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Guest
मैं संजू से बोल कर छत पर आ गया....वहाँ आंटी नाइट गाउन मे खड़ी थी...छत पर कम रोशनी ही रह गई थी ..सर्द हवा चल रही थी और अंधेरा, रोशनी को अपनी बाहों मे समेटे जा रहा था.....
आंटी ने तो गाउन के उपेर साल डाली हुई थी बट मुझे सर्द हवाओं का पूरा अहसास हो रहा था....
आंटी की पीठ मेरे साइड थी...और उनकी नाइट गाउन मे कसी गान्ड को देख कर मेरा मन मचल उठा...और मैं सीधा उनके पास जा कर उनके बॅक से चिपक गया.....
आंटी- आहह..क्कौन ..ओह तुम हो...क्या करते हो...डरा दिया...
मैने आंटी को पीछे से अपने साइड खीचा और उनके आगे हाथ डालकर उनको अपने से चिपका लिया....
आंटी- आहह...क्या करता है...यहाँ नही मेरी जान...
मैं- अब तो जो होगा वो यही होगा मेरी छमिया....
आंटी- ये क्या बोल रहा है बेटा....कोई आ गया तो..मारे जायगे...
मैं- जो होगा..होने दो...आज मैं नही मानने वाला...
आंटी- बेटा समझ कर ना...यहाँ आस- पास की चाटो पर से किसी ने देख लिया तो....
मैं- कोई नही देखेगा...डोंट वरी...
आंटी- बेटा अगर किसी ने देख लिया तो मैं बदनाम हो जाउन्गी और फिर मुझे भी सुसाइड करना पड़ेगा....
मैं- मेरे रहते ऐसा नही होगा...मेरी जान को मैं मरने नही दूगा...
और मैने अपने हाथ आंटी के बूब्स पर जमा लिए और पीछे से अपना लंड आंटी की गान्ड मे रगड़ने लगा....
आंटी- आहह..तू तो मुझे पागल कर देगा...ठीक है कर ले तेरी मन की...पर याद रखना...मेरी इज़्ज़त तेरे हाथ मे है...बचा ले या लूटा दे ..तेरी मर्ज़ी....
मैं- हाँ मेरी जान...मैं ही तेरी इज़्ज़त लूटूगा....ऑर कोई नही...
आंटी- तेरे लिए तो मैं हमेशा रेडी हूँ...
और आंटी ने अपनी गान्ड को मेरे लंड पर घिस कर अपनी सहमति दे दी....
मैं आंटी के बूब्स दवाने लगा और आंटी भी अपनी गान्ड पीछे कर के मेरे लंड पर घिसने लगी....
थोड़ी देर मे ही मेरे लंड ने सिर उठाना सुरू कर दिया.....
मैं आंटी को गरम करने के बाद दीपा के बारे मे बात करने लगा...मुझे पता था कि गरम होते ही आंटी रॉयगी नही...यही सही टाइम था....
मैं - ये बताओ आंटी...दीपा ने सुसाइड क्यो की....
आंटी- ओह्ह..पता नही बेटा...क्यो किया ....
मैं- कोई टेन्षन होगी ...???
आंटी- पता नही...कभी बताया नही उसने...
मैं- पति से प्रॉब्लम थी क्या....???
आंटी- अरे वो तो उसका हर कहा मानता था....उसके ढील देने पर ही साली इतनी चुड़दक़्कड़ हो गई थी....बहुत अच्छा है उसका पति तो...
मैने आंटी का शॉल निकाल के फेक दिया और नाइट गाउन के अंदर हाथ डाल दिए....अब आंटी के ब्रा मे क़ैद बूब्स मेरे हाथ मे थे...और मैं ज़ोर से उन्हे दबा रहा था.....
यहा आंटी अपनी गान्ड घिसते हुए अपना मुँह पीछे कर के मेरे होंठो को चूमते हुए बात भी करने लगी.....
मैं- ह्म्मिसत..तो दीपा की मौत एक मिस्ट्री है...???
आंटी- ह्म्म...पर सब जल्दी पता चल जाएगा...पोलीस लगी हुई है...
मैं- ह्म्म...अब दीपा को छोड़ो...और आज उसके नाम की चुदाई करते है....
आंटी- हाँ..साली चुड़दकर को ऐसी श्रद्धांजली ही देना चाहिए....हहहे...
मैं- सही कहा...हाहाहा...
हम दोनो हँसते हुए मज़े ले रहे थे और आंटी की हँसी देख कर मुझे यकीन हो गया कि आंटी को दीपा के जाने का कोई दुख नही है...ये सिर्फ़ नाटक कर रही थी....
आंटी का दीपा के लिए रूख़ देखकर मुझे आंटी पर भी शक होने लगा कि क्या आंटी भी इन सब मे शामिल है...???
तभी आंटी ने अपने हाथ से मेरे आधे खड़े लंड को दबा दिया...
मैं- आअहह...क्या है जान...
आंटी- अब चूत रोने लगी मेरे राजा...जल्दी से चुप करा दे....
मैं- ह्म्म्मर...पर यहाँ नही...
आंटी- मैने तो पहले ही कहा था...तो तूने आग क्यो लगाई...अब क्या करूँ..???
मैं- अरे चुप ना ...मैने कहा यहाँ नही ..मतलब वहाँ चलो ..टंकी के पीछे...
टंकी काफ़ी बड़ी थी...उसके पीछे खड़े हुए भी ज़्यादा नही दिखता था...उपेर से अंधेरा भी छा गया था तो पकड़ने का टेन्षन कम था....
हम जैसे ही टंकी के पीछे गये तो आंटी ने अपना गाउन एक झटके मे ही निकाल दिया और ब्रा- पैंटी मे आ गई...
फिर तुरंत घुटनो पर बैठ कर मेरे पेंट को खोल कर नीचे कर दिया साथ मे अंडरवर भी...और मेरा आधा खड़ा लंड उनके सामने आ गया....
आंटी- मुउहह...अब इंतज़ार नही होता....
और आंटी ने जल्दी से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया.....
आंटी तेज़ी के साथ मेरे लंड को चूस रही थी जैसे जन्मो की प्यासी हो..शायद कुछ दिन से चुदाई नही की इसलिए….
आंटी-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प
मैं-आआहह…अओंती….क्कक्या चूस्ति हो….ऑर तेज,…हहाअ …ऐसे ही
आंटी-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प
मैं-आअहह…..ऐसे ही….ऑर तेज…मेरी रानी…आअहह…
आंटी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प
मैं-आंटी …मज़ा आ गया…आअहह
थोड़ी देर की लंड चुसाइ मे मेरा लंड अपनी औकात पर आ गया और अब मैं आंटी के सिर को सहलाते हुए इसरा करने लगा कि बस करो..अब चूत फाड़नी है….
आंटी भी मेरी बात समझ कर रुक गई और लंड को मुँह से निकाल के बोली….
आंटी- आहह ..कितने दिन बाद…मज़ा आ गया…
मैं- ह्म..अब आओ…आपकी चूत की खुजली मिटा दूं…
आंटी मेरे कहते ही वो खड़ी हो कर मुझे किस करते हुए मेरे लंड को पकड़ कर अपनी पैंटी के उपेर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी....
मैने आंटी की पैंटी निकली और आंटी ने अपनी ब्रा निकाल दी....
फिर मैने आंटी की टाँग उठा कर लंड उनकी चूत मे सेट किया जो पहले से रस टपका रही थी.....
आज आंटी पूरे जोश मे थी ....आंटी खुद ही मुझे पकड़ के झटके मारे और दो झटके मे ही मेरा पूरा लंड चूत मे घुसा लिया ...
आंटी-आहह….उउउफफफ्फ़..म्माआ….
मैं- बड़ी जल्दी है ना…
आंटी-आहह…हां..बेटा…तू बस.. मार…ऐसे ही..आहह
आंटी ने तो गाउन के उपेर साल डाली हुई थी बट मुझे सर्द हवाओं का पूरा अहसास हो रहा था....
आंटी की पीठ मेरे साइड थी...और उनकी नाइट गाउन मे कसी गान्ड को देख कर मेरा मन मचल उठा...और मैं सीधा उनके पास जा कर उनके बॅक से चिपक गया.....
आंटी- आहह..क्कौन ..ओह तुम हो...क्या करते हो...डरा दिया...
मैने आंटी को पीछे से अपने साइड खीचा और उनके आगे हाथ डालकर उनको अपने से चिपका लिया....
आंटी- आहह...क्या करता है...यहाँ नही मेरी जान...
मैं- अब तो जो होगा वो यही होगा मेरी छमिया....
आंटी- ये क्या बोल रहा है बेटा....कोई आ गया तो..मारे जायगे...
मैं- जो होगा..होने दो...आज मैं नही मानने वाला...
आंटी- बेटा समझ कर ना...यहाँ आस- पास की चाटो पर से किसी ने देख लिया तो....
मैं- कोई नही देखेगा...डोंट वरी...
आंटी- बेटा अगर किसी ने देख लिया तो मैं बदनाम हो जाउन्गी और फिर मुझे भी सुसाइड करना पड़ेगा....
मैं- मेरे रहते ऐसा नही होगा...मेरी जान को मैं मरने नही दूगा...
और मैने अपने हाथ आंटी के बूब्स पर जमा लिए और पीछे से अपना लंड आंटी की गान्ड मे रगड़ने लगा....
आंटी- आहह..तू तो मुझे पागल कर देगा...ठीक है कर ले तेरी मन की...पर याद रखना...मेरी इज़्ज़त तेरे हाथ मे है...बचा ले या लूटा दे ..तेरी मर्ज़ी....
मैं- हाँ मेरी जान...मैं ही तेरी इज़्ज़त लूटूगा....ऑर कोई नही...
आंटी- तेरे लिए तो मैं हमेशा रेडी हूँ...
और आंटी ने अपनी गान्ड को मेरे लंड पर घिस कर अपनी सहमति दे दी....
मैं आंटी के बूब्स दवाने लगा और आंटी भी अपनी गान्ड पीछे कर के मेरे लंड पर घिसने लगी....
थोड़ी देर मे ही मेरे लंड ने सिर उठाना सुरू कर दिया.....
मैं आंटी को गरम करने के बाद दीपा के बारे मे बात करने लगा...मुझे पता था कि गरम होते ही आंटी रॉयगी नही...यही सही टाइम था....
मैं - ये बताओ आंटी...दीपा ने सुसाइड क्यो की....
आंटी- ओह्ह..पता नही बेटा...क्यो किया ....
मैं- कोई टेन्षन होगी ...???
आंटी- पता नही...कभी बताया नही उसने...
मैं- पति से प्रॉब्लम थी क्या....???
आंटी- अरे वो तो उसका हर कहा मानता था....उसके ढील देने पर ही साली इतनी चुड़दक़्कड़ हो गई थी....बहुत अच्छा है उसका पति तो...
मैने आंटी का शॉल निकाल के फेक दिया और नाइट गाउन के अंदर हाथ डाल दिए....अब आंटी के ब्रा मे क़ैद बूब्स मेरे हाथ मे थे...और मैं ज़ोर से उन्हे दबा रहा था.....
यहा आंटी अपनी गान्ड घिसते हुए अपना मुँह पीछे कर के मेरे होंठो को चूमते हुए बात भी करने लगी.....
मैं- ह्म्मिसत..तो दीपा की मौत एक मिस्ट्री है...???
आंटी- ह्म्म...पर सब जल्दी पता चल जाएगा...पोलीस लगी हुई है...
मैं- ह्म्म...अब दीपा को छोड़ो...और आज उसके नाम की चुदाई करते है....
आंटी- हाँ..साली चुड़दकर को ऐसी श्रद्धांजली ही देना चाहिए....हहहे...
मैं- सही कहा...हाहाहा...
हम दोनो हँसते हुए मज़े ले रहे थे और आंटी की हँसी देख कर मुझे यकीन हो गया कि आंटी को दीपा के जाने का कोई दुख नही है...ये सिर्फ़ नाटक कर रही थी....
आंटी का दीपा के लिए रूख़ देखकर मुझे आंटी पर भी शक होने लगा कि क्या आंटी भी इन सब मे शामिल है...???
तभी आंटी ने अपने हाथ से मेरे आधे खड़े लंड को दबा दिया...
मैं- आअहह...क्या है जान...
आंटी- अब चूत रोने लगी मेरे राजा...जल्दी से चुप करा दे....
मैं- ह्म्म्मर...पर यहाँ नही...
आंटी- मैने तो पहले ही कहा था...तो तूने आग क्यो लगाई...अब क्या करूँ..???
मैं- अरे चुप ना ...मैने कहा यहाँ नही ..मतलब वहाँ चलो ..टंकी के पीछे...
टंकी काफ़ी बड़ी थी...उसके पीछे खड़े हुए भी ज़्यादा नही दिखता था...उपेर से अंधेरा भी छा गया था तो पकड़ने का टेन्षन कम था....
हम जैसे ही टंकी के पीछे गये तो आंटी ने अपना गाउन एक झटके मे ही निकाल दिया और ब्रा- पैंटी मे आ गई...
फिर तुरंत घुटनो पर बैठ कर मेरे पेंट को खोल कर नीचे कर दिया साथ मे अंडरवर भी...और मेरा आधा खड़ा लंड उनके सामने आ गया....
आंटी- मुउहह...अब इंतज़ार नही होता....
और आंटी ने जल्दी से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया.....
आंटी तेज़ी के साथ मेरे लंड को चूस रही थी जैसे जन्मो की प्यासी हो..शायद कुछ दिन से चुदाई नही की इसलिए….
आंटी-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प
मैं-आआहह…अओंती….क्कक्या चूस्ति हो….ऑर तेज,…हहाअ …ऐसे ही
आंटी-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प
मैं-आअहह…..ऐसे ही….ऑर तेज…मेरी रानी…आअहह…
आंटी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प
मैं-आंटी …मज़ा आ गया…आअहह
थोड़ी देर की लंड चुसाइ मे मेरा लंड अपनी औकात पर आ गया और अब मैं आंटी के सिर को सहलाते हुए इसरा करने लगा कि बस करो..अब चूत फाड़नी है….
आंटी भी मेरी बात समझ कर रुक गई और लंड को मुँह से निकाल के बोली….
आंटी- आहह ..कितने दिन बाद…मज़ा आ गया…
मैं- ह्म..अब आओ…आपकी चूत की खुजली मिटा दूं…
आंटी मेरे कहते ही वो खड़ी हो कर मुझे किस करते हुए मेरे लंड को पकड़ कर अपनी पैंटी के उपेर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी....
मैने आंटी की पैंटी निकली और आंटी ने अपनी ब्रा निकाल दी....
फिर मैने आंटी की टाँग उठा कर लंड उनकी चूत मे सेट किया जो पहले से रस टपका रही थी.....
आज आंटी पूरे जोश मे थी ....आंटी खुद ही मुझे पकड़ के झटके मारे और दो झटके मे ही मेरा पूरा लंड चूत मे घुसा लिया ...
आंटी-आहह….उउउफफफ्फ़..म्माआ….
मैं- बड़ी जल्दी है ना…
आंटी-आहह…हां..बेटा…तू बस.. मार…ऐसे ही..आहह