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मोहिनी(एक ठंडी आह भर कर)- ह्म...मैं अंकित को जानती हूँ...उसके बाप को भी ...उसके दादा को भी और उसके पूरे परिवार को...सबको जानती हूँ...
मोना-ओके...आप ये तो बताओ कि हुआ क्या था...और आप कैसे जानती है उन सब को और कब से.....
मोहिनी की बातें सुन कर मैं शॉक्ड था....मैं भी जानना चाहता था कि आख़िर मोहिनी मेरे परिवार को कैसे जानती है....क्या रीलेशन हो सकता है उसका, मेरे परिवार से.....और उसकी मौसी कौन थी...और उसे मारा किसने...????
मोहिनी- हमारा रिश्ता बहुत पुराना है....और बहुत ही करीबी....
मोना- हाँ ..पर ये तो बताओ कि ये कौन सा रिश्ता है..जो मुझे भी नही बताया ....
मोहिनी- रिश्ता तो बहुत पुराना है बेटा....तब तो मेरा जनम भी नही हुआ था...तबसे ये रिश्ता है....पर मुझे बहुत बाद मे पता चला....
मोना- आपको कब पता चला...और ये आपके जनम के पहले का रिस्ता है..तो आपको किसने बताया....
मोहिनी- मुझे तो मेरी मौसी के खत(लेटर) से सब पता चला...वो भी तब , जब मेरी मौसी इस दुनिया को छोड़ कर जा चुकी थी...
ये बात होते ही थोड़ी देर के लिए रूम मे शांति हो गई....तभी मोहिनी ने अपनी नम हो चुकी आँखो को सॉफ किया और एक सिगरेट जला के कस मारने लगी.....थोड़ी देर के बाद मोना फिर बोली...
मोना- एक बात समझ नही आई मोम...आख़िर अंकित की फॅमिली मे से कोई आपकी मौसी को क्यो मारेगा....
मोहिनी(सिगरेट का कस लगा कर)-क्योकि मेरी मौसी भी उस फॅमिली की दुश्मन थी...और बदला ले रही थी....
मोना- किस बात का बदला...
मोहिनी- मेरी माँ और मौसी के परिवार को मिटा डालने का बदला..जिसके ज़िम्मेदार अंकित के बड़े लोग थे...
मोना- तो आप अंकित को इसका ज़िम्मेदार समझती है...
मोहिनी- नही बेटा...मैं उसे ज़िम्मेदार नही समझती और मैं बदला लेने का भी नही सोचती...बस मरने के पहले एक बार अंकित के बाप से और उसके दादाजी से मिलना चाहती हूँ...
मोना- पर किस लिए...??
मोहिनी- कुछ सवाल पूछने है उनसे...और कुछ सच्चाई भी बतानी है उनको...
मोना- कैसी सच्चाई मोम...??
मोहिनी- ये तुझे अभी नही बता सकती...इंतज़ार कर...तुझे भी साथ ले चलूगी...सुन लेना ..ह्म्म
मैं मोहिनी की बात सुन कर सोच मे पड़ गया....
कितनी अच्छी औरत है ये...सब जानती भी है कि इसकी मौसी की मौत की वजह मेरी फॅमिली है...फिर भी इसके दिल मे मेरी फॅमिली के लिए नफ़रत नही है...
वहाँ मोहिनी को शांत देख कर मोना ने फिर से एक सवाल कर दिया...मैं भी कब्से इसी सवाल के जवाब का वेट कर रहा था....
मोना- ह्म्म...वैसे आपकी मौसी कौन थी मोम...और उन्हे मारा किसने था....
मोहिनी(थोड़ी देर चुप रहने के बाद)- मेरी मौसी की मौत के ज़िम्मेदार अंकित के डॅड है...उन्ही ने मारा मेरी मौसी को....
और इतना कहकर मोहिनी फुट-फुट कर रोने लगी और मोना अपनी मोम को संभालने लगी ....
पर मेरे दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी...मैं जल्दी से जल्दी मोहिनी की मौसी का नाम जानना चाहता था...
मैं सोचने लगा था कि क्या मेरे डॅड ने एक और खून किया है...किसी की जान ली है....
मैं लॅपटॉप पर आँखे लगाए मोहिनी को देख रहा था और कान खुले रख कर इंतज़ार कर रहा था कि जल्द से जल्द मुझे उस औरत का नाम पता चल जाए जिसे मोहिनी के हिसाब से मेरे डॅड ने मारा...
तभी मोना अपनी माँ को संभालते हुए बोली...
मोना- बस मोम..प्ल्ज़ चुप हो जाइए...
मोहिनी(रोते हुए)- कैसे चुप हो जाउ बेटा...कैसे भूल जाउ कि कितनी बेदर्दी से आकाश ने मार डाला मेरी प्यारी मौसी को....मेरी सरिता मौसी...
और "सरिता मौसी " बोल कर मोहिनी की आँखो मे आँसुओं का सैलाब आ गया और उसके साथ मोना भी रोने लगी...
वहाँ दोनो माँ-बेटी आपस मे चिपकी हुई आँसू बहाने लगी और मैं सरिता का नाम सुनते ही सन्न हो गया और उन्दोनो को रोते हुए देखता रहा.....
मेरे दिमाग़ मे इस समय तूफान आया हुआ हुआ था....
कुछ सवाल भी थे....कुछ उलझने थी...और बहुत ज़्यादा जिग्यासा थी....
मैं जानना चाहता था कि सरिता की मौत के बारे मे मोहिनी को कितना और क्या पता है....
साथ मे यह भी जानना था कि मेरी फॅमिली का मोहिनी की माँ और उसकी मौसी सरिता की फॅमिली से क्या संबंध था....
और मेरी फॅमिली ने उस फॅमिली को क्यो और कैसे बर्बाद किया था....
मैं अपने आप से ही झूझ रहा था...दिल ये मानने को तैयार नही था कि मेरे डॅड या दादाजी किसी को नुकसान पहुचा सकते है....
पर दिमाग़ मे मोहिनी की बाते और डाइयरी मे लिखी बात चल रही थी...जिसके हिसाब से उस दिन मेरे डॅड के हाथ मे पिस्टल थी और उस घर मे सुभाष और सरिता की लाशे पड़ी हुई थी....
मतलब..क्या सच मे मेरे डॅड ने ही सरिता को मारा था....
मैं इस समय इन सवालो के जवाब जानने के लिए मरा जा रहा था...और मेरा माइंड तो जैसे फटने लगा था....
ऐसी कंडीशन मे मैं सिर्फ़ एक काम करता हूँ ...थोड़ी सी ड्रिंक...
मैं उठा और नीचे जाकर एक बॉटल ले आया....
फिर 2 पेग लगाए तो थोड़ी शांति मिली...
थोड़ी देर बाद मैने देखा कि मोना और मोहिनी ने रोना बंद कर के कपड़े पहन लिए थे...
और मोना अपने रूम मे निकल गई...और मोहिनी भी अपने पति के साथ सोने लगी...
मैने सोचा कि अब तो कुछ पता चलेगा नही ...अब मुझे खुद ही मोना या मोहिनी से बात कर के सच्चाई जाननी होगी....
और कुछ देर बाद एक पेग और गटक कर मैं भी सोने लगा....
सुबह जब मैं जगा तो एक झटके के साथ जगा...
मैं पसीने मे तर-बतर था और मेरी सासे ज़ोर-ज़ोर से चल रही थी....
आज फिर से मैने वो सपना देखा जो मुझे अक्सर परेसान करता है...
मेरे चारो तरफ से हाथ आकर मेरा गला दबा रहे है...
ऑश..लास्ट नाइट मेरे लिए बहुत बुरी रही...
पहले तो मोहिनी की बातों ने मेरा दिमाग़ हिला दिया और फिर वो सपना...
मैने अपने आप को नॉर्मल किया और रेडी हो कर नीचे आ गया....
आज नाश्ते के दोरान मेरी नज़रे मोहिनी पर ही टिकी रही...
पर उसने ऐसा कोई रिक्षन नही दिया जिससे पता चले कि वो मुझे बहुत अच्छे से जानती है...और ना ही उसके चेहरे पर कल रात की बातों का कोई असर था....
नाश्ता करने के बाद सबका प्लान बना कि आज नदी की तरफ घूमने चलते है...
हम फिर से खेतो की तरफ आ गये वाहा से पैदल ही नदी की तरफ निकलना था....
सब लोग अलग-अलग पार्ट्नर ले कर जाने लगे...
पर मेरा बिल्कुल भी मूड नही कर रहा था....आज मैं अकेला रहना चाहता था....
पर जूही को ये मंजूर नही था...वो मेरे साथ ही खड़ी रही....
मैं नही चाहता था कि मेरी वजह से जूही का दिन भी खराब निकले....इसलिए मैने उसे जाने को बोला...
पर जूही कहाँ मानने वाली थी...उसे तो जैसे सिर्फ़ मुझसे मतलब था...घूमने से नही....
जूही ने मेरा हाथ पकड़ा तो मैं उसे देखने लगा....
जूही भी मेरी आँखो मे झाँक कर देखने लगी...शायद मेरी उदासी की वजह तलाश रही थी...
आख़िरकार काफ़ी देर तक मुझे देखने के बाद वो बोल ही पड़ी...
जूही- दर्द बाटने से कम होता है अंकित...
मैं- क्क़..क्या...कहा...
जूही- अपने दर्द मे इतना खोए हुए हो कि मेरी बात भी नही सुनी...
मैं- नही..ऐसा कुछ नही है...मैं तो बस....
जूही(बीच मे)- मैं फोर्स नही करूँगी...जब तक तुम्हे ये ना लगे कि मैं तुम्हारे दर्द को बाँट सकती हूँ..तब तक कुछ मत कहना...
मैं- ऐसा कुछ नही यार..वो तो बस रात को ड्रिंक की थी ना...तो मूड फ्रेश नही हुआ...
जूही- झूट बोलना सीख लो अंकित...अभी ठीक से नही बोल पाते हो....
मैं- क्या...मैं क्यो झूठ बोलुगा...और वो भी तुमसे...
जूही- ह्म्म..चलो..ये बात यही ख़त्म करते है...जब बताना हो तो बता देना...अभी चले...
मैं- ऐसा कुछ नही समझी...और ..मेरा सिर दर्द हो रहा है...तुम चली जाओ ना...मैं नही घूमने वाला...
जूही- तो फिर...एक काम करो..बैठो यहाँ...
मैं- क्या..पर क्यो...
फिर जूही ने मुझे जबरन नीचे बैठा लिया...मैं मना करता रहा पर वो नही मानी...
बैठने के बाद जूही ने मुझे खीच कर अपनी गोद मे लिटा लिया....
मैं- ये..क्या कर रही हो...
जूही- सस्शह....लेटे रहो...
मैं- ओके..पर बताएगी कि क्यो...??
जूही- तुम्हारा सिर दर्द ठीक करना है...
मैं- ह्म्म्म..ओके...करो फिर...
जूही की गोद मे सिर रख कर मैं अपना सिर दबवाने लगा....
जूही की गोद और उसके नाज़ुक हाथों के स्पर्श से मेरा मूड ठीक होने लगा...
और उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख-देख कर मेरा मूड मस्ती करने का होने लगा....
जूही(सिर दबाते हुए)- कुछ आराम मिला...??
मैं- ना..अभी नही...
जूही- कोई बात नही...जल्दी मिल जायगा...मेरे हाथो मे जादू है...
मैं- अच्छा...पर मेरे उपेर हाथो का जादू नही चलता...
जूही- ओह्ह...तो क्या चलता है...
मैं- उम्म्म..होंठो का जादू...
जूही मेरी बात का मतलब समझ गई और शरमा गई...
मैं- क्या हुआ...होंठो का जादू है तुम्हारे पास..??
जूही(शरमाते हुए मुझे देखती रही)
मैं- नही है तो रहने दो..मैं किसी और को ढूँढ लुगा...
और मैने उठने का नाटक किया...पर जूही ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे वापिस गोद मे लिटा दिया...
जूही(गुस्सा दिखाते हुए)- चुपचाप लेटे रहो...बड़े आए किसी और को ढूँडने वाले...
मैं- तो क्या करूँ...तुम तो जादू दिखा ही नही रही...
जूही- श्ह्ह्ह्ह...चुप...
और मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही जूही मेरे चेहरे पर झुक कर फूक मारने लगी...
जूही के गरम होंठो से निकलती गरम हवा ने मेरे माथे पर टकरा का मेरे जिस्म मे हलचल मचा दी...
मैने शांति से अपनी आँखे बंद की और जूही की गरम सांसो के अहसास मे खोने लगा...
जूही- आराम मिला...
मैं- ह्म..थोडा सा...
फिर जूही ने झुक कर मेरे माथे पर किस कर दिया...जो मेरे अरमान जगाने के लिए काफ़ी था...
जूही- अब...
मैं- ह्म्म्म्म ...थोड़ा और...
फिर जूही मेरे माथे को किस करती रही और मेरी मस्ती बढ़ती रही...
मैं- जूही...मेरी आँखे भी ...
जूही- अच्छा....
इतना बोल कर जूही ने मेरी बंद आँखो पर एक-एक किस कर दिया...
मैं- अभी आराम नही मिला...
जूही ने फिर 2-3 और किस किए....तभी मैने जूही को अपने होंठ दिखाते हुए कहा....
मैं- जूही मेरे होंठ भी...
जूही- बदमाश....
मैं- सच्ची यार...करो ना..
जूही शायद इसी इंतज़ार मे थी...पिछली बार भी हमने लिप किस नही किया था...
जूही शरमाते हुए अपने होंठ मेरे होंठो तक लाई...उसकी गरम साँसे मैं अपने होंठो पर फील कर रहा था....
पर इससे पहले की हमारे होंठो का मिलन हो पाता ...पीछे से शबनम की आवाज़ आई....
शबनम- जूही...ये क्या हो रहा है...
जूही और मैं दोनो घबरा गये...शबनम ने हमे रंगे हाथो पकड़ लिया था...और उसके साथ चंदा भी थी...
शबनम की आवाज़ सुनते ही जूही सीधी हो गई और मैं उसकी गोद से उठकर बैठ गया...
शबनम- अंकित तुम...यहाँ...हो क्या रहा था यहाँ...
जूही- मोम...वो..वो अंकित ..
मैं(बीच मे)- अरे आंटी...मेरी आँख मे कचरा चला गया था तो जूही से गरम फूक मारने को बोला था..
शबनम(मुस्कुरा कर)- ओह्ह..अच्छा ...
जूही- हाँ मोम..
शबनम- ह्म..अच्छा अब ठीक है ना ..
मैं- जी...
शबनम- तो जूही मेरे साथ चल..हमे कुछ खाने को बनाना है...
जूही- जी मोम...पर आप यहाँ ...घूमने नही गई...
शबनम- गई थी...फिर सोचा कि क्यो ना आज सबको अपने हाथो की बिरयानी खिला दूं...तो आ गई..चल हमारी हेल्प कर दे...
जूही चुपचाप उठ कर चंदा के साथ फार्महाउस मे चली गई...मैं भी उठ कर खड़ा हो गया...
शबनम- थॅंक यू बेटा...
मैं- किस लिए आंटी...
शबनम- मुझे सही रास्ता दिखाने के लिए...
मैं- कोई बात नही आंटी...ये सब सिर्फ़ अकरम के लिए किया...उसकी फॅमिली...मतलब मेरी फॅमिली..है ना..
शबनम- ह्म्म..मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे बेटे को तुम जैसा दोस्त मिला...
मैं- नही आंटी...मैं खुश हूँ कि मुझे अकरम जैसा दोस्त मिला...
शबनम- तुम दोनो अच्छे हो ओके...अब तू घूम ले...फिर तुझे मस्त बिरयानी खिलाती हूँ...
मैं- ओके आंटी...वैसे...अंकल कहाँ है..आइ मीन किसके साथ गये...
शबनम- वो तो ज़िया के साथ निकल गये...
मैं- ओके..आप बिरयानी बनाओ ..मैं घूम कर आता हूँ...
फिर आंटी बिरयानी बनाने निकल गई और मैं नदी की तरफ जाने लगा....
जाते हुए मैं सोचने लगा कि आज भी जूही की किस्मत खराब निकली...उस दिन मैने लिप किस नही किया और आज आंटी की वजह से नही हो पाया...बेचारी...
फिर मुझे आंटी की बात याद आई कि वसीम ज़िया के साथ निकल गया है...
मुझे यकीन हो गया कि पक्का ये दोनो कहीं गुल खिला रहे होंगे....आज तो इन्हे रंगे हाथो पकदूँगा...
क्योकि अगर अकरम की फॅमिली को सही करना है तो वसीम और ज़िया को भी सही रास्ते पर लाना होगा....
यही सोच कर मैं तेज़ी से आगे बढ़ने लगा....
काफ़ी देर घूमने के बाद मुझे सफलता मिल ही गई....
नदी के पास वसीम और ज़िया चुदाई करने मे बिज़ी थे....
ज़िया ग्राउंड पर कुतिया बनी हुई थी और वसीम पीछे से उसकी गान्ड मार रहा था....
वसीम- आअहह...बेटा...तेरी गान्ड मारने मे जो मज़ा है...वो किसी और गान्ड मे नही...ईएह...
ज़िया- अब्बू....ज़ोर से क्यों ...आआहह...आअराम से ना...उूउउम्म्म्म..
वसीम- क्या करूँ..तेरी गान्ड ही ऐसी है...उपेर से मैं कल से प्यासा हूँ बेटा....ईएह...
ज़िया- क्यो...कल मोम नही मिली...और मोहिनी...आअहह...उनकी ले लेते..या मौसी की...आअहह..
वसीम- कल तेरी मोम साथ थी तो कुछ नही हुआ...यीहह...
ज़िया- हमम्म....बस डॅड...मेरा होने वाला है..आहह...आअहह...
वसीम- मैं भी आया...ईसस्स...ईीस्स...आआहह...
वसीम और ज़िया झड कर वैसे ही बैठे रहे...
मैने सोचा कि चलो इनकी बंद बजाता हूँ...पर कुछ कदम चलने के बाद....
मैं(मन मे)- अगर अभी इन्हे पकड़ लिया तो वसीम सारी उम्र मेरे सामने शर्मिंदा रहेगा....और ये अच्छा नही...
मैं ज़िया से बात कर के इस सब को रोक सकता हूँ....
ज़िया को तो चोद ही चुका हूँ...तो उसको ज़्यादा फ़र्क नही पड़ेगा...
ह्म्म..यही ठीक होगा...अभी यहाँ से चलता हूँ...आज रात को ज़िया से बात करूगा...
मैं आगे का प्लान सोच कर वहाँ से निकल आया...और नदी के किनारे पर पहुच गया...
वहाँ पर संजू और पूनम मस्ती करते हुए भाग रहे थे...
संजू पूनम को पकड़ रहा था...थोड़ी ही देर मे संजू ने पूनम को पकड़ा और वही खुले मे किस करने लगा...
ये देख कर मुझे गुस्सा आ गया...मैने सोच लिया कि आज इन दोनो को तो सबक सिखा ही दूं...
तभी पूनम और संजू वही पास मे बने एक घर मे घुस गये...
ये घर किसका होगा...वसीम का..???
ये जानने के लिए मैने अकरम को कॉल किया...उसने मुझे बताया कि वसीम एक फॅक्टरी खोलने वाला है यहाँ...
तो क्लाइंट से मिलने के लिए और उन्हे ठहराने के लिए ये घर बनाया है..
कॉल कट कर के मैं उस घर मे चला गया...
घर के अंदर संजू पूनम को नंगा कर के चूत मे लंड डाल चुका था और दोनो चुदाई मे मस्त थे...
तभी मैं तालियाँ बजाते हुए आगे बढ़ने लगा....
तालियो की आवाज़ सुनकर दोनो ने आवाज़ की तरफ देखा और वहाँ मुझे देख कर दोनो की फट के हाथ मे आ गई और दोनो सुन्न पड़ गये.....
मैं तालियाँ बजाते हुए उन दोनो के पास जाने लगा और दोनो की गान्ड और ज़्यादा फटने लगी....
मैं- वाह...वाह. .क्या बात है...
संजू- अंकित...तू...यहाँ....???
मैं- हाँ बेटा..मैं ..यहाँ...क्यो क्या हुआ...क्या मैं ग़लत वक़्त पर आ गया....ह्म
मेरी बात सुनकर दोनो चुप रहे...कोई जवाब नही दिया. ..
मैं- अच्छा हुआ कि मैं यहाँ आ गया...इसी बहाने ये देखने तो मिला कि भाई-बेहन का प्यार क्या होता है..वाहह .....
संजू- भाई ...वो ..मैं...
मैं- क्या वो मैं...हाँ...तुझे शर्म नही आई...अपनी दीदी को चोदता है ...
संजू-(मुँह नीचे कर के उदास हो गया)
मैं- अभी बता दूं तेरे घर...रजनी आंटी को बोल दूं...कि तू अपनी दीदी को रंडी की तरह चोदता है...
संजू- नही भाई...मैं तो दी से प्यार...
मैं(बीच मे)- प्यार....चुप साले...इसको कहीं भी चोदता रहता है और इसे प्यार कहता है...
संजू- मैं तो कभी-कभी...
मैं- अच्छा...कभी-कभी...हाहाहा...
मेरे हँसने से संजू का चेहरा उतर गया..तभी पूनम बोली...
पूनम- भाई..प्ल्ज़्ज़....
मैं- तू तो बोल ही मत...तू तो रंडी बन गई है अब...
पूनम(गुस्से से)- भाई...
मैं- क्या भाई...हां...खुले मैदान मे..पहाड़ी के पास खुले मे और अब यहाँ...क्या ये रंडियो जैसी हरकत नही...
पूनम ने मेरी बात सुनी तो वो समझ गई कि मैने सब देखा है इसलिए वो चुप हो गई...
संजू- भाई प्लीज़...माफ़ कर दे...अब नही करूगा...
तभी पूनम ने मुझे देखा और मैने उसे आँख मार दी...
पूनम समझ गई कि मैं बस संजू के मज़े ले रहा हूँ...
मैं- अबे शर्म नही आई ....इतना मस्त माल अकेले-अकेले खा रहा है...मुझे भूल गया...
संजू(आँखे फैला कर)- क्या...क्या कहा..
मैं- वही जो सुना...मुझे भी बता देता...हम साथ मे चुदाई करते...
संजू- मैं तो बताने वाला था..पर दी ने...
मैं- ओह्ह...तो पूनम ने मना किया...क्यो पूनम...??
पूनम- मैं डर रही थी...
मैं- मुझसे...ह्म्म..
मैने पूनम को घूर के देखा और वो मुस्कुरा दी...
संजू- भाई..तो अभी कर ले...बस ये किसी को बताना मत ..बहुत बदनामी होगी..
मैं- ओह्ह..अब बदनामी की फ़िक्र हो गई...और खुले मे चोद रहा था तब...तब नही सोचा...
संजू- ग़लती हो गई भाई...सॉरी...
पूनम- सॉरी भाई...अब नही करेंगे..
मैं- ह्म्म..पर तुम दोनो को सज़ा तो मिलेगी...
संजू- जो सज़ा देना है दे..बस माफ़ कर दे...
मैं- सज़ा ये है कि अभी मैं पूनम को तेरे सामने चोदुगा...और पूनम की सज़ा ये है कि अभी वो 2 लंड से एक साथ चुदेगि...
संजू और पूनम एक साथ बोल पड़े...क्याअ...??
मैं- ह्म्म..अब तू वहाँ बैठ जा ...मैं पूनम को लाता हूँ...
संजू हमसे दूर जा कर सोफे पर बैठ गया और मैने पूनम को पीछे से बाहों मे भर लिया...
मैं(धीरे से)- बड़े मज़े मार रही है अकेले-अकेले...
पूनम- आप भी तो मार रहे हो..
मैं- हाँ..पर मुझसे क्यो छिपाया...
पूनम- बस ..डरती थी कि आप मना ना कर दो...
मैं- नही रे...इसमे क्या...तुझे घर पर ही लंड मिल गया...अच्छा है ना..
पूनम- ह्म्म...और अब तो 2-2 लंड मिलेगे...
मैं- ह्म्म..तो चल तुझे 2 लंड का एक साथ मज़ा चखाता हूँ...
पूनम- मैं तो कब्से सोचती थी कि मुझे 2 लंड एक साथ मिले...जबसे फिल्म मे देखा था...तब से मन है...
मैं- आज तेरा मन भर देते है...आज तेरी चूत और गान्ड..दोनो की बजाते है..चल..
फिर मैं पूनम को सोनू के पास ले गया...
सोनू का लंड आधा मुरझा गया था...पर मेरा लंड फुल आकड़ा था...
मैने पूनम को सोफे पर झुकाया और उसे संजू का लंड चूसने बोला...
फिर अपना पेंट निकाल कर पूनम की टाँग उठाई और अपना लंड पूनम की चूत मे डाल दिया...
पूनम(लंड मुँह से निकाल कर)- आअहह...गीला तो कर लेते...आअहह....
मैं- तो दर्द कैसे होता...आज तो तुझे रुला-रुला कर मारना है....
पूनम- ऊहह...संजू..तू ही बोल ना..आराम से करे...आआहह...
मैं- चुप कर और लौंडा चूस उसका...संजू...डाल दे इसके मुँह मे वापिस...
संजू ने पूनम का मुँह पकड़ के लंड को उसके मुँह मे वापिस डाल दिया और मैं तेज़ी से धक्के मारने लगा...
पूनम की धीरे-धीरे सिसकिया निकल रही थी.....पर लंड मुँह मे होने की वजह से ठीक से सुनाई नही दी...
मैं- संजू...मज़ा आ रहा है...
संजू- हाँ भाई...तेरे सामने इससे लंड चुसवाने मे ज़्यादा ही मज़ा आ रहा है...इतनी जल्दी टाइट हो गया...
मैं- ह्म्म ..छोड़ना मत...पेलता रह उसके मुँह मे...आज उसे रुला-रुला कर चोदना है...ये ले....
पूनम- उउउंम..उउंम्म...उउंम्म..उउउंम्म...
संजू- यीहह...दी....ऐसे ही...आअहह....
मैं- यीहह....साली...अब खा 2-2 लंड...ये ले....ईईहह...ईईहह....
थोड़ी देर बाद मैने चुदाई रोकी और संजू को इशारा कर दिया कि उसे छोड़ दे...
संजू के छोड़ते ही पूनम खांसने लगी और उसके मुँह से लार टपकने लगी...
पूनम- कमीने...खो-खो..आआहह..म्मार डालोगे क्या....आअहह..भाई...तुम..खो-खो...उउंम्म...
मैं- बस कर...अभी तो तुझे बहुत कुछ सहना है....
चल संजू इसे अपने उपेर चढ़ा ले...तू चूत मार...मैं गान्ड फाड़ता हूँ इसकी....
संजू तुरंत लेट गया और पूनम भी उसका लंड ले कर उसके उपेर लेट गई....
पूनम- भाई...अब गीला कर के डालना....
मैं- नही...आज तुम्हे दर्द झेलना होगा...यही तेरी सज़ा है...
और मैने लंड को गान्ड पर सेट कर के एक धक्का मारा और सुपाड़ा गान्ड मे घुस गया.....
पूनम- आाऐययईईईईईई.....ध्हीरीए...
मैने पूनम की फ़िक्र ना करते हुए पूरा लंड दूसरे झटके मे गान्ड मे डाल दिया....
पूनम- ऊहह...म्म्म्मा आअ......म्म्मासअररर ......गाऐयईई...
मैं- संजू..इसकी टेन्षन मत लो...और धक्के मारने शुरू करो...
मेरी बात सुनते ही संजू ने नीचे से और मैने उपेर से धक्के मारना शुरू कर दिया....
पूनम दर्द से तड़पति हुई हम दोनो के लंड का मज़ा लेने लगी....
थोड़ी देर मे ही पूनम नॉर्मल हो गई और सिसकने लगी....
पूनम- आअहह....आअहह....एक साथ दो लंड का मज़ा...आआहह....
संजू- दी तुम्हे मज़ा आ रहा है ना...
मैं- तुझे दिखता नही क्या...देख कैसे मज़े से गान्ड हिला रही है....
पूनम- हाँ भाई....बहुत मज़ा आया...मारो...और तेजज....आआहह....
पूनम पूरी मस्ती मे अपनी चूत और गान्ड मरवाते हुए मज़े ले रही थी...और मैं और संजू भी चुदाई का मज़ा ले रहे थे...
रूम मे बस हमारी सिसकारियों की आवाज़े आ रही थी....
संजू- यस दी...ये लो...आअहह...क्या मस्त चुदवा रही हो दी...येस्स..ईीस्स....
पूनम- हाँ भाई...ज़ोर से मारो...आअहह...आहह..
मैं- संजू पेल साली को...अभी ये दी नही..एक रंडी समझ कर चोद...
पूनम- हाँ भाई...दोनो की रंडी हुउऊउ....मारो...आअहह...उउउफफफ्फ़ ....
संजू- तो ये ले फिर...ले रंडी...
मैं- हाँ..ऐसे ही...मार साली की...फाड़ दे....ईएहह....
थोड़ी देर तक पूनम को दोनो तरफ से चोदने पर पूनम झड गई और लस्ट पड़ गई...
तब मैने लंड गान्ड से निकाल लिया और संजू ने भी पूनम को साइड लिटा दिया....
पूनम- आअहह...मार डाला...उउउंम्म...
मैं- अभी तो शुरुआत है..आगे देखना...
पूनम- ह्म्म..तो दिखाओ फिर...
संजू- तुम तो सच मे रंडी के जैसे तैयार हो गई..
पूनम- ओये...आज मैं तुम दोनो की रंडी ही हूँ...रूको मत...चलो आओ...पर एक साथ नही...दोनो साथ मे थोड़ी देर से करना...ओके..
मैं- ओके..चल फिर कुतिया बन जा...और संजू तू इसका मुँह चोद...तब तक मैं इसकी गान्ड मारता हूँ...
पूनम वफ़ादार कुतिया की तरह पोज़ मे आ गई...और संजू भी उसके सामने खड़ा हो गया...
पूनम ने मुँह खोल कर संजू के लंड का स्वागत किया और चूसने लगी...
मैं भी पूनम के पीछे आया और एक झटके मे लंड को गान्ड मे डाल कर थुकाइ शुरू कर दी...
पूनम- उउंम..आहह...तुम्हारा लंड..जान ..निकाल देता है..उउउंम्म..
संजू- तू लंड चूस साली...
मैं- अब ठीक बोला...और तू साली..ये ले...
पूनम- उउंम..उउंम..उउउंम..उउंम...उउंम..
संजू- पूरा ले साली...अंदर तक...आअहह...
मैं- ईएहह...ईएह...ये ले...एस्स...एसस्स...एस्स...
थोड़ी देर तक मैं जोरदार तरीके से गान्ड मारता रहा और पूनम भी संजू के लंड को तेज़ी से चूस्ति रही....
संजू को लगा कि वो झाड़ जायगा तो उसने लंड को बाहर निकाल लिया....
पूनम- आहह...क्या हुआ तुझे...
संजू- मुझे भी गान्ड मारनी है...
मैं - पूनम मार लेना पर अभी नही...
मैं- संजू...तू चूत मार ले...
पूनम- एक साथ नही प्ल्ज़...
मैं- ठीक है..तू संजू से चूत मरवा...मैं तेरा मुँह चोदता हूँ..
पूनम - ह्म्म..आजा संजू...
पूनम जल्दी से लेट गई और संजू ने भी जल्दी से पूनम के पीछे लेट कर उसकी चूत मे लंड पेल दिया और मैने भी पूनम के मुँह मे लंड डाल दिया...
और फिर से चुदाई शुरू हो गई....
संजू- आअहह...अब लंड को सुकून मिला...यीहह...यीहह...
पूनम- उउउंम...सस्स्ररुउउउगग़गग...सस्द्रररुउउउगगगगग....उूुउउंम्म...
मैं-यस बेबी यस...ज़ोर से...आअहह...
संजू- ओह्ह..एसस्स दी...येस्स...टेक इट...आअहह...
पूनम- उउंम...सस्स्रररुउउउगगगगग...उूउउंम्म...उूउउम्म्म्म...उूउउंम्म....
मैं- ऊहह..ग्गगूवस्ससस....ससूउक्ककक...ईएहह.....ययईएहह...
थोड़ी देर की चुदाई के बाद पूनम फिर से झड़ने लगी....और उसने मेरा लंड मुँह मे दबा कर झड़ना शुरू कर दिया....
पूनम- उूुउउंम्म...उूउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म....
पूनम के झड़ते ही मैने उसके मुँह से लंड निकाल लिया और और संजू भी लंड निकाल के बैठ गया....
संजू- अब मुझे गान्ड मारने दो...
पूनम- बाद मे मार लेना...आअहह..
मैं- नही...अभी मार संजू...पकड़ इसे और उपेर बैठा ले...चूत मेरे लिए खोल देना...
पूनम- एक साथ ..नही ना...
मैं- चुप कर...ये तेरी सज़ा है..मुझसे छिपाने के लिए....
संजू तो मेरे बोलते ही खुश हो गया और उसने पूनम को अपने उपेर लिटा कर गान्ड मे लंड डाल दिया...
पूनम एक हल्की सिसकी के साथ गान्ड मे लंड ले गई.....
संजू- गान्ड तो चूत से ज़्यादा मस्त होती है दी...मज़ा आ गया...
मैं- अब मज़ा ले...मैं चूत का मज़ा लेता हूँ...पूनम भी दो लंड का मज़ा लेगी...
और मैने पूनम के उपेर आकर उसकी चूत मारना शुरू कर दिया.....
मैं- संजू...ज़ोर से मारना दी की गान्ड...
संजू- फाड़ डालुगा भाई...
पूनम- ओह्ह्ह....सालो...अपनी दी की फाड़ोगे...आआअहह....आअहह...
संजू- आज तू दी नही...रंडी है....ये ले...
मैं- सही कहा...फाड़ दे....ईीस्स...ईएसस्स....
पूनम- ओह्ह्ह...एस्स....माअरो...ज़ोर से...आहह...आहह...
हम तीनो चुदाई मे पूरी तरह मस्त थे...और पूनम तो नये अनुभव से ज़्यादा ही मस्त थी...
पूनम- आअहह ....आअहह ....आअहह....आअहह...
संजू- एस्स...ये लो ..दी....ज़ोर से लो...यीहह...
मैं- मज़ा ले पूनम ...अब ऐसे ही चोदेगे....आअहह...
पूनम- हाँ भाई...आआओउउंम्म...दोनो मारना....रंडी बना कर...आआहह...आअहह....
संजू- एसस्स..एसस्स...ईीस्स..ईसस्स...
मैं- ये लो...यीहह...यईहह...यईहह...
पूनम- आअहह...आअहह...आअहह ....आअहह...फास्ट...फास्ट....आहह..
टिदी देर बाद पूनम झड़ने लगी...
पूनम- मैं आई भाई...आआअहह. .उउफफफ्फ़...म्म्मासआ ....ईएसस्स...ईीस्स...आअहह...
पूनम के झाड़ते ही संजू भी झड़ने लगा....
संजू- मैं भी गया...आअहह...ईएह...यईएह....
मैं- अभी मेरा काम नही हुआ...
पूनम मैं थक गई...पल्लज़्ज़...रुक जाओ..
मैं- चल...तेरा मुँह चोदता हूँ...आजा...
पूनम नीचे बैठ गई और मैं उसका मुँह चोदने लगा....संजू अपना लंड हिलाते हुए लंड रस टपकाने लगा...
पूनम-उउंम..उउंम..क्ख्म्म..क्क्हुउऊंम्म.ऊमम्म..
मैं-यीहह......अंदर ले...ओर ...यहह...
मैं झड़ने के करीब था तो पूरी स्पीड से उसके मुँह को चोदने लगा…और उसकी सिसकारिया…उसके मुँह मे दबने लगी..
मैं-ईीस…एस्स..बाबे…एसस्स…ज़ोर से…आहह
पूनम-उउउंम…सस्रसरररुउउप्प्प…सस्रररुउुुुउउ……उउउम्म्म्म….क्क्हूंम्म्मम
ऐसे ही थोड़ी देर मैं पूनम के मुँह को चोदता रहा ऑर फिर झड़ने लगा...
पूनम ने मेरे लंड रस की एक भी बूँद बर्बाद नही की और पूरा पी गई...
थोड़ी देर बाद हम सब नॉर्मल हुए और कपड़े पहन लिए...
संजू- आज तो मज़ा आ गया...
पूनम- सच मे..इतना मज़ा पहली बार आया...
मैं- ह्म्म..संजू तू जा..मैं पूनम के साथ आता हूँ...
संजू मेरी बात मान कर निकल गया...और मैने पूनम को समझा दिया कि कभी भी संजू को ये मत बताना कि मैं तुझे पहले से चोदता हूँ...
पूनम- डोंट वरी भाई..कभी नही बोलूँगी...
मैं- और हां..जगह देख कर चुदाई किया कर..खुले मे नही..
पूनम- सॉरी भाई...अब ध्यान रखुगी..
मैं- चलो अब...
हम दोनो थोड़ा आगे ही बढ़े थे कि मेरे पास एक कॉल आ गया...
स्क्रीन देख कर मैने पूनम को जाने को बोला...उसके दूर जाते ही मैने कॉल पिक की...
सामने से जैसे ही मैने पहली लाइन सुनी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये...बात ही कुछ ऐसी थी.....किसी की भी गान्ड फाड़ दे....
क्या थी वो बात...????????
Sorry friends for long break