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अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

रज़िया की नाक से निकलती साँसें जीशान की नाक में जाने लगती हैं, मुँह से निकलता सलाइवा जीशान चाटने लगता है, और अपने हाथों से उसके नरम जिस्म को कसने लगता है। रज़िया अब पूरे तरह जीशान के कब्ज़े में आ चुकी थी।

बिना रज़िया से इजाजत लिए जीशान उसकी नाइटी को खोलने लगता है। रज़िया थोड़ा ऐतराज दिखाते हुये उसके हाथ को पकड़ लेती है।

जीशान आज सोचकर आया था कि वो रज़िया के दिल के साथ उसका जिस्म भी जीत लेगा। वो जानता था कि अब उसे ह इस घर को और इस घर की औरतों का ख्याल रखना है, और इस काम को बखूबी निभाते हुये आज वो अपनी दादी को अपने काबू में कर रहा था।

रज़िया जीशान के इस तरह से मसलने से बेचैन वो उठी थी। वो जीशान के होंठों को अब अपने मुँह में खींचकर उसे चूसने लगती है। जीशान रज़िया की नाइटी निकाल देता है और उसकी दोनों चुचियाँ जीशान के सामने आ जाती हैं। उसने शायद कभी इतनी खूबसूरत चुचियाँ नहीं देखी थी। इसलिए वो कुछ देर के लिए सब कुछ भूल कर उन्हें देखता रह जाता है।

रज़िया जीशान के सर को पकड़कर उसे अपने चुचियों पे झुकाती है-“ले, अपनी रज़िया का दूध पी जा… आज से तू कभी भूका नहीं सोएगा जीशान…”

जीशान अपना मुँह खोलकर रज़िया की चुचियों को अपने मुँह में खींच लेता है और उसे चूसता चला जाता है-“गलप्प्प गलप्प्प…” और कभी होंठों को तो कभी निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है। मगर जीशान भी अमन का बेटा था-जल्दबाज।

अपनी दादी को हाँसिल करने की जल्दी में वो अपना एक हाथ रज़िया की चूत पे रख कर दबा देता है और उसी पल रज़िया उसे धक्का देकर अपने से अलग कर देती है।

रज़िया-“ उंगली क्या दी तुम तो पूरा हाथ खींच रहे हो, चले जाओ यहाँ से…”

जीशान-मगर?

रज़िया-“अगर मगर कुछ नहीं , मैंने कहा ना चले जाओ यहाँ से…”

जीशान को बुरी तरह गुस्सा आ जाता है और वो रज़िया के रूम से निकलकर अपने रूम में चला जाता है। उसके जाने के बाद रज़िया अपनी पैंटी निकालकर देखती है। वो पूरी की पूरी गीली हो चुकी थी और यही वजह थी रज़िया के इस तरह विहेब करने की। पानी निकलने के बाद तो शेर भी ढेर हो जाता है, फिर शेरनी क्या चीज है।

जीशान को समझ में नहीं आ रहा था कि रज़िया ने ऐसा क्यों किया? कभी उसे लगता था कि रज़िया उसे सब कुछ दे देगी और कभी रज़िया उसके साथ गैरों जैसा बर्ताव करती थी।

रात काटना उसके लिए बहुत मोहाल साबित हुआ। खड़े लण्ड के साथ सोना जीशान को नहीं आता था।

सुबह 7:00 बजे-

जीशान फ्रेश होकर बाहर गार्डन एरिया में जाने लगता है। वो भी अमन की तरह अपने फिटनेस पे बहुत ध्यान देता था।

अनुम और सोफिया उससे पहले ही जाग चुकी थीं। और सुबह के नाश्ते की तैयार करने में लगी हुई थी। लुबना घोड़े बेच के सो रही थी।

एक बार तो जीशान का दिल किया कि वो रज़िया के रूम में जाकर देखे। मगर फिर वो खुद को गालियाँ देते हुये आगे बढ़ जाता है वो। नग़मा के रूम के सामने उसे आवाज़ सुनाई देती है तो वो नग़मा के रूम में चला जाता है। आवाज़ नग़मा के बाथरूम में से आ रही थी। नग़मा ने बाथरूम का दरवाजा लाक नहीं किया था। और अंदर का नजारा जीशान साफ-साफ देख सकता था।

नग़मा गाना गुनगुना रही थी और शावर से नहा रही थी। बिना ब्रा वाली उस टीशर्ट में से नग़मा की भरी हुई दोनों चुचियाँ देखकर जीशान को पहले तो हैरानी होती है कि ये नग़मा ही है ना? वो ब्रा और पारदर्शी पैंटी में नहा रही थी।

अचानक नग़मा को एहसास होता है कि कोई उसे देख रहा है। मगर वो उस तरफ ना देखते हुये घूम जाती है और उस देखने वाले को अपने गाण्ड दिखाती हुई वो टीशर्ट उतार देती है। चिकनी पीठ और उसपे से गिरता हुआ पानी जो उसकी पैंटी को गीला कर रहा था, जिसकी वजह से पैंटी में से झाँक ती हुई चूत तड़प रही थी, जीशान के दीदार करने के लिए। नग़मा गाना गुनगुनाते हुये घूमती है और झुक के अपनी पैंटी भी निकाल देती है। उसके बाद नग़मा वो करती है जो जीशान ख्वाब में भी नहीं सोच सकता था… वो अपनी कुँवारी चूत को दोनों हाथों से मसलने लगती है।

जीशान नग़मा की कुँवारी चूत को देखकर पागल सा हो जाता है और उसका लण्ड उसके पैंट में झटके खाने लगता है। सामने हुश्न की मलिका खड़ी हुई उसे अपनी तरफ खींच रही थी। मगर जीशान जानता था कि अगर अभी कोई कदम उठाया तो गलत हो सकता है। वो अपने लण्ड को अपने पैंट में अड्जस्ट करता हुआ बाहर निकल जाता है।

उसके बाहर जाते ही नग़मा दरवाजा की तरफ देखकर मुश्कुरा देती है।

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लुबना और अनुम फॅक्टरी जाने के लिए तैयार खड़ी जीशान का इंतजार कर रहे थे।

लुबना-अम्मी, कहाँ हैं भाई?

अनुम-“मैं अभी उसे देखकर आती हूँ …” वो जीशान के रूम में चली जाती है।

जीशान आईने के सामने खड़ा अपने बाल सँवार रहा था। अनुम को अपने सामने खड़ा देखकर वो एक हल्की सी स्माइल उसे देता है-“थैंक्स मेरी बात मानने के लिए…”

अनुम उससे देखने लगती है। उन आँखों में कई बातें थीं, कई सवालात थे, और उनके जवाब जीशान को देने थे। कल जो उसने कसम खाया था, उस बात से अनुम काफी परेशान थी और ये उसके चेहरे से साफ बयान हो रही थी। अनुम बिना कुछ बोले जीशान के चेहरे को देखने लगती है।

जीशान-क्या हुआ अम्मी?

अनुम-कुछ नहीं , चलो।

जीशान-चलिए।

वो दोनों रज़िया के पास आते है। अनुम रज़िया से मिलकर बाहर चली जाती है। जबकि जीशान रज़िया को कुछ नहीं कहता बस उसकी आँखों में कुछ तलाश करने लगता है, और वो बात रज़िया बड़ी आसानी से छुपा लेती है।

जीशान कार फॅक्टरी की तरफ चला देता है। लुबना और अनुम दोनों बैक सीट पे बैठी बातें कर रही थी।

जीशान-“अम्मी, लंच टाइम में आप मेरे साथ शॉपिंग करने चल रही हैं, और आज आप मेरी पसंद की ड्रेस लेंगी, ठीक है ना?”

अनुम जीशान की तरफ देखकर मुश्कुरा देती है-“हाँ ठीक है…”

लुबना-“और मेरी शॉपिंग?”

इससे पहले जीशान उससे कुछ कहता, अनुम लुबना को भी साथ चलने के लिए कह देती है। और जीशान चुप हो जाता है। कुछ देर बाद कार फॅक्टरी पहुँच जाती है। वो तीनो फॅक्टरी के अंदर जाने लगते हैं तभी जीशान का सेल फोन बजता है।

जब वो सेल देखता है तो उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है, काल रूबी का था। जीशान काल रिसीव करता है। दूसरी तरफ से रूबी की घबराई हुई आवाज़ सुनाई देती है।

जीशान-“क्या बात है रूबी? बहुत परेशान लग रही हो…”

रूबी-“जीशान आप क्या मेरे घर आ सकते हैं? मुझे बहुत घबराहट सी हो रही है। अम्मी अब्बू भी शादी में गये हैं। प्लीज़्ज़… जल्दी आ जाए आप…”

जीशान-“ओके, मैं अभी पहुँचता हूँ …”

अनुम-“क्या हुआ जीशान ? चलो अंदर…”

जीशान-“अम्मी, मैं बस अभी आया। एक दोस्त की तबीयत खराब है। आप अंदर बैठिए मैं थोड़ी देर में आया…”

लुबना-“जल्दी आना, वरना पता चला हम यहाँ बैठे रह गये और आप वहाँ दोस्त के साथ पार्टी कर रहे हो…”

जीशान लुबना की तरफ देखकर दाँत पीसते हुये उससे कहता है-“तुझे तो मैं वहाँ से आकर देखता हूँ …”

अनुम और लुबना फॅक्टरी के अंदर चले जाते हैं, और जीशान कार रूबी के घर के तरफ दौड़ा देता है। जीशान ने जब से कालेज छोड़ा था, तब से वो रूबी से पर्सनल नहीं मिला था। फोन पे सिर्फ़ दोनों के बीच बात हुआ करती थी।

रूबी ने भी जीशान को ज्यादा परेशान नहीं किया था। वो भी जानती थी कि जीशान इस वक्त किस हालत से गुजर रहा है। हालाँकि डाक्टर सोनिया ने जीशान को कई बार अपने घर पे इन्वाइट किया था, मगर जीशान कोई ना कोई बहाना बनाकर बात टाल देता था।

मगर आज रूबी की घबराई हुई आवाज़ सुनकर जीशान से रहा नहीं गया और वो रूबी के घर पहुँच जाता है। जब वो रूबी के घर के अंदर पहुँचता है तो उसे रूबी बिल्कुल ठीक-ठाक हँसती हुई दरवाजा पे खड़ी मिलती है।

जीशान पूछता है-“अब कैसी तबीयत है तुम्हारी ? डाक्टर को काल करूँ? हुआ क्या था?”

रूबी-“पहले बैठो तो सही …” वो जीशान का हाथ पकड़कर उसे अपने बेडरूम में ले जाती है और बेड पर बैठाकर उसके पास आकर बैठ जाती है-“कुछ नहीं हुआ मुझे, बस तुम्हारी याद आ रही थी तो बहाना करके बुला लिया तुम्हें…”

जीशान-“व्हाट नानसेन्स रूबी? ये भी कोई तरीका हुआ बुलाने का? मैं कितना परेशान हो गया था, जब मैंने तुम्हारी वो परेशानी वाली आवाज़ सुनी। मैं जा रहा हूँ …”

 
रूबी जीशान का हाथ पकड़कर उसे बेड पे बैठा देती है और उसके ऊपर चढ़ जाती है-“जब देखो बिजी बिजी… आखिर लाइफ में कुछ एजाय्मेंट है भी कि नहीं तुम्हारे? समर कैम्प से आने के बाद तो तुम्हारी सूरत देखने को तरस गई हूँ मैं…”

जीशान-“रूबी, मुझे बहुत देर हो रह है। मुझे जाना है, बाद में मिलते हैं…”

रूबी ने जीन्स की पैंट और नाइटी पर एक जैकेट पहन रखी थी। वो जीशान की आँखों में देखते हुये अपनी जैकेट निकालकर फेंक देती है। गुलाबी कलर की नाइटी में रूबी कयामत लग रही थी। जीशान की नजरें रूबी के जिस्म पे टिक सी जाती है।

रूबी-“मैं यहाँ तड़प रही हूँ और तुम हो की मेरी प्यास भी नहीं बुझाते…”

जीशान रूबी की कमर को पकड़कर उसे अपने ऊपर गिरा देता है-“मुझे लगा था, तू सुधर गई होगी…”

रूबी-“जिसे तुम्हारा पानी लगा हो, वो कभी नहीं सुधर सकती। तुम्हें पता है, सिर्फ़ तुम्हारे लिए मैं खुद को संभालकर रखी हूँ …”

जीशान रूबी के होंठों को चूम लेता है। रूबी अपना जिस्म ढीला छोड़ देती है जैसे जीशान से कह रही हो-“कर लो जो करना है…”

मगर शायद जीशान का मूड कुछ करने का नहीं था। वो रूबी को कुछ देर चूमने के बाद उसे अपने ऊपर से उतारकर खड़ा हो जाता है।

रूबी तड़पती आँखों से जीशान को देखने लगती है।

जीशान-“मैं बाद में आऊूँगा बाइ…”

रूबी बेड पर उल्ट लेट जाती है-“सारी , मैंने तुम्हारा टाइम वेस्ट किया। मुझे माफ कर दो। आइन्दा मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूँगी। अगर मुझे तुम्हारे याद भी आएगी ना तो मैं नींद की गोलिया खा लिया करूँगी, मगर तुम्हें काल नहीं करूँगी…”

जीशान रोती हुई रूबी की कमर पर जैसे ही हाथ रखता है, रूबी का मुँह बंद हो जाता है।

रूबी मुश्कुराके जीशान की तरफ देखती है और जीशानरूबी की जीन्स की पैंट खोलकर उसे नीचे खींच लेता है।

रूबी उठकर बैठ जाती है और जीशान के होंठों से चिपक जाती है। वो बड़े जोर-जोर से जीशान के होंठों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है-“मैं तड़प रही हूँ जीशान आपके लिए… इससे पहले कि मैं मर जाऊूँ, मुझे अपना बना लो, मुझे सब कुछ दे दो, मेरा सब कुछ ले लो जीशान…”

जीशान भी सब कुछ भूल करके रूबी की जवानी में खो जाना चाहता था। पिछले एक साल से उसे चूत के दीदार नहीं हुये थे। वो तो जैसे भूल ही गया था कि चूत और चुदाई होती क्या है?

रूबी जीशान का पैंट को खोलकर नीचे गिरा देती है और उसके सामने जीशान का लण्ड जैसे ही आता वो… वो अपना मुँह खोलकर उसे चाटने लगती है गलप्प्प गलप्प्प।

जीशान-“अह्ह… रूबी ऐसा मत कर मुझे फॅक्टरी जाना है अह्ह…”

रूबी-“कहीं भी जाओ मगर अभी ये सिर्फ़ मेरा है गलप्प्प गलप्प्प…”

जीशान के लण्ड में भी धीरे-धीरे अकड़न आने लगती है और खून से नशें मोटी होने लगती हैं। वो जो पिछले एक साल से आराम कर रहा था, आज उसे जैसे रूबी के गरम होंठों ने फिर से जगा दिया था। जीशानरूबी की नाइटी निकाल देता है और पैंटी रूबी निकालकर फेंक देती है।

जीशान को हैरानी होती है, जब वो रूबी की चूत के होंठों को खोलकर अपनी जीभ उसमें घुसना चाहता है। रूबी अब तक कुँवारी थी।

रूबी-तुम्हें क्या लगा था?

जीशान कुछ नहीं कहता और अपनी जीभ से उसकी चिकनी बिना बालों वाली चूत को चाटने लगता है गलप्प्प गलप्प्प।

 
रूबी बेडशीट पकड़ लेती है। उसके आँखों में समर कैम्प का वो दिलकश हादसा घूमने लगता है, जब जीशान ने उसकी गाण्ड में पहली बार अपना लण्ड डालकर उसके जमकर घिसाई किया था।

जीशान की जीभ रूबी के क्लोटॉरिस के साथ छेड़खानी करने लगती है।

रूबी-“अह्ह… जीशान डाल दो ना अंदर उम्ह्ह…”

जीशान अपने लण्ड पे रूबी की चूत से निकला पानी लगाकर जैसे ही अपने लण्ड को उसके चूत पे लगाता है, रूबी उसके लण्ड को हाथ में पकड़कर अपनी गाण्ड के सुराख पे लगा देती है।

रूबी-“उम्ह्ह… यहाँ डालो…”

जीशान का लण्ड बड़ा था और रूबी की गाण्ड का सुराख बहुत छोटा। कई बार कोशिश करने के बाद भी वो अंदर नहीं जा पाता। रूबी पास में पड़ी हुई तेल के बोतल जीशान के हाथ में थमा देती है। जीशान धीरे-धीरे सारा तेल रूबी की गाण्ड के सुराख में डाल देता है और थोड़ा तेल अपने लण्ड पे लगाकर फिर से कोशिश करता है।

रूबी के चीख निकलने लगती है, जैसे-जैसे तेल से भीगा हुआ जीशान का लण्ड उसकी गाण्ड में घुसने लगता है-“अह्ह… मर जाउन्गी मैं, निकाल लो वापस इसे अह्ह…”

जीशान-“अब बहुत देर हो चुकी है मेरी जान, अब नहीं अह्ह…”

रूबी-“नहीं ना जीशान अह्ह… कम से कम आराम-आराम से तो करो मुझे… अम्मी जी अम्मी जीईई…”

जीशान अपने बाप की औलाद था। एक बार वो चूत में या गाण्ड में घुस जाता तो अपनी मर्ज़ी से बाहर निकालता था। जीशानरूबी की कमर को पकड़कर अपने लण्ड को जितनी अंदर डाल सकता था, डालकर उसकी गाण्ड मारने लगता है।

और रूबी चिल्लाने लगती है। मगर उस वाली घर में उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था। रूबी धीरे-धीरे शांत होने लगती है। उसकी गाण्ड का सुराख अब जीशान को अपने अंदर अड्जस्ट कर चुका था, वो हर झटके के साथ अपनी कमर को ऊपर उठाकर जीशान का साथ देने लगती है। दोनों पसीने में भीग चुके थे। मगर दोनों में से कोई भी हार मनाने को तैयार नहीं था, ना जीशान की स्पीड कम हो रही थी और ना रूबी की कमर हिलना बंद हो रही थी। जीशान रूबी की चूत पे हाथ रख कर दनादन अपने लण्ड को रूबी की चूत में अंदर-बाहर करने लगता है।

जीशान एक तरफ से रूबी की चूत सहलाए जा रहा था, दूसरी तरफ से गाण्ड में मोटा लण्ड ठ ठूँसे जा रहा था। इतने बेरहम अंदाज में जीशान उसकी गाण्ड मारने में लगा हुआ था कि कुछ ह देर में रूबी की चूत से ढेर सारा पानी बहने लगता है, और वो बेड पर ढेर हो जाती है। जीशान भी उसके ऊपर लेट जाता है। जब दोनों अपनी साँसे संभाल के उठकर बैठते हैं तो रूबी जीशान के होंठों को अपने कब्ज़े में लेकर चूमने लगती है।

रूबी-मुझे प्रामिस करो, मुझसे मिलने आओगे जब मैं कहूँ गी।

जीशान-पक्का वादा ज़रूर आऊूँगा। अब मैं जाऊूँ, अम्मी इंतजार कर रही होंगी।

रूबी-“ठीक है, वैसे दिल तो नहीं कर रहा मेरा, मगर ओके। आप अभी जा सकते हो।

जीशान एक बार और रूबी को चूमते हुई फॅक्टरी चला जाता है।

 
लंच टाइम हो चुका था और अनुम लुबना के साथ जीशान का ही इंतजार कर रही थी।

जीशान-सारी सारी मुझे आने में देर हो गई।

अनुम-कहाँ रह गये थे जीशान? मुझे यहाँ लाकर खुद गायब हो गये हो।

जीशान-खाना खाया आपने?

लुबना-बस आपका ही इंतजार कर रहे थे जहाँपनाह।

जीशान-अम्मी, आप आइए मेरे साथ, और तू भी ले ले मोटी ।

अनुम-कहाँ?

जीशान-शॉपिंग करने।

अनुम-अब रहने भी दे जीशान, मेरे पास बहुत सारे ड्रेस हैं।

जीशान-आप चल रहे हो या नहीं ?

अनुम-अच्छा बाबा चलो, पहले खाना तो खा लो।

जीशान-किसी रेस्टोरेंट में खा लेंगे।

अनुम खड़ी हो जाती है और बाहर कार के पास आ जाती है।

लुबना मुँह फुलाए अब भी चेयर पर बैठी हुई थी।

जीशान लुबना से-क्या हुआ, चलना नहीं है क्या?

लुबना-अम्मी को इतने प्यार से चलने के लिए बोले आप, और मुझे एक बार भी नहीं । नहीं चलना मुझे आपके साथ, जाओ तुम दोनों।

जीशान को उस वक्त लुबना का वो मुँह फुलाया हुआ चेहरा देखकर बहुत प्यार आ रहा था। उसपे बचपन में जब भी लुबना नाराज हो जाती थी, वो इसी तरह मुँह फुलाकर बैठा जाया करती थी। जीशान उसके पास आता है और उसके गाल पे हल्के से पप्पी ले लेता है-नथींग पर्सनल।

लुबना का दिल बाग-बाग हो जाता है और वो मुश्कुराती हुई जीशान का हाथ पकड़कर बाहर निकल जाती है।

एक लड़की जिससे मोहब्बत करते हैं वो उसके सामने कितना भी नाराजगी दिखाने की कोशिश करे मगर जब वो शख्स उस लड़की को जरा सा प्यार जताता है वो लड़की अपना सारा गुस्सा भूल जाती हैं। लुबना का भी उस वक्त वही हाल था। उसे तो बस जी शान से प्यार चाहिए था, जरा सा ही सही मगर सच्चा प्यार। मगर अभी तक जीशान ने लुबना से किसी भी तरह की मोहब्बत का इजहार नहीं किया था।

वो तीनों एक बड़े से शॉपिंग माल में पहुँच जाते हैं, जहाँ जीशान अनुम और लुबना को अपनी पसंद के कई ड्रेस खरीद के देता है। अनुम और लुबना से चोरी से वो सोफिया और रज़िया के लिए नाइटी खरीद लेता है। अनुम नग़मा के लिए भी दो ड्रेस पसंद करती है।

लंच करने के बाद तीनों फॅक्टरी वापस आ जाते हैं। अनुम बहुत खुश नजर आ रही थी और उसके चेहरे पे मुस्कान देखकर जीशान भी बहुत खुश था उसे यकीन हो चला था कि उसकी मोहब्बत एक ना एक दिन अनुम के दिल से उसके अब्बू अमन ख़ान का नाम हमेशा हमेशा के लिए निकाल देगी।

रात 7:00 बजे-जीशान अनुम और लुबना के साथ घर पहुँच जाता है।

रज़िया-अरे आ गये तुम लोग? मैं अभी तुम्हें काल ही करने वाली थी।

अनुम रज़िया के साथ उसके रूम में चले जाते हैं, और लुबना अपने ड्रेस लेकर उसे अपने रूम में ट्राई करने चलौ जाती है।

सोफिया उस वक्त अपने रूम में सोई हुई थी आज है उसकी एम॰सी॰ पीरियड्स ख़त्म हुई थी। नहाकर वो अपनी नाइटी में ही बेड पे गहरी नींद में सोई हुई थी।

नग़मा जीशान के हाथ में बैग देखकर उसे पूछने लगती है-“भाई जान इतने सारे बैग्स… इनमें क्या है?”

जीशान-कपड़े हैं। नग़मा तेरे भी हैं, ले पहनकर देख ले अगर फिटिंग ठीक नहीं आए तो बदल लेंगे।

नग़मा-किसके पसंद के हैं?

जीशान-मेरी पसंद के हैं।

नग़मा-फिर तो फिटिंग एकदम सही आएगी।

जीशान-क्याअ?

नग़मा-“कुछ नहीं …” वो हँसती हुई जीशान के हाथ में से बैग लेकर अपने रूम में चली जाती है।

और जीशान उसकी बात पे मुस्कुराता हुआ सोफिया के रूम में चला जाता है।

 
सोफिया को गहरी नींद में सोया देखकर वो वापस अपने रूम में जाने लगता है। मगर फिर कुछ सोचते हुये वापस सोफिया के पास आकर उसके चेहरे के पास बैठ जाता है। सोफिया उस वक्त निहायत ही खूबसूरत लग रही थी। चेहरे पे आती उसकी जुल्फें बहुत प्यारी लग रही थीं। जीशान से रहा नहीं जाता और वो किसी परवाने की तरह शमा को चूमने की ख्वाहिश में अपने होंठ सोफिया के होंठों पर रख देता है।

सोफिया नींद से जाग जाती है। अपने चेहरे के इतने करीब जीशान को पाकर सोफिया पहले तो डर जाती है-“ओह्ह… जीशान तुम हो… मगर तुम इस वक्त?”

जीशान-लो जी कर लो बात? रात होने को आई है और आप पूछ रहे हो कि मैं इस वक्त? अरे बाजी उठिए, क्या हुआ है आपको?

सोफिया उठकर बैठ जाती है-“हाँ वो थकान से आँख लग गई थी। इस बैग में क्या है?” जीशान के हाथ में बैग देखकर सोफिया उससे पूछ लेती है।

जीशान-सरप्राइज।

सोफिया-किसके लिए?

जीशान-“उफफ्फ़हो… बाजी, आपके लिए और किसके लिए?”

सोफिया-सच बता ना क्या लाया है मेरा क्यूट सा भाई?

जीशान-क्या कहा आपने क्यूट, जब दूँगा ना तब पता चलेगा?

सोफिया-क्या? क्या कहा तूने ?

जीशान-“मैंने कहा जब गिफ्ट दूँगा ना तब पता चलेगा कितना क्यूट हूँ मैं?”

सोफिया-प्लीज़्ज़… बता भी दे क्या लाया है मेरे लिए?

जीशान-एक शर्त पर दूँगा।

सोफिया की आँखें बैग पर ही टिकी हुई थीं। उसे बहुत जल्दी थी ये पता करने की कि जीशान उसके लिए क्या लाया है? कहा-क्या शर्त है तेरी बोल जल्दी से?

जीशान-“मेरी शर्त ये है कि आप इसे पहनकर मुझे देखाओगी। और हाँ, किसी और को नहीं । दूसरी शर्त ये है कि आप सिर्फ़ इसे ही पहनोगी…”

सोफिया को कुछ-कुछ समझ में आ रहा था और कुछ नहीं । वो जीशान के हाथ में से बैग छीन लेती है और उसे खोलकर जब नाइटी बाहर निकालती है तो उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। वो एक पिंक कलर की पारदर्शी नाइटी थी और इतनी छोटी लग रही थी कि अगर सोफिया उसे पहनती तो वो उसके घुटनों के ऊपर तक चढ़ जाए।

जीशान को पता था कि सोफिया या तो इनकार कर देगी या वो नाइटी उठाकर उसके मुँह पर मार देगी। मगर सोफिया ऐसा कुछ नहीं करती, वो पूरी नाइटी को अच्छे से देखती है और फिर वापस बैग में रख देती है।

जीशान-आपको पसंद आई?

सोफिया-“अच्छी है ले रख ले अपने पास अपनी बीवी को पहनाना। कम्बख़्त मरे मुझे ऐसे चीज गिफ्ट करता है जान से मार दूँगी …” वो उठकर खड़ी हो जाती है।

जीशान उसके पीछे जाकर उसे अपने बाहों में भर लेता है, और उसके कान में धीरे से कहता है-“मैं जानता हूँ ये नाइटी आप ज़रूर पहनोगी। मेरा दिल मुझसे झूठ नहीं कह सकता सोफिया…”

सोफिया मुड़कर जीशान को जवाब देना चाहती है मगर तब तक जीशान उसके रूम से बाहर निकल चुका होता है।

एक दूसरी नाइटी जो वो रज़िया के लिए लाया था, वो रज़िया को देने के लिए उसके रूम में जाता है। जब वो रज़िया के रूम में पहुँचता है तो उसे रज़िया रूम में दिखाई नहीं देती। बाथरूम में से पानी गिरने की आवाज़ सुनाई देती है। जीशान थोड़ी देर वहीं बैठकर रज़िया का इंतजार करने लगता है। मगर अचानक उसे रात वाली बात याद आ जाती है, और वो उठकर बाहर जाने लगता है। फिर कुछ सोचते हुये वो नाइटी का बैग वहीं रज़िया के बेड पर रख कर अपने रूम में चला जाता है।

लुबना अपने सभी ड्रेस पहनकर देख चुकी थी और सभी को बता भी चुकी थी इसे। अपने ड्रेस वो जीशान को बताने के लिए जब उसके रूम में जाती है। जीशान उस वक्त अपने बेड पर लेटा हुआ सोफिया के बारे में ही सोच रहा था। उसे सोफिया से मोहब्बत तो नहीं हुई थी, क्योंकी उसकी मोहब्बत तो कोई और थी, जो उसे प्यार भी करती थी और इजहार-ए-मोहब्बत भी नहीं करती थी।

लुबना जीशान के सामने आकर खड़ी हो जाती है-कैसी लग रही हूँ मैं भाई?

जीशान लुबना को नीचे से ऊपर तक देखने लगता है-बहुत खूबसूरत ।

लुबना को अपने कानों पर यकीन नहीं होता। वो जीशान के सामने आकर उसकी आँखों के सामने हाथ हिलाती है।

जीशान-क्या है, क्यों परेशान कर रही है?

लुबना-भाई मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि आपने मेरी तारीफ़ किया, मुझे चिमटी काटो प्लीज़्ज़… ऐसा लग रहा है जैसे मैं कोई ख्वाब देख रही हूँ ।

जीशान पूरी ताकत से लुबना के बाजू पर चिमटी काट लेता है।

लुबना-अम्मीईई जीईई।

जीशान-बस अब आ गया यकीन? चल जा बाहर अब।

लुबना अपनी उंगलियों को एक करके उसकी मुट्ठी बनाती है, और पूरी ताकत से जीशान के पेट में मार देती है। जीशान को वो मुक्का इतने जोर से पड़ता है कि उसके मुँह से खाँसी निकल जाती है।

लुबना-मैंने पहले ही कहा था कि छुई मुई मत समझना मुझे? प्यार से बोली थी चिमटी काटने के लिए आपने तो अपने भड़ास निकाल ली ।

 
जीशान उसके बाल पकड़कर उसे बेड पर गिरा देता है-“जब देखो धौंस देती रहती है। अभी बताता हूँ तुझे…”

अनुम-क्या बताना है, जरा मैं भी तो देखूं?

लुबना-“अम्मी देखो ना भाई मुझे बोल रहे थे कि तुझे किसी दिन जान से मार दूँगा…”

अनुम जो लुबना की चीख सुनकर किचेन में से जीशान के रूम में आ गई थी।

जीशान-“अरे मोटी कभी तो सच बोला कर? अम्मी मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा इसे। उल्टा इसने देखो मेरे पेट में कितने जोर से मुक्के मारे…”

अनुम-लुब जाओ किचेन में, और खाना डाइनिंग टेबल पर लगा दो।

लुबना जीशान की तरफ मुश्कुराती हुई बाहर चली जाती है।

अनुम-तुम दोनों बच्चे नहीं हो, जब जब देखो झगड़ते रहते हो।

जीशान-अम्मी सच मैं अब बच्चा नहीं रहा, तो मेरी शादी करवा दो ना।

अनुम-अच्छा? सच तू शादी करना चाहता है? सच बोल अभी तेरे लिए लड़कियों की लाइन लगा देती हूँ । बोल कैसे लड़की चाहिए तुझे?

जीशान अनुम के पास आ जाता है-“मुझे जैसी लड़की पसंद है वैसे आपको मिल नहीं सकती, और मैं जिसे चाहता हूँ वो मेरी होना नहीं चाहती…”

अनुम-क्या गोल मोल बातें कर रहा है? साफ-साफ बोल कैसे लड़की चाहिए तुझे?

जीशान-पहले आँखें बंद करो।

अनुम-वो क्यूँ ?

जीशान-करो ना, और जब तक मैं ना कहूँ खोलना मत। मैं आपको एक तस्वीर दिखाता हूँ मुझे वो पसंद है।

अनुम-अच्छा जल्दी लेकर आ, मैं अपनी आँखें बंद कर लेती हूँ ।

जीशान-आपको मेरी कसम, जब तक मैं ना कहूँ आँखें मत खोलना।

अनुम-ठीक है बाबा, बता भी दे।

जीशान अनुम के आँखें बंद करने के बाद उसका हाथ पकड़कर उसे एक जगह खड़ा कर देता है-“अब आँखें खोल दो…”

अनुम जब आँखें खोलती है तो उसके पूरा जिस्म काँप जाता है। वो आईने के सामने खड़ी थी, और जीशान रूम से बाहर जा चुका था।

डाइनिंग टेबल पर अनुम जीशान को घुरने लगती है। वहाँ सभी मौजूद थे, इसलिए अनुम जीशान को कुछ कह भी नहीं सकती थी। मगर जीशान बड़े आराम से खाना खाने में लगा हुआ था। वो सोफिया को चोर नजरों से देखकर खाना खा रहा था।

नग़मा अपनी कातिल निगाहों से जीशान को ही देख रही थी।

जब जीशान की आँखें उससे मिलती हैं तो जीशान को कुछ अजीब सा महसूस होता है और वो नग़मा से पूछ बैठता है-“क्या बात है नग़मा ड्रेस पसंद नहीं आई तुझे?”

नग़मा-हाँ… वो ना मेरा मतलब है बहुत अच्छे हैं भाई, आपको मेरी पसंद कैसे पता चली ?

जीशान-अम्मी की पसंद के हैं वो ड्रेस।

नग़मा-ओह्ह… अच्छा मुझे लगा अपने पसंद किए हैं क्या?

जीशान-ऐसा समझ ले मेरी भी पसंद शामिल है उसमें।

नग़मा के गुलाबी होंठ और गुलाबी हो जाते है। जीशान को नग़मा कुछ बदली -बदली सी दिखाई दे रही थी।

वो उसपर कुछ ख़ास ध्यान नहीं देता है और खाना खाने लग जाता है। खाना खाने के बाद सभी अपने-अपने कमरे में चले जाते हैं।

लुबना सोफिया बरतन साफ करने में लगी हुई थीं। तभी किचेन में जीशान आता है और सोफिया की कमर पर से हाथ फेरता हुआ आगे बढ़ जाता है। लुबना उस वक्त बरतन धोने में लगे हुई थी। इसलिए सोफिया की जान में जान आ जाती है, मगर उसकी नजरें जीशान को ऐसे घूर ती हैं कि जीशान डर के मारे अपने रूम में चला जाता है।

रज़िया अपने रूम में आकर दरवाजा बंद कर लेती है, और वो नाइटी जो उसके बेड पर पड़ी हुई थी उसे उठाकर देखने लगती है। नाइटी तो उसने तभी देख ली थी, जब जीशान उसे बेड पर रख कर गया था। मगर शायद उसे पहनना अभी था। रज़िया अपने कपड़े उतारने लगती है। वो जानती थी कि ये नाइटी कौन लाया था? मगर उसने इस बारे में जीशान से कोई बात नहीं की थी।

पूरे कपड़े उतारने के बाद जब रज़िया वो नाइटी पहनकर आईने में खुद को देखती है तो किसी दुल्हन की तरह शरमा जाती है। वो नाइटी उसके आधे जिस्म को भी छुपाने में नाकाम थी। वो सोचने लगती है कि जीशान ये उसके लिए लाया है, और इन्ही ख्यालों में अपने हाथों से जब रज़िया अपनी चुची को छूती है तो रोंगटे खड़े कर देने वाली सरसराहट उसके जिस्म में कुछ पलों के लिए दौड़ जाती है।

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जीशान अपने बेडरूम में बेड पर लेटा हुआ था। तभी सोफिया उसके रूम के दरवाजा के पास आकर दरवाजा खटखटाती है। जीशान सिर उठाकर सामने देखता है।

सोफिया-“जीशान 5 मिनट बाद रूम में आ जाना…”

जीशान के तो होश ही उड़ जाते हैं, और खुशी के मारे वो बेड पर से उतरकर सोफिया की तरफ लपकता है। मगर तब तक सोफिया रूम में पहुँच जाती है और अपने रूम के दरवाजा पर खड़ी होकर इशारे से जीशान को 5 मिनट बाद आने का कहती है।

जीशान से ये 5 मिनट गुजारना बहुत मुश्किल हो रहा था। वो सोफिया के दरवाजे के सामने टहलने लगता है, और जैसे ही 5 मिनट होते हैं वो धड़ाम से दरवाजा खोलकर अंदर घुस जाता है। अपनी आँखों के सामने हुश्न की मलिका अमन विला की सबसे खूबसूरत लड़की, जिसकी खूबसूरती के आगे अमन ने भी अपने सारे हथियार डाल दिए थे।

रज़िया और अमन के प्यार के निशानी सोफिया, उस पतली सी पिंक कलर की नाइटी में जीशान के सामने खड़ी थी। जीशान सोफिया को उस नाइटी में देखकर दंग रह जाता है। उससे खड़ा भी नहीं रहा जा रहा था वो पास में पड़े सोफे पर बैठ जाता है।

और सोफिया भी इतराती हुई उसके पास आकर बैठ जाती है, कहती है-“मुझे तो लगा था अमन विला का शेर मुझे देखकर कुछ कहेगा, मगर ये शेर तो ढेर हो गया है…”

जीशान अपने गले का थूक निगलते हुये सोफिया की आँखों में देखने लगता है-“मेरे पास शब्द नहीं हैं बाजी। आप इतनी खूबसूरत लग रही हो कि क्या कहूँ ?”

सोफिया-चल देख लिया ना… अब रूम के बाहर जा दरवाजा वहाँ है।

जीशान-ऐसे कैसे चले जाऊूँ? इतनी मेहनत से पसंद करके लाया हूँ आपके लिए मैं ये नाइटी , और आप कह रहे हो कि बाहर चले जाओ। मुझे कुछ और भी देखना है?”

सोफिया-क्याऽऽऽ?

जीशान-“ये…” वो डरते-डरते अपना हाथ सोफिया की चुची पर रख देता है।

सोफिया-नहीं कभी नहीं , अपनी हद से आगे मत बढ़ो मिस्टर जीशान।

जीशान सोफिया की कमर पकड़कर उसे अपनी तरफ कर लेता है-“अभी औकात में ही हूँ सोफिया। ज्यादा तड़पाओगी ना तो सब कुछ भूल जाउन्गा…”

सोफिया-मुझे धमकाता है? चल जा यहाँ से।

जीशान भी पठान का बच्चा था कहाँ पीछे हटने वाला था। वो जानता था सोफिया उसे चाहने लगी है। बस थोड़ी हिचकिचाहट बाकी है, जो उसे ही दूर करनी थी।

जीशान अपने हाथ की पकड़ सोफिया की चुची पर बढ़ा देता है जिससे सोफिया के होंठ सूखने लगते हैं बार-बार अपने जीभ को होंठों पर फेरने लगती है सोफिया, मगर जीशान को हाथ हटाने के लिए नहीं कहती।

सोफिया-“जीशान ज़िद मत कर मान जा ना… मैंने तेरी बात मानी ना… अब तू भी सुन ले अपनी बाजी की बात…”

जीशान-“पहले एक झलक दिखाओ मुझे, उसके बाद चला जाउन्गा।

सोफिया कुछ सोचने के बाद इधर-उधर देखने लगती है, और फिर जीशान को वो कुदरत की वो नायाब चीज दिखाती है, जिसे देखकर जीशान के होंठ सूखने लगते हैं। जीशान अपना हाथ उन गुलाबी निपल्स की तरफ बढ़ाने लगता है।

मगर सोफिया उसके हाथ पर थप्पड़ मार के खड़ी हो जाती है, और उंगली के इशारे से जीशान को बाहर का रास्ता दिखाने लगती है।

अपनी बात का पक्का जीशान भी बुरा सा मुँह बनाकर सोफिया के रूम से बाहर चला जाता है।

उसके जाने के बाद सोफिया दरवाजा बंद करती है और उसे जीशान के भोलेपन पर हँसी आ जाती है।

जीशान सोफिया के रूम से निकलकर अपने रूम में जाने लगता है। तभी उसे पीछे से अनुम आवाज़ देकर रोक लेती है। वो पीछे पलटकर देखता है तो अनुम की आँखों में अपने लिए जलते हुये अंगारे देखकर उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है।

अनुम-“सुबह जो तूने हरकत की वो मुझे बिल्कुल ठीक नहीं लगी। जीशान आइन्दा ऐसी हरकत अगर तुमने की ना तो मैं तुम्हें इस घर से हमेशा हमेशा के लिए निकाल दूँगी …”

जीशान सिर झुकाए अनुम की बात सुनने लगता है। उसे पता था कि इस वक्त अनुम बहुत गुस्से में है, और ऐसे वक्त में खामोश रहने में हीभलाई है।

अनुम-तुम सुन रहे हो ना मैंने क्या कहा तुमसे?

जीशान-ठीक है। आइन्दा मैं आपसे बातू भी नहीं करूँगा।

अनुम-क्याऽऽऽ?

जीशान जानता था कि उसने जो कहा है वो अनुम के दिल पे लगेगा और वो दिल में ही जगह बनाना चाहता था। वो अनुम को देखता हुआ अपने रूम में चला जाता है

और अनुम उसे जाता देखकर सोचने लगती है कि अपने अब्बू की ट्रू कापी है ये लड़का। अनुम भी काफी देर तक जीशान के बारे में सोचने के बाद थकान की वजह से सो जाती है।

मगर जीशान के दिमाग़ में तो कल से रज़िया ही घूम रही थी। वो उठकर रज़िया के रूम के पास जाता है और धीरे से दरवाजे को खोलता है। उसे ये देखकर हैरानी होती है कि रज़िया उस वक्त किससे से फोन पर बात कर रही थी? और खुशी भी होती है कि रज़िया ने उसकी लाई हुई नाइटी पहन रखी थी।

रज़िया-“अच्छा फ़िज़ा बेटे, अब मैं फोन रखती हूँ । रातू भी बहुत हो चुकी है, तुम भी आराम करो…”

जब रज़िया फोन बंद करके जीशान की तरफ देखती है तो उसके तो जैसे होश ही उड़ जाते हैं-“तुम इस वक्त यहाँ और तुम्हारे कपड़े कहाँ हैं?”

जीशान सिर्फ़ अंडरवेअर में ही रज़िया के रूम में चला आया था-“मुझे गर्मी बहुत हो रही थी और मेरे रूम का एसी काम नहीं कर रहा है, इसलिए मैं यहाँ सोने चला आया…”

रज़िया-“नहीं तुम अपनी अम्मी के रूम में सोने जाओ, यहाँ मत सोओ…”

जीशान-“मेरे अब्बू का घर है। मैं जहाँ चाहूं वहाँ सो सकता हूँ …” ये कहते हुये जीशान रज़िया के बेड पर लेट जाता है।

दिल में मुस्कान लिए और चेहरे पे गुस्से के साथ रज़िया जीशान को एक हल्की सी ठप्पी मार देती है-“एक कोने में सो सकते हो, और अगर कोई भी चक्कर करने की कोशिश भी की ना तुमने जीशान तो देख लो?”

जीशान धीमी आवाज़ में कहता है-“देखने ही तो आया हूँ …”

रज़िया-क्या?

जीशान-कुछ नहीं , मैं कुछ ऐसी वैसी हरकत नहीं करूँगा। वैसे ये नाइटी आप पर बहुत जॅंच रही है दादी ।

रज़िया-शुक्रिया अनुम लाई है मेरे लिए।

जीशान-“क्या अम्मी? जी नहीं , मैं लाया हूँ अपनी पसंद की। किसने कहा आपको कि अम्मी लाई है आपके लिए?”

रज़िया कुछ नहीं कहती है और मुश्कुराती हुई बेड पर एक करवट लेट जाती है।

जीशान उठकर दरवाजा लाक कर देता है। रज़िया उससे कुछ नहीं कहती और अपनी आँखें बंद कर लेती है।

जीशान सोफिया को देखकर पहले से पागल हुआ पड़ा था, और कल रात जो हालत रज़िया ने जीशान की की थी उससे जीशान थोड़ा गुस्सा भी था रज़िया से, मगर उसे उस वक्त सबसे ज्यादा ज़रूरत एक औरत की चूत की थी। वो चूत वाली औरत अपने जिस्म को उस पतली सी नाइटी से ढँक के ठीक उसके बगल में लेटी हुई थी, मगर जीशान उसे कुछ करने से डर भी रहा था।

आखिर जीशान खुद से कहता है-“जो होगा देखा जाएगा?

और फिर जीशान अपने लण्ड पर हाथ रख कर चीख पड़ता है-“अह्ह… दादी अह्ह…”

रज़िया-“क्या हुआ जीशान ? क्या हुआ मेरे बच्चे?” जीशान की दर्द भरी आवाज़ सुनकर रज़िया बुरी तरह डर जाती है।

जीशान-दादी मुझे कीड़े ने काट लिया।

रज़िया-कहाँ पर?

जीशान-“यहाँ…” अपने लण्ड की तरफ इशारा करके वो रज़िया को दिखाता है।

रज़िया झट से घबराहट में जीशान का अंडरवेअर खींच लेती है, और उसकी आँखों के सामने पहली बार अमन और उसके अब्बू के बाद तीसरा जवान लण्ड लहराता बलखाता आ जाता है।

 
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