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Guest
थोड़ी देर बाद ज़िया नॉर्मल हुई...अब उसका रोना बंद था और घबड़ाहट भी कम थी...
मैं- देखो ज़िया...ये तो पक्का है कि उसने जो देखा वो किसी को नही बताया..
ज़िया- तुम कैसे कह सकते हो...शायद बता दिया हो...
मैं- अर्रे...अगर बता दिया होता तो अब तक यहाँ हम अकेले नही होते...
ज़िया- हां...सही कहा...
मैं- अब देखना ये है कि आगे क्या होता है...
ज़िया- आगे क्या...मैं तो उससे नज़रे भी नही मिला पाउन्गी अब...
मैं- ह्म..ये तो है...अभी हमे इंतज़ार करना होगा...उसके अगले कदम का...
ज़िया- पर क्या होगा उसका अगला कदम..कुछ आइडिया है...कहीं मोम- डॅड को ना बता दे...
मैं- ये तो इंतज़ार के बाद ही पता चलेगा....
ज़िया- ह्म...तो अभी क्या करे...
मैं- अभी तुम यहाँ से जाओ और अपनी जगह पर रेस्ट करो...तब तक मैं भी रेस्ट कर लेता हूँ...और कुछ सोचता भी हूँ...
ज़िया- ओके...पर प्ल्ज़..जल्दी कुछ करो.....वरना पूरी ट्रिप मे मैं एंजाय नही कर पाउन्गी...
मैं- डोंट वरी...मैं हूँ ना...तुम्हे खुल के मज़ा कराउन्गा...
ज़िया- तुम जितनी अच्छी चुदाई करते हो उतनी ही अच्छी तरह लड़की को संभाल लेते हो...यू आर सो स्वीएट...मम्मूउहह...
(और ज़िया ने मुझे जोरदार किया कर दिया....)
मैं- हाँ मेरी जान...वैसे भी अभी कुतिया की गान्ड बाकी है...
ज़िया(मुस्कुरा कर)- ह्म्म....कुतिया भी गान्ड फड़वाने के इंतज़ार मे है...
मैं- ह्म्म..चलो...अभी जाओ...रेस्ट करो...
ज़िया- ओके..
और ज़िया एक बार फिर से मुझे किस कर के निकल गई...और उसके जाने के बाद मैं भी लेट गया...
लेकिन शायद रेस्ट करना मेरे नसीब मे ही नही था....
ज़िया के जाने के 20 मिनिट बाद ही अकरम मेरे पास आ गया...
अकरम- सो रहा था क्या भाई...
मैं- अबे...तू..नही-नही...बस लेता था..आ बैठ...
और फिर हम दोनो बैठ गये...अकरम शांत बैठा खिड़की की तरफ देख रहा था...मैं समझ गया कि ये टेन्षन मे है...
मैं- बोल ना अकरम...क्या टेन्षन है...
अकरम- भाई..मेरी टेन्षन एक ही है...मेरी मोम...और उनका वो कमीना आशिक़..
मैं- ह्म्म..पर हुआ क्या...अचानक से ये क्यो सोचने लगा...
अकरम- क्या करूँ यार...माइंड मे आ ही जाता है ये सब...
मैं- ओके..बट टेन्षन मत ले..मैं सब ठीक कर दूँगा...
अकरम(तेज आवाज़ मे)- कब करेगा भाई...एक-एक दिन निकालना मुस्किल होता है....जिस समय भी मोम बाहर जाती है तो एक ही बात माइंड मे चलती है..कि कहा चुद रही होगी ..
मैं- मैं समझ सकता हूँ यार...पर मैं जल्दी ही ठीक कर दूँगा...
अकरम- जल्दी कब यार...
मैं- अकरम..मैं 2 दिन मे सब ठीक कर दूँगा ...पर एक प्रोमिस करना होगा...
अकरम- कैसा प्रोमिस...और 2 दिन मे कैसे....वो थोड़े हमारे साथ है ..
मैं- वो मेरा काम है...मैं 2 दिन मे कर दूँगा...पर एक प्रोमिस कर पहले...
अकरम- कैसा प्रोमिस....
मैं- यही कि तू अपनी मोम को शर्मिंदा नही करेगा...अपने डॅड को भी कुछ नही बातायगा और ना किसी और को..
अकरम- हाँ भाई बिल्कुल...मैं किसी को कुछ नही कहुगा.....
मैं- और एक बात...जो मैं कहूँ...उसमे मेरा साथ देना होगा...
अकरम- तेरे लिए तो जान भी हाज़िर है...तू बोल बस की करना क्या है..
मैं- बोलुगा...बस 2 दिन दे...ओके
अकरम- ओके..टेक युवर टाइम....थॅंक्स भाई...
मैं- अब रुलायगा क्या...हाहाहा...
अकरम- नही...पर पिलाउन्गा ज़रूर..विस्की...
मैं- तो ला फिर..
अकरम - अभी लाया...
अकरम विस्की लेने चला गया और मैं अपने आप से बाते करने लगा...
मैं(मन मे)- सॉरी दोस्त...तुझे अभी नही बता पाया कि तुम्हारी माँ का यार हमारे साथ ही है...और वो और कोई नही ..तेरे डॅड का खास दोस्त है...पर जल्दी ही मैं उसे तेरे सामने नंगा कर दूँगा...प्रोमिस...
फिर अकरम विस्की लेकर आया और हमने 2-2 पेग लिए और रेस्ट करने लगे....
काफ़ी देर रेस्ट करने के बाद हमारी आँख खुली...जब संजू ने हमे जगाया...
इस वक़्त दोपहर हो चुकी थी और हमारी बस किसी ढाबे पर खड़ी हुई थी...
हम तीनो नीचे आ गये...जहा बाकी सब पहले से ही मौजूद थे....
वसीम- आओ लड़को...कुछ खाना-पीना हो जाए...फिर सीधा अपनी मंज़िल पर रुकेगे......
सरद- हाँ यार...अब और इंतज़ार नही होता...जल्दी से वहाँ पहुचे और फिर मस्त मज़े करे....क्यो..
सरद ने हम सबको देख कर पूछा और हम सबने मुस्कुरा कर उसकी बात को सहमति दे दी...
मैं(मन मे)- हाँ साले ..तू तो मर रहा होगा की कब तू अपने दोस्त की वाइफ को पटक-पटक कर चोदे...कमीना कही का...
फिर हम सब फ्रेश हुए और खाने-पीने मे जुट गये....
सब निपटने के बाद हम सब थोड़ा वॉक करते हुए रिलॅक्स होने लगे और तभी ज़िया ने मुझे इशारे से बुला लिया...
मैं- हाँ...क्या हुआ...
ज़िया- क्या हुआ मतलब...हमारे सिर पर बॉम्ब गिरा है और तुम इतने रिलॅक्स...क्यो...???
मैं- तो क्या...एक जगह बैठ कर मातम मनाऊ...
ज़िया- मैने ऐसा कब कहा....
मैं- तो तुम कहना क्या चाहती हो...??
ज़िया- यही कि तुमने कुछ सोचा उसके बारे मे...
मैं- अभी नही...वाहा पहुच कर सोचुगा...और तुमने...
ज़िया- मैने......यही कि उसे समझाउंगी..कुछ...
मैं- ओके..समझ गया...तुम रिलॅक्स हो जाओ...मैं कुछ करता हूँ...और हाँ थोड़ा मुस्कुराओ...मुझे मेरी कुतिया परेसान अच्छी नही लगती...
ज़िया(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...तो आ जाउ अभी...
मैं- नही बिल्कुल नही...अभी चूत को समझा के रखो...ओके...
ज़िया- ह्म्म..