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तो डॉली आज उन्ही तैयारियों में लगी थी।
आज सेटरडे की छुट्टी थी ,और कल संडे तो मूड भी काफी रिलैक्स था।
अब तक पिंकी सब की चाय बना कर ले आई थी ,चाय के साथ कुछ हाई प्रोटीन बिस्किट और कुछ लो कैलोरी जो काकी और डॉली के लिए थे।
पिंकी ने जब चाय की ट्रे टेबल पर रखी डॉली ने प्यार से राजनी के सिर पर हाथ फेरते हुए उठाया ,,,,,,
राजनी बेटा चाय आ गई है,,,या अभी और सोना है
जब अदरक वाली चाय की महक राजनी की नाक
तक पहुंची तो बिना देर किए ,,,,
वह सोफे पर बैठ गई ,रात के तेल से चुपड़े हुए बाल ,उसके पूरे चेहरे पर आ रहे थे ।
जैसे ही उसने चाय का कप उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ,,,,,
डॉली ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे रखते हुए कहा,,,,,
राजनी दिस इज नॉट फेयर,,,,,
पहले आप जाकर ब्रश करके आइए उसके बाद ही आप चाय पिएंगी।
राजनी को पता था ,कि मम्मा ने जो कह दिया ,वह तो उसे करना ही पड़ेगा फटा फट गई और मुंह धोते हुए जल्दी से अंदर आ गई ।
चाय का कप उठाते हुए कहा!
मम्मा अब तो डेफिनेटली में इसे पी सकती हूं ।
अब आप इसे पी सकती है ! और हां चाय पी कर आपको दोबारा नहीं सोना है आज लंच पर पूनम और विकास शैलेश गौरी को लेकर आ रहे हैं ।
तो मैं चाहती हूं ,तू फटाफट उठ के नहा ले ,और अपने तेल से सने बाल भी धो ले ओ,,,,नो,,,, मम्मा आप भी न मुझे रिलैक्स नहीं करने दोगी।
पूनम आंटी विकास और गौरी तो ठीक है ,,,परे शैलेश यह फिर मेरे पीछे चिपकू की तरह पड़ जाएगा ।
और मुझे डिस्टर्ब करता ही रहेगा,राजनी बेटा ऐसे नहीं कहते ,,,वो कितना ध्यान रखता है तेरा, कॉलेज में किसी चीज की कमी होने देता है क्या तुझे कभी
तू ऐसे क्यों कहती रहती है उसके बारे में शैलेश एक
बहुत अच्छा लड़का है।
हां मम्मा तो मैंने कब कहा कि वह बुरा है पर अच्छे के साथ साथ वेरी-वेरी चिपकू
राजनी देख मैं शैलेश की कोई भी बुराई नहीं सुन सकती ।
मेरे लिए वह एक बेस्ट पर्सन है ।
उसमें ढूंढने से भी कोई बुराई नहीं निकाल सकते, और एक अच्छे इंसान के साथ साथ बहुत इंटेलिजेंट भी ,पूरे 5 साल तक हर बार उसी ने कॉलेज टॉप किया है ,और तेरी कितनी हेल्प करता है फिर भी तू उसके बारे में ऐसा बोलती रहती है।
ठीक है मेरी प्यारी मम्मा ,,,कुछ नहीं बोलूंगी ,,, डॉली ने बिस्किट की प्लेट राजनी की तरफ बढ़ाई ,,,,और जैसे ही सबकी चाय खत्म हुई डॉली टॉवल उठाकर नहाने बाथरूम में गई ।
लेकिन जाने से पहले राजनी से भी कह कर गई ,,,राजनी एक बार फिर से सुन ले सब लोग 100 बजे तक यहां आ जाएंगे ,और मैं चाहती हूं कि उससे पहले हमारे सारे काम रेडी हो जाए ।
डॉली ने इतना कहा ,कि पिंकी भी साथ में सारी बात समझ गई ,और वह फटाफट दोपहर के लंच की तैयारी करने लगी,,,,
डॉली जब नहा कर निकली ,तो देखा कि सुमन भी आ चुकी है ,सुमन यानी कि पिंकी की मां ,और छोटू की वाइफ, डॉली को जब भी कोई एक्स्ट्रा काम होता था तो वह सुमन को बुला लेती थी ।
और सुमन हंसी-खुशी फटाफट डॉली के साथ सारे काम करवा लेती ।
सुमन इंतजार कर ही रही थी ,कि डॉली आकर बताए, कि क्या करना है
डॉली बाथरूम से निकली, और किचन में गई, उसके पीछे-पीछे सुमन भी चली गई थी ।
डॉली ने सुमन को इशारा करते हुए सारे काम समझा दिए ,प्याज की कचोरीया बनेंगे, पुलाव बनेंगे ,कढ़ाई पनीर बनेगा और हां राजनी के फेवरेट दाल चावल तो बनना ही है।
जब वो लोग आ जाएंगे ,तो गरम-गरम चपाती भी सेक देना ।
और मीठे में क्या बनेगा डॉली दीदी
मीठे में तो तू काकी से ही पूछ ले, कि क्या क्या बनना है।
यह तो काकी ही बताएंगी, सुमन ने बड़े ध्यान से डॉली की सारी बातें सुनी ,और साथ में पिंकी को भी समझाया ,कि उन्हें क्या-क्या करना है ।
डॉली ने पूजा के लिए ताबे के लोटे में पानी भरा ,और कान्हा जी के मंदिर की तरफ जाने लगी, जाते-जाते उसने कहा कि तुम तैयारी करो ,मैं बस आधे घंटे में कान्हा जी को नहला कर और खाना खिला कर आती हूं ।
डॉली चली गई ,और सुमन ने काकी से पूछते हुये,कि मीठे में क्या बनेगा ,,,,
काकी ने दो तीन चीजों के फटाफट नाम बताए ,,,,कि हलवा हां ,,, शैलेश को अपने यहाँ का मेवे वाला हलवा बहुत पसंद है ।
और गौरी बिटिया को खीर, यह दोनों चीजें चाहिए, राजनी ! वह तो मीठे से दूरी भागती है, उसे तो बस उसके पसंद के दाल चावल खिला दो ,उसके बाद उसकी कोई तमन्ना ही नहीं रहती ,तीनों बच्चों की पसंद का खाना हो गया।
हम लोग तो उसी में कुछ ना कुछ खा लेंगे ,और फिर डॉली तो तुझे बता ही गई होगी ,कि क्या क्या बनना है ।
सुमन ने प्याज काटते हुए कहा ,,,,
जी काकी डॉली दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया है ।
और आप चिंता मत कीजिए, उनके आने से पहले ही मैं सब कुछ तैयार कर लूंगी और फिर डॉली दीदी तो आ
ही रही है। भला उन्हें चैन पड़ेगा कि वह बैठ जाए मुझसे पहले आधा काम वो ही कर लेंगी और शैलेश भाई को तो डॉली दीदी के हाथ का हलवा ही ज्यादा पसंद आता है। हां गोरी बिटिया को जरूर मेरे हाथ की खीर अच्छी लगती है ,,,,
तो खीर तो मैंने चढ़ा दी है ,काकी धीरे धीरे चलती हुई आई ,और एक बार किचन का मुआयना करने लगी, कि सब कुछ ठीक से हो रहा है या नहीं।
सुमन और पिंकी काफी साफ-सुथरे तरीके से ,और नहा धोकर ही रसोई में आती थी ,क्योंकि शुरू से ही जैसे ही रसोई बनती है ,तो पहली थाली कान्हा जी के लिए निकाली जाती है ,और काकी को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था, कि उनकी रसोई में कोई बिना नहाए धोए कदम भी रखे।
और फिर डॉली ,वह भला काकी के खिलाफ कभी जा सकती थी ,थोड़ी देर में डॉली भी पूजा करके आ गई थी ,खाने की खुशबू की महक पूरे घर में फैल रही थी ,अब तक मिक्स वेज ,कड़ाही पनीर दाल चावल, पुलाव ,खीर ,और हलवा सब कुछ बनाया जा चुका था ।
डॉली ने सुमन से कहा ,सुमन जल्दी से पूरियां तल दे ,तो सबसे पहले मैं कान्हा जी का भोग लगा दूँ ,,,दीदी कचोरियां भी टलनी है
सुमन ,तुझे याद नहीं रहता ,कान्हा जी को प्याज के खाने का भोग नहीं लगाया जाता ।
कचोरी हम बाद में तल लेंगे ,पहले तू पूरी निलाक दे,
मैंने थाली लगा ली है।
सुमन ने जल्दी से छोटी-छोटी चार पूरियां निकाल कर डॉली को दे दीं।
डॉली ने कान्हा जी के प्रसाद की थाली में पुरिया रखते हुए, एक बार फिर से जल का लोटा भरा ,और कान्हा जी का प्रसाद लगाने चली गई ।
अब तक सारा इंतजाम हो चुका था दोपहर के 100 बज गए थे, विकास और पूनम बस आने ही वाले थे ।
कहने को तो दोपहर के 100 बज गए थे ।
पर फरवरी का महीना था ,तो दिन भी काफी छोटी होते थे ,लेकिन हां इस समय की धूप अच्छी लग रही थी।
सारा काम हो गया ,तो डॉली ने गाउन चेंज करते हुए एक हल्का सा सूट ,और दुपट्टा पहन लिया था ।
राजनी अब तक ऊपर ही थी , डॉली ने नीचे से ही राजनी को आवाज लगाई राजनी तूने नहाया ,कि नहीं
कि अभी भी अपनी पढ़ाई में लगी है ।
इतना ही कहा ,कि राजनी फटाफट सीढियों से उतरती हुई नीचे आ गई।
मम्मा,,,,,राजनी ने घुटनों तक की एक फुल स्लीव्स फ्रॉक पहनी हुई थी।
जो काफी स्टाइलिश थी, उसके धुले हुए बाल इधर से उधर उड़ रहे थे ,और काले घुंघराले बालों में उसका चेहरा और भी खूबसूरत नजर आ रहा था ,डॉली ने एक नजर ऊपर से नीचे तक डाली, और कहा राजनी अभी मौसम इतना भी गरम नहीं है, कि तू एक हल्का सा
स्वेटर ना डाल पाए। बेटा एक पतला स्वेटर पहन ले
यह ठंड लग जाती है ,राजनी ने लापरवाही से डॉली की बात को इग्नोर करते हुए ,डॉली के गले में बाहें डाल दी,और कहने लगी, मम्मा मुझे ठंड नहीं लगेगी ,,,,रैयली आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
वेदर देखो ना, आपने देखा अभी दोपहर के 100 बजे हैं, 25 टेंपरेचर ! भला इस में ठंड कैसे लग सकती है
और फिर आप ही ने कहा ना, कि शैलेश आने वाला है ,तुम अच्छे से तैयार हो जाओ ,तो इसलिए मैंने स्वेटर नहीं पहना और अपनी ही बात पर खिलखिला कर हंसदी,,,,,,
डॉली ने घड़ी पर निगाह डालते हुए फोन उठाया ,और पूनम को फोन करने लगी पहली ही बैल में पूनम ने फोन उठा लिया हां डॉली बोल ! अरे क्या बोलूं ,तुम लोग अभी तक आए नहीं ,हम कब से वेट कर रहे हैं ,और अब तो मुझे भूख भी लगने लगी।
हम लोग रास्ते में हैं ,बस 10 मिनट के अंदर ही तुम्हारे घर के अंदर होंगे ।
ठीक है फिर जल्दी आ जा मैं खाना लगवाती हूं ,और सबसे पहले आकर खाना ही खाएंगे ।
उसके बाद कोई दूसरी बात होगी ,हां ठीक है मैडम जी तू खाना रेडी कर हम बस पहुंचते हैं।
डॉली ने सुमन और पिंकी से टेबल पर खाना लगाने के लिए कहा, और राजनी का हाथ पकड़कर ,खींचते हुए उसे गार्डन में ले आई ,राजनी जब तक वो लोग आ रहे हैं ,तब तक धूप में खड़ी हो जा ,तेरे बाल भी हल्के
हल्के गीले है।
सूख जाने देना अच्छे से ,राजनी कुछ कहती ,इससे पहले डॉली ने कस के उसके हाथ पर पकड़ बना रखी थी।
और गार्डन में पास ही लगी बेंच पर जबरदस्ती उसको अपने पास बैठा लिया उसके बालों में हाथ फिरा कर देखने लगी,,,,,, कितने अच्छे लग रहे हैं,तेरे बाल ।
सच में बिल्कुल रेशम की तरह चमक रहे है, तेल की अच्छी तरह से मसाज करने पर एक ही दिन में फर्क पड़ जाता है ।
तेरे बाल,,,,, राजनी डॉली में कुछ और बातें होती, तब तक विकास पूनम गौरी और शैलेश को साथ लेकर गार्डन के अंदर आ चुके थे ।
राजनी ने जैसे ही देखा ,दौड़कर जाकर पूनम के गले लग गई ,,,,
पूनम ने भी राजनी को कस के गले लगाया ,और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,राजनी डॉली सच ही कह रही थी ,सच में तू पहले से बहुत दुबली लग रही है, ठीक से खाती क्यों नहीं
पूनम कुछ और कहती इससे पहले गौरी भी आकर राजनी के गले लग गई ,दीदी मैंने आपको कितना मिस किया है ।
पिछले 1 महीने से तो आप हमारे घर पर भी नहीं आई ,हां गौरी सच में मैं बहुत बिजी थी ,यहां काकी भी मुझसे बहुत गुस्सा है ,और वहां तू भी मुझसे गुस्सा है। अब तक शैलेश प्यार भरी निगाहों से राजनी को देखे
जा रहा था ।
सब से मिलने के बाद राजनी मुस्कुराती हुई धीरे से शैलेश के पास गई, और बोली मिस्टर चिपकू आप भी तो कुछ कहिए! आपको तो जरूर में मोटी ही दिखूंगी । आप कभी कह ही नहीं सकते, कि मैं पतली हो गई हूं ,,,,हां मोटू तू हमेशा मोटी ही रहेगी, जैसी बचपन में थी गोल मटोल ,,,मोटू,,,,,
मम्मा देखो ना ,,,राजनी ने चिढ़ते हुए कहा ,,,,,
पूनम ने धीरे से शैलेश को एक चपत लगाई ,और उसे डांटने लगी,,,,
शैलेश! खबरदार जो मेरी राजनी को मोटू कहा ,देख ना वह कितनी पतली हो गई है ।
मैं तो कहती हूं उसे अपना थोड़ा सा वेट बढ़ाना चाहिए।
मैं ठीक हूं! पूनम आंटी प्लीज मैंने कितनी मुश्किल से अपना वेट कंट्रोल किया है , अब मुझे दोबारा मोटी नहीं होंना,,,,,,
ठीक है मत होना,,,,,
बातें चल रही थी, कि डॉली ने पूनम का हाथ पकड़ते हुए कहा ,अब अंदर भी चले लंच टेबल पर लग गया होगा ,और अब मुझसे और कंट्रोल नहीं हो रहा ,,,
और काकी को तू जानती है ना ,जब तक तुम लोग नहीं आ जाते ,तब वह एक और भी नहीं खाएगी ,वह तो बड़ी मुश्किल से मना कर मैंने उन्हें नाश्ते में थोड़ी सा दलिया खिला कर दवाई दे दी थी ।
वरना अभी तक तो दवाई के लिए भी बैठी रहती, इतना कहने के साथ ही शैलेश ,डॉली, पूनम, और गौरी
जल्दी से घर के अंदर आ गए।
राजनी जानबूझकर सबसे पीछे रुक गई थी ,जब उसने देखा, कि चारों लोग घर के अंदर जा चुके हैं ।
तो वह जल्दी से विकास के पास गई ,और कुछ बातें करने लगी ।
विकास डॉली की बातों का जवाब देते जा रहा था । दोनों जानबूझकर एक-एक कदम बढ़ाते हुए घर के अंदर आ रहे थे। क्योंकि उनके बीच कुछ जरूरी बातें हो रही थी ,शायद कुछ ऐसी बातें ,जो किसी को भी पता नहीं थी ।
जब राजनी ने देखा ,कि वह घर के अंदर ही आने वाले हैं ,तो उसने मुस्कुराकर कहा ,थैंक यू सो मच अंकल ,अगर आपका साथ रहा ,तो सब कुछ बहुत जल्द पॉसिबल हो पाएगा ।
विकास ने राजनी के सिर पर हाथ रखते हुये कहा, राजनी बेटा मैं हमेशा आपके साथ हूं ।
आपको जब भी मेरी जरूरत होगी, आप मुझे अपने सामने खड़ा पाओगी,और हां मैंने तुम्हें कुछ पेपर्स दिए थे ,उसके बारे में एक बार अच्छे से स्टडी कर लेना, क्योंकि मुझे वह फाइल आगे बढ़ानी होगी जी अंकल ! वैसे वह फाइल मैंने देख ली है, और अगर आपको ठीक लग रही हो तो इट्स ओके, मुझे तो ठीक ही लगी और दोनो ,अंदर आकर टेबल पर लंच करने बैठ गए थे ।
लंच टेबल पर भी शैलेश राजनी को चिढ़ाने से बाज नहीं आ रहा था।
कभी कुछ कहता ,तो कभी कुछ, सबकी नजर बचाते
हुए राजनी कभी शैलेश के पैर पर अपना पैर दे मारती, और कभी धीरे से उसे चिकोटि काट लेती,,,,
राजनी ने धीरे से कहा मिस्टर चिपकू तुम कभी सुधरोगे नहीं ,,,,,
सबके बीच लंच करते हुए बातें भी होती जा रही थी ,और जो सबसे मेन मुद्दा था वह यही था ,के एग्जाम के बाद राजनी के एम एस की क्या प्लानिंग है ।
एमएस के लिए शैलेश ने भी इस साल ड्राप लेकर तैयारी कर रहा था ।
और वह पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था तो बस इसी को लेकर सबके बीच बातें शुरू हो गई,,,,,,,,,,,,
( पार्ट-5 )
PG, की प्लानिंग
डॉली का यही मन था ,ms के लिए राजनी और शैलेश दोनों को एक ही कॉलेज एडमिशन मिल जाए ,तो कितना अच्छा होगा ,उसे राजनी की चिंता भी नहीं रहेगी ,फिर जब शैलेश उसके साथ रहेगा ,तो राजनी को भी हर तरह से हेल्प मिलती रहेगी।
लंबी बातें करने के बाद ,सब लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे ,कि MS की तैयारी के लिए राजनी को शहर में ही रहना चाहिए ,वो और शैलेश एक साथ पढ़ाई करेंगे ,तो तैयारी करना आसान हो जाएगा ,जैसे ही यह बात निकली ,,,साथ में गौरी भी बोल पड़ी, मां राजनी दीदी हमारे साथ रहेंगी तो कितना अच्छा लगेगा
में और दीदी मेरे रूम में !
हम दोनों साथ साथ रहेंगे, कितना मजा आएगा ,,,,,
गौरी की इस बात पर पूनम डॉली की तरफ देखने लगी, डॉली ने सबको खीर परोसेते हुए कहा ,,,,,,
पूनम इस बात के लिए मुझे थोड़ा वक्त चाहिए ,अभी तो राजनी के फाइनल एग्जाम मै भी 3 महीने बाकि है,तब तक इस बारे में,में काकी से भी बात करूंगी ,और
उसके बाद ही मैं कोई जवाब दे पाऊँगी,,, क्या फर्क पड़ता है राजनी तुम्हारे साथ रहे ,या आसपास कहीं pg में ,,,,तैयारी तो उसे शैलेस के साथ ही करनी है ।
इस तरह शादी के पहले तेरे यहाँ घर पर रहना ,कुछ अजीब लग रहा है।
पूनम ने भी कहा ,डॉली तुझे जैसा ठीक लगे,, तू समझ के बता देना ।
पर जरा जल्दी ही, डिसीजन ले लेना । क्योंकि 10 महीने बाद ही, ms का एग्जाम होने वाला है।
और मैं चाहती हूं ,इस एग्जाम में तो दोनों को निकल ही जाना चाहिए।
हमारे पास इतना समय नहीं है, कि ज़रा भी टाइम भी वेस्ट किया जाए।
इस बार राजनी जरा सीरियस हो गई थी ।
मम्मा मैं तो कह रही हूं ,,,पूनम आन्टी अभी से मेरे लिए अच्छा सा pg देख ही लें।
जो आंटी के घर के पास ही हो,
तो आने-जाने में भी प्रॉब्लम नही होगी सच बात है, अगर पढ़ाई शुरु करना है
तो फिर देर करना ठीक नही है ।
राजनी,,,, पहले लंच कर लो, एक बार काकी दादी से बात करके, हम भी डिसीजन ले लेते हैं।
Ok मॉम,,, कहते हुए सब लोग लंच करने लगे ।
लंच के बाद राजनी ,शैलेश, और गौरी ऊपर के रूम में चले गए थे ।
और पिंकी भी उनके पीछे पीछे ऊपर पहुंच गई,,,
डॉली,,, पूनम और विकास के साथ नीचे ही बैठी थी।
दोनों के बीच एक बार फिर से राजनी के रहने को लेकर बातें होने लगी।
डॉली ने साफ स्पष्ट शब्दों में कह दिया था,,,, कि पूनम, शायद राजनी का तुम्हारे साथ रहना ,काकी दादी को पसंद ना आये, इसलिए तुम अपने घर के पास ही उसके लिए कोई अच्छा सा pg देख लो ,,,ज़िम्मेदारी तो सारी तुम्हारी ही रहेगी राजनी की जिम्मेदारी !
तुम्हारे पास छोड़ रही हूँ उसे,,,, पूनम ने भी डॉली का हाथ, अपने हाथ में लेकर कहा तुम्हें कहने की जरूरत नहीं है डॉली,,,,राजनी मेरी ही है।
मैं उसका पूरा ध्यान रखूँगी, उनके बीच बातें चलती रहीं।
इसी बीच काकी भी वहाँ पर आ गई।
और डॉली ने काफी को भी राजनी के बारे में सब कुछ बता दिया ,काकी तो जानती ही थी,,, कि राजनी को पढ़ने शहर जाना है ।
उन्होंने भी अपनी हामी भर दी।
उन्हें भी विकास पूनम पर पूरा भरोसा था रात को विकास पूनम को निकालना था। राजनी ने कहा दिया था कि जब तक उसके फाइनल एग्जाम खत्म होंगे ,तब तक आँटी उसके लिए कोई pg भी देख लेगी।
यह सारी बातें सबके बीच हो चुकी थी। रात 800 बजे तक विकास पूनम जा चुके थे।
डॉली काकी और राजनी के बीच एक बार फिर से अपनी बातें होने लगी थी। काकी ने राजनी को
समझाते हुए कहा राजनी तू शहर पढ़ने तो जा रही है।
पर मुझसे वादा कर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान रखेगी।
और पूनम विकास जो कहेंगे वो करेगी।
हां काकी दादी अंकल जैसा कहेंगे मैं वैसा करुंगी ,डोंट वरी,,,,मम्मा आप एक काम कीजिए, काफी दादी को मेरे साथ ही भेज दीजिए।
ये मेरी मालिश करती रहेगी ,अपने हाथों से मुझे खिलाती रहेगी ,तो इनकी चिंता भी दूर हो जाएगी,,,,,
डॉली हस पड़ी, हां और तेरी चिंता करते करते काकी दादी खुद बीमार पड़ जाएंगी तू अपना ध्यान रख ले इतना ही काफी है।
दादी का क्या खास रखेगी
मम्मा पक्का में दादी का ध्यान रख लूँगी उनको टाइम पर दवाइयां देना, उनको खाना खिलाना ,हां यही करती रहेगी
और पढ़ाई पढ़ाई कब करेगी ।
हां मम्मा यह तो मैंने सोचा ही नहीं
लेकिन जब 2 साल बाद मैं अपना MS कम्प्लीट कर लूँगी , तब डेफिनेटली काकी दादी को अपने साथ ही रखूंगी और अच्छे से उनका ध्यान भी रखूँगी तब काकी भी बीच में बोल पड़ी।
रहने से 2 साल बाद तू पढ़ाई खत्म करके शैलेश के साथ शादी कर ले
और अपनी गृहस्थी बसा ले ,मेरे लिए इतना ही काफी है, मेरा ध्यान रखने के लिए तेरी मां है ,अब तो बस मेरी
बूढ़ी आंखें तेरी गृहस्थी बसते देखना चाहती हैं और एक छोटा सा नन्ना मुन्ना तेरी गोद में देखना चाहती हे।
इससे ज्यादा तो मेरी कोई इच्छा नहीं रही ।
काकी दादी अब फिर उसी बात को लेकर बैठ गई ।
आज सेटरडे की छुट्टी थी ,और कल संडे तो मूड भी काफी रिलैक्स था।
अब तक पिंकी सब की चाय बना कर ले आई थी ,चाय के साथ कुछ हाई प्रोटीन बिस्किट और कुछ लो कैलोरी जो काकी और डॉली के लिए थे।
पिंकी ने जब चाय की ट्रे टेबल पर रखी डॉली ने प्यार से राजनी के सिर पर हाथ फेरते हुए उठाया ,,,,,,
राजनी बेटा चाय आ गई है,,,या अभी और सोना है
जब अदरक वाली चाय की महक राजनी की नाक
तक पहुंची तो बिना देर किए ,,,,
वह सोफे पर बैठ गई ,रात के तेल से चुपड़े हुए बाल ,उसके पूरे चेहरे पर आ रहे थे ।
जैसे ही उसने चाय का कप उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ,,,,,
डॉली ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे रखते हुए कहा,,,,,
राजनी दिस इज नॉट फेयर,,,,,
पहले आप जाकर ब्रश करके आइए उसके बाद ही आप चाय पिएंगी।
राजनी को पता था ,कि मम्मा ने जो कह दिया ,वह तो उसे करना ही पड़ेगा फटा फट गई और मुंह धोते हुए जल्दी से अंदर आ गई ।
चाय का कप उठाते हुए कहा!
मम्मा अब तो डेफिनेटली में इसे पी सकती हूं ।
अब आप इसे पी सकती है ! और हां चाय पी कर आपको दोबारा नहीं सोना है आज लंच पर पूनम और विकास शैलेश गौरी को लेकर आ रहे हैं ।
तो मैं चाहती हूं ,तू फटाफट उठ के नहा ले ,और अपने तेल से सने बाल भी धो ले ओ,,,,नो,,,, मम्मा आप भी न मुझे रिलैक्स नहीं करने दोगी।
पूनम आंटी विकास और गौरी तो ठीक है ,,,परे शैलेश यह फिर मेरे पीछे चिपकू की तरह पड़ जाएगा ।
और मुझे डिस्टर्ब करता ही रहेगा,राजनी बेटा ऐसे नहीं कहते ,,,वो कितना ध्यान रखता है तेरा, कॉलेज में किसी चीज की कमी होने देता है क्या तुझे कभी
तू ऐसे क्यों कहती रहती है उसके बारे में शैलेश एक
बहुत अच्छा लड़का है।
हां मम्मा तो मैंने कब कहा कि वह बुरा है पर अच्छे के साथ साथ वेरी-वेरी चिपकू
राजनी देख मैं शैलेश की कोई भी बुराई नहीं सुन सकती ।
मेरे लिए वह एक बेस्ट पर्सन है ।
उसमें ढूंढने से भी कोई बुराई नहीं निकाल सकते, और एक अच्छे इंसान के साथ साथ बहुत इंटेलिजेंट भी ,पूरे 5 साल तक हर बार उसी ने कॉलेज टॉप किया है ,और तेरी कितनी हेल्प करता है फिर भी तू उसके बारे में ऐसा बोलती रहती है।
ठीक है मेरी प्यारी मम्मा ,,,कुछ नहीं बोलूंगी ,,, डॉली ने बिस्किट की प्लेट राजनी की तरफ बढ़ाई ,,,,और जैसे ही सबकी चाय खत्म हुई डॉली टॉवल उठाकर नहाने बाथरूम में गई ।
लेकिन जाने से पहले राजनी से भी कह कर गई ,,,राजनी एक बार फिर से सुन ले सब लोग 100 बजे तक यहां आ जाएंगे ,और मैं चाहती हूं कि उससे पहले हमारे सारे काम रेडी हो जाए ।
डॉली ने इतना कहा ,कि पिंकी भी साथ में सारी बात समझ गई ,और वह फटाफट दोपहर के लंच की तैयारी करने लगी,,,,
डॉली जब नहा कर निकली ,तो देखा कि सुमन भी आ चुकी है ,सुमन यानी कि पिंकी की मां ,और छोटू की वाइफ, डॉली को जब भी कोई एक्स्ट्रा काम होता था तो वह सुमन को बुला लेती थी ।
और सुमन हंसी-खुशी फटाफट डॉली के साथ सारे काम करवा लेती ।
सुमन इंतजार कर ही रही थी ,कि डॉली आकर बताए, कि क्या करना है
डॉली बाथरूम से निकली, और किचन में गई, उसके पीछे-पीछे सुमन भी चली गई थी ।
डॉली ने सुमन को इशारा करते हुए सारे काम समझा दिए ,प्याज की कचोरीया बनेंगे, पुलाव बनेंगे ,कढ़ाई पनीर बनेगा और हां राजनी के फेवरेट दाल चावल तो बनना ही है।
जब वो लोग आ जाएंगे ,तो गरम-गरम चपाती भी सेक देना ।
और मीठे में क्या बनेगा डॉली दीदी
मीठे में तो तू काकी से ही पूछ ले, कि क्या क्या बनना है।
यह तो काकी ही बताएंगी, सुमन ने बड़े ध्यान से डॉली की सारी बातें सुनी ,और साथ में पिंकी को भी समझाया ,कि उन्हें क्या-क्या करना है ।
डॉली ने पूजा के लिए ताबे के लोटे में पानी भरा ,और कान्हा जी के मंदिर की तरफ जाने लगी, जाते-जाते उसने कहा कि तुम तैयारी करो ,मैं बस आधे घंटे में कान्हा जी को नहला कर और खाना खिला कर आती हूं ।
डॉली चली गई ,और सुमन ने काकी से पूछते हुये,कि मीठे में क्या बनेगा ,,,,
काकी ने दो तीन चीजों के फटाफट नाम बताए ,,,,कि हलवा हां ,,, शैलेश को अपने यहाँ का मेवे वाला हलवा बहुत पसंद है ।
और गौरी बिटिया को खीर, यह दोनों चीजें चाहिए, राजनी ! वह तो मीठे से दूरी भागती है, उसे तो बस उसके पसंद के दाल चावल खिला दो ,उसके बाद उसकी कोई तमन्ना ही नहीं रहती ,तीनों बच्चों की पसंद का खाना हो गया।
हम लोग तो उसी में कुछ ना कुछ खा लेंगे ,और फिर डॉली तो तुझे बता ही गई होगी ,कि क्या क्या बनना है ।
सुमन ने प्याज काटते हुए कहा ,,,,
जी काकी डॉली दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया है ।
और आप चिंता मत कीजिए, उनके आने से पहले ही मैं सब कुछ तैयार कर लूंगी और फिर डॉली दीदी तो आ
ही रही है। भला उन्हें चैन पड़ेगा कि वह बैठ जाए मुझसे पहले आधा काम वो ही कर लेंगी और शैलेश भाई को तो डॉली दीदी के हाथ का हलवा ही ज्यादा पसंद आता है। हां गोरी बिटिया को जरूर मेरे हाथ की खीर अच्छी लगती है ,,,,
तो खीर तो मैंने चढ़ा दी है ,काकी धीरे धीरे चलती हुई आई ,और एक बार किचन का मुआयना करने लगी, कि सब कुछ ठीक से हो रहा है या नहीं।
सुमन और पिंकी काफी साफ-सुथरे तरीके से ,और नहा धोकर ही रसोई में आती थी ,क्योंकि शुरू से ही जैसे ही रसोई बनती है ,तो पहली थाली कान्हा जी के लिए निकाली जाती है ,और काकी को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था, कि उनकी रसोई में कोई बिना नहाए धोए कदम भी रखे।
और फिर डॉली ,वह भला काकी के खिलाफ कभी जा सकती थी ,थोड़ी देर में डॉली भी पूजा करके आ गई थी ,खाने की खुशबू की महक पूरे घर में फैल रही थी ,अब तक मिक्स वेज ,कड़ाही पनीर दाल चावल, पुलाव ,खीर ,और हलवा सब कुछ बनाया जा चुका था ।
डॉली ने सुमन से कहा ,सुमन जल्दी से पूरियां तल दे ,तो सबसे पहले मैं कान्हा जी का भोग लगा दूँ ,,,दीदी कचोरियां भी टलनी है
सुमन ,तुझे याद नहीं रहता ,कान्हा जी को प्याज के खाने का भोग नहीं लगाया जाता ।
कचोरी हम बाद में तल लेंगे ,पहले तू पूरी निलाक दे,
मैंने थाली लगा ली है।
सुमन ने जल्दी से छोटी-छोटी चार पूरियां निकाल कर डॉली को दे दीं।
डॉली ने कान्हा जी के प्रसाद की थाली में पुरिया रखते हुए, एक बार फिर से जल का लोटा भरा ,और कान्हा जी का प्रसाद लगाने चली गई ।
अब तक सारा इंतजाम हो चुका था दोपहर के 100 बज गए थे, विकास और पूनम बस आने ही वाले थे ।
कहने को तो दोपहर के 100 बज गए थे ।
पर फरवरी का महीना था ,तो दिन भी काफी छोटी होते थे ,लेकिन हां इस समय की धूप अच्छी लग रही थी।
सारा काम हो गया ,तो डॉली ने गाउन चेंज करते हुए एक हल्का सा सूट ,और दुपट्टा पहन लिया था ।
राजनी अब तक ऊपर ही थी , डॉली ने नीचे से ही राजनी को आवाज लगाई राजनी तूने नहाया ,कि नहीं
कि अभी भी अपनी पढ़ाई में लगी है ।
इतना ही कहा ,कि राजनी फटाफट सीढियों से उतरती हुई नीचे आ गई।
मम्मा,,,,,राजनी ने घुटनों तक की एक फुल स्लीव्स फ्रॉक पहनी हुई थी।
जो काफी स्टाइलिश थी, उसके धुले हुए बाल इधर से उधर उड़ रहे थे ,और काले घुंघराले बालों में उसका चेहरा और भी खूबसूरत नजर आ रहा था ,डॉली ने एक नजर ऊपर से नीचे तक डाली, और कहा राजनी अभी मौसम इतना भी गरम नहीं है, कि तू एक हल्का सा
स्वेटर ना डाल पाए। बेटा एक पतला स्वेटर पहन ले
यह ठंड लग जाती है ,राजनी ने लापरवाही से डॉली की बात को इग्नोर करते हुए ,डॉली के गले में बाहें डाल दी,और कहने लगी, मम्मा मुझे ठंड नहीं लगेगी ,,,,रैयली आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
वेदर देखो ना, आपने देखा अभी दोपहर के 100 बजे हैं, 25 टेंपरेचर ! भला इस में ठंड कैसे लग सकती है
और फिर आप ही ने कहा ना, कि शैलेश आने वाला है ,तुम अच्छे से तैयार हो जाओ ,तो इसलिए मैंने स्वेटर नहीं पहना और अपनी ही बात पर खिलखिला कर हंसदी,,,,,,
डॉली ने घड़ी पर निगाह डालते हुए फोन उठाया ,और पूनम को फोन करने लगी पहली ही बैल में पूनम ने फोन उठा लिया हां डॉली बोल ! अरे क्या बोलूं ,तुम लोग अभी तक आए नहीं ,हम कब से वेट कर रहे हैं ,और अब तो मुझे भूख भी लगने लगी।
हम लोग रास्ते में हैं ,बस 10 मिनट के अंदर ही तुम्हारे घर के अंदर होंगे ।
ठीक है फिर जल्दी आ जा मैं खाना लगवाती हूं ,और सबसे पहले आकर खाना ही खाएंगे ।
उसके बाद कोई दूसरी बात होगी ,हां ठीक है मैडम जी तू खाना रेडी कर हम बस पहुंचते हैं।
डॉली ने सुमन और पिंकी से टेबल पर खाना लगाने के लिए कहा, और राजनी का हाथ पकड़कर ,खींचते हुए उसे गार्डन में ले आई ,राजनी जब तक वो लोग आ रहे हैं ,तब तक धूप में खड़ी हो जा ,तेरे बाल भी हल्के
हल्के गीले है।
सूख जाने देना अच्छे से ,राजनी कुछ कहती ,इससे पहले डॉली ने कस के उसके हाथ पर पकड़ बना रखी थी।
और गार्डन में पास ही लगी बेंच पर जबरदस्ती उसको अपने पास बैठा लिया उसके बालों में हाथ फिरा कर देखने लगी,,,,,, कितने अच्छे लग रहे हैं,तेरे बाल ।
सच में बिल्कुल रेशम की तरह चमक रहे है, तेल की अच्छी तरह से मसाज करने पर एक ही दिन में फर्क पड़ जाता है ।
तेरे बाल,,,,, राजनी डॉली में कुछ और बातें होती, तब तक विकास पूनम गौरी और शैलेश को साथ लेकर गार्डन के अंदर आ चुके थे ।
राजनी ने जैसे ही देखा ,दौड़कर जाकर पूनम के गले लग गई ,,,,
पूनम ने भी राजनी को कस के गले लगाया ,और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,राजनी डॉली सच ही कह रही थी ,सच में तू पहले से बहुत दुबली लग रही है, ठीक से खाती क्यों नहीं
पूनम कुछ और कहती इससे पहले गौरी भी आकर राजनी के गले लग गई ,दीदी मैंने आपको कितना मिस किया है ।
पिछले 1 महीने से तो आप हमारे घर पर भी नहीं आई ,हां गौरी सच में मैं बहुत बिजी थी ,यहां काकी भी मुझसे बहुत गुस्सा है ,और वहां तू भी मुझसे गुस्सा है। अब तक शैलेश प्यार भरी निगाहों से राजनी को देखे
जा रहा था ।
सब से मिलने के बाद राजनी मुस्कुराती हुई धीरे से शैलेश के पास गई, और बोली मिस्टर चिपकू आप भी तो कुछ कहिए! आपको तो जरूर में मोटी ही दिखूंगी । आप कभी कह ही नहीं सकते, कि मैं पतली हो गई हूं ,,,,हां मोटू तू हमेशा मोटी ही रहेगी, जैसी बचपन में थी गोल मटोल ,,,मोटू,,,,,
मम्मा देखो ना ,,,राजनी ने चिढ़ते हुए कहा ,,,,,
पूनम ने धीरे से शैलेश को एक चपत लगाई ,और उसे डांटने लगी,,,,
शैलेश! खबरदार जो मेरी राजनी को मोटू कहा ,देख ना वह कितनी पतली हो गई है ।
मैं तो कहती हूं उसे अपना थोड़ा सा वेट बढ़ाना चाहिए।
मैं ठीक हूं! पूनम आंटी प्लीज मैंने कितनी मुश्किल से अपना वेट कंट्रोल किया है , अब मुझे दोबारा मोटी नहीं होंना,,,,,,
ठीक है मत होना,,,,,
बातें चल रही थी, कि डॉली ने पूनम का हाथ पकड़ते हुए कहा ,अब अंदर भी चले लंच टेबल पर लग गया होगा ,और अब मुझसे और कंट्रोल नहीं हो रहा ,,,
और काकी को तू जानती है ना ,जब तक तुम लोग नहीं आ जाते ,तब वह एक और भी नहीं खाएगी ,वह तो बड़ी मुश्किल से मना कर मैंने उन्हें नाश्ते में थोड़ी सा दलिया खिला कर दवाई दे दी थी ।
वरना अभी तक तो दवाई के लिए भी बैठी रहती, इतना कहने के साथ ही शैलेश ,डॉली, पूनम, और गौरी
जल्दी से घर के अंदर आ गए।
राजनी जानबूझकर सबसे पीछे रुक गई थी ,जब उसने देखा, कि चारों लोग घर के अंदर जा चुके हैं ।
तो वह जल्दी से विकास के पास गई ,और कुछ बातें करने लगी ।
विकास डॉली की बातों का जवाब देते जा रहा था । दोनों जानबूझकर एक-एक कदम बढ़ाते हुए घर के अंदर आ रहे थे। क्योंकि उनके बीच कुछ जरूरी बातें हो रही थी ,शायद कुछ ऐसी बातें ,जो किसी को भी पता नहीं थी ।
जब राजनी ने देखा ,कि वह घर के अंदर ही आने वाले हैं ,तो उसने मुस्कुराकर कहा ,थैंक यू सो मच अंकल ,अगर आपका साथ रहा ,तो सब कुछ बहुत जल्द पॉसिबल हो पाएगा ।
विकास ने राजनी के सिर पर हाथ रखते हुये कहा, राजनी बेटा मैं हमेशा आपके साथ हूं ।
आपको जब भी मेरी जरूरत होगी, आप मुझे अपने सामने खड़ा पाओगी,और हां मैंने तुम्हें कुछ पेपर्स दिए थे ,उसके बारे में एक बार अच्छे से स्टडी कर लेना, क्योंकि मुझे वह फाइल आगे बढ़ानी होगी जी अंकल ! वैसे वह फाइल मैंने देख ली है, और अगर आपको ठीक लग रही हो तो इट्स ओके, मुझे तो ठीक ही लगी और दोनो ,अंदर आकर टेबल पर लंच करने बैठ गए थे ।
लंच टेबल पर भी शैलेश राजनी को चिढ़ाने से बाज नहीं आ रहा था।
कभी कुछ कहता ,तो कभी कुछ, सबकी नजर बचाते
हुए राजनी कभी शैलेश के पैर पर अपना पैर दे मारती, और कभी धीरे से उसे चिकोटि काट लेती,,,,
राजनी ने धीरे से कहा मिस्टर चिपकू तुम कभी सुधरोगे नहीं ,,,,,
सबके बीच लंच करते हुए बातें भी होती जा रही थी ,और जो सबसे मेन मुद्दा था वह यही था ,के एग्जाम के बाद राजनी के एम एस की क्या प्लानिंग है ।
एमएस के लिए शैलेश ने भी इस साल ड्राप लेकर तैयारी कर रहा था ।
और वह पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था तो बस इसी को लेकर सबके बीच बातें शुरू हो गई,,,,,,,,,,,,
( पार्ट-5 )
PG, की प्लानिंग
डॉली का यही मन था ,ms के लिए राजनी और शैलेश दोनों को एक ही कॉलेज एडमिशन मिल जाए ,तो कितना अच्छा होगा ,उसे राजनी की चिंता भी नहीं रहेगी ,फिर जब शैलेश उसके साथ रहेगा ,तो राजनी को भी हर तरह से हेल्प मिलती रहेगी।
लंबी बातें करने के बाद ,सब लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे ,कि MS की तैयारी के लिए राजनी को शहर में ही रहना चाहिए ,वो और शैलेश एक साथ पढ़ाई करेंगे ,तो तैयारी करना आसान हो जाएगा ,जैसे ही यह बात निकली ,,,साथ में गौरी भी बोल पड़ी, मां राजनी दीदी हमारे साथ रहेंगी तो कितना अच्छा लगेगा
में और दीदी मेरे रूम में !
हम दोनों साथ साथ रहेंगे, कितना मजा आएगा ,,,,,
गौरी की इस बात पर पूनम डॉली की तरफ देखने लगी, डॉली ने सबको खीर परोसेते हुए कहा ,,,,,,
पूनम इस बात के लिए मुझे थोड़ा वक्त चाहिए ,अभी तो राजनी के फाइनल एग्जाम मै भी 3 महीने बाकि है,तब तक इस बारे में,में काकी से भी बात करूंगी ,और
उसके बाद ही मैं कोई जवाब दे पाऊँगी,,, क्या फर्क पड़ता है राजनी तुम्हारे साथ रहे ,या आसपास कहीं pg में ,,,,तैयारी तो उसे शैलेस के साथ ही करनी है ।
इस तरह शादी के पहले तेरे यहाँ घर पर रहना ,कुछ अजीब लग रहा है।
पूनम ने भी कहा ,डॉली तुझे जैसा ठीक लगे,, तू समझ के बता देना ।
पर जरा जल्दी ही, डिसीजन ले लेना । क्योंकि 10 महीने बाद ही, ms का एग्जाम होने वाला है।
और मैं चाहती हूं ,इस एग्जाम में तो दोनों को निकल ही जाना चाहिए।
हमारे पास इतना समय नहीं है, कि ज़रा भी टाइम भी वेस्ट किया जाए।
इस बार राजनी जरा सीरियस हो गई थी ।
मम्मा मैं तो कह रही हूं ,,,पूनम आन्टी अभी से मेरे लिए अच्छा सा pg देख ही लें।
जो आंटी के घर के पास ही हो,
तो आने-जाने में भी प्रॉब्लम नही होगी सच बात है, अगर पढ़ाई शुरु करना है
तो फिर देर करना ठीक नही है ।
राजनी,,,, पहले लंच कर लो, एक बार काकी दादी से बात करके, हम भी डिसीजन ले लेते हैं।
Ok मॉम,,, कहते हुए सब लोग लंच करने लगे ।
लंच के बाद राजनी ,शैलेश, और गौरी ऊपर के रूम में चले गए थे ।
और पिंकी भी उनके पीछे पीछे ऊपर पहुंच गई,,,
डॉली,,, पूनम और विकास के साथ नीचे ही बैठी थी।
दोनों के बीच एक बार फिर से राजनी के रहने को लेकर बातें होने लगी।
डॉली ने साफ स्पष्ट शब्दों में कह दिया था,,,, कि पूनम, शायद राजनी का तुम्हारे साथ रहना ,काकी दादी को पसंद ना आये, इसलिए तुम अपने घर के पास ही उसके लिए कोई अच्छा सा pg देख लो ,,,ज़िम्मेदारी तो सारी तुम्हारी ही रहेगी राजनी की जिम्मेदारी !
तुम्हारे पास छोड़ रही हूँ उसे,,,, पूनम ने भी डॉली का हाथ, अपने हाथ में लेकर कहा तुम्हें कहने की जरूरत नहीं है डॉली,,,,राजनी मेरी ही है।
मैं उसका पूरा ध्यान रखूँगी, उनके बीच बातें चलती रहीं।
इसी बीच काकी भी वहाँ पर आ गई।
और डॉली ने काफी को भी राजनी के बारे में सब कुछ बता दिया ,काकी तो जानती ही थी,,, कि राजनी को पढ़ने शहर जाना है ।
उन्होंने भी अपनी हामी भर दी।
उन्हें भी विकास पूनम पर पूरा भरोसा था रात को विकास पूनम को निकालना था। राजनी ने कहा दिया था कि जब तक उसके फाइनल एग्जाम खत्म होंगे ,तब तक आँटी उसके लिए कोई pg भी देख लेगी।
यह सारी बातें सबके बीच हो चुकी थी। रात 800 बजे तक विकास पूनम जा चुके थे।
डॉली काकी और राजनी के बीच एक बार फिर से अपनी बातें होने लगी थी। काकी ने राजनी को
समझाते हुए कहा राजनी तू शहर पढ़ने तो जा रही है।
पर मुझसे वादा कर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान रखेगी।
और पूनम विकास जो कहेंगे वो करेगी।
हां काकी दादी अंकल जैसा कहेंगे मैं वैसा करुंगी ,डोंट वरी,,,,मम्मा आप एक काम कीजिए, काफी दादी को मेरे साथ ही भेज दीजिए।
ये मेरी मालिश करती रहेगी ,अपने हाथों से मुझे खिलाती रहेगी ,तो इनकी चिंता भी दूर हो जाएगी,,,,,
डॉली हस पड़ी, हां और तेरी चिंता करते करते काकी दादी खुद बीमार पड़ जाएंगी तू अपना ध्यान रख ले इतना ही काफी है।
दादी का क्या खास रखेगी
मम्मा पक्का में दादी का ध्यान रख लूँगी उनको टाइम पर दवाइयां देना, उनको खाना खिलाना ,हां यही करती रहेगी
और पढ़ाई पढ़ाई कब करेगी ।
हां मम्मा यह तो मैंने सोचा ही नहीं
लेकिन जब 2 साल बाद मैं अपना MS कम्प्लीट कर लूँगी , तब डेफिनेटली काकी दादी को अपने साथ ही रखूंगी और अच्छे से उनका ध्यान भी रखूँगी तब काकी भी बीच में बोल पड़ी।
रहने से 2 साल बाद तू पढ़ाई खत्म करके शैलेश के साथ शादी कर ले
और अपनी गृहस्थी बसा ले ,मेरे लिए इतना ही काफी है, मेरा ध्यान रखने के लिए तेरी मां है ,अब तो बस मेरी
बूढ़ी आंखें तेरी गृहस्थी बसते देखना चाहती हैं और एक छोटा सा नन्ना मुन्ना तेरी गोद में देखना चाहती हे।
इससे ज्यादा तो मेरी कोई इच्छा नहीं रही ।
काकी दादी अब फिर उसी बात को लेकर बैठ गई ।