इसके बाद अगले दो दिन तक कुछ खास नही हुआ....बस मैं बारी-बारी संजू, सोनू और अकरम के घर आता-जाता रहा.....और उनको संभालने की कोसिस करता रहा.....
2 दिन बाद सभी घरों का महॉल पहले से बेहतर था...पर अभी भी उनका दर्द पूरी तरह से मिटा नही था....
इन दिनो मे मैने एक और बात नोट की...वो थी जूही का बदला व्यवहार.....
वो जूही जो मुझे देखते ही खुश हो जाती थी....अब वो मुझे देख कर नज़रें चुराने लगी....
मैं जूही के पास बैठता तो मुझसे ऐसा लगता कि जैसे उसे मेरा पास मे रहना पसंद नही आ रहा....
पहले तो मुझे ये सब बड़ा अजीब लगा....मैने जूही से पूछना भी चाहा...पर फिर ये सोच कर चुप रह गया कि शायद जूही अपने डॅड की मौत से काफ़ी ज़्यादा डिस्टर्ब है...और इस सदमे से बाहर आने के लिए उसे कुछ टाइम चाहिए.....
यही सोचकर मैने डिसाइड कर लिया कि जूही को अभी अकेला छोड़ना ही बेहतर होगा....
वही दूसरी तरफ अनु इस दुख भरी घड़ी मे टूट सी गई थी....काफ़ी मुस्किल से संभाल पाई बेचारी....
पर एक बात अच्छी थी...मेरे साथ ने अनु को उस दर्द से जल्दी ही बाहर निकाल दिया ...और अब वो खुद आगे आ कर अपनी माँ और बेहन को संभाल रही थी....
पर इन दोनो से बुरा हाल था सोनू और सोनम का.....
हालाकी दोनो ही समझदार थे...फिर भी माँ तो माँ होती है...और उसकी अचानक से इन परिस्थितियों मे मौत.....
सुषमा की मौत ने दोनो भाई-बहनो को अंदर तक झकझोर दिया था.....उपर से उनके डॅड भी लापता थे....
सुषमा की मौत के साथ ही ये बात सबके सामने आ गई थी कि सुषमा का पति लापता है....और आनन-फानन मे दामिनी ने पोलीस मे कंप्लेन भी करवा दी....
दामिनी के इस कदम ने सोनू के साथ-साथ मुझे भी झटका दे दिया...क्योकि मैं जानता था कि सोनू के डॅड का वसीम ने ही किडनॅप करवाया था औट वसीम के मरने के बाद उसके आदमी सोनू के डॅड के साथ कुछ भी कर सकते है...और उपर से ये पोलीस कंप्लेन...
अगर पोलीस आक्टिव हुई तो सोनू के बाप का जिंदा बचना मुस्किल हो जायगा ....
इसलिए सबसे पहले मैने आलोक को कह कर पोलीस को रोका और फिर अपने आदमी लगा दिए सोनू के बाप को ढूढ़ने.....
2 दिन बाद मैं पारूल को साथ लेकर वापिस अपने घर पहुँचा तो सामने का नज़ारा देख कर हैरान रह गया.....
मेरे सामने डॅड और सुजाता ठहाके मारते हुए बातों मे मसगूल थे...
और दोनो इतने करीब बैठे थे कि दोनो के जिस्म के बीच से हवा भी नही जा रही थी...
उनको ऐसी हालत मे देख कर पारूल ने तो शर्म से आँखे झुका ली...पर मेरी आँखो मे गुस्सा छलक आया...जो डॅड को भी दिख गया और उन्होने खड़े हो कर हमे टोका.....
आकाश- अरे अंकित...आओ बेटा ...वहाँ क्यो खड़े हो गये...
मैं(अपने गुस्से को छिपा कर)- कुछ नही डॅड..बस आ ही रहे है....
फिर मैने पारूल को उसके रूम मे जाने को बोला और खुद डॅड के पास आ गया....
आकाश- वो अकरम कैसा है अब...और उसकी फॅमिली....
मैं- ठीक...ठीक है...पर अभी पूरी तरह से नही....
फिर मैं डॅड से नज़रें चुरा कर इधर-उधर देखना शुरू किया तो डॅड ने फिर से टोक दिया......
आकाश- क्या हुआ...क्या देख रहे हो...
मैं(झटके से)- नही...कुछ नही...वो...सविता आई....कहाँ है वो...दिख नही रही.....
मेरी बात सुनकर डॅड कुछ बोलते उससे पहले ही सुजाता चहक उठी.....
सुजाता- वो सविता तो बाहर गई है....
मैं(सुजाता को देख कर)- बाहर....ह्म...ओके..
सुजाता(बड़े प्यार से)- अरे...मैं कॉफी लाती हू ना अपने बेटे को....रूको मैं लाती हूँ....
सुजाता अपनी बात बोल कर बिजली की तरह किचिन मे चली गई.....जो मुझे बड़ा अटपटा लगा ....
मैं(मन मे)- कॉफी का तो मैने बोला ही नही....कुछ ज़्यादा ही प्यार दिखा रही है साली..माजरा क्या है....
सोनू , संजू और अकरम के घर का महॉल तो उनके अपनो की मौत की वजह से बुरा था......
पर रिचा के घर का हाल इन तीनो के घर से बदतर थी.....
उसकी वजह थी वसीम के साथ हुआ हादसा...और उसके मुँह से निकली सच्चाई...जिसमे रिचा का नाम भी शामिल था.....
उस दिन से आज तक रिचा की बेटी रिया ने अपनी मोम से एक बार भी ठीक से बात नही की थी....दोनो एक ही घर मे अज्नबियो की तरह रह रही थी....
दोनो माँ-बेटी का जब भी सामना होता था उसी वक़्त रिया के मुँह से बस एक ही बात निकलती थी....कि आख़िर सच क्या है....उसकी माँ का अतीत क्या है...
रिचा ने बार-बार कोसिस की ...कि रिया किसी तरह मान जाए....पर रिया भी ज़िद पर आडी थी.....और उसने सॉफ-सॉफ बोल दिया था कि या तो रिचा सच्चाई बताए...वरना उससे बात ना करे....
इस बीच रिचा बॉस2 को लेकर भी बहुत परेशान थी....वो वसीम की मौत के बाद से बॉस2 को काल और मेसेज कर रही थी पर बॉस2 ने एक बार भी रिप्लाइ नही दिया था.....
आज फिर से रिचा अपने रूम मे बैठी बॉस2 को फ़ोन पर फ़ोन लगाए जा रही थी.....पर सामने से कोई रेस्पोन्स ना मिलने से वह बौखला उठी और फ़ोन को बेड पर फेक दिया.....
रिचा(झल्ला कर)- साला हरामी....खुद का काम पड़ता था तो रिचा डार्लिंग ...और मेरी बारी आई तो....कमीना साला.....
सही कहते है लोग...मुसीबत मे परच्छाई भी साथ छोड़ देती है....
एक तो साला इस अंकित की वजह से मेरा पूरा खेल बिगड़ गया और उपर से ये कमीना.....माना कि मुस्किल घड़ी है...पर कम से कम एक बार तो बात कर ले....अरे बात नही तो मेसेज ही कर देता....साला हरामी....
रिचा इतनी परेशान थी कि उसे पता ही नही चला की रिया उसके रूम मे आ चुकी है.....वो तो बौखलाहट मे बॉस2 को गालियाँ बक रही थी ....और रिया उसके पास खड़ी पूरी बात सुन रही थी....
अपनी बात बोलते-बोलते जब रिया ने गर्दन घुमाई तो रिया को सामने देख कर उसकी सिट्टी-पिटी गुम हो गई...
रिया को देखकर रिचा के चेहरे का रंग उड़ गया और रिया का चेहरा गुस्से से लाल पड़ने लगा....
रिचा(हकलाते हुए)- र्र..रिया...तू..तू यहाँ.....
रिया(गुस्से से देख कर)- ह्म्म...मैं यहाँ....अब बोलो...अब भी यही कहोगी कि आप ईनोसेंट है..आपका कुछ लेना-देना नही इन सब वारदातों से...आपका कोई अतीत नही...हाँ....
रिया की आवाज़ बात पूरी करते-करते तेज होती गई और रिया की बातों को सुनकर रिचा का मुँह सूखने लगा.....
रिचा- बेटा...मैं...सच कहती हूँ...मेरा इससे कोई.....
रिया(गुस्से मे चिल्ला कर)- बस....बस कीजिए....मुझे आपका झूठ नही सुनना...मुझे सच जानना है सच....
रिया की कड़क आवाज़ सुनकर रिचा कुछ नही बोली बस आँखो से आँसू बहाने लगी...जिसे देख कर रिया और भी ज़्यादा गुस्से मे आ गई....
रिया(चिल्ला कर)- बंद कीजिए ये मगरमच्छ के आँसू ...इनका कोई असर नही होने वाला....समझी...
रिया की बात सुनकर रिचा खामोश रही....और उसकी आँखो से बहने वाले आँसू तेज हो गये.....
रिया थोड़ी देर तक रिचा को देखती रही और गुस्से से भरी हुई रूम मे इधर-उधर होती रही ....
और कुछ देर बाद वो रिचा के सामने रुकी और उसके सामने 2 उंगलिया दिखा कर बोली...
रिया- 2 दिन...सिर्फ़ 2 दिन है आपके पास....या तो आप सच बोलेगी....वरना...वरना मैं....
रिया बोलते-बोलते अपने दाँत पीसने लगी...तभी मौका देख कर रिचा रोती हुई बोल पड़ी....
जबसे रेणु के पास वसीम का कॉल आया था तब से रेणु की परेशानियाँ बढ़ गई थी ....
पहले तो वसीम का फ़ोन आया....और वो कुछ बोला नही....जबकि उससे पहले ऐसा कभी नही हुआ था कि वसीम कॉल कर के बात ना करे.....
और फिर वसीम की मौत की खबर ने तो उसे हिला ही डाला था....तभी से उसका बुरा हाल था...
वो सोच-सोच कर परेशान हो गई थी कि अगर वसीम मर गया था तो कॉल किसने किया...और क्यो...
क्या किसी को इस बात की भनक लग गई है कि मैं वसीम के साथ काम कर रही हूँ....उसके साथ....नही....ऐसा कैसे हो सकता है....मैने तो कोई प्रूफ नही छोड़ा और किसी को बोला भी नही....
हो सकता है कि ग़लती से कॉल लगा हो...पर वसीम के मरने के बाद किसने किया...पोलीस...??....ये वसीम का बेटा अकरम....???
कही...कही ये अंकित ने तो...नही....वो नही हो सकता....वो होता तो अब तक मेरी नाक मे दम कर देता....तो फिर कौन हो सकता है....कौन...???
रेणु परेशानी मे दारू के पेग लगते हुए सिगरेट पर सिगरेट पिए जा रही थी....
तभी रूम का गेट खुला और सामने रघु और एक सक्श खड़ा था.....सामने खड़े सक्श को देख कर रेणु ने सिगरेट फेकि और दौड़ के उसके गले लग गई....
रेणु(सुबक्ते हुए)- डॅड....अच्छा हुआ आप आ गये....मैं..मैं...
रेणु के डॅड ने रेणु को चुप कराया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोला....
""बस बेटी...बस....अब घबराने की ज़रूरत नही...मैं आ गया हूँ ना....रिलॅक्स...."'
रेणु(गले लगी हुई रोने लगी)- मैं बहुत डर गई थी डॅड....बहुत ज़्यादा...मुझे लगा कि जैसे सब ख़त्म होने वाला है....
""बेटा....चुप हो जा...बिल्कुल चुप...और मुझे बता कि आख़िर हुआ क्या...ह्म...""
फिर रेणु ने बैठ कर अपने डॅड को वसीम से मिलने से लेकर अब तक की सारी बातें बता दी...और साथ मे फ़ोन वाली बात भी...
पूरी बात सुनकर वो सक्श खड़ा हुआ और रेणु के सिर पर प्यार से हाथ फेर कर बोला....
""बेटी...तू टेन्षन मत ले....मैं आ गया हूँ ना...कुछ बुरा नही होगा....""
रेणु- पर डॅड...अगर अंकित को ये बात पता लग गई तो...
""डोंट वरी.....लगता है टाइम आ गया...लोगो को बताने का कि मदन गुप्ता वापिस आ गया है....""
रेणु- पर डॅड...अभी तक आज़ाद का कुछ पता नही...
मदन- तो पता चल जायगा....उसका बेटा तो है...और पोता भी....आज़ाद भी मिल जायगा....
रेणु- पर आप करने क्या वाले हो...
मदन- जो भी करूँगा...खास ही होगा...आख़िर लोगो को भी पता चलना चाहिए...कि मदन गुप्ता जितनी सिद्दत से दोस्ती निभाता है...उतनी ही सिद्दत से दुश्मनी भी निभाता है.....तू फ़िक्र मत कर...
रेणु अपने डॅड की बात सुनकर नॉर्मल हुई और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई...
तब तक रघु ने मदन के लिए पेग बनाया और मदन एक साँस मे पेग गटक कर दहाड़ उठा....
मदन- आअहह...आज से आज़ाद की उल्टी गिनती शुरू.....हाहाहा....
और मदन के साथ-साथ रेणु और रघु भी हँसने लगे...जबकि छिप कर खड़ी हुई आकृति की आँखो मे ये सब सुन कर आँसू आ गये......
मैं कॉफी पीने के बाद डॅड से बात करने का वेट ही कर रहा था कि तभी संजू का फ़ोन आ गया....
वैसे तो मैं संजू से गुस्सा था...पर विनोद की मौत के बाद मैने गुस्से को साइड मे रख कर उससे बात करनी शुरू कर दी थी....
संजू ने कॉल कर के मुझे बताया कि आज स्कूल पहुँचना ज़रूरी है....बोर्ड एग्ज़ॅम के सिलसिले मे सबको बुलाया गया है....
तो थोड़ी देर बाद मैं पारूल के साथ स्कूल निकल गया....वहाँ संजू के साथ अनु और रक्षा भी पहुँच गई थी....
स्कूल का काम निपटा कर जब मैं संजू के साथ बाहर खड़ा था तो मेरे फ़ोन पर एक कॉल आया ...एक अननोन नंबर से...
( कॉल पर )
मैं- हेलो....
सामने- हेलो राजा...
मैं- क्या...कौन राजा...
सामने - अरे मेरे अंकित राजा और कौन....
आवाज़ सुनकर ये तो समझ आ गया कि सामने कोई औरत थी...पर थी कौन...??
मैं(गुस्से से)- हाँ अंकित बोल रहा हूँ...तुम कौन...
सामने- मैं कौन ये बताना ज़रूरी नही....बस मेरी बात मान..वो ज़रूरी है...
मैं(हैरानी से)- बात..कौन सी बात..और मैं क्यो मनु...
सामने(उँची आवाज़ मे)- माननी तो पड़ेगी...वरना लोगो को पता चल जायगा कि पिछले दिनो तूने क्या गुल खिलाया था.....
ये बात सुनकर मैं चौंक गया...मैं सोचने लगा कि पक्का ये वसीम की मौत की बात कर रही है...पर इसे कैसे पता...और ये है कौन...ये बात तो सिर्फ़ रिचा जानती है...पर ये रिचा तो है नही...तो क्या रिचा ने किसी को....लगता तो नही...पर उस कमीनी का क्या भरोसा....
सामने- क्या राजा...कहाँ खो गया...
मैं- कहीं नही...तुम हो कौन..और चाहती क्या हो....
सामने- ह्म्म..ये की समझदारी की बात...
मैं(गुस्से से)- जल्दी बोलो...क्या चाहती हो...
सामने- पहले मिल...फिर बताती हूँ....
मैने सोचा कि इसके बारे मे जानने के लिए इससे मिलना तो पड़ेगा ही...और कोई रास्ता नही....
मैं- ठीक है...बताओ कब मिलना है...
सामने- अभी...5 मिनट मे....
मैं(झल्ला कर)- 5 मिनट मे...क्या बकवास है...मैं अभी स्कूल मे हूँ...5 मिनट मे कैसे ...
सामने(बीच मे)- जानती हूँ तू कहाँ है...तभी तो बोला कि 5 मिनट मे...
मैं- मतलब....तुम..तुम स्कूल मे हो...
सामने- हाँ...ठीक समझा....
मैं(यहा-वहाँ देख कर)- कहा...मतलब कहाँ मिलना है...
सामने- 5 मिनट मे बिल्डिंग के लास्ट रूम मे आ जाओ....मैं वही मिलूगी....और हाँ...अकेले आना....वरना तेरे लिए ठीक नही होगा...समझे...
मैं- ठीक है...मैं अकेला ही आउगा...
सामने- आजा फिर...
और इतना बोलकर उसने कॉल कट कर दिया....और मैने संजू को पारूल को घर छोड़ने का बोलकर उस रूम की तरफ चल पड़ा.....
मैं(चलते हुए)- एक मुसीबत दूर नही होती और दूसरी टपक पड़ती है...देखा हूँ कौन है साली.....??????
फिर मैने कॉल कट की और आजू-बाजू देखते हुए उसके बताए रूम की तरफ बढ़ने लगा...असल मे, मैं नही चाहता था कि कोई मुझे वहाँ जाते हुए देख सके....इसलिए मैं सबकी नज़रों से छिप्त्ते-छिपाते उस रूम तक पहुँच गया....
रूम तक तो आ गया....पर क्या इस तरह अकेले जाना ठीक होगा....वो भी एक अंजान सक्श के कहने पर....
ये बिचार काफ़ी देर तक मेरे माइंड मे चलता रहा....और फाइनली मैने सोचा कि जो होगा देखा जायगा....और कोई रास्ता भी तो नही....देखे तो वो क्या जानती है मेरे बारे मे...
और फिर मैने एक लंबी साँस ली और इधर-उधर देख कर झटके से अंदर घुस गया और जाते ही गेट को वापिस लॉक किया....
मैं- फफफूओ....अच्छा हुआ किसी ने देखा नही.....
तभी मेरे पीछे से एक मीठी सी आवाज़ आई...जिसने मुझे चौंकने पर मजबूर कर दिया....
""मैने तो देख लिया....ह्म्म...""
आवाज़ सुनकर तो मैं चौंका ही , पर जैसे ही मैने पलट कर उसे देखा तो मेरी हैरानी का ठिकाना नही रहा....
मैं सोचने लगा कि जिससे मेरी बात हुई थी...वो तो एक औरत की आवाज़ थी...पर यहाँ तो एमएलए की लड़की खड़ी है....सेतु...
मैं(हैरानी से)- तुम...तुम यहाँ क्या कर रही हो....
सेतु(मुस्कुरा कर)- वाह....मैने ही आपको बुलाया और मुझसे ही पूछते हो कि मैं यहाँ कैसे....
मैं(गुस्से से सिर हिला कर)- नही...ये सच नही....बोलो कौन है वो जिसने मुझे कॉल किया था..क्या वो तुम्हारे साथ थी...हाँ...
सेतु- नही...मैने ही कॉल किया था..कसम से...
सेतु ने मेरा गुस्सा देख कर अपने सिर पर हाथ रखा और कसम खाने लगी....
मैं(सेतु को घूर कर)- वो एक औरत की आवाज़ थी....तुम्हारी नही...समझी...
इतना सुनते ही सेतु खिलखिला कर हंस पड़ी ...पर उसकी हँसी मेरे गुस्से को और ज़्यादा बढ़ा रही थी...
जब सेतु ने देखा कि मेरा चेहरा गुस्से से लाल होने लगा है तो उसकी हसी रुक गई और उसकी जगह चेहरे पर डर के भाव उभर आए....
सेतु(डरते हुए)- म्म..मैं सच बोल रही हूँ...आपको..मैने ही....
मैं(बीच मे, चिल्ला कर)- बस...और नाटक नही....सच बोल...कौन था तेरे साथ...बोल...
मैने आगे बढ़ कर सेटी का सिर पकड़ कर हिला दिया...जिससे वो और ज़्यादा डर गई....
सेतु- आआ...मैने ही बुलाया था....ये..ये देखो...मेरे फ़ोन मे एक अप्प है आवाज़ बदलने का...बस मैने वही ...
सेतु मेरा गुस्सा देख कर इतनी डर गई कि उसने एक साँस मे जल्दी -जल्दी पूरी बात बोल दी...
उसकी बात सुनते ही मैने उसका मोबाइल छीना और वो एप देखने लगा...और एप देख कर तो मुझे और ज़्यादा गुस्सा आ गया और मैने गुस्से मे फ़ोन पटक दिया....
मैं(चिल्ला कर)- तू अपने आप को समझती क्या है....क्या..क्या मतलब था इसका...मुझे डराना चाहती थी...हाँ...आख़िर...आख़िर ये सब क्यो किया...क्यो...
सेतु(डरते हुए)- वो मैं...मैने...वो...
मैं- क्या मैं वो-मैं वो....सॉफ-सॉफ बोल...क्यो किया ये सब...हाँ...
मैं गुस्से मे आगे बढ़ता गया और सेतु पीछे हट ती गई....लेकिन फिर उसके पीछे टेबल आ गई और वो थम गई...
मैं(ज़ोर से)- अब बता भी...क्या ज़रूरत पड़ गई ये सब करने की....हाअ...
सेतु(डरती हुई, धीरे से)- मैं बस...आपके साथ....वो...मस्ती...
मैं(अपने कान को हाथ लगा कर)- क्या...क्या बोला...ज़ोर से बोल...
सेतु(जल्दी मे)- आपके साथ मस्ती करनी थी...
मैं(घूर कर)- मस्ती...हाँ..मस्ती...बहुत मस्ती सूझ रही है...चल आज तेरी मस्ती निकालता हूँ....चल आजा...
सेतु- नही..अब नही करनी....
मैं(गुस्से से)- अब तू क्या...तेरी माँ भी करेगी...आज तेरी सारी मस्ती निकालता हूँ....बहुत गर्मी है ना....आज ऐसा ठंडा करूँगा कि साली मेरे नाम से भी काँपेगी....
और फिर मैने गुस्से से सेतु को टेबल पर पटका और उसकी कमर को खींच कर उसके नंगे बूब्स को मसल्ने लगा....
मेरे हाथो की मजबूती से सेतु की चीख निकालने लगी पर मैने उस पर कोई तरस नही खाया और ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स दबाने लगा....
मैं- अब माँ याद आई ना...रुक...थोड़ी देर मे बाप भी याद आयगा...
और फिर रूम मे सेतु की चीखे गूंजने लगी....और कुछ देर बाद ही उसकी चीखे सिसकारियों मे तब्दील हो गई...
और उसकी वजह थी मेरे हाथो की पकड़ ढीली पड़ जाना...
सेतु को चीखता देख मुझे उस पर तरस आ गया और उसके बूब्स की गर्मी ने मेरे गुस्से को भी कम कर दिया....जिससे मैं अब प्यार से उसके बूब्स मसल रहा था और वो मस्ती मे सिसक रही थी...
सेतु- आआहह....ऐसे ही करो ना...आपने तो...एयेए...जान ही ले ली थी...
मैं(सेतु को घूर कर)- मेरा गुस्सा अभी उतरा नही....और जो तूने किया है...उसकी सज़ा तो मिल कर ही रहेगी....
और इतना बोल कर मैने अपने लंड को आज़ाद किया और सेतु के मुँह मे डाल दिया....