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गर्मी की छुट्टियाँ ---(इन्सेस्ट)
इंट्रोडक्षन & अपडेट 1
एक गाड़ी गाँव को शहर से जोड़ती हुई सड़क पर धूल उड़ाती हुई रपा-रॅप भागती जा रही थी, गाड़ी की आगे वाली सीट पर ड्राइवर बैठा था और पीछे वाली सीट पर 2 व्यक्ति...एक लड़का और एक लड़की...दोनो की शक्लो मे एक मिलाव था जिससे पता लगता था की दोनो भाई-बहन हैं...लड़के का नाम सूरज और लड़की का नाम सीमा था...दोनो भाई-बहन ने इसी साल 12त क्लास पास की थी और सम्मर वकेशन मे अपने नाना-नानी के घर जा रहे थे, सूरज, सीमा से 1 साल बड़ा था...पर 1 साल वो फैल हो गया था बीमारी के चलते इसलिए उसे क्लास रिपीट करनी पड़ी.
खेर दोनो भाई-बहनॉ मे बेहद प्यार था, जहाँ सीमा पढ़ने मे अवल थी वही सूरज बस काम चलाऊ था, उसे पढ़ाई से ज़्यादा चुदाई मे रूचि थी, उसकी इसी रूचि के चलते उसने बहुत ज़ल्द अपने ज्ञान को इस एरिया मे बेहद बढ़ा लिया था,
किसी सयाने की बात मानते हुए वो नियम से रोज़ रात को अपने लंड की ज़बरदस्त मालिश करता था सांड़े के तेल से, जिससे उसके लंड एक बम-पिलाट लौडे मे तब्दील हो गया.
सूरज हर वक़्त बस चूत ही ढूंढता रहता था, पर बेचारे के क्सतंट मे लंड बुए हुए थे, आज तक तक एक ना मिली, पर इसे निराश होकर उसे कोशिश करनी नही चूड़ी, रोज़ सुबा से शाम तक करता था और आज तक कर रहा है. उधर सीमा, पढ़ाई मे अवाल तो थी ही, उसके साथ काम-ज्ञान मे भी कम नहीं थी, उसका ये ज्ञान सूरज की तरह भरी दुनिया से नही, इंटेरेट की दुनिया से आया था, पर उसका थियरी को अच्छा था पर प्रॅक्टिकल जैसा हमारे देश मे होता है "कमज़ोर" वैसा ही उसका भी था, उसे भी अपनी सहैली के साथ गंदी-गंदी बाते करने मे मज़ा आता था, और उसका जवान जिस्म एक तगड़े लंड की माँग करने लगा था, पर बेचारी अभी तक अपनी इच्छा पूरी ना कर पाई.
सूरज और सीमा, के मा-बाप देल्ही के बड़े बिज़्नेस कपल थे, जिनका कारोबार विदेश तक फेला हुआ था, इस साल वो दोनो अपना सेकेंड हनिमून बनाने के लिए क्र्यूज़ शिप पर चले गये थे, क्यूकी अब हनिमून मे बच्चों को तो नही ले जा सकते थे जिसके चलते, सूरज और सीमा को उनके नाना-नानी के गाँव सम्मर वाकेशन बिताने के लिए भेज दिया गया. दोनो भाई-बहन यहाँ नहीं आना चाहते थे, पर एक तो मा-बाप की आज्ञा और ऊपर से नाना-नानी की इच्छा अपने धेवता-धेवती को देखने की, इसके चलते दोनो को बिना इच्छा के भी नाना-नानी के पास गाँव जाना पड़ा.
मे की दोपहरी अपने चरम पर थी, और तभी एक कार एक घर के सामने रुकी, दोनो भाई-बहन कार से नीचे उतर कर घर के अंदर गये, दरवाज़े के पास ही नानाजी मूढ़े और नानी खाट पर बैठी थी, दोनो बच्चों को देखार नाना-नानी बेहद खुस हुए, दोनो बहन-भाइयो ने उनका आशीर्वाद लिया.
सूरज और सीमा के नाना-नानी की उम्र लगभग 70 के आस-पास थी, नाना एक जमाने मे काफ़ी उँचे सरकारी ओढ़े पर थे, और इनके दो लड़किया हुई, रुक्मणी और राम्या. राम्या, सूरज और सीमा की मा थी. दोनो लड़कियो की शादी अच्छे घर मे कर दी गइ, और फिर रिटाइयर्मेंट के बाद दोनो नाना-नानी अपने पुसतेनी घर मे आ गये. जहाँ नाना को ठीक से सुनाई और दिखाई नही पड़ता था वहीं, नानी को चलने और सुनने मे दिक्कत थी, इसके चलते दोनो ने घर का काम करने के लिए, दो नोकर को रख रखा थे जो पति-पत्नी थे, जो उनका खाना पीना और इतने बड़े घर की देखभाल करते थे, पति का नाम महेश, जिसकी उम्र लगभग 55 साल थी, और उसकी पति मीना किसकी उम्र 30 थी, असल मे महेश नाना-नानी का खास नोकर था, और उसका विवाह इन्होने पास ही के गाँव की मीना से कर दिया जो विधवा हो गइ थी.
खेर नाना-नही के आशीर्वाद के बाद दोनो बच्चों को ऊपर वाले फ्लोर पर कमरा दे दिया गया था, एक ही लाइन मे 5 कमरे थे, जिनमे से 4 कमरे, बेडरूम थे और एक बीच का कमरा ड्रॉयिंग रूम था, कमरो के सामने छोटा आँगन और दो बाथरूम, एक पहले कमरे के सामने और जीने के साथ, दूसरा 5 कमरे के सामने और चारदरी के साथ, और, आँगन से झाँक कर देखो तो नीचे बाड़ा और बाड़ा के बीचो बीच एक बरगद के पेड़ जिससे सारे बाड़ा मे छाँव और ठंडक रहती थी, और नीचे वाले फ्लोर पर भी ऐसा ही नक्शा था, ऊपर वाले 5 कमरो के बिल्कुल नीचे 5 कमरे और थे, जिसमे 1 कमरा नाना-नानी का था, और 1 महेश और मीना का, बाकी एक ड्रॉयिंग/डाइनिंग रूम था, और एक किचन, और बाकी एक गेस्ट रूम के तौर पर यूज होता था, बाड़ा जहाँ ख़तम होता था वहाँ घर का मेन गेट था, मेन गेट के बाई तरफ जानवरों का तवेला , पर उसमे कोई जानवर नहीं रखे गये थे, काफ़ी पहले का बना हुआ था, जब यहाँ जानवर रखे जाते थे, अब तो गाँवो मे जानवर रखने का परचालन काफ़ी कम हो गया है, गेट की बाईं तरफ, एक छोटा का दरवाज़ा था जो घर पे पीछे बने छोटे किचन गार्डन मे एक बारीक पगडंडी की ज़रिए ले जाता था. . घर के आस पास काफ़ी दूर तक कोई दूसरा घर नही था.घर के बिल्कुल सामने नाना की पुसतेनी ज़मीन थी, जिससे उन्होने ठीके पे दे रखा था, जिसने आम और लीची के 3 बाग भी थे.
सूरज को 1 कमरा मिला और उसके बिल्कुल साइड वाला कमरा सीमा को दिया गया, कमरो मे कूलर थे, पर मे की इस भयानक गर्मी मे एसी मे रहने वाले बच्चों का कूलर से क्या होना था, खेर दोनो भाई-बहन ने अपना समान सेट किया, और ड्राइवर को वापस जाने को बोल दिया, क्यूकी उन्हे अब काफ़ी लबमा समय इधर ही बिताना था.
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इंट्रोडक्षन & अपडेट 1
एक गाड़ी गाँव को शहर से जोड़ती हुई सड़क पर धूल उड़ाती हुई रपा-रॅप भागती जा रही थी, गाड़ी की आगे वाली सीट पर ड्राइवर बैठा था और पीछे वाली सीट पर 2 व्यक्ति...एक लड़का और एक लड़की...दोनो की शक्लो मे एक मिलाव था जिससे पता लगता था की दोनो भाई-बहन हैं...लड़के का नाम सूरज और लड़की का नाम सीमा था...दोनो भाई-बहन ने इसी साल 12त क्लास पास की थी और सम्मर वकेशन मे अपने नाना-नानी के घर जा रहे थे, सूरज, सीमा से 1 साल बड़ा था...पर 1 साल वो फैल हो गया था बीमारी के चलते इसलिए उसे क्लास रिपीट करनी पड़ी.
खेर दोनो भाई-बहनॉ मे बेहद प्यार था, जहाँ सीमा पढ़ने मे अवल थी वही सूरज बस काम चलाऊ था, उसे पढ़ाई से ज़्यादा चुदाई मे रूचि थी, उसकी इसी रूचि के चलते उसने बहुत ज़ल्द अपने ज्ञान को इस एरिया मे बेहद बढ़ा लिया था,
किसी सयाने की बात मानते हुए वो नियम से रोज़ रात को अपने लंड की ज़बरदस्त मालिश करता था सांड़े के तेल से, जिससे उसके लंड एक बम-पिलाट लौडे मे तब्दील हो गया.
सूरज हर वक़्त बस चूत ही ढूंढता रहता था, पर बेचारे के क्सतंट मे लंड बुए हुए थे, आज तक तक एक ना मिली, पर इसे निराश होकर उसे कोशिश करनी नही चूड़ी, रोज़ सुबा से शाम तक करता था और आज तक कर रहा है. उधर सीमा, पढ़ाई मे अवाल तो थी ही, उसके साथ काम-ज्ञान मे भी कम नहीं थी, उसका ये ज्ञान सूरज की तरह भरी दुनिया से नही, इंटेरेट की दुनिया से आया था, पर उसका थियरी को अच्छा था पर प्रॅक्टिकल जैसा हमारे देश मे होता है "कमज़ोर" वैसा ही उसका भी था, उसे भी अपनी सहैली के साथ गंदी-गंदी बाते करने मे मज़ा आता था, और उसका जवान जिस्म एक तगड़े लंड की माँग करने लगा था, पर बेचारी अभी तक अपनी इच्छा पूरी ना कर पाई.
सूरज और सीमा, के मा-बाप देल्ही के बड़े बिज़्नेस कपल थे, जिनका कारोबार विदेश तक फेला हुआ था, इस साल वो दोनो अपना सेकेंड हनिमून बनाने के लिए क्र्यूज़ शिप पर चले गये थे, क्यूकी अब हनिमून मे बच्चों को तो नही ले जा सकते थे जिसके चलते, सूरज और सीमा को उनके नाना-नानी के गाँव सम्मर वाकेशन बिताने के लिए भेज दिया गया. दोनो भाई-बहन यहाँ नहीं आना चाहते थे, पर एक तो मा-बाप की आज्ञा और ऊपर से नाना-नानी की इच्छा अपने धेवता-धेवती को देखने की, इसके चलते दोनो को बिना इच्छा के भी नाना-नानी के पास गाँव जाना पड़ा.
मे की दोपहरी अपने चरम पर थी, और तभी एक कार एक घर के सामने रुकी, दोनो भाई-बहन कार से नीचे उतर कर घर के अंदर गये, दरवाज़े के पास ही नानाजी मूढ़े और नानी खाट पर बैठी थी, दोनो बच्चों को देखार नाना-नानी बेहद खुस हुए, दोनो बहन-भाइयो ने उनका आशीर्वाद लिया.
सूरज और सीमा के नाना-नानी की उम्र लगभग 70 के आस-पास थी, नाना एक जमाने मे काफ़ी उँचे सरकारी ओढ़े पर थे, और इनके दो लड़किया हुई, रुक्मणी और राम्या. राम्या, सूरज और सीमा की मा थी. दोनो लड़कियो की शादी अच्छे घर मे कर दी गइ, और फिर रिटाइयर्मेंट के बाद दोनो नाना-नानी अपने पुसतेनी घर मे आ गये. जहाँ नाना को ठीक से सुनाई और दिखाई नही पड़ता था वहीं, नानी को चलने और सुनने मे दिक्कत थी, इसके चलते दोनो ने घर का काम करने के लिए, दो नोकर को रख रखा थे जो पति-पत्नी थे, जो उनका खाना पीना और इतने बड़े घर की देखभाल करते थे, पति का नाम महेश, जिसकी उम्र लगभग 55 साल थी, और उसकी पति मीना किसकी उम्र 30 थी, असल मे महेश नाना-नानी का खास नोकर था, और उसका विवाह इन्होने पास ही के गाँव की मीना से कर दिया जो विधवा हो गइ थी.
खेर नाना-नही के आशीर्वाद के बाद दोनो बच्चों को ऊपर वाले फ्लोर पर कमरा दे दिया गया था, एक ही लाइन मे 5 कमरे थे, जिनमे से 4 कमरे, बेडरूम थे और एक बीच का कमरा ड्रॉयिंग रूम था, कमरो के सामने छोटा आँगन और दो बाथरूम, एक पहले कमरे के सामने और जीने के साथ, दूसरा 5 कमरे के सामने और चारदरी के साथ, और, आँगन से झाँक कर देखो तो नीचे बाड़ा और बाड़ा के बीचो बीच एक बरगद के पेड़ जिससे सारे बाड़ा मे छाँव और ठंडक रहती थी, और नीचे वाले फ्लोर पर भी ऐसा ही नक्शा था, ऊपर वाले 5 कमरो के बिल्कुल नीचे 5 कमरे और थे, जिसमे 1 कमरा नाना-नानी का था, और 1 महेश और मीना का, बाकी एक ड्रॉयिंग/डाइनिंग रूम था, और एक किचन, और बाकी एक गेस्ट रूम के तौर पर यूज होता था, बाड़ा जहाँ ख़तम होता था वहाँ घर का मेन गेट था, मेन गेट के बाई तरफ जानवरों का तवेला , पर उसमे कोई जानवर नहीं रखे गये थे, काफ़ी पहले का बना हुआ था, जब यहाँ जानवर रखे जाते थे, अब तो गाँवो मे जानवर रखने का परचालन काफ़ी कम हो गया है, गेट की बाईं तरफ, एक छोटा का दरवाज़ा था जो घर पे पीछे बने छोटे किचन गार्डन मे एक बारीक पगडंडी की ज़रिए ले जाता था. . घर के आस पास काफ़ी दूर तक कोई दूसरा घर नही था.घर के बिल्कुल सामने नाना की पुसतेनी ज़मीन थी, जिससे उन्होने ठीके पे दे रखा था, जिसने आम और लीची के 3 बाग भी थे.
सूरज को 1 कमरा मिला और उसके बिल्कुल साइड वाला कमरा सीमा को दिया गया, कमरो मे कूलर थे, पर मे की इस भयानक गर्मी मे एसी मे रहने वाले बच्चों का कूलर से क्या होना था, खेर दोनो भाई-बहन ने अपना समान सेट किया, और ड्राइवर को वापस जाने को बोल दिया, क्यूकी उन्हे अब काफ़ी लबमा समय इधर ही बिताना था.
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