सरद पार्क से भाग कर सीधा अपने घर पहुँचा ....उसने शूटर को रास्ते मे ड्रॉप कर दिया था....
अपने घर आते ही वो अपने रूम मे क़ैद हो गया...वो बहुत ही परेशान और डरा हुआ लग रहा था....उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था....
उसकी ऐसी हालत देख कर उसकी बीवी भी परेशान हो गई...उसने सरद से वजह भी पूछना चाही...पर सरद बिना कुछ बोले अपने रूम मे आ गया और अंदर आते ही रूम लॉक कर लिया......
सरद कुछ देर तक लंबी-लंबी साँसे लेता रहा...और कुछ देर बाद उसने एक कॉल लगाया....
( कॉल पर )
सरद- हेलो...हेलो भाई...
"" छोटे...क्या हुआ...तू हाफ़ क्यो रहा है....सब ठीक तो है ना...""
सरद- नही भाई...कुछ भी ठीक नही...कुछ भी...
"" क्या...हुआ क्या..ये तो बता...""
सरद- सब गड़बड़ हो गई भाई...जो सोचा था ...सब चौपट हो गया...
"" क्या मतलब....क्या शूटर ने काम ठीक से नही किया....""
सरद- उसने तो काम किया...शूट कर दिया...पर...
""पर क्या...कही अंकित को....""
सरद(बीच मे)- नही भाई...अंकित ठीक है...उसे कुछ नही हुआ....
""तो तू क्यो परेशान है...वसीम का शूटर मर गया इसलिए...""
सरद- नही भाई...वो नही मरा...
""क्या मतलब नही मरा...एक तरफ तू बोल रहा है कि अंकित सेफ है...और वसीम का शूटर भी नही मरा...और अपने शूटर ने शूट भी किया...आख़िर हुआ क्या...""
सरद- सुनो भाई...पूरी बात बताता हूँ...
""ह्म्म..बोल...""
फिर सरद ने पार्क मे हुई सारी घटना अपने भाई को बता दी..जिसे सुन कर सरद का भाई भी परेशान हो गया...
""क्या...वसीम के बेटे को गोली लगी ...और उस लड़के की बेहन को भी....""
सरद- हाँ भाई...यही तो परेशानी है...वहाँ दो लोग घायल हुए...जिनका हमसे कुछ लेना-देना भी नही था...
""ये तो बुरा हुआ...अच्छा वो दोनो कैसे है...मतलब जिंदा है या....""
सरद- नही पता...मैं वहाँ से भाग आया ...
"" ह्म्म...पर अब तू घर पर मत रुक...निकल जा वहाँ से...""
सरद- हाँ..मैं भी यही सोच रहा हूँ...पर वसीम...उसका क्या...उसके बेटे को गोली लगी है..
""उसको बाद मे देखगे...पहले वहाँ से निकल...पोलीस का लफडा हुआ तो फस सकता है...रहा वसीम...तो उसकी गर्दन मेरे हाथ मे है...डोंट वरी...""
सरद- ठीक है भाई...मैं निकलता हूँ...बाइ...
फिर सरद ने फ़ोन रखा और एक बेग पॅक कर के घर से निकलने लगा...तभी उसकी बीवी ने उसे टोक दिया...
मैं(मुस्कुरा कर)- शायद आज की डेट मे , मैं ही तेरी माँ को अच्छे से जानता हूँ...बॉडी से भी और ब्रेन से भी...
रिया- मुझे तेरी बकवास नही सुननी...जा यहाँ से...
मैं- ठीक है...मैं जाता हूँ...पर ..तू बोर हो रही होगी ना...रुक..एक नया वीडियो देता हूँ...देख ले...शायद पसंद आए...मैं तुझे सेंड करता हूँ...
फिर मैने रिया के मोबाइल मे एक वीडियो सेंड कर के उसे उसका मोबाइल थमा दिया...
मैं- देख ले...शायद तेरी सोच बदल जाए ...मैं बाद मे आता हूँ...फिर बताना...ओके...
और फिर मैं वहाँ से निकल आया....और बाहर बैठ कर इंतज़ार करने लगा....
अचानक मुझे कुछ याद आया और मैने एक कॉल किया.....
मैं- हेलो...मैने इसलिए कॉल किया कि तुम्हे याद दिला दूं...कि वो दिन आ गया है....परसो सुबह तुम्हे मेरे सामने होना है...ओके...
सामने- हाँ...मुझे याद है...
मैं- गुड...अब देखना... ये सर्प्राइज़ उसकी जिंदगी का सबसे बढ़ा सर्प्राइज़ होगा...चलो...मिलते है 2 दिन बाद....बाइ...
फिर थोड़ी देर तक मैने वही रेस्ट किया और फिर रिया के पास पहुँच गया....
रूम मे जाते ही मैने रिया की हालत पर गौर किया...वो रोए जा रही थी...उसका फ़ोन ज़मीन पर पड़ा था...जिससे मैं समझ गया कि वीडियो देखते ही उसने फ़ोन फेक दिया होगा....
मैने एक चेयर उठाई और रिया के सामने रख दी...और फिर रिया के सामने बैठ कर उसका हाथ थाम लिया...
मैं- रिया...प्ल्ज़...
रिया(रोते हुए)- कह दो की ये सब झूठ है...ये...ये वीडियो...ये नकली है...कह दो प्ल्ज़....
मैं- काश...काश मैं ऐसा कह सकता....बट...सच यही है...
रिया(चिल्ला कर)- न्न्नाआहहिईीईई....कह दो कि ये झूठ.....(और रिया रोने लगी)
मैने रिया के हाथ को थामे हुए दूसरे हाथ से उसका सिर सहलाया और उसे चुप करने लगा....
मैं- रिया...ये टाइम रोने का नही है...बल्कि...बल्कि इस टाइम तुम्हे मजबूत होना होगा....तुम ही बताओ...तुम्हारे रोने से आख़िर होगा क्या...क्या सच बदल जायगा...क्या सब ठीक हो जायगा...हां...
रिया(मेरी तरफ देख कर , गुस्से से)- अगर ये सच था तो तुमने मुझे क्यो बताया...क्यो मेरी लाइफ को बर्बाद कर दिया...क्यो...
मैं- नही...मैने तुम्हारी लाइफ को बर्बाद होने से बचाया है...समझी...
रिया(रोते हुए)- वो कैसे...
मैं- पहले तुम चुप हो जाओ...कुछ खा लो...फिर बात करेंगे....
रिया- नही...मुझे अभी बात करनी है...
मैं- नही...पहले तुम उस हालत मे तो आओ जिस हालत मे तुम कुछ समझ पाओगी....अब कोई सवाल नही...तुम रूको...
और फिर मैं वहाँ से उठ कर एक औरत को ले कर वापिस रिया के पास पहुँचा...जिसे देख कर रिया शॉक्ड हो गई...
रिया- आंटी...आप....आप यहाँ...आप जिंदा है...
मैं- हाँ...ये जिंदा है...और अब वो वक़्त आने वाला है जब सारी दुनिया जान जाएगी कि ये जिंदा है...बस थोड़ा टाइम और....
रिया- पर इन्हे ये सब करने की ज़रूरत क्या थी...
मैं- रिया...तुम्हे हर सवाल का जवाब मिल जायगा...पर उसके लिए तुम्हे इंतज़ार करना होगा...अभी तुम कुछ खा लो और कपड़े भी चेंज कर लो...और हाँ..तुम्हारी फ्रेंड को भी ठीक करो...फिर बात करेंगे...
फिर मैं उस औरत को वही छोड़ कर आ गया और बाहर बैठ कर रिया का वेट करने लगा....
मैं बाहर बैठा वेट ही कर रहा था की मुझे सोनू का कॉल आ गया....
( कॉल पर )
सोनू- हेलो अंकित....कहाँ हो तुम...
मैं- बस यही आस-पास...तू बोल ..कोई प्राब्लम ...
सोनू- नही..बस ऐसे ही..मुझे डर लग रहा है...कही सोनम को कुछ...
मैं(बीच मे)- फालतू बकवास मत कर...सोनम को कुछ नही होगा...डॉक्टर अपना काम कर रहे है ना...तू बस उपेर वाले पर भरोशा रख...ओके...
सोनू- ह्म्म...तू कब आएगा...
मैं- जल्दी आउगा...तू ये बता कि अकरम के डॅड को बोल दिया ना...
सोनू- हां..और वो भी यही सोच रहे थे कि घर पर अभी ना बताए...पर वो यहाँ नही है अब...
मैं- नही है मतलब...कहाँ गया....
सोनू- पता नही...पर किसी से बड़े गुस्से मे बात कर के निकल गया....
मैं- ह्म..तू उसे छोड़...अकरम के साथ रहना...और कुछ भी हो...मुझे कॉल कर देना ..बाकी मेरे आदमी पहुँच रहे है...वो संभाल लेगे...डरना मत...ओके..
सोनू- ओके...
फिर मैने कॉल कट की और स को कॉल कर के उसे हॉस्पिटल पर नज़र रखने बोल दिया...तो मुझे पता चला कि वो सब पहले ही पहुँच चुके है...
अब मैं अकरम और सोनम की सुरक्षा से बेफ़िक्र था...अब मुझे इंतज़ार था रिया का....
थोड़े इंतज़ार के बाद मेरे सामने रिया और उसकी सहेली उस औरत के साथ खड़ी हुई थी...
पर मेरा ध्यान तो सिर्फ़ रिया पर ही था...फूल की तरह नाज़ुक थी वो...दिखने मे तो एवरेज लड़की थी...और बिना किसी मेक-अप के खड़ी थी...फिर भी वह खूबसूरत लग रही थी...
वैसे तो मैं लड़की को देख कर गरम हो जाता हूँ पर रिया को देख कर एक अजीब सा अहसास हो रहा था...उसकी मासूम आँखे मेरे दिल मे चुभ रही थी....पता नही क्यो...पर आज रिया मुझे बेहद पसंद आ रही थी....
मुझे यू घूरते हुए देख कर रिया सहम गई ...उसकी आँखो मे एक अंजाना डर पैदा हो गया...और जैसे ही मैं ये बात समझा तो मैं बोल पड़ा...
मैं- डरो मत रिया...तुम यहाँ सेफ हो...अच्छा ये बताओ...खाना खाया....
रिया(सिर हिला कर)- ह्म्म..
फिर मैने उस औरत को रिया की सहेली को ले जाने बोला ...ये सुन कर रिया फिर डर गई...पर मैने उसे अपने सामने बैठा कर फिर से बोला कि वो सेफ है...डरने की कोई बात नही...जब रिया बैठ कर तोड़ा नॉर्मल हुई तो मैने बात सुरू की....
मैं- अब बोलो...जो भी दिल मे हो...बिना डर के बोलो...
रिया- क्या वो वीडियो...(और रिया चुप हो गई )
मैं- ह्म्म...वो रियल है...उस वीडियो मे दिखा हर सक्श और हर घटना ...सब सच है...
रिया- आपको वो कहाँ से मिला...
मैं- आप ..तुम मुझे तुम ही बोलो...ओके..डरो मत...
रिया- ह्म्म..तो बताओ...तुम्हे वो कैसे मिला...
मैं- एक फ्रेंड से...जिसके एक रिलेटिव के पास ये वीडियो था...
रिया- क्या तुम जानते थे कि वीडियो मे कौन है...
मैं- हाँ..ये मुझे आज ही पता चला...वैसे मुझे डाउट तो था...पर आज कन्फर्म हो गया...वीडियो मे तुम्हारी माँ है...रिचा...सही कहा ना...
रिया(उदासी से)- ह्म्म...वही थी...
मैं- देखो रिया...रोना मत...रोने से कुछ नही होगा...ये बताओ कि क्या मरने वाला सक्श तुम्हारा नाना था....
रिया- हाँ...मैने उनको फोटो मे देखा है...घर पर...
मैं- ह्म...तो अब बताओ...क्या कहती हो...
रिया- क्या कहूँ...मुझे कुछ समझ नही आ रहा...जिस माँ को मैं देवी समझती थी...वो ऐसी होगी...कभी नही सोचा था मैने...
मैं- रिया...मैं तुम्हारा दर्द समझता हूँ...पर अभी ऐसा बहुत कुछ है जो जान कर तुम्हे दुख ही होगा...तुम्हारी माँ...वो एक बहुत बड़ी कमीनी औरत है...
रिया(मुझे घूर कर )- क्या मतलब...
मैं- क्या तुम सब सच सुनना चाहती हो...
रिया- हाँ...मैं भी तो सुनू की असल मे मेरी माँ है क्या...
मैं- सोच लो...क्या तुम सुन पाओगी...
रिया- हाँ...जब उनकी ऐसी करतूत देख ही ली..तो और सब भी सुन सकती हूँ....
मैं- ठीक है...पर तुम्हे स्ट्रॉंग बनना होगा...शायद ये सुन कर तुम हर्ट हो जाओ...
रिया- मेरा दिल उनकी तरफ से टूट चुका है...अब फ़र्क नही पड़ता...तुम बताओ...कैसी है मेरी माँ...
मैं- कमीनी + शातिर + ख़ुदग़र्ज़ + रंडी....और भी बहुत कुछ...शॉर्ट मे कहूँ तो वो औरत कहलाने के लायक नही...शी ईज़ आ होर....जो अपना मतलब निकालने के लिए किसी के साथ कुछ भी कर सकती है...उसके लिए सिर्फ़ पैसा और खुद का मक़सद ही इंपॉर्टेन्स रखता है...और कोई नही...तुम भी नही....
रिया- नही...मेरी माँ मेरे लिए बुरी नही है...
मैं- ह्म..अगर ऐसा है तो अच्छा होगा...पर क्या तुम श्योर हो...क्यो ना आजमा के देख लो...
रिया- मैं...पर मैं क्या बोलुगी...नही...ये मुझसे नही होगा...
मैं- ह्म्म..वो मैं बताउन्गा...सवाल ये है कि क्या तुम मेरे साथ हो...
रिया- मैं तुम्हारे साथ...पर किसलिए...और क्यो...आख़िर तुम ये सब क्यो कर रहे हो...तुमने मुझे किडनॅप किया...फिर ये वीडियो दिखाया और अब मेरी माँ के बारे मे ये सब...आख़िर क्यो...
मैं- वो भी बताउन्गा...पर पहले तुम जवाब दो...
रिया- पहले तुम ये साबित करो कि तुमने जो कहा वो सच है....फिर मैं कुछ जवाब दुगी...
रिया- वीडियो मे वो बच्ची है...हो सकता है जो दिख रहा है वो सही ना हो..या ये भी हो सकता है कि कोई अलग वजह हो...वो सब पहले की बात है...पर मैं कैसे मानु कि आज भी मेरी माँ वैसी ही है...जैसी तुम मुझे बता रहे हो...
मैं- ह्म्म..तो मैं अभी साबित कर देता हूँ...तुम्हारी मा मेरे साथ भी कई बार सो चुकी है...रूको ..मैं उसी के मुँह से बुलवाता हूँ...सुनना...
रिया- हॅट...मैं नही मानती...तुम तो अभी...नही..मैं नही मानती...
मैं- अच्छा...तो खुद सुन लो...
और मैं कॉल लगाने लगा पर रिया ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक दिया....
मैं- क्या...??
रिया- व्हतस अबाउट लाइव आक्षन...आइ मीन...मैं खुद देखना चाहती हूँ कि मेरी माँ कितनी गिरी हुई है....
मैं रिया की बात सुन कर हैरान हुआ और फिर उसे देख कर मुस्कुरा दिया......
मैं- ओके...तो रेडी हो जाओ...हम अभी तुम्हारे घर चलते है.....
रिया- एक मिनिट....तुमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया....
मैं- अब कौन सा सवाल बचा....
रिया- वही...जो तुमने कहा था कि तुम मेरी लाइफ बर्बाद नही कर रहे...बल्कि बर्बाद होने से बचा रहे हो...कैसे...???
मैं- ह्म्म...तुम मेरे साथ चलो...ये जवाब भी तुम्हे वही मिल जाएगा....
और फिर मैं रिया और उसकी फ्रेंड को ले कर वहाँ से निकल गया......
घर की डोरबेल को बार-बार बजा कर कोई गेट को ज़ोर-ज़ोर से पीट रहा था...और साथ मे सरद का नाम ज़ोर से चिल्ला रहा था....
सरद तो घर मे था नही...पर उसकी बीवी और बेटी इन आवाज़ो को सुन कर सहम गई ....
बड़ी मुस्किल से सरद की बीवी मोहनी ने अपने आप को मजबूत किया और गेट ओपन किया...सामने वसीम खड़ा था...
मोहिनी- तुम...
वसीम(बीच मे ही चिल्ला कर)- सरद कहाँ है...कहाँ है वो...
मोहिनी- म्म..मुझे नही पता...पर हुआ क्या...
वसीम- नही पता मतलब...कहा गया वो...
और वसीम पूरे घर के रूम्स को चेक करने लगा...वसीम के पीछे मोहिनी और मोना भी चल रही थी...मोहिनी बार-बार वसीम से गुस्से की वजह पूछती रही पर वसीम तो अपनी ही धुन मे था....
वसीम(एक रूम को देख कर)- यहाँ भी नही...कहाँ गया साला....
मोहिनी- पता नही...कुछ देर पहले ही निकल गये....
वसीम- कहाँ गया...
मोहिनी- बोला ना ...नही पता...पर हुआ क्या...
वसीम- जो भी हुआ...ठीक नही हुआ...अब मैं उसे छोड़ूँगा नही....समझी...
मोहिनी(झल्ला कर)- पर ये तो बताओ कि हुआ क्या...
वसीम- तुझे बताने की ज़रूरत नही...बस इतना समझ ले कि अब सरद के दिन पूरे हो गये...
मोहिनी- तुम...तुम शांति से बैठो तो...और बताओ कि सरद ने किया क्या...
वसीम- मेरे पास वक़्त नही ...मुझे पता है वो कहाँ होगा...हट जाओ...आज मैं उसे छोड़ूँगा नही...
और वसीम मोहिनी को साइड करके वापिस निकल गया....
वसीम के जाते ही मोना सहमी हुई अपनी माँ के पास आई और उसके गले से चिपक गई...
मोना- मोम...ये सब हो क्या रहा है...
मोहिनी- पता नही बेटी...यू अचानक से वसीम को क्या हो गया...
मोना- मोम...एक बात सच-सच बताओगी...
मोहिनी- हाँ बेटी...पूछो...
मोना- आज डॅड ने आपसे ये क्यूँ कहा कि आप उनकी बीवी नही...
मोना के मुँह से ये बात सुन कर मोहिनी सन्न रह गई...वो नही चाहती थी कि मोना को इस राज के बारे मे कुछ भी पता चले...
मोना- बोलो मोम...क्या ये सच है....
मोहिनी(सर झुका कर)- ह्म्म...
मोना- तो क्या...सरद मेरे डॅड नही...
मोहिनी(सिर हिला कर)- नही बेटा....
मोना(हैरानी से)- तो...तो कौन है मेरे डॅड....और कहाँ है वो...क्या वो...
मोहिनी(बीच मे)- वो इस दुनिया मे नही रहे बेटा....
मीना(नम आँखो से)- क्या....इसका मतलब...मैं अपने डॅड को कभी देख भी नही पाउन्गी...
मोहिनी- नही मेरी बच्ची....तुम्हारे डॅड हमे छोड़ कर जा चुके है...सॉरी बेटा...सॉरी...
मोना- नही मोम ...आपके सॉरी कह देने से कुछ नही होगा....आपने मुझसे सच छिपा कर अच्छा नही किया...और उससे भी बुरा ये कि आपने सरद को चुना....जिसने ना सिर्फ़ आपको बल्कि मुझे भी एक रंडी बना डाला...
मोहिनी- मोना....
मोना- हाँ मोम...हम दोनो ही रंडी बन कर रह गये...जब जिसका जी चाहा...उसने हमे यूज़ किया....और मैं पागल ये सोचती रही कि मेरे डॅड खुले विचारों के है...सेक्स को लाइफ का एक प्यारा पार्ट मानकर एंजाय करते है...पर सच तो ये है कि उनके लिए हम बीवी या बेटी थी ही नही...बल्कि दो रखेल थी हम...
मोहिनी- मोना...(और मोहिनी ने मोना को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया)
मोना(गाल पकड़ कर)- वाह मोम वाह...सच सुनते ही गुस्सा आ गया...काश ये थप्पड़ उस दिन मारा होता जब पहली बार मैं सरद के साथ हमबिस्तर हुई थी...तो आज मेरी लाइफ ऐसी ना होती...
मोहिनी ने थप्पड़ तो मोना को मारा पर खुद रोने लगी....
मोना- अब आपके रोने से क्या होगा मों...कुछ भी नही....आपने अपनी लाइफ तो बर्बाद की ही...साथ मे मेरी लाइफ को भी बदतर बना दिया....
मोहिनी(रोते हुए)- मैं मजबूर थी मेरी बच्ची....और मैं मजबूरी मे ये पाप करती रही...मुझे माफ़ कर दे...पल्लज़्ज़्ज़्ज़....
मोना(मोहिनी के कंधे पर हाथ रख कर)- मोम....क्या मैं जान सकती हूँ कि आपकी वो मजबूरी क्या थी...और प्ल्ज़...मुझे मेरे रियल डॅड के बारे मे बताओ मोम..
जैसा कि तुम जानती ही हो कि मेरी सारी फॅमिली जल कर ख़त्म हो गई थी...जिसका इल्ज़ाम आज़ाद पर लगाया गया था....
पर मैने कभी इस बारे मे नही सोचा...सब किस्मत का खेल मान कर जिंदगी को नये सिरे से जीना सुरू कर दिया....
मेरी मौसी ने मुझे सहर मे पढ़ाया और मेरी अच्छी परवरिश की...वही पर मुझे एक सरीफ़ लड़का मिला...जिसका नाम मोहित था...
पहले हमारी दोस्ती हुई...फिर प्यार....और जब मौसी को इस बारे मे पता चला तो उन्होने भी हमारे रिश्ते को सहमति दे दी और मेरी शादी मोहित से हो गई....
हम दोनो बहुत ही प्यार से अपनी लाइफ जी रहे थे...मोहित बहुत ही सरीफ़ थे...पर वो बड़ा आदमी बनने के बारे मे सोचते रहते थे...
इसी लिए हमने शादी के 2 साल तक कोई बच्चा नही किया...फिर तुम्हारे डॅड का बिज़्नेस सेटल हुआ तो हमने बच्चा प्लान किया...और तुम मेरी कोख मे आ गई....
इस बात से हम दोनो खुश थे....और हम दोनो अपने होने वाले बच्चे के लिए दिन रात सपने देखने लगे...मोहित ने भी ज़्यादा मेहनत स्टार्ट कर दी...वो हमारे बच्चे को एक खुशाल जिंदगी देना चाहते थे...
सब कुछ अच्छा चल रहा था....तुम्हे मेरे पेट मे 7 महीने हो चुके थे...2 महीने बाद हमारी लाइफ मे खुशिया बढ़ने वाली थी...
पर शायद उपेरवाले को ये मंजूर ना था...हमारी खुशियों को किसी की नज़र लग गई...और एक दिन अचानक मोहित को हार्ट अटॅक आ गया और वो दुनिया से चले गये....
मोहित की मौत के बाद मैं टूट चुकी थी...दिल तो किया कि मैं भी मर जाउ...पर फिर अपने बच्चे का सोच कर मैने जीने का तय किया....
पर बेटी...ये दुनिया एक अकेली औरत को हवस की नज़रों से देखती है...मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ....
मोहित के जाने के बाद मुझे भी कई मुस्किलों का सामना करना पड़ा....उपेर से मेरा आख़िरी महीना चल रहा था...जिससे मैं ज़्यादा ही परेशान थी....
ऐसे वक़्त मे मेरी लाइफ मे सरद आया....वो एक फरिश्ते की तरह मेरी जिंदगी मे आया....
उसने तब मेरा हाथ थामने की पेस्कश की जब सारी दुनिया मुझे बाजारू बनाने पर तुली हुई थी...
तब मुझे वो बहुत अच्छे लगे...उनकी सराफ़त...उसका पेशकस करने का तरीका ..सब कुछ ...इसलिए मैने उन्हे हाँ बोल दिया....
मैने सोचा कि मुझे और मेरे बच्चे को एक सहारा मिलेगा...और मिला भी...
पर जब तू जवान हो गई तब सरद ने अपना असली रंग दिखाया.....उसने मुझे तो पहले ही दूसरे के साथ सुला दिया था....पर जब उसने तुम्हारे साथ सोने की पेशकश की तो मैं आग-बाबूला हो चुकी...
पर उसने मुझे ये कह कर मजबूर कर दिया कि वो तुझे सब सच बता देगा और हमे छोड़ देगा....
मैं चाहती तो उससे अलग हो जाती...पर जब मैने देखा कि तुझे कोई प्राब्लम नही तो मैने भी चुप रहना ठीक समझा.....और फिर हम दोनो मर्दो के हाथ का खिलोना बन गये......
ये कह कर मोहिनी टूट कर रोने लगी और मोना उसे संभालने लगी.....
मोहिनी- मुझे माफ़ कर दे मेरी बच्ची...माफ़ कर दे...
मोना- नही मोम...आप अकेली ग़लत नही...मैं भी ग़लत हूँ...प्ल्ज़ मोम...चुप हो जाइए..प्ल्ज़ ..
और फिर दोनो माँ बेटी आपस मे चिपक कर रोने लगी...करीब 2 घंटे तक दोनो चिपकी हुई एक दूसरे को संभालती रही...रूम मे खामोशी छाइ थी...
तभी फ़ोन की घंटी बजी जिससे दोनो माँ-बेटी होश मे आई.....और मोनिनी ने रिसेवर उठाया....और सामने से आवाज़ आई....
""सर....पोलीस मेरे पीछे है...मैं नही बच पाउन्गा...आप भी भाग जाओ...शायद मैं ज़्यादा देर तक मुँह बंद ना रख पाउ...भाग जाओ सर...भाग जाओ...""
इसके बाद कॉल कट हो गया और मोहिनी घबरा गई. .
मोना- क्या हुआ मोम...कौन था...
मोहिनी ने सब कुछ मोना को बता दिया...
मोना- ओह नो...डॅड ने क्या कर दिया ऐसा....
मोहिनी- पता नही...पर कुछ तो ग़लत हुआ है...तभी वसीम भी गुस्से मे आया था...पता नही वो कहाँ होंगे....
मोना- शायद मैं जानती हूँ कि वो कहाँ मिलेगे....
मोहिनी- कहाँ बेटा...
मोना- चलिए मेरे साथ...
और फिर दोनो घर से निकल गये.......
मैं रिया और उसकी सहेली को ले कर सीक्रेट हाउस ले कर उसकी सहेली के घर गया और उसे ड्रॉप कर के रिचा के घर निकल गया.....
रिचा के घर पहुँच कर मैने रिया को प्लान समझाया और उसे वही छोड़ दिया और कुछ देर वेट करने के बाद रिचा के घर की डोरबेल बजा दी.......
डोरबेल बजते ही रिचा ने गेट खोला और मुझे सामने देख कर उसके चेहरे का रंग उड़ गया...जो अभी तक चमक रहा था.....
मैं- कैसी हो जानेमन....
रिचा- त्त..तुम...
मैं- हाँ मेरी जान...हम ही है....पहचाना नही क्या....
रिचा(मुस्कुरा कर)- अरे...क्यो नही....आइए ना.....
मैं(अंदर आते हुए)- तुम्हारा चेहरा देख कर ये तो समझ गया कि तुम्हे उस पार्सल की असलियत समझ आ गई....पर ये समझ नही आया कि तुम्हे अपनी बेटी से प्यार है या नही ...
रिचा- मतलब....
मैं(सोफे पर बैठ कर)- मतलब ये...कि कोई कॉल नही..कोई बात नही...तुम तो बड़ी रिलॅक्स लग रही हो...ह्म्म...
रिचा- वो..वो बॉक्स की सच्चाई समझ गई तो ये भी समझ गई कि आप बुरे नही है...आप मेरी बेटी को कुछ नही करोगे...इसलिए...थोड़ा...रिलॅक्स...
मैं- ओह...कोई नही...पर तुम्हारे पाप इतने ज़्यादा है कि मैं भी ज़्यादा दिनो तक अच्छा नही बना रह सकता...मुझे बुरा बनना ही होगा....
रिचा- म्म..मैने क्या किया...
मैं- सब बताउगा....थोड़ा रुक जाओ....
फिर मैने एक नज़र बाहर साइड मे मारी...तो वहाँ पर रिया आ चुकी थी...वो पीछे के गेट से अंदर आई थी...वो गेट खोलना उसे आता था...कुछ ट्रिक होगी....
मैं- ह्म्म...एक बात बताओ...अगर मैं तुम्हारी बेटी को तुम्हारे असली रंग दिखा दूं तो...
रिचा- नही...ऐसा मत करना....
मैं- ह्म्म..तो अब तुम अपने मुँह से मुझे सच-सच बताओगी ..कोई झूठ नही....और मैं वादा करता हूँ....कि सच बोलने पर मैं तुम्हे माफ़ कर दूँगा...फिर तुम अपनी बेटी के साथ आराम से रहना...
रिचा- म्म..मैं क्या बताऊ...
मैं- जो मैं पुच्छू...और याद रखो...झूठ बोला तो तुम तो जाओगी ही...साथ मे तुम्हारी मासूम बेटी भी जाएगी...
रिचा- पर बताना क्या है....
मैं- चलो सुरू से सुरू करते है....ओके...
रिचा कुछ नही बोली बस मुझे घूरती रही....
मैं- तुमने मेरे साथ सेक्स किसके कहने पर किया और क्यो...???
रिचा- वो..वो तो कामिनी ने कहा था...और रजनी ने भी....वो इसलिए क्योकि वो सब तुम्हे सेक्स का आदि बनाना चाहते थे....
मैं- ह्म...दूसरा सवाल....अकरम की कार पर अटॅक किसने करवाया....और रफ़्तार को किसने मनाया इस काम के लिए....
रिचा- वो तो सरफ़राज़ ने बोला था....और उसने ही रफ़्तार को मनाने का बोला था...क्योकि पोलीस वाले आसानी से बच जाते है...और उसके लिए रफ़्तार ने पूरी रात मेरी गान्ड मारी थी. .तब माना था कमीना....
मैने मुस्कुरा कर एक नज़र रिया पर डाली...वो हैरान खड़ी थी...उसकी आँखे फटी जा रही थी...पर वो अपने आपको संभाले खड़ी हुई थी....
मैं- अब ये बताओ कि मेरे डॅड की कार पर हमला किसने करवाया था....झूट मत बोलना...दामिनी ने सुना था तुझे बात करते हुए...
रिचा- वो भी सरफ़राज़ का काम था...उसमे मेरा कुछ नही था...(मन मे- थॅंक गॉड...इसको बॉस2 का पता नही...)
मैं- ह्म्म..अब ये बताओ कि रश्मि को किसने मारा...
ये सवाल सुनकर रिचा की फट गई...वो तो सोच कर बैठी थी कि इस मौत के बीच उसका नाम कभी नही आएगा....
रिचा- रश्मि...मुझे क्या पता...उसका तो आक्सिडेंट हुआ था ना...
मैं(हँसते हुए)- तू अपने आपको होशियार या मुझे बेवकूफ़ समझ रही है शायद ..हाँ...
रिचा- म्म..मतलब...
मैं- मतलब ये कि मैं ये जानता हू कि रश्मि तुम्हारे साथ काम कर रही थी...सोनू के मामले मे..समझी...और मैं ये भी जानता हूँ कि रश्मि आक्सिडेंट मे नही मरी...और ना ही वो ड्राइवर...तो अच्छा होगा कि तुम ही सच बोल दो...वरना रफ़्तार बोल पड़ा तो तुम गई समझो..और तुम्हारी बेटी....
रिचा- र्र..रफ़्तार...
मैं- हाँ..रफ़्तार...मैं जानता हूँ कि वो भी इसमे शामिल था....अब सवाल ये है कि तुम सच बोलोगि या झूठ...
रिचा- वो...वो रफ़्तार ने किया...सब सरफ़राज़ के कहने पर...इसमे मेरा हाथ नही...मैं किसी को मारने का सोच भी नही सकती...
मैं- ओह्ह..तू इतनी अच्छी है...
रिचा- सच मे...मैं पैसो के लिए इनका साथ दे रही हूँ...अपने जिस्म का इस्तेमाल भी करती हूँ पर मर्डर...ऐसा तो मैं सोच भी नही सकती...
रिचा की बात सुन कर मैं हँसने लगा और हँसते हुए अपना मोबाइल निकाल कर एक वीडियो रिचा को सेंड कर दिया...
मैं(हँसते हुए)- एक वीडियो भेजा है...देख कर बताओ...कैसा है...जल्दी...
और फिर जैसे ही रिचा ने वीडियो प्ले किया तो थोड़ी देर मे ही मोबाइल उसके हाथ से गिर गया...और मैं ज़ोर से हँसने लगा.....
रिचा(सहमी हुई)- ये...ये कहाँ से....
मैं(बीच मे)- क्या कहा था....मर्डर के बारे मे सोच नही सकती...पर शुरुआत तो यही से हुई थी ना....हाँ ....
रिचा- अंकित...ये तुम्हे कहाँ से...किसने दिया....
मैं- वो सब छोड़...अब ये सोच कि ये सब बातें तेरी बेटी को पता चली तो तेरा क्या होगा...हाँ...
रिचा- न्ह्हीइ...उसे कुछ मत कहना....वो ये सह नही पाएगी...जीते जी मर जाएगी...
मैं- ओके..रिलॅक्स...अब ये बताओ कि वीडियो मे तुमने मारा किसे...अपने बाप को...
रिचा(चुप चाप सिर झुका लिया )
मैं- साली कुतिया...क्या कहूँ तुझे....खैर वो तो मैं पता कर लूँगा...पर अभी मैं एक सौदा करना चाहता हूँ....
रिचा- कैसा सौदा....
मैं- सौदा ये कि मैं तेरी बेटी को कुछ नही बताउन्गा...पर उसके बदले तुम्हारी बेटी मेरी होगी....मेरी रखेल...
रिचा- न्ह्ही...ऐसा कभी नही होगा...
मैं- तो फिर ठीक...उसे सब बता देता हूँ....फिर वो जाने और तुम...
रिचा(मेरे पास आ कर )- देखो अंकित....तुम चाहो तो मैं सारी जिंदगी तुम्हारी गुलाम बन कर रहूगी...पर मेरी बेटी को छोड़ दो प्ल्ज़...
मैं- तू...अरे तेरे जिस्म मे वो कसक कहाँ जो तुम्हारी बेटी मे है....उससे तेरा क्या मुक़ाबला...
रिचा- तो मैं तुम्हारे लिए एक से बढ़ कर एक लड़कियाँ लाउगि...पर मेरी बेटी नही...प्ल्ज़्ज़...
मैं- नही मेरी जान...चाहिए तो मुझे वही....इस घर मे मेरी 2 रखेल होगी...वाउ...मज़ा आएगा.....
रिचा- नही अंकित...प्ल्ज़ ऐसा मत बोलो...वो मासूम है....
मैं- मुझे कली को खिला कर फूल बनाना पसंद है डार्लिंग....सवाल ये है कि तुम खुद मरना चाहोगी या अपनी बेटी के साथ मेरी रखेल बनना चाहोगी...अभी सोचो और जल्दी बोलो...
रिचा(मन मे)- ह्म..ये नही मानेगा...क्या करूँ...अभी हाँ कर देती हूँ...फिर बॉस2 इसे ख़त्म कर ही देगे....तो मैं फ्री...हाँ बोल देती हूँ...रिया को कुछ पता भी नही चलेगा...और वो राज़ी भी नही होगी....एक शर्त रख देती हूँ...हाँ)
मैं(मन मे)- जितना भी दिमाग़ चलाना है चला ले कुतिया...पर ये बात तो पक्की है कि आज रात से तेरी बेटी तुझसे नफ़रत ही करेगी....और तू तो पक्का मरेगी...आज नही तो कल...पर मरेगी ज़रूर)
रिचा- अगर मेरी बेटी नही मानी तो...
मैं- तू बस उसे मेरे पास आने का बोल...बाकी मैं देख लूँगा...ओके...
रिचा- ठीक है...बोल दुगी....रिया तुम्हारी हुई समझो...बना लो उसे अपनी रखेल ..
मैने रिया की तरफ देखा तो उसकी आँखे नम हो गई थी...और गुस्सा उसके चेहरे पर हावी हो रहा था....
मैं- तो ठीक है फिर....कल तुम्हारी बेटी घर आ जाएगी....और कल रात को मैं उसके साथ सुहागरात मनाउन्गा...ओके...अब चलता हूँ...
रिचा(मन मे)- ये वीडियो मुझे इससे लेना होगा..वरना गड़बड़ हो जाएगी...पर इसे रोकू कैसे...हाँ...सेक्स...औरत का जिस्म ही इसे रोक सकता है....
मैं रिया के सामने रिचा को छोड़ना चाहता था...पर फिर सोचा कि आज के लिए इतना काफ़ी है....यही सोच कर मैं जाने के लिए उठा...तभी रिचा ने अपनी मॅक्सी निकाल फेकि और ब्रा-पैंटी मे मेरे सामने खड़ी हो गई...
मैं- ह्म्म...ये सब क्या है...
रिचा- बेटी को तो कल चोदोगे...पर माँ की प्यास तो आज ही बुझानी होगी....
और फिर रिचा ने मुझे वापिस बैठाया और घुटनो पर आ कर मेरे लंड को आज़ाद करने लगी...
जैसे ही मेरा लंड बाहर आया तो रिचा एक मझि हुई रंडी की तरह लंड को हिलाते हुए चूमने लगी और मस्ती करने लगी.....
मैने भी रिचा के होंठो की गर्मी पाते ही अपना पेंट खोल कर नीचे कर दिया और इतमीनान से बैठ कर रिचा को देखने लगा....
थोड़ी देर बाद ही मेरा लंड पूरे जोश मे खड़ा हो गया....तभी मैने रिया को देखा...वो आँखे फाडे मेरे लंड को घूर रही थी....
मैं- ओह रिचा....कितना अच्छा होगा जब रिया के नाज़ुक होठ मेरे सुपाडे को अपनी गिरफ़्त मे लेगे...
रिचा-ऐसे....(और रिचा ने सुपाडे को होंठो मे दबा लिया)
मैं- हाँ...ऐसे ही...आहह...कम ऑन रिया......
रिचा- उउउम्म्म्मममममममम.......
मैं- ऊओ...क्या बात है....ज़ोर से...
रिचा ने धीरे-धीरे कर के आधे से ज़्यादा लंड मुँह मे भर लिया और फुल मस्ती मे उपर-नीचे होकर लंड चूस रही थी...
वहाँ रिया अपनी माँ का लाइव शो देख कर हैरान थी...उसका मुँह खुल गया था..और आँखे बड़ी होती जा रही थी....
मैने एक नज़र रिया पर डाली और फिर रिचा का सिर पकड़ कर पूरा लंड उसके मुँह मे डाल दिया....
मैं- यस ....तेरी बेटी को भी ये मज़ा आएगा ...आअहह....
मेरा लंड रिचा के गले तक पहुँच गया था उसके मुँह से आने वाली आवाज़े बंद हो गई थी...सिर्फ़ लार बह कर मेरी बॉल्स की गीला कर रही थी...
मैं- ऊहह...इट फील्स गुड...नाउ सक हार्ड....
और मैने रिचा का सिर छोड़ दिया...और रिचा ने लंड को मुँह से निकाल कर खांसना सुरू कर दिया....
मेरा लार से तर-बतर लंड रोशनी मे सॉफ चमक रहा था...जिसे देख कर रिया का मुँह थोड़ा और खुल गया...
मैने रिया को देख कर एक स्माइल दी और रिचा को आगे बढ़ने का इशारा किया...
रिचा ने बिना देर किए वापिस लंड को मुँह मे डाला और चूसना सुरू कर दिया....और मैं मस्ती मे आहें भरने लगा...और ये सीन देख कर रिया भी गर्मी महसूस करने लगी....
रिचा- उउउंम्म...उउउंम्म...आअहह...अब और ना तड़पओ....
मैं- तड़प मे ही मज़ा है मेरी जान....कल तेरी बेटी भी ऐसे ही तडपेगी....
रिचा- ह्म्म..कल की कल देखना आज मेरी प्यास बुझाओ....
मैं- क्यो नही...तू तो मेरी कुतिया है....चल खोल दे अपनी चूत....
रिचा ने तुरंत अपनी ब्रा और पैंटी निकाली और मैने उसे सोफे पर लिटा दिया...और लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा....
रिचा- ऊहह...अब घुसा भी दो...
मैं- ऐसे ही तेरी बेटी कहेगी...जब मेरा हथियार उसकी नाज़ुक चूत के फाको पर रगड़ मारेगा....है ना...
रिचा- हाँ...बहुत तडपेगी वो...हथियार ही ऐसा है...
मैं- हाँ...बिल्कुल.....फिर मैं लंड को चूत के दाने पर थपथपाउंगा...ऐसे....
रिचा- ओह्ह....आग लगा दी...आअहह...डाल दो ना...
मैं- ह्म्म..वो भी ऐसे ही मचलेगी....क्या सीन होगा ना...एक नाज़ुक सी कली फूल बनने तडपेगी...है ना...
रिचा- ह्म्म्मत..अब डालो ना प्ल्ज़...
मैं- ये ले....यीहह....
रिचा- आअहह....जब भी जाता है...फाड़ देता है...
मैं- तेरी बेटी का क्या होगा....उसकी कसी हुई चूत की फाके फट जाएँगी....
रिचा- आअहह....फटने दो...उसी मे मज़ा है....
मैं- ह्म्म..तू उसकी चूत चूस कर चिकनी कर देना....ठीक...यीहह....
और दूसरे शॉट मे मैने पूरा लंड रिचा की चूत मे उतार दिया....और रिचा चीख पड़ी...
रिचा के झाड़ते ही मैने लंड को उसकी चूत से निकाला और रिया की तरफ पलट कर उसे दिखाया ....
मैं- ह्म्म...ये तेरी बेटी की फाड़ेगा कल....उसका पानी भी मेरे लंड की शोभा बढ़ाएगा....है ना...
रिचा- आहह....क्यो नही....उसका पानी मैं भी चखना चाहुगी...उउउम्म्म्म...
और रिचा उठ कर मेरे लंड को चूसने लगी.....
थोड़ी देर बाद मैने रिचा को कुतिया बनाया और लंड उसकी गान्ड मे घुसा दिया…
मेरे आधा लंड रिचा की गान्ड मे चला गया...
रिचा-आअहह...वहाँ नही....आअहह....
मैं-अरे ऐसी मस्त गान्ड मारने के लिए ही होती है....तेरी बेटी की भी मारूगा...क्या कसी गान्ड है उसकी....है ना...ईएहह.....
और मैं एक ज़ोर का धक्का दिया और पूरा लंड उसकी गान्ड मे डाल दिया......
रिचा-म्माआ….माअरर….गाइइ….आअहह....
मैं- मरेगी तो तेरी बेटी...जब उसकी गान्ड खुलेगी....ईएहह......
रिचा- आआआहह......ज़रूर....आअहह....
मैं-मज़ा आया
रिचा-उउउंम्म....बहुत....मारो अब....
मैने देर ना करते हुए धक्के देना स्टार्ट कर दिया ओर रिचा तड़पने लगी..
रिचा- आअहह....ज़ोर से राजा...फाड़ दो....
मैं- हाँ मेरी रानी...ये ले...ईएहह....ईएहह....
और फिर मैने जोसदार गान्ड चुदाई सुरू कर दी...
बीच-बीच मे मैं रिया को देख रहा था...वो पूरी गरम हो चुकी थी...उसका हाथ उसकी चूत पर पहुँच चुका था...और वो चूत को उपेर से धीरे-धीरे रगड़ रही थी...पर बिना पलक झपकाए हमारी चुदाई को देखे जा रही थी...
मोहिनी और मोना सरद को ढूँढते हुए एक फार्महाउस पर पहुँचे...ये उसी का फार्महाउस था...जहा वो कभी -कभी आया करता था....
हाउस की लाइट ओं थी...मोहिनी और मोना ये देख कर खुश हुए पर जैसे ही वो गेट तक पहुँचे तो उन्हे अंदर से कुछ टूटने की आवाज़ आई...जिससे वो दोनो डर गई...
फिर दोनो हाउस के साइड मे बनी खिड़की पर पहुँची...वो खुली हुई मिल गई...
और दोनो ने अंदर देखा तो शॉक्ड रह गई....वहाँ सरद एक आदमी के साथ बातें कर रहा था....
मोना- मोम...ये तो...
मोहिनी- स्शहीए....सुनने दो पहले...कि बात क्या है...
और फिर दोनो अंदर की बातें सुनने लगी...जिसे सुन कर दोनो के मुँह खुले के खुले रह गये....
सरद- सही कहा....ये राज तो राज ही रहेगा....और फसेगा वसीम...हाहाहा....
""हाहाहा...सही कहा....आज़ाद की फॅमिली को हम मिटायगे और इल्ज़ाम आएगा वसीम पर...""
मोना- इतनी बड़ी बात....तो यहाँ से सब सुरू हुआ....और अंकित दुश्मनो से घिर गया....
मोहिनी- हाँ बेटा...ये तो मैने भी नही सोचा था....इस कमीने की वजह से सब हुआ....
तभी उस रूम मे वसीम आ गया और आते ही भड़कने लगा.....
वसीम-ये यहाँ.... तो ये तुम्हारे साथ है...हमेशा से...और तूने बताया भी नही...और अब तू मुझे धोखा देने चला...
सरद- नही...पर हमे अंकित की दौलत चाहिए...फिर उसे मारेंगे....उससे पहले उसे मरने नही देगे...समझा...
वसीम(सरद की कोल्लेर पकड़ कर)- आज तेरी वजह से मेरा बेटा हॉस्पिटल मे पड़ा है....अगर उसे कुछ हो जाता तो मैं...
तभी वहाँ खड़ा तीसरा आदमी बोला....
""चुप कर...वो तेरा बेटा नही...समझा...""
वसीम- वो मेरा ही बेटा है अब...समझे...और मैं ही उसका बाप हूँ...
""ओह्ह..अगर उसे बता दूं कि उसका बाप कौन था और वो कहाँ गया...फिर...क्या फिर वो तुझे बाप मानेगा...ंहिईिइ....""
वसीम- बकवास बंद कर....
सरद- देख वसीम..हम दोनो का मक़सद एक है..अंकित की फॅमिली का सफ़ाया...तो झगड़ा क्यो...हमे उसकी इज़्ज़त और दौलत लूटने दे...उसके बाद तू जो चाहे कर लेना...ओके...
वसीम- हाँ..पर....
तभी उन्हे खिड़की के पास कोई आवाज़ आई और तीनो सतर्क हो गये....
सरद- क्क...कौन है...
वसीम- कौन होगा...कही कोई...ओह्ह्ह...
तभी तीसरा आदमी गुर्राया....
""शांत रहो...सरद...तू वसीम को संभाल...मैं देखता हूँ...""
जब वो आदमी बाहर आया तो उसे दो साए भागते दिखाई दिए...वो भी पीछे लपका....
मोहिनी(भागते हुए)- मोना...अंकित को फ़ोन कर....जल्दी...उसे बुला यहाँ ..
मोना- हाँ..हां...
मोना ने मुझे कॉल किया और तभी एक गोली चली....जिससे मोहिनी ज़मीन पर गिर गई....
मोना(चिल्ला कर)- मोम....
मोहिनी(ज़मीन पर पड़ी कराहती हुई)- भाग बेटी...आअहह...अंकित को....आअहह...
मोना- हा...हा...
तभी मैने फ़ोन रिसीव किया .....
मैं- हाँ मोना ..कैसी हो...
मोना(हाफ्ते हुए)- अंकित...तुम्हे कुछ बताना है...अभी....
मैं- हाँ बोलो...क्या हुआ...
मोना- तुम...तुम **** एरिया मे बने.....आआआआहह...
और फिर मुझे सिर्फ़ धाम्म की आवाज़ आई...जैसे कोई गिरा हो....
मैं तुरंत अपने आदमियों के साथ वहाँ पहुँचा....पर वहाँ कोई नही मिला.....सिर्फ़ दो लाषे पड़ी थी...मोना और मोहिनी की...
मैं(मन मे)- आख़िर यहाँ हुआ क्या....क्या देख-सुन लिया इन दोनो ने...ज़रूर मेरे बारे मे कुछ था...तभी तो मुझे कॉल किया...पर ऐसा क्या था जिसकी वजह से इनको अपनी जान गॅवानी पड़ी....कुछ तो हुआ है....पर क्या....
क्या मैं वो बात कभी जान पाउन्गा या कभी नही....??????????
मैं मोना और मोहिनी की लाश के पास ही खड़ा था की तभी वहाँ इनस्पेक्टर आलोक आ गये...और साथ मे रफ़्तार सिंग भी आया.....
आलोक- अंकित...यू आर फाइन....??
मैं- यस सर...बट ये दोनो....हुह...हमे आने मे देर हो गई....
आलोक- ह्म्म...रफ़्तार....डेड बॉडीस को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दो...तब तक मैं इस घर की तलासी ले लेता हूँ....
मैं- सिर...इफ़ यू डोंट माइंड...मैं भी साथ चलूं.....
आलोक- ओके...चलो...
फिर मैं और आलोक घर के अंदर दाखिल हो गये.....घर मे वैसे तो सब ठीक था...सिर्फ़ एक रूम मे कुछ गड़बड़ लगी...
उस रूम मे टेबल पर 2 पेग और स्नॅक्स रखा हुआ था....एक तरफ विस्की की खाली बोतल लुड़की पड़ी थी और एक तरफ एक ग्लास टूटा पड़ा था...ऐसा लग रहा था कि किसी का फुल पेग गिर गया हो....
इसके अलावा वहाँ कोई खास चीज़ नही मिली....सिबाए एक के....वो था एक बटन....वो किसी की शर्ट का बटन लग रहा था....
आलोक- ह्म्म...देख कर लगता है कि यहाँ तीन लोग थे...
मैं- ह्म्म...3 पेग जो बनाए गये...है ना....
आलोक- बिल्कुल ठीक...अब ये पेग ही बातायगे कि इन्हे पीने वाला था कौन...
मैं- यू मीन फिंगर प्रिंट्स....
आलोक- यस...फिंगर प्रिंट्स उनका नाम बतायगे...
मैं- आइ डोंट थिंक सो...आइ मीन...अगर वो 2 मर्डर करने की सोच सकते है...तो इतना तो सोचा ही होगा कि फिंगर प्रिंट्स मिटा दे...आइ मीन...शायद वो प्रोफेशनल हो....
आलोक- हो सकता है...बड़े बड़े से बड़ा मुजरिम भी ग़लती कर जाता है.....
मैं- आइ होप आप सही हो....(गुस्से से) मैं जल्द से जल्द जानना चाहूगा कि आख़िर इस रूम मे ऐसा हुआ क्या...जिसे देखने पर इस दो मासूमो को अपनी जान देनी पड़ी...
मैं(गुस्से से)- रफ़्तार....मेरी छोड़...तेरी सुन...तुम्हारी कब्र खोदना सुरू कर दी है मैने...बहुत जल्द तुम्हे अपनी सारी करतूतों की कीमत चुकानी पड़ेगी...समझा....
रफ़्तार(गुस्से से चिल्ला कर)- तेरी ये हिम्मत...मैं तुझे.....
आलोक(पीछे से )- रफ़्तार....
रफ़्तार- जी सर...आया.....(मुझे घूर कर) जल्दी मिलूँगा बच्चे....फिर देखना....
मैं- ह्म्म...जल्दी मिलेगे....
आलोक- अंकित...तुम भी निकलो अब...कुछ पता चला तो कॉल करूगा...
मैं- ओके सर ....बाइ...
और मैं वहाँ से निकल कर घर आ गया...पूरे रास्ते मैं उस बटन के बारे मे सोचता रहा...जो मुझे मिला था....मुझे ये याद था कि मैने वो बटन कही देखा है...पर कहाँ देखा ये याद नही आ रहा था....
फिर मैं घर पहुँचा...खाना खाया और सविता से टिपीन मे खाना पॅक करा कर हॉस्पिटल चला गया....सोनू के पास....
वहाँ जा कर मैने सोनू को खाने का बोला और जब तक अकरम से मिल कर आ गया....
आज की रात मैं सोनू के साथ ही हॉस्पिटल मे रुक गया.....
रात को मैं एक तरफ तो उस बटन के बारे मे सोचता रहा...जो मुझे अभी तक याद नही आया था.....
दूसरी तरफ मुझे रफ़्तार की बातों पर गुस्सा आ रहा था....मैने सोच लिया कि रफ़्तार को सबक सिखाने का टाइम आ गया....
पर प्राब्लम ये थी की एक पोलीस वाले के साथ कुछ करूगा तो पोलीस केस मे फस सकता हूँ....
फाइनली मैने सोच लिया कि रफ़्तार को सबक सिखाने के लिए सबसे पहले उसकी वर्दी उतरवानी पड़ेगी....फिर उसके साथ कुछ भी कर सकता हूँ....उसमे ज़्यादा परेशानी नही होगी और पोलीस के लफडे मे भी आसानी से नही फसुगा....
ये डिसाइड कर के मैने एक कॉल किया और कुछ बात कर के सो गया.....
पूरी रात आधे टाइम मैं सोया और आधे टाइम सोनू....क्योकि हम दोनो ही सोनम और अकरम की देख-रेख कर रहे थे....हालाकी मेरे आदमी हॉस्पिटल के बाहर थे...फिर भी हमने खुद ही नज़र रखने का फैशला किया ....
जब सुबह हुई तो हम दोनो ही थके हुए दिख रहे थे....और तभी डॉक्टर ने आ कर बॉम्ब फोड़ दिया....
डॉक्टर- हेलो बाय्स...गुड मॉर्निंग....
मैं- मोर्नग डॉक्टर...एवेरितिंग ईज़ फाइन...
डॉक्टर- सॉरी...आइ हॅव आ बॅड न्यूज़....
मैं और सोनू डॉक्टर की बात सुन कर खड़े हो गये....और सोनू तो घबरा ही गया था....
सोनू- मेरी बेहन...वो ठीक है डॉक्टर...
मैं- क्या हुआ डॉक्टर...और किसे हुआ....
डॉक्टर(सोनू से)- रिलॅक्स...मेरी बात सुनो...तुम्हारी बेहन को कुछ नही हुआ...पर...
मैं- पर क्या...क्या अकरम को कुछ...
डॉक्टर(बीच मे)- नही...वो बिल्कुल ठीक है...असल मे प्राब्लम लड़की कॉन है...
सोनू- कैसी प्राब्लम...
डॉक्टर- असल मे गोली उसके दिल के काफ़ी नज़दीक लगी है...जिससे हम काफ़ी साबधनी बरत रहे है..बट फिर भी उसका ज़ख़्म पूरी तरह से नही भर पा रहा...बार -बार ज़ख़्म खुल रहा है...इसलिए हमे तुरंत स्पेशलिस्ट सुरगें को बुलाना पड़ेगा....वी आर नोट स्पेशलिस्ट....
मैं- तो बुलाए ना....देर किस बात की...
डॉक्टर- ओके...बट इसके लिए आपको 20 लख्स का खर्चा पड़ेगा...आइ मीन सब मिला कर...उसका चार्ज ज़्यादा है...
सोनू- 20 लाख...इतना पैसा कहाँ से...
मैं(बीच मे)- ओके डॉक्टर..आप बुलाए...
डॉक्टर- ओके...तो आप 2 दिन मे पैसा जमा करवा दीजिए....हम उसे बुलाते है.....और हां...आप चाहे तो लड़के को घर ले जा सकते है...वो अब ठीक है...
मैं- ओके डॉक्टर...थॅंक यू....
जब डॉक्टर चला गया तो सोनू मुझे अपनी रुआंसी हो चुकी आँखो से देखने लगा....
मैं- क्या हुआ...
सोनू- 20 लाख...
मैं- डोंट वरी...मैं हूँ ना...
सोनू(मेरे गले लग कर)- थॅंक्स भाई...मेरी बेहन के लिए तू इतना सोच रहा है...थॅंक्स...
मैं- अबे तेरी बेहन है तो मेरी भी कुछ हुई ना....चल रोना बंद कर...तू यही रुक मैं अकरम को घर छोड़ कर और पैसे ले कर आता हूँ..ओके...
सोनू- ओके ...पर तू अकरम के घर बतायगा क्या...आइ मीन..क्या गोली लगने का बता देगा ....
मैं- ओह...ये तो सोचा ही नही...कल रात तो मैने बोल दिया था कि वो मेरे साथ है....अब गोली का तो बोल ही नही सकता...कुछ सोचना पड़ेगा....
सोनू- पर वसीम ...आइ मीन अकरम के डॅड ने कुछ बोल दिया हो तो...
मैं- नही...उसकी टेन्षन नही...वो तो कल रात घर ही नही गया था....
सोनू- तो कहाँ था...यहाँ तो था नही...
मैं- वो सब छोड़...तू फ्रेश हो जा...तब तक मैं कुछ सोचता हूँ...फिर ले जाउन्गा...ओके...
फिर सोनू फ्रेश होने निकल गया...और मैं सोचने लगा कि आख़िर अकरम के घरवालो से बोलूँगा क्या....
सुबह के 6 बजे रफ़्तार डाल्ली की तरह जॉगिंग करने पार्क मे निकल गया....
वहाँ जा कर उसने जॉगिंग स्टार्ट की तभी एक लड़की भी उसके साथ मे जॉगिंग करने लगी....
रफ़्तार ने गौर किया कि वो लड़की बार-बार उसको देख रही थी...
रफ़्तार ने जब थोड़ा पास जा कर उस लड़की को गौर से देखा तो उस लड़की को देख कर गरम होने लगा...साला ठर्की जो ठहरा...
उस लड़की ने एक टाइट स्पोर्ट वेस्ट और शॉर्ट पहना हुआ था....
उसकी वेस्ट मे उसके बूब्स ऐसे कसे हुए थे...कि उपेर से ही पूरा आकार समझ आ रहा था....उस पर से कुछ हिस्सा नंगा भी दिखाई दे रहा था....और वेस्ट आधे पेट तक ही था...जिससे उसका चिकना पेट और मादक नाभि भी सॉफ दिख रही थी..
और उसका शॉर्ट भी बॉडी पर इतना कसा हुआ था कि उपेर से ही गान्ड का पूरा शेप सॉफ दिख रहा था....
फिर क्या था...रफ़्तार की ठरक बढ़ गई और वो उस लड़की के पीछे-पीछे जॉगिंग करने लगा....वो लड़की भी बार-बार पीछे मूड कर रफ़्तार को देखती और स्माइल कर देती....
एक तो लड़की की कसी हुई गान्ड देख कर रफ़्तार पहले ही गरम हो रहा था..उपर से लड़की की स्माइल ने आग मे घी का काम कर दिया....
कुछ देर की जॉगिंग मे रफ़्तार को लगने लगा कि बस ...अब ये लड़की उसके हाथ मे आ जाएगी...
फिर वो लड़की साइड मे बैठ कर योगा करने लगी और रफ़्तार भी उसी के पास जा कर एक्सरसाइज़ करने लगा....दोनो आमने-सामने थे और एक दूसरे को देख रहे थे....
लड़की ने योगा करते हुए अपने दोनो पैरो को साइड किया तो रफ़्तार का मुँह खुला रह गया....लड़की ने अंदर शायद पैंटी नही पहनी थी....इसलिए चूत का शेप कुछ-कुछ नज़र आ रहा था....
ये नज़ारा देख कर रफ़्तार अटक सा गया और एक टक उस लड़की के पैरो के बीच मे देखने लगा....
लड़की ने भी रफ़्तार को यू घूरते देखा तो एक स्माइल कर दी...ये रफ़्तार के लिए ग्रीन सिग्नल था...
रफ़्तार तुरंत उठा और आस-पास देख कर चेक किया कि कोई देख तो नही रहा....
जब उसने देखा कि सब अपने आप मे बिज़ी है तो वो लड़की के पास पहुँच गया....
रफ़्तार- हेलो...क्या नाम है तुम्हारा...
लड़की- नाम...नाम से क्या करना...काम करो ना....
रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- इस एज मे इतनी आगे..गुड...
लड़की- असली एज तो यही है...जिंदगी के मज़े लेने की....
रफ़्तार- ओह हो...तो कैसे मज़े लेती हो....
लड़की- ह्म्म...आपको देख कर तो नही लगता कि आप इतने मासूम है...जो मज़े का मतलब ना समझे....
लड़की- इस नाज़ुक हुश्न की मल्लिका....जो हवसियो की हवस मिटाने के लिए हमेशा रेडी रहती है....
रफतात- अच्छा....तो मेरी हवस मिटाओगी....
लड़की- ह्म्म...आप मेरे हुश्न के आगे टिक पाओगे...लगता तो नही....
रफतात(थोड़ा अकड़ कर)- लड़की ...मैं वो चीज़ हूँ जो अच्छे ख़ासे हुश्न की धज्जिया उड़ा देता हूँ....एक बार मेरे साथ चल ...कभी भूल नही पायगी....
लड़की- भूल तो आप भी नही पायगे....मैं आपकी जिंदगी बदल दूगी...
रफ़्तार- अच्छा...तो नंबर. ले ले मेरा....फिर मिलते है...
लड़की- नही..जो करना है अभी करो....मेरे पास टाइम नही...
रफ़्तार(चौंक कर)- अभी...पर यहाँ कैसे...
लड़की- 5 मिनट मे लॅडीस वॉशरूम मे आ जाओ...वो पार्क के उस साइड है...वहाँ...फिर देखते है...कितनी हवस है आपके अंदर....
रफ़्तार- ठीक है...तू चल...मैं आता हूँ...फिर दिखाता हूँ तुझे...
लड़की- आज सारी हवस ख़त्म हो जाएगी...हहहे....आ जाओ...
और फिर लड़की वहाँ से उठ कर साइड मे बने वॉशरूम मे गई और रफ़्तार का वेट करने लगी ....
5 मिनट बाद रफ़्तार भी वहाँ पहुँच गया...जैसे ही उसने गेट पर नॉक किया तो लड़की ने किसी को मसेज किया और गेट खोल दिया....
अंदर घुसते ही रफ़्तार ने लड़की को बाहों मे कस लिया और चूमने के लिए उसके होंठो पर होंठ रखने चाहे..पर लड़की ने हाथ लगा कर रोक लिया...
रफ़्तार- अब क्या हुआ....अभी तो वहाँ...
लड़की(बीच मे)- अरे...सब कर लेना...पर 2 मिनट रूको तो...
रफ़्तार- किस लिए...
लड़की- पहली बात तो ये कि मैं कपड़े कराब नही करना चाहती...तो मुझे कपड़े निकालने दो....आप भी निकाल लो...और दूसरी बात ये..कि मुझे हल्का होना है...यू नो व्हाट आइ मीन...तभी मज़ा आएगा ना....
रफ़्तार- ह्म्म...तो जल्दी करो...रहा नही जाता...
फिर लड़की उस वॉशरूम मे बने टायिलेट्स मे से एक मे घुस गई और रफ़्तार बाहर कपड़े निकालने लगा....
कुछ देर बाद ही लड़की के मोबाइल पर मिस्कल्ल आया और लड़की चिल्लाती हुई अंदर से निकल कर सीधा वॉशरूम के बाहर भाग गई...
रफ़्तार लड़की की इस हरक़त से चौंक गया और वो भी बाहर भागा....
जैसे ही वो बाहर आया तो उसने देखा कि वहाँ भीड़ जमा है...और सब लोग उसे गुस्से से देख रहे है...और वो लड़की एक औरत से लिपट कर रो रही है...उसकी ड्रेस भी चेंज थी...और वो फटी भी थी...
लड़की(रोते हुए)- यही है वो...इसने मेरे साथ जबर्जस्ति.....(और रोने लगी)
रफ़्तार कुछ समझ पाता उससे पहले ही एक औरत ने आगे आ कर रफ़्तार के गाल पर तमाचा जड़ दिया....
औरत- कमीने...शर्म नही आती..अपनी बेटी की उमर की लड़की के साथ..छी....
तभी एक आदमी भी आयेज आया और उसने भी एक तमाचा मार दिया...
आदमी- ऐसे कमीने को तो नंगा कर के मारना चाहिए..
रफ़्तार संभला और उस आदमी का हाथ पकड़ के बोला...
रफ़्तार- ओये...जानता है मैं कौन हूँ...पोलीस वाला हूँ...और पोलीस वाले पर हाथ उठाने का अंजाम जानता है...रुक मैं बताता हू...
आदमी- साले ..पोलीस वाला है तो क्या...लड़की की इज़्ज़त लूटेगा...
उस आदमी ने दूसरा हाथ उठाया तो रफ़्तार ने उसे लात मार कर गिरा दिया....
तभी वहाँ खड़े लोग आगे बढ़े...और मारो-मारो बोलते हुए रफ़्तार की पिटाई चालू कर दी...
रफ़्तार बेचारा मार ख़ाता रहा पर कुछ कर नही पाया...
थोड़ी देर बाद एक रौबदार आवाज़ ने भीड़ को शांत कर के अलग किया और रफ़्तार को उठाया....
रफ़्तार ने आँखे खोल कर देखा तो सामने इनपेक्टोर आलोक हवलदार के साथ खड़े थे...
रफ़्तार- स्सीर्र. .आप...
आलोक- तो तुम थे वो कमीने....शर्म नही आती...बेटी की उमर की लड़की के साथ जबर्जस्ति करते हुए....वो भी एक पोलीस वाले होकर...
रफ़्तार- सर...वो लड़की ...आहह...वो कमीनी...
चटाक़....
आलोक ने एक थप्पड़ खीच दिया और रफ़्तार ज़मीन पर जा गिरा...
आलोक- अब जो कुछ कहना है अदालत मे कहना...मैं इस सब की शिकायत पर तुम्हे गिरफ्तार करता हूँ और तुम्हे अभी सस्पेंड करता हूँ....हवलदार...ले चलो इसे...और डाल दो हवालात मे...
हवलदारो ने हुकुम का पालन किया और रफ़्तार को ले कर जीप मे डाल दिया....रफ़्तार जीप तक आते हुए उस लड़की को देखता रहा...पर वो कही नही दिखी....
फिर आलोक रफ़्तार को ले गया और हवालात मे डाल दिया.....
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और यहाँ हॉस्पिटल मे मैने अकरम को सारा प्लान समझा दिया कि उसे घर क्या बोलना है.....
अकरम- ह्म्म...पर सब लोग...ये मानेगे क्या...???
मैं- हाँ...मान ना पड़ेगा....मैं उन्हे मनाउन्गा....तू बस मेरे साथ रहना...ओके....
फिर सब लोग अकरम को ऐसे देखने लगे जैसे वो कोई अजूबा हो...बेचारा अकरम....वो चुप रहा ...बस मुझे देखने लगा....
मैं- पहले आप लोग शांत हो जाइए....ऐसा कुछ भी नही हुआ की कोई टेंशन ले...असल मे एक छोटी सी चोट है....बस...
सादिया(उठ कर अकरम के पास आई )- छोटी सी चोट...बट पट्टी देख कर तो लगता है कि बढ़ा घाव है ..हाँ...
मैं- वो गर्दन मे है ना...इसलिए लगा होगा...वैसे मामूली चोट है...
सादिया- ह्म्म...पर हुआ क्या...ये चोट लगी कैसे...
मैं(नज़रे झुका कर)- ये मेरी ग़लती है....
मेरे बोलते ही सब लोग मुझे देखने लगे जो अभी तक अकरम को देख रहे थे....
मैं- हाँ...ये सब मेरी वजह से हुआ...सॉरी...बट अकरम को ये चोट...
सबनम(बीच मे)- नही बेटा...सॉरी मत बोलो...हम सब जानते है कि तेरे लिए अकरम क्या मायने रखता है...इसलिए ये भी समझते है कि तू जान-बूझ कर अकरम को कोई चोट नही पहुँचा सकता...तो प्ल्ज़ बेटा...तुम्हे नज़रे झुकाने की ज़रूरत नही...
मैं- थॅंक्स आंटी...फिर भी ..ग़लती तो मेरी ही है ना....
सबनम- तो क्या हुआ...इंसान से ग़लती तो हो ही जाती है...पर तू दिल पर बोझ मत रखना....जो हुआ उसे कयामत समझ कर भूल जा....मेरे लिए तो ये ज़्यादा मायने रखता है कि तुम दोनो ठीक हो....ओके...
सादिया- ह्म्म...सही कहा....पर अब ये तो बताओ कि ये सब हुआ कैसे...
सादिया की बात सुन कर एक बार फिर अकरम ने मुझे देखा तो मैने सब बताना सुरू किया....
मैं- असल मे कल रात हम डाइट बोर्ड पर निशाना लगा रहे थे....जब मैं डॉट मार रहा था तो अकरम सामने आ गया...बोला कि उसे मारने दो...
पर मैने मना किया...और उसे साइड मे होने को कहा...पर अकरम नही हटा...
मैने सोचा कि मैं अकरम के साइड से डॉट मार दूँगा....वही अकरम ने सोचा कि मैं उसे देख कर डॉट नही मारूगा....
तभी मैने डॉट मार दिया और उसी टाइम अकरम मुझे डराने डॉट की तरफ आ गया....और डॉट अकरम की गर्दन पर टकराया....डॉट इतना नुकीला था कि गर्दन चीर डाली....और ये सब...
इतना बोल कर मैं गर्दन झुका कर खड़ा हो गया....पर सबनम मेरे पास आई और मुझे गले लगा लिया...
सबनम- मायूस मत हो बेटा....ये तो किस्मत की बात है....ग़लती तो उस डॉट की है...है ना...(और सबनम मुस्कुरा दी...और बाकी सब भी...)
ज़िया- क्या भाई...इतने मजबूत हो..और एक डॉट से हार गये....ऊऊओह...
तभी पीछे से वसीम की आवाज़ आई जियाने सबको चौंका दिया...
वसीम- डॉट....ये चोट डॉट से लगी...
सबनम(वसीम के पास जा कर)- हाँ...और आप कहाँ से आ रहे है...और आप ऐसे....क्या हुआ...आपका ऐसा हाल...
वसीम की हालत इस टाइम ठीक नही लग रही थी...इसलिए सब उसे घूर रहे थे...पर मैं उसे एक अलग ही नज़र से घूर रहा था....
वहाँ सबनम ने डॉट की कहानी वसीम को सुनानी सुरू की और वसीम एक तक मुझे ही देखता रहा....
मैं भी जनता था की वेसिम कुछ नही बोलेगा....बोलेगा तो खुद ही फासेगा....पर मैं ये जानना चाहता था कि कल रात से ये गायब कहाँ था......
वसीम ने जब मुझे घूरते देखा तो अपने आप को ठीक किया और मुझसे नज़रे चुरा ली...और सबनम से कुछ बोल कर अपने रूम मे निकल गया.......
मैं(मन मे)- तुम चाहे जितना भी छिप लो सरफ़राज़ ख़ान....पर मैं तुझे दुनिया के सामने नंगा कर के ही दम लूगा....तब तक मज़े कहे...हुह...
फिर हम सबने नाश्ता किया और नाश्ते के बाद मैने अकरम को उसके रूम मे छोड़ा और बाद मे आने का बोल कर निकाल आया ...फिर मैं जूही से मिला और उसका हाल पूछ कर अकरम के घर से अपने घर निकल आया....
अपने घर आ कर मैने कुछ सामान लिया और फिर से बाहर निकल गया.......