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गुलाबी चूत के कई रंग

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Antarvasna, hindi sex stories: मुझे दिल्ली आए हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था दिल्ली में मेरी जॉब लगे हुए अभी सिर्फ दो महीने ही हुए थे लेकिन मैं दिल्ली में अपने आप को एडजेस्ट कर चुका था और सब कुछ ठीक चलने लगा था। दिल्ली में मेरी जॉब मेरे मामा जी ने अपने दोस्त से कहकर लगवाई थी मैं रोहतक का रहने वाला हूं और दिल्ली उससे पहले भी मेरा आना जाना लगा रहता था लेकिन अब मैं दिल्ली में ही जॉब करने लगा था। रविवार के दिन मेरी छुट्टी थी तो सोचा कि अपने मामा जी से मिल आता हूं काफी दिन हो गए थे मैं मामा जी से मिल भी नहीं पाया था। मैंने मामा जी को फोन किया और कहा कि क्या आप घर पर ही हैं तो वह मुझे कहने लगे हां बेटा मैं घर पर ही हूं। मैंने मामा जी से कहा कि मैं आपको मिलने के लिए आ रहा हूं वह मुझे कहने लगे कि हां सुनील बेटा तुम घर पर ही आ जाओ। मैं उस दिन उनके घर पर चला गया मैं घर पर गया तो मैंने मामा जी से पूछा कि आज बंटी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। वह मुझे कहने लगे कि बंटी अपने स्कूल के दोस्तों के साथ कहीं घूमने गया होगा तुम तो जानते ही हो कि आजकल वह कितना बिगड़ चुका है और हमारी बात वह बिल्कुल भी सुनता नहीं है।

मैंने मामा जी को कहा मामा जी अभी उसकी उम्र है तो मामा जी मुझे कहने लगे कि बेटा फिर भी उसे हमारी बात माननी तो चाहिए। मैंने मामा जी को कहा कि मैं भी उससे इस बारे में बात करूंगा वह मुझे कहने लगे कि हां बेटा तुम बंटी को एक बार इस बारे में जरूर समझाना मैंने उन्हें कहा जी मामा जी। हम दोनों बात कर रहे थे कि तभी मामी आ गई मामी ने मुझे कहा कि सुनील बेटा तुम कैसे हो तो मैंने मामी से कहा मैं तो ठीक हूं आप बताइए आप कैसी हैं। वह कहने लगे की बेटा तुम्हें क्या बताऊं मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है। मैंने उनसे कहा कि आखिर क्या हुआ तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके पैरों में बहुत ज्यादा दर्द रहता है और कई डॉक्टर से दिखाने के बाद भी अभी तक कोई आराम नहीं मिल पाया है। मामा जी और मैं अब बात करने लगे मामा जी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम्हारी नौकरी तो ठीक चल रही है मैंने उन्हें कहा जी मामा मेरी नौकरी तो अच्छी चल रही है।

उन्होंने मुझे कहा कि बेटा क्या तुम इस बीच रोहतक भी जाने वाले हो तो मैंने उन्हें कहा मामा जी मैं जल्द ही रोहतक जाने के बारे में सोच रहा हूं काफी दिन हो गए हैं मां और पापा से अभी तक मिल नहीं पाया हूं। मामा जी मुझे कहने लगे कि ठीक है अगर तुम रोहतक जाओ तो मुझसे मिलते हुए जाना मैंने उन्हें कहा ठीक है। उस दिन मैं उनके घर पर ही रुका और अगले दिन मामा जी के घर से ही मैं अपने ऑफिस चला गया और उसके बाद जब मैं वापस शाम के वक्त अपने घर लौटा तो मेरी मां से मैंने उस दिन काफी देर तक बात की उन्होंने मुझे कहा कि सुनील बेटा तुम कुछ दिनों के लिए घर आ जाओ। मैंने मां से कहा मां बस मैंने अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया है जैसे ही मुझे छुट्टी मिल जाएगी मैं कुछ दिनों के लिए घर आ जाऊंगा मां कहने लगी कि ठीक है बेटा मैंने उस दिन मां से करीब आधे घंटे तक बात की। पापा सरकारी स्कूल में क्लर्क हैं और वह बड़े ही अच्छे हैं उन्होंने मुझे कभी भी किसी भी चीज के लिए मना नहीं किया। मैंने भी जल्दी घर जाने का फैसला कर लिया था और मैं जब अपने घर रोहतक जा रहा था तो उस दौरान जिस बस में मैं जा रहा था मेरे सामने वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी। काफी देर तक तो मैंने उससे बात नहीं की और उसने भी मुझसे बात नहीं की लेकिन जब मुझे लगा कि मुझे उससे बात करनी चाहिए तो मैंने उससे बात की और अपना परिचय उसे दिया। उसने भी मुझे अपना नाम बताया और कहा मेरा नाम शालिनी है मैंने शालिनी से कहा कि क्या आप रोहतक में रहती है तो वह मुझे कहने लगी कि हां मैं रोहतक में ही रहती हूं, शालिनी से मेरी ज्यादा बात नहीं हुई। हम लोग रोहतक पहुंच चुके थे रोहतक पहुंचने के बाद मैं अपने घर चला गया मैं जब अपने घर पहुंचा तो मेरे मम्मी पापा बड़े खुश थे इतने समय बाद मैं उन लोगों से मिल रहा था तो वह लोग कहने लगे कि सुनील बेटा हमें तुम्हारी बड़ी याद आती है और एक तुम हो कि जब से दिल्ली गए हो तब से घर ही नहीं आये। मैंने उन्हें कहा कि आप तो जानते ही हैं कि जब से मुझे नौकरी मिली है उसके बाद मैंने पहली बार ही तो छुट्टी ली है मुझे भी आप लोगों की बड़ी याद आती थी लेकिन मेरी मजबूरी है।

मां ने मुझे कहा बेटा तुम अपना सामान अपने कमरे में रख दो तो मैंने मां से कहा हां मां मैं अपना सामान अपने कमरे में रख देता हूँ। उस दिन मैं घर पर ही था मैं अगले दिन अपने दोस्तों से मिलने गया मैं जब अपने दोस्तो से मिला तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं अपने दोस्तो से मिलकर अपने घर लौट रहा था तो घर लौटते वक्त मैंने रास्ते में देखा कि शालिनी मेरे दोस्त अजय के साथ आ रही थी। मैंने अजय को देखते हुए अपनी मोटरसाइकिल रोकी और अजय से कहा कि अजय तुम कहां से आ रहे हो तो अजय मुझे कहने लगा कि मैं अपने किसी रिश्तेदार के घर गया हुआ था वहीं से हम लोग लौट रहे थे। अजय ने मुझे जब शालिनी से मिलवाया अजय कहने लगा कि यह मेरी बहन है मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया। शालिनी ने कहा कि हम लोगों की मुलाकात कल ही तो हुई थी कल ही हम लोग बस में एक साथ आ रहे थे। मैं और अजय कुछ देर तक बात करते रहे फिर वह लोग भी चले गए लेकिन शालिनी से मेरी मुलाकात हो चुकी थी तो शालिनी से मैं बातें करने लगा था मुझे शालिनी से बातें करना अब अच्छा लगने लगा था। शालिनी का नंबर मुझे मिल चुका था इसलिए हम दोनों की बातें होने लगी थी।

कुछ ही दिनों में मै दिल्ली आ चुका था और शालिनी अभी भी रोहतक में हीं थी वह अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही है शालिनी और मैं एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। शालिनी ने एक दिन मुझे फोन किया और वह मुझसे बात करने लगी तो मैंने उसे कहा कि शालिनी क्या तुम्हारे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो चुके हैं तो वह मुझे कहने लगी हां मेरे एग्जाम तो खत्म हो चुके हैं। मैंने शालिनी को कहा अब तुमने क्या सोचा है तो वह कहने लगी कि मैं अब जॉब के लिए ट्राई कर रही हूं। मैंने शालिनी को कहा कि मैं तुम्हारे लिए यहीं दिल्ली में कोई नौकरी देख लूं तो क्या तुम यहां जॉब करोगी तो वह कहने लगी की हां क्यों नहीं। मैंने भी अब शालिनी के लिए दिल्ली में नौकरी की बात कर ली थी वह भी अब दिल्ली जॉब करने के लिए आ गई थी। मैं बहुत खुश था कि हम दोनों की मुलाकात होती रहती थी और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे। मुझे और शालिनी को रोज मिलना एक दूसरे से अच्छा लगने लगा जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हम दोनों बहुत ही खुश हो जाते। एक दिन शालिनी मुझसे मिलने के लिए घर पर आई हुई थी मैं और शालिनी साथ में बैठे हुए थे। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे लेकिन उस दिन हम दोनों के अंदर एक अलग ही करंट सा जागने लगा जब मैंने शालिनी के हाथों को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा तो वह मुझे कहने लगी सुनील यह सब ठीक नहीं है। शालिनी का गदराया हुआ बदन मेरी बाहों में आ चुका था मैं उसके स्तनों को महसूस करने लगा। मैं उसके बदन को दबाने लगा मुझे उसके स्तनों को दबाने में मजा आने लगा मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसा तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और उसके अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। उसने मुझे कहा मेरी गर्मी बहुत बढ चुकी है। मैंने उसके बदन से कपड़े उतारे जब मैंने उसके बदन से कपड़े उतारकर उसे अपने सामने नंगा कर दिया तो वह मेरे सामने शर्माने लगी।

वह मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी उसका गोरा बदन चमक रहा था जैसे कि वह दूध से नहाती हो। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और उसे भी बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था। हम दोनों के अंदर की गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी जब मैंने शालिनी की गुलाबी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे अब मत तड़पाओ मै बिल्कुल नहीं रह पाऊंगी। वह अपने पैरों को आपस में मिलाने लगी जिससे कि मुझे भी महसूस होने लगा कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही है और हम दोनों के अंदर की गर्मी अब इस कदर बढ़ गई कि हम दोनों रह नहीं पाए। मैंने जब शालिनी से कहा मैं तुम्हारी चूत मे अपने लंड को घुसेड देता हूं मैंने जैसे ही शालिनी की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी आज मुझे मजा आ गया।

अब मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ गया था क्योंकि उसकी योनि से जिस प्रकार से खून बाहर की तरफ निकाल रहा था उससे मेरी गर्मी और भी ज्यादा बढ़ रही थी। मेरे अंदर की गर्मी अब इस कदर बढ़ गई कि मैं बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा था मैं उसे इतनी तीव्र गति से चोद रहा था कि मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर लंड को इतनी तेजी से करना शुरू कर दिया कि मेरा लंड पूरी तरीके से छिलकर बेहाल हो चुका था लेकिन मुझे मजा आ रहा था। शालिनी की चूत मारने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसको भी बहुत आनंद आ रहा था। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही चोदते जाओ मैं उसे जोरदार तरीके से धक्के मार रहा था जिस तेज गति से मैं उसे चोद रहा था उस से उसका शरीर पूरी तरीके से हिल रहा था और मेरे शरीर से अब इतना ज्यादा पसीना छूटने लगा था कि मुझे महसूस होने लगा था मैं उसकी चूत की गर्मी को झेल नहीं पा रहा हूं और ना ही शालिनी मेरे लंड की गर्मी को झेल नही पा रही थी। मैंने शालिनी की चूत में जब अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी सुनील आई लव यू। जब मैंने उसे चोदकर उसकी चूत की गर्मी को मिटा दिया तो उसने मुझे आई लव यू कहा और मुझे अपना दीवाना बना लिया।
 
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