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Guest
हम लोग फिर निकल पड़े अपने अपने रस्तो पर हम अभी कोई 2 से 3किलो मीटर ही गये होगे की 4से 5गाड़ियाँ हमारे सामने आ के रुकी जिन में करीब 25 से 30 आदमी थे उन सब के आगे एक जिप्स्सी (ओपन जिप्स्सी जिसे यूपी में चुनाव में प्रचार के लिए यूज करते है )में 4 लोग थे जो अच्छे घर से लग रहे थे.
में-गुड़िया आप गाड़ी में ही रूको में देखता हू क्या बात है.और सभी को फोन कर के गाड़ी में रुकने को बोल दिया.
रवि-में भी आता हू .
में-नही तू गाड़ी में ही रुक.
रवि-ज़्यादा दिमाग़ ना लगा और चल.मेरे मना करने से पहले ही वो बाहर आ चुका था में भी अपनी गाड़ी से नीचे उतर के उन के तरफ बढ़ गया.
आदमी 01-(में उन्हे यहाँ ऐसे ही नंबर से इंट्रो कार्याउगा) हा भाई कौन हो तुम लोग कहाँ जा रहे हो जानते नही की यहाँ हमारा राज चलता है.
में-माफी चाहते है सर वो क्या है ना हम नये है इस इलाक़े में हमें तो बस इस ***गौव में जाना है .
आदमी 01-चलो कोई नही पर गुनाह तो हुआ है तुम से चलो एक काम करो अपनी ये सेकेंड नंबर वाली गाड़ी यही छोड़ के चले जाओ.(यानी की मेरी गाड़ी वो इस वक़्त सेकेंड नंबर पे थी.)
रवि-ये तो मुमकिन नही है.
आदमी 02-मालिक कालुवा ने बताया था ना की इन के साथ लौंडिया भी बहुत मस्त मस्त है तो उन्ही*****अभी उस की बात पूरी हो पाती उस से पहले ही उस आदमी का सिर मैने वहाँ खड़ी जिप्सी के फ्रंट मिरर में दे मारा और उसके बाद उसे ज़मीन पे पटक कर लगभग आध मरा कर दिया मुँहे ऐसे गुस्से में देख के सभी गाड़ी से बाहर आना चाहते थे पर ली ने उन में से किसी को भी बाहर नही आने दिया.
आदमी 01-अब तुम में से कोई भी जिंदा बच के नही जाएगा यहाँ से.
में-हमारा तो पता नही पर ये (जिस को मैने मारा था )कल का सूरज नही देख पाएगा.
आदमी 01-देख क्या रहे हो मार दो सब को और उठा लो ला****
रवि-क्या हुआ आ आगे बोल हम भी तो देखे की फिर क्या होता है .
आदमी 01-कुछ नही मेरे साथ .और अपने अन्टी (जो भाई लोग उप के रहने वाले है वो समझ गये होगे) में से एक पिस्टल निकाल के रवि के कनपटी पे लगा देता है.
में-क्या यार 21सदी में भी 19सदी का हथियार यूज कर रहे हो रूको में दिखाता हू की गन और पिस्टल किसे कहते है .और मैने अपनी गाड़ी की डिकी खोल के एक बॅग निकाल के उसके सामने फेक दिया .
में-खोलो इसे .
उस ने अपने ही एक आदमी को इशारे से बेग खोले को बोला उस ने डरते डरते ही बेग खोला और उसके अंडर के हथियार देख के सभी के होश उड गये और खुद ब खुद उस ने अपनी पिस्टल रवि से हटा के नीचे कर ली अब उसके चेहरे पे खोफ्फ़ सॉफ देखा जा सकता था .
ली-ज़्यादा टाइम पास मत कर और हमें और भी कम है या तो रास्ता छोड़ दे नही तो में अपना तरीका आजमाता हू.
आदमी 01-तुम्हारी तो बहन की ******सालो किसी को जिंदा नही छोड़ुगा में अब .
उसके मुँह से गाली सुन के मुझे पता नही क्या हो गया मैने उस की गर्दन पकड़ के जीप के बोनट पे इतने तेज़ से दे मारा की उसके बाकी सभी साथी ये देख के वहाँ से डर के मारे भाग गये.
में-क्या बोला तूने दोबारा बोल बोल ना अब क्या हुआ तुझे.
रवि-छोड़ दे उसे नही तो वो सच में मर जाएगा \
.
पर इस टाइम में किसी जंगली जानवर से कम नही था में रुकना चाह रहा था पर मेरा शरीर मेरे काबू में नही था .जब रवि ने उसे मेरे हाथों से छुड़ाने की नाकाम कोशिश की तो मैने उसे भी धक्का दे दिया वो करीब 5से 6फुट दूर जा के गिरा.
सिचुएशन खराब होती देख ली मेरे सामने आ गया और मेरी आँखों में देखने लगा और मेरा गुस्सा धीरे धीरे शांत होने लगा और कोई 1 मिनट से भी कम समय में नॉर्मल हो गया.
(दोस्तो यहाँ से कुछ बातें टेलीपेथि से होगी)
में-(ली ये सब क्या था मेरा खुद पे काबू क्यू नही था )
ली-(जल्द ही तुम्हें पता चल जाएगा अभी तुम रवि और बकीओ को शांत करो सभी बहुत डरे हुए है तुम्हारे इस बर्ताव से)
चार्ली-(सब ठीक तो है ना वहाँ मैने कुछ हाइ लेवेल एनर्जी महसूष की अभी कुछ देर पहले )
ली-(यहाँ सब ठीक है तुम अपने काम पर ध्यान दो)
में-सॉरी भाई वो गुस्से में मैने तुझे धक्का दे दिया आई आम सॉरी .
रवि-इट्स ओके चल अब तो छोड़ दे इसे नही तो मर जाएगा वो देख गुड़िया रो रही है तुझे शायद पता नही है तुझे आज से पहले इतने गुस्से में मैने पहले कभी नही देखा.
में-मैने उस को छोड़ते हुए.चल निकल यहाँ से इससे पहले की मेरा मूड चेंज हो जाए निकल ले यहाँ से और अगर दोबारा मेरे फॅमिली के आस पास भी नज़र आए तो जान से मार दूँगा समझा.
आदमी 01-ये अच्छा नही किया तूने तू नही जानता राहुल ठाकुर नाम है मेरा ये हमारा इलाक़ा है आज नही तो कल में तुझे और तेरे इस फॅमिली को सबक ज़रूर सिखाउन्गा.(और वो वहाँ से अपनी पूरी रफ़्तार से निकल गया)
मैने सोचा की उस का पीछा किया जाए पर ली ने मना किया की उस को हम कभी भी सबक सिखा सकते है पहले बकीओ को संभालते है.
मुझे ली की बात सही लगी इसलिए में भी वापस मूड के गाड़ियों के तरफ चल दिया सभी लोग गाड़ियों के बाहर आ चुके थे अब तक.
निशा-तुम पागल तो नही हो वो इतने सारे लोग थे और तुम सिर्फ़ तीन उन से भिड़ने की क्या ज़रूरत थी.(और रोने लगी )
में-सीईईईई.चुप देख में बिल्कुल ठीक हू अब तू रोना बंद कर देख तुझे देख के बकीओ को भी रोना आ रहा है.
निशा-अपने आँसू पोछते हुए.पर अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता.
में-कुछ नही बस इस धरती से एक बोझ ही कम होता और कुछ नही .
निशा-तुम बहुत बुरे हो .और मेरे सीने पे मुक्के मारने लगी और थक के मेरे गले लग लगी और सुबकने (रोने के ठीक बाद जब हम चुप होने की कोशिश करते है) लगी .
मैने उसके सिर पे प्यार से हाथ फेरा और उसे खुद से अलग किया .फिर लगभग सेम डायलॉग और सेम रिप्लाइ सभी को.किसी तरह सभी को शांत करे के बाद मैने देखा तो पाया की वहाँ गुड़िया नही है वो अब तक गाड़ी में ही थी और रो रही थी.
मैने धीरे से गाड़ी का गेट ओपन किया और गुड़िया को गाड़ी से बाहर निकाल कर उसे चुप करने की नाकाम कोशिश करने लगा.पर वो चुप होने के वजाय और ज़्यादा रोने लगी वो मेरी किसी भी बात को सुनना ही नही चाहती थी आख़िर में मैने उसे गले लगा लिया और उस को रोने दिया अभी में गुड़िया को शांत करने की कोशिश ही कर रहा था की मेरे कंधे पे किसी ने हाथ रखा मैने पलट के देखा तो कोई 25 से 26साल का लड़का था बाद में इंट्रो में पता चला की ये हमारे मामा का बड़ा लड़का है मामा की अचानक तबीयत खराब होने से ये हमें लेने आए है पर लेट होने के कारण टाइम से सही जगह नही पहुँच पाए.
राजीव- हाई में राजीव हू पहले तो माफी चाहूगा की में लेट हो गया असल में मुझे पता ही लेट चला जैसे ही पता चला की आप सभी को पिक करना है में तुरंत निकल पड़ा हाइवे पे पता चला की आप लोग वहाँ से निकल चुके है तभी से आप सभी को ढूँढ रहा हू.
जिया दी-सॉरी राजीव अभी यहाँ कुछ भी ठीक नही है घर चल के बात करते है प्लीज़ .
राजीव-हा क्यू नही.
फिर हम सभी निकल लिए घर के लिए इस बार मेरी गाड़ी निशा ड्राइव कर रही थी और उसके साथ ही फ्रंट सीट पे रानी बैठी थी जो अभी भी काफ़ी डरी हुई थी.में और गुड़िया पीछे थे गुड़िया ने मेरे गोद में अपना सिर रख के अपने पैर मोड़ के वही सीट पे अपनी आँखे बंद कर के लेटी हुई थी .और में प्यार से उसके सिर पे हाथ फेर रहा था और उस को नॉर्मल करने की कोशिश भी .
में-गुड़िया आप गाड़ी में ही रूको में देखता हू क्या बात है.और सभी को फोन कर के गाड़ी में रुकने को बोल दिया.
रवि-में भी आता हू .
में-नही तू गाड़ी में ही रुक.
रवि-ज़्यादा दिमाग़ ना लगा और चल.मेरे मना करने से पहले ही वो बाहर आ चुका था में भी अपनी गाड़ी से नीचे उतर के उन के तरफ बढ़ गया.
आदमी 01-(में उन्हे यहाँ ऐसे ही नंबर से इंट्रो कार्याउगा) हा भाई कौन हो तुम लोग कहाँ जा रहे हो जानते नही की यहाँ हमारा राज चलता है.
में-माफी चाहते है सर वो क्या है ना हम नये है इस इलाक़े में हमें तो बस इस ***गौव में जाना है .
आदमी 01-चलो कोई नही पर गुनाह तो हुआ है तुम से चलो एक काम करो अपनी ये सेकेंड नंबर वाली गाड़ी यही छोड़ के चले जाओ.(यानी की मेरी गाड़ी वो इस वक़्त सेकेंड नंबर पे थी.)
रवि-ये तो मुमकिन नही है.
आदमी 02-मालिक कालुवा ने बताया था ना की इन के साथ लौंडिया भी बहुत मस्त मस्त है तो उन्ही*****अभी उस की बात पूरी हो पाती उस से पहले ही उस आदमी का सिर मैने वहाँ खड़ी जिप्सी के फ्रंट मिरर में दे मारा और उसके बाद उसे ज़मीन पे पटक कर लगभग आध मरा कर दिया मुँहे ऐसे गुस्से में देख के सभी गाड़ी से बाहर आना चाहते थे पर ली ने उन में से किसी को भी बाहर नही आने दिया.
आदमी 01-अब तुम में से कोई भी जिंदा बच के नही जाएगा यहाँ से.
में-हमारा तो पता नही पर ये (जिस को मैने मारा था )कल का सूरज नही देख पाएगा.
आदमी 01-देख क्या रहे हो मार दो सब को और उठा लो ला****
रवि-क्या हुआ आ आगे बोल हम भी तो देखे की फिर क्या होता है .
आदमी 01-कुछ नही मेरे साथ .और अपने अन्टी (जो भाई लोग उप के रहने वाले है वो समझ गये होगे) में से एक पिस्टल निकाल के रवि के कनपटी पे लगा देता है.
में-क्या यार 21सदी में भी 19सदी का हथियार यूज कर रहे हो रूको में दिखाता हू की गन और पिस्टल किसे कहते है .और मैने अपनी गाड़ी की डिकी खोल के एक बॅग निकाल के उसके सामने फेक दिया .
में-खोलो इसे .
उस ने अपने ही एक आदमी को इशारे से बेग खोले को बोला उस ने डरते डरते ही बेग खोला और उसके अंडर के हथियार देख के सभी के होश उड गये और खुद ब खुद उस ने अपनी पिस्टल रवि से हटा के नीचे कर ली अब उसके चेहरे पे खोफ्फ़ सॉफ देखा जा सकता था .
ली-ज़्यादा टाइम पास मत कर और हमें और भी कम है या तो रास्ता छोड़ दे नही तो में अपना तरीका आजमाता हू.
आदमी 01-तुम्हारी तो बहन की ******सालो किसी को जिंदा नही छोड़ुगा में अब .
उसके मुँह से गाली सुन के मुझे पता नही क्या हो गया मैने उस की गर्दन पकड़ के जीप के बोनट पे इतने तेज़ से दे मारा की उसके बाकी सभी साथी ये देख के वहाँ से डर के मारे भाग गये.
में-क्या बोला तूने दोबारा बोल बोल ना अब क्या हुआ तुझे.
रवि-छोड़ दे उसे नही तो वो सच में मर जाएगा \
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पर इस टाइम में किसी जंगली जानवर से कम नही था में रुकना चाह रहा था पर मेरा शरीर मेरे काबू में नही था .जब रवि ने उसे मेरे हाथों से छुड़ाने की नाकाम कोशिश की तो मैने उसे भी धक्का दे दिया वो करीब 5से 6फुट दूर जा के गिरा.
सिचुएशन खराब होती देख ली मेरे सामने आ गया और मेरी आँखों में देखने लगा और मेरा गुस्सा धीरे धीरे शांत होने लगा और कोई 1 मिनट से भी कम समय में नॉर्मल हो गया.
(दोस्तो यहाँ से कुछ बातें टेलीपेथि से होगी)
में-(ली ये सब क्या था मेरा खुद पे काबू क्यू नही था )
ली-(जल्द ही तुम्हें पता चल जाएगा अभी तुम रवि और बकीओ को शांत करो सभी बहुत डरे हुए है तुम्हारे इस बर्ताव से)
चार्ली-(सब ठीक तो है ना वहाँ मैने कुछ हाइ लेवेल एनर्जी महसूष की अभी कुछ देर पहले )
ली-(यहाँ सब ठीक है तुम अपने काम पर ध्यान दो)
में-सॉरी भाई वो गुस्से में मैने तुझे धक्का दे दिया आई आम सॉरी .
रवि-इट्स ओके चल अब तो छोड़ दे इसे नही तो मर जाएगा वो देख गुड़िया रो रही है तुझे शायद पता नही है तुझे आज से पहले इतने गुस्से में मैने पहले कभी नही देखा.
में-मैने उस को छोड़ते हुए.चल निकल यहाँ से इससे पहले की मेरा मूड चेंज हो जाए निकल ले यहाँ से और अगर दोबारा मेरे फॅमिली के आस पास भी नज़र आए तो जान से मार दूँगा समझा.
आदमी 01-ये अच्छा नही किया तूने तू नही जानता राहुल ठाकुर नाम है मेरा ये हमारा इलाक़ा है आज नही तो कल में तुझे और तेरे इस फॅमिली को सबक ज़रूर सिखाउन्गा.(और वो वहाँ से अपनी पूरी रफ़्तार से निकल गया)
मैने सोचा की उस का पीछा किया जाए पर ली ने मना किया की उस को हम कभी भी सबक सिखा सकते है पहले बकीओ को संभालते है.
मुझे ली की बात सही लगी इसलिए में भी वापस मूड के गाड़ियों के तरफ चल दिया सभी लोग गाड़ियों के बाहर आ चुके थे अब तक.
निशा-तुम पागल तो नही हो वो इतने सारे लोग थे और तुम सिर्फ़ तीन उन से भिड़ने की क्या ज़रूरत थी.(और रोने लगी )
में-सीईईईई.चुप देख में बिल्कुल ठीक हू अब तू रोना बंद कर देख तुझे देख के बकीओ को भी रोना आ रहा है.
निशा-अपने आँसू पोछते हुए.पर अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता.
में-कुछ नही बस इस धरती से एक बोझ ही कम होता और कुछ नही .
निशा-तुम बहुत बुरे हो .और मेरे सीने पे मुक्के मारने लगी और थक के मेरे गले लग लगी और सुबकने (रोने के ठीक बाद जब हम चुप होने की कोशिश करते है) लगी .
मैने उसके सिर पे प्यार से हाथ फेरा और उसे खुद से अलग किया .फिर लगभग सेम डायलॉग और सेम रिप्लाइ सभी को.किसी तरह सभी को शांत करे के बाद मैने देखा तो पाया की वहाँ गुड़िया नही है वो अब तक गाड़ी में ही थी और रो रही थी.
मैने धीरे से गाड़ी का गेट ओपन किया और गुड़िया को गाड़ी से बाहर निकाल कर उसे चुप करने की नाकाम कोशिश करने लगा.पर वो चुप होने के वजाय और ज़्यादा रोने लगी वो मेरी किसी भी बात को सुनना ही नही चाहती थी आख़िर में मैने उसे गले लगा लिया और उस को रोने दिया अभी में गुड़िया को शांत करने की कोशिश ही कर रहा था की मेरे कंधे पे किसी ने हाथ रखा मैने पलट के देखा तो कोई 25 से 26साल का लड़का था बाद में इंट्रो में पता चला की ये हमारे मामा का बड़ा लड़का है मामा की अचानक तबीयत खराब होने से ये हमें लेने आए है पर लेट होने के कारण टाइम से सही जगह नही पहुँच पाए.
राजीव- हाई में राजीव हू पहले तो माफी चाहूगा की में लेट हो गया असल में मुझे पता ही लेट चला जैसे ही पता चला की आप सभी को पिक करना है में तुरंत निकल पड़ा हाइवे पे पता चला की आप लोग वहाँ से निकल चुके है तभी से आप सभी को ढूँढ रहा हू.
जिया दी-सॉरी राजीव अभी यहाँ कुछ भी ठीक नही है घर चल के बात करते है प्लीज़ .
राजीव-हा क्यू नही.
फिर हम सभी निकल लिए घर के लिए इस बार मेरी गाड़ी निशा ड्राइव कर रही थी और उसके साथ ही फ्रंट सीट पे रानी बैठी थी जो अभी भी काफ़ी डरी हुई थी.में और गुड़िया पीछे थे गुड़िया ने मेरे गोद में अपना सिर रख के अपने पैर मोड़ के वही सीट पे अपनी आँखे बंद कर के लेटी हुई थी .और में प्यार से उसके सिर पे हाथ फेर रहा था और उस को नॉर्मल करने की कोशिश भी .