• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चूतो का समुंदर

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


वहाँ कामिनी के घर कामिनी और कमाल की दमदार चुदाई चालू हो गई...और यहाँ मैं कार भगाते हुए एक होटेल के सामने रुका...

मैं जल्दी से कार पार्क करके होटेल के अंदर आया और मॅनेजर के कॅबिन मे जा कर उससे बात करने लगा...

मॅनेजर- हेलो सर...आ गये आप...

मैं- हेलो...मेरा काम हुआ...

मॅनेजर- हाँ...फिल्म चालू है ...ये देखिए...

और मॅनेजर ने मुझे अपना लॅपटॉप घुमा कर दिखा दिया....

मैने स्क्रीन पर देखा तो सामने आंटी की उस मर्द के साथ दमदार चुदाई चालू थी...

आंटी को उस मर्द के साथ देख कर मैं हैरान तो हुआ बट खुश भी था...क्योकि अब मुझे मेरे प्लान के लिए एक न्यू आइडिया मिल गया था उस मर्द के साथ आंटी को देख कर....

मैं लाइव चुदाई देख ही रहा था कि रेणु दीदी का कॉल आ गया....

(कॉल पर)

रेणु- हेलो भाई...कहाँ पहुचे...???

मैं- जहाँ पहुचना था...

रेणु- ओह्ह...तो देख लिया ना उस रांड़ को...

मैं- ह्म्म...अब इसे कौन बचायगा मुझसे...

रेणु- हाँ भाई..इसकी अच्छे से फाड़ देना...इस तक पहुचने के लिए मैने अपनी फाडवाई है...

मैं- हाँ मेरी जान...मुझे दुख है कि इस प्लान के लिए तुम्हे इस तरह का काम करना पड़ा...सॉरी...

रेणु- अरे भाई...तेरे लिए तो जान भी दे दूं...बस तुम आगे बढ़ो...एक बार सब सामने आ जाए फिर गिन-गिन कर हिसाब लेगे..ओके..

मैं- हाँ मेरी जान...पक्का..

रेणु- अब मैं रखती हूँ...तुम आगे सम्भालो...और फिर बताना मुझे कि आख़िर बात क्या है...

मैं- ओके...चलो बाइ

रेणु- बाइ...

कॉल कट कर के मैने मॅनेजर को कहा कि ये टेप सिर्फ़ मुझे चाहिए, किसी को भनक भी ना मिले इसकी..... और मैं मास्टर की लेकर सीधा रूम की तरफ चला गया...

रूम तक आते ही मैने मास्टर की से लॉक ओपन किया....अंदर दोनो चुदाई मे इतने बिज़ी थे कि उनको पता ही नही चला...

फिर मैने थोड़ा रुक कर गेट पर एक लात मारी और गेट खुल गया...

गेट खुलते ही आंटी और वो मर्द काँप गये और चुदाई रुक गई...उस समय आंटी उस मर्द के लंड की सवारी कर रही थी और बिल्कुल मेरे सामने थी...उनका नंगा बदन देख कर मेरे लंड मे तनाब आने लगा....

मैं(गुस्से से)- ये क्या हो रहा है यहाँ...???

आंटी- वउूओ...ब्बेटा...ततुउउ...य्यहहा...

मैं- हाँ साली रंडी...मैं यहाँ...और तू साली यहाँ क्या कर रही है...

आंटी- वउूओ...माऐईन्न्न....

मैं- वो मैं क्या...साली कितनी भूख है तुझे लंड की जो यहाँ आके खाती है...इतनी ही भूख है तो घर मे लेती रह ना...तेरा बेटा भी खुश हो जाएगा...

आंटी- (चुप रही)

मैं- अब बोल ...मुँह मे लंड धुसा है क्या....

मेरे बात का आंटी ने कोई जवाब नही दिया बस नीचे देख कर रोने लगी....वो मर्द अभी भी आंटी की चूत मे लंड डाले लेटा हुआ था..और मुझे उसकी सूरत नही दिख रही थी....

थोड़ी देर तक रूम मे सन्नाटा छाया रहा...फिर मैने ही गेट को बंद करके सन्नाटा तोड़ा और बेड के पास जाने लगा...

मैं(बेड के पास आते हुए)- देखु तो कि रंडी किसका लंड खा रही थी....

और जैसे ही मैं बेड के पास पहुचा तो उस मर्द को देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गई ...

मैं- ओह्ह..तो आप है...अरे आंटी इनका लंड खाने के लिए आप होटेल तक क्यो आई...इनका लंड तो आप घर मे ही ले लेती...आख़िर आपके प्यारे देवेर जी है ये तो....

( हाँ ये संजू के चाचा थे जो आंटी को चोद रहे थे..और कल रात भी यही अंकल के सामने आंटी को चोद कर गये थे...और यही है वो एल1 जिसने एल2 को अपायंट किया था...एल2 के बारे मे आगे पता चलेगा...और हाँ जिस लेडी के साथ ये उस रात बात कर रहे थे वो और कोई नही...मेरी रेणु दी ही थी....

आप सब थोड़ा कन्फ्यूज़ हो रहे थे तो कुछ राज़ पर से परदा हटा दिया...पर रेणु दी क्यों...???

रेणु दी को मैने ही इनके(संजू के चाचा) पास भेजा था...ये मेरे प्लान का हिस्सा था...इन पर मुझे शक कब और कैसे हुआ..ये आगे पता चलेगा... और रेणु दी इनके साथ किस तरह...क्या कह कर सेट हुई.....ये मुझे भी नही पता....अभी मुझे इस बात का अंदाज़ा भी नही कि रेणु दी इन सब के बॉस को जानती है या उनसे मिली है....)

( मेरे प्लान रेणु के ज़रिए संजू के चाचा को एक्सपोज़ करना था.....अब रेणु दी इस खेल मे किसके साथ और क्यो है....ये तो फ्यूचर मे ही सामने आएगा....)

****----*******------*******-------******------********------*******--------****------******------*****-----*******

यहाँ होटल रूम मे आंटी अभी शरम से ..और पकड़े जाने से अपनी आँखे नीचे किए हुए बैठी थी और वो मर्द भी सुन्न पड़ा हुआ था और मैं उनकी इस हालत पर खुश हो रहा था....

और वहाँ संजू के घर...संजू अपनी माँ को चोदने का ख्याल लिए घर पहुचा और सीधा बाथरूम मे घुस कर मूठ मारने लगा....

संजू अपनी माँ के नाम की मूठ मारते हुए बार-2 माँ को याद करते हुए बड़बड़ा रहा था...और जैसे ही वो शांत होकर पीछे मुड़ा तो उसके सामने उसकी पूनम दी खड़ी थी...

थोड़ी देर तक दोनो भाई-बेहन मूरत बन कर खड़े रहे.....एक तरफ पूनम अपने भाई का लंड देख रही थी तो दूसरी तरफ सोनू डर रहा था कि पूनम ने उसके मुँह से माँ के बारे मे सुन लिया...पर साथ मे वो नाइटी मे खड़ी पूनम की बॉडी देख कर गरम भी हो रहा था....

थोड़ी देर बाद पूनम रूम से निकल गई....

संजू(मन मे)- ये क्या हो गया...दीदी ने मोम से कह दिया तो...मेरी ही मर जायगी...और चूत तो मिलेगी नही...मेरी गान्ड फट ज़रूर जायगी....ओह गॉड ये क्या हो गया....

दूसरे कमरे मे...

पूनम(मन मे)- अगर संजू मोम के नाम की मूठ मार सकता है तो मेरे नाम की भी मारता होगा...आख़िर मैं तो अभी जवान हूँ...और उसका लंड भी ठीक है...वा....वो भी मुझे घूर रहा था...मैं तो उसके लिए मोम को पटाने की सोच रही थी...पर अब तो मुझे भी उसका लंड चाहिए....बात करनी ही होगी....

दोनो भाई-बेहन एक दूसरे से बेख़बर अपने आप मे खोए हुए थे......

 


होटेल के रूम मे....मैं, आंटी और आंटी के प्यारे देवेर मौजूद थे...आंटी तो जब से पकड़ी गई तबसे ही रो रही थी...संजू के चाचा अपना मुँह मुझसे छिपाने के लिए दूसरी तरफ देखते हुए लेटे थे...और मैं दोनो की ऐसी हालत देख कर स्माइल कर रहा था....

लेकिन अभी भी संजू के चाचा का लंड आंटी की चूत मे पड़ा था..हलकी अब वो मुरझा गया था...और आंटी भी अपनी गान्ड पसार कर लंड चूत मे लिए हुए बैठी थी....

रूम मे सन्नाटा छा गया था....एक बार फिर मैने सन्नाटा तोड़ा....

मैं- आंटी...अब लंड खा चुकी हो तो बक्श दो उसे...पूउक्चह...

मेरे पुचकार्ते ही आंटी को अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ और वो जल्दी से उठ कर साइड हुई और अपनी बॉडी को बेडशीट से ढक लिया....

आंटी के उठ ते ही संजू के चाचा ने अपने हाथो से अपना लंड छिपा लिया...

मैं- ओह हो...अब शर्म आ रही है...और जब उछल-उछल के लंड खा रही थी..तब ये शर्म कहाँ गई थी...क्यो आंटी....??

आंटी(अपनी आँखो से शर्म के आँसू बहाने लगी)

मैं- और अंकल आप...उठो और कपड़े पहनो...मुझे आपसे बात करनी है.....

जैसे ही मैने अंकल से इज़्ज़त से बात की तो वो हैरान हो कर मुझे देखने लगे....मैने उन्हे इशारे से जल्दी करने को कहा तो वो उठ कर जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगे.....

मैं- आंटी...आप रेस्ट कर लो...चुदाई से थक गई होगी ना...??

आंटी-(चुप-चाप नीचे नज़रे किए हुए बेडशीट को जाकड़ कर बैठी रही)

संजू के चाचा कपड़े पहन कर खड़े हो गये पर उनकी आँखो मे अभी भी डर था...शायद ये सोचकर कि पता नही मैं क्या करने वाला हूँ....

( आप संजू के चाचा के बारे मे ये तो जान ही चुके है कि यही वो एल1 थे...चलिए इनका नाम भी बता दूं...इनका नाम है विनोद..)

मैं- हाँ अंकल तो आप बोलना शुरू कीजिए...

विनोद- मैं...क्या...बेटा..???

मैं- वही जो मैं जानना चाहता हूँ...

मेरी बात सुनकर अंकल खामोश रहे और सवालिया नज़रों से मुझे और आंटी को देखने लगे....जैसे कि पूछ रहे हो कि मैं क्या बोलूं....

मैं- अब बोलो भी...

विनोद- मैं क्या बोलू बेटा....???

मैं- अबे इज़्ज़त से बात करो तो समझ नही आता क्या...ये बता साले कि यहाँ अपने भाई की बीवी को क्यो चोद रहा था भडवे...अब कुछ बात कानो मे गई कि नही...बोल अब....

मुझे गुस्से मे देख कर अंकल भी डर गये और आंटी की तो बिना लंड डाले ही गान्ड फट गई....

विनोद- वो..बेटा...वो हुआ यूँ कि...वो..

मैं- अबे भडवे..क्या वो- वो लगा रखा है...जल्दी बोल साले...

विनोद- बेटा मेरी ग़लती नही है..ये सब इसका किया धरा है...यही है सारे फ़साद की जड़...(आंटी की तरफ उंगली करके बोला)

मैं(आँखे नचाते हुए)- अच्छा...तो तू बेचारा इसके कहने मे आ गया...ऐसा क्यो....???

विनोद- हाँ बेटा..मैं सच बोल रहा हूँ..इसने ही मुझे फसाया...ये है ही साली रंडी....

मैने अंकल के रंडी बोलते ही उनके गाल पर थप्पड़ मार दिया...

मैं- चुप कर....अब ये रंडी हो गई...तो तू क्या हुआ...साले भडवे...

अंकल को थप्पड़ मारने से अंकल जहाँ शॉक्ड हो गये...वही आंटी मेरी तरफ आँखे फाड़ के देखने लगी...शायद उन्हे इस थप्पड़ की उम्मीद नही थी....

विनोद- मुझे मारने से क्या होगा...मारना है तो इसे मार...मैं तो इसी के कहने से सब कर रहा हूँ...

अंकल की बात सुनकर आंटी सकपका गई और उनके चेहरे का रंग उड़ गया...और आंटी का ये हाल देख कर मैं मन ही मन खुश हो गया...

अगले ही पल मैने अंकल को एक और थप्पड़ रसीद दिया....

मैं- चुप कर...एक शब्द नही...साले अपनी ग़लती छिपाने के लिए आंटी को बदनाम करता है...अब बिल्कुल चुप रहना....

मेरी बात सुनकर और दूसरा थप्पड़ खाने के बाद अंकल तो जैसे मूरत बन गये और गाल पर हाथ रख कर मुझे देखने लगे....यहाँ आंटी का भी यही हाल था और वो मुझे आँखे फाडे देख रही थी...मैने फिर से बोलना शुरू किया...

मैं- खबरदार जो अब मेरी आंटी के बारे मे ग़लत बोला तो...मैं उनके खिलाफ एक शब्द नही सुनना चाहता...

मेरी बात का असर आंटी पर क्या हुआ ये तो बताना मुस्किल था पर अंकल तो मुझे ऐसे देख रहे थे कि कह रहे हो की....साला पागल हो गया है...जो तेरी मारने के लिए प्लान कर रही है...उसी की तरफ़दारी कर रहा है....

मैं भी समझ रहा था कि अंकल की हालत क्या हो रही है...पर ये मेरे प्लान का एक हिस्सा था....

मैं- अंकल अब तू यहाँ से जा और रूम *** मे मेरा वेट कर...तुझे वही देखुगा...

विनोद- पर मेरी...

मैं(बात काट कर )- बोला ना जा..जा यहाँ से..दफ़ा हो...

और मैने अंकल को गेट खोलकर बाहर कर दिया और उन्हे दूसरे रूम मे रुकने का बोल कर गेट वापिस लॉक कर लिया....

जैसे ही मैं गेट लगा कर पलटा तो मुझे देखते ही आंटी फुट-फुट कर रोने लगी....उन्हे रोते हुए देख कर मैं मन ही मन हँसने लगा...

मैं(मन में)- कितनी बड़ी ड्रामेबाज़ है ये...अभी रंडी की तरह लंड खा रही थी और अब...और तो और मेरे पीठ पीछे मुझे ही बर्बाद करने का प्लान कर रही है और मुझ पर प्यार लुटाती रही....साली ड्रामेबाज़ रंडी....हाहाहा....

आंटी बराबर रोए जा रही थी और मुझे देखते हुए सोच रही थी कि अब मैं उनसे क्या कहूँगा...पर मैने भी तय कर लिया था कि आंटी को प्यार से हॅंडल करना होगा...इन्हे भनक भी नही लगनी चाहिए कि मैं इनके प्लान के बारे मे कुछ भी जानता हूँ....

मैं फिर आंटी के पास गया और जल्दी से बेड पर चढ़ गया...और मैने प्यार से आंटी के आँसू पोछते हुए कहा....

मैं- बस करो आंटी...अब नही...बिल्कुल मत रोना...

आंटी(सुबक्ते हुए)- बेटा ....मुझे ...म्माफ़फ्फ़....हुहुहू.....

और आंटी मेरे सीने से लग गई...

मैं- आंटी आपको संजू की कसम...चुप हो जाओ...फिर बात करेंगे...

संजू की कसम देते ही आंटी चुप हो गई और बोली...

आंटी- ओके..अब नही रोउंगी...पर प्लीज़ कह दे कि तूने मुझे माफ़ कर दिया...

मैं- ह्म्म..कर दूँगा पर एक शर्त है...

आंटी- हाँ बेटा बोल...मुझे सब मंजूर है...

मैं- तो मुझे ये बताइए कि ये सब क्यों हुआ और शुरुआत कहाँ से हुई...

आंटी- बेटा ये बात तब शुरू हुई थी जब मैं सेक्स के लिए तड़पति थी...उस टाइम संजू के पापा तो मुझे खुश नही कर पाते थे तो मैने अपनी फ्रेंड के कहने पर बाहर वालो से सेक्स किया....तभी एक दिन मुझे सेक्स करते हुए संजू के चाचा ने देख लिया...वो पता नही कहाँ से उस होट्ल मे आ गये थे ...और बस फिर क्या....उस दिन से मुझे उनको भी खुश करना पड़ा....

और हाँ...जबसे तू मुझे मिला तो मैने किसी को अपने पास भटकने नही दिया...लेकिन विनोद को मैं मना नही कर पाई...नही तो ये घर मे मुझे बदनाम कर देता....

आंटी ने बहुत ही बेबाकी से एक झूठी कहानी मुझे सुना दी..ताकि मुझे उनसे सहनभूति हो...पर मैं तो सब जान गया था...फिर भी मैं उनके सामने चुप ही रहा....

मैं- ओह्ह ..तो ये बात थी....इसमे आपकी ग़लती नही...आप अपने आपको ग़लत मत समझो और प्लीज़ रोना मत...

आंटी- बेटा तूने मुझे माफ़ कर दिया ना...

मैं- हाँ आंटी...मुझे आपसे कोई शिकायत नही...

आंटी(मन मे)- ओह...थॅंक गॉड...ये मेरी बात मान गया.....बच गई आज तो...अब बस विनोद अपना मुँह बंद रखे तो अच्छा होगा....

मैं(मन मे)- तू खुश हो रही होगी ना...कोई बात नही...अभी खुश हो जा...बाद मे तो तू खून के आँसू रोएगी....

आंटी- पर बेटा तुम यहाँ...कैसे...???

मैं- वो क्या हुआ आंटी कि मैं अपने फ्रेंड से मिलने होटल मे आया था...तभी मुझे आप दिख गई...और जब आप काफ़ी देर तक नही आई तो मैने पता किया कि आप किस रूम मे है...और मुझे कुछ शक हुआ जब मैने देखा कि रूम किसी मर्द के नाम है तो मैं आ गया...बस...

आंटी- पर बेटा ये बात किसी को पता ना चले...तेरे अंकल को शक भी हो गया तो वो मर जायगे....

मैं(मन मे) - साली ..जब कल रात को अपने पति के सामने अपने देवेर से चुद रही थी तब तो वो मरा नही...अब मर जाएगा...रंडी साली..

 


( मैने चुदाई के वीडियो मे ये बात सुन ली थी जो इस रूम मे लगे सीक्रेट कमरे से शूट हो चुका था....यहाँ कमरा मैने ही लगवाया था क्योकि रेणु ने मुझे पहले ही बता दिया था कि विनोद इसी रूम मे आने वाला है...)

आंटी- बेटा...बेटा...कहाँ खो गया...

मैं- ह्म्म..कही नही...बोलिए..

आंटी- बेटा ये बात...

मैं(बात काट कर)- हमारे बीच मे ही रहेगी...डोंट वरी....

आंटी- थॅंक यू बेटा...

मैं- ह्म्म..पर सज़ा तो आपको मिल के रहेगी आंटी...

आंटी(चौंकते हुए)- सज़ा...कैसी सज़ा बेटा...??

मैं- आपने मुझे ये बात पहले क्यो नही बताई...

आंटी- कैसे कहती बेटा...तू मुझे ग़लत समझता ..

मैं- तभी..सज़ा तो मिल कर रहेगी...मेरे अलावा किसी दूसरे से चुदाई करने के लिए...

आंटी- ह्म्म..तो ठीक है...दे दे सज़ा...मैं इसी लायक हूँ...

मैं- सज़ा तो सुन लो..

आंटी- जो तू कहे...मुझे मंजूर होगा...

मैं- ह्म्म...तो आज और अभी मैं आपको रंडी की तरह चोदुन्गा...ओके

आंटी(खुश होकर) - अच्छा...मजूर...

मैं- ह्म्म...पर आज आंटी नही...रंडी चुदेगि....समझी...

आंटी- मैं तो तेरी रंडी ही हूँ...जैसा चाहे...वैसा चोद ले...

मैं - ह्म्म...तो अभी लो...

मैं बेड पर खड़ा हुआ और जल्दी से कपड़े निकाल के नंगा हो गया...आंटी ने भी अपने उपेर की बेडशीट हटा दी और पूरी नंगी मेरे सामने आ गई....

मैं जल्दी से आंटी के सामने खड़ा हो गया...और आंटी के बाल पकड़ के लंड को उनके मुँह मे डाल दिया....

आंटी के मुँह मे जाते ही मेरा लंड कड़क होना शुरू हो गया....

आंटी- सस्स्रररूउउगगगगग.....सस्स्स्रररूउउग़गग....सस्स्रररूउउगग़गग....

मैं- खा जा रंडी....पूरा खा ले....और ले...

आंटी- सस्स्रररूउउगग़गग...उउंम्म...सस्सुऊउग़गग....

थोड़ी देर मे ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैने आंटी के दोनो साइड पैर डाल कर उनके सिर को पकड़ा और तेज़ी से उनके मुँह को चोदने लगा....

आंटी- सस्ररूउगगगगगग...सस्स्रररूउग़गग....क्क्हूम्म...क्क्हुउऊंम्म....

मैं- ले साली रंडी...गले मे ले...यह...

औनटु- क्क्हुउऊंम..क्क्हुउऊंम्म..क्क्हुऊंम्म...

मैं- और ले गला भर ले....फाड़ दूँगा गला....यस...ये ले...

मैं आंटी के मुँह को बेदर्दी से चोद रहा था और आंटी के मुँह से शब्द भी नही निकल पा रहे थे....उनके मुँह से सिर्फ़ लार बाहर आने लगी और वो साँस भी नही ले पा रही थी...पर मेरे अंदर जो उनके लिए गुस्सा था वो मैं चुदाई करके निकालने वाला था...

मैं- और ले रंडी...आज तेरा गला चोद-चोद के फाड़ डुगा....ये ले...ये ले...

आंटी- ख्हुउऊंम...क्क्हुउऊंम्म..क्क्हुऊंम्म..क्क्हुउंम...

करीब 10 मिनट आंटी का दमदार तरीके से मुँह चोदने के बाद मैने उनका सिर छोड़ दिया और आंटी लंड मुँह से निकाल कर लेट गई और हान्फते हुए साँसे लेने लगी....

मैं- थक गई रंडी...अभी तो शुरुआत है...आज तो तू गई....हाहाहा...

आंटी- आहह..आहह...ऐसे तो मार...आअहह..डालोगे.....

मैं- तुझे कैसे मार दूं...तुझे तडपा- तडपा के मारूगा...समझी रंडी...

आंटी- आअहह...आहह...ह्म्म्मम....तो मार डालो...जैसे चाहो....

मैने आंटी को बाल पकड़ कर उठाया और कुतिया बना दिया....और उनकी गान्ड पर 3-4 थप्पड़ मार दिए...

आंटी- आहह....आओउक्च्छ...आअहह...

मैं- चल कुतिया...अपनी गान्ड दिखा...तेरी गान्ड फाड़ता हूँ...

जैसे ही आंटी आगे झुकी तो उनकी गान्ड उठ कर सामने आ गई और मैने लंड सेट कर के एक ही झटके मे पूरा लंड आंटी की गान्ड मे डाल दिया और धक्के मारने लगा.

आंटी- उउउइ...माआ....मार डाला...आअहह...

मैं- चुप कर रंडी....अब देख कैसे फाड़ता हूँ.....

आंटी- आअहह .....धीरे करो ना...

मैं- चुप साली...रंडी (और मैं आंटी की गांद को थप्पड़ मार कर लाल करने लगा)

मैं फुल स्पीड मे आंटी की गान्ड पर थप्पड़ मारते हुए उनकी गान्ड फाड़ने लगा.......

आंटी- हाय...मार डाला....आअराम से मार...आअहह...

मैं- और चीख रंडी....यही तेरी सज़ा है..

मैने एक हाथ से आंटी के बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उनकी गान्ड पर थप्पड़ जड़ना चालू किया और फुल स्पीड मे उनकी गांद मारने लगा....

********-----------***********------------********-------------**************

यहाँ आंटी की गान्ड ठुकाई स्टार्ट हुई तो वहाँ कामिनी के घर कमाल और कामिनी की दमदार चुदाई ख़त्म हो रही थी....

कामिनी- आहह...भाई...ओह्ह..कँम्मींगग...

कमाल- यस...येस्स..येस्स..कम बेबी कम...

कामिनी तो झड गई पर कमाल ने चुदाई चालू रखी...थोड़ी देर बाद वो भी झड़ने लगा...

कमाल- ओह...मैं आया....यह...यीहह...आअहह..

कमाल के झड़ते ही दमदार चुदाई ख़त्म हुई....

फिर दोनो भाई-बेहन साथ मे नहा कर रूम मे आए और बेड पर कामिनी कमाल की बाहों मे लेट कर बात करने लगी...

कामिनी- खुश हो भाई ???

कमाल- बहुत खुश...मज़ा आ गया...

कामिनी- ह्म्म...पर असली मज़ा तो तब आएगा...जब हमारा मक़सद पूरा होगा...

कमाल- होगा मेरी जान ज़रूर होगा...टाइम तो आने दो...

कामिनी- हाँ भाई...कितना वेट किया है इसके लिए...है ना...

कमाल- हां और मुझे तो दुनिया से छिपना पड़ा...अपने भाई-बेहन के साथ नौकर की तरह रहना पड़ा...बस अब वेट नही होता....मैं भी चाहता हूँ कि मैं अपने परिवार के साथ खुशी से रहूं...

कामिनी- जानती हूँ भाई...पर थोड़ा और ऐसे ही जी लो....आने वाला वक़्त हमारा ही होगा....

कमाल- सही कहा...हम एक-एक जखम का हिसाब लेगे जो उन्होने हमे दिए है...

कामिनी- ज़रूर भाई...पर याद रहे कि दुनिया को वो दिखाओ जो वो पसंद करे...और करो वो जो हम चाहते है...

कमाल- ह्म्म..ठीक कहा...

कामिनी- अब तुम निकलो....बच्चे आने वाले होंगे...

कमाल-ओके...चलता हूँ...

इसके बाद कमाल कपड़े पहन कर निकल गया और कामिनी भी नाइटी मे आ गई....

कामिनी ने कॉफी मग़वाई और फिर कॉफी पीते हुए आज रात को उस अननोन से होने वाली मीटिंग के बारे मे सोचने लगी........

 


काफ़ी कुछ सोचने के बाद उसने कुछ प्लान किया और मन ही मन तय किया कि अब वो जाने के लिए तैयार है....जो होगा वो देखा जाएगा......

यहाँ मैं आंटी की गान्ड फाडे जा रहा था....आज से पहले मैने आंटी की इतनी वाइल्ड चुदाई नही की थी...लेकिन आज की चुदाई मे मेरा आंटी के लिए गुस्सा, लंड से निकल कर उनकी गान्ड मे बरस रहा था...

आज की गान्ड ठुकाई से आंटी की आँखो से आँसू बहने लगे और वो दर्द से चीख रही थी...इस दौरान आंटी 2 बार झाड़ चुकी थी...पर मैं अभी भी उनकी गान्ड को थप्पड़ो से लाल करते हुए उनकी गान्ड का भुर्ता बना रहा था....

आंटी- आ..आ..एयेए..आ...ईयी...म्मा...आअहह..

मैं- ले साली..और ले...और चिल्ला...यही तेरी सज़ा है....

आंटी- आ..आ..माअफ्फ ..कर दो...आहह..अहज..

मैं- चुप रंडी...ये ले...

मैं थोड़ी देर बाद झड़ने के करीब पहुच गया और मैने आंटी की गान्ड से लंड निकाला और उन्हे पलटा के फिर से लंड उनके मुँह मे डाल दिया और तेज़ी से आंटी का मुँह चोदने लगा.....

आंटी- उउंम... क्क्हुउऊंम्म..क्क्हुऊंम..क्क्हुऊंम..

मैं- ले साली...पूरा ले ...ईससस्स...

और मैं थोड़ी देर बाद झड़ने लगा...मैने आंटी का मुँह लंड पर दबा दिया....और अपने लंड रस से आंटी के मुँह को भर दिया....

आंटी के गले से होते हुए मेरा लंड रस उनके पेट मे जाने लगा और जैसे ही मैने लंड बाहर निकाला तो बाकी का रस उनके सीने पर गिर गया....

आंटी- खों...खों..खूंन्..मार डाला रे...

मैं- अब तुझे हमेशा ऐसे ही चोदुगा...यही तेरी सज़ा है...

आंटी- माफ़ कर दे बेटा...प्ल्ज़्ज़..

मैं- माफी नाम का वर्ड मेरी डिक्षनरी मे नही है मेरी रंडी....

आंटी- ठीक है...जैसा तू चाहे ..वैसा करना...मैने ग़लती की तो सज़ा भी झेलूगी......

मैं- ह्म्म..अब जा कर नहा ले...मैं अभी आता हूँ...तू यही वेट करना...

आंटी- ह्म्म...कहाँ जा रहा है...???

मैं- काम है कुछ...और तू आज से रंडी की तरह रह...रंडिया सवाल नही करती....

और फिर मे कपड़े पहन कर रूम से निकल गया....

मैं रूम से निकल कर सीधा उस रूम मे पहुचा जहाँ विनोद अंकल चेयर पर बैठे हुए बैठे थे और एक आदमी उन पर नज़र रखे हुए था .....मैने ही उनके हाथ पैर बाँधने को बोला था...ताकि उन्हे पता चले कि मैं भी लोगो से टाइम आने पर काम करवा सकता हूँ...और फिर आराम से उनको डरा कर बात कर सकता हूँ....

जैसे ही मैं दूसरे रूम मे गया तो मेरा आदमी बाहर निकल गया और रूम मे रह गये सिर्फ़ मैं और विनोद अंकल....

मैने रूम का गेट लगाया और बोला....

मैं- हाँ तो अंकल...अब कुछ काम की बात हो जाए...

अंकल(डरे हुए)- क्या बात बेटा...किस काम की...???

मैं- ये तो हम दोनो ही जानते है कि इस समय मैं किस काम के बारे मे बात कर रहा हूँ....

अंकल- मैं समझा नही बेटा...मैं तो बस भाभी की चुदाई करता हूँ...वो भी उनके कहने पर...

मैं- अच्छा ..और अपनी बीवी के सामने कमजोर पड़ जाता है...उसकी चूत मे काँटे लगे है क्या ... .??

अंकल- ये तुम्हे कैसे पता....किसने कहा तुमसे...???

मैं- ये छोड़...मुझे तो बहुत कुछ पता है...पर अभी मेरी बात का जवाब दे ..

अंकल- वो...वो तो रजनी ने मना किया था...

मैं- आहह..और तू मान गया....ऐसी कौन सी मजबूरी थी...जिससे रजनी की गुलामी करने लगे...

अंकल- वो बेटा...उसे कुछ ऐसा पता है कि अगर उसने मेरी फॅमिली को बता दिया तो...वो मुझे छोड़ देगे....

मैं- ह्म्म...मैं वो मजबूरी जानना चाहूगा...और उस प्लान के बारे मे भी...जिसमे तुम्हारे साथ दीपा,कामिनी और रजनी भी है...और हाँ अब तो तूने नया मोहरा भी फिट कर लिया...हाहाहा...

विनोद के तो ये सब सुनकर पसीने छूट गए..पर उसे समझ मे आ गया कि ज़रूर रेणु ने मुझे ये सब बताया है....रेणु ही धोखेबाज है...

मैं- क्या हुआ मिस्टर.खिलाड़ी....होश उड़ गये क्या....हाँ

विनोद- तुम्हे ये सब रेणु ने बताया है ना...??

मैं- हमम्म...थोड़ा सा...वैसे ये सोचना छोड़ कि मुझे किस ने बताया...अभी ये सोच कि अब तुम्हारे साथ क्या होने वाला है...

विनोद(घबराते हुए)- क्क़..क्या होने वाला है...त्त...तुम क्या करने वाले हो...???

मैं- ह्म्म..कुछ तो करूगा...कुछ बड़ा सा...कुछ खास...पर ...

विनोद- प्प्प..पर क्या...??

मैं- पर...पहले ये तो जान लूँ कि तूने ये प्लान क्यो बनाया...क्या चाहता है है तू....क्या दुश्मनी है तेरी मुझसे...और तुम्हारे साथियों के बारे मे भी...हाँ....समझा कि नही...???

विनोद- म्म्मा..ऐसा कुछ नही है...मैं तो बस इन सब पर नज़र रख रहा था...बस सिर्फ़ नज़र...और इस सब मे मुझे रजनी ले कर आई....

मैं- ना बेटा ना...मज़ाक नही....दादी मज़ाक के मूड मे नही है...(और मैने विनोद की कॉलर पकड़ कर गुस्से से कहा)- साले मैं सराफ़त दिखा रहा हूँ तो तुझे नखरे सूझ रहे है...अब चुप-चाप से तोते की तरह पढ़ना शुरू कर...वरना...

विनोद- सच मे...मैं तो बस नज़र रख रहा था...रजनी के कहने पर...

मैं- चुप साले...अब तो हद हो गई...रुक 1 मिनट...एक फिल्म दिखाता हूँ...तब शायद तेरा मुँह खुल जाएगा....

मैने मोबाइल निकाल कर वीडियो प्ले किया और चेयर पर बैठे हुए विनोद के साइड मे पैर रखा और मोबाइल उसके सामने कर दिया....

मोबाइल मे चल रहा वीडियो देख कर विनोद चौंक गया...और जैसे-2 वीडियो आगे बढ़ा ,वैसे-2 विनोद के चेहरे का रंग उड़ने लगा और थोड़ी ही देर मे उसकी आँखो से आँसू निकलने लगे....

विडोद- नही...ये नही हो सकता...बंद करो इसे प्लीज़...

जैसे ही विनोद ने रोते हुए आँखे बंद की तो मैने वीडियो बंद किया और उसके सामने खड़ा हो गया....

मैं- अब रोना छोड़ और बोलना शुरू कर..नही तो.....

विनोद(रोते हुए)- तुम जो चाहो...मैं वो करूगा...प्लीज़ इस वीडियो को किसी को मत दिखाना...पल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़...

मैं- ये मेरे पास ही रहेगा...डोंट वरी....अब तुम बोलो...ये सब चक्कर क्या है....

विनोद- बताता हूँ सब बताता हूँ....

और विनोद ने बोलना शुरू कर दिया.....

**********--------------**********----------************---------************

 


वहाँ विनोद मुझे प्लान के बारे मे बताने लगा और यहाँ दूसरी तरफ संजू के घर.....

संजू के घर पूनम और संजू अपने-2 रूम मे लेटे हुए उस इन्सिडेंट के बारे मे सोच रहे थे जो थोड़ी देर पहले दोनो के बीच हुआ था....

संजू(मन मे)- आज ये अच्छा नही हुआ....दीदी ने मुझे ऐसे देख लिया..ये ग़लत है...क्या सोच रही होगी मेरे बारे मे कि मैं कितना गंदा हूँ...अपनी मोम के नाम की ही मूठ मारता हूँ...ओह गॉड , ये कैसे हो गया मुझसे...मैने गेट लॉक क्यो नही किया...और तो और बाथरूम का गेट भी खुला ही रखा...कैसे भूल गया...अब पता नही दीदी क्या करेगी....मोम से बोल दिया तो...और अगर डॅड से बोल दिया तो...ओह माइ गॉड...और अब तो मैं उनसे नज़रे भी नही मिला पाउन्गा....क्या सफाई दूँगा उन्हे....एक काम करता हूँ...दीदी से बात करता हूँ...उनसे माफी माँग लूँगा...पैर पकड़ लूँगा कि एक बार माफ़ कर दे बस...हां यही करना होगा....

वहाँ पूनम ने जबसे संजू का लंड देखा था तो वो भी सोच मे डूबी थी...चुड़दकड़ तो उसे अंकित ने बना ही दिया था इसलिए नया लंड देख कर उसकी चूत मे खुजली मचने लगी थी...

पूनम(मन मे)-आज जो कुछ मैने देखा क्या वो सब सच था या एक सपना....मुझे तो ये सपने जैसा लग रहा है...मेरा सगा भाई ,मेरी मोम के नाम की मूठ मार रहा था...ऐसा कैसे हो सकता है....मेरा भाई तो कितना सीधा लड़का है...फिर ये सब ...???

वेल जैसे भी हुआ हो...उसका लंड तो...आअहह...कितना सॉलिड दिख रहा था....काश वो मेरे नाम की मूठ मरता..ओह्ह्ह...उसका लंड याद आते ही मेरी चूत मे खुजली होने लगी....मैं भी कितनी चुड़दकड़ हो गई हूँ...अंकित ने जो लंड का स्वाद चखाया है..ये उसी का नतीज़ा है कि आज मैं अपने सगे भाई का लंड देख कर बहक रही हूँ....पर अब क्या, अब देर हो चुकी है...अब तो मैं संजू का लंड लेकर ही रहूगी...किसी भी तरह...शाम,दाम,डंड,भेद...जैसे भी हो...अभी उससे बात करती हूँ...हां

संजू और पूनम दोनो अपने-अपने मन मे तय कर के एक- दूसरे से बात करने के लिए अपने रूम से बाहर आए तो दोनो एक-दूसरे के सामने आ गये..और एक-दूसरे को देख कर खड़े हो गये और एक-दूसरे को फटी आँखो से देखने लगे.....

अब आगे ये दोनो क्या करेंगे ...कौन पहले आगे आएगा....देखते है....

********--------*********--------******--------*******------*******----**********------********-------******------*******

यहाँ होटेल के रूम मे विनोद अंकल ने मुझे कुछ बाते बताई , जितना भी वो जानते थे...अब उसने कितना सच और कितना झूठ बोला, ये बताना मुस्किल था.. .और जैसे ही विनोद ने बोलना बंद किया तो मैं बोला...

मैं(गहरी साँस ले कर)- ह्म्म...तो तुम कह रहे हो कि तुम बॉस नही हो...बॉस कोई और है और तुम सिर्फ़ सब लोगो पर नज़र रख रहे थे कि वो लोग क्या करते है...और तुम अपने बॉस को सबकी रिपोर्ट देते हो ..है ना...??

विनोद- हाँ...मेरा काम इतना ही है....

मैं- और रेणु...वो बॉस को जानती है...

विनोद(सोचकर)- शायद नही...

मैं- शायद का क्या मतलब...???

विनोद- जब मैं नही जानता तो वो भी नही जानती होगी...तुम उसी से क्यो नही पूछते...

मैं- ओके...और इसका मतलब ये कि तुम्हारा भी कोई मक़सद नही इस प्लान मे...तुम किसी के लिए काम कर रहे हो बस...??

विनोद- मुझे सिर्फ़ पैसे चाहिए थे....

मैं- ह्म्म..पैसा...ये पैसा चीज़ ही ऐसी है कि कुछ भी करवा देती है लोगो से.....

विनोद- मुझे माफ़ कर दो बेटा....मैं बहक गया था...

मैं- मान लिया तुम बहक गये थे...और मैं तुम्हे माफ़ भी कर दूँगा...पर...

विनोद- पर क्या बेटा...बोलो...

मैं- पर मेरी कुछ शर्त है...

विनोद- शर्त....क्या शर्त...???

मैं- पहली....कि तुम मुझे अपने बॉस के बारे मे बताओ...दूसरी...तुम वो वजह बताओ जिसकी वजह से तुम्हे नया मोहरा मिला...तीसरी....हमारे बीच जो भी बाते हुई वो किसी को पता ना चले...किसी को भी नही...समझ गये...किसी को मतलब किसी को भी नही....

विनोद- मुझे मंजूर है....पर मैं बॉस से कभी मिला नही और उसका नंबर भी नही...उसे जब काम होता है तभी कॉल करता है...हमेशा न्यू नंबर से....और मैं अपने बीच की बातें किसी को नही बोलूँगा...

मैं- ह्म्म...और वो राज़....??

विनोद- ह्म्म..सुनो....($$$$$$$$$$$$$$)

मैं- सच मे....क्या बात है...मज़ा आ गया....

विनोद- अब खुश हो ना...

मैं- ह्म्म..पर याद रखना...जिस दिन तुम अपनी बात से पलटे उसी दिन ये वीडियो....

विनोद- नही-नही...मैं याद रखुगा...आज से सब तुम्हारे हिसाब से करूगा...

मैं- ओके...तुम मेरा काम करो और खुश रहो...ओके...

विनोद- ओके...अब मैं जाउ...

मैं- ह्म्म..(मैने अपने आदमी को बुलाया और विनोद को खुलवा दिया...)

विनोद- ओके..मैं जाता हूँ...

मैं- ह्म्म..पर सुनो...

विनोद- अब क्या...???

मैं- अपनी बीवी को आज के बाद हाथ भी मत लगाना...जब तक मैं ना कहूँ...

विनोद- ओके..समझ गया...

जैसे ही विनोद निकला..कुछ देर मे ही रेणु का कॉल आ गया...

(कॉल पर)

रेणु- क्या न्यूज़ है भाई...??

मैं- कुछ खास नही..वो निकल गये हाथ से...(झूठ बोला)

रेणु- क्या...???..मतलब ..कुछ भी पता नही चला कि कौन क्या कर रहा है तुम्हारे खिलाफ...

मैं- क्या मतलब..किसकी बात कर रही हो...??

रेणु- अरे कामिनी और रजनी की...दीपा तो गई ना...

मैं- ह्म्म...कोई खास बात पता नही चली..वही पुरानी बातें..ये तुम्हे पता करना होगा...और बॉस के बारे मे भी...

रेणु- बॉस के बारे मे पता करना मुस्किल है ...मेरी तो बॉस से बात होती नही और विनोद हमेशा अकेले मे ही बॉस से बात करता है...फिर भी आइ विल ट्राइ माइ बेस्ट..

मैं- ओके ..गुड लक...

रेणु- ओके अब आगे क्या सोचा है...??

मैं- अभी तो कुछ नही...कुछ होगा तो बताउन्गा....अभी मैं आंटी को देख लूँ..

रेणु- ओके...देख लो...बाइ

मैं- बाइ...

कॉल कट होते ही मैं सोच मे पड़ गया....

मैं(मन मे)- विनोद के जाते ही रेणु का कॉल आना और दोनो का सेम आन्सर देना, इत्तेफ़ाक़ नही हो सकता...रेणु की विनोद से बात हुई होगी और विनोद ने वही किया होगा जो मैने उसे करने को बोला..पर रेणु का इतनी इंक्वायरी करना समझ नही आया...आख़िर क्यो...???

वो इस सब मे इतना इंटरेस्ट ले रही है जैसे कि टारगेट मैं नही वो है....शायद ये उसका प्यार है मेरे लिए या फिर उसका भी कुछ फ़ायदा है ..ये वो कुछ गेम खेल रही है........??????

मैं रेणु दी के बारे मे सोचने लगा कि क्या उसका कोई अपना फ़ायदा है या सिर्फ़ वो मेरी खातिर मेरी हेल्प कर रही है....पहले तो मुझे उस पर डाउट हुआ पर बाद मे मेरे दिल ने ये मानने से इनकार कर दिया कि रेणु दी मुझे धोखा दे सकती है....

फिर मैं सीधा होटल के मॅनेजर के पास गया और वीडियो डिस्क ले ली...जिसमे आंटी और विनोद की चुदाई रेकॉर्ड थी...फिर मैने आंटी को साथ लिया और संजू के घर जाने लगा....

 
कार मे आंटी बोली...

आंटी- बेटा पहले मेरी फ्रेंड के घर चलना...फिर बाद मे घर...

मैं- क्यो...अभी कौन सा काम आ गया...???

आंटी- बेटा वो...मैं जो कपड़े घर से पहन के आई थी वो मेरी फ्रेंड के घर है...और ये ड्रेस उसकी है..जो मैने पहनी है...

मैं- ओह तो अपने यार से मिलने के लिए छुप-2 कर हॉट ड्रेस पहनती हो..हाहाहा...

आंटी(आत्मगिलानी से सर नीचे करके रह गई)

मैं- कम ऑन आंटी..ऐसे मुँह मत लटकाओ...जो हो गया सो हो गया..आगे से याद रखना...

आंटी- ह्म्म..आज से कुछ ग़लत नही करूगी....बस तू मुझे माफ़ कर दे...

मैं- ह्म्म..अब ये बताओ कि चलना कहाँ है...

फिर आंटी ने रास्ता बताया और मैने कार उस रास्ते पर दौड़ा दी...थोड़ी देर बाद हम आंटी की फ्रेंड के घर के बाहर खड़े थे...

डोर बेल बजाने पर गेट खुला और कुसुम हमारे सामने आ गई....कुसुम वैसे तो एक सीधी-सादी घरेलू महिला थी...बट आंटी की संगत मे पड़ कर वो भी सेक्स के मज़े लेने लगी थी...पर अभी तक उसकी हिम्मत नही हुई कि किसी गैर मर्द के साथ सेक्स कर सके...वो बदनामी से डरती थी पर उसे किसी गैर के साथ सेक्स करने का बहुत मन था...

पर कुसुम अपने पति से भी डरती थी क्योकि कुसुम का पति पोलीस मे है....

(कुसुम के पति के बारे मे आगे बात करेंगे....)

कुसुम- हाई...आ गैइइ....ऊओह...तुम भी...

(मुझे आंटी के साथ देख कर कुसुम चौंक गई और आगे कुछ कहते-कहते रुक गई...)

आंटी(बात संभालते हुए)- वो कुसुम...ये मुझे रास्ते मे मिल गया तो मैं साथ ले आई...ये अंकित है...

कुसुम- अरे तो उसमे क्या...और मैं इसे जानती हूँ...ये संजू का फ्रेंड है और तुम्हारे बेटे जैसा है तो मेरा भी बेटा हुआ ना...आओ अंदर आओ...

हम अंदर गये और मैं सोफे पर बैठ गया जबकि आंटी चेंज करने अंदर रूम मे निकल गई..और कुसुम किचन मे....

थोड़ी देर बाद कुसुम कॉफी और स्नकस ले कर आई...

मैं-अरे इसकी क्या ज़रूरत....

कुसुम(बीच मे ही)- अरे ऐसे कैसे...तुम पहली बार मेरे घर आए..कुछ तो लेना पड़ेगा....लीजिए...

मैने कॉफी ली और बिस्किट के साथ कॉफी की चुस्कियाँ लेने लगा....थोड़ी देर बाद आंटी भी चेंज कर के आ गई और फिर साथ मे हम कॉफी पीते हुए बातें करने लगे....

10-15 मिनट बाद हम जाने के लिए रेडी हुए तभी कुसुम, आंटी को अंदर ले गई और थोड़ी देर बाद वापिस आई ...

जब हम जाने लगे तो कुसुम ने कहा...

कुसुम- फिर आना बेटा...

मैं- हाँ ..आंटी के साथ ज़रूर आउन्गा...

कुसुम- आंटी के साथ ही क्यो...कभी भी आना...ये घर अपना ही समझो.....

मैं- जी..ज़रूर आउन्गा...ओके बाइ...

आंटी- बाइ कुसुम....

कुसुम- बाइ...और मेरा काम याद रखना रजनी...बब्यए

आंटी ने कुसुम की बात पर स्माइल कर दी और अंगूठा दिखा कर ओके बोल दिया...

फिर हम संजू के घर पहुचे..अंदर आते ही मैं संजू के रूम मे चला गया ...पर मुझे वहाँ संजू नही मिला....

फिर मैं अनु के रूम मे गया तो अनु सो रही थी....

कितनी प्यारी लग रही थी अनु उस वक़्त ..ये शब्दों मे बता पाना मुस्किल था मेरे लिए...

मैं धीरे से अनु के पास गया और झुक कर उसके चेहरे पर आई बालों की लट को हटा दिया....

मेरे स्पर्श से अनु कसमासाई तो मैने जल्दी से हाथ पीछे कर लिया...क्योकि मैं नही चाहता था कि अनु अभी जाग जाय....क्योकि अभी मुझे एक इम्पोर्टेंट काम से जाना था...

मैने नज़र भर कर अनु को देखा और फिर रूम से चुप-चाप निकल आया...

फिर मैं वापिस नीचे आ गया....वहाँ पर आंटी के साथ मेघा आंटी भी आ गई थी और दोनो गॉसिप कर रही थी....

मैं- आंटी..मैं आता हूँ...

आंटी- कहाँ जा रहे हो...???

मैं- एक फ्रेंड के पास...थोड़ा काम है...

आंटी- ओके ..जल्दी आना..रात होने वाली है...

मैं- ह्म्म...

फिर मैं निकल कर सीधा अपने सीक्रेट हाउस पहुच गया....

( इस सीक्रेट हाउस मे मेरे ही लोग रहते है...जिन्हे मैने अपनी हेल्प के लिए चुना है...)

मैं ड्राइव करते हुए विनोद की बताई हुई जानकारी के बारे मे सोच रहा था....

अब तक मुझे ये तो पता चल गया था कि मेरे खिलाफ प्लान मे कामिनी,दीपा,रजनी और विनोद है...पर अभी तक मुझे इन सब के बॉस के बारे मे कोई जानकारी हाथ नही लगी थी...

विनोद ने जो मुझे बताया था उससे जो जानकारी पता चली वो ये थी....

दीपा सिर्फ़ पैसो के लिए काम करती थी...उसकी अपनी कोई वजह नही थी....वो रजनी और कामिनी के लिए काम करती थी...उसका काम ये था कि कैसे भी वो मुझे अपने प्यार मे फँसा कर अपने परिवार से दूर कर दे और मुझसे ज़यादा से ज़यादा पैसा खीच सके....पर वो नाकाम रही...

रजनी का मक़सद सिर्फ़ पैसा नही था...वो मेरे डॅड से नफ़रत करती थी और उन्हे मारना चाहती थी...पर पहले वो मुझे अपने डॅड से दूर करना चाहती थी....वो मेरे डॅड को तड़पाना चाहती थी....

कामिनी का मक़सद भी पैसा तो था पर साथ मे वो मेरी पूरी फॅमिली से नफ़रत करती थी...वो मेरा यूज़ करके मेरी फॅमिली को हर्ट करना चाहती थी...

विनोद का काम सबके काम पर नज़र रखना था....उसे इन सब के उपेर वाले बॉस ने अपायंट किया था....

विनोद की बात से मुझे ये तो पता चल गया था कि कौन क्या चाहता है...बट अभी ये पता करना बाकी था कि क्यो चाहता है...आख़िर ऐसा क्या किया मेरे डॅड ने जो रजनी उन्हे मारना चाहती है...और मेरी फॅमिली ने कामिनी के साथ क्या किया कि वो मेरी पूरी फॅमिली को ही मारना चाहती है...

और तो और मुझे ये भी नही पता कि मेरी फॅमिली है कहाँ और आख़िर मेरे डॅड और मैं उनसे दूर क्यों है....

और सबसे बड़ा सवाल कि अगर ये लोग मेरे डॅड और मेरी फॅमिली से नफ़रत करते है तो अभी तक इन्होने कुछ किया क्यों नही...किस बात का वेट कर रहे है और मुझे क्यो फसाया....डाइरेक्ट मार ही डालते....

और ये साला कौन है जो इन सब को हुकुम देता है...उसकी पहचान और उसका मक़सद जानना बाकी है...पर उस तक पहुचने का लिंक अभी तक नही मिला....ना दीपा से और ना विनोद से....

 


मेरे सामने सबसे बड़ा चेलेंज ये पता करना था कि आख़िर इस सब की ज़रूरत क्यो पड़ी...क्यो मेरी लाइफ के साथ इस तरह का गेम खेला गया...क्यूँ....???

और यही सोचते हुए मैं सीक्रेट हाउस पहुच गया....अंदर जाते ही मेरा खास आदमी सामने आ गया....

स- आओ अंकित...जाम रेडी है...

मैं- ह्म्म..तो सब सेट है...(सोफे पर बैठते हुए)

स- ह्म्म..पर जो गेम तुम खेल रहे हो वो बहुत रिस्की है....एक ग़लत कदम और हो सकता है इसका खामियाज़ा बहुत ज़्यादा भुगतना पड़ सकता है.....कई जानें दाव पर लगी हुई है....

मैं- बात तो सही है...बट देयर आर नो अदर वे माइ फ्रेंड....

स- ह्म्म...पर तुम बहुत तेज भाग रहे हो....

मैं- लाइफ एक रेस है भाई...तेज नही भागुंगा तो लोग कुचल कर निकल जायगे....

स- हाँ..पर इसमे बहुत रिस्क है...तुम्हारे डॅड भी...

मैं(बात काट कर)- रिस्क ईज़ आ पार्ट ऑफ लाइफ ब्रो.....जब सामने वाले अपना सब खुच दाव पर लगा सकते है तो मैं क्यो पीछे रहूं...और ये तो सिर्फ़ शुरुआत है...असली चॅलेंजस तो आने बाकी है दोस्त....

स- ह्म्म..चलो फिर पेग ख़त्म करो और रेडी हो जाओ.....

मैं- ह्म्म..सक्सेस के नाम..चईएर्स...

और हम पेग गटकने लगे......

*********-------------***********----------***********------------***********

यहाँ संजू के घर मे मेरे निकलते ही आंटी रेस्ट करने का बोल कर अपने रूम मे गई और विनोद को कॉल किया....

(कॉल पर)

आंटी- हेलो...विनोद

विनोद- हाँ भाभी...

आंटी- भाभी के बच्चे...कहाँ हो तुम..??

विनोद- मैं तो शॉप पर हूँ...क्यो क्या हुआ..???

आंटी- ओह..तुम तो ऐसे बोल रहे हो कि जैसे कुछ हुआ ही नही...तुम्हे पता है ना कि कुछ देर पहले हमें किसी ने रंगे हाथो पकड़ा था...याद है ना...??

विनोद- हाँ भाभी याद है...मैं तो बस मज़ाक कर रहा था...

आंटी(गुस्से मे)- तुझे मज़ाक सूझ रहा है और यहाँ मैं टेन्षन से मरी जा रही हूँ...तुझे टेन्षन नही...???

विनोद- हाँ टेन्षन तो थी...पर अंकित को आपने हॅंडल कर लिया होगा...ये मैं जानता हूँ...इसलिए मैं टेन्षन फ्री हो गया...

आंटी- मेरी बात छोड़...टेन्षन तो मुझे इस बात की है कि तूने अंकित को क्या बोला...

विनोद- मैने....कुछ खास नही...बस बोल दिया कि भाभी के साथ मज़े कर रहा था....

आंटी- बस...उसने और कुछ नही कहा...

विनोद-हम्म...हां उसने पूछा था कि मैं मेघा को सेक्स का सुख क्यों नही देता....और यही मुझे भी जानना है कि ये बात उसे कैसे पता चली कि मैं मेघा के साथ सेक्स नही करता...

आंटी- वो..एम्म...वो ऐसा हुआ...कि...

विनोद- मुझे यकीन था कि ये तुमने ही बोला होगा...करना क्या चाहती थी तुम..क्या मेघा को भी अपने जैसी रंडी बनाना था...

आंटी- चुप कर...एक बार और मुझे रंडी बोला तो मुझसे बुरा कोई नही होगा...तू जानता है ना कि मैं ऐसी क्यो बनी...और ये भी मत भूल कि अगर मैने तेरे बारे मे अंकित या उसके डॅड को बता दिया तो सोच तेरा क्या होगा....

विनोद- अरे भाभी आप तो गुस्सा हो गई...मैं बस ये बोल रहा था कि मेघा को इससे दूर रखो प्ल्ज़...

आंटी- ह्म्म..आया ना लाइन पर...अब बोल तूने अंकित को क्या बताया...

विनोद- मैने उसे कुछ नही बताया...बस यही बोला कि हम चुदाई करते है....बस..

आंटी- ऐसा ही बोला तो ठीक है...अगर उसे मेरे प्लान के बारे मे पता भी चला तो फिर...तू तो गया.....

विनोद- नही भाभी मैने कुछ नही बोला...ट्रस्ट मी

आंटी- ह्म्म...अब संभाल के रहना...बाइ

विनोद- बाइ..

फ़ोन रखने के बाद आंटी ने चैन की साँस ली कि चलो विनोद ने अंकित को कुछ नही बताया....विनोद सच बोल रहा है...अगर कुछ बताया होता तो अंकित मुझसे इतनी अच्छी तरह बात नही करता उल्टा मेरी वॉट लगा देता...

यहाँ विनोद फ़ोन रखने के बाद सोचने लगा कि ये क्या हो गया....मैं तो दोनो तरफ से फस गया...अंकित को ना बताता तो मेरा परिवार मिट जाता और भाभी की बात ना मानूं तो मैं ख़त्म हो जाउन्गा....अब बस अंकित भाभी को ना बोले कि मैने उसे कुछ बताया...वरना मेरा राज़ अंकित के सामने आ जाएगा और फिर सबसे पहले वो मुझे ही मिटा देगा.. ..

यहाँ विनोद परेशान वहाँ आंटी परेशान...पर सिर्फ़ ये दोनो ही नही थे जो परेशान थे...अंकित भी परेशान था, पूरा सच जानने के लिए...और इन सब से ज़्यादा परेशान थी कामिनी...

हाँ...कामिनी को जबसे वो अननोन कॉल आया था तबसे उसका दिमाग़ हिला हुआ था...उसने उस इंसान से मिलने का तो तय कर लिया बट फिर भी वो कोशिश यही कर रही थी कि उस इंसान के बारे मे कहीं से कुछ पता चल जाए....पर उसकी सारी कोशिशे नाकाम हुई...

 


फाइनली वो जाने के लिए रेडी होने लगी...और कुछ देर बाद कामिनी पहुच गई होटल डेलिट के रूम नंबर. 202 मे...कामिनी ने गेट नॉक किया तो उसे कॉल आया...

कॉल पर उसे बता दिया गया कि उसे आगे क्या करना है....

कामिनी ने सामने वाले के कहने पर रूम मे जाते ही रूम को अंदर से लॉक कर दिया....

रूम को लॉक करने के बाद जैसे ही कामिनी आगे बड़ी तो सामने से आवाज़ आई...

"खुशामादीद मोहतार्मा खुशामदीद"

कामिनी जैसे ही रूम मे एंटर हुई तो वो रूम का मुआयना करने लगी....रूम मे हल्की रोशनी छाइ हुई थी...सामने की टेबल पर ड्रिंक आंड स्नकस रखा हुआ था....और टेबल की दूसरी तरफ एक इंसान रोलिंग चेयर पर बैठा हुआ अपनी उंगली मे की चेन घुमा रहा था...

वो इंसान कामिनी की दूसरी तरफ मुँह किए हुए था....इसलिए उसका चेहरा कामिनी ने नही देखा....

( यहाँ मैं अननोन इंसान को उन लिख रहा हूँ)

कामिनी- एक्सक्यूज मी...

उन- तसरीफ रखिए....

कामिनी- आप है कौन...???

उन(कड़क आवाज़ मे)- यहाँ सवाल सिर्फ़ हम करेंगे...आप तसरीफ रखे...

कामिनी, जो पहले से ही डरी हुई थी...उस इंसान की बात सुनकर और सहम गई और चुप-चाप सोफे पर बैठ गई....

कामिनी के बैठते ही उस इंसान ने अपनी चेयर घुमाई और अब वो कामिनी के सामने आ गया....

कामिनी उसको देखने लगी ...उस इंसान की फुल सेव थी...साथ मे कड़क मूछे और उसके बाल भी कंधे तक आ रहे थे....

कामिनी उसे देख कर पहचानने की कोशिश कर रही थी कि शायद कोई क्लू मिल जाए जिससे वो इसकी असलियत समझ जाए...

वो इंसान भी कामिनी के मन मे चल रही उथल-पुथल को समझ जाता है.....

उन- अपने ज़हेन को इतना परेशान ना करे मोहतार्मा....आप हमें नही पहचानती....कोशिश बेकार है...

कामिनी- वो...ऐसा...कुछ नही...मैं बस...

उन- चलिए छोड़िए...वैसे क्या पीएंगी आप...??

कामिनी- जो आप पिलाना चाहे...

उन- हम जानते है कि बड़ी ही सातिर है आप...पर आज आपको स्कॉच से काम चलाना पड़ेगा...लीजिए...

कामिनी- ह्म्म..चियर्स...

दोनो अपने पेग से एक-एक सीप मारते है.....

कामिनी - तो अब बताइए ...मुझसे क्या चाहते है आप....

उन- ह्म्म...डाइरेक्ट मुद्दे की बात.....

कामिनी- क्या करे हमारे पास टाइम की कमी जो है...

उन- वक़्त की कमी तो सबको ही खलती है मोहतार्मा...वक़्त किसी का अपना नही होता...

कामिनी- तभी तो कहा...जल्दी से बता दें...कि आप चाहते क्या है...पैसा या फिर....कुछ और....

उन- हाहाहा....पैसो से हमें खरीदने की कोशिश ना करे....हम बिकने वालो मे से नही...

कामिनी- ह्म्म..जो इंसान पैसो मे ना बिके वो किसी ना किसी कीमत पर तो बिक ही जाएगा....

उन- ह्म्म...पर क्या आप वो कीमत दे पाएगी...??

कामिनी- क्यो नही...आप कीमत तो बताइए....

उन- ह्म...हमारी कीमत है वो राज़ जो आप अपने दिल मे दफ़न किए हुए है....

कामिनी- कौन सा राज़...मैने क्या छिपा कर रखा है...???

उन- इतनी मासूम ना बनें...हम उस राज़ की बात कर रहे है..जिसने आपको अंकित का दुश्मन बना दिया...आख़िर क्यो आप उस बच्चे के पीछे पड़ी है...

कामिनी- उसमे कोई राज़ नही...आप भी तो उसके दुश्मन है...??

उन- हाँ और उसकी वजह है उसके पिता...पर आपकी वजह क्या है...

कामिनी- कोई भी वजह हो...आपको क्या...

उन- सोच लो...हम आपको दुनिया के सामने नंगा कर सकते है...

कामिनी(गुस्से मे)- बस...एक शब्द नही....मेरी दुश्मनी किससे है...किस वजह से है..ये मेरा पर्सनल मॅटर है...समझे...और मैं किसी को बताना ज़रूरी नही समझती...

उन- पर मुझे वो वजह जान नी है..नही तो...

कामिनी(गुस्से से खड़ी हो गई)- तुम्हे जो करते बनता है करो...मैं नही डरती...और हाँ...मैं अकेली नही हूँ...समझे...अब मैं जा रही हूँ...तुम जो करना चाहो कर लो...

कामिनी गुस्से से उठ कर गेट की तरफ जाने लगी.....

उन- आपकी लाडली बेटी *** मे बने आपके बंग्लो मे है ना.....

कामिनी उसकी बात सुनते ही रुक गई और पलट के बोली....मतलब

उन- ह्म्म...सोचिए कि अगर मे तुम्हारी बेटी तक पहुच सकता हूँ तो आगे क्या कर सकता हूँ...हाहाहा...

अपनी बेटी के नाम से तो कामिनी पूरी तरह डर गई और वापिस उस इंसान के पास आ गई....

कामिनी- नही...नही...मेरी बेटी को कुछ मत करना...मैं वही करूगी जो तुम चाहते हो...क्या चाहिए...बोलो..

उन- लगता है मोहतार्मा की आपकी याददाश्त कमजोर है...बादाम खाया कीजिए....हमें वो वजह जाननी है...जिस वजह से आप अंकित की दुश्मन बन गई....

कामिनी- ओके...पर मेरी दुश्मनी सिर्फ़ अंकित से नही...मैं उसके पूरे परिवार को ख़त्म करना चाहती हूँ...

उन- ह्म्म...पर क्यो...

कामिनी- बताती हूँ...पर याद रखना कि ये बात सिर्फ़ हमारे बीच मे ही रहनी चाहिए....

उन- बेफ़िक्र रहिए...अब बताए वो राज़....

कामिनी सोफे पर दोबारा से बैठ गई और अपनी कहानी सुनाने लगी.....

**************************************************************

 


यहाँ विनोद रजनी आंटी से बात करने के बाद रेणु को कॉल करता है....

(कॉल पर)

विनोद- हेलो....

रेणु- हेलो....इस टाइम कॉल क्यों किया..???

विनोद- मुझे कुछ सवालो के आन्सर चाहिए...

रेणु- क्या कह रहे हो...सॉफ-सॉफ बोलो...

विनोद- तुमने अंकित को मेरे बारे मे बताया ना...??

रेणु- हाँ...बताना पड़ा...

विनोद- तुम हो किसके साइड...हमारी या उसकी...

रेणु- मैं तुम्हे बताना ज़रूरी नही समझती....

विनोद- क्या कहा...तुम मुझे फसा सकती हो और अब मुझे ही वजह नही बता सकती...भूलो मत...तुम भी...

रेणु- बस...मुझे अंकित का भरोसा बरकरार रखना था..इसलिए तुम्हे फसाया..और ये बात बॉस को पता है...

विनोद- क्या..बॉस को पता है...पर बॉस ने ये नही सोचा कि अगर मैं उनके बारे मे बता देता तो...

रेणु- बॉस जानते है कि तुझमे इतना दम नही...और अगर ऐसा करते भी तो बॉस का बुरा तो बाद मे होता...उससे पहले तुम और तुम्हारा परिवार....पता है ना...

विनोद- बस...तुम्हे बताने की ज़रूरत नही...मैं बॉस के खिलाफ कुछ नही करता...

रेणु- पर मुझसे तो अंकित ने कहा था कि तुम हाथ से निकल गये.....

विनोद- उसने तुमसे झूठ बोला...उसने मुझसे सब पूछा...पर हाँ...डरो मत मैने ये नही बताया कि बॉस कौन है और ना ये कि तुम भी बॉस को जानती हो...और तुम तो उनकी रंडी हो...हाहाहा....

रेणु- चुप कर...मुझे रंडी बोलने की गुस्ताख़ी दुबारा मत करना....समझे...

विनोद- ओके..ओके...अब ये बताओ कि आगे क्या ..??

रेणु- बॉस के आदेश का वेट करो..और अपना काम करते रहो...अंकित पर खास नज़र रखना...ओके

विनोद - ओके...बाइ

रेणु- बाइ...

फ़ोन रखने के बाद विनोद और रेणु अपनी- अपनी सोच मे डूब गये....

रेणु(मन मे)- अंकित ने मुझसे झूठ बोला...कहीं उसको शक तो नही हो गया...अगर ऐसा हुआ तो ये मेरे लिए अच्छा नही....मुझे उसका भरोशा वापिस से जीतना होगा...नही तो मेरा मक़सद पूरा नही हो सकता....मुझे उसकी ज़रूरत है.....

विनोद(मन मे)- ये तो साला मैं दोनो तरफ से फस गया...अंकित को सच बताता हूँ तो भी और नही बताता तो भी....पर अंकित मेरी बात को सच मान जाए तो ठीक...उसे ये शक नही होना चाहिए कि मैं बॉस को जानता हूँ....हे भगवान बस और कोई मुसीबत मत देना मुझे प्ल्ज़्ज़.....

यहाँ दोनो ही अपने-अपने बारे मे सोच रहे थे...इस बात से अंजान की कोई ऐसा भी है...जो इनके अरमानो पर पानी फेरने को तैयार है.....और उसने इनके ख़ात्मे का इंतज़ाम पहले ही कर लिया बस सही टाइम का वेट कर रहा है....

**************************************************************

यहाँ संजू के घर मे कुछ खास नही हो रहा था...सब अपने आप मे बिज़ी थे....

सिर्फ़ एक लड़की थी जो जागने के बाद भी सोई हुई थी..वो थी अनु...

अनु अपने बेड पर लेटे हुए किसी के सपने मे खोई हुई थी...जो उसके सपनो का राज कुमार था....वो है अंकित....

अनु अंकित से हुई अपनी पहली मुलाक़ात...फिर उसकी तरफ आकर्षण...उसके लिए पनपते प्यार...और किसी के कहने पर इसके लंड को चोरी-चोरी चूसना...ये सब याद करके शरमा भी रही थी...मुस्कुरा भी रही थी और गिल्टी भी फील कर रही थी....

पर जब उसने अंकित के साथ गुज़ारी उस रात को याद किया तो उसके चेहरे पर लाली छलक उठी....

वो सोचने लगी कि कैसे अंकित ने उसे प्यार किया...उसको सुलाया और अपने प्यार का इकरार भी किया....

अनु ने अंकित को कॉल किया पर फ़ोन पिक नही हुआ...

अनु फिर से अपनी सुनहरी यादो ने खोई हुई मंद- मंद मुस्कुराने लगी......

पर इस घर मे सिर्फ़ अनु ही नही थी जो शरमा रही थी....दो लोग और थे जो अपने - अपने ख़यालो मे खोए हुए...कभी मुस्काते तो कभी शरमाते...ये थे संजू और पूनम....

**************************************************************

यहा अनु-संजू-पूनम शर्मा रहे है पर इन्ही की बेहन कही बेशरम बनी हुई है.....

रूबी के घर रक्षा और रूबी एक दूसरे की चूत और बूब्स का रस्पान करने मे बिज़ी थे....

जैसे ही अंकित रूबी के घर से निकला था...उसके बाद ही रक्षा ने रूबी को जगाया...और फिर शुरू हो गया था दोनो का हवस का खेल....

इस खेल मे दोनो दो-दो बार झड चुकी थी...और अब तीसरी बार की तैयारी मे थी....

रक्षा- उम्म...ज़ोर से चाट ना...

रूबी- आहह..इतनी ज़ोर से तो चूस रही हूँ...अब क्या चवा जाउ....

रक्षा- अरे तू तो लंड खा कर खुश हो गई...अब मेरा भी ख्याल कर....

रूबी- तो तू भी ले ले ना मेरी रानी...आज रात अपने भैया का मूसल खा ले....

रक्षा- हाँ मेरी रानी...अब तो मेरा प्रोमिस भी पूरा हो गया है....अब तो बस भैया से बोलना बाकी है....जब तक तू तो चूस ना...

रूबी- ह्म्म...सस्स्रररूउर्र्ररुउप्प्प.....सस्स्र्र्ररुउउप्प्प..:)

रक्षा- यस ..यस...आअहह....खा जा ...ऐसे ही.....

**************************************************************

 
Back
Top