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चूतो का समुंदर

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शबनम अपने रूम मे किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी...मैने गेट नॉक किया तो वो चौंक गई....

शबनम(फ़ोन काट कर)- तुम..यहाँ...आओ बेटा...कुछ काम था क्या..??

मैं- जी आंटी ..कुछ बात करनी थी आपसे ...

शबनम- हाँ बोलो ना...

मैं- एक मिनिट...

और मैने रूम को अंदर से लॉक कर दिया...जिससे शबनम फिर से चौंक गई...

शबनम- ये...ये गेट क्यो लॉक किया...

मैं- बात ही कुछ ऐसी है आंटी...कुछ प्राइवेट...

शबनम- प्राइवेट....???...ऐसी क्या बात करना है तुम्हे....वो भी मुझसे...

मैं- आंटी..बात ही कुछ ऐसी है कि मैं नही चाहता कि कोई भी ये बात सुने...और आप भी नही चाहेगी...

शबनम- अच्छा....बताओ तो...ऐसी क्या बात है...जो मैं भी सबसे छुपाना चाहुगी...

मैं शबनम के साथ बेड पर बैठ गया.....

शबनम- अब बताओ..

मैं- आंटी...ये बात आपकी अय्यशि के बारे मे है...

शबनम- क्या...क्या कहा तुमने....???

मैं- वही जो आपने सुना...आपकी अय्याशी...

शबनम(गुस्से मे)- क्या बकवास कर रहा है...होश मे तो है..

मैं- हाँ...पूरे होश मे हूँ...होश तो आपने खो दिया..जो इतने नीचे गिर गई...

शबनम(पूरे गुस्से मे)- क्या बक रहा है....मैं नीचे गिर गई....तू बोल भी कैसे सकता है ऐसा...

मैं- जो सच है वही बोल रहा हूँ...

शबनम- सॉफ-सॉफ बोल...क्या कहना चाहता है...

मैं- वही आंटी..जो आप कर रही है...किसी बाहरी इंसान के साथ सेक्स कर के...

सत्ताअक्ककक....इतना बोलते ही सबमम ने मेरे गाल पर थप्पड़ जड़ दिया....

मैं चाहता तो अभी उसकी माँ चोद देता...पर अकरम की मोम है...यही सोच कर अपने गुस्से को काबू कर लिया...

शबनम(चिल्लाते हुए)- क्या कहा तूने....तुझे ये बोलते हुए शर्म भी नही आई...तुझे

मैं- शर्म तो आप को आनी चाहिए....ग़लत आपने किया...और आप मुझे...

मेरी बात सुनते ही शबनम ने फिर से मुझे मारने हाथ उठाया...पर इस बार मैं थप्पड़ खाने के मूड मे नही था...और मैने शबनम का हाथ पकड़ लिया...

शबनम- मेरा हाथ छोड़...मैं बताती हूँ तुझे...अभी सबको बोलती हूँ कि तू क्या बक रहा है...

मैं- सुनो आंटी...अकरम की मोम हो इसलिए चुप हूँ...वरना...

शबनम(बीच मे)- वरना...वरना क्या करेगा...

मैं- मैं कुछ नही करूगा...आपके बच्चे ही आपकी बॅंड बजा देगे....

शबनम(हँसती हुई)- मेरे बच्चे...और वो मेरे खिलाफ जायगे...कैसे...

मैं(शबनम का हाथ छोड़ कर)- वो ऐसे कि जब उन्हे पता चलेगा कि उनकी माँ किसी दूसरे का बिस्तर गरम करती है..तो सोचो...वो क्या करेंगे...हाँ..

शबनम- बस...बहुत बोल लिया तूने...और मैं सुन भी लिया...अब मैं बताती हूँ सबको कि तू कितनी घटिया बाते कर रहा है मुझसे...

शबनम उठ कर गेट की तरफ जाने लगी...तभी मैने तालियाँ बजाना शुरू कर दिया ...

मैं(तालियाँ बजाते हुए)- वाह...हरक़ते रंडियों जैसी और बाते ऐसी...वाह..

शबनम(गुस्से से लाल हो कर)- क्या बोला...मुझे रंडी बोला....तेरी हिम्मत कैसे हुई ..रुक अब तो तू गया ...समझा...

शबनम गेट खोलने गई पर उसके पहले ही मैने लास्ट तीर मार दिया...

मैं- हाँ..बताओ सबको कि सरद की रंडी कैसे बनी...हाहाहा....

सरद का नाम सुनते ही शबनम के हाथ रुक गये और चेहरे का रंग उड़ गया...

मैं- क्या हुआ....अपने मालिक का नाम सुनते ही झटका लगा क्या...ओह हो...

शबनम ने गेट छोड़ा और पलट के मुझे देखने लगी...उनकी आँखो मे गुस्सा भी था और डर भी...

शबनम- सरद ...ये सरद कहाँ से आ गया...

मैं- ओह..मेरी प्यारी आंटी...भूल गई क्या...

शबनम- क्क्क..क्या मतलब...???

मैं- वाह...बिस्तेर पर तो उसका लंड खाती हो और नाम सुन कर बोल रही हो कि सरद का क्या...ह्म्म्मट

शबनम- तुम बकवास बंद करो और जाओ यहाँ से...और आइन्दा मुझसे बात भी मत करना ..

मैं- चुप...तेरे जैसी औरत से मैं क्यो बात करूँ...वो तो तू मेरे दोस्त की माँ है इसलिए इतने अच्छे से बात कर रहा था...समझी...वरना...

शबनम- वरना...वरना क्या...कहना क्या चाहता है...

मैं- वरना तेरे जैसी रंडियों को अपन अपने लंड पर नचाते है..समझी..

शबनम(पूरे गुस्से मे चिल्ला कर)- बस..बस कर...एक बार और मुझे ग़लत कहा तो जान से मार दूँगी...

मैं(बेड से उठ कर)- हाँ..मार देना...पर एक बार ये देख ले...फिर सब समझ जायगी...

मैने मोबाइल मे वीडियो प्ले करके शबनम को पकड़ा दिया...

मैं- ले देख इसे...और बुला सबको....फिर सबको पता चलेगा कि तू क्या चीज़ है....

( ये वही वीडियो था जिसमे शबनम, मोहिनी और सरद के साथ सेक्स कर रही थी..)

जैसे ही शबनम ने वीडियो देखना शुरू किया तो उसका गुस्सा आँसू बन कर निकलने लगा और आँखो मे सिर्फ़ डर दिखाई देने लगा......

शबनम पूरी तरह मूरत बन कर आंशु बहा रही थी और उसका चेहरा पीला पड़ने लगा था...

थोड़ी देर मे ही शबनम ने मोबाइल बेड पर फेक दिया और वही ज़मीन पर बैठ कर रोने लगी...

मैं- अब आपको रोना आ रहा है...करते वक़्त कुछ नही सोचा...

 


शबनम(बस सुबक्ती रही)

मैं- अब कहाँ गई ज़बान...बोलो...बुलाओ सबको...और बता दो कि मैं कितना घटिया हूँ...

शबनम- मैं...मैं....(और रोने लगी)

मैं- अब रोने से क्या फ़ायदा....अब तो सब कर ही लिया है...है ना...

शबनम(थोड़ा हिम्मत कर के)- बेटा..मैं..वो...माफ़ कर दे...

मैं- माफ़...मैं क्यो माफ़ करूँ..और मैं होता कौन हूँ माफ़ करने वाला...

शबनम(रोते हुए)- सोररय्यी...ब्ब्बेटा...

मैं- सॉरी ...वाह...कभी सोचा है कि यदि ये बात अकरम या आपकी बेटियों को पता चली तो क्या होगा...हाँ...

शबनम- मैं बहक गई थी.....सूओरररयी....

मैं- मुझे सॉरी मत बोलो...यहाँ बैठ कर सोचो कि क्या सही किया और क्या ग़लत...मैं चलता हूँ...

और मैं अपना फ़ोन उठा कर शबनम को रोता हुआ छोड़कर निकल आया....

मुझे शबनम से बहुत सी बात करनी थी...बट इस टाइम सोचा कि उन्हे रो कर पछ्ता लेने दो...फिर बात करूगा....

और मैं अपने रूम की तरफ निकल गया...

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यहाँ सहर मे सोनू(सुषमा का बेटा) अपनी कार को रजनी आंटी के घर के बाहर रोकता है...

गेट खोलते ही उसे रजनी सामने दिखती है....

सोनू- आंटी...मुझे आपसे से बहुत ज़रूरी काम है...

रजनी देखती है कि सोनू काफ़ी घबराया हुआ है...इसलिए वो सोनू का हाथ पकड़ कर उसे सोफे तक ले जा कर बैठा देती है...

रजनी- पहले तू बैठ और साँस ले ले...कितना घबराया हुआ है...बैठ...

सोनू- आंटी...मुझे बहुत ज़रूरी काम है आपसे....

रजनी- हाँ ...पहले पानी पी ले...फिर आराम से बोल...

सोनू ने पानी पिया और थोड़ा सा नॉर्मल हुआ....

रजनी- हाँ..अब आराम से बता ...तू इतना परेसान क्यो है...??

सोनू- वो...आक्च्युयली आंटी..मैं अंकित को ढूँढ रहा हूँ...उसका कुछ पता नही चल रहा...

रजनी- अरे...तू कॉल कर ले उसे...

सोनू- वो आंटी...मैने किया था बट लग नही रहा है...

( यहाँ आपको बता दूं कि सोनू खुद अंकित को कॉल कर सकता था...पर उसे वहाँ पहुचना था जहाँ अंकित है और वो नही चाहता था कि उसके आने की बात अंकित को पता चले )

रजनी- ओह्ह..शायद नेटवर्क प्राब्लम होगी...तू टेन्षन मत ले...

सोनू- हाँ शायद...इसी लिए आपके पास आया....

रजनी- मेरे पास ..मतलब..???

सोनू- वो..मुझे पता चला कि संजू और पूनम दी भी अंकित के साथ गये है ..है ना...

रजनी- हाँ..गये है...वो सब अकरम की फॅमिली के साथ गये है...

सोनू- इसलिए...आप संजू या पूनम को कॉल कर के पूछो ना कि वो कहाँ है...

रजनी- ठीक है बेटा...पूछ लेती हूँ...तू बैठ मैं चाइ ले आती हूँ...और कॉल भी कर लेती हूँ....

रजनी किचन मे निकल गई...

सोनू(मन मे)- जितनी जल्दी पता चल जाए उतना ही अच्छा...और मैं भी वही पहुच जाउ...पर पता नही वहाँ मुझे क्यो पहुचा रही है वो...

थोड़ी देर मे रजनी चाइ- नाश्ता ले कर आ गई...

सोनू- पता लगा आंटी...??

रजनी- हाँ...वो इस समय **** गाओं के पास है....अकरम का कोई फार्म हाउस है वहाँ...

सोनू- ओके..थॅंक्स आंटी..मैं चलता हूँ...

रजनी- पर बेटा ये चाइईईईई...

रजनी कुछ कह पाती उसके पहले ही सोनू घर से निकला और कार से निकल गया.....

रजनी(मान मे)- ये सोनू को क्या हुआ...किस बात की जल्दी है इसे...और हाँ...

तभी रजनी को कुछ याद आया और उसे झटका लगा......

रजनी(मन मे)- हे भगवान....ये अकरम के डॅड अंकित को उस गाओं क्यो ले गये....अगर अंकित को कुछ पता चल गया कि उस गाओं मे क्या है तब तो उसे सब कुछ पता चलने मे कोई देर नही लगेगी....

 


अब तो यही उम्मीद करती हूँ को अंकित को उस गाओं का या उस गाओं से जुड़ी किसी बात का कुछ भी पता ना चले....

रजनी आंटी परेसान हो कर अपने रूम मे घूम रही थी और बार-बार अपना फ़ोन भी चेक कर रही थी...

वो खुद ही नही समझ पा रही थी कि वो किस बात से ज़्यादा परेसान है...

इस बात से कि कही अंकित को उस गाओं से कुछ पता ना चल जाय...या फिर इस बात से की अगर अंकित को सच पता चला तो अंकित की हालत क्या होगी...

( हालाकी रजनी आंटी इस बात से पूरी तरह अंजान थी कि अंकित के पास एक डाइयरी है...जिससे उसे काफ़ी कुछ पता चल गया है....)

तभी रजनी आंटी का फ़ोन बज उठा और कॉल अटेंड करते ही रजनी आंटी सामने वाले पर भड़क उठी....ये विनोद का कॉल था.....

( कॉल पर)

रजनी- कहाँ मर गये थे तुम...

विनोद- क्या...इतनी गुस्सा ....क्या हुआ..???

रजनी- ये बता कि तुझे पता है कि अंकित कहाँ पर है अभी...

विनोद- नही...पर तुम्हे तो पता होगा ना...

रजनी- हाँ...तभी तुम्हे कॉल किया...

विनोद- पर मुझसे क्या मतलब...वो घूम रहा होगा...

रजनी- देख...मैं जानती हूँ...कि तू और बॉस दोनो ही उस पर नज़र रखे हुए हो...तो तुम्हे तो पता होगा ही...

विनोद- क्या बके जा रही हो..काम की बात करो...

रजनी(गुस्से मे)- तो काम की बात सुन और तेरे बॉस को भी बता देना...

विनोद(बीच मे)- हाँ...बता दूँगा...जल्दी बोलो...

रजनी- तो सुन...अपने बॉस को एक बात समझा देना कि अगर अंकित को खरॉच भी आई तो मैं किसी को नही छोड़ूँगी...

विनोद- ये...तुझे क्या हो गया...हमारा मक़सद एक ही है..और तुम ऐसी बात कर रही हो...

रजनी- मेरा मक़सद सिर्फ़ आकाश की बर्बादी है.....

विनोद- तो अंकित भी उसी की पैदाइश है...

रजनी(बीच मे...चिल्लाते हुए)- मुझे कुछ नही सुनना...बस याद रखना...अंकित को कुछ भी हुआ तो तुम सब मरोगे...और ये बात अपने बॉस को भी बोल देना...बाइ...

रजनी ने अपनी बात सॉफ-सॉफ कह कर फ़ोन कट कर दिया....

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यहाँ एक गाओं मे वसीम और सरद कार से जा रहे है....

कार ड्राइव करते हुए वसीम आजू-बाजू देख रहा था....

आजू-बाजू तो सरद भी देख रहा था...लेकिन वसीम और सरद के देखने मे ज़मीन-आसमान का अंतर था ...

सरद ऐसे देख रहा था जैसे कि उसके लिए ये एक नई जगह थी....

जबकि वसीम के देखने मे एक अपनापन था...जैसे कि वो बरसो से इस जगह को जानता हो....

थोड़ी देर बाद कार एक बड़ी सी हवेली के सामने रुक जाती है....

सरद- वसीम...यहाँ क्यो रुक गये....???

वसीम ने कुछ नही बोला बस एक नज़र सरद को देखा और गाते खोल कर नीचे उतर आया....

 


सरद भी जल्दी से कार से बाहर आ गया....

सरद- क्या हुआ भाई..बता तो सही ...

वसीम फिर से कुछ नही बोला बस कार से दूर जाकर हवेली के सामने खड़ा हो गया और एक टक लगा कर हवेली देखने लगा.....

सरद(थोड़ा सीरीयस हो कर)- क्या हुआ भाई....ऐसे क्या देख रहा है इस पुरानी हवेली को....

वसीम( चुप-चाप हवेली देखता रहा)

सरद वसीम के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर थोड़ी तेज आवाज़ मे बोला...

सरद- वसीम...

वसीम- हाँ...हाँ क्या हुआ...

सरद- मुझे कुछ नही हुआ...पर तुझे क्या हो गया....

वसीम- कुछ नही यार...बस इस हवेली को देख रहा था....

सरद- क्यो...मतलब ऐसा क्या है इस हवेली मे...कुछ खास ???

वसीम- कुछ खास नही...बहुत खास है ये हवेली ..

सरद- ऐसा क्या है इसमे...

वसीम- इसमे...इसमे वो आग है...जिसे देख कर मेरे सीने मे आग भड़क जाती है....

सरद- मतलब...सॉफ-सॉफ बोलोगे....

वसीम- बस ...यही समझ ले कि मेरा अतीत इस हवेली से खास ताल्लुक रखता है....

सरद- मैं अभी भी नही समझा...

वसीम(सरद को देख कर मुस्कुराता है )- तू दिमाग़ पर ज़ोर मत दे...टाइम आने पर सब समझ जायगा..ओके...अब चल...

सरद- ह्म्म..अब कहाँ चलना है...

वसीम- मेरे अतीत का एक और सबसे खास पन्ना दिखाता हूँ...

और वसीम , सरद के साथ कार ले कर आगे निकल गया....

थोड़ी देर बाद वसीम ने फिर से कार रोक दी और सरद के साथ एक बड़े से पुराने घर के सामने खड़ा हो गया .....

सरद- ह्म्म..अब यहाँ क्या है...इस पुराने से घर मे...

वसीम- यहाँ...बहुत कुछ है...

वसीम का ऐसा जवाब सुनकर सरद वसीम को अजीब नज़रों से देखने लगा...

वसीम उस घर को देखते हुए भावुक होने लगा और उसकी पलके नम होने लगी...

वसीम अपनी आँखो मे आसू भरे उस घर को देखे जा रहा था...जबकि सरद इस बात से अंजान आस-पास देखता रहा...

थोड़ी देर बाद जब वसीम की तरफ से कोई हलचल नही हुई तो सरद फिर से बोला...

सरद- देख लिया हो तो चले...हाँ

तभी वसीम ने सरद को देखा और उसकी आँखो मे आसू देख कर सरद चौंक गया....

सरद- तुम..तुम रो रहे हो...

वसीम अपनी पलके सॉफ करते हुए अपने आँसू को छिपा कर बोला....

वसीम(झूठी मुस्कान के साथ)- अरे नही यार...ये तो...ये यहा डस्ट बहुत उड़ रही है...और फिर धूप भी तेज है...इसलिए आँख से पानी आ गया...चल..चलते है...

सरद- ओह्ह...वैसे इस घर को क्यो देख रहा था..किसका घर है ये...

वसीम- पता नही...बस ऐसे ही मन किया तो देखने लगा...चल...चलते है...

सरद- अच्छा...तुम कही कुछ छिपा तो नही रहे....

वसीम(मुस्कुरा कर)- साले ..तुझसे छिपाउँगा...हाँ...तू तो मेरा सबसे बड़ा राज जानता है...फिर भी ऐसा सोचता है...

सरद(मुस्कुरा कर)- अरे नही भाई...ऐसे ही बोल दिया...चल...

तभी वसीम का फ़ोन बज उठा....

(कॉल पर)

वसीम- हाँ बोलो...वो मान गया...

सामने- हाँ....जल्दी ही काम कर देगा...

वसीम- ह्म्म..गुड जॉब...

और फ़ोन कट कर के वसीम और सरद गाओं मे घूमने लगते है....

वसीम(मन मे)- अब वक़्त आ गया है अपने प्यारे दुश्मन को एक झटका देने का....

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यहाँ मैं शबनम से बात कर के अपने रूम मे जा रहा था तो मुझे जूही की याद आई.....

थोड़ी देर पहले ही मैने उसके साथ घूमने को मना कर दिया था ..जिससे वो हर्ट हो गई थी...

मेरे पास कोई काम तो था नही तो सोचा कि चलो जूही को मना लेते है....

यही सोच कर मैं जूही के रूम पर गया और नॉक किया.....

मैं- हे जूही...ओपन दा डोर...

जूही- ( चुप रही)

मैं- अरे यार...प्लीज़ ओपन दा डोर....प्लज़्ज़्ज़

जूही(सुबक्ते हुए)- नही...जाओ यहाँ से....

मैं(मन मे)- ये तो रो रही है.....

मैं- प्लीज़..मेरी बात तो सुन लो..एक बार..प्लीज़...

जूही- बोला ना...जाओ यहाँ से...मुझे कोई बात नही करनी...

मैं- आइ म सॉरी यार...प्लीज़ गेट खोलो...बात करते है ना...

जूही(गुस्से मे)- एक बार का समझ मे नही आता...जाओ यहाँ से....

मैं- देखो...मुझे भी गुस्सा आता है..और तुमसे कहीं ज़्यादा ..समझी..

जूही- तो..तो क्या लोगे..नही खोलती गेट...जो करना है कर लो..

मैं- ओके..फाइन...मत खोलो...और आज के बाद मैं आउन्गा भी नही तेरे पास...बब्यए...

और मैं गुस्से मे वहाँ से जाने लगा...

मैं गुस्सा शांत करने के लिए अपने रूम मे ना जा कर सीधा बाहर गार्डेन मे आ गया...

इधर जब जूही को मेरी आवाज़ नही आई तो वो समझ गई कि मैं गुस्सा हो गया...

जूही ने जल्दी से गेट खोला पर मुझे वहाँ ना पा कर मुझे ढूढ़ने लगी...

थोड़ी देर बाद जूही मेरे पास गार्डेन मे पहुच गई...जहाँ मैं घास पर आँखे बंद किए लेटा था...

मुझे भी किसी के कदमो की आहट मिली पर फिर भी मैं आँखे बंद करके लेटा रहा...

जूही मेरे पास खड़ी हो कर मुझे देखती रही...पर जब मैने कोई हलचल नही कि तो वो खुद ही बोल पड़ी....

जूही- इतनी गुस्सा जनाब...ह्म्म्म ..

फिर मैने आँखे खोली और ऐसा दिखाया कि जैसे मुझे अभी-अभी उसके आने का पता चला....पर मैं मुँह से कुछ नही बोला...बस उठ कर बैठ गया...

जूही- अब क्या बोलॉगे भी नही...

मैने कोई जवाब नही दिया..तो जूही मेरे बाजू मे बैठ गई...

जूही- अब कुछ बोलॉगे...

मैं- क्यो आई यहा..

जूही- तुमसे मिलने...बात करने...

मैं- जाओ यहाँ से ..मुझे कोई इंटरेस्ट नही...

जूही- अच्छा जी...तो रूम मे क्यो आए थे....

मैं- वो तो बस...यू ही...

जूही- ह्म्म..मेरी फ़िक्र है ना तुम्हे...

मैं- फ़िक्र..तुम्हारी...मैं क्यो करूँ...हहा....

जूही- अच्छा...तो क्यो आए थे...यही देखने ना कि मैं गुस्सा हूँ कि नही...

मैं- मुझे क्या करना...तुम गुस्सा हो या ना हो....

जूही- अरे वाह जनाब..आप तो बड़े चालू है...हमारी फ़िक्र भी करते है और फिर छुपाते भी है....

मैं- हाहाहा...ऐसा कुछ नही...समझी...

और मैं जाने के लिए उठने लगा....तभी जूही ने मेरा हाथ पकड़ लिया....

जूही- रूको ना...मेरी बात तो सुनो...आइ म सॉरी...

मैं- हाथ छोड़ो...मुझे जाना है...

जूही- सॉरी बाबा...देखो मैं अपने कान पकड़ती हूँ....

मैने देखा कि जूही ने अपने हाथो से कान पकड़े हुए है और सॉरी बोल रही है...

इस वक़्त जूही बहुत क्यूट लग रही थी...एक दम प्यारी लड़की...

जूही की मासूमियत देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गई और मैं वापिस बैठ गया....

मैं- अब कान छोड़ो..मैं मान गया....ह्म्म्म.

जूही- तो अब तुम मुझे मनाओ....

मैं- किस बात के लिए....

जूही- मुझे गुस्सा दिलाया...मुझे रुलाया...इसलिए....

मैं- अच्छा जी...तो तुम चाहती हो कि मैं तुम्हे मनाऊ...

जूही- बिल्कुल...

मैं- पर लड़की को मनाने का मेरा तरीका ज़रा हट के है...

और मैने जूही की आँखो मे देखने लगा...जूही भी मेरी आँखो मे देखते हुए बोली....

जूही- तो दिखाओ ना...क्या तरीका है तुम्हारा...

मैं(आँखो मे देखते हुए)- तुम गुस्सा तो नही करोगी...

जूही- उम उम..

मैने जूही के दोनो हाथो को आवने हाथो से पकड़ा तो वो सिहर उठी ..

फिर मैं जूही की आँखो मे देखते हुए अपना चेहरा उसके चेहरे के पास ले गया....

हमारे होंठ अब थोड़ी सी दूरी पर थे...जूही थोड़ी-2 काँपने लगी थी...पर लगातार मेरी आँखो मे देखती रही...

मैं धीरे-2 अपने होंठ जूही के होंठो के पास ले गया...

जूही के दिल की धड़कने तेज होने लगी थी और उसकी बॉडी काँपने लगी थी...

मैं- मना लूँ तुम्हे...

जूही- ह्म्म्म ..

और जूही ने अपने होंठ खोल दिए...उसके होंठ मेरे होंठो का स्वागत करने के लिए बेताब हो रहे थे....

जूही तेज-तेज आहें भरने लगी और मैने अपने होंठ उसके होंठो के बिल्कुल पास ले गया...

फिर मैने उसके गाल पर किस करके सॉरी बोल दिया....

मैं- सॉरी...अभी इसका टाइम नही आया...जल्दी ही आएगा...

और मैं जूही को छोड़ कर खड़ा हो गया....

जूही मेरी हरक़त से शॉक्ड हो गई थी...पर मेरी बात सुनकर वो शरमा गई...

मैं खड़ा हुआ और बोला ...

मैं- तुम अंदर जाओ...मैं थोड़ा घूम कर आता हूँ...और हाँ...जो आज नही हुआ...वो जल्दी ही होगा....

और मैने जूही को देख कर मुस्कुराता हुआ निकल गया...और जूही भी मुस्कुराती हुई बैठी रही....

फिर मैने सोचा की चलो थोड़ा घूम लेते है...संजू और पूनम भी मिल जाए शायद...

यही सोच कर मैं खेतो की तरफ गया...

 
थोड़ी दूर जाते ही मुझे संजू और पूनम दिख गये...

वो दोनो बीच खेत मे रासलीला कर रहे थे...

संजू , पूनम को खुले खेत मे नंगा कर के और कुतिया बना के चोद रहा था....

ये देख कर मुझे बहुत गुस्सा आया...गुस्सा इस बात का नही था कि वो सेक्स कर रहे थे...क्योकि ये तो मुझे पता था....

गुस्सा इस बात का था कि सेक्स के नशे मे ये दोनो इतने पागल हो गये कि खुले मे सेक्स कर रहे है....

भले ही ये आपस मे चुदाई करते है...बट है तो भाई-बेहन...फिर भी ऐसे खुले मे...कुछ तो शर्म करते...

मैं(मन मे)- अब तक सोचता था कि ऐश करने दो...पर इन्हे देख कर लगता है कि इन्हे सबक सिखाना ही पड़ेगा...तभी साले लाइन पर आएँगे....

मैं गुस्से मे उन्हे वही सेक्स करता छोड कर आगे निकल आया और थोड़ा घूम कर वापिस अपने रूम मे आ गया...

रूम मे आते ही मैने एक पेग बनाया और पेग पीते हुए संजू और पूनम के उपेर का गुस्सा शांत करने लगा...

फिर मैने जूही के साथ हुए इन्सिडेंट के बारे मे सोच कर मुस्कुराने लगा....

मैं(मन मे)- कितनी प्यारी लग रही थी..जब वो सॉरी बोल रही थी..बेहद ही मासूम...और उसके होंठ....

तभी मेन गेट पर..जो की खुला हुआ था ..किसी ने नॉक की और आवाज़ आई...

""अंकित...आइ थिंक, वी नीड टू टॉक""

आवाज़ सुनते ही मैने गेट की तरफ देखा तो सामने शादिया खड़ी हुई थी....

मैने अपना पेग साइड मे रखा और खड़े हो कर उसके पास पहुचा...

मैं- आप यहाँ...वाह...बड़ी देर मे याद आई...हाँ...

शादिया- तुम ये बताओ कि अभी फ्री हो...मुझे बात करनी है...

मैं- ह्म्म...फ्री हूँ...और ना भी होता तो आपके लिए टाइम निकाल ही लेता...पर आपने मेरे सवाल का जवाब नही दिया...

शादिया- कौन सा सवाल...???

मैं- यही कि इतने दिन बाद कैसे याद आई...

शादिया- याद तो था और मन भी था...बस सही टाइम का इंतज़ार कर रही थी...

मैं- ओह्ह..तो आज सही टाइम मिल गया..हा...

शादिया- ह्म्म..तो अब बात करे...अगर तुम्हारे सारे सवालो के जवाब मिल गये हो तो...

मैं- ओह हाँ...क्यो नही...आइए ....अंदर आइए....

शादिया-नही ..यहा नही...

मैं- तो फिर...??

शादिया- तुम मेरे रूम मे आओ...

मैं- ह्म्म..ठीक है..आप चलो...मैं आता हूँ...

शादिया चली गई और मैं सोचने लगा कि आख़िर इसे बात क्या करनी है...

ज़रूर यही पूछेगी कि मैं पार्लर मे क्या कर रहा था...ह्म्म...कोई कहानी बनानी पड़ेगी...

वेल हो सकता है..साली चुदाई के मूड मे हो...उस दिन तो खुश हो गई थी...हो सकता है...

चलो देखते है..शादिया बेगम क्या बोलती है...और हाँ..उनसे ये भी पता करना है कि वो अकरम के डॅड के साथ क्यो सोती है...

यही सब सोच कर मैने अपना एक पेग ख़त्म किया और शादिया के रूम मे निकल गया.....

शादिया रूम मे मेरा ही वेट कर रही थी....

मैं रूम मे एंटर हुआ तो शादिया ने गेट लॉक करने को बोला....

गेट लॉक कर के हम आमने सामने बैठ गये....

शादिया- तो..ये बताओ क्या पीओगे....

मैं(मुस्कुरा कर)- जो भी आप पिला दे...

शादिया(मुस्कुरा कर)- वर्ट स्मार्ट...पर मैं ड्रिंक की बात कर रही हूँ...क्या पीओगे..स्कॉच या विस्की ..

मैं- अभी तो...ह्म्म..विस्की....

शादिया ने पेग बनाए और हमने जाम टकरा कर बाते शुरू की...

मैं- तो..कैसे याद किया मुझे...

शादिया- तुम जानते हो...

मैं- ओह्ह..तो उस दिन की बात के लिए...

शादिया- ह्म्म्म...बिल्कुल...

मैं- देखो..मेरा फंडा है...रात गई ..बात गई...उस दिन जो भी हुआ वो दोनो की मर्ज़ी से हुआ...सो फर्गेट इट..ओके..

शादिया- नही...ना तुम भूलने वाले हो और ना तुम्हारा हथियार...हहहे...

मैं- ओह्ह..अभी तक याद है...

शादिया- ह्म्म..है ही ऐसा...क्या करे....

मैं- तो इसके लिए हमे याद किया...??

शादिया- नही...कुछ और ही सवाल है...

मैं- तो पूछो फिर...

शादिया- तो बताओ...तुम वहाँ क्या कर रहे थे...

मैं- जॉब..और क्या...

शादिया- अंकित ..जो एक करोड़पति का इकलौता बेटा है...वो एक मसाज पार्लीर मे मसाज देने की जॉब करेगा...सॉरी डियर...ये बात हजम नही होती...अब सच बोलो...

मैं(मुस्कुराते हुए)- नाइस वन...वेल सच सिर्फ़ इतना है कि मैं वहाँ अपने फरन्ड के साथ गया था...फिर आपको देखा तो आपकी बॉडी पसंद आ गई...फिर पैसे देकर आपका मसाज करने पहुच गया...बाकी क्या हुआ...ये तो आप जानती ही है...है ना...

शादिया- ह्म्म्मु...तो मैं इतनी पसंद आ गई कि तुम मसाज देने आ गये...

मैं- ह्म्म..आपकी बॉडी ही ऐसी है...कसी हुई...और भरी हुई...जो मुझे पसंद है...

शादिया- ह्म्म..तो तुमने मुझसे बात क्यो नही की ..बाद मे..जब हम मिले थे...

मैं- ह्म्म..वो इसलिए ..क्योकि मैं नही चाहता था कि आप मुझे ग़लत समझे...और ये सोचे कि मैं आपका फ़ायदा उठाने आ गया...क्योकि मैं किसी औरत का फ़ायदा उठाना पसंद नही करता....समझी अब

शादिया- ह्म्म्मु...तुम स्मार्ट भी हो और काफ़ी अच्छे भी...

मैं- हो सकता है...पर आप क्या है..स्मार्ट ..अच्छी या धोखेबाज...

शादिया(चौंक कर)- क्या...धोखेबाज...मैने किसे धोखा दिया..???

मैं- आप जानती है कि रोज रात को आप किसे धोखा देती है..

शादिया(सकपका कर)- क्या...धोखा...किसे...??

मैं- अब मेरे मुँह से सुनना है तो बता ही देता हूँ....वो है...शबनम आंटी...

शादिया- शबनम ...मैं उसे धोखा कैसे दे सकती हूँ...

मैं- उसके पति की बाहों मे सो कर...

शादिया(गुस्से से)- व्हाट...क्या बक रहे हो...

मैं- बक नही रहा...सच बता रहा हूँ...मुझे सब पता है...

शादिया- क्या पता है...

मैं- यही कि तुम वसीम अंकल का बिस्तर गरम करती हो...

शादिया- ये झूट है ..तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो...मैं अपनी बेहन के साथ....

मैं(बीच मे)- हाँ हाँ..तुम अपनी बेहन को धोखा दे रही हो...मैने अपनी आँखो से देखा...जिस रात हम यहाँ आए थे...उसी रात को...याद आया...

 


शादिया मेरी बात सुनकर भोचक्की रह गई...उसे समझ मे नही आ रहा था कि मुझे ये सब कैसे पता...

मैं- अब बोलो...मैं झूठ बोल रहा हूँ...???

शादिया- वो..वो...मैं तो..

मैं(बीच मे)- बस...सच मुझे पता है...ओके...तुम भी सच बोल ही दो...

शादिया(झल्ला कर)- हां हाँ...मैं सोती हूँ वसीम के साथ...पर क्या करू ...मजबूर हूँ...

मैं- कैसी मजबूरी है तुम्हारी...??

शादिया- एक औरत के जिस्म की आग उसे पागल कर देती है...बस फिर अच्छे-बुरे की समझ खो जाती है...

मैं- तो इस आग को किसी और से बुझा लेती...अपनी बेहन के घर डाका क्यो डाला...

शादिया- मेरे सोहर ने मुझे किसी और के लिए छोड़ दिया था...तब वसीम ने मुझे सहारा दिया...फिर उसके लिए मेरे दिल मे प्यार जाग गया और...ये सब..

मैं- वाह...प्यार...ये प्यार नही हवस है...आपने सिर्फ़ अपने जिस्म की आग बुझाई...और कुछ नही..

शादिया- हाँ..भुझाई...मैं क्या करती...ये आग ही ऐसी है...

मैं- बकवास...आपने अपनी बेहन का सोचा..कि उसे भी आग लगती होगी...

शादिया- मतलब...उसका सोहर है ना ..

मैं- हाँ..पर वो तो तुम्हारे साथ रहता था..तो वो क्या करती..

शादिया- तुम कहना क्या चाहते हो...

मैं- यही कि उसने भी इंतज़ाम कर लिया अपनी आग बुझाने का...

शादिया(मुँह फाड़ कर)- क्या...शबनम ने...नही..वो ऐसा नही कर सकती...

मैं- क्यो नही...

शादिया- उसे अपने पति और बच्चो का सोचना चाहिए...और वो तो बड़ी सीधी है...नही-नही...

मैं- सीधी है तो क्या...औरत तो है...और उसके जिस्म मे भी आग लगती है...

शादिया- पर वो ऐसा सोच भी कैसे सकती है...और क्यो...???

मैं- क्यो का जवाब आप हो...जब पति उसे देखता भी नही तो वो क्या करेगी...

शादिया- मतलब..मेरी वजह से...

मैं- हाँ..आपकी वजह से..और ऐसा ही रहा तो आपकी वजह से पूरा परिवार बिखर जायगा ...वो परिवार जिसने आपको प्यार, सम्मान सब कुछ दिया....

मेरी बात सुनकर शादिया फुट-फुट कर रोने लगी...और मैं उसे रोता देख कर अपना पेग पीने लगा....

थोड़ी देर रोने के बाद शादिया शांत हुई और बोली...

शादिया- मैं कभी इस पावर को बिखरने नही दूगी...

मैं- ह्म्म..तो क्या करेगी अब...???

शादिया- मैं जानती हूँ मुझे क्या करना है....

मैं- फिर भी...क्या...???

शादिया- सबसे पहले वसीम को अपने से दूर करना है...और अपनी बेहन से बात कर के माफी मागनी है...और उसे समझना भी है कि वो ऐसा कोई काम ना करे जो ग़लत हो...

मैं- आप सिर्फ़ वसीम से दूर हो जाओ...बाकी काम मैने लगभग कर दिया है..और हाँ...इस बारे मे शबनम आंटी को कुछ मत कहना...ओके

शादिया- तुमने....तुम्हे पता है शादिया के बारे मे...

मैं- ह्म्म..अब ये छोड़ो.....और याद रखना...सब ठीक है अब...इसलिए शबनम से बात भी मत करना इस बारे मे...

शादिया- ह्म्म..पर तुमने ये सब क्यो...???

मैं(बीच मे) - ये मेरे दोस्त की फॅमिली है...इसलिए...

शादिया- अकरम को सच मे बहुत अच्छा दोस्त मिला...सच मे वो लकी है...

मैं- लकी तो मैं भी हूँ...उस जैसा दोस्त जो मिला....वेल अब क्या इरादा है...

शादिया- तुम बताओ...

मैं- आपके सुधरने की खुशी मे पार्टी हो जाए...

शादिया- ह्म्म..लाओ..पेग बनाती हूँ...

शादिया पेग बनाने लगी और मैं सोचने लगा कि...चलो, शादिया तो लाइन पर आ गई...इसने जो कहा वो करे तो सब ठीक...वरना इसे अपने तरीके से लाइन पर लगाउन्गा....

और फिर हम ड्रिंक करते हुए बाते करने लगे.......

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यहाँ सहर मे सोनू अपने घर पहुच कर अंकित के पास आने की तैयारी करने लगा....

तभी उसके घर वो लेडी पहुच गई...जिसने सोनू को अंकित के पास जाने का बोला था.....

सोनू- तुम...तुम यहाँ..

लेडी- ह्म्म...क्या करूँ...आना ही पड़ा...काम जो है...

सोनू- काम...जा तो रहा हूँ...अब क्या है...

लेडी- काम ये है कि तुम्हे अंकित के पास जाने से रोकू...

सोनू- मतलब...??

लेडी- मतलब ये की अब तुम अंकित के पास नही जा रहे हो...

सोनू(गुस्से मे हाथ मे लिया हुआ सामान फेक कर)- क्या बकवास है...तुमने मुझे समझ क्या रखा है....कभी ये करो..कभी वो करो...ये लगा क्या रखा है...

लेडी- मैं क्या करूँ...उपेर से ऑर्डर है...

सोनू- भाड़ मे गया ऑर्डर..कौन है ये ऑर्डर देने वाला...बताओ मुझे...मैं खुद बात करता हूँ उससे...

लेडी(थोड़ा गुस्से मे)- ओये...शांत हो जा...ज़्यादा मत उछल...वरना...

सोनू(गुस्से मे)- क्या..क्या कर लोगि तुम..

लेडी- चुप...भूल मत हमारे पास तेरी खास कमज़ोरी है...तूने मुँह चलाया तो ...हहहे...

सोनू(डर कर)- नही...ऐसा कुछ मत करना...बोलो क्या करना है..

लेडी- अब आया ना लाइन पर....

सोनू- अब जल्दी बोलो..ताकि मैं जल्दी से काम पूरा कर दूं...

लेडी- ह्म्म..अब ये अड्रेस ले...यहाँ जाना है तुम्हे...और हाँ ये ब्रीफ़केस भी ले...

सोनू- इसमे क्या है...

लेडी- पता नही...जब तू इस अड्रेस पर पहुचेगा तब पता चल जायगा...

सोनू ने ब्रीफ़कसे खोलते हुए बोला....

सोनू- ह्म्म..और इसका लॉक...ये तो कोड माँग रहा है...

लेडी- तुम यहाँ पहुचो...बाकी सब डीटेल वही मिलेगी...ओके...

सोनू- आख़िर तुम लोग करवाना क्या चाहते हो...

लेडी- क्या पता..वैसे जल्दी ही जान जाओगे...बाइ...

वो लेडी जाने लगी तो सोनू पीछे से बोला...

सोनू- मैं तो ये सब मजबूरी मे कर रहा हूँ पर तुम तो...जिस थाली मे खाया उसी मे छेड़ कर रही हो...

लेडी(आँखे मटका कर)- ह्म्म..तो..

सोनू- तो..कुछ नही...उपेर वाला देख रहा है...हर बात का हिसाब देना होगा...बचोगी नही...

लेडी- वो जब देखेगा तब की बात है...अभी अपने काम पर ध्यान दो...गुड लक...

लेडी मुस्कुराते हुए निकल जाती है..और सोनू अपने आप पर गुस्सा करते हुए रोने लगता है....

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यहाँ गाओं मे वसीम सरद के साथ पूरा गाँव घूम कर वापिस अपने फार्महाउस आने लगता है...

तभी वसीम के फ़ोन पर मेसेज आया...जिसे देखते ही उसने कार साइड की ओर नीचे आ कर कॉल किया....

( कॉल पर)

वसीम- हाँ ..मेसेज मिल गया...वो कहाँ है...

सामने- वो तो आ जायगा..पर तुम करना क्या चाहते हो...

वसीम- बस एक चोट देना चाहता हूँ...

सामने- ह्म्म..पर ध्यान रहे...उसकी जान ना चली जाए...

वसीम- नही जायगी...बस एक गहरी चोट लगेगी...

सामने- आपको उस पर इतना भरोसा है..कहीं गड़बड़ हो गई तो..??

वसीम- नही होगी...वो एक पक्का निसानेबाज़ है...ग़लती की कोई गुंजाइश नही...मुझे पूरा भरोसा है..

सामने- आपको भरोसा है तो ठीक...वैसे अब मेरे लिए क्या ऑर्डर है...

वसीम- इंतज़ार करो...जल्दी ही काम बताउन्गा...

फिर वसीम कॉल कट कर के फार्महाउस निकल आता है....

थोड़ी देर बाद....

वसीम अपने रूम मे पेग लगाते हुए एक फोटो देख कर बोलता है...

वसीम- बस...अब टाइम आ गया है...सब हिसाब पूरे कर दूंगा....बस तुम सब की कमी पूरी नही कर पाउन्गा....

और वसीम की आँखो मे आँसू आ गये....

यहाँ वसीम अपनो के गम मे डूबा हुआ था .

अंकित के साथ शादिया पेग लगा रही थी....

 


शबनम पश्चाताप के आँसू बहा रही थी..

जूही , अंकित के बारे मे सोच-सोच कर खुश हो रही थी...

कुल मिला कर सब अपने-अपने काम मे लगे हुए थे...

पर इनसे दूर सहर मे रजनी और सोनू अंकित के लिए परेसान थे....

एक ख़तरा मंढारा रहा है....पर शायद किसी को पता नही कि ये आने वाला ख़तरा किसे शिकार बनाता है...

अंकित को या फिर किसी और को........????????????

शादिया के रूम मे....

मैने शादिया के साथ ड्रिंक करना शुरू ही किया था कि अकरम का कॉल आ गया....

अकरम ने मुझे जल्दी से गार्डन मे आने को बोला....

मैं- शादिया जी...अब मैं चलता हूँ...कुछ काम आ गया...

शादिया- पर..हमारी पार्टी...

मैं- आप रेडी रहना...मैं आता हूँ...वैसे किस तरह की पार्टी करनी है....

शादिया- ह्म्म..जो पार्लर मे किया था....आज भी कुछ ऐसा ही करना है...

मैं- अरे..अभी तो आप सुधरी थी और अभी...

शादिया(बीच मे)- मैं वसीम के साथ नही करूगी पर किसी और के साथ तो कर सकती हूँ ना...

मैं- ह्म्म..बट ऐसे इंसान के साथ करना जिससे अकरम की फॅमिली की बदनामी ना हो...किसी को खबर ना हो....ओके

शादिया- ह्म्म..तो तुमसे अच्छा कौन मिलेगा...तुम पर किसी को शक नही होगा और तुम बदनाम भी नही करोगे...

मैं(मुश्कुरा कर)- मनोगी नही...

शादिया- नही...आज तो नही...

मैं- ओके..वेट करो..आता हूँ....और हाँ ..आज पीछे से फाड़ुँगा...

शादिया(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...आओ तो ...फिर जहाँ चाहे वहाँ फाड़ लेना...

फिर मैं शादिया को बाइ बोलकर नीचे गार्डन मे आ गया....

वहाँ अकरम , रूही के साथ खड़ा हुआ था...

मेरे आते ही अकरम ने रूही को इशारा किया और रूही अंदर जाने लगी....

जाते-जाते रूही मेरे बाजू से गुज़री तो मुझे दूर से किस दे कर आँख मार गई...

रूही की इस हरक़त पर मैं मुस्कुराते हुए अकरम के पास पहुचा तो वो मुझ पर फिर से भड़क उठा.....

वसीम- तू साले मुस्कुरा रहा है..और मेरी मरी पड़ी है...

मैं- क्या हुआ...इतनी गर्मी किस लिए ??

अकरम- अबे गर्मी नही..मैं परेसान हूँ बस...

मैं- यार इतनी परेसानि ठीक नही...रिलॅक्स...

अकरम- कैसे भाई..कैसे...मैं चाह कर भी रिलॅक्स नही कर पाता...

मैं- तू अपनी मोम के लिए परेसान है ना...??

अकरम- हाँ भाई....वही एक परेसानि है...मैं जहा भी रहूं ..कुछ भी करूँ...पर उनका सोचते ही मुझे आग लग जाती है. ..

मैं- थोड़ा सबर कर यार...

अकरम- नही होता भाई...अब तो बिल्कुल नही....

मैं- शांत हो जा...और मेरी बात सुन..

अकरम- क्या सुनूँ...तूने आज का बोला था..और तू. .

मैं(बीच मे)- और आज ही काम कर दिया...समझे...

अकरम- क्या कहा तूने. .

मैं- यही कि जो वादा किया था वो पूरा कर दिया....

अकरम- सच...मतलब..मतलब तुझे पता चल गया कि वो इंसान कौन है जिसके साथ मोम...

मैं- नही...पर तेरा काम हो गया ...

अकरम(घूरते हुए)- मतलब क्या है...??

मैं- मतलब ये कि मैने तेरी मोम से बात कर ली...

आलराम(शॉक्ड)- सच मे...पर...पर कैसे...क्या...कब...??

मैं- चौंक मत...और ये सब छोड़...अब तेरी मोम सुधर जायगी...जैसे पहले थी...

अकरम- सच ...

मैं(मुस्कुरा कर)- तेरी कसम ..सब सच है.....

अकरम - कैसे...क्या बात की तूने....

 
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