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चूत की कसावट बढती चली गई

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Antarvasna, hindi sex kahani: आदित्य और मैं साथ में बैठे हुए थे हम लोग अपने ऑफिस की कैंटीन में थे आदित्य मुझसे कहने लगा कि मुकेश मेरी सगाई तय हो चुकी है तो मैंने आदित्य को बधाई दी और कहा कि यह तो बहुत ही खुशी की बात है। आदित्य ने मुझे बताया कि उसकी सगाई जल्द ही होने वाली है आदित्य से मेरी मुलाकात 6 महीने पहले हमारे ऑफिस में ही हुई थी और आदित्य से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई। मैंने आदित्य को कहा चलो यह तो बहुत ही खुशी की बात है आदित्य कहने लगा कि तुम्हें भी मेरी सगाई में आना है मैंने उसे कहा कि जरूर आदित्य मैं तुम्हारी सगाई में जरूर आऊंगा। जिस दिन आदित्य की सगाई थी उस दिन हम लोग भी आदित्य की सगाई में गए जब हम लोग आदित्य की सगाई में गए तो उसकी सगाई काफी धूमधाम से हुई उसके काफी रिश्तेदार आए हुए थे और हमारे ऑफिस से भी हमारे कुछ स्टाफ के लोग थे।

आदित्य की सगाई में मैं मालिनी से मिला जब मालिनी से मैं मिला तो मुझे उससे मिलकर काफी अच्छा लगा और उसके व्यवहार ने मुझे पूरी तरीके से प्रभावित कर लिया था। मालिनी स्कूल में पढ़ाती है वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है और उसके बाद तो जैसे हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा यह बात आदित्य को भी पता थी क्योंकि मालिनी आदित्य को पहले से ही पहचानती थी इस वजह से उसने आदित्य को इस बारे में सब कुछ बता दिया था। आदित्य की सगाई भी हो चुकी थी और जल्द ही उसकी शादी होने वाली थी उसकी शादी के दिन मैं और मालिनी साथ में ही थे उस दिन मालिनी ने मुझे अपने परिवार से मिलवाया। जब उसने अपने परिवार से मुझे मिलाया तो मुझे उनसे मिलकर अच्छा लगा हालांकि अभी तक मालिनी ने हम दोनों के रिश्ते के बारे में किसी को भी नहीं बताया था लेकिन मैंने मालिनी से कहा क्या तुम अपने पापा मम्मी को इस बारे में बताने वाली हो। मालिनी ने मुझे कहा कि हां मैं अपने पापा मम्मी को इस बारे में बताने वाली हूं और कुछ समय बाद ही मालिनी ने मेरे और अपने रिश्ते के बारे में अपने पापा और मम्मी को बता दिया था। जब उसने उन दोनों को इस बारे में बताया तो उन्हें हमारे रिश्ते से कोई भी परेशानी नहीं थी मालिनी और मैं अब एक दूसरे से जल्द ही शादी करने वाले थे हम दोनों की शादी भी तय हो चुकी थी।

जब हम दोनों की शादी हुई तो उसके बाद मालिनी और मैं एक दूसरे के साथ काफी अच्छे से समय बिताते और हम दोनों के बीच प्यार भी काफी था हम दोनों की जिंदगी अच्छे से चल रही थी और सब कुछ ठीक था। एक दिन मालिनी ने मुझे कहा कि मुकेश मुझे आज अपनी सहेली से मिलने के लिए जाना है तो मैंने मालिनी को कहा ठीक है मालिनी तुम अपनी सहेली से मिलने के लिए चली जाओ। वह अपनी सहेली को मिलने के लिए गई तो उस दिन मालिनी का एक्सीडेंट हो गया जिससे कि उसे काफी ज्यादा चोट आई। उसका एक्सीडेंट हो जाने के बाद वह बिल्कुल भी काम नहीं कर पा रही थी मैं नहीं चाहता था कि मालिनी काम करें मैंने उसके लिए घर में एक नौकरानी रखने का फैसला कर लिया था। मालिनी अब घर पर ही रहती थी उसकी देखभाल के लिए मैंने एक नौकरानी रखी जो कि घर का काम भी देख पा रही थी, मैंने जिसको काम पर रखा उसका नाम कांता है कांता काम अच्छे से करती थी और उसके काम में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी या दिक्कत नहीं थी वह मालिनी का भी पूरा ध्यान रखती थी और घर में खाने की भी पूरी व्यवस्था वही देखती थी साफ-सफाई से लेकर सारा काम वही करती थी। मैं कई बार अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में घर से बाहर रहता था धीरे-धीरे मालिनी भी ठीक होने लगी थी और मैं कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस के काम से अहमदाबाद चला गया। अहमदाबाद में हमारा कोई जरूरी प्रोजेक्ट शुरू होने वाला था जिसके लिए मुझे ही मेरे ऑफिस से भेजा गया था और वहां पर हम लोग नया ऑफिस शुरू भी करने वाले थे इसलिए कुछ समय तक मैं अहमदाबाद में ही रहने वाला था। मैंने अब अपने ऑफिस के लिए नई जगह भी देख ली थी और उसके बाद मैं वापस मुंबई लौट आया।

मैं जब मुंबई लौटा तो मालिनी मुझे कहने लगी कि मुकेश आज मुझे घूमने के लिए कहीं जाना है काफी समय हो गया हैं मैं कहीं घूमने के लिए भी नहीं गई हूं। उस दिन मालिनी का काफी घूमने का मन था तो मैं भी उसे मना नहीं कर पाया, मैं और मालिनी उस दिन घूमने के लिए निकले क्योंकि मालिनी के पैर में चोट लगी थी जो अभी तक पूरी तरीके से ठीक नहीं हुई थी इसलिए उसे चलने में दिक्कत होती थी। हम लोग एक मॉल में पहुंचे और वहां पर हम दोनों ने उस दिन मूवी देखी मूवी देखने के बाद हम लोग घर वापस लौट आए मालिनी काफी खुश थी वह मुझे कहने लगी कि मुकेश मुझे लग रहा है कि अब मैं पहले से बेहतर महसूस करने लगी हूं। मालिनी के पैर में काफी ज्यादा चोट आ गई थी जिस वजह से उसे चलने में बहुत परेशानी होने लगी थी अब धीरे-धीरे वह ठीक भी होने लगी थी और सब कुछ ठीक हो चुका था। कांता घर का काम अच्छे से कर रही थी एक दिन मैं ऑफिस जाकर जल्दी लौट आया था उस दिन कांता रसोई में खाना बना रही थी। मैंने कांता को आवाज देते हुए कहा कांता मेरे लिए एक गिलास पानी ले आना। वह कहने लगी साहब ठीक है बस अभी लाई और वह हो थोड़ी देर बाद पानी का गिलास लेकर आई जैसे ही उसने मुझे पानी दिया तो उसके हाथ से खिला गिर गया और वह नीचे गिर गया। उसने मुझे कहा साहब माफ कर दीजिए मैं बस अभी पानी ले आती हूं।

वह दौड़ती हुई रसोई की तरफ गई लेकिन जब वह दौड़ रही थी तो उसके स्तन हिल रहे थे मैं उसे देखकर उत्तेजित होने लगा था मेरा लंड हिलोरे मारने लगा था मैं चाहता था मैं अपने लंड को उसकी उसकी चूत मे डाल दू और जल्दी से जल्दी अपनी प्यास बुझाऊं। जब वह पानी लेकर आई तो मैंने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा मैंने पानी जल्दी से पिया और वह मेरे पास बैठी हुई थी। मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा उसने हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिस मे वह बहुत ही गजब लग रही थी उसका गदराया हुआ बदन मुझे अपनी और आकर्षित कर रहा था और ना चाहते हुए भी मैं उसकी चूत मारने के लिए तैयार था। मैंने जब उसके स्तनों पर हाथ लगाया तो वह मेरी तरफ देखने लगी लेकिन वह मुझसे कुछ बोल नहीं पाई मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में बैठा लिया। मैंने अपने बटुए से कुछ पैसे निकाले और वह मैंने कंता के हाथ में थमा दिए कांता अब समझ चुकी थी कि मैं उससे क्या चाहता हूं इसलिए कांता ने भी देर नहीं की और मेरे पजामे को नीचे करते हुए मेरे अंडर वियर से उसने मेरे लंड को बाहर निकाला। मेरा लंड हिलोरे मार रहा था उसने जैसे ही उसे अपने हाथ में लेकर ऊपर नीचे करना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा और वह उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी थी। उसने अपने मुंह के अंदर लंड लिया और बड़े अच्छे से उसका रसपान किया मुझे तो मजा आ चुका था और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। उसने मुझे कहा अब उस से बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है मैंने उसे कहा तुम अपनी साड़ी के ऊपर कर लो उसने अपनी साड़ी को ऊपर किया तो उसकी चूत को देखकर मैंने भी जल्दी से उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया और मैंने जब उसकी चूत के अंदर धक्का देते हुए अपने मोटे लंड को डाला तो उसके मुंह से एक तेज चीख निकली और उस चीख के साथ मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला गया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने कुछ देर बाद उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया जब मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा तो उसकी उत्तेजना इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह मुझे कहने लगी साहब आप मेरी गर्मी को अच्छे से बुझा दीजिए क्योंकि इसकी चूत से निकलता हुआ पानी काफी अधिक हो चुका था इसलिए मैं समझ चुका था कि उसकी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी है। उसकी गर्मी इतनी अधिक हो चुकी थी उसे मै बिल्कुल भी झेल नहीं पा रहा था मेरे लिए आसान नहीं था मैंने उसे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है। वह कहने लगी साहब मजा तो मुझे बहुत ज्यादा आ रहा है आपका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा है जब आपका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा है तो मुझे बहुत मजा आ रहा है।

मैं अब तेज गति से उसे धक्के दिए जा रहा था जब मैं उसे धक्के मार रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था अब उसे भी मजा आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे लगता है मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही लावा बाहर आने लगा है इसलिए मैं आपका साथ नहीं दे पाऊंगी। मैं समझ चुका था कि वह बहुत ज्यादा गरम हो चुकी है और वह मेरा साथ नहीं दे पाएगी क्योंकि उसकी चूत से निकलता हुआ लावा कुछ ज्यादा ही अधिक हो चुका था जिससे कि उसकी चूत के अंदर मै अपने वीर्य को जल्दी से गिराना चाहता था। मेरा वीर्य जैसे ही उसकी योनि के अंदर गिरा तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी कि साहब आज तो आपके साथ मजा ही आ गया आपने मेरी इच्छा आज पूरी कर दी है। उसने अपने कपड़े पहन लिए और उसके बाद वह चली गई कुछ देर बाद मालिनी भी वापस लौट चुकी थी। मैंने मालिनी को कहा मालिनी तुम कहां चली गई थी तो वह कहने लगी मैं अपनी सहेली के पास चली गई थी लेकिन मुझे तो कांता के साथ चूत चुदाई का खेल खेलकर मजा आ गया था और वह बहुत ज्यादा खुश थी।
 
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