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चूतो का समुंदर

इधर रिचा के घर..........

सुबह-सुबह रिचा ने अपनी बेटी को कॉलेज भेजा और गेट बंद कर ही रही थी कि अचानक से गेट पर धक्का पड़ा जिससे रिचा पलट कर अंदर गिर गई...और वो उठ ही रही थी कि किसी ने उसे पीछे से दबोच लिया.....

रिचा की चीख निकलने ही वाली थी पर उस सक्श ने रिचा का मुँह दबा लिया....

रिचा- ग्गगूवंम्म...उउउम्म्म्म...

""श्हहीयीययी.....मैं हूँ...चिल्ला मत...""

और उस सक्श ने रिचा का मुँह छोड़ दिया.....

रिचा(पलट कर)- तुम...तुम इस तरह क्यो आए...मेरी तो जान ही निकाल दी....

"" अरे नही मेरी जान...तेरी जान बहुत कीमती है मेरे लिए....समझी....""

रिचा- जानती हूँ...मैं ना होती तो तुम अब तक फस चुके होते....

""ह्म्म...और तुम...तुमने भी तो कांड किए है...और साजिश ऐसी रचाई कि सफ़राज़ ने हथियार उठा लिया...और वो फँसता ही चला गया...गुड...""

रिचा- पर तुम यहाँ कैसे...कही सरफ़राज़ को भनक भी लग गई कि तुम मुझे जानते हो तो हम दोनो गये....

"" सरफ़राज़ की छोड़ो...उसे तो अंकित निपटा देगा...और अंकित निपट गया तो भी वो हमारा कुछ नही कर पाएगा....""

रिचा(बैठते हुए)- वैसे मानना पड़ेगा....सोनू के बाप को किडनॅप तुमने किया...और इल्ज़ाम आएगा सरफ़राज़ पर...

"" ह्म्म...पर साले ने ग़लती कर दी...उस लड़की को मार दिया...""

रिचा- ह्म्म..पर दूसरी बार ये नही होगा...अंकित बेड पर पहुँच जायगा....

"" और साथ मे सोनू का बाप और वो रश्मि भी उपर जाएँगे....हाहाहा....""

उस सक्श के साथ रिचा भी ठहाका मारने लगी कि तभी उन्हे एक आहट सुनाई दी...और उस तरफ देख कर दोनो की गान्ड फट गई...

सामने वाला- तो तुम हो...तुम हो असली दुश्मन.....मैं तुम्हे अंकित के सामने...आआआआअहह...

बात पूरी होती उससे पहले ही उसके सीने मे एक खंजर उतर गया...और उसकी आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गई....

पहाड़ी रास्ते पर रात के अंधेरे मे एक कार बहुत तेज़ी से चल रही थी...और उससे भी बड़ी कार उसके पीछे लगी हुई थी...

पीछे वाली कार बार-2 आगे वाली कार को टक्कर मारती रही...जैसे तैसे ड्राइवर उसे संभाल रहा था...

पर एक टक्कर ऐसा लगा कि ड्राइवर कार के नीचे गिर गया और वो कार नीचे खाई मे जा गिरी...जिसकी पिछली शीट पर कोई बैठा हुआ था.....

कार खाई मे गिरी और दूसरी कार उपेर रुकी...उसमे से रफ़्तार सिंग बाहर निकला और किसी को कॉल किया....

रफ़्तार- कार तो गई...और उसमे बैठने वाला भी उपेर गया....पर वो था कौन...??

सामने- तुम सिर्फ़ आम खाओ...गुठलियाँ मत गिनो...ओके..अब निकलो वहाँ से...और जब तक मैं ना कहूँ मुझे कॉल मत करना....

रफ़्तार(फ़ोन रख कर)- ये पैसो की भूख भी क्या-क्या करायगी....चलो...भगवान मरने वाले को शांति दे....

इधर अंकित के घर................

पूरा दिन पारूल के साथ बिताने के बाद ...मैं शाम को रेडी हुआ और धूम नाइट क्लब निकल गया.....

क्लब मे कुछ देर बिताने के बाद ही वो लेडी आ गई...जिसके इंतज़ार मे मैं वहाँ आया था....

उसने मुझे देखा नही था और वो अपनी फ्रेंड्स के साथ टेबल पर आ कर टकीला लगाने लगी...

मैं काफ़ी देर तक बार काउंटर पर खड़ा हुआ ये नज़ारा देखता रहा और फिर उसके सामने वाली टेबल पर बैठ गया....

थोड़ी देर बाद ही उसकी नज़र मुझ पर पड़ी...पर मैने उसे इग्नोर किया और उसके चेहरे पर गुस्सा छा गया....

एक बात तो सच है...एक औरत की खूबसूरती पर सवाल उठा दो...फिर वो खुद पीछे आयगी....उस सवाल का जवाब ढुड़ने....

मुझे देखते ही वो लेडी गुस्से से भर गई और अपनी फ्रेंड्स के साथ कुछ डिस्कस करने लगी...

पर मैं उसे अभी भी इग्नोर ही कर रहा था....थोड़ी देर बाद वो उठ कर मेरे सामने खड़ी हो गई और मुझे घूर्ने लगी....

लेडी(गुस्से से)-एक्सक्यूज मी....

मैं- यस प्लीज़....

लेडी- तुम मेरा पीछा कर रहे हो...???

मैं- व्हाट...पीछा..वो भी तुम्हारा...नो वे...

लेडी- झूट मत बोलो...तुम वही हो ना..जिसने आज सुबह मेरी इन्सल्ट की थी...

मैं- ह्म्म..तो ये याद है...पर ये याद नही कि मैने तुम्हे बचाया भी था...रिमेंबर...

लेडी- याद है..इसलिए ही तो तुमसे आराम से बात कर रही हूँ, वरना...

मैं- वरना...वरना क्या....भूल गई...मेरा कोई कुछ नही कर सकता..समझी...

लेडी(लंबी सास ले कर)- ओह्ह्ह....ओके...ये बताओ कि मेरा पीछा करते यहाँ क्यो आए...

मैं- ग़लतफहमी है तुम्हारी...मैं कोई पीछा नही कर रहा...और करूँ भी क्यो...हाँ ..अगर कोई सेक्सी लेडी होती तो ज़रूर करता...

लेडी(गुस्से से)- सेक्सी..सेक्सी...सेक्सी....क्या मैं सेक्सी नही...हाँ...

मैने उसे उपेर से नीचे तक गौर से देखा...उसने एक 1 पीस ड्रेस पहनी हुई थी...जो जाँघो तक जाती थी...और इतनी टाइट थी की बूब्स ड्रेस को फाड़ने को तैयार थे...साथ मे उसके गोरे बाजू भी लाइट की रोशनी मे दमक रहे थे....होंठो पर लिपस्टिक और खुले हुए बाल उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रहे थे...

मैं(सिर हिला कर)- उम हूँ...तुम सेक्सी नही...मेरे लिए तो नही...

 


मेरी बात सुनकर लेडी बोखला गई और टेबल पर हाथ रख कर मेरी आँखो मे झाँक कर बोली....

लेडी- तुम्हारे लिए सेक्सी की डेफ़िनेशन क्या है...बोलो...

मैं- वेल...वो तुमसे नही होगा...तो उसे छोड़ो और बैठ कर एक जाम मेरे साथ लो...सारे गीले-सीकवे दूर करते है...आओ...बैठो...

मैने उसकी बात को सिरे से खारिज कर दिया और उसके लिए खड़े हो कर चेयर खीच दी...

लेडी(मुझे घूरते हुए)- तुमने तो मॅटर ही बदल दिया...हाँ...

पर वो मेरे कहने पर बैठ गई और मैने 2 स्कॉच का ऑर्डर कर दिया...

लेडी- बोलो तो...सेक्सी का मतलब क्या है तुम्हारे लिए...

मैं- ह्म्म...तुम गुस्सा हो जाओगी...रहने दो...

लेडी- नही...मैं गुस्सा नही करूगी...बोलो...

मैं- ओके..बट पहले 1 जाम मेरे साथ...पुरानी बाते भूलने के लिए...ह्म्म.

लेडी(पेग उठा कर)- ओके...फॉर न्यू स्टार्ट...चियर्स...

और हमने अपने पेग की सीप मारी...

लेडी- उम्म..अब बताओ...तुम्हारी नज़रों मे एक औरत सेक्सी कब होती है...

मैं- बताउन्गा...पर पहले जान-पहचान तो कर ले...माइसेल्फ अंकित...न यू ??

लेडी- शीला...शीला वर्मा...

मैं- नाइस टू मीट यू मिसेज़.शीला...

शीला- सेम हियर....अब बताओगे भी...

मैं- ओके...बट बुरा लगे तो इग्नोर करना..ओके...

शीला- ओके..ऐज आ फ्रेंड ही सुनुगि..अब बोलो भी...

मैं(सीप मार कर)- सेक्सी का सही मतलब वो होता है...जो बेड पर आपको अपनी तरफ खीच ले....

शीला(हँसती हुई)- मतलब...??

मैं- मतलब ये कि जो लेडी मुझे बिस्तर पर बुलाने मे कामयाब हो जाए..मेरे लिए वो ही सेक्सी है...

शीला(ज़ोर से हंस कर)- हहहे...ऐसे तो तुम्हे कोई सेक्सी लगेगी ही नही...

मैं- नही...ऐसी मिली है मुझे...वो मुझे बिस्तर तक ले गई...और फिर मैने उन्हे सेक्सी का टॅग दिया...

शीला(हैरानी से)- मतलब सेक्स करने के बाद....??

मैं- तो बेड पर क्या होता है इसके अलावा...ह्म्म्म.

शीला- उफ़फ्फ़...ऐसी औरते भी होती है...नो वे....

मैं- ह्म्म..जो सेक्सी होती है...वो ऐसी ही होती है...

शीला- सॉरी...मैं इस तरह की सेक्सी बनना कभी नही चाहूँगी...

मैं- पता है...तुम सेक्सी नही हो सकती...तुम अपने पति के साथ ही अड्जस्ट करो..न्ड वाई द वे...आइ हॅव टू गो...सी यू अराउन्ड...बब्यए...

और वो कुछ बोलती इससे पहले ही मैं उठ गया और शीला फटी आँखो से मुझे जाता हुआ देखती रही ....

मैं(कार मे)- कुछ ज़्यादा ही हो गया आज...पर हो गया तो हो गया...नेक्स्ट टाइम उसे लाइव एग्ज़ॅंपल दूँगा...शायद कुछ बात बढ़े...देखते है...

और मैं घर निकल आया....

घर आ कर मैने देखा कि सविता , रेखा और हरी कुछ चिंता मे दिख रहे थे ...

मैं- हेलो...क्या हुआ...तुम सब के चेहरे पर 12 क्यो बजे है...

रेखा- सर...वो रश्मि...

मैं- रश्मि को क्या हुआ...

रेखा- वो अभी तक आई नही...सुबह की निकली हुई है...

मैं- तो कॉल करो...पता चल जायगा कि कहाँ है...

रेखा- किया..पर उठा ही नही रही...

मैं- रूको मैं करता हूँ...

मैने रश्मि को कॉल किया तो किसी लड़की ने कॉल लियाऔर पूछने पर बताया कि रश्मि बाथरूम मे है...वो आज नही आयगी....

मैने उसका नाम पूछा तो उसने रूचि बताया....ये नाम सुनते ही रेखा रिलॅक्स हो गई...उसने बताया कि रूचि रश्मि की खास फ्रेंड है....और रश्मि रूचि के घर कभी-कभी रुक भी जाती है...

मैं- अब ठीक है ना...तो चलो डिन्नर लगाओ...और पारूल के रूम मे ले आना...

फिर डिन्नर कर के कुछ देर पारूल के पास रुका और फिर सोने लगा...

तभी डॅड मेरे रूम मे आ गये....

मैं- दाद...आप, इस वक़्त....कोई ज़रूरी काम था....

आकाश- हा...बहुत खास काम है...

मैं- हा बोलिए...

डॅड मेरे पास आए और मुझे एक पेपर पकड़ा दिया....

मैं- ये क्या है...

आकाश- ये..मेरे एक अकाउंट के पेपर है...तुम्हारे साइन चाहिए....

मैं- ह्म्म्म ...

थोड़ी देर बाद मैने साइन कर दिए...मुझसे पेपर वापिस ले कर डॅड वापिस जाने लगे...

मैं- डॅड...मैं हमेशा आपके साथ हूँ...डोंट वरी...न्ड गुड नाइट....

आकाश- गुड नाइट बेटा....

एक आलीशान घर मे.........

रिचा अपनी आदत के अनुसार कुतिया बनी हुई थी और उसका बॉस उसकी गान्ड मारे जा रहा था....

रिचा- आहह..आहह..आहह...आअराम से ना...

बॉस- अरे आराम कहाँ...तेरी गान्ड मानती ही नही...ईएहह...

रिचा- साले ...तेरी बेटी की गान्ड भी नही मानती ...आअहह ..आहह...

बॉस- हाँ रंडी...वो भी नही मानती...रंडी हो गई तेरे जैसी...एस्स...

रिचा- आहह...तेरे तो मज़े है ना...ठोकता रह...आओउउंम्म...

बॉस- हाँ साली...ये ले...अभी तू ठुकवा बस ...

रिचा- आअहह...आअहह...आअहह...आआईयईई......

बॉस- एस्स..एस्स..एस...एस...ईएहह.....आअहह..

और दोनो झड़ने के बाद बातें करने लगे...

बॉस(सिगरेट जला कर)- फ्फूहह... एक बात बता...उसे लड़की को मरवाया क्यो...अभी उसकी ली भी नही थी मैने....

रिचा- क्या करूँ..साली ने वो सुन लिया था जो उसे सुनना नही चाहिए था...

बॉस- ह्म...पर तू बात किससे कर रही थी..जो उसने सुन ली...हां...

बॉस के इस सवाल पर रिचा सोच मे पड़ गई...अब वो क्या बताए कि वो बॉस को भी धोखा दे रही है...

बॉस- बोल ना...किसे, क्या बता रही थी...??

रिचा- किसी से...नही तो..मैं सिर्फ़ अपने आप से बात कर रही थी कि एक बार अंकित बेड पर पहुँच जाए फिर सोनू के बाप को और रश्मि को मारना पड़ेगा...बस...उसने ये सुन लिया...तो उसे मारना पड़ा...

बॉस- ह्म...पर वो आ कहाँ से गई तेरे घर मे...??

रिचा- पूछो मत...मेरी बेटी है ना...वो गेट खोल कर निकल गई और मैने बिना देखे अपना गणित लगाना शुरू कर दिया...उउफ़फ्फ़...

बॉस- ठीक है ..पर अब तू कातिल भी हो गई...चाकू सीधा गले मे उतार दिया....वाह...

रिचा- करना पड़ता है...अपनी जान बचाने को दूसरो को मारना ही होता है...

बॉस- हाँ...और फिर मुझे कॉल कर दिया और मुझ पर बोझा डाल दिया कि लगाओ ठिकाने...

रिचा(बॉस के मुरझाए लंड को सहला कर)- तो क्या मेरे लिए इतना भी नही कर सकते...

बॉस- क्यो नही मेरी रांड़...तेरे लिए ही तो किया...और उस साले रफ़्तार को 1 लाख देने पड़े इस सब के और ड्राइवर को 20000 अलग से ....

रिचा- फ़िक्र मत करो...मैं इससे भी ज़्यादा दिलवाउन्गी....अपनी रांड़ पर यकीन रखो..ह्म्म..

और रिचा ने बॉस का लंड मसल दिया...

बॉस- क्या इरादा है...घर नही जाना तुझे...

रिचा- नही...आज रात इस लंड के नाम...

बॉस- और तेरी बेटी...क्या वो भी कही लंड खा रही है...हाँ...

रिचा- नही...वो इस शौक से दूर है...वो तो अपनी फ्रेंड के घर पढ़ने गई है...तो मैं घर मे अकेली क्या करूँ...

बॉस- बढ़िया है...तो चूस कर तैयार कर...मैं घर पर कॉल कर के कोई बहाना मारता हूँ तब ताज..फिर रात भर तेरी फाड़ुँगा....

रिचा(लंड चाट ते हुए , मन मे)- साले...अभी जितना चाहे फाड़ ले मेरी...एक दिन तेरी ऐसी फटेगी की फिर तू बचेगा ही नही....उूउउम्म्म्म....

बॉस- अरे...ये तो बता कि उस लड़की के घरवालो का क्या...वो उसे...

रिचा(बीच मे)- वो मैं देख लूगी...अब डिस्टर्ब मत करो...सस्स्रररुउउउप्प्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प...

और कुछ देर बाद उस रूम मे चुदाई की आवाज़े गूज़्ने लगी.....

 


अंकित के घर....नेक्स्ट मॉर्निंग....

सुबह मेरी आँख खुली तो देखा की 9 बज चुके थे...मतलब आज भी मेघा नही आई...

मैं- इस मेघा से जा कर मिलना होगा...आज ही मिलता हूँ....

मैं रेडी हुआ...पारूल के साथ नाश्ता किया और स्कूल निकल गया....

स्कूल मे मुझे रक्षा मिली और उसने मुझे अपनी एक फ्रेंड से मिलवाया...

मैं तो उससे नॉर्मली मिला बट वो मुझे कुछ खास अंदाज़ मे देख रही थी...बट मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया....

मैं- अच्छा...रक्षा...ये बताओ कि तुम्हारी मोम कैसी है...

रक्षा- ठीक है...कल से बिल्कुल ठीक है...

मैं- ओके...चल तू क्लास मे जा अब...

और मैं कॅंटीन मे आ गया...जहाँ मेरे कमीने दोस्त पहले ही आ गये थे...

हमेशा की तरह हमने गप मारी और कॉफी पी कर निकल गये...

घर आते ही मुझे रजनी आंटी का कॉल आ गया....

( कॉल पर)

मैं- हाँ आंटी...बोलो...

रजनी- ह्म..तो आंटी याद है...

मैं- बिल्कुल...आपको क्या लगा...

रजनी- कुछ नही...अब सुन...अभी घर आजा...घर मे कोई नही है...

मैं- आप भी ना...ठीक है...अब आपको मना तो कर नही सकता ...आता हूँ...

मुझे पता था कि रक्षा और अनु अभी स्कूल मे ही है...और पूनम सहर से बाहर...बचा संजू तो वो भी बाहर भटक रहा होगा...मतलब सिर्फ़ रजनी और मेघा ही घर मे है...

चलो...मेघा से मिलने तो जाना ही था...अब रजनी को भी खुश कर दूगा...

यही सोच कर मैं रजनी के घर पहुँचा...पर रजनी बाथरूम मे थी...

मैं तुरंत मेघा के रूम मे चला गया...जो इस समय बेड पर उल्टी लेटी कुछ पढ़ रही थी....

मैने आव देखा ना ताव बस मेघा के उपेर लेट गया....

मेघा- अओउउक्च्छ...कौन है...तुम...

मेघा ने पलट कर देखा तो शांत हो गई...

मैं- ह्म्न..हम ही है...उउउंम्म..

और मैने मेघा को किस कर दी...

मेघा- ये क्या बदतमीज़ी है...निकलो यहाँ से...वरना...

मैं- क्या..बदतमीज़ी...तुमने ही उस दिन....

मेघा(बीच मे)- आइ सेड गेट आउट...नही तो मैं शोर मचाउन्गी...

मैं मेघा का बदला रूम देख कर हैरान था...पर मैं इस टाइम कोई सीन नही बनाना चाहता था...इसलिए वहाँ से निकल गया...

मैं(मन मे)- ये साली तो पलटी मार गई...हुआ क्या इसे...मैं अभी मूड खराब नही करना चाहता ...वरना साली की गान्ड मार देता...कुतिया साली...

मैं गुस्से से तमतमाया रजनी के रूम मे आया तो वो मुझे टवल मे दिख गई....

मैने गेट को लॉक किया और कपड़े निकाल लिए...

रजनी- बेटा ..क्या हुआ...इतनी जल्दी मैं क्यो हो...कुछ हुआ क्या...

मैने रजनी की कोई बात नही सुनी और उसे नंगा करके 1 घंटे तक पूरे ज़ोर से चुदाई की...और पूरा गुस्सा उनकी चूत और गान्ड पर उतार दिया...

रजनी- आअहह ..आज तो मार ही डाला...

मैं- सॉरी आंटी...मेरा मूड थोड़ा गरम था...

रजनी- कोई नही बेटा...मुझे तो तेरे साथ मज़ा ही आता है...तू कैसे भी करे...उउंम..

मैं- लव यू...उउउम्म्म्म...

रजनी- अच्छा...अब रेडी हो जा..तुझे एक बहुत खास बात बतानी है...उस फोटो के बारे मे...जो तूने दिखाई थी....

मैं- अच्छा...तो जल्दी बताओ...

रेडी हो कर आंटी ने मुझे कॉफी पिलाई...

रजनी- कल मैं अपनी कुछ पुरानी पिक्स देख रही थी...उसमे ये पिक भी थी...इसमे तेरे डॅड है...और साथ मे वो भी जिसकी पिक तूने मुझे दिखाई थी...ये देखो....

और आंटी ने 1 पिक मेरे हाथ मे दे दी.....

रजनी- ये देखो...ये उसी की पिक है ना...जो तूने दिखाई थी...

मैं(चौंक कर)- हा...ये वही है...पर ये मेरे डॅड के साथ....कैसे....मतलब मोम के साथ-साथ डॅड भी इसे जानते है...पर ये है कौन...और क्या रिश्ता है इसका मोम-डॅड से.....???????????????

मेरे मन मे अजीब से ख़याल उठने लगे थे ....कौन है ये...जिससे मों ने हेल्प लेने को कहा था....

और डॅड भी इसे जानते है...और डॅड ने मुझे उस दिन......क्या डॅड कुछ छिपा रेज है.. क्या वो....??

मैं(सिर हिला कर)- नही....ऐसा कुछ नही है....डॅड ऐसा क्यो करेंगे....

रजनी- क्या हुआ बेटा....क्या किया तेरे डॅड ने...

मैं- डॅड ने...क्क..कुछ नही...मैं तो ...वो ...

रजनी(मेरा सिर सहला कर)- हाँ...बोल क्या हुआ...कुछ सोच रहा था क्या...

मैं- नही...मैं तो बस ये कह रहा था कि मैं डॅड से इसके बारे मे पूछुगा...पर आप ये बताओ कि ये पिक आपके पास कब आई..मतलब कब ली आपने...

रजनी- पता नही बेटा...पुरानी पिक है...कुछ याद नही आ रहा....और इसका बॅकग्राउंड भी समझ नही आ रहा...वरना कुछ सोचती भी...

मैं- ह्म्म...कोई नही...अब इसका जवाब वही देगे...जो इस पिक मे है....ओके आंटी...मैं चलता हूँ....

रजनी- ओके बेटा...कुछ पता चले तो बताना...

मैं- जी ज़रूर...बब्यए...

और मैं अपने घर निकल आया....घर पहुँच कर मैने कुछ टाइम पारूल के साथ बिताया और फिर शीला को फसाने के लिए प्लान सोचने लगा...

 


मैं पारूल के रूम से निकल कर रेखा के रूम मे आ गया....रेखा इस वक़्त मॅक्सी पहने बेड पर डली थी...मुझे देखते ही खड़ी हो गई...

रेखा- सर आप...मुझे बुला लिया होता...

मैं- क्यो..मैं आ गया तो कोई दिक्कत...

रेखा- नही. .पर हरी अभी बाथरूम मे है और आप यहाँ...

रेखा ऐसे शर्मा रही थी जैसे कि मैं उसे चोदने आया हूँ...

मैं- अरे....मैं कुछ काम से आया हूँ...

रेखा(उदास हो कर)- काम से...मुझे लगा कि आप...

मैं(बीच मे)- वो इक्षा भी पूरी होगी...पर पहले मेरा काम...

रेखा- जी कहिए...मैं रेडी हूँ...

मैं- ह्म्म..तो सुनो...

और रेखा को काम समझा कर मैं वहाँ से निकल गया.....

कामिनी के घर.........

मैने सोचा कि चल कर दामिनी और कामिनी का हाल-चल जान लेते है...यही सोच कर मैं कामिनी के घर आ गया....

मैने डोर बेल बजाई को गेट खुलते ही काजल मेरे सामने आ गई...और एक प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ मेरा वेलकम किया.....

काजल- वेलकम अंकित...

मैं- क्या बात है...आज वादे प्यार से वेलकम किया जा रहा है...कुछ खास है क्या....???

काजल- हहहे....नही...खास तो आप है...इसलिए...

मैं- ओह..तो तुम्हारी नज़रों मे मैं खास हो गया...कब्से...??

काजल- हमेशा से....बस आपने ही ध्यान नही दिया...

मैं- अच्छा...

काजल- और क्या...आप तो बस काम से आते है...कभी हमारा हाल-चाल भी नही पूछा...तो पता कैसे चलेगा ...

मैं- ओह्ह..अच्छा कामिनी आंटी कैसी है...उनका प्लास्टर निकल गया ना...तो अब पैर का क्या हाल...

काजल(बीच मे)- देखा...आज भी सिर्फ़ मोम का हाल जानने आए...मेरा नही..

मैं- ह्म्म...सही कहा...आज मैं कामिनी और दामिनी जी का हाल पूछने आया हूँ....पर हाँ...तुम्हारा हाल जानने के बाद ही जाउन्गा....ओके....

और मैं मुस्कुरा कर कामिनी के रूम मे चला गया...

मैं- तो कामिनी जी...कैसी हो आप....

कामिनी- अरे अंकित...आओ-आओ...मैं तो ठीक हूँ...पर ये कामिनी से कामिनी जी क्यो...

मैं(मुस्कुरा कर)- कभी-कभी इज़्ज़त दे देनी चाहिए...जैसे आप मुझे देती है...अपनी इज़्ज़त...हाँ...

कामिनी(शर्मा कर)- तुम भी...क्या आज भी इज़्ज़त लेने आए हो...हाँ...

मैं- ह्म्म...आज नही...आज तो बस हाल जानने आया हूँ...और एक सवाल का जवाब लेने..जो मेरे लिए ज़रूरी है...

कामिनी- हाँ पूछो...अब क्या जानना है तुम्हे...

मैं- सोनू के डॅड आपके कौन है...

कामिनी- ये कैसा सवाल है...वो मेरे भाई है...

मैं- अच्छा...तो फिर दामिनी ने जो कहानी सुनाई थी...उसमे तुम तीन बहनो के अलावा इस भाई का ज़िक्र क्यो नही था...क्या ये उसके बाद आया...अगर हाँ तो कहाँ से आया....

कामिनी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी...

मैं- ऐसे मुस्कुराने का क्या मतलब...जो पूछा वो बताओ...और सच बोलना....

कामिनी- सच यही है...वो हमारा सगा भाई है...

मैं- तो फिर दामिनी ने...

कामिनी(बीच मे)- पूरी बात सुनो...फिर कुछ बोलना...ओके...

मैं- ह्म...बताओ...

कामिनी- सोनू के डॅड मेरे ही भाई है...असल मे मेरे पिता ने अपने एक रिलेटिव से कह के रखा था कि उनका पहला बेटा वो उन्हे गोद दे देगे...क्योकि उनको कोई औलाद नही थी...

मेरे भाई के जन्म के 2 साल बाद ही उन्होने भाई को रिलेटिव को गोद दे दिया....

फिर हमारे साथ ये सब हादसा हुआ...इसलिए दामिनी ने उसका ज़िक्र नही किया....

पर हमारे मोम-डॅड की मौत के कुछ दिन बाद ही हमारे रिलेटिव भी एक आक्सिडेंट मे मारे गये और भाई अकेला हो गया...

इसलिए फिर हम सब साथ रहने लगे...यही पूरा सच है....

मैं- ओह्ह...तो ये बात थी...

कामिनी(मुस्कुरा कर)- ह्म्म्म ....तुमने क्या सोचा कि इसमे भी कोई राज है...हाँ..

मैं- हाँ शायद..मेरी सोच ही ऐसी हो गई...

कामिनी- ग़लती तुम्हारी नही...तुम्हारे सामने कई ऐसी बातें आई है..इस वजह से तुम हर बात कर शक करते हो...और ये लाज़मी भी है...कोई बात नही...

मैं- ह्म्म..कह तो ठीक रही हो....वैसे पैर कैसा है...कितना टाइम और लगेगा ठीक होने मे...

कामिनी- बस...कुछ दिन मे पूरा ठीक हो जायगा...और तब मैं इज़्ज़त दे पाउन्गी..हहहे...

मैं- अच्छा है...चलो थोड़ा दामिनी को देख लूँ...

फिर मैं दामिनी के रूम मे चला गया...जहाँ वो मोटी नर्स और नौकरानी मुझे देखते ही चोकन्ने हो गये....

मैने एक नज़र उन्हे देखा और फिर दामिनी को देख कर वहाँ से निकल आया...

गेट पर आते ही पीछे से काजल की आवाज़ आई...

काजल- आज भी भूल गये....मेरा हाल पूछने वाले थे आप...ह्म्म्म..

मैं(मुस्कुरा कर)- तुम्हारा हाल कल पूछुगा...पूरे दिन भर ...अभी उतना टाइम नही कि तुम्हारे हाल और चाल को ठीक से देख सकूँ...समझ गई ना...

काजल ने कुछ नही कहा बस शर्मा के नीचे देखने लगी...

मैं(जाते हुए)- कल दिन मे रेडी रहना...बब्यए....

 


अंकित के घर पर.......

आकाश ने अंकित से पेपर तो साइन करवा लिए थे ..पर वो अभी भी किसी उलझन मे फसा हुआ था...इसलिए गहरी सोच मे डूबा था ..की तभी उसका फ़ोन रिंग होने लगा.....ये उसी औरत का कॉल था ...

( कॉल पर )

आकाश- हेलो....

औरत- हाँ...काम किया कुछ या दारू ही पीते रहे...

आकाश- हाँ..किया...मैने पेपर्स पर अंकित के साइन ले लिए...

औरत- बहुत अच्छे ...मम्मूउउहहाअ..

आकाश- पर....अब इनका करना क्या है...

औरत- तुम तो दिमाग़ से पैदल ही रहोगे...तुम कुछ मत करो...वो पेपर्स मुझे भेज दो बस...

आकाश- तुम्हे...पर तुम करोगी क्या...??

औरत- आचार डालुगी...अरे बेवकूफ़ हो क्या...इन पेपर्स से अंकित की सारी प्रॉपर्टी अब मेरे नाम होगी...हहहे...

आकाश- तुम्हारे ...और मेरा क्या...??

औरत(सकपका कर)- वो..हाँ...मेरे नाम हुई कि तुम्हारे..एक ही बात है ना...क्यो..

आकाश- ह्म्म..तो ये मैं अपने नाम कर लेता हूँ...एक ही बात तो है...

औरत(झल्ला कर)- नही...वो मेरे नाम ही करना...समझे...

आकाश- क्यो...मेरे नाम हुई तो क्या परेशानी...तुम्हारी ही समझो...बीवी हो मेरी तुम...हाँ...

औरत- मैने बोला ना कि मेरे नाम होगी ...बस...

आकाश- नही...अब तो ये मेरी ही होगी...

औरत(गुस्से से)- सहर जाते ही पर निकल आए..हाँ...मेरी बात नही मनोगे...

आकाश- नही...तुम मेरी बात मनोगी...समझी...

औरत- अच्छा...लगता है मुझे आना ही पड़ेगा...

आकाश - तो आ जाओ...करोगी क्या आ कर..

औरत- सबको सच बताउन्गी कि तुम हो कौन...फिर देखना की क्या मिलता है...

आकाश- तो बता दो...तुम्हे भी घंटा नही मिलेगा...समझी...

औरत(मन मे)- इसे हो क्या गया...साला मुझसे बहस कर रहा है...खैर, ठंडे दिमाग़ से काम लेना होगा...वरना ये बेवकूफ़ , हाथ मे आई प्रॉपर्टी को दूर कर देगा...

आकाश- तो क्या सोचा....

औरत- अरे जानू...तुम भी ना...हम दोनो मे कोई अंतर है क्या...तुम रखो या मैं...एक ही बात है...

अक्ष- ह्म्म ...अब सही कहा...

औरत- ह्म्म...तो मैं वहाँ आ जाती हूँ..फिर उस साँप के बच्चे को मार देगे...और हमारी ऐश ही ऐश...

आकाश- क्या...पर उसे मारना क्यो...बच्चा है वो...

औरत- तो क्या...उसे तो मारना ही होगा...ये मेरी दिली तमन्ना है...

आकाश(गुस्से मे)- तू तो औरत के नाम पर कलंक है..बच्चे को मारेगी...छी..

औरत- ह्म्म्मू...जैसी भी हूँ , अच्छी हूँ...अब तुम इंतज़ार करो मेरे आने का...और जब तक सम्भल कर रहना...ठीक...अब रखो...

फ़ोन रख कर आकाश गुस्से से लाल हो गया...पर कुछ सोच कर अपने गुस्से को काबू कर लिया...

दूसरी तरफ उस औरत ने फ़ोन रखा और सोचने लगी ...

औरत(मन मे)- लगता है इस पर आकाश का जादू चल गया...अब तो इसे जल्दी ही निपटाना होगा....वैसे भी, आज़ाद की फॅमिली मे किसी को नही छोड़ने वाली मैं....सब मरेगे...सब के सब...

शाम को....धूम नाइट क्लब मे....

मैं बार काउंटर पर खड़ा पेग ही लगा रहा था की शीला मेरे पीछे आ कर खड़ी हो गई....

शीला- एक्सक्यूज मी...तुम आज फिर से...

मैं- क्या मतलब...मैने कहा था कि मैं तुम्हारे पीछे नही...

शीला-ओह्ह..तो कल से अचानक उस क्लब मे कैसे आने लगे...पहले तो नही आए...

मैं- ओह्ह..असल मे मैं बाहर पढ़ता था...और वही से नाइट क्लब की आदत लग गई...यहाँ 3-4 दिन पहले ही आया...तो बस यहाँ के बेस्ट नाइट क्लब मे आने लगा....ओके...

शीला- ओह...सॉरी...मैने कुछ..

मैं(बीच मे)- कोई नही...फ्रेंड्स मे नो सॉरी....

शीला- ह्म्म्मल...हम फ्रेंड्स जो बन गये...सो, नो सॉरी...

मैं- चलो इस दोस्ती को और बढ़ाते है...एक-एक जाम के साथ...

शीला(सीप मार कर)- तो आज भी तुम्हारी सेक्सी की डेफ़िनेशन नही बदली...हाँ...??

मैं- नही...मेरे लिए वही सेक्सी है जो सेक्स करने आ जाए...

शीला(आँखे घुमा कर)- ओह...देन प्रूवेड इट...

मैं- पर कैसे...आइ मीन अभी कैसे...???

शीला- यहाँ कई हॉट लेडी है...इनमे से बताओ कि तुम्हारे हिसाब से सेक्सी कौन है...

मैं- ओके...थोड़ा देखने दो...

मैं कुछ देर पेग पीते हुए वहाँ मौजूद लॅडीस को देखता रहा और फिर मैने 1 लेडी की तरह उंगली दिखा दी...

शीला- वो वाली...वो सिगल पीस ड्रेस मे ..हाँ...

मैं - यस...वही...वो है मेरी नज़र मे रियल सेक्सी लेडी...

शीला- ह्म्म..तो अब प्रूव करो...कि वो तुम्हारे हिसाब से सेक्सी है...

मैं- मतलब..??

शीला- मतलब क्या...सेक्स करो...अगर सेक्स करेगी तभी सेक्सी होगी ना...जैसा की तुम्हारी डेफ़िनेशन कहती है...अबाउट सेक्सी...ह्म..

मैं- ह्म्म..ओके...मैं प्रूव कर दूँगा...पर तुम्हारे लिए प्रूव करने से मुझे क्या फ़ायदा...हाँ..

शीला- फ़ायदा मतलब क्या...तुम अपनी बात प्रूव करोगे और क्या...

मैं- पर किस लिए...तुम्हे दिखाने...पर इसकी ज़रूरत ही क्या है...कोई खास नही...है ना...

शीला- नही...मुझे पता तो चले कि ये सच भी है या दिमाग़ का वहम.है तुम्हारे...

मैं- पर फ़ायदा क्या...कुछ फ़ायदा हो तो आगे बढ़ुँ...बोलो...

शीला- ह्म्म..ओके...तुम प्रूव करो...फिर जो कहो वो मिलेगा...

मैं- अच्छा...सोच लो..कही मैं कुछ ज़्यादा ना माग लूँ..

शीला(मुस्कुरा कर)- ऐसी नौबत नही आयगी...तुम उसके साथ सेक्स कर ही नही सकते...

मैं- तो तुम प्रोमिस करो और कुछ ही देर मे देख लेना...

शीला- प्रोमिस...तुम प्रूव करो...फिर मैं तुम्हारी विश पूरी कारूगी...

मैं- ओके...कीप आइज़ ऑन मी...

और मैं पेग ख़त्म कर के उस लेडी के पास चला गया....और शीला दूर से मुझे देखने लगी.......

 


करीब 1 घंटे के बाद मैं नाइट क्लब से निकल कर खुश हो कर घर जा रहा था....रास्ते मे ही था कि मुझे पोलीस स्टेशन से फ़ोन आ गया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो...

सामने- मैं ** पोलीस स्टेशन से हवलदार बोल रहा हूँ. ...क्या ये अंकित मल्होत्रा का नंबर. है..

मैं- हाँ...बोल रहा हूँ...कहिए...

सामने- आप तुरंत ** पोलीस स्टेशन आ जाइए....जल्दी...

मैं- ओके...पर बात क्या है..ये तो बताओ..

सामने- आप आ जाओ...पता चल जायगा...

मैं(ब्रेक मार कर)- ओह्ह...अच्छा आपके सीनियर आलोक कहाँ है..उनसे बात कराईए...

सामने- वो किसी काम से बाहर गये है...आते ही होगे...पर आप चले आइए...जल्दी से जल्दी...

मैं- ओके...आता हू...

कॉल कट हो गई....फिर मैने अपने आदमी को कॉल किया बट उसने कॉल उठाया नही...

मैं(मन मे)- ये भी कॉल नही ले रहे....क्या करूँ...ये साला पोलीस का लफडा ही मुझे बुरा लगता है...पता नही क्या हुआ....चलो...जा कर देखते है...जो होगा सो होगा...

और मैने कार पोलीस स्टेशन के लिए दौड़ा दी......

पोलीस स्टेशन पहुँच कर मैं उस हवलदार से मिला...जो मेरा ही वेट कर रहा था....

मैं- हाँ जी ...मैं अंकित मल्होत्रा हूँ...क्या हुआ...

हवलदार- ओह..आ गये आप..चलिए मेरे साथ...

मैं- कहाँ...??

हवलदार- असल मे हमे एक लड़की की लाश मिली है और हमारे साब ने बताया कि उस लड़की को आपके घर देखा गया है...इसलिए आपको सिनाख्त के लिए बुलाया है...

मैं- क्या...लाश ...किसने कहा कि वो मेरे घर की कोई है..मतलब कौन साब है आपके ...??

हवलदार- रफ़्तार सर...

मैं(धीरे से)-ये साला रफ़्तार....हर जगह तगड़ी लगाता है बेन्चोद...

हवलदार- कुछ कहा क्या...??

मैं- नही...कहा है लाश...??

हवलदार- वही पड़ी है...जब तक छानबीन नही होती, हम उठा नही सकते...आलोक सर आएँगे तब उठेगी...

मैं- ओह..आलोक सर...चलिए फिर...

हवलदार- चलिए...आपकी कार से चलते है. .

और फिर मैं हवलदार के साथ निकल गया....

मेरे दिल मे अजीब सी कस्मकश चल रही थी ....

लड़की की लाश...मतलब...नही...वो ना हो...मेरा अंदेशा ग़लत हो तो ठीक....बिना देखे क्यो कुछ सोचु...क्या पता कि उन्हे सिर्फ़ डाउट हो...ग़लत पहचान की हो...हाँ...हो सकता है....पहुँच कर ही पता चलेगा....

और मैं अपने धड़कते दिल को संभाले ड्राइव करता रहा.....

वहाँ पहुँच कर देखा कि इन्स आलोक भी आ चुके थे...

मैं- आलोक सर...ये सब...मुझे यहाँ..

आलोक(बीच मे)- मेरे साथ आओ...

और आलोक मुझे अपने साथ वहाँ पड़ी लाश के पास ले गये...

आलोक- इस आदमी को जानते हो...??

मैं- नही...मैं नही जानता...

आलोक(उसका चेहरा ढक कर)- ओके..अब यहाँ आओ...और इसे देखो....

और फिर आलोक ने ज़मीन पर कार के पास पड़ी लाश से चद्दर हटाई और उसे देख कर मेरे मुँह से ज़ोर से निकल गया...

मैं- रश्मि...........ये कैसे....इसे किसने....?????

इनस्पेक्टर आलोक ने जैसे ही लाश के उपेर से चद्दर हटाई तो चेहरा देख कर ही मेरे मुँह से एक चीख सी निकल गई....

मैं- रश्मि.....

रश्मि की लाश देख कर मेरा माइंड घूम सा गया था....

ये सच था कि मैं उसे सज़ा देना चाहता था...पर मौत ...कभी नही...

मैने सोचा भी नही था कि रश्मि मर जाएगी...वो भी इस तरह...

मैं अपनी आँखो मे सवाल लिए इन्स आलोक को देखने लगा...और आलोक ने कंधे उचका कर बता दिया कि उन्हे भी कोई अंदाज़ा नही कि ये कैसे हुआ...

लाश को ढक कर आलोक मेरे पास आए और तसल्ली देने को मेरे कंधे पर हाथ रख दिया...

मैं- हाँ...सर...ये सब कैसे हुआ...कब हुआ ..

आलोक- वैसे पूरी सच्चाई तो नही पता पर शायद ये आक्सिडेंट आज शाम के टाइम ही हुआ है...

आलोक मुझे समझा ही रहे थे कि वहाँ रफ़्तार सिंग आ गया ..

रफ़्तार- सॉरी सर...लेट हो गया...

और जैसे ही रफ़्तार ने मुझे देखा तो घूर कर बोला...

रफ़्तार- तुम यहाँ कैसे...हा ..

आलोक(बीच मे)- मैने बुलाया अंकित को...क्योकि ये लड़की इन्ही के घर काम करती थी...

रफ़्तार(मुझे देख कर)- ओह...कमाल है...आज-कल जो भी पंगा होता है...उसमे तेरी फॅमिली ज़रूर शामिल होती है...हाँ...

मैं गुस्से मे कुछ बोलने ही वाला था कि आलोक बीच मे बोल पड़ा....

आलोक- रफ़्तार सिंग ...बेहतर होगा कि अपने काम पर ध्यान दो....

रफ़्तार ने आलोक की बात सुन कर एक-एक कर के लाषो को चेक किया और बोला....

रफ़्तार- ह्म्म...मुझे तो लगता है कि ड्रिंक आंड ड्राइव का मामला है...पिए हुए होगी...

आलोक- रफ़्तार....

रफ़्तार- हाँ सर...बदबू सॉफ बता रही है कि दोनो पिए हुए है...

मैं- क्या बक रहे हो...रश्मि..

आलोक(बीच मे)- अंकित....तुम चुप रहो...और रफ़्तार...बदबू तो शराब उपेर से डालने पर भी आती है...और शायद मैं सही हूँ...ये शराब उसी ने डाली जिसने इन्हे मारा...

रफ़्तार- मारा...पर ये तो आक्सिडेंट है...

आलोक- लगता है तुम पोलीस का काम भूल चुके हो रफ़्तार....बिना देखे ही बोल दिया ...हाँ...

रफ़्तार- क्या मतलब सर...

आलोक- शायद तुमने इस कार को और लाश को गौर से नही देखा....वरना समझ जाते...

रफ़्तार- क्या सर...मैं समझा नही..मैने क्या नही देखा ..

आलोक- सबसे पहले कार को देखो...इसे देख कर सॉफ पता चलता है कि कार को पीछे से कई टक्कर मारी गई है...

रफ़्तार- ह्म्म...सही कहा...पर हो सकया है कि कार की ब्रेक लगी हो और पीछे वाली कोई कार टकरा गई होगी...और फिर नीचे गिर गई. .ये तो आक्सिडेंट ही हुआ ना....

आलोक- हो सकता था...पर तुम उस लड़की की लाश देखो..उसके गले मे घाव है...जो एक चाकू या खंजर से हुआ है...

रफ़्तार(सकपका कर)- घाव....मैने शायद...सॉरी ध्यान नही दिया...

आलोक- ह्म्म्मर..और उस आदमी की बॉडी देखो...उसके सीने मे भी गोली लगी है...

रफ़्तार- पर सर...कोई इनका मर्डर कर के इन्हे यहाँ क्यो लायगा...आइ मीन ये आक्सिडेंट की क्या ज़रूरत ...

आलोक- ज़रूरत ...मिस्टर.रफ़्तार, कातिल अपने आप को बचाने के लिए बहुत सी तिकड़म करते है...

रफ़्तार- हो सकता है सर...पर ये किया किसने होगा...

आलोक- आप बताओ...

रफ़्तार(सकपका कर)- म्म..मैं..क्यो..

आलोक- ये एरिया आप का ही है....

रफ़्तार- हाँ सर...मैं पता करवाता हूँ...

आलोक- गुड...तब तक मैं इन लाशो का पोस्टमार्टम करवाता हूँ...देखे क्या पता चलता है...

मैं- सिर...मैं भी आपके साथ चलूं...

आलोक- आप घर जाइए अंकित....पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद लाश आपको मिल जाएगी....अभी आपको इसके घरवालो को भी बताना होगा...ह्म..

मैं- ओके सर...और प्ल्ज़...पता कीजिए कि इसे मारा किसने ....(रफ़्तार को देख कर)- एक बार बस पता चल जाए कि इसमे कौन-कौन शामिल है...तो सालो को नंगा कर के मारूगा....कसम से...

आलोक- ओके..हम जल्दी ही पता करेंगे....आप घर जाइए....

फिर आलोक लाशो के साथ हॉस्पिटल निकल गये और मैं घर निकल आया...

 


ड्राइव करते हुए मैं रफ़्तार के रियेक्शन को याद कर रहा था...जो मेरी लास्ट बात सुन कर उसने रिएक्ट किया था...

मैं- क्या रफ़्तार इसमे शामिल है...हो भी सकता है...वो रिचा के लिए काम करता है और रश्मि भी उन्ही लोगो के लिए काम करती थी...

पर रश्मि को मारा किसने...और क्यो...क्या उसे कुछ पता चला या उसने किसी काम को मना किया....

जो भी हो..मुझे जल्द से जल्द पता लगाना होगा....और जो इसका ज़िम्मेदार है...उसको तो मैं छोड़ूँगा नही...

पर अभी सबसे बड़ी समस्या ये है कि रश्मि के भाई-भाभी को कैसे बताऊ...मैने आज तक किसी को इस तरह की न्यूज़ नही दी...क्या करूँ...

हाँ ...रजनी आंटी...उन्हे साथ ले जाता हूँ ...हाँ..यही ठीक होगा...

और मैं रजनी आंटी के घर गया और उनको सब बता कर , साथ ले कर घर चला आया........

थोड़ी देर बाद मेरे घर पर मातम का महॉल हो गया ...

रश्मि की खबर सुन कर उसका भाई हरी सिर पकड़ कर बैठ गया और सिसकने लगा....

जहाँ हरी अपने आसुओ को थामे हुए था ..वही रश्मि की भाभी रेखा ज़ोर से रोते हुए आँसू बहा रही थी....

सविता और रजनी आंटी रेखा को तसल्ली दे रही थी तो मैं भी हरी को हौसला दे रहा था...

डॅड और पारूल इस सब से अंजान अपने रूम्स मे सोए हुए थे...और मैं चाहता भी नही था कि इस हालत मे पारूल को ऐसी कोई न्यूज़ मिले....

थोड़ी देर समझने के बाद हरी और रेखा की आवाज़े तो बंद हो गई पर आँसू अभी भी निकल तहे थे...और उनके साथ रजनी और सविता भी गमजदा हो गई थी...

अपने घर का महॉल देख कर मेरा माइंड भी खराब हो गया था....

ये सब क्या हो रहा था मेरे आस-पास...कुछ दिन पहले ही पारूल को गोली लग गई...वो मौत के मुँह से बाहर आई और आज रश्मि तो मौत की नीद सो ही गई....

किसकी नज़र लग गई ये....मेरे दुश्मन मेरा तो कुछ कर नही पाए पर फिर भी मेरे घर मे मातम छा गया....

मुझे सोच से बाहर मेरे आदमी का कॉल ले कर आया....मैं उठ कर अपने रूम मे आ गया....

( कॉल पर )

मैं- आपके आपकी क्या करते है...खाक छानते है या सो जाते है...

स- रिलॅक्स...मेरी बात तो सुनो ...

मैं- क्या सुनू...रश्मि मर गई...और किसी को कानो-कान खबर नही...तो फ़ायदा क्या ऐसी नज़र रखने का...

स- मेरी बात सुनोगे...या बस बोलते ही जाओगे...

मैं- हूँ...बोलो...

स- देखो अंकित...पहले शांत हो जाओ....और फिर सुन कर डिसाइड करो कि ग़लती किसकी...

मैं- सॉरी...मैं थोड़ा ज़्यादा ही...बताइए...मैं ठीक हूँ...

स- तुम्हारी बात का मुझे बुरा नही लगता....अब सुनो....हमारे लोग रश्मि पर नज़र रखे हुए थे ...

पर आज रश्मि एक माल मे जाने के बाद गायब हो गई...पता ही नही चला कि अचानक से वो कहाँ गई...बस यही ग़लती हो गई और आज ही ये हादशा....बट डोंट वरी..मैं आगे से ऐसी ग़लती नही होने दूँगा...

मैं- अब क्या...ग़लती तो हो गई..और इस ग़लती कि कीमत भी रश्मि की मौत...खैर...हो जाता है...इंसान से ग़लती हो जाती है...समझता हूँ...

स- पर अब कोई ग़लती ना हो..इसका मैं खास ख्याल रखुगा...और हाँ...मुझे लगता है कि इसमे रिचा का हाथ है...इसलिए मैने उस पर निगरानी तेज कर दी है...

मैं- ओके...कुछ पता चले तो बताना...अगर रिचा ही निकली तो वो टाइम से पहले ही मरेगी...

स- ह्म्म...अब तुम रेस्ट करो...बाइ

मैने कॉल कट की और नीचे आ गया....जहा महॉल अभी भी गूंगीं ही था.....

शीला के घर..........

एक तरफ मेरे घर पर गम का महॉल था....वही दूसरी तरफ शीला शॉक मे थी .....

क्लब से घर आने के बाद से ही वो क्लब मे हुई घटना को याद करके शॉक्ड थी...और उसी घटना को याद कर रही थी...

क्लब मे जब मैने शीला से कहा कि मैं उस औरत को अपने हिसाब से सेक्सी साबित करूगा...तो शीला को यकीन नही था कि कोई अंजान औरत ऐसे ही सेक्स के लिए राज़ी हो जाएगी...

शीला को चेलेंज कर के मैं उस औरत के पास चला आया...

मैं उससे बात कर रहा था और शीला बड़ी उत्सुकता से हमे देखे जा रही थी...

हमारी बाते थोड़ी देर मे हसी-मज़ाक मे बदल गई और फिर हम साथ मे जाम टकरा कर ड्रिंक करने लगे...

ड्रिंक के बाद मैने उस औरत को कान मे कुछ बोला और फिर हम सबकी नज़रों से दूर निकल गये...

शीला ने कुछ देर तक हमारा वेट किया पर जब हम वापिस नही आए तो शीला हमे ढुड़ने निकल पड़ी...

ढुड़ते हुए शीला वॉशरूम तक पहुँच गई...और वहाँ उसे सिसकियों की आवाज़ आई...

उसने गेट को चेक किया..वो खुला ही था...जो मैने ही खुला छोड़ा था...

गेट खोलते ही शीला की आँखे बड़ी हो गई...मैं उस औरत के बूब्स को बाहर निकाल कर चूस रहा था और वो मस्ती मे सिसक रही थी ...

मैं- उूउउंम...सस्रररुउउप्प...सस्स्रररुउउप्प्प...उउंम्म...

औरत- आअहह...कम ऑन...सक इट...उउउंम्म..एस्स...सक ...सक...सक...आआहह...

ये नज़ारा देख कर शीला का दिमाग़ घूम गया...पर वो आँखे फाडे हमे देखे जा रही थी...

औरत- आअहह...बस...बस ...

मैं- उउउंम्म....आआहह...क्या हुआ ...

औरत- जल्दी करो...अपना हथियार निकालो....टाइम कम है...

मैं- य नोट सेक्सी...ये लो...

और मैने अपना लंड आज़ाद कर दिया...जो लगभग खड़ा ही था....

लंड देख कर औरत की आँखे चमक गई और शीला की आँखे चौड़ी हो गई...

वो औरत तुरंत घुटनो पर आई और लंड को चाट लिया.....

औरत- सस्रररुउउप्प्प्प....वाउ...सॉलिड है....

मैं- जल्दी करो...चूसो इसे...

औरत- क्यो नही...

और उस औरत ने लंड को गुप से मुँह मे लिया और तेज़ी से चुसाइ शुरू कर दी....

लंड उसके थूक से सना हुआ उसके मुँह के अंदर-बाहर हो रहा था और ये देख कर शीला की चूत मे खुजली हो रही थी...

औरत- उूउउम्म्म्म..उूउउम्म्म्म..उउउंम्म..उउउंम्म..उूउउम्म्म्म..उउउंम्म..

मैं- यस बेबी..यू आर सो सेक्सी....कम ऑन....सक इट...फास्ट...फास्ट...आअहह...

यहाँ मैं लंड चुस्वाता रहा और वहाँ शीला गरम हो कर अपनी चूत को कपड़ो जे उपेर से ही मसल्ने लगी....

थोड़ी देर बाद मैने लंड को उसके मुँह से निकाला और उसे खड़ा कर के दीवार से उल्टा चिपका दिया......

औरत- एस्स...फक मी...जल्दी...उउउंम..

मैं- ये लो...

और मैने 2 धक्को मे लंड को उसकी चूत मे उतार दिया...

औरत- वाउ...क्या हथियार है...जिसको मिलेगा उसकी किस्मत ही है...उउंम..

मैं- अभी तुम किस्मत वाली हो...ये लो..

और फिर जोरदार चुदाई शुरू हो गई....

शीला की आँखो के सामने मैं उस औरत को तेज़ी से चोद रहा था...और उसकी सिसकारियाँ शीला के कानो मे जाकर शीला को गरम कर ने लगी...

और शीला उपेर से चूत मसल्ते हुए ही झड गई....

 


थोड़ी देर बाद वो औरत भी झड गई...

औरत- आहह..मज़ा आ गया...

मैं- अब तेरी गान्ड मारूगा...

औरत- तो मारो ना...इस लंड से गान्ड ना मरवाऊ...पागल हूँ क्या...मारो...पर गीला कर लो..

मैं- यस...तू लंड चूस मैं गान्ड गीली करता हूँ..

और मैने उस औरत को 69 मे उल्टा टाँग लिया...

ये सीन देख कर तो शीला की आँखे और बड़ी हो गई...

मैं- सस्स्ररुउउप्प्प ...सस्स्ररुउपप...सस्ररुउउप्प्प...सस्ररुउपप...

औरत- उउउंम..उउउम्म्म्मम...उउउंम्म..

थोड़ी देर बाद...

मैं- उउउंम्म..अब रेडी है..

औरत- तुम तो चुदाई मे चॅंपियन हो..जिसे चोदोगे वो मस्त हो जाएगी...

मैं- अब झुक जाओ...

और फिर मैने उसे झुका कर उसकी गान्ड मारना चालू कर दिया...

मेरा लंड गान्ड फाड़ रहा था और वो औरत मस्ती मे बड़बड़ा रही थी...और शीला अपनी पैंटी मे उंगली डाल कर लाइव चुदाई का मज़ा ले रही थी...

थोड़ी देर बाद एक- एक करके हम तीनो झड गये और शीला वहाँ से निकल गई...फिर वो औरत क्लब से घर निकल गई...

जब मैं क्लब मे वापिस आया तो शीला को देख कर मुस्कुरा दिया और उसे बाद मे मिलने का इशारा कर के निकल आया...

ये सब सोचते हुए शीला फिर से झड चुकी थी....

शीला- क्या लड़का है...क्या मस्त चोदा उस औरत को...सच मे...मेरा तो सोच कर ही पानी निकल गया...उउउम्म्म्म...

क्या वो मुझे भी...नही...ये मैं क्या.. हो सकता है कि वो बादे के मुताबिक मुझे चोदने को बोले...हाँ..ऐसा हो तो... क्या करू मैं...वैसे...क्या लंड था...सो..गुड...

अब देखते है कि वो मुझसे माँगता क्या है...ह्म्म्मं..

नेक्स्ट डे ..हॉस्पिटल मे....

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मैने फॉरमॅलिटीस पूरी की और रश्मि की लाश को घर लाने लगा....

मैं(इंस्पेक्टर आलोक से)- तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे क्या आया...

आलोक- यही कि ये आक्सिडेंट नही...मर्डर थे...लड़की को चाकू से और आदमी को गोली से मारा है..और हाँ...कोई भी ड्रिंक नही किए था....

मैं- तो अब..

आलोक- हम अपनी जान लगा देगे...कातिल जल्दी ही सामने होगा...

तभी रफ़्तार भी वहाँ आ गया...उसने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देख ली थी...

रफ़्तार- सर...ये क्या...लड़की की मौत आदमी के बाद हुई...

आलोक- हा...क्यो..तुम्हे कोई डाउट...???

रफ़्तार(हड़बड़ा कर)- म्म..मुझे क्या...मैं तो बस बता रहा था....

आलोक- ओके...चलो अंकित...चलते है...

मैं आलोक के साथ निकल आया और पीछे रफ़्तार इस सोच मे पड़ गया कि रश्मि को मौत ड्राइवर के बाद कैसे हो सकती है...

दोपहर ताल रश्मि का अंतिम-संस्कार हो गया. ..मेरे घर मे लोगो का आना-जाना लगा हुआ था....

तभी इंस्पेक्टर आलोक आए..और इशारे से मुझे अकेले मे बुलाया...

मैं- जी कहिए...

आलोक- मुझे एक चीज़ मिली है जो डॉक्टर ने रश्मि की मुट्ठी से निकाली...और ये सिर्फ़ मुझे ही पता है..अब तुम देख लो..

आलोक ने जब मेरे हाथ मे कुछ दिया तो मैने देखा कि वो एक लॅडीस रुमाल था ...

मैं- रुमाल...इसका क्या...

आलोक- इस रुमाल पर खून से कुछ लिखा है..शायद कोई मेसेज हो...देखो..कुछ समझ आता है क्या...

जब मैने उस रुमाल को खोलकर देखा तो उस पर खून से टेडे मेडे कर के 3 वर्ड लिखे थे...

""एलएचडब्ल्यू""

मैं- एलएचडब्ल्यू.... अब ये क्या है......?????????

इस का मतलब ना तो इन्स आलोक की समझ आया था और ना मेरी...पर ये बात तो पक्की थी कि इन वर्ड्स का रश्मि से कोई ख़ास संबंध था....

शायद रश्मि कुछ बताना चाहती थी ....कोई नाम...कोई चीज़ या कोई जगह....नही पता....

इन्स आलोक ने मुझे रुमाल दिया और बाद मे मिलने का बोल कर निकल गये....मैं भी घर आए गेस्ट के साथ बिज़ी हो गया .....

शाम तक सब लोग जा चुके थे....पर मेरे घर का महॉल और ज़्यादा गमगीन लग रहा था....

घर मे सन्नाटा पसरा हुआ था.....कोई भी कुछ नही बोल रहा था...सब रश्मि की यादों मे खोए बैठे थे.....

आज मुझे भी रश्मि की हर बात , हर अदा याद आ रही थी...उसका चहकना हो या कॉफी पिलाना....प्यार करना या मज़ाक करना...हर एक बात मेरे माइंड मे घूम रही थी...

जिस रश्मि को कल तक मैं नफ़रत करने लगा था...आज उसी के जाने से मेरे दिल को तकलीफ़ हो रही थी....एक टीस सी उठ रही थी दिल मे....

"" दुनिया का दस्तूर आज तक ना समझ पाया....वो दूर जाने के बाद ही क्यो याद आया.....""

किसी ने सच ही कहा था कि हमे किसी की कमी तभी महसूस होती है..जब वो हमसे दूर हो जाए....

पर मुझे हिम्मत नही हारनी थी...मैं ही कमजोर पड़ गया तो बाकी लोगो का क्या होगा....

और खास कर पारूल....वो तो वैसे ही सदमे मे थी...उपेर से एक और झटका....उसे संभालना होगा....

पारूल का ख्याल आते ही मैं उसके रूम मे गया....

वहाँ देखा की पारूल सो रही थी...और नर्स भी लेट चुकी थी...

फिर मैने सविता , रेखा और हरी का हाल भी पूछा और सबको सोने का बोल कर रूम मे आने लगा....

तभी मुझे डॅड का ख़याल आया....और उनसे बात करने के बाद मैं भी रश्मि को याद करते हुए सो गया.....

 


अगले कुछ दिन मैं ज़्यादातर घर मे ही रहा ....सारे काम पॉज़ कर दिए....

क्योकि सबसे पहले मैं ये चाहता था कि मेरे घर का महॉल कुछ अच्छा हो जाए...

2 दिन बाद रेखा और हरी भी रश्मि की अस्थियाँ ले कर अपने गाँव निकल गये....बाकी के अंतिम काम वही पर करने....

2 दिन बाद मैने भी घर से निकलना शुरू कर दिया...दामिनी और कामिनी को चेक करना...रजनी आंटी, संजू आंड अकरम से मिलना..एट्सेटरा...

पर कुछ दिन तक मैने मेघा और शीला पर कोई ध्यान नही दिया...क्लब भी जाना बंद था...

इसी बीच मेरे आदमी रफ़्तार और रोका पर नज़रे जमाए हुए थे...पर उनकी तरफ से भी कोई न्यूज़ नही आई थी...

पारूल भी लगभग ठीक हो गई थी और घर का महॉल भो कुछ अच्छा हो चला था...

मैं रात को रूम मे बैठा कुछ सोच ही रहा था कि डॅड मेरे रूम मे आ गये...

आकाश- अंकित...क्या हो रहा है...

मैं- हाँ..कुछ नही डॅड...आइए ना...

आकाश- ह्म...

आकाश बैठ गये...पर आज उनके माथे पर चिंता की लकीरे सॉफ दिखाई दे रही थी....

मैं- क्या हुआ डॅड...कोई प्राब्लम है क्या...

आकाश- ह्म्म्मआ...बहुत बड़ी प्राब्लम बेटा...

मैं- ह्म्म...तो वो आ रही है....यही ना...

आकाश(एक साँस ले कर)- हाँ बेटा...वो आ रही है...

मैं- तो इतनी टेन्षन क्यो डॅड...हम यही तो चाहते थे....कि वो यहाँ आ जाए....सब वैसा ही हुआ जैसा हमने चाहा था...

आकाश- हाँ...पर अब क्या....अब मैं क्या करूँ...

मैं- मतलब...आपको क्या करना है...आपको बस उससे मिलना है..बस...

आकाश- पर मिल कर क्या करूगा....आइ मीन उसने कुछ ऐसी बात की ..जो मैं नही जानता तो फिर...

मैं- मुझे पता है डॅड...आप संभाल लोगे...और ज़्यादा कुछ हुआ तो उसी टाइम ये गेम ख़त्म कर देगे...और क्या...

आकाश- ह्म्म...पर वजह तो जाननी ही होगी...क्योकि मुझे नही लगता कि वो सिर्फ़ पैसो की वजह से पीछे पड़ी...कुछ तो है...

मैं- वो सब बताएगी डॅड...बस उसे आने तो दो....

आकाश- ओके...पर बाकी घरवालो को क्या कहुगा....उसे यही रहना है...घर मे...

मैं- वो मैं देख लूँगा...आप बस उसे ले आना..ओके...

आकाश- ओके..तो मैं चलता हूँ...गुड नाइट....

मैं- डॅड...क्या एक बात पुच्छू...

आकाश- हूँ...पूछो...

मैं उठा और कवरड से एक फोटो निकाल कर डॅड को दे दी....

मैं- ये कौन है....आइ मीन इसकी असलियत क्या है....

आकाश- तुम इसे जानते तो हो...फिर क्यो...

मैं(बीच मे)- मैं वो जानना चाहता हूँ जो आप जानते हो...प्ल्ज़ बताइए....कौन है ये...

आकाश- नही बेटा...मैं इसे नही जानता....

मैं- अच्छा...एक मिनट प्ल्ज़...

और मैने डॅड के हाथ मे दूसरी पिक्स पकड़ा दी...

मैं- अब बताइए....जिसे आप जानते नही ..उसके साथ आपकी पिक्स कैसे....

ये पिक्स देख कर आकाश के चेहरे पर फिर से परेशानी छा गई....उसे समझ मे नही आ रहा था कि क्या बोले....उसका झूठ जो पकड़ा गया था...

मैं- बोलिए डॅड....ऐसा क्या है कि आप मुझसे झूठ बोल रहे है...कौन है ये....???

आकाश- बेटा...मैं...क्या कहूँ...

मैं- प्ल्ज़ डॅड...सच बता दीजिए....प्ल्ज़...

आकाश- अब तुझे क्या बताऊ....

मैं- डॅड...इसे मोम भी जानती थी ना....

अक्ष- हूँ...हाँ बेटा...

मैं- कही इसका रिस्ता मोम के साथ....

आकाश(गुस्से मे)- अंकित....

मैं- सॉरी डॅड...पर मैं...

अक्ष(बीच मे)- तुम अपनी मोम के बारे मे...

मैं(बीच मे)- नही डॅड...मैं ऐसा सोचने से पहले मारना पसंद करूगा...मैं तो बस इतना बोल रहा था कि क्या इनका मोम से कोई रिश्ता था....या फिर आपका....

आकाश- ह्म्म...लगता है कि तुम्हे सच बताना ही होगा...वरना तुम पता नही क्या -क्या सोचते रहोगे...

मैं- तो बोलिए डॅड...

आकाश- अभी नही...पर मैं सब बताउन्गा....बस एक बार ये प्राब्लम सॉल्व हो जाए फिर...अब इतनी बात तो मान नी ही होगी तुम्हे...ओके..

मैं- पर...

आकाश(बीच मे)- अभी इतना जान लो कि ये अपनो से भी बढ़ कर था...तुम्हारी मोम के लिए.....बाकी सब...सही टाइम आने पर....गुड नाइट...

मैं- ओके डॅड...मैं इंतज़ार करूगा....गुड नाइट....

डॅड अपने रूम मे चले गये....और मैने भी फ़ैसला कर लिया कि अब डॅड के मुँह से सच सुनने के बाद ही इस सक्श से कोई बात करूगा...उसके पहले नही...

 


एक होटल रूम मे......

रिचा- आख़िर तुम मुझसे मिलने क्यो मर रहे थे....हाँ...

रफ़्तार- मरता नही तो क्या....तेरी वजह से मैं मरने वाला हूँ...

रिचा(चेहरे से नकाब हटा कर)- पर मैने बोला था ना कि अभी हमारा साथ होना हमे मुस्किल मे डाल देगा...कहीं अंकित को भनक लग गई तो...

रफ़्तार- ओह..डेढ़ सनी...वो लौंडा तेरा बाप है...उसे शक हो गया हम पर...समझी...

रिचा- हम पर...नही...तुम बको मत...

रफ़्तार- अरे साली...बक नही रहा...मैने खुद सुना, उसे ये कहते की रफ़्तार पर नज़र रखो....

रिचा- तो ये बोल कि तुझ पर शक है..और हो भी क्यो ना...तू हमेशा उसे घूरता रहता है और फालतू मुँह चलाता है...

रफ़्तार- तो ये मेरे लिए नही ...तेरे और तेरे बॉस के लिए करता हूँ...समझी...

रिचा- वो सब छोड़...ये बता कि मेरा नाम तो नही आया ना ...

रफ़्तार- नही...तेरा नाम नही सुना...उसे सिर्फ़ मुझ पर शक है...

रिचा- उउफ़फ्फ़...बढ़िया है... सिगरेट तो जला...परेशान कर दिया...और ये बता कि मुझे पीछे के गेट से क्यो आने बोला..क्या कोई मेरे घर पर नज़रें जमाए है क्या...

रफ़्तार(सिगरेट जला कर)- नही...पर साबधानी मे क्या हर्ज....

रिचा(सिगरेट ले कर)- पर मुझे कैसा डर....अंकित सोच भी नही सकता कि रश्मि की मौत मे मेरा कोई रोल है...फ़फफ़ूूहह...

रफतात- सही है...पर मैं फसा तो तू भी गई...समझी...और ये बता कि उस लड़की को मारा किसने...और कब...

रिचा- इससे तुझे क्या...पैसा मिला ना तुझे...

रफ़्तार- हाँ मिला..पर ये तो बता देती कि लड़की जिंदा है...कही बच जाती तो मर ही गये थे...

रिचा(शॉक्ड)- व्हाट...ये कैसे हो सकता है....वो तो मेरे घर पर ही मर गई थी....

रफ़्तार- नही मेडम...वो लड़की ड्राइवर के बाद मरी...और ड्राइवर को मैने मारा...मतलब लड़की खाई मे गिरने के बाद मरी....समझी...

रिचा- ओह माइ गॉड...पर उसने तो खुद चेक किया था और बोला था कि मर गई...

रफ़्तार- किसने...तेरा बॉस तो था नही वहाँ...

रिचा- अरे...मेरा दोस्त...उसी ने तो चाकू..

रिचा जल्दबाज़ी मे सच बोल गई...पर याद आते ही चुप हो गई...कि रफ़्तार से सच नही बोलना...

रफ़्तार- ये उसने था कौन...हां...

रिचा- तुझे क्या लेना -देना...होगा कोई भी...दोस्त है मेरा....

तभी पीछे से आवाज़ आई...

बॉस- पर मुझे लेना -देना है...कौन था वो दोस्त...और क्या थी वो वजह कि उसे रश्मि को मारना पड़ा....हां..

रिचा पलटी और बॉस को देख कर उसके पसीने छूट गये....वो मन मे सोच ही रही थी कि बॉस को क्या बोले तभी उसके गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ पड़ा....और रिचा ज़मीन पर गिर गई....

बॉस- रफ़्तार...तू निकल...इसे मैं देख लूँगा ...और हाँ...संभाल कर..और ये ले पैसे...ऐश कर ...

रफ़्तार निकल गया और रिचा भी थोड़ा सम्भल गई. ..

बॉस ने रिचा के बाल पकड़ कर उठाया और फिर पूछा ....

बॉस- तो बोल ...कौन था वो...किसने मारा उस लड़की को....

रिचा(डरती हुई)- मुझ पर शक कर रहे हो....मैने ही मारा...कोई नही आअहह....

बॉस ने रिचा के बाल खीच दिए...

बॉस- चुप कर रंडी....क्या मैं इतना भी नही जानता कि तुझ जैसी रंडी किसी को कितनी चोट पहुँचा सकती है...हाँ...

रिचा- तुम मेरी बात सुनो...प्ल्ज़...

बॉस- मैं घाव देख कर ही समझ गया था कि वो किसी और ने किया...पर चुप रहा...क्योकि पहले बॉडी ठिकाने लगानी थी...पर अब तू सच बोलेगी....समझी...

रिचा- मैं झूठ नही बोल रही...यही सच है...उसे मैने मारा...

बॉस- तू ऐसे नही मानेगी ना....

बॉस ने रिचा को बेड पर पटका और एक कॉल किया...

बॉस- इसकी बेटी कहा है...दिखाओ...

कुछ देर बाद बॉस को मोबाइल पर एक पिक रिसीव हुई...

बॉस(रिचा को दिखा कर)- अब तय कर ले....सच बकेगी या तेरी बेटी को मेरे आदमी नोचना शुरू करे...बेचारी...कितने प्यार से सो रही है...

रिचा- नही..नही मेरी बेटी को कुछ मत करना...मैं सब बताउन्गी...सच..

बॉस- तो बोल...कौन था वो....

रिचा- सम्राट सिंग का बेटा....

बॉस- ये साला सम्राट सिंग...ये वही है ना...महल वाला....

रिचा- हाँ...वही...

बॉस- तो वो तेरे पास क्यो आया था...हां..

रिचा- वो ..वो भी आकाश का दुश्मन है...उसी को मारने की बात कर रहा था कि रश्मि आ गई...और फिर उसने रश्मि को मार दिया...

बॉस- क्यो...रश्मि तो तेरे लिए काम कर रही थी ना...

रिचा- हाँ...पर उस दिन वो बोलने लगी कि वो अंकित को सब बता देगी...और भागने वाली थी कि ...

बॉस(बीच मे)- तो सम्राट के लड़के ने उसे मारा...और तूने लाश का बोझ मुझ पर डाल दिया , हाँ...

रिचा- मैं घबरा गई थी...वो रश्मि को मार के भाग गया था...तो मैं किससे बोलती...एक आप ही तो हो मेरे...

रिचा ने अपनी बाहें बॉस के गले मे डाल कर उसे रिझाना शुरू किया..

बॉस- हाँ साली...पर एक बात सुन...उस सम्राट के लड़के को मुझसे मिलवा दे...जल्दी...समझी...नही तो मैं...

रिचा- बिल्कुल...अब मिलेगा तो ले आउगि...अभी मेरी बेटी को...

बॉस- ह्म्म...वो सेफ है...

रिचा- तो अब ये मास्क भी हटा दो...और कपड़े भी....ह्म्म..

बॉस- रंडी जाग गई तेरी...आजा...तेरी फाड़ कर ही जाउन्गा....

और फिर रूम मे चुदाई की आवाज़े गूजना शुरू हो गई......

नेक्स्ट डे.......

सुबह मेरी नीद सविता के जगाने से खुली....उसने बताया कि कोई गेस्ट आई हुई है....

मैं- कौन है...??

सविता- पता नही...बड़े सर खुद लेने गये थे...

मैं- ओह्ह...मैं फ्रेश हो कर आता हूँ...

थोड़ी देर बाद मैं नीचे पहुँचा तो एक गदराई हुई औरत सोफे पर पसरी हुई थी...और साथ मे डॅड भी बैठे थे....

मैं- गुड मॉर्निंग डॅड....

आकाश- ओह...आओ अंकित...इनसे मिलो...

मैं- हेलो...पर ये है कौन...

आकाश- बेटा...ये है सुजाता...मेरे दोस्त की बीवी...

मैं- ओके...हेलो आंटी....

सुजाता- ये अंकित है ना....हेलो बेटा...यहाँ आओ...

और मैं सुजाता के पास पहुँचा तो उसने मुझे गले से लगा लिया....

उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सीने मे चुभे जा रहे थे...एक कामुक अनुभव हो रहा था...पर मैं कंट्रोल मे था....

सुजाता(मुझे अलग कर के)- कितना हॅटा-कट्टा हो गया है...इसे बहुत छोटा सा देखा था...

आकाश- ह्म्म..डाल्ली जिम जो जाता है...और बेटा किसका है...आकाश का...

सुजाता- ह्म्म...तब तो डॅड की सारी खूबियाँ होगी इसमे..है ना...

सुजाता ने एक सरारती मुस्कान बिखेर दी...

आकाश- अब तुम फ्रेश हो जाओ...तक गई होगी....(सविता से)- सविता....सुजाता को इनका रूम दिखा दो...

फिर सविता , सुजाता को ले कर एक रूम मे चली गई...और मैं डॅड के साथ बैठ गया....

आकाश- अब आगे क्या....

मैं- कुछ दिन देखते है...पता तो चले कि इसके दिल ने क्या है..

आकाश- ओके...

तभी सविता आई और सवाल दाग दिया....

सविता- सर...ये मेडम कितने दिन रुकेगी...और इनके पति...वो नही आए....

आकाश- इनके पति थोड़ा आउट ऑफ कंट्री गये है...तो 10-15 रुकेगी...कोई प्राब्लम है क्या...

सविता- नही..मैं तो बस यू ही पूछ रही थी..

आकाश(मुझसे)- ओके..अब मैं चलता हूँ ऑफीस...बाइ...

आकाश के जाते ही सविता ने धीरे से कहा...

सविता- अंकित...मुझे ये मेडम अच्छी नही लगी....

मैं- क्यो...क्या हो गया...

सविता- बेटा..ये जबसे आई..तबसे बड़े सर से चिपकी हुई है...मुझे तो इसकी नियत ठीक नही लगती....

मैं- ओह...कोई नही...मैं हू ना...टेडी होगी तो सीधा कर दूँगा...ओके...

सविता(मुस्कुरा कर)- इसे भी....ठीक है बेटा...इसे भी जन्नत दिखा ही दो...

तभी सुजाता की आवाज़ आई...जो इस समाए एक पतली सी नाइटी मे थी...

सुजाता- किसको क्या दिखना है अंकित...

मैं- अरे आंटी...कुछ नही...वो ताई माँ बोल रही थी कि आपको यहाँ की खूबसूरत चीज़े दिखा दूं...आप देखेगी ना....

सुजाता(मेरे बाजू मे बैठते हुए)- हाँ बेटा...मैं यहाँ सब देखने ही तो आई हूँ...

मैं(मन मे)- जानता हूँ साली...तू देख...तुझे क्या -क्या दीखता हूँ...

सुजाता- चुप क्यो हो गये...मुझे दोस्त ही समझो...और दोस्त की तरह बात करो...हाँ...

मैं- अरे..कुछ नही...चलिए..पहले कॉफी पीते है...फिर आगे की बात करेंगे...ह्म्म्म ..

और मैं, सुजाता के साथ कॉफी पीते हुए बाते करता रहा....

कॉफी के बाद सुजाता रेस्ट करने गई और मैं पारूल के पास....

 
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