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चूतो का समुंदर



पता नही मैं उस अंजान इंसान के लिए क्यो रोने लगा था ....और मैं उसे हॉस्पिटल जाने को कहने लगा....पर वो मुझे बात सुनने को बोलने लगा ..

मैं- चलिए ना..प्ल्ज़्ज़

अननोन- बेटा...तुम ये की लो और ***** बॅंक मे जाना. .

मैं - आप चुप रहो ..कुछ नही होगा आपको..

अननोन- बेटा ...तुम्हारे दुश्मन बहुत ख़तरनाक है...वो नही चाहते कि तुम्हे कुछ पता चले...आअहह

मैं - की ले ली मैने...मैं जाउन्गा बॅंक मे पर आप अभी हॉस्पिटल चलिए प्ल्ज़

अननोन- नही बेटा मैं नही बचूँगा....तुम बॅंक लॉकर से सामान ले लेना...आअहह..उस से तुम्हे सब समझ आ जायगा....आअहह

मैं- हाँ ले लूँगा..पर आप..

अननोन- अब मेरा काम ख़त्म...जो मैं बताने वाला था..वो सब लॉकर मे है...आहह

मैं- ओके...पर अभी आपको बचना है...

मैने उसे उठना चाहा पर उसने फिर से मुझे बैठा दिया...

मैं- आप चलिए ना...

अननोन- बेटा मेरी बात सुनो...

मैं- हाँ बोलिए

अननोन- लॉकर की बात किसी को मत....आअहह बताना...तेरे बाप को भी नही.....

मैं- ठीक है..पर आप

अननोन- और मेरे बारे मे किसी को पता ना चले..

मैं - नही चलेगा ओके..

अननोन- सबसे सतर्क रहना बेटा.... मेरा काम पूरा...आअहह

इससे पहले की मैं कुछ कर पाता उस अननोन इंसान ने दम तोड़ दिया....और मैं कुछ नही कर पाया...

उसके मरने के बाद मुझे डर लगने लगा और मैं उसके हाथ से की लेकर वहाँ से उठ कर अपनी कार के पास आया और तेज़ी के साथ कार भगाते हुए अपने घर निकल आया.....

मैं कार को पूरी स्पीड से चलाते हुए घर आ रहा था….मेरी आँखो के सामने बस उस इंसान की खून से लत्फथ बॉडी ही नज़र आ रही थी…..

मुझे पता ही नही चला कि मैं कब घर पहुँच गया….

जैसे ही मैं घर पहुँचा तो कार से निकल कर सीधा रूम की तरफ भागने लगा…जैसे ही मैं हॉल से होकर निकल रहा था तो वहाँ सविता आई और रश्मि मुझे देख कर चौक गई जो कि वहाँ पहले से ही मौजूद थी …

जैसे ही उन दोनो ने मेरा चेहरा देखा तो दोनो डर गई…पता नही मेरे चेहरे का क्या हाल था…

सविता- क्या हुआ बेटा…कहाँ से आ रहा है…??

मैं- चुप रहा ..बस उन दोनो की तरफ देखने लगा..

सविता- क्या हुआ बेटा...ये क्या हाल बना रखा है...??

मैं- फिर से चुप रहा…मेरे मुँह से शब्द ही नही निकल रहे थे…

रश्मि- सर कुछ तो कहिए…कोई आक्सिडेंट हुआ क्या…??

मैं- आई माँ….आई माँ….

सविता- बोल ना बेटा क्या हुआ...

आज मैने सविता को आई माँ कह कर बोला था…जो मैं उन्हे चोदने के बाद कम ही कहता था….

मैं आई माँ कहकर चुप हो गया और मेरी आँखो से आँसू निकलने लगे…

सविता और रश्मि मुझे रोता हुआ देख कर ज़्यादा ही डर गई और सविता तो खुंद भी रोने लगी…

सविता- क्या हुआ बेटा…कुछ ग़लत हुआ क्या…बता मुझे…

रश्मि- हाँ सर…बोलिए….मैं बड़े सर को कॉल करती हूँ…

मैं- नही…नही कॉल मत करना ..किसी को….

सविता- ठीक है बेटा कोई कॉल नही करेगा...तू मुझे बता क्या हुआ....कुछ भी हुआ होगा ..मैं संभाल लूगी...

मैं उन दोनो की बात सुनकर थोड़ा रिलॅक्स ज़रूर हुआ , पर मेरे गले से कोई शब्द नही निकल रहे थे....और मैं अपने रूम मे भाग कर आ गया...

रूम मे आते ही मैं बेड पर लेट गया और फिर से उस आक्सिडेंट के बारे मे सोचने लगा....कि अचानक ये कैसे हो गया..वो इंसान कौन था...उसके दुस्मन कौन थे...क्या ये एक आक्सिडेंट ही था या एक प्लॅंड मर्डर...

वहाँ नीचे मेरी ऐसी हालत देखने के बाद और मेरे भाग कर आने के बाद सविता और रश्मि बाते करने लगी…

रश्मि- सविता आई…ये क्या हुआ सर को…

सविता- पता नही रश्मि…पर कुछ तो बुरा हुआ है…मेरा बेटा..

रश्मि- उनकी हालत ठीक नही है…

सविता- लगता है कुछ बड़ी बात हुई है..वरना मेरा बेटे की ऐसी हालत नही होती..

रश्मि- अब हम क्या करे ..बड़े सर को बताए क्या…???

सविता- नही-नही…उसने मना किया है ना…

रश्मि- पर हमे बड़े सर को बताना होगा....कही कुछ बड़ी बात हो गई तो बड़े सर तो हमे ही कहेगे ना कि हमने उनको क्यो नही बताया...

सविता- बोला ना नही...मैं पहले उससे बात कर लूँ..फिर देखेगे कि बड़े सर को कहें कि नही...

रश्मि- ठीक है जैसा आप कहो..पर अभी क्या करे..

सविता- मैं उपेर अंकित बाबा के पास जाती हूँ...तू एक काम कर कॉफी बना के ले आ जल्दी..

रश्मि- ठीक है..आप जाओ..मैं कॉफी लाती हूँ….

यहाँ रूम मे , मैं उस इंसान की बातो को सोच रहा था कि उसने ये क्यों कहा कि मैं किसी को कुछ ना बताऊ यहाँ तक की डॅड को भी….क्या चाहता था वो…और उस लोकर मे ऐसा क्या है…???

तभी सविता मेरे रूम मे आ गई…अब तक मैने रोना बंद कर दिया था फिर भी मेरे चेहरे का हाल बुरा दिख रहा था…

सविता- बेटा क्या हुआ…???

मैं(मन मे)- ये मैने क्या किया ..इनके सामने ऐसे कैसे टूट गया…ये डॅड को ना बता दे…इन्हे सच तो बता नही सकता…कुछ तो बताना होगा …

सविता- बोलो ना बेटा ..मुझे तो बताओ..ऐसा क्या हुआ..???

मैं(बड़ी मुस्किल से शब्द ढूंड कर बोला)- वो आई माँ…वो…मैने…

सविता- हाँ बेटा बोल ना...

मैं- वो ..आई माँ..मैने एक आक्सिडेंट..

सविता मेरी बात सुनकर मेरे बेड पर आ गई और मुझे गले लगा लिया..

सविता- तुझसे आक्सिडेंट हो गया बेटा….

मैं- नही आई माँ…मैने बस आक्सिडेंट देख लिया…

सविता- हे भगवान तेरा लाख-लाख धन्याबाद....मुझे लगा कि तूने आक्सिडेंट कर दिया है...

मैं- नही आई माँ...मैने...एक आक्सिडेंट देखा है...

सविता-किसका बेटा...*??

मैं- पता नही कौन था...मैं नही जानता...

सविता- भूल जा बेटा...भूल जा...तू उसके बारे मे मत सोच...

मैं- आई माँ…मुझे डर लग रहा है…

सविता- डर मत बेटा ..मैं हूँ ना...तू बिल्कुल मत डर...

सविता मुझे अपने सीने से लगाए हुए थी..और मेरा मुँह उसके बड़े-बड़े बूब्स पर था पर आज मेरे मन मे कोई भी ग़लत भावना नही आ रही थी..आज मुझे सविता के अंदर वही पुरानी आई माँ दिख रही थी...

सविता- भूल जा मेरे बच्चे...तू रोना मत ओके...

मैं- ह्म्म आई माँ मुझे नीद आ रही है…

सविता – सो जा बेटा..सो जा…थोड़ी देर मे सब ठीक हो जायगा…

ऐसे ही सविता के सीने से लगे हुए मैं सो गया ..मुझे पता ही नही चला…फिर करीप 40-45 बाद मेरी आँख खुली तो मैं वैसे ही सविता के सीने पर सिर रख कर पड़ा था और सविता मेरा सिर सहला रही थी….

 


मैं- दाई माँ…

सविता- उठ गया बेटा…अब कैसा लग रहा है…

मैं- अब ठीक हूँ …मुझे कॉफी पीना है…

सविता- हाँ बेटा ..अभी लाती हूँ…

सविता उठने ही वाली थी कि रश्मि कॉफी ले कर आ गई…

रश्मि- सर …अब आप कैसे है…

मैं- ठीक हूँ रश्मि...लाओ कॉफी लाओ

इसके बाद मैने कॉफी पी और मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा…अब मेरे मन मे कोई डर नही था ..सिर्फ़ सवाल थे , जिनके जवाब मुझे ढूँडने थे…

सविता- अब ठीक है ना मेरे बच्चा…

मैने सविता की तरफ देखा तो उसका पल्लू गिरा हुआ था..और उसके बूब्स ब्लाउस मे मेरे सामने थे…अब मेरा मूड पहले की तरह हो गया था…और सविता के बूब्स देखते ही मैने उसे गले से लगा लिया..

सविता- क्या हुआ बेटा..

मैं- अब मैं ठीक हूँ आई माँ…अब मुझे खुश करो…

सविता- ओह…तो बच्चा ठीक हो गया…बोल क्या करूँ…

मैं- रश्मि तू नीचे जा…मैं आई माँ को प्यार कर लूँ ..तू नीचे ध्यान रखना…

रश्मि मुस्कुराते हुए नीचे निकल गई और मैने सविता के एक बूब्स को मुँह मे भर लिया...

सविता- आहह..बेटा…कब से तड़प रही थी….आज मिटा दे ये तड़प…

मैं- उउंम...उउंम्म

सविता- बेटा ...आहह....ऐसे ही...आज गर्मी मिटा दे मेरी....

मैं- ओके...चलो बाथरूम मे...आज आपकी गान्ड मारनी है...

सविता- ह्म्म..चलो..पर चूत भी मार लेना…

मैं- चलो तो दोनो मारूगा...चूत और गान्ड ओके...

सविता- मेरा प्यारा बेटा….चल…

इसके बाद हम दोनो नंगे होकर बाथरूम मे गयी और मैने 40 मिनट तक सविता की चूत और गान्ड मारी…अब मेरा मूड बिल्कुल मस्त था….

हम चुदाई ख़त्म कर के रूम मे आए और सविता कपड़े पहन कर मेरे लिए कॉफी बनाना निकल गई और मैं संजू के घर जाने को रेडी हो गया….

जब सविता कॉफी लेकर आई तो बोली…

सविता- ये क्या बेटा ..कहाँ जा रहा है..

मैं- वो मैं संजू के घर …एग्ज़ॅम तक वही रहूँगा…बताया तो था…

सविता- हाँ बताया था..पर अब रात हो गई है..आज यही रुक जा ना…

मैं- नही आई माँ….आज रात को पढ़ाई करनी है..कल एग्ज़ॅम है ना…

सविता – जैसा तू ठीक समझे….अब तू ठीक है ना…

मैं- हाँ बिल्कुल...अब बिल्कुल फ्रेश हूँ...थॅंक्स...

सविता- अरे थॅंक्स क्यो बोल रहा है…थॅंक्स तो मुझे बोलना चाहिए …आज मेरी गर्मी मिटाने को..

मैं- (मुस्कुराते हुए)- ओके…अब आप जाओ…मैं अभी आता हूँ…

सविता के जाने के बाद मैने सोचा कि अब मुझे सब राज पर से परदा उठाना होगा…उस बॅंक लोकर को कल देखूँगा ..पर उस लंड चूसने वाली को आज ही देखना है..अब एग्ज़ॅम एंड तक वेट नही कर सकता….मेरे पास बहुत से काम है…और लोकर खोलने के बाद शायद काम बढ़ जाए..

तो आज से ही शुरुआत करते है….एक-एक राज को बेपर्दा करने का…सबसे पहले लंड चूसने वाली की असलियत देखनी है…

इसके बाद मैं घर से सविता को बोल कर निकल आया और एक एलेकट्रोनिस की शॉप पर जाकर कुछ सामान खरीदा…

उसके बाद मैं संजू के घर निकल आया…

मैं जैसे ही संजू के घर मे आया तो सब मेरा ही वेट कर रहे थे और काफ़ी परेशान थे…

आंटी- बेटा तू आ गया…कहाँ था तू…???

मैं- मैं घर गया था आंटी…आप लोग टेन्षन मे क्यो हो…

संजू- तो तू कॉल क्यो नही ले रहा था….???

मैं- कॉल…मेरा मोबाइल….

मैने जल्दी से मोबाइल देखा…वो साइलेंट पर था और उसमे 38 मिस कॅल पड़ी थी….

संजू- अब बोल..

मैं- यार वो मोबाइल साइलेंट था और मैं सो रहा था ..सॉरी...

संजू- सॉरी क्या …पता है हम सब कितने परेशान थे…

मैं- सॉरी..आप सभी को..मैने जानभूज कर नही किया..

आंटी- कोई नही बेटा…तू ठीक है..बस यही बहुत है..चल आजा…

जैसे ही मैं सबके साथ बैठा तो सबने अपनी नाराज़गी जताई….

पूनम दी, अनु, रक्षा, आंटी,आंटी2, और अंकल लोग…सब मेरी फ़िक्र कर रहे थे,….क्योकि मेरा सेल साइलेंट मूड पर था…..

आज मुझे समझ आ गया कि मोबाइल को साइलेंट मूड पर रखना कितनी परेशानी बढ़ा सकता है….

थोड़ी देर बाद हमने डिन्नर किया..और अपने –अपने रूम मे चले गये…

सब कल एग्ज़ॅम की तैयारी मे बिज़ी हो गयी बस मैं नीचे टीवी देखता रहा ….क्योकि मेरे माइंड मे अभी भी उस इंसान की बातें चल रही थी….

तभी मेरे पास आंटी आ गई….

आंटी- क्या सोच रहा है बेटा…???

मैं- कुछ नही आंटी….

आंटी- ह्म्म्म …हमसे गुस्सा है क्या…??

मैं- नही तो..ऐसा क्यो लगा आपको..

आंटी- वो मैने सोचा कि तुम्हारे आते ही सब तुमसे सवाल पूछने लगे कि कहाँ था..क्या कर रहा था...तो...

मैं- अरे नही आंटी...असल मे , मैं तो खुश हूँ कि आप सब को मेरी इतनी फ़िक्र है...

आंटी- वो तो होगी ही…मेरे लिए जैसा संजू वैसा ही तू…..

मैं- अच्छा..और…

आंटी(मुस्कुरा कर धीरे से )- और मेरा पति भी तू ही है….

मैं- अच्छा...

आंटी- हाँ...और तू संजू की बात का बुरा मत मान ना...वो तेरी फ़िक्र मे गुस्से मे बोला था...

मैं- अरे आंटी संजू की किसी बात का मैं कभी बुरा नही मानता…सब ठीक है…मैं खुश हूँ…

आंटी- अच्छा..तो आज रात को मुझे खुश कर दे…

मैं- आंटी ..आज नही ..कल एग्ज़ॅम है..

आंटी- ओह ..सॉरी…मुझे याद ही नही रहा…तू जा कर पढ़ाई कर…

मैं- ह्म्म्मी…जाता हूँ…

आंटी- अरे बेटा इस पॅकेट मे क्या है….

मैने जो एलेक्टॉनिक्स का समान लिया था वो उस पॅकेट मे था…

आंटी- बोल ना..क्या है इसमे…

मैं- वो आंटी इसमे..अकरम का सामान है…जो मेरे घर पड़ा था…उसने बोला कि कल स्कूल मे लेता आउ तो….ले आया..

आंटी- ओके…तू अब जा कर पढ़ाई कर..और कॉफी चाहिए हो तो बोल देना…

मैं- ओके आंटी…बोल दूँगा…

इसके बाद मैं संजू के रूम मे निकल गया…

वाहा संजू पढ़ाई कर रहा था…और मुझे देखते ही उसने मुझ पर सवाल दागने शुरू कर दिए…

संजू- साले तू था कहाँ..और आज तेरा फ़ोन साइलेंट कैसे हो गया…??

मैं- भाई रुक तो सब बताता हूँ....

संजू- हाँ बता जल्दी…

मैं- अरे यार वो मैं घर गया था कुछ काम से तो वही नीद आ गई..

संजू- मोबाइल साइलेंट क्यो था..????

मैं- यार बोलने तो दे..

संजू- बोल..

मैं- जब मैं जगा तो मेरा चुदाई का मूड बन गया और मैं सविता को चोदने लगा…

संजू- पर मोबाइल…

मैं- वही बोल रहा हूँ..मैने साइलेंट किया था…क्योकि डॅड का कॉल आ रहा था…मैने सोचा की चुदाई के बाद नॉर्मल कर लूगा पर याद ही नही रहा …ओके…सॉरी

संजू- ओके..आगे से याद रखा कर…मुझे टेन्षन हो गई थी…

मैं- ओके…अब तू पढ़ाई कर और मुझे भी करने दे,,,,

संजू- ओके...

 


फिर हम दोनो पढ़ाई करने लगे पर मेरे दिमाग़ मे तो आज उस लंड चूसने वाली को पकड़ने का प्लान था...पर उसके लिए मुझे संजू को रूम से बाहर भेजना होगा...पर कैसे..*???

मैं सोच ही रहा था कि रक्षा रूम मे आ गई...

रक्षा- सॉरी भैया…आपको डिस्टर्ब कर रही हूँ…

मैं- यार तू हमसे सॉरी मत बोल..डाइरेक्ट डिस्टर्ब कर..क्यो संजू,..हाहहहा

संजू- हाँ बिल्कुल..बोल कैसे आई..??

रक्षा- वो अंकित भैया से काम था…

मैं- मुझसे…बोल क्या काम है…

रक्षा- भैया वो मुझे कुछ क़ूस समझ नही आ रहे ..कल एग्ज़ॅम है..क्या आप समझा दोगे…

मैं- ह्म्म..पर तूने अनु से नही पूछा…वो बता देती…

रक्षा- वो तो पूनम दी के साथ उनके रूम मे पढ़ रही है....

मैं- ओके..बता क्या प्राब्लम है…

रक्षा- आप मेरे रूम मे चलिए ना..यहा संजू भैया को डिस्टर्ब भी होगा…

मैं- ओह ..सही कहा..चल तेरे रूम मे …

मैं रक्षा के पीछे-पीछे उसके रूम मे जाने लगा….रक्षा ने टाइट लेग्गी पहन रखी थी और साथ मे टी-शर्ट….आज सर्दी थी..फिर भी ऐसी ड्रेस..कमाल है…

रक्षा की गान्ड टाइट लेग्गी मे कसी हुई थी और चलते हुए उपर-नीचे होकर मेरे लंड पर बिजलियाँ गिरा रही थी…

हम रक्षा के रूम मे पहुँच कर बेड पर बैठ गये..जहाँ उसकी बुक्स पड़ी थी…

रक्षा ने जल्दी से हम दोनो को कंबल से ढक लिया और फिर मुझे अपनी प्राब्लम बताने लगी…

रक्षा और मैं चिपक कर बैठे हुए थे और उसकी बुक मेरे पैरो पर थी...रक्षा जैसे ही प्राब्लम बताने झुकती तो उसके गले से मुझे ब्रा मे क़ैद उसके आधे नंगे बूब्स दिखाई देते ...जो मेरे लंड मे खलबली मचाने लगे...

उपेर से रक्षा की जाँघ मेरी जाँघ से चिपक कर गर्मी बढ़ा रही थी...

जैसे ही मैने उसकी प्राब्लम सॉल्व करने के लिए कॉपी मे लिखना शुरू किया तो मेरी कोहनी उसके बूब्स से टकराने लगी ..पर रक्षा वैसे ही झुंक कर कॉपी मे देखती रही…जैसे कुछ हुआ ही ना हो…..

जब रक्षा ने कुछ नही कहा और ना सीधी हुई तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं जान-बुझ कर तेज़ी से कोहनी को उसके बूब्स पर ज़ोर से प्रेस करने लगा...

पर फिर भी रक्षा टस के मस नही हुई...उपेर से वो थोड़ा ज़्यादा ही झुंक गई....

मुझे समझ नही आ रहा था कि रक्षा ये खुंद कर रही है या सिर्फ़ ऐसे ही हो गया…

पर अब मुझे मज़ा आने लगा था और मेरे लंड को भी…

करीब 15 मिनट तक मैं रक्षा के बूब्स को प्रेस करता रहा पर वो कुछ भी नही बोली और ना ही पीछे हुई….

अचानक रक्षा बोली…

रक्षा- भैया सर्दी ज़्यादा है ना…

मैं(मन मे)- कैसी सर्दी...मेरे जिस्म मे तो आग लगा दी तूने...

रक्षा- भैया..मैं हीटर चालू करूँ…

मैं- ह्म्म…(और क्या बोलता)

रक्षा मेरे राइट साइड थी और रूम हीटर का स्विच मेरे लेफ्ट साइड पर दीवाल पर था….

रक्षा जैसे ही हीटर चालू करने घुटनों के बल उठी तो उसके बूब्स मेरेमूंह पर आ गये और वो हीटर का प्लग लगाने लगी…

अब मेरे मुँह के सामने ऐसे मस्त तने हुए बूब्स थे तो मन क्यो ना बहके…..मैं थोड़ी देर खुंद को रोकता रहा….पर रक्षा से शायद प्लग ठीक से नही लग रहा था तो उसे टाइम लग रहा था और उसके बूब्स मेरे मुँह पर घिस रहे थे…

अब मेरे सब्र का बाँध टूट गया और मैने रक्षा के एक निप्पल को होंठो मे लेकर हल्का सा किस कर दिया…

रक्षा-आहह…..भैया

और वो हीटर ऑन करके वापिस अपनी जगह पर बैठ गई…

मैं- सीसी..क्या हुआ..

रक्षा(स्माइल कर के)- वो आपकी दाढ़ी ..

मैं- ओह..सॉरी..

रक्षा- कोई नही…अब दूसरा सवाल बताइए…

मैने सोचा कि अच्छा हुआ कि रक्षा ने ग़लत नही सोचा..वरना पता नही क्या करती...और मैं फिर से रक्षा को सवाल समझाने लगा...

मैं वहाँ 1 घंटे बैठा रहा और रक्षा के बूब्स को कोहनी से दबाता रहा पर रक्षा ने कुछ भी नही कहा….

मैं- ये भी हो गया…अब ठीक…अब मुझे भी पढ़ने दोगि..मेरा भी एग्ज़ॅम है..

रक्षा- सॉरी भैया…मेरी वजह से आप नही पढ़ पाए…

मीयन- कोई नही , मैं रेडी हूँ एग्ज़ॅम को बस रिविषन थोड़ा बाकी है…

रक्षा- ओके..अब आप अपना पढ़िए…

मैं-ह्म्म्म

पर मैं उठुंगा कैसे …रक्षा ने मेरा लंड टाइट कर दिया था..और इसके सामने उठा तो इसे दिख जायगा ..क्या करूँ..???

मैं- रक्षा- एक काम करो…

रक्षा- जी कहिए…

मैं- रजनी आंटी से कहो कि कॉफी बना दे…

रक्षा- ओह इतनी सी बात…आप रूको…मैं बना कर लाती हूँ…

मैं- ओके बेटा…

रक्षा कॉफी बनाने निकल गई और मैं जल्दी से उठ कर अपना लंड सेट कर के संजू के रूम मे आया और बाथरूम जाकर फ्रेश हो गया…

इसके बाद मैं पढ़ने बैठ गया और थोड़ी देर मे ही कॉफी आ गई..कॉफी पी कर मैं संजू के साथ पढ़ने लगा….

कुछ देर बाद संजू सोने लगा…और मैं पढ़ता रहा…

फिर मुझे याद आया कि आज उस लंड चूसने वाली को पकड़ना है और उसके लिए मैं सामान भी लाया हूँ…

और अब तो संजू सोने वाला है तो मुझे सामान सेट करने मे कोई प्राब्लम भी नही होगी....

मैने जल्दी से पॅकेट खोला …उसमे एक बल्ब, होल्डर और स्विच था…

जो टेबल लॅंप की तरह था..मतलब मैं बल्ब कही भी लगा दूं पर उसका कंट्रोल मेरे हाथ मे होगा…

मैने सोचा था कि जैसे ही वो लंड चूस कर जाने लगेगी तो मैं वैसे ही बल्ब जला दूगा ….बस फिर क्या..उसका चेहरा मेरे सामने होगा…

मैने जल्दी से सब सेट किया….बल्ब को गेट से साइड मे लगाया और स्विच मेरे बेड पर था….

 


मैने बाहर देखा तो सभी रूम्स की लाइट ऑन थी…तो मैं फिर से पढ़ने बैठ गया…

जब मुझे लगा कि सब सोने लगे तो मैं भी लाइट ऑफ कर के लेट गया…

मैं सोच रहा था कि अगर ये अनु, पूनम या रक्षा है तो आज नही आयगी…क्योकि कल सबको एग्ज़ॅम देने जाना है…..

मुझे लेटे हुए 40-45 मिनट हो गयी पर कोई नही आया…मैने सोचा कि शायद अब नही आएगी और मैने सोने के लिए आँखे बंद कर ली….कि तभी मेरे रूम का गेट खुला….और मैं खुश हो गया…

अब मैं वेट करने लगा कि कब ये अपना काम ख़त्म करे और मैं इसे बेपर्दा करू….

रोज की तरह आज भी उसने बड़े प्यार से मेरे लंड को आज़ाद किया..फिर लंड को किस करने लगी..फिर बॉल्स से लेकर टोपे तक जीभ फिराते हुए चाटने लगी…

मेरे मुँह से आनंद मे आह निकल रही थी पर मैं अपनी आवाज़ को दवाए हुए लेटा रहा….

कुछ दे तक लंड चाटने के बाद मेरा लंड औकात पर आने लगा….

जैसे ही लंड आधा खड़ा हुआ तो उसने लंड का सूपड़ा चूसना शुरू कर दिया….और धीरे-2 लंड को मुँह मे भर कर चूसने लगी…

मुझे तो आनंद की प्राप्ति हो रही थी और साथ मे इस बात की खुशी भी कि आज ये पकड़ी जाएगी….

देखते ही देखते मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया और उसने लंड को गले मे ले जाते हुए चूसना शुरू कर दिया…और साथ मे हाथ से मेरी बॉल्स को सहलाने लगी…

थोड़ी देर की मेहनत के बाद उसकी लंड चुसाइ ने असर दिखा दिया और मैं उसके मुँह मे झड़ने लगा….

वो गप्प से मेरे लंड रस को पी गई और रोज की तरह लंड को आख़िर बूँद तक चूस कर सॉफ कर दिया….और लंड को अंदर करके उठ गई….

जैसे ही वो उठी और गेट की तरफ जाने लगी तो मैने अपने हाथ मे पकड़े हुए स्विच से बल्ब ऑन कर दिया…..

बल्ब ऑन होते ही वो मेरे साइड पलट गई और मेरी आँखे खुली देख कर मुझे देखने लगी….

मैं तो उसे देख कर शॉक्ड था..मुझे शक तो इस पर भी था पर सबसे ज़्यादा शक किसी और पर था…

मैं बार-बार आँखे बंद करके खोल रहा था और कन्फर्म कर रहा था कि मैं सही देख रहा हूँ या ग़लत…

यहाँ मैं परेशान था और वहाँ वो खड़ी हुई नॉर्मल दिख रही थी…

मुझे लगा था कि जैसे ही इसे पकडूंगा तो ये शॉक्ड हो जाएगी या डर जाएगी…पर ये तो बिल्कुल नॉर्मल थी…और मुझे देखे जा रही थी….

मुझे तो यकीन करना मुस्किल था कि ये अनु है…मैने सोचा भी नही था कि ये अनु निकलेगी…

हाँ दोस्तो ये अनु ही थी….आप की ही तरह मुझे भी लग रहा था कि लंड चूसने वाली रक्षा या मेघा आंटी निकलेगी..पर ये तो अनु निकली…

अनु पर मुझे शक था…पर सबसे कम चान्स लग रहे थे…

पर अब तो असलियत मेरे सामने थी….

मैं और अनु कुछ देर तक ऐसे ही एक-दूसरे को देखते रहे…पर कोई कुछ बोला नही…

आख़िर कर मैने हिम्मत जुटा कर धीरे से कहा…

मैं- अनु..तुम…??

अनु- श्हहीयीययी…बाद मे….गुडनाइट

और अनु रूम से निकल गई..और मैं शॉक्ड हो गया…

मैं सोचने लगा कि क्या लड़की है…ये तो ऐसे निकल गई जैसे कुछ हुआ ही ना हो…

अरे आज रंगे हाथ पकड़ी गई..फिर भी बिल्कुल नॉर्मल थी….जैसे कि ये जानती थी कि आज इसे पकड़ा जाना है….

मैने हमेशा अनु को लाइक किया है पर ऐसा नही सोचा था…मैं खुंद उसके जिस्म को प्यार करना चाहता था पर ये तो मुझसे एक कदम आगे निकली….

इतने दिनो तक मेरे लंड के मज़े लेती रही और मुझसे नॉर्मल बाते भी करती थी…तभी तो इस पर शक नही हुआ था…

पर अगर अनु ये सब कर रही थी तो रक्षा का बहेवियर क्यो बदल गया था मेरे लिए ,….उसी दिन से , जिस दिन से ये लंड चूसने की शुरुआत हुई थी….

क्या रीज़न हो सकता है….

अनु का इस तरह से लंड चूसना और रक्षा का मुझे घूर्ना…क्या एक इत्तफ़ाक़ है या फिर दोनो चीज़ो मे कुछ लिंक है….

अब तो ये सब अनु ही बताएगी….कल एग्ज़ॅम के बाद अनु से बात करता हूँ….अभी सो जाते है….

और मैं अपनी सोच को थोड़ा रेस्ट देकर…सपनो की दुनियाँ मे खो गया…..

मैने ये सोच कर सोया था कि आज अनु को सपने मे लंड चूस्ते हुए देखूँगा…पर आज मेरे सपनो की बॅंड बजने वाली थी….

मेरे सामने एक लाश पड़ी हुई है और मेरे हाथ मे एक इंसान तड़प रहा है….वो लाश एक औरत की है और मेरे हाथों मे एक मर्द तड़प कर मर रहा था…

अचानक से मेरे चारो तरफ से हाथ आने शुरू हो गये …धीरे-धीरे वो हाथ मुझे घेर कर मेरे चारो तरफ घूमने लगे…और फिर सारे हाथ मेरे गले को दबाने लगे….मैं अपनी गोद मे पड़े हुए इंसान को बचाने मे लगा था कि अब मैं खुंद मरने की हालत मे हो गया…और मैं ज़ोरों से चीखने लगा…

छोड़ दो मुझे..छोड़ दो…..मैने क्या किया…छोड़ दो….मुझे मत मारो….

मैं चिल्लाता हुआ अपनी जान की भीख माग रहा था और वो हाथ मेरे गले मे कसते जा रहे थे…मैं पसीने मे पूरी तरह भीग गया था और पसीना इतना हो गया कि मेरा पूरा चेहरा तर-बतर हो गया….

अचानक से मेरी आँख खुली…तो मेरे सामने रक्षा खड़ी हुई थी और उसके हाथ मे पानी की बॉटल थी…

फिर मैने अपने आप को देखा तो मैं अपने हाथो से अपना गला पकड़े हुए था….

मैने तुरंत अपने हाथो को अलग किया और तेज-तेज साँसे लेने लगा…

रक्षा- भैया..भैया...आप ठीक हो...

मैं- हमम्म…हमम्म्म…हाँ..बुरा सपना था…

रक्षा- भैया , मैं तो डर ही गई थी…

मैं- ह्म्म…तू यहाँ कैसे …???

रक्षा- मैं तो आपको जगाने आई थी...आज एग्ज़ॅम है...याद तो है ना..

मैं नॉर्मल हो गया और मैने देखा कि मेरा चेहरा और गला पानी से भीगा हुआ है..

मैं- हाँ…याद है…और ये बता कि पानी तूने डाला...

रक्षा- हाँ भैया...वो मुझे कुछ समझ ही नही आ रहा था तो..

मैं- ऐसा क्या हुआ...*????

रक्षा- आप जोरो से चीख रहे थे…और अपना गला दबा रहे थे…

मैं- सच मे…पर किसी ने सुना तो नही ना…

रक्षा- अगर मैं ना आती तो सब सुन लेते….पर जैसे ही आप चीखे तो मैने जल्दी से आपके उपर पानी डाल दिया…

मैं- ह्म्म..अच्छा किया…अब सुन…ये किसी को मत बताना….

रक्षा- ओके…पर हुआ क्या था भैया…

मैं- बोला ना..सपना देखा…बुरा था…

रक्षा- ओके..अब आप रेडी हो जाओ…फिर सब साथ मे स्कूल चलते है….

मैं- ह्म्म..वैसे आधा तो तूने ही नहला दिया…

रक्षा- आप कहो तो पूरा नहला दूं….

मैं रक्षा की बात सुनकर उसकी तरफ देखने लगा और रक्षा ने मुझे देख कर स्माइल कर दी…

रक्षा- क्या हुआ…नहला दूं…

मैं- सच मे...मुझे नहला पाएगी...

रक्षा- आप कहो तो….आपको ऐसा नहलाउन्गी कि आप खुश हो जाएगे..

मैं- ह्म्म..फिर कभी नहाउन्गा तेरे साथ…

रक्षा- ओके…मैं उस दिन का वेट करूगी…

मैं- क्या..

रक्षा- नहलाने के लिए..

मैं- ह्म्म..अब तू चल मैं आता हूँ..

इसके बाद रक्षा निकल गई..और मुझे नया टेन्षन दे गई....

रात को अनु मेरा लंड चूस गई और सुबह रक्षा मेरे साथ नहाने की बात कर गई....ये दोनो बहने तो काफ़ी आगे निकल गई...इतना तो मैने सोचा भी नही था....लगता है संजू के घर मे बिना मेहनत करे ही मुझे सारी चूत मिल जाएगी....बस मेघा आंटी के साथ भी कुछ बात शुरू हो जाए तो अच्छा....

फिर मैं रेडी होकर नीचे आ गया...जहा सब नाश्ता कर रहे थे,,,,

 


मैने भी सबको मॉर्निंग विश कर के वही बैठ गया…और अनु को देखने लगा ..पर अनु तो बिल्कुल नॉर्मल थी…ऐसा लग ही नही रहा था कि इसे कुछ भी फ़िक्र है कि कल रात को मैने इसे लंड चूस्ते हुए पकड़ा था…..

मैने सोचा कि अभी जाने दो इससे तो आज एग्ज़ॅम के बाद बात करूगा…..वहाँ दूसरी तरफ रक्षा मुझे देखते हुए स्माइल दे रही थी..वही पूनम दी का हाल था…पारूल भी स्माइल देने लगी...

फिर मैने नाश्ते पर फोकस किया और नाश्ता करने लगा ….

और नाश्ता कर के हम सब एक साथ एग्ज़ॅम के लिए निकले....

कार मे मैं और संजू आगे थे और पूनम दी, अनु और रक्षा पीछे थी…..

स्कूल पहुँच कर हमने एग्ज़ॅम दिए और एग्ज़ॅम के बाद अपने-अपने फ्रेंड्स के साथ गप करने लगे…

तभी मुझे अकरम ने इशारा करके बुलाया…और मैं समझ गया कि इसकी मोम की बात होगी…

फिर मैं अकरम के पास गया और हम सबसे दूर स्कूल के ग्राउंड मे निकल गये…

मैं- हाँ भाई अब बोल…क्या बात है

अकरम- क्या बोलू यार..वही मोम के बारे मे बात करनी थी…

मैं- हाँ , मैं समझ गया था…बोल कुछ हुआ क्या..???

अकरम- नही भाई..कल तो वो आई ही थी…और कल कुछ नही हुआ…

मैं- तो आज..???

अकरम- नही रे ..आज भी कुछ नही होगा…

मैं- तुझे इतना भरोशा कैसे है..??

अकरम- वो ..मेरी मोम मेरी मौसी के साथ है ..इसलिए..

मैं- हाँ यार..तेरी मौसी से याद आया ..कि कल तो वो दिखी ही नही…वो तो तेरे साथ ही रहती है…कहाँ थी वो...???

अकरम- हाँ सादिया मौसी..वो कल मेरी नानी के पास थी..नानी की हालत कुछ ठीक नही थी…

मैं- ओके…तो आज आ गई क्या…???

अकरम- नही..आज मोम भी नानी के पास उन्हे देखने गई है…

मैं- ओह…तो अभी तो कोई प्राब्लम नही होगी..

अकरम- हाँ पर जब वो वाइस आयगी तब…???

मैं- अरे भाई मैं हूँ ना…बोला था ना कि मैं सब ठीक कर दूँगा…

अकरम- भाई तेरे भरोसे पर ही मैं कॅंप मे जाने को रेडी हुआ….एग्ज़ॅम के बाद मेरा कॅंप है…

मैं- हाँ भाई ...तू आराम से जा..मैं सब ठीक कर लूँगा…

अकरम- ओके...भाई...

मैं- अब टेन्षन छोड़ और नेक्स्ट पेपर की तैयारी कर...चल अब...

अकरम- हाँ चल...

जैसे ही हम वापिस आ रहे थे कि मेरे फ़ोन पर अनु का कॉल आने लगा...

मैं(मन मे)- ये अभी क्यो कॉल कर रही है…देखते है ..अब क्या बोलती है…

मैं- अकरम तू रुक थोड़ा..ये कॉल इम्पोर्टेंट है….और मैं थोड़ी दूर जाकर बात करने लगा….

( कॉल पर)

मैं- हाँ बोलो…

अनु- भैया..कहाँ हो आप…???

मैं- स्कूल के ग्राउंड पर..क्यो क्या हुआ..???

अनु- वो..मुझे आपसे बात करनी थी…

मैं- कैसी बात…

अनु- वो..भैया…आप जानते हो…

मैं- ह्म्म..तो घर पर बात कर लेते है…

अनु- नही..मुझे आपसे अकेले मे बात करनी है…

मैं- तो घर मे अकेले ही रहेगे..

अनु- पर भैया..अभी कर लेते है ना…

मैं- नही..अभी मैं फ्रेंड्स के साथ हूँ और मुझे थोड़ा काम से जाना भी है...

अनु- ओके...पर घर मे अकेले कहाँ मिल पाएगे...

मैं- वो बाद मे देख लेगे..अभी रखो...ओके

अनु- ओके..बाइ

मैं- बाइ…

मैने अनु से थोड़ी गुस्से मे बात की थी….और ये ज़रूरी भी था..क्योकि मैं नही चाहता था कि अनु को पता चले कि मैं भी उसके लिए मरा जा रहा था….

फिर मैं अकरम के साथ स्कूल मे सबके बीच आ गया…

हमे देखते ही संजू हमारे पास आ गया…..और हम कॅंटीन गये और गप करते हुए कॉफी पी…

उसके बाद अकरम अपने घर निकल गया और मैने सबको संजू के घर छोड़ा और बहाना कर के निकल आया…

मुझे उस इंसान के बताए हुए लॉकर को देखने की इक्षा ज़्यादा थी…मैं जान ना चाहता था कि उसमे ऐसा क्या है…जो मुझे मेरे बारे मे सच बता सके….

मैं जल्दी से कार भगा कर उस बॅंक मे पहुँचा जहाँ लोकर था ….वहाँ जा कर जब मैने मॅनेजर को सारी बात बताई तो वो बोला..

मॅनेजर- रिलॅक्स सर….हम जानते है…उन्होने हमे पहले ही कहा था कि उनके अलावा सिर्फ़ मिस्टर.अंकित को ये लॉकर खोलने देना..

मैं- सच मे..आइ मीन….जी

मैं(मन मे)- क्या उसको पहले ही अंदाज़ा था कि वो मरने वाला है…

मॅनेजर- इस तरफ सर…

मैं फिर मॅनेजर के साथ लॉकर रूम मे गया और मैने लॉकर खोल कर देखा…

उस लोकर मे 3 एन्वेलप थे…अब उनमे क्या था …ये तो खोलने पर ही पता चलेगा….

मन तो कर रहा था कि जल्दी से ओपन करू..पर उन इंसान की बात याद आई कि किसी पर भरोशा मत करना….

और मैने सारा सामान लेकर बॅंक की फॉरमॅलिटीस पूरी की और जल्दी से कार दौड़ा कर अपने घर चला आया..

मैने सविता को कहा कि कोई भी मुझे डिस्टर्ब ना करे और मैं अपने रूम मे चला गया...अब मुझे इंतज़ार था कि इन एन्वेलप मे क्या निकलता है...

मैं रूम को अंदर से लॉक किया और एन्वेलप ले कर अपने बेड पर बैठ गया....

आज मेरी धड़कन तेज हो गई थी...पता नही इसमे ऐसा क्या है...जिससे मेरी लाइफ का कोई बड़ा राज जुड़ा हुआ है.....

इस टाइम मेरे दिल और दिमाग़ मे जंग छिड़ी हुई थी...दिमाग़ कह रहा था कि जल्दी से एन्वेलप्स को ओपन करके पता करू कि इसमे क्या राज छिपा हुआ है , जो मेरी लाइफ से रिलेटेड है....

और दूसरी तरफ दिल कह रहा था की मत खोल ...पता नही इसमे कुछ ऐसा निकले जिससे मेरा दिल दुखे और मैं टूट जाउ.....

पर फाइनली मैने दिमाग़ के साथ जाना सही समझा...मुझे सच का संमना करना ही पड़ेगा.....

पर क्या हो सकता है इसमे..यही सोचते हुए मैने हिम्मत कर के पहले एन्वेलप को ओपन किया.....उसमे से एक डाइयरी निकली....एक पुरानी सी डायरी …

मैं समझ नही पाया कि डाइयरी को कोई लॉकर मे क्यो रखेगा....ज़रूर इसमे कुछ ऐसा लिखा है जो मेरे लिए जान ना ज़रूरी है और मेरे दुश्मनों के लिए फ़ायदे वाली चीज़ है....

फिर मैने दूसरा एन्वेलप खोला..उसमे मुझे दो फोटो आल्बम मिले....मैने सोचा कि इसमे किसकी पिक्स होगी....बाद मे देखेगे....

फिर मैने आख़िरी एन्वेलप खोला ...उसमे मुझे कुछ मॅप्स जैसे दिखाई दिए...जो मुझे समझ मे नही आ रहे थे...

मैने सोचा कि सबसे पहले ये डाइयरी पढ़ के देखता हूँ....शायद इसमे ही फोटो आल्बम और मेप्स के बारे मे कुछ पता चले....

मैने दोनो एन्व्ल्प साइड किए और डाइयरी को लेकर लेट गया और जैसे ही मैने डाइयरी को ओपन किया और पढ़ना शुरू किया......

 


हेलो अंकित….

अगर तुम ये डायरी पढ़ रहे हो तो इसका मतलब ये है कि मैं इस दुनिया मैं नही रहा….

मुझे अंदाज़ा तो था कि एक दिन ऐसा आएगा ही कि जिस दिन तुम ये डाइयरी पढ़ोगे….

पर ये सारी बाते मैं खुंद तुम्हे बताना चाहता था …जो इस डाइयरी मे लिखा है….

तुम सोच रहे होगे कि मैं कौन हूँ…तुम्हे कैसे जानता हूँ और तुम्हे क्या और क्यो बताना चाहता था…???????

चलो सबसे पहले मैं अपनी असलियत तुम्हे बताता हूँ……

मेरा नाम है मोहन..और मैं……

इतने मे ही किसी ने मेरे गेट पर नॉक किया …और मैने डर से डाइयरी बंद कर दी…

डोर पर मेरे डॅड थे…..

दा- हेलो अंकित..बेटा सो रहे हो क्या..???

मैं- जी डॅड…अभी आया…

मैं जल्दी से गेट ओपन करने उठा पर मुझे याद आया कि उस इंसान ने कहा था कि किसी को कुछ पता ना चले….तो मैने जल्दी से सारे एन्वेलप को अपनी सीक्रेट कवर्ड मे रखा और जाकर गेट ओपन किया….

मैं- हाई डॅड…आप कब आए…

डॅड- हेलो माइ सोन….कम टू पापा…

मैने डॅड के गले लग गया….

मैं- डॅड ..मैने आपको बहुत मिस किया..’

डॅड- मैने भी…पर तुम तो शादी मे गये थे ना…

मैं- जी डॅड…वो रजनी आंटी के साथ…

डॅड- ह्म्म..कैसी रही शादी…???

मैं- मस्त डॅड..आपकी ट्रिप कैसी रही…

डॅड- एक अच्छी डील मिली है….सब ठीक रहा…

मैं- वाउ डॅड…मतलब अब आप यही रहोगे…

डॅड- सॉरी बेटा…बट मैं शाम को निकल जाउन्गा..एक डील होनी है…

मैं- ओह डॅड…आप भी ना

डॅड- बस बेटा ये डील हो जाए फिर 2 वीक तेरे साथ ही रहूँगा….ओके

मैं- ओके डॅड…

डॅड- वैसे तेरे एग्ज़ॅम कैसे चल रहे है…

मैं- आज पहला था…मैं संजू के साथ पढ़ाई कर रहा हूँ…अच्छा होगा…

दाद- ह्म्म…तो शाम को वही जायगा…

मैं- जी डॅड…पर आपके जाने के बाद….

डॅड- ओक…अभी चल मेरे साथ कॉफी पी ले…

मैं- स्योर डॅड- चलिए…

डॅड- मैं फ्रेश हो आता हूँ..तू भी फ्रेश हो जा…फिर कॉफी पीते है ओक

मैं- जी डॅड…

मैं रूम मे आ गया….मेरा मन तो था कि डाइयरी पढ़ लूँ…पर ऐसा कर नही सकता था…डॅड जो आ गये थे ..और मैं उस इंसान के कहे मुताबिक किसी के सामने भी कुछ नही आने दे सकता था…उसने कहा था कि मेरे दुश्मन मेरे आस-पास ही है….

मैं सोचा कि आज रहने देते है ..वैसे भी एग्ज़ॅम टाइम है ..डाइयरी मे कुछ ऐसा निकला जो मेरी टेन्षन बढ़ा दे तो एग्ज़ॅम चौपट हो जाएगे….

यही ठीक रहेगा कि मैं अभी डॅड के साथ रहूं…बाद मे देखते है….

इसके बाद मैं फ्रेश होकर नीचे गया और डॅड के साथ कॉफी पी…वहाँ डॅड ने मेरे लिए लाए गिफ्ट दिए और कुछ पेपर्स पर मेरे साइन लिए…

जब डॅड रेडी होने गये तो मैने फिर से सोचा कि क्या मैं वो सब सामान जो लॉकर मे मिला , डॅड को दिखा दूं …पर फिर मैने सोचा कि उस इंसान ने मना किया था तो उसकी मानता हूँ…

मैं कन्फ्यूज़ था कि दाद को बताऊ कि नही…फिर मैने उस इंसान की बात मानी…और चुप रहा….

एक बार मैं चेक कर लूँ फिर डिसाइड करूगा कि डॅड को बोलू कि नही….

मैने सोच ही रहा था कि डॅड नीचे आ गये और उसके बाद हमने एक और कॉफी पी और डॅड हमे बाइ कह कर निकल गये ….

मैं भी थोड़ी देर बाद सविता को बोल कर संजू के घर निकल आया…मैने सोचा कि अब कल ही वो डाइयरी पढ़ुंगा…देखते है उसमे क्या है…

जैसे ही मैं कार से निकला तो मुझे बीच रास्ते मे सोनम दिखाई दी…..वो कुछ फ्रेंड्स के साथ थी….

सोनम को देख कर मेरी पुरानी यादे ताज़ा हो गई…मैने सोचा कि आज सही मौका है…आज सोनम से सीधे-2 बात करता हूँ….आज तो आन्सर सुनकर ही जाउन्गा…

मैने जल्दी से कार साइड की और गेट ओपन किया ही था कि साला सोनम का बाप अपनी कार ले कर उसे लेने आ गया…

उसके बाद सोनम अपने पापा के साथ निकल गई …पर जाते हुए उस की नज़र मुझ पड़ पड़ी…

मुझे देखकर सोनम की आँखे खुशी से बड़ी हो गई…और वो ऐसे ही मुझे देखते हुए निकल गई…जब तक उसे मैं दिखाई दे रहा था …वो मुझे ही देखती रही…

उसके इस तरह से मुझे देखने से मुझे एक बात तो पक्की हो गई कि सोनम मुझे ना नही कहेगी….

मैने सोच लिया कि अब इसे कॉल करके मिलने बुलाउन्गा..और सारी बात क्लियर करूगा….

पर फिर याद आया कि सोनम को तो जब देखेगे तब देखेगे अभी उस टेन्षन को देखना है जो संजू के घर मे मेरा वेट कर रही है…..

मैने फिर कार स्टार्ट की और संजू के घर निकल गया….

संजू के घर आते ही मुझे नीचे हॉल मे आंटी, आंटी2 संजू और पारूल दिखाई दिए…वो सब टीवी देख रहे थे….

मेरे दिल को थोड़ी तस्सली हुई कि मुझे आते ही अनु या रक्षा का सामना नही करना पड़ा….क्योकि लास्ट नाइट उन दोनो के साथ जो हुआ उसे सोचकर मैने डिसाइड किया था कि दोनो से अकेले मे ही मिला जाए तो ठीक रहेगा…..

हालाकी रक्षा सुबह नॉर्मल ही थी…पर अनु के साथ रात को जो हुआ…उसके बाद तो उसे अकेले मे ही मिलना होगा…

मेरे आते ही आंटी ने कहा…

आंटी- आ गया बेटा…कहाँ गया था…कुछ काम था क्या…???

मैं- नही आंटी कोई खास काम नही…मैं घर गया था …तभी डॅड आ गये तो उनके साथ बातों मे शाम हो गई…

आंटी- अच्छा….तू बैठ, मैं कॉफी बनाती हूँ…

पारूल- आंटी आप बैठो , मैं बना लाती हूँ…

आंटी- ठीक है बेटा..सबकी बना लेना…

मेघा आंटी- हां बना ले…पर ठीक से बनाना …तुझे तो कभी कॉफी पीने भी नही मिलती होगी ना…

मेघा आंटी की बात पारूल को चुभि या नही पर मुझे बहुत बुरी तरह से चुभ गई…..

मैं जवाब देने ही वाला था कि आंटी ने मुझे इशारे से रुकने को कहा…और खुंद बात को संभाल लिया…

आंटी- पारूल अच्छी कॉफी बनाती है मेघा…पारूल बेटा …तू जा…कॉफी बना..

पारूल- जी…और वो किचन मे निकल गई…

आंटी- मेघा , ये सब क्या है….ऐसा क्यो बोल देती है उसे..

मेघा- तो क्या ग़लत कहा भाभी…नौकर ही तो है…

मेघा आंटी की बातों से मेरा गुस्सा बढ़ता जा रहा था..जो मेरी आँखो मे आंटी ने देख लिया…

आंटी- बस मेघा..अब उसे नौकर बोलना बंद कर….अंकित ने उसे अपनी बेहन बोला है..समझी…

मेघा आंटी- ओह…सॉरी बेटा..मेरा वो मतलब नही..था…पर फिर भी उसे सीखने मे टाइम तो लगेगा ना…..भभाई मैं अभी आई….

मेघा आंटी तो सफाई दे कर निकल गई पर मुझे तो उन पर बहुत गुस्सा आ गया था…और मैं उपर जाने लगा…तभी आंटी ने कहा..

आंटी- बेटा…यहाँ आ…मेरे साथ बैठ…

मैं मजबूर था और आंटी को मना नही कर पाया…और उनके बाजू मे जाकर बैठ गया…

मेरी आँखे अभी भी गुस्से से भरी थी….पर आंटी ने इशारे से कहा कि संजू निकल जाए फिर बात करेगे,…तभी संजू मुझसे बाते करने लगा…

हम बाते करते रहे और कॉफी भी फिनिश कर ली…कॉफी ख़त्म होने के बात संजू रूम मे पढ़ने निकल गया….और आंटी ने पारूल को किचन मे भेज दिया…

आंटी- हाँ अब बोल..

मैं- क्या बोलू…आपने सुना ना…इनको क्या प्राब्लम है…कहें तो मैं पारूल को अपने घर ले जाता हूँ…

आंटी- क्या ये तेरा घर नही…???

मीयन- ऐसा है तो पारूल के साथ ऐसा बिहेव क्यों…???

आंटी- बेटा….उसकी बात को भूल जाओ…हम सब है ना…पारूल को प्यार देने के लिए..

मैं- वो ठीक है आंटी ..पर इनको मैं माफ़ नही करूगा…

आंटी- मैने कब कहा कि माफ़ कर दे….

मैं- तो फिर बताओ की मैं इन्हे कैसे जवाब डू….

आंटी- मेरी बात मानेगा..

मैं- कहिए…

आंटी- तू इसकी गान्ड फाड़ दे..

मैं- आंटी, आप ये ….कैसे….

आंटी- चौंक मत…इसकी गान्ड मार ले…डाल दे अपना तगड़ा हथियार इसकी गान्ड मे…

मैं- ऐसा होगा कैसे…वो क्या रंडी है..जो मैं बुलाऊ और वो आ जाए….

आंटी- नही है तो बना दे ना…

मैं- आंटी..आप ठीक तो है…इतनी तेज औरत है वो….उन्हे ऐसे कैसे पटा लूँ…

आंटी- वो मैं बताती हूँ…

मैं- तो बताओ…

आंटी- यहाँ नही ..मेरे रूम मे चल..

मैं- आंटी…कोई हरकत मत करना…

आंटी- हाँ रे…चल तो सही…

मैं- ओके चलो…

जैसे ही मैं आंटी के साथ उनके रूम मे गया तो आंटी ने रूम को अंदर से लॉक कर दिया….

मैं- आंटी…ये क्या…सब है घर पर….कुछ तो समझा करो…

आंटी- मैं कुछ नही करूगी….टेन्षन मत ले ..मैं संभाल लूगी….

मैं- ओके..अब बोलो..

आंटी मेरी बात ना सुनते हुए बेड पर लेट गई और मुझे अपने उपर खीच लिया…मैं सीधा आंटी के उपर आ गिरा और मेरा सिर उनके बड़े-बड़े बूब्स पर आ गया…

मैं- ओह हो आंटी…आप नही सुधरोगी ना…

आंटी- अरे बेटा लेटने मे क्या प्राब्लम है…अब आराम से बात करते है ना…

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..क्यो नही…अब बोलो…उस साली को कैसे अपनी रंडी बनाऊ…

आंटी- उसके लिए तुम्हे आज रात को मुझे चोदना पड़ेगा,….

मैं- क्या…????

आंटी- मैं सच कह रही हूँ…

मैं- उससे क्या होगा…

आंटी- उससे ये होगा कि वो साली तेरा लंड अपनी चूत मे और गान्ड मे लेगी…अपनी मर्ज़ी से…

मैं- आप पागल हो गई हो ….चेक करवाओ अपना माइंड…

आंटी- अरे बेटा मैं सच कह रही हूँ….

मैं- कैसा सच..आपको चोदने से वो कैसे मान जाएगी…

आंटी- इसके लिए तू मेरी पूरी बात तो सुन....

मैं- तबसे सुन ही तो रहा हूँ और अब मेरा मन ये बूब्स चूसने को कर रहा है…

आंटी- तो चूस ले ना बेटा…और चूस्ते हुए मेरी बात सुन…

मैं- ह्म्म्म..पर बात क्या है…

आंटी.- सब बताती हूँ…पहले तेरी प्यास बुझा दूं….

 


इसके बाद आंटी ने जल्दी से अपनी मॅक्सी को खोल के बूब्स को बाहर किया और ब्रा निकाल दी...जिससे उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सामने आ गये...

मैं- सस्ररुउपप...सस्ररुउपप...आहह....आंटी...अब बोलो...

आंटी-आहह...बेटा..चूस ले....

मैं- अब आप बोलो..मैं चूस्ते हुए सुनता हूँ…

आंटी- ह्म्म..तुझे याद है ना कि तूने उस दिन कहा था कि मेघा को सबक सिखाना है…

मैं- उम्म्म…

आंटी- तो मैने उसे तेरा लंड खिलाने की सोची

मैं- उम्म…

आंटी- इसी लिए मैने उसके मन की बात जानने की सोची…

मैं- आहह…तो क्या पता चला..??

आंटी- तू चूस्ता रह…मैं बताती हूँ…

मैं- उउंम्म…

आंटी- मैने उस दिन से मेघा की सेक्स के बारे मे राय जानने की कोसिस की…और मुझे पता चला कि वो देवेर जी की बीमारी की वजह से सेक्स लाइफ से खुश नही है…वो सेक्स के लिए तरस रही है पर बदनामी के डर से कभी किसी के साथ कुछ नही किया…

मैं- उम्म्म….उउउंम्म..

आंटी- और जब मैने सब जान लिया तो आज उससे खुल के बात की…

मैं- अहहह…..क्या बात की….

आंटी- तू चूस्ता रह बेटा….आअहह..ऐसे ही….

मैं- उउंम्म…

आंटी- आज जब तुम सब एग्ज़ॅम देने गयी थे तो मैने उससे बात की….

( अब आगे की बाते आंटी और मेघा आंटी के बीच की …यहाँ मैं आंटी लोगो को उनके नाम से लिख रहा हूँ..)

रजनी- और मेघा ….आज उदास क्यो दिख रही हो…

मेघा- क्या बताऊ भाभी..आप तो जानती हो…कि इनकी तवियत खराब हुई है तबसे ये रात मे सोते ही रहते है…

रजनी- ओह हो…मेघा ये तो अच्छा नही है…तू देवेर जी से बात तो कर…

मेघा- उनसे क्या कहूँ…मना भी लेती हूँ तो 5-6 धक्के मार कर झड जाते है और दुबारा करने लायक नही रहते और मैं प्यासी रह जाती हूँ…

रजनी- तो तू क्या करती है फिर..???

मेघा- और क्या भाभी…कभी गुस्से मे नहा के ठंडी हो जाती हूँ..और कभी उंगली से…

रजनी- मेघा…ये तो बहुत बुरा हो रहा है तेरे साथ…

मेघा(रोते हुए)- हाँ भाभी…पर मैं क्या करूँ…मेरी किस्मत ही खराब है…ऐसे ही तड़पना लिखा है मेरी किस्मत मे…

रजनी- ऐसा मत बोल मेघा…सब ठीक हो जायगा…

मेघा- कुछ ठीक नही होगा भाभी..डॉक्टर ने कहा है कि इनकी हालत ऐसी ही रहेगी..अब पूरी तरह से ठीक नही हो पाएगे

रजनी- तो तू कुछ और इंतज़ाम कर ले ना..

मेघा- क्या कह रही हो भाभी...हाए राम...मैं ऐसा सोच भी नही सकती....

रजनी- क्यो नही..क्या हम औरतों को अपनी लाइफ मे खुश रहने का हक़ नही है क्या...*???

मेघा- है क्यो नही भाभी...पर पति को धोखा देना....नही- नही..

रजनी- इसे धोखा देना नही बोलते मेघा...तू कहे तो मैं..

मेघा- नही भाभी…मैं बाहर किसी के साथ कुछ नही करना चाहती….बदनाम नही होना

रजनी-मैने कब कहा कि बाहर ....

मेघा- मतलब ..आप कहना क्या चाहती है…

रजनी- देख..अब तुझसे क्या छुपाना…तेरी तरह , मेरी भी हालत थी..

मेघा- मतलब..भाई साब भी आपको खुश नही कर पाते…

रजनी- नही ना..मैं भी 2 साल से तड़प रही थी..पर अब देख मैं कितनी खुश हूँ…

मेघा- हे भगवान..भाभी..आपने ये क्या किया…किसके साथ ...कोई देख लेगा तो बदनामी नही होगी…

रजनी- नही मेघा…मैं बाहर कही कुछ नही करती….वो तो…

मेघा(आँखे बड़ी कर के)- बाहर नही तो…तो क्या भाभी..किसके साथ…

रजनी -तू वादा कर कि किसी को नही कहेगी….

मेघा- ओके भाभी..वादा…पर घर मे हो कौन सकता है…???

रजनी- अंकित

मेघा- क्या....वो ...वो तो बच्चा है..आप...कैसे ....भाभी...बच्चे के साथ...

रजनी- मेघा..वो दिखने मे बच्चा है……पर ऐसी चुदाई करता है कि बड़ी से बड़ी रंडी भी गुलाम हो जाए…

मेघा- पर भाभी..वो आपके बेटे जैसा है…

रजनी- मेघा..जब चूत मे आग लगती है ना ..तो बुजेयेन वाले का लंड दिखता है…रिश्ता नही…

मेघा- पर एक बच्चे के साथ…कैसे..?

रजनी- बोला ना..वो बच्चा..नाम का है..उसका लंड देखना…बड़े-बड़े को पीछे छोड़ देगा…

मेघा- मैं नही मानती…और वो रेडी कैसे हो गया आपके साथ करने को…

रजनी- अरे मेघा..चूत चाहे तो किसी को भी मना ले….फिर ये तो जवान होता लड़का है…

मेघा- ह्म्म..पर आपकी बात मैं नही मान सकती …है तो वो बच्चा ही…

रजनी- अच्छा..तो तू खुंद देख कर बोलना…मैं सही हूँ या ग़लत…

मेघा- ह्म्म्मा..पर कैसे…

रजनी- देख..मैं आज उसे पटा कर चुदवाउन्गी…तब देख लेना…

मेघा- ह्म्म्मा..पर कहाँ..और कब…

रजनी- आज रात मे…और कहाँ……????...हां..गेस्ट रूम मे बुला लूगी...ओके

मेघा- ओके....पर आप उसे मत बताना...

रजनी- ह्म्म..नही बताउन्गी..पर उसका पसंद आया तो लेगी ना…

मेघा- आप भी ना…पहले देखूं तो सही…फिर बताउन्गी….

रजनी -ओके…

 
प्रेज़ेंट मे……

इसके बाद आंटी ने अपनी बात ख़त्म की…मैं जबसे आंटी के बूब्स को बारी- बारी चूस कर बाते सुन रहा था,….

आंटी- अब बता….मैने ठीक किया ना..

मैं- ह्म्म्मा…प्लान तो अच्छा है…पर काम बनेगा क्या..?

आंटी- बिल्कुल बनेगा…साली तेरा लंड देखते ही लार टपका देगी…

मैं- सच मे….

आंटी- हाँ..पर याद रहे…उसे ये ना पता चले कि तुझे कुछ पता है…

मैं- ओके आंटी…..आज रात को उसे ट्रेलर दिखा ही देते है…

आंटी- ह्म्म्मी..अब उठ जा ..मेरी चूत मे आग लग गई है..

मैं- मेरे लंड मे भी ज्वालामुखी फट रहा है…

आंटी- चल फिर बाथरूम मे……

मैं- ह्म्म..जल्दी चलो...

इसके बाद बाथरूम मे जाकर मैने आंटी को कुतिया बना कर चोद दिया और हम दोनो कपड़े ठीक करके बाहर आ गये…

बाहर आते ही मैने देखा कि पारूल हॉल मे टीवी देख रही थी और हमे देख कर मुस्कुरा दी…मैने भी स्माइल दे दी….आंटी भी स्माइल करके किचन मे चली गई…

आंटी ने फिर से कॉफी पिलाई और मैं कॉफी पीकर संजू के रूम मे आ गया....पढ़ाई करने के लिए…..

संजू के रूम मे आ कर मैं लेट गया और आज हुए हादसे के बारे मे सोचने लगा....

मैं नही चाहता था कि मैं उस इंसान के बारे मे या फिर उसके आक्सिडेंट के बारे मे सोचूँ...पर पता नही क्यो, जैसे ही मैं फ्री होता तो मुझे वो सब याद आने लगता....

मुझे ऐसे सोच मे डूबा हुआ देख कर संजू बोला...

संजू - क्या हुआ भाई...क्या सोच रहा है ???

मैं - सीसी...क्क्या....कुछ नही बस एग्ज़ॅम के बारे मे सोच रहा था कि नेक्स्ट पेपर के लिए कितना पढ़ना होगा....

संजू-सच मे...पर मुझे ऐसा लगता है कि तू कुछ टेन्षन मे है.. .

मैं- नही तो...मैं बस वो..पढ़ाई करने का ही सोच रहा था...सच मे...

संजू- अच्छा...नही बताना तो मत बता...पर झूठ मत बोल..ओके

मैं- झूठ...अबे तुझसे क्यो झूठ बोलूँगा...

संजू- देख भाई मैं तुझे अच्छे से जानता हूँ...दोस्त हूँ तेरा ..समझा...

मैं सोचने लगा कि किसी ने सच ही कहा है कि एक दोस्त ही दूसरे दोस्त के दिल को सबसे ज़्यादा समझता है....संजू ने भी बिना कहे मेरे दिल का हाल समझ लिया था...

संजू- क्या हुआ...कुछ पर्सनल बात है क्या...तेरे डॅड ने कुछ कहा...

मैं(मन मे) - संजू को बता दूं..??...पर उस इंसान ने कहा था कि किसी को मत कहना....पर संजू सवाल करता रहेगा...इसे आक्सिडेंट का बता देता हूँ...बाकी नही...ह्म्म

संजू- भाई बोला ना कि मत बता ..पर ऐसे सोच मे डूबा मत रह...

मैं- नही रे ऐसा कुछ नही...चल बताता हूँ पर किसी को बोलना मत...

संजू-बस क्या भाई...आज तक कुछ बोला क्या किसी को...

मैं- ओके...तो सुन...मुझे कल अकरम के घर पार्टी मे एक इंसान मिला था...वो मुझसे कुछ कहना चाहता था ..इसलिए आज मैं उससे मिलने गया था...

संजू- तो उसने ऐसा कुछ कहा कि तुझे टेन्षन हो गई...

मैं - नही रे...वो कुछ कहता उसके पहले एक ट्रक ने उसे उड़ा दिया...

संजू- ओह माइ गॉड. .फिर...

मैं- फिर क्या मैं वहाँ से भाग आया....वो मर गया था...

संजू- ओह...तो इसलिए तू डरा हुआ दिख रहा है..

मैं- डर नही रहा बस सोच रहा हूँ कि कौन हो सकता है वो...

संजू- छोड़ ना यार...जो रहा नही उसका मत सोच...

मैं- पर मैने उसे अपने सामने मरते हुए देखा...तो दिल तो घबरायगा ना...

संजू- ह्म..पर तू डर मत..मैं तेरे साथ हूँ...

मैं - ह्म्म..तू ऐसे ही मेरा साथ देगा ..???

संजू- भाई साथ क्या ...अगर ज़रूरत पड़ी तो तेरी मौत भी मैं ले लूँगा...

संजू की बात सुनकर मुझे उस पर प्यार आया और मैने जा कर उसे गले लगा लिया...

मैं- थॅंक्स भाई..

संजू- साले भाई बोलता है और थॅंक्स भी...

मैं- ओके..नही बोलता ...पर अब एक काम कर...

संजू- बोल ना यार...

मैं- तू मार्केट जा और दारू ले आ..और हाँ आंटी से कहना कि चिकन बनाए...मैने कहा है...

संजू- बस इतनी सी बात...अभी जाता हूँ...पर नेक्स्ट पेपर का पढ़ना भी है साले ..

मैं- अबे कल गॅप है...पढ़ लेना...आज मुझे ज़रूरत है ड्रिंक की....

संजू - ओके ...मैं अभी जाता हूँ...नही तो मोम खाना बनाने लगेगी..

मैं- तो जा ना..किसका वेट कर रहा है...ये ले पैसे...

फिर मैने संजू को पैसे दिए और वो निकल गया ....मैं फिर से बेड पर लेट गया और अब मैने उस इंसान के बारे मे सोचना छोड़ कर मेघा आंटी पर फोकस किया...

मैं मेघा आंटी से बहुत गुस्सा था और कुछ ऐसा प्लान सोचने लगा कि मैं जल्द से जल्द उनको अपने लंड का गुलाम बना लूँ....

मेघा आंटी के मामले मे तो रजनी आंटी ने हेल्प कर दी ..पर मेघा आंटी की दोनो बेटियो का क्या...

अनु और रक्षा.....अनु को तो मैने रंगे हाथ पकड़ा है...वो तो मुझे मिलेगी ही....पर रक्षा के मन मे क्या है...ये पता करना होगा....देखते है...

 


मैं मन मे इस घर की बची हुई चूत को चोदने का प्लान कर रहा था और यहाँ एक चूत रूम के गेट पर खड़ी हुई मुझे देख रही थी.....

जैसे ही मेरा ध्यान गेट की तरफ गया तो मैं चौंक गया....वो इसलिए की जिसके बारे मे आप सोच रहे हो और वो अचानक आपके सामने आ जाए तो ना चाहते हुए भी आप चौंक जाते हो...

मैं- अरे...रक्षा...तू यहाँ....कैसे..?

रक्षा- कुछ नही भैया...बस आपसे बात करनी थी...

मैं- तो अंदर आ ना...वहाँ क्यो खड़ी है ..

रक्षा जल्दी से मेरे पास आकर बैठ गई..

मैं - हाँ अब बोल ..क्या बात है..??

रक्षा- वो भैया...मुझे आपसे पढ़ाई मे कुछ हेल्प चाहिए थी...

मैं- अब क्या हेल्प कर सकता हूँ...मैथ का पेपर तो हो गया....और बाकी सब्जेक्ट अपने अलग-अलग है...

रक्षा- हाँ भैया पर इंग्लीश की ग्रामर तो सेम ही रहती है ना....

मैं- ओह..तो तुम्हे इंग्लीश पढ़ना है...

रक्षा- जी भैया...

मैं- तो इतना डर क्यो रही है...पढ़ा दूगा ..उसमे क्या...

रक्षा- हाँ...पर मेरे साथ किसी और को भी पढ़ना है...

मैं- हाँ पता है...अनु को ना...

रक्षा- नही ..अनु को नही...वो..

मैं- अनु नही तो कौन..???

रक्षा- वो भैया रूबी को

मैं- रूबी....उसमे क्या है...कल बुला लेना...पढ़ा दूगा...

रकाहा- भैया ..वो ..मैने उसे आज ही बुला लिया...

मैं- आज...पर आज टाइम कहाँ है..रात हो गई...उसे कैसे पढ़ा पाउन्गा...उसे घर जाना होगा...

रक्षा- नही भैया...वो रात को मेरे साथ रुकने वाली है...

मैं- ह्म्म तो ठीक है ...ऐसा है तो रात मे पढ़ा दूगा ...

रक्षा- थॅंक्स भैया...मुझे लगा था ..आप गुस्सा होगे...

मैं- इसमे गुस्सा होने की क्या बात है...

रक्षा- वो आपको भी पढ़ाई करनी होगी..और मैने आपसे बिना पूछे रूबी को बुला लिया...इसलिए..

मैं - अरे बेटा...तुम्हारे लिए हमेशा फ्री हूँ...जब भी कुछ काम हो..बोल दिया करो...

रक्षा- सच मे...थॅंक्स भैया ..लव यू...

और रक्षा ने वो किया जो आज तक नही किया था...उसने मुझे थॅंक्स कह कर मेरे गाल पर किस कर दी...

किस करने के बाद मैने उसे देखा तो वो मुस्कुरा रही थी....

रक्षा-ओके भैया..मैं जाती हूँ...रूबी आती ही होगी....

मैं कुछ बोलता उसके पहले रक्षा अपनी कसी हुई गान्ड मटका कर रूम से निकल गई और मुझे फिर से सोचने पर मजबूर कर गई....

मैं(मन मे)- ये रक्षा को क्या हो गया...और आज ये मुझसे इंग्लीश क्यो पढ़ना चाहती है....क्या ये पढ़ने के बहाने मुझे पढ़ा गई...???

और ये किस....इसके माइंड मे चल क्या रहा है....और रूबी क्यो आ रही है....कुछ समझ नही आ रहा....

रक्षा को कुछ करना ही होता तो रूबी को क्यो बुलाती....क्या मैं ग़लत सोच रहा हूँ....सच मे ये दोनो पढ़ने के लिए ही बुला रही है या फिर...

खैर ..सोचने से कोई फ़ायदा नही...जो होगा तो देख लेगे...मुझे तो बस मौका चाहिए कि कब रक्षा की जवानी का रस पी सकूँ....

मैं रक्षा के बारे मे सोच रहा था और मेरे सामने अचानक अनु आ कर खड़ी हो गई...

अनु- भैया आप फ्री है ...???

मैं अनु को उपेर से नीचे तक देखने लगा...और उसकी आँखो पर जाकर मेरी नज़र रुक गई....

अनु- ऐसे क्या देख रहे हो...??

मैं- कुछ जवाब ढूँढ रहा था तुम्हारी आँखो मे...

अनु- जवाब चाहिए तो मुझे पूछो...हर सवाल का जवाब मिल जायगा..

मैने अनु का हाथ पकड़ा और उसे बेड पर बैठा दिया...

अनु- भैया ...मुझे आपसे बात करनी है...

मैं- ह्म्म्मर...मैं अभी भी अनु की आँखो मे देख रहा था...

अनु- भैया...प्ल्ज़्ज़...ऐसे मत देखिए ना

मैं- ह्म्म...क्या कहा...??

अनु- आपका ध्यान कहाँ है...

मैं- वो मैं...कही नही...बोलो...

अनु- मुझे आपसे बात करनी है...

मैं- ह्म्न..मुझे भी...

अनु- जानती हूँ...तो कीजिए ना..

मैं- यहाँ नही...अकेले मे...

अनु- यहाँ हम दोनो ही है...

मैं- नही...अभी कोई भी आ सकता है...मुझे तुमसे बहुत सी बाते करनी है...टाइम लगेगा...

अनु- ओके...पर कब और कहाँ..???

मैं - बताउन्गा...अभी जाओ...

अनु उठ कर जाने लगी पर उठ नही पाई...

अनु- भैया...मेरा हाथ...

मैं- हाथ...ओह्ह...सॉरी...

अनु का हाथ अब तक मेरे हाथ मे था...

अनु- आप कहे तो नही जाती...

मैं- नही..अभी जाओ...

अनु जब जाने लगी तो मैने धीरे से कहा...

मैं- रात मे आओगी...???

अनु मेरी बात सुनकर रुक गई पर पलटी नही....

मैं- कुछ पूछा मैने...

अनु- ह्म्म्मा...

और अनु जल्दी से रूम से निकल गई...

अनु के सामने आते ही मेरी टेन्षन बढ़ गई ...

मेरे पास आज कई काम थे....आंटी को चोदना वो भी मेघा आंटी के सामने...रक्षा को पढ़ाना..रूबी के साथ मे...और अनु से बात करना और साथ मे लंड चुसवाना...

और मैने संजू से ड्रिंक मग़वाई है...वो काम भी तो है....

मेरे पास एक रात है और काम कई सारे....अब रात मे क्या होता है और क्या नही ये देखना है.......

मैं थोड़ी देर तक रात के प्लान के बारे मे डिसाइड करने लगा कि मुझे क्या करना है....तभी संजू वापिस आ गया...

मैं- अबे इतनी जल्दी आ गया...

संजू- अरे जल्दी कहाँ आया...बस लेट नही हुआ....तू अभी तक सोच मे डूबा है...

मैं(मन मे)- अब तुझे क्या बताऊ की तेरी बहनें हरकत ही ऐसी कर रही है कि मैं सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ...

संजू- फिर से सोचने लगा...

मैं- अरे नही ...तू ड्रिंक लाया ना...

संजू- हाँ ना...और चिकन बन रहा है...

मैं- वो छोड़ ...मुझे 1 पेग बना...

संजू- अभी...???...भाई सब जाग रहे है अभी...

मैं- तो क्या हुआ....1 पेग पिउगा बस....अब बना जल्दी से....मेरा मूड ऑफ है अभी...

संजू- ओके...पर कोई आ गया तो...??

मैं- तू बोल देना कि मैं सो रहा हूँ...मैं सोने का नाटक कर लूँगा..अब बना जल्दी...

फिर संजू रूम लॉक किया और 1 पेग बनाया.....

मैने पेग पीते हुए डिसाइड कर लिया कि मुझे आज रात क्या करना है....फिर थोड़ी रेस्ट कर के मैं बाथरूम गया और ब्रश कर लिया...ताकि बदबू ना आए

बाथरूम से आकर मैं संजू के साथ पढ़ाई करने लगा और साथ मे रक्षा का वेट करने लगा...

 
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