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चूतो का समुंदर

मैं बुत बना सामने खड़े मेरे सर्प्राइज़ को देख रहा था ..और रजनी आंटी मेरी ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा रही थी.....

रजनी- अब देखता ही रहेगा कि अंदर भी आएगा ..

मैं(चौंक कर)- हूँ...हां...क्या कहा....

रजनी(मुस्कुरा कर)- अब ये तेरे हवाले है...चल पास से देखना....

रजनी की बात सुन कर मेरे चेहरे पर खुशी चमक गई...और सामने खड़ी औरत शरमा गई...

रजनी- देख...मैने अपना काम कर दिया...तुझे तेरा इनाम दे रही हूँ...कैसा लगा...

मैं- इसकी मुझे बहुत ज़रूरत थी...अब तो खेल खेलने मे सही मज़ा आएगा....

रजनी- तो खेल ले इसके साथ...मगर प्यार से...बहुत शर्मीली है...

मैं- डोंट वरी आंटी..बेशरम हम बना देगे ...

रजनी- हहहे...जानती हूँ...तू इससे बात कर..मैं सबके लिए कॉफी लाती हूँ...

मैं- वैसे...गर्मी तो इसे देख कर ही बढ़ गई...फिर भी कॉफी ले आइए...जितनी गर्मी बढ़ेगी...मज़ा उतना ज़्यादा आएगा.....

रजनी- ओके..तू बात कर...और कुसुम..अब शरमाना छोड़ और लाइफ के मज़े ले...हां..

और रजनी हम दोनो को अकेला छोड़ कर कॉफी बनाने चली गई....और साथ मे गेट को बाहर से लॉक कर दिया...

जी हाँ...रजनी आंटी ने सर्प्राइज़ मे एक खूबसूरत औरत को पेश किया था....वो थी कुसुम...रफ़्तार की बीवी....

रजनी के जाने के बाद मैने सामने खड़ी कुसुम पर नज़रे घुमाई...जो इस वक़्त शर्म और डर से भरी हुई थी...

मैने देखा कि कुसुम एक खूबसूरत चेहरे के अलावा एक मदमस्त जिस्म की मालकिन है...

उसके बड़े-बड़े बूब्स साड़ी और ब्लाउस से धक्के होने के बावजूद अपने बड़े होने का अहसास दिला रहे थे...

स्लेवलेस्स ब्लाउस से उसके मासल बाजू...पतली साड़ी के अंदर चिकना पेट और उसमे से झाँकती हुई बड़ी नाभि...किसी का भी मन मोह सकती थी...

कुल मिलकर कुसुम को देख कर कोई भी उसे पाने के लिए ललचा सकता था...और आज वो मुझे अपना सब कुछ देने के लिए खड़ी थी...

मैं धीरे-2 कुसुम की तरफ गया और उसका हाथ पकड़ा...

मेरे हाथ लगते ही कुसुम सिहर उठी...उसकी आँखे बंद हो गई...

मैं समझ गया कि वो थोड़ा घबराई हुई है...

मैने कुसुम को अपने साथ बेड पर बैठा लिया...और बात करनी शुरू की...

मैं- एक बात बताओ ..तुम ये सब मर्ज़ी से करने आई हो या फिर किसी दबाब मे...

कुसुम ने मुझे आँख उठा कर देखा और शरमा गई...

मैं- मैने कुछ पूछा है...जवाब दो...

कुसुम- मर्ज़ी से...

मैं- तो फिर डरना छोड़ो...हाँ...शरमा सकती हो...वो मैं दूर कर दूँगा...

मेरी बात सुनकर कुसुम फिर से शरमा गई...

मैं कुछ देर तक कुसुम से उसके बारे मे और उसके परिवार के बारे मे बातें करता रहा...जिससे कुसुम थोड़ा नॉर्मल हो गई...असल मे मुझे इंतज़ार था कॉफी का...

हमारी बातें चल ही रही थी कि रजनी कॉफी ले आई ..फिर हम सबने कॉफी पी और मैने रजनी को बाहर देखने का बोल कर भेज दिया...अब फिर से रूम मे कुसुम और मैं अकेले थे...

मैं(मन मे)- इसको नॉर्मल करने के लिए मुझे ही आगे बढ़ाना होगा...क्योकि ये तो आगे आयगी नही...

तभी कुसुम खड़ी हुई और मैने उसका हाथ पकड़ लिया...कुसुम कुछ ना बोली बस चुपचाप खड़ी रही...

मैने उसके हाथ पर किस किया तो कुसुम शरमा गई और मैने खड़े होकर कुसुम की पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया...

मेरे हाथो की गिरफ़्त मे आते ही कुसुम मचल उठी और मुँह से सिसकी निकल गई...

मैने आगे बढ़ कर कुसुम के मुलायम गालो पर एक किस किया...जिससे कुसुम और ज़्यादा मचल गई..

कुसुम- उउंम्म..

मैं- कुसुम...मेरी बात सुनो...

कुसुम- ह्म..

मौन- अगर तुम दिल से रेडी हो तो ठीक...वरना तुम जा सकती हो...

और इतना कह कर मैने अपनी बाहों से कुसुम को आज़ाद कर दिया...

थोड़ी देर तक हम बुत बने खड़े रहे और फिर कुसुम ने मेरे हाथो को पकड़ के अपने आप को मेरी बाहों मे पहले की तरह क़ैद कर लिया...

मैं- तो तुम तैयार हो...

कुसुम - ह्म्म्मर...

और कुसुम का इतना कहना मेरे लिए काफ़ी था...

 


मैने अपने हाथो को उसके पेट पर कसा और चेहरा आगे करके उसके होंठो पर होंठ रख दिए...

पहले तो कुसुम चुपचाप होंठ चुसवाती रही और थोड़ी ही देर मे उसने भी मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया...

मैं समझ गया कि अब ये लाइन पर है...अब मज़ा किया जाए...

मैने अपने हाथो से कुसुम की सारी का पल्लू नीचे किया और दोनो हाथ उसके बूब्स पर रख दिए...जो अभी ब्लाउस मे क़ैद थे. .

कुसुम के बूब्स पर हाथ लगते ही वो और ज़्यादा गरम हो गई और होंठ चूसने की स्पीड बढ़ा दी...

किस करते हुए मैं काफ़ी देर तक उसके बूब्स को ब्लाउस के साथ ही दबाता रहा...

मैं- सस्स्ररुउउप्प्प..उउंम...नाइस बोईबस...उउंम्म...

कुसुम- उउंम..आहह..उउउंम..उउउंम्म...

मैं- अओउंम....आ...इन्हे खोल दूं...

कुसुम- उउउंम...उउउंम्म..आहह..हाअ ..आओउंम...

कुसुम के मुँह से हां निकलते ही...मैने ब्लाउस के हुक को खोलना शुरू किया.....

हर एक हुक के खुलने पर कुसुम का जोश बढ़ रहा था और धीरे-2 कर के उसका ब्लाउस खुल गया...अब कुसुम के बूब्स सिर्फ़ ब्रा से ढके हुए थे...जो मेरे हाथो से मसले जा रहे थे...

मैने देर ना करते हुए उसके ब्लाउस को हाथो से अलग किया और झटके मे उसकी ब्रा को अनलॉक कर दिया....

ब्रा झूलते ही कुसुम के हाथ अपने सीने पर पहुँच गये...जो खुली हुई ब्रा को संभाले हुए थे...

मैं- अब क्या हुआ...मन नही है...

कुसुम कुछ नही बोली ....बस नीचे देखने लगी...

मैं- ठीक है...मन नही तो कपड़े पहनो...और हो तो खुद को नंगा करो...

कुसुम मुझे आँखे फाड़ कर देखने लगी...जैसे पूछ रही हो कि मैं क्यो नंगा करूँ अपने आप को...

मैं- ऐसे क्या देख रही हो...अब तुम जो चाहे करो...पर अगर मेरे साथ कुछ करना है तो खुद को नंगा करना होगा...ओके...डिसाइड करो...पर जल्दी...

कुसुम कुछ देर वैसे ही खड़ी रही...

मैं- ओके..समझ गया...मैं चलता हूँ..

मैने उठ कर जाने जा नाटक किया ही था कि कुसुम ने अपने हाथो से ब्रा को नीचे गिरा दिया...और उसके बड़े-बड़े गोरे बूब्स मेरी आँखो के सामने फुदकने लगे...

मैने आगे बढ़ कर उसके बूब्स पर हाथ फेरा और बोला...

मैं- साड़ी निकालो...

मैं कुसुम के बूब्स को सहलाने लगा और कुसुम मुझे देखते हुए अपनी साड़ी निकालने लगी..

उसके बूब्स सहलाते हुए मैने उसे पूरा नंगा करवा दिया...पैंटी भी नही छोड़ी...

मेरे सामने कुसुम पूरी नंगी खड़ी थी और शर्म से लाल हो गई थी...

मैने एक हाथ ले जा कर कुसुम की चूत पर फिरा दिया...

कुसुम- उउउम्म..

मैं- एक भी बाल नही...पूरी तैयारी के साथ आई हो...

कुसुम(शरमाने लगी)- उउम्म..

मैं- मस्त...अब ये खजाना लूटने मे मज़ा आएगा...आज से ये मेरा...

और मैने चूत को हथेली मे भर के दबा दिया...

कुसुम- आअह्ह्ह्ह्ह....

मैं- बस जान...थोड़ा और...फिर सिसकियाँ ही सिसकिया सुनाई देगी...

और मैने फिर कुसुम को पलटा कर बाहों मे कस लिया और उसके बूब्स मसल्ते हुए अपने लंड को उसकी नंगी गान्ड पर दबाने लगा .....

कुसुम- आअहह. .धीरे...

मैं- ज़ोर मे ही मज़ा है मेरी जान....

कुसुम- आअह्ह्ह्ह......

मैं ज़ोर-ज़ोर से कुसुम के बूब्स मसलता रहा और अपने लंड को उसकी गान्ड पर दबाता रहा...

कुछ ही देर बाद कुसुम गर्म हो गई...वो सिसकते हुए अपनी गान्ड को मेरे लंड पर दबाने लगी थी...

मेरे लिए ये सही था..अब आगे बढ़ने मे और मज़ा आएगा...

मैने कुसुम को अपनी तरफ पलटाया और बारी-बारी उसके बूब्स को चूसने लगा...और कुसुम मस्ती मे आँख बंद किए सिसकने लगी....

कुसुम- आअहह...उउउंम्म....

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प...उउम्म्म्मममममम...

कुसुम- आअहह....बस करो...आअहह...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प...उउउंम्म...उउउंम्म....

कुसुम- ऊह्ह्ह....उउउम्म्म्म...आह्ह्ह...

थोड़ी देर तक मैं कुसुम के बूब्स को पूरी मस्ती मे चूस्ता रहा. ...

कुसुम की चूत इस मस्ती मे पानी बहाने लगी थी...और लंड के लिए तड़प रही थी...

 
थोड़ी देर बार मैने कुसुम को बेड पर लिटाया और बिना देरी किए उसकी चूत चुसाइ कर दी....

कुसुम- नही ..नही...यहाँ नही...ऊहह.....यहाँ भी .....आआहह...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प्प...आआहह...यही तो मज़ा है मेरी जान....

कुसुम- वहाँ किसी ने ऐसा नही .....आअहह...

मैने कुसुम की बात पूरी होने के पहले ही उसकी चूत को मुँह मे भर लिया और चूसने लगा ...

मेरे मुँह मे आते ही चूत झर-झरा गई और चूत रस मेरे मुँह मे डाल दिया...

कुसुम- हटो...एम्म...आऐईयइ...आअहह...प्पल्लज़्ज़्ज़...हट जाओ...

कुसुम मुझे हटाना चाहती थी...पर मैं तो चूत रस पीने मे बिज़ी था....जब चूत रस ख़त्म हो गया तो मैने चूत को मुँह से निकाल दिया..और खड़ा हो गया...

कुसुम- ये तुमने क्या किया...आअहह...वो गंदा...

मैं(बीच मे)- चुदाई का असली मज़ा ही चुसाइ के बिना अधूरा है मेरी जान...

और मैने जल्दी से अपना पेंट और अंडरवेअर निकाल दिया...क्योकि अब मुझे कंट्रोल नही हो रहा था....

मैं जैसे ही नंगा हुआ तो कुसुम की निगाह मेरे लंड पर ठहर गई...

कुसुम(मन मे)- रजनी ने सच कहा था...बहुत तगड़ा लंड है...मेरी तो फाड़ ही देगा...

मैं आगे बढ़ा और कुसुम का हाथ मेरे लंड पर रख दिया. .

मैं- कैसा लगा...

कुसुम- ब्ब..बढ़ा...

मैं- चूसोगी नही...ह्म्म..

कुसुम- वो मैं..मैने कभी नही...मतलब...

मैं- कोई नही...सब सिखा दूँगा...बट अभी टाइम नही है...

और मैने कुसुम की टांगे खोल कर अपना लंड चूत के उपेर रगड़ना शुरू कर दिया...

चूत का पानी मेरे लंड को गीला कर रहा था और मेरे लंड की रगड़ कुसुम को फिर से गरम कर रही थी...

थोड़ी देर लंड रगड़ने के बाद मैने लंड पर थूक लगाया और कुसुम की चूत पर सेट कर दिया...

कुसुम- उउंम..

मैं- डाल दूं..

कुसुम(मुझे देखते हुए शरमा गई और आँखे बंद कर ली...)

कुसुम की खामोशी ही उसकी हां थी...और मैने ज़ोर से धक्का मारा और आधा लंड चूत मे चला गया...

कुसुम- आाऐययईईईई......म्माआ...

मैं- बस...थोड़ा और...आदत पड़ जाएगी..

और मैने फिर से जोरदार शॉट मारा एर लंड चूत की जड़ तक घुस गया...और कुसुम चीख उठी...

कुसुम- म्माअरररर...ग्गगाइिईई....म्म्म्मा आअ......

मैने देखा की कुसुम की आँखो मे आसू आ गये...

मैने आगे झुक कर कुसुम को किस करना शुरू किया और धीरे -2 कमर हिलाने लगा...

 
करीब 2-3 मिनट मे कुसुम जोश मे आ गई और अपनी गान्ड हिलाने लगी...और मैने चुदाई शुरू कर दी...

मैं- अब ठीक है ना...हा..

कुसुम- हाँ...आहह...दर्द हो रहा..

मैं- अभी मिट जायगा....

कुसुम- आहह...सच मे बढ़ा...आअहह...हाीइ...

मैं- तभी तो तुम्हे ज़्यादा मज़ा आएगा....

कुसुम- हमम्म...थोड़ा ज़ोर से....

मैं- ये ले मेरी जान...

और मैने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी...

कुसुम- आहह.. आहह...आअहह...एयाया ..

मैं- अब मज़ा आया ना....ये लो...

कुसुम- आहह....हम्म....ऐसे ही. .आहह...

मैं- यस...ईएहह ... यीहह...ईएहह...

कुसुम- एयेए..आ..आहह...आहह....आओउउंम्म...

मैने पूरी स्पीड से कुछ देर ही चोदा था कि कुसुम फिर से झड़ने लगी...

कुसुम- आअहह...आअहह...ऊओह...येस्स....ईीस्स...एसस्स...गाऐयइ.....उउम्म्म्म...

कुसुम झड कर शांत हो गई...पर मैने चुदाई जारी रखी...

थोड़ी देर बाद मैने कुसुम को एक तरफ किया और उसके पीछे लेट कर लंड को चूत मे डाल दिया और चुदाई जारी रखी...

कुछ धक्को के बाद कुसुम ने अपनी गान्ड हिलानी शुरू कर दी...और मैने उसकी कमर पकड़ कर छोड़ना जारी रखा...

कुसुम- तुम थकते नही...हाँ...

मैं- तुम जैसी माल साथ हो तो रात भर चोदता रहूं...कौन थकेगा...

कुसुम(मुस्कुरा कर)- इतनी..आअहह..पसंद आई...

मैं- हाँ...पर अभी बहुत कुछ सीखना है तुम्हे....

कुसुम- आहह....क्या...

मैं- बाद मे...अभी मज़े करो...

और मैने कुसुम को कुतिया बनाया और फुल स्पीड मे चोदने लगा....

कुसुम- आहह…ज़ोर से….ज़ोर से…आअहह....

मैं- येस्स्स..ये ले...ये ले...ऐसे ही ना...

कुसुम- अहहह..हाअ,,...आईससीए,,,हहीी,,,,,,आहहह.....फ्फ़ादद..द्दूव

मैं पीछे से गंद पकड़ कर तेज़ी से कुसुम को चोद रहा था और कुसुम भी अपनी गंद को हिला कर चुद रही थी.....

कुसुम -आहह…आअहह….आहहह..….

मैं- येस्स…ये ले…ओर तेजज..यहह

कुसुम- आअहह…म्म्माुअस्सटत्…ल्ल्लुउन्न्ड्ड़ हहाईयैयाीइ….जब भी अंदर …आहह..जाता है….मज़ा देता…आहह..है…

चुदाई पूरे सवाब पर थी और मेरी जाघे कुसुम की गान्ड पर थाप मार कर उसे लाल कर रही थी ....

और करीब 20 मिनिट की चुदाई मे कुसुम एक बार फिर से झड़ने लगी.....

कुसुम- आअहह…आह.आ.आह…अमम्मायन्न…आऐईइ…..अहह..आह...आऐईयईईईईई

मैं-आअहह….ये ले …

कुसुम झड़ने लगी ओर चुदाई की आवाज़ बदलने लगी......

आअहह…..स्शहहह..आहह…त्ततहुूप्प्प…कचहुप्प्प…..ईएहहाअ…आहह…त्ततहुूप्प्प…त्ततहुूप्प्प….फ़फफूूककचह…फ़फफूूककच…

.ऊओ…ईीस्स…यईीसस…आअहह….ऊओ……फफफफकक्चाआप्प्प….टतततुउउप्प…आहह....

कुसुम झड कर पस्त पड़ गई थी और कुछ धक्के मारने के बाद मैं भी झड़ने के करीब आ गया....

मैं- आअहह..मैं आया.....कहाँ डालु...चूत मे...

कुसुम- नही..नही...अंदर नही...

तो मैने लंड बाहर निकाला और कुसुम की पीठ और गान्ड पर लंड रस की पिचकारी मार दी...

जब मैं झड गया तो लेट गया...और कुसुम भी उल्टी पड़ी रही....और हम दोनो रेस्ट करने लगे......

हमने थोड़ी देर ही रेस्ट किया था कि गेट पर नॉक हुआ...जिसे सुनकर कुसुम घबरा गई....

मैं- डोंट वरी....मैं देखता हूँ...तुम रेस्ट करो....

फिर मैं उठा और कपड़े पहन कर गेट के पास गया और गेट के बाहर सिर निकाला....बाहर रजनी खड़ी थी .....

रजनी(मुस्कुरा कर)- आवाज़ बहुत करती है वो ...

मैं- क्या...आपको सुनाई दी...

रजनी- ह्म्म..पर और किसी ने नही सुनी...डोंट वरी...

मैं- ह्म..

रजनी- तो...क्या हाल है उसका...

मैं- खुद ही देख लो...

और मैं रजनी के साथ अंदर आ गया...जहा कुसुम उल्टी पड़ी थी...पूरी नंगी...और उसकी पीठ से लेकर गान्ड तक मेरा लंड रस पड़ा हुआ था...

रजनी(मुस्कुरा कर)- ओह हो...नहला ही दिया....क्यो कुसुम ..मज़ा आया ना...

कुसुम ने अपना सिर बेड मे छिपा लिया...

मैं- अच्छा आंटी...अब कॉफी पिलाओ...मुझे जाना है फिर...

रजनी- ओके...और कुसुम...तू भी फ्रेश हो जा...

फिर मैं आंटी के साथ बाहर आया...और कॉफी पीते हुए आंटी को समझा दिया कि कुसुम को सेक्स एंजाय करना सिखाए...ताकि नेक्स्ट टाइम ज़्यादा मज़ा आए...

कॉफी ख़त्म कर के मैं वहाँ से निकल आया और सीधा पहुँचा वर्मा के ऑफीस....

वही मिस्टर.वर्मा...जो डॅड के पार्ट्नर थे और अब पार्ट्नरशिप तोड़ना चाहते थे.....

मैं वर्मा के ऑफीस पहुँचा तो उसकी सीक्रेटरी ने मुझे वेट करने बोला और थोड़े इंतज़ार के बाद मुझे वर्मा के कॅबिन मे भेज दिया...

जब मैं ऑफीस मे एंटर हुआ तो देखा कि ऑफीस मे एक बड़ी सी टेबल...कुछ चेयर्स और कुछ फाइल्स थी...

रूम के एक तरफ बार काउंटर बना हुआ था एक शानदार सोफा पड़ा था और मेरे सामने वर्मा उस सोफे पर बैठा हुआ था...और उसके सामने टेबल पर टीचर्स स्पेशल स्कॉच की बॉटल रखी हुई थी...और कुछ स्नकस...

ऐसा लग रहा था कि ये ऑफीस नही बल्कि एंजाय करने को रूम बनाया गया है...

वर्मा वैसे तो मेरे डॅड का पार्ट्नर था...बट आगे मे उनसे थोड़ा कम ही था...बट दिखने मे आगे थुल्तुला ही था...साथ मे चश्मे भी चढ़े हुए थे साले को...

मुझे सामने देखते ही वर्मा ने मुस्कुरा कर मेरा वेलकम किया...

वर्मा- हेलो अंकित...आओ बेटा...आओ....

मैं- हाई अंकल..कैसे है आप...

वर्मा- मैं ठीक हूँ..आओ बैठो...

मैं वर्मा के सामने ही बैठ गया और मेरे बैठे ही वर्मा पेग बनाने लगा....

वर्मा- बेटा..तुम भी लोगे...

मैं- नो अंकल...

वर्मा- लेते नही हो कि मेरे साथ नही ले रहे...

मैं- लेता हूँ...बट आपके साथ ..नही..

वर्मा- कम ऑन यंग मॅन...इसमे क्या...एक पेग तो लेना ही होगा...

वर्मा ने मना करते हुए भी एक पेग बना दिया और हमने ग्लास टकरा कर पीना शुरू किया...

मैं(सीप मार कर)- अंकल...मुझे आपसे कुछ बात...

वर्मा(पेग ख़त्म कर के)-हम्म..हम्म..आहह..मैं पूछने ही वाला था...कैसे आना हुआ तुम्हारा....???

मैं- आक्च्युयली...मुझे पता चला कि आपकी और मेरे डॅड की बहस हुई...

वर्मा(दूसरा पेग बनाते हुए)- ह्म...तो तुम कल हुई बहस की बात कर रहे हो....

मैं- हाँ...उसी की बात कर रहा हूँ...

वर्मा(सीप मार कर)- हाँ...तो उसमे क्या बात करनी है...क्या तुम बहस की वजह जानने आए हो...

मैं- नही...मैं वजह जानता हूँ...

वर्मा- तो तुम जानते हो...फिर क्या बात करनी है...

मैं- सिर्फ़ ये जानने आया हूँ कि आपने ऐसा क्यो किया.. क्यो आप अभी ये पार्ट्नरशिप तोड़ रहे है...वो भी तब..जब ऑफीस खाक मे मिल गया...

वर्मा ने मुझे रुकने का इशारा किया और एक सिगरेट जला कर कस मारा और बचा हुआ पेग ख़त्म कर के बोला...

वर्मा- देखो बच्चे....मुझे उस ऑफीस के जलने से कोई लेना-देना नही...मुझे बस अपना पैसा वापिस चाहिए...ओके..

मैं- पर सब कुछ जल कर खाक हो चुका है...

वर्मा- तो मुझे क्या ...मेरा अग्रीनेंट सिर्फ़ माल का था ऑफीस आस्सेस्ट से नही...इसलिए उस ऑफीस मे क्या बचा..क्या नही...उससे मुझे कोई मतलब नही....

मैं- ओके...माना ...पर अचानक...इस वक़्त डॅड के उपेर उस ऑफीस के एंप्लायी का प्रेशर है...उन्हे पैसे भी देना है...वरना वो पोलीस मे जा सकते है..

वर्मा (तीसरा पेग बनाते हुए)- तो मैं क्या करूँ...वो तुम्हारे डॅड की प्राब्लम है..मेरी नही...मुझे बस मेरा पैसा वापिस चाहिए...बस...

इस बार वर्मा की टोन सुन कर मुझे गुस्सा आ गया बट मैं कंट्रोल किया...

मैं- वो तो है...बट अगर आप थोड़ा रुक जाते तो...

वर्मा(आधा पेग गटक कर)- हम्म..नही मैं नही रुक सकता...मुझे अभी अपना पैसा चाहिए 1 हफ्ते मे...बस...

 


वर्मा ने अपनी बात बोली और सिगरेट का कस मार के धुआ उड़ाने लगा....अब मेरा गुस्सा बढ़ रहा था...

मैं- तो आप नही मानेगे...

वर्मा(मुस्कुरा कर)- नही बच्चे...

मैं- ह्म्म ..किसकी गुलामी कर रहे हो आप...एमएलए की...

वर्मा(गुस्से मे)- क्या...क्या कहा तूने...तू मुझे एमएलए का चमचा बोल रहा है क्या...

मैं- नही...चमचा नही...कुत्ता है तू एमएलए का ..कुत्ता...

मेरा गुस्सा पूरे ताव पर था...मुझे ये भी फ़िक्र नही थी कि इस वक़्त मैं वर्मा को उसी के ऑफीस मे कुत्ता बोल रहा हूँ...

वर्मा भी मेरी बात सुन कर गुस्से मे आ गया...और उसने एक छिपा हुआ बटन दबाया और खड़ा हो गया ...

थोड़ी ही देर मे 2 गार्ड आ गये और मुझे पकड़ लिया...

वर्मा ने एक पेग और बनाया और आधा डकार कर बोला...

वर्मा- सही कहा तूने...मैं एमएलए के कहने पर काम कर रहा हूँ...पर यही एक वजह नही...मैं एलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट मे तेरे बाप को मिटाने के लिए आगे बढ़ा हूँ...वो तो गया समझो...फिर सिर्फ़ मेरा राज होगा इस फील्ड मे...समझा...

मैं- तो एमएलए का साथ क्यो दिया...खुद कोसिस करते...मेहनत कर के भी आगे निकल सकते थे....

वर्मा- मेहनत...हाहाहा...ते मूर्खो की सोच है...यहाँ तो दूसरे को कुचल कर ही आगे बढ़ा जा सकता है..यही है आज की दुनिया का सच...

मैं- ये तुम्हारी सोच है...सच नही...

वर्मा- तो यही सही...पर एक सच मैं बताता हूँ...बहुत ही जल्द तेरा बाप रोड पर आ जायगा....समझे...

मैं(गुस्से से)- मेरे रहते हुए कभी नही...

वर्मा- जवान खून...ओह हो...तो एक काम कर ...रोक के दिखा हमे...और हाँ...तेरे लिए मैं 1 हफ्ते की जगह 2 हफ्ते देता हूँ...बोल...रोक पायगा हमे...हाँ...

मैं(मन मे)- साले...2 हफ्ते मे तेरी दुनिया हिला दूँगा...

वर्मा- बोल...क्या हुआ...मुँह बंद...निकल गई गर्मी...

मैं- एक ही बात बोलूँगा...मान जाओ...वरना अच्छा नही होगा....

वर्मा- हाहाहा....काश तेरी माँ जिंदा होती...और वो मेरे पास आती तो शायद मैं मान जाता...और बदले मे उसके साथ.....

तभी मैने वर्मा के सीने पर एक किक मारनी चाही पर गार्ड मुझे पकड़े थे...तो मेरी किक हवा मे तैर गई....

तभी एक गार्ड ने अपनी स्टिक उठाई और मुझे मारने ही वाला था कि...

वर्मा- नही...इसे मारना मत...बेचारा ..अपनी माँ की बात पर गुस्सा है...कोई नही...

मैं- तुम जो कर रहे हो...उसका अंजाम बहुत बुरा होगा ..मैं तुझे छोड़ूँगा नही...समझे...

वर्मा- ओह...मैं डर गया...हाहाहा...ठीक है बच्चे...कर ले ट्राइ...तू मेरा कुछ नही बिगाड़ पायगा...समझा....

मैं- पछताओगे मिस्टर.वर्मा...बहुत पछताओगे...

वर्मा- तो जाओ...और मुझे पछताने पर मजबूर करो...(गार्ड्स से)- ले जाओ इसे...बाहर का रास्ता दिखाओ..और हाँ...हाथ मत लगाना ...बच्चा है बेचारा...मुउहह....

मैं- लीव मी...मैं रास्ता जानता हूँ...छोड़ो....

वर्मा ने गार्ड्स को इशारा कर दिया और वो मुझे छोड़ कर सामने खड़े हो गये..

मैने वर्मा को गुस्से से देखा और हाथ झटक कर बाहर निकल गया...और मेरे पीछे वर्मा ठहाका मार के हँसने लगा....

जब मैं वर्मा के ऑफीस से निकल कर कार मे बैठा तो मेरे पास ही एक कार रुकी और उसमे से एक मस्त औरत निकली...

उस औरत ने मिनी ड्रेस पहनी हुई थी...जो घुटनो तक थी..और जिसमे उसकी चिकनी जाघे चमचमा रही थी...

उपेर देखा तो आँखो मे गॉगल्स लगे थे..और डीप नेक के टॉप से गोरे बूब्स दावत दे रहे थे...और बॅक साइड तो कमाल ही थी....

मैने देखा कि वो सीधी बिल्डिंग मे चली गई..और उसे देख कर सभी के सभी उसे सलाम ठोकने लगे...

जैसे ही वो मेरी आँखो से ओझल हुई तो मैने कार दौड़ाई और घर निकल आया.....

मैं वर्मा की बातें सुन कर टेन्षन मे आ गया था और जब घर पहुँचा तो एक और टेन्षन मेरा इंतज़ार कर रही थी...

घर मे एंटर होते ही मेरे सामने रफ़्तार सिंग आ गया जो इस वक़्त मेरे डॅड से बात कर रहा था ....

मैं-ओह नो.... तुम यहाँ....अब क्या हुआ...

रफ़्तार- अरे...लो..चूजा भी आ गया...हाहाहा....

मैं- तुम यहाँ क्या कर रहे हो...

रफ़्तार- कुछ खास नही....कोर्ट के कुछ पेपर है ..तेरे बाप के लिए....बस वही देने आया था...

मैं- तो दे दिए ना...अब निकलो...

रफ़्तार- गुस्सा...ह्म्म्मो...जाता हूँ...

रफ़्तार अपने थुल्लो के साथ बाहर जाने लगा और मेरे बाजू मे आते ही बोला...

रफ़्तार- एक बार तेरा बाप बर्बाद हो जाए...फिर तुझे अच्छे से देखुगा...सारी गुस्सा...उउंम..घुसेड दूँगा...समझ गया ना कहाँ...

मैने रफ़्तार को गुस्से मे आँखे दिखाई...और रफ़्तार ठहाका मारते हुए निकल गया....

मैं(डॅड के पास जा कर)- ये पेपर...किस बात के पेपर है डॅड...

आकाश- तीन नोटीस है बेटा...

मैं- नोटीस...पर 3 किस लिए....

आकाश- 1 एंप्लायी के पेमेंट का...1 वर्मा की तरफ से और एक मिस्टर.सक्सेना की तरफ से...

मैं- ये सक्सेना कौन है...

आकाश- मेरे एक और पार्ट्नर...इनका पैसा हमारी 2 कंपनीज़ मे लगा हुआ है...बहुत रहीस आदमी है...

मैं- तो ये भी अपना पैसा...

आकाश(बीच मे)- हाँ..ये भी 2 मंत मे अपना पैसा वापिस चाहते है...

मैं- पर क्यो...???

आकाश- पता नही बेटा...बुरा वक़्त आता है तो हर तरफ बुरा ही होता है...

डॅड निराश हो कर अपने रूम मे निकल गये...

मैं(मन मे)- ये बुरा वक़्त नही डॅड...सब साले साज़िश कर रहे है...और इस सब का ज़िम्मेदार एक ही सख्स है...एमएलए....लेकिन मैने भी इस बुरे वक़्त जो अच्छा नही किया..तो आपका बेटा नही....

और मैं भी गुस्से मे अपने रूम मे चला गया....

 


दूर कही...किसी गाँव मे....

गाँव का बाज़ार भरा हुआ था...और बाज़ार के बीचो-बीच एक मस्त औरत अपनी गान्ड को बलखाती हुई जा रही थी...

बाज़ार मे उसने काफ़ी सामान खरीदा ...और उससे ज़्यादा अपने जिस्म के जलवे दिखा कर लोगो के लंड खड़े किए...

सामान ले कर वो बाज़ार से निकली तो एक बंदा उसके पीछे लग गया...

वो बंदा अपने चेहरे को ढके हुए उस औरत का पीछा कर रहा था...

वो औरत इस सख्स के इरादो से अंजान अपनी गान्ड लहराती अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ रही थी...

धीरे -धीरे उस औरत और उस सख्स के बीच का फासला कम होता गया...

अचानक ही औरत को लगा कि कोई उसके पीछे है तो उसने गान्ड को लहराना बंद किया और तेज़ी से आगे बढ़ने लगी ...

पर वो सख्स भी तेज़ी से औरत के पीछे चलने लगा...

औरत के दिल की धड़कन तेज होने लगी...पर उसके पैर इससे तेज नही चल रहे थे...और साड़ी की वजह से वा दौड़ भी नही पा रही थी...

यहाँ पीछे वाला सख्स और ज़्यादा तेज़ी से चलने लगा और और औरत के करीब आ गया...

अब औरत समझ गई कि वो नही बच पायगी...वो सोचने लगी कि कैसे इस इंसान से अपने आप को बचाऊ...क्या बोलूँगी...

औरत कुछ सोच ही रही थी कि तभी वो सख्स पीछा करते हुए उसके पास पहुँच गया और औरत के कंधे पर हाथ रखा...

कंधे पर हाथ लगते ही औरत रुक गई ...उसके हाथ से थैला नीचे ज़मीन पर गिर गया और एक जोरदार चीख उसके गले से निकल गई....

""आआआआआआआआआआआआआआआ""

इस से पहले की उस औरत की आवाज़ ज़्यादा दूर तक जाती और कोई और उसे सुन सकता...उससे पहले ही सामने वाले सख्स ने औरत के मुँह पर हाथ रख कर उसकी आवाज़ बंद कर दी....

औरत की चीख मुँह के अंदर ही घुट गई..और वो सिर्फ़ आँखे फाडे सामने वाले को देखती रही ....

औरत की दिल की धड़कन और भी तेज हो गई और उसकी आँखो मे डर सॉफ-सॉफ नज़र आने लगा....

तभी सामने वाला सख्स फुसफुसाया....

सम्राट- चिल्लाओ मत...मैं तेरा बाप हूँ सम्राट सिंग.....

और इतना बोलकर सम्राट ने उस औरत के मुँह से हाथ हटाया और अपना चेहरा दिखा कर फिर से छिपा लिया...

औरत(तेज साँसे लेती हुई)- आहह....आअप...आप यहाँ क्यो आए...और इस तरह से...मेरी तो जान ही निकाल दी...

सम्राट- माफ़ करना बेटी...पर आना पड़ा...ज़रूरी था तुझसे मिलना ...

औरत- स्स्श्ह्ही ....ठीक है...पर यहाँ नही ....मेरे साथ आइए...

फिर वो औरत सम्राट को अपने साथ एक घर के पीछे ले गई...जहाँ उन्हे कोई देख ना सके ...

औरत- अब बताइए...ऐसी भी क्या बात हो गई जो आपको मुझसे मिलने आना पड़ा...

सम्राट- क्या बताऊ बेटी...उस आकाश के पिल्ले पर जो हमला करवाया था...वो अब गले की फाँस बन गया....और इसी वजह से सबसे चिप कर भटक रहा हूँ....

औरत- लेकिन उसे तो कुछ नही हो पाया था ना...आपने हमलावर को रोक तो दिया था....

सम्राट- हाँ बेटी...पर वो साला आकाश का पिल्ला...हमले की जाँच करने महल आ गया था...और मेरे घर तक भी पहुँच गया था...अच्छा हुआ कि मैं वहाँ से निकल गया था वरना....

औरत- वरना क्या...वो क्या कर लेता आपका....और आप उस बच्चे से छिपते भाग रहे है...

सम्राट - नही बेटी ..सिर्फ़ इतनी सी बात नही...उस हादसे के बाद कई लीग मेरे पीछे पड़ गये...पता नही कौन है वो सब...

औरत- आपने पता नही किया...??

सम्राट- मैने आदमी लगा रखे है...पर जब तक कुछ पता नही चलता...मुझे छिप कर ही रहना होगा...क्योकि अगर मुझ तक कोई पहुँच गया तो खेल बिगाड़ सकता है...

औरत(गहरी सास ले कर)- ह्म्म...तो फिर आप यहाँ क्या कर रहे है...यहाँ भी किसी ने आपको मेरे साथ देख लिया तो...क्या जवाब देगे...

सम्राट- हाँ..ये भी है...पर मुझे बात करनी थी तुमसे...

औरत- तो फ़ोन कर लेते...

सम्राट- अरे..मैं चाहता था कि खुद आ कर बात करूँ...वैसे भी तुझसे मिले कई दिन हो गये ...

औरत- ठीक है...अब यहाँ से जाओ...कोई देख ले उससे पहले...

सम्राट- चला जाउन्गा...बस ये बताओ कि और कब तक मुझे दुनिया से छिपना होगा...

औरत- बस थोड़ा इंतज़ार और करो...अपना मुर्गा ठिकाने पर पहुँच चुका है...बस कुछ टाइम बाद आज़ाद का सब हमारा होगा...और आज़ाद का नाम उसके वंश के साथ दुनिया से मिट जायगा...

सम्राट(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..तभी मेरे सीने की आग बुझेगी....

औरत- अब मैं चालू...

सम्राट- ह्म्म..पर ये तो बता कि तू बाज़ार मे क्या कर रही थी...नौकर मर गये क्या...

औरत- अरे...वो मेरा मन हुआ घूमने का ..तो निकल आई...

सम्राट - ठीक है...मैं चलता हूँ. .

सम्राट अपना चेहरा ढक कर निकल गया...और औरत भी अपने रास्ते चल दी...

 
सहर मे.........अंकित के घर ..........

रात के वक़्त...मैं अपने रूम मे बैठा सोच रहा था कि ये सारी प्रॉब्लम्स कैसे सॉल्व होगी ...

वो प्रॉब्लम्स जो कि वर्मा , रफ़्तार और एमएलए ने पैदा की थी...और अब उसमे एक और नाम जुड़ गया था....सक्सेना का...

इसके अलावा भी बहुत बड़ी परेसानियाँ थी...बट अभी मैं सिर्फ़ डॅड की परेशानियों के बारे मे सोच रहा था....

मैने ये बात अपने आदमी (स) को भी बता दी थी...और वो उसका सोल्रौवन भी दौड़ने लग गया था....

मुझे सबसे ज़्यादा टेंशन वर्मा की थी...साले ने मुझे चेलेंज कर दिया की बचा ले अपने बाप को...मेरे डॅड को रास्ते पर लाना चाहता है वो...

और यही बात मुझे खटक रही थी...मैं वर्मा को ऐसा जवाब देना चाहता था कि उसकी अकड़ और इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाए...और इसी काम के लिए मैने अपने आदमी को लगा दिया था....

सोचते हुए मैने ड्रिंक करना शुरू कर दिया था....और कुछ देर बाद मेरे आदमी का कॉल भी आ गया...

( कॉल पर )

मैं- क्या पता चला...

स- कल रात धूम नाइट क्लब मे चले जाना....काम हो जायगा...

मैं- ह्म्म..और क्या पता चला...

स- ह्म...कुछ खास नही...तुम्हे मेहनत करनी पड़ेगी...ये आसान नही है...

मैं- तो मैं आसान काम करता ही कब हूँ...काम टफ हो तो करने मे मज़ा ज़्यादा आता है...

स- हाहाहा...डाट्स लाइक अंकित....गुड...तो कल रात को पहुँच जाना...ओके

मैं- ओके...थॅंक्स...

कॉल कट करके मैं ड्रिंक करने लगा...और साथ मे ये भी सोचने लगा कि कल मुझे क्या करना होगा...

तभी मुझे सोनू का कॉल आ गया...जो काफ़ी परेशान लग रहा था...

मैने सोनू से बात की और बोल दिया कि कल टेंशन मत ले...कल उसका काम हो जायगा...

और फिर सोनू से कुछ डिस्कस कर के मैने कॉल कट कर दी...

मैं(मन मे)- लगता है कि सोनू के लिए एक गोली खानी ही पड़ेगी....

मैं ड्रिंक करते हुए अपने ख़यालों मे खोया हुआ था कि मेरे रूम मे किसी के आने की आहट हुई...

जब मैने देखा तो गेट पर रश्मि खड़ी थी...एक पतली सी नाइटी पहने हुए...

मैं- ओह...रश्मि...इस वक़्त...

राहमी(अंदर आ कर)- क्यो सर...क्या मेरा आना अच्छा नही लगा...मुझसे खफा है क्या...

मैं- नही...ऐसा तो कुछ भी नही...

रश्मि(गेट लॉक कर के)- तो मुझसे इतनी दूरी क्यो..

मैं(मन मे)- साली...मुझसे गद्दारी कर रही है और अब मेरे सामने बड़ी सीधी बनती है...

रश्मि- क्या हुआ..क्या अब मेरा हुश्न आपको बुरा लगने लगा...

मैं- क्या...नही...ऐसा तो कुछ भी...

तभी रश्मि ने अपनी नाइटी निकाल दी और अपना गदराया बदन मेरे सामने पेश कर दिया...जो पूरा नंगा था और रूम की लाइट मे चमक रहा था...

रश्मि- क्या मुझ मे कोई कमी आ गई ..हाँ...

मैं- नही...बिल्कुल नही...तुम तो आज पहले से ज़्यादा मस्त लग रही हो ...

रश्मि (इतराते हुए)- तो फिर इस जिस्म को रगड़ते क्यो नही....देखो तो ...मेरा अंग-अंग कैसे आपके नीचे मसल्ने को तड़प रहा है....

मैं(मन मे)- ये तो वही बात हो गई...मुँह मे राम और बगल मे छुरी...हाँ...

रश्मि- कहा खो गये सर...क्या मेरा आना पसंद नही आया...

मैं- हा...नही..ऐसा कुछ नही...मैं तो बस तुम्हारे हुश्नजाल मे खो गया था...

रश्मि- तो आज की रात मेरी तड़प मिटा दो सर....(और रश्मि ने अपने निप्पल मरोड़ दिए और सिसक उठी)

मैं- क्यो..आज की रात मे कुछ खास है क्या...

रश्मि- ह्म्म...क्या पता...फिर ऐसी रात मे आपके साथ मौका ना मिले...

मैं- ह्म्म...(और मैने एक और पेग बना लिया)

रश्मि- आज की रात मुझे जी भर के मसल दो सर..आअहह...(और रश्मि ने फिर से अपने निप्पल मरोड़ दिए)

मैं- ह्म...तो आओ फिर...आज मैं तुझे ऐसे मसलूगा कि उसके बाद तुझे चुदने का मन भी नही होगा....आजा ..

और मैं बेड पर बैठ गया और रश्मि मेरे पास आ कर नीचे बैठ गई और लंड आज़ाद कर के चूसने लगी....

रश्मि- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्ररुउउप्प्प...सस्ररुउप्प्प...उउंम...उउउंम...उउंम....

आज रश्मि पूरे जोश मे लंड चूस रही थी...जैसे फिर कभी चूसने को नही मिलेगा...

मैं ड्रिंक पीते हुए रश्मि की चुसाइ से गरम हो गया था ..

मैने ग्लास साइड मे रखा और रश्मि को बेड पर ला कर 69 पोज़िशन मे चुसाइ शुरू कर दी....

रश्मि- अओउउउंम्म...उउउंम्म..उउउम्म्म्म....उूुुउउंम्म...

मैं- सस्स्रररुउउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प्प.....सस्स्रर्र्ररुउप्प्प्प...

रश्मि- सस्स्रररुउपप...आअहह..उउंम..उउंम्म...उउउंम्म..

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प...उउउंम..उउंम..

रश्मि- उउंम...आहह...गाआ रे...आहह...आहह...आअहह....

थोड़ी देर बाद चुसाइ से रश्मि झड़ने लगी और मेरा लंड भी छेद की माँग करने लगा....

मैने रश्मि को फिर से बेड नीचे उल्टा किया और उसकी गान्ड मे लंड उतार दिया....

रश्मि- आआहह.....फ़ाआद्द्ड़..दी...

मैं- फटी तो पहले से ही है साली...चिल्ला मत...

और मैने रश्मि की जाघे पकड़ के चुदाई शुरू कर दी...

रश्मि- आअहह...आअहह..आअहह...आअहह:) ..

मैं- साली...थोड़ी टाइट हो गई..हाअ..

रश्मि- आहह...तो फाड़ दो ना....आआहह...ज़ोर से ....

मैं- तो ये ले साली...एस्स...एस्स...एसस्स....

हमारी चुदाई काफ़ी देर तक चली...मैने रश्मि की गान्ड के बाद उसकी चूत भी मारी और उसे 3 बार झड़ने पर मजबूर किया....

फाइनली मैं रश्मि के मुँह मे झड कर शांत हुआ...

 
फिर नॉर्मल होने के बाद रश्मि निकल गई...और उसे जाता देख कर मेरे मन मे एक ही ख्याल आया...

मैं(मन मे)- साली...तुझ जैसी रंडी अंकित को नही फसा सकती...कल का दिन तेरा नही...मेरा होगा....

अगले दिन मैं रेडी हुआ और ब्लूटूथ ले कर सोनू की बताई जगह निकल गया...उसने मुझे एक स्कूल के सामने बने गार्डन मे बुलाया था....

वहाँ पहुँचने से पहले ही मैने ब्लूटूथ फ़ोन से कनेक्ट कर लिया और सोनू से बात शुरू कर दी....

मैं- हाँ सोनू...तू पहुँच गया...

सोनू- हाँ...और तेरी रश्मि भी आ गई...

मैं(मुस्कुरा कर)- अच्छा है...कुछ दिन और उछलने दो साली को...फिर देखते है...

सोनू- ओके...पर ये बता कि तू रेडी है ना...

मैं- हाँ..बट तूने पीठ पर ये पट्टा बाधने क्यो बोला...मज़ा नही आ रहा...

सोनू- वो पट्टा ही गोली को रोकेगा....समझा...

मैं- तू क्या असली गोली मारेगा ...

सोनू- हाँ...क्योकि मुझसे देखने के लिए रश्मि होगी वहाँ....

मैं- साले ...असली गोली...देख कर भाई...कहीं मेरा पत्ता ना कट जाए...

सोनू- तू टेन्षन मत ले....तेरी कमर मे ही गोली लगेगी...और तू गिर जायगा...और फिर तेरी रीड की हड्डी बेकार हो जाएगी....

मैं- ह्म..वो तो तूने रात मे बताया था...पर ये बता कि ये साले मुझे अधमरा क्यो करना चाहते है...

सोनू- ताकि तू बेड पर लेट जाय और बीच ये सब तेरे डॅड को उड़ा देगे...और फिर तुझसे जो चाहिए वो ले कर तुझे भी थूक देगे...

मैं- गुड प्लान...अच्छा ये बता..तेरे डॅड को कब छोड़ने का बोला...

सोनू- तू बेड पर लेटा और मेरे डॅड आज़ाद...

मैं- ओके...चल मैं पार्क मे पहुँच गया....अब आराम से बात करना ...और हाँ...फाइयर करने से पहले यस बोल देना..ताकि मैं रेडी रहूं...

सोनू- ओके...तू टेन्षन मत ले...बस गोली लगने के बाद बिना हीले पड़े रहना ओके..

मैं- ह्म..और वो रश्मि कहाँ है...

सोनू- तेरे लेफ्ट साइड...पेड़ के पीछे से देख रही है तुझे...

मैं- ह्म...तो मेरी मौत का तमाशा देखने आ गई साली...

सोनू- 1 मिनट रुक...

और फिर सोनू ने थोड़ी देर बाद बोला...

सोनू- रेडी हो जा...ऑर्डर आ गया...

मैं - इतनी जल्दी...अभी स्कूल का लंच है...कोई सुन लेगा तो...तू फसेगा..

सोनू- कुछ नही होगा...साइलेनसर है....ओके रेडी....

मैं(लंबी सास ले कर)- अयाया...रेडी...

सोनू- 3...2....1...यस

सस्स्सुउुुउउप्प्प्प्प....

गोली तो बिना किसी आवाज़ के हवा मे लहराते हुए मेरी तरफ बड़ी...पर एक आवाज़ हवा मे गूज़ गई...

हहुउ..भाय्य्य्ाआआआआआआअ.......

आवाज़ सुन कर मैं पलटा तो मेरी जान निकल गई...

सामने पारूल थी...उसका मुँह खुला हुआ...आँखे बंद होती ...सीने से खून निकलता...

उसकी बॉडी हवा मे मेरी तरफ गिरने लगी...और मैने चिल्लाते हुए उसे संभाला....

मैं- पाररुउउल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल....नही...

ये नज़ारा देख कर रश्मि की तो गान्ड फट गई और सोनू अपनी गन फेक कर मेरी तरफ दौड़ा चला आया...

पारूल को ऐसे देख कर तो मेरी दुनिया ही ठहर गई..मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करूँ..क्या बोलू...ये सब अचानक...

पर सोनू ने होश से काम लिया और पारूल को कार मे डाल कर हॉस्पिटल भागा...साथ मे मैं भी था...

हॉस्पिटल मे पारूल आइसीयू मे थी और मैं बाहर आँखो मे आसू लिए बुत बना बैठा था.....

मेरे माइंड मे सिर्फ़ एक बात चल रही थी....

"इसका ज़िम्मेदार कौन....??????????????????

 
पारूल आइसीयू मे जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी...और मैं अपनी आँखो मे आसू लिए सोच मे पड़ गया...कि आख़िर जो हुआ...वो कैसे हुआ.....

गार्डन मे मैने सोनू के कहने पर घूमना शुरू किया....और उसी के कहे मुताबिक मैने कमर के उपेर पट्टा बाँधा हुआ था ...जो बुलेट प्रूफ था....

प्लान के हिसाब से सोनू उसी पट्टे पर गोली मारता...और मैं गिर जाता...और बाद मे डॉक्टर बोल देता कि मेरी रीड की हड्डी किसी काम की नही रही...और मैं कभी खड़ा भी नही हो पाउन्गा....

सब कुछ ठीक चल रहा था...पर अचानक पारूल मेरे पीछे आ गई...और जो गोली मुझे कमर पर खानी थी...वो उसका पेट चीर गई...

पर पारूल कहाँ से आ गई...और सोनू ने उसे देखा क्यो नही...

इस सवाल का जवाब सोचते हुए मुझे याद आया कि गार्डन के सामने ही पारूल का स्कूल था...और उस वक़्त लंच टाइम चल रहा था....

पारूल मुझे देख कर मुझसे मिलने आई होगी और शायद पीछे से आकर मुझे सर्प्राइज़ कर रही होगी..हाँ यही होगा...

पर सोनू ने क्यो नही देखा उसे....हाँ..याद आया ...मेरे बाजू मे छोटी घनी झाड़िया लगी थी लाइन से....और पारूल उसी मे से छिपकर आई थी...इसलिए सोनू भी टाइम रहते नही देख पाया....

इसी तरह मैं बैठ-बैठा अपने मन मे सारे सवालो के जवाब सोचता रहा....

पर दिल की धड़कन अभी भी तेज थी...जिस्म डर से थरथरा रहा था...माथे पर सिकान बढ़ती ही जा रही थी...

और दिल से बस एक आवाज़ निकल रही थी...कि भगवान...पारूल को कुछ ना होने देना..

उस फूल सी बच्ची ने तो कोई गुनाह नही किया...आज तक किसी का बुरा सोचा भी नही...तो उसे सज़ा क्यो दे रहे हो...प्ल्ज़...उसे जल्दी से ठीक कर दो..प्ल्ज़...

मैं अपनी नम आँखो से उपेर देखते हुए भगवान से प्रार्थना करता रहा...

मुझे ऐसे ही बैठे हुए करीब 1 घंटा हो गया था...सोनू भी मेरे साथ वही बैठा हुआ था...

तभी आइसीयू से डॉक्टर बाहर आया...

गेट की आवाज़ सुनकर मैने आँखे खोली....सामने डॉक्टर को देखा तो बिजली की स्पीड से उठ कर उसके पास पहुँच गया...

मैं- ड्ड..डॉक्टर...वो..मेरी गुड़िया...कैसी है वो...

डॉक्टर ने अपना चश्मा निकाला और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोला...

डॉक- हमने अपनी तरफ से पूरी कोसिस की...

मैं(बीच मे)- तो...तो क्या...

डॉक- रिलॅक्स मिस्टर. , गोली पेट से निकाल ली गई है...पर...

मैं- पर क्या डॉक्टर...

डॉक- उसका खून बहुत बह चुका था..तो..

मैं- तो मेरा खून ले लो...मेरे जिस्म मे बह रहे खून की आख़िरी बूँद तक ले लो डॉक्टर...बट उसे बचा लो प्ल्ज़...

मैं लगभग गिडगिडाते हुए डॉक्टर से बोला...डॉक्टर ने दोनो हाथो से मेरे कंधे थामे और मुझे बैठा दिया...

डॉक्टर- रिलॅक्स...हमारे पास खून था...उसे ऑलरेडी चढ़ा चुके है...थोड़ी ही देर मे उसे होश आ जायगा...रिलॅक्स...

मारे खुशी के मेरी आँखो मे आसुओं का शैलाब आ गया...और मैं डॉक्टर के हाथ पकड़ कर उसका सुक्रिया अदा करने लगा...

डॉक्टर- अब आप रिलॅक्स करो...उसके होश मे आते ही आपको खबर देता हूँ...ओके...

मैं(रोते हुए)- ह्म्म..थॅंक्स डॉक्टर...

डॉक्टर- लगता है आप उसे बहुत चाहते है...कौन है वो...

मैं- मेरी बेहन..मेरी छोटी सी गुड़िया है वो...

डॉक(मेरा कंधा थपथपा कर)- ओके..रिलॅक्स...आपकी गुड़िया ख़तरे से बाहर है...

डॉक्टर अपने कॅबिन मे निकल गया और मैं आइसीयू के बाहर से पारूल को देखने लगा....

ग्लास के उस पार ओक्सीजन मास्क पहले पारूल लेटी हुई थी...उसको खून की बॉटल लगी हुई थी...

उसकी ऐसी हालत देख कर एक बार फिर से मेरे माइंड मे गुस्सा भर गया...

मैने अपनी आँखो मे आए आँसू सॉफ किए और हॉस्पिटल से बाहर जाने लगा...

मुझे यू गुस्से मे जाते देख सोनू दौड़ के मेरे सामने आ गया...

मैं- हट जा...

सोनू- तू कहाँ जा रहा है...

मैं- इट्स एनफ ....अब किसी को नही छोड़ूँगा...ना रश्मि...ना रिचा और ना उसका बॉस...सबको मार दूँगा...

सोनू- क्या...नही ..नही..तू ऐसा कुछ नही करेगा...मेरी बात सुन...

मैं(बीच मे)- एनफ ईज़ एनफ....तू हट जा...वरना तुझे भी मार दूँगा...हट जा...

मैने सोनू को धक्का दे कर अलग किया और आगे बढ़ गया....पर सोनू फिर से मेरे सामने आ गया...

सोनू- अंकित ...मैं जानता हूँ तू गुस्से मे है..पर मेरे डॅड का तो सोच...तेरा एक कदम मेरे डॅड की जान ले सकता है...प्ल्ज़ अंकित...ठंडे दिमाग़ से काम ले...

मैं(चिल्ला कर)- नही...अब और नही....मेरे अपनो की जान पर बन आए...और मैं चुप रहूं...साला नमार्द हूँ क्या...मैं किसी को नही छोड़ूँगा....

सोनू- पर मेरे डॅड...उनका क्या...कुछ तो सोच...मेरे डॅड की जान पर बन आयगी...

मैं- मुझे कुछ नही सुनना...हट जा...

इस बार मैने सोनू को हटाया तो उसके पीछे से सोनम आ कर मेरे सामने खड़ी हो गई....

सोनम को सोनू ने सब बता दिया था...अपने डॅड के बारे मे भी...

मैं- अब तुझे क्या कहना है....

सोनम- बस इतना ही...कि ये सब कर के पारूल का दर्द कम कर दोगे...ह्म..

मैं- नही...पर दर्द देने वालो को इससे ज़्यादा दर्द दूँगा...

सोनम- और मुझे जिंदगी भर का दर्द...मेरे डॅड को मुझसे छीन कर..हाँ...

मैं- नही..मैं तुम्हारे डॅड को क्यो छीनने लगा...

सोनम- ये तुम जानते हो...तुम एक कदम बढ़ाओगे और मेरे डॅड की जान गई समझो....

सोनम की बात सुनकर मैं थोड़ा संभला...उसने ठीक कहा था...मैं अगर रश्मि या रिचा को कुछ करता हूँ तो सोनम के डॅड की जान भी जा सकती है...

क्योकि अगर सोनू मुझे नही मारेगा तो उसके डॅड को जिंदा रख कर उनका क्या फ़ायदा...

सोनम की बात से मेरा गुस्सा दूर हो गया और मैं वही साइड मे बैठ गया....

 
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