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चूतो का समुंदर



यही बात कुछ देर पहले सोनू ने भी कही थी...पर मैं नही माना था...पर सोनम के मुँह से यही सुन कर मैं चुप हो गया...

शायद लड़की की आवाज़ मे वो जादू है..जो आग को भी ठंडा कर देती है...और बर्फ को गरम....

सोनम की बात सुनकर मैं शांत हो गया...सोनम और सोनू भी मेरे साइड मे आ कर बैठ गये....

सोनम- थॅंक यू...

मैं- नही...असल मे मुझे गुस्से मे कुछ सूझ ही नही रहा था...सच कहा तुमने...मेरा एक ग़लत कदम तुम्हारे डॅड की जान ले सकता है...

सोनू- बस एक बार मेरे डॅड मिल जाए...फिर सालो को इसी गन से गोली मार दूँगा...

सोनम- पर भैया...तुमने ये बात मुझे पहले क्यो नही बताई...कि डॅड किडनॅप हो गये और तुम्हे अंकित को मारने को कहा गया है...

सोनू- मैं...मैं क्या करता...मैं नही चाहता था कि तुझे या मोम को टेन्षन हो कोई...

मैं- हाँ सोनम..सोनू ने सही किया...अब इस बात पर कोई बहस नही...

सोनम- ओके...अच्छा पारूल कैसी है...

मैं- वो ख़तरे से बाहर है...जल्दी ही होश आ जायगा...

फिर हम तीनो वहाँ बैठ कर पारूल के होश मे आने का वेट करने लगे....

यहाँ रिचा के घर ......

पारूल को गोली लगने से रश्मि एक दम घबरा गई थी ....वो जानती थी कि अंकित पारूल को अपनी सग़ी बेहन से ज़्यादा चाहता है...

उसे लगा कि अगर अंकित ने उसे यहाँ देख लिया तो उसे छोड़ेगा नही....

ऐसी हालत मे रश्मि घबराई हुई सीधा रिचा के घर पहुँची....

रिचा(गेट खोलते ही)- तू...तू यहाँ...क्या हुआ...

रश्मि(हान्फते हुए)- अंदर तो चलो...सब बताती हूँ...

रिचा ने जल्दी से रश्मि को अंदर किया और गेट लॉक कर दिया....

रिचा- क्या...अंकित की जगह गोली किसी और को लग गई....(रिचा सोफे से उठ कर खड़ी हो गई...जब रश्मि ने उसे वहाँ हुई घटना बताई)

रश्मि- हाँ...अंकित को गोली लगती इससे पहले पारूल आ गई और उसे गोली लग गई...

रिचा- पारूल...पर वो वहाँ कैसे पहुँची...तुमने तो कहा था कि अंकित अकेला है...

रश्मि- हाँ...अकेला ही था...पर अचानक पारूल आ गई ..और सब...

रिचा और रश्मि थोड़ी देर तक खामोश रहे...रश्मि तो घबराई हुई थी...पर शायद रिचा ये सोच रही थी कि अब आगे क्या करे...

रिचा- ओके..जो हुआ सो हुआ....उसके बाद क्या हुआ...पारूल मर गई क्या...

रश्मि- पता नही...अंकित और सोनू उसे हॉस्पिटल ले गये और मैं वहाँ से भाग आई...

रिचा- सोनू...पर सोनू क्यो सामने आया...

रश्मि- शायद ..उसे लगा होगा कि उसने ग़लती कर दी..इसलिए..

रिचा- वो तो ठीक है...पर कही सोनू, अंकित को सब बक ना दे...

रश्मि- वो क्यो बकेगा...उसके डॅड तो आपके पास है...

रिचा- जानती हूँ...लेकिन देखना तो पड़ता ही है ना....और ये बता कि तू यहाँ क्यो आई....मुझे फ़ोन से बता देती...

रश्मि- फ़ोन...मैने किया था...आपने उठाया नही...और मैं घबरा गई थी...

रिचा- ओह...शायद मैने सुना नही...ओके..तू अब आराम से घर जा...और पारूल के बारे मे कुछ पता चले तो कॉल करना...वैसे वो जिंदा है मर गई...

रश्मि- मेरे हिसाब से तो मर गई होगी...

रिचा- ओह..बेचारी...खम्खा बीच मे आ गई...खैर...तुम जाओ...और कॉल करना...अंकित के गुम मे शामिल होने तो आना ही होगा मुझे...हाँ...बेचारा....

और फिर रिचा हँसने लगी और रश्मि भी डरते हुए झूठी हसी हँसने लगी...और थोड़ी देर मे ही रश्मि वहाँ से निकल गई...

रश्मि के जाते ही रिचा ने बॉस को कॉल किया....

( कॉल पर )

बॉस- हाँ बोल...काम हो गया...

रिचा- नही ना...नही हुआ...

बॉस- क्या...पर क्यो...

रिचा- हुआ यू कि.......

और रिचा ने सबकुछ बॉस को बता दिया...जिसे सुन कर बॉस भी पारूल के लिए हमदर्दी दिखाने लगा...

बॉस- ह्म्म्म ..बेचारी...कोई नही..अब अंकित को गम मनाने दो...सोनू को कुछ दिन रुकने का बोल दो...

रिचा- ओके...मैने भी यही सोचा था...

बॉस- ओके..तो अब कुछ दिन मुझे कॉल मत करना...और कोई ज़रूरी काम हो तो ...तुम जानती हो कि तुम्हे कहाँ जाना है...बाइ...

रिचा- ह्म..बाइ...

वापिस हॉस्पिटल मे......

नर्स ने जैसे ही हमारे पास आकर बोला कि लड़की को होश आ गया...तो मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा और खुशी बन कर मेरे आँसू आँखो से छलक पड़े...

सोनम ने मुझे संभाला और मेरे आँसू सॉफ किए...

सोनम- अपनी गुड़िया को यू रोता चेहरा दिखाओगे क्या...

मैं- ह्म..नही..मैं फ्रेश हो कर आता हूँ...

मैं वहाँ से उठा और अपने चेहरे को सॉफ कर लिया...मैं भी नही चाहता था कि पारूल मुझे रोता देखे....

अपने आपको ठीक करके मैं आइसीयू मे पहुँचा तो देखा कि...पारूल होश मे आ चुकी थी...ओक्सीजन मास्क भी हट गया था और खून की बॉटल भी...

मुझ पर नज़र पड़ते ही पारूल बोल उठी...

पारूल- भैया...

मैं(मुँह पर उंगली रख कर)-स्शहीए...चुप रहो...

और मैं पारूल के साइड मे बैठ कर उसका सिर सहलाने लगा...

मैं- कैसी है मेरी गुड़िया...

पारूल- ठीक हूँ भैया...पर ये सब...

मैं(बीच मे)- कुछ मत बोल...जो हुआ..वो एक आक्सिडेंट था....बस तू ठीक है..यही मेरे लिए काफ़ी है...

पारूल- ह्म..

मेरे साथ सोनम और सोनू ने भी पारूल का हाल पूछा और उसे आराम करने की सलाह दे कर बाहर आने लगे...

मैं भी वहाँ नही रहना चाहता था..क्योकि मुझे डर था की मैं फिर से आँसू ना बहा दूं...इसलिए मैं भी उनके साथ जाने लगा....

तभी पारूल ने पीछे से मुझे आवाज़ दी...

पारूल- भैया...

मैं- हाँ गुड़िया...बोलो..

पारूल- वो गोली आपके लिए चली थी ना...

मैं चुप रह गया और फिर से पारूल के साइड मे बैठ कर उसका सिर सहलाने लगा...

मैं- बोला ना..कि ये सब आक्सिडेंट समझ कर भूल जाओ...बस...

पारूल- अगर मैं सही हूँ तो अच्छा ही हुआ...

मैं- क्या मतलब...

पारूल- आप पर आने वाली मुसीबत मुझे मिल गई...ये अच्छा ही हुआ ना..क्योकि आपके लिए तो मैं मरने को भी ....

मैं(पारूल के मुँह पर उंगली रख कर)- बस...मरे तेरे दुश्मन...

और मैने पारूल के माथे को किस किया और वहाँ से निकल आया....क्योकि मेरे आँसू अब रुक नही पा रहे थे...

पारूल का मेरे लिए प्यार देख कर मेरे आसू छलक ही गये...और पारूल के चेहरे पर गिरी मेरे आँसू की बूँद ने उसे भी ये अहसास दिला दिया....कि वो मेरे लिए कितनी खास है....

आइसीयू से निकल कर मैं सीधा डॉक्टर के पास पहुँचा....

मैं- हेलो सर...

डॉक्टर- हेलो मिस्टर. ....ओह, मैने आपका नाम तो पूछा ही नही..

मैं- अंकित मल्होत्रा...

डॉक्टर- आइए मिस्टर.अंकित...बैठिए...

मैं- सर...मेरी बेहन को ज़्यादा चोट तो नही आई..आइ मीन वो गोली..ज़्यादा डॅमेज तो नही हुआ ना ..

डॉक्टर- नही अंकित...असल मे गोली पेर के किनारे से निकली...तो चिंता की बात नही...बस ज़ख़्म है...कुछ दिन मे ठीक हो जायगा...

मैं- थॅंक गॉड...

डॉक्टर- वैसे ये सब हुआ कैसे...

मैं- पता नही...सब अचानक हो गया...

मैने सोचा कि जल्दी से यहाँ से निकलता हूँ...नही तो ये डॉक्टर बाल की खाल निकालेगा...

मैं- आक्च्युयली...मैं ये पूछने आया हूँ कि मैं अपनी बेहन को घर कब तक ले जा सकता हूँ...

डॉक्टर- वैसे वो अब ठीक है...बस कुछ दिन पट्टी बगैरह होगी..और कुछ टॅब्लेट्स...बाकी कुछ नही...तो आज शाम तक ही ले जा सकते है...अगर चाहे तो...

मैं- गुड...मैं शाम को ही ले जाउन्गा..

डॉक्टर- पर क्या घर मे ख्याल रख पायगे..

मैं - आप एक नर्स भेज देना...मैं पेमेंट कर दूँगा..ओके..

डॉक्टर- ओके...और हाँ...एक बात तो भूल ही गया...पोलीस के आने के बाद ही आप उसे ले जा सकते है...

मैं- पोलीस...पर पोलीस क्यो...

डॉक्टर- देखिए मिस्टर.अंकित...गोली लगी है..तो ये मॅटर तो पोलीस का ही बनता है ना...

मैं- ह्म्म..बट मैं नही चाहता कि पोलीस इस मामले मे पड़े...और इसके लिए मैं आपको चुप रहने की सलाह देता हूँ...

डॉक्टर- व्हाट डू यू मीन...

मैं- आप इस मॅटर को यही क्लोज़ करो...और हाँ...चुप रहने की कीमत भी मिलेगी...

डॉक्तोर(गुस्से से)- तुम समझते क्या हो अपने आप को...जानते हो कि मैं कौन हूँ...

मैं- नही...पर मैं मल्होत्रा एलेक्टॉनिक्स का मालिक हूँ...समझे....

डॉक- ओह...आप...मल्होत्रा एलेक्ट्रॉनिक्स....मिस्टर आकाश के बेटे...

मैं- ठीक समझे...अब बोलो...चुप रहने की कीमत क्या लोगे...

डॉक- सॉरी मिस्टर. अंकित...देर हो गई...

मैं- क्या मतलब...

डॉक्टर- मतलब...

 


तभी कॅबिन के बाहर से एक आवाज़ आई...ये रफ़्तार सिंग की आवाज़ थी...जो मेरे पीछे गेट पर खड़ा हुआ था...

रफ़्तार- मतलब ये कि रफ़्तार अपनी रफ़्तार से यहाँ पहुँच चुका है...

मैं खड़ा हो गया और रफ़्तार के पास पहुँचा...

मैं- तो...अब क्या...

रफ़्तार- अब...अब तेरी फिल्म बनाउन्गा..हाहाहा...

मैं- देखो...ये पोलीस का मॅटर नही है..

रफ़्तार- मुझे तू तो समझ ही मत...चुपचाप खड़ा रह...और डॉक्टर तू...चल मेरे साथ...ज़रा मिलूं तो उस फूल जैसी कमसिन कली से....

रफ़्तार की बात सुन कर मेरा खून खौल गया..पर शांत रहने के अलावा कोई चारा नही था...

रफ़्तार डॉक्टर को लेकर आइसीयू मे चला गया और यहाँ मैने एक कॉल लगा दिया...

थोड़ी देर बाद रफ़्तार आइ सीयू से बाहर आया...

रफ़्तार- तो तेरी मौत उसने ले ली...हाँ...

मैं- मुझे मारने वाला अभी पैदा ही नही हुआ इनस्पेक्टर...

रफ़्तार- अच्छा...सुक्र मना कि लड़की बीच मे आ गई...वरना तेरा तो हो गया था..राम-नाम सत्य...हाहाहा...

मैं(घूरते हुए)- तो क्या अब मैं उसे ले जा सकता हूँ....

रफ़्तार- ले जा...ज़रूर ले जा...ऐसी कोमल कली को हॉस्पिटल मे नही छोड़ना...क्या पता कि रात के अंधेरे मे कोई फूल को कली...

मैं(रफ़्तार की कलर पकड़ कर)- बस इनस्पेक्टर...आगे एक शब्द भी बोला तो...

रफ़्तार- पोलिसेवाले की कलर पर हाथ डाला....अब तेरी ऐसी फिल्म बनाउन्गा ना...तू देख...इस केस मे तेरी गान्ड लगा दूगा...और अभी तो तेरी...

रफ़्तार ने दोनो हाथो से मेरी कलर पकड़ी और मुझे दीवाल से चिपका दिया...

रफ़्तार- आज की रात तेरी बेहन जहाँ भी रहे...तू तो रहेगा मेरे लॉकअप मे...चल...

तभी इनस्पेक्टर आलोक की आवाज़ गर्जि...

आलोक- रफ़्तार...लीव हिम...

रफ़्तार- ओह...तो इसे बुला लिया...हां..साले...

आलोक- सुना नही..छोड़ो उसे...और दफ़ा हो यहाँ से...

रफ़्तार- सर ..उसने पोलीस पर हाथ डाला...और क़ानून के हिसाब से...

आलोक(बीच मे)- मुझे क़ानून मत सिखा...और हा..यहाँ लगे सीसीटीवी कमरे सब सॉफ कर देगे..कि किसने किसको हाथ लगाया और किसने क्या बोला...

सीसीटीवी का नाम सुनते ही रफ़्तार ढीला पड़ गया...और वहाँ से जाने लगा...

रफ़्तार(मुझे घूर कर)- एक दिन तेरी फिल्म ज़रूर बनाउन्गा बच्चे...

मैं- कोसिस कर ले...और हाँ...तेरे लिए एक फिल्म मैं बनाउन्गा...असल मे शुरू भी कर दी...जल्दी ही दिखाउन्गा...

रफतात ने मुझे घूरा और अकड़ के साथ वहाँ से निकल गया...

आलोक- मिस्टर.अंकित...पोलीस फॉरमॅलिटीस होने के बाद आप अपनी बेहन को ले जा सकते है...

मैं- थॅंक यू सर....

और फिर शाम तक हम वही रहे और शाम को एक नर्स के साथ पारूल को घर ले आए....सोनू और सोनम भी मेरे साथ ही रहे और मेरे घर भी आ गये.......

पारूल को मैने अपने बाजू वाले रूम मे ही शिफ्ट करवाया ....ताकि वो मेरे पास ही रहे...

उसके बाद मैने संजू, अकरम को आक्सिडेंट की खबर दे दी....क्योकि ना बताता तो दोनो गुस्सा हो जाते...खास दोस्त जो ठहरे...

 


सोनम ने भी अपनी मोम और कामिनी के घर ये बात बोल दी...रिचा तक भी ये बात पहुँच गई...

फिर क्या था...सब के सब मेरे घर आ धम्के ...पारूल का हाल- चाल पूछा और मुझसे घटना के बारे मे...

सबके आने और उनकी बातें सुन कर मेरा गुससा भी दूर हो गया और माइंड एकदम फ्रेश हो गया...

सबको निपटा कर मैने उन्हे घर रवाना किया...पर सोनम पारूल के पास ही रुक गई...

वैसे रुकना तो अनु, रक्षा और जूही भी चाहती थी...पर मैने उन्हे जाने के लिए मना लिया...

सोनम को भी भेजना चाहा ...पर उसने बोला कि जब मैं उसके डॅड के लिए गोली खाने को तैयार था..तो क्या वो थोड़ी हेल्प भी नही कर सकती...तो मैं चुप रहा और वो मेरे घर रुक गई...

रात हम सबने पारूल के रूम मे ही डिन्नर किया और फिर सब सोने निकल गये...सिर्फ़ मैं और सोनम रह गये...

फिर पारूल के सो जाने के बाद मैने नर्स को भी सोने का बोला और सोनम के साथ अपने रूम मे आ गया...

मैं- आहह..तो सोनम...तुम यहाँ सो जाओ..मैं नीचे सो जाउन्गा...

सोनम- क्यो..मेरे साथ रूम शेयर करने से डर लगता है क्या...

मैं- उऊँ..हा..थोड़ा सा...

सोनम- मैं भूतनि हूँ क्या..???

मैं- नही...तुम तो परी हो...इसलिए...

सोनम- बातें मत बनाओ...कही नही जाना....और इतना ही ज़रूरी है तो मैं जाती हूँ..

मैं- ओह..नही...कोई कही नही जा रहा...आओ बैठो...पर ..

सोनम- पर क्या...

मैं- मुझे ड्रिंक करने का मान गई...बस 2 पेग...

सोनम- ओह...तो लाओ..मैं खुद बना देती हूँ..

मैं- तुम्हारे हाथ से तो ज़्यादा ही नशा हो जायगा...

सोनम(मुस्कुरा कर)- आप भी ...लाइए...पेग बनाती हूँ....

मैं- ओके...बट पहले चेंज तो कर ले...ओह हाँ...तुम क्या पहनोगी...एक काम करो...पारूल की कोई ड्रेस पहन लो..ओके..

सोनम- चेंज बाद मे कर लूगी...पहले ड्रिंक तो करा दूं आपको...

फिर सोनम ने अपने हाथो से पेग बना कर पिलाए...वाकई..आज नशा कुछ ज़्यादा ही हो रहा था.....

मैं(एक पेग ख़त्म कर के)- सोनम..एक बात पुच्छू....

सोनम- ह्म्म..शायद मैं जानती हूँ कि क्या पूछने वाले हो...

मैं- अच्छा...तो बताओ...

सोनम- नही..आप पूछिए....

मैं- ओह...तुम लड़कियों को पता सब होता है...पर पहल लड़के ही करे...हाँ..

सोनम(मुस्कुरा कर)- ये हमारा हक़ है...अब पूछिए भी...

मैं- तुमने मेरे सवाल का जवाब क्यो नही दिया...ना ही हाँ कहा और ना ही ना...

सोनम चुप रही...और दूसरा पेग बना कर मुझे पकड़ा दिया...

मैं- खामोशी कभी कोई जवाब नही होती सोनम...मुझे जवाब चाहिए...बोलो...

सोनम- पता नही...ना मैं कहना नही चाहती थी...और हाँ मैं कह नही सकती थी...

मैं- पर क्यो...कोई मजबूरी...??

सोनम- ऐसा ही समझो...मजबूर हूँ..अपने दिल से...

मैं- तो मैं वो मजबूरी ज़रूर जानना चाहूगा...जो तुम्हारे दिल को हाँ कहने से रोक रही है...

सोनम- नही...आप ना ही जाने तो अच्छा होगा...

मैं- बिल्कुल नही...अच्छा हो या बुरा...मैं जानना चाहूगा...अब बोल भी दो...

सोनम- शायद ये जान कर आप मुझसे नफ़रत करने लगे...

मैं(पेग ख़त्म कर के)- अगर ऐसा सोचती हो तो मैं वादा करता हूँ...कि कुछ भी हो...तुम मेरी नज़रों मे वैसी ही रहोगी...जैसी अभी हो...ओके..

सोनम- क्या...मतलब आप मानेगे नही...

मैं- मानना मेरी फ़ितरत नही...

फिर सोनम ने मेरे लिए एक और पेग बनाया और मुझे पकड़ा कर नज़रे नीचे झुका ली...

मैं- सोनम...मैं इंतज़ार कर रहा हूँ...

सोनम- मैं आपके लायक नही...

मैं- ये मैं डिसाइड करूगा...अभी मुझे वो मजबूरी जाननी है जो तुम्हे हाँ कहने से रोक रही थी...

सोनम- मैं अपनी हवस मे इतनी आँधी हो गई थी की...की..

सोनम कुछ कहते हुए इमोशनल हो गई...उसकी आँखे शायद नम भी हो गई थी. .

मैं- क्या...क्या किया था तुमने...

सोनम- मैने वो किया था जो ज़्यादातर लोग नही करते...मैने हवस की आग बुझाने के लिए अपने ही भाई के साथ....

और इतना बोल कर सोनम रोने लगी...उसको रोता देख कर मैं सोच मे पड़ गया कि अपना पेग ख़त्म करूँ या पहले उसे संभालू...

वो इसलिए क्योकि सोनम की कही बात ने मुझे कोई शॉक नही दिया था....वो मैं पहले से ही जानता था...

 


सोनम का रोना बढ़ता गया और मुझे आधा पेग पी कर ही उसे संभालना पड़ा....

मैं- सोनम...नही...प्ल्ज़..रोओ मत...कुछ नही हुआ...

सोनम(रोते हुए)- कुछ नही...बहुत कुछ हुआ है...अब मैं तुम्हारे लायक नही रही...

मैं- नही सोनम...ऐसा नही है...मैने तुम्हारी सीरत से प्यार किया...जिश्म से नही...और अगर ऐसा नही होता तो मैं तुम्हे प्रपोज करता ही नही...क्योकि मैं जानता था कि तुम अपने भाई के साथ सेक्स करती हो...

सोनम मुझे आँखे फेड देखने लगी...

मैं- हाँ सोनम...तुम्हे प्रपोज करने के पहले ही मैने तुम्हारी और सोनू की लाइव सेक्स फिल्म देख ली थी...

सोनम को मेरी बात सुनकर ज़ोर का झटका लगा था...जिस बात को कोई नही जानता था..उसे जान कर भी मैने उसे प्रपोज किया....क्यो...शायद सोनम यही सोच रही होगी....

मैं(सोनम के चेहरे को पकड़ कर)- अब ये आँसू मत बहाओ...मुझे तुमसे कोई शिकायत नही....मेरे लिए तुम वैसी ही हो जैसी उस दिन थी..जब मैने तुम्हे प्रपोज किया था...

सोनम- आपको पता था...

मैं- ह्म..(और फिर मैने सोनम को वो बात बताई जब मैने कामिनी के घर सोनू और सोनम को चुदाई करते पकड़ा था...)

सोनम(रोते हुए)- फिर भी आपने मुझे...

मैं- हाँ..फिर भी...आइ लव यू...

ये वर्ड सुनकर तो सोनम खुशी के मारे मेरे गले लग कर रोने लगी...

सोनम के गले लगते ही मेरी बॉडी मे गर्मी का संचार होने लगा...ना चाहते हुए भी सोनम की बॉडी मुझे अपनी तरफ खीचने लगी ..

और मैने सोनम को कस कर अपनी बाहों मे भर लिया...

सोनम के कड़क बूब्स मेरे सीने मे दव कर मेरे लंड मे हलचल मचाने लगे ....और शायद यही हाल सोनम का भी था...उसने भी मुझे अपनी बाहों मे ज़ोर से जकड लिया था...

थोड़ी देर तक हम ऐसे ही चिपके रहे और फिर मैने कंट्रोल कर के सोनम को शांत करवाया और उसे फ्रेश होने को बोला...

सोनम उठी और पारूल के रूम से नाइट ड्रेस लाई और बाथरूम मे घुस गई...और मैं अपना पेग ख़त्म करने लगा......

थोड़ी देर बाद जब सोनम बाथरूम से बाहर निकली तो मेरी आँखे बड़ी हो गई...

वो इस समय एक पतली सी नाइटी मे थी..जो उसकी जाघो तक आ रही थी...शायद पारूल की नाइटी इसे छोटी पड़ गई...

पर इसमे सोनम क़हर ढा रही थी...उसकी चिकनी जाघे....बिना ब्रा के उछलते बूब्स और खुली बाहें मेरा कंट्रोल ख़त्म कर रही थी...

सोनम की इस अदा ने मुझ पर हमला कर दिया और मैने भी अपनी टी-शर्ट निकली और सोनम के पास पहुँच गया...

मैं- सोनम...तुम..तुम तो...उूउउंम्म..

और मेरी बात ख़त्म होने से पहले ही सोनम के रसीले होंठो ने मेरे होंठो को अपनी क़ैद मे कर लिया...

हमारे होंठ मिलते ही हमारा जोश भी बढ़ गया और हम एक दूसरे को ऐसे चूसने लगे जैसे की ये होंठ फिर कभी नही मिलेगे....

सोनम- उउउंम्म..उूउउंम्म...उूउउंम्म....उूुउउंम्म....उउंम्म..

मैं- उउउंम्म...उउउम्म्म्म...उउउंम्म...उउउम्म्म्म...

हमारे जिस्म हमारे किस के साथ-साथ आपस मे किस करने लगे थे...और दोनो के जिस्म गरम होते जा रहे थे...

मैने सोनम को किस करते हुए अपनी बाहों मे उठाया और बेड पर लिटा दिया...

पर हमारा किस अभी भी जारी था....होंठ एक दूसरे के होंठो को छोड़ने तैयार ही नही थे...

आज पता चला कि अगर दो लोगो के बीच प्यार हो तो इमोशन्स जागने मे बिल्कुल वक़्त नही लगता....और इमोशन इस कदर जागते है कि जोश की इंतहा हो जाती है.......

सोनम मेरे नीचे थी और मैं उसके रसीले होंठ चूसने मे मगन था...

सोनम तो इतने जोश मे आ गई कि अपने नाख़ून मेरी नंगी पीठ पर दबा कर मुझे चूसने लगी.....

थोड़ी देर बाद हमने किस ख़त्म किया ....क्योकि हमे सास लेने की सख़्त ज़रूरत थी...

हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे देखते हुए लगभग हाफ़ रहे थे...और चेहरे पर एक मादक मुस्कुराहट थी....

मैं- तो अब प्यार आगे बढ़ाए...

मेरी बात सुन कर सोनम ने शर्मा कर अपनी आँखे बंद कर ली और अपने हाथो को उपर कर दिया...जैसे मेरे सामने समर्पण कर रही हो....

मैने भी देर नही की और सोनम की बनियान टाइप नाइटी को उसके बदन से अलग कर दिया...

उसके गोल चमकदार बूब्स मेरे सामने थे...ना छोटे..ज़्यादा बड़े...बिल्कुल फिट...और मेरे मुँह मे पानी लाने को काफ़ी थे...

पर मैने सोनम की पैंटी को अलग कर के काम पूरा किया और नंगी होते ही सोनम उछल कर मेरे सीने से चिपक गई...

मैने सोनम को पलटाया और खुद बेड पर बैठ गया...अब सोनम मेरी गोद मे थी...

सोनम ने मुझे फिर से किस किया और सरक्ति हुई बेड के नीचे बैठ गई...

मैं- अब शरमाना छोड़ो...तुम्हारी बारी....

सोनम मेरी बात समझ गई और मेरे बचे हुए कपड़े निकाल कर मुझे नंगा कर दिया....

मेरा लंड सोनम के सामने आते ही उसकी आँखे चमक गई...उसने नीचे बैठ कर अपने बूब्स के बीच मेरा लंड फसा लिया और टोपे पर किस कर के बूब्स मसल्ने लगी...

मैं- ह्म्म्म..पसंद आ गया ...हां...

सोनम(शरमा गई)-

मैं- अब शरमाना छोड़ो...मुझे बेड पर लड़की के अंदर की रंडी चाहिए...जो हर लड़की के अंदर होती है...ओके...

सोनम- ह्म्म्मन...

मैने सोनम को उठा कर बेड पर लिटाया और खुद उसके बूब्स के बीच लंड डाल कर बैठ गया...

सोनम ने अब कोई देर नही की और बूब्स से लंड को दबा लिया और मैने लंड हिलाना चालू कर दिया...

थोड़ी ही देर बाद मेरा लंड सोनम के मुँह मे जाने लगा ...और सोनम ने भी मुँह खोल के मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया.....

मैं- येस्स...ये हुई ना बात...अब मज़ा आएगा...यीहह...

सोनम- गगूवंम्म...क्क्हूनम्म्म..ख्हूम्म..क्क्हूओनमम्मम..

मैं- वाउ...गुड...येस्स...यीस्स...ईीस्स...

सोनम- क्क्हूम्म..क्क्हूओंम..क्क्हूंम्म...

 


थोड़ी देर बाद मैं उठ कर सोनम के पैरों के पास आ गया और उसकी जाघे खोल कर उसकी चूत पर जीभ फिरा दी...

सोनम- आअहह.....

मैं- वेरी नाइस...पूरी चिकनी...जैसी मुझे पसंद है...

सोनम कुछ नही बोली बस मुझे देख कर शरमा गई....और मैने चूत चुसाइ शुरू कर दी....

मैं- सस्स्रररुउउप्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्रररुउउ..आआहह....सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्रररुउुउउप्प्प्प...सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प...आअहह....

सोनम- उउउफफफफ्फ़...माअस...आअहह...आअहब...उउउंम्म...ऊहह..माआ....उउउंम्म...उउंम्म...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प्प.....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....

सोनम- ओह...आअहह...आअहह...हहा....चूसो...आजहह...मज़ा आ गया...आहह...आअहह....

थोड़ी देर की मस्त चूत चुसाइ से सोनम झड़ने लगी और अपना चूत रस छोड़ने लगी....

नेहा- ओह्ह..मैं..आअहह...आऐईयइ...उउंम...उउउंम...आआहह...

मैं प्यार से सोनम की चूत चूस कर चूत रस पी गया और फिर सोनम ने सिर के पास अपना लंड कर के बैठ गया....

सोनम समझ गई कि उसे क्या करना है....सोनम ने लपक कर लंड को चूसना शुरू कर दिया और मैने भी अपनी उंगलिया सोनम की चूत मे डाल दी...उसे तैयार करने के लिए....

सोनम- सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउउप्प्प्प.....सस्स्रररुउउप्प्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प्प्प.....

मैं- आहह....ऐसे ही मेरी जान..अच्छे से चूस.. ..उउउम्म्म्म

सोनम- सस्स्रररूउउगग़गग.....सस्स्रररुउउउग़गग...सस्स्रररूउउगग़गग...सस्स्रररुउउउगग़गग....

मैं- उउंम..ज़ोर से डार्लिंग...पूरा अंदर लो...आअहह...ऐसे ही...

सोनम सस्स्ररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प...सस्ररुउपप...

मैं- ओह्ह...येस्स...ज़ोर से..आअहह ....

सोनम- सस्स्ररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प...उूउउम्म्म्मममम....

सोनम ने पूरा लंड गले मे भर लिया..और गुऊपप..गग्गगुउुप्प...करने लगी....

मैं- ओह...यस..बहुत अच्छे....आअहह...

सोनम- सस्स्ररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प...

मैं- बस..रुक जा..झड़ाएगी क्या...आओउंम..

मैने सोनम को रोका और उसकी चूत से उंगली निकाल कर लंड सेट कर दिया ....

मैं- रेडी ...

सोनम ने हाँ मे सिर हिला दिया....और मैने एक धक्के मे आधा लंड चूत मे डाल दिया...

सोनम की चूत खुली हुई थी तो ज़्यादा दर्द नही हुआ...

पर दूसरे धक्के मे पूरा लंड चूत ने जाते ही उसकी चीख निकल गई...

सोनम- आआईयईईई.....म्माआ...

मैं- दर्द हुआ...बस थोड़ा होगा...

और मैने सोनम के बूब्स दबाना चालू कर दिया...साथ मे धीरे-धीरे कमर हिलाने लगा...

थोड़ी देर बाद सोनम नॉर्मल हुई और चुदाई शुरू हो गई...मैने सोनम के बूब्स मसल्ते हुए उसे तेज़ी से चोदने लगा....

मैं- अब कैसा लग रहा सोनम...ह्म्म्म ...

सोनम- उउउम्म्म्म....करते रहो....

थोड़ी देर मे सोनम की मस्ती बढ़ती गई और उसकी सिसकारियाँ भी बढ़ने लगी.....

सोनम-आहह…आअहह....आहह...….ज़ोर से…

मैं- हाँ मेरी जान...ये लो...एस्स..एस्स...एसस्स...

सोनम- आहह...आअहह......आहह....उउउंम....

मैं- एसस्स..ये ले...ये ले...ऐसे ही ना...

सोनम- हमम्म..आअहह..हाअ...आईससीए...हहीी.......आअहह.....

फिर मैने सोनम को कमर से पकड़ कर उठाया और उसे अपने उपेर कर के लेट गया...

सोनम अब मस्त हो चुकी थी और मेरे उपेर आते ही मुझे किस करते हुए अपनी गान्ड हिला कर चुदने लगी....

सोनम- आहह…ज़ोर सी….उउउंम..उउंम्म…आहह…फाड़ दो....उउउम्म्म्ममम....

मैं- उउंम्म...हाँ जान....ये लो…उउम्म्म्म

सोनम- अहहह....आहह...आईसीई..हहीी...आहह......माअर्ररूव....माअर्ररूव...तीएज्ज्ज...उूउउम्म्म्म..उउउम्म्म्मम....

मैं- उउंम...उउउंम्म..उउंम्म...

और मैने नेहा को पकड़ कर नीचे से तेज धक्के मारने चालू कर दिए....और थोड़ी ही देर मे सोनम झड़ने लगी.....

सोनम-आहह…अहहह.आह…अमम्मायन्न…आऐईइ…..आहह..आह...आऐईयइ...

सोनम झड कर शांत पड़ गई और मेरे गले लग कर लेट गई...

मैं- क्या हुआ जान...

सोनम- थक गई...

मैं- अच्छा...पर मेरा काम बाकी है...

सोनम- ह्म्म..थोड़ा रूको ना...

मैं- रुकना ही तो नही आया यार...तुम रेस्ट करो...मैं मज़े करता हूँ...

सोनम- अकेले कैसे...

मैं- बताता हूँ....

 


मैने सोनम को 69 पोज़िशन मे अपने उपेर लिटा लिया और उसकी चूत को चाट कर रेडी करने लगा....

सोनम अपने मुँह मेरे लंड के पास रख कर चुपचाप पड़ी सिसकती रही और मैं अपना काम करता रहा...

3-4 मिनट की मेहनत के बाद ही सोनम गरम हो गई और उसने मेरे लंड को गुप्प से मुँह मे भर लिया...और फिर चुसाइ शुरू हो गई....

सोनम- उउउंम्म..सस्स्रररुउउप्प्प...उउंम्म..उउंम...

मैं- सस्स्ररुउउप्प्प...सस्ररुउपप...सस्स्ररुउप्प्प...

सोनम- उउउंम्म..आहह..उउउंम्म..उउउम्म्म्म...

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि अब सोनम रेडी है तो मैने उसे कुतिया बनाया और जोरदार चुदाई शुरू कर दी....

मैं- यीह..यीहह...ईएह...ईएह..

सोनम- उउउंम...उउंम..आअहह..आअहह...

मैं- ओह्ह..एस्स बेबी...एसस्स..आअहह...

सोनम- आहह..बहुत मज़ा आ रहा ....आअहह...आअहह...

मैं- एस्स ...एसस्स...ईीस्स...ईीस्स...

मेरे तेज धक्को से सोनम की गान्ड आवाज़े निकालने लगी और धक्के खा कर उसकी कमर भी दर्द होने लगी...

सोनम- आहह...मेरी कमर....थोडा धीरे...

मैं- यस जान..कुछ करता हूँ...

और मैने सोनम को पीछे करके बैठा दिया और तेज धक्के जारी रखे...

मैं- हाँ मेरी जान...अब ठीक है...हां

सोनम- हा...आहह...आअहह......आहह......

मैं- तो लो फिर...य्स्स..ये ले...एस....

सोनम- हमम्म..आअहह..हाअ,,...आईससीए,,,हहीी,,,,,,आहहह.....

मैं- आहह....मज़ा आएगा आज तो...यीहह...ईएह....

सोनम- आहह…ज़ोर सी….फाड़,…आहह…दूओ..आहह….

मैं- ये लो जान.. …ओर लो…यीहह

सोनम- अहहह....आहह...आईसीई..हहीी...आहह......माअर्ररूव....माअर्ररूव...तीएजज्ज़...

और 20 मिनिट की चुदाई मे सोनम फिर से झड़ने लगी.....

सोनम-आहह…आह.आ.आह…अमम्मायन्न…आऐईइ…..आ..आह...आऐईयईईईईई

मैं- मैं भी आ रहा हूँ जान...ये लो....ईएहह....ईएहह.....

हम दोनो ने झाड़ते हुए चुदाई जारी रखी...और चुदाई की आवाज़ बदलने लगी......

आअहह…..स्शहहह..आहह…त्ततहुूप्प्प…कचहुप्प्प…..ईएहहाअ…आहह…त्ततहुूप्प्प…त्ततहुूप्प्प….फ़फफूूककचह…फ़फफूूककच…

.ऊओ…ईीस्स…यईीसस…आअहह….ऊओ……फफफफकक्चाआप्प्प….टतततुउउप्प…आहह....

और थोड़ी ही देर मैं हम दोनो ढेर हो गये...

थोड़ी देर लेटने के बाद सोनम उठी और मेरे लंड को फिर से चाटने लगी....

मैं- क्या हुआ जान...अभी हिम्मत बाकी है....

सोनम- अभी रात जवान है..तो मैं क्यो रुकु...सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प...

मैं- आहह...तो फिर तैयार करो....

और मैं लंड चटवाते हुए सेकेंड राउंड के लिए रेडी होने लगा.......

इधर आकाश के रूम मे ....रात के वक़्त....

रात के वक़्त आकाश का फ़ोन बजा तो स्क्रीन पर नाम देख कर वो सोच मे पड़ गया...फिर अपने चारो तरफ का मुआयना करके उसने कॉल लिया और धीरे से बोला....

( कॉल पर )

आकाश- हाँ..हेलो...

सामने एक औरत थी...

औरत- हेलो को गोली मारो..ये बताओ कि कॉल लेने मे इतना टाइम क्यो लगा...

आकाश- वो...वो मैं चेक कर रहा था...कि कोई सुन ना ले...

औरत- ठीक है...अब बता...काम का क्या हुआ...

आकाश- काम...कैसा काम...

औरत- क्या...दिमाग़ खराब है क्या...वहाँ जिस काम से गया वो पूछ रही हूँ...

आकाश- हाँ ..वो..याद है...मैने सोचा कि...

औरत(बीच मे)- हहहे...तुम सोचने भी लगे..हाँ...अरे सोचने के लिए दिमाग़ चाहिए...और तुम्हारा दिमाग़ तो...

आकाश(गुस्से से )- क्या मतलब...???

औरत- मतलब छोड़ो..और ये गुस्सा मुझे मत दिखाओ...मेरी बात ध्यान से सुनो...कल अंकित से पेपर्स पर साइन करा लो...बाकी मैं खुद कर लूगी..समझे...

आकाश- पर अभी...अभी कैसे...

औरत- क्यो...अभी क्या हुआ...

आकाश- आज उसकी बेहन का आक्सिडेंट हो गया...वो परेशान है...

औरत- बेहन...ये कहाँ से पैदा हो गई...

आलाश- मुंहबोली बेहन है..पर अंकित के लिए सग़ी से बढ़ कर...

औरत- कोई भी हो...उससे क्या...तुम कल कर लेना..समझे...

आकाश- थोड़ा टाइम तो दो...ऐसे नही होगा...

औरत- उफ्फ हो...ठीक है..1 हफ्ते मे सब निपटाओ...और अब मुझे कुछ नही सुनना...मेरी चूत मे आग लगी है...मैं चली आग बुझाने...रखो...

आकाश कुछ कह पता उसके पहले ही औरत ने कॉल कट कर दी...

कॉल रखने के बाद आकाश सोच मे पड़ गया ......

आकाश(मन मे)- लगता है कि अंकित से बात करनी ही होगी...वरना ये औरत जान खा जाएगी....

नेक्स्ट मॉर्निंग......

सुबह मेरी आँख खुली तो सोनम मेरी बाहों मे पड़ी थी...रात को उसकी 2 बार जोरदार चुदाई हुई थी...

सोनम को देख कर मेरा मन फिर से होने लगा...पर मुझे एक ज़रूरी काम याद आया और मैने कंट्रोल कर लिया...और फ्रेश होने निकल गया....

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सुबह के 10 बजे करीब एक सुनसान रोड पर एक शानदार कार जा रही थी...

अचानक से कार डगमगाई और ड्राइवर ने बड़ी मुश्किल से कंट्रोल कर के कार रोकी...

ड्राइवर ने नीचे उतर के देखा तो कार के 2 पहिए पन्चर हो चुके थे...

जैसे ही उसने पिछली शीट पर बैठी अपनी मालकिन को ये बात बोली तो एक हॉट लेडी कार के बाहर आ गई...

उस लेडी ने मिनी स्कर्ट और उससे भी मिनी टॉप पहनी हुई थी...

उसका चिकना पेट और गोरी जाघे धूप मे चमचमा रही थी...

वो लेडी बहुत गुस्से मे थी और अपने ड्राइवर को बड़बड़ा रही थी...

तभी एक शानदार कार उसके साइड मे रुकी और कार का काँच नीचे हुआ और एक आवाज़ आई....

"" मे आइ हेल्प यू सेक्सी......?????

आवाज़ सुनते ही लेडी ने अपनी नज़र उस कार की तरफ घुमाई और अपनी आँखो पर लगे बड़े गॉगल को सिर पर चढ़ा कर कार मे बैठे लड़के को देखने लगी...वो लड़का और कोई नही बल्कि मैं ही था....

लेडी- व्हाट....व्हाट यू जस्ट सेड...???

मैं- आइ सेड....मे आइ हेल्प यू...

लेडी- नो...उसके आगे क्या बोला...??

मैं- आगे...ओह हाँ...आइ सेड सेक्सी...

लेडी- सेक्सी...हाँ...तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई...

मैं- हिम्मत...वो तो बहुत है...बट ये बताओ..कि सेक्सी सुनना पसंद नही है या फिर...

मैने अपनी बात को जानबूझ कर अधूरा छोड़ दिया....

लेडी- फिर..फिर क्या...?

मैं- छोड़ो...मेरी ग़लती है...मैने ग़लत इंसान से ग़लत बात बोल दी...तुम सेक्सी हो ही नही सकती....

लेडी(गुस्से मे)- एक्सक्यूज मी....मतलब क्या है तुम्हारा....???

मैं- ह्न्म्म..मतलब ये है मेडम...कि आज समझ आ गया की सिर्फ़ कम कपड़े पहनने से कोई सेक्सी नही हो जाता....सोच भी वैसी होनी चाहिए....

लेडी(और ज़्यादा गुस्से मे)- क्या...सोच ...सेक्सी....कहना क्या चाहते हो...??

मैं- देखो...अगर सेक्सी बनना है तो माइंड से बनना होता है...सिर्फ़ अपनी बॉडी दिखा कर कोई सेक्सी नही हो जाता...

लेडी- मैं अब भी नही समझी...

मैं- समझना क्या है...तुम कपड़े तो ना के बराबर पहनी हो और सेक्सी सुनकर भड़क गई...आइ एम सॉरी...तुम्हारी सोच बहुत छोटी है....तुम मत पहना करो ऐसे कपड़े...

लेडी- हे...तुम मेरी इन्सल्ट कर रहे हो...और इसका अंजाम...

मैं(बीच मे)- इन्सल्ट...नही...मैने तो बस तुम्हे देख कर तुम्हारी तारीफ मे एक शब्द बोला था...बट तुम्हारी सोच ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया...कि हर छोटे कपड़ो वाली सेक्सी नही होती...हाँ..वो कहावत भी है..कि कौवा अगर हंस की चाल चले तो हंस नही बन जाता....

लेडी- तुम मेरी इन्सल्ट पर इन्सल्ट किए जा रहे हो...अब तुम देखो...क्या हाल करती हूँ तुम्हारा...तुम जानते नही कि मैं कौन हूँ....

मैं- मेरा हाल....हाहाहा...जाओ -जाओ...मेरा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता....समझी...और हाँ...मैने जो कहा ...उस बारे मे सोचना ज़रूर...कि क्या सिर्फ़ कपड़ो से कोई सेक्सी हो जाता है कि नही...ओके...बब्यए...

और इससे पहले वो औरत कुछ बोलती ..मैं आगे बढ़ने लगा....पर कुछ दूर आगे पहुँच कर ही मुझे वापिस आना पड़ा....

असल मे, मैं बॅक व्यू मिरर से उस औरत को देख ही रहा था कि वहाँ एक जीप आ कर रुकी और उसमे से 4 गुंडे टाइप मर्दो ने उस लेडी को घेर लिया और छेड़छाड़ करने लगे...

2 लोगो ने उसके ड्राइवर को पकड़ लिया और 2 उस औरत को टच करने लगे....

औरत बेचारी उनके सामने गिडगिडाने लगी की प्ल्ज़ उसे छोड़ दो...बट गुंडे तो गुंडे ही थे ....

मैने ये नज़ारा देखा तो कार को टर्न करके उसके पास पहुँचा और एक किक मार कर अपनी कार का गेट खोला और उन गुणडो के सामने खड़ा हो गया....लाइक आ फिल्मी हीरो...

मुझे देखते ही औरत मुझसे मदद की भीख माँगने लगी....

लेडी- प्ल्ज़...मुझे बचा लो...प्ल्ज़...

गुंडा1- ये बच्चे...तू निकल यहाँ से...वरना...

मैं- वरना...क्या वरना...??

गुंडा2( मेरी तरफ आ कर)- वरना तेरा भुर्ता बना देगे...समझा...

मैं(अपना गॉगल निकाल कर)- रियली...मेरा भुर्ता....मुझे तो नही लगता...

गुंडा1- अच्छा....तो क्या करेगा तू..हाँ...बचायगा इसे ..

मैं- ह्म..नही...इसे तो तुम लोग इज़्ज़त से छोड़ दोगे...तो बचाने की ज़रूरत ही नही...और फिर तुम लोग यहाँ से चुपचाप निकल जाओगे...

मेरी बात सुन कर वो सब हँसने लगे और वो लेडी भी मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मैं कोई पागल हूँ...

गुंडा1-बेटा, लगता है तू ऐसे नही मानेगा...ये कालू, 2 चिपका तो इसको...साले का नक्शा बदल जाए...

 


कालू अपने हाथ को गुस्से मे बोलते हुए मेरे पास आया और इससे पहले ही वो कुछ करता उसके सिर के साइड मे मेरा हाथ पड़ा और वो सीधा बेहोश हो गया....

गुंडा1- कालू...क्या हुआ...उठ...

मैं- अब ये 1 घंटे के बाद ही उठेगा....अब बोलो...छोड़ते हो इन्हे या फिर सब बेहोश हो कर ही जाओगे...

गुंडा1- साले....तेरी तो...

और गुंडे ने अपनी पॉकेट से चाकू निकाली ....पर मेरी तरफ बढ़ने से पहले ही वो वही जम सा गया....

क्योकि मैने अपनी टी-शर्ट के नीचे दबी हुई पिस्टल निकाल ली थी...

मैं- अब आओ...फिर पता चलेगा कि बेटा कौन और बाप कौन....

मेरी बात का उन गुन्डो के पास कोई जवाब नही था...

तभी गुंडे1 ने उस औरत के गले पर चाकू रखने ले इरादे से उसकी तरफ रुख़ किया और तभी उसके हाथ मे ढायं की आवाज़ के साथ गोली लगी और उसका चाकू नीचे गिर गया....

मैं- अब भी बोल दो...जाना चाहते हो तो निकलो...वरना चारो सीधा हॉस्पिटल मे जाओगे...बोलो...

मेरी आवाज़ मे इस बार गुस्सा था...जिसे सुन कर उन 2 गुण्डों ने ड्राइवर को भी छोड़ दिया और जीप की तरफ आ गये ..

मैं- अब इसे उठाओ और निकलो यहाँ से...

फिर उन्होने उस बेहोश हुए गुंडे को जीप मे रखा और तेज़ी से वहाँ से निकल गये...

गुणडो के जाते ही मैं भी अपनी कार के पास आया और तभी...

लेडी- एक्सक्यूज मी...आइ एम..स...

मैं(हाथ दिखा कर)- ह्म...चलो तुम्हे छोड़ देता हूँ...ये जगह तुम्हारे लिए ठीक नही...

लेडी ने अपने ड्राइवर को कार के पास ही छोड़ा और मेरे साथ आ कर बैठ गई....

कार मे वो लेडी मुझे देखती रही...शायद अपनी बातों पर शर्मिंदा हो रही थी...पर बोली कुछ नही...

मैं भी चुप ही रहा...क्योकि मैं उसे माफ़ करने के मूड मे ही नही था...

थोड़ी देर बाद मैने कार रोक दी....

मैं- लो..मेरी मंज़िल तो आ गई...अब यहाँ से तुम्हे जहाँ जाना हो जा सकती हो...

लेडी(बाहर देख कर)- अरे...मुझे भी यही आना था.

मैं- ओके..तो अब निकलो...

लेडी- मैं...वो...आइ एम..

मैं(ज़ोर से)- आइ सेड गेट आउट....ओके...फास्ट...

वो बेचारी बुझे मान से कार से निकल गई और मैने कार बढ़ा दी और पार्किंग मे चला गया.....

मैं जहाँ आया था ये एक वॉटर पार्क था....जहा शांति के अलावा आँखो को भी सुकून मिलता है ...जब मस्त माल बिकनी मे आपके सामने आते है...

कार पार्क करके मैं आया तो लेडी जा चुकी थी...मैं भी अंदर गया और चेंज करके पूल साइड लेट कर रिलॅक्स करने लगा......

मेरे सामने पूल मे कई तरह के माल अठखेलियाँ कर रहे थे....छोटे-बड़े हर टाइप के....

किसी के बूब्स मुझे लुभाते तो किसी की गान्ड मेरे लंड मे हलचल मचती....

मैं स्कॉच की सीप मारते हुए इस रंगीन महॉल का आनंद ले ही रहा था कि मेरे सामने एक और जबर्जस्त माल आ गया. ...ये वही लेडी थी जिसे मैने लिफ्ट दी थी....

उसने अपनी गोरी बॉडी को सिर्फ़ दो कपड़ों का सहारा दिया था....वो एक कसी हुई बिकनी पहन कर मेरे सामने बलखाती हुई आ रही थी...

उसकी बिकनी सिर्फ़ उसके निप्पल और नीचे के दोनो होल ही ढके हुए थी...बाकी की बॉडी सूरज की धूप मे चमचमा रही थी....

वो मेरे पास आती हुई मेरे सामने ही खड़ी हो गई और मुझे अपनी गान्ड के दर्शन करीब से करा दिए...क्या मस्त गोल भरी हुई गान्ड थी उसकी...

और फिर उसने आगे झुक कर गान्ड को और बड़ा कर दिया और अचानक ही पूल मे जंप मार दी...

मेरे मुँह से बस हाय निकल पाया और वो पूल मे पहुँच गई....

थोड़ी देर तक उसने पूल मे अपनी अदाए दिखाई और फिर पूल से निकल कर मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई...

उसकी बॉडी पानी मे भीगने के बाद और भी ज़्यादा चिकनी लगी थी...

फिर उसने झुक कर अपने उभारों की गहराई भी मुझे दिखा दी...और बड़े प्यार से बोली....

लेडी- अब क्या हुआ...कुछ कहोगे नही....

मैं- क्क..क्या...??

लेडी- सेक्सी ऑर व्हटेवेर यू वान्ट टू से.....

मैं- सेक्सी....नो.. तुम सेक्सी कहीं से नही लगती...

मेरी बात सुन कर उसे गुस्सा आया पर वो शांत रह गई...ये सोच कर कि मैं उससे गुस्से मे ऐसा बोल रहा हूँ....

लेडी- ओह...सच मे...ज़रा गौर से देखो...फिर बताओ...

मैं- एक बार बोला ना...तुम सेक्सी लगती हो नही...बस..

और ना चाहते हुए भी मैं उठ कर खड़ा हो गया और जाने लगा...

लेडी(पीछे से)- क्या मतलब तुम्हारा...क्या मैं सेक्सी नही...

मैं पलटा और मन ही मन उसकी बात पर मुस्कुराया और उसे उपेर से नीचे तक देख कर बोला...

मैं(सिर हिला कर)- नो...तुम सेक्सी नही लगती....वेल...कोसिस करती रहो...शायद कभी सेक्सी हो जाओ...हाँ...

वो औरत गुस्से से तिमिला उठी....सही भी है..किसी भी फीमेल को ये बोलो कि वो सेक्सी नही तो उसकी सुलग ही जाएगी...

वो लेडी गुस्से मे मेरे सामने आई और मेरा रास्ता रोक कर खड़ी हो गई...

लेडी- क्या कमी है मुझ मे....कैसे कह सकते हो कि मैं सेक्सी नही...

मैं- देखो...इसमे बुरा क्या मानना...नही हो तो नही हो...और हाँ...हो सकता कि हम दोनो के लिए सेक्सी की डेफ़िनेशन अलग-2 हो...सो...चिल यार...हॅव फन...

मेरे कहने के बाद भी वो लेडी मेरे सामने से नही हटी...गुस्से मे वो तेज साँसे ले रही थी और उसके बूब्स हर साँस के साथ उपेर नीचे हो कर मेरी गर्मी बढ़ा रहे थे....

मैं- एक्सक्यूज मी प्ल्ज़...

लेडी(पीछे से)- तो तुम्हारी डेफ़िनेशन है क्या...बताओगे मुझे...

मैं(मुस्कुरा कर)- तुम्हारे बस का नही है...बोला ना...चिल करो...

लेडी- नही...तुम बताओ बस...

मैं- उउंम..लीव इट....आइ हॅव टू गो नाउ...मे बी सम अदर टाइम...बब्यए...

लेडी- पर कब...ये तो बताओ....

मैं(आगे बढ़ते हुए)- देखते है...मॅटर ऑफ लक ...बब्यए...

और मैं बिना उसकी तरफ देखे वहाँ से निकल आया.....

कार लेकर मैं घर आ रहा था...तभी मेरा फ़ोन बजने लगा....

( कॉल पर )

मैं- हाँ जी...

स- कहाँ हो...

मैं- बस..वॉटरपार्क से आ रहा हूँ...आग लगा कर....हाहाहा....

स- हाहाहा...बहुत अच्छे...तो प्लान काम कर गया...

मैं- ह्म..प्लान बी काम कर गया ...

स- ह्म्म...फिर आगे क्या किया...

मैं- हाँ , सुनो...(फिर मैने सब कुछ स को बता दिया...उस लेडी के साथ जो भी हुआ..सब)

स- क्या...तुमने उसकी बॅंड ही बजा दी...हाहाहा.....

मैं- क्या आपको लगता है कि मैने सही किया...मतलब ये उल्टा पड़ गया तो...

स- नही...उसके लिए उसकी खूबसूरती ही सबकुछ है...और तुमने वही चोट कर दी है...पक्का तडपेगी...

मैं- वही तो...तड़प कर उल्टा बार ना कर दे..या हाथ से निकल जाए...

स- हो सकता है...पर ऐसा होने मत देना....आज रात ही आग पर पानी डाल देना...वरना आग भड़क जाएगी..

मैं- समझ गया....मैं देख लूगा...

स- आइ होप वो तुम्हे देख कर खुश ज़रूर होगी...

मैं- हाँ क्यो नही....देखते है रात को...कुतिया बनती है या शेरनी की तरह झपट्टा मारती है...

स- ह्म..अच्छा सुनो...रश्मि पर नज़र रखना...वो तुम्हारे निकलते ही कहीं निकल गई थी...कहीं कोई और हमला ना हो जाए..

मैं- डोंट वरी...मैं देख लूँगा...

फिर मैने कॉल कट की और घर आ गया....

घर आ कर मैने शाम तक का समय पारूल के साथ ही बिताया...इससे मुझे और पारूल, दोनो को खुशी हुई....

 
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