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गर्मी की छुट्टियाँ ---(इन्सेस्ट)

मीना

छोटी मालकिन, आपको और छोटे मालिक को और बड़ी मालकिन नीचे खाने पर बुला रही है

सीमा

जी मुझे पता है, मे भाई को उठाने आई थी , हम अभी आते है

सीमा का जवाब सुनकर मीना वापस चली गई, और सीमा की सांस मे सांस आई.

उसने फिर सामने बाथरूम मे अपने चेहरे को पानी से धोया और एक बार और सूरज के कमरे की ओर बढ़ गई, इसबार उसे सचमुच उठाने के लिए. सीमा ने दरवाज़े पर दस्तक दी जैसे पहली बार कमरे मे आई हो.

सूरज--कोंन?

(अंजान बनते हुए)

सीमा-

भाई मे हू, उठ जाओ नानी खाने के लिए पूछ रही है, क्या मे अंदर आ जाऊं?

(बड़ी भोली बनकर पूछा)

जब सीमा बाहर गई थी तब तक सूरज ने अपने कपड़े पहन लिए थे, तो उसने सीमा को अंदर आने की पर्मिशन दे दी.

सीमा रूम के अंदर आ गई, और अंदर आते ही सबसे पहले उसकी नज़र सूरज के बमप्लास्ट लौडे पर गई जो अब उसने लोवर से ढक लिया था, जिसे देखकर सीमा के चेहरे पर एक मायूसी छा गई, उसकी इस मायूसी को सूरज ने भी ताड़ लिया, और उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैर गई.

सूरज

अरे सीमा इतनी मायूस क्यू लग रही है?

सीमा ने अपना ध्यान सूरज के लौडे से हटा कर उसके चेहरे की ओर किया.

सीमा

कुछ नही भाई, बस यही सोच रही थी की आपको मेरी वजह से कितनी तकलीफ़ हुई

ये सब बोलते हुए उसके चेहरे पर एक मंद सी मुस्कान थी. सूरज भी उस मुस्कान को भली- भाँती समझ रहा था.

सूरज

अरे कोई बात नही, तू तो मेरी लाडली बहन है तू मुझे तकलीफ़ नही मज़े दे सकती है.

सूरज की बात सुनकर सीमा ने शक्की निगाहो से उसकी ओर देखा.

सीमा

क्या मतलब भाई?

सूरज

अरे मतलब है की मेरी इतनी प्यारी चुलबुली बहन जब मेरे पास होती है तो मुझे सिर्फ़ मज़ा आता है, तकलीफ़ नही होती

(ये बोलते हुए उसकी निगाहै सीमा के मम्मो की ओर थी)

सीमा ने भी सूरज की नज़रे ताड़ ली, और उसके होंठो पर भी एक कुटिल मुस्कान तैर गई, और उसने सूरज को टीज़ करने के लिए अपने मोटे मम्मे थोड़ा आगे कर दिए अंगड़ाई लेने के पोज़ मे.

सीमा

हा ये तो तुमने सही बोला भाई, मुझे भी अपने प्यारे भाई के साथ बहुत मज़ा आते है

(उसकी नज़रे ये बोलते हुए सूरज के लंड पर थी)

सूरज ने भी उसकी नज़रों का इशारा भाप लिया, और फिर अंजान बनते हुए सीमा के सामने ही अपने टट्टो को लोअर के ऊपर से खुज़ला दिया, सीमा सूरज की ऐसी हरकत देखकर चोंक गई, पर ना जाने उसे इस बात से कोई ऐतराज नही हुआ.

सीमा

भाई मे भी कितनी बेवकूफ़ हू, इन सब चीज़ो मे आपकी पीठ का हाल तो पूछना भूल गई, अब आपकी पीठ कैसी है?

सूरज

मीना की मालिश से काफ़ी आराम है.

सीमा

(मन मे)

हा ऐसी मदमस्त मालिश से किसे आराम नही होगा.

(और हल्का सा मुस्कुरा दी)

ये तो बहुत अच्छी बात है, फिर खाने का क्या प्रोग्राम है, तुम्हारा खाना यही ले आओ या नीचे करोगे.

सूरज बेड से खड़ा हुआ.

सूरज

अब हालत ठीक लग रही है तो नीचे चल सकता हू.

सीमा

गुड तो फिर चले.

सूरज ने हामी मे गर्दन हिला दी, और सीमा वापस मूड गई और दरवाज़े की ओर बढ़ गई, दरवाज़े पे पहुँच कर उसे एक शरारत सूझी, उसे यकीन था की जैसे सूरज कुछ वक़्त पहले उसके मम्मो को घूर रहा था इस वक़्त भी वो उसकी मोटी गान्ड ताड़ रहा होगा, तो उसने अपना दांया हाथ पीछे लेजा कर अपनी गान्ड खुज़ला दी वो भी काफ़ी गहरी, और गेट खोल कर बाहर आ गई.

सूरज जो की सीमा के पीछे चल रहा था, सीमा की ऐसी हरकत देख कर दंग रह गया, उसे उम्मीद नही थी की सीमा इतना डेरिंग काम कर जाए गी, उसने आज तक सीमा को एक किताबी कीड़ा ही समझा था, उसे कभी नही लगा था की सीमा इतनी फॉर्वर्ड होगी, पर आज की उसकी हरकतो ने सूरज के दिमाग़ मे सीमा की छवि को चेंज कर दिया था, जो उसके ठर्की दिमाग़ को बेहद पसंद आ रहा था, उसने डिसाइड कर लिया की अब वो टेस्ट करेगा सीमा कहाँ तक पुश करती है.

टू बी कंटिन्यूड...
 
अब आगे -

सूरज और सीमा दोनो नीचे डिन्नर के लिए आ गये.

नानी-

सूरज बेटा अब पीठ का दर्द कैसा है

सूरज-

अब काफ़ी आराम है नानी जी, सुबह तक ठीक हो जाएगा

नाना-

ये तो बहुत अच्छी बात है, तुम्हारे पापा-मम्मी का भी फोन आया था, वो लोग भी क्र्यूज़ शिप पर सही है पहुँच गये, डिन्नर के बाद उसने बात कर लेना

सूरज ने हामी मे गर्दन हिला दी, फिर सबने चुप- चाप खाना खाया

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सूरज लेटा हुआ दिन भर की घटनाओ पर गोर कर रहा था, जैसे-जैसे वो चीज़ों को समझने की कोशिश कर रहा था, चीज़े तो समझ आई नही पर ठरक पूरी चढ़ गइ .

दिन भर की घटनाओ को सोचते-सोचते उसका लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया, जिसे उसने एक बार और मूठ मार कर शांत कर दिया, और फिर धीरे से दिन भर की थकान के कारण वो सो गया.

रात के किसी पहर उसकी नींद एक जोरदार बिजली की कड़कड़आहत से टूटी, होश संभाला तो पाया बाहर जोरदार बारिश हो रही थी, बिजली का रीज़न जानकार वो वापस सोने की तैयारी मे था की उसके गेट का किसी ने दस्तक दी.

सूरज ने जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने सीमा खड़ी थी हल्की सहमी हुई.

सूरज=

सीमा क्या हुआ डरी हुई सी क्यू है?

सीमा ने कुछ ना बोला और सूरज के गले लग गइ .

सीमा-

भाई बहुत ज़ोर से बिजली कड़क रही है मुझे डर लगता है इससे

(सहमी आवाज़ मे बोली)

सूरज को भी इस बात का पता था की सीमा को बिजली की आवाज़ से बेहद डर लगता है.

सूरज-

कोई नही तू कुछ देर इधर ही रुक जा

सूरज की बात सुनकर सीमा उसके बेड पर जा बैठी. सूरज भी गेट बंद करके बेड पर आ गया.

सूरज-

तू लेट जा आराम से मे हू यहाँ डरने की कोई बात नही

सीमा सूरज का आश्वासन पाकर बेड पर लेट गइ , सूरज भी दूसरी और लेट गया, लेटे लेटे दोनो को कब नींद ने जकड लिया.

रात को किसी वक़्त सूरज की आँख अपने ऊपर से चादर हटने से खुली, उसने देखा की उसकी चादर सीमा अपने ऊपर ओढ़ ली थी, नींद मे होने के कारण से उसने अपने और सीमा के बीच का गॅप कम किया और सीमा से लिपट-ता हुआ चादर अपने ऊपर ओढ़ ली.

……………………….

सुबह सूरज की किरणों के कारण सूरज की आँख खुली, तो सबसे पहला अहसास उसे अपने मोटे लौडे पर कुछ गरम चीज़ का हुआ. उसने नीचे देखा तो उसका लोडा और अकड़ गया, क्यूकी उस पर सीमा की मोटी ताज़ी गान्ड कस के दबी हुई थी.

इस सीन से सूरज की नींद एकदम रफू चक्कर हो गइ और उसका ठर्की दिमाग़ लंड से कॉर्डीनेट करने लगा. उसने एक बार सीमा की ओर देखा तो उसे सोता पाया, फिर सूरज ने बेहद धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की जिससे उसका बमप्लास्ट लंड सीमा के चुतड़ों की दीवार मे रगड़ खाने लगा. कुछ देर ऐसी ही घिसाई के बाद सूरज ने धीरे से अपना बिना अंडरवेर वाला लोवर नीचे कर दिया, और उसका विकराल नाग आज़ाद हो गया, फिर से सूरज ने अपना लंड सीमा के चुतड़ों की दीवार मे रख दिया, पर अब क्यूकी उसका लंड नंगा था तो उसे समझते देर ना लगी की उसकी लाडली बहन भी लोवर के नीचे नंगी है.

ये पता चलते ही सूरज का लौडा और बड़ा हो गया और उसकी रगड़ाई ने दम पकड़ लिया, वो काफ़ी ज़ोर से घस्से मार रहा था, अब ये किस्से कहानियो मे होता है की लड़की की गान्ड पर लोडा रगड़ा जाए और उसे पता ना चले असलियत मे नही, इसलिए सूरज की लंड रगड़ाई से सीमा की आँख खुल गई और उसे समझते देर ना लगी की उसकी मोटी तनदुरुस्त गान्ड के साथ क्या सुलूक हो रहा है.

पहले तो उसे हैरानी हुई ऐतराज नही, पर जब सूरज ने दो तीन करारे धक्के दे मारे उसकी हैरानी भी दब ती चली गई, और उसकी सेक्स ड्राइव जो की काफ़ी ज़्यादा थी उसने ज़ोर मारना शुरू कर दिया और उसे भी उस लंड रगड़ाई मे मज़ा आने लगा.

इधर सूरज का माल छूटने वाला था की सीमा ने बेखयाली मे अपनी गान्ड पीछे को करके सूरज ने लंड पर दबा दी, बस इस दबावत ने सूरज की आँखे चौड़ी कर दी और साथ ही उसका माल लंड से बह चला, वो हैरानी ने माल बहाता हुआ सीमा की ओर देख रहा था, ठीक उसी वक़्त सीमा ने भी वासना के वेग मे गर्दन मोड़ कर सूरज की ओर देखा.

दोनो की नज़रे टकराई, जहाँ सूरज के चेहरे पर माल छूटने का सुखद अहसास वही सीमा के चेहरे पर वासना पूर्ण मुस्कान, सूरज एक सांस सीमा की आँखो मे घूरते हुए माल त्याग कर रहा था, वही सीमा भी बुत बनी हुई उसकी आँखो मे एक टक देख रही थी. जैसी ही सूरज ने माल का आख़िरी कतरा छोड़ा ठीक उसी वक़्त सीमा की मुनिया ने भी रस छोड़ ना शुरू कर दिया और उस सुखद अहसास से उसकी आँखे आधी बंद आधी खुली रह गइ , और होंठ सुख गये जिनको गीला करने के लिए उसने अपने जीभ पर होंठ फिराया.

ये नज़ारा देख कर सूरज का ढीला पड़ा लंड भी ज़ोर मारा. जब दोनो भाई-बहन के ऊपर से काम का वेग निकल गया तो दोनो को स्थिति का अहसास हुआ, सीमा तुरंत उठ कर बाहर की ओर भागी, पर बेड से खड़े होते हुए सूरज के लंड को ताड़ना नही भूली, सूरज भी जब वो गेट खोलकर बाहर जा रही थी तो उसकी मोटी थिरकती गान्ड पर पड़े अपने माल को देखना नही भुला.

सीमा सूरज के कमरे से सीधा अपने कमरे मे जाकर बेड पर पड़ गई, इधर सूरज कुछ सोच मे डूबा था उधर सीमा अब तो ये आने वाला वक़्त ही बताएगा दोनो क्या सोच रहे थे. क्या ये सिचुयेशन उनके जीवन को कोई नया मोड़ देगी या एक दुर्घटना बन कर रह जाएगी.

टू बी कंटिन्यूड...
 
रीकॅप -

सीमा सूरज के कमरे से सीधा अपने कमरे मे जाकर बेड पर पड़ गई, इधर सूरज कुछ सोच मे डूबा था उधर सीमा अब तो ये आने वाला वक़्त ही बताएगा दोनो क्या सोच रहे थे. क्या ये सिचुयेशन उनके जीवन को कोई नया मोड़ देगी या एक दुर्घटना बन कर रह जाएगी.

अब आगे -

इंत. डाइनिंग रूम - मॉर्निंग

सीमा और सूरज, नाना-नानी के साथ बैठे ब्रेकफास्ट कर रहे थे. दोनो ऊपर से तो बिल्कुल शांत लग रहे थे लेकिन अंदर तूफान उठा हुआ था सुबह की घटना को लेकर.

एक और सूरज का लंड हल्की-हल्की अकड़न महसूस कर रहा था, वही सीमा की चूत मे भी चीटियाँ सी चल रही थी, सूरज चॉक निगाहो से सीमा की ओर देखता तो उसे प्लेट मे ताकते हुए पता, जब सूरज प्लेट मे देखता तो सीमा भी उसकी ओर देखती. काफ़ी टाइम दोनो का सिंकरनाइज़ेशन ठीक नही चल रहा था, पर एक बार दोनो का कोर्डिनेशन सटीक बैठ गया, और नज़रे आपस मे मिल गइ और सीमा की हल्की मुस्की निकल गई.

सीमा की मुस्कान का मतलब सूरज ने उसकी गेर नाराज़गी लगाया, और उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैर गइ , फिर जैसे दोनो की नज़रे मिली थी वैसे की निगाहै अल हेदा हुई.

……………………….,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मॉर्निंग - लेटर

दोनो भाई बहन नानी नानी के साथ आँगन मे बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे खाट पर आमने-सामने. दोनो आज कुछ ज़्यादा नही बोल रहे थे क्यूकी उनके दिमाग़ मे अपनी ही पिक्चर चालू थी.

नानी

सूरज बेटा पीठ का दर्द कैसा है?

सूरज

अब ठीक से नानी जी

फिर उन लोगो के बीच वैसी ही बाते होने लगी रोज़ मॅरा वाली. थोड़ी देर बाद नाना नानी के पास आस पड़ोस के आदमी आकर बैठ गये, जिसके चलते सूरज घर के बाहर निकल आया, उसे भी समझ नही आ रहा था की किधर जाए, तो उसने अपने कदम एक बार और खेतो की बढ़ा लिए.

अभी वो खेत की पगडंडी की ओर बढ़ा ही था की

सीमा

भाई रूको मे भी चलूंगी

पीछे से सीमा ने उसे पुकारा.

सीमा की पुकार सुनकर वो पीछे मुड़ा तो उसकी नज़र सीधा उसके मम्मो पर पड़ी, आज सीमा ने टाइट स्लेवालेएशस टॉप पहना है था जिसमे उसके मोटे मम्मे ऊपर नीचे हिल रहे थे.

सूरज ने जब अपनी नज़र ऊपर उसके चेहरे की ओर उठाई तो सीमा को अपनी और देखते हुए पाया, उसके होते पर एक दबी सी मुस्कान थी, उसकी मुस्कान को देखकर सूरज भी मुस्कुरा पड़ा.

सूरज

कहाँ चलेगी?

(जब सीमा पास आ गई तो पूछा)

सीमा

कही भी घर मे काफ़ी बोरियत हो रहीहै

सूरज ने कोई जवाब नही दिया और पगडंडी की ओर बढ़ गया.

सीमा

भाई रूको मे आगे चलती हू, अगर मे गिर गई तो तुम मुझे संभाल लोगे. है ना?

(सूरज की ओर कुटिल मुस्कान बिखेरती हुई बोली)

सूरज ने हा मे गर्दन हिला दी और सीमा अपनी गान्ड थिरकते हुए सूरज के आगे चलने लगी, सूरज की हालत सीमा की गान्ड की मटकं से बेहद नाज़ुक हो चली थी, उसका ठर्की दिमाग़ उसे बार-बार उकसा रहा था सीमा को पटक-के चोद ने को, पर एक भाई का ज़मीर उसके ठर्की पन को रोक रहा था.

दोनो भाई बहन चलते हुए खेतो मे काफ़ी अंदर तक आ गये.

सीमा

भाई मे तो थक गई

और झुक कर अपने घुटनो पर हाथ रख लिए, जिससे उसकी मोटी तनदुरुस्त गान्ड टाइट लोवर मे ऊपर उठ आई.

सूरज जो की सीमा के पीछे था उसकी नज़र सीधा सीमा की मोटी गान्ड पर गई, और उसकी “आह” निकल गई. सीमा अभी भी वोही पोज़ी धारण किए हुई थी, पर उसकी नज़रे पीछे सूरज को देख रही थी उसका रिक्षन देखने को, जब उसे सूरज का कामुक रिक्षन दिखा तो उसकी हसी छुट गई, उस मध्यम हसी तो सूरज ने भी सुन लिया जिससे सूरज की नज़र अपनी लाडली छोटी बहन के चेहरे पर गई जो अब उसके अंगड़ाई लेते लौडे को देख रही थी.

सूरज भी पुराना चुदक्कड था उसने 1 पल मे समझ लिए सीमा के चेहरे पर आए वासना मई भाव, सूरज जो कल तक सीमा के चेंज्ड बिहैवियर की गुत्थी सुलझाने मे लगा था, उसने सीमा के चेहरे बे भाव और उसकी मुस्कान को देख कर अंदाज़ा लगा लिया की उसकी लाडली बहन जानबुज कर उसके साथ ऐसा कर रही है.
 
काएदे से तो उसे इसका रीज़न जानना चाहिए था, पर जब एक जवान लड़के तो चूत का भूत चढ़ा हो तो तर्क बहुत पीछे छुट जाते है, और इसी तर्क के पीछे छूटने वाले तर्क को तर्क मानते हुए सूरज ने सीमा के उस खेल मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की सोची.

और खेल का आगाज़ उसने सीमा की गान्ड को बावले कुत्ते की तरह घूरते हुए लोडा मसलने से करी. सूरज को यू खुले आम अपनी गान्ड ताड़ते हुए लोडा मसलते देख सीमा की जिस्म मे मीठी खुज़ली सी उठी, और सूरज के इस वर का जवाब सीमा बड़े वर से देने का फ़ैसला किया.

सीमा

भाई देखना मेरे पीछे कुछ है तो नही

(यूही झुके हुए उसने पूछा)

सूरज भी उसकी शरारत भली भाँति समझ रहा था, तो वो भी दो कदम आगे बढ़ कर सीमा के एकदम नज़दीक आ गया. अब सीमा की मोटी गान्ड और सूरज के बमप्लास्ट लौडे मे मात्र कुछ फासला रह गया था.

सूरज

किस जगह?

सीमा मे अपना हाथ पीछे ले जाते हुए उंगली के इशारे से अपनी मोटी गान्ड के दाएँ खरबूज़े की ओर इशारा किया.

सीमा

यहा

सूरज तो उसकी उसकी गान्ड काफ़ी देर से उस टाइट लोवर मे ताड़ रहा था, तो उसे भली भाँति पता था की सीमा नौटंकी कर रही है.

सूरज

कहाँ मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा

(ड्रामा खेलते हुए बोला)

सूरज के जवाब पर सीमा ने डेरिंग करते हुए अपनी उंगली अपनी मोटी ताज़ी गान्ड के दाएँ चूतड़ के एक हिस्से पर रख दी.

सीमा

भाई यहा, देखो न ध्यान से.

सूरज भी पूरी शरारत मे था, वो भी आगे की ओर झुक कर, झुकी हुई सीमा की गान्ड के दाएँ चूतड़ को करीब से देखने लगा.

अब सिचुयेशन यू थी की, सीमा खेतो के बीच पगडंडी पर अपने हाथ अपने घुटनो पर रख कर अपनी मोटी गान्ड हवा मे उठाए खड़ी थी, और उसकी एक उंगली अपनी ही गान्ड के एक हिस्से को छू रही थी, और उसका भाई का चेहरा उसकी उठी हुई गान्ड के बेहद करीब था.

सूरज

यहाँ तो मुझे कुछ नही दिख रहा?

(शरारत से बोला)

सीमा

होगा ना भाई ज़रा ध्यान से देखो

(वो भी शरारत पर उतर आई थी)

सूरज

अच्छा रुक मे थोड़ा नीचे देखता हू

ये बोलकर सूरज ने अपना चेहरा थोड़ा नीचे कर लिया, जिससे उसकी निगाहै सीधा सीमा की चूत के सामने थी, और उसे सबसे पहले दिखा टाइट लोवर मे फूली हुई फुददी जिसके चारो और गीला हो रखा था. सूरज के अनुभवी दिमाग़ ने तुरंत ताड़ लिया की उसकी लाडली छोटी बहन आज भी बिना पैंटी के अपने चूतड़ मटकाने आई है.

जब कुछ देर तक सूरज की ओर से कोई जवाब नही आया, तो सीमा ने अपने मुड़े हुए पैरो से बीच से देखा तो अपने भाई को अपनी बिना पैंटी वाली चूत को देखते पाया. जिसकी वजह से उसके चेहरे पर एक हरामी सी मुस्कान आ गई, सूरज जो बेहद गोर से अपनी जवान बहन की चूत घूर रहा था, कुछ पल के लिए जब उसने सामने देखा तो उसकी नज़र अपने पैरो के बीच से झांकती हुई सीमा की नज़रो से मिली और उसके चेहरे पर भी सीमा के जैसे की मुस्कान आ गई.

सूरज फिर सीधा खड़ा हो गया.

सूरज

यहाँ कुछ नही से तुझे वहम हुआ होगा.

सीमा

नही भाई कुछ था उसने मुझे पीछे काटा

(उसी शरारती मुस्कान के साथ बोली)

अभी सूरज कुछ आगे बोलता उससे पहले ही सीमा की ‘ऊउच’ की आवाज़ आई, और उसी के साथ सीमा ने अपने दाएँ हाथ से “चटाक़” एक तेज़ चटा अपने ही चुड्तो पे जड़ दिया, जिससे उसके मोटे गोस्त से भरे हुए चूतड़ जेल्ली के जैसे हिलने लगे.

ऐसा नज़ारा देखकर सूरज की सिट्टी पिटी गुप हो गइ .

सीमा

भाई मेने बोला था ना कुछ था, अब मेने उसे मार दिया अब सब सही है

(कुटिल मुस्कान के साथ सूरज की ओर देखते हुए वो बोली)

अपनी गान्ड पे कड़क चपत लगाने और अपनी जीत पर खुश होती हुई सीमा आगे बढ़ गई, और छोड़ गई सूरज के ठर्की दिमाग़ मे अपने लिए बेहद ठरक.

सीमा आगे आगे गान्ड मटकाती चली जा रही थी, सूरज पीछे पीछे गान्ड ताड़ते हुए, क्यूकी गर्मियो के दिन थे तो सूरज(सन) सर पे चढ़ आया था, इस गर्मी से सीमा का जिस्म पसीने से लतपथ हो गया था, तभी उसे सामने एक ट्यूब वेल दिखाई दी.

सीमा

भाई देखो ना ट्यूब वेल, चलो ना उधर चलते है

(मिन्नत सी की उसने)

अब भला सूरज अपनी लाडली बन्नो की बात कैसे टाल सकता था तो वो भी राज़ी हो गया.
 
दोनो भाई बहन ट्यूब वेल के पास आ गये, और सीमा छोटे बच्चों के जैसे पानी से खेलने लगी. सूरज भी पास के मुंडेर पर बैठ गया और पानी से खेलती अपनी जवान बहन की जवानी ताड़ने लगा.

सीमा

भाई मुझे तो बहुत गर्मी लग रही है और तुम भी पसीनो से भीग गये हो चलो नहाते है ना.

सूरज

वो तो ठीक है पर नहाने के लिए हमारे पास कपड़े कहाँ है, पहले चल के कपड़े ले आते है.

सीमा

अरे भाई कपड़ो की क्या ज़रूरत है नहाने के लिए, हम ये कपड़े निकाल देंगे और फिर वापस यही पहन लेंगे

(एक कुटिल मुस्कान के साथ बोली)

सीमा का सुझाव सुनते ही सूरज का लंड गनगना गया, और उसे भी सीमा का सुझाव अच्छा लगा, पर उसने ऐसा कुछ जताया नही, वो देखना चाहता था की आख़िर सीमा के दिमाग़ मे क्या चल रहा है.

सूरज

लेकिन हम दोनो बिना कपड़ो के, मेरा मतलब है

सीमा

ओफो भाई, आप तो लड़कियो के जैसे शर्मा रहे हो, जब मे लड़की होकर नही शर्मा रही तो आप क्यू?

वो कुटिल मुस्कान कायम रखते हुए सीमा बोली.

सूरज

ओक, लेकिन हम दोनो एक दूसरे के सामने कपड़े कैसे निकलेंगे ?

सीमा

मुझे तो कोई प्राब्लम नही आपके सामने कपड़े निकालने मे, आपको है क्या

सीमा की बात सुनकर सूरज ने ठर्की आँखो से उसकी ओर देखा, उसके चेहरे उस वक़्त वासना मे लाल हो चुका था. जब सीमा ने सूरज को कुछ बोलते नही देखा तो वो हँसने लगी.

सीमा

हिहीही...भाई अपना चेहरा तो देखो

(हँसते हुए बोली)

कोई नही अगर तुम को मुझसे शरम आ रही है तो उसका भी आइडिया है मेरे पास, आप दूसरी और मूह कर लेना मे कपड़े निकाल कर ट्यूब वेल मे चली जाउन्गी, फिर मे दूसरी और चेहरा कर लूँगी तो आप कपड़े निकाल पर पानी के अंदर आ जाना, ठीक है ना?

सीमा के सुझाव मे सूरज ने हामी भर दी, अँधा क्या चाहै दो आँख और यहाँ तो सूरज की पूरी की पूरी अपनी जवान बहन मिल रही थी वो भी नंगी.

सूरज ने दूसरी और मूह फेर लिया, पर ध्यान अपने पीछे ही था उसका,उसे सीमा के टॉप निकालने की आहट हुई जिससे वो कौतूहल वश खुद को रोक ना सका, और पीछे की ओर मूह फेरने लगा.

सीमा

ना ना ना भाई दिस इज अगेन्स्ट रूल...हिहीही

सीमा के टोकने से सूरज रुक तो गया पर मुस्कान ना रोक पाया. कुछ पल के बाद उसे ट्यूब वेल के पानी मे हलचल महसूस हुई, तो वो समझ गया की सीमा पानी के अंदर जा चुकी है.

इसलिए उसने अपने चेहरा ट्यूब वेल की ओर फेरा, पर जैसे ही वो मुड़ा, तो उसे पहले दर्शन हुए,सीमा की मोटी गान्ड के, असल मे सीमा अभी आधी ही पानी मे उतरी थी वो पानी मे बैठने ही जा रही थी की सूरज मूड गया.

सूरज भोचक्का से सीमा की गान्ड ताड़ रहा था की सीमा पानी मे बैठ गई और मुड़कर सूरज की ओर देखा उसे बताने के लिए की अब उसकी बारी है.

पर जब सूरज को पहले से ही उधर देखते पाया तो वो चोंक गई.

सीमा

भाई दिस इज चीटिंग, आप पहले कैसे मूड गये, और ऑम्ग आपने मुझे पीछे से पूरा नंगा देख लिए, देट रूड भाई

(ये बोलते हुए भी उसके होंठो पर हल्की मुस्कान थी)
 
सूरज के पास इसका कोई जवाब नही था, क्यूकी ग़लती तो उससे हुई थी, इसलिए वो चुपचाप खड़ा रहा, सीमा ने कुछ पल सूरज को देखा, काफ़ी सीरीयस होकर.

सीमा

भाई अब आपसे ग़लती हुई है तो उसका पनिशमेंट भी मिलना चाहिए, और आप का पनिशमेंट तो अब पापा ही डिसाइड करेंगे, मे अभी उन्हे फोन लगाती हू.

ये बोलकर वो अपने फोन की ओर बढ़ी, सूरज की ये देखकर गान्ड उधड़ गई, उसे लगा सीमा उनके पापा को फोन मिलाकर सारी गाथा गा देगी जो कुछ भी उन दोनो के बीच कल से हुआ, और सारा इल्ज़ाम उसपर डाल देगी.

सूरज

सीमा यार प्लीज़ पापा को फोन ना कर, ये तो तेरा ही आइडिया था ना, हा मानता हू मुझसे ग़लती हुई है, और पनिशमेंट भी मिलना चाहिए मुझे, आर इसमे पापा को क्यू इन्वॉल्व कर रही है, दोनो आपस मे निपटारा कर लेते है ना.

सूरज का तर्क सुनकर सीमा ने अपने हाथ वापस खींच लिए.

सीमा

ओक, ये आइडिया भी अच्छा है. हू लेट मी थिंक.

आऊर फिर उसने कुछ देर सोचने की आक्टिंग की. सूरज की पूरे टाइम फटी पड़ी थी.

सीमा

तो ठीक है, आपने मुझे पीछे से पूरा नंगा देखा तो मे भी आपको पीछे से पूरा नंगा देखूँगी, तभी इश्यू सेट्ल होगा.

(कुटिल मुस्कान के साथ बोली)

सूरज ये सुनकर चोका, पर फिर सोचा की अगर मामला इतने मे दब जाए तो कोई बुराई नही है.

सूरज

ठीक है, लेकिन इसके बाद तो इस बारे मे पापा मम्मी या किसी को नही बोलेगी. प्रॉमिस

सीमा

भाई आपको पता है ना आप इस वक़्त बारगिनिंग की पोज़िशन मे नही हो, इसलिए ज़्यादा दिमाग़ ना लगाओ, जल्दी कपड़े उतारो और मुझे अपना पीछा नंगा दिखाओ...हिहीही

सूरज को भी सीमा के इस खेल मे मज़ा आ रहा था, तो उसने भी बिना कोई वक़्त गवाए अपना चेहरे सीमा से दूसरी और मोड़ लिया, और अपनी टी-शर्ट उतारने लगा, टी-शर्ट निकल पर उसने अपने लोवर मे उंगलिया फसाई, और एक ही झटके मे लोवर नीचे कर दिया.

सीमा

वाउ, नाइस आस भाई हिहीही

सीमा के कॉमेंट पर सूरज मुस्कुरा दिया, और लोवर पैरो से निकालकर ज़मीन पर गिरा दिया. अब उसके सामने दुविधा ये थी की कैसे अपना लंड सीमा को दिखाए वो ट्यूब वेल मे जाए, ऐसा नही था की उसे अपना लंड सीमा को दिखाने मे कोई ऐतराज था, वैसे भी सीमा उसके लंड की थमाई कल कर चुकी थी, पर डर उसे इस बात का था अगर वो ऐसा करता तो कही वो सरफ़िरी किसी को बता ना दे और उसकी कुटाई हो जाए बिन कुछ खाए पिए. इसलिए उसने सीमा को इस बारे मे बताना सही जाना.

सूरज

सीमा मे अब ट्यूब वेल मे आने वाला हू तो अपना मूह दूसरी और कर लेना

इस बात पर सीमा ना कोई जवाब नही दिया, तो सूरज ने उसे उसकी हामी जाना, और ट्यूब वेल मे जाने के लिए पीछे मूड गया. पर पीछे मुड़ते ही उसको झटका लगा, क्यूकी सीमा उसकी ओर ही देख रही थी, ये कहना ज़्यादा बहतर होगा उसके लंड को एक टक निहार रही थी.

सीमा की ज़िंदगी का ये पहला लाइव लोडा था, वो सूरज के लौडे को मेल पॉर्न स्टार के लौडे से कंपेर करने लगी, और उसे सूरज के लंड को लेकर बिल्कुल निराशा नई हुई, क्यूकी सूरज का बमप्लास्ट लोडा बड़े बड़े पॉर्न स्टार के लोडा पे भारी पड़ रहा था हर एंगल से, वो लंड मे ऐसे खोई की उसे ये भी ध्यान ना रहा की सूरज उसे अपने लंड को ताड़ते हुए देख रहा है.

सूरज का लंड भी अपनी लाडली बन्नो बहन की अटेन्षन पाकर, ईगो मे अकड़ने लगा, अकड़न मे उसने एक छोटा ठुमका मारा, ये ठुमका काफ़ी था सीमा की तंद्रा तोड़ने के लिए.

जब सीमा सूरज के लंड के माया जाल से बाहर आई तो उसने एक बार सूरज के चेहरे पर नज़र दौड़ाई तो उसे अपनी और कुटिल मुस्कान फैंकते जाना, जिससे वो झेप गई और हड़बड़ी मे अपना मूह दूसरी और फेर लिया.

सूरज भी अब थोड़ा चिल हो गया था क्यूकी उसे सीमा की नज़रो मे अपने लंड के लिए भूक नज़र आ चुकी थी जो उसके अनुभवी दिमाग़ के लिए मोर तन एनफ हिंट था की लोंड़िया गरमा गई है, सूरज बिंदास चलते हुए ट्यूब वेल मे आया और आराम से पानी मे अपनी नंगी लाडली बहन के पास नंगा विराज़ मान हो गया.

सूरज के पानी मे बैठने की आवाज़ सुनकर सीमा ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखे हल्की लाल हो रखी थी जैसे उसने नशा कर लिया हो, उन दोनों की आँखे आपस मे मिली, और दोनो ही हँस पड़े.

सूरज

कैसा लगा

सूरज ने सीमा से पूछा.

सीमा

क्या?

सूरज

ट्यूब वेल मे नहाना

(कुटिल मुस्कान के साथ बोला)

सीमा भी भली भाँति जान रही थी की सूरज क्या पूछ रहा है और क्या बोल रहा है.

सीमा

मस्त, काफ़ी मोटा है वैसे

(उसी कुटिल कुस्कान से साथ वो बोली)

सूरज

क्या?

सूरज जान तो गया था की उसकी लाडली बन्नो क्या पूछ रही है, पर फिर भी औपचारिकता के लिए पूछ लिया.

सीमा

वो सामने पेड़, काफ़ी मोटा तना है उसका, वैसे आपने क्या सोचा

(तिरछि निगाहो से सूरज को देखती हुई बोली)

सीमा का सवाल सुनकर सूरज ने उसकी ओर देखा.

सूरज

नही मे भी पेड़ के तने की ही बात कर रहा था, वैसे काफ़ी मोटी है ये भी

पास मे पड़ी रस्सी को देखकर वो बोला, पर उसकी आँखो का इशारा सीमा की तरफ था, जिसे वो भली भाँति जान रही थी की उसका प्यारा भाई क्या बोलना चाहता है.

सीमा को भी अब इस डबल मीनिंग गेम मे काफ़ी मज़ा आ रहा था, तो उसने भी इसमे खूब बढ़ चढ़ कर शरीक होने का फ़ैसला किया.

सीमा

हा काफ़ी मोटी है भाई, क्यूकी इसपर काफ़ी महनत लगी है

शरारत के साथ वो बोली. सूरज का लंड सीमा की डबल मीनिंग बातों से खड़ा हो चुका था, उसे अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, उसका मन सीमा को पटक-के ढपा धप चोद ने का कर रहा था,पर ऐसा करना पासिबल नही था.

सूरज

अच्छा किस किसने करी होगी इस्पे मेहनत

(शरारत से उसने सीमा से पूछा)
 
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