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Guest
मैं प्रेमा की लाश देख कर घबराने लगा था...मुझे समझ ही नही आ रहा था कि क्या करूँ....
आज मेरी लाइफ मे अचानक से एक ऐसा हादसा हो गया था...जिसकी मैने ख्वाब मे भी कल्पना नही की थी....
वो औरत जो इस सहर मे किसी को जानती नही...जिसने कल रात ही मेरे घर मे कदम रखा...अचानक मारी गई...और लाश बन कर मेरे सामने पड़ी है...
मैं इस टाइम कुछ भी नही सोच पा रहा था...बस मुझे पारूल का मासूम चेहरा याद आ रहा था....
मैं(नम आँखो से)- ये सब कैसे हुआ...
आकाश(मेरे कंधे पर हाथ रख कर)- अब ये तो पोलीस ही पता लगा सकती है बेटा.....
मैं- पोलीस....नही...पोलीस नही...पोलीस आयगी तो पारूल...नही...उसे पता नही चलना चाहिए....वो सह नही पायगी...नही...पोलीस नही...
आकाश- पर पोलीस को तो बुलाना ही होगा बेटा...ये मर्डर केस है...और फिर ये लाश...
मैं(बीच मे)- जानता हूँ...पर अभी नही...अभी कोई कुछ नही बोलेगा....और पारूल से तो बिल्कुल नही...मैं करता हूँ कुछ...अभी चलो यहाँ से...और चुप ही रहना....ओके ...
फिर मैं सबको वहाँ से ले कर आ गया और उन्हे चुप रहने की हिदायत दे दी...
थोड़ी देर बाद जब पारूल रेडी हो कर नीचे आई तो मैने उसे रक्षा के साथ जाने का बोल दिया...और ये भी बोल दिया कि उसकी माँ ज़रूरी काम से गाओं चली गई....कल तक आ जाएगी...
पारूल की हैरानी तो हुई...पर वो मेरी बात मान कर चली गई.....
पारूल के जाते ही मैने कुछ कॉल्स किए और फिर पारूल का चेहरा याद कर के मेरी आँखो मे गुस्सा खून बन कर निकलने लगा....
मैं- पारूल....मुझे माफ़ करना बेटा....पर तेरे लिए यही सही था...और हाँ....मैं तेरी माँ के कातिल को छोड़ूँगा नही....ऐसी मौत दूँगा कि मौत भी काँप उठेगी...हाँ......
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एक सुनसान जगह पर......
संजू आगे-आगे भाग रहा था....और अंकित उसका पीछा कर रहा था.....
अंकित- रुक साले.....साले धोखे बाज....मैं तुझे जिंदा नही छोड़ूँगा....रुक साले.....
अचानक संजू को ठोकर लगी और वो ज़मीन पर गुलाटी मार कर गिर गया...तब तक अंकित उनके पास पहुँच गया और संजू पर गन तान दी....
संजू- एम्म...मुझे...म्म्मारआ...माफ़ कर दे ...मुझे ...
अंकित(बीच मे)- मैने तुझ पर भरोशा किया था कुत्ते...और तूने ये सिला दिया...हाअ...
संजू- आ..अंकित..म्म...मेरी बात...मेरी बात सुन...माफ़ कर दे...माफ़...
अंकित- नही...धोखेबाज को माफ़ नही...सॉफ किया जाता है....
संजू- नही अंकित...माफ़ कर दे..प्ल्ज़ माफ़ कर दे....
अंकित- माफी उपर जा कर मागञा....साले धोखेबाज.....
संजू- अंकित..नही..न्न्नाहिी...
और अंकित 3 फिरे करता है और एक जोरदार चीख गूँज उठती है....
""न्न्3ीचनणन्नाआआहहिईीईई......""
और एक जोरदार चीख के साथ रजनी हड़बड़ा कर जाग गई और बेड पर बैठ कर जोरों से सासे लेने लगी....
रजनी की साँसे पूरे रूम मे सॉफ सुनाई दे रही थी...और उसका तेज़ी से धड़कता दिल उसके सीने मे खलबली मचा रहा था...और उसका पूरा चेहरा पसीने से तर-बतर हो चुका था.......
रजनी(मन मे)- ये कैसा सपना था...नही...ऐसा तो कभी हो ही नही सकता....अंकित और संजू तो एक-दूसरे को भाई से बढ़ कर मानते है...फिर उनके बीच ऐसा कुछ....न्हिईीई....ये सिर्फ़ एक सपना है...सिर्फ़ सपना.....
पर थोड़ी देर शांत रहने के बाद राजनू को कुछ याद आया और वो फिर से सोच मे पड़ गई ......
रजनी(मन मे)- पर अंकित....वो धोकेबाजों को कभी माफ़ नही करता...भले ही वो कोई भी हो...कितना भी खास.....इसका मतलब....संजू को भी....हे भगवान....इससे पहले कि अंकित को संजू के इरादे किसी और से पता चले...मुझे खुद अंकित से बात करनी होगी...
वरना मेरा सपना कही हक़ीक़त मे ना बदल जाय ...नही-नही...मैं ऐसा नही होने दूगी...कभी नही....
रजनी आख़िरी शब्द उसके मुँह से ज़ोर से निकल गये...जिसे सुनकर संजू के डॅड बाथरूम से बाहर आ गये....
प्रमोद- क्या हुआ ....तुम चिल्लाई क्यो....??
रजनी(सकपका कर)- हा...नही...कुछ नही...मैं तो बस...वो...एक सपना....
प्रमोद(बीच मे)- क्या...सपना....हाहाहा....तुम भी ना...सपने से डर गई....ह्म..चलो जाओ और फ्रेश हो जाओ....पूरा चेहरा पसीने से लत्पथ हो रहा है...उठो जाओ...
फिर रजनी ने अपने आप को संभाला और बाथरूम चली गई और मान ही मान सोचने लगी कि अब आगे उसे क्या करना है......
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आज मेरी लाइफ मे अचानक से एक ऐसा हादसा हो गया था...जिसकी मैने ख्वाब मे भी कल्पना नही की थी....
वो औरत जो इस सहर मे किसी को जानती नही...जिसने कल रात ही मेरे घर मे कदम रखा...अचानक मारी गई...और लाश बन कर मेरे सामने पड़ी है...
मैं इस टाइम कुछ भी नही सोच पा रहा था...बस मुझे पारूल का मासूम चेहरा याद आ रहा था....
मैं(नम आँखो से)- ये सब कैसे हुआ...
आकाश(मेरे कंधे पर हाथ रख कर)- अब ये तो पोलीस ही पता लगा सकती है बेटा.....
मैं- पोलीस....नही...पोलीस नही...पोलीस आयगी तो पारूल...नही...उसे पता नही चलना चाहिए....वो सह नही पायगी...नही...पोलीस नही...
आकाश- पर पोलीस को तो बुलाना ही होगा बेटा...ये मर्डर केस है...और फिर ये लाश...
मैं(बीच मे)- जानता हूँ...पर अभी नही...अभी कोई कुछ नही बोलेगा....और पारूल से तो बिल्कुल नही...मैं करता हूँ कुछ...अभी चलो यहाँ से...और चुप ही रहना....ओके ...
फिर मैं सबको वहाँ से ले कर आ गया और उन्हे चुप रहने की हिदायत दे दी...
थोड़ी देर बाद जब पारूल रेडी हो कर नीचे आई तो मैने उसे रक्षा के साथ जाने का बोल दिया...और ये भी बोल दिया कि उसकी माँ ज़रूरी काम से गाओं चली गई....कल तक आ जाएगी...
पारूल की हैरानी तो हुई...पर वो मेरी बात मान कर चली गई.....
पारूल के जाते ही मैने कुछ कॉल्स किए और फिर पारूल का चेहरा याद कर के मेरी आँखो मे गुस्सा खून बन कर निकलने लगा....
मैं- पारूल....मुझे माफ़ करना बेटा....पर तेरे लिए यही सही था...और हाँ....मैं तेरी माँ के कातिल को छोड़ूँगा नही....ऐसी मौत दूँगा कि मौत भी काँप उठेगी...हाँ......
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एक सुनसान जगह पर......
संजू आगे-आगे भाग रहा था....और अंकित उसका पीछा कर रहा था.....
अंकित- रुक साले.....साले धोखे बाज....मैं तुझे जिंदा नही छोड़ूँगा....रुक साले.....
अचानक संजू को ठोकर लगी और वो ज़मीन पर गुलाटी मार कर गिर गया...तब तक अंकित उनके पास पहुँच गया और संजू पर गन तान दी....
संजू- एम्म...मुझे...म्म्मारआ...माफ़ कर दे ...मुझे ...
अंकित(बीच मे)- मैने तुझ पर भरोशा किया था कुत्ते...और तूने ये सिला दिया...हाअ...
संजू- आ..अंकित..म्म...मेरी बात...मेरी बात सुन...माफ़ कर दे...माफ़...
अंकित- नही...धोखेबाज को माफ़ नही...सॉफ किया जाता है....
संजू- नही अंकित...माफ़ कर दे..प्ल्ज़ माफ़ कर दे....
अंकित- माफी उपर जा कर मागञा....साले धोखेबाज.....
संजू- अंकित..नही..न्न्नाहिी...
और अंकित 3 फिरे करता है और एक जोरदार चीख गूँज उठती है....
""न्न्3ीचनणन्नाआआहहिईीईई......""
और एक जोरदार चीख के साथ रजनी हड़बड़ा कर जाग गई और बेड पर बैठ कर जोरों से सासे लेने लगी....
रजनी की साँसे पूरे रूम मे सॉफ सुनाई दे रही थी...और उसका तेज़ी से धड़कता दिल उसके सीने मे खलबली मचा रहा था...और उसका पूरा चेहरा पसीने से तर-बतर हो चुका था.......
रजनी(मन मे)- ये कैसा सपना था...नही...ऐसा तो कभी हो ही नही सकता....अंकित और संजू तो एक-दूसरे को भाई से बढ़ कर मानते है...फिर उनके बीच ऐसा कुछ....न्हिईीई....ये सिर्फ़ एक सपना है...सिर्फ़ सपना.....
पर थोड़ी देर शांत रहने के बाद राजनू को कुछ याद आया और वो फिर से सोच मे पड़ गई ......
रजनी(मन मे)- पर अंकित....वो धोकेबाजों को कभी माफ़ नही करता...भले ही वो कोई भी हो...कितना भी खास.....इसका मतलब....संजू को भी....हे भगवान....इससे पहले कि अंकित को संजू के इरादे किसी और से पता चले...मुझे खुद अंकित से बात करनी होगी...
वरना मेरा सपना कही हक़ीक़त मे ना बदल जाय ...नही-नही...मैं ऐसा नही होने दूगी...कभी नही....
रजनी आख़िरी शब्द उसके मुँह से ज़ोर से निकल गये...जिसे सुनकर संजू के डॅड बाथरूम से बाहर आ गये....
प्रमोद- क्या हुआ ....तुम चिल्लाई क्यो....??
रजनी(सकपका कर)- हा...नही...कुछ नही...मैं तो बस...वो...एक सपना....
प्रमोद(बीच मे)- क्या...सपना....हाहाहा....तुम भी ना...सपने से डर गई....ह्म..चलो जाओ और फ्रेश हो जाओ....पूरा चेहरा पसीने से लत्पथ हो रहा है...उठो जाओ...
फिर रजनी ने अपने आप को संभाला और बाथरूम चली गई और मान ही मान सोचने लगी कि अब आगे उसे क्या करना है......
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