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निदा के कारनामे complete

Thanks to all

 
मैं मुश्कुराई और बोली- “मुझे शोर मचाने की क्या जरूरत है, अभी अम्मी जो हुकुम दे गई हैं की मैं आपके हर हुकुम को पूरा कारूं तो मैं अपनी अम्मी की नाफरमानी कैसे कर सकती हँ?”

बाबाजी मुश्कुराये और बोले- “मुझे ऐसी ही लड़कियां पसंद है जो अपने माँ बाप का कहना हर हाल में मानें। आ अब मेरे पास आ ताकी मैं वो अमल शुरू कर सकें...

मैं उठी और बोली- “अगर मेरे साथ ये अमल पहले से ही कोई कर चुका हो तो...”

बाबाजी मुश्कुराकर बोले- “मैं तेरे जिश्म को देखकर ही समझ गया था की ये मेहनत किसी और की है और ये बहुत अच्छा है की अब तुझे ज्यादा दर्द नहीं सहना पड़ेगा..."

मैं मुश्कुराई और बोली- “बाबाजी आपकी उमर तो काफी ज्यादा है तो भला आप मुझे क्या दर्द दे सकेंगे...”

बाबाजी हँसे और बोले- “मर्द और घोड़ा कभी बूढे नहीं होते और आज तुझे ये भी पता चलेगा की बूढ़ा आदमी तेरे साथ क्या क्या कर सकता है?”

मैं मुश्कुराकर बोली- “अगर ऐसी बात है तो फिर आप जो चाहें मेरे साथ करें...”

मेरी बात सुनकर बाबाजी मुश्कुराये और उन्होंने मुझे अपनी तरफ घसीटा और मुझे लिपटा लिया फिर उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला दिया। मेरे होंठ उनके होंठों से मिले तो मुझे बदबू सी आई जैसे शराब पीने के बाद मुँह से आती है। मैं एक लम्हे को रुकी फिर मैंने अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए। बाबाजी ने मुझे काफी देर से लिपटाया हुवा था और वो मुझे मुसलसल किस कर रहे थे, साथ-साथ उन्होंने मेरे बड़े-बड़े मम्मों को भी दबाना शुरू कर दिया था। जिसकी वजह से मेरे बदन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। थोड़ी देर बाद बाबाजी ने मुझे लिटा दिया और मेरे कपड़े उतारने लगे। थोड़ी देर बाद ही मैं बाबाजी के सामने एकदम नंगी लेटी हुई थी। बाबाजी ने ने मेरा चमकता हुवा बेदाग जिश्म देखा तो देखते ही रह गये।

मैं मुश्कुराई और बोली- “बाबाजी आपको तो साँप सँघ गया है अब आप मेरे साथ अमल कैसे करेंगे?”

मेरी बात पर बाबाजी चौंके और बोले- “लड़की तू तो बहुत खूबसूरत और सेक्सी है। आज तो तेरे साथ खूब मजा आयगा...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “सिर्फ़ खुद ही मजा नहीं लेते रहिएगा, मजा मुझे भी चाहिए...”

मेरी बात पर बाबाजी बोले- “लड़की तू ये बात बार-बार बोलकर हमारी बेइज्ज़ती कर रही है। तू बेफिकर रह, आज मैं तुझे वो मजा दूंगा जो आज तक किसी ने भी नहीं दिया होगा...”

 
मैंने सोचा की राणा साहेब वाला मजा तो नहीं आएगा और फिर मैं बोली- “अगर आप मुझ पर अमल करने वाला मंतर दिखा दें तो मुझे तसल्ली हो जायेगी...”

मेरी बात पर बाबाजी मुश्कुराये और बोले- “अगर ऐसी बात है तो ये ले...” ये कहकर बाबाजी ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। और फिर मुझे नंगा देखकर जो हाल बाबा जी का हुवा था वो ही हाल मेरा हुवा था । बाबाजी का बदन देखकर। बाबाजी का बदन किसी पहलवान की तरह कसरती था और सबसे बढ़कर उनका लण्ड जो की दिखने में पत्थर की तरह ठोस लग रहा था और साइज में ऐसे लग रहा था जैसे वो किसी घोड़े का लण्ड हो। मुझे वो लंबाई में 10 इंच के आस पास लगा।

फिर उन्होंने अपना लण्ड को झटका दिया तो उनका लण्ड उनके पेट से जा लगा और मुझे उनके लण्ड की ताकत का सही से अंदाजा हो गया। बाबाजी ने जो मेरी हालत देखी तो मुश्कुराकर बोले- “क्यों लड़की क्या हुवा क्या सारी हवा निकल गई...”

मेरी हवा वाकई निकल गई थी और मैं हकलाती हुई बोली- “वावोव... बाबाजी आपकी उमर क्या है...” बाबाजी हँसे और बोले- “मेरी उमर 72 साल है.”

बाबाजी की बात सुनकर मुझे हैरत का झटका सा लगा और मैं बोली- “आपका बदन देखकर तो नहीं लगता...”

बाबाजी मुश्कुराकर बोले- “मुझे नोजवानी से पहलवानी का शौक है इसलिए मैं अपने बदन का बहुत खयाल रखता

मैं हैरत से बोली- “और आपका लण्ड.."

वो हँसे और बोले- “मेरा लण्ड पूरे 10 इंच लंबा है... क्यों क्या आज तक इतना बड़ा किसी का नहीं देखा?”

मैंने इनकार में सिर हिलाया।

वो हँस पड़े और बोले- “फिर तो तेरी खैर नहीं है, आज मेरी तेरी चूत और गाण्ड दोनों को फाड़कर रख दूंगा...”

बाबाजी की बात सुनकर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और मैं ये सोचकर ही घबराने लगी की आज ये बाबा पता नहीं मेरा क्या हाल करेगा। बाबाजी मेरे पास बैठ गये और मेरे जिश्म को सहलाने लगे। उनके हाथ थोड़े ठंडे थे जिसकी वजह से मेरे जिश्म में करेंट सा दौड़ने लगा और मेरी सिसकारियां निकलने लगीं। बाबाजी ने मेरी दोनों चूचियां को पकड़ लिया और उसे मसलते हुये झुक कर मेरे होंठों को चूमने लगे। मुझ पर एक नशा सा चढ़ रहा था और मेरी आँखें बंद हुई जा रही थी।

थोड़ी देर बाद वो मेरी चूत में उंगली करने लगे। अब वो मुझे किस करते हुये एक हाथ से मेरी चूचियों को दबा रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी चूत में उंगली कर रहे थे। अब मेरे जिम में बाकायदा करेंट दौड़ रहा था और मैं बुरी तरह से जज़्बात की शिद्दत से कांप रही थी। फिर बाबाजी मुझे चूमते हुये नीचे आने लगे। काफी देर तक वो मेरी चूचियां चूसते रहे और इसी दौरान उन्होंने अपनी उंगली से ही मुझे झड़ा दिया। मेरा जिश्म बुरी तरह से टूटने लगा, पर वो मेरे चूचियां को चूसते ही रहे। फिर वो दोबारा से मुझे चूमते हुये नीचे जाने लगे और फिर वो मेरी चूत पर आकर रुक गये। अब वो मेरी चूत को अपनी जुबान से चाट रहे थे और मेरे हलाक से तेज सिसकारियां निकल रही थी।

 
बाबाजी ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से मेरी चूत के लबों को चीरा और अपनी जुबान मेरी चूत के अंदर तक डाल दी। उनकी जुबान थोड़ी सख्त हो गई थी। बाबाजी की जुबान भी उनके लण्ड की तरह काफी लंबी थी और अब वो अपनी जुबान को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। ये मेरी जिंदगी का अलग तजुर्बा था और आज तक किसी ने मेरे साथ ऐसा नहीं किया था। खैर अब तक मुझे सिर्फ 5 लोगों ने चोदा था पर किसी ने आज तक मुझे ये मजा नहीं दिया था। बाबाजी की जुबान काफी सख़्त थी और वो मुझे किसी लण्ड की तरह अपनी चूत में महसूस हो रही थी।

बाबाजी काफी तेजी से अपनी जुबान को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहे थे जिसकी वजह से मैं फिर से अपनी मंजिल तक पहुँच गई और एक तेज सिसकारी के साथ मैं दोबारा से झड़ गई और मेरी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया जो की बाबाजी ने चाटना शुरू कर दिया। बाबाजी मुझे चोदे बगैर ही मुझे दो बार फारिग कर चुके थे। फिर उन्होंने मुझे उल्टा करके लिटा दिया और दो तकिये मेरी चूत के नीचे रख दिए जिसकी वजह से मेरे । कूल्हे ऊपर को उठ गये। फिर बाबाजी ने मेरी टाँगों को चीर दिया। मैं समझी की वो मेरी चुदाई की शुरुवात मेरी गाण्ड से करेंगे पर उन्होंने झुक कर मेरी गाण्ड से मुँह लगा दिया।

जब उनकी गीली-गीली जुबान मेरी गाण्ड के सुराख से टकराई तो एकदम से मेरे पूरे जिम में सनसनी सी दौड़ गई और मजे की शिद्दत से मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। अब तक जिसने भी मुझे चोदा था उन्होंने मेरी चूत तो चाटी थी पर मेरी गाण्ड किसी ने आज तक नहीं चाटी थी। ये मेरे लिए एक नया तजुर्बा था जिसका मैं बहुत मज़ा ले रही थी। वाकई एक बूढ़े आदमी ने मुझे चोदे बगैर ही मुझे वो मजा दिया था जो आज तक कोई नहीं दे पाया था।

मुझे अपनी चूत से ज्यादा अपनी गाण्ड चटवा कर मजा आ रहा था। फिर जब बाबाजी ने मेरी चूत की तरह मेरी गाण्ड में भी अपनी जुबान डालनी चाही तो मैं मजे की शिद्दत से पागल होने लगी और अपना सिर जमीन पर मारने लगी।

थोड़ी सी कोशिश के बाद बाबाजी ने अपनी जुबान मेरी गाण्ड के सुराख में हाल ही दी। अब वो कभी अपनी जुबान मेरी गाण्ड में अंदर बाहर करते, कभी वो अपनी जुबान से किसी नदीदे कुत्ते की तरह मेरी गाण्ड को चाटते। उन्होंने ये अमल मेरे साथ 10 मिनट तक किया और फिर वो लेट गये और मुझे अपना लण्ड चूसने को बोला।

मैं उठकर बैठ गई, मैंने देखा की बाबाजी का लण्ड एकदम सीधा खड़ा था और अपनी फतह का जशन मना रहा था, मुझे बाबाजी के लण्ड पर बड़ा प्यार आया और मैंने बड़ी मुहब्बत से बाबाजी का लण्ड पकड़ लिया। मैंने झुक कर अपने होंठ बाबाजी के टोपे से मिला दिए और उनके टोपे का किस लेने लगी, फिर मैंने अपनी जुबान बाहर निकाली और बाबाजी का लण्ड चारों तरफ से खूब चाटने लगी। मैं एक साइड से उनके लण्ड को चाटती हुई। उनके टोपे तक आती और फिर चाटते हुये दूसरी तरफ से वापिस नीचे चली जाती। मैंने ये अमल काफी देर तक उनके लण्ड के साथ किया।

फिर मैंने अपना पूरा मुँह खोला और बाबाजी का लण्ड अपने मुँह में ले लिया, बाबाजी का लण्ड चंद इंच तक ही मेरे मुँह में गया। मैं अब उनके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मेरी कोशिश थी की उनका लण्ड । ज्यादा से ज्यादा अपने मुँह में ले लँ पर उनका लण्ड बहुत बड़ा था और वो 4 या 5 इंच ही मेरे मुँह में जा रहा था। बाबाजी मेरी ये कोशिश देख रहे थे। उन्होंने एकदम से मेरा सिर पकड़ा और अपने लण्ड पर दबा दिया। बाबाजी का लण्ड एक झटके से पूरा का पूरा मेरे हलाक के अंदर तक घुस गया। मेरी आँखें एकदम से बाहर को निकल आई और मुझे एकदम से फंदा सा लग गया। मैंने फौरन ही उनका लण्ड अपने मुँह से निकाला और खांसने लगी। बाबाजी हँसने लगे, जबकी मैं उनको नाराजगी की नजरों से देखने लगी।

 
बाबाजी हँसते हुये बोले- “चल माफ कर दे और दोबारा से चूस मेरा लण्ड, तू बहुत अच्छी तरह चूस रही थी...”

मैं बाबाजी को कुछ देर देखती रही तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने करीब किया और मुझे चूमते हुये बोलेतू नाराज बड़ी अच्छी लग रही है दिल तो कर रहा है की तुझे ना मनाऊँ पर तू गुस्सा खतम कर और उसी तरह चूस मेरा लण्ड। तेरा जैसा चुप्पा आज तक किसी ने नहीं लगाया है...”

बाबाजी की बात पर मेरे होंठों पर मुश्कुराहट आ गई और मैंने भी जवाब में उनको चूमा और दोबारा से उनका लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने 5 मिनट और बाबाजी का लण्ड चूसा फिर उन्होंने मुझे लिटा दिया और फिर उन्होंने मेरी टांगें उठाकर अपने कंधों पर रखी तो उनका लण्ड मेरे कूल्हों के सुराख से होता हुवा मेरी कमर तक पहुँच गया।

बाबाजी ने थोड़ा पीछे होकर अपने लण्ड की टोपी को मेरी चूत के सुराख पर रखा और बोले- “अब तेरी बर्दाश्त का इम्तिहान है...” ये कहकर उन्होंने एक जोरदार झटका मारा। मैं समझी थी की पहले वो मुझे आराम आराम से चोदेंगे बाद में अपनी स्पीड बढ़ायेंगे पर उन्होंने तो पहला झटका ही इतना जोरदार मारा था की उनका आधे से ज्यादा लण्ड मेरी चूत में घुस गया था। मेरी आँखों के सामने आँधेरा सा छा गया था। वोही राणा साहेब याद आ गये और आवाज़ मेरे हलक में जैसे फस सी गई थी।

बाबाजी ने फौरन ही दूसरा झटका मारा और अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में जड़ तक घुसा दिया। जो आवाज मेरे हलाक में फँस गई थी वो एक तेज चीख के साथ बाहर निकली और आह्ह्ह मेरी चीख से पूरा स्थान गूंज उठा, बाबाजी ने इसी पर ही बस नहीं किया, उन्होंने फिर अपना लण्ड वापिस बाहर खींचा और पहले से ज्यादा जोरदार तरीके से मेरी चूत में घुसा दिया। मैं तकलीफ की शिद्दत से फिर चीखी पर बाबाजी धपा-धप झटकों पर झटके मार रहे थे। उनका लण्ड किसी सख़्त मोटे और गरम लोहे की तरह मेरी चूत पर जुलूम ढा रहा था और मेरी चूत उनके लण्ड को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और मैं बुरी तरह से चीख रही थी। मेरी आँखों से आँसू भी साथ साथ बह रहे थे।

मुझ पर क्या गुजर रही थी इसकी बाबाजी को कोई परवाह नहीं थी वो तो झटके मारने की मशीन बने हुये थे। जब बाबाजी को झटके मरते हुये 15 मिनट हुये तो मैं भी तीन बार और झड़ हो चुकी थी। फिर आहिस्ताआहिस्ता मेरी चूत उनके लण्ड को बर्दाश्त करने के काबिल हुई और मुझे भी मजा आने लगा और अब मैं लज़्ज़त की वजह से सिसकारियां लेने लगी। बाबाजी ने जो मुझे मजे में देखा तो उन्होंने और तेज झटके मारने शुरू कर दिए।

और बोले- “कंवल आज तुझे चोदकर मुझे चुदाई का असल मजा मिल रहा है, आज तक कोई ऐसी लड़की ही नहीं मिली जो इतनी देर तक मेरे लण्ड को बर्दाश्त कर सके, आज तो मैं तुझे चोद-चोदकर तेरी चूत और गाण्ड का कीमा बना दूंगा.”

मैं कुछ कहना चाहती थी पर बाबाजी के झटके इतने जोरदार थे की मेरे मुँह से सिर्फ गग्ग्घूऊग्ग आअहहा ही निकल रही थी। 20 मिनट और बाबाजी ने मुझे ऐसे चोदा और मैं दो बार और झड़ गई। फिर उन्होंने मुझे उल्टा लिटा दिया और मेरी चूत के नीचे दो तकिये रखे और मेरी टाँगों को चीर दिया। अब मेरी चूत ऊपर उठकर खुल । गई थी। बाबाजी मेरे ऊपर लेट गये। बाबाजी का वजन काफी ज्यादा था और मुझे अपनी कमर टूटती हुई महसूस हुई। पर बाबाजी ने अपना लण्ड पीछे से मेरी चूत में डाला और झटका मार दिया। इस पोजिशन में मेरी चूत और ज्यादा टाइट हो चुकी थी और बाबाजी का लण्ड बुरी तरह से मेरी चूत को चीरता हुवा मेरी चूत में गया। मुझे दर्द तो बहुत हुवा पर मजा भी बहुत आया।

 
मजा बाबाजी को भी आया था इसलिए पहले बाबाजी ने धीरे-धीरे झटके मारे और मुझे बहुत मजा आया। जब बाबाजी का लण्ड मेरी चूत में जाता तो ऐसा लगता था की जैसे उनका लण्ड मेरी चूत की खाल को अपने साथ खींचता हुवा अंदर ले जा रहा है और जब उनका लण्ड वापिस बाहर आता तो मुझे अपनी चूत की खाल उनके लण्ड के साथ बाहर आती हुई महसूस होती। ये बाबाजी के लण्ड की मोटाई और मेरी चूत की टाइटनेस थी जिससे मुझे ऐसा महसूस हो रहा था।

फिर बाबाजी ने अपने झटकों की रफ़्तार बढ़ा दी और मेरे मुँह से तेज सिसकारियां निकलने लगी और इन सिसकारियों में मेरी चीखें भी शामिल हो रही थी। पर अब मैं दर्द से नहीं मजे के आलम में चीख रही थी। बाबाजी का पूरा स्थान मेरी उफफ्फ़... आह्ह्ह... ऊऊह्ह... ऊऊहह... ऊईई... हमम्माआ... हमम्मा... से गूंज रहा था, यकीनन मेरी तेज सिसकारियों की आवाजें बाहर बैठे हुये बाबाजी के दोनों खिदमतगारों के पास भी जा रही होंगी

और मेरी सेक्सी सिसकारियों को सुनकर वो दोनों भी बेताब हो रहे होंगे, मुझे चोदने के लिए। यहां अपने खिदमतगरों की तरफ से बेनियाज बाबाजी मुझे चोदने का पूरा-पूरा मजा ले रहे थे। मजा तो मैं भी ले रही थी पर मुझे इस मजे के लिए बहुत तकलीफ भी बर्दाश्त करनी पड़ रही थी। पर मेरी नजर में इस मजे के लिए अगर मुझे इससे ज्यादा भी तकलीफ बर्दाश्त करनी होती तो मैं खुशी से बर्दाश्त करती।

बाबाजी ने मजीद 10 मिनट मुझे इस तरह चोदा और मुझे एक बार फिर झड़ा दिया। फिर बाबाजी ने रुक कर अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला और फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरी गाण्ड के सुराख पर रखा और बोले- “कंवल अब मैं तुम्हारी गाण्ड मारने लगा हूँ..."

बाबाजी की बात सुनकर मैंने अपने होंठ सख्ती के साथ बंद कर लिए और होने वाले दर्द को बर्दाश्त करने के लिए तैयार हो गई। फिर बाबाजी ने एक जोरदार झटका मारा, बाबाजी का ये झटका बहुत ही ज्यादा ताकतवर था और उनका लण्ड एकदम से उग्गूड्उब्बब की तेज आवाज निकालता हुवा जड़ तक मेरी गाण्ड में घुस गया। मैंने अपने होंठ सख्ती के साथ बंद किए हुये थे पर ये झटका मेरी उमीद से बहुत ज्यादा जोरदार था और दर्द भी बर्दाश्त के बाहर था, इसलिए मेरे हलाक से एक बहुत ही तेज चीख बुलंद हुई और मेरे सारे बदन में सनसनी से दौड़ गई।

मैं बुरी तरह से कंपकंपाई पर बाबाजी के पूरे जिश्म का वजन मेरे ऊपर था इसलिए मैं जरा सा भी हिल ना सकी पर मेरे मुँह से निकलने वाली चीख ने स्थान की दीवारों को हिलाकर रख दिया था। मेरी चीख पर बाबाजी हँसे

और फिर वो तेज तेज झटके मारने लगे। कमरा मेरी तेज चीखों और घूदुब-घूब की तेज आवाज़ों से गूंज रहा। था। बाबाजी का लंबा और मोटा लण्ड मेरी छोटी से गाण्ड को फाड़ रहा था और दर्द बर्दाश्त ना कर पाकर मैं बुरी तरह से चीख रहीं थी और रो रही थी। 25 मिनट की जबरदस्त गाण्ड मरवाई के बाद मेरी गाण्ड बाबाजी के लण्ड के काबिल हो सकी और मेरा दर्द कुछ कम हवा पर पूरा गया नहीं। अब मैं दर्द और मजे के बीच की कैफियत में थी।

 
ये वो कैफियत थी जिसके लिए मैं अपना सब कुछ कुरबान करने के लिए तैयार थी। दर्द और मजे की ये केफियत आज मुझे पहली बार महसूस हुई थी इसलिए मैं अपने आपके सातवें आसमान पर महसूस कर रही थी। मैं बाबाजी की पूरी गुलाम बन चुकी थी और अब अगर ये मुझे खुदकुशी करने को भी बोलते तो मैं खुदकुशी करने के लिए भी तैयार हो जाती। फिर बाबाजी ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से निकाला और उठकर खड़े हो गये। मैंने शिकायती नजरों से पलटकर बाबाजी को देखा।

तो वो मेरा मतलब समझकर मुश्कुराये और बोले- “तू फिकर ना कर मेरी रानी, अभी मैंने तुझे चोदना बंद नहीं किया है, मेरा अमल अभी खतम नहीं हुवा है। अभी तो मैंने तुझे खूब मजा देना है...”

बाबाजी की बात से मेरे होंठों पर मुश्कुराहट आ गई, फिर बाबाजी ने मुझे भी उठाया और फिर उन्होंने मुझे। अपनी गोद में उठाकर अपने सीने से लगा लिया। मैंने अपनी बाहें बाबाजी के गले में डाल दी। बाबाजी ने एक हाथ से अपना लण्ड मेरी चूत में फिट किया और मुझे कमर से पकड़कर अपने लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगे। इस तरह बाबाजी का लण्ड मेरी चूत को अंदर से चारों तरफ से रगड़ता हुवा अंदर बाहर होने लगा। बाबाजी काफी तेजी में मुझे अपने लण्ड पर इस तरह से ऊपर नीचे कर रहे थे जैसे मेरा कोई वजन ही ना हो। बाबाजी का लण्ड बहुत बुरी तरह से मेरी चूत को छील रहा था और रगड़ रहा था जिससे मैं लज़्ज़त के मारे पागल हुई जा रही थी और मैं अपनी चुदाई का पूरा पूरा मजा ले रही थी। थोड़ी देर बाद बाबाजी ने अपना लण्ड मेरी चूत से निकालकर मेरी गाण्ड में डाला।

तो मैं मुश्कुराकर अपनी फूली हुई सांसो के बीच बोली- “बाबाजी बड़ी ताकत है आप में, इतनी देर से आप झड़ ही नहीं रहे हैं.”

मेरी बात पर बाबाजी मुश्कुराकर बोले- “अभी मेरे झड़ने में काफी वक़्त है...”

बाबाजी की बात पर मैंने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था की बाबाजी ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में पूरा का पूरा घुसा दिया। लण्ड गाण्ड में एकदम से घुसा तो मेरे मुँह से अल्फ़ाज के बजाय तेज सिसकारी निकली और । फिर सिसकारियां निकलती ही रही क्योंकी बाबाजी खूब तेजी के साथ मुझे अपने लण्ड पर ऊपर नीचे कर रहे थे। 15 मिनट तक और बाबाजी ने मुझे इस पोजिशन में चोदा। फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद से उतारा और मुझे वो दीवार के पास ले आये। फिर उन्होंने मुझे पूरा सटाकर दीवार से लगा करके खड़ा कर दिया। बाबाजी ने मुझे इस तरह से दीवार से लगाया था की मेरे चूचियां दीवार से लग कर पूरी तरह से दब गई थीं।

 
फिर उन्होंने पीछे से अपना लण्ड मेरी चूत में डाला और मुझे कमर से पकड़कर जमीन से उठा दिया। अब मैं दीवार से बुरी तरह से लगी हुई हवा में थी। फिर बाबाजी ने नीचे से ऊपर झटके मारने शुरू कर दिए। मैं पहले ही हवा में थी उनके झटकों से थोड़ा और ऊपर उठ जाती और फिर जब वो अपना लण्ड मेरी चूत से वापिस खींचते तो मैं थोड़ा नीचे आ जाती। मैं दीवार से पूरी की पूरी मिली हुई थी इसलिए इस तरह ऊपर नीचे होने पर मेरी चूचियां दीवार के साथ खूब रगड़ खा रही थीं जिससे मुझे और मजा आ रहा था। एक तरफ बाबाजी का । लण्ड मुझे लज़्ज़त की दुनियां में लेकर आया हुवा था दूसरी तरफ दीवार के साथ चूचियों का रगड़ना मुझे डबल मजा दे रहा था।

बाबाजी ने 15 मिनट तक इसी तरह मेरी चूत को चोदा फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत से निकालकर मेरी गाण्ड में घुसाया और झटकों पर झटके मारने शुरू कर दिए। बाबाजी को चोदते हुये घंटे से ऊपर हो गया था पर वो अभी तक उसी जोश के साथ मेरी चुदाई कर रहे थे। ये मेरी जिंदगी की सबसे लंबी चुदाई थी।

पता नहीं बाबाजी क्या थे... ये असल में आमिल थे या कोई ढोंगी थे... खैर जो कोई भी थे मैं तो इनकी मुरीद बन चुकी थी और पता नहीं ये बाबाजी क्या खाते थे जो इनकी टाइमिंग इतनी लंबी थी की फारिग होने को ही नहीं आ रहे थे। 15 मिनट मेरी गाण्ड मारने के बाद बाबाजी ने मुझे छोड़ दिया और मुझे डाग्गी स्टाइल में खड़ा होने को बोला। मैं फटाफट डाग्गी स्टाइल में खड़ी हो गई क्योंकी मैं अपनी चुदाई को एक सेकेंड के लिए भी रुकने नहीं देना चाहती थी।

मेरी तेजी को देखकर बाबाजी मुश्कुराकर बोले- “तुझे बहुत मजा आ रहा है जब ही तू और चुदवाने के लिए इतनी बेताबी दिखा रही है."

बाबाजी की बात पर मैं मुश्कुरा दी और बोली- “हाँ बाबाजी आप जैसा मर्द मुझे पहली बार नहीं मिला है इसलिए मैं अपनी चुदाई को एक लम्हे के लिए भी रुकने नहीं देना चाहती हूँ...”

मेरी बात पर बाबाजी मुश्कुराकर मेरे पीछे घुटनों के बल आकर बैठ गये फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में फिट किया और मेरी कमर को पकड़कर एक जोरदार झटका लगा दिया। इस पोजीशन में मेरी टाइट चूत और। ज्यादा टाइट हो चुकी थी। इसलिए बाबा जी का लण्ड बहुत ही ज्यादा फँसकर मेरी चूत में गया और मेरे मुँह से तेज लज़्ज़तभरी चीख निकल गई। अब बाबाजी तेजी के साथ मुझे कुतिया बनाकर चोद रहे थे और उनके तेज झटकों की वजह से मेरे चूचियां जो की लटकी हुयी थी बुरी तरह से हिलने लगीं। बाबाजी झटके मारते हुये मेरे ऊपर चढ़ आये और उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे चूचियां को पकड़ लिया और फिर जितनी तेज झटके मार रहे थे इतनी ही तेज उन्होंने मेरी चूचियां को दबाना शुरू कर दिया।

अब मुझे दो तरफ से मजा मिल रहा था और मैं अपनी चुदाई का बहुत ही ज्यादा मज़ा ले रही थी। 15 मिनट बाद उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत से निकालकर मेरी गाण्ड में घुसा दिया और मेरी गाण्ड मारनी शुरू कर दी। और मेरे मुँह से निकलने वाली सिसकारियां और तेज हो गई। इस पोजिशन में मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और बाबाजी को भी, इसलिए अब बाबाजी मुझे इसी पोजीशन में चोदते रहे। फिर बारी-बारी मेरी चूत और गाण्ड की बाबाजी ने 40 मिनट और चुदाई करी।

और फिर वो बोले- “कंवल अब मैं झड़ने लगा हूँ तुम मेरी मनी को पी लो...”

 
मैं अब तक की चुदाई से बुरी तरह से हाँफ गई थी और पशीने-पशीने हो गई थी। फिर जब बाबाजी ने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला तो एक लम्हे के लिए मैं थक कर गिर पड़ी। पर दूसरे ही लम्हे मैं उठी और मैंने। पलटकर बाबाजी का लण्ड अपने मुँह में लेना चाहा, पर देर हो गई थी और बाबाजी के लण्ड से मनी की तेज और मोटी धार निकलकर मेरे मुँह पर पड़ी और मेरा पूरा मुँह उनके लण्ड से निकालने वाली मनी से खराब हो गया।

बाबाजी ने अपना मनी उगलता हुवा लण्ड जल्दी से मेरे मुँह में घुसा दिया और बाकी की सारी मनी मेरे मुँह में छोड़ दी। जितना बड़ा बाबाजी का लण्ड था उतनी ही ज्यादा मनी उनके लण्ड से निकली। मैंने बाबाजी की सारी मनी को पी लेने के बाद उनका लण्ड चाट-चाटकर साफ कर दिया। मेरा पूरा मुँह उनकी मनी से खराब था और अब मैंने अपने मुँह को साफ करना था। बाबाजी मेरा मतलब समझ गये और उन्होंने एक तरफ पड़ा हुवा एक कपड़ा मुझे पकड़ा दिया। मैंने कपड़े को देखा तो वो मर्दाना अंडरवेर था। यकीनन ये अंडरवेर बाबाजी का था। मैंने वो अंडरवेर पकड़कर बाबाजी को देखा।

बाबाजी मुश्कुराये और बोले- “ये मेरा है तू इससे अपना मुँह पोंछ लें, इससे मेरा अमल मुकम्मल हो जायेगा...”

बाबाजी की बात सुनकर मैं मुश्कुराई और फिर मैंने उनका अंडरवेर अपने मुँह की तरफ किया तो उससे तेज बदबू आ रही थी और ये बदबू पेशाब की थी। मैंने कुछ सोचे बगैर उस बदबूदार अंडरवेर से अपना मुँह पोंछना शुरू कर दिया, जब मैंने अच्छी तरह से बाबाजी के अंडरवेर से अपना मुँह साफ कर लिया तो बाबाजी बोले

कंवल अब मेरे इस अंडरवेर को चाटो...”

आज इतनी जबरदस्त तरीके से मुझे चोदकर बाबाजी ने मुझे खरीद लिया था, इसलिए मैं उनका हर हुकुम मान रही थी। फिर मैंने उनके कहने के मुताबिक उनका पेशाब और मनी से सना हुवा अंडरवेर चाटना शुरू कर दिया। पहले मैंने उनके अंडरवेर पर लगी हुई सारी मनी को चाटा, फिर मैंने उनके अंडरवेर को जगह-जगह से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उनके गंदे अंडरवेर की सारी बदबू अब मुझे अपने मुँह में महसूस हो रही थी। बाबाजी मुश्कुराते हुये ये सब देख रहे थे। फिर वो वैसे ही नंगे अपनी जगह पर वापिस जाकर बैठ गये और । उन्होंने करीब लगे हुई घिटी के बटन को दबाया तो थोड़ी देर बाद बाबाजी के कमरे का दरवाजा बाहर से खुला और उनका एक खिदमतगार अंदर आ गया। अंदर का मंजर देखकर वो मुश्कुराने लगा।

बाबाजी ने उसको देखा और मुश्कुराकर बोले- “जाओ रशीद को भी बुला लाओ और इस लड़की के साथ तुम दोनों भी मजे कर लो..."

बाबाजी की बात सुनकर वो खिदमतगार वापिस बाहर निकल गया। इतनी देर में मैंने बाबाजी का पूरा अंडरवेर चूस लिया था। बाबाजी मुझसे बोले- “अब तू मेरा ये अंडरवेर अपने साथ ले जाना। ये अंडरवेर मेरी तरफ से तेरे लिए तोहफा है."

इससे पहले मैं जवाब में कुछ बोलती बाबाजी के दोनों खिदमतगार अंदर आ गये। मैं बोलते बोलते चुप हो गई।

और बाबाजी मुझसे बोले- “तू ने अभी जिस तरह मुझे खुश किया है उसी तरह मेरे इन दोनों खिदमतगारों को भी खुश कर तब कहीं जाकर ये अमल पूरा होगा..."

मुझे इन दोनों से चुदवाने में कोई ऐतराज नहीं था फिर बाबाजी ने भी हुकुम दे दिया था इसलिए मेरी तरफ से इनकार का सवाल ही पैदा नहीं होना था। और इसीलिए मैं भी मैदान में आ गई। फिर उन दोनों खिदमतगारों ने मुझे लिटा दिया और मेरे पूरे जिश्म को चूमने और चाटने लगे। बाबाजी ने मेरी पूरी तरह से तासकीन कर दी। थी। पर उनके दोनों खिदमतगारों ने कुछ इस तरह से मेरी चूचियां और चूत को चाटा की मेरी चुदाई की भूख फिर से चमक उठी और मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं।

बाबाजी अपने खिदमतगारों से कहने लगे- “वक़्त थोड़ा है इसलिए तुम दोनों एक साथ ही इसे चोदो...”

 
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