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गर्मी की छुट्टियाँ ---(इन्सेस्ट)

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गर्मी की छुट्टियाँ ---(इन्सेस्ट)

इंट्रोडक्षन & अपडेट 1

एक गाड़ी गाँव को शहर से जोड़ती हुई सड़क पर धूल उड़ाती हुई रपा-रॅप भागती जा रही थी, गाड़ी की आगे वाली सीट पर ड्राइवर बैठा था और पीछे वाली सीट पर 2 व्यक्ति...एक लड़का और एक लड़की...दोनो की शक्लो मे एक मिलाव था जिससे पता लगता था की दोनो भाई-बहन हैं...लड़के का नाम सूरज और लड़की का नाम सीमा था...दोनो भाई-बहन ने इसी साल 12त क्लास पास की थी और सम्मर वकेशन मे अपने नाना-नानी के घर जा रहे थे, सूरज, सीमा से 1 साल बड़ा था...पर 1 साल वो फैल हो गया था बीमारी के चलते इसलिए उसे क्लास रिपीट करनी पड़ी.

खेर दोनो भाई-बहनॉ मे बेहद प्यार था, जहाँ सीमा पढ़ने मे अवल थी वही सूरज बस काम चलाऊ था, उसे पढ़ाई से ज़्यादा चुदाई मे रूचि थी, उसकी इसी रूचि के चलते उसने बहुत ज़ल्द अपने ज्ञान को इस एरिया मे बेहद बढ़ा लिया था,

किसी सयाने की बात मानते हुए वो नियम से रोज़ रात को अपने लंड की ज़बरदस्त मालिश करता था सांड़े के तेल से, जिससे उसके लंड एक बम-पिलाट लौडे मे तब्दील हो गया.

सूरज हर वक़्त बस चूत ही ढूंढता रहता था, पर बेचारे के क्सतंट मे लंड बुए हुए थे, आज तक तक एक ना मिली, पर इसे निराश होकर उसे कोशिश करनी नही चूड़ी, रोज़ सुबा से शाम तक करता था और आज तक कर रहा है. उधर सीमा, पढ़ाई मे अवाल तो थी ही, उसके साथ काम-ज्ञान मे भी कम नहीं थी, उसका ये ज्ञान सूरज की तरह भरी दुनिया से नही, इंटेरेट की दुनिया से आया था, पर उसका थियरी को अच्छा था पर प्रॅक्टिकल जैसा हमारे देश मे होता है "कमज़ोर" वैसा ही उसका भी था, उसे भी अपनी सहैली के साथ गंदी-गंदी बाते करने मे मज़ा आता था, और उसका जवान जिस्म एक तगड़े लंड की माँग करने लगा था, पर बेचारी अभी तक अपनी इच्छा पूरी ना कर पाई.

सूरज और सीमा, के मा-बाप देल्ही के बड़े बिज़्नेस कपल थे, जिनका कारोबार विदेश तक फेला हुआ था, इस साल वो दोनो अपना सेकेंड हनिमून बनाने के लिए क्र्यूज़ शिप पर चले गये थे, क्यूकी अब हनिमून मे बच्चों को तो नही ले जा सकते थे जिसके चलते, सूरज और सीमा को उनके नाना-नानी के गाँव सम्मर वाकेशन बिताने के लिए भेज दिया गया. दोनो भाई-बहन यहाँ नहीं आना चाहते थे, पर एक तो मा-बाप की आज्ञा और ऊपर से नाना-नानी की इच्छा अपने धेवता-धेवती को देखने की, इसके चलते दोनो को बिना इच्छा के भी नाना-नानी के पास गाँव जाना पड़ा.

मे की दोपहरी अपने चरम पर थी, और तभी एक कार एक घर के सामने रुकी, दोनो भाई-बहन कार से नीचे उतर कर घर के अंदर गये, दरवाज़े के पास ही नानाजी मूढ़े और नानी खाट पर बैठी थी, दोनो बच्चों को देखार नाना-नानी बेहद खुस हुए, दोनो बहन-भाइयो ने उनका आशीर्वाद लिया.

सूरज और सीमा के नाना-नानी की उम्र लगभग 70 के आस-पास थी, नाना एक जमाने मे काफ़ी उँचे सरकारी ओढ़े पर थे, और इनके दो लड़किया हुई, रुक्मणी और राम्या. राम्या, सूरज और सीमा की मा थी. दोनो लड़कियो की शादी अच्छे घर मे कर दी गइ, और फिर रिटाइयर्मेंट के बाद दोनो नाना-नानी अपने पुसतेनी घर मे आ गये. जहाँ नाना को ठीक से सुनाई और दिखाई नही पड़ता था वहीं, नानी को चलने और सुनने मे दिक्कत थी, इसके चलते दोनो ने घर का काम करने के लिए, दो नोकर को रख रखा थे जो पति-पत्नी थे, जो उनका खाना पीना और इतने बड़े घर की देखभाल करते थे, पति का नाम महेश, जिसकी उम्र लगभग 55 साल थी, और उसकी पति मीना किसकी उम्र 30 थी, असल मे महेश नाना-नानी का खास नोकर था, और उसका विवाह इन्होने पास ही के गाँव की मीना से कर दिया जो विधवा हो गइ थी.

खेर नाना-नही के आशीर्वाद के बाद दोनो बच्चों को ऊपर वाले फ्लोर पर कमरा दे दिया गया था, एक ही लाइन मे 5 कमरे थे, जिनमे से 4 कमरे, बेडरूम थे और एक बीच का कमरा ड्रॉयिंग रूम था, कमरो के सामने छोटा आँगन और दो बाथरूम, एक पहले कमरे के सामने और जीने के साथ, दूसरा 5 कमरे के सामने और चारदरी के साथ, और, आँगन से झाँक कर देखो तो नीचे बाड़ा और बाड़ा के बीचो बीच एक बरगद के पेड़ जिससे सारे बाड़ा मे छाँव और ठंडक रहती थी, और नीचे वाले फ्लोर पर भी ऐसा ही नक्शा था, ऊपर वाले 5 कमरो के बिल्कुल नीचे 5 कमरे और थे, जिसमे 1 कमरा नाना-नानी का था, और 1 महेश और मीना का, बाकी एक ड्रॉयिंग/डाइनिंग रूम था, और एक किचन, और बाकी एक गेस्ट रूम के तौर पर यूज होता था, बाड़ा जहाँ ख़तम होता था वहाँ घर का मेन गेट था, मेन गेट के बाई तरफ जानवरों का तवेला , पर उसमे कोई जानवर नहीं रखे गये थे, काफ़ी पहले का बना हुआ था, जब यहाँ जानवर रखे जाते थे, अब तो गाँवो मे जानवर रखने का परचालन काफ़ी कम हो गया है, गेट की बाईं तरफ, एक छोटा का दरवाज़ा था जो घर पे पीछे बने छोटे किचन गार्डन मे एक बारीक पगडंडी की ज़रिए ले जाता था. . घर के आस पास काफ़ी दूर तक कोई दूसरा घर नही था.घर के बिल्कुल सामने नाना की पुसतेनी ज़मीन थी, जिससे उन्होने ठीके पे दे रखा था, जिसने आम और लीची के 3 बाग भी थे.

सूरज को 1 कमरा मिला और उसके बिल्कुल साइड वाला कमरा सीमा को दिया गया, कमरो मे कूलर थे, पर मे की इस भयानक गर्मी मे एसी मे रहने वाले बच्चों का कूलर से क्या होना था, खेर दोनो भाई-बहन ने अपना समान सेट किया, और ड्राइवर को वापस जाने को बोल दिया, क्यूकी उन्हे अब काफ़ी लबमा समय इधर ही बिताना था.

………………………………
 
नानी ने मीना से बोलकर दोनो को खाना खिलाया नीचे ड्राइंग रूम मे, खाना खाने के बाद दोनो बच्चों ने आराम करने की इच्छा जताई और ऊपर अपने कमरे मे चले गये.

सूरज(मन मे):

साला भेन्चोद कहाँ फस गया, अच्छा ख़ासा देल्ही मे दोस्तो के साथ लोंड़िया बाज़ी करता, अब यहाँ गान्ड मरवाउन्गा, 2 महीने...हट बहन चोद किस्मत ही लंडु है

(ये बोलकर अपने पलंग पर ओन्धे मूह पड़ गया)

कमरे मे कूलर की आवाज़ गूँज़ रही थी...जिससे बाहर का कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था.. ओए सूरज ने ठंडक करने के लिए,कमरे का दरवाज़ा भी बंद कर लिया, लेटे लेटे उसकी कांवासना ने ज़ोर मज़ा और उसका बम-पिलाट लोडा एक बार फिर खड़ा हो गया, और उसने अपने कचे और जीन्स एक साथ उतार पर नीचे से बिल्कुल नंगा हो गया, और लगा 61-62 करने, उसके ख़यालो मे अपने स्कूल की टीचर प्रियंका थी, जिसकी मोटी दमदार गान्ड का सूरज दीवाना था, कितनी इच्छा थी सूरज की प्रियंका की मोटी गान्ड ढपा-धप चोदने की, पर इच्छा मन तक ही रह गइ और स्कूल ख़तम हो गया, ऐसे ही अपनी कामुक फॅंटेसी को जीते हुए उसे दमदार लौडे ने वीर्य की धारें फेकना शुरू कर दी, वो उसकी जांघों और पेट कर गिर गइ .

सूरज(मन मे):

अरे बहन चोद, ये क्या हो गया, यहाँ तो कमरे के अंदर बाथरूम भी नही, अब ये माल सॉफ करने के लिए लंद्वा बाहर जाना पड़ेगा.

सूरज ने पास पड़े अख़बार से सारा माल सॉफ किया और अपने जीन्स बिना कच्छी के पहने कमरे से बाहर निकल कर बाथरूम की ओर जाने लगा, जैसे ही वो बाथरूम का डोर खोलने को हुआ, उसे एक सीठी की आवाज़ सुनाई दी, बाथरूम के अंदर से, उसे समझते देर ना लगी की ये आवाज़ लड़की के मूतने की है, और इस वक़्त वहाँ एक ही लड़की मोजूद थी, उसकी बहन सीमा, काएदे से तो उसे वहाँ से चले जाना चाहिए था, पर अपना सूरज ठहरा चुदक्कड, तो उसने अंदर झाँकने की ठानी, उसने देखा तो पाया, की दरवाज़ा फटटो का बना है, जिसमे अंदर देखने लायक गॅप है. सूरज ने लगाई अपनी एक आँख, और उसकी नज़र सीधा पड़ी एक मस्त फूली हुई गुलाबी चुनमुनिया पर, जिसपे झान्टो का नामो निशान भी नही था, ये उसकी ज़िंदगी की पहली लाइव चुनमुनिया थी.

सूरज, सीमा की चूत मे मानो खो सा गया और उसे ये भी पता ना लगा की कब उसका हाथ अपने बम-पिलाट लौडे पर पहुँच कर, उसे मुठियाने लगा, वो सीमा की चूत से निकलता मूत देखकर, जीन्स के ऊपर से ही लौडे की रगड़ाई कर रहा था, वहाँ सीमा का मूत ख़तम हुआ, यहाँ सूरज का माल छूटा, और माल निकलने के साथ ही सूरज सर पर पाव रखकर अपने कमरे की ओर भगा, की कही सीमा उसे पकड़ ना ले, पर सूरज ये भूल गया की सीमा कोई बच्ची नही है की उसे कुछ भी पता ना लगे, जब सूरज फटटो के छेद से उसे देख रहा था, सीमा ने उसे तभी देख लिया था, पर उसने भी कुछ सोचते हुए उसे कुछ ना बोला और देखने दिया, अब ये तो आने वाला समय बताएगा उसने ऐसा क्यू किया.

टू बी कंटिन्यूड...
 
रीकॅप -

सूरज, सीमा की चूत मे मानो खो सा गया और उसे ये भी पता ना लगा की कब उसका हाथ अपने बम-पिल् लौडे पर पहुँच कर, उसे मुठियाने लगा, वो सीमा की चूत से निकलता मूत देखकर, जीन्स के ऊपर से ही लौडे की रगड़ाई कर रहा था, वहाँ सीमा का मूत ख़तम हुआ, यहाँ सूरज का माल छूटा, और माल निकलने के साथ ही सूरज सर पर पाव रखकर अपने कमरे की ओर भगा, की कही सीमा उसे पकड़ ना ले, पर सूरज ये भूल गया की सीमा कोई बच्ची नही है की उसे कुछ भी पता ना लगे, जब सूरज फटटो के छेद से उसे देख रहा था, सीमा ने उसे तभी देख लिया था, पर उसने भी कुछ सोचते हुए उसे कुछ ना बोला और देखने दिया, अब ये तो आने वाला समय बताए गा उसने ऐसा क्यू किया.

अब आगे -

सूरज चढ़ि हुई सांसो के साथ अपने कमरे मे आया, और फटाक से चिटकनी बंद करली, उसने अभी भी ये सब सपने जैसे मालूम हो रहा था, क्यूकी उसने कभी सपने मे भी नही सोचा था की वो कभी अपनी बहन की चूत का नंगा देखेगा, और उसकी चूत देखकर मूठ मारेगा, माल के जीन्स मे ही निकल जाने से उसकी सारी जीन्स खराब हो गइ थी, जिससे उसे चिप-चिपा महसूस हो रहा रहा, पर उसकी बाहर जाने की हिम्मत नहीं थी, इसलिए उसने जीन्स को निकाला, और वैसे ही नंगा बिस्तर पर पड़ गया, सफ़र की थकान के कारण उसे नींद आ गइ .

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उधर सीमा अपने रूम मे कपड़े चेंज कर रही थी, उसके दिमाग़ मे अभी भी वो घटना घूम रही थी की कैसे उसका भाई उसे मूतते देख रहा था, उसने कभी नही सोचा था की उसका भाई इतना गिर जाएगा, उसे पता तो काफ़ी पहले से था की सूरज चुदाई ज्ञान मे कुछ ज़्यादा ही रूचि लेता है, क्यूकी वो जब उसके साथ कभी बाहर जाती, तो चोर निगाहो से जब भी उसकी ओर देखती उसकी नज़रे किसी ना किसी औरत या लड़की के मम्मो या चुतड़ों पर ही पाती. ऐसा नही है सीमा कोई दूध की धूलि हुई लड़की थी, वो भी बाहर लोडो को नापति रहती थी, पर उसने कभी भी ये नपाई अपने भाई पर ना की, आज की घटना ने उसकी सोच को एक नया आयाम दे दिया था, सीमा का जिस्म भी उसके काबू मे नही रहता था, या यू कह लें की उसके अंदर सेक्स ड्राइव आम लड़कियो से कुछ ज़्यादा थी, और हो भी क्यू ना, उसका जिस्म इस उम्र मे भी एक पूर ज़ोर जवान औरत जैसा हो गया था, उसके जिस्म की नाप 35-26-36 थी, वो उसके कपड़ो से छुपाया नही छुपता था, जब भी वो गली से निकलती, तो लड़के उसकी गदराई गान्ड देखकर लार टपका देते, और मम्मो को देखकर दूध पीने की इच्छा करते, सीमा लोंडो के मनो भाव को अच्छे से समझती थी, पर उन्हे तड़पाने के लिए, उनके सामने अधिक गान्ड मटका मटका कर चलती. आपकी पढ़ाकू छवि के चलते वो कभी भी अपनी इच्छाओ को बाहर नही ला सकी, पर जब आज सूरज ने उसकी फुददी दर्शन किया, तो उसे उस वक़्त बेहद अजीब और उसके ऊपर गुस्सा भी आया, पर साथ ही जिस्म मे एक मस्तानी सिहरन भी उठी, उस मस्तानी सिहरन का तेज उसके गुस्से से कही ज़्यादा, जिसके चलते उसने सूरज को कुछ ना बोला, और खुलके उसे चूत का दर्शन करने दिया, पर अब उसके मन मे एक नई इच्छा ने जनम ले लिया था. ये सब सोचते हुए, सीमा भी थकान के कारण सो गइ .

…………………………

शाम को सीमा के गेट पर एक दस्तक हुई...

सीमा:

कोंन है?

सूरज:

मे हू सीमा, शाम हो गइ कब तक सोती रहेगी, नानी नीचे बुला रही है

सीमा:

अच्छा भाई आती हू, तू चल

सीमा ने उठ कर एक लोवर और हाफ टी-शर्ट पहनी और नीचे आ गई, यहाँ नाना-नानी और सूरज बहते हुए चाय पी रहे थे.

नानी:

आई गई मेरी बच्ची, क्या पीएगी चाय कोफ़ी या दूध

सीमा:

मे तो कॉफी पियूंगी...

नानी:

मीना सीमा के लिए कॉफी तो बना दे...

मीना:

जी मालकिन...

मीना सीमा के लिए कॉफी बनाने चली गई...

नाना:

और बच्चों कैसा लग रहा है गाँव मे, तुम दोनो तो बहुत सालो बाद आए हो इधर, बोर तो नही हो रहे...

नाना की बात सुनकर सूरज ने ना मे गर्दन हिला दी... पर सीमा बोल पड़ी...

सीमा:

नानाजी मे तो बोर हो रही हू, यहाँ कुछ देखने के लिए नही है क्या

नाना:

अरे है क्यू नही, इतना सुंदर गाँव है, तुम एक काम करो चाय पीने के बाद तू और सूरज गाँव या फिर खेत घूम आओ

दोनो भाई-बहन ने हामी मे गर्दन हिला दी, सीमा की कॉफी पीने के बाद वो दोनो, नाना-नानी की आज्ञा लेकर, गाँव घूमने निकल पडे, क्यूकी नाना-नानी का घर बाकी गाँव से थोड़ा एकांत मे था, तो उनलोगो ने गाँव घूमने के बजाय, सामने खेतो मे घूमना ठीक जाना.

सूरज:

अरे सीमा गाँव के बजाए, खेतो मे चलते है, हरियाली मे मज़ा आएगा

सीमा:

हा भाई मे भी यही सोच रही थी, यही चलते है

और दोनो भाई बहन खेतो की ओर चल पडे, पगडंडी से, सीमा आगे चल रही थी और सूरज उसके पीछे, सीमा का ध्यान खेतो की हरियाली मे था पर सूरज का ध्यान तो आज हरियाली से ज़्यादा सीमा की मोटी मटकती गान्ड पर था.
 
अचानक चलते चलते सीमा का बॅलेन्स बिगड़ा और वो आगे को झुक गइ , इस झुकाव के कारण उसकी मोटी गान्ड हवा मे और उठ गइ , इस दृश्य को देखकर सूरज के टटटे हलक मे आ गये, और उसके बम-पिलाट लौडे मे तनाव आना शुरू हो गया.

सीमा की नज़र ऐसे झुकी हुई सूरज की ओर गइ , और उसने देखा की उसका भाई उसकी मोटी ताज़ी गान्ड को बावले कुत्ते की तरह देख रहा है, मानो अभी भभॉड़ देगा, सूरज की ऐसी हालत देखकर उसे बेहद मज़ा आ रहा था, वापस खड़े होने से पहले उसने एक ज़ोर का उठाव मारा गान्ड पर जिससे उसकी गान्ड थिरक गइ , और उधर सूरज की हलक मे सांस अटक गइ और उसके बम-पिलाट लौडे ने जीन्स मे तंबू ठोक दिया.

खेर सीमा ने अपना वॉर करते हुए अपना कदम एक बार फिर आगे बढ़ाया, अब उसकी चाल मे एक मस्तानी लोंड़िया वाली मस्ती आ गइ थी, गान्ड ज़रूरत से 90% ज़्यादा मटक रही थी, इधर अपने सूरज को ग्रहण लगता जा रहा था, एक तो गर्मी की उमस ऊपर से ऐसा नज़ारा देख कर जिस्म की गर्मी ने उसके मानो असली का सूरज बना दिया था, सूरज बहुत कोशिश कर रहा था की वो सीमा के मटकते चूतड़ ना देखे, क्यूकी दोपहर से उसे एक आत्म ग्लानि हो रही थी की कैसे वो इतना गिर सकता है की अपनी सग़ी बहन की चूत देखकर मूठ मार दे, पर वो आत्म ग्लानि अब धीरे धीरे कमज़ोर पड़ रही थी, और हवस सर नाचने को तैयार थी.

उधर, सीमा ने जब से सूरज को अपनी तनदुरुस्त गान्ड कुत्ते जैसे देखता पाया, उसका जिस्म हिलोरे मारने लगा था, चूत तो तभी रो दी थी, जब उसने सूरज को गान्ड उठान दिखाया था, अब तो वो, गंगा-जमना बहा रही थी, और ग़रीबी मे आटा गीला की बात ये थी उसने इस वक्त पैंटी भी नही पहनी थी, जिससे चूत पर अमृत जांघों पर चिपक रहा था, पर इस सबके बाद भी उसकी गान्ड मटकना चालू थी. तभी उसे एक आइडिया आया, सूरज और और तड़पाने का.

सीमा:

अरे भाई देखो लीची का बाग, चलो ना मुझे लीचे खानी है

(बाग की ओर इशारा करते हुए उसने बोला)

सीमा की बात सुनकर सूरज भी उस बाग की ओर देखने लगा, और फिर सीमा के पीछे-पीछे ताड़ता एक पेड़ के पास पहुँच गया,

सीमा:

ओफो भाई ये लीचिया तो बहुत ऊपर है कैसे तोड़े इन्हे

(पूरा ड्रामा खेलते हुए उसने बोला)

सूरज:

अरे तो चढ़ जाता हू इसमे कोंनसि बड़ी बात हो गइ

सीमा:

नही भाई तुम गिर जाओगे, चोट लग जाएगी, एक कम करो तुम मुझे उठा लो गोदी मे, मे तोड़ दूँगी

सीमा ने अपना पासा फेंका...सूरज ने कुछ देर सोचा और फिर हामी मे सर हिला दिया.

सीमा चलती हुई सूरज के सामने खड़ी हो गइ , सीमा की हाइट सूरज के कंधे तक थी, जिससे सूरज ने उसकी बगलो मे हाथ फसा कर उसे ऊपर उठा लिया, सूरज भी कोई कमजोर नही था , खूब जिम मार-मार के तगड़ा मुस्टंडा हो रखा था, उसने बड़ी आसानी से सीमा को उठा लिया

सीमा:

भाई हाथ अभी भी नही पहुँच रहा थोड़ा और ऊपर उठाओ ना

सूरज ने अपने बलिशट बाजुओं का ज़ोर दिखाया और सीमा को और ऊपर उठा दिया, अब स्थिति ये थी की सीमा की टाइट लोवर मे कसी हुई लंड-पिलाट मोटी गान्ड, सूरज के मूह से सामने थी, और चूतड़ की गोलिया उसके होंठो को बस लग-भग छू ही रही थी, और ऊपर से जो कुछ देर पहले, उसकी चूत ने गंगा-जमना बहाई थी, उसकी मादक सुंगंध सूरज के नथुनो मे घुस रही थी, और उधर सूरज की गरम साँसे सीमा के बिना पैंटी के ढके चुतड़ों मे घुस रही थी जिससे लीची-वीचि सब तोड़ना भूल गइ और उसकी आँखो की पुतलिया पलटने लगी काम-वासना के वेग मे.

ना सूरज का ध्यान सीमा को लीची तुड़वाने मे था और ना ही सीमा का ध्यान लीची तोड़ने मे, दोनो काम-देव के बान का शिकार होते महसूस हो रहे थे. एका-एक सूरज को एक चीटी ने काट लिया हाथ पर (अब गर्मिया है तो चीटी तो निकलेंगी ही), और उसका परिणाम ये हुए कि उसका मूह, धप से सीमा के बिना पैंटी मे कसे हुए चुतड़ों मे जा धसा

सीमा: अहह....
 
इधर मूह धसा, उधर सीमा की मादक "आ अहह...." निकल गइ , जो गर्मियो की शाम के वातावरण के गुम हो गइ , और इधर सूरज को ये पता चल गया की उसकी लाडली बहन बिना पैंटी पहने अपने चूतड़ मटकाते घूम रही थी, जिसका सीधा असर उसके मोटे-ताज़े लौडे पर पड़ा और उसने एक ठुमका दिया जीन्स के अंदर.

इस ठुमके का असर ये हुआ, की सूरज की पकड़ सीमा पर से ढीली हो गइ और वो धम से अपने पैरो पर आ गइ , पर इस क्रिया का ये निसकर्ष निकला की एक सेकेंड के लिए, सूरज का लंड-पिलाट लोडा, सीमा की चूत मे टकरा गया, जिससे दोनो के जिस्म मे एक सनसनी दौड़ गइ .

कुछ वक़्त तक ना सीमा कुछ बोली ना सूरज, गर्मियो की शाम मे दो जवान जिस्म, एक बाग मे खड़े अपनी सोचो मे डूबे रहे.

सीमा:

भाई आपने तो मुझे गिरा दिया होता

(उलाहना देते हुए बोली)

पर उसने ये ज़िक्र ना किया, की "भाई आपने तो अपना मूह मेरे चुतड़ों मे दे दिया", अब भला ये बात कैसे बोलती ये बात बोलने वाली थोड़े होती है, हमारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट मे भी बहुत ही महिलाओ को इस तरह की सिचुयेशन रोज़मरा के जीवन मे फेस करनी पड़ती है, लेकिन कभी अपने ये थोड़ा ही सुना है की एक महिला ने छेड़ खानी के आरोप मे कुछ ऐसा बोला "की फ्लाना-फ्लाना आदमी ने मेरी गान्ड भीच दी", ये सुनने को ज़रूर मिलता है की उस आदमी ने मुझे छेड़ा, खेर हम कहानी पे आते है.

सूरज:

सॉरी सर, एक चीटी ने पैर पर काट लिया, इसलिए बॅलेन्स बिगड़ गया.

सीमा:

क्या चीटी ने काट लिया, दिखाओ मुझे

सीमा ने अपने भाई के प्रति एक बहन वाला प्यार दर्शाया, और अचानक अपने घुटनो पर बैठ कर, सूरज के पैरो की तरफ देखने लगी, पर उसे चीटी तो नहीं दिखी हाँ अजगर ज़रूर दिखा, जी हा अजगर सूरज की जीन्स मे समाया था, अजगर को देखते ही अपनी सीमा के होश फाख्ता हो गये, और वो उस मोटे ताज़े औज़ार को ऐसे देखने लगी, जैसे कुतिया रोटी को देखती है.

सूरज की नज़र जब सीमा पर पड़ी तो वो भी चॉक गया, क्यूकी उसकी लाडली बन्नो उसके लौडे को हवस की आँखो से देख रही थी, एक बार तो अपने सूरज की भी सिट्टी-पिटी गुप होगई, की कही ये आज सालो से पाले हुए लौडे को खा ही ना जाए, वैसे भी सीमा को नोंन- वेज काफ़ी पसंद है, पर उसकी इस सोच का ये असर हुआ, की उसके लौडे ने ठुमका दिया, और उधर सीमा की तंद्रा टूटी.

सीमा:

भाई यहाँ तो कोई चीटी नहीं है

(भोली बनकर बोला)

सूरज:

हा चली गइ होगी

सीमा:

भाई ऐसे तो लीची टूटे गी नही तुम, ना इसबार मुझे आगे से उठाओ

इतना बोलकर, उसने अपने हाथ फेला दिए,

अब अंधे को चाहिए दो आँख, और यहाँ तो वैसे भी दो बड़े-बड़े खरबूज़े थे, तो सूरज ने आव- देखा ना ताव, सीमा के हाथ के नीचे से हाथ निकालकर, लगाया ज़ोर, जिससे, सीमा के मोटे-मोटे मम्मो, ने उसका चेहरा ढक लिया

और इस के साथ सूरज को चनका आ गया...

सूरज:

आआआआअहह...

और सूरज 'आअहह' करते हुए धडाम से ज़मीन पर गा गिरा, और सीमा उसके बाज़ू मे मूह के बल मिट्टी मे पड़ी जाके...और इसी के साथ लीची तोड़ने का अभियान विफल हुआ...

टू बी कंटिन्यूड...
 
रीकॅप -

और इसकी के साथ सूरज को चनका आ गया

सूरज:

आआआआअहह...

और सूरज 'आअहह' करते हुए धडाम से ज़मीन पर गिरा, और सीमा उसके बाज़ू मे मूह के बल मिट्टी मे पड़ी जाके...और इसी के साथ लीची तोड़ने का अभियान विफल हुआ...

अब आगे -

जैसे तैसे करके सीमा सूरज को घर तक ले आई, सूरज की पीठ मे आए अनायास खिचाव ने उसे जिस्म मे दर्द की लहरे दौड़ रही थी.

नानी:

अरे सूरज बेटे को क्या हुआ?

उनके सवाल पर सीमा ने सारी गाथा कह सुनाई

नानी:

क्या ज़रूरत पड़ी थी तुम दोनो, हमसे बता देते, महेश से बोलकर तुडवा देती लीची

नाना:

कोई बात नही जवान बालकों को तो चोटें लगती रहती है, सूरज दर्द ज़्यादा है क्या?

सूरज:

दर्द तो है नानाजी, पर इतना ज़्यादा नही है, थोड़ा आराम करूँगा तो ठीक हो जाएगा...

नानी:

अरे आराम से कुछ ना होगा, अरी मीना तू ज़रा सूरज लाला की पीठ की मालिश तो कर दे

सूरज:

नही नानी इसकी ज़रूरत नही है...ऐसी ही चला जाएगा

पर सूरज की दरखास्त को नानी ने दरकिनार कर दिया और मीना को मालिश का जिम्मा सोन्प दिया गया.

मीना:

छोटे मालिक आप अपने कमरे मे चलो मे तेल गरम करके लाती हू

मीना की बात मानते हुए, सीमा, सूरज को सहारा देते हुए ऊपर उसके कमरे मे ले गइ ... सीमा ने उसे धीरे से उसके बिस्तर पर बैठा दिया...सूरज ने जब सीमा के चेहरे की ओर देखा तो नमी दिखी...

सूरज:

अरे पगली क्या हुआ तू क्यू रो रही है?

उसका बस ये पूछना भर था और सीमा ने सिसकना शुरू कर दिया

सीमा:

सॉरी भाई, ये सब मेरी वजह से ही हुआ है, ना मे लीची तोड़ने की ज़िद करती ना ये सब होता

(रोते हुए बोली)

सूरज ने उसका हाथ थाम कर, उसे अपने पास बिस्तर पर बैठा लिया, और उसका सर अपनी छाती से चिपका के चुप करने की कोशिश करने लगा.

सूरज:

चल अब चुप होज़ा, इसमे तेरी ग़लती नही, मैं ही ग़लत तरीके से उठा रहा था, जिससे मसल्स स्ट्रेच होना लाज़मी था

(बालो को सहलाते हुए बोला)

सूरज का दुलार पाकर, सीमा ने रोना बंद कर दिया...

सूरज:

चल अब जाके मूह धो ले, सारे मूह पर चेपे लग गये है मिट्टी के...हाहाहा

सूरज को हस्ता देख कर, सीमा ने हल्का सा उसकी छाती पर मारा, और बाहर मूह धोने चली गइ ...

इतने मे मीना तेल गरम करले ले आई...

मीना:

छोटे मालिक, अपनी शर्ट और जीन्स उतार दे, और ओंदे मूह बिस्तर पर लेट जाए, मे आपकी मालिश कर देती हू

मीना के सुझाव से सूरज चॉक गया...

सूरज:

लेकिन मे आप के सामने ऐसे कैसे लेट जाऊं बिना कपड़ो के

मीना:

हिहीही...अरे छोटे मालिक मेने बिना कपड़ो के थोड़े ही कहा है, आपने नीचे कच्छा तो पहना है ना, उसी मे लेट जाना, नही तो तेल से आपके कपड़े खराब हो सकते है...

सूरज को मीना का सुझाव तो जम रहा था, पर फिर भी उसके अंदर किसी अंजान औरत के सामने कपड़े उतार ने मे झीजक महसूस हो रही थी, अब भले ही वो चूत का खोज़ी हो, पर है तो कोरा, तो अंजान औरत के सामने इस तरह अपनी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ाना उसे जचा नही. पर फिर भी पीठ के दर्द के चलते उसे मानना पड़ा

सूरज:

अच्छा आप एक काम करिए,कमरे से थोड़ी देर बाहर जाए मे तब तक अपने कपड़े निकाल कर मालिश की तैयारी करता हू.
 
मीना हँसते हुए, कमरे से भर चली, गई, उसे सूरज का ऐसा बच्चों जैसा स्वाभाव अच्छा लग रहा था. मीना के जाने के बाद सूरज ने अपने कपडे निकाल कर , बिस्तर पर औंधे मूह पड़ गया, और अपनी कमर के नीचे का हिस्सा, एक चादर के ढक लिया

सूरज:

आ जाइए...

(मीना को पुकारा)

मीना मुस्कुराते हुए अंदर आई, और धम से अपनी मोटी गान्ड बिस्तर पर टिका के बैठ गइ , उसी नज़र उल्टे लेटे सूरज पर पड़ी

मीना(मन मे):

हाए, छोटे मालिक का जिस्म तो बहुत गठीला है, लगता है खूब दंड मारते है, है देख तो कितने कठोर लग्रा, एक बार किसी औरत के ऊपर चढ़ गये तो उसकी चीखे निकाल दे

मीना एक कामुक औरत थी, उसकी शादी के 3 महीने बाद ही उसका घरवाला मर गया, फिर कई सालो तक उसका विवाह ना हो पाया, एक दिन जब सूरज के नाना-नानी ने उनके महेश का रिस्ता उसके लिए भेजा, तो मीना के बाप ने तुरंत हा करदी, भले ही महेश मीना से 25 साल बड़ा हो, पर आख़िर उसका घर तो बस रहा है, तो अंत वोही हुआ जो इस देश की अधिकतर नारियो के साथ होता है,
 
मीना एक कामुक औरत थी, उसकी शादी के 3 महीने बाद ही उसका घरवाला मर गया, फिर कई सालो तक उसका विवाह ना हो पाया, एक दिन जब सूरज के नाना-नानी ने उनके महेश का रिस्ता उसके लिए भेजा, तो मीना के बाप ने तुरंत हा करदी, भले ही महेश मीना से 25 साल बड़ा हो, पर आख़िर उसका घर तो बस रहा है, तो अंत वोही हुआ जो इस देश की अधिकतर नारियो के साथ होता है,

परिवार के दवाब मे आकर समझोता, और मीना महेश से बिहा दी गई, पर भला एक अल्हड़ जवान औरत, किसी अधेड़ उम्र के आदमी के काबू आई है जो मीना आती, बस मीना अपने शादी से अपने अंदर की आग लिए जल रही है.

और क्यूकी उसके संस्कार ऐसे नही थे की वो बाहर मूह मारे जाके, तो कैसे भी करके अपनी चूत का आग झेल रही थी, पर आज सूरज के गठीले जिस्म को देखकर, उसकी चूत चीखें मार-मार रोने लगी.

मीना:

छोटे मालिक, तेल हल्का गरम है इसलिए, डरियेगा नही

सूरज ने हामी मे गर्दन हिला दी, और मीना ने तेल अपनी हथेली मे लेके, उसके जिस्म पर उडेल दिया और हाथ से मलने लगी, इधर तेल की गर्माहट से सूरज की"आअहह" निकली और इधर सूरज के जिस्म की कठोरता से मीना की "अहह" और उसकी चूत ने पेटीकोट पर 2 बूंदे चूत रस टपका दिया.

मीना अब खूब मन लगा कर सूरज का जिस्म पर तेल मल रही थी, कभी उसकी बाजुओं पर, कभी रीड ही हड्डी पर, तो कभी गर्दन पर.

मीना

छोटे मालिक ऐसे मालिश ठीक से ना हो पा री, क्या मे आपके पैरों पर बैठ जाऊं

मीना ने अपने जिस्म की गर्मी के हाथों मज़बूर होकर ये पैंतरा मारा, सूरज बेचारा इस पैंतरा को ज़रूरत समझने की हिम्मत कर बैठा और हा मे गर्दन हिला दी.

बस सूरज की हा होते ही, मीना तुनाकर के अपनी गान्ड सूरज जी जांघों का टिका दी, मीना को मोटी तनदुरुस्त गान्ड का असर सूरज के दिमाग़ से पहले उसके बम-पिलाट लौडे मे हुआ और उसने ठुमका मारा और सख्त होने लगा, मीना ने बिना कोई वक़्त गवाए तेल सूरज की पीठ पर छिड़क दिया और लगी पीठ पर घिस्से मारने, कभी ऊपर, कभी नीचे, कभी दाएँ, कभी बाए.

इन घिस्सो और मीना की गान्ड के मध्यम से सूरज का बम-पिलाट लौंडा उसकी गांड के बोझ के नीचे दब गया, अब पीठ के दर्द से ज़्यादा लौडे मे दर्द हो उठा, पर इन सब बातों से बेख़बर मीना, कमर -तोड़ मालिश मे लगी रही, और अब तो हद हो गइ , मीना हथेली की जगह, अपने कोहनियों से सूरज की मालिश पर उतर आई, इन पोज़िशन को मेनटेन करने के लिए उसे थोड़ा आगे खिसकना पड़ा, जिससे उसकी चूत सूरज की गांड के मोटे उभारों से टकरा गइ , और उसके मोटे-मोटे मम्मे सूरज की पीठ पर ब्लाउस के अंदर से पीस गये

इसका असर सीधा मीना की हूलारे मारती जवानी पे हुआ, और काम- वासना का असर उसके दिमाग़ से चूत पर अविश्वसनीय गति से हुआ और उसकी आँखे पलट गइ , अचानक उसने मालिश बंद करदी

मीना:

आअहह....माआआआअ की आवाज़ ने कमरा गूंजा दिया, और वो कुतिया की तरह जीब निकाल कर हांफने लगी. उसकी चूत ने चूत रस की फुहार मारी जिससे उसका पेटीकोट तर-बतर हो गया, और रस की गर्मी पेटीकोट और चादर से होती हुई, सूरज की गान्ड को मिली, और गर्मी का पता लगते ही सूरज ने गर्दन घुमा कर देखी और उसे दिखी सेक्स की देवी.

हाँ मीना का हुलिया ही कुछ ऐसा हो रखा था, बाल पसीने के कारण उसके चेहरे पर चिपक गये थे, पल्लू सरक कर बिस्तर पर पड़ा था, उसके मम्मे उस छोटे से ब्लाउस मे भीम-काए लग रहे थे, और वो अपनी जीब निकाल कर हाँफ रही थी,बस इतना काफ़ी था, और सूरज के लौडे ने बिना हाथ लगाए वीर्य की वर्षा कर दी, जिससे उसकी गान्ड हवा मे उठने लगी, जैसे उसका लोडा बिस्तर चोद - चोद के छेद कर देगा .

ऐसे मूव्मेंट से मीना की तंद्रा टूटी और उसे आभास हुआ की उसने अभी-अभी ये कैसा गुल खिला दिया है, वो बिना कुछ बोलते तेल की कटोरी हाथ मे लिए, सर पे पाँव रखकर भागी. इधर सूरज मिया भी माल मे सने हांफते हुए बिस्तर पर औंधे मूह पडे रहे.

कमरे मे तो काम-वेग थम गया था, इन दोनो को ये नहीं पता था, की इनकी इस रास लीला को दो आँखे और देख रही थी, जिसकी हालत भी बेहद नाजुक बनी हुई थी.
 
ऐसे मूव्मेंट से मीना की तंद्रा टूटी और उसे आभास हुआ की उसने अभी-अभी ये कैसा गुल खिला दिया है, वो बिना कुछ बोलते तेल की कटोरी हाथ मे लिए, सर पे पाँव रखकर भागी. इधर सूरज मिया भी माल मे सने हांफते हुए बिस्तर पर औंधे मूह पडे रहे.

कमरे मे तो काम-वेग थम गया था, इन दोनो को ये नहीं पता था, की इनकी इस रास लीला को दो आँखे और देख रही थी, जिसकी हालत भी बेहद नाजुक बनी हुई थी.

अब आगे -

वो दो आँखे किसी और की नही बल्कि सीमा की ही थी, वो बेचारी टाय्लेट करके सूरज के कमरे की ओर आई तो उसने देखा सूरज के कमरे का दरवाज़ा हल्का भीड़ा हुआ था, उसने जैसे ही दरवाज़ा धकेलने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसे रूम मे से मीना की आवाज़ आई और ना जाने क्या सोचा कर उसके बढ़ते हुए हाथ थम गये, और फिर उसने वोही देखा जो आप लोगो ने देखा, उसकी चढ़ती जवानी उस कामवेग को सहन ना कर सकी, और उस कामुक दृश्य को देखकर उसकी मुनिया रोने लगी, और उसका हाथ अनायास ही अपनी चूत पर चला गया और वो उस पर घस्से मारने लगी, जैसे-जैसे अंदर की करवाही ज़ोर मार रही थी वैसे- वैसे सीमा के घस्से ज़ोर पकड़ रहे थे और जब वो झड़ने वाली थी तो उसे किसी के कदमो की आवाज़ आई और उसका चरम आते-आते रह गया और वो अपने कमरे की ओर भागी,

जैसे ही कमरे मे पाँव रखा तो पड़ोस के कमरे से मीना बाहर की ओर दौड़ती उसे दिखी, उसका पल्लू अस्त-व्यस्त था, और उसकी मोटी मोटी चुचिया हिलोरे मारते हुए ब्लाउस मे ऊपर-नीचे हो रहीं थीं, उसका ऐसा रूप देखकर सीमा की चूत मे नदियाँ बह निकली और उसने कस के एक बार अपनी मुनिया बिना पैंटी के ऊपर से सहला दी और बस ये काफ़ी था उसके झड़ने के लिए, सीमा ऐसे झड़ी ऐसे झड़ी की उसकी पिंडलियाँ तक कांप गइ और वो अपनी चूत हाथों में भींचती हुई धडाम से फर्श पर जा गिरी, फर्श पर ऐसा लग रहा था मानो उसने पिशाब कर दिया हो, उसकी साँसे इतनी तेज़ चल रही थी जिससे उसके अमृत कलश उठक-बैठक कर रहे थे, ये उसकी अब तक की ज़िंदगी का सबसे ज़बरदस्त ऑर्गॅज़म था, जब उसके सर से काम -वेग कुछ कम हुआ तो उसे अपनी स्थिति का अहसास हुआ तो उसने झट-पट अपने आप को ठीक किया और बिस्तर पर जाके लेट गइ , और बीते लम्हो को सोचने लगी.

……………………..

उधर सूरज ने भी अपनी सांसो पर काबू पा लिया और पास पड़े कपड़े से अपने वीर्य को सॉफ किया, ये उसके जीवन का वीर्य वीर्य पात था जो उस एक औरत के द्वारा हुआ था, उसके सरीर मे एक भीनी - भीनी चंचलता फेल गइ और मूह पे मुस्कुराहट, उसने तय कर लिया की जब मीना ने इस स्थिति की शुरुआत की है तो वो उसे ज़रूर चोद के रहेगा, अपने इस संकल्प को दृढ़ करते हुए उसकी आँख लग गइ .

रात का खाने का वक़्त हो चला,नानी ने सीमा को सूरज को बुलाने के लिए भेजा, सीमा ने जाकर सूरज के दरवाजे पर दस्तक देने को हुई पर उसके हाथ लगाते ही दरवाज़ा खुल गया, क्यूकी सूरज सोने से पहले दरवाज़ा बंद करना भूल गया था, सीमा ने कमरे के अंदर झाँका तो वहाँ घुप अंधेरा फेला था, सीमा ने अंधेरे मे टटोलते हुए लाइट का स्विच पर हाथ मारा तो बल्ब की रोशनी पूरे कमरे मे फेल गइ और सीमा की सांस हलक को आ गई, क्यूकी सामने का नज़ारा ही कुछ ऐसा था, सूरज नंग धड़ंग बिस्तर पर पड़ा खर्राटे मार रहा था, और उसका पप्पू अपना विकराल रूप धारण किए आसमान को चुनौती दे रहा था, इधर सीमा उसके नाग को आँख फाडे देख रही थी

ये उसके जीवन का पहला लाइव लंड था जो उसने देखा था, आज तक सिर्फ़ पॉर्न मे ही उसने लंडो का दर्शन किया था, लंड के इतने नज़दीक दर्शन से उसके अंदर एक चंचलता हुई ओर ना चाहते हुए भी उसके पेर अनायास की सूरज के बिस्तर की ओर बढ़ चले, सूरज मिया इन सब चीज़ो से बेख़बर सपनो की दुनिया या चुदाई की दुनिया कहना ज़्यादा बहतर होगा, मे डूबे हुए थे, जैसे-जैसे सीमा बिस्तर के नजदीक आ रही थी वैसे-वैसे उसके जिस्म मे अलग बेचैनी उठती जा रही थी, वो सम्मोहित से होती हुई आगे बढ़ी जा रही थी की उसका घुटना बेड से टकराया और उसका बॅलेन्स बिगड़ गया और वो धडाम से बिस्तर पर गिरी और उसका हाथ सूरज की नगी जांघों पर लगा और उसी के साथ सूरज के जिस्म मे हल्की सरसराहट हुई पर उसकी नींद नही खुली,
 
अब सिचुयेशन ऐसी थी की सीमा बिस्तर पर पड़ी थी और उसका चेहरा सूरज की दांई जाँघ के काफ़ी करीब था और उसका हाथ उसके जाँघ पर था, सीमा जब इस सोच के बाहर आई तो उसने झट से अपने आप को संभाला ओर फिर वापस उठने को हुई, पर जैसे ही वो खड़ी होने वाली थी उसकी नज़र सूरज के बमप्लास्ट लौडे पर पड़ी और फिर सूरज के चेहरे पर, जब उसे कन्फर्म हो गया की सूरज की नींद नही टूटी तो उसके अंदर उत्सुकता ने जनम किया, ओर सहसा उसने अपना हाथ सूरज के बमप्लास्ट लौडे की ओर बढ़ा दिया

जैसे-जैसे उसका हाथ लंड की ओर बढ़ रहा था वैसे-वैसे उसकी साँसे चढ़ रही थी, वो जानती थी की उसे ऐसा नही करना चाहिए ये गलत है सूरज उसका भाई है, पर अपने सामने एक मस्त तनदुरुस्त लौडे को देखकर उसके तर्क निरर्थक होते जा रहे थे, ओर आख़िर कर उसने तर्को को दरकिनार कर के बेहद धीरे से उसकी उंगलियो ने सूरज के लौडे पर उठी हुई नसों को छूआ, सीमा की उंगलियो के छुअन से लौडे ने एक मदमस्त ठुमका मारा,

लौडे की ये अदा देखकर सीमा के चेहरे पर एक स्माइल आ गइ ओर फिर उसने अपनी दांई मुट्ठी मे बेहद धीरे से उसके लौडे को थाम लिया, लौडे को थाम ते ही उसकी आँखे लौडे की गर्माहट से बंद होती चली गई, उसे ना जाने क्यू पर लौडे को थामना बेहद अच्छा लग रहा था, वो इस भावना मे ये भी भूल गइ की पल-पल उसकी कसावट लौडे पर बढ़ती जा रही है.

उधर लौडे पर कसावट के बढ़ने से सूरज भी नींद मे बेचन होता जा रहा था, उसे लग रहा था मानो मीना उसके लौडे पर चढ़ कर कूद रही हो, और उसने नींद मे ही अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया, उसकी कमर के हिलते ही उसका लौंडा सीमा के हाथों मे ऊपर नीचे हो रहा था मानो उसके हाथों को चोद रहा हो,

सूरज की ऐसी हरकत देखकर सीमा ने भी अपनी कसावट लौडे पर और मज़बूत कर दी, अपने लौडे पर इस अप्रत्याशित कसाव से सूरज की नींद एका- एक खुल गइ और उसने अपनी आँखे अपने लौडे की ओर की, पर वहाँ का नज़ारा देख कर सूरज की आँखे बड़ी हो गइ , उसे यकीन नही हो रहा था की सीमा उसकी सग़ी बहन कुछ ऐसा कर सकती है वो भी उसके सगे भाई के साथ, जब सूरज सीमा की ओर देखा रहा था तो उसका लंड जो कुछ पल पहले तक सीमा के हाथों को चोद रहा था रुक गया, जिससे सीमा की तंद्रा टूटी और झट से उसने सूरज की ओर देखा, पर तब तक सूरज ने वापस अपनी आँखे बंद कर ली थी, सीमा जब संतुष्ट हो गइ तो उसने फिर से अपना काम(लंड थमाई ) शुरू किया, इधर सूरज पज़्ज़ल सॉल्व करने की कोशिश मे लगा था की आख़िर सीमा ऐसा क्यू कर रही है, पर जब कुछ देर माथा पच्ची करने के बाद भी उसे कुछ समझ नही आया तो उसने सब ऊपर वाले के भरोसे छोड़ कर लंड थमाई का मज़ा लेने लगा.

जितना मज़ा सूरज को सीमा के हाथों लंड थमाई का आ रहा था उतना ही मज़ा सीमा को लंड थामने का, दोनो अपने मज़ा मे चूर थे की सीढ़ियो पर कुछ खटपट हुई जिसे सीमा ने सुन लिया उसने तुरंत सूरज का लोडा छोड़ा और झट से दरवाज़े की ओर भागी, जैसे ही वो दरवाज़ा खोल कर बाहर आई उसे मीना ऊपर आते दिखाई पड़ी.
 
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