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चूतो का समुंदर

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मैं प्रेमा की लाश देख कर घबराने लगा था...मुझे समझ ही नही आ रहा था कि क्या करूँ....

आज मेरी लाइफ मे अचानक से एक ऐसा हादसा हो गया था...जिसकी मैने ख्वाब मे भी कल्पना नही की थी....

वो औरत जो इस सहर मे किसी को जानती नही...जिसने कल रात ही मेरे घर मे कदम रखा...अचानक मारी गई...और लाश बन कर मेरे सामने पड़ी है...

मैं इस टाइम कुछ भी नही सोच पा रहा था...बस मुझे पारूल का मासूम चेहरा याद आ रहा था....

मैं(नम आँखो से)- ये सब कैसे हुआ...

आकाश(मेरे कंधे पर हाथ रख कर)- अब ये तो पोलीस ही पता लगा सकती है बेटा.....

मैं- पोलीस....नही...पोलीस नही...पोलीस आयगी तो पारूल...नही...उसे पता नही चलना चाहिए....वो सह नही पायगी...नही...पोलीस नही...

आकाश- पर पोलीस को तो बुलाना ही होगा बेटा...ये मर्डर केस है...और फिर ये लाश...

मैं(बीच मे)- जानता हूँ...पर अभी नही...अभी कोई कुछ नही बोलेगा....और पारूल से तो बिल्कुल नही...मैं करता हूँ कुछ...अभी चलो यहाँ से...और चुप ही रहना....ओके ...

फिर मैं सबको वहाँ से ले कर आ गया और उन्हे चुप रहने की हिदायत दे दी...

थोड़ी देर बाद जब पारूल रेडी हो कर नीचे आई तो मैने उसे रक्षा के साथ जाने का बोल दिया...और ये भी बोल दिया कि उसकी माँ ज़रूरी काम से गाओं चली गई....कल तक आ जाएगी...

पारूल की हैरानी तो हुई...पर वो मेरी बात मान कर चली गई.....

पारूल के जाते ही मैने कुछ कॉल्स किए और फिर पारूल का चेहरा याद कर के मेरी आँखो मे गुस्सा खून बन कर निकलने लगा....

मैं- पारूल....मुझे माफ़ करना बेटा....पर तेरे लिए यही सही था...और हाँ....मैं तेरी माँ के कातिल को छोड़ूँगा नही....ऐसी मौत दूँगा कि मौत भी काँप उठेगी...हाँ......

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एक सुनसान जगह पर......

संजू आगे-आगे भाग रहा था....और अंकित उसका पीछा कर रहा था.....

अंकित- रुक साले.....साले धोखे बाज....मैं तुझे जिंदा नही छोड़ूँगा....रुक साले.....

अचानक संजू को ठोकर लगी और वो ज़मीन पर गुलाटी मार कर गिर गया...तब तक अंकित उनके पास पहुँच गया और संजू पर गन तान दी....

संजू- एम्म...मुझे...म्म्मारआ...माफ़ कर दे ...मुझे ...

अंकित(बीच मे)- मैने तुझ पर भरोशा किया था कुत्ते...और तूने ये सिला दिया...हाअ...

संजू- आ..अंकित..म्म...मेरी बात...मेरी बात सुन...माफ़ कर दे...माफ़...

अंकित- नही...धोखेबाज को माफ़ नही...सॉफ किया जाता है....

संजू- नही अंकित...माफ़ कर दे..प्ल्ज़ माफ़ कर दे....

अंकित- माफी उपर जा कर मागञा....साले धोखेबाज.....

संजू- अंकित..नही..न्न्नाहिी...

और अंकित 3 फिरे करता है और एक जोरदार चीख गूँज उठती है....

""न्न्3ीचनणन्नाआआहहिईीईई......""

और एक जोरदार चीख के साथ रजनी हड़बड़ा कर जाग गई और बेड पर बैठ कर जोरों से सासे लेने लगी....

रजनी की साँसे पूरे रूम मे सॉफ सुनाई दे रही थी...और उसका तेज़ी से धड़कता दिल उसके सीने मे खलबली मचा रहा था...और उसका पूरा चेहरा पसीने से तर-बतर हो चुका था.......

रजनी(मन मे)- ये कैसा सपना था...नही...ऐसा तो कभी हो ही नही सकता....अंकित और संजू तो एक-दूसरे को भाई से बढ़ कर मानते है...फिर उनके बीच ऐसा कुछ....न्हिईीई....ये सिर्फ़ एक सपना है...सिर्फ़ सपना.....

पर थोड़ी देर शांत रहने के बाद राजनू को कुछ याद आया और वो फिर से सोच मे पड़ गई ......

रजनी(मन मे)- पर अंकित....वो धोकेबाजों को कभी माफ़ नही करता...भले ही वो कोई भी हो...कितना भी खास.....इसका मतलब....संजू को भी....हे भगवान....इससे पहले कि अंकित को संजू के इरादे किसी और से पता चले...मुझे खुद अंकित से बात करनी होगी...

वरना मेरा सपना कही हक़ीक़त मे ना बदल जाय ...नही-नही...मैं ऐसा नही होने दूगी...कभी नही....

रजनी आख़िरी शब्द उसके मुँह से ज़ोर से निकल गये...जिसे सुनकर संजू के डॅड बाथरूम से बाहर आ गये....

प्रमोद- क्या हुआ ....तुम चिल्लाई क्यो....??

रजनी(सकपका कर)- हा...नही...कुछ नही...मैं तो बस...वो...एक सपना....

प्रमोद(बीच मे)- क्या...सपना....हाहाहा....तुम भी ना...सपने से डर गई....ह्म..चलो जाओ और फ्रेश हो जाओ....पूरा चेहरा पसीने से लत्पथ हो रहा है...उठो जाओ...

फिर रजनी ने अपने आप को संभाला और बाथरूम चली गई और मान ही मान सोचने लगी कि अब आगे उसे क्या करना है......

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रेणु के घर..............

रात के हादसे के बाद रेणु की आँख सीधे सुबह ही खुली...और जब उसकी आँखे खुली तो उसने अपने आप को एक अंजान कमरे मे पाया...

अंजान जगह देख कर रेणु ने तुरंत खड़े होने की कोसिस की पर वो उठ भी नही पाई....क्योकि उसके हाथ और पैर को बाँध कर रखा गया था.....

रेणु(चिल्ला कर)- कौन है यहाँ....कौन लाया मुझे...हहााअ.....

रेणु कुछ देर तक झटपटाती रही और चिल्लती रही....पर उसे कोई जवाब ना मिला...और ना ही कोई उसकी आवाज़ सुन कर उस कमरे मे आया.....

करीब 10 मिनट तक रेणु झटपटाती रही...तब कही जाकर उसे गेट खुलने की आवाज़ आई और उसकी आँखे गेट पर लग गई....

जैसे ही गेट खोलने वाला रेणु के सामने आया तो रेणु का चेहरा गुस्से से लाल हो गया....

रेणु(चिल्ला कर)- तो ये सब तुमने किया ...हाँ....

संजू- श्हीए....आराम से...रिलॅक्स...

रेणु(गुस्से से)- रिलॅक्स गया भाड़ मे....तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ये सब....

संजू(बीच मे)- बोला ना....रिलॅक्स...कुछ देर मे सब जान जाओगी...

और संजू ने आगे बढ़ कर रेणु को आज़ाद किया और फिर पानी ऑफर किया....

रेणु(पानी पी कर)- हुह...अब बको...ये सब क्या था...

संजू- मुझे यही ठीक लगा...बस कर दिया...

रेणु(आँखे दिखा कर)- ठीक...इसे तुम ठीक कहते हो...आख़िर ये सब हो क्या रहा है...तुम पागल हो क्या....

संजू(बैठ कर)- ह्म..तभी तो तुम्हे बचाया है...पागलपन है ना...हा...

रेणु(हैरानी से)- बचाया....पर किससे.....

संजू- तुम्हारे डॅड ...मदन से...

रेणु- क्या....क्या कहा तुमने....वो मेरी जान...नही...तुम झूठ बोल रहे हो....

संजू(मुस्कुरा कर)- जानता था कि तुम यकीन नही करोगी...पर सच यही है...और मेरे पास इसका प्रूफ भी है...

रेणु- कैसा प्रूफ...मुझे बताओ...

संजू- ह्म...तो ये सुनो...

और इतना बोल कर संजू ने अपने मोबाइल पर एक ऑडियो क्लिप प्ले कर दी...जिसमे मदन और समर की बातें रेकॉर्ड थी...और उन बातों से सॉफ हो गया कि मदन और समर रेणु की जान लेना चाहते थे....और कल रात बिजली गुल होना...उनके ही प्लान का हिस्सा था...पर संजू ने सही वक़्त पर अपने खास आदमियों को भेज कर रेणु को बेहोश करवाया और यहा पहुँचा दिया.....

ये बातें सुन कर रेणु की आँखे नम हो गई और उसने अपना सिर पकड़ कर सिसकना शुरू कर दिया.....

संजू- अब बोलो...क्या मैने ग़लत किया...हाँ...

रेणु(सुबक्ते हुए)- इतना बड़ा धोखा....साला...कमीना....मैं उसे छोड़ूँगी नही....उसकी जान ले लुगी...

संजू- रिलॅक्स....तुम्हारी गाली बकने से कुछ नही होने वाला....समझी....

रेणु(गुस्से से)- उस कमिने के लिए मैने क्या नही किया...कितनो से अपने जिस्म को कुचलवाया...अपनो को धोखा दिया...उस औरत को धोखा दिया जो मेरी माँ से बढ़ कर थी...और बदले मे...मेरी जान लेनी चाही....मेरी जान...

संजू(खड़ा हो कर)- सब करमो का फल है ....जो तुमने किया...वो तुम्हारे साथ हुआ...है ना...

रेणु(खड़ी हो कर)- पर तुमने मुझे क्यो बचाया....तुम भी तो उनमे से एक हो....हाँ...

संजू- बिल्कुल सही...पर मुझे तुम्हारी ज़रूरत है....कम से कम अभी तो है ही....

रेणु- ह्म्म..मतलब बाद मे तुम भी मेरी जान ले लोगे....

संजू(मुस्कुरा कर)- फ्यूचर किसने देखा मेडम....पर यकीन मानो...अगर तुम मेरे हिसाब से चली तो जिंदा रहोगी....जिंदा भी और सेफ भी....ओके....

रेणु- ह्म्म...चलो...देखते है...मेरी लाइफ भी अजीब है...आसमान से टपकी और खजूर पर अटकी....आगे पता नही...कहाँ जाउन्गी....

संजू- आगे का आगे देखना...फिलहाल कुछ खा लो...और रेस्ट करो...मैं बाद मे आता हूँ....

रेणु- ह्म..क्यो नही...आज मरने से बची हूँ...तो दवा कर खाउन्गी....

इसके बाद संजू वहाँ से निकल गया और एक नौकर रेणु के लिए खाना ले आया....

संजू(मन मे)- रेणु मेडम....मरोगी तो तुम यहाँ भी...पर ये मौत उस मौत से काफ़ी अलग होगी....

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अंकित के घर..............

सुबह-सुबह पारूल की माँ की लाश ने मेरे दिल-ओ-दिमाग़ को हिला कर रख दिया था....

एक तरफ मैं ये सोच रहा था कि पारूल की माँ को आख़िर कौन मार सकता है और क्यो....जबकि दूसरी तरफ मुझे पारूल की टेन्षन हो रही थी कि आख़िर उसे कैसे समझा पाउन्गा....क्या बोलुगा उसे कि उसकी माँ कहाँ गई....क्यो गई...???

मैं अपनी सोच मे डूबा हुआ था कि तभी गेट पर नॉक हुई और जब मैने गेट खोला तो सामने संजू की चाही (मेघा ) को खड़ा पाया....

मेघा इस वक़्त साड़ी मे थी...और मेरे सामने नज़रे झुकाए खड़ी थी....

मेघा को देख कर मुझे याद आया कि मैने ही इससे आज सुबह आने को कहा था....

मेघा- अंकित...मैं वो...तुमने कहा था...कि मैं....तो ...आ गई...

मैं- हाँ...हाँ ...याद है मुझे...आइए....

मेघा(मुझे देख कर)- क्या हुआ...तुम कुछ परेशान हो....क्या मैं वापिस...

मैं(बीच मे)- अरे नही...ऐसी कोई बात नही...आप एक काम करो...आप जिम मे जा कर चेंज करो...मैं फ्रेश हो कर आता हूँ...ओके....

और मैने मेघा को जिम मे भेज दिया और फिर से सोच मे पड़ गया....

मैं(मन मे)- अब क्या करूँ....एक तरफ पारूल का टेन्षन....उसकी माँ की मौत का टेन्षन...और आज ही मेघा आ गई...क्या करूँ....

मेघा को वापिस भेजा तो वो और उदास हो जाएगी....नही...मैने उसे खुश करने को बुलाया था...तो खुश करना ही होगा...चलो...कुछ देर के लिए दिल और दिमाग़ मेघा पर लगाता हूँ...फिर पारूल की माँ के कातिल की खोज होगी...चलो...

और फिर मैं अपने आप को नॉर्मल करके जिम पहुँचा और वहाँ मेघा को देख कर ही मेरे माइंड की टेन्षन कुछ देर के लिए गायब हो गई...और दिल मे अजीब सी खुशी पैदा हो गई.....

पर फिर मैने किसी तरह अपने अरमानो को कंट्रोल किया और मेघा के साथ जिम करने लगा....

जिम मे पूरे टाइम मैने मेघा को सिर्फ़ फिज़िकल ट्रैनिंग ही दी....और कुछ भी नही किया...हालाकी उसके जिस्म की खुसबू मेरा माइंड हिला रही थी...पर जैसे-तैसे मैने खुद को रोके रखा...

मेघा(बाहर आते हुए)- तुम ठीक तो हो....

मैं- हुह...क्या...क्या कहा...

मेघा- मुझे लग रहा है कि आज तुम्हारा ध्यान कहीं और है...मुझ पर नही ...

मैं(नज़रे चुराते हुए)- नही...ऐसा कुछ नही ...असल मे मेरी नीद पूरी नही हुई...इसलिए थोसा सा...

मेघा- ओह्ह...अच्छा तो....मैं जाउ अब...

मैं(सिर हिला कर)- ह्म...पर कल ज़रूर आना....कुछ खास ट्रैनिंग होगी कल....

मेघा(सिर झुका कर)- ह्म...बाइ...

और फिर मेघा चुपचाप निकल गई और मैं भी अपने काम पर लग गया....

थोड़ी देर बाद मैं घर से निकल कर रॉनी से मिलने पहुँचा...जहा मेरे कुछ खास आदमी भी मौजूद थे....

रॉनी- हे बॉस...

मैं- हाई रॉनी...जल्दी बताओ क्या मिला तुम्हे....

रॉनी(लॅपटॉप दिखा कर)- ये देखो...इसमे तो कुछ खास नही दिख रहा....यहा किसी भी कमरे मे ऐसा कुछ नही जो अजीब लगे...

मैं- ह्म...वैसे भी कोई पागल ही होगा जो इतनी भीड़ मे कुछ भी ग़लत करेगा...

रॉनी- वैसे बॉस...ये जो औरत थी...आइ मीन पारूल की मोम...वो यहाँ किसी को जानती थी क्या....आपको छोड़ कर....

मैं- हाँ...कामिनी की फॅमिली...वो उन सब को जानती थी...पर कामिनी के घर से कोई आया ही नही था...सिर्फ़ दामिनी और काजल थी...वो भी जल्दी निकल गई...

रॉनी- वो नही हो सकती...क्योकि ये काम किसी औरत का नही ..मर्द का है...

मैं(चौंक कर)- ये कैसे बोल सकते हो....

रॉनी(सिगरेट दिखा कर)- वो...इसलिए...ये सिगरेट वही मिली...जहाँ लाश मिली थी...और प्रेमा जी सिगरेट पीती नही...तो ये कन्फर्म है कि ये किसी मर्द का काम है...क्योकि मैने वहाँ किसी औरत को सिगरेट पीते हुए नही देखा....

मैं- ह्म्म...हो सकता है...बट वहाँ मौजूद कई औरतें भी सिगरेट पीती है....शायद वहाँ पी हो...

रॉनी- मे बी...बट सीसीटीवी फुटेज से कुछ खास पता नही चला....

तभी मैने लॅपटॉप मे कुछ ऐसा देखा कि मैं चौंक गया...और मैने तुरंत वो सीन रीवाइंड कर दिया.....

रॉनी- क्या...इसमे क्या देखा आपने....

मैं- हाँ..कुछ नही...बस कुछ डाउट हुआ था....वैसे पीएम रिपोर्ट कब आ रही है...शायद कुछ पता चले....

रॉनी- अपने लोग वही है बॉस...जल्दी ही मिल जाएगी...

मैं- अच्छा...चलो मैं निकलता हूँ...पर उससे पहले तुम सब सुन लो कि तुम्हे अब करना क्या है...

रॉनी- जी बॉस...हम रेडी है...हुकुम करो...

फिर मैने सबको उनका नेक्स्ट टास्क समझा दिया.....

मैं- तो...सब समझ गये ना....हमारे पास टाइम कम है...और हाँ..अब हम वही मिलेगे....वैसे...तुम लोग एस के कॉंटॅक्ट मे हो कि नही...

रॉनी- हाँ...वो रोज कॉल करता है...पर 2-3 दिन से कोई पता नही...

मैं- ह्म...वेल..अब उसे परेशान मत करना....कॉल आए तो कुछ मत बताना...नही तो टेन्षन हो जाएगी उसे...और अब तुम सब निकलो....

फिर सारे आदमी वहाँ से निकल गये पर मैने रॉनी को रुकने का इशारा कर दिया...सबके जाने के बाद....

रॉनी- यस बॉस...कोई खास बात...

मैं- ह्म्म..रॉनी क्या कोई ऐसी टेक्निक जानते हो जिससे मास्क के साथ-साथ इंसान की आवाज़ भी बदल जाय...हाँ...

रॉनी- जी बॉस...जानता हूँ...ये मैं भी कर सकता हूँ...

मैं- ग्रेट...तो फिर ध्यान से सुनो...

और कुछ देर रॉनी से बात कर के मैं वहाँ से निकल आया......

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संजू के घर..........

मैं रॉनी से मिल कर घर जा ही रहा था कि रास्ते मे मुझे रजनी आंटी का कॉल आया...जो बहुत परेशान लग रही थी...और उन्होने मुझे अर्जेंट मे घर मिलने बुला लिया....

जैसे ही मैं संजू के घर पहुँचा तो रजनी आंटी मुझे जल्दी से उपर पूनम के रूम मे ले गई....वो बहुत परेशान दिख रही थी...शायद कोई खास बात थी...तभी तो वो मुझे अकेले मे ले गई....

मैं(रूम लॉक होते ही )- आंटी...आप ठीक तो है....

रजनी- हाँ...हम ठीक हूँ...बिल्कुल ठीक...

मैं- नही...आप झूठ बोल रही है...आप ठीक होती तो इस तरह मुझे यहाँ नही लाती...चलिए बोलिए...क्या बात हो गई....

रजनी(आगे बढ़ कर)- अंकित...पहले तुम बैठो...मुझे तुमसे कुछ खास बात करनी है...बहुत खास....

मैं- ओके...पर पहले आप शांत तो हो जाओ....देखो आपको कितना पसीना आ रहा है....आइए बैठिए...और अब आराम से बताइए...क्या हुआ...

रजनी- देखो बेटा...तुम जानते ही हो कि मैने तुममे और संजू मे कोई फ़र्क नही किया...दोनो को ही बराबर प्यार दिया है...

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे ...ये कोई कहने की बात है...आपने मुझ पर संजू से ज़्यादा प्यार लूटाया है...पर आप ये सब...आख़िर बात क्या है...

रजनी(सहमी हुई )- बेटा...मैं तुम दोनो मे से किसी को नही खोना चाहती...

मैं(रजनी का हाथ थाम कर)- आंटी....आप ऐसा क्यो बोल रही है...हम दोनो ही आपके साथ है....और हमेशा रहेगे ...ह्म..

रजनी(नम आखो से)- बेटा...पर अब मुझे डर लग रहा है कि कहीं तुम दोनो मे से किसी को कुछ...

और इतना बोल कर रजनी सुबकने लगी...तो मैने उन्हे संभाला और कड़क आवाज़ मे बोला....

मैं- अब आप वो बात बताइए...जिसने आपको इतना परेशान कर रखा है...

रजनी- बेटा...तुम...तुम संजू को माफ़ कर देना....प्ल्ज़...

मैं- माफ़....पर किस लिए....उसने क्या किया....

रजनी- बात ये है बेटा...कि..कि...

मैं- क्या आंटी...जल्दी बोलिए...संजू ने क्या किया....

रजनी- संजू तुम्हे धोखा दे रहा है....

इतना सुनते ही मेरी आँखे बड़ी हो गई...और मैने आंटी को पूरी बात बताने के लिए बोला....

रजनी- मैं जानती हूँ कि संजू ने तुमसे बोला है कि वो तुम्हारे साथ है...पर सच्चाई ये है कि संजू तुमसे झूठ बोल रहा है...और तुम्हारे दुश्मनो का साथ दे रहा है...

मैं(हैरानी से)- आपको ये सब कैसे पता....

रजनी- मैने उसे फ़ोन पर बोलते सुना है...वो तुम्हे फसा कर मारने की फिराक मे है....

मैं- क्या...संजू मुझे धोखा दे रहा है...मुझे मारेगा वो...मुझे. ..

रजनी- हाँ बेटा....और मैं नही चाहती कि मैं तुम दोनो मे से किसी को भी खो दूं...इसलिए तुम संजू को समझाओ और उसे माफ़ कर दो प्ल्ज़...

मैं(खड़ा हो कर)- आंटी...संजू कोई नादान बच्चा नही...जो उसे समझाऊ...पर अगर उसने मुझे धोखा दिया है...तो उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा....

रजनी(घबरा कर)- बेटा...प्ल्ज़...संजू को...

मैं(बीच मे)- बस आंटी...और कुछ नही सुनना मुझे....लगता है किस्मत हम दोनो मे से किसी 1 को ही जीने देगी....

रजनी(रोते हुए)- नही बेटा...ऐसा मत बोल....प्ल्ज़...ऐसा मत बोल...

मैं- आंटी...मेरा रास्ता छोड़िए.....और हाँ ..हम मे से किसी 1 की मौत की खबर का इंतज़ार कीजिए....बहुत जल्दी ही न्यूज़ मिलेगी....

और इतना बोल कर मैं वहाँ से निकल आया....पीछे आंटी रोते हुए फर्श पर बैठ गई....

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एक गाओं की सुनसान जगह पर...दोपहर के वक़्त.......

स इस गाओं मे किसी के बारे मे पूछताच्छ करते हुए एक जगह रेस्ट करने लगा....कि तभी किसी ने उसके सिर पर पीछे से बार किया और स बेहोश हो गया .....

फिर जब स को होश आया तो उसने अपने आपको एक चेयरे पर बँधा हुआ पाया....और आधी-खुली आँखो से सामने बैठे सक्श को देख कर उसको अपनी आँखो पर भरोशा नही हुआ......

स के सामने इस वक़्त आज़ाद मल्होत्रा बैठा हुआ था......

स (चौंक कर)- ये..ये तुम..तुम जिंदा हो....नही...तुम जिंदा नही हो सकते....ये नही हो सकता...

तभी रूम मे आवाज़ आई...

"" ये सच है गद्दार....ये जिंदा भी है और तन्दुरुस्त भी......""

स( चीख कर)- ये नही हो सकता....बिल्कुल नही हो सकता...

"" क्यो नही हो सकता...हाँ...""

स(सामने घूर कर)- क्योकि मैने ही इसे मारा था.....अपने हाथो से मारा था....हा....हाहाहा....मैने मारा था इसे...और मैं जिसे मारता हूँ उसे जिंदगी नसीब नही होती...कभी नही...कभी नही....

तभी रूम मे रोशनी फैल गई और सामने का नज़ारा देख कर स के होश उड़ गये.......

रूम मे रोशनी फैलते ही स के सामने बैठे सक्श ने अपने चेहरे से मास्क निकाल लिया.....

जो सक्श एक पल पहले आज़ाद नज़र आ रहा था...वो असल मे बहादुर था....आज़ाद का पुराना वफ़ादार....

स(गुस्से से चिल्ला कर) - तू...तेरी इतनी हिम्मत कि तू मुझसे चालबाजी करे...हाँ....मुझसे धोखा...

बहादुर(गुस्से से)- चुप कर धोखेबाज.....साला...खुद धोखा दे रहा था...और अब मुझे ही सुना रहा है...हाँ...

स(घूरता हुआ)- हुहम...आख़िर तूने ये सब क्यो किया...क्या मिला तुझे...

बहादुर- सच....और यही जानने के लिए मैं तड़प रहा था....असल मे मर रहा था....हर दिन, हर पल...बस यही सोच रहा था कि मुझे बस....बस एक बार अपने मालिक का पता चल जाए...और देख...आज मुझे सब सच पता चल गया....मेरे मालिक के बारे मे भी और...तेरे बारे मे भी....

स(ठहाका मार कर)- हाहहाहा....सच...हाँ...सच पता कर के भी तू क्या करेगा....तेरा मालिक तो गया....और अब उसका खानदान भी जायगा....और तू...तू कुछ नही कर पायगा...कुछ भी नही...

बहादुर- अच्छा....सच मे...तुझे क्या लगता है कि मैं चुप बैठुगा...हाँ...

स(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...नही...तू तो चुप नही रहेगा....पर तू करेगा क्या....अंकित से बोलेगा...हाँ...तो जा बोल दे...पर याद रखना....वो ये कभी नही मानेगा....कभी नही....

बहादुर- अच्छा...और वो क्यो....

स- क्योकि उसकी सोच मेरे कब्ज़े मे है...वो वही करेगा..जो मैं उससे करवाउन्गा.....बिल्कुल वही....

बहादुर- अगर ऐसा होता तो वो मुझे आज़ाद बना कर तेरे सामने नही भेजता....समझा...

स- ओह...तो तुम सोचते हो कि मैं तुम्हे अंकित से मिलने दूँगा....कभी नही...और रही बात अंकित के प्लान की...तो उसको यकीन दिलाने के लिए मेरे पास भी कई प्लान है....

बहादुर- चलो देखते है कि तू क्या करता है....पहले खुद तो बच के दिखा....

स- मुझे बचाने वाले यहाँ पहुँचते ही होगे....अब तू बचने की तैयारी कर...अगर बच सके तो बच के दिखा....

तभी रूम का गेट खुला और एक-एक करके 4 आदमियों को अंदर फेका गया...जो सभी बेहोश थे....

और तभी रूम मे एक सक्श अंदर आया और ज़ोर से चिल्लाया....

""तू इनके बाल पर ही उछल रहा था....ये ले....ये सब तो ख़त्म हो गये...अब तुझे कौन बचायगा.....हाँ..""

और जैसे ही वो सक्श स के सामने आया तो उसे देख कर स दंग रह गया.....

स की हालत इस समय ऐसी थी...जैसे वो एक ज़िंदा लाश बन गया हो....काटो तो खून नही...शायद यही हाल हो गया था उसका.....

तभी सामने खड़े सक्श ने गुस्से से दाँत पीसते हुए स की कनपटी पर एक मोटी लकड़ी से ज़ोर से हमला किया...जिससे स दुवारा बेहोश हो गया....और सामने खड़ा सक्श गुस्से मे स को थप्पड़ मारते हुए बड़बड़ाने लगा.....

"" मेरे बेटे को मारेगा....मेरे बेटे को....हााअ...""

ये सब देख कर बहादुर ने हाथ जोड़ कर उस साक्ष् को शांत रहने की रिक्वेस्ट की....

बहादुर- आप कृपया शांत हो जाइए...और अंकित बाबा के लिए इसे छोड़ दीजिए....इसे अपने किए की सज़ा मिलेगी...ज़रूर मिलेगी....पर अभी आप इसे छोड़ दीजिए...अंकित साब को अपना काम पूरा करने के लिए इसकी ज़रूरत है....प्ल्ज़....मान जाइए...शांत हो जाइए....

बहादुर की बात सुनकर वो सक्श शांत हुआ और गुस्से से भनभनाता हुआ रूम से निकल गया....

उसके जाते ही बहादुर ने अपने आदमियों को बुलाकर स का ध्यान रखने का बोला और वो भी बाहर निकल गया......

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दामिनी के घर.....

दामिनी ने जैसे ही गेट खोला तो सामने 4 लोग खड़े दिखे....जिन्हे देख कर दामिनी थोडा सहम गई..

दामिनी- क्क़..क्या है....

आदमी- आपको चुपचाप हमारे साथ चलना है...और हाँ...आपकी बेहन कामिनी को भी ....

दामिनी(गुस्से से)- ये क्या बकवास है....तुम लोग...रूको ..अभी बताती हूँ... कोई है....कोइइ....

आदमी(बीच मे)- कोई नही आयगा....हम पूरी तैयारी से आए है....

दामिन(चिल्ला कर)- आख़िर तुम लोग हो कौन और...और मुझे....

आदमी2(बीच मे)- कुछ बोलने से पहले ये देख लीजिए...

और इतना बोल कर उस आदमी ने अपना मोबाइल आगे कर दिया...जिसमे चल रहा वीडियो देख कर दामिनी के पसीने छूट गये....

दामिनी- ये सब कैसे....और तुम लोग आख़िर चाहते क्या हो...

आदमी2(मुस्कुरा कर)- चुपचाप हुमारा कहना मानिए....इसी मे सबकी भलाई है...ठीक है....

इसके बाद वो लोग दामिनी के साथ अंदर चले गये और गेट अंदर से बंद हो गया......

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अकरम के घर......

अकरम अपने रूम मे सादिया के साथ रॉंमाँस करने मे बिज़ी था कि तभी उसका मोबाइल बज उठा....

(कॉल पर)

अकरम- हाँ..हेलो...

सामने-&%&%&%&

अकरम- हाँ , अकरम ही बोल रहा हूँ....तुम कौन हो...

सामने- &%&%&%&%%%

अकरम(हैरानी से)-क्या....तुम सच बोल रहे हो ना....

सामने-&%&%&%&%%

अकरम(साँस ले कर)-ह्म...समझ गया....मैं पहुँच जाउन्गा....

और अकरम ने फ़ोन कट करके सादिया को कपड़े पहनने का बोला और फिर एक कॉल कर के रेडी हो गया......

अकरम(सबनम से)- मोम ...मैं एक काम से कुछ दिनो के लिए बाहर जा रहा हूँ....आप सब अपना ख्याल रखना ....

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सूमी के घर...............

सूमी के घर इस वक़्त सूमी ,उसकी बेटी और संजू मौजूद थे....और संजू किसी गहरी सोच मे डूबा हुआ था .....उसने अभी-अभी अपनी माँ रजनी से फ़ोन पर कुछ बात की...जिससे वो परेशान हो गया था....

सूमी- संजू...संजू...

संजू(चौंक कर)- हूँ....हाँ...क्या हुआ...हाँ..

सूमी- मुझे क्या हुआ ...अरे तुम बताओ कि तुम्हे क्या हुआ...कहाँ खोए हुए हो....और ये बताओ कि तुमने बुलाया किसे है....

संजू(खड़ा हो कर)- जल्दी जान जाओगी....वो लोग आते ही होंगे...

सूमी(खड़ी हो कर)- ओके...पर तुम इतने परेशान क्यो हो...क्या हुआ...

संजू- क्क़..कुछ नही...मैं बस ..पता नही...मेरा सिर दर्द हो रहा है....

सूमी(पास आ कर)- ओह्ह....बस इतनी सी बात...आओ मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूँ....

संजू(हाथ दिखा कर)- नही....अभी मुझे मालिश से ज़्यादा ज़रूरी काम निपटाने है ...तुम बस...1 कॉफी बना लाओ...

इसके बाद सूमी कॉफी लेने चली गई और संजू अपनी माँ की बातों के बारे मे सोचने लगा...जो थोड़ी देर पहले ही रजनी ने फ़ोन पर बोली थी..

संजू(मन मे)- मोम...अंकित मुझे मारे उसके पहले मैं कुछ ऐसा करूँगा कि आप को अपने बेटे पर नाज़ होगा....बस अब कुछ ही दिनो की बात है...फिर सब ठीक हो जायगा .....

थोड़ी देर बाद सूमी के घर संजू के आदमी कुछ लोगो को ले कर आ गये.....

इन लोगो मे रेणु,रिचा,आकृति, कामिनी, दनिनी और उनकी फॅमिली थी....और अभी तक उन सब की आँखो पर पट्टी बँधी हुई थी....

सब के सब काफ़ी गुस्से मे पूछ रहे थे कि हमें यहाँ क्यो लाए...कौन हो तुम...एट्सेटरा...

तभी संजू उनके पास पहुँचा और ज़ोर से चिल्लाया....

संजू- चुप...अब कोई भी बोला ना तो यही मार डालुगा...समझे...

संजू की जोरदार आवाज़ ने रूम मे सन्नाटा कर दिया पर उन सब के दिल और दिमाग़ मे खलबली मच गई....

संजू(अपने आदमी से)- ले जाओ इन्हे और चलने की तैयारी करो...

आदमी- पर सर...इन सबको सबसे छिपा कर...कैसे...

संजू(घूर कर)- अब ये भी मैं बताऊ....हाँ..जाओ...और याद रखना...कोई गड़बड़ हुई तो वो तुम्हे छोड़ेगा नही...जानते हो ना ...

आदमी(डरते हुए)- जी..जी सर...

और फिर वो आदमी सबको वहाँ से ले गये...और उनके जाते ही सूमी लपक कर संजू के पास आई और चिल्लाती हुई बोली...

सूमी- आख़िर ये सब चल क्या रहा है....

संजू(मुस्कुरा कर)- वेट जान...वेट...सब समझ आ जायगा...

सूमी(घूर कर)- अच्छा...पर इन सबको कहाँ भेज दिया....

संजू- ह्म...जहाँ तुझे भेजना है....

सूमी(हैरानी से)- क्या मतलब...??

संजू- मेरे वापिस आने का इंतज़ार करो....और हाँ ...तैयारी कर के रखना....

इतना बोल कर संजू घर से निकल गया और सूमी सोच मे पड़ गई कि आख़िर ये सब हो क्या रहा है.....पर सूमी को संजू पर भरोशा था...इसलिए वो अपनी बेटी के साथ तैयारी करने मे जुट गई....

 
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