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चूतो का समुंदर

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यहाँ होटल डेलिट के रूम नो.202 मे कामिनी अपनी कहानी सुना कर बोली...

कामिनी- तो ये बात है....और इसी लिए मैं मल्होत्रा फॅमिली को ख़त्म करना चाहती हूँ....

उन- ह्म्म...आपकी बात से ये तो पता चल गया कि आपकी फॅमिली के साथ ग़लत हुआ है...पर इसमे उस मासूम अंकित की क्या ग़लती....उसने तो कुछ नही किया....

कामिनी- नही किया तो क्या....गेंहू के साथ घुन तो पिसता ही है....और वैसे भी मेरा मक़सद सिर्फ़ उसकी फॅमिली ख़त्म करना ही नही...बल्कि उस की प्रॉपर्टी भी है...

उन- मतलब...??

कामिनी- मेरा बदला तो मूल होगा...और प्रॉपर्टी होगी उसका ब्याज...

उन- तो तुम अभी क्यो नही मार देती उन्हे...

कामिनी- मार देगे...पहले मिल तो जाएँ...

उन- तो उन्हे ढूढ़ रही हो...???

कामिनी- हाँ...

उन- ओके..तो जब तक उसकी फॅमिली नही मिलती तब तक क्या करोगी....

कामिनी- जब तक सिर्फ़ इंतज़ार...और अब मैं चलती हूँ...आज रात अंकित को मज़े जो कराना है....

उन- ओके...मज़े करो...मेरे टच मे रहना....और कभी हमें भी मज़े...हाहाहा..

कामिनी जाने लगी फिर गेट पर पहुच कर रुक गई...

कामिनी- ह्म्म..ज़रूर...वैसे आपका नाम क्या है...

अननोन- नाचीज़ को अकबर कहते है....

कामिनी- ओके अकबर जी...जल्दी मिलेगे...गुड'नाइट

अकबर- गुड'नाइट

कामिनी के रूम से निकलते ही अकबर ने किसी को कॉल किया...

(कॉल पर)

अकबर- वो निकल गई है...रेडी हो ना...

सामने- जी बॉस

अकबर- पर याद से जितना बोला उतना ही करना....उससे ज़्यादा नही...

सामने- जी बॉस...उतना ही होगा...

अकबर- ओके..काम हो जाए तो मुझे बता देना...

फिर अकबर ने कॉल कट की और एक पेग बना कर पीने लगा....

यहाँ कामिनी हॉतले से निकल कर कार ड्राइव करते हुए अपने घर जा रही थी....

रास्ते मे जहाँ रोड सुनसान थी ...वहाँ उसने किसी को देखा और उसकी आँखे बड़ी हो गई और उसकी नज़र वही पर अटक गई....

कामिनी ये भूल गई कि वो कार ड्राइव कर रही है...और आगे देखने की जगह वो साइड मे नज़रे गढ़ाए देखे जा रही थी...

थोड़ी देर मे एक आवाज़ आई......

न्न्ी दनणन्नाआआहहिईीईईईईईई............

............

मैं रात मे थोड़ा लेट हो गया था संजू के घर आते -आते......और संजू के घर मे सभी इस बात से परेशान थे...जिसमे आंटी सबसे ज़्यादा परेशान थी...

जैसे ही मैने संजू के गेट पर कार रोकी...तो रजनी आंटी लगभग भागते हुए बाहर आ गई...और जैसे ही मैं कार से निकला तो आंटी मुझे थप्पड़ मार दिया....

आंटी(चिल्ला कर)- कहाँ था तू...???

मैं(गाल पर हाथ रखे हुए)- वो...मैं...एक फ्रेंड...हाँ...एक फ्रेंड के घर पर था...

आंटी- तो बता कर नही जा सकता...कम से कम कॉल ही कर देता...और तू कॉल क्यो नही ले रहा था ..

मैं- कॉल...कब...एक मिनट...

मैने तुरंत मोबाइल निकाल के देखा ..उसमे कई मिस्कल्ल पड़े थे....तब मुझे याद आया कि ये तो मैने ही साइलेंट कर दिया था...और नॉर्मल करना भूल गया .....

आंटी- अब बोलता क्यो नही....

मैने आंटी की आँखो मे देखा तो वो रो रही थी...और गुस्सा भी किए जा रही थी....

मैं- सॉरी आंटी...फ़ोन साइलेंट था...सॉरी...

आंटी- क्या सॉरी...मेरी तो जान निकल रही थी...मुझे लगा कि तुझे कुछ...

और आंटी ने मुझे गले लगा कर रोना शुरू कर दिया....

मैं हैरान था आंटी का प्यार देख कर...पर उस टाइम मुझे भी आंटी के प्यार ने मजबूर कर दिया और मेरी आँखे नम हो गई...

मैं- सॉरी आंटी...आप क्यो रो रही है...ग़लती मेरी है...

आंटी- तुझे कुछ हो जाता तो मैं अपने आप को कभी नाफ़ नही कर पाती....ऐसा मत किया कर बेटा....

मैं- सॉरी आंटी...आगे से ऐसा नही होगा...

हम दोनो आँखो मे आसू भरे गले मिल रहे थे...और तब तक घर के सारे लोग भी गेट पर आ चुके थे...

सब लोग हमारा प्यार देख कर भावुक से हो गये थे...कुछ तो रो रहे थे जिनमे अनु,रक्षा और पूनम थी....

पर कुछ को शायद ये नाटक लग रहा था...

संजू भी जल्दी से मेरे पास आ गया और तब तक मैं आंटी से अलग हो गया...

संजू ने आते ही मुझे कंधे पर मारा और बोला...

संजू- साले...कहाँ था तू...तेरी वजह से यहाँ सबकी जान अटक गई थी...फ़ोन भी नही उठाता...रुक बताता हूँ तुझे...

संजू मुझे मारने आगे बढ़ा तो मैं आंटी को साइड कर के उनके पीछे हो गया...

संजू- निकल साले...सामने आ...

मैं- मेरी बात तो सुन...रुक जा...

आंटी- अब बस भी करो...संजू रुक जाओ...खबरदार जो मेरे बेटे को हाथ लगाया...

संजू- हाँ..ये आपका बेटा ..और मैं कौन...???

आंटी- अरे तुम दोनो मेरे बेटे हो...अब लड़ना बंद करो..चलो खाना खाते है...सब भूखे होंगे...

संजू- ओके..चल तुझे तो बाद मे देखता हूँ...

मैं- ..अभी चल...खाना खाते है...मैं कार लॉक कर के आता हूँ....

सब अंदर चले गये पर आंटी वही रुकी रही...जब मैं कार लॉक कर के पलटा तो आंटी ने मेरी आँखो मे देखते हुए कहा...

आंटी- इन आँखो मे आँसू अच्छे नही लगते...मैने हमेशा इन आँखो मे ख़ुसी ही देखी है...

मैं- अच्छा...कब्से...

आंटी- जब तू पैदा भी नही हुआ था तब से...

मैं- वो कैसे...

आंटी- तेरी आँखे तेरी माँ जैसी है बेटा...उसकी आँखो मे भी मैं आँसू नही देख पाती थी...

मैं- आप मेरी माँ को जानती थी..

आंटी(सकपका कर)- वो..मैं..हाँ..तेरे पैदा होने के पहले हम सहेली बन गई थी...शायद किसी फंक्षन मे किसी कॉंमान फ्रेंड ने मिलवाया था....अब चल खाना खा ले...फिर बात करेंगे ...

और आंटी आगे निकल गई....मैं भी पीछे-2 आ गया...और नीचे ही हाथ-मुँह धो कर खाना खाने बैठ गया....

 


खाने की टेबल पर मुझे रूबी नज़र नही आई....

मैं- रूबी कहाँ है...???

रक्षा- वो अपने घर पर है...उसके मोम- डॅड आ गये...और हाँ...अब वो ठीक है भैया...

मैं समझ गया कि रक्षा रूबी की गान्ड चुदाई के बाद ठीक होने की बात कर रही थी....पर दूसरे नही समझे....

पूनम- क्यो उसे क्या हुआ था...

मैं(रक्षा को आँख दिखा कर)- वो...आज दोपहर मे उसे फीवर आ गया था थोड़ा...

रक्षा(नज़रे नीचे कर के)- हाँ..दीदी...उसे फीवर आया था....

हमारी बात सुनकर अनु ने मुझे ऐसे देखा कि अभी ही मुझे कच्चा चवा जायगी.....

खाने के बाद सब अपने रूम मे निकल गये...तभी मुझे अनु का मेसेज आया...." छत पर आओ "

मैं चुप-चाप छत पर निकल गया....अनु एक किनारे पर सर्द हवा खाते हुए खड़ी थी...जैसे ही मैं उसके करीब पहुचा तो अनु ने मुझ पर हमला कर दिया और मेरे सीने भर घूसो की बारिश कर दी....

अनु मार मुझे रही थी और रोने खुद लगी...मैं भी उसके गुस्से की वजह जानता था इसलिए मैं शांत खड़ा रहा और उसे रोकने की कोशिश भी नही की...

जब अनु मुझे मारते-2 थक गई तो वो खुद रुक गई और रोते हुए मेरे गले लग गई....

मैने थोड़ी देर तक उसे रोने दिया और फिर उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरने लगा....

मैं- अब चुप भी हो जाओ बेटा...

अनु(सुबक्ते हुए)- आपने ऐसा क्यो किया...मैने कितने कॉल किए...कॉल क्यो नही लिया....

मैं- बेटा मैं भूल गया था...सॉरी..

अनु- मेरी तो जान ही निकल जाती ..अगर आपको कुछ हो जाता तो....

मैं- अरे मेरी जान...इतना प्यार मत कर मुझसे...

अनु- करूगी....क्या कर लोगे....हमेशा करूगी...

अनु ने मुझे कस के गले लगा लिया...

मैं- ओके...अब माफ़ किया ना...अब नीचे चल..सर्दी लग जायगी...

अनु- नही...पहले प्रोमिस करो कि आज के बाद ऐसा नही करोगे...

मैं- ओके...प्रोमिस...अब चलेगी...

अनु- और ये भी कि मुझे छोड़ कर नही जाओगे...कभी भी...

मैं- ह्म्म..(अनु का चेहरा पकड़ कर उपेर किया और उसके माथे पर किस किया)...कभी नही जाउन्गा...

अनु- आइ लव यू...

मैं- लव यू 2 बेटा....अब चल...वरना फिर से मेरे लिए सब टेन्षन ले लेगे...हाहाहा..

अनु- आप भी ना...चलिए...

हम नीचे आ कर अपने -2 रूम मे चले गये...

कल पेपर था इसलिए सब पढ़ने मे बिज़ी थे...जैसे ही मैं रूम मे आया तो संजू भी पढ़ रहा था...मैं भी पढ़ने लगा...

संजू- मेरा गुस्सा उतरा नही...आज पढ़ ले...क्योकि कल पेपर है...तुझे कल देखुगा...

मैं- ओके भाई...देख लेना...अभी पढ़ाई कर...

हम दोनो पढ़ रहे थे पर आज संजू बार-2 मोबाइल से मेसेज भी कर रहा था....मुझे पढ़ना था इसीलिए मैने उसे इग्नोर कर दिया...

करीब 2 घंटे के बाद संजू गेस्ट रूम मे पढ़ने का बोल कर निकल गया और मैं लाइट ऑफ कर के लेट गया...

आज मैने अनु को मना कर दिया था ...इसलिए मैं सोने लगा...

सोते हुए मुझे आंटी की वो बात याद आई ..कि मेरी आँखे मेरी माँ से मिलती है...

मैं सोचने लगा कि आंटी अगर मेरी माँ को जानती थी...तो मेरी दुश्मन क्यो बन गई...क्या वजह हो सकती है...

फिर मुझे आज का इन्सिडेंट याद आया कि कैसे आंटी मेरे लिए परेशान थी...मेरे लिए रो रही थी...उन्हे मेरी परवाह थी....

मैं सोचने लगा कि ये आंटी भी क्या पहेली है...एक तरफ तो मेरे खिलाफ प्लान करती है और एक तरफ मुझे इतना प्यार...क्या ये सिर्फ़ दिखावा था या सच...

ये सवाल लिए मैं नीद की आगोश मे चला गया.....

 
सुबह मुझे अनु ने ही जगाया और हम रेडी हो कर एग्ज़ॅम देने निकल गये....

एग्ज़ॅम के बाद आज फिर से अकरम से बात हुई और मैने उसे थोड़ा सब्र करने को कह दिया....

एग्ज़ॅम के बाद हम सब संजू के घर आ गये...पर संजू नही आया...वो किसी फ्रेंड से मिलने का बोल कर निकल गया था...

घर पर सिर्फ़ मेघा आंटी मिली...रजनी आंटी कहीं गई हुई थी....

हम सब उपेर जा कर रेस्ट करने लगे...करीब 30 मिनट बाद मेरे रूम मे रक्षा आ गई...और जैसे ही वो अंदर आई तो उसने गेट अंदर से लॉक कर दिया...

मैं - ह्म्म..क्या इरादा है....

रक्षा(अपने होंठो को दाँत से दबा कर)- आज आपको खा जाने का मन हो रहा है...

मैं- अच्छा...पर मुझे पचा पाना आसान काम नही है बेटा...

रक्षा- मुझे भी आसान काम पसंद नही है भैया....(और रक्षा बेड पर चढ़ गई)

मैं- अरे..अरे...कुछ तो शर्म करो...घर मे और भी लोग है...हम अकेले नही....

रक्षा मेरे सीने पर लेट गई....

रक्षा- डोंट वरी...मैं सब चेक कर के आई हूँ...अनु और पूनम दी सो रहो है और मोम भी....और हाँ..मैने मोम का गेट बाहर से लॉक कर दिया....

मैं- क्या कर रही है...तू भी ना...ऐसा क्यो किया....

रक्षा- आज आपसे खुल के प्यार जो करना था...

मैं-खुल के...मतलब...

रक्षा- आज मुझे आपसे अपनी जवानी की शुरआत करवानी है...

मैं- सच मे....पर तेरा प्रोमिस...

रक्षा- वो पूरा हो गया...

मैं- कैसे...और था क्या तेरा प्रोमिस...अब तो बता दे....

रक्षा- वो प्रोमिस रूबी से था कि जब तक आप उसको दोनो तरफ से नही चोदते...तब तक मैं आपसे चुदाई नही करवाउन्गी...

मैं- ओह...ओह..तू इतनी बेशरम कब से हो गई...चोदना...चुदाई...ऐसी बाते कब सीख गई...

रक्षा मेरे चेहरे पर अपना चेहरा कर के बोली....

रक्षा- जब आपने मेरे बूब्स और चूत को चूसा और अपना लंड चुस्वाया...तभी मैं बेशर्म हो गई...

मैं- अच्छा...अपने भैया से ऐसी बातें...

रक्षा- सॉरी भैया...मैं बस..मज़ाक कर रही थी...पर सच मे आज मैं आपसे वैसा ही प्यार करना चाहती हूँ...

रक्षा अपनी बात बोल कर शरमाने लगी और मेरे सीने मे अपना चेहरा छिपा लिया...

मैनर रक्षा को बाहों मे भर के कहा...

मैं- कोई बात नही...आज मैं अपनी जान को ऐसे प्यार करूगा कि वो खुश हो जायगी ओके...

रक्षा- ह्म्म..

मैं- तो चलो शुरू हो जाओ...

रक्षा- मुझे शर्म आती है...आप ही शुरू करो...

मैं- ह्म्म..तो चलो तुम्हारी शर्म भगाते है....लेकिन पहले मुझे अपनी प्यारी बेहन के हाथ से बनी कॉफी पीना है...तभी प्यार करूगा....

रक्षा- ओके...अभी लाई...बस 5 मिनट...

रक्षा को कॉफी बनाने भेज कर मैने अपने आदमी को कॉल कर के बोल दिया कि अभी 2 घंटे तक मुझे डिस्टर्ब ना करे...

फिर मुझे संजू जा ख्याल आया और मैने संजू को कॉल किया...

(कॉल पर)

संजू- हाँ भाई...बोल...

मैं- कहाँ है बे...घर क्यो नही आया...???

संजू- भाई...आता हूँ शाम तक...थोड़ा फ्रेंड के पास हूँ...

मैं- कौन से फ्रेंड के पास...??

संजू- भाई तू नही जानता...मेरी कोचिंग वाला है...

( संजू अपनी कॉलोनी मे कोचिंग क्लास जाता था)

मैं- ओके...पर एक मिनट ये आवाज़ कैसी...

संजू- क्या आवाज़..क्क्क..कुछ नही..

मैं- साले ये चुदाई की आवाज़ है...बोल कहाँ है तू और क्या कर रहा है...सच बोलना

संजू- कसम से भाई फ्रेंड के घर पर हूँ...और ये आवाज़ तो ..वो..पॉर्न फिल्म की है...सच्ची...

मैं- ओके..मज़े कर...जल्दी आना...

संजू- ओके....भाई...बाइ

मैं - बाइ...

कॅल कट होने के बाद रक्षा आ गई और कॉफी देकर निकल गई...और थोड़ी देर बाद आने का बोल गई थी....

 


मैं भी कॉफी ले कर बेड पर ही बैठ गया और कॉफी पीने के बाद मैं रक्षा को चुदाई का पहला सुख देने को रेडी हो गया......

कुछ देर बाद रक्षा रूम मे आई और मैं उसे देखता रह गया.....

रक्षा ने अंदर आते ही गेट लॉक किया...और अपनी पेंट निकाल दी....अब वो सिर्फ़ टी-शर्ट और पैंटी मे थी....

उसकी टाइट गोरी-गोरी जाघे...उसकी आँखो मे उमड़ती सेक्स की चाहत ...उसके खुले हुए बाल...कसे हुए बूस....ये सब मेरे लंड को टाइट करने के लिए काफ़ी था....

मैने एक तक रक्षा को देख रहा था और रक्षा भी फुल मूड मे अपने होंठ को दाँत से चबाते हुए मुझे उकसा रही थी....

अब मेरा लंड मेरे पेंट से निकलने को बेताब हुआ जा रहा था....

रक्षा ने भी मेरे पेंट मे बने तंबू को देख लिया और मुस्कुरा कर बेड पर आ गई..और आते ही मुझे किस करने लगी....

रक्षा को किस करने के साथ मैं उसके बूब्स को उपेर से ही मसल्ने लगा....और रक्षा भी एक हाथ से मेरे तने हुए लंड को पेंट के उपेर से ही दबाने लगी....

थोड़ी देर तक हम एक- दूसरे के होंठ चूस कर लाल कर दिए और किस ख़त्म किया...

रक्षा बिना कुछ बोले मुझे धक्का दे कर लिटा गई और फिर पैरों के पास गई और मेरे पैरों को फैला कर वो पैरो के बीच लेट गई और मेरे पेंट को अनलॉक कर के लंड बाहर निकाल लिया......

मेरा खड़ा हुआ लंड फन्फनाते हुए रक्षा के सामने आ कर सलामी देने लगा.....और रक्षा ने बिना वक़्त गवाए लंड के सुपाडे को मुँह मे भर लिया....

रक्षा कुछ देर तक सुपाडे को चूस्ति रही और अपनी जीभ से लंड के छेद को चाट ती रही....

मैं रक्षा की हरक़तों से हैरान भी था और साथ मे बहुत ही उत्तेजित हो रहा था .....

आज तक किसी ने मेरे लंड का छेद इस तरह नही चाटा था....पता नही रक्षा ने ये कहाँ से सीख लिया....

मैं- आअहह...रक्षा...ये क्या कर रही है....

रक्षा- उम्म...उउंम्म...उउंम्म...

मैं- बोल ना...कहाँ से सीख गई...आअहह..आहह

रक्षा(लंड मुँह से निकाल कर)-उम्मह...वो मैने फिल्म मे देखा था...वो वाली फिल्म मे...

मैं- ह्म्म....बहुत कुछ सीख लिया...हां

रक्षा- ह्म्म...आपको मज़ा आया ना...???

मैं- ह्म्म...और क्या सीखा...???

रक्षा- सब कर के बताउन्गी...अब मुझे अपना काम करने दो...

और रक्षा ने फिर से सुपाडे को मुँह मे भर कर चूसने लगी....और मैं सिसकने लगा....

रक्षा अपना काम पूरे मन से कर रही थी...उसने मेरे सुपाडे को चूस- चूस कर लाल कर दिया था....

मैने भी एक्साइटिड हो कर रक्षा को पकड़ कर अपने साइड मे खींच लिया...

अब रक्षा मेरे साइड मे लेटी हुई सुपाडा चूसने लगी थी और मैं बैठ कर उसकी पेंटी मे कसी हुई गान्ड सहलाने लगा....

मैं- आहह...अब आगे भी चूस...बहुत बाकी है...

रक्षा से जल्दी से मेरे लंड को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और साथ मे हाथ से मेरी बॉल्स भी सहलाने लगी.....

मैं बड़े प्यार से रक्षा की गान्ड सहलाते हुए उस से अपना लंड चुसवाने लगा…रक्षा पूरा लंड गले तक ले जाती और फिर बाहर लाती....सच मे मस्त चूस रही थी...

रक्षा-उम्म्म…उउंम्म..उउंम..उउंम्म..उउंम

मैं-आहह…बेटा…ऐसे ही…अच्छा कर रही हो…आहह

रक्षा-उउंम..सस्ररुउउउप्प्प…उउउम्म्म्म

मैं-हाँ..तेज करो…जल्दी पूरा भर के चूस …तेजज...आहह

रक्षा-उउंम..उउंम्म..उउंम्म..उउउंम्म

मैं-आहह…मेरी प्यारी गुड़िया…बॉल्स भी चूस ...आहह.…

रक्षा- उउंम…सस्ररुउउप्प्प…उउंम्म..उउंम

मैं- ऑश…हाँ बेटा तेज ऑर तेज..

मेरी बात सुन कर रक्षा पूरी स्पीड से मुँह मे लंड को आगे –पीछे कर रही थी….साथ मे मेरी बॉल्स भी चूस लेती थी....

थोड़ी देर बाद मैने रक्षा को रोक कर उसे लिटा दिया और अपना पेंट निकाल कर रक्षा के पैरो के पास आ गया...

मैने रक्षा के पैर फैलाए और उसकी पेंटी साइड करके उसकी चूत पर जीभ घुमाने लगा....

 


मैं- सस्र्र्ररुउउप्प…आहह….मस्त चूत है तेरी…

रक्षा- आहह…भैया…नही…ओह्ह...

मैं- चुप..क्या नही...देख कितनी चिकनी है...ऐसी चूत खा जाने का मन करता है......सस्स्रररुउउप्प्प्प...

रक्षा- भैयाअ....आहह....तीएकक....हाइी...ख्हा जाओ...

फिर मैने रक्षा की चूत को चाटना और चूसना चालू कर दिया ओर रक्षा मस्ती मे तड़पने लगी...ओर मेरे सिर को चूत पर दबाने लगी...

मैं- सस्रररुउउप्प...उउउम्म्म्मम...सस्रररुउउप्प्प....सस्र्रुरुउउप्प...

रक्षा-आहह..अहहह....ऊहह..म्मूऊम्मय्यी

मैं- सस्रररुउउप्प्प...सस्ररुउउउप्प्प...सस्रररुउउप्प...

रक्षा- आहह...भैया....मज़ा ..आआहह...आ...गा...आहह

मैं-उम्म्म..उउउंम्म..उउंम...उउंम्म

रक्षा-बब्बहाइियय्य्ाआ...आअहह....ऊहह....ऊहह....आहह

मैने रक्षा की चूत को मुँह मे भरके चूसा ऑर पारूल को चूत चुस्साई का आनद दिया…ऑर इस आनंद मे रक्षा झड़ने लगी…

रक्षा- भैया..….आहह...मैं गई...ओह्ह....अहहह

मैं- स्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प…सस्ररुउउप्प्प

रक्षा मस्ती मे झड़ने लगी और मैं उसके चूत रस को पीने लगा…

जब मैने सारा चूत रस पी लिया तो रक्षा की चूत से मुँह हटा लिया…

थोड़ी देर तक रक्षा शांत पड़ी रही और जब नॉर्मल हुई तो बोली...

रक्षा- भैया..अब मुझे वो मज़ा दो...जो एक लड़की को सिर्फ़ एक बार ही मिलता है...दर्द के साथ मज़ा...

मैं- ह्म्म...बड़ी तड़प रही है मेरी गुड़िया...

रक्षा(शरमाते हुए)- ह्म्म...

मैं - तो आ जा बेटा...आज तुझे असली मज़ा देता हूँ....

फिर मैने जल्दी से रक्षा को नंगा किया और खुद भी नंगा हो गया और रक्षा को लिटा कर अपने पास खीच और उसकी चूत पर लंड फिराने लगा...

मैं- रेडी है मेरी गुड़िया...

रक्षा- हाँ भैया...अब अपनी गुड़िया को अपनी बीवी बना लो....

मैं- ओह...तो बीवी बनना है...इतनी जल्दी...

रक्षा- ह्म्म..अब और ना तडपाओ भैया...जल्दी से मुझे अपना बना लो...

मैं- ओके बेटा...पर दर्द होगा...चुप रहना...

रक्षा- आपका प्यार मेरा दर्द ख़त्म कर देगा...आप करो...

मैं- तो ये लो...

मैने फिर हाथ से लंड पकड़ कर धक्का मारा और मेरा आधा सुपाडा रक्षा की चूत मे घुस गया…..ऑर वो तड़प उठी…

रक्षा-आअहह…आअहह..नाहहीी….

मैने तुरंत ही थोड़ा सा धक्का और मारा ऑर सुपाडा रक्षा की चूत मे घुस गया….रक्षा की चूत खुल गई ऑर खून निकलने लगा ऑर रक्षा तड़प कर चीखने लगी…

रक्षा-म्मगम्मूऊउम्म्मय्यययययी……हुहुहुहू…..मार्र..गाइइ…..णिीिकककाआल्लूओ..आहह..मम्मूऊउम्म्मय्यी

पर रक्षा अपनी आवाज़ को दबा कर चीख रही थी...मुझे उसके दर्द का अहसास था और मैने उसके बूब्स को सहलाना चालू किया ओर झुक कर उसे किस करने लगा ओर फिर एक धक्का मारा जिससे थोड़ा लंड अंदर चला गया…

रक्षा-उम्म..उउंम..उउउंम्म

मैं रक्षा को किस कर रहा था तो उसकी आवाज़ भी नही निकल पाई..पर वो तड़प ही रही थी…मैं थोड़ी देर रुका ऑर उसके बूब्स को दबाते हुए उसे किस करता रहा…तो वो थोड़ा नॉर्मल हुई …करीब 2 मिनट बाद मैने ज़ोर से धक्का मारा ऑर आधा लंड उसकी चूत मे चला गया….

रक्षा-नाहहीी….मम्मूऊम्म्म्मी…आहह….आआईयइ...

मैं- बस बेटा…हो गया…अब दर्द नही होगा..ऑर मैने बूब्स ऑर किस का काम जारी रखा….

थोड़ी देर बाद मैने आधे लंड को ही धीरे-धीरे आगे पीछे करना शुरू किया ऑर रक्षा दर्द से सिसकने लगी..

रक्षा -भैया…आहह..दर्द हो रहा…आहह

मैं- बस बेटा..थोड़ा रूको..सब ठीक होगा…

मैने अपना काम करता रहा और 5 मिनट के बाद रक्षा नॉर्मल हो गई…उसकी आँखे आसुओं से भर गई थी…मैने फिर धक्का मारा ऑर पूरा लंड अंदर डाल दिया….

रक्षा-हुहुहू..म्मूऊउम्मय्ययी….म्मार्र....गगाइइइ….म्मूऊम्मय्यी

मैने पारूल के बूब्स सहलाते हुए उसे किस करने लगा ऑर धीरे –धीरे लंड को हिलाने लगा….

करीब 10 मिनट की मेहनत के बाद रक्षा नॉर्मल हुई ऑर बोली..

रक्षा- भैयाया…अब करो…दर्द कम है…

मैं- ठीक है बेटा ..मैं आराम से करता हूँ…

मैने रक्षा का एक पैर हाथ से उठाया और उसे धीरे-धीरे चोदने लगा.....

रक्षा-उम्म्म...आअहह..आअहह..

मैने प्यार से उसको चोदना शुरू किया ओर थोड़ी देर के बाद स्पीड बढाई…अब रक्षा भी दर्द के साथ मस्ती मे सिसक रही थी…

मैं- बेटा..अब ठीक है…

रक्षा- आहह..हाँ..भैया…करो…आहह

मैं- ये लो…यीहह

रक्षा-हाँ..भैया…डालो….आहह

मैने अपनी स्पीड थोड़ी और बढ़ा दी…

मैं- ये लो बेटा…अब मज़ा करो..

रक्षा-आहह..भैया…डालो…ज़ोर से…आहह…

मैं- मज़ा आ रहा है…

रक्षा- हहा….भैया…बहुत..आहह…ज़ोर से...डालो....

मैने थोड़ी देर बाद फुल स्पीड मे रक्षा को चोदना शुरू किया ऑर रक्षा ने भी अपनी गान्ड को उछाल कर लंड का स्वागत करना शुरू किया….

मैं- ये ले...मेरी गुड़िया..एस...

रक्षा-हाँ...भैया...फाड़ दो....अब...ज़ोर से...आहह..आहह

मैं- ये ले.....आहह...टाइट है...

रक्षा-आह..भैया…ज़ोर से..ओरर..तेजेज़्ज...खोल दो...

मैं तेज़ी से रक्षा को चोद रहा था ओर कुछ देर बाद ही रक्षा झड़ने लगी ऑर उसके चूत रस के साथ खून मिक्स हो कर बहने लगा….

रक्षा-भैया…आहह..मैम्म्म…गाइइ....उउफफफ्फ़...म्म्माख...

मैं- येस….बेटा..कम ऑन...येस्स..

जैसे ही पारूल झड गई तो मैने लंड को चूत से बाहर निकाल लिया तो देखा कि चूत खून से लाल हो गई थी ऑर पूरी खुल चुकी थी…

मैने फिर से लंड अंदर डाल दिया और तेज धक्के मारने लगा...आज रक्षा की लंड चुसाइ से और उसकी टाइट चूत के कमाल से मैं भी झड़ने के करीब आ गया.......

मैने लंड को चूत से निकाला और उठ कर रक्षा के मुँह के पास लंड ले गया...

और लंड को हाथ से हिला कर उसके मुँह पर झड़ने लगा....

रक्षा ने मुँह खोल कर मेरा लंड रस अपने मुँह मे भर लिया...

थोड़ा लंड रस वो गटक गई और बाकी उसके मुँह पर फैल गया....

मैं जैसे ही झड के फ्री हुआ ... तो साइड मे बैठ गया...

मैं- अब खुश है मेरी गुड़िया...

रक्षा- ह्म्म..पर अभी और करो ना...

मैं- इतना मत करो कि कल उठ भी ना पाओ...

रक्षा- प्ल्ज़्ज़ भैया ..एक बार और...मुझे कुछ नही होगा...

मैं- तू नही मानेगी ना...ठीक है...थोड़ा रेस्ट कर फिर करता हूँ...

रक्षा- ह्म्म..

हम रेस्ट करने लेट गये कि तभी किसी ने गेट पर नॉक किया.........

 
गेट नॉक होते ही हम डर गये...मुझे लगा कि संजू आ गया...पर जैसे ही नॉक करने के साथ आवाज़ आई तो मैं थोड़ा रिलॅक्स हो गया....

ये पूनम दी थी....

पूनम- संजू, अंकित...कोई तो खोलो गेट...

रक्षा- मर गये...अब...???

मैं- डोंट वरी...तू कपड़े ले कर बाथरूम मे जा...मैं देखता हूँ...

रक्षा के बाथरूम मे जाने के बाद मैने कपड़े पहने और गेट खोला...

मैं(मुँह फाड़ते हुए)- क्या हुआ..क्यो परेशान हो...???

पूनम- तुम लोग घोड़े बेच कर सोते हो क्या ....

मैं- मैं अकेला सो रहा था...

पूनम- क्यो..संजू कहाँ है...??

मैं- वो अपने फ्रेंड के घर गया...आप बोलो...क्या हुआ..??

पूनम- ह्म्म..हुआ तो नही ..हो सकता है..

और पूनम ने हाथ मेरे गले मे डाल दिए...

मैं- अरे...अभी नही...बाद मे...मुझे नीद आ रही है...

पूनम- अच्छा...अब नीद आने लगी...कैसे मर्द हो ..चूत बुला रही है और तुम्हे सोने की पड़ी है...

मैं- कैसा मर्द हूँ ....ये आपसे बेहतर कौन जानता है...पर इस वक़्त मैं नही सोया तो कल बीमार ज़रूर हो जाउन्गा...मैं कल सारी रात जगा हूँ...समझी आप

पूनम- सच मे...तब तो सो जाओ...मैं तुम्हे बीमार नही कर सकती...पर एक किस तो दे दो...

मैने पूनम को किस किया पर पूनम बोली...

पूनम- ऐसा नही...लंबा वाला...

मैं- ओके...आओ फिर...

मैने फिर पूनम को बाहों मे कस के एक लंबा किस किया और तब पूनम गई...

मैने जल्दी से गेट लॉक किया और रक्षा को बाहर बुला लिया...

मैं- बच गये...

रक्षा- ह्म्म...पर दीदी क्यो आई थी...???

मैं- वो संजू को पूछ रही थी...होगा कोई काम...

रक्षा- ह्म्म..अब करो ना भैया...एक बार और..

मैं- रुक तो 2 मिनट...थोड़ी देर बाद करता हूँ...ओके..

रक्षा- ओके...

थोड़ा रेस्ट करने के बाद रक्षा ने फिर से मेरा पेंट खोल दिया और मेरे लंड को चूसने लगी....

फिर रक्षा ने मेरे लंड को हाथ से हिलाते हुए मेरी बाल्स को चूसना-चाटना शुरू कर दिया....

रक्षा- उम्म्म...उउउंम्म...उउउंम...सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प....आहह...

मैं- तू एक्सपर्ट हो गई मेरी जान...आहह...ऐसे ही..

थोड़ी देर तक लंड और बॉल्स चूस कर रक्षा ने मेरा लंड रेडी कर दिया...

फिर मैने रक्षा को खीच के गोद मे बैठाया और किस करने लगा....रक्षा मुझसे ज़यादा जोश मे मेरे होठ चूसने लगी....

थोड़ी देर बाद मैने उसको बेड पर लिटा कर उसका पेंट और पेंटी निकाल दी और उसकी ताज़ी-ताज़ी खुली चूत को चाटने लगा....

थोड़ी देर की चूत चुसाइ के बाद मैने अपना पेंट निकाल दिया...और रक्षा की चूत पर लंड सेट कर दिया...

रक्षा- भैया...डॉगी स्टाइल मे कीजिए ना...

मैं- तुझे दर्द हुआ तो...

रक्षा- मैं सह लूगी...मुझे डॉगी स्टाइल पसंद है...

मैं- ओके...तो आज तू मेरी कुतिया बनेगी...हाहाहा...

रक्षा- तो बनाओ ना...आइ एम रेडी...

रक्षा जल्दी से डॉगी पोज़ मे आ गई...और उसकी गान्ड उभर कर मेरे सामने आ गई...

मैं- आहह..क्या गान्ड है बेटा...ये तो मारनी ही पड़ेगी...

रक्षा- तो मार लीजिए...चाहो तो अभी मार लो...

मैं- नही...आज सिर्फ़ चूत...

रक्षा- ओके...अब कीजिए ना...नही तो फिर कोई आ जाएगा...

मैने जल्दी से रक्षा की चूत पर लंड सेट किया और एक धक्का मार कर आधा लंड चूत मे डाल दिया...

रक्षा- आहह...भैया...

मैं- दर्द हुआ बेटा...

रक्षा- भैया..अभी मुझे कुतिया की तरह चोदो...बेदर्दी से...

मैं- ओके...जैसा तू कहे...पर चिल्लाना कम...

और मैने तेज़ी से धक्का मारा और पूरा लंड चूत मे चला गया...

रक्षा- आहह….माँ…उूउउइइ…..आहह

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ मेरी कुतिया…

रक्षा-आअहह..फाड़ दो…आअहह…ज्ज़ोर..से…मार्र..

मैं- तो ये ले …फटी तेरी..यीहह

मैने रक्षा को फुल स्पीड मे चोदना शुरू किया ओर वो धीरे-2 से आवाज़े निकालने लगी ऑर चुदाई का मज़ा लेने लगी...

रक्षा-आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज…म्म्माह….फ़फफादद्ड़..दद्दूव…आअहह...उूउउफ़फ्फ़..म्म्मा....

मैं- आहह..ईएहह….एस्स..एस्स….ये..ले…

रक्षा- आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह....आअहह…ऊओह

मैं- ऑर तेजज्ज़ डालु..

रक्षा-आअहह….ड्ड्डयाययाऑल्ल…दो…..आआअहह…फासस्थटत्त…आअहह

..यस…यस..यस…आअहह....तीएजज्ज़....ऊओरर..तततेजज....आहह...उउफफफ्फ़...आआहह

मैं-यस बेबी..ये ले..…ये ले बेटा...

मैने तेज़ी से रक्षा की चुदाई कर रहा था ऑर रक्षा की गान्ड पर मेरी जाघे इतनी तेज़ी से टकराने लगी कि उसकी गान्ड लाल पड़ने लगी …..10-15 मिनट की चुदाई मे रक्षा फिर से झड़ने लगी ऑर उसकी सिसकारिया बढ़ने लगी..

रक्षा-आअहह…आहह…हहा…ऐसे ही करो...तेज..भैया ...आहह..मैंन..आऐईज...ओह्ह...म्मा...एस्स..

मैं- यस बेबी...एस..एस्स...ये ले...

रक्षा झड गई और थोड़ी देर बाद वो आगे सिर रख कर लेट गई...मैं अभी भी उसे चोदे जा रहा था...

थोड़ी देर बाद मैने लंड बाहर निकाला....और फिर रक्षा के बाजू मे लेट गया...

 


थोड़ा रेस्ट करने के बाद रक्षा उठ कर मेरे उपेर आई और अपने दोनो पैरे मेरे दोनो साइड करके बैठ गई और मेरा लंड अपनी चूत पर सेट करके अंदर लेने लगी....

मैं- लंड की सवारी करनी है...

रक्षा- ह्म्म..आप लेटो...मैं आपकी चुदाई करती हूँ...

मैं- ओके..छुरि खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर...कटेगा तो खरबूजा ही....करो..करो...

रक्षा ने मेरा लंड चूत मे लेकर बैठना शुरू किया और जब पूरा लंड अंदर गया तो वो सिसक उठी...

रक्षा- आअहह...

मैं- दर्द हुआ क्या..??

रक्षा- आहह..आहह...हाँ...थोड़ा सा....

मैं- ह्म्म..आराम से कर...

रक्षा – आहह..हा…आप चोदिये ना….

मैं रक्षा की बात समझ गया ओर उसको नीचे से प्यार से धक्के मारने लगा…रक्षा झुक कर मेरे उपेर आ गई और मैने उसकी गान्ड पकड़ कर उसकी चुदाई शुरू कर दी......

मैं- यीहह….यस…बेबी..यस...

रक्षा-आअहह..आहह..आह…अफ…आहह

मैं-.यीहह..जंप बेबी...

रक्षा- आहह..अह्ह्ह्ह…आह…हाअ…जजूर्र ससी…आहह

मैने कमर उछाल –उछाल कर रक्षा को चोद रहा था और रक्षा पूरा दिल लगा कर अपने जिस्म को उछाल-उछाल के मुझसे चुदवा रही थी…

रक्षा- आहह…ज़ोर सी,,,,,आअहह…यस…...ज़ोर..से…फाड़…दूं..आहह

मैं- उउंम्म…आह…ये ले…..लंड खा…ये ले….उउम्म्म्मम

रक्षा- हाँ…ऐसे ही,….ऑश...म्मा…..फादद्ड़…..आहहाहह…..उउफ़फ्फ़…

मैं थोड़ी देर तक रक्षा को चोदता रहा ऑर फिर रक्षा खुद ही उछल-उछल कर लंड को लेना शुरू कर दिया…

रक्षा-आअहह…आहह...आहह…उउउफ़फ्फ़….हहाअ

मैं-यस बेबी…जंप….याआ..एस

रक्षा-आअहह…आहह…हहा…हाअ…आहह

मैं- एस…जंप…ज़ोर से..यस..बेटा..

रूम मे अब आवाज़े बढ़ने लगी थी...

फफफफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए..हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…

..तीज़्ज़ज्ज…हहाअ…उउउफफफ्फ़..एसस्सस्स…आअहह…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह…आअहह

मैं-यस बेबी यस

रक्षा- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…फफफफफफुऊफ़ुऊूक्कककककक…म्माईिईन्न्न,….आआईयइयाय …आअहहहह…ऊओ…म्मा….ऊहह…ऊहह..ऊहह

ऐसे चिल्लाते हुए रक्षा झड़ने लगी ऑर उसका चूत रस मेरे लंड से मिलके फुकछ-फुकछ की आवाज़े करने लगा…

रक्षा झड़ने के बाद भी उछलती रही....मैं भी झड़ने के करीब था तो मैने फिर से रक्षा को लिटाया और उसके मुँह के सामने लंड कर दिया...

रक्षा ने तुरंत लंड मुँह मे भर लिया और चूसने लगी...

रक्षा- उउंम्म..उउंम..उउंम..

मैं- एस..बेबी ....कमिंग...येह्ह..यह...

मैं रक्षा के मुँह मे झड गया और इस बार रक्षा पूरा लंड रस पी गई...पर उसकी लाख कोशिश के बाद भी थोड़ा लंड रस उसके मुँह से निकल कर उसके गले और सीने पर आ गया....

दमदार चुदाई के बाद हम रेस्ट करने लगे ...

थोड़ी देर बाद मैने रक्षा को उसके रूम मे रेस्ट करने भेज दिया और मैं भी फ्रेश हो कर रेडी हो गया...

तभी मेरे सेल पर एक अननोन कॉल आ गया...जैसे ही मैने कॉल लिया तो पता चला कि ये तो उसी लड़की का कॉल है जो पहले भी आया था....

और मैं सोचने लगा कि आख़िर ये है कौन और मेरे पीछे क्यो पड़ी हुई है.....

मैने कॉल पिक की

(कॉल पर)

मैं- हेलो...

अननोन- हेलो...हाउ आर यू ??

मैं - फाइन...हू आर यू ...??

अननोन- आप बताओ...

मैं- मैने कैसे बता सकता हूँ मेडम...

अननोन- अरे..पहचानो ना...

मैं(गुस्से मे)- मैं कैसे पहचानू...तुम ही बोलो...नही तो मैं फ़ोन रखता हूँ....

अननोन- मुझे तो लगा था कि आप स्मार्ट हो...पर आप तो...हहहे...

मैं- क्या मतलब...हँसने वाली क्या बात है...अब मैं क्या सबको पहचानू क्या....

अननोन- ह्म्म..पर कुछ लोगो को तो पहचानो...जिनसे आप मिल चुके हो...

मैं- ये ज़रूरी नही..ओके

अननोन- ओके...तो आज के बाद किसी से ये मत कहना कि..."हम वो है जो दिल मे बसना जानते है, दिल तोड़ना नही..."....ओके...बाइ...

सामने वाली ने अपनी बात बोलकर फ़ोन कट कर दिया...और मैं सोचने लगा कि इसने ऐसा क्यो कहा...क्या मैं इससे मिला हूँ और मैने ही इससे ये लाइन कही....

पर किससे बोला था ये...बोला तो कई बार है...पर उनमे से ये कौन हो सकती है....

 


मैं अपनी सोच मे था कि तभी संजू आ गया और आते ही बोला...

संजू- क्या भाई...क्या कर रहा था...

मैं- तू..जल्दी आ गया...

संजू- हाँ..क्यो..तेरा कोई काम खराब हो गया क्या...??

मैं- क्या बक रहा है...ऐसा कुछ नही...मैं तो अभी सो रहा था...अभी जगा हूँ...

संजू- ह्म्म..वैसे बाकी सब कहाँ है...और आंटी का रूम बाहर से किसने लॉक किया था...

मैं- क्या...रूम लॉक था...मुझे नही पता किसने किया...और बाकी सब...शायद सो रहे होंगे...हाँ..आंटी घर पर नही है...

संजू- क्यो ..मोम कहाँ गई...??

मैं- पता नही...जब हम आए तब भी नही थी...

संजू- ओके ..वैसे ये बता कि मेरा काम कब करेगा...

मैं- कौन सा काम बे...??

संजू- भूल गया...अबे जिस वजह से तू यहाँ आया था...मोम...

मैं- ओह हाँ...जल्दी कर दूँगा...

संजू- कब...सिर्फ़ 2 दिन बचे है एग्ज़ॅम के फिर तू तो चला जाएगा और मैं घंटा हिलाउन्गा....

मैं- डोंट वरी...कल रात तेरी सुहागरात...तेरी मोम के साथ...खुश...

संजू- बहुत खुश...पर पक्का ना...

मैं- ट्रस्ट मी...

संजू- थॅंक्स भाई...

मैं- तेरे लिए तो कुछ भी यार...

तभी आवाज़ आई कि...और मेरे लिए क्या करोगे...???

मैं और संजू..दोनो आवाज़ सुनकर गेट की तरफ देखने लगे...वहाँ पूनम दी खड़ी थी...

मैं और संजू आँखो ही आँखो मे एक-दूसरे से बोल रहे थे कि कहीं इसने तो नही सुन लिया...तभी...

पूनम- बोलो...मेरे लिए क्या करोगे...

मैं- वो...जो आप कहे...आपका हुकुम सिर आँखो पर...

पूनम - प्रोमिस...

मैं- पक्का प्रोमिस...ओके...

पूनम- ह्म्म..चलो इसी बात पर कॉफी पिलाती हूँ...

मैं- हाँ...जल्दी लाओ...

पूनम कॉफी बनाने निकल गई...ऑर संजू बोला...

संजू- यार, दीदी ने सुन तो नही लिया...???

मैं- नही रे...सुन लेती तो बॅंड बजा देती...टेन्षन मत ले....वैसे तू जल्दी कैसे आ गया...???

संजू- वो...आक्च्युयली मेरे फ्रेंड को अपनी मोम के साथ कहीं जाना पड़ा...तो मैं आ गया...चल मैं फ्रेश हो आता हूँ...फिर घूमने चलते है...आज एग्ग्रोल्ल खाने का मन है..

मैं-ओके...फिर जल्दी कर...

संजू बातरूम मे निकल गया और मैं सोचने लगा कि ठीक हुआ संजू पहले नही आया ...वरना रक्षा के साथ देख लेता तो क्या होता...बच गये...

थोड़ी देर बाद मैं संजू के साथ नीचे आ गया और फिर पूनम दी के साथ कॉफी पी और पूनम दी को बता कर हम दोनो कार से निकल गये....

फिर हम मार्केट मे एग्ग्रोल्ल की शॉप पर खड़े थे...तभी मुझे मेरे आदमी का कॉल आया...पर मैने कट कर दिया...

मैं संजू के सामने कोई बात नही करना चाहता था...इसलिए मैने अपने आदमी को मेसेज कर दिया...

मैं एग रोल का मज़ा लेने के बाद...बाकी लोगो के लिए भी रोल पॅक करवाने लगा...तब तक संजू डिन्नर के लिए पनीर लाने गया था...

उसी समय आंटी की फ्रेंड कुसुम उस शॉप पर आ गई....

मैं- हेलो..

कुसुम(डरते हुए)- हेलो..

मैं- आप यहाँ मिल जायगी सोचा ना था...कैसी है आप...

कुसुम- वो..मैं ठीक हूँ...

तभी वो पोलीस वाला मुझसे बोला...

(पोलीस वाले का नाम रफ़्तार सिंग है..जिसे मैने र्स लिख रहा हूँ )

र्स- ये लड़के...कौन है तू...???

मुझे उसके बोलने की टोन बिल्कुल पसंद नही आई पर पोलीस की ड्रेस देख कर मैने आराम से जवाब दिया...

मैं- मेरा नाम अंकित है...पर आप क्यो पूछ रहे है...

र्स - क्योकि तू मेरी बीवी से बात कर रहा है....

मैं- आपकी बीवी...मतलब कुसुम आंटी...

र्स(आँखे दिखा कर )- हाँ...कुसुम ...ये मेरी बीवी है...

मैने दोनो को देख कर सोचने लगा..कि कहाँ ये गोरी कुसुम और कहा ये काला- मोटा सांड़ ...ये कुसुम ने इससे शादी क्यो की...

र्स- तू इसे कैसे जानता है...???

मैं- वो मैं रजनी आंटी के साथ इनके घर आया था...तभी देखा था...

र्स- ह्म्म..रजनी तेरी आंटी है...??

मैं- हाँ...

र्स- ठीक है...पर जानने का मतलब ये नही कि तू कहीं भी इसे हेलो बोले...(अपनी बीवी से) और तू ...तेरे को बड़ा हेलो बोलना होता है...क्या मैं काफ़ी नही...जो ..

कुसुम- प्ल्ज़्ज़...बेटा तुम जाओ...

मैं कुछ पूछना चाहता था पर टाइम सही नही था...इसलिए मैं अपना समान ले कर चुप- चाप निकल आया...आते हुए मुझे कुसुम की आँखो मे शर्मिंदगी के आँसू दिख रहे थे...पर मैं यहाँ कुछ नही कर सकता था...

कुसुम का पति भी मुझे अकड़ के देखता रहा..जब तक की मैं शॉप से निकल नही आया....

फिर मैं संजू के साथ घर आ गया...अब रजनी आंटी भी आ चुकी थी और उनके साथ ही सब लोग हॉल मे बैठे हुए थे...सिर्फ़ रक्षा नही दिख रही थी...वो चुदाई की वजह से सो रही होगी...

हॉल मे सबको देख कर मुझे अंदाज़ा हुआ कि कुछ सीरीयस बात है...क्योकि सबके चेहरे उतरे हुए थे....

हम ने समान रखा और मैं बोला...

मैं- क्या हुआ...आप लोग ऐसे...चुप क्यो है...कुछ प्राब्लम है क्या...

आंटी- बेटा वो...कामिनी का आक्सिडेंट हो गया....

मैं- क्या...कैसे..कब...???

आंटी- कल रात को...वो कहीं से आ रही थी तो कार कहीं टकरा गई...

मैं- ओह...वो ठीक तो है ना...???

आंटी- हाँ..वो बिल्कुल ठीक है...बस थोड़ा डरी हुई है....उसे चोट नही आई...शीतबेल्ट ने बचा लिया..

मैं- ओह...चलो अच्छा हुआ....तो मैं मिल कर आता हूँ...

आंटी- अभी...??...कल जाना...अभी रहने दे...

मैं- अरे अभी मिलके आता हूँ ना...संजू को साथ ले जाता हूँ...जल्दी आ जाउन्गा...

आंटी- अरे रात हो रही है...अभी रहने दे...

संजू- हाँ भाई...कल चलेगे...और वैसे भी कल पेपर है...अब गॅप नही है...याद है ना...

मैं- ओह ...हाँ यार...सच कहा...तो कल एग्ज़ॅम के बाद चलेगे...ओके

आंटी- हाँ...अब तुम लोग पढ़ाई करो....मैं डिन्नर बनाती हूँ....जाओ सब...

फिर हम सब पढ़ाई करने चले गये....

अनु, पूनम दी के रूम मे पढ़ रही थी...क्योकि रक्षा सो रही थी...संजू और मैं भी पढ़ने लगे...

पढ़ते हुए मुझे याद आया कि कल गॅप नही और मैने रक्षा की चुदाई कर दी...उसको दर्द हो रहा होगा...उसकी पढ़ाई का क्या....यही सोच कर मैं रक्षा के पास आ गया...

 
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