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चूतो का समुंदर



मैं- अब आओ...तुम्हारी चूत फाड़ता हूँ...

मेरे बोलते ही मोहिनी ने मुझे सोफे पर लिटाया और मेरे उपेर आ कर लंड को चूत मे डाल कर बैठ गई....

मोहिनी- आआईयईईईई....माररर गई.....

मोना- तो किसने कहा था एक झटके मे लेने को...

मोहिनी- आअहह....मज़ा दर्द मे ही है बेटी...

मोना- ह्म्म..और मेरे मज़े का क्या.....

मैं- आजा ...तेरी चूत चख लेता हूँ...

फिर मोना मेरे मूह पर चूत रख कर बैठ गई...और मोहिनी ने लंड पर उछलना सुरू कर दिया...

मोना पहले से ही गरम थी...तो मेरे जीभ लगते ही उसका चूत रस बहने लगा. ...

मोना- आअहह....मैं गई मोम...आअहह...

मोहिनी- मेरा भी होने वाला है...इस लंड ने तो अंदर जाते ही खलबली मचा दी..आअहह....

मैं मोना का चूत रस पीने लगा और वहाँ मोहिनी भी झड़ने लगी...

झड़ने के बाद भी मोहिनी लंड पर उछलती रही और मैं मोना की चूत चाट ता रहा....

मोहिनी- आअहह..आआहह...आअहह..बेटी...ये तो...आअहह...बहुत तगड़ा लंड ...आअहह...

मोना- आअहह..हाँ मोम...मस्त है.....पूरा मज़ा देता है...आअहह..काटो मत...उूउउंम्म..

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउुउउप्प्प...सस्स्रररुउप्प्प...उउउंम्म...उूउउंम्म..

मोहिनी- ओह्ह..येस्स....आअहह...आअहह....बेटी....मज़ा आ गया...सस्स्शीई....

मोना- हाँ मोम....ज़ोर से उछलो...आअहह.....ऐसे ही....उउउंम्म..

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प्प....उउउंम..उउउंम्म..उउउंम्म..

मोना- आअहह....मोम...अब..मेरी बारी....

मोहिनी- अभी नही..आओउउउंम्म...थोड़ा रुक..ईीस्स...ईीस्स..ईसस्स...

थोड़ी देर तक मैने मोना की चूत चाट कर उसे फिर से गरम कर दिया...और मोहिनी भी उछल-उछल कर फिर से गरम होने लगी थी...

फिर मोना ने मोहिनी को रोका और उसे हटा कर खुद मेरे लंड पर बैठ कर उछलने लगी...

मोहिनी- साली ....कितनी जल्दी है तुझे ...रुक नही सकती थी...

मोना- चुप कर रंडी...झड़ने के बाद भी लंड नही छोड़ती....हाअ...ऊहह....म्माआ...

मोहिनी- अंकित...फाड़ दे साली की...

मोना- हाँ अंकित...फाड़ दो....फिर मेरी माँ की फाड़ देना...आहह..आहह..

मैं- दोनो की फाड़ता हूँ...ये लो...ये लो..यीहह....

मैं तेज़ी से मोना को नीचे से धक्के मार रहा था और बाजू मे बैठी मोहिनी की गान्ड दबा रहा था...

मैं- मोहिनी...तेरी गान्ड बड़ी मस्त है...

मोहिनी- आअहह...तो मार लेना पर अभी नही...

मोना- अभी..मेरी मार...ज़ोर से....आआहह...आआहह...

थोड़ी देर बाद ही मोना फिर से झड गई...

मोना- आअहह...मैं गई...ऊऊहह...म्माआ.....

 


मोना के झाड़ते ही मोहिनी ने मोना को साइड किया और उसकी जगह खुद मेरा लंड ले कर बैठ गई....

मोहिनी- आहह..एस्स...ईीस्स....ईश्द्ड...आष्ह...

मैं- जंप..जंप...ज़ोर से...एस्स...ईएहह...यईएह...

मैने मोहिनी को चोदने लगा और मोना बाजू मे आ कर अपनी माँ के बूब्स चूसने लगी...

मोहिनी- आहह...चूस बेटी...ज़ोर से चूसो...चुदाई का मज़ा बढ़ गया...आआअहह...आअहह....

थोड़ी देर तक मोहिनी उछलते हुए थक गई...और शांत पड़ने लगी...

मोना- अब हटो...मेरी चूत मारने दो....

मोहिनी- आजा बेटी...तू मरवा ले...

और मोहिनी के हट ते ही मैं भी खड़ा हो गया और मोना को सोफे पर लिटा कर उसकी चूत मारने लगा...

मोना- आअहह...धीरे ....आअहह...आअहह...

लेकिन मैं अब पूरी स्पीड से मोना की चूत मारने लगा...

मोना- ओह..माँ....बचाओ....ये फाड़ देगा...आआहह......आअहह...

मोहिनी- फट जाने दे बेटी...चूत का तो काम ही है फटना....ज़ोर दे मार अंकित...

मैं- यहह...चुप कर ...चिल्ला मत ...

मोहिनी- मैं इसका मूह बंद करती हूँ..

और मोहिनी अपनी चूत खोल कर मोना के मूह पर बैठ गई..

मोहिनी- आअहह...चूस बेटी...माँ की चूत चूस...

मैं- येस्स्स...और अपनी चूत फाट्वा...ये ले...ये ले...

मोना- उउउंम..उूुउउंम्म..उूउउंम्म..उउउंम्म...उउउंम्म...

मोहिनी- आअहह...आआहह...ज़ोर से...आअहह....मेरा हो रहा है...आआहह.....

मैं- ये ले...येस्स...एस्स...येस्स...आअहह...ईएहह....

थबॉदी देर की जोरदार चुदाई के बाद मोना झड़ने लगी.....

मोना- उउउंम...उउउंम्म...उहुउंम..आआहह...आअहह.....गाऐयइ ररीई...

मोहिनी- मैं भी गई बेटी...आआहह....प्पििई...जा...आआहह...आआहह...

मैं- मेरा भी होने वाला है...

मोहिनी- अंदर मत छोड़ना...मुझे पिलाओ....

मोहिनी जल्दी से नीचे बैठ गई और मोना भी लंड रस पीने आ गई...

मोना- मुझे भी...

मैं- दोनो लो...ईएह...ईएह...

मैने दोनो के मूह पर लंड रस छोड़ दिया और वो दोनो मेरे लंड को चाट कर के लंड रस पी गई और लंड भी सॉफ कर दिया...

और दोनो माँ-बेटी एक दूसरे के मूह पर लगा लंड रस चाट कर किस करने लगी...

दमदार चुदाई के बाद हम तीनो बेड पर आ कर रेस्ट करने लगे......

माँ-बेटी की दमदार चुदाई के बाद मैं रेस्ट करने लगा....

तभी मेरे माइंड मे झटका लगा और मुझे याद आया कि मैने ग़लती कर दी....

 
प्लान तो ये थे कि मोहिनी को चुदाई के लिए तडपा कर उसका मूह खुलवाना है...पर चुदाई की मस्ती मे ये भूल ही गया ...

अब क्या होगा...क्या मोहिनी कुछ बोलेगी ...या फिर चुदाई बेकार जायगी...

काफ़ी देर सोचने के बाद मैने डिसाइड किया कि एक बार पूछ कर तो देखता हूँ...फिर देखते है...क्या जवाब देती है...

मोना- क्यो मोम...मज़ा आया...???

मोहिनी- हाँ बेटी...बहुत मज़ा आया...सालो बाद...आआहह...

मोना- मोम...ये सब अंकित का कमाल है....

मोहिनी- ह्म्म्मी...थॅंक यू अंकित...

मैं- अरे आंटी ..थॅंक्स कैसा...

मोहिनी- नही अंकित...तुम नही जानते कि तुमने मुझे कितना सुख दिया है...

मोना- तब तो मोम आपको भी अंकित को खुश करना होगा....

मोहिनी- करूगी ना बेटी...ज़रूर करूगी...बोलो अंकित कैसे खुश करू तुम्हे...

मोना(बीच मे)- वैसे मोम...एक तरीका है अंकित को खुश करने का...

मोना ने मुझे देखते हुए ये बात बोली....तो मैं समझ गया कि मोना मेरा काम ईज़ी कर रही है...

मोहिनी- अच्छा...बोल बेटी क्या तरीका है...

मोना- अंकित को वो सच बता दो...जो आपने मुझे भी नही बताया...

मोना की बात सुनते ही मोहिनी चुप रह गई और आँखे फाड़ कर मोना को देखने लगी....

मोना- मुझे क्या देख रही हो मोम...अंकित को सब पता है..जितना मैं जानती हूँ...

मोहिनी(गुस्से से)- तूने बताया....

मोना- नही मोम..मैने नही...ये तो...

मैं(बीच मे)- नही आंटी..मोना ने कुछ नही बोला...मैने उस रात आपकी और मोना की बातें सुन ली थी...

मोहिनी(शॉक्ड हो कर)- कैसे...??

मैं- वो छोड़िए..अब पॉइंट पर आता हूँ...आप मुझे बताएँगी कि आपकी फॅमिली और मेरी फॅमिली के बीच क्या हुआ था....

मोहिनी- मुझे कुछ नही कहना...मैं जा रही हूँ...

मोहिनी बेड से उठ कर खड़ी हो गई और अपनी नाइटी देखने लगी...

मैं- आंटी...आख़िर ऐसी क्या बात है जो आप इतनी गुस्सा हो जाती हैं...इस नफ़रत का रीज़न क्या है...???

मोहिनी(रुक कर)- नफ़रत....नही..मुझे तुमसे कोई नफ़रत नही...

मैं- पर मेरे डॅड और दादाजी से तो है ना...??

मोहिनी- नही बेटा..तुम्हारे डॅड से भी नही...और दादाजी से भी नही...

मैं- तो फिर आप क्यो चुप है...और आप मेरे डॅड और दादाजी से क्यो मिलना चाहती है...

मोहिनी- वो तो मुझे उनसे कुछ सवाल पूछने है..बस...पर नफ़रत नही है उनसे....

मैं- क्या सवाल है आपके...

मोहिनी- मैं वो तुम्हे नही बता सकती..

मैं- ओके...पर आप ये तो बता सकती है कि दुश्मनी की वजह क्या है...और आपकी मौसी किस बात का बदला ले रही थी..और आप क्यो उस दुश्मनी को भूल गई जिसकी वजह से आपकी फॅमिली बर्बाद ही गई...क्यो...???

मोहिनी- तुम क्यो जानना चाहते हो ये सब...??

मैं- क्योकि मेरे चारों तरफ मेरे दुश्मन फैले हुए है...

मिहीणी- पर मैं उनमे से नही हूँ..और ना ही मेरा कोई अपना तुम्हारा दुश्मन है...ओके...अब मैं चलती हूँ...

मोहिनी ने अपनी नाइटी पहनी और जाने लगी....

मैं(चिल्ला कर)- रूको...मेरी बात सुनो...

मेरी आवाज़ सुन कर मोहिनी के बढ़ते कदम रुक गये और मोना तो मेरा गुस्सा देख कर मुझसे दूर खड़ी हो गई....

मोहिनी- आख़िर तुम क्यो पीछे पड़े हो...मैने कहा ना कि मेरी कोई दुश्मनी नही तुमसे...ना तुम्हारी फॅमिली से....भूल जाओ सब कुछ...

मैं- कैसे भूल जाउ...हर समय मेरे दुश्मन मेरे चारों तरफ घात लगाए बैठे है...

मोहिनी- पर मैने कुछ नही किया...कसम से...

मैं- मान लिया...पर मुझे लगता है कि आपकी सच्चाई से शायद मैं अपने दुश्मनो तक पहुच पाउ...हो सकता है कोई हो जो आपकी नज़र मे अच्छा हो पर असल मे वही बुरा निकल गया हो...

मोहिनी- ऐसा नही हो सकता...मैं तो सब भूल कर आगे बढ़ चुकी हूँ...अब मैं जा रही हूँ...

मैं- बस एक मिनट...एक बात का जवाब दो...फिर चली जाना...

मोहिनी- ह्म्म्म..बोलो...

मैं- आपको लगता है कि मेरे दादाजी की वजह से आपकी फॅमिली बर्बाद हुई...??

मोहिनी- हाँ...पर..

मैं(हाथ दिखा कर)- अभी रूको....आपको ये भी लगता है कि आपकी मौसी की मौत की वजह मेरे डॅड है..??

मोहिनी- हाँ बिल्कुल...पर मैं सब भूल चुकी हूँ...

मैं- पर मैं ये नही मानता...नही मानता कि मेरे डॅड किसी की जान ले सकते है....ये भी नही मानता कि मेरे दादाजी किसी परिवार को तबाह कर सकते है...नही मानता...

मोहिनी- पर सच्चाई यही है...

मैं- नही..बिल्कुल नही..और इसी लिए मैं पूरी बात जानना चाहता हूँ...

मोहिनी- इससे क्या होगा...जो हो गया उसे बदल दोगे क्या...??

मैं- नही...पर सच सामने ला सकता हूँ ना...आपको ये बता सकता हूँ ना कि असल मे सच्चाई क्या है..

मोहिनी- इससे क्या मिलेगा..??

मैं- आपको नही...पर मुझे मिलेगा...मेरा भरोसा ..मेरे डॅड पर...मेरे दादाजी पर...और शायद मुझे असली दुश्मन मिल जाए...

मोहिनी कुछ सोचने लगी ...और मैं उसके पास जा कर खड़ा हो गया...

 


मैं- कम ऑन आंटी...बोलिए...क्या हुआ था ...कैसे हुआ था प्लीज़...

मोहिनी मेरी आँखो मे देखने लगी...मेरी आँखे गुस्से और उम्मीद से भरी हुई थी...

मोहिनी- ठीक है...तुम्हे सच जानना है..तो पूरी कहानी सुनाती हूँ...फिर तुम ही बताना कि मैं सही हूँ या ग़लत...

मैं - कहिए आंटी...जल्दी..

मोहिनी- आओ बैठो...

फिर हम दोनो सोफे पर बैठ गये...और मोना भी नाइटी पहन कर बेड पर बैठ कर हमारी बाते सुनने लगी....


आगे की कहानी मोहिनी की जुवानी....



मेरी माँ के परिवार मे 5 सदस्य थे...

मेरी माँ...मेरी मौसी(सरिता)...मेरे मामा....और मेरे नाना-नानी...

मेरे नाना एक स्कूल टीचर थे...उनका ट्रान्स्फर तुम्हारे दादाजी के गाओं मे हुआ...फिर वही से ये सब सुरू हुआ...

तुम्हारे दादाजी गाओं के नामी-गिरामी इंसान थे...

वो सरकारी कर्मचारियों की बहुत इज़्ज़त करते थे और पूरी मदद भी...

उन्होने मेरे नानाजी की भी काफ़ी मदद की...

पर तुम्हारे दादाजी बहुत अय्याश भी थे...और गाओं की कई औरत और लड़कियों को चोदते थे....

उनकी शादी के बाद भी उनकी अयाशियाँ चालू रही...

तुम्हारे दादाजी के पास दौलत भी थी और सोहरत भी...और वो सबका भला भी करते थे...इसीलिए सब उनसे प्रभावित हो जाते थे....

बस मेरी नानी ने भी यही ग़लती कि...वो तुम्हारे दादाजी से प्रभावित हो गई...

धीरे-धीरे वो तुम्हारे दादाजी की तरफ आकर्षित हो गई...

और फिर तुम्हारे दादाजी की रखेल बन गई...

तुम्हारे दादाजी ने मेरे नाना का ट्रान्स्फर पास के गाओं मे करवा दिया..

और फिर रोज नानाजी के जाने के बाद दिन भर मेरी नानी के साथ चुदाई करने लगे....

मेरी नानी भी जवान लंड ले कर बहुत खुश थी और उपेर से उन्हे पैसे भी मिलते थे...

ये सिलसिला बहुत टाइम तक चलता रहा...नानाजी जॉब पर जाते और मेरी माँ और मामा स्कूल...मेरी मौसी तो बचपन से सहर मे पढ़ती थी..एक रिस्तेदार के यहाँ रह कर....

घर पर सिर्फ़ नानी होती और तुम्हारे दादाजी दिन भर उन्हे चोद्ते थे....

पर एक दिन मेरी माँ स्कूल से बीच मे आ गई...उनका सिर दर्द हो रहा था....

और उन्होने मेरी नानी को तुम्हारे दादाजी के साथ देख लिया....

मेरी माँ भी उस एज मे थी जिस एज मे चुदाई का मतलब समझ आ जाता है...

फिर मेरी माँ ने कई बार छिप-छिप कर चुदाई देखी और अपने हाथ से अपनी चूत ठंडी करने लगी...

एक दिन मेरी माँ को तुम्हारे दादाजी ने देख लिया और मौका पा कर उन्हे भी चोद दिया...

मेरी माँ भी खुश थी और नानी भी...

मेरी नानी घर मे चुदवाती और मेरी माँ तुम्हारे दादाजी के खेतों मे...कभी-2 घर पर भी...

एक दिन मेरी माँ घर पर चुद रही थी तो नानी ने देख लिया....

पर वो कुछ करती उसके पहले माँ ने नानी का मूह बंद कर दिया...ये कह कर कि वो नानाजी को सब बता देगी ...

फिर क्या था उस घर मे तुम्हारे दादाजी की 2 रखेल हो गई...दोनो साथ मे चुदवाती थी...

एक बार मेरे नानाजी मेरे मामा के साथ मेरी मौसी से मिलने गये ..

वो 3 दिन का बोल कर गये थे ...इसी वजह से तुम्हारे दादाजी 3 दिन के लिए हमारे घर रुक गये...

पर नानाजी दूसरे दिन ही आ गये और अपनी आँखो से सब देख लिया...

उनकी बीवी और बेटी एक साथ चुद रही थी...

मेरे नाना जी को गुस्सा तो आया पर वो तुम्हारे दादाजी से टकरा नही सकते थे...इसीलिए गाओं छोड़ कर दूसरे गाओं आ गये...

पर मेरी माँ और नानी की चुदाई की आदत ख़त्म नही हुई...

वो तुम्हारे दादाजी को बुलाकर वहाँ भी चुदवाती थी..पर कभी-कभी...

मुझे नही पता कि फिर क्या हुआ...

कुछ सालों बाद..जब मैं 3-4 साल की थी तो अपनी मौसी के साथ सहर गई थी...

वही पता चला कि मेरी माँ, मामा, और नाना-नानी जल कर खाक हो गये....

जब मैं बड़ी हुई तो मौसी ने बताया कि आज़ाद( दादाजी) ने ही सब को बंद कर के घर मे आग लगा दी थी...

फिर मेरी मौसी बदला लेने का सोचती रही...

किस्मत से उनकी शादी आज़ाद के दोस्त मदन से हो गई....

मैं भी शादी करके यहाँ आ गई थी....

उसके बाद पता नही क्या हुआ...पर एक दिन पता चला कि मेरी मौसी को तुम्हारे डॅड ने मार डाला....

मेरी मौसी मेरे लिए एक लेटर छोड़ गई थी...उसी लेटर को पढ़ कर मेरे दिल मे कुछ सवाल है जो तुम्हारे दादाजी से पूछना है...

बस...यही सच्चाई है...जो मुझे पता है....
 


मोहिनी ने अपनी कहानी ख़त्म की....उसकी आँखे भर आई थी...और मोना की भी...

पर मेरे दिमाग़ मे अभी भी कुछ सवाल थे...

मैं जानता था कि मेरे दादाजी अय्याश थे...पर वो किसी को मार देगे...ये नही मान सकता....और डॅड के लिए तो सोच भी नही सकता...क्योकि डॅड को मैं बहुत करीब से समझता हूँ...

रूम मे तोड़ो देर खामोशी रही...फिर इस खामोशी को मोहिनी ने तोड़ा...

मोहिनी- बस यही थी पूरी कहानी....

मैं- ह्म्म्मब...और आपको लगता है कि आपकी मौसी और उनकी फॅमिली की मौत की वजह मेरे दादाजी और डॅड है...??

मोहिनी- हम्म...

मैं- क्या आपने देखा...??

मोहिनी- जब मेरी माँ की फॅमिली जल कर मरी...तब मैं बहुत छोटी थी...और जब मेरी मौसी की मौत हुई तो मैं वहाँ नही थी...

मैं- मतलब....आपने खुद नही देखा...

मोहिनी- नही...मुझे तो दूसरों से पता चला...

मैं- ह्म्म..और आपने मान लिया....

मोहिनी- देखो...जब मेरे नाना का परिवार जल कर मरा तो लोगो ने बताया कि उस दिन तुम्हारे दादाजी ने आकर धमकी दी थी कि वो सबको जान से मार डालेगे...

मैं- पर धमकी क्यो दी...

मोहिनी- वही तो मुझे जानना है...

मैं- ह्म्म...और आपकी मौसी का...

मोहिनी- लोगो ने बताया कि एक घर मे चार लाषे थी...जिसमे एक मेरी सरिता मौसी की भी थी....और वहाँ सबने सिर्फ़ तुम्हारे डॅड को देखा...पिस्टल के साथ...

मैं- मतलब आपने जो सुना वो मान लिया...

मोहिनी- हाँ...और अब मैं सब भूल कर अपनी लाइफ जी रही हूँ...सिर्फ़ कुछ सवाल है जिनके जवाब चाहिए....

मैं- क्या है वो सवाल...

मोहिनी- सॉरी...वो मैं किसी को नही बता सकती...और उन सवालो से तुम्हारे किसी दुश्मन का कोई रिश्ता नही हो सकता....

मैं- ओके ..मत बताइए...लेकिन मैं आपको प्रूव कर के दिखाउन्गा कि आपको जो भी पता है...वो झूट है...सच नही...

मोहिनी- ठीक है...मैं इंतज़ार करूगी...देखते है तुम्हारा भरोसा सही है या ग़लत....

मैं- ओके...चलता हूँ...

मोना इतनी देर से हमारी बातें सुन रही थी...अचानक मेरे जाने की बात सुनकर बोल पड़ी...

मोना- कहाँ चलता हूँ...अब तुम्हारा काम हो गया तो भागने लगे....

मैं- नही..ऐसा नही है...

मोना- तो फिर एक राउंड और हो जाए...क्यो मोम...??

मोहिनी(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...अंकित का मूड फ्रेश तो करना ही पड़ेगा...क्यो अंकित...

मैं- ह्म्म्म..तो आओ...करो फ्रेश...

फिर दोनो माँ-बेटी नंगी हो गई और सुरू हो गया चुदाई का दूसरा राउंड....

 
shubhs wrote: क्या बात है हमारे साथ तो ऐसा नही होता
 


एक बार फिर से दमदार चुदाई कर के मैं दोनो को वही छोड़ कर अपने रूम मे आ गया....

मेरे माइंड मे मोहिनी की बातें सुनकर एक ही सवाल आ रहा था ...कि ऐसा क्या हुआ था जिस वजह से मोहिनी की माँ की पूरी फॅमिली को जलाया गया....

जितना मैं अपने दादाजी को जानता हूँ उससे यही लगता है कि वो आय्याश रहे है पर किसी को मार नही सकते....

तो फिर मोहिनी की माँ की फॅमिली को किसने ख़त्म किया....???

मेरे दुश्मनो मे से किसी ने या कोई और...??????

और यही सवाल सोचते-सोचते मैं नीद की आगोश मे चला गया.....

सुबह मेरी नीद एक बहुत ही स्वीट आवाज़ सुनकर खुली....

ये प्यारी सी आवाज़ जूही की थी जो मेरे सिर पर हाथ फिराते हुए मुझे जगा रही थी...

जूही- उठो यार...इतना भी क्या सोना....

मैं(बिना आँखे खोले)- हहुउऊ....सोने दो ना....

जूही- अरे...ऐसे मौसम मे कोई सोता है क्या...देखो कितना सुहाना मौसम है....उठ भी जाओ....

मैं(आँखे खोल कर)- ह्म्म..मनोगी नही...आओउुउउम्म्म्मम....क्यो...

जूही(मुस्कुराते हुए)- नही...कभी नही...अब उठ जाओ ना...

आँखे खोलते ही इतनी प्यारी मुस्कान के साथ एक खूबसूरत लड़की को देख कर मेरी सारी थकान दूर हो गई...

मैं जूही के चेहरे को गौर से देखने लगा....

उसके मुस्कुराते हुए गुलाबी होठ और बिना मेक-अप का खिला हुआ चेहरा जिस पर गीले बालों की लटे लटक रही थी...

उसके जिस्म से निकलती महक...मेरी नाक मे घुसकर मुझे मोहित करने लगी थी...और उसका हाथ मेरे सिर को सहला कर मुझे दूसरी दुनिया मे लिए जा रहा था...

सच मे जूही बेहद खूबसूरत दिख रही थी...उपेर से उसकी मुस्कान ने तो मुझे चारों खाने चित्त कर दिया था...

जूही के हसीन जादू ने मेरे जिस्म मे जान फूक दी थी...और मैं उसे एक टक देखे जा रहा था...

जूही के बालों से पानी की बूँद उसके गाल से गुजरती हुई मेरे होंठो पर गिरी...तो मानो जैसे उसमे जूही ने अपने जिस्म का रस मिला दिया हो....शायद जूही नहा कर सीधा मुझे जगाने आ गई थी....

जूही- अब क्या ख्यालों मे ही रहोगे...हक़ीक़त मे भी बहुत कुछ है डियर....

मैं जूही के शब्द सुन कर बेबस रह गया....

क्या उसने मेरी आँखो को पढ़ लिया था कि मैं क्या सोच रहा हूँ...

मैं जल्दी से बैठ गया और झूठा गुस्सा करते हुए बोला....

मैं- उउंम..क्या यार...बाल सूखा के नही आ सकती...मेरे मूह मे पानी चला गया...

जूही- अरी...मैने क्या..

मैं(बीच मे)- बस....अब जाओ यहाँ से...मैं आ जाउन्गा...

जूही मेरा बर्ताव देख कर शॉक्ड थी...

मेरी बात ने उसके दिल को घायल कर दिया और उसकी आँखे भर आई...पर उसने एक आँसू भी नही छलकने दिया...

जूही- आ जाना तो...

और जूही गुस्से से बाहर निकल गई....और मैं उठ कर बाथरूम मे....

थोड़ी देर बाद हम सब नाश्ते की टेबल पर थे....सब लोग खुश थे पर जूही अपनी आँखे नीचे किए हुए चुप चाप नाश्ता कर रही थी....

मैं उसकी उदासी समझ रहा था....मेरी वजह से आज सुबह-सुबह उसका मूह उतर गया....

वो बेचारी तो मुझे इतने प्यार से जगाने आई थी और मैने उसकी आँखो मे आँसू दे दिए....

वेल..नाश्ता करने के बाद वसीम ने सबसे पूछा कि आज का क्या प्लान है....

सबने आज वसीम की बनने वाली फॅक्टरी जाने का तय किया...साथ मे वहाँ का रेलवे स्टेशन भी देख लेगे और पास मे बना दम भी देख लेगे....

सब लोग निकलने लगे तो मैने जूही से बात करने का सोचा...पर वो गुल को साथ ले कर तेज़ी से निकल गई....

और मैं मन मार कर संजू के साथ आ गया....

हम आज पैदल ही जाने वाले थे....

जैसे ही हमने चलना शुरू किया तो मेरे आदमी का कॉल आ गया...

मैं सबसे दूर पीछे आ गया और बात करने लगा....

(कॉल पर)

मैं- हाँ...क्या हुआ...

स- एक प्राब्लम है....

मैं- कैसी प्राब्लम..??

स- तुमने कहा था कि कामिनी को घेरना है...और प्लान भी तय हो गया था...ह्म..

मैं- ह्म..तो उसमे प्राब्लम क्या है...

स- वेल ..दो प्राब्लम है...

मैं- अरे..बताओ तो...

स- देखो ..एक तो ये कि कामिनी घर से बाहर नही निकल रही...और दूसरी ये कि जिसके भरोसे ये प्लान बनाया था वो भी हिचक रहा है...

मैं- ह्म्म...उसे फ़ोन दो...मैं बात करता हूँ...

स- ये लो...लो बात करो(उस सक्श से)

मैं- तुझे क्या हुआ...

सामने- मैं ...थोड़ा डर...

मैं(बीच मे)- डोंट वरी...मैं हूँ ना..तुम बस वो करो जो कहा जाए...बाकी मुझ पर छोड़ दो...ओके

सामने- हमम्म..

मैं- अब उन्हे फ़ोन दो...

स- हाँ..बोलो..

मैं- ये तो रेडी है...

स- ह्म्म..पर कामिनी का क्या...उसके घर मे एंट्री कैसे होगी...??

मैं- एंट्री की बाद मे देखेगे...पहले उसे बाहर निकाल कर झटका देना है...

स- पर बाहर कैसे...और कहाँ...तुम जानते हो कि हमे सेफ जगह चाहिए...भीड़ नही...

मैं- हाँ...तो *** होटेल कैसा रहेगा...वहाँ कामिनी को बुलाते है...

स- पर होटल मे कैसे ...

मैं(बीच मे)- पूरी बात तो सुनो...

स- बोलो...

मैं- वो होटेल सहर के आउटर मे है...बीच मे सुनसान रास्ता पड़ता है...बस वही काम कर देना...

स- ह्म्म्म्..आइडिया अच्छा है...पर कामिनी आयगी वहाँ...???

मैं- हाँ...उसका तो बाप भी आयगा...

स- वो कैसे....??

मैं- उसे ख़ान बुलायगा...तो वो दौड़ते हुए आयगी...

स-ओम...तो मैं तैयारी करता हूँ...

मैं- ह्म्म..7.30 पर झटका लगेगा और रात को 8 बजे...कामिनी सीधे हॉस्पिटल मे होगी...

स- ओके..चलो तुम अपना काम करो...मैं अपना सेट करता हूँ....बाइ

मैं- बाइ...

मैने कॉल कट ही किया था कि अकरम मुझे बुलाता हुआ आ रहा था...

अकरम- चल साले...बात तो चलते हुए भी कर सकता है...चल..हम काफ़ी पीछे है...

मैं- ओके..चल...

और हम दोनो आगे चल दिए....और सब के साथ आ गये...

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यहाँ सहर मे संजू के घर...

रजनी पूरी रात ठीक से सोई नही थी...जबसे उसे पता चला कि अंकित पर जानलेबा अटॅक होने वाला है..तबसे वो बहुत ही परेसान थी...

वो देर रात तक अंकित को कॉल करती रही पर कोई फ़ायदा नही हुआ...इसी वजह से आज वो लेट जागी थी...

संजू के पापा भी अपनी शॉप पर जा चुके थे ...

रजनी उठ कर रेडी तो हो गई पर उसका माइंड अभी भी ठीक नही था...

वो फिर से अंकित को कॉल लगाती रही पर कोई फ़ायदा नही हुआ...असल मे अंकित ने वो नंबर बंद कर रखा था जो रजनी के पास था....

रजनी ने काफ़ी कोशिस की पर रिज़ल्ट सेम निकला...थक-हार कर रजनी ने कुछ सोचा और तैयार होकर निकल गई....

थोड़ी देर बाद रजनी , कामिनी के घर मे उसके सामने थी....

कामिनी- अब बोल..क्या हुआ...इतनी टेन्षन मे क्यो है...क्या पहाड़ टूट पड़ा...

रजनी- पहाड़ नही कामिनी...उससे भी बढ़ कर टेन्षन है..

कामिनी(चिंता से)- क्या..घर मे तो सब...

रजनी(बीच मे)- घर मे सब अच्छे है...

कामिनी- तो फिर क्यो इतनी घबराई हुई है...

रजनी- बताती हूँ...पर पहले मैं जो पुछु उसका सही-सही जवाब देना...

कामिनी- मैं तुझसे झूठ बोलोगि क्या...पूछ...

रजनी- तेरी बॉस से बात हुई अभी...

कामिनी- नही...काफ़ी टाइम से नही हुई..क्यो...क्या हुआ....

रजनी- ओके...ये बता कि क्या तुझे पता है कि अंकित कहाँ है अभी...

कामिनी- नही तो...यार मैं तो अभी घर पर ही हूँ...बॉस ने कहा था ना कि कुछ टाइम चुप रहो...तो मैने कोई खबर नही ली उसकी....और मेरा पैर भी अभी ठीक नही हुआ पूरी तरह से...

रजनी- ह्म्म..जानती हूँ...पर मुझे लगा कि शायद बात हुई होगी...

कामिनी- नही रे...वैसे अंकित है कहाँ...तुझे तो पता होगा ना...तेरे तो बेटे का फ्रेंड है...ह्म..

रजनी- ह्म..वो दोनो घूमने गये है....

कामिनी- ह्म..ले चाइ पी..

कामिनी चाइ पीते हुए रजनी को देखती रही...वो समझ गई कि रजनी के मन मे कोई बात ज़रूर है....

कामिनी- रजनी...अब तू बताएगी कि असली बात क्या है...

रजनी- वो..कामिनी...तू जानती है कि अंकित पर अटॅक होने वाला है...???

कामिनी(शॉक्ड )- क्या...किसने कहा तुझसे...

रजनी- बस पता चला..तू बता ना...क्या तुझे पता है...??

कामिनी- नही यार...मुझे सच्ची नही पता...तुझसे ही सुन रही हूँ...ऑश तो इस बात की टेन्षन है तुझे...

रजनी- हाँ कामिनी...उस पर अटॅक क्यो...उसकी क्या ग़लती...

कामिनी- डोंट वरी...बॉस उसे नही मार सकते..जब तक पूरा काम नही हो जाता...समझी...

रजनी- मैं उसे मरने भी नही दूगी...समझी...

कामिनी- अच्छा...बॉस के खिलाफ जाओगी....

रजनी- हाँ..जाउन्गी...मैं अंकित को खरॉच भी नही आने दूगी...

कामिनी- ओह हो...पर अगर तेरी बात सच है...और उस पर अट्क प्लान हो गया है तो वो तो गया....

रजनी(खड़े हो कर)- मैं ये नही होने दूगी...

और रजनी का गुस्सा देख कर कामिनी को भी गुस्सा आ गया..

कामिनी- तू हमारे खिलाफ जाएगी क्या...

रजनी- हाँ...अंकित के लिए जाना पड़ा तो जाउन्गी...देखती हूँ मुझे कौन रोकता है...

रजनी गुस्से मे आ कर बाहर जाने लगी ...तभी कामिनी चिल्ला कर बोली...

कामिनी- तू उसके लिए हमे छोड़ेगी....आख़िर तेरा लगता क्या है वो...??

रजनी ने पलट कर कामिनी को घूरते हुए ज़ोर से कहा....

रजनी- मेरा बेटा है वो...समझी...

और रजनी वहाँ से निकल गई...और आँखो मे आसू लिए सीधे अपने पति की शॉप पर पहुच गई...

(संजू के पापा का नाम...प्रमोद)

प्रमोद(संजू के पापा) ने रजनी को शॉप पर देखा तो वो शॉक्ड हो गये और रजनी की आँख मे आसू देख कर तो उन्हे टेन्षन हो गई...

प्रमोद ने अपने भाई को अपनी जगह लगाया और रजनी के साथ अंदर बने रूम मे आ गया.....

प्रमोद- रजनी..तुम यहाँ...और ये क्या हाल बना रखा है...

रजनी कुछ नही बोली बस सुबक्ते हुए प्रमोद के गले लग गई...और आँसू बहाने लगी...

प्रमोद- रजनी ..आख़िर हुआ क्या...बताओ तो...

रजनी(सुबक्ते हुए)- अंकित की जान ख़तरे मे है...

प्रमोद- क्या...

प्रमोद रजनी को अलग कर के उसकी आँखो मे देखने लगता है..

रजनी- हां...कोई उस पर अटॅक करने वाला है..

प्रमोद- क्या बोल रही हो...तुमने तो कहा था कि उसे कुछ नही होगा....अब क्या हुआ...

रजनी- पता नही...शायद बॉस ने ही तय किया होगा...मुझे कुछ नही पता...

प्रमोद- रजनी...मैं आज तक चुप हूँ वो इसलिए कि तुमने कहा था कि अंकित को कुछ नही होगा...पर अब..

रजनी- तुम्हे क्या लगता है..क्या मैं ये नही चाहती...

प्रमोद- रजनी...हमने अलका से वादा किया था कि उसके बेटे का ख्याल रखेंगे और अब...

रजनी(बीच मे)- मुझे सब याद है....इसीलिए तो मेरी जान जा रही है...अंकित को कुछ हो गया तो मैं अलका को क्या मूह दिखाउन्गी....

और रजनी ज़ोर से रोने लगी...

 
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