हमे पढ़ते हुए थोड़ा टाइम ही हुआ था कि उम्मीद के अनुसार रक्षा मुझे बुलाने आ गई...
मैं रक्षा के साथ उसके रूम मे चला गया...वहाँ पर रूबी पहले से थी....
रूबी ने एक लेग्गी और टाइट टॉप पहन रखा था ...जिसमे उसके बूब्स तने हुए दिख रहे थे....उपर से उसकी टाइट लेग्गी मे उसकी जांघे देख कर तो मैं उसे देखता रह गया....
मन तो कर रहा था कि इसको अभी नंगा करूँ और इसकी जवानी को चूस कर इसे कली से फूल बना दूं...
मैं रूबी को घूरते हुए खड़ा था....रूबी मुझे ऐसे देखते हुए शरमा गई और नीचे देखने लगी....
फिर रक्षा ने मुझे हिलाते हुए कहा...
रक्षा- चलिए भैया....अभी तो रात भर बाकी है....
मैं- क्क्क...क्या...??
मैने रक्षा को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी ..पर मैं तो ऐसे पकड़े जाने से डर गया था.....
रकाहा- चलिए भैया...बेड पर चले...
मैं- ह्म्म..क्या...बेड पर ???
राल्शा- मतलब...बेड पर पढ़ाई करने...
मैं- हाँ..क्यो न्ही..
रक्षा- आपने क्या सोचा था....(और रक्षा हँसने लगी...साथ मे रूबी भी)
मैं- कुछ नही...चलो ..
मैं जा कर बेड पर बैठ गया...और रूबी , रक्षा मेरे सामने बैठ गई ..
और हमने कंबल पैरो पर डाला और बीच मे बुक रख कर पढ़ाई शुरू की...
मैं पूरा ध्यान बुक पर लगाए हुए था...क्योकि मुझे डर था की कही मैने इन लड़कियो को देखा तो मेरा मन फिर से भटकने लगेगा...
भगवान ने लड़की चीज़ ही ऐसी बनाई है कि अगर आप उसे पसंद करते हो तो वो आपका ध्यान भटका देगी...
और यहाँ तो दोनो ही लड़कियाँ ऐसी थी जो मुझे पसंद आ गई थी....
थोड़ी देर तक मैं दोनो को अच्छी तरह से पढ़ाता रहा...मैं उनकी सूरत देखना चाहता था पर देखा नही...
पर तभी मुझे झटका लगा....
मैं तो कंट्रोल मे था पर उन दोनो को शायद कंट्रोल नही था....
अचानक मुझे महसूस हुआ कि मेरे पैर को कोई अपने पैर से छेड़ रहा है....
जैसे ही मेरा ध्यान हटा तो मैने सिर उपर किया....जहाँ मुझे दोनो लड़किया हँसते हुए दिखाई दी....
मैं दोनो को घूर के देख रहा था...पर वो दोनो कातिल स्माइल दिए जा रही थी....तभी..
रक्षा- क्या हुआ भैया...कुछ प्राब्लम....
रक्षा मुझसे पूछ रही थी और उसी वक़्त मेरे पैर पर नाख़ून चुभा....
मैं- आ...कुछ नही...
और दोनो हँसने लगी...
मैं फिर से उन्हे पड़ने को बुक पर झुक गया और साथ मे वो दोनो भी झुक गई....
पर इस बार मेरी नज़रे ना चाहते हुए भी उनके सीने पर जाने लगी....
और जाती भी क्यो ना....उन दोनो ने वी गले का टॉप पहना हुआ था जिसमे झुकने पर ब्रा मे क़ैद उनके आधे नंगे बूब्स दिखाई दे रहे थे....
एक तो सर्दी...उपेर से बंद कमरा....उसमे मैं कंबल मे दो लड़कियों के साथ...पैरो से छेड़-छाड़ और उपेर से इतने मस्त दो जोड़ी प्यारे बूब्स....साला लंड तो झटके खाएगा ही...
बस अब तो मेरा लंड खड़ा होने के लिए फड़कने लगा था.....
मैं सोच रहा था कि ये लड़कियाँ मान जाए और अपने पैर काबू मे रख ले...पर लड़कियाँ कुछ और ही मूड मे थी...
ऐसी हो कंडीशन मे मैं उनके बूब्स देखते हुए पढ़ाता रहा और मेरा लंड...खड़ा हो गया....पर वो दोनो अपनी हरकत जारी रखे हुए थी...
तभी रूम के गेट पर संजू आ गया....
संजू- चलो सब ..मोम डिन्नर के लिए बुला रही है...
रक्षा- जी भैया..चल रूबी...भैया चलो...बाकी बाद मे पढ़ेंगे...
मैं(मन मे)- थॅंक्स संजू...ठीक टाइम पर आया....लंड फटा जा रहा था..
रक्षा- चलिए ना भैया...
मैं- ह्म्म..अब सब पढ़ लिया ना...???
रक्षा- अभी कहाँ भैया....मैं पढ़ाई तो रात मे होगी...हहहे...
मैं कुछ समझ रहा था और कुछ नही भी...पर संजू के सामने मैने कुछ नही कहा बस सिर हिला कर स्माइल कर दी...
रक्षा , रूबी के साथ नीचे निकल गई और संजू मेरे पास आ गया...
संजू- भाई अपना क्या प्रोग्राम है...???
मैं- तूने आंटी को क्या बोला...
संजू- वो उस दिन की तरह बोल दिया कि हम बाद मे खाएगे...
मैं- साबाश बच्चे...अच्छा किया..
संजू- अब रूम मे चलेगा या यही बैठा रहेगा...
मैं- चल रहा हूँ....पर इनको अभी और पढ़ना है...
संजू- तो कब तक पिएगे हम...पढ़ाने मे टाइम लगेगा...???
मैं- पहले पार्टी करते है...इन्हे कल का बोल दूँगा...
संजू- चल फिर...
अब तक मेरा लंड शांत हो चुका था तो मैं संजू के साथ उसके रूम मे चला गया...और फ्रेश हो कर पढ़ाई करने बैठ गया ..
असल मे हम पढ़ाई करते हुए सबके वापिस जाने का वेट कर रहे थे....
जैसे ही सब वापिस अपने रूम मे आए तो मैने संजू को नीचे खाना लेने भेज दिया....
संजू के जाते ही रक्षा रूम मे आ गई....
रक्षा- चले भैया...
मैं- अभी...रूको थोड़ी देर मे आता हूँ ओके....
रक्षा- ओके ..पर आना ज़रूर...मेन पढ़ाई तो अब करनी है...
मैं- हाँ...आता हूँ...
रक्षा तो गई...पर मैं सोचने लगा कि ड्रिंक करने के बाद मैं कैसे इनके सामने जाउन्गा....
मैने डिसाइड किया कि रक्षा को सब सच बता दूगा....यही ठीक रहेगा...
फिर संजू के आते ही हमने रूम लॉक किया और ड्रिंक करना शुरू किया....
अभी 2 पेग ही लिए थे कि आंटी का मेसेज आ गया...
(मसेज से)
आंटी- बेटा तू रेडी है....
मैं- नही...
आंटी- कब तक आयगा...मेघा से क्या कहूँ
मैं- आज नही हो पायगा ...किसी और दिन करेगे...
आंटी- क्यो..??
मैं- मैं पढ़ाई कर रहा हूँ...
आंटी- मेघा से क्या कहूँगी अब...
मैं- बोल देना कि उन्ही की बेटी और उसकी फ्रेंड को पढ़ा रहा हूँ...ओके
आंटी- ओके...पर मेरा क्या..?
मैं- सॉरी आंटी...आज नही आ सकता...अंकल से काम चलाओ...
मैं- तो तुम्हे बाय्फ्रेंड बना लेना चाहिए ..मुझसे क्यो ???
रक्षा- क्योकि मैं आपसे ही प्यार करती हूँ...
मैं- क्या....कब्से...???
रक्षा- जबसे प्यार का मतलब जाना है तबसे...???
मैं- ह्म्म...और रूबी तुम...??
रूबी- मैं भी...जबसे आपसे मिली हूँ .. .तबसे ..
मैं- रक्षा तुम मुझसे प्यार करती हो और मुझसे रूबी को चुदवाना चाहती हो...ये कैसा प्यार है...
रक्षा- प्यार मे उसकी खुशी देखनी चाहिए जिससे प्यार करते हो...और आप रूबी को चोद कर खुश होगे इसलिए..
मैं- तुम्हे ऐसा क्यो लगा कि मैं खुश होउंगा...???
रक्षा- क्योकि मुझे पता है कि फ्रेश चूत आपको खुश कर देती है...
नैन- ये क्या बक रही हो....???
रक्षा- मुझे सब पता है....
मैं- तुम्हे कैसे पता..??
रक्षा- वो आपको कहते सुना था...
मैं- कब ???
रक्षा- एक दिन आप संजू भैया से कह रहे थे तब सुना...
मैं- तो मुझ पर नज़र रख रही थी...???
रक्षा- नही...वो बस सुन लिया था...
मैं - ओके...अब बताओ करना क्या है...तुम दोनो ने लंड खड़ा कर दिया मेरा...
रक्षा- आज आप रूबी की सील तोड़ दो...
मैं- और तुम्हारी...???
रक्षा- मेरी आप ही तोड़ोगे बट आज नही...
मैं- क्यो ???
रक्षा- वो..मैने किसी से प्रोमिस किया है...इसलिए...
मैं- कैसा प्रोमिस और किस से...???
रक्षा- वो बाद मे बताउन्गी...अभी आप रूबी की सील खोल दो...
रक्षा की बात सुनकर मैने डिसाइड कर लिया कि अब खुल के बात करता हूँ...जब कद्दू खुंद कटने को तैयार है तो चक्कु पीछे क्यो रहे....
मैं- ओके...पर रूबी...पता है ना कि सील टूटने पर दर्द होता है ...
रूबी- हाँ...पर मैं तैयार हूँ...
मैं- और हो सकता है कि कल तुम चल भी ना पाओ...तो...??
रूबी- डोंट वरी..मेरे घरवाले बाहर गये हुए है...कुछ नही होगा...
मैं- ओह...फुल प्लान कर के आई हो..हाँ..
रूबी- हाँ. .कितने दिन से वेट कर रही हूँ.. आज मेरी प्यास मिटा दो भैया...
मैं- ओके...और रक्षा तुम हमारा साथ दोगि या नही...
रक्षा- पूरा साथ दुगी..बस आज चूत नही खुलवाउन्गी....
मैं - ओके..तो शुरू करे...
मेरे कहते ही रूबी बैठ गई और जल्दी से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया.......
और मेरे लंड को बाहर निकल के देखने लगी...
यहाँ मैने रक्षा को खीच कर उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया...
वो दोनो मुझसे भी ज़्यादा जोश मे थी...रक्षा मेरे होंठो को तेज़ी से चूसने लगी और रूबी अपनी जीभ मेरे लंड पर घुमाने लगी....
थोड़ी देर तक रक्षा के होंठो का रस चूसने के बाद मैने उसके होंठ छू दिए और नाइटी के उपेर से ही उसके निप्पल को किस कर दिया....
रक्षा- आअहह...भैया...ऐसा ही किस उस दिन भी किया था...
मैं- ह्म्म्मो...तुम्हे याद है...
रक्षा- हां...मैं तो उसी दिन चाहती थी कि आप मेरे बूब्स चूसो पर आप ही आगे नही बढ़े...
मैं- मुझे पता होता ना तो बेटा मैं रोज तुम्हारे बूब्स को चूस्ता और इन्हे बड़ा कर देता....मम्मूउउहह...
रक्षा- आअहह सच भैया....तो अब आप रोज चूसना...आअहह
मैं- उम्म्म्म....
रक्षा- आहह ...भैया....काटो मत ...
मैं- आअहह..क्यो तुझे अच्छा नही लगा....
रक्षा- अच्छा तो लगा पर दर्द होता है ना...
मैं- बेटा दर्द मे ही मज़ा है....उउंम्म..
रक्षा- आअहह...ऐसे ही...खा जाओ भैया...
मैं रक्षा के बूब्स चूस के मज़ा ले रहा था और वहाँ रूबी ने मेरे लंड को चाटने के बाद सूपड़ा मुँह मे भर के चूसना शुरू कर दिया....
मैने धीरे-धीरे रक्षा के बूब्स चूस्ते हुए एक हाथ रूबी की गान्ड पर रख दिया और उसकी नाइटी को कमर पर चड़ा दिया....
मैने जैसे ही उसकी गान्ड पर हाथ लगाया तो चौंक गया....रूबी ने अंदर पैंटी भी नही पहनी हुई थी....
फिर मैने दूसरा हाथ रक्षा की गान्ड पर रखा और उसकी नाइटी उपेर की तो उसने भी पैंटी नही पहनी थी....
अब मैं एक हाथ से रक्षा और दूसरे हाथ से रूबी की गान्ड दबा रहा था और रक्षा अपने बूब्स को अपने हाथो से पकड़ के मुझसे चुसवा रही थी...वही रूबी मेरे लंड को चूस रही थी.....
करीब 10 मिनट बाद मैने दोनो को रोक दिया और उनकी नाइटी निकाल दी...
फिर मैने घुटनो पर बैठ गया और दोनो को अपने साइड करके उनको किस करते हुए उनके बूब्स मसल्ने लगा....
दोनो लड़किया पहली बार किसी लड़के के साथ पूरी नंगी थी इसलिए दोनो शरमा भी रही थी और ज़्यादा ही गरम हो रही थी...
मैं- तुम दोनो ...सच मे मस्त हो...क्या बॉडी है...
रूबी - आहह...आपको अच्छी लगी...
मैं- बहुत ..और मैने रूबी को किस कर दिया....
रक्षा- और मेरी..भैया...
मैं- तेरी भी बेटा...उउंम्म
रक्षा- उउंम...आहह..भैया..कितना तडपाया आपने...
मैं- मुझे पता होता तो दोनो को अपने साथ ही रख लेता...
रूबी- सच मे...तो उस दिन कुछ क्यो नही किया...
मैं- कब..??
रक्षा- कंबल के अंदर....हाइड आंड सीक खेलते हुए...
मैं- ओह तो तुम दोनो थी....कोई नही..आज तुम्हारी शिकायत दूर करता हूँ...
रक्षा- जल्दी करो भैया...इसकी चूत खोल दो...
मैं- ह्म्म...तू मेरा लंड चूसेगी...
रक्षा- मुझे आता नही...
मैं- रूबी को तो अच्छा आता है...क्यो रूबी कहाँ से सीखा...
रूबी- वो भैया...वो मैने ..
मैं- क्या हुआ...कोई प्राब्लम...
रक्षा- भैया वो..इसने अपनी मोम को देखा था...
मैं- ओह्ह तो मोम- डॅड की चुदाई देखी...ह्म्म्म ..
रक्षा- अब मैं चूसू भैया...आपका लंड..
मैं- आजा बेटा...
और मैं बेड पर लेट गया और रक्षा मेरे लंड के पास मुँह करके लेट गई....
इसके बाद मैं रूबी की गान्ड, रक्षा रूबी की चूत और रूबी रक्षा की चूत चूसने मे मस्त हो गयी.....
मैं- उउंम्म....सस्रररुउउप्प...आअहह...
रक्षा- सस्स्रररुउउप्प....सस्स्रररुउउप्प...
रूबी- उउउंम...उउउंम्म...उउउम्म्म्म...
थोड़ी देर मैं रक्षा और रूबी झड़ने लगी....
रूबी- आहह....मैं..आऐ....ऊओ...
रक्षा- मैं भी ...ऊहह...म्म्मा.आ
और दोनो का चूत रस एक- दूसरे के मुँह मे जाने लगा ...
रूबी तो रक्षा का रस पी गई पर रक्षा मुँह हटाने लगी...तो मैने रक्षा का मुँह रूबी की चूत मे लगा दिया और साथ मे...मैं भी रूबी की चूत का रस्पान करने लगा.....
जब वो दोनो झड चुकी तो अलग हो कर लेट गई.....
रक्षा- भैया आपने ऐसा क्यो किया...
मैं- तुझे चूत रस चखाने को..मज़ा आया...
रक्षा- बुरा नही है....
मैं- तो अब तू मेरा लंड चूस फिर मैं रूबी को चोदुन्गा....
रक्षा- हाँ ...ये मैं कर सकती हूँ....
फिर रक्षा ने मेरा लंड चूस कर खड़ा कर दिया और मैने रूबी के उपेर जा कर उसकी चूत पर लंड सेट कर दिया....
मैं- रूबी...अपनी चूत फैला लो....दर्द कम होगा....
मेरे कहते ही रूबी ने अपने हाथ से अपने पैर पकड़ कर चूत को फैला दिया...
मैने पहला ही झटका ज़ोर से मार दिया और रूबी की चीख निकल गई....
मेरे लंड का सुपाडा उसकी सील तोड़ के चूत के अंदर जा चुका था...और रूबी का कोमार्य ख़त्म हो गया था....
रूबी- मम्मूऊम्म्मय्ी.....आआहह....मर गई...म्माआ...
रूबी को रोते हुए देख कर रक्षा ने जल्दी से उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया और मैने दूसरा झटका मारा...
दूसरा झटका ज़्यादा तेज था और लंड चूत को फाड़ता हुआ जड तक घूंस गया और रूबी तड़पने लगी....
रूबी की चीख रक्षा के मुँह मे घूँट रही थी....
रूबी- उउंम...उउंम..उउंम्म..
मैने रूबी की सील तोड़ दी और उसकी आँखो से खुशी और दर्द के मिले आँसू बहने लगे....
रक्षा अपना काम बड़ी खूबी से कर रही थी....
थोड़ी देर मे जब रूबी थोड़ा नॉर्मल हुई तो रक्षा ने उसके होंठ छोड़ दिए....
रक्षा भी अपनी चूत मस्ती मे चुसवा रही थी....और सिसक रही थी...
रक्षा- आहह...आअहह...ऐसे ही....ज़ोर से चूस ...
रूबी-आहह...सस्स्रररुउउप्प...उउंम्म
मैने पूरी स्पीड मे 5 मिनट और रूबी को चोदता रहा ऑर रूबी फिर से झड़ने लगी…
रूबी- भैया…..मेरा…पानी,…आहह…..आहह…निकल….रहा.....
रूबी झड़ने लगी ऑर उसकी चूत मे पानी के साथ मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए फुकच्छ करने लगा….साथ मे रक्षा भी झड़ने हुए आहें भरने लगी....ऑर चुदाई का महॉल गरम हो गया…
मैने बाथरूम जा कर अपने लंड को सॉफ किया और पोछ कर रूम मे आ गया....
फिर माइनर 1 पेग और बनाया और अनु के रूम मे निकल गया.....
जब मैं अनु के रूम मे जाने को नॉक करने लगा तो पता चला कि रूम खुला हुआ है...
मैं रूम के अंदर गया तो सामने बेड पर अनु लेटी हुई दिखाई दी....
मैने रूम को अंदर से लॉक किया और बेड के पास पहुँच गया....
अनु कंबल ओढ़े हुए सोई हुई थी...सिर्फ़ उसका चेहरा ही बाहर था...
मैं खड़े हो कर अनु की खूबसूरती देखने लगा....
इस घर मे वैसे तो सभी लड़किया सुंदर है...बट अनु सबसे ज़्यादा क्यूट है...
मैं अनु के चेहरे को देखते हुए सोच रहा था कि कितनी क्यूट दिख रही है...बिल्कुल गुलाब के फूल की तरह सुंदर...उपेर से उसके बाल की लट जो उसके चेहरे पर डाली हुई थी...वो उसकी सुंदरता और बढ़ा रही थी....
मैं अनु की क्यूटनेस मे इतना खो गया कि ये भी भूल चुका था कि मैं यहाँ किस काम से आया था...
मैं(मन मे)- ये इतनी प्यारी है कि इसे अपनी बीवी बना लूँ....इसे देख कर हवस नही...प्यार उमड़ता है....
ये इतनी नाज़ुक है कि इसे प्यार से सहलाना होगा....ये रोन्दने के लिए नही है....
मैने डिसाइड किया कि इसे मैं पूरी जिंदगी प्यार करूगा...पर सिर्फ़ अपनी सेक्स भूख मिटाने के लिए यूज़ नही करूगा...
मैं फिर एक हाथ से अनु के गाल पर पड़ी हुई लट अलग की और कहा...
मैं- कितनी प्यारी है तू....तुझे देख कर ही प्यार आता है...पर तूने ये लंड चूसने जैसा काम क्यो किया....
मैं तुझे हमेशा से प्यार करता हूँ और अब तुम्हारे सामने बोलता हूँ कि तुम हाँ कहो तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा....रियली आइ लव यू स्वीटी...
और मैने बाल की लट हटा कर अनु के गाल पर पप्पी ले ली...और वापिस आने लगा.....
अनु- भैया...सोई हुई होती तो बहुत बदकिस्मत होती मैं...
मैं- ऐसा क्यो कह रही हो ???
अनु- वो इसलिए कि मुझे सोता हुआ देख कर आपने अपने दिल की बात तो की....
मैं- ऐसा क्या....तुमने क्या सुना...???
अनु- वही जो सुनने को मैं 2 सालो से इंतज़ार कर रही थी...
मैं- क्या...मैं समझा नही....
अनु- भैया...
मैं- हाँ ...
अनु- आइ लव यू
अनु ने अपने दिल की बात बोल दी बट मुझे कुछ ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा....मैं सोचने लगा कि इतने दिनो से मेरा लंड चूस रही है और अब मुझे आइ लव बोल रही है...
अनु- क्या हुआ भैया...आपने कुछ ...
मैं- आहंम...कुछ नही...क्या कहा तुमने ...???
अनु- भैया....आपका ध्यान कहाँ है....
मैं- यही तो है...बोलो...
अनु- तो आपने नही सुना जो मैने कहा...
मैं- हां सुना...पर...
अनु- पर क्या...???
मैं- अनु कुछ कहने से पहले ये पता होना चाहिए कि उसका मतलब क्या है...
अनु- मैं कुछ समझी नही...
मैं- ह्म्म..समझाता हूँ....
और मैं बेड के पास पड़ी चेयर को लेकर बैठ गया...
मैं- देखो अनु...तुम जो कह रही हो..उसका मतलब भी पता है तुम्हे...??
अनु- हाँ भैया...मैं आपसे सच्चा प्यार करती हूँ....
मैं- सच्चा प्यार..हाँ...???
अनु- जी भैया...कसम से...
मैं- अनु, सच्चा प्यार क्या होता है...जानती हो...???
अनु- हाँ जानती हूँ...
मैं- तो बताओ...
अनु- सच्चा प्यार वो होता है जो दिल से हो...जो अपने प्यार की खुशी देखे ना कि अपनी....जो अपने साथी के दुख को गले लगा ले....जो उसकी आँखो मे आँसू ना आने दे...सच्चा प्यार वो होता है जो किसी भी हालात मे अपने साथी का साथ ना छोड़े...सच्चा प्यार वो.....
मैं(बात काट कर) - बस...तुम किताबो मे लिखी लाइन्स बता रही हो....सवाल ये है कि तुम क्या सोचती हो....
अनु- मैं भी ऐसा ही प्यार करती हूँ आपसे....
मैं- और तुम्हारा प्यार ये कहता है कि रात के अंधेरे मे मेरे लंड को चूसो...
मैने ये बात थोड़ी गुस्से से कही और आँखे भी दिखाई...जिससे अनु ने अपनी नज़रे नीचे कर ली....
मैं अब खामोश था और मैने देखा कि अनु की आँखो से आसू बहने लगे....मैं ये तो नही चाहता था....
मैं- अनु...अनु रो मत ...मैं गुस्से मे बोल गया..सॉरी...
मुझे आज अनु की आँख मे आसू देख कर अच्छा नही लग रहा था और मैं उठ कर बेड पर उसके बाजू मे बैठ गया...
मैं- अनु , रो मत प्लीज़...चुप हो जाओ...
अनु(रोते हुए)- आपको यही लगता है कि ये सब मैं सेक्स के लिए कह रही हूँ...
मैं- नही अनु...मेरा ऐसा मतलब नही था...
अनु- यही मतलब था....अगर आपको ऐसा लगता है तो मैं कभी आपके पास नही आउगि...लेकिन प्यार आपसे ही करूगी...
मैं- अनु...चुप हो जा...प्ल्ज़्ज़
अनु के आसू नही रुके तो मैने अपने हाथ से उसके आसू पोछ दिए और उसके साथ ही लेट गया...
मैं- बस अब रोना नही....मेरी बात सुनो...
अनु- ह्म्म्म..
मैं- तू मुझसे प्यार करती है...???
अनु- ह्म्म..
मैं- कब्से...??
अनु- जबसे मैने प्यार का मतलब जाना है....
मैं(मन मे)- ओह माइ गॉड...ये डाइलॉग तो थोड़ी देर पहले ही सुना था....मुझे पता था कि अनु और रक्षा काफ़ी करीब है...पर इतने करीब कि डायलॉग भी सेम ....कमाल है...
अनु- मैं आपसे कहना चाहती थी पर हमेशा डर जाती थी....
मैं- ह्म्म...कितना प्या करती है मुझसे...???
अनु- अपनी जान से भी ज़्यादा....
मैं- ह्म्म..तू रोना मत ...तो तुझसे कुछ पूछूँ....
अनु- ह्म्म्मन..
मैं- जब मुझसे प्यार करती थी...तो बोला क्यो नही...और ये गंदी हरकत क्यो की....
( लंड चूसने वाली)
अनु- वो तो आपका प्यार पाने के लिए....
मैं- हाहाहा...ऐसे प्यार मिलता है....???
अनु- हाँ...मुझे तो ऐसा ही बताया था...
मैं- किसने कहा...???
अनु- वो..मधु है ना...उसने....
मैं- अच्छा...क्या कहा उसने...??
अनु- उसने कहा था कि लड़के की ज़रूरत पूरी करो तो वो प्यार करते है...
मैं- बकवास...वो प्यार नही...सेक्स की भूख है...हवस है ..
अनु- मतलब ये अच्छा नही है...??
मैं- बिल्कुल नही...गंदा है....
अनु- तो मैं गंदी हूँ...मैने गंदा काम किया है...
और अनु फिर से रोने लगी....मैने उसे चुप करने के लिए उसे गले से लगा लिया....
मैने - नही बेटा....तू ऐसा मत सोच....तू बहुत प्यारी है....बस तूने अपनी फ्रेंड की बात मानी...तो तू कहाँ गंदी हुई....
अनु(सुबक्ते हुए)- सच्ची भैया...मैने ग़लत नही किया ना..??
मैं- ग़लत तो किया...पर इसमे तेरा दोष नही है....बस अब उसकी कोई बात मत मानना....ओके
अनु- ह्म्म...मैं उसे छोड़ुगी नही...
मैं- नही...तू कुछ मत करना....
अनु- भैया ...उसने मुझे इतना गंदा काम करने को कहा और आप उसे बचा रहे है...
मैं- नही रे पगली...बचा नही रहा...बस तू कुछ मत करना...
अनु- इसका मतलब क्या हुआ. .???
मैं- मतलब ये कि हम मिल कर उसे सज़ा देंगे..पर टाइम आने पर...ओके
अनु- ह्म्म...आप कहते हो तो ठीक...
फिर हम थोड़ी देर तक यू ही गले लगे हुए खामोश लेटे रहे....मुझे इस तरह लेटे हुए अनु पर प्यार आ रहा था...पर हवस की कोई भावना नही थी....
अनु- भैया...
मैं- ह्म्म...
अनु- आपने जो कहा था वो सच है ना...???
मैं- कब...क्या कहा था...???
अनु- वही जो आपने रूम मे आते ही कहा था....मुझसे प्यार करते है...
मैं- हाँ तो..तुझे पसंद नही..??
अनु- आपको तो मैं जान से ज़्यादा पसंद करती हूँ....
मैं- ह्म्म...कितना...???
अनु- आपके लिए जान दे सकती हूँ...
मैं- ह्म्म..वैसे ये बता कि मधु के कहने पर तू मेरे रूम मे आने लगी...पर ये क्यो सोचा कि मैं इससे खुश हो जाउन्गा...
अनु- वो भैया...मैने आपकी बात सुनी थी...एक दिन आप मोबाइल पर किसी से कह रहे थे कि फ्रेश माल मिले तो प्यार करूगा ही....
मैं(मन मे) - ये तो रेणु दीदी से कहा था....
अनु- तो मैने सोचा कि आपको ये पसंद आयगा....
मैं- ह्म्म...पर तुम्हे डर नही लगा..कि पकड़ी भी जा सकती है...या मैं गुस्सा कर सकता था...
अनु- गुस्से का डर उस दिन ख़त्म हो गया था..जब आपने मेरा सिर पकड़ कर मेरे मुँह मे पानी डाल दिया था....
मैं- अच्छा...
अनु- और मैं चाहती थी कि आप मुझे पकड़ लो....
मैं- वो क्यो...??
अनु- ताकि आप मुझसे पूछो..और मैं अपने दिल की बात कहूँ...
मैं- वो तो तू वैसे भी कह सकती थी ना...
अनु- नही भैया...मेरी हिम्मत नही हुई....2 साल से आपसे कहना चाहती थी...पर हिम्मत ही नही जुटा पाई...
मैं- ह्म्म्मा..तो अब तू मेरी हो गई...
अनु- हाँ..और आप...
मैं- मैं भी तेरा और ये मेरी बॉडी भी तेरी..
अनु- तो मेरी बॉडी भी आपकी...
मैं- हाँ...वैसे तूने ये चूसना कहाँ से सीखा....
अनु- वो भैया...मधु के पास से..
मैं- मतलब..???
अनु- वो उसके पास रब्बर का है...उसी ने सिखाया...
मैं- वो क्या करती है उससे...??
अनु- भैया...वो तो अंदर भी डालती है...नीचे...
मैं- तूने भी डाला...???
अनु- नही भैया...मैं सिर्फ़ आपके साथ ही कुछ करूगि...वरना बिल्कुल नही...
मैं- ओके...तो अभी करना है क्या...???
अनु- जब आप कहो....मैं तैयार हूँ...
मैं- ह्म्म...आज नही....
अनु- क्यो ??
मैं- तुम स्पेशल हो माइ लव...तुम्हारे लिए कुछ स्पेशल करूगा...
अनु- ह्म्म...तो अभी क्या करूँ...
मैं- तू ऐसे ही लेटी रह मेरी बाहों मे....
इसके बाद अनु मेरे सीने पर सिर रखे हुए लेटी रही और थोड़ी देर मे ही सो गई....
मैं उसके फूल से चेहरे को देखकर सोच रहा था कि इतनी सुंदर लड़की मुझसे इतना प्यार करती है और मैं क्या हूँ...???
मैने तो कई के साथ सेक्स किया...इसे धोखा कैसे दूं....
मैने डिसाइड किया कि अनु को सब सच बता दूँगा और फिर प्यार से उसके माथे पर किस किया और लेट गया....
अनु मेरे सीने पर सोई हुए प्यारे सपने देख रही होगी ...पर मेरे माइंड मे उस डाइयरी की बात चल रही थी....
मैं(मन मे)- कल सुबह सबसे पहले वो डाइयरी पढ़नी है...फिर अनु से बात होगी ...
ऐसे सोचते हुए ही मुझे नीद आ गई...आज ड्रिंक भी किया था तो पता भी नही चला...और ना ये सोचा कि सुबह जब मुझे कोई अनु के साथ सोते हुए देखेगा तो क्या होगा...?????????
आज तक मैं जिस वजह से रात मे चौंकता था , उसी वजह से आज सुबह- सुबह मेरी आँख खुल गई....
मैने सोचा भी नही था कि सुबह- सुबह मेरे साथ ऐसा होगा...
आज अनु सुबह- सुबह मेरे लंड को मुँह मे ले कर चूस रही थी और लंड खड़ा करने की कोशिश कर रही थी....
मैं- अनु...ये क्या...तुम फिर से...क्यो..???
अनु ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया बस लंड चुसाइ चालू रखी....
मैं- अनु ...जवाब दो...उम्म्म
मेरी बात ख़तम ही नही हुई और अनु ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरा मुँह बंद कर दिया....
मैने भी सोचा कि चलो इसे इसका काम कर लेने दो फिर बात करेंगे....और मैं लंड चुसवाने का मज़ा लेने लगा....
अनु ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटा लिया और लंड को पूरी सिद्दत से चूसने लगी....बीच मे अनु अपने बाल को हटा ती , जो लंड चुसाइ के बीच मे आ रहे थे...उसकी लंड चुसाइ से मेरा लंड औकात पर आ गया था....
जैसे ही मेरा लंड पूरा खड़ा हुआ तो अनु ने लंड को मुँह से निकाल लिया और एक टक देखने लगी....तो मैने लंड को हाथ से पकड़ लिया....पर अनु आँखे फाडे हुए देखती रही...
मैं- क्या हुआ....???
अनु- भैया....ये तो...इतना बड़ा...
मैं- पहली बार थोड़ी देख रही है ..
अनु- पहली बार ही देखा...
मैं- अच्छा...इतने दिन से चूस रही है और कहती है कि पहली बार देखा...
अनु- हाँ...क्योकि आज तक अंधेरे मे ही चूसा था...देखा नही था....
मैं- ओके...अब देख लिया ना...कैसा है....
अनु- बहुत तगड़ा है...पर...
मैं- पर क्या ??
अनु- ये अंदर कैसे जा सकता है...
मैं- सब चला जाता है...आराम से...
अनु- पर मेरी वो तो छोटी सी है...
मसिन- हाहाहा...उसे चूत कहते है...और टेन्षन मत ले...चूत किसी भी लंड को अंदर ले लेती है...हाहाहा...
अनु- सच्ची...
मैं- हाँ..अब तू इसे शांत तो कर दे...
अनु- ह्म्म..पहले थोड़ा प्यार कर लूँ...
मैं- जो करना है करो...ये तुम्हारा है...पर जल्दी...कोई आ ना जाए...
अनु - ह्म्म्म
और उसके बाद अनु ने अपनी जीभ को लंड के उपेर से नीचे और नीचे से उपेर फिरानी सुरू कर दी....वो मेरे लंड को चटखारे लेकर चाट रही थी....
अनु- सस्स्रररुउपप...सस्स्रररुउउप्प...आहह
मैं- ओह्ह अनु...तू एक्सपर्ट हो गई...आअहह
अनु- सस्रररुउउप्प...आअहह
मैं- अब जल्दी से चूस मेरी जान...जल्दी...
मेरे कहते ही अनु ने मेरे लंड के सुपाडे को मुँह मे भरा और अपनी जीभ सुपाडे पर घूमाते हुए चूसने लगी....
धीरे-2 अनु ने लंड पूरा मुँह मे भर लिया और मुँह उपेर नीचे करके लंड को चूसने लगी...
थोड़ी देर तक अनु ने बड़े प्यार से लंड चूसा और फिर स्पीड बढ़ा दी....जिससे मैं झड़ने के करीब आ गया...
मैं- अनु ...आइ एम कोँमिंग बेबी...
और मैं अनु के मुँह मे झड़ने लगा....अनु पूरे मन से मेरा सारा लंड रस पी गई और फिर लंड चूस कर पूरा सॉफ कर दिया....और फिर मेरे उपेर आकर मेरे गले लग गई...
मैं- ओह अनु...तू फिर से सुरू हो गई...
अनु- ह्म्म...आदत पड़ गई है भैया...
मैं- पर सुबह- 2 ...क्यो..??
अनु- वो कल रात मेरे रोने की वजह से आपको मज़ा नही मिला था ना..इसलिए...
मैं- अरे बेटा..तू मज़े लेने की नही प्यार करने के लिए है...
अनु- तो मुझे भी आपको प्यार करना चाहिए ना...
मैं- हाँ..पर ऐसे...???
अनु- आपको अच्छा नही लगा...???
मैं- अच्छा क्या...तूने मेरी मॉर्निंग सच मे बेस्ट बना दी...
अनु- तो मैं आपको ऐसे ही प्यार करूगि...आप मना मत करना...
मैं- ओके बेटा ..नही करूगा....अब उठ जा...मैं जाउ ...वरना तेरे साथ कोई देखेगा तो बवाल हो जाएगा..
अनु- ह्म्म...पर मेरी मॉर्निंग का क्या ??
मैं- अभी तेरी मॉर्निंग गुड करता हूँ...
और मैने अनु के होंठो को चूसना सुरू कर दिया....
हम आपस मे एक किस कर के अलग हुए और फिर मैं अनु को लिटा कर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गया....
अभी सारे लोग सो ही रहे थे तो मैने सोचा कि चलो अनु की मॉर्निंग तो मस्त हो गई...अब रक्षा और रूबी को भी गुड मॉर्निंग बोल दूं फिर संजू के पास जाउन्गा.....और मैं रक्षा के रूम मे चल गया....
रक्षा के रूम मे जाकर मैने देखा की रक्षा और रूबी दोनो सोई हुई है...और रूम की लाइट भी ऑन है....
रूबी तो अपनी पहली चुदाई से दर्द और थकान की वजह से गहरी नीद मे थी और रक्षा भी चूत की खुजली मिटा कर इतमीनान से सो रही थी....
दोनो वैसे तो कंबल मे थी पर रक्षा के उपेर से कंबल खिसक गया था और उसके आधे बूब्स बाहर दिख रहे थे....
रक्षा के चेहरे मे भी मासूमियत थी पर अनु से ज़्यादा नही....
पर इस समय मुझे रक्षा का चेहरा देख कर उस पर प्यार आ रहा था...और साथ मे उसके गोरे- 2 बूब्स देख कर मेरा मन भी मचल रहा था....
मैने जल्दी से रूम का गते लॉक किया और रक्षा के बाजू मे जा कर बैठ गया...
थोड़ी देर तक रक्षा की खूबसूरती को निहारने के बाद मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी और मेरे मन मे लालच आ गया...
मैने धीरे से कंबल को नीचे किया...जिससे उसके बूब्स पूरे बाहर आ गये....
मैने एक हाथ से उसके बूब को साहलया तो उसकी तरफ से कोई हरकत नही हुई....
फिर मैने थोड़ी देर तक उसके बूब्स को बारी-बारी सहलाया....अब भी रक्षा सोई हुई थी...
फिर मैने उसके निप्पल को दबाया...पर कोई रेस्पोन्स नही मिला....
मैने फिर उसके बूब्स को दबाना चालू कर दिया...पर अभी भी रक्षा सोती रही....
फिर मैने झुक कर रक्षा के निप्पल पर जीभ घुमानी चालू की...और कुछ देर तक उसके दोनो निप्पल को चाट ता रहा....फिर भी रक्षा नही जागी....
पर जैसे ही मैने उसके एक बूब को मुँह मे भरा तो रक्षा कसमसा गई....
पर मैने अपना काम चालू रखा....
मैं उसके बूब को मुँह मे भर के चूसने लगा....
थोड़ी देर बाद मैने दूसरा बूब भी चूसा...और थोड़ी देर चूसने के बाद मुझे रक्षा की आवाज़ आई...
रक्षा- गुड'मॉर्निंग भैया...
मैं(बूब को मुँह से निकाल कर)- मोर्नग बेटा...अच्छी नीद आई...???
रक्षा- ह्म्म...और सुबह उससे भी अच्छी हुई....
मैं(मुस्कुरा कर)- सच मे...
रक्षा- ह्म्म...पर आपने मुझे जगाया क्यो नही...
मैं-क्योकि मैं नही चाहता था कि हमारी बात से रूबी जाग जाए...
रक्षा- तो उससे क्या...उसे तो सब पता है...फिर कैसा डर ???
मैं- डर नही...वो थकि होगी...उसे सोने दो...तो दर्द भी जल्दी ठीक हो जाएगा...
रक्षा- ह्म्म्म ...पर आप रुक क्यो गये...करिए ना...
मैं- क्या करूँ...
रक्षा(शरमाते हुए)- वही जो कर रहे थे....
मैं- ह्म्म...तुम चुप-चाप मज़े लेगा....वो जागने ना पाए...ओके
रक्षा- हाँ मे गर्दन हिला दी...
फिर मैं रक्षा के उपेर झुक कर उसके बूब्स को चूसने लगा...
रक्षा- उनम्म( रक्षा ने अपने होंठ बंद किए पर हल्की सिसकी निकालती रही...)
मैं- सस्स्ररुउउप्प्प्प...उउम्म्म्म
रक्षा-हम्म...उउउम्म्म्म
थोड़ी देर तक मैं उसके नरम-नरम बूब्स का रस्पान करता रहा...और फिर मैने उपेर जाकर उसके होंठो पर होंठ लगा दिए....
रक्षा तो जैसे इसी इंतज़ार मे थी और उसने जल्दी से मेरे होंठो को अपने होंठो से क़ैद कर लिया और मेरा सिर पकड़ कर जोश के साथ किस करने लगी...
मैं रक्षा की किस्सिंग से हैरान था...वो मुझे ऐसे चूस रही थी कि जैसे मैं कही भागा जा रहा हूँ...साथ मे उसकी जीभ मेरे मुँह मे घूमने लगी और मेरी जीभ को किस करने लगी....
हम तब तक होंठ चूस्ते रहे जब तक कि हमे साँस लेने मे तकलीफ़ नही हुई....जैसे ही हमारे होंठ अलग हुए तो हम ज़ोर- ज़ोर से साँस लेने लगे....
थोड़ी देर मे जब हम नॉर्मल हुए तो एक- दूसरे को देख कर मुस्कुरा दिए और फिर रक्षा शरमा गई...
मैने उसे कुछ नही कहा..और उठ कर उसके उपेर से कंबल हटा दिया....
जिससे रक्षा अब पूरी नंगी मेरे सामने आ गई....
रक्षा का जिस्म गोरा था....और उसकी बनावट भी बिल्कुल मस्त थी...सिफ्ट होंठ...मस्त बूब्स...कातिल कमर...पर्फेक्ट गान्ड....
और प्यारी चूत...जो इस समय उसकी जाँघो के बीच छिपी हुई थी और उसके नाक की तरह उसकी जाग भी चूत की रक्षा कर रही थी....
मैं रक्षा के जिस्म को देखे जा रहा था और रक्षा शर्म से लाल हो रही थी....
मैं फिर बेड पर उसके बाजू मे बैठ गया और झुक कर उसकी नाभि को किस कर दिया....
रक्षा- आहह...भैया...
मैने अपनी जीभ को नाभि मे घुमाना चालू कर दिया और साथ मे उसकी जाघ को हाथ से सहलाने लगा....
थोड़ी देर बाद मेरी जीभ घुमाने से रक्षा भी गरम ही गई और अपने बूब्स अपने हाथ से मसल्ने लगी......
मैं अपनी जीभ को उसकी बॉडी पर फिराते हुए उसकी चूत पर पहुत गया...और उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटने लगा.....
रक्षा- आहह...आअम्म्म.....उउंम्म
थोड़ी देर बाद ही रक्षा ने अपने दोनो पैर फैला दिए औट चूत को आज़ाद कर दिया....ये मेरे लिए चूत चूसने की दावत थी....
मैं उठा और उसके पैरो के साइड झुक गया.. और रक्षा की प्यारी चूत मेरे सामने आ गई....
मैं- बेटा...ज़्यादा आवाज़ मत करना...ओके...
रक्षा जो अभी मज़े मे अपनी आँखे बंद किए हुए थी....उसने गर्दन हिला कर हामी भर दी....
मैने थोड़ी देर तक चूत को चाटा...जिससे रक्षा की चूत पानी- पानी ही गई...और फिर मैने जीभ को नुकीला करके उसकी चूत मे डाल दिया...
रक्षा- उउंम...भा...ईया....आहह...
मैने धीरे से अपनी जीभ से उसकी चुदाई करने लगा और रक्षा अपने बूब्स मसल्ते हुए मज़े से सिसकती रही....
थोड़ी देर बाद रक्षा ने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और तेज़ी से अपनी गान्ड उठा- उठा कर चूत चुसवाने लगी....
करीब 5-6 मिनट बाद ही रक्षा की चूत ने चूत रस की बारिश कर दी और मैं फ्रेश चूत का रस पीने लगा....
जब रक्षा झड चुकी तो वो थक के लेट गई और मैं उसकी चूत से चूत रस चाटने लगा....
जब मैने चूत रस को चाट लिया तो उसकी चूत को चाट कर सॉफ कर दिया और उसे कंबल उढा कर उसके सिर के पास खड़ा हो गया....
मैं- अच्छा लगा ...
रक्षा- आज मेरी लाइफ की बेस्ट मॉर्निंग हुई है भैया ...
मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..अब तू रेस्ट कर ..मैं चलता हूँ...
रक्षा- ह्म्म...
मैं -चल गेट लगा ले...कोई आ गया और तुम दोनो की हालत देखी तो....और इस रूबी को पेन किल्लर खिला देना ओके....
रक्षा - ह्म्म...चलिए
और मैने रक्षा को किस किया और एक नज़र रूबी पर डाली...जो हम से बेख़बर सोई हुई थी...और मैं रूम से बाहर निकल आया....
मेरे बाहर आते ही रक्षा ने गेट लॉक कर लिया और मैं संजू के रूम मे चला आया.....
जैसे ही मैं संजू के रूम मे आया तो सबसे पहले फ्रेश होकर अपने लंड को शांत किया जो रक्षा की चूत चूसने से खड़ा हो गया था और उसके बाद संजू के साथ बेड पर लेट गया....
लेटे हुए मैं सोचने लगा कि आज की सुबह भी क्या शुरुआत की हुई....एक बेहन ने मेरा लंड रस पिया और दूसरी ने अपना चूत रस मुझे पिलाया....
फिर मैने कल का प्लान बनाया कि कल किसी भी हालत मे डाइयरी पढ़ना है और साथ मे कल पारूल का अड्मिशन भी कराना है....
फिर मैं थकान की वजह से कब सो गया पता ही नही चला....