• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चूत फाड़ता हुआ लंड अंदर चला गया

sexstories

Administrator
Staff member
Antarvasna, desi kahani: ममता मेरे घर पर आई मैंने जब घड़ी की तरफ देखा तो 10:00 बज रहे थे मैंने ममता से कहा मैं घर की साफ सफाई कर लेती हूं उसके बाद मैं तुम्हारे साथ बैठूंगी ममता कहने लगी ठीक है सुहानी तुम घर का काम खत्म कर लो। मैं अब घर का काम खत्म कर के ममता के साथ बैठ गयी ममता और मैं आपस में बात कर रहे थे तो ममता ने मुझे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए अपने मायके जा रही है। मैंने ममता से कहा तुम वहां से वापस कब लौटोगी ममता कहने लगी कि मुझे वहां से वापस लौटने में तो थोड़ा समय लग जाएगा मैं तुमसे यही कह रही थी कि यदि बच्चों को कोई परेशानी हो तो तुम देख लेना मैंने ममता से कहा ममता तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो। ममता हमारे बिल्कुल सामने वाले घर में ही रहती है इसलिए उसे जब भी कोई मदद की जरूरत होती है तो वह मुझसे कह दिया करती है मुझे भी जब ममता की जरूरत होती है तो मैं ममता से कह देती हूं हम दोनों के बीच काफी अच्छी बातचीत है।

मैंने ममता से कहा ममता मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं ममता कहने लगी कि सुहानी रहने दो मेरा चाय पीने का मन नहीं है मैंने ममता से कहा लेकिन मेरा तो चाय पीने का मन हो रहा था और मैं सोच रही हूं कि मैं चाय बना देती हूं। ममता ने भी कहा ठीक है तुम अगर अपने लिए चाय बना रही हो तो मेरे लिए भी चाय बना ही दो। मैंने ममता के लिए भी चाय बना दी हम दोनों चाय पीते पीते एक दूसरे से बात कर रहे थे ममता के पति का प्रमोशन कुछ समय पहले ही हुआ था। मैं और ममता काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे फिर ममता ने कहा कि बच्चों के स्कूल जाने का समय हो चुका है ममता कहने लगी कि मैं अब घर चलती हूं। ममता अपने घर चली गई मैं भी बच्चों के लिए खाना तैयार करने लगी क्योंकि बच्चे थोड़ी देर बाद ही स्कूल से आने वाले थे और थोड़ी देर बाद बच्चे स्कूल से आ चुके थे। जैसे ही बच्चे स्कूल से आए तो मैंने उन्हें कहा कि तुम हाथ मुंह धो लो उसके बाद मैं तुम्हारे लिए खाना लगा देती हूं। बच्चे अपने कपड़े चेंज कर के हाथ मुंह धोने के लिए चले गए और थोड़ी ही देर बाद वह खाने की टेबल पर आये और मैंने उन लोगों के लिए खाना लगा के फिर उन्हें खाना खिला दिया था और उसके बाद वह लोग अपने स्कूल का काम करने लगे।

शाम के करीब 5:00 बज चुके थे मैंने सोचा कि क्यों ना बाहर टहल आती हूँ और मैं अपने घर के बाहर ही पार्क में चली गई वहां पर मैं टहलने लगी बच्चे घर पर ही थे। मैं जब पार्क में थी तो ममता मुझे दिखाई दी और ममता मुझे कहने लगी कि सुहानी चलो बाहर से सब्जी ले आते हैं। हम लोग अपनी कॉलोनी के बाहर चले गए और वहां से हम लोग अब सब्जी ले आए उसके बाद मैं भी घर आ चुकी थी ममता भी अगले दिन अपने मायके चली गई थी। ममता जब अपने मायके चली गई तो उसके बाद उसके बच्चे मेरे बच्चों के साथ ही घर पर आ जाया करते थे उन्हें मैं दोपहर में खाना खिला दिया करती थी और ममता के पति शेखर के लिए भी मैं रात के वक्त खाना बना दिया करती थी कभी कबार वह लोग हमारे घर पर भी आ जाया करते थे। ममता पन्द्रह बीस दिनों के लिए अपने घर पर गई थी इसलिए मुझे ही ममता के बच्चों की देखभाल करनी थी। एक दिन मैंने अपने पति से कहा कि घर में राशन खत्म हो गया है तो क्या आप आते हुए राशन ले आएंगे वह मुझे कहने लगे कि सुहानी मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं होगा क्योंकि मुझे आज ऑफिस से आने में देर हो जाएगी। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं ही राशन ले आऊंगी और मैं शाम के वक्त राशन लेने के लिए चली गई मैं जब शाम के वक्त राशन लेने के लिए अपनी कॉलोनी के बाहर दुकान में गई तो वहां से मैने राशन ले लिया उसके बाद मैं घर आ गई। मैं जब घर लौटी तो थोड़ी देर बाद ही शेखर भी घर लौट चुके थे वह मुझे कहने लगे कि भाभी जी क्या आपकी कोई मदद करनी है तो मैंने उन्हें कहा नहीं आप रहने दीजिए। मैंने उन्हें कहा बच्चे तो खेलने के लिए गए हुए हैं तो वह कहने लगे कि हां बच्चों को मैंने भी खेलने के लिए भेज दिया था और वह लोग बस थोड़ी देर बाद लौटते ही होंगे।

मैंने शिखर से पूछा कि ममता वापस कब लौट रही है तो वह कहने लगे कि ममता से आज ही मेरी बात हुई थी और वह कह रही थी कि वह कुछ दिनों में वापस लौट आएगी। ममता के पिताजी की तबीयत ठीक नहीं थी इस वजह से ममता अपने मायके गई हुई थी यह बात तो ममता ने मुझे बता ही दी थी। शेखर के साथ मैं काफी देर तक बैठी रही और फिर बच्चे भी आ चुके थे बच्चे जब घर पहुंचे तो मैंने सोचा कि वैसे भी अब खाना बनाने का समय तो हो ही चुका है मैं अब खाना बनाने के लिए रसोई में चली गई। मैं खाना बना रही थी कि तभी मेरे पति संजय का फोन आया और वह मुझे कहने लगे कि सुहानी मैं भी थोड़ी देर बाद घर लौट रहा हूं क्या कुछ लेकर आना है? मैंने उन्हें कहा नहीं संजय रहने दीजिए मैं राशन ले आई थी। वह कहने लगे ठीक है मैं बस थोड़ी देर बाद घर पहुंच रहा हूं अब संजय थोड़ी देर बाद घर आ चुके थे जब संजय घर आए तो वह मुझे कहने लगे कि आज ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था इस वजह से मुझे ऑफिस से घर आने में देर हो गई। मैंने संजय को कहा मैंने खाना बना दिया है आप खाना खा लीजिए वह कहने लगे कि क्या तुमने बच्चों को खाना खिला दिया था तो मैंने संजय से कहा कि हां बच्चों को मैंने खाना खिला दिया है।

थोड़ी देर बाद शेखर भी हमारे घर पर आ गए क्योंकि शेखर भी हमारे घर पर ही खाना खाने वाले थे वह संजय के साथ बैठकर खाना खाने लगे और आपस में वह दोनों बात कर रहे थे। ममता अपने मायके से वापस नहीं लौटी थी उससे मेरी फोन पर बात होती रहती थी। एक दिन शेखर अपने ऑफिस से घर जल्दी लौट आए थे और संजय भी 2 दिनों के लिए अपने ऑफिस के किसी काम से बाहर गए हुए थे। शेखर उस दिन जल्दी घर आ गए थे हम दोनों साथ में बैठ कर बात कर रहे थे। उस दिन ना जाने मुझे क्या हुआ और शेखर भी अपने आप पर काबू ना कर सके। हम दोनों उस दिन एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गए जब शेखर ने मेरे बदन से कपड़े उतारे तो मैंने शेखर से कहा क्या यह सब ठीक है? शेखर मुझे कहने लगा देखो सुहानी यह तो सिर्फ हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए है। मैंने भी अब शेखर का साथ देना ही ठीक समझा मैंने अपने दोनों पैरों को खोल दिया। शेखर ने जब मेरी चूत को देखा तो उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया वह मेरी चूत को बड़े ही अच्छे से चाटने लगा। वह जिस प्रकार से मेरी चूत को चाटते उस से मेरी चूत से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा। शेखर ने मुझसे कहा तुम मेरे लंड को मुंह मे ले लो? मै शेखर के लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। शेखर ने मुझसे कहा तुम ऐसे ही मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर करती रहो काफी देर तक मैंने ऐसे ही किया। शेखर ने मुझे कहा मैं तुम्हारी चूत मे अब अपने लंड को डालना चाहता हूं। शेखर ने मेरे दोनों पैरों को खोला और मेरी चूत पर अपने लंड को सटाते हुए अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया। शेखर का लंड अंदर की तरफ चला गया मुझे अच्छा लगने लगा। वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगे। शेखर का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ रही थी।

शेखर का मोटा लंड मेरी चूत की दीवार को फाडता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था। शेखर मुझे बड़ी तेजी से धक्के देते रहे उन्होने मुझे बहुत देर तक ऐसे ही चोदा उसके बाद जब मेरी गर्मी बढने लगी तो शेखर के लंड से भी पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था और शेखर का वीर्य जैसे ही बाहर गिरा तो शेखर ने मुझसे कहा सुहानी आज तुम्हारे साथ सेक्स कर के मजा आ गया। मैंने शेखर से कहा मैं दोबारा से तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हूं? शेखर ने अपने लंड को साफ़ किया और मरी चूत से निकलते हुए वीर्य को साफ किया। मैंने आपकी चूतडो को शेखर कि तरफ कर दिया था शेखर ने मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला और मेरी गर्मी को बढ़ा दिया। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मैं अपनी चूत के अंदर लंड को लेने के लिए तैयार थी। शेखर ने मेरी चूत पर अपने लंड को सटाया और अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया। शेखर का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर समा चुका था।

शेखर का लंड जैसे ही मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैंने शेखर से कहा मुझे आज बहुत ही अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से मैंने तुम्हारे साथ सेक्स किया। शेखर मुझे कहने लगे सुहानी मुझे भी आज तुम्हें धक्के देने मे बहुत मजा आ रहा है वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के दे रहे थे मेरी चूतड़ों का रंग लाल हो चुका था। मेरी चूतडो से अलग ही प्रकार की आवाज निकल रही थी मेरी चूत के अंदर बाहर शेखर ने बहुत देर तक अपने लंड को किया। मेरी चूत से निकलती हुई गर्मी ज्यादा ही बढ़ने लगी थी अब शेखर मुझे कहने लगे मेरा वीर्य बाहर की तरफ को आने वाला है। मैंने शेखर से कहा तुम अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर ही गिरा दो। शेखर ने मेरी चूत के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया। शेखर का वीर्य मेरी चूत के अंदर गिर चुका था मैं बहुत ही ज्यादा खुश थी। जब तक ममता वापस नहीं लौटी तब तक शेखर और मैंने सेक्स किया और उसके बाद भी हम दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को हमेशा पूरा करते रहते हैं।
 
Back
Top