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ठरकी दामाद complete

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अब आगे

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रचना ने अपना हाथ एक बार फिर से उसके गर्म लंड पर रखा और अपनी कमर आगे करके अपनी नंगी चूत पर उस लंड को लगा दिया...और ज़ोर से अजय से लिपट गयी.

''आआआआआआआआआहह..... उम्म्म्ममममममममममममममम....... वॉट अ फ़ीलिंग..........''

वो अजय के लंड को अपनी चूत के उपर दबाकर उसकी गर्माहट और कसावट का मज़ा ले रही थी..

अजय ने भी बड़ी मुश्किल से अपने उपर संयम रखकर अपने आप को रोके रखा..

रचना : "बॉस.....आप अपनी चेयर पर बेठिये ना...पहले की तरह...आई विल हेंडल दिस...''

और एक बार फिर से उसने अजय के लंड को पकड़कर दबा दिया..

अजय उसे लेकर अपनी सीट की तरफ चल दिया...और फिर अचानक उसके दिमाग़ में एक विचार आया..

और वो रचना से बोला : "यहाँ नही....बाहर चलते है...बॉस के केबिन में .''

अजय के बॉस का केबिन ,यानी वाइस प्रेसीडेंट का कमरा...जो ऑफीस के बिल्कुल लास्ट में था..

और ये अजय ने इसलिए कहा था क्योंकि उस केबिन के कोने में एक आलीशान सोफा पड़ा था,जो इतना गद्देदार था की उसपर बैठने के बाद पूरा शरीर अंदर की तरफ धँस जाता था,अजय का बॉस उस सोफे को अक्सर लंबी मीटिंग के दौरान इस्तेमाल करता था.

रचना ने भी कुछ नहीं कहा और वो और अजय केबिन से बाहर निकल कर बॉस के केबिन की तरफ चल दिए..

जाते हुए दोनों अपने कपड़े उठा लिए क्योंकि एमर्जेन्सी तो कहीं भी आ सकती थी..दिल के एक कोने अजय को शायद थोड़ा डर अभी भी था की कही बॉस ऑफीस ना आ जाए..और यही डर उसके और रचना के दिल में इस वक़्त रोमांच बनकर दौड़ रहा था.

ये वही ऑफीस था जहाँ रोज 70 के आस-पास लोग हुआ करते है, सभी अपने वर्क स्टेशन और केबिन्स में बैठकर काम किया करते है..और आज उन वीरान पड़ी सीटों के आगे से निकलते हुए अजय और रचना, बिना कपड़ो के, किसी राजा-रानी की तरह टहलते हुए बॉस के केबिन की तरफ़ जा रहे थे..

अजय ने उसे आगे चलने को कहा ताकि वो उसकी थिरकती हुई गांड देख सके..

और रचना ने भी मना नही किया, वो अपनी मोटी गांड मटकाती हुई आगे चलने लगी..साली,अभी थोड़ी देर पहले अंधेरे में शरमा रही थी और अब नंगी होकर ऑफीस में चल रही है ..क्योंकि वो भी जानती थी की उसकी गांड कितनी मस्त है...और जब लड़कियो को पता होता है की उनकी मस्ती भरी चाल देखकर पीछे वालो का क्या हाल होता है तो वो जान बूझकर और मटक कर चलती है, ताकि उनकी गांड की हर थिरकन से पीछे वाले का हाल बुरा हो जाए..

और हाल तो सच में अजय का बुरा हो गया...रोजाना ऑफीस में उसकी मस्त गांड को देखकर वो आँहे भरा करता था और वही रचना इस वक़्त उसके आगे नंगी होकर चल रही थी...अजय इससे ज़्यादा कुछ और माँग ही नही सकता था उपर वाले से..

अजय के बॉस ने जो चाबियाँ भेजी थी,उसमे उसके केबिन की भी चाबी थी..अजय वो केबिन खोलकर अंदर आ गया और अंदर से दरवाजा लॉक कर दिया..

केबिन में हल्की रोशनी आ रही थी...अजय ने एसी ऑन कर दिया और जाकर सोफे पर बैठ गया..

उसका नंगा शरीर उस कॉटन की गद्देदार सीटो के अंदर पूरा धँस गया...अजय ने रचना को अपने पास बुलाया और उसे अपने उपर खींचकर सोफे पर लेट गया..

दोनो के शरीर गुत्थम - गुत्था हो रहे थे...दोनो एक दूसरे को मसल रहे थे...चूम रहे थे...चाट रहे थे...

अजय को उस गद्देदार सीट पर लेटकर बहुत मज़ा आ रहा था...उसके तो नीचे भी गद्दा था और उपर भी.

और रचना के बूब्स चूस्कर उसे सच में बहुत मज़ा आया आज...वो तो उन्हे छोड़ ही नही रहा था...

रचना ने बड़ी मुश्किल से अपने स्तन उसके चुंगल से चुढवाए और मछली की तरह फिसलकर नीचे की तरफ चल दी...

और अपना मुँह उसने सीधा अजय के लंड के उपर लाकर रोक दिया...और फिर नागिन की तरह जीभ निकाल कर उसने 2-3 बार उसे छुआ..

और फिर किसी अजगर की भाँति उसके पूरे लंड को एक ही बार में निगल गयी..

अजय तो कराह उठा उसके इस प्रहार से...उसका पीठ से ऊपर का हिस्सा हवा में उठ गया

''आआआआआआआआआआहह रचना....................... उम्म्म्ममममममममममममम .... माय बैईबीsssss ....''

रचना के रेशमी बालों में हाथ फेरते हुए वो उसके सिर को उपर और नीचे धकेल रहा था...

वो सच में काफ़ी अच्छी सकिंग कर रही थी...पूजा से भी अच्छी .हालाँकि दोनो ही इस खेल में नयी थी पर रचना इस मामले में उससे आगे निकल चुकी थी.

उसे तो बताने की भी ज़रूरत नही पड़ी की मर्द की गोटियां चूसने से वो ज़्यादा उत्तेजित होता है, वो खुद ही अपनी जीभ से उसकी बॉल्स चाटने लगी और फिर उन्हे एक-2 करके मुँह में लेकर चूसा भी उसने..

और इसी तरह कभी उसके लंड को और कभी उसकी बॉल्स को चूस्टे-2 वो अजय को ऑर्गॅज़म के करीब ले गयी..

और जब अजय को लगा की वो किसी भी पल झड़ सकता है तो वो सोफे से उठकर खड़ा हो गया और रचना को सोफे पर पेट के बल उल्टा लिटा दिया

अब वो खड़े होकर उल्टी पड़ी रचना का मुँह जोरों से चोद रहा था..

और जल्द ही उसने चिल्लाना शुरू कर दिया..

''आआआआआआआआआअहह रचना..................... माय डार्लिंग ............... आई एम कमिंगsssssss ''

और रचना ने भी अपने बॉस की आवाज़ सुनकर अपना मुँह वहां से नही हटाया...बल्कि उसके लंड को अपने पिंक लिप्स पर रगड़कर उसे अपने मुँह में ही झड़ने का न्योता दे डाला..

अजय ने उसके सेक्सी से चेहरे को देखते हुए, अपने लंड से गरमा गर्म सफेद मलाई निकालनी शुरू कर दिया...सीधा उसके नर्म होंठों पर...

जिसे उसने अपनी जीभ की मदद से अपने मुँह में ले लिया...थोड़ा माल बाहर गिरा और थोड़ा उसके चेहरे पर...बाकी सब उसके मुँह के अंदर गया.

रचना ने बड़े ही सेक्सी अंदाज में ,मुस्कुराते हुए अपना माल से भरा मुँह खोलकर अजय को दिखाया...और फिर एक ही झटके में वो सारा का सारा माल गटक गयी.

ये सीन हर मर्द को पसंद आता है जब उसका माल उसकी पार्ट्नर पूरा पी जाए...

अजय भी इस सीन को देखकर उत्तेजित हो उठा और उसने अपना मुरझा रहा गीला लंड पकड़कर उसके चेहरे पर रगड़ दिया..

रचना ने भी अपने चेहरे पर पड़ी माल की बूँदों को अजय के लंड पर चुपड़ डाला...वो अपना चेहरा अजय के लंड से ऐसे रगड़ रही थी मानो किसी टावल से सॉफ कर रही हो..

और अच्छी तरह से अपने चेहरे का माल उसके लंड पर लगाने के बाद एक बार फिर से उसे चूस गयी..अजय को अपनी सेक्रेटरी का आज का ये काम बहुत पसंद आया था.

अब रचना का नंबर था.

आज मौका भी था, सरूर भी था..और रचना जैसा माल भी था.

अजय आज उसे वो मज़ा देना चाहता था की वो जिंदगी भर ना भूले..

अजय ने रचना को उस गद्देदार सोफे पर किसी रानी की तरह लिटा दिया और खुद गुलाम की तरह उसके पैरों के पास आकर बैठ गया..

अब वो हल्की रोशनी में, उस जवान और नंगी हुस्ननपरी को आराम से देख पा रहा था.

उसकी उभरी हुई छातियाँ और पतली कमर और बाद में फेली गुई गांड एक उत्कर्ष नमूना था नारी सुंदरता का..

वो उसे उपर से नीचे तक देखता रहा और फिर नीचे झुकते हुए उसने रचना की दोनो जांघे फेला कर उसकी गुलाबरस में डूबी चूत को देखा..

ऐसा लग रहा था जैसे कोई गुलाब खिलने की कोशिश कर रहा हो.

उसकी चूत की परतें एक दूसरे के उपर चड़कर अंदर के गुलाबी दाने को छुपाने की असफल कोशिश कर रही थी.

 


पर अंदर से आ रही तरंगो की वजह से उसकी चूत के होंठ अपने आप बंद और खुल रहे थे..

अजय ने अपने होंठों को गीला किया और नीचे झुककर अपने उन गीले होंठों से एक बड़ा वाला चुंबन उसकी चूत के चेहरे पर दे दिया..

''आआआआआआआआआआअहह ......''

वो तड़प उठी.

आँखे अपने आप बंद होने लगी.

और फिर अजय ने किसी नाग की भाँति उसकी चूत को डस लिया.

''उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़.......अजय ....... उम्म्म्मममममममममममम......''

उसके बाद तो अजय ने जैसे कोई रौद्र रूप धारण कर लिया.

वो उसकी चूत को किसी आइस्क्रीम की तरह चूसने लगा.

वो होती है ना तिल्ले वाली कुलफी, जिसे मुँह में लेकर चूसने से उसका मीठा दूध और खोया अंदर जाता है, वही एहसास अजय को हो रहा था...वो उसकी फूली हुई चूत को मुँह में लेकर उसके अंदर से निकल रहा गाढ़ा और मीठा रस निगलता जा रहा था.

वैसे एक बात तो थी..अजय की लाइफ की ये चौथी कुँवारी चूत थी, जिसे वो अपने मुँह में लेकर चूस रहा था..पहली तो उसकी बीबी प्राची की थी, जिसकी कुंवारी चूत को सुहागरात पर उसने जी भरके चूसा था..

बाद में अपनी दोनो सालियों की चूतें , यानी पूजा और रिया की, भी उसने जी भरकर चूसी थी.

और अब ये...रचना...उसकी कमसिन सेक्रेटरी..जो ऑफीस में नंगी लेटकर मज़े से अपनी चूत को चुस्वा रही थी.

कई लोगो की किस्मत में एक कुँवारी चूत को चूसना नही लिखा होता..और अजय था की इतने कम समय में 4थी चूस चुका था....पता नही और क्या-2 लिखा था उपर वाले ने अजय की किस्मत में .

खैर, अजय के होंठ चूसते -2 जब उसके दाने तक पहुँचे तो उसपर जीभ लगते ही रचना सिहर उठी...ये पहली बार था की कोई चीज़ इतनी अंदर तक जा पहुँची थी..

आज तक उसने मास्टरबेट करते हुए भी अपनी उंगलियाँ अंदर नही डाली थी, उसे डर था की कहीं उसकी झिल्ली ना फट जाए..

और अजय की जीभ थी की उसकी चूत की परतें साइड में करती हुई, उस दाने तक जा पहुँची थी,जिसके बारे में रचना ने आज तक सिर्फ़ सुना ही था...कभी उसे छूकर नही देखा था..

अजय समझ गया की ये उसकी बॉडी का सबसे वीक पॉइंट है..क्योंकि जैसे -2 अजय उसपर जीभ फेर रहा था,रचना का शरीर काँप रहा था...ऐसा लग रहा था जैसे उसका नंगा शरीर सर्द रात में बाहर रखा हुआ है...अजय को उसकी इस हालत पर तरस भी आ रहा था और उसके शरीर से निकल रही तरंगो को महसूस करके मज़ा भी....

और इस मज़े को बड़ाने के लिए उसे अच्छी तरह से पता था की क्या करना है...अजय ने उसकी चूत की पंखुड़ियों को दोनो हाथों से फेलाकर अपनी जीभ कड़ी करके अंदर धकेलनी शुरू कर दी...अजय अच्छी तरह से जानता था की कुँवारी लड़की के लिए तो उसकी जीभ ही किसी लंड के समान है..रचना भी उसके जीभ रूपी लंड से पिलवाकर उस गद्देदार सोफे पर ऐसे मचल रही थी जैसे उसके अंदर कोई आत्मा घुस गयी हो...उसका अपने शरीर पर कोई कंट्रोल ही नही रह गया था, और उस उन्माद में आकर वो ऐसे चीखे मार रही थी जैसे सच मे उसकी चुदाई हो रही हो..

''आआआआआआआआआआआहह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओफफफ्फ़ अजय ................ स्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर...... उम्म्म्मममममममममममममममममम ......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स मररर गाइिईईईईईईईईईईईईईईई...... क्य्ाआआआआआ कर ररहेईईईईईईय हूओओओओओओ..... अहह .... मजाआाआआआआ आआआआआआ रहाआआआआआआआआ है...... आआआआआआअहह ओह सरsssss सस्स्स ... यूउुुुुउउ आआर सस्स्सूऊऊओ गूऊऊऊऊड''

वो तो अक्सर अपनी सेक्रेटरी को कॉंप्लिमेंट देता रहता था...पर आज उसी सेक्रेटरी से मिल रहे इन कॉंप्लिमेंट्स को सुनकर वो दुगने जोश से हर वो काम कर रहा था जिसमें रचना को मज़ा आ रहा था..

और कुछ देर तक उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद जब वो पूरी गीली हो गयी तो अंदर से आ रही सुगंध को सूँघकर अजय पर एक सुरूर सा चड गया...और उसी सुरूर मे बहकर उसने अपने दाँये हाथ की बीच वाली उंगली उसकी चूत में डाल दी..

वो तो ऐसे उछली जैसे उसे बिच्छू ने डॅंक मार दिया हो...शायद अजय की उंगली उसकी झिल्ली से जा टकराई थी, तभी उसे तेज दर्द का एहसास हुआ था...अजय सोचने लगा की जब उसकी इस संकरी सी चूत में लंड जाएगा तो उसका क्या हाल होगा...अच्छा हुआ आज वो उसकी चुदाई नही कर रहा है, वरना बॉस के कमरे को तहस नहस कर देना था उसने.

रचना के कहने पर अजय ने अपनी उंगली बाहर निकाल ली और चूत को होंठों से चूस्कर ही उसकी और अपनी प्यास बुझाने लगा..

अजय का एक हाथ अपने लंड पर भी था...वो दोबारा खड़ा होने लगा था...

और जल्द ही रचना अपने ऑर्गॅज़म के करीब पहुँच गयी...उस ऑर्गॅज़म के जिसे उसके बॉस ने अपने होंठों से चूस-चूस्कर बुलाया था.

और जब वो आया तो अजय को ऐसा लगा जैसे 7.5 रेक्टेयर का भूकंप आया हो...पूरा सोफा उसने हिला डाला, और ज़ोर-2 से तड़पति हुई झड़ने लगी..

कहते है, जब उत्तेजित मर्द झाड़ता है तो उसके लंड की पिचकारी, और औरत झड़ती है तो उसकी चूत की सिसकारी, बहुत दूर तक जाती है...

ये तो शुक्र था की वो ऑफिस था, किसी का घर होता तो ये चीख पड़ोसियों तक जरूर जाती

अजय को सॉफ महसूस हुआ की रचना की चूत के अंदर से, एक के बाद, एक सिसकते हुए से, कंपन बाहर निकल रहे है..जिनके साथ उसकी चूत का रस भी निकला, अजय ने होंठ लगा कर एक-2 बूँद पी डाली...ऐसे प्रोटिन शेक को वो वेस्ट नही करना चाहता था.

और जब तूफान थमा तो रचना ने अजय को अपने उपर खींच लिया और उसके गीले होंठों पर लगा अपनी ही चूत का रस,गहरी स्मूच के साथ,पी गयी.

कुछ देर तक उस सोफे पर पड़े रहने के बाद अजय ने उसे अपने केबिन में चलने की सलाह दी..और एक बॉस की तरह,उसे कमरे की हालत सही करके वापिस आने का कहकर,खुद नंगा अपने केबिन की तरफ चल दिया.

रचना ने वी पी के कमरे को ठीकठाक करके, वहां चाबी लगाई और वो खुद भी नंगी ही हिरणी की तरह छलांगे मारती हुई, अपने बॉस के पास चल दी.

अब दोनो को भूख लगी थी..अजय नंगा ही जाकर चेयर पर बैठ चुका था...और रचना के आने के बाद उसने पिज़्ज़ा का बॉक्स खोलकर उसे वहीं टेबल पर बिठा लिया..

रचना भी अपनी फेली हुई गांड लेकर उसके काँच के टेबल पर चड गयी..ठंडा ग्लास उसके चूतड़ों को काफ़ी ठंडक पहुँचा रहा था...वो महसूस कर पा रही थी की उसकी चूत से अब भी बूँद-2 करके रस बाहर निकल रहा है,जो उसके बॉस की टेबल पर गिर रहा होगा...

अजय का लंड तो उसके मुम्मे देखकर बैठने का नाम ही नही ले रहा था.

अजय ने उसे टेबल पर लेट जाने को कहा...रचना ने भी हमेशा की तरह, अपने बॉस की बात को बिना सोचे समझे मान लिया और अजय की लंबी टेबल पर लेट गयी..

अजय ने पिज़्ज़ा के पीस निकाल कर उसके नंगे जिस्म पर बिछा दिए...पहला टुकड़ा उसकी चूत के उपर..

ये सब अजय ने शादी से पहले एक बी एफ मूवी में देखा था, जिसमे एक अँग्रेजन अपने बाय्फ्रेंड को ऐसे ही खुश करती है...अपनी बॉडी पर पिज़्ज़ा के पीस सजाकर, और फिर पिज़्ज़ा के डिब्बे के नीचे छेद करके उसके लंड को आर-पार निकालकर उसे चूसती भी है...

बस तभी से वो सीन उसके दिमाग़ में बैठ गया था, वैसे तो उसने कभी सोचा नही था की वो ऐसा कुछ ट्राइ करेगा पर आज सब समान उसके पास था...नंगी लड़की और गर्म पिज़्ज़ा..

बस अजय को वही बात याद आ गयी और उसने टेबल पर रचना को किसी थाली की तरह सजाकर उसके उपर पिज़्ज़ा लगाकर खाने की सोची..

अजय ने उसकी चूत की कटोरी के उपर पड़ा पिज़्ज़ा उठाया और उसे खाने लगा...उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके उपर कोई ख़ास ओरिगेमी मसाला लगा दिया गया हो...शायद चूत की भीनी खुश्बू उसके अंदर समा गयी थी.

फिर उसने दो टुकड़े उठाकर उसके मोटे मुम्मो पर रख दिए...पहाड़ी उँची थी,इसलिए उसपर पिज़्ज़ा के टुकड़े टिक ही नही पा रहे थे...मोटे निप्पल उन्हे नीचे की तरफ फिसलने को मजबूर कर रहे थे...पर अजय ने जैसे-तैसे उन्हे वहां जमा ही दिया...

फिर वो उसकी चूत के आस पास के हिस्से से,पीज़्ज़े की गिरी हुई चीज़ को अपनी जीभ में लपेटता हुआ,धीरे-2 ऊपर की तरफ चल दिया..जैसे-2 वो उपर जा रहा था,रचना की साँसे तेज हो रही थी...और पिज़्ज़ा अपनी जगह से हिल सा रहा था...पर रचना ने उसे तब तक गिरने नही दिया, जब तक उसका बॉस उन पहाड़ियों पर चड नहीं गया...और उपर चड़ते ही वो दाँयी तरफ के टुकड़े पर,बिना हाथ लगाए टूट पड़ा..रचना की पूरी छाती पर पिज़्ज़ा की सॉस और चीज़ फेल गयी...दूसरे टुकड़े को उसने अपने हाथ से पकड़ लिया ताकि वो नीचे ना गिर जाए...अजय ने अपने मुँह में आए हर टुकड़े को तो ऐसे खाया जैसे वो बरसों से भूखा हो...वो अच्छी तरह से पिज़्ज़ा की सॉस भी चाट रहा था..उसकी ब्रेड को टुकड़े करके खा रहा था..और साथ ही साथ नीचे की तरफ फैल रही चीज़ों को अपनी जीभ और होंठों से चाट भी रहा था.

आख़िरकार उसका पिज़्ज़ा ख़त्म हो गया...लेकिन उसकी उत्तेजना ख़त्म नही हुई...वो उसके बूब्स चूस्कर और बड़ चुकी थी.
 
50

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अब आगे

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अजय ने अपना पिज़्ज़ा खाने के बाद खड़े होकर अपना लंड मसलना शुरू कर दिया...रचना ने अपना पिज़्ज़ा उठाया और उसे खाने लगी..

अजय ने उसके सेक्सी से चेहरे को देखते हुए अपनी स्पीड बड़ा दी और फिर अचानक उसके लंड से जोरदार पिचकारी निकल पड़ी...जो सीधा रचना के मुँह पर जाकर टकराई....कुछ उसके चेहरे पर गिरी और कुछ उसके पीज़्ज़े पर ... रचना के लिए तो वो पिज़्ज़ा डबल चीज़ का बन चुका था...उसने लपालप करके उसे खा लिया...और फिर अपने चेहरे के माल को समेट कर उसे भी निगल गयी..

अजय तो गहरी साँसे लेता हुआ अपनी चेयर पर गिर पड़ा...

रचना टेबल से उतरी और एक वफ़ादार सेक्रेटरी की तरह वो अजय के सामने बैठकर उसके लंड को मुँह में लेकर उसे सॉफ करने लगी.

कुछ ही देर में उसने लंड को चमका डाला..और फिर मुस्कुराती हुई बाथरूम की तरफ चल दी...

थोड़ी देर में वो क्लीन होकर बाहर आई और फिर दोनो ने कपड़े पहन लिए..

चार बज चुके थे...अब थोड़ा बहुत काम भी करना ज़रूरी था.

अजय और रचना ने अगले 2 घंटे तक मन लगाकर उस प्रॉजेक्ट पर काम किया जिसके लिए वो ऑफीस आए थे...और आख़िरकार उसे निपटा ही डाला..

जाते हुए रचना को एक बार फिर से अच्छी तरह चूसने के बाद वो उसे ड्रॉप करता हुआ घर की तरफ चल दिया.

वो जानता था की अब इस तरह की चुसाई अब अक्सर हुआ करेगी ऑफीस में .

तभी उसके बॉस का फोन आया..अजय ने जब नंबर देखा तो समझ गया की वो ज़रूर प्रॉजेक्ट के बारे में पूछेगा..लेकिन तभी उसके शातिर दिमाग़ में एक विचार कोंध गया.

और उसने बॉस का फोन उठाकर ये कहा की अभी काम पूरा नही हुआ है...कल दोबारा जाना पड़ेगा..यानी संडे वाले दिन...बॉस को भला क्या प्राब्लम होनी थी...उसे तो काम से मतलब था, जब अजय खुद ही संडे को आने के लिए तैयार है तो उसे क्या परेशानी होनी थी...वैसे भी उस प्रॉजेक्ट की कोटेशन मंडे मॉर्निंग में भेजनी थी.

अब अजय के पास एक और दिन था...और ऑफीस की चाभी भी..

और उसे मालूम था की अगले दिन किसका शिकार करना है.

अजय करीब 8 बजे घर पहुँचा...काफ़ी थके होने की वजह से उसने किसी से ज़्यादा बात की, उसकी दोनो सालियां बेचारी अपने-2 अरमान मन में ही लेकर रह गयी...आज की रात के लिए उन्होने कुछ ख़ास सोचा हुआ था अपने जीजू के लिए, पर अजय की हालत देखकर उन्होने अपना प्लान अगले दिन के लिए टाल दिया...वैसे भी 5 घंटे में 3 बार झड़ने से कैसी कमज़ोरी महसूस होती है ये एक मर्द ही जानता है..वो भला ये बात कैसे जानती

अजय ने खाना खाया और अपने रूम में जाकर सो गया...प्राची अपनी बहनो के साथ काफ़ी देर तक बातें करती रही,बाद में वो भी चली गयी और प्राची उसकी बगल में आकर सो गयी...करीब 11 बजे अजय की नींद खुली, प्राची गहरी नींद में थी...उसने दूसरे रूम में जाकर देखा की कहीं कल की तरह आज भी तो पूजा या कोई और वहां नही रुका है, पर आज कोई नही था...

उसने जल्दी से अपना फोन निकाला,और व्हाट्स ऐप चालू किया, और सीधा अपने दोस्त की बीबी अंजलि की प्रोफाइल पर गया...और उसकी किस्मत अच्छी थी,वो ऑनलाइन थी उस वक़्त..

अजय ने हाय का मैसेज टाइप करके भेज दिया...एक ही पल में उसका रिप्लाइ आ गया : "हाय ...आ गयी मेरी याद...कहाँ थे इतने दिनों से...''

अजय : "बस यहीं था....आजकल ऑफीस में कुछ ज़्यादा काम होता है...इन्फेक्ट मैं तो आज भी ऑफीस में था...एक प्रॉजेक्ट रिपोर्ट बनानी थी...''

अंजलि : "ओहो....क्या बात है...काश इतने सिनसेयर मेरे पति होते तो उनकी भी प्रमोशन हो जाती...वो तो एक नंबर के ढीले है..''

अजय हंस दिया...वो भी जानता था की अनिल हर काम करने में कितना ढीला है...शायद इसलिए अजय को उससे पहले प्रमोशन मिल गयी थी...

पर यहाँ वो शायद उसके दूसरे ढीलेपन की भी बात कर रही थी..ये समझते ही उसने लिखा : "अच्छा ..ऐसा क्या ढीलापन दिखा दिया उसने...''

अंजलि : "देखो ना...आज मेरा इतना मन कर रहा था कुछ करने का...और ये है की दारु पीकर, मैच देखकर सो गये...''

अजय जानता था की अनिल को क्रिकेट के मैच देखने का कितना शोंक है...

अजय : "हाय ...काश मैं वहां होता तो आपकी सारी नाराज़गी दूर कर देता...''

अंजलि : "आप तो रहने ही दो...एक बार ही प्यास बुझाई और उसके बाद गायब ही हो गये...ये नही सोचा की जो आग भड़काई है उसको ठंडा करने के लिए तो मिलते रहना ज़रूरी होता है...''

अजय : "कोई बात नही भाभी...आपकी ये शिकायत मैं कल ही दूर कर देता हूँ ...''

अंजलि ने जब ये पड़ा तो उसकी चूत एकदम से गीली हो गयी, उसने टाइप किया : "कल..? पर कल कैसे...अनिल तो कल घर ही होगा...''

अजय : "मैं आपके घर नही आ रहा ,बल्कि आपको कहीं और बुला रहा हूँ ...''

ये देखकर अंजलि की आँखे चमक उठी...उसने लिखा : "कहीं और...यानी तुम्हारे घर...?''

अजय : "अरे नही भाभी...मेरे घर भी नही...कहीं और...ये मैं आपको कल बताऊंगा ..आप किसी तरह से बाहर निकलने का जुगाड़ करो कल ...बस अनिल को शक ना हो...मुझे 12 बजे मार्केट में मिलना, वहां से मैं आपको ले चलूँगा...''

अंजलि ये सुनकर और भी एक्साइटेड हो गयी...उसने लिखा : "वाव...यानी तुमने सब सोच कर रखा है...तुम मेरे निकलने की फ़िक्र ना करो, मैं किट्टी या पार्लर जाने का बहाना करके निकल आउंगी, और अनिल की फ़िक्र ना करो, वैसे भी कल इंडिया पाकिस्तान का मैच है, वो घर से निकलेंगे ही नही...''

अजय : "ये तो अच्छी बात है...वो घर बैठकर मैच देखेगा और हम दोनो मिलकर मैच खेलेंगे...''

अंजलि : "उम्म......मेरा तो अभी से मन कर रहा है तुम्हारे बेट से मैच खेलने का...''

अजय : "और मेरा आपको बॉल्स से खेलने का...''

अजय ने महसूस किया की चैट करते-2 उसका लंड स्टील का बन चुका है..जब उसका ये हाल है तो अंजलि की चूत का क्या हाल होगा इस वक़्त...वो तो अपना बिस्तर गीला कर चुकी होगी...

अंजलि : "उम्म्म....अब ऐसे ना तड़पाओ अजय....जितना खेलना है खेल लेना कल...मेरी बॉल्स से भी और मेरी गीली पिच से भी...''

अजय : "वो तो ठीक है, पर अभी के लिए तो कुछ इंतजाम कर दो ? "

अंजलि : "बोलो, क्या करू मैं , अपने राजा के लिए ''

अजय मुस्कुराया और उसने मैसेज टाइप किया : "मुझे अपनी बॉल्स और गीली पिच की पिक्स भेजो ''

अंजलि : "उम्म्म्म्म्म। ... क्यों परेशान कर रहे हो, तुम तो अपना हिलाकर सो जाओगे,और मई तड़पती रहूंगी रात भर ''

अजय : "नहीं भाभी, आपकी कसम, मई आज की रात नहीं झाड़ूंगा, आपके लिए संभाल कर रखुँगाम सिर्फ अपने छोटे सिपाही को आपने सैक्सी फ़िगर दिखाकर कल के लिए तैयार करना है, प्लीज, भेजो न,.... ''

 
अंजलि ने भी ज्यादा बहस नहीं की, उसने एक नजर अनिल पर डाली , वो गहरी नींद में था, अंजलि ने अपनी टी शर्ट को ऊपर किया और अपने कठोर मुम्मे बहार निकाल कर अपनी एक सेल्फ़ी ली, और उसे अजय को भेज दिया

अजय तो उसके मुम्मो की कठोरता, उसके निप्पल्स की चोंचे और मुम्मों की मोटाई देखकर पागल सा हो गया

उसने तुरंत मैसेज भेजा : "वआव भाभी, मजा आ गया, आप कल मिलो तो सही, इनका तो मै हलवा बनाकर खा जाऊंगा ''

अंजलि उसके मेसेज को देखकर मुस्कुरा दी, वो जानती थी की उसके मोटे मुम्मे हैं ही इतने आकर्षक, भले ही अजय उन्हें बुरी तरह चूस चुका था, मसल चुका था, पर एक बार फिर से उन्हें नंगा देखकर वो ऐसे पागल हो रहा था जैसे पहली बार देख रहा हो उन्हें। ..

उसने इतराते हुए एक और पिक खींची और उसे भी अजय को भेज दिया

इस बार वो और मोटे लग रहे थे, शायद थोड़ा और क्लोसअप से ली थी ये फोटो

अजय ने अपना लंड बाहर निकाल लिया, और उसे मसलने लगा , उसने अंजलि से वादा ना किया होता तो अभी के अभी मुठ मारकर अपना माल बाहर निकाल देता

अजय : "भाभी, क्यों तड़पा रहे हो, पूरा दिखाओ न , प्लीईज़ ''

वो मुस्कुराई और उठकर बाथरूम की तरफ चल दी, दरवाजा बंद करके उसने अपना टॉप निकाला और अपनी टॉपलेस पिक खींचकर उसे अजय को भेज दिया

ये पिक देखकर तो अजय का दिमाग ही खराब हो गया, ऐसे मोटे मुम्मे वाली औरत को दोबारा चोदकर कितना मजा आएगा, यही सोचता हुआ वो अपने लंड को धीरे-२ रगड़ता रहा

अजय : "वाह भाभी, आपके मोटे बूब्स पर तो लटक जाने का जी चाहता है ''

अंजलि : "कल जितना चाहे लटक लेना, कोई रोकने वाला नहीं होगा , मुझे भी अपने बूब्स चुसवाना बहुत पसंद है, कोई मेरे बूब्स चूसे या पुस्सी ,दोनों में एक जैसा ही आनंद मिलता है मुझे तो ''

अजय को वो कल के लिए टिप्स दे रही थी की उसके साथ क्या-२ करे वो....

अजय : "अच्छा, सिर्फ चुसवाना ही पसंद है, चुदाई नहीं। .... ''

अंजलि: "चुदाई का तो कोई मुकाबला ही नहीं है, उसके लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ ''

अजय : "अभी के लिए तो आप अपना पायजामा उतारो और मुझे फुल बॉडी की नंगी पिक भेजो, जल्दी ''

अंजलि ने वैसा ही किया, और अपने नशीले और नंगे बदन की पिक अजय को भेज दी

अजय तो उसके चिकने शरीर और चिकनी चूत को देखकर पागल सा हो गया

अंजलि : "अब मुझे भी तो कुछ दिखाओ ''

अजय ने झट से अपना लंड बहार निकाला और उसकी एक फोटो अंजलि को भेज दी.

जो हाल अभी तक अजय का हो रहा था, वो अब अंजलि का होने लगा

वो अपनी चूत को बुरी तरह से मसलने लगी

और उसने एक और पिक अजय को भेज डाली

अजय : "अब बस करो भाभी, आपसे वादा न किया होता तो कब का झड़ चूका होता, ये पिक्स देखकर तो अपने आप माल निकल जाएगा ''

अंजलि मुस्कुराई और बोली : "मेरी चूत का हाल देखो जरा, बिना झड़े ही इसका रस बाहर निकल रहा है ''

इतना लिखकर उसने अपनी चूत का क्लोसप लेकर उसे अजय को भेज दिया

उसकी चूत सच में टपक रही थी , उसके बाद अंजलि अपने कपडे पहन कर वापिस अपने रूम में आ गयी

थोड़ी देर तक और चैट करने के बाद अजय बोला : "ओक भाभी , अब आप सो जाओ ...कल मिलते है...''

अंजलि : "ठीक है कुत्ते...कल मिलते है...''

अजय : "कुत्ते ?? ये क्या था...?''

अंजलि : "जब मुझे किसी पर हद से ज़्यादा प्यार आता है ना तो मेरे मुँह से अपने आप गालियां निकल जाती है...अनिल से पूछना कभी, कैसी गंदी-2 गालियां ख़ाता है वो , जब मुझे गर्मी चड़ती है...उसकी मा-बहन और खानदान के किसी भी इंसान को नही बख्शती मैं तो...हे हे..''

अजय : "अच्छा , ये बात है...फिर तो हो जाए 2-2 हाथ, स्कूल टाइम के बाद तो मैं भी गाली देना भूल ही चुका था...कल अपने खजाने से ऐसी गालियां निकालूँगा की आपकी चूत के परखच्चे उड़ जाएँगे वो गालियां सुनकर ...''

जवाब में अंजलि ने हंसते हुए स्माइली भेजे और लिखा : "देखेंगे....''

और उसके बाद मिलने की जगह डिसाईड करके अजय ने सारी चैट डिलीट करी और वापिस आकर सो गया....अब उसे कल की धमाकेदार चुदाई का इंतजार था...

पर अजय की किस्मत में हर चीज़ आसानी से नही आती,उसे क्या मालूम था की जो प्लान उसने बनाया है,उसमें खलल पड़ने वाला है...और ऐसा खलल जिसके बारे में उसने सपने में भी नही सोचा था...
 
51

**********

अब आगे

*********

अगले दिन नाश्ता करके अजय फिर से तैयार होकर ऑफीस चल दिया...कल की तरह आज भी पूजा और रिया का वो प्लान अधूरा रह गया था जिसके लिए दोनो पिछले कई दिनों से प्लानिंग कर रही थी...पर ये अजय था की उनके लिए टाइम ही नही था...

अजय के तो दोनो हाथों में लड्डू थे...उसे इस वक़्त वैसे भी अपनी सालियों की ज़्यादा चिंता नही थी...वो बाहर का काम पहले निपटा लेना चाहता था..

घर से निकल कर उसने अंजलि को कॉल किया, वो घर से निकल चुकी थी..अजय ने उसे मेन मार्केट में एक जगह पहुँचने को कहा और वहां पहुँचकर उसने अंजलि को कार में बिठा लिया..

अंजलि ने बिना चुन्नी के,एक टाइट सी कुरती पहनी हुई थी...और साथ में ग्रीन कलर की चिपकी हुई स्लैक्स...उस सिंपल सी ड्रेस में वो बला की सुंदर लग रही थी...अजय तो उसके भरंवा शरीर को देखकर पागल सा हो गया...उसका मन किया की उसे वहीं कार में लिटाकर चोद डाले...पर आज के लिए तो उसके पास अच्छा खासा इंतज़ाम था,इसलिए कार में चोदने का तो सवाल ही नही उठता था..

कार में बैठते ही उसने एक सिगरेट निकाल ली और सुलगा कर अपने होंठों से लगा ली...

अजय ने पहली बार अंजलि को सिगरेट पीते देखा था,इसलिए थोड़ा अचंबित हुआ...वो ये तो जानता था की अनिल चैन स्मोकर है,पर अंजलि के बारे में उसे आज ही पता चला..

अंजलि (मुस्कुराते हुए) : "ऐसे क्यो देख रहे हो...पहले कभी किसी को सिगरेट पीते नही देखा क्या...''

अजय : "देखा तो है, पर मुझे नही पता था की तुम्हे भी इसका शोंक है...वैसे मुझे सिगरेट पीने वाली लड़किया बहुत पसंद आती है...''

अंजलि (कश भरकर उसके मुँह पर धुंआ छोड़ते हुए ) : "हा हा,अच्छा ...ऐसा क्यो भला ?''

अजय : "वो इसलिए की उन्हे सिगरेट पीते देखकर इस बात का अंदाज़ा लग जाता है की वो हर काम में हाथ आजमाना जानती है...और अपने इसी आत्मविश्वास की वजह से वो सैक्स करने में अपने पार्ट्नर को भी पीछे छोड़ देती है...''

अंजलि : "हा हा हा....ये तो मैने पहले किसी से नही सुना की सिगरेट पीने वाली लड़किया सैक्स के मामले में आदमी से आगे होती है... लेकिन तुम्हारा अंदाज़ा मेरे मामले में तो बिल्कुल सही है...मैं सिगरेट भी पीती हूँ और सैक्स तो तुम्हे पता ही है की कैसा करती हूँ ..''

अजय : "तभी तो मैने ये बात कही है...क्योंकि आज तक मैने तुमसे ज़्यादा जंगलिपन किसी और में नही देखा ''

अजय ऐसी बातें करके उसके अंदर की शेरनी को जगा रहा था...वैसे उसे जगाने की ज़रूरत तो नही थी,पर आज वो उसके साथ वाइल्ड गेम खेलना चाहता था...कल रात की सेक्स चैट के बाद और आज सैक्स करते हुए गालियाँ देने की बात उसे अभी तक याद थी,इसलिए वो उसे अभी से उकसा कर उत्तेजना से भर देना चाहता था,और ऐसा हो भी रहा था...

अंजलि ने अपना हाथ आगे करके कार चला रहे अजय के लण्ड पर रख दिया और सिसक कर बोली : "आज तो तू गया अजय...आज तो तू गया..''

अजय मुस्कुरा दिया...और कार चलता रहा.

थोड़ी ही देर मे अजय ने अपने ऑफीस के बाहर कार रोकी...ये देखकर अंजलि चोंक गयी और बोली : "ये...ये तो अनिल का आई मीन तुम लोगो का ऑफीस है....यहाँ किसलिए...''

अजय ने मुस्कुराते हुए ऑफीस की चाबी निकाल कर उसे दिखाई अपने बॉस वाली और कल ऑफीस में आकर काम करने की बात उसे बताई..जाहिर था,उसने अपनी सेक्रेटरी वाली बात छुपा ली थी..

अंजलि : "वाव अजय...तुम्हारा दिमाग़ तो बहुत तेज चलता है...काश तुम मुझे कल भी बुला लेते...ऑफीस के काम के बाद मैं तुम्हारी थकान उतारने के काम आती...''

अब अजय उसे क्या बोलता की कल किसी और ने उसकी थकान ऑलरेडी उतार दी है.

अजय : "कल काम कर लिया और आज काम पूजा करनी थी,इसलिए तुम्हे आज बुलाया है....चलो अब...वरना यही कार में शुरू हो जाना है मैने...''

अंजलि भी मुस्कुराती हुई गाड़ी से उतरी और दोनो लगभग भागते हुए ऑफीस में जा घुसे...दरवाजा लॉक करते ही दोनो एक दूसरे के गले से लिपटकर ऐसे स्मूच करने लगे जैसे बरसों के बिछड़े प्रेमी हो....अंजलि तो अपनी जाँघ उपर करके उसकी टाँगों और पेट को सहला रही थी...और अपनी गीली चूत भी उसके जिस्म से रगड़ रही थी...

अजय उसे स्मूच करता-2 अपने केबिन में ले आया...और बिना किस्स तोड़े ही उसने टटोलते-2 केबिन की लाइट जलाई..

अंजलि से तो सब्र ही नही हो रहा था...उसे अभी के अभी अजय का मोटा लण्ड अपनी चूत में चाहिए था...उसने एक ही झटके में अपनी पायजामी उतार फेंकी और अजय की जीन्स खोलकर उसे भी ज़मीन पर गिरा दिया...

अजय ने उसकी चिकनी कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी टेबल पर बिठा दिया...अंजलि ने अपनी दोनो टांगे फेला दी और अजय के लण्ड को पकड़कर अपनी चूत पर रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया..

अजय का मोटा वाला लौड़ा सरसराता हुआ सा उसकी टनल में घुसता चला गया..

''आआआआआआआहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़..... अजय ...............

मादरचोद ............. चोद मुझे...... भेंन के लण्ड ....''

अजय तो उसकी गाली सुनकर बावला सा हो गया...और उसके मोटे मुम्मे मसलता हुआ उसकी चूत में लण्ड पेलने लगा..

''ले साली..कुतिया......आज तेरी चूत को फाड़कर इसके अंदर अपने लण्ड का माल जमा करूँगा....आज तू मेरे बच्चे की माँ बनकर ही यहाँ से निकलेगी... साली''

ये पासिबल तो नही था पर ऐसा बोलने में अजय को मज़ा बहुत आया...

अंजलि भी कहाँ पीछे रहने वाली थी...वो उसकी गांड पर अपने नाख़ून गाड़कर ज़ोर से दहाडी : "तो चोद ना हरामखोर.... कुतिया बोला है तो कुत्ता बनकर चोद मुझे ...अपना लंड इतना अंदर डाल की कभी निकले ही नही...कुतिया की तरह चिपक जाउंगी तेरे लण्ड से मैं भी.....आआआआअहह भेंन चोद .......मार मेरी चूत ....ज़ोर -2 से....साले कुत्ते ''

अजय का मन तो कर रहा था की उसके कुर्ते को फाड़कर अपना जंगलिपन उसे दिखा डाले..पर ऐसा करके वो उसके घर वापिस जाने में मुश्किल पैदा नही करना चाहता था...इसलिए उसने अपने उपर कंट्रोल रखते हुए उसके कुर्ते को उपर करके निकाल डाला...और ब्रा के स्ट्रेप्स को कंधों से नीचे गिरा कर उसके मोटे मुम्मे बाहर निकाल कर नंगे कर दिए और उनपर अपना मुँह लगा कर टूट पड़ा...

''आआआआआआआआहह साआआााल्ले .....जोर से काट .... मेरी ब्रेस्ट है .... केक नही..... आआआआअहह ... निप्पल चूस गांडू .....''

अजय ने उसके दोनो मुममे पकड़ कर उसके लाल निप्पलों को एक-2 करके चूसा.....जो इतने नुकीले हो चुके थे की उनपर कोई गुब्बारा लगे तो वो भी फट जाए..

 
अंजलि ने अजय की टी शर्ट को उतार फेंका...और अब दोनो मादरजात नंगे हो चुके थे...अजय की टेबल चुदाई का चौराहा बन चुका था, जिसपर कल रचना नंगी लेटी थी...भले ही वो चुदी नही थी,पर अजय ने जो उसके साथ किया था वो किसी चुदाई से कम नही था...

अजय ने उसकी दोनो टांगे उठा कर हवा में कर दी और उसे टेबल पर लिटा दिया, अब वो उसकी चूत में बड़ी आसानी से खड़े होकर चुदाई कर पा रहा था..

''आआआआआआआआआआआआअहह भेंन चोद .....साले कितना मोटा लण्ड है तेरा...... काश रोज चुदाई करवा पाती तुझसे...उम्म्म्मममममममममम...... डाल साले ...... चूत के दाने को रगड़ ..... अंदर तक डाल कर चोद ..... अहह ..... ओह''

अजय : "साली रंडी, तुझे तो मैं अपनी रखेल बनाकर रखूँगा...अपने घर के अंदर ही....अपनी बीबी के सामने चोदूँगा रोज....''

अंजलि (सिसकते हुए) : "सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... अहहssssss ...मैं तो तेरी रखेल बनने को भी तैयार हूँ .... तेरी बीबी के सामने तो क्या,उसके साथ ही मैं तेरे लण्ड से चुदूगी एक दिन....अहह.... देख लेना....''

उसके ऐसा कहने पर अजय को एहसास हुआ की काश ऐसा हो सकता...वो तो ना जाने कब से ये सपना देख रहा है की वो अपनी बीबी और किसी और चूत के साथ थ्रीसम करे...पर उसे अच्छी तरह पता था की उसकी बीबी ऐसा कभी नही होने देगी... दूसरी औरत को उसके सामने लाना तो दूसरी बात थी,उसे अगर भनक भी पड़ गयी की अजय आजकल कैसे बाहर मुंह मारता फिर रहा है तो वो उसे अपने घर के 3र्ड फ्लोर से ही नीचे फेंक देगी...

इसलिए उसने अपनी बीबी की तरफ से ध्यान हटाया और अंजलि पर लगा दिया...जो इस वक़्त बावली सी होकर उसके केबिन की टेबल पर किसी रंडी की तरह चुदाई करवा रही थी...

अजय के झटके इतने तेज थे की उसके हिलते हुए मुम्मे बहुत ज़ोर से उसके चेहरे से टकरा रहे थे...

अजय ने ऐसी क़्विक फकिंग आज तक किसी के साथ नही की थी...भले ही उनके पास आज शाम तक का समय था, पर अंदर आए हुए उन्हे सिर्फ़ 5 मिनट ही हुए थे और अजय उसकी चूत मार रहा था...ना लंड चुसाई की रस्म, ना चूत चखाई की अदायगी , ना जाने कैसी आग लगी थी दोनो में की ऑफीस में आते ही सीधा चुदाई करनी शुरू कर दी...लेकिन इससे एक बात तो पक्की थी, शुरुवाती चुदाई के बाद उनके पास पूरा दिन रहेगा,जिसमें वो बाकी का बचा हुआ वो हर काम कर सकेंगे जिसका कोकशास्त्र में वर्णन है..

अंजलि की चूत में लगी आग का सेंक था ही इतना तेज की अजय जल्द ही झड़ने के करीब पहुँच गया...

वो चिल्लाया : "आआआआआआआअहह ...... ओह्ह्ह्ह भाभीssssssss ..... मैं झड़ने वाला हूँ ...... बोल रंडी ..... कहा निकालूsssssssssss .....''

''मेरी चूऊऊऊऊऊऊऊत में ......... सारा माल अंदर ही निकााआाआल..... बना दे मुझे अपने बच्चे की माँआआआआआआ...'' अंजलि ने जब ये कहा तो वो उसके रण्डीपन का कायल हो गया....सच में ऐसी औरत कहाँ मिलेगी जो अपने पति के दोस्त से,उसी के ऑफीस में चुदाई करवाकर उसके बच्चे की माँ बनने के लिए तैयार हो..

पर अजय के पास इस वक़्त ये सब बातें सोचने का टाइम नही था....अंजलि के इतना कहते ही की उसकी चूत में ही झड़ जाए, उसके लंड से लंबी-2 पिचकारियाँ निकल कर उसकी चूत के अंदर होली खेलने लगी...अजय के गर्म रंग को महसूस करते ही अंजलि भी थरथराती हुई झड़ने लगी...

और दोनो एक दूसरे को चूमते हुए झड़ने लगे..

''आआआआआआआआआहह.... ओह मेरे राआआआजा ............. मजाआाअ आआआआआआ गय्ाआआआआआआआअ .... साआाआले तेरे लण्ड की तो मैं कायल हो गयी.......... ''

अजय भी अपने दोस्त की तारीफ सुनकर मुस्कुरा दिया...

अजय ने अपना चिपचिपा लण्ड बाहर निकाला और अंजलि झट से उसके कदमो में बैठकर उसके लण्ड को मुँह में लेकर सॉफ करने लगी...ठीक उसी तरह से जैसे कल रचना ने उसका लण्ड सॉफ किया था.... ऐसी रंगीन भाभी के मुँह में उसका लण्ड बहुत सुंदर लग रहा था..अपने एक हाथ से वो अपनी चूत से रिस रहे माल को समेट कर उसे भी चाट रही थी...कुल मिलाकर वो एक रंडी की भूमिका अच्छी तरह से निभा रही थी.

अजय का लंड अच्छी तरह से सॉफ करके वो बाथरूम में गयी और खुद भी साफ होकर ऐसे ही नंगी मटकती हुई वापिस आ गयी...

अब अजय उसके रसीले बदन के हर हिस्से का अच्छी तरह से मज़ा लेना चाहता था...और इसके लिए उसके बॉस के केबिन से बढ़िया जगह कोई और हो हि नही सकती थी...

उसने अंजलि का हाथ पकड़ा और उसे लेकर वाइस प्रेसीडेंट के केबिन की तरफ चल दिया,जहाँ उसने कल सोफे पर लिटाकर रचना की चूत चूसी थी...आज भी वो अंजलि की चूत का जूस वैसे ही पीना चाहता था...पर उससे पहले अपना लंड भी तो चुसवाना था उसे...अजय ने तो ये भी सोच लिया था की आज वो उसकी गांड भी मारेगा

केबिन का लॉक खोलकर अजय ने ए सी चला दिया और कल की तरह वो एक बार फिर से सोफे पर जाकर राजा बनकर बैठ गया...और अपनी उंगली के इशारे से उसने अंजलि को पास बुलाया और अपना लंड उसके हाथ में देकर उसे अपने पैरों के पास बिठा लिया...बाकी तो अंजलि को कुछ और समझाने की ज़रूरत ही नही थी...वो उसके मोटे लंड को हाथ में लेकर मुस्कुराइ और उसे सहलाते हुए बोली : "तुम एक नंबर के ठरकी हो.... बिना आराम के दूसरी शिफ्ट के लिए तैयार हो गये.. तुम्हारी बीबी की तो शामत आ जाती होगी...''

अजय : "वो तो है.... मेरे स्टेमीना को झेलना हर किसी के बस की बात नही है....''

ये बोलकर वो उसे उकसा रहा था...और हुआ भी ऐसा ही....वो सिसकारी मारकर उसके लण्ड को मसलती हुई, उसके होंठों से अपने होंठ रगड़ती हुई बोली : "उम्म्म्मममममम...... आज तुम जान जाओगे की तुम्हारी टक्कर का भी कोई है इस दुनिया में .... मुझे रंडी बोला है ना.... अपनी रखेल कहा था ना अभी तुमने.... अब वैसी ही बनकर रहूंगी.... हमेशा. .... तेरे इस लंड की गुलाम ... जब चाहे बुला लेना.... जहाँ चाहे चोद लेना ... मेरे पति के सामने भी मेरी चूत मरोगे ना तो भी मना नही करूँगी.... भेंन चोद ..... आज तू मेरा असली रंडीपना देखेगा....''

वो उत्तेजना के आवेश में आकर कुछ भी अनाप-शनाप बोले जा रही थी और अजय उसे सुनकर खुश हुए जा रहा था....

पर उसकी खुशी को लकवा मार गया जब अचानक केबिन का दरवाजा खुला और उसका बॉस अंदर आ गया.

सामने के सोफे पर अजय बड़ी ही शान से अधलेटा सा होकर अपने लंड को अंजलि से चुसवा रहा था ..अंजलि की पीठ दरवाजे की तरफ थी,इसलिए वो नही देख पाई की कोई अंदर आया है...

पर अजय की तो सिट्टी - पिटी ही गुम हो गयी...जिस बात का उसे डर था,वही हुआ,उसके बॉस के पास ऑफीस के मैन गेट की दूसरी चाभी भी थी,और वो शायद अजय का काम देखने के लिए ऑफिस आ गया था...उसे पुर ऑफीस में ढूँढने के बाद वो जब अपने केबिन में घुसा तो अंदर का सीन देखकर उसके भी होश उड़ गये...उसे भी शायद इस बात की उम्मीद नही थी की अजय काम के बहाने उसके ऑफीस को,उसके केबिन को चुदाईघर बना देगा ...

एक बात तो पक्की थी की उसकी नौकरी तो गयी...

रही सही कसर अंजलि ने पूरी कर दी.

अंजलि ने जब देखा की अजय को एकदम से साँप सूंघ गया है और वो डरा हुआ सा दरवाजे की तरफ देख रहा है तो वो उसके लंड को छोड़कर पीछे की तरफ पलटी, और अपनी उसी उत्तेजना के आवेश में भरकर ज़ोर से बोली

"कौन है ये भोंसड़ी का ...''

उसका बॉस कभी अजय को और कभी अंजलि को हैरानी और गुस्से से भरी नज़रों से देख रहा था.

 
52

**********

अब आगे

*********

अजय ने तो अपना माथा पीट लिया...उसका लण्ड मुरझा कर ऐसा हो गया जैसे सूखा हुआ धनिया.

अंजलि ने कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट को ,उसी के केबिन में , इतनी गंदी गाली दी थी...वो भी उसे जो हाइ सोसायटी बैठता था, IIM से पढ़ा हुआ बन्दा, उसे गाली सुनकर कैसा लगा होगा...उसके गुस्से से तमतमा रहे चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसे कैसा लगा है

पर हर आदमी ये भूल जाता है की उसकी टाँगो के बीच जो लंड नाम की चीज़ है, वो उसके दिमाग़ के कंट्रोल में नही रहती...लंड का अपना ही दिमाग़ होता है...इसलिए एक तरफ तो वो बॉस अजय और अंजलि को देखकर गुस्से में आग बबूला हो रहा था और दूसरी तरफ अंजलि के नंगे बदन को देखकर उसके लंड ने अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी...भले ही उसकी उम्र 55 के आस पास थी, पर उसका लंड अभी भी बेहतर चुदाई करने में सक्षम था..

अंजलि उठ खड़ी हुई और नंगी ही चलती हुई उसके बॉस की तरफ चल दी...

उसके बॉस ने जब देखा की अंजलि नंग धड़ंग सी चलती हुई उसकी तरफ आ रही है तो उसके मुँह से कुछ निकला ही नही....नज़ारा ही इतना सैक्सी था

वो बॉस के करीब आई और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली : "अजय....ये मेरे लिए सरप्राइज है ना...''

अजय भी ये सुनकर चोंक सा गया....वो अभी तक तो अपने बॉस के गुस्से से बचने के तरीके सोच रहा था...उन्हे कैसे क्या बोलना है ये सोचने मे लगा था...पर जब उसने देखा की अंजलि के नंगे बदन को देखकर वो थोड़ा सकपका से गये है तो उसके दिमाग़ मे तुरंत ये ख्याल आ गया की क्यो ना अपने बॉस को भी इस चुदाई के खेल में शामिल कर ले, शायद चूत देखकर उनका गुस्सा शांत हो जाए ...

और अंजलि की ये सर्प्राइज़ वाली बात सुनकर तो उसके प्लान को एक नयी राह मिल गयी...

अंजलि : "अरे..वही सरप्राइज जब मैसेज पर मैने लिखा था की एक साथ 2 के लंड लूँगी...तुम्हे शायद वो बात याद रह गयी थी...तभी तुमने अपने इस दोस्त को यहाँ बुलाया है....है ना !! ''

अजय ने अपने बॉस की तरफ देखा...उनके चेहरे पर भी असमंजस के भाव थे...

यानी ऐसे मौके पर वो इधर जाए या उधर...

मतलब, गुस्सा करे या चुदाई में शामिल हो जाए...

अंजलि : "वैसे तुम्हारे दोस्त की उम्र थोड़ी ज़्यादा है...लेकिन मैने सुना है की जितनी ज़्यादा उम्र होती है,उतनी बड़िया चुदाई करते है ऐसे मर्द....बस लंड में दम होना चाहिए...''

इतना कहते हुए उसने बॉस के करीब आकर, बिना वॉर्निंग के,उनके लंड को पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया...इतने मोटे लंड को हाथ में लेकर वो समझ गयी की माल बड़िया है...

अंजलि : "उम्म्म्मममममम.....मज़ा आएगा...... समान तो सही है इसका....ओ अजय....इधर आकर ज़रा इंट्रो तो करवा इनसे ...नही तो ऐसे ही खड़े रहकर अच्छे ख़ासे मूड को खराब कर देगा ये तो...''

अजय बेचारा सकुचाता हुआ सा, नंगा ही खड़ा होकर उनके करीब आया...अब तक उसके दिमाग में एक योजना बन चुकी थी ... अजय अपने बॉस की तरफ इशारा करते हुए बोला : "अंजलि ये है मेरे बहुत अच्छे फ्रेंड मिसटर खन्ना, और खन्ना, ये है मेरे ही ऑफीस में काम करने वाले मेरे एक दोस्त की बीबी, अंजलि.....''

अजय के ऐसा कहते ही मिसटर खन्ना के चेहरे के भाव ही बदल गये...अभी तक तो वो ये समझ रहे थे की अजय किसी रंडी को ले आया है पर उसके ऐसा कहने से तो उनके दिल मे खलबली सी मच गयी की ऐसा कौन सा बंदा है जिसकी बीबी को वो ऑफिस में लाकर चोद रहा है...

अपने ही ऑफीस में काम करने वाले किसी एम्पलॉई की वाइफ को इस तरह रंडी की तरह बिहेव करता देखकर खन्ना का लंड गन्ना बन गया...और उसने अपनी हाइ सोसायटी का तमगा परे फेंकते हुए, बड़ी ही बेशर्मी से,अजय और अंजलि के सामने ही अपने लंड को पकड़कर उपर की दिशा में अड्जस्ट किया...

अंजलि : "अरे साहब,आप क्यो तकलीफ़ करते हो...मुझे बोलो ना, मैं कर देती हूँ इसको सही....''

इतना कहते-2 अंजलि ने एक बार फिर से खन्ना के लंड को पकड़कर इधर-उधर करना शुरू कर दिया...ऐसा करके वो उसकी मुश्किल और बढ़ा रही थी...क्योंकि अंजलि का हाथ लगते ही उनका घोड़ा अब हाथी बनकर चिंघाड़ने लगा...उसकी सूंड को पेंट में क़ैद करके रख पाना अब थोड़ा मुश्किल होता जा रहा था..

खन्ना ने टूटे-फूटे शब्दो में अजय से पूछा : "अजय....किस....किसकी वाइफ है ये....''

अजय समझ चुका था की मुर्गा फँस चुका है, अब उसे डरने की कोई ज़रूरत नही थी...बल्कि वो अब अपने बॉस को इस खेल में शामिल करके डबल मज़ा लेने के मूड में आ चुका था...

अजय :"खन्ना जी...आप आम खाइए ना, पेड़ क्यो गिनते हो....''

इतना कहते हुए अजय ने अंजलि को इशारा किया...और अंजलि ने बड़े ही उतावलेपन से,अपने मम्मों को पकड़ कर खन्ना के चेहरे के सामने कर दिया और बोली : "हाँ जी, आप आम खाओ...ये लो, बड़े मीठे है....''

अब तो खन्ना से सब्र नही हुआ और उसने बिना अपने ओहदे की परवाह किए उसके मोटे-2 स्तनों को पकड़ा और ज़ोर-2 से दबाते हुए उन्हे चूसने लगा...बिल्कुल चोसा आम की तरह....

अंजलि तो कराह पड़ी : "धीरे चूस भोंसड़ी के .....खून निकालेगा क्या मादरचोद .....अहह''

थोड़ी देर पहले दी गयी जिस गाली से वो आग बाबूला हो गया था, वही गाली अब उसे सुरीली लग रही थी...

अजय वापिस सोफे पर जाकर बैठ गया....और उन दोनो की गुथम - गुत्था देखने लगा..

अंजलि ने आनन-फानन में उसकी पेंट खोल दी, उसकी टी शर्ट उतार कर एक कोने में फेंक दी और उसके जोक्की को भी नीचे उतार दिया....और अब वो भी अंजलि और अजय की तरह पूरा नंगा हो चुका था....

अंजलि उसके कदमो में बैठकर उसके मोटे और काले लंड को देखकर फुसफुसाई : "तभी तो मुझे ज़्यादा उम्र के मर्दों में ज़्यादा दिलचस्पी रहती है....जितनी ज़्यादा उम्र होती है,उतने ही मोटे और लंबे लंड हो जाते है तुम मर्दों के...और यही सबसे ज़्यादा मज़ा देते है....''

अजय ने भी अपने बॉस के लंड को देखकर उनका लोहा मान लिया...ऐसा लगता ही नही था की उनके लंड पर उनकी उम्र का कोई साया पड़ा हो, वो एकदम गठीला सा होकर ऐसे मैदान में खड़ा था जैसे चुदाई के मैदान में मोजूद हर चूत को वो परास्त करके ही दम लेगा...

पर अभी तो इस चुदाई के मैदान में सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही चूत थी...

और वो थी अंजलि की चूत ...

जो उनके लण्ड को देखकर पागल हुए जा रही थी....एक तरफ अजय का जवान और ताज़ा लंड था,दूसरी तरफ ये गठीला और एक्सपीरियेन्स वाला लंड ...आज तो उसके और उसकी चूत के मज़े ही मज़े थे..

अंजलि उसको धकेलते हुए उसी की बॉस चेयर तक ले गयी और वहां बिठा दिया...और एक ही झटके में उनके मोटे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी..

आज मिसटर खन्ना अपने ही केबिन में नंगे बैठकर अपना मोटा लंड इस गर्म औरत से चुस्वा रहे थे...ऐसा तो शायद उन्होने सपने में भी नही सोचा होगा...पर अंजाने मे ही अजय की वजह से ये आज पास्सिबल हो गया.

और सबसे बड़ी बात जो मिसटर खन्ना को उत्तेजित कर रही थी वो ये की अंजलि उन्ही के ऑफीस में काम करने वाले एंप्लायी की बीबी थी...पर किसकी ये अभी तक सीक्रेट बना हुआ था...

अंजलि उनके लंड को चूस रही थी और अपने लंड को उसके मुँह में धकेलते हुए खन्ना जी बोले : "अहह.... मजा अआ गया...... अब बताओ....... किसssss ....किसकी बीबी हो तुम.....''

अंजलि मुस्कुराती हुई उठी और बोली : "अभी बताती हूँ ....पहले मेरी चूत तो चाट भड़वे .....''

इतना बड़ा अपमान भी इस वक़्त उन्हे सुरीला लग रहा था....वो किसी पालतू कुत्ते की तरह चूत पर अपनी जीभ लगाकर उसे चूसने लगा

अंजलि ने इशारे से अजय को अपनी तरफ बुलाया , वो करीब आया तो अंजलि उसके लंड को मुँह में लेकर उसे चूसने लगी...पीछे से खन्ना उसकी चूत चाट रहा था और आगे से वो अजय का लंड चूस रही थी... कॉरपोरेट ऑफीस में ऐसा माहौल बहुत कम देखने को मिलता है..

 
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