मोहिनी- नही अंकित...तुम नही जानते कि तुमने मुझे कितना सुख दिया है...
मोना- तब तो मोम आपको भी अंकित को खुश करना होगा....
मोहिनी- करूगी ना बेटी...ज़रूर करूगी...बोलो अंकित कैसे खुश करू तुम्हे...
मोना(बीच मे)- वैसे मोम...एक तरीका है अंकित को खुश करने का...
मोना ने मुझे देखते हुए ये बात बोली....तो मैं समझ गया कि मोना मेरा काम ईज़ी कर रही है...
मोहिनी- अच्छा...बोल बेटी क्या तरीका है...
मोना- अंकित को वो सच बता दो...जो आपने मुझे भी नही बताया...
मोना की बात सुनते ही मोहिनी चुप रह गई और आँखे फाड़ कर मोना को देखने लगी....
मोना- मुझे क्या देख रही हो मोम...अंकित को सब पता है..जितना मैं जानती हूँ...
मोहिनी(गुस्से से)- तूने बताया....
मोना- नही मोम..मैने नही...ये तो...
मैं(बीच मे)- नही आंटी..मोना ने कुछ नही बोला...मैने उस रात आपकी और मोना की बातें सुन ली थी...
मोहिनी(शॉक्ड हो कर)- कैसे...??
मैं- वो छोड़िए..अब पॉइंट पर आता हूँ...आप मुझे बताएँगी कि आपकी फॅमिली और मेरी फॅमिली के बीच क्या हुआ था....
मोहिनी- मुझे कुछ नही कहना...मैं जा रही हूँ...
मोहिनी बेड से उठ कर खड़ी हो गई और अपनी नाइटी देखने लगी...
मैं- आंटी...आख़िर ऐसी क्या बात है जो आप इतनी गुस्सा हो जाती हैं...इस नफ़रत का रीज़न क्या है...???
मोहिनी(रुक कर)- नफ़रत....नही..मुझे तुमसे कोई नफ़रत नही...
मैं- पर मेरे डॅड और दादाजी से तो है ना...??
मोहिनी- नही बेटा..तुम्हारे डॅड से भी नही...और दादाजी से भी नही...
मैं- तो फिर आप क्यो चुप है...और आप मेरे डॅड और दादाजी से क्यो मिलना चाहती है...
मोहिनी- वो तो मुझे उनसे कुछ सवाल पूछने है..बस...पर नफ़रत नही है उनसे....
मैं- क्या सवाल है आपके...
मोहिनी- मैं वो तुम्हे नही बता सकती..
मैं- ओके...पर आप ये तो बता सकती है कि दुश्मनी की वजह क्या है...और आपकी मौसी किस बात का बदला ले रही थी..और आप क्यो उस दुश्मनी को भूल गई जिसकी वजह से आपकी फॅमिली बर्बाद ही गई...क्यो...???
मोहिनी- तुम क्यो जानना चाहते हो ये सब...??
मैं- क्योकि मेरे चारों तरफ मेरे दुश्मन फैले हुए है...
मिहीणी- पर मैं उनमे से नही हूँ..और ना ही मेरा कोई अपना तुम्हारा दुश्मन है...ओके...अब मैं चलती हूँ...
मोहिनी ने अपनी नाइटी पहनी और जाने लगी....
मैं(चिल्ला कर)- रूको...मेरी बात सुनो...
मेरी आवाज़ सुन कर मोहिनी के बढ़ते कदम रुक गये और मोना तो मेरा गुस्सा देख कर मुझसे दूर खड़ी हो गई....
मोहिनी- आख़िर तुम क्यो पीछे पड़े हो...मैने कहा ना कि मेरी कोई दुश्मनी नही तुमसे...ना तुम्हारी फॅमिली से....भूल जाओ सब कुछ...
मैं- मान लिया...पर मुझे लगता है कि आपकी सच्चाई से शायद मैं अपने दुश्मनो तक पहुच पाउ...हो सकता है कोई हो जो आपकी नज़र मे अच्छा हो पर असल मे वही बुरा निकल गया हो...
मोहिनी- ऐसा नही हो सकता...मैं तो सब भूल कर आगे बढ़ चुकी हूँ...अब मैं जा रही हूँ...
मैं- बस एक मिनट...एक बात का जवाब दो...फिर चली जाना...
मोहिनी- ह्म्म्म..बोलो...
मैं- आपको लगता है कि मेरे दादाजी की वजह से आपकी फॅमिली बर्बाद हुई...??
मोहिनी- हाँ...पर..
मैं(हाथ दिखा कर)- अभी रूको....आपको ये भी लगता है कि आपकी मौसी की मौत की वजह मेरे डॅड है..??
मोहिनी- हाँ बिल्कुल...पर मैं सब भूल चुकी हूँ...
मैं- पर मैं ये नही मानता...नही मानता कि मेरे डॅड किसी की जान ले सकते है....ये भी नही मानता कि मेरे दादाजी किसी परिवार को तबाह कर सकते है...नही मानता...
मोहिनी- पर सच्चाई यही है...
मैं- नही..बिल्कुल नही..और इसी लिए मैं पूरी बात जानना चाहता हूँ...
मोहिनी- इससे क्या होगा...जो हो गया उसे बदल दोगे क्या...??
मैं- नही...पर सच सामने ला सकता हूँ ना...आपको ये बता सकता हूँ ना कि असल मे सच्चाई क्या है..
मोहिनी ने अपनी कहानी ख़त्म की....उसकी आँखे भर आई थी...और मोना की भी...
पर मेरे दिमाग़ मे अभी भी कुछ सवाल थे...
मैं जानता था कि मेरे दादाजी अय्याश थे...पर वो किसी को मार देगे...ये नही मान सकता....और डॅड के लिए तो सोच भी नही सकता...क्योकि डॅड को मैं बहुत करीब से समझता हूँ...
रूम मे तोड़ो देर खामोशी रही...फिर इस खामोशी को मोहिनी ने तोड़ा...
मोहिनी- बस यही थी पूरी कहानी....
मैं- ह्म्म्मब...और आपको लगता है कि आपकी मौसी और उनकी फॅमिली की मौत की वजह मेरे दादाजी और डॅड है...??
मोहिनी- हम्म...
मैं- क्या आपने देखा...??
मोहिनी- जब मेरी माँ की फॅमिली जल कर मरी...तब मैं बहुत छोटी थी...और जब मेरी मौसी की मौत हुई तो मैं वहाँ नही थी...
मैं- मतलब....आपने खुद नही देखा...
मोहिनी- नही...मुझे तो दूसरों से पता चला...
मैं- ह्म्म..और आपने मान लिया....
मोहिनी- देखो...जब मेरे नाना का परिवार जल कर मरा तो लोगो ने बताया कि उस दिन तुम्हारे दादाजी ने आकर धमकी दी थी कि वो सबको जान से मार डालेगे...
मैं- पर धमकी क्यो दी...
मोहिनी- वही तो मुझे जानना है...
मैं- ह्म्म...और आपकी मौसी का...
मोहिनी- लोगो ने बताया कि एक घर मे चार लाषे थी...जिसमे एक मेरी सरिता मौसी की भी थी....और वहाँ सबने सिर्फ़ तुम्हारे डॅड को देखा...पिस्टल के साथ...
मैं- मतलब आपने जो सुना वो मान लिया...
मोहिनी- हाँ...और अब मैं सब भूल कर अपनी लाइफ जी रही हूँ...सिर्फ़ कुछ सवाल है जिनके जवाब चाहिए....
मैं- क्या है वो सवाल...
मोहिनी- सॉरी...वो मैं किसी को नही बता सकती...और उन सवालो से तुम्हारे किसी दुश्मन का कोई रिश्ता नही हो सकता....
मैं- ओके ..मत बताइए...लेकिन मैं आपको प्रूव कर के दिखाउन्गा कि आपको जो भी पता है...वो झूट है...सच नही...
मोहिनी- ठीक है...मैं इंतज़ार करूगी...देखते है तुम्हारा भरोसा सही है या ग़लत....
मैं- ओके...चलता हूँ...
मोना इतनी देर से हमारी बातें सुन रही थी...अचानक मेरे जाने की बात सुनकर बोल पड़ी...
मोना- कहाँ चलता हूँ...अब तुम्हारा काम हो गया तो भागने लगे....
मैं- नही..ऐसा नही है...
मोना- तो फिर एक राउंड और हो जाए...क्यो मोम...??
मोहिनी(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...अंकित का मूड फ्रेश तो करना ही पड़ेगा...क्यो अंकित...
मैं- ह्म्म्म..तो आओ...करो फ्रेश...
फिर दोनो माँ-बेटी नंगी हो गई और सुरू हो गया चुदाई का दूसरा राउंड....
आँखे खोलते ही इतनी प्यारी मुस्कान के साथ एक खूबसूरत लड़की को देख कर मेरी सारी थकान दूर हो गई...
मैं जूही के चेहरे को गौर से देखने लगा....
उसके मुस्कुराते हुए गुलाबी होठ और बिना मेक-अप का खिला हुआ चेहरा जिस पर गीले बालों की लटे लटक रही थी...
उसके जिस्म से निकलती महक...मेरी नाक मे घुसकर मुझे मोहित करने लगी थी...और उसका हाथ मेरे सिर को सहला कर मुझे दूसरी दुनिया मे लिए जा रहा था...
सच मे जूही बेहद खूबसूरत दिख रही थी...उपेर से उसकी मुस्कान ने तो मुझे चारों खाने चित्त कर दिया था...
जूही के हसीन जादू ने मेरे जिस्म मे जान फूक दी थी...और मैं उसे एक टक देखे जा रहा था...
जूही के बालों से पानी की बूँद उसके गाल से गुजरती हुई मेरे होंठो पर गिरी...तो मानो जैसे उसमे जूही ने अपने जिस्म का रस मिला दिया हो....शायद जूही नहा कर सीधा मुझे जगाने आ गई थी....
जूही- अब क्या ख्यालों मे ही रहोगे...हक़ीक़त मे भी बहुत कुछ है डियर....
मैं जूही के शब्द सुन कर बेबस रह गया....
क्या उसने मेरी आँखो को पढ़ लिया था कि मैं क्या सोच रहा हूँ...
मैं जल्दी से बैठ गया और झूठा गुस्सा करते हुए बोला....
मैं- उउंम..क्या यार...बाल सूखा के नही आ सकती...मेरे मूह मे पानी चला गया...
जूही- अरी...मैने क्या..
मैं(बीच मे)- बस....अब जाओ यहाँ से...मैं आ जाउन्गा...
जूही मेरा बर्ताव देख कर शॉक्ड थी...
मेरी बात ने उसके दिल को घायल कर दिया और उसकी आँखे भर आई...पर उसने एक आँसू भी नही छलकने दिया...
जूही- आ जाना तो...
और जूही गुस्से से बाहर निकल गई....और मैं उठ कर बाथरूम मे....
थोड़ी देर बाद हम सब नाश्ते की टेबल पर थे....सब लोग खुश थे पर जूही अपनी आँखे नीचे किए हुए चुप चाप नाश्ता कर रही थी....
मैं उसकी उदासी समझ रहा था....मेरी वजह से आज सुबह-सुबह उसका मूह उतर गया....
वो बेचारी तो मुझे इतने प्यार से जगाने आई थी और मैने उसकी आँखो मे आँसू दे दिए....
वेल..नाश्ता करने के बाद वसीम ने सबसे पूछा कि आज का क्या प्लान है....
सबने आज वसीम की बनने वाली फॅक्टरी जाने का तय किया...साथ मे वहाँ का रेलवे स्टेशन भी देख लेगे और पास मे बना दम भी देख लेगे....
सब लोग निकलने लगे तो मैने जूही से बात करने का सोचा...पर वो गुल को साथ ले कर तेज़ी से निकल गई....
और मैं मन मार कर संजू के साथ आ गया....
हम आज पैदल ही जाने वाले थे....
जैसे ही हमने चलना शुरू किया तो मेरे आदमी का कॉल आ गया...
मैं सबसे दूर पीछे आ गया और बात करने लगा....
(कॉल पर)
मैं- हाँ...क्या हुआ...
स- एक प्राब्लम है....
मैं- कैसी प्राब्लम..??
स- तुमने कहा था कि कामिनी को घेरना है...और प्लान भी तय हो गया था...ह्म..
मैं- ह्म..तो उसमे प्राब्लम क्या है...
स- वेल ..दो प्राब्लम है...
मैं- अरे..बताओ तो...
स- देखो ..एक तो ये कि कामिनी घर से बाहर नही निकल रही...और दूसरी ये कि जिसके भरोसे ये प्लान बनाया था वो भी हिचक रहा है...
मैं- ह्म्म...उसे फ़ोन दो...मैं बात करता हूँ...
स- ये लो...लो बात करो(उस सक्श से)
मैं- तुझे क्या हुआ...
सामने- मैं ...थोड़ा डर...
मैं(बीच मे)- डोंट वरी...मैं हूँ ना..तुम बस वो करो जो कहा जाए...बाकी मुझ पर छोड़ दो...ओके
सामने- हमम्म..
मैं- अब उन्हे फ़ोन दो...
स- हाँ..बोलो..
मैं- ये तो रेडी है...
स- ह्म्म..पर कामिनी का क्या...उसके घर मे एंट्री कैसे होगी...??
मैं- एंट्री की बाद मे देखेगे...पहले उसे बाहर निकाल कर झटका देना है...
स- पर बाहर कैसे...और कहाँ...तुम जानते हो कि हमे सेफ जगह चाहिए...भीड़ नही...
मैं- हाँ...तो *** होटेल कैसा रहेगा...वहाँ कामिनी को बुलाते है...
स- पर होटल मे कैसे ...
मैं(बीच मे)- पूरी बात तो सुनो...
स- बोलो...
मैं- वो होटेल सहर के आउटर मे है...बीच मे सुनसान रास्ता पड़ता है...बस वही काम कर देना...
रजनी पूरी रात ठीक से सोई नही थी...जबसे उसे पता चला कि अंकित पर जानलेबा अटॅक होने वाला है..तबसे वो बहुत ही परेसान थी...
वो देर रात तक अंकित को कॉल करती रही पर कोई फ़ायदा नही हुआ...इसी वजह से आज वो लेट जागी थी...
संजू के पापा भी अपनी शॉप पर जा चुके थे ...
रजनी उठ कर रेडी तो हो गई पर उसका माइंड अभी भी ठीक नही था...
वो फिर से अंकित को कॉल लगाती रही पर कोई फ़ायदा नही हुआ...असल मे अंकित ने वो नंबर बंद कर रखा था जो रजनी के पास था....
रजनी ने काफ़ी कोशिस की पर रिज़ल्ट सेम निकला...थक-हार कर रजनी ने कुछ सोचा और तैयार होकर निकल गई....
थोड़ी देर बाद रजनी , कामिनी के घर मे उसके सामने थी....
कामिनी- अब बोल..क्या हुआ...इतनी टेन्षन मे क्यो है...क्या पहाड़ टूट पड़ा...
रजनी- पहाड़ नही कामिनी...उससे भी बढ़ कर टेन्षन है..
कामिनी(चिंता से)- क्या..घर मे तो सब...
रजनी(बीच मे)- घर मे सब अच्छे है...
कामिनी- तो फिर क्यो इतनी घबराई हुई है...
रजनी- बताती हूँ...पर पहले मैं जो पुछु उसका सही-सही जवाब देना...
कामिनी- मैं तुझसे झूठ बोलोगि क्या...पूछ...
रजनी- तेरी बॉस से बात हुई अभी...
कामिनी- नही...काफ़ी टाइम से नही हुई..क्यो...क्या हुआ....
रजनी- ओके...ये बता कि क्या तुझे पता है कि अंकित कहाँ है अभी...
कामिनी- नही तो...यार मैं तो अभी घर पर ही हूँ...बॉस ने कहा था ना कि कुछ टाइम चुप रहो...तो मैने कोई खबर नही ली उसकी....और मेरा पैर भी अभी ठीक नही हुआ पूरी तरह से...
रजनी- ह्म्म..जानती हूँ...पर मुझे लगा कि शायद बात हुई होगी...
कामिनी- नही रे...वैसे अंकित है कहाँ...तुझे तो पता होगा ना...तेरे तो बेटे का फ्रेंड है...ह्म..
रजनी- ह्म..वो दोनो घूमने गये है....
कामिनी- ह्म..ले चाइ पी..
कामिनी चाइ पीते हुए रजनी को देखती रही...वो समझ गई कि रजनी के मन मे कोई बात ज़रूर है....
कामिनी- रजनी...अब तू बताएगी कि असली बात क्या है...
रजनी- वो..कामिनी...तू जानती है कि अंकित पर अटॅक होने वाला है...???
कामिनी(शॉक्ड )- क्या...किसने कहा तुझसे...
रजनी- बस पता चला..तू बता ना...क्या तुझे पता है...??
कामिनी- नही यार...मुझे सच्ची नही पता...तुझसे ही सुन रही हूँ...ऑश तो इस बात की टेन्षन है तुझे...
रजनी- हाँ कामिनी...उस पर अटॅक क्यो...उसकी क्या ग़लती...
कामिनी- डोंट वरी...बॉस उसे नही मार सकते..जब तक पूरा काम नही हो जाता...समझी...
रजनी- मैं उसे मरने भी नही दूगी...समझी...
कामिनी- अच्छा...बॉस के खिलाफ जाओगी....
रजनी- हाँ..जाउन्गी...मैं अंकित को खरॉच भी नही आने दूगी...
कामिनी- ओह हो...पर अगर तेरी बात सच है...और उस पर अट्क प्लान हो गया है तो वो तो गया....
रजनी(खड़े हो कर)- मैं ये नही होने दूगी...
और रजनी का गुस्सा देख कर कामिनी को भी गुस्सा आ गया..
कामिनी- तू हमारे खिलाफ जाएगी क्या...
रजनी- हाँ...अंकित के लिए जाना पड़ा तो जाउन्गी...देखती हूँ मुझे कौन रोकता है...
रजनी गुस्से मे आ कर बाहर जाने लगी ...तभी कामिनी चिल्ला कर बोली...
कामिनी- तू उसके लिए हमे छोड़ेगी....आख़िर तेरा लगता क्या है वो...??
रजनी ने पलट कर कामिनी को घूरते हुए ज़ोर से कहा....
रजनी- मेरा बेटा है वो...समझी...
और रजनी वहाँ से निकल गई...और आँखो मे आसू लिए सीधे अपने पति की शॉप पर पहुच गई...
(संजू के पापा का नाम...प्रमोद)
प्रमोद(संजू के पापा) ने रजनी को शॉप पर देखा तो वो शॉक्ड हो गये और रजनी की आँख मे आसू देख कर तो उन्हे टेन्षन हो गई...
प्रमोद ने अपने भाई को अपनी जगह लगाया और रजनी के साथ अंदर बने रूम मे आ गया.....
प्रमोद- रजनी..तुम यहाँ...और ये क्या हाल बना रखा है...
रजनी कुछ नही बोली बस सुबक्ते हुए प्रमोद के गले लग गई...और आँसू बहाने लगी...
प्रमोद- रजनी ..आख़िर हुआ क्या...बताओ तो...
रजनी(सुबक्ते हुए)- अंकित की जान ख़तरे मे है...
प्रमोद- क्या...
प्रमोद रजनी को अलग कर के उसकी आँखो मे देखने लगता है..
रजनी- हां...कोई उस पर अटॅक करने वाला है..
प्रमोद- क्या बोल रही हो...तुमने तो कहा था कि उसे कुछ नही होगा....अब क्या हुआ...
रजनी- पता नही...शायद बॉस ने ही तय किया होगा...मुझे कुछ नही पता...
प्रमोद- रजनी...मैं आज तक चुप हूँ वो इसलिए कि तुमने कहा था कि अंकित को कुछ नही होगा...पर अब..
रजनी- तुम्हे क्या लगता है..क्या मैं ये नही चाहती...
प्रमोद- रजनी...हमने अलका से वादा किया था कि उसके बेटे का ख्याल रखेंगे और अब...
रजनी(बीच मे)- मुझे सब याद है....इसीलिए तो मेरी जान जा रही है...अंकित को कुछ हो गया तो मैं अलका को क्या मूह दिखाउन्गी....