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चूतो का समुंदर



मैं सोच ही रहा था कि ये कौन हो सकता है कि तभी मेरी लेफ्ट पैर पर एक और हाथ घूमने लगा और मैं शॉक्ड हो गया….

मेरे लेफ्ट मे सिर्फ़ अनु और रूबी थी…और मेरे राइट मे रक्षा, पूनम दी और मधु थी…

मैं पूनम दीदी के लिए तो श्योर था बट ये दूसरा कौन था…और ये लेफ्ट साइड मे किसका हाथ आ गया..क्या अनु..??? …या रूबी..????

मैं सोच रहा था और हाथ अपना काम कर रहे थे,,….नतीज़ा ये हुआ कि मेरे लंड ने हुन्न्कार भरना शुरू कर दिया..

तभी मेघा आंटी रूम मे आ गई और सारे हाथ पीछे हट गये…

आंटी2- लो बच्चो..आप सबके लिए गरमा-गरम कॉफी और पकोडे…

अनु- थॅंक्स मम्मी…मैं सोच ही रही थी कि ऐसे मौसम मे कुछ गरमा-गरम हो जाए…

आंटी2- अब ले आई ना..चलो-चलो शुरू करो, मैं संजू को देने जाती हूँ…

इसके बाद हम सब कॉफी और पकोड़ो का आनंद लेने लगे और मैं हाथ के बारे मे सोचने लगा…

नाश्ता ख़त्म करके मैने फिर से पढ़ाना शुरू कर दिया और करीब 2 घंटे पढ़ने के बाद हम फिर से रेस्ट करने लगे…

इस बार भी मेरे पैरों पर हाथ घूमते रहे और मेरे दिमाग़ मे सवाल…कि कौन है ये ..पूनम तो पक्का है…पर बाकी कौन…?????

मैं सोच ही रहा था कि पूनम दी बोली

पूनम- अब पढ़ाई बहुत हो गई..अब कुछ गेम खेलते है...

अनु- हाँ दीदी..पर ऐसे मे क्या खेले..???

पूनम दी- ह्म्म..हम सब हाइड आंड सीक खेलते है पर न्यू स्टाइल मे…

मैं- न्यू स्टाइल...वो कैसे…???

पूनम – हम मे से एक बाहर पारी देने जायगा और बाकी लोग कंबल मे छिप जाएगे…

रूबी- दीदी..कंबल मे सब लोग..तब तो सब पकड़े जाएगे…

पूनम- अरे रूबी सुन तो…

अनु- हाँ आप बोलो…

पूनम- यही तो ट्विस्ट है…

रक्षा- कैसा ट्विस्ट..

पूनम- देखो हम 2-2 और 3-3 के ग्रूप मे कंबल मे रहेगे..और जो पारी देगा..उसे बताना होगा कि इस कंबल मे 2 लोग या 3 लोग कौन-कौन है…

मधु- 2 या 3 को बता भी देगा तो अगली पारी कौन देगा..2 अया 3 लोग साथ मे तो दे नही सकते ना…

पूनम- सुनो तो..

मैं- हाँ …पहले आप बोल लो…

पूनम- तो सुनो…उस ग्रूप मे जिसका नाम पहले बुलाया जायगा वो पारी देगा…पर तभी जब पूरे ग्रूप को सही पहचान लिया जाएगा..

रूबी- मैं समझी नही थोड़ा डीटेल मे समझाओगी दीदी….

पूनम- हाँ क्यो नही…देखो , जैसे मधु पारी देने गई…और मैं अनु के साथ 1 कंबल मे छिप गई और रक्षा, भाई और तुम एक कंबल मे…

अनु- ओके…फिर..

पूनम- अगर मधु ने बोल दिया कि मेरे कंबल मे मैं और अनु है या भाई के कंबल मे भाई , रक्षा और रूबी है …तो उसकी पारी ख़त्म और वो जिस कंबल का बोलेगी उसमे से वो पारी देगा जिसका नाम पहले बोला हो..

मैं- ह्म्म..पर सारी नेम सही हो तब..

पूनम- हाँ….बिल्कुल….समझ गयी सब..??

हम सबने हाँ कर दिया…

मैं- समझ तो गया..पर ऐसा गेम होता भी है कही…

पोनं- अरे भाई होता है ना..हम जब स्कूल ट्रिप पर गयी थे तो अपने रूम मे खेलते थे…ये हमने ही बनाया है…

मैं- अच्छा..पर ये लोग खेलेगे..????

अनु- क्यो नही खेलेगे…किसी को कोई प्राब्लम क्यो रक्षा, रूबी ,मधु..बोलो..

अनु की बात पर सबने कहा दिया कि कोई प्राब्लम नही...

इसके बाद सब खेलने को रेडी थे पर पहली पारी कौन देगा…???

पूनम दी- पहली पारी देने के लिए हम पर्ची मे नंबर लिख कर उछालते है…जिसका सबसे कम नंबर आयगा वो पारी देगा..

मैं- ओके..पर पहले संजू को बुला लो…

अनु- हाँ , मैं बुलाती हूँ...

अनु संजू को बुलाने गई पर संजू सो चुका था.....

पूनम- ओके तो हम 6 लोग है…मैं 6 नंबर की चिट बनाती हूँ…जिसके पास 1 आयगा..वो पारी देगा..ओके

हम सबने हाँ कह दिया और चिट तैयार हो गई..चिट मे 1 नंबर मधु का आ गया और वो पारी देने को जाने लगी…

पूनम- रूको मधु..गेम को थोड़ा और मजेदार बनाते है…

अनु- वो कैसे….

पूनम-देखो , हम रूम मे अंधेरा कर देते है..फिर हमे भी समझ नही आएगा कि हमारे कंबल मे कौन है…

मैं- पर जब कोई नाम लेगा तो...

पूनम- हाँ, देखो जिसका नाम बुलाया जायगा वो हाँ बोलेगा..और जैसे ही दो लोग अलग कंबल मे हुए तो पार्री वापिस देनी होगी…

अनु- वाउ दी ..अब तो और भी मज़ा आयगा…

पूनम- चल फिर लाइट ऑफ कर और खिड़की भी…वैसे भी बाहर तो अंधेरा छा ही गया है…

इसके बाद रूम मे अंधेरा हो गया..और मधु अपनी पारी देने चली गई…मधु को नीचे मेन डोर तक जा कर 10 तक काउंट कर के आना था…जब तक हम को 2 कम्बलो मे छिपना था…लेकिन इसी रूम के अंदर..चाहे खड़े रहे या लेटे रहे…

मैं सोचने लगा कि इन लड़कियो के साथ कंबल मे मेरा क्या होगा…कही मेरा लंड खड़ा हो गया तो…???????

मैं सोच पाता उसके पहले ही मुझे किसी ने पकड़ के अपने साथ कंबल मे लिटा लिया और दूसरी लड़की मेरे दूसरे साइड से कंबल मे आ गई…

एक अजीबो- ग़रीब गेम शुरू हो चुका था….जो ना किसी ने सुना होगा और ना किसी ने खेला होगा…..

पता नही ये गेम आगे क्या-क्या करवाता है…और मुझे क्या मिलता है…..मज़ा या सज़ा…..????????......देखते है…

अब मैं 2 जवान लड़कियों के साथ एक ही कंबल मे था….और कमाल की बात ये थी कि मुझे या भी नही पता था कि मेरे साथ जो लड़कियाँ है …वो है कौन..???

मुझे सच मे बड़ा अजीब लग रहा था कि आख़िर ऐसा खेल क्यो खेल रही है ये सब लड़कियाँ..जबकि सबको पता है कि उनको लड़के के साथ चिपक कर एक ही कंबल मे रहना पड़ेगा…

फिर मैने सोचा की जब इनको कोई प्राब्लम नही तो मैं क्यो डर रहा हूँ…जो होगा तो होने दो…वैसे भी जब चूत ही फड़कने लगे तो लंड की क्या ग़लती…हाहाहा…

यही सोच कर मैने अपनी घबड़ाहट को निकाल फेका और कंबल मे छिपे हुए गेम का मज़ा लेने का सोच लिया…

यहाँ कंबल के अंदर हम 3 लोग बड़ी मुस्किल से अड्जस्ट हो रहे थे…हम सबके बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपके हुए थे…

मैं बीच मे करवट लेके पड़ा हुआ था और दोनो लड़कियाँ भी करवट लिए हुई थी…ऐसे हम तीनो एक ही साइड मे करवट लेके लेटे हुए थे…

मेरे आगे साइड जो लड़की थी…उसकी गान्ड मेरे लंड से सट गई और मुझे गरम करने लगी….वही पीछे वाकई लड़की के कड़क बूब्स मेरी पीठ पर चुभ रहे थे…जो मेरी गर्मी को और भी ज़्यादा बढ़ाने लगे…

मैं कुछ देर तक तो बिल्कुल नॉर्मल रहा…पर लंड कहाँ मानता है…वो तो गान्ड से टच होते ही कड़क होने लगा…और मेरे पीछे वाली लड़की के बूब्स भी तन गये और मेरी पीठ पर उसके निप्पल चुभने लगे….

अब तक सब नॉर्मल ही था ..पर इसके बाद जो हुआ..वो देख कर तो मैं शॉक्ड रह गया…

 


अचानक पीछे वाली लड़की मुझसे ज़्यादा ही सट गई और हमारी बॉडी पूरी तरह से चिपक गई…अब मैं उसका पेट अपनी पीठ पर सॉफ महसूस करने लगा…साथ मे उसकी मोटी जाघे मेरी गान्ड से चिपक गई…

ऐसा लग रहा था कि हमारी बॉडी एक ही हो गई है…और मुझे उसके बूब्स मेरी पीठ पर ऐसे चुभ रहे थे कि जैसे ये बूब्स पीठ मे होल ही कर देगे…

यहाँ पीछे वाली लड़की ने मुझे पूरा गरम कर दिया तो मेरा लंड औकात पर आ गया और आगे वाली लड़की की गान्ड मे घुसने लगा…

मेरा लंड उसकी गान्ड की दरार मे घूंस गया तो मेरा दिल भी डर से धड़कने लगा…कि कही ये लड़की गुस्सा हो कर कोई पंगा ना कर दे…

पर मुझे फिर से झटका लगा...इस बार आगे वाली लड़की ने झटका दिया...जब उसने अपनी गान्ड को पीछे करने मेरे लंड पर दबा दी..जिस से मेरा लंड अब पूरी तरह उसकी गान्ड की दरार मे समाने लगा…

मैं अब बहुत ही खुश और परेशान था…मुझे समझ नही आ रहा था कि ये सब क्या चल रहा है…मैने सोचा था कि पूनम दीदी होगी तो वो हरकत कर रही होगी ..पर यहाँ तो दो-दो लड़कियाँ है…और ये भी नही पता कि ये है कौन…

फिर मैने सोचा कि एक लड़की पूनम दीदी है और दूसरी शायद वो है जो मेरा लंड चूस कर जाती है रात मे…पर कौन..अनु या रक्षा…????

क्योकि बाकी की दो लड़किया तो इस घर की नही है….फिर सोचा कि जब मधु पारी देने आएगी तो नाम बोलेगी..तब शायद पता चल जाएगा…तब तक मज़े करो…

यही सोच कर मैं वेट करने लगा कि अब आगे क्या करती है ये दोनो…इतने मे पीछे वाली लड़की ने अपना एक पैर मेरे पैर पर चढ़ा दिया…और ज़्यादा ही चिपक गई…अब मुझे उसकी चूत का उभार का अहसास भी मेरी जाँघ पर होने लगा था…

मैने पीछे वाली के बारे मे सोच ही रहा था कि आगे वाली लड़की ने अपनी गान्ड की पीछे करते हुए मेरे लंड से रगड़ना चालू कर दिया…

जब मैने देखा कि दोनो हरकते कर रही है तो मैं क्यो चुप-चाप हूँ…आख़िर शुरुआत तो इन दोनो ने ही की…

यही सोच कर मैने अपना एक हाथ आगे करके आगे वाली लड़की के बूब्स पर रख दिया…उसके बूब्स पूरी तरह कसे हुए थे…

मेरे ऐसा करने के बाद तो उसने अपनी गान्ड मेरे लंड पर घिसने की स्पीड तीज कर दी तो मैने भी मौका देखते हुए उसके बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया..

वहाँ पीछे वाली लड़की ने मेरी जाँघ पर पैर चढ़ा कर अपनी गान्ड को हिलाना शुरू कर दिया…जिस से उसकी चूत मेरी गान्ड पर रगड़ खाने लगी….

मैं तो इतना गरम हो गया कि मुझे लगने लगा कि अभी इनको नंगा करूँ और दोनो की चूत मार लूँ…पर क्या करता..रूम मे हमारे अलावा भी दो लड़किया और थी…तो मैं ऐसे ही गरम होते हुए मज़ा लेने लगा…

अब दोनो लड़किया अपनी पूरी स्पीड से अपनी गान्ड हिला रही थी…एक की चूत मेरी गान्ड पर तो एक की गान्ड मेरे लंड पर रगड़ खाने लगी और मेरा हाथ भी पूरी स्पीड से आगे वाली लड़की के बूब्स दवाने लगा…

धीरे-धीरे कंबल के अंदर सिसकिया सुनाई देने लगी….वो दोनो सिसक रही थी पर आवाज़ को दबाते हुए..ताकि कोई सुन ना ले..

वो दोनो तो मज़े ले रही थी पर मेरा लंड जो खड़ा था उसका क्या करूँ…

मैं यही सोच रहा था कि अब तक मधु क्यो नही आई..जल्दी आ जाए तो कुछ शान्ती मिले….

इतने मे रूम के बाहर से रजनी आंटी की आवाज़ आई…

आंटी- अरे बच्चो...कहाँ हो...

आंटी की आवाज़ सुनते ही वो लड़कियाँ. कंबल से निकल गई और मैं बैठ गया...

आंटी- बेटा ये लाइट क्यो ऑफ है..??

पूनम(लाइट ऑन कर के)- मोम, हम हाइड न्ड सीक खेल रहे थे....आप ने सब बिगाड़ दिया..

आंटी- ओह..सॉरी बच्चो...मैं तो कॉफी ले कर आई थी....

मैं- थॅंक्स आंटी...मुझे इसकी ज़रूरत थी...

आंटी के साथ मधु भी थी...उसे देखते ही पूनम बोली...

पूनम दी- मधु तू कहाँ रह गई थी..पारी देने गई थी कि...

मधु(बीच मे)- वो आंटी ने रोक लिया था सॉरी...

अनु- ओके मधु...पहले कॉफी पीते है फिर तू वापिस पारी देने जाना...

मधु- ओके...

आंटी- सॉरी बच्चो...मुझे पता नही था कि तुम गेम खेल रहे हो...

मैं- कोई नही आंटी...होता है..

अनु- हाँ आंटी...हम फिर से स्टार्ट कर लेगे...

मैं अनु की बात सुन कर सोचने लगा कि साला अभी तक लंड बैठा नही है...अब फिर से....इस बार पता नही कौन मेरे साथ आती है कंबल मे..

और अगर पहले जैसा ही हुआ तो....इस बार मे फुल मज़ा लूँगा...बस अब मुझे इंतज़ार था कि कब गेम वापिस स्टार्ट होगा....

रजनी आंटी से कॉफी ट्रे मधु ने ले ली और सब को सर्व करने लगी….

हम सब कॉफी पी रहे थे और मैने अपने लंड के बैठने का इंतजार कर रहा था...यहाँ मेरी कॉफी ख़तम हो रही थी और वहाँ मेरे लंड की अकड़ कम होती जा रही है....

सब लड़कियाँ खिलखिलाते हुए गप्पे कर रही थी और गेम के बारे मे बात करने लगी कि मज़ा खराब हो गया तो ठीक पर अब अच्छे से मज़ा करेगे....

मैं बारी-बारी सब लड़कियों की आँखो मे देखने लगा...मैने सोचा कि जो मेरे साथ हरकते कर रही थी...शायद मुझे पता चल जाए...

पर ऐसा कुछ समझ नही आया...सब लड़किया मुझसे नज़र मिलते ही स्माइल कर रही थी...तो मुझे भी स्माइल करना पड़ा...पर मुझे कोई भी ऐसा नही दिखा जिसे देख कर लगे कि थोड़ी देर पहले वो मेरे साथ जवानी के मज़े ले रही थी....

मैने सोचा कि इन्ही से पूछा जाए..तो मैने बात घूमते हुए पूनम दी से बोला...

मैं- दी...आप कहाँ छिपी हुई थी...

पूनम दी- क्यो पूछ रहे हो भाई... ??

मैं- बस ऐसे ही…(अब मैं सच तो बोल नही सकता ना)

पूनम दी- अरे भाई जहाँ भी छिपी थी , मैने सेफ थी….मधु को कभी पता नही चलता..क्यो अनु…हहहे

पूनम दी की बात पर सब हँसने लगी….मैने फिर से पूछा…

मैं- अरे पर किसके साथ छिपि हुई थी .. ???

पूनम दीदी के बोलने से पहले ही अनु बोल पड़ी…

अनु- आप भी भैया…पीछे ही पड़ गये…अभी मधु जाएगी ना पारी देने तब पता कर लेना …है ना दीदी..

पूनम दी – हाँ बिल्कुल…

मुझे मेरी बात का आन्सर तो नही मिला पर मेरा लंड बैठ गया था और अब मुझे बातरूम जाने की तड़प होने लगी…

अनु- भाई , गेम फिर से स्टार्ट करे…

मैं- ह्म्म..पर 1 मिनट रूको , मैं अभी आया…

अनु- अब आप कहाँ जा रहे है…

मुझे बताने मे शर्म आ रही थी पर अनु बताए बिना जाने नही दे रही थी ..तो मुझे फ़िंगर से इशारा कर के बताना पड़ा ही बाथरूम जाना है…

मेरी फ़िंगर देखते ही सब लड़कियाँ हँसने लगी …और मैं शर्मा कर संजू के रूम मे बाथरूम चला गया..

बाथरूम मे जाते ही मैने जल्दी से अपने आपको हल्का किया और सोचने लगा कि यार ये हो क्या रहा है…ये लड़किया क्या जानबूझ कर ये सब कर रही थी या ऐसे ही हो गया ..आपस मे चिपके जो हुए थे…

पता नही..पर इस बार ऐसा कुछ हुआ तो मैने अपनी औकात पर ज़रूर आ जाउन्गा..और फिर मैं वो करूगा ..जो मेरा लंड चाहेगा..ना कि दिमाग़ की सुनुगा…

मैने हल्का हो कर वापिस अनु के रूम मे आ गया…वहाँ लड़किया आपस मे काना-फूसी कर रही थी और मुझे देखते ही सब एक साथ ज़ोर से हँसने लगी…

मैं- क्या हुआ…???

पूनम दी- कुछ नही भाई..लड़कियों की बाते…

मैं- ओह्ह..तो मैं बाहर जाता हूँ..

अनु- अरे नही भैया..ऐसी कोई बात नही…हमने अब डिसाइड किया है कि मधु अब की बार पारी देने जाएगी तो 100 की जगह 200 काउंट करेगी…

मैं- पर क्यों..???

पूनम दी- भाई ये पनिशमेंट है…जो भी दूसरी बार पारी देने जायगा वो डबल काउंट करेगा..

मैं- और अगर तीसरी बार गया तो…???

अनु- भैया …हर बार 100 आड होता जायगा…

मैं- ओके…गुड ..

पूनम- ओके, तो मधु अब तू जा …और अनु तू लाइट ऑफ कर दे…

अनु- ओके..पर पहले सब एक साथ आ जाओ..ताकि पता ही ना चले कि कौन कहाँ है…

 


मुझे समझ नही आ रहा था कि मधु के जाने के बाद हमे पता भी रहे तो क्या..पर मैं कुछ कहता उसके पहले सब मेरे साथ खड़े हो गयी और जैसे ही अनु ने लाइट ऑफ की तो सब ज़ोर से हँसते हुए, इधर-उधर हो गयी…

मैं इस बार भी खड़ा ही था कि तभी मुझे किसी ने खीच कर अपने पास कर लिया और नीचे लिटाते हुए कंबल ऊढा दिया….

मैं खुश था कि इस बार मेरे साथ एक ही लड़की थी ….अब अगर कुछ हुआ तो पता चल जायगा कि ये कौन है ….

पर मेरी खुशी ज़्यादा देर तक नही रही…एक लड़की मेरे पीछे से कंबल मे आ गई और इस बार भी हम एक साइड मुँह कर के चिपक कर लेट गये ….

हम पिछली बार की तरह ही लेटे थे,…बस हमारा मुँह दूसरी साइड था…पर इस बार भी मुझे समझ नही आ पाया कि कौन-कौन मेरे साथ मे है…???

मैं इस बार बिल्कुल तैयार था…पिछली बार की तरह मुझे झटका नही मिल सकता था….

हम लेटे ही थे कि पहली बार की तरह मेरा लंड आगे वाली लड़की की गान्ड से चिपक गया…और गर्मी की शुरुआत हो गई…बिल्कुल उसी तरह पीछे वाली लड़की के बूब्स मेरे सीने मे चुभने लगे…

मैने सोच लिया था कि इस बार मैं अपने हिसाब से लेड करूगा पर मुझे ये भी कन्फर्म करना था कि क्या इस बार भी दोनो लड़किया जान-भुंझ कर हरकते करती है या सिर्फ़ लेटने की वजह से हम चिपके पड़े है…

मेरा ये डाउट भी जल्दी ही क्लियर हो गया…जब आगे वाली लड़की ने अपनी गान्ड पीछे कर दी..उसकी गान्ड पीछे आते ही मेरा लंड उसकी गान्ड की दरार मे सेट हो गया…

अब मैं इस इंतज़ार मे था कि पीछे वाली लड़की भी हरकते करती है तो ठीक ..वरना मैं आगे वाली लड़की को अपने तरीके से मज़े दूं…

लेकिन आज तो जैसे लड़कियों ने मुझे शिकार ही बना लिया था…पीछे वाली लड़की ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया और मेरी पीठ से चिपक गई…

अब जबकि दोनो लड़किया मज़े के मूड मे थी तो मैने भी उनके साथ मज़े लेने का सोच लिया…

मैं(मन मे)- ये साली वही है या अलग…जो भी हो..दोनो मस्ती के मूड मे है…तो मैने क्यो रुक रहा हूँ…अब खुल के मज़ा करता हूँ…अगर कोई देख भी लेगा तो देखने दो…मैं बाद मे सब झेल लूगा…पर अभी इन्हे बताता हूँ कि मेरे अरमान जगाने का अंजाम क्या होता है…

यह मैं सोच रहा था और वहाँ वो दोनो लड़कियाँ अपने काम मे लगी हुई थी….एक तरफ आगे वाली लड़की अपनी गान्ड को मेरे लंड पर घिस रही थी और दूसरी तरफ पीछे वाली लड़की मेरी जाँघ सहलाते हुए अपने बूब्स मेरी पीठ मे गढ़ाए जा रही थी…

मैने मूड बना ही लिया था…और देर ना करते हुए मैने अपना हाथ पीछे वाली लड़की की जाघ पर रख दिया और उसकी मोटी जाँघ को सहलाने लगा…और दूसरी तरफ मैने अपना पैर आगे वाली लड़की के पैर पर रख दिया और उसको पैर से कसने लगा…

मैने सोचा कि दोनो लड़कियों को झटका लगेगा और वो शायद रुक जाएगी ..पर यहाँ तो बाजी उल्टी हो गई…वो दोनो अपना काम खुल के करने लगी….

आप आगे वाली लड़की ने अपने हाथ को पीछे कर के मेरे चेहरे को अपने गालो की तरफ खींच लिया…और पीछे वाली लड़की ने मेरे हाथ पकड़ कर मेरी जाघ पर रखा और उपर से अपनी जाघ चढ़ा दी…जिससे मेरे हाथ के पास उसकी चूत वाला हिस्सा आने लगा..और वो मेरे हाथ पर अपनी जाघ घिसने लगी…

मैं समझ चुका था कि दोनो खेल का मज़ा लेने के मूड मे …तो मैने भी आगे बढ़ना सही समझा…

फिर मैने आगे वाली लड़की के कान पर जीभ फिराना शुरू कर दिया …मेरे इस हमले से आगे वाली लड़की के मुँह से आह निकल गई…पर वो भी स्मार्ट थी और अपनी आह को मुँह के अंदर ही छुपा लिया…

मैने आगे वाली के कान को चाट ते हुए उसके कान को अपने लिप्स मे भर लिया और चूसने लगा…

और अपना पिछला हाथ …जो कि पीछे वाली की चूत के पास था …उसे आगे कर के मैने पीछे वाली लड़की की चूत को सहलाना शुरू कर दिया…

अब आगे और पीछे …दोनो लड़किया हल्की-हल्की आहें भरने लगी…पर इतनी धीमी आवाज़ मे कि मुझे भी ज़रा सी सुनाई दे रही थी…

मैने सोचा कि मधु आने ही वाली होगी…अब मुझे आगे बढ़ना होगा…और मैने नेक्स्ट स्टेप लेने का फैशला किया…

मैने अपना दूसरा हाथ आगे वाली लड़की के नीचे से डालने की कोसिस की…तो उस लड़की ने अपनी पीठ को उचका कर मेरा हाथ आगे जाने दिया….

वही मैने पीछे वाली लड़की की चूत को मुट्ठी मे भर लिया….

आगे वाली लड़की पलट कर सीधी हो गई और मेरे मुँह के पास उसके बूब्स आ गये....मैने अपने हाथ से उसकी कमर को कसा और उसके बूब्स को कपड़े के उपेर से मुँह मे भरने लगा....

पीछे वाली लड़की भी कम नही थी...उसने अपना हाथ आगे करके मेरे लोवर के उपर से मेरा लंड थाम लिया और मैने उसकी चूत को मुट्ठी मे मसल्ने लगा....

अब तक मेरा लंड दोनो लड़कियों की हरकतों से अपनी औकात मे आने लगा था....

मैने सोचा कि टाइम जा रहा है..अब आगे बढ़ना सही होगा…

और यही सोच कर मैं सीधा लेट गया और अपना हाथ आगे वाली लड़की के नीचे से निकाल कर उसके गले मे डाल दिया और उसका मुँह अपने साइड कर के उसके लिप्स पर अपने लिप्स लगा दिए…

वहाँ पीछे वाली लड़की ने मेरे लंड को हिलाना शुरू कर दिया..पर अभी बाहर नही निकाला था…और मैं अभी भी उसकी चूत को कपड़े के अप्पर से मुट्ठी मे मे भरे हुए मसल रहा था….

आगे वाली लड़की मेरे होंठ लगते ही खुश हो गई और जल्दी से मेरे होंठो को चूसने लगी…वही पीछे वाली लड़की ने मेरे लंड को मूठ मारना तेज कर दिया और अपने होंठो से मेरा गला चूमने लगी…मैं भी पीछे वाली लड़की की चूत को जोरो से मसल रहा था..और अब कंबल मे हल्की-हल्की आहों की आवाज़े आ रही थी…

मैने सोचा कि चलो अब बहुत हो गया…और मैने आगे वाली के होंठो को छोड़ा और अपने हाथ से उसकी टी-शर्ट उपर करने की कोसिस करने लगा पर नाकाम रहा…

तो मैने उसके लोवर मे हाथ डाल दिया और मेरा हाथ उसकी चिकनी चूत से टकरा गया…जैसे ही मैने उसकी चूत को टच किया तो उसके मुँह से आह निकल गई…और मैं बेफ़िक्र होकर उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा....

फिर मैने पीछे वाली लड़की की चूत को मसलना छोड़ा और हाथ को उसके लोवर मे डाल दिया….यहाँ मेरे हाथ मे थोड़े बालों वाली चूत लगी…

पीछे वाली लड़की भी अपनी चूत मे मेरा हाथ लगते ही सिसक गई और उसने जल्दी से मेरा लंड बाहर कर दिया और हिलाने लगी…

आगे वाली लड़की भी पीछे नही रही और उसने भी अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया …और आप दोनो लड़कियाँ मिलकर मेरे लंड से खेलने लगी…जो पूरी औकात मे आ चुका था…

अब सीन कुछ ऐसा था कि मैं सीधा लेटा था और दोनो हाथो से दोनो की चूत को सहला रहा था….और वो दोनो लड़कियाँ अपने एक-एक हाथ से मेरे लंड को और बॉल्स को सहलाए जा रही थी….

वो दोनो लड़किया इतनी गरम थी कि मेरा हाथ उनकी चूत मे लगते ही वो दोनो पानी छोड़ने लगी…और मैने भी अब उंगली को उनकी चूत की दरार ने फिराना शुरू कर दिया…

वही दोनो लड़कियाँ मेरे लंड का पानी निकालने के लिए तेज़ी से लंड को हिला रही थी और मैं डबल हॅंड जॉब का मज़ा ले रहा था…

मैं लेटे हुए सोचने लगा कि कहीं मेरा पानी ना निकल जाए और उतने मे मधु आ जाए तो क्या होगा…बड़ी प्राब्लम हो जाएगी….ये दोनो तो चूत से पानी बहाए जा रही है..पर मेरा ना निकले तो सही है…

पर लंड तो अपनी धुन मे था….उसे तो बस अपनी गर्मी दिख रही थी….

मधु का नाम याद आते ही मुझे याद आया कि इतनी देर तक मधु आई क्यो नही…या फिर वो आ गई है और चुप-चाप यही है….

मैने सोचा , जो भी हो ..मैं क्यो सोचूँ…

आप लोग भी सोच रहे होगे कि मधु अब तक कहाँ है…यही सवाल मेरे माइंड मे आ रहा था…

फिर मैने सोचा कि कही ये तीनो लड़कियाँ मिली तो नही..और ये इन तीनो की प्लॅनिंग हो….

पर इसके पहले मेरे साथ जो दो लड़कियाँ थी..वो क्या यही दोनो थी या कोई और..???

कही ऐसा तो नही कि ये सारी लड़कियाँ आपस मे मिली हो और ये गेम सिर्फ़ इसी लिए खेला गया..कि मेरे साथ जवानी के मज़े लिए जा सके….

मैं(मन मे)- कुछ भी हो सकता है…पर सच क्या है…ये पता कैसे चलेगा…???

मैने सोच ही रहा था कि इतने मे रूम के बाहर से मेघा आंटी की आवाज़ आई…

आंटी2- अरे बच्चो…कहाँ हो…चलो …नीचे चलो…अनु, पूनम, रक्षा..कहाँ हो..और अंधेरा क्यो है यहाँ…

मेघा आंटी की आवाज़ सुनते ही सबकी गान्ड फट गई और मेरे कंबल वाली लड़कियों ने जल्दी से अपना हाथ मेरे लंड से और मेरे हाथ अपनी-अपनी चूत से हटाए….और जल्दी से अलग हो गई और कंबल निकाल लिया…इतने मे अनु की आवाज़ आई..

अनु- हाँ मोम..हम यही है ...1 मिनट...

ये आवाज़ तो दूसरे कंबल से आई ..मतलब ये तो कन्फर्म हो गया कि अनु मेरे साथ नही थी…

इसके बाद हम सब अलग हो गये और बैठे ही थे कि लाइट ऑन हो गई…जो कि पूनम दीदी ने की थी…

लाइट ऑन होते ही मैने आजू- बाजू देखा कि कौन मेरे साथ था …पर कुछ समझ नही आया , क्योकि सब लड़किया खड़ी हुई थी साथ मे…और मैने भी अपना लंड लोवर के अंदर डाल लिया था पर वो खड़ा हुआ था…

वो तो किस्मत ठीक थी कि कंबल मेरी कमर पर था और लंड किसी को दिखाई नही दिया होगा…

इतने मे आंटी2 और मधु रूम मे आ गई....

मैं अभी भी बैठा हुआ था….और सोच रहा था कि ये मेरे साथ हो क्या रहा है....साला आज दूसरी बार मेरे साथ क्ल्प्ड हो गया....

फिर मेघा आंटी की आवाज़ सुनकर मैं अपनी सोच से बाहर आया….

आंटी2- क्या हो रहा था..और लाइट क्यो ऑफ थी…???

पूनम दी- वो चाची ..हम हाइड आंड सीक खेल रहे थे…और मधु पारी देने गई थी..

आंटी2- वो ठीक है पर लाइट क्यो ऑफ की..???

पूनम दी- वो हम एक ही रूम मे छिपे थे ना तो बंद कर ली..ताकि आसानी से छिप सके…

आंटी2- तुम लोग भी ना…खैर छोड़ो ये सब ,,,,,नीचे आओ…वो मधु की मम्मी आई है और पूनम तेरी मौसी भी आई है….जल्दी चलो..

अनु- ओके मोम..हम आते है…

इसके बाद आंटी चली गई और हम सब ने चैन की साँस ली..और फिर सब हँसने लगे…

पूनम दी- आज तो बच गयी..पर मधु तुझे बोलना चाहिए ना..

मधु- मैं क्या करूँ..मेरे नीचे जाते ही मेरी मोम आ गई और मैं ,मेरी मोम से बात कर रही थी कि आंटी उपर आने लगी तो मैं भी भाग कर आई पर आंटी पहले ही पहुँच गई…

पूनम दी- कोई नही..अच्छा ये हुआ कि हम सब सेफ है..अब चलो..गेम फिर कभी खेलेगे…

इसके बाद सब नीचे जाने लगे ..पर मैं अभी उठ नही सकता था क्योकि मेरा लंड अभी भी आधा खड़ा था…

अनु- भैया , चलिए ना..क्या हुआ…

मैं- ह्म्म..तुम चलो मैं आता हूँ….

पूनम दी- लगता है भाई को हमारे साथ छिपने का इतना मन है की अब उठा नही जाता..हहहे…

पूनम दी की बात पर सब ज़ोर से हँसने लगी पर मेरी हालत खराब थी तो मैं बस स्माइल दे कर ही रह गया…

अनु- ठीक है भैया…हम फिर गेम खेल लेगे …अभी तो उठ जाओ…

मैं- तू भी ना…बोला ना कि तुम लोग जाओ, मैं आता हूँ…

 


अनु फिर बाकी लड़कियों के साथ स्माइल करते हुए निकल गई और मैं सोचने लगा कि बच तो गयी ..पर ये कैसे पता चलेगा कि मेरे साथ था कौन….एक तो पूनम दी ही होगी पर दूसरी कौन…कैसे पता करू….

और ये कैसे पता चलेगा कि दोनो बार वही दोनो थी या अलग-अलग…

थोड़ी देर सोचने के बाद मैने तय किया कि पूनम दी से बात करूगा..जब तक मेरा लंड भी बैठ गया था..और मुझे ज़ोर से बाथरूम जाने का मन होने लगा…

मैं जल्दी से उठा और लोवर ठीक कर के संजू के रूम मे पहुँच गया…जहा संजू नही था…शायद नीचे होगा….

मैं जल्दी से बाथरूम गया और फ्रेश हो कर नीचे आ गया…

नीचे आंटी लोगो के साथ संजू की मौसी और मौसा जी बैठे थे….साथ मे संजू, पूनम, अनु और रक्षा भी थे….मधु और रूबी शायद अपने घर निकल गई थी…

जैसे ही मैं पहुँचा तो मैने मेहमानो को नमस्ते किया…

आंटी- हाँ बेटा आ गया…रागिनी(संजू की मौसी) ये है अंकित….संजू का फ्रेंड…

रागिनी- ह्म्म..हेलो बेटा…

मुसा जी- नमस्ते बेटा…आओ बैठो…

रागिनी- रजनी ये वही है ना ...आकाश और अलका का बेटा......

मैं- मौसी जी आप मेरे मोम-डॅड को जानते हो क्या…

आंटी- अरे नही..ऐसा कुछ नही..वो तेरे डॅड-मोम..पहले मिले थे..जब तू था नही…तभी की जान –पहचान है…है ना रागिनी…(आंटी ने रागिनी को आँख से इशारा किया)

रागिनी- हाँ बेटा वो,,,पहले मिले थे ना ..तभी की याद है…

मैं- ओके

मैं सोचने लगा कि आख़िर आंटी ने रागिनी को आँख से इशारा क्यो किया…कोई बात है क्या…??? पर आंटी मुझसे क्यो छिपाती…पता नही शायड मेरा वहम हो..मैं भी ना ,,,कितना शक्की हो गया हूँ…..

आंटी- बेटा, क्या सोच रहा है..ये ले कॉफी पी..

मैं – कुछ नही आंटी..दीजिए कॉफी..

इसके बाद मैं कॉफी पीने लगा और हम सब बाते करने लगे…

बातों मे पता चला कि संजू की मौसी के लड़के की शादी है…उसका ही निमंत्रण देने आए हुए है वो लोग…

शादी एग्ज़ॅम के 2 दिन बाद की है तो ये सही रहा …अब सब शादी मे जा सकते है…उन्होने मुझे भी आने को कहा…पर मैं आ पाउन्गा की नही , ये डॅड से बात करने के बाद पता चलेगा…

ऐसी ही बाते करते हुए शाम हो गई और फिर पूनम , अनु और रक्षा अपने रूम्स मे पढ़ाई करने निकल गई और मैं भी संजू के साथ रूम मे आ गया…

हम रूम मे आए ही थे कि अकरम का कॉल आ गया..

( कॉल पर)

मैं- हाँ भाई ..बोल…

अकरम- मुझे पता था तुम दोनो भूल गये होगे सालो..

मैं- क्या…???

अकरम- भाई , पार्टी….

मैं(मन मे)- ओह तेरी, आज तो अकरम के घर पर पार्टी है ..ये मैं कैसे भूल गया…

अकरम- हेलो..भूल गया था ना साले..

मैं- नही बे..हम बस रेडी हो कर आने वाले थे…तूने कॉल कर दिया जब तक..

अकर्म- ओके तो जल्दी आओ..सब आ ही गये… समझा..

मैं- हाँ , तू रख , हम आते है…

इसके बाद मैने कॉल कट की और संजू से बोला...

मैं- चल संजू , रेडी हो जा..

संजू- कहाँ जाना है..

मैं- साले तू भी भूल गया ना…अकरम के घर …पार्टी..

संजू- ओह हाँ , सच मे ये तो माइंड से निकल ही गया था..

मैं- अब रेडी हो जा जल्दी से फिर निकलते है..

इसके बाद हम रेडी हो कर नीचे आए और आंटी को सारी बात बता कर अकरम के घर पार्टी मे निकल गये ..

जब हम अकरम के घर पहुँचे तो उसके घर का महॉल देख कर दंग रह गये…

आज अकरम के घर काफ़ी सारे गेस्ट आए हुए थे…ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई शादी का फंक्षन हो….

मैं और संजू कार पार्क कर के अकरम के घर के अंदर पहुँचे….

मेन गेट क्रॉस करके जैसे ही हम होल मे पहुँचे कि अकरम हमारे सामने आ गया…

अकरम- तो आ ही गये कमीनो…बड़ी जल्दी नही आ गये…

मैं- यार अब ताने मारना बंद कर ना…

अकरम- अच्छा…चल अब अंदर भी आएगा की नही…

इसके बाद हम अकरम के साथ अंदर पहुँच गये…

यहाँ हॉल की रौनक देख कर तो मैं सच मे सॉक्ड था कि अकरम के डॅड ने काफ़ी पैसा खर्च कर दिया और गेस्ट भी बहुत थे…

मैं- अकरम एक बात बता…

अकरम- हाँ बोल ना..

मैं- साले ये पार्टी किस लिए रखी है…???

अकरम- बताया था ना, डॅड को बड़ी डील मिली है बस तो पार्टी रख ली…

मैं- साले इंतज़ाम तो ऐसे किया है जैसे कोई शादी हो…

अकरम- हाहहहा..थक्स यार…पर क्या करूँ, डॅड को पार्टी देने का शौक है …उन्ही ने सब सेट किया है…

मैं- ह्म्म..और तेरी मोम कहा है..??

अकरम(सीरीयस होते हुए)- यही है…पर कल से फिर लग जाएगी उसी के साथ..

मैं- चुप कर…अभी नही…बाद मे बात करेगे…पहले अपनी फॅमिली से तो मिलवा..

अकरम- ह्म्म..मैं अभी सबको लाता हूँ..जब तक तुम ड्रिंक लो…हे वेटर…

अकरम ने वेटर को बुला कर हमे ड्रिंक दिए और अपनी फॅमिली को लेने निकल गया….

हम ड्रिंक कर ही रहे थे कि संजू के पापा की फ्रेंड मिल गयी और संजू उनके साथ बिज़ी हो गया….मैने संजू से कहा कि मैं अभी आया और मैं पार्टी मे आए माल को देखने लगा…

मैं घूम रहा था तभी मैने गौर किया कि एक इंसान मुझे ही देख रहा है…फिर मुझे याद आया कि ये मुझे तबसे घूर रहा है जबसे मैं पार्टी मे आया….

पहले मैने इग्नोर किया था पर अब मुझे कुछ शक होने लगा ..क्योकि वो इंसान नज़रों से मेरा पीछा किए जा रहा था…

मैं उस इंसान के पास जाने की सोच कर आगे बढ़ा ही था कि मुझे एक मस्त माल दिख गया….ये जाना –पहचाना था तो मैं वही रुक कर उसे देखने लगा…

वो दीपा थी जिसकी गान्ड मेरी तरफ थी और वो किसी से बाते करने मे बिज़ी थी…

इतने दिनो बाद दीपा की गान्ड देख कर मेरा लंड उसकी माँग करने लगा …पर मेरा माइंड लंड को समझाने लगा कि भाई अभी रुक जा , यहाँ ये सब नही करना….

यहाँ मैं दीपा को देखे जा रहा था और वहाँ वो अंजान इंसान मुझे घूरे जा रहा था...

दीपा को देखते हुए मुझे उस दिन मार्केट वाली बात याद आ गई…मैने सोचा कि चलो दीपा से सच्चाई जान लूँ और मैं दीपा के पास जाने लगा…

जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा तभी दीपा पलट गई और शॉक्ड हो गई…

देपा- ओह..ऊओह..आअपप..यहाँ…??

मैं- ह्म्म….

दीपा(धीरे से)- आप यहाँ कैसे…???

मैं- अरे मेरे फ्रेंड का घर है इसलिए और तुम कैसे..??

दीपा(मुँह पर उंगली रख कर)- स्शहीए…

मैं- क्या हुआ..???

दीपा- एक मिनट ..मैं अपने पति से मिल्वाती हूँ…

दीपा ने अपने पति को बुलाया और बोला..

दीपा- ये मेरी फ्रेंड का बेटा है..वो रजनी है ना...उसका

डी पति- ओह…हेलो बेटा…हाउ आर यू ???

मैं- फाइन अंकल…आप कैसे है…

डी पति- गुड…और क्या करते हो…???

मैं- स्कूल मे हूँ अंकल..

अंकल – गुड..गुड…

इतने मे दीपा के पति को किसी ने बुला लिया और वो आता हूँ बोल कर निकल गये…

मैं- ह्म्म..तो अपने पति के साथ आई है मेरी रानी…

दीपा- धीरे से बोलो…कोई सुन ना ले..

मैं- डोंट वरी...और सूनाओ ..तुम यहाँ कैसे...

दीपा- अरे वो…मेरे पति के फ्रेंड है ये…

मैं- ओह..अकरम के डॅड..???

दीपा- ह्म्म्मी..

मैं- अच्छा एक बात बताओ…आज कल कहाँ घूमती रहती हो..कॉल भी नही करती…गुस्सा हो या भूल गई..

दीपा- ना भूली हूँ और ना गुस्सा हूँ..बस मेरे पति अभी घर पर है तो चुप हूँ….नही तो मैं तुम्हारी बाहों मे होती…

मैं- ह्म्म..और आज कल कार से नही घूमती..???

दीपा- मतलब...मैं कार से ही जाती हूँ..जब भी बाहर जाती हूँ...

मैं- अरे मुझे लगा था कि मैने तुम्हे ऑटो मे देखा था एक दिन..

दीपा(डर गई)- सीसी…कहा..नही-नही…मैं तो ऑटो से कही नही गई…

मैं(मन मे)- साली झूट बोल रही है , मतलब दाल मे कुछ काला है…आगे पूछू या नही…ट्राइ करता हूँ…

दीपा- क्या हुआ…मैं नही थी ..तुमने किसी और को देखा होगा..

मैं- ह्म्म..हो सकता है , मैं कार ड्राइव कर रहा था..तो ग़लती हो सकती है…(मैने सोचा कि अभी जाने दो...इसकी सच्चाई फिर कभी पता करूगा)

दीपा- ह्म्म..ऐसा ही हुआ होगा…

मैं- ओके…छोड़ो…वैसे ये बताओ कि आज इतनी हॉट कैसे लग रही हो…

दीपा- अरे कहाँ हॉट…मुझे पता होता कि आप आने वाले हो तो हॉट बन के ही आती…

मैं- तुम आज भी हॉट हो समझी….देखो लंड खड़ा हो गया…

दीपा- स्शहीए…आप भी…

मैं- क्यो…अब डर रही हो…वैसे तो बड़ा कहती थी कि जहा बोलो चुदने आ जाउन्गी..

दीपा- मैं आज भी वही कहती हूँ…आप कहो तो अभी चुद जाउ..

मैं- अच्छा ..और तेरा पति...

दीपा- उसको मैं हॅंडल कर लूगी...

मैं- जाने दो..बाद मे कभी..

दीपा- नही..अब तो मेरा मन भी है प्ल्ज़्ज़…आपको देख कर ही चूत मे पानी आ गया..अब मना मत करना..

मैं- ओके..पर कहाँ ???

दीपा- आप रूको मैं सब सेट करके आती हूँ…

मैं- ओके…

 


इसके बाद दीपा चली गई और मैं मन मे उसे गाली देने लगा कि साली कैसे झूट बोल रही है…अब तो पता करना ही होगा कि चल क्या रहा है…

फिर मैने उस इंसान को देखा जो मुझे काफ़ी देर से घूरे जा रहा था…और मैने डिसाइड किया कि अब इस से पूछना ही होगा और मैं उसके पास पहुँचा…मेरे जाते ही वो बोला..

अननोन- कैसे है अंकित ..

मैं- व्हाट..तुम मुझे जानते हो..??

अननोन- हाँ बिल्कुल..और आपकी फॅमिली को भी…

मैं- बट मैं आपको नही जानता …

अननोन- आप तो अभी बहुत कुछ नही जानते अंकित जी..

मैं- क्या मतलब तुम्हारा…??

अननोन- मतलब ये कि आप तो अभी अपने आपको भी ठीक से नही जानते …

मैं(गुस्से से)- क्या बकवास है ,हो कौन तुम..???

अननोन- बकवास नही, सच बोल रहा हूँ…आपकी लाइफ के बारे मे आपसे ज़्यादा मैं जानता हूँ…

मैं- व्हाट, होश मे तो हो…???

अननोन- हाँ पूरे होश मे…और इसीलिए आपको कुछ बताने आया हूँ..आपको आपसे पहचान कराने आया हूँ…

मैं- मतलब..???

अननोन- अंकित जी..आपकी फॅमिली मे कौन-कौन है जिसे आप जानते है…

मैं- मैं और मेरे डॅड..

अननोन- और आपकी बुआ , मामा, मौसी भी तो है..

मैं- हाँ पर वो रिलेटिव है…फॅमिली के नाम पर तो मैं और मेरे डॅड ही है..

अननोन- नही अंकित जी..आपकी फॅमिली बहुत बड़ी है…कई लोग है उसमे…

मैं- व्हाट…तुम पागल हो…मेरी फॅमिली के बारे मे मुझे ही नही पता होगा..

अननोन- ह्म्म..शायद ..???

मैं- क्या..??..तुम हो कौन और क्या बक रहे हो..??

अननोन- ये सही वक़्त और सही जगह नही है बताने को…वैसे भी आपको तो बहुत कुछ नही पता…

मैं- और भी कुछ है क्या ..वो भी बोल दे…

अननोन- हाँ है…आपको क्या लगता है कि आपकी लाइफ मे जो हो रहा है वो अपने आप हो रहा है….

मैं- हाँ बिल्कुल और क्या…???

अननोन- नही , ये सब प्लान है…

मैं- बकवास बंद कर…तू पागल है…जा यहाँ से…

इतने मे दीपा ने मुझे आवाज़ दी और मैं जाने लगा...

मैं- अब मैं चला...और तेरी बकवास बहुत सुन ली मैने समझा...

अननोन- अगर ऐसा है तो ठीक..पर ये तो बताओ कि दीपा आपसे क्यो चुदि और आज इस पार्टी के चलते हुए भी आपसे चुदने को आ गई...

मैं उस इंसान की बात सुनकर रुक गया..और मेरा माइंड गरम होने लगा कि इसे ये सब कैसे पता...कौन है ये..*??...इतना सब कैसे जानता है और ये जो कह रहा है क्या उसमे कुछ सच्चाई है…या सब बकवास है...?????

मैने उससे कहने ही वाला था कि वो बोल पड़ा..

अननोन- आप इसे बजा के आओ …मैं यही हूँ…आपके माइंड मे जो भी सवाल है..सबके आन्सर मेरे पास है…बिलिव मी…

मैने एक बार उस इंसान की आँखो मे देखा…उसकी आँखो मे मुझे सच मे बिश्वास नज़र आ रहा था…

मैने तय कर लिया कि इस से सब पता कर के ही रहूँगा…आख़िर पता तो चले कि इतना सब कैसे जानता है और ऐसा क्या जानता है जो मुझे भी नही पता…

मैं- ओके…यही रूको मैं आता हूँ..

अननोन- मैं यही हूँ…आप निपटा के आओ…

इसमके बाद मैं दीपा के पास चला गया…

मैने जैसे ही दीपा के पास पहुँचा तो बोली

दीपा- कौन था वो..क्या कह रहा था…

मैं- वो…ऐसे ही बात कर रहे थे…यही मिल गया..मैं नही जानता..

दीपा- अच्छा तो इतने गुस्से मे बात क्यो कर रहे थे..

मैं- अरे कुछ नही..वो बस मुझे बच्चा कह रहा था तो उस पर मैं गरम हो गया ..

दीपा- गरम हो गये , हाँ…चलो मेरे लिए तो अच्छा है..

मैं- ह्म्म..अब बताओ कि क्या प्लान है…

दीपा- उपर एक रूम खाली है..मैं वहाँ जा रही हूँ…आप थोड़ी देर मे आ जाना…

मैं- रूम मे …पर ऐसे कैसे किसी के घर मे..

दीपा(बीच मे)- मैने अकरम की मोम को बोला है कि मैं रेस्ट करने जा रही हूँ थोड़ा…उसी ने मुझे रूम मे जाने को कहा…

मैं- ओके…तब ठीक है…

दीपा- अब मैं जा रही हूँ…5 मिनट मे आ जाना..ओके

मैं-ह्म्‍म्म

दीपा अपनी गान्ड मटकाते हुए उपर चली गई और मैने वेटर से ड्रिंक लिया और पीने लगा…

मैं सोच रहा था कि आज साला मेरे साथ दो बार केएलपीडी हो गया….अब सारी कसर दीपा को ठोक के निकालता हूँ..और अब तो दिमाग़ भी गरम है..जो उस अंजान इंसान ने कर दिया…उसे चुदाइ के बाद देखूँगा…

मैं(मन मे)- दीपा डार्लिंग…आज तो तेरी ऐसी फाडुन्गा कि तू ठीक से चल भी नही पाएगी…एक तो मेरा लंड बेताब है और दूसरा तूने मुझसे झूट बोला…सारी कसर तेरी चूत और गान्ड पर निकालूँगा….

इसके बाद मैं 5 मिनट ड्रिंक करते हुए घूमता रहा और फिर सबसे नज़र बचा कर उपर निकल आया…और जो रूम दीपा ने बोला था उसी रूम मे घुस गया और रूम अंदर से लॉक हो गया…

दीपा गेट के पास ही खड़ी थी और जैसे ही मैं अंदर गया तो दीपा ने जल्दी से गेट लॉक कर दिया और पलट कर मेरे गले से लग गई…

दीपा- ओह…जानू…कितना तडपाया तुमने…..

मैं- ह्म्‍म्म..तुमने भी मुझे बहुत तडपाया है मेरी रानी…

दीपा- मैं क्या करती...मेरा पति जा ही नही रहा...

मैं- कोई बात नही जान...आज तेरी तड़प मिटा देता हूँ...

दीपा- हाँ मेरे राजा..,मैं तो कब्से इंतज़ार मे हूँ...जल्दी से मेरी खुजली मिटा दो...

मैं- आज मैं भी बहुत गरम हूँ…देख तेरी कैसे फाड़ता हूँ…

दीपा- तो देर किस बात की..जल्दी करो..

फिर दीपा ने मुझे जोरदार किस करना शुरू कर दिया…वो इतनी गरम थी कि मेरे होंठो को चूज़ कर लाल करने लगी…और मैने भी दीपा के बूब्स को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और हम ऐसे ही एक-दूसरे की बाहों के सहारे पास मे पड़े हुए सोफे पर आ गये….

सोफे पर आते ही दीपा ने मुझे सोफे पर बैठाया और जल्दी से मेरा पेंट निकालने लगी….

मैं- ओह दीपा डार्लिंग...आराम से..

दीपा- नही मेरे राजा ,…अब वेट नही होता…

मैं- ओके..तो निकाल ले..

दीपा- ह्म्म..आज कितने दिन बाद मुझे मेरा प्यारा हथियार मिल रहा है...

दीपा ने जल्दी से मेरा पेंट पैरो के नीचे खिसका दिया और मेरा आधा खड़ा हुआ लंड उसकी आँखो के सामने आ गया..

और दीपा ने जल्दी से लंड को हाथ मे थाम लिया.....

दीपा- ओह्ह्ह..मेरी जान...कितना तडपाया है तूने...

मैं- तो अब जी भर के प्यार कर ले...

दीपा- ह्म्म..

और दीपा मेरे लंड पर झपट पड़ी और मेरे लंड को जीभ से चाटने लगी…मैं तो वैसे ही भरा हुआ था..और दीपा की जीभ मेरे लंड पर लगते ही मेरा लंड औकात मे आने लगा…

दीपा- स्ररुउपप…सस्ररुउपप…सस्ररुउप्प्प

मैं- ओह मेरी रंडी..ऐसे ही..आअहह..

दीपा- सस्ररुउपप..सस्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प..

मैं- साली जल्दी से चूस ना…

पर दीपा ने मेरी बात सुनी ही नही और लंड को चाट ती रही...थोड़ी देर बाद दीपा ने मेरी बाल्स को चाटना शुरू कर दिया...

मैं- आहह..दीपा...ऐसे ही..ओह्ह्ह..

दीपा- सस्ररुउप्प्प्प..सस्ररुउपप..

मैं- आहह…मुँह मे भर ले रंडी…

दीपा ने जल्दी से मेरी बॉल्स को मुँह मे भर लिया और ज़ोर से चूसने लगी...

दीपा-उउंम्म...उउंम्म...उउउंम्म..

मैं- ह्म्म्म…आहह..ऐसे ही साली…आहह

 
थोड़ी देर तक मैं दीपा से मेरी बॉल्स चुसवाता रहा पर मेरा लंड आज कुछ ज़्यादा ही गरम था…और मैने दीपा को गालियाँ देनी शुरू कर दी…

मैं- रंडी..मेरा लंड चूस…जल्दी

दीपा- ऐसे ही गालियाँ दो..मुझे ऐसी चुदाई मे मज़ा आयगा…

मैं- ठीक है साली अब लंड चूस ..

दीपा ने जल्दी से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया…

दीपा- सस्ररूउउगग...सस्रररूउउग़गग..सस्ररूउउगग...

मैं- ओह्ह..ऐसे ही साली..तेरी माँ को चोदु...ज़ोर से ..आहह

दीपा- सस्रररूउगग...सस्ररूउउगग...

दीपा मेरे लंड को गले तक ले जाते हुए चूस रही थी...पर मैं ज़्यादा ही जोश मे था तो मैने दीपा का मुँह पकड़ कर तेज़ी से लंड के उपर-नीचे करना शुरू कर दिया...

दीपा-क्क्हम्म..क्क्हम्म...उउंम...

मैं- चुप साली...ले अंदर...आहह

दीपा- क्क्ूनूम्म..क्क्ूनूम्म....उउंम/...उउंम्म

मैं- ले साली..मेरी रंडी है तू....ले और ले..

मैं जोरो से दीपा के मुँह को चोदता रहा ..थोड़ी देर बाद मैने दीपा को छोड़ दिया...और वो खांसने लगी...

दीपा- ख़्हू..ख़्हू...क्क्हू..जान लोगे क्या...

मैं- चुप रंडी...अब आजा..तेरी चूत फाड़ता हूँ...

मैने जल्दी से दीपा को पकड़ कर सोफे पर कुतिया बना दिया और उसकी ड्रेस उपर करके उसकी पैंटी साइड मे कर दी और उसके पीछे आ कर मैने एक ही झटके मे पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया…और तेज़ी से चोदने लगा....

दीपा- आहहहहह…मार डाला…

मैं- चुप कर कुतिया…नही तो फाड़ दूँगा…

दीपा- फाड़ दो…आहह..

मैने तेज़ी से दीपा को चोदना शुरू कर दिया ….

दीपा- आहह..आह..आ..आराम से..

मैं- चुप...तू मेरी कुतिया है...ये ले...

मैने दीपा के बाल पकड़ कर उसे तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया ...

दीपा- अहः..आ..आइईइ..आइी..ऊहह...

मैं- बोल ना साली मेरी कुतिया है ना...

दीपा- हाँ मेरे राजा...फाड़ दो कुतिया की....ज़ोर से...

मैं तो गरम था ही और अब दीपा भी फुल मूड मे आ गई थी….

मैं- ले मेरी कुतिया..ज़ोर से…

दीपा- अहहह..अहहह..आह..

थोड़ी देर तक दीपा की दमदार चुदाई करने के बाद मैने चूत से लंड निकाल लिया और दीपा की ड्रेस को निकाल दिया...

अब दीपा के बूब्स भी आज़ाद हो गये और वो पूरी नंगी हो गई,...

मैने जल्दी से उसे धक्का मारा और सोफे पर लिटा दिया और उसको आगे खीच कर उसकी टाँग को उठाया और पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया…

दीपा- आऐ….

मैं- चुप कर रंडी…

दीपा- आहह..मेरे राजा..मारो रंडी की..ज़ोर से..आहह…

मैं- ये ले साली..

और मैं दीपा को तेज़ी से चोदने लगा…और दीपा झड़ने लगी….

दीपा- मैं आईईइ...आअहह.....ज़ोर से..आहह..आ..ऊहह..म्माआ

मैं दीपा के झड़ने के बाद भी उसे तेज़ी से चोदता रहा और रूम मे दीपा की सिसकारियो के साथ फ़ुउच-फ़ुउच की आवाज़े आने लगी...

दीपा- आहह..आहह..आहह...उउफ़फ्फ़ माँ...

आहह...ऊहह...ईएहह...ऊहह...म्मा..आहह..फ्फक्च्छ.,..फ़्फुूक्च्छ..फ़्फ़ुूच..ताप..ताप्प..आहह..ऊहह..म्मा...ईीस्स..येस्स..

ऊहह..माआ..अहहह...उउफफफफ्फ़..ऊहह

ऐसी ही आवज़ो के साथ हम चुदाई के रंग मे डूबे हुए थे....

मैने दीपा को छोड़ा और सोफे पर बैठ गया..और दीपा को उपर आने को कहा…

इस बार दीपा मेरे उपर आई और एक ही झटके मे मेरा लंड चूत मे ले लिया और जोरो से उछलने लगी…दीपा झड़ने के बाद फिर से गरम हो गई थी….

मैने दीपा को झुंका कर उसके बूब्स को काटना ,चूसना शुरू किया और तेज़ी से उसको चोदने लगा….

मैं- उउंम..उउंम्म…आहह..

दीपा- उम्म्म..खा जाओ इन्हे…चूस डालो मेरे राजा..

मैं- हाँ साली…ख़ाता हूँ..उउंम..उूउउंम…उउंम

दीपा- उउंम…आहह….आअहह..अहहह

मैं- साली..पति को छोड़ के मेरे लंड पर उछल रही है..

दीपा- नाम मत लो उस गान्डु का…आहह…..मैं तुम्हारी…अहहह..कुतिया हूँ…आहह

मैं- तुझे तेरे पति के सामने चोदुगा..

दीपा- चोदो ना….उस गान्डु से कौन डरता है..अहहह..उउउफ़फ्फ़…माँ

मैं- हाँ मेरी रंडी…तेरे बेडरूम मे चोदुगा..उसके बाजू मे…

दीपा- मज़ा आयगा..आहह…

दीपा की बातों से मेरा जोश बढ़ गया और मैने दीपा को लंड पर बैठाते हुए उठा कर खड़ा हो गया और उसे उछल-उछल कर चोदने लगा…

दीपा- हाँ मेरे राजा..आहह..ऐसे ही,…मज़ा आ गया,….ओह्ह्ह…

मैं- ले मेरी रंडी..साली अपने पति के साथ आई..और चूत मेरे लंड पर…

दीपा- आहह…हाँ..अब मेरे घर आ के चोदना मेरे राजा

मैं- ठीक है रंडी…आउन्गा….

थोड़ी देर तक दीपा को उछालते हुए मेरे हाथ दर्द होने लगे तो मैने दीपा को उतार दिया…

दीपा- अब अपनी कुतिया को सवारी करवा दो मेरे राजा..

मैं- आजा कुत्ति…कर ले सवारी..फिर तेरी गान्ड फाड़ना है…

दीपा- फ्फाड़ लो ना…ये गान्ड भी लंड माग रही है..

मैं- चल सवारी कर..गान्ड बाद मे….

और मैं सोफे पर बैठ गया..और इस बार दीपा अपनी पीठ मेरी तरफ करके मेरे लंड पर बैठ गई और गुऊप से लंड अंदर ले कर उछलने लगी…

मैं-क्या बोल रही थी…

दीपा-आहह…वो मेरे पति के सामने फाड़ना मेरी..आहह…..

मैं- क्यो नही मेरी रंडी…तुझे उसी के सामने चोदुन्गा एक दिन..अभी जल्दी कर साली

दीपा-आअहह…म्‍म्माअस्सटत्…ल्ल्लुउन्न्ड्ड़ हहाईयैयाीइ….जब भी अंदर …आहह.जाता है….मज़ादेता…आहह..है…ऊहह

मैने पीछे से दीपा के दोनो हाथो से पकड़ा ऑर तेज़ी से चोदने लगा…

दीपा—आहह…रर्रााज्जज्जा……आऐईइईसीई,,हिी….क्क्ूनूस्स्स…क्करर्र डदीया…आब्ब…मैईन्न..बभी….ख़्ूनस्ष्ह..क्करररर द्दुऊऊग़गगीइइ…आहह….ऊओररर…त्टीजज……

मैं-इहहाअ….य्ययहहाअ

दीपा-आअहह…ऊओझहह…म्‍म्मज़्ज़ाअ…आहह

मैं-एसस्स….तू सच मे रंडी है….

दीपा-आअहह…बिल्कुल…..आअहह…तुम्हारी गुलाम हूँ…आअहह….

मैं-बहुत खूब….ये ले…

दीपा-आअहह..म्‍म्मायन्न्न्न् बभहिी आईयाईयाय,,,आहह

दीपा जोरो से लंड पर उछल रही थी और मैं नीचे से जोरदार धक्के मार रहा था..ऑर 20 मिनट की चुदाई मे दीपा फिर से झड़ने लगी.....

दीपा-आअहह…आह.आ.आह…अमम्मायन्न…आऐईइ…..आहह..आह...आऐईयईईईईई

मैं-आअहह….ये ले …

दीपा झड़ने लगी ऑर छुदाई की आवाज़ बदलने लगी

आअहह…..स्शहहह..आहह…त्ततुनूउप्प्प…कचूनूप्प्प…..ईएहहाअ…आहह…त्ततुनूउप्प्प…त्ततुनूउप्प्प….फ़फफूूककचह…

फ़फफूूककच….ऊओ…ईीस्स…यईीसस…आअहह….ऊओ……फफफफकक्चाआप्प्प….टतततुउउप्प…आहह

ऐसे ही दीपा झड गई ओर मैने भी झड़ना शुरू कर दिया…….

मैं- मैं भी आया मेरी कुतिया…

दीपा- भर दो मेरी चूत…आअहह…बहुत प्यासी है…

मैं- ये ले मेरी रंडी..भर ले…

मैं दीपा की चूत को अपने लंड रस से भरने लगा...

फिर दीपा वैसे ही मेरे उपेर लेट गई..और जब नॉर्मल हुई तो मुझसे बोली..

दीपा- आज बहुत मज़ा आया…

मैं- ह्म्म..वो तो है..

दीपा- अब मुझे ऐसे ही चोदना ..गाली बकते हुए…

मैं- ठीक है मेरी कुतिया…

दीपा- वो तो मैं हूँ ही…हहहे…

मैं- अब तेरी गान्ड फाडनी है…

दीपा- ह्म्म..फाड़ लेना ..पर आज हुआ क्या था…इतनी ज़ोर से मार रहे थे…

मैं(मन मे)- अब इसे कैसे बताऊ कि आज दो बार मेरे साथ केएलपीडी हो गया..साली लड़कियों ने मज़े ले लिए मेरे..और मैं कुछ नही कर पाया…

दीपा- बोलो ..क्या हुआ…

मैं- ऐसा कुछ नही..बस आज तू इतने दिन बाद मिली ना..तो जोश बढ़ गया…

दीपा- ह्म्म..फ्रेश हो जाओ..फिर गान्ड मर्वानी है मुझे…

 
मैं- ह्म्म..चलो..

फिर हम दोनो बाथरूम मे गयी और फ्रेश होकर मैं दीपा की गान्ड मारने का सोच ही रहा था कि रूम पर किसी ने नोक किया…और हम डर गयी…

दीपा- सीसी…कौन है..

बाहर से एक औरत की आवाज़ आई…

औरत- दीपा जी..मेडम आपको बुला रही है...

दीपा- ओके..तुम जाओ..मैं 5 मिनट मे आती हूँ..

औरत- ठीक है मेडम…

लड़की के जाने के बाद दीपा बोली…

दीपा- अब क्या..???

मैं- कोई नही..तुम रेडी हो जाओ…और नीचे आ जाना…मैं पहले निकल जाता हूँ…

दीपा- पर मेरी गान्ड..??

मैं- वो तेरे घर आ कर मारूगा…

दीपा- सच..मैं वेट करूगी..

मैं- ओके..अब कपड़े पहनो..वरना कोई फिर से आ जायगा…

दीपा- ओके...

इसके बाद हमने कपड़े पहने ..और मैं दीपा के पहले रूम से निकल आया…

दीपा की जमकर चुदाई कर के मैं फ्रेश हुआ और रूम से निकल कर नीचे आ गया….वहाँ अकरम मुझे ही देख रहा था…

अकरम- कहाँ था तू…कब से देख रहा हूँ…

मैं- अरे मैं ..वो…बाथरूम गया था….थोड़ा प्रेशर आया था..

अकरम-हाहाहा..कोई नही…चल मेरी फॅमिली से मिलाता हूँ…

मैं- ओके…अरे वो संजू कहाँ है..

अकरम- वो वही है मेरी फॅमिली के साथ…

और मैने अकरम के साथ उसकी फॅमिली से मिलने चला गया…

अकरम- डॅड..ये है मेरा खास फ्रेंड एके

( यहाँ मैं अकरम की फॅमिली को इंट्रोड्यूस करवा देता हूँ…

मिस्टर.वसीम ख़ान- अकरम के डॅड

मिसेज़. सबनम- अकरम की मोम

मिस. ज़िया.- अकरम की बड़ी दीदी

मिस. जूही – अकरम की छोटी दीदी )

वसीम- हेलो बेटा...

वसीम के साथ अकरम की पूरी फॅमिली ने मुझे हेलो बोला...और मैने भी सबको हेलो कहा..

मैं- हेलो…

सबनम- कैसे हो बेटा , तुमने कुछ खाया –पिया कि नही…??

मैं- जी आंटी…बस खा-पी ही रहा हूँ…

मैं अकरम की फॅमिली से पहली बार मिल रहा था…आज तक मैं कभी उसके घर नही आया था…

जब मैने अकरम की मोम को देखा तो दिल खुश हो गया…क्या मस्त माल थी यार…और अकरम की दोनो दीदी भी कयामत थी…

मैं सोचने लगा कि इतने मस्त माल पर कोई डाका क्यो नही डालेगा...मुझे मौका मिले तो मैं तीनो को रगड़ के चोदुगा…

फिर मैने सोचा कि ये मैं क्या सोचने लगा...साला आज कल मेरे दिमाग़ मे सिर्फ़ चुदाई ही क्यो आती है…पहली बार अकरम की फॅमिली से मिल रहा हूँ और उसकी माँ-बेहन को चोदने का सोचने लगा…छी..

मैं अपनी सोच मे खोया था कि अकरम के डॅड ने कहा..

वसीम- एक्सक्यूस मी बेटा..हम ज़रा गेस्ट से मिल ले...तुम सब बाते करो....चलो सबनम...

इतना बोलकर अकरम के मोम-डॅड निकल गये और हम सब बाते करने लगे…

ज़िया- तो आप अकरम के साथ पढ़ते है…

मैं- जी…और प्लीज़ मुझे आप मत कहिए...मैं तो आपसे छोटा हूँ..

ज़िया- ओके…तो तुम ..अब ठीक है…तुम कभी घर नही आए…

मैं(मन मे)- अगर मुझे पता होता कि अकरम के घर मे तीन पटाखा माल है तो डेली आता…

ज़िया- ओह..हेल्ल्लो…मैने कुछ पूछा…इसमे इतना क्या सोचना…

मैं- अरे नही…वो क्या है ना कि कभी ऐसा चान्स ही नही बना..और अकरम ने घर बुलाया ही नही…

ज़िया- ओके..तो चलिए अब हम तुम्हे बुलाएगे …आओगे ना..???

मैं(मन मे)- तुम कहो तो यहाँ से जाउन्गा ही नही..बस मेरी भूख मिटा दो...

ज़िया- हेल्लू..तुम कहाँ खो जाते हो..??

मैं- सॉरी दीदी…आउन्गा ना..आप जब भी बुलाएँगी तब आउन्गा….

ज़िया- ओके…पर एक शर्त है…

मैं- हाँ कहिए…

ज़िया- देखो..हम सब फ्रेंड्स की तरह ही रहते है..तो मुझे आप मत कहना …अकरम भी मुझे तुम कह कर बुलाता है और जूही भी…

मैं- ओके जैसा आप..ओह आइ मीन तुम कहो…

ज़िया- ये हुई ना बात…याद रखना…

जूही- अरे दी..एक- दो बार मिलेगा तो आदत पड़ जाएगी ना….

मैं- ठीक कहा…

अकरम- हाँ भाई…तू तो जल्दी सीख जायगा…

मैं- हाँ यार…अब मुझे घर जल्दी-जल्दी बुलाना…हाहहः

जूही- हाँ बिल्कुल…और अकरम नही बुलायगा तो हम है ना…क्यो दीदी…

ज़िया- बिल्कुल….अपना नंबर. दो…अब हम फ्रेंड है ओके…सिर्फ़ अकरम ही नही…हमसे भी फ्रेंडशिप निभाना …

मैं- ज़रूर दीदी…

इसके बाद हमने नंबर एक्सचेंज किए और ऐसी ही मस्ती मज़ाक करते हुए टाइम पास करते रहे..

मैं अकरम की दोनो दीदी को देख-देख कर फिर से गरम होने लगा था..क्या खूब थी दोनो…मस्त फिगर था..ख़ासकर उनकी मचलती गान्ड ..ओह्ह्ह माँ..मन तो कर रहा था कि अभी झुंका कर गान्ड मार लूँ….

पर ऐसा कैसे हो सकता है…पर मैने सोच लिया था कि अकरम की मम्मी की जासूसी करने के साथ मैं इन दोनो को पटाने की कोसिस भी करूगा…अब इनका हुश्न मेरी भूख बन गई थी….और मैं अपनी भूख शांत कर के ही रहूँगा….

थोड़ी देर बाद ज़िया और जूही अपने फ्रेंड्स के साथ खाने को निकल गयी,..और हमे भी खाने को कहा….हम भी खाना खाने लगे…और मेरी नज़र उस अंजान इंसान को ढूँडने लगी….

फिर मैने देखा कि वो इंसान वही खड़ा था ..जहा पहले मिला था..मैं प्लेट लेकर उसके पास पहुँच गया…..

 


मैं- तुम अब तक यही हो…

अननोन- जी..मैं तुम्हारा ही वेट कर रहा हूँ..

मैं- तो बताओ..क्या बता रहे थे..कैसे जानते हो इतना सब मेरे बारे मे…

अननोन- सब बताउन्गा..इसीलिए मैं तुमसे मिलने आया..पर यहाँ नही..

मैं- यहाँ नही मतलब…..क्या प्राब्लम है…

अननोन- तुम्हे अंदाज़ा भी नही कि कहा कौन तुम पर नज़रे जमाए हुए है…इसलिए यहाँ नही….

मैं- ओके..मान लिया..तो कहाँ चले…

अननोन- आज नही…ये लो कार्ड इसमे अड्रेस है..कल शाम को यहा पहुँच जाना..

मैं- ह्म्म..और अगर तुम्हारी बात बकवास लगी तो याद रखना….

अननोन- मुझे जान से मार देना ….पर पहले मेरी बात सुन लेना ..ओके

मैं- ओके….

तभी अकरम ने मुझे आवाज़ दी…

अननोन- अब तुम्हे जाना चाहिए...कल यहाँ टाइम पर पहुँच जाना..

मैं- ओके…कल मिलता हूँ..देखूं तो सही..तुम्हारे पास क्या जानकारी है..बाइ

अननोन- बाइ

इसके बाद वो इंसान बाहर निकल गया और मैं अकरम के साथ खाना खाने लगा….

मैं खाते हुए उस इंसान को जाते हुए देख कर सोचने लगा कि ये सब मेरे साथ हो क्या रहा है…आज-कल मेरी लाइफ मे जो भी हो रहा है सब मुझे शॉक्ड ही कर रहा है और उपर से मुझे कुछ पता भी नही चल रहा….

पहले वो लंड चूसने वाली, फिर दीपा का यू पैसे लेना और मुझसे झूठ बोलना…फिर उस गेम मे मेरे साथ लड़कियों की मस्ती और अब ये अंजाना इंसान..जो मेरे बारे मे बहुत कुछ जानता है….

क्या मैं ये सब जान भी पाउन्गा कि कौन , क्या कर रहा है ..और ये मेरे लिए अच्छा है या बुरा…

कुछ भी हो अब मैं सारे ससपेन्स को दूर ज़रूर करूगा..जितने हो सके उतने तो सॉल्व हो जाए…

और शुरुआत होगी इस इंसान से….कल देखता हूँ…इसकी असलियत क्या है…

ऐसे ही मन मे ख्याल करते हुए हमने खाना ख़त्म किया और घर आने को कहा….अकरम जानता था कि हमारे एग्ज़ॅम है तो उसने फोर्स नही किया रुकने का….

फिर मैं और संजू….ज़िया , जूही अकरम , और उनके मोम-डॅड को बाइ कह कर घर आ गयी….

घर आकर मैने देखा कि सब आज पढ़ाई करने मे बिज़ी है तो मैने भी डिसाइड किया कि अब पढ़ना ज़रूरी था क्योकि एग्ज़ॅम 1 दिन बाद ही था…

हम सब पढ़ाई मे बिज़ी हो गयी और करीब 2-3 घंटे तक हमने पढ़ाई की…..इसके बाद हम फ्रेश हो कर कॉफी पीने लगे , जो कि पूनम दी हमारे लिए बना कर ले आई थी..….

कॉफी ख़त्म करके हमने थोड़ी और पढ़ाई की ….और फिर सोने को बेड पर लेट गयी..

हम लेटे ही थे कि मैं सोच मे फिर से डूब गया..और अचानक मुझे संजू की मौसी का ख्याल आ गया…मैं सोचने लगा कि कुछ तो है जो आंटी और उनकी सिस्टर के बीच की बात है….और वो मेरे मोम-डॅड से रिलेटेड है…पर क्या हो सकती है…क्या संजू की मौसी मेरे मोम-डॅड को अच्छे से जानती थी या सिर्फ़ जान-पहचान है….

कैसे पता करूँ..आख़िर सच क्या है…????

साला इतनी टेन्षन तो कभी नही हुई मुझे और आज मेरे माइंड मे टेन्षन की भरमार है…पता नही ये कैसे सॉल्व होगी….

ऐसे ही सोचते हुए मेरी आँख लग गई और रोज की तरह मैं तब जागा जब वो लंड चूसने वाली मेरे लंड को चूसने लगी…

पता नही कौन है साली जो इतनी देर होने के बाद भी लंड चूसने का वेट करती रही..खैर मैं लंड चस्वाने का मज़ा लेने लगा….

आज फिर से वो वैसे ही अपना काम करके निकल गई और मैं सोचने लगा कि जाने दो..एग्ज़ॅम दे दूं…फिर तुम्हे ही सबसे पहले देखता हूँ…और मैं थोड़ी देर मे ही सो गया…

आज सुबह जब मेरी आँख खुली तो मुझे एक और झटका मिला…रोज की तरह मैं एक प्यारी सी आवाज़ सुनकर उठा था..पर आज ये आवाज़ देने वाली अनु नही थी…आज रक्षा थी….जो पिछले दिनो मुझे घूर के देखती थी और आज मुझे प्यार से उठाने आ गई…

रक्षा- भैया ऐसे क्या घूर रहे है…

मैं- सीसी..कुछ नही…आज तू कैसे…??

रक्षा- क्यो भैया..मैं आपको जगा नही सकती क्या...

मैं- ऐसा नही कहा..पर अनु आती थी रोज तो बोला..

रक्षा- तो क्या अनु के जगाने से ही जागेगे ..मेरे जगाने पर नही…

मैं- अरे ऐसा नही है..मैं बस पूछ रहा था///

रक्षा- समझ गई भैया..आपको मेरा आना अच्छा नही लगा ..आइ एम सॉरी….अनु को भेजती हूँ…

और रक्षा पलट कर जाने लगी..

मैं- अरे रक्षा...सॉरी...यहाँ आ...तू गुस्सा मत हो..अच्छी नही लगती गुस्से मे...

रक्षा- आप को कैसे पता..आप तो मुझे देखते ही नही.

मैं- मतलब...*??

रक्षा- मतलब..आप तो बस अनु, पूनम दी, संजू भैया से ही बात करते हो..मुझसे तो की ही नही..फिर आपको कैसे पता कि मैं कैसी लगती हूँ…

मैं- अरे मेरी गुड़िया...ऐसा नही.है...चल मैं सॉरी बोलता हूँ..आज से रोज तुम्हे ही देखूँगा..ओके

रक्षा(मुस्कुरा कर)- सच...अब उठ जाइए...नाश्ते पर सब आपका वेट कर रहे…

मैं- ओके...अब तू जा..मैं आता हूँ..

रक्षा वहाँ से चली तो गई पर मेरे माइंड मे एक सवाल छोड़ गई...कि आज रक्षा इतने प्यार से क्यो बात कर रही थी...वैसे तो खा जाने वाली नज़रों से देखा करती थी..पर आज क्या हुआ..

कहीं यही तो नही जो रात मे आती है..नही-नही...वो तो कब्से आती है पर इसका मिज़ाज तो आज बदला.....तो क्या बात होगी...*??

अरे कही ऐसा तो नही कि कल के खेल मे ये मेरे साथ हो...हो भी सकता है..पर कैसे पता चलेगा...*???

ओह्ह्ह..मेरा माइंड फट रहा है…क्या करूँ….अभी सब भूल जाता हूँ….पहले उस अंजान इंसान से मिल लूँ…फिर एक-एक कर के सबको देखूँगा…अभी फ्रेश हो लेता हूँ..

इसके बाद मैं फ्रेश हुआ और रेडी होकर नीचे आ गया…..

हमने नाश्ता किया और फिर पढ़ाई करने बैठ गयी,,,,,आज फिर पारूल का अड्मिशन नही हो पाया…मैने उसे बोल दिया कि एग्ज़ॅम तक और रुक जा…फिर अड्मिशन करवा दूगा…

आज का दिन पढ़ाई करते हुए ही निकल गया…फिर मुझे याद आया कि मुझे उस इंसान से मिलना था…

मैं आंटी से बहाना बना कर निकल गया..और उस जगह पहुँच गया जहाँ वो इंसान मुझसे मिलने वाला था….

ये जगह सहर से बाहर थी…बिल्कुल सुनसान जगह …हाइवे से लग कर जगह थी…

मैं वहाँ उसका वेट करने लगा..फिर थोड़ी देर मैं वो इंसान एक टेक्शी से आया और टेक्शी उसे छोड़ कर निकल गई…और वो इंसान अपने मुँह पर कपड़ा बाँध कर मेरे पास आने लगा.….

वो इंसान रोड क्रॉस कर के आ ही रहा था कि तभी एक ट्रक उसे टक्कर मारते हुए निकल गया...

सिर्फ़ एक चीख सुनाई दी...

अननोन- आआहह....

मैने आज तक कोई आक्सिडेंट देखा ही नही था...और आज तो मेरे सामने ही एक इंसान को ट्रक उड़ाकर निकल गया...

ये नज़ारा देख कर मैं सुन्न पड़ गया और मेरे गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी....

मुझे समझ मे नही आ रहा था कि क्या करूँ...मेरे हाथ- पैर जाम हो गये थे...

तभी मुझे आवाज़ सुनाई दी और मुझे थोड़ा होश आया....

अननोन- अंकित्तत्त.....

वो आवाज़ उस अंजान इंसान की थी जो काफ़ी आगे पड़ा हुआ था....

मैं फिर भी हिल नही पाया ...पर जब उसने दुबारा मुझे पुकारा तो मेरे पैर उसकी तरफ बढ़ने लगे और मैं जल्दी से भागने लगा....

जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा तो उसे देख कर मैं काँपने लगा और मैं जोरो से रोने लगा ..

मैं- ये..ये ...आपको...नही....

अननोन- बेटा मेरी बात...आअहह...सुनो जल्दी...

मैं- पहले डॉक्टर के पास चलते है...

मैने उसे उठाने को हाथ बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ के बैठा दिया...

अननोन- नही बेटा...मेरी..मेरी बात सुनो...आहह

मैं- आपका खून ....चलो डॉक्टर के पास

अननोन- नही बेटा...मैं नही बचूँगा..मेरी बात सुनो..

मैं- नही आप मेरी बात सुनो...प्ल्ज़्ज़ चलो..

 
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