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Romance तेरी मेरी आशिक़ी (कॉलेज के दिनों का प्यार)

[color=rgb(0,]इक्कीसवाँ भाग[/color]

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भैया से दीपा के यहाँ रुकने की अनुमति मिलने के बाद मैंने भैया को अपनी जीत के बारे में भी बता दिया। भैया मेरी जीत पर बहुत खुश हुए, फिर मैंने उन्हें माँ की नाराजगी के बारे में भी बताया।

उसके बाद मैं कुर्सी पर बैठ गया और दीपा घर के अंदर कपड़े बदलने के लिए चली गई। थोड़ी देर बाद दीपा कपड़े बदल कर बाहर आई तो मैं दीपा को देखता ही रह गया। दीपा को मैंने हमेशा ही थोड़ा बहुत साजो-श्रृंगार में देखा था, लेकिन वो आज बिना साजो-श्रृंगार के साधारण कपड़ों में भी और भी ज्यादा खूबसूरत और मासूम लग रही थी। ऐसा नहीं था कि दीपा खूबसूरत नहीं थी, परंतु रोज के मुकाबले आज मुझे वो ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। मैं बस एकटक दीपा को देखे जा रहा था। दीपा भी आकर मेरे पास वाली चारपाई पर बैठ गई।

अरे छोटे बाबू क्या हुआ। ऐसे क्या देख रहे हो जैसे पहली बार देख रहे हो। दीपा ने मुझसे कहा।

देखता तो मैं तुमको रोज ही हूँ, मगर आज तुम रोज से अलग लग रही हो। मैंने कहा।

अच्छा, आज ऐसा क्या खास है जो अलग लग रही हूँ मैं। दीपा ने मुझसे पूछा।

तुम इस समय बहुत ज्यादा खूबसूरत और मासूम लग रही हो। मैंने दीपा से कहा।

मेरी बात सुनकर दीपा शरमाने लगी और वहाँ से उठकर जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर जोर से अपनी तरफ खीचा। दीपा सीधे आकर मेरी गोद में गिर पड़ी। मैंने दीपा को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके चेहरे पर आई लटों को अपने हाथों से संवार कर उसके कंधे के पीछे कर दिया तथा उसके खूबसूरत चेहरे को निहारने लगा।

दीपा ने कुछ देर मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में मुझे अपने लिए बेइंतेहाँ प्यार नजर आया। मैंने उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसके गुलाबी होंठों पर रख दिए। दीपा ने भी मेरा साथ दिया। लगभग 5 मिनट सॉफ्ट किस करने के बाद दीपा ने अपने आपको मुझसे अलग किया।

यही सब गंदी हरकतें करने के लिए रुके हो क्या छोटे बाबू। दीपा ने मुझसे कहा।

इससे भी ज्यादा गंदी हरकतें करने का मन है मेरी प्यारी दीपा। मैंने दीपा को छेड़ते हुए कहा।

चलो हटो। खाना भी बनाना है। भूखा सोने का इरादा है क्या। दीपा ने मुझे प्यार से झिड़कते हुए कहा।

फिर दीपा खाना बनाने के लिए रसोईघर में चली गई। मैं भी उसके पीछे-पीछे रसोईघर में चला गया। दीपा मुझे मना करती रही लेकिन मैंने उसकी थोड़ी बहुत मदद खाना बनाने में की। खाना बन जाने के बाद हमदोनों ने मिलकर खाना खाया। फिर दीपा बरतन साफ करने लगी और मैं वापस आकर चारपाई पर बैठ गया।

उधर घर पर मेरे न पहुँचने के बाद माँ बहुत परेशान थी। खाना खाने की मेज पर जब सभी लोग खाना खाने के लिए बैठे तो माँ ने अर्जुन भैया से पूछा।

आज ये निशांत कहाँ रह गया है। अभी तक घर नहीं आया।

वो आज दीपा के यहाँ पर रूका हुआ है। अर्जुन भैया ने माँ से कहा।

क्यों कुछ काम था क्या उसे जो वो दीपा के यहाँ रुका है। माँ ने अर्जुन भैया से पूछा।

नहीं माँ कुछ काम नहीं था। आज आशीष कहीं बाहर गया हुआ है और दीपा घर में अकेली है, इसलिए वो आज दीपा के साथ ही रुक गया है। अर्जुन भैया ने माँ को बताया।

क्या कहा। दीपा घर में अकेली है और निशांत उसके साथ है। ये लड़का भी ना। क्या जरूरत थी दोनों को अकेला वहाँ रहने की। दीपा को लेकर वो घर भी तो आ सकता था। माँ ने कहा।

दीपा यहाँ आने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए निशांत रुक गया उसके साथ। अर्जुन भैया ने कहा।

क्यों नहीं आने को तैयार थी वो। तुम लोगों ने कुछ कहा है क्या उससे। माँ ने अर्जुन भैया से कहा।

नहीं माँ उसके लगता है कि बार बार हमारे घर आने से पास-पड़ोस में तरह-तरह की बातें होने लगेंगी। इसलिए वो यहाँ आने को तैयार नहीं थी। अर्जुन भैया ने कहा।

और वो दोनो जो कर रहे हैं उससे पास-पड़ोस में कोई बातें नहीं होंगी। एक जवान लड़का और लड़की पूरी रात एक घर में अकेले रहेंगें। तो लोगों को तो और भी मौका मिलेगा तरह तरह की बात बनाने का। माँ ने अर्जुन भैया से कहा।

क्या माँ। आपको अपने बेटे के ऊपर विश्वास नहीं है क्या। अर्जुन भैया ने कहा।

मुझे दोनों पर पूरा विश्वास है कि वो दोनों कोई ऐसा-वैसा काम नहीं करेंगे जिससे हम लोगों की बदनामी हो, लेकिन हम समाज के बनाए नियमों को अनदेखा भी तो नहीं कर सकते। हम सबको समाज के साथ ही चलना पड़ता है। दोनों ने ये बिलकुल ठीक नहीं किया। माँ ने निशांत भैया को समझाते हुए कहा।

माँ की बात भी एक हद तक सही ही थी। एक लड़का लड़की अकेले एक घर में रात गुजार लें तो लोगों के मुँह पर तरह-तरह की बातें होने लगती है।

छोड़ों न माँ। आप कहाँ ये सब बातें लेकर बैठ गई हो। एक बात कहूँ अगर आपको बुरा न लगे तो। अर्जुन भैया ने माँ से कहा।

हाँ बोलो अर्जुन। माँ ने कहा।

आपको दीपा कैसी लगती है माँ। अर्जुन भैया ने कहा।

दीपा बहुत अच्छी और संस्कारों वाली लड़की है। भगवान ऐसी बेटी सभी को दे। माँ-बाप के न रहने के बाद भी आशीष ने बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं दीपा को। माँ ने दीपा की तारीफ करते हुए कहा।

माँ मुझे लगता है कि अपना निशांत दीपा का बहुत पसंद करता है और दीपा भी निशांत को पसंद करती है। तो क्यों न दोनों की शादी करवा दी जाए।

ये तो बहुत अच्छी बात है अर्जुन। दीपा जैसी लड़की अगर इस घर की बहू बने। ये तो हमारे लिए बहुत सौभाग्य की बात है। सबसे बड़ी बात ये कि दीपा जैसी संस्कारों वाली लड़की के साथ शादी करके उस नालायक की किस्मत खुल जाएगी। माँ ने खुश होते हुए कहा।

माँ की सहमति मिलने के बाद अर्जुन भैया और अदिती भाभी बहुत खुश हो गए। कुछ ही दिनों में दीपा ने अपने कुशल व्यवहार और अपने पन से घर के हर सदस्य के अंदर एक अलग जगह बना ली थी।

लेकिन अभी तो दोनों की पढ़ाई चल रही है। बिना पढ़ाई पूरी हुए शादी करना जल्दबाजी होगी, और सबसे बड़ी बात क्या आशीष इस रिश्ते के लिए तैयार होंगे। माँ ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा।

हाँ ये बात तो सही कहा आपने माँ, लेकिन एक बार उनसे बात तो करनी ही होगी न, हो सकता है उन्हें भी ये रिश्ता पसंद हो। भैया ने कहा।

तो ठीक है किसी दिन हम सब रिश्ते के लिए दीपा के घर आशीष से बात करने के लिए चलेंगे, लेकिन तुम दोनों एक बात कान खोलकर सुन लो। निशांत और दीपा के रिश्ते से मुझे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन निशांत ने मेरी बात न मानकर अपने मन का काम किया है। तो अब मैं जैसा भी करूँ, तुम दोनों को मेरा साथ देना होगा। माँ ने भैया और भाभी से कहा।

ठीक है माँ हम आपके साथ हैं। लेकिन आप करने क्या वाली हैं। अर्जुन भैया ने माँ से सवाल किया।

वो तुम दोनों को बाद में पता चल जाएगा। मैं इतनी जल्दी निशांत के सामने दीपा से उसकी शादी के लिए हाँ थोड़े ही बोलूँगी, उसे भी तो पता चले कि उसने किससे पंगा लिया है। माँ ने मजाकिया लहजे में कहा।

ठीक है माँ वैसे निशांत बता रहा था कि आप उसके चुनाव जीतने पर खुश नहीं हैं। भैया ने कहा।

मैं खुश क्यों नहीं होऊँगी, आखिर मेरे बेटे ने जीत हासिल की है। मैं उसके सामने नाराजगी इसलिए दिखाई, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि वो किसी गलत रास्ते पर चले पड़े, मेरी नाराजगी से उसे कम-से-कम ये तो लगता रहेगा कि उसके किसी गलत काम करने से मैं नाराज हो सकती हूँ। माँ ने कहा।

उसके बाद माँ, भैया और भाभी ने मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

इधर मैं और दीपा भी खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगे। दीपा ने सोने के लिए मेरा बिस्तर लगा दिया और वो सोने के लिए दूसरे कमरे में जाने लगी। मैंने दीपा का हाथ पकड़ लिया।

मुझे अकेला छोड़कर कहाँ चल दी मेरी प्यारी दीपा। मैंने दीपा से कहा।

अब रात हो गई है और सोने के समय भी हो गया है। तो सोने जा रही हूँ। दीपा ने कहा।

क्या तुम आज रात मेरे साथ मेरे बिस्तर पर नहीं सो सकती। मैंने दीपा से कहा।

मैं तो खुद तुम्हारे साथ सोना चाहती थी, लेकिन मुझे लगा कहीं तुम नाराज न हो जाओ इसलिए मैं अंदर जो रही थी। दीपा ने कहा।

क्या बात है दीपा, मतलब तुमने पूरी तैयारी करके रखी है। मैंने शरारत के साथ दीपा से कहा।

तुम न आजकल कुछ ज्यादा ही शरारती होते जा रहे हो छोटे बाबू। दीपा ने कहा।

अभी मैंने अपनी शरारत शुरू कहाँ की है दीपा डार्लिंग। मैंने दीपा से कहा।

तुम भी न, अच्छा रुको मैं कपड़े बदलकर आती हूँ। यह बोलते हुए दीपा दूसरे कमरे मे चली गई।

थोड़ी देर बाद दीपा एक गाउन पहनकर बाहर आई। मैं दीपा को देखते हुए कहा।

लगता है तुम आज मेरी जान लेकर ही मानोगी। तुम्हें इन कपड़ों में देखकर मेरी तो नीयत खराब हो रही है दीपा डार्लिंग। मैंने दीपा से शरारत से कहा।

अच्छा, अब अपनी नीयत ठीक कर लो, नहीं तो मैं दूसरे कमरे में जा रही हूँ। दीपा ने कहा।

मैंने दीपा का हाथ पकड़ लिया और उसे पकड़कर अपने ऊपर खीच लिया, दीपा मैरे ऊपर गिर पड़ी। थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेटे हुए एक दूसरे की आँखों में देखते रहे।

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[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]बाईसवाँ भाग[/color]
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दीपा की बात सुनकर मैंने उसे खीचकर अपने ऊपर गिरा लिया और उसकी उसकी आँखों में देखने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने होंठ आगे बढ़ाकर उसके माथे को चूम लिय़ा, फिर उसकी दोनों आखों को धीरे से चूमा। उसके बाद मैं दीपा को फिर से देखने लगा। दीपा ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी। फिर मैंने आगे बढ़कर उसके गालों को चूमा और अपना होंठ दीपा के होठों पर रख दिया। दीपा ने कोई विरोध नहीं किया। वो भी होंठ चूसने में मेरा साथ देने लगी। थोड़ी देर दीपा के होंठो को चूसने के बाद मैंने अपना होंठ दीपा के होंठो से हटा लिया और उसे दिखने लगा।

अपनी आँखें खोलो दीपा। मैंने दीपा से कहा।

दीपा ने अपनी आँखें खोल दी और मेरी तरफ देखने लगी। मैंने दीपा को अपनी बाहों में कसते हुए कहा।

बोलो दीपा डार्लिंग। अब आगे क्या इरादा है।

मुझसे क्यों पूछ रहे हो तुम, तुम्हारा जो मन हो वो करो मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। दीपा ने कहा।

अगर मैं तुम्हारे साथ वो सब कुछ करना चाहूँ जो एक पति पत्नी करते हैं तो। मैंने दीपा से कहा।

मैं तुम्हारी ही हूँ निशांत और मेरा ये शरीर भी तुम्हारा ही है। मैं तन मन से तुम्हारी हो चुकी हूँ और तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है। दीपा ने मुझसे कहा।

दीपा की बात सुनकर मैंने दीपा को और जोर से अपने से लिपटा लिया और उसके चेरहे पर अपना हाथ फिराने लगा।

अरे दीपा डार्लिंग, मैं तो मजाक कर रहा था। मैं ये शादी के बाद ही करूँगा। तुमने मुझपर जो भरोसा दिखाया है उसे मैं नहीं तोड़ूँगा। मैंने दीपा से कहा।

मुझे तुमसे यही उम्मीद थी निशांत कि मेरे इकरार के बाद भी तुम मेरा भरोसा नहीं तोड़ोगे। दीपा ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा।

चलो ठीक है फिर। अब सोते हैं कल कॉलेज भी तो जाना है। मैंने दीपा से कहा।

उसके बाद मैं और दीपा एक दूसरे की बाहों में ही बिस्तर पर लेट गए और बाते करते हुए नींद की आगोश में खो गए। सुबह भोर में मेरी आँख पहले खुली। दीपा मेरी बाहों में सुकून की नींद सो रही थी। दीपा सोते हुए बहुत ही मासूम और प्यारी लग रही थी। मैंने उसके माथे को चूम लिया और दीपा का कंधा पकड़कर उसे हिलाया

दीपा। उठो सुबह हो गई है, कॉलेज भी चलना है न। मैं दीपा को जगाते हुए कहा।

सोने दो न छोटे। बहुत अच्छी नींद आ रही है। दीपा ने बच्चों की तरह मेरे सीने में घुसते हुए कहा।

चलो उठो जल्दी, नहीं तो देर हो जाएगी कॉलेज जाने में। मैंने दीपा के गाल को खीचते हुए कहा।

दीपा गाल खीचने से कसमसाते हुए उठ गई और नित्यक्रिया के लिए बाथरूम में चली गई उसके जाने के कुछ ही देर बाद आशीष भैया भी निमंत्रण से वापस आ गए। मैंने उन्हें प्रणाम किया।

अरे निशांत तुम कैसे हो भाई और कब आए। आशीष भैया ने कहा।

मैं ठीक हूँ भैया और मैं कल शाम को ही आया था दीपा को कॉलेज से छोड़ने तो पता चला कि आप नहीं हो तो दीपा जिद करने लगी कि मैं यही रुक जाऊँ। तो मैं यही रूक गया। अभी कॉलेज के लिए निकल रहे हैं दोनों लोग।

क्या तुम रात में भी यहीं थे दीपा के साथ। इससे अच्छा तो दीपा को लेकर तुम्हें अपने घर चले जाना चाहिए था। आशीष भैया ने कहा।

आशीष भैया की बात से लग गया था कि वो मेरे यहाँ रात रुकने थे खुश नहीं थे। आखिर जवान बहन के साथ एक लड़का, भले ही वह उसे जानते ही हों रात गुजारे तो कोई भी भाई खुश नहीं होगा। मैं भी उनकी दुविधा समझ रहा था।

हाँ भैया मैंने दीपा से कहा भी था घर चलने के लिए, लेकिन उसे रोज-रोज घर जाना अच्छा नही लग रहा था। इसलिए मैं उसे लेकर यहाँ आ गया। मैंने आशीष भैया से कहा।

चलो ठीक है। तुम बैठो तब तक मैं भैंसों के दूध निकाल लेता हू। आशीष भैया ने कहा।

उसके बाद आशीष भैया बाल्टी लेकर दूध दूहने चले गए और मैं चारपाई पर बैठा सोचने लगा कि मुझे सच में दीपा को लेकर अपने घर चले जाना चाहिए था। पता नहीं आशीष भैया क्या क्या सोच रहे होंगे दीपा और मेरे बारे में। उधर दीपा ने नहाकर नाश्ता बनाने चली गई। मैं बाथरूम में घुस गया। नित्यक्रिया के बाद मैंने भी स्नान किया और बारह आकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद भैया भी भैंस दुहकर आ गए। उन्होंने भी बाथरूम जाकर हाथ मुँह धोया और मेरे पास आकर बैठ गए।

और बताओ निशांत तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है। आशीष भैया ने मुझसे पूछा।

बहुत बढ़िया चल रही है पढ़ाई भैया। मैंने आशीष भैया से कहा।

तब तक दीपा नाश्ता लेकर आ गई, हम तीनों नहीं बैठकर नाश्ता करने लगे।

आपको पता है भैया। निशांत छात्रसंघ चुनाव जीत गया है। दीपा चहकते हुए अपने भाई से बोली।

अरे वाह ये तो खुशी की बात है निशांत। बहुत बहुत बधाई हो भाई। आशीष भैया खुश होते हुए बोले।

धन्यवाद भैया। मैंने आशीष भैया से कहा।

अच्छा तुम दोनों कॉलेज समय से चले जाना। मैं दूध लेकर डेरी के लिए निकल रहा हूँ। तुम दोनों अपना ख्याल रखना।

इतना बोलकर आशीष भैया फिल्टर गाड़ी में बाँधकर डेरी के लिए निकल गए। थोड़ी देर बाद हम दोनों भी कॉलेज के लिए निकल पड़े। कॉलेज पहुँचने के बाद दीपा अपने क्लास की तरफ चली गई और मैं अपने क्लास की तरफ चला गया। थोड़ी देर बार क्लास में अध्यापक आए। उन्होंने सबसे पहले मुझे छात्रनेता बनने के लिए शुभकानमनाएँ दी। मैंने भी उनका अभिवादन किया। फिर अध्यापक पढ़ाने लगे। अपनी क्लास खत्म करने के बाद मैं कैंपस में आकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद राहुल भैया और विक्रम भैया मेरे पास आए।

क्या बात हो नेता जी। जब से चुनाव जीते हो नजर ही नहीं आ रहे हो। राहुल भैया मुझे छेड़ते हुए बोले।

ऐसी कोई बात नहीं है भैया। बस ऐसे ही थोड़ा परेशान था बस। मैंने राहुल भैया से कहा।

क्या यार निशांत। अब तुम कॉलेज के नेता बन गए हो। तुम्हें परेशानी को अपने आस-पास भी नहीं फटकने देना है। जब तुम अपनी ही परेशानी से जूझते रहोगे तो छात्रों की परेशानी को कैसे दूर करोगे।

अरे नहीं भैया वो माँ मेरे चुनाव जीतने से खुश नहीं हैं यही सोचकर थोड़ा परेशान हूँ कि जब मैं उनके सामने चाऊँगा तो क्या होगा। मैंने उनसे कहा।

क्यों तुम कल घर नहीं गए थे क्या जो माँ से अभी तक मुलाकात नहीं हुई तुम्हारी। विक्रम भैया ने कहा।

नहीं भैया कल मैं दीपा के घर चला गया था और रात उसी के यहाँ था। मैंने उनसे कहा।

अच्छा एक बात बताओ। तुम दीपा से प्यार करते हो न।

हाँ भैया। मैंने राहुल भैया से कहा।

तुम बहुत लकी हो निशांत, दीपा सच में बहुत अच्छी लड़की है। जितनी वह दिल की अच्छी है उतनी ही वह पढ़ाई में भी अव्वल है। उसने इतने कम समय में ही कॉलेज के सभी अध्यापकों के मन में अपनी अलग पहचान बना ली है। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

धन्यवाद भैया। मैं खुश होते हुए कहा।

वैसे तुम्हें एक राज की बात बताऊँ, लेकिन पहले वादा करो कि ये बात तुम दीपा को कभी नहीं बताओगे और इसे अपने दिल में ही दबाकर रखोगे। नहीं तो दीपा का मेरे ऊपर से भरोसा उठ जाएगा। राहुल भैया ने कहा।

ऐसी क्या बात है भैया कि आप ऐसा बोल रहे हैं। मैंने शंकित दृष्टि से उन्हें देखते हुए सवाल किया।

ऐसे नहीं छोटे। पहले वादा करो तो बताऊँगा। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

छोटे। आपको ये नाम कैसे पता चला। ये तु इस कॉलेज में सिर्फ दीपा को मालूम है। मैंने राहुल भैया को देखते हुए पूछा।

यार निशांत तुम सवाल बहुत करते हो। तुम्हें नहीं जानना है तो जाओ नहीं बताता तुम्हें। राहुल भैया ने कहा।

अरे नहीं भैया। मुझे जानना है। मैं वादा करता हूँ कि मैं ये बात दीपा को कभी पता नहीं चलने दूँगा। लेकिन पहले आ ये बताइए कि आपको मेरे घर का ना कैसे पता चला। मैंने राहुल भैया से पूछा।

मुझे ये नाम दीपा ने बताया। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

लेकिन दीपा की जान-पहचान तो मैंने आपसे करवाई थी चुनाव का उम्मीदवार बनते समय। मैंने राहुल भैया से कहा।

तुमको क्या लगता है निशांत कि इस छात्रसंघ चुनाव में मैंने तुमको खड़ा होने के लिए कहा था। राहुल भैया ने कहा।

और नहीं तो क्या आपने ही तो फोन करके मुझे इस चुनाव में देवांशु के विरुद्ध चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार बनने के लिए कहा था। आपको याद नहीं है क्या। मैंने राहुल भैया से कहा।

हाँ तो मैं कब इस बात से मना कर रहा हूँ कि मैंने तुमको चुनाव में खड़ा होने के लिए नहीं कहा था। लेकिन इसके पीछे एक और बात है जो तुम्हें पता नहीं है। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

और वो बात कौन सी है भैया। मैंने उत्सुकतावश राहुल भैया से पूछा।

वो बात ये है कि मैं तो तुम्हें ठीक से जानता भी नहीं था, बस वहीं खेल के मैदान में हम दोनों की मुलाकात हो जाती थी। वहीं से हम दोनों में थोड़ी बहुत जान पहचान बढ़ी थी। राहुल भैया ने कहा।

हाँ ये बात तो आपकी सही है भैया, लेकिन आप कुछ और बात कर रहे थे न। मैंने राहुल भैया से कहा।

हाँ तो मैं कह रहा था कि मुझे छात्रसंघ के चुनाव में तुम्हें उम्मीदवार बनाने के लिए तुम्हारे नाम का सुझाव दीपा ने ही दिया था।राहुल भैया ने मुझसे कहा।

राहुल भैया ने की बात सुनकर मैं आश्चर्यचकित रह गया। मैं मुँह फाड़े कभी राहुल भैया को देखता तो कभी विक्रम भैया को।

क्या कहा। दीपा ने। मैं लगभग चीखते हुए बोला।

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छात्रसंघ चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में तुम्हारा नाम दीपा ने ही बताया था। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

क्या कहा। दीपा ने। मैं आश्चर्यचकित होकर राहुल भैया से बोला।

हाँ दीपा ने ही तुम्हे उम्मीदवार बनाने के लिए मुझसे कहा था। राहुल भैया ने मुझसे कहा।

लेकिन आप दीपा को कैसे जानते हैं और उसने मेरा नाम क्यों इस चुनाव में उम्मीदवार के लिए आपको बताया। मैने राहुल भैया से कहा।

दीपा की एक सहेली है जिसका नाम सोनम है। सोनम मेरे खास दोस्त की बहन है। दीपा से मैं अपने दोस्त के घर ही 2 बार मिला था, उस समय बस हाय हेलो ही हुआ था। ये कक्षा 10 की बात है। जब दीपा पढ़ती थी । उसके बाद मेरे दोस्त के पापा का स्थानांतरण दूसरे शहर हो गया तो वो लोग यहां से चले गए। दीपा को मैंने कॉलेज में कुछ दिन पहले ही देखा था। पहले तो मैंने सोचा कि ये दीपा ही है, इससे बात करूँ। फिर मैंने अपना इरादा बदल दिया। लेकिन एक दिन जब मैं लाइब्रेरी में कुछ किताब देख रहा था तो दीपा भी वहाँ पर बैठकर कोई किताब पढ़ रही थी। तो मैं उसके पास जाकर बैठ गया। पूछने पर उसने बताया की उसका नाम दीपा है, लेकिन वो मुझे ठीक से पहचान नहीं पाई। फिर सोनम के बारे में बताने और पुरानी बात याद दिलाने से वो मुझे पहचान गई। राहुल भैया ने मुझे पूरा वृत्तांत सुना दिया।

ये तो बहुत अच्छी बात है भैया की आप दोनों पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं, लेकिन ये बात समझ में नहीं आ रही है कि उसने मुझे क्यों इस छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़ा करवाया। मैंने राहुल भैया से पूछा।

एक दिन मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठकर इस चुनाव के बारे में चर्चा कर रहा था, तभी दीपा मेरे पास आई। वो उस देवांशु के लिए वोट मांगने के लिए सभी छात्रों से बात कर रही थी। उसने मुझे और मेरे दोस्तों से भी देवांशु को वोट देने के लिए निवेदन किया और देवांशु की तारीफ़ करने लगी , तभी मैनें उसे बताया कि हम सब देवांशु को वोट नहीं देंगे।

दीपा ने कारण जानना चाहा तो मैंने उसे बताया कि हम सब दोस्त देवांशु के प्रतिद्वन्द्वी को वोट देंगे , क्योंकि देवांशु इस काबिल नहीं है कि वो छात्रसंघ नेता बनकर इस कॉलेज की भलाई के लिए कुछ कर सके।

आप ऐसा क्यों कहा रहे हैं भैया। वो बहुत अच्छा लड़का है और बहुत काबिल है। मुझे लगता है कि अपनी सारी जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभाएगा। दीपा ने कहा।

तुम इसलिए ऐसा लगता है कि वो तुम्हारा सहपाठी है, कभी तुम उसके बारे में पता करना कि वो कितना बिगड़ा हुआ लड़का हूं। मेरी मानो तो जितनी जल्दी हो सके उसका साथ छोड़ दो। मैंने दीपा से कहा।

ठीक है भैया में इस बारे में सोचूँगी, मगर आप किसको खड़ा कर रहे हैं देवांशु के ख़िलाफ़। दीपा ने पूछा।

सोच रहा हूँ देवांशु की तरह ही किसी नए बंदे को खड़ा करूँ, लेकिन समझ मे नहीं आ रहा है किसे। मैन कहा।

मैं एक नाम बताऊँ अगर आप सहमत हों तो। दीपा ने कहा।

हाँ क्यों नहीं। मैंने कहा।

आप छोटे को इस चुनाव में उम्मीदवार बना सकते हैं। वो भी देवांशु की तरह नया ही है। दीपा ने कहा।

कौन छोटे। मैन कहा।

मेरे पूछने पर दीपा शर्माने लगी और तुम्हारे बारे में बताया। उसकी बात और उसके हाव भाव से मैं समझ गया कि शायद वो तुमसे प्यार करती है। इतने दिनों में में मैं भी तुमको थोड़ा बहुत जान गया था। तो हम सब दोस्तों ने निर्णय लिया कि तुम्हे ही उम्मीदवार बनाया जाए। दीपा ने मुझसे ये बात तुम्हे न बताने के लिए कहा था।

राहुल भैया की बात सुनकर मुझे दीपा का अपने लिए प्यार और भरोसा महसूस कर उस पर बहुत प्यार आया और मैन निर्णय लिया कि मैं दीपा की उम्मीदों पर पूरा खरा उतरने की कोशिश करूँगा।

अभी हम बात कर ही रहे थे कि दीपा वहां पर आ गई।
क्या बातें हो रही हैं दीपा ने कहा।

कुछ नहीं बस तुम्हारे बारे में ही बातें हो रही हैं। बड़ी तारीफ कर रहा है निशांत तुम्हारी। राहुल भैया ने कहा।

निशांत ऐसा ही है। सब की तारीफ करता रहता है। दीपा ने कहा।

इसके बाद हमने थोड़ी देर बातें की। फिर मैं राहुल भैया, विक्रम भैया और उनके कुछ खास दोस्त, दीपा और उसकी कुछ खास सहेलियां और मेरे दो खास मित्र जीत की पार्टी करने के लिए एक अच्छे आए रेस्टोरेंट में चले गए। सब लोगों ने मिलकर अपनी पसंद का खाना ऑर्डर किया। कुछ देर बाद खाना आया और हम सबने मिलकर खाना खाया। जब बिल देने की बारी आई तो मैं बिल देने लगा तो राहुल भैया ने मुझे रोकते हुए खुद बिल का भुगतान करने लगे। मेरे मन करने के बाद भी वो नहीं माने तो निर्णय ये लिए गया कि मैं राहुल भैया और विक्रम भैया बिल का भुगतान करेंगे। हमने मिलकर खाने के पैसे दिए और अपने अपने घर चले गए।

मैं अपने घर पहुचा कुछ देर बाद अर्जुन भैया भी आ गए तो उन्होंने मुझसे पूछा।

कैसा रहा आजका दिन छोटे।

बहुत अच्छा रहा भैया। मैन कहा।

फिर रात में खाने के समय सब लोग बैठे हुए थे और खाना खा रहे थे।

तुम कल रात भर कहाँ थे निशांत। माँ ने कहा।

कल रात दीपा के भैया घर पर नहीं थे तो दीपा ने मुझे रोक लिया था। कल में उसी के साथ था। मैंने कहा।

कल तुम दीपा के साथ रात भर अकेले थे। तुमको समझ मे आता है कि क्या किया है तुमने। तुम उसे लेकर यहां नहीं आ सकते थे। मां ने कहा।

मैंने माँ को सारी बात बता दी। थोड़ी देर बाद माँ ने कहा।

तुमने अभी तक जो भी किया अपने मन का किया, लेकिन अब तुझे मेरी एक बात माननी होगी। कर तू उसके लिए मना नही करेगा। मां ने कहा।

ठीक है माँ। में मना नहीं करूंगा। मैंने कहा।

मैंने तुम्हारे लिए एक लड़की पसंद की है और मैं चाहती हूँ कि तुम्हारी शादी उससे हो।माँ ने कहा।

माँ की बात सुनकर मुझे झटका लगा। मैं कभी माँ को देखता तो कभी भैया और भाभी को।

क्या हुआ निशांत तुमने कोई जवाब नहीं दिया। माँ ने कहा।

कुछ नहीं माँ वो मैं सोच रहा था कि पहले पढ़ाई खत्म हो जाए। उसके बाद शादी का सोचूँगा। मैने कहा।

तो मैं कौन सा तुझे अभी शादी के लिए बोल रही हूँ। तेरी पढ़ाई पूरी होने के बाद ही शादी होगी। लेकिन उसी से शादी करनी पड़ेगी, जिसे मैंने पसंद किया है। कुछ दिन बाद वो लोग यहां आ रहे हैं तो मैं सोच रही हूँ कि तुम दोनों एक दूसरे से मिल लो। अगर सबकुछ ठीक रहा तो सगाई कर देते हैं तुम्हारी । माँ ने कहा।

मैं तो बात को टालना चाहता था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद तक शायद माँ उस पसंद की हुई लड़की से मेरा रिश्ता न करें, लेकिन माँ ने तो पूरी तैयारी कर ली थी। में दीपा से ही शादी करना चाहता था, इसलिए मैंने माँ को सब बताने का फैसला कर लिया।

बात ये है माँ कि मैं किसी से प्यार करता हूँ और उसी से शादी करना चाहता हूँ। मैंने हिम्मत जुटाते हुवे मां से कहा।

क्या कहा। तू अब प्यार भी करने लग गया। हमारे पूरे खानदान में ऐसा कभी नहीं हुआ। तुमने तो मेरी नाक कटा दी। मां ने गुस्से का नाटक करते हुए कहा।

माँ एक बार मेरी बात तो सुन लो। आप सब उसे अच्छी तरह जानते हैं। और उसे पसंद भी करते हैं। मैंने माँ से कहा।

कौन है वो लड़की जिसे हम जानते हैं। माँ ने कहा।

में दीपा से प्यार करता हूँ और उसी से शादी करना चाहता हूँ आप सब की अनुमति से। मैंने एक सांस में सब बोल दिया।

क्या दीपा। ये नहीं हो सकता छोटे। दीपा ने मेरे घर आते जाते मेरे बेटे को फ़ांस लिया। मैं बात करती हूँ आशीष से और बताती हूँ दीपा की करतूत उसे। मां ने कहा।

लेकिन माँ। मेरे इतना कहते ही मां उठाकर गुस्से से मुझे देखती हुई अपने कमरे में चली गयी।

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[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]चौबीसवाँ भाग[/color]

[color=rgb(51,]माँ ने मेरी बात नहीं सुनी और गुस्से से अपने कमरे में चली गयी।

भैया आप माँ से बात करिए न आप तो जानते हैं कि मैं दीपा से कितना प्यार करता हूँ। मैंने भैया से कहा।

माफ़ करना निशांत मैं इस मामले में तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता। अर्जुन भैया ने कहा।

भाभी आप तो माँ को कुछ समझाइए। मैं दीपा से बहुत प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ और माँ हैं कि किसी और लड़की को पसंद करके बैठी हैं। आप कुछ करिए न भाभी। मैने भाभी से कहा।

मैं तो तुम्हारी मदद करूँगा ही नहीं। उस दिन जब मैंने पूछा था कि अगर किसी से प्यार करते हो तो मुझे बता दो मैं तुम्हारी पूरी मदद करूँगी, लेकिन उस दिन तुम मुकर गए थे और आज पता चल रहा है कि तुम दीपा से प्यार करते हो और उसके लिए माँ से बात करने के लिए बोल रहे हो। भाभी ने कहा।

मुझे माफ़ कर दीजिए भाभी। मैं बहुत जल्द आपको बताने वाला था, लेकिन उससे पहले ही माँ ने किसी और से बात कर ली। मैंने कहा।

माफ़ करना निशांत। इस मामले में मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊँगी। भाभी ने कहा।

उसके बाद भैया और भाभी अपने कमरे में चले गए। मैं कुछ देर वहीं बैठा रहा और अपने और दीपा के बारे में सोचता रहा। फिर में भी उठकर अपने कमरे में चला गया।

मैं अपने बिस्तर पर लेटकर सोने की कोशिश करने लगा, मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने अपना मोबाइल निकाला और दीपा को फ़ोन मिलाया, लेकिन उसने फ़ोन नहीं उठाया और न ही उसका फ़ोन की आया। मैं बिस्तर पर करवटे बदलता रहा। आधी रात के बाद मुझे नींद आ गयी।

सुबह उठकर मैंने स्नान किया और कॉलेज निकल गया। आज मैं बहुत उदास था। जब मैं कॉलेज पहुँचा तो आज देवांशु मेरा कॉलेज गेट के पास अपने दोस्तों के साथ मेरा इंतज़ार कर रहा था। मैंने उसे नजरअंदाज कर दिया और अपनी कक्षा की तरफ जाने लगा।

अरे नेता जी। कहाँ चले। बड़ी जल्दी में लग रहे हो। अरे हमसे भी मिल लो। कब से हम अपने नए नेता जी की बाट जोह रहे हैं और आप हैं कि बिना मिले ही चले जा रहे हैं। देवांशु मुझपर तंज़ कसते हुए बोला।

माँ और भैया भाभी की बात को लेकर मैं पहले से ही बहुत परेशान था और इस समय देवांशु से बात करने का मतलब था कि लड़ाई होना निश्चित था और मेरा इस समय लड़ाई करने का कोई मूड़ नहीं था।

मैं अभी बहुत जल्दी में हूँ देवांशु। फिर कभी बात करेंगे। मैंने देवांशु से कहा और बिना उसकी बात सुन आगे बढ़ गया।

मैंने अपनी क्लास में जाकर अपनी सीट पर बैठ गया और टीचर के आने पर क्लास अटेंड की। आगे की क्लास करने का मेरा मन नहीं था तो मैं जाकर गार्डन में बैठ गया। आस पास अन्य छात्र-छात्राएँ बैठे हुए थे। थोड़ी देर बाद देवांशु अपने दोस्तों के साथ वहाँ पर आ गया।

क्या बात है नेता जी। आपके चेहरे की हवाइयाँ क्यों उड़ी हुई हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी से मार खाकर आये हो। देवांशु व्यंग्यात्मक लहजे में बोला।

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। बस तबियत थोड़ी ठीक नहीं है। मैंने बात को यहीं खत्म करने की नीयत से देवांशु को जवाब दिया।

लग तो नहीं रहा है कि तुम्हारी तबियत को कुछ हुआ है। ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने दो चार थप्पड़ लगाए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दीपा ने ही तुझे पीटकर तेरा ये हाल किया है। देवांशु ने कहा।

देख देवांशु। मैं तुझसे कोई पंगा नहीं चाहता। तो अपनी ये बकवास बन्द कर और जा यहाँ से। मेरा मूड़ मत खराब कर। मैंने देवांशु से कहा।

क्यों बे। चुनाव क्या जीत गया तू, बहुत अकड़ने लगा है, तेरी सारी अकड़ मैं निकालूँगा और उस दीपा को भी सबक सिखाऊंगा। साली ने मुझसे धोखा करके मेरे खिलाफ जाकर तेरा साथ दिया। छोडूंगा नहीं तुम दोनों को। देवांशु ने कहा।

देवांशु ने दीपा को गाली दी थी जिसे सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। मैं उठा और देवांशु का कॉलर पकड़ लिया।

अपनी गंदी जुबान से दीपा का नाम लेने की कोशिश दोबारा मत करना। नहीं तो तेरा वो हाल करूँगा कि तुझे जिंदगी भर पछतावा रहेगा कि तुमने निशांत से पंगा क्यों लिया। मैं गुस्से में चिल्लाते हुए बोला।

हम दोनों एक दूसरे का कॉलर पकड़कर गुत्थम गुत्था हो गए थे। आस पास की छात्र-छात्राएँ भी हम दोनों के पास जमा हो गए। राहुल भैया और विक्रम भैया भी अपने दोस्तों के साथ वहाँ आ गए थे। उन्होंने हम दोनों को अलग किया।

तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी निशांत मुझसे उलझकर। ये तुझे बहुत महँगा पड़ेगा। छोडूंगा नहीं में तुझे। देवांशु अपने दोस्तों के साथ मुझे धमकी देते हुए चला गया।

उसके जाने के बाद राहुल भैया के पूछने पर मैंने उसे सारी बात बता दी।

देखो निशांत अब तुम छात्रों के नेता बन चुके हो और तुम्हे बात बात पर आपा खो देना शोभा नहीं देता। इससे विद्यार्थियों के मन मे तुम्हारे लिए गलत छवि बनेगी। तो आगे से इसका ध्यान रखना और उस देवांशु के मुंह बिल्कुल भी मत लगना। वो तो चाहता ही है कि तुम्हारी छवि विद्यार्थियों के बीच खराब हो। राहुल भैया मुझे समझते हुए बोले।

मैंने भी हाँ में सिर हिला दिया। उसके बाद सभी अपनी अपनी कक्षाओं में चले गये। आज दीपा भी कॉलेज नहीं आयी थी। मेरा अब पढ़ाई की कोई इच्छा नहीं थी, इसलिए मैं कॉलेज से घर के लिए निकल पड़ा।

मैं अपने कमरे में उदास बैठा हुआ था। खाने के समय मैंने माँ से फिर बात करनी चाही, लेकिन वो अपने फैसले पर अडिग रही। इसी तरह तीन दिन बीत गए।

मैं रोज सुबह कॉलेज जाता और शाम को कॉलेज से घर आता। रात में माँ को मानता, लेकिन माँ ने तो जैसे कसम खा रखी थी उस लड़की से मेरी शादी करवाने की।

चौथे दिन मैं कॉलेज में था और अपने दुःख को कम करने के लिए राहुल भैया और विक्रम भैया से कॉलेज के बारे में मंत्रणा कर रहा था।

निशांत मुझे लगता है कि कक्षा में विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था के बारे में एक बात कुलपति महोदय से बात करनी चाहिए। राहुल भैया ने कहा।

कॉलेज परिसर में पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। कई नल खराब पड़े हुए हैं। विद्यार्थियों के बैठने के लिए भी पार्क के अलावा कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बारे में भी उनसे बात करनी चाहिए। अब ये सब देखना भी काम है। विक्रम भैया ने कहा।

ठीक है जैसा आप लोग कहें। चलिए फिर चलते हैं कुलपति महोदय के पास। मैंने कहा।

उसके बाद मैं, राहुल भैया, विक्रम भैया और उनके दो दोस्त कुलपति महोदय के कार्यालय पहुचे और उन्हें उक्त सभी समस्याओं से अवगत कराया। कुलपति महोदय ने भी जल्द से जल्द इन समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

उसके बाद हम अपनी अपनी कक्षाओं में चले गए। इन 3-4 दिनों से मेरी दीपा से ठीक से बात नहीं हो पाई थी, बस हाय हेल्लो तक ही बात हुई थी, क्योंकि मैं घर वाली समस्या का जिक्र अभी फिलहाल दीपा से नहीं करना चाहता था।

कॉलेज खत्म होने पर मैं घर आया और रात में खाने के समय मैंने फिर माँ से बात की, लेकिन माँ नहीं मानी। खाने के बाद हम अपने अपने कमरे में सोने के लिए निकल गए।

सुबह उठकर मैं कॉलेज गया और अपनी क्लास में बैठकर पढ़ाई की। भोजनावकाश के समय मैं पार्क में बैठा था कि तभी विद्यार्थियों का दो समूह मेरे पास आया।

सर, हम द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। सभी विषय तो ठीक से पढ़ाए जा रहे हैं, परंतु हिंदी विषय के प्रोफेसर ठीक से पढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हमने इस बारे में पहले भी बात करी थी, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। प्रथम समूह के एक छात्र ने अपनी समस्या बताई।

ठीक है मैं बात करता हूँ इस बारे में। और आप सब की क्या परेशानी है। मैंने दूसरे समूह की तरफ देखते हुए कहा।

सर, हम प्रथम वर्ष के विद्यार्थी हैं, अंतिम वर्ष के कुछ छात्र हम लोगों की रोज रैगिंग करते हैं। तरह तरह के उलटे सीधे सवाल पूछते हैं। गंदे गंदे टास्क करने के लिए देते हैं। मना करने पर मारते हैं, जिससे हमारी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। आप इस बारे में कुछ करिए सर। उस समूह से एक लड़की ने अपनी परेशानी बताई।

ठीक है में कुछ करता हूँ। इतना बोलकर में राहुल भैया के पास जाने के लिए उठ खड़ा हुआ।

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[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]पचीसवाँ भाग[/color]
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मेरे पास आये हुए सभी विद्यार्थियों की परेशानियों को सुनने के बाद मैंने कहा।

आप लोग अब जाइये मैं कुछ करता हूँ इसके बारे में। मैंने उन विद्यार्थियों से कहा।

उनके जाने के बाद मैं वहाँ से राहुल भैया के पास चला गया। वहाँ पर राहुल भैया के साथ विक्रम भैया और उनके कुछ दोस्त बैठे हुए थे। मैंने उन्हें मुझसे मिले हुए छात्रों की समस्याओं से अवगत कराया। सब ने तय किया कि कल इस बारे में कुलपति महोदय से बात करेंगे।

उसके बाद मैं अपनी कक्षा में आने लगा तभी मुझे दीपा मिल गई।

क्या बात है छोटे बाबू। मुझसे दूर दूर भाग रहे हो आजकल। मुझसे नाराज़ हो क्या ? मुझसे कोई भूल हो गई है क्या? दीपा ने मुझे देखते ही मुझसे सवाल किया।

ये कैसी बात कर रही हो तुम दीपा। तुम तो मेरी जान हो। भला मैं तुमसे कैसे नाराज़ हो सकता हूँ। मैंने दीपा से कहा।

फिर क्या बात है। तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते हो। कोई परेशानी है क्या तुमको? दीपा ने पूछा।

नहीं कोई परेशानी नहीं है दीपा। बस मुझे समय नहीं मिल पाया इन दिनों, इसलिए तुमसे बात नहीं हो पाई। मैंने दीपा से नज़रें चुराते हुए कहा।

तुम्हें तो ठीक से झूठ बोलना भी नहीं आता छोटे। तुम्हारे चेहरे से दिख रहा है कि कोई परेशानी तो जरूर है। अब झूठ बोलना छोड़ो और बात क्या है ये बताओ। दीपा ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली।

कोई परेशानी नहीं है दीपा। तुम्हे ग़लतफ़हमी हुई है कि मैं परेशान हूँ। मैंने दीपा से कहा।

ठीक है छोटे। मैं यहां बैठी ही क्यों हूँ। मैं जा रही हूँ तुम रहो अपनी परेशानियों के साथ। दीपा नाराज़ होते हुए बोली और जाने लगी।

दीपा की नाराजगी देखकर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे वापस बैठा लिया।

माँ मेरी शादी करवाना चाहती हैं। मैंने दीपा से कहा।

लेकिन इतनी जल्दी क्यों है उन्हें तुम्हारी शादी की। कहीं तुमने कोई कांड तो नहीं कर दिया। दीपा ने मज़ाकिया लहज़े में कहा।

क्या यार तुम भी। पहले पूरी बात तो सुन लो। माँ मेरी शादी करवाना चाहती हैं, लेकिन अभी नहीं पढ़ाई खत्म होने के बाद, और हम दोनों के प्यार के बारे में मैंने भी माँ को बता दिया है। मैंने दीपा को देखते हुए कहा।

मेरी बात सुनकर वो बहुत खुश हुई उसे लग रहा था कि माँ उससे मेरी शादी करना चाहती हैं

तो तुम इतने परेशान क्यों हो। क्या तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहते। दीपा ने कहा।

कैसी बात के रही थी तुम। मैं तुमसे ही शादी करना चाहता हूँ, लेकिन असली परेशानी की वजह दूसरी है। माँ ने तुमसे शादी के लिए इनकार कर दिया है और मेरे लिए कोई दूसरी लड़की पसंद कर ली है उन्होंने। मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा।

मेरी बात सुनकर दीपा का चेहरा फक्क पड़ गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला। वो मेरे पास से उठी और आंखों में आँसू लिए अपने कक्षा में भाग गई। मैं उसे आवाज़ देता रहा, लेकिन वो नहीं रुकी।

उसके जाने के बाद मेरा भी मन कॉलेज में नहीं लगा तो मैं अपने घर चला आया। मैंने दीपा से और बातकर उसे और दुःख और दर्द नहीं देना चाहता था।

घर आकर मैं अपने कमरे में चला गया। खाना खाते समय मैंने माँ से फिर बात की तो माँ ने कहा।

क्या तू सच मे दीपा से बहुत प्यार करता है।

हाँ माँ आप सब के बाद अगर मैं सबसे ज्यादा किसी से प्यार करता हूँ तो वो दीपा है। मेरी शादी उससे करवा दो प्लीज़। मैंने माँ से निवेदन करते हुए कहा।

तुमने ये बताने में बहुत देर कर दी है निशांत। मैं उन्हें अपनी जुबान दे चुकी हूँ। अब मैं कुछ नहीं कर सकती निशांत। अब तुझे सोचना है कि तुझे दीपा चाहिए या अपनी माँ और भाई की इज़्ज़त। माँ ने कहा।

अब इसके आगे बोलने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं था तो मैं खाना खाकर अपने कमरे में चला गया और दीपा को फ़ोन लगाया। दीपा ने फ़ोन उठाया।

हाँ छोटे बाबू। कैसे याद किया। कोई और बात हो गई क्या। दीपा ने फिक्रमंद लहजे में पूछा।

नहीं और कोई बात नहीं हुई है, लेकिन तुम मेरी बात को अनसुना करते हुए क्यों भाग गई थी कॉलेज में। मैंने दीपा से पूछा।

इस बारे में कल कॉलेज में बात करते हैं निशांत। अभी मुझसे नींद आ रही है। दीपा ने कहा।

मैंने भी शुभरात्रि बोलकर फ़ोन रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई।

सुबह में उठकर नहा धोकर नाश्ता किया और कॉलेज चला गया। वहां पर क्लास अटेंड की और राहुल भैया को फ़ोन करके कुलपति महोदय के कार्यालय के बाहर मिलने के लिए बुलाया। थोड़ी देर बाद राहुल भैया विक्रम और 2-3 दोस्तों के साथ वहाँ आ गए। हम सब मिलकर कुलपति महोदय के पास गए।

आओ निशांत, राहुल और विक्रम। क्या बात है। फिर से कोई समस्या आ गई है क्या। कुलपति महोदय ने कहा।

बात ये है कि हमें आपसे दो अहम मुद्दे पर बात करनी है। इतना ही नहीं आपको उसका समाधान तत्काल करने के लिए कड़ा कदम उठाना होगा। राहुल भैया बोले।

पहले बात क्या है ये तो बताओ। अगर जरूरी हुआ तो मैं तत्काल कदम उठाऊंगा। कुलपति महोदय ने कहा।
सर कॉलेज में रैगिंग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। वरिष्ठ विद्यार्थियों ने रैगिंग से नए विद्यार्थियों के अंदर इतना खौफ़ भर दिया है कि वो कॉलेज आना नहीं चाहते हैं और जो विद्यार्थी कॉलेज आ रहे हैं वो हर समय डरे सहमे रहते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है और इस रैगिंग से कॉलेज का माहौल और छवि खराब हो रही है। इसे जितनी जल्दी हो सके बंद करें ताकि विद्यार्थी बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। मैंने कुलपति महोदय से कहा।

मैंने इस बारे में आज सुबह ही कॉलेज की व्यवस्था प्रणाली देखने वाली संस्था को बोल दिया है। बहुत जल्दी कॉलेज में रैगिंग दंडनीय अपराध घोषित कर दिया जाएगा। और नियम तोड़ने वाले को सख्त सजा दी जाएगी। कुलपति महोदय ने कहा।

धन्यवाद सर, दूसरा मुद्दा ये है कि हिंदी वाले प्रोफेसर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वो विद्यार्थियों को शिक्षा देने के बजाय कॉलेज में अपना समय बिताते हैं। सर हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। अगर प्रोफेसर अपने कर्तव्यों के प्रति ऐसे ही उदासीन रहे तो हिंदी राष्ट्रभाषा तो दूर। जन-जन की भाषा भी नहीं बन पाएगी। मैंने कुलपति महोदय से कहा।

लेकिन मुझे तो इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। आप लोगों ने अच्छा किया जो मुझे इससे अवगत कराया। आप लोग निश्चिंत होकर जाइये। मैं देखता हूं इस मामले को। कुलपति महोदय ने कहा।

कुलपति महोदय के आश्वासन के बाद हम लोग उनके कार्यालय से बाहर आ गए। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद सभी अपनी कक्षाओं में चले गए। मैं अभी भी वहीं बैठा हुआ था। तभी दीपा आकर मेरे बगल में बैठ गई।

और छोटे कहाँ थे अभी तक। दीपा ने मेरे कंधे पर चपत लगाते हुए कहा।

कुछ नहीं कुलपति महोदय के पास गया था। विद्यार्थियों की कुछ समस्याएं थी उसी पर चर्चा करने गया था। मैंने कहा।

और बताओ कब देखने जा रहे हो माँ द्वारा पसंद की हुई लड़की को। दीपा ने मुझसे पूछा।

दीपा की बात सुनकर मैंने उसकी तरफ देखा। उसके व्यवहार से कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था कि मेरी दूसरी लड़की से शादी के बारे में जानकर उसे तनिक भी बुरा लग रहा है या वो दुखी है।

क्या तुम्हें अच्छा लगेगा अगर मेरी शादी किसी दूसरी लड़की से होगी। मैंने दीपा से पूछा।

सच कहूँ तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा, परंतु माँ ने कुछ सोच समझकर ही उस लड़की को तुम्हारे लिए चुना होगा। दीपा ने कहा

लेकिन मुझे तुमसे ही शादी करनी है। और मैं इसके लिए कुछ भी करूँगा। मैं माँ को मना कर दूंगा उस लड़की से शादी करने के लिए। मैंने दीपा से कहा।

तुम ये गलत बोल रहे हो छोटे। माना कि हम दोनों प्यार करते हैं, लेकिन हम दोनों का प्यार हमारे घरवालों के प्यार से ज्यादा तो नहीं है न। हमें क्या पता कि हमारे घरवालों ने कितने कष्ट सहे हैं हमारी परवरिश में। हमारा 6 महीनों का प्यार हमारे माँ बाप भाई बहन के प्यार से अधिक तो नहीं है न। दीपा ने मुझे समझते हुए कहा।

लेकिन मैं सिर्फ तुमसे ही शादी करूँगा किसी और से नहीं। मैंने दीपा से कहा।

जब माँ नहीं चाहती कि हमारी शादी न हो तो मैं तुमसे शादी नहीं करूंगी। तुम क्या चाहते हो कि मैं तुमसे माँ की मर्जी के ख़िलाफ़ शादी करके सारी जिंदगी माँ से नजरें न मिला पाऊँ। जब माँ मुझसे पूछेंगी की मैंने ऐसा क्यों किया तो क्या जवाब दूंगी उन्हें मैं। कैसे नज़रें मिलूंगी में माँ से। मैं माँ की मर्जी के ख़िलाफ़ तुमसे शादी कभी नहीं करूंगी। दीपा ने कहा।

और हम दोनों जो इतना प्यार करते हैं उसका क्या? मैंने दीपा से कहा।

हम प्यार हमेशा करते रहेंगे, बल्कि ऐसा प्यार करेंगे एक दूसरे से कि लोगों के लिए एक मिशाल पेश करेंगे, ताकि हमारे बाद भी लोग कहें कि प्यार करो तो दीपा और निशांत की तरह निःस्वार्थ और रूहानी प्यार। दीपा ने कहा।

दीपा की बात सुनकर मैं निरुत्तर हो गया। उधर घर का माहौल कुछ और ही था।

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[color=rgb(0,]छब्बीसवाँ भाग[/color]
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दीपा की बात सुनकर मैं निरुत्तर हो गया। कुछ देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे। उसके बाद दीपा मुझे बाय बोलकर घर के लिए निकल गई, क्योंकि उसके भैया उसे लेने आ गए थे। उसके जाने के बाद मैं भी घर के लिए निकल गया।

उधर घर मे कुछ दूसरा ही माहौल था।आज भाई और माँ पहले ही घर आ गए थे और बैठे हुए कुछ मंत्रणा कर रहे थे।

अर्जुन क्यों न कल आशीष के पास चलकर छोटे और दीपा के रिश्ते की बात कर ली जाए। माँ ने अर्जुन भैया से कहा।

आप ठीक कह रही हैं माँ, लेकिन अब छोटे को और परेशान न करो। मुझसे उसकी हालत देखी नहीं जाती माँ। अर्जुन भैया ने कहा।

मुझे भी लगता है कि बहुत हो चुका उसे परेशान करना। अब मैं तो मान जाऊँगी, लेकिन छोटे को आखिरी झटका दीपा देगी। माँ ने कहा।

मैं समझी नहीं माँ। आप करने क्या वाली हैं? अदिति भाभी ने माँ से पूछा।

मैंने कुछ सोच रखा है इसके लिए, बस तुम दोनों निशांत से कुछ मत बताना बाकी में संभाल लूँगी। माँ ने कहा।

ठीक है माँ जैसा आपको ठीक लगे। हम तो आपके ही साथ हैं। अर्जुन भैया ने कहा।

बहू जरा आशीष को फ़ोन लगाओ।मुझे बात करनी है उससे। माँ ने कहा।

माँ की बात सुनकर अदिति भाभी ने आशीष भैया को फ़ोन लगाया और माँ को दे दिया।

प्रणाम माँ जी। आशीष भैया ने कहा।

जीते रहो बेटा। माँ ने कहा।

और बताइये माँ जी। मुझे कैसे याद किया आपने। मेरे लायक कोई सेवा। आशीष भैया ने पूछा।

हाँ बेटा तुमसे दीपा के बारे में बहुत जरूरी बात करनी हैं इसलिए मुझे तुमसे मिलना है। माँ ने कहा।

दीपा के बारे में। क्या बात है माँ जी। उसने कोई गलती की है क्या? आप कहें तो मैं अभी आ जाऊँ आपके यहाँ। आशीष भैया फिक्रमंद लहजे में बोले।

नहीं बेटा ऐसी कोई बात नहीं है और तुमको आने की कोई जरूरत नहीं है। तुम कल किस समय खाली रहोगे। मैं खुद तुम्हारे घर आऊंगी। और इस बात का जिक्र दीपा से बिल्कुल मत करना। माँ ने कहा।

ठीक है माँ जी। कल 12 बजे के बाद जब आपको समय मिले आ जायेगा। आशीष भैया ने कहा।

आशीष भैया से बात करने के बाद माँ ने फ़ोन रख दिया। कुछ देर बाद मैं भी घर पहुंच गया।

खाना खाते समय मैंने माँ से कहा।

माँ मेरी बात मान लीजिए न। मैं सच में दीपा से बहुत प्यार करता हूँ। मेरी शादी उसी से करवा दीजिए। मैं उसके बिना नहीं रह सकता।

मेरी बात सुनकर माँ सोच में पड़ गई। थोड़ी देर तक सोचने के बाद माँ ने कहा।

ठीक है। मैं तेरी बात मान लेती हूँ, लेकिन मेरी एक शर्त है।

क्या शर्त है माँ। मैंने खुश होते हुए कहा।

मेरी शर्त ये है कि अगर दीपा या उसके भाई ने शादी के लिए मना कर दिया तो तुम मेरी पसंद की लड़की से ही शादी करोगे। माँ ने कहा।

मैं तो माँ की बात से बहुत खुश हो गया, क्योंकि मुझे लग रहा था कि दीपा के भैया इस शादी के लिए मना नहीं करेंगे।

ठीक है माँ जैसा आप बोल रही हैं वैसा ही होगा। मैंने माँ से कहा।

इसके बाद सबने खाना खत्म किया मैं और भैया अपने अपने कमरे में चले गए। अदिति भाभी और माँ रसोईघर का काम देखने लगी। मां की हाँ के बाद मैं बहुत खुश था, इसलिए कमरे में आने के बाद मैंने तुरंत दीपा को फ़ोन किया।

हेलो दीपा। मैंने फ़ोन उठाते ही दीपा से पूछा।

में ठीक हूँ। तुम कैसे हो। दीपा ने कहा।

मैं भी ठीक हूँ। एक खुशखबरी है। माँ हम दोनों की शादी के लिए मान गई हैं। मैंने खुशी से चहकते हुए कहा।

क्या सच में। ये तो बहुत अच्छी बात है छोटे बाबू। दीपा ने भी खुश होते हुए कहा।

लेकिन उन्होंने कहा है कि अगर तुम और भैया ने शादी के लिए इनकार कर दिया तो मुझे उनकी पसंद की लड़की से ही शादी करनी पड़ेगी। मैन दीपा से कहा।

तुम उसकी चिंता मत करो। मुझे पूरा भरोसा है कि भैया मेरी खुशी के लिए मना नहीं करेंगे। दीपा ने कहा।

इसके बाद हमने थोड़ी देर बात की। फिर सो गए।
सुबह उठकर नाश्ता करके मैं कॉलेज चला गया।

क्लास अटेंड करने के बाद मैं पार्क में जाकर बैठ गया। दीपा भी अपनी क्लास अटेंड कर के पार्क की तरफ आ रही थी तो उसे देवांशु मिल गया। दीपा देवांशु को नजरअंदाज करके आगे बढ़ने लगी तो देवांशु ने कहा।

हेलो दीपा कैसी हो, तुम तो मुझे भूल ही गई। क्या बात है तुम मुझसे नाराज़ लग रही हो।देवांशु बोला।

ऐसी कोई बात नहीं है। बस पढ़ाई का दबाव है इसलिए समय नहीं मिल पाता। दीपा ने कहा।

लेकिन उस निशांत के साथ समय बिताने के लिए तुम्हे तो बहुत समय मिलता है, और मेरे लिए तुम्हारे पास समय नहीं है। देवांशु ने कहा।

देखो देवांशु। मुझे किसके साथ समय बिताना है और किसके साथ नहीं। ये तुम्हे बताने की जरूरत नहीं है। बेहतर है तुम अपने काम से काम रखो। दीपा ने नाराज़ होते हुए कहा।

क्यों दीपा। बताने की जरूरत है तुम्हे, क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ। तुमने मेरा साथ बीच में छोड़कर चुनाव में उस निशांत का साथ दिया, फिर भी मैंने तुम्हे माफ कर दिया, लेकिन अब बहुत ज्यादा कर रही हो तुम जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है। देवांशु ने दीपा पर अपना हक जताते हुए कहा।

तुम होते कौन हो मुझे माफ़ करने वाले और मैंने कब कहा कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ। मैन सिर्फ निशांत की हूँ और उसी से प्यार करती हूँ। तो अपने दिमाग से ये घटिया ख्याल निकाल दो कि मैं तुमसे कभी प्यार करूँगी। दीपा ने गुस्सा होते हुए कहा।

लेकिन क्यों आखिर मुझमें कमी क्या है। तुम क्यों प्यार नहीं करती मुझको। पैसा है। रुतबा है। देखने में भी बढ़िया हूँ। आखिर तुम्हे और क्या चाहिए मुझसे प्यार करने के लिए। तुम्हे किस बार का गुरुर है। कॉलेज की सारी लड़कियाँ मुझपर मरती हैं, लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हूँ। देवांशु खीझते हुए दीपा से बोला।

तुम्हारे पास भले ही पैसा हो। रुतबा हो। भले ही तुमपर कॉलेज की लड़कियां मरती हों। लेकिन दीपा उन लड़कियों जैसी नहीं है। जो चंद पैसों के लिए तुम जैसे घटिया इंसान से प्यार करे। जो लड़कियों को बस खिलौना समझकर उनके साथ खेलता है। दीपा ने गुस्से से कहा।

उन दोनों के बात करने की आवाज हर गुजरते क्षण के साथ तेज़ होती जा रही थी जिससे उन दोनों के आस पास बहुत से विद्यार्थी जमा हो गए थे।

क्या बोली तू साली। मुझे घटिया बोलती है तू। मैं तुझे छोडूंगा नहीं। तुझे मुझसे पंगा लेना बहुत महँगा पड़ेगा दीपा, क्योंकि मुझे जो चीज पसंद आ जाती है उसे में किसी भी कीमत पर हासिल करके ही रहता हूँ। मेरी बात याद रखना। देवांशु ने दांत पिस्टे हुए दीपा को उंगली दिखाते हुए कहा।

आ गया न तू अपनी असली औकात पर। अच्छा हुआ मैंने समय रहते तेरा साथ छोड़ दिया। अरे तू प्यार के तो क्या दोस्ती के लायक भी नहीं है। जो लड़कियों की इज़्ज़त करना न जानता हो। वो मर्द नहीं होता। तुझे जो करना है कर ले। मैं तुझसे डरने वाली नहीं हूँ। दीपा ने देवांशु को उसी के लहजे में जवाब देते हुए कहा।

उसके बाद दीपा वहां से निकल गयी और अपनी कक्षा में चली गई। मैं भी दीपा का इंतज़ार करने के बाद अपनी कक्षा में चल गया।

उधर माँ भैया और भाभी दीपा के यहाँ पहुँच चुके थे। एक दूसरे का हाल चाल पूछने के बाद मुख्य मुद्दे की बात शुरू हुई।

आपको दीपा के बारे में क्या बात करनी थी माँ जी। आशीष भैया ने कहा।

जो बात हम आपसे करने आए हैं वो दीपा से ही संबंधित है, लेकिन वो बाद कि बात हैं अभी हम आपसे कुछ बात मांगने आए हैं। अर्जुन भैया ने कहा।

मुझसे। मैं भला एक गरीब आदमी आपको क्या दे सकता हूँ, फिर भी आप कहिए अगर मेरी सामर्थ्य में हुआ तो मैं आप लोगों को निराश नहीं करूंगा।
आशीष भैया ने न समझने वाले अंदाज़ में कहा।

वो बेशकीमती है तुम्हारे लिए और तुम्हारी सामर्थ्य में भी है, उम्मीद है तुम निराश नहीं करोगे हमें। माँ ने कहा।

आप बताइए वो क्या है जो आप मुझसे मांगने आए हैं। आशीष भैया ने कहा।

बात ये हैं बेटा कि निशांत और दीपा एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। मुझे अपने निशांत के लिए दीपा का हाथ चाहिए। मैं उसे अपने घर की बहू बनाना चाहती हूं। माँ ने कहा।

क्या। क्या कहा आपने। आशीष भैया आश्चर्यचकित होकर बोले।

उसके बाद उन्होंने अपना फ़ोन निकालकर दीपा को फ़ोन लगाया।

दीपा। जहां भी हो अभी के अभी घर पहुँचो और निशांत को भी साथ में लेकर आना। आशीष भैया ने गुस्से से कहा।

क्या हुआ भैया। कोई बात है। आप इतने गुस्से में क्यों हैं। दीपा ने पूछा।

जितना कह रहा हूँ। उठना ही करो। जल्दी घर पहुँचो।
इतना कहकर आशीष भैया ने फ़ोन काट दिया।

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[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]सत्ताईसवाँ भाग[/color]
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आशीष भैया ने दीपा को तुरंत घर आने के लिए कहा और साथ में मुझे भी साथ में ले आने के लिए कहा।

दीपा ने तुरंत मुझको फ़ोन किया और बाहर बुलाया।

क्या बात है दीपा। तुमने अचानक से मुझे बाहर क्यों बुलाया। मैंने बाहर आने के बाद कहा।

भैया का फ़ोन आया था वो बहुत गुस्से में थे। उन्होंने तुरंत घर आने के लिए कहा है साथ में तुमको भी बुलाया है। पता नहीं क्या बात है। दीपा ने कहा।

अब वो तो वहां जाने के बाद ही पता चलेगा कि क्या बात है। मैंने कहा।

मैंने जाकर अपनी बाइक निकली और दीपा को पीछे बैठाकर उसके घर की तरफ चल पड़ा।

उधर घर पर माँ ने आशीष भैया से पूछा।

क्या हुआ बेटा तुमने कोई जवाब नहीं दिया। क्या तुम्हें इस रिश्ते से इनकार है।

नहीं माँ जी ऐसी बात नहीं है। मेरी दीपा की तो किस्मत ही खुल जाएगी आपके घर की बहू बनकर। लेकिन मुझे ये रिश्ता बेमेल लग रहा है। आप लोग इतने हर मामले में मुझसे बड़े(अमीर) हैं, इसलिए मैं जवाब नहीं दे पा रहा हूँ। आशीष भैया ने कहा।

ये कैसी बातें कर रहे हो बेटा। बड़े तो तुम हो। क्योंकि देने वाला हमेशा मांगने वाले से बड़ा होता है। और ये अमीर गरीब का भेदभाव मुझे करना नहीं आता। दीपा जैसी संस्कारी लड़की जिस घर में हो वो लोग कभी गरीब हो ही नहीं सकते। माँ ने कहा।

ठीक है माँ जी जैसा आपको ठीक लगे, फिर भी मैं एक बार इस बारे में दीपा से बात करना चाहता हूँ। आशीष भैया ने कहा।

जब मैं दीपा के घर पहुंचा तो वहाँ पर अपनी माँ और भैया भाभी को देखकर मैं बहुत खुश हुआ। दीपा ने सबको प्रणाम कर माँ के पैर छुए और अपने भाई के पास जाकर खड़ी हो गई।

क्या बात है भैया। आपने मुझे इतनी जल्दी किसलिए बुलाया कॉलेज से। दीपा ने कहा।

ये क्या सुन रहा हूँ मैं। तुम्हारे और निशांत के बारे में क्या तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो। आशीष भैया ने थोड़ा गुस्सा करते हुए कहा।

हाँ भैया मैं दीपा से बहुत प्यार करता हूँ और शादी भी करना चाहता हूँ। दीपा के बदले मैंने जवाब दिया।

मैं तुमसे बात नहीं कर रहा हूँ निशांत मैं दीपा से जानना चाहता हूँ। बोलो दीपा क्या मैंने जो सुना है वो सच है। आशीष भैया ने दीपा से फिर पूछा।

हाँ भैया ये सच है। दीपा ने अपना सिर झुकाकर धीरे से कहा।

मैं तुमको कॉलेज इसीलिए भेजता हूँ कि तुम पढ़ाई छोड़कर ये सब करो। तुमने मेरा भरोसा तोड़ा है दीपा। आशीष भैया ने दीपा की तरफ अपनी पीठ करते हुए कहा।

आशीष भैया की बात सुनकर दीपा की आंखों में आंसू आ गए। साथ मे माँ और भैया भी चकित थे, पर हल्का हल्का मुस्कुरा रहे थे आशीष भैया की बात सुनकर, मगर उन्होंने कुछ कहा नहीं और मेरा हाल तो पूछो ही मत। माँ के मानने के बाद जो उम्मीद जगी थी मेरे मन मे दीपा से शादी को लेकर, आशीष भैया की बात सुनकर वो धूमिल पड़ने लगी।

भैया आप नाराज़ मत हो मुझसे। मैं निशांत से बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन आप से ज्यादा नहीं। दीपा ने आशीष भैया का हाथ पकड़ते हुए कहा।

नहीं दीपा तुमने मुझे निराश किया है दुःख पहुचाया है तुमने मुझे। मैंने तुम्हें पढ़ने के लिए कॉलेज भेजा था, लेकिन तुम तो पढ़ाई छोड़कर प्यार करने लगी और अब शादी भी करना चाहती हो। आशीष भैया ने कहा।

मुझे माफ़ कर दो भैया। मैं आपको दुःखी नहीं देख सकती। ये सच है भैया कि मैं निशांत से प्यार करती हूँ और शादी भी करना चाहती हूँ, लेकिन आपको नाराज़ करके नहीं। मेरे लिए आप निशांत से ऊपर हैं। दीपा ने रोते हुए कहा।

तुम निशांत से शादी करना चाहती हो, लेकिन मैं इस शादी के खिलाफ हूँ, मैंने तुम्हारे रिश्ते के लिए कहीं और जुबान दे चुका हूँ। आशीष भैया ने कहा।

आशीष भैया की बात सुनकर मुझे और दीपा को विश्वास नहीं हुआ। कहाँ तो मैं दीपा से शादी करना चाहता था। बड़ी मुश्किल से माँ को मनाया था, लेकिन आशीष भैया तो दीपा की शादी कहीं और करना चाहते थे। मुझसे ये बर्दास्त नहीं हो रहा था।

लेकिन भैया जब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं तो आपको इस शादी से क्या दिक्कत है। आप वो रिश्ता तोड़ दीजिए। मैंने आशीष भैया से कहा।

अब इसका निर्णय दीपा को लेना है कि वो क्या चाहती है। अपने भाई की मान-मर्यादा और इज़्ज़त ये तुम्हारा प्यार। आशीष भैया ने कहा।

आप जैसा कहेंगे भैया मैं वैसा करूँगी। आप जहाँ मेरा रिश्ता करना चाहते हैं मैं तैयार हूं उसके लिए, लेकिन भैया आप मुझसे नाराज़ मत होइये। मैं निशांत से ज्यादा आपसे प्यार करती हूँ भैया। अगर आप ही मुझसे नाराज़ हो गए तो मैं बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी। आप ही मेरे सबकुछ हैं भैया। दीपा ने रोते हुए आशीष भैया से कहा।

ये तुम क्या कह रही हो दीपा। तुम प्यार मुझसे करती हो तो शादी किसी और से कैसे कर सकती हो। तुम इतनी आसानी से मुझे भूल सकती हो क्या। मैं दीपा की कही हुई पिछली सारी बाते भूलते हुए उससे कहा।

मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकती निशांत, लेकिन मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि मैं तुम्हारे लिए सबकुछ छोड़ सकती हूँ, लेकिन अपने भैया को नहीं छोड़ सकती। मैं अपने भैया की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ तुमसे शादी नहीं कर सकती। मेरे भैया की इज़्ज़त और मान-मर्यादा के सामने मेरा प्यार मेरे लिए कुछ भी नहीं। तुम मुझे भूल जाओ निशांत। मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती। दीपा ने आशीष भैया का हांथ चूमते हुए मुझसे कहा।

दीपा इतना कहकर रोते हुए घर के अंदर चली गई। सभी उसे जाता हुआ देखते रहे।

अब तो तुमने दीपा का फैसला सुन लिया न। अब तुम अपने कॉलेज जाओ। मुझे तुम्हारी माँ और भाई से कुछ बात करनी है। आशीष भैया मेरी तरफ मुखातिब होते हुए बोले

उनकी बात सुनकर मैं सिर झुकाकर उनके घर से निकल गया। अब मेरे पास आशीष भैया से कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं था। वहां से निकलकर मैं एक पार्क में जाकर बैठ गया और अपनी किस्मत को कोसने लगा। उधर आशीष भैया के घर का माहौल अगल था।

ये सब क्या था आशीष। क्या तुम्हें सच में ये रिश्ता पसंद नहीं है। माँ ने कहा।

कैसी बात कर रही हैं आप माँ जी। आपके घर मेरी दीपा का रिश्ता हो रहा है ये तो मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं बहुत खुश हूं अपनी दीपा के लिए। आशीष भैया ने कहा।

तो फिर ये सब क्या था जो अभी कुछ देर पहले यहां घटा। मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। माँ ने कहा।

कुछ नहीं माँ जी। मुझे दीपा पर पूरा विश्वास था, परन्तु मैं बस ये देखना चाहता था कि निशांत से प्यार करने के बाद दीपा अभी भी वैसे ही अपने भाई का सम्मान करती है जैसे पहले करती थी या उसमे बदलाव आ गया है जो अक्सर प्यार करने वाले लड़के लड़कियों में आता है। और मुझे खुशी है कि आज भी दीपा के लिए मेरे मान-सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उस दिन जब मैंने मैं घर पर नहीं था तो निशांत रात को यहीं रुका था, तभी मुझे इन दोनों पर शक हुआ था कि शायद दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। आशीष भैया ने गर्व रुंधे हुए गले से कहा।

इसीलिए तो मुझे दीपा बहुत पसंद है। इतने अच्छे संस्कारों वाली लड़की कहाँ मिलेगी मुझे अपने निशांत के लिए। माँ ने कहा।

लेकिन अभी मैंने अपनी दीपा को रुला दिया है तो पहले उसे मानना हैं मुझे और माफी भी मांगनी है। आशीष भैया ने कहा।

फिर आशीष भैया उठकर दीपा के कमरे में चले गए। दीपा अपने बिस्तर पर पेट के बल लेटकर रो रही थी। भैया की आवाज़ सुनकर उसने अपने आंसू पोछ लिए और उठकर बैठ गई।

मुझे माफ़ कर दो दीपा। मैंने तुम्हारा दिल दुखाया है। आशीष भैया ने कहा।

आप क्यों माफ़ी मांग रहे हैं भैया। माफी तो मुझे मांगनी चाहिए। जो मैंने अपने भाई को नाराज़ किया गलती करके। दीपा ने कहा।

तुमने कोई गलती नहीं कि दीपा। तुमने तो प्यार किया है सच्चा प्यार। और मुझे अपनी दीपा पर नाज़ है। आशीष भैया ने कहा।

भैया की बात सुनकर दीपा आश्चर्यचकित रह गई। वो अचरज भारी नज़रों से भैया को देखने लगी।

ऐसे क्या देख रही हो दीपा। मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है। मैंने तुम्हारे लिए कोई रिश्ता नहीं देखा है, मैं तो मज़ाक कर रहा था। निशांत जैसा अच्छा लड़का मेरी दीपा के लिए मुझे कहाँ मिलेगा भला। आशीष भैया ने हँसते हुए कहा।

आशीष भैया की बात सुनकर दीपा बहुत खुश हुई और वो दौड़कर आशीष भैया के गले लग गई और सिसकती हुई शिकायती लहज़े में बोली।

आपने तो मुझे डरा ही दिया था आप बहुत गंदे हो भैया।

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[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]अट्ठाईसवाँ भाग[/color]

[color=rgb(51,]दीपा आशीष भैया के गले लग गई और उनसे शिकायती लहज़े में बोली।

आप बहुत गंदे हो भैया आपने तो मुझे डरा ही दिया था।

अब तो खुश हो न तुम। अब तुम्हारी शादी तुम्हारी पसन्द के लड़के से होगी। आशीष भैया ने कहा।

मैं बहुत खुश हूं भैया और ये खुशी मुझे आपने दी है। थैंक यू सो मच भैया। दीपा ने कहा।

चल ज्यादा मस्का मत लगा, निशांत की माँ तुमसे कुछ बात करना चाहती हैं मैं उन्हें यहीं भेज रहा हूँ। आशीष भैया ने कहा।

इतना कहकर आशीष भैया कमरे से बाहर चले गए। थोड़ी दे बाद माँ कमरे में गई। दीपा उन्हें देखकर शर्माने लगी।

दीपा बेटी। माँ ने दीपा को आवाज़ दी।

दीपा माँ से शर्मा रही थी इसलिए उसने माँ को कोई जवाब नहीं दिया।

क्या बात है दीपा। तुम बोल क्यों नहीं रही हो। माँ ने कहा।

दीपा ने इसबार भी कोई जवाब नहीं दिया।

लगता है तुम्हें मेरा निशांत पसंद नहीं है। कोई बात नहीं चलती हूँ मैं। माँ ने कहा।

इतना कहकर माँ बाहर जाने लगी तो दीपा ने कहा।

ऐसी बात नहीं है माँ। मुझे निशांत बहुत पसंद है।
इतना कहकर दीपा फिर शरमाने लगी।

अच्छा इतना पसंद है निशांत तुम्हें। तो ये बताओ उसके लिए क्या कर सकती हो तुम। माँ ने कहा।

मैं निशांत के लिए कुछ भी कर सकती हूँ, बस अपने भाई के खिलाफ नहीं जा सकती, उसके अलावा कुछ भी। दीपा ने कहा।

ठीक है। मैं तुम्हारी शादी निशांत से करवाने के लिए तैयार हूँ, लेकिन उसके पहले तुम्हें मेरे लिए कुछ करना होगा। माँ ने कहा।

मुझे क्या करना होगा माँ। दीपा ने मां को देखते हुए पूछा।

उसके बाद माँ ने दीपा को कुछ बाते बताई। जिसे सुनने के बाद दीपा मुस्कुराने लगी।

ये करना जरूरी है क्या माँ जी। छोटे अभी बहुत परेशान है। उसे और परेशान करने की क्या जरूरत है। दीपा ने कहा।

वाह क्या बात है। अभी शादी हुई भी नहीं है और अभी से इतनी तरफ़दारी। पता नहीं शादी के बाद क्या होगा। माँ ने दीपा को छेड़ते हुए कहा।

माँ की बात सुनकर दीपा शर्मा गई और मुस्कुराते हुए अपना सिर नीछे झुक लिया।

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है माँ। मैं तो बस ऐसे ही कह रही थी। दीपा ने कहा।

अब मैं सास बनने वाली हूँ तुम्हारी तो तुम्हे मेरी बात माननी होगी। मां ने कहा।

ठीक है माँ जी जैसा आप कहें। दीपा ने कहा।

उधर मैं उदास मन से पार्क में बैठा था और सोच रहा था कि कब आगे मुझे क्या करना है। एक मन कहता कि दीपा को भगाकर शादी कर लूं, लेकिन मैं जानता था कि दीपा इसके लिए कभी तैयार नहीं होगी। एक मन कहता कि मुझे किसी भी तरह आशीष भैया को शादी के लिए मनाना ही होगा। मुझे वहां बैठे बैठे शाम हो गई। उसके बाद में सीधे घर के लिए निकल गया।

घर पहुँच कर मैं सीधे अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद खाना खाने की मेज पर सभी लोग बैठकर खाना खाने लगे। मैं अभी भी खामोश ही था किसी से बात नहीं कर रहा था।

क्या बात है छोटे। तू बात क्यों नहीं कर रहा है किसी से। अर्जुन भैया ने मुझसे पूछा।

कोई बात नहीं है भैया। बस कुछ ठीक नहीं लग रहा है। मैंने कहा।

देखो निशांत हमने तुम्हारी बात मानीं और दीपा के घर भी गए, लेकिन आशीष को इस रिश्ते से आपत्ति है। तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। माँ ने कहा।

मैंने जल्दी जल्दी खाना खत्म किया और अपने कमरे में चल गया। सुबह उठकर मैं नहा धोकर कॉलेज चला गया, भोजनावकाश के समय मेरी मुलाकात दीपा से हुई।

क्या बात है निशांत तुम बहुत उदास लग रहे हो। दीपा ने मुझसे पूछा।

सब कुछ जानकर भी अनजान मत बनो दीपा। तुम्हे अच्छे से पता है कि मैं क्यों उदास हूँ। मैंने दीपा से कहा।

जानकर तो तुम अनजान बन रहे हो निशांत, मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि अपने भाई के अलावा तुम्हारे प्यार के लिए मैं कुछ भी करूँगी, लेकिन जब भैया ही राजी नहीं हैं तो मैं उनके खिलाफ तो नहीं जाऊँगी। दीपा ने कहा।

कोई तो रास्ता होगा जिससे मेरी शादी तुम्हारे साथ हो जाए। मैंने कहा।

एक रास्ता है, अगर भैया मान जाएँ इस शादी के लिए तो। तुम्हें कुछ भी करके भैया को मनाना होगा अपनी शादी के लिए। दीपा ने कहा।

ठीक है। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि आशीष भैया जल्दी मान जाएँ इस शादी के लिए। मैंने कहा।

उसके बाद हम दोनों अपनी अपनी कक्षा में चले गए। कॉलेज खत्म होने के बाद मैं और दीपा अपने अपने घर को चले गए।

इसी तरह दिन बीतने लगे। मैं एक हफ्ते तक कभी आशीष भैया से मिलकर उन्हें शादी के लिए मनाता तो कभी फ़ोन पर बात करके, लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं थे। इधर कॉलेज में जो भी विद्यार्थी इन दिनों अपनी समस्याएं लेकर आते थे। मैं राहुल भैया और विक्रम भैया के साथ मिलकर अगर संभव होता तो हम लोग ही उन समस्याओं का समाधान कर देते। नहीं तो कुलपति महोदय से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करते।

एक दिन में कॉलेज में भोजनावकाश के समय बैठा हुआ था कि तभी देवांशु वहां आ गया।

और क्या हाल चाल हैं नेता जी। सुना है आजकल बहुत अच्छे अच्छे काम कर रहे हो विद्यार्थियों के लिए। मेरी भी एक समस्या है। छात्रनेता होने के कारण उसे दूर करना तुम्हारा फ़र्ज़ है। देवांशु ने मुझपर तंज़ कसते हुए कहा।

मैं उससे बात करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं था, लेकिन उसने समस्या की बात की तो मैंने अपना फ़र्ज़ समझकर उसकी समस्या के बारे में पूछा।

हां। क्यों नहीं। बताओ, मुझसे जो बन पड़ेगा मैं करूँगा।

बात ये है कि मेरी गर्लफ्रैंड को एक कमीना मुझसे छीनना चाहता है। मैंने उसे बहुत समझाया लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं है। मैं इस समस्या को अपने तरीके से खुद सुलझा सकता हूँ और उसके हाथ पैर तुड़वा सकता हूँ, लेकिन मैंने सोचा पहले अपने नेता जी की मदद ले लेता हूँ। हो सकता है तुम ही इसका कोई समाधान कर दो। अगर तुमसे भी नहीं हो पाएगा तो मैं अपने तरीके से इस समस्या का समाधान करूँगा। देवांशु ने आखिरी पंक्ति दांत पीसते हुए कही।

उसकी बात सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया, मैं समझ गया कि ये मेरी और दीपा की ही बात कर रहा है, लेकिन मुझे राहुल भैया की बात याद थी कि जितना हो सके देवांशु से उलझने की कोशिश मत करना। नही तो छात्रों के बीच तुम्हारी छवि खराब होगी इसलिए मैंने शान्त भाव से कहा।

देखो देवांशु, ये तुम्हारा व्यक्तिगत मामला है, इसमें में तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता। मैं एक छात्रनेता हूँ। तुम्हें कोई कॉलेज की समस्या हो। कैम्पस में कोई समस्या हो। प्रोफेसर ठीक से क्लास न ले रहे हों तो मुझे बताओ। में उसका समाधान करूँगा।

देखा दोस्तों मैं न कहता था कि ये लातों का भूत है। ये बातों से नहीं मानने वाला। अब तू अपनी उलटी गिनती गिनना शुरू कर दे, क्योंकि बहुत जल्द तू इतिहास बनकर रह जाएगा। देवांशु मुझे चेतावनी देते हुए बोला।

तुझको जो करना है कर ले। मैं तेरे से डरता नहीं हूँ। अगर मैं अपने पे आ गया तो तुझे बहुत भारी पड़ेगा। मैंने देवांशु से कहा।

इसके बाद देवांशु मुझे देख लेने की धमकी देते हुए चला गया। मेरा मूड खराब हो चुका था, इसलिए मैं घर जाने के लिए सोचा और पार्किंग की तरफ जाने लगा, तभी मेरा फोन बजने लगा।

हां माँ बताइये। मैंने कहा।

तुम जहां कहीं भी हो तुरंत घर आओ। माँ ने कहा।

मैं घर ही आ रहा हूँ, कोई खास बात है क्या। मैंने कहा।

तेरे लिए खुशखबरी है। मैंने जिस लड़की से तेरे रिश्ते की बात की थी वो लोग आए हुए हैं तो तू जल्दी घर आ जा और एक बार लड़की से मिल ले। माँ ने कहा।

माँ की बात सुनकर मैं उदास हो गया। मैं माँ को मना भी नहीं कर सकता था, क्योंकि अभी तक आशीष भैया मेरी और दीपा की शादी के लिए हां नहीं की थी, और दीपा के अलावा किसी और लड़की से शादी करना भी नहीं चाहता था। तो मैंने निर्णय लिया कि मैं उस लड़की से साफ साफ अपने और दीपा के बारे में बता दूंगा। शायद उसे मेरी बात समझ आ जाए और वो खुद इस रिश्ते के लिए इनकार कर दे। यही सब सोचकर मैंने पार्किंग से अपनी मोटरसायकल निकली और घर की तरफ चल पड़ा।[/color]


[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(0,]उन्तीसवाँ भाग[/color]


[color=rgb(51,]माँ के बुलाने पर मैं बुझे मन से घर की तरफ चल पड़ा। मैंने निश्चय कर लिया था कि मैं उस लड़की से अपने और दीपा के रिश्ते के बारे में साफ साफ बता दूंगा।[/color]

[color=rgb(51,]थोड़ी देर बाद मैं घर पर पहुँचा तो माँ, भैया और भाभी हॉल में बैठे मेरा इंतज़ार कर रहे थे। मेरे घर मे घुसने के बाद माँ ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]जल्दी से जाकर फ्रेश हो जाओ लड़की बहू के कमरे में बैठी हुई है। जाकर उससे मिलो। उसे देखो और एक दूसरे को समझने की कोशिश करो।[/color]

[color=rgb(51,]लेकिन माँ मैं दीपा से शादी करना चाहता हूँ। फिर आप लोग क्यों मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे हैं। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]देखो तुम्हारे कहने पर ही हमने आशीष से दीपा के रिश्ते की बात की थी, परंतु आशीष ने मना कर दिया। तो अब किसी न किसी से तो तुम्हे शादी करनी ही है। अब ज्यादा बहस नहीं करो और जाकर फ्रेश होकर उस लड़की से मिलो। माँ ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]माँ की बात सुनकर मैं बुझे मन से अपने कमरे में चल गया और फ्रेश होकर अपने बिस्तर पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद मैं अपने कमरे से निकलकर भाभी के कमरे की तरफ चल पड़ा। आज मेरे पांव मेरा साथ ही नहीं दे रहे थे। मैं भगवान से कामना कर रहा था कि कुछ ऐसा हो जाए कि मैं भाभी के कमरे तक पहुँच ही न पाऊँ।[/color]

[color=rgb(51,]लेकिन उस समय भगवान भी मेरे साथ नहीं थे। जब मैं भाभी के कमरे में पहुँच गया तो देखा कि एक लड़की मेरी तरफ पीठ करके बैठी हुई है। मैंने उसको देखना नहीं चाहता था इसलिए मैंने भी उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली और उससे कहा।[/color]

[color=rgb(51,]सुनिए मुझे तुमसे कुछ कहना है।[/color]

[color=rgb(51,]हां मुझे पता है कि आप क्या कहना चाहते हैं। उसने मेरी तरफ पलटते हुए कहा।[/color]

[color=rgb(51,]तुम्हें कैसे पता कि मुझे क्या कहना है। मैंने उससे कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मुझे आपकी मम्मी ने सब बताया है। उसने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]क्या बताया है मेरी माँ ने तुमको। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]आपकी माँ ने बताया है कि आप मुझसे शादी करने के लिए तैयार हैं। उस लड़की ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]बिल्कुल नहीं। मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। मैं किसी और से प्यार करता हूँ कर उसी से शादी करूँगा। तुम इस रिश्ते के लिए माँ को मना कर दो। मैंने उससे कहा।[/color]

[color=rgb(51,]लेकिन आपकी मम्मी ने तो बताया था कि उसके भाई को ये रिश्ता पसंद नहीं है। इसलिए उन्होंने आज मुझे तुमसे मिलवाने के लिए बुलाया है। उस लड़की ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मैं उन्हें इस शादी के लिए मना लूंगा। बस तुम इस शादी से मना कर दो। बोल दो कि मैं तुम्हें पसंद नहीं। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]लेकिन मुझे तो आप बहुत पसंद हैं। मैं मना क्यों करूँ। वैसे मैं भी उस लड़की से कम सुंदर नहीं हूँ। एक बार देखो मुझे। तुम उसे भूल जाओगे। उस लड़की ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मैंने कहा न मुझे तुमसे शादी नहीं करनी। और मेरे लिए मेरी दीपा से ज्यादा सुंदर लड़की और कोई नहीं है। तुम भी नहीं। मैंने उस लड़की से कहा।[/color]

[color=rgb(51,]ऐसे कैसे। अभी तक तुमने मुझे देखा ही नहीं। जब से आए हो मुंह घुमाकर खड़े हुए हो। उस लड़की ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]जब मुझे तुमसे शादी करनी ही नहीं है तो तुम्हें देखने का कोई मतलब ही नहीं है। वैसे भी दीपा तुमसे हर मामले में अच्छी है। सूरत में भी और सीरत में भी समझी। मैंने तुमसे शादी नहीं करनी। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]उसके बाद मैं भाभी के कमरे से वापस आने लगा, तभी उसकी बात सुनकर मेरे पैर वहीं रुक गए।[/color]

[color=rgb(51,]वो कैसी है मुझे पता है। ना सूरत से है न सीरत से है। सुना है उसका कॉलेज के किसी लड़के के साथ चक्कर चल रहा है, वो तुम्हें धोखा दे रही है और तुम उसके पीछे पागल हो। उस लड़की ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया मैंने अपनी मुट्ठी भींज ली और उसकी तरफ पलट कर बोला।[/color]

[color=rgb(51,]तेरी तो मैं.....[/color]

[color=rgb(51,]इसके आगे के शब्द मेरे मुंह में ही रह गए। कारण, सामने दीपा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी। मैं उसे देख कर हक्का बक्का राह गया। मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि ये सब हो क्या रहा है और दीपा यहां क्या कर रही है।[/color]

[color=rgb(51,]तभी पीछे से मुझे तालियों की आवाज़ सुनाई दी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो माँ, अर्जुन भैया और अदिति भाभी के साथ आशीष भैया भी खड़े थे और सभी मेरी हालत का मज़ा लेते हुए मुस्कुरा रहे थे।[/color]

[color=rgb(51,]क्यों निशांत क्या हुआ। अर्जुन भैया ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]ये सब क्या है भैया। मतलब दीपा यहां क्या, कैसे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।[/color]

[color=rgb(51,]दीपा यहां का क्या मतलब है तेरा। दीपा ही तो वो लड़की है जिससे मैंने तुम्हारे लिए पसंद किया है। माँ ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मां की बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आशीष भैया कैसे मान गए।[/color]

[color=rgb(51,]लेकिन आशीष भैया तो तैयार नहीं हैं मेरी और दीपा की शादी के लिए। मैंने मां से कहा।[/color]

[color=rgb(51,]किसने कहा कि मुझे इस रिश्ते से ऐतराज़ है। अरे मैं तो बहुत ज्यादा खुश हूं कि तुम दोनों की शादी हो रही है। आशीष भैया ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]और नहीं तो क्या। तुम्हारे लिए कोई लड़की वड़की माँ जी ने नहीं देखी है। तुम्हारे लिए दीपा से अच्छी लड़की कोई हो ही नहीं सकती। अदिति भाभी ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]तो फिर वो सब क्या था जो इतने दिन से हो रहा था। मैंने आश्चर्य से पूछा।[/color]

[color=rgb(51,]वो सब मेरा प्लान था तुझे परेशान करने का। क्योंकि तू मेरी बात नहीं मानता था, इसलिये मुझे ये करना पड़ा, आखिर तुझे भी तो पता चलना चाहिए की मां से पंगा लेने का क्या नतीजा होता है। माँ ने इस बार हंसते हुए कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मतलब आप सब ने मिलकर मुझे परेशान किया इतने दिन और दीपा तुम भी इन सब लोगों के साथ मिली हुई हो और आवाज़ बदलकर मुझे गुमराह कर रही थी। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]दीपा को ये सब करने के लिए मैंने ही कहा था। माँ ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मां की बात सुनकर मुझे इस बात का सुकून हो गया कि दीपा के साथ मेरी शादी में अब कोई रुकावट नहीं है। मैंने दौड़कर मां को गले लगा लिया।[/color]

[color=rgb(51,]आप सब बहुत खराब हो, आपको पता है इन दिनों मुझपर क्या गुजरी है। मैंने मां के गले लगे हुए शिकायती लहज़े में कहा।[/color]

[color=rgb(51,]चलो जो भी हुआ अच्छा ही हुआ। कम से कम इसी बहाने हमें तुम दोनों की प्यार की गहराई और सच्चाई का आभास तो हुआ। आशीष भैया ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]इसके बाद कुछ देर रहने के बाद दीपा अपने भाई के साथ अपने घर चली गई। मेरे लिए आज का दिन दोपहर बाद बहुत खुशनुमा रहा और इसी खुशी में आज का सारा दिन बीत गया।[/color]

[color=rgb(51,]सुबह मैं फ्रेश होकर नाश्ता किया और कॉलेज चला गया। सारी क्लास अटेंड करने के बाद मैं घर वापस आ गया। इसी तरह दिन गुजरते रहे। मैं रोज कॉलेज जाता। दीपा से मिलता। बहुत सारी बातें होती और मैं घर वापस आ जाता। सब कुछ अच्छे से चल रहा था।[/color]

[color=rgb(51,]फिर माँ ने आशीष भैया से मिलकर 3 दिन बाद मेरी और दीपा की सगाई का दिन निर्धारित कर दिया। मैं और दीपा बहुत खुश हुए। मैंने राहुल भैया, विक्रम भैया और अपने कुछ सहपाठियों को सगाई में आमंत्रित किया। दीपा ने भी अपनी कुछ सहेलियों को सगाई में बुलाया। राहुल भैया और विक्रम भैया मेरी और दीपा की सगाई की बात सुनकर बहुत खुश हुए।[/color]

[color=rgb(51,]तीसरे दिन सगाई का एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें मेरे कुछ रिश्तेदार और दोस्त शामिल हुए। दीपा की तरफ से भी उसके कुछ रिश्तेदार और उसकी कुछ सहेलियां शामिल हुई।।[/color]

[color=rgb(51,]सगाई बहुत अच्छी और धूमधाम से हुई। मेरे और दीपा के सभी दोस्तों ने हम दोनों को शुभकामनाएं दी। सगाई खत्म हो जाने के बाद मेरे और दीपा के सभी दोस्त अपने अपने घर चले गए।[/color]

[color=rgb(51,]मैं और दीपा बहुत खुश थे, क्योंकि हम दोनों ने जो सपना देखा था वो पूरा होने जा रहा था। मैंने देखा था कि प्यार करने वाले बहुत से प्रेमियों को अपनी मंज़िल नहीं मिलती। लेकिन मेरे और दीपा के घरवालों ने हैम दोनों को अपनी मंज़िल तक पहुचाया था।[/color]

[color=rgb(51,]अगले दिन हम दोनों कॉलेज नहीं गए, बल्कि मैं दीपा को लेकर एक लवर पॉइंट पर गया। वहाँ पहुचकर हम दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गए।[/color]

[color=rgb(51,]मैं बहुत खुश हूं छोटे। दीपा ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मैं भी बहुत खुश हूं दीपा। तुम्हे पता है जब आशीष भैया ने इनकार किया था तो मैं कितना ज्यादा परेशान हो गया था और उनको मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो मां ही नहीं रहे थे। वो तो बाद में पता चला कि वो नाटक कर रहे थे और तुम भी उन सब के साथ मिली हुई थी। मैंने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]मैं क्या करती निशांत। माँ ने मुझे ऐसा करने के लिए कहा था। तो मुझे करना पड़ा। दीपा ने कहा।[/color]

[color=rgb(51,]उसके बाद मैं और दीपा एक दूसरे की आंखों में देखने लगे। हम दोनों की आंखों में एक दूसरे के लिए प्यार था। मैं दीपा की आंखों में देखते देखते उसमे डूब गया और अपना होंठ उसके चेहरे की तरफ बढाने लगा। दीपा ने भी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। कुछ पल बाद मेरे होंठ दीपा के होंठों पर चिपक गए। मैं और दीपा पूरी सिद्दक्त से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे।[/color]

[color=rgb(51,]लगभग 10 मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद हम एक दूसरे से अलग हुए। हम दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी और दिल मे एक सुकून था। थोड़ी देर बैठने के बाद हम दोनों वहां से निकल गए। मैंने दीपा को उनके घर छोड़कर अपने घर चला गया।[/color]


[color=rgb(0,]साथ बने रहिए।[/color]
 
[color=rgb(51,]तीसवाँ भाग

सगाई हो जाने के बाद मैं और दीपा बहुत खुश थे और हमेशा साथ साथ रहने लगे। अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुँचा तो बधाई देने वालों का तांता लग गया। चूंकि विद्याथियों के लिए अब मैं कोई आम विद्यार्थी तो था नहीं। उनका छात्रनेता था, और मेरे काम और मेरे व्यवहार ने सभी विद्यार्थी और प्रोफेसर के दिल में मेरे लिए एक खास छाप छोड़ी थी। तो हम दोनों की सगाई की खबर कॉलेज में जैसे जंगल मे आग फैलती है उसी तरह फैल चुकी थी। विद्यार्थी खुशी से मुझे बधाई दे रहे थे।

इस पूरे प्रक्रम के दौरान मुझे देवांशु कहीं दिखाई नही पड़ा था। मैं अपनी कक्षा में जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद क्लास शुरू हो गई। क्लास अटेंड करने के बाद भोजनावकाश के समय मैं राहुल भैया के पास चला गया। वो अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे। मुझे देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।

अरे निशांत आओ आओ। और बताओ क्या चल रहा है। राहुल भैया ने कहा।

मैं ठीक हूँ भैया और सब ठीक चल रहा है। मैंने कहा।

तुमको बहुत बहुत बधाई सगाई के लिए। बहुत खुशनशीब हो तुम कि तुम जिस लड़की से प्यार करते हो उसी लड़की से तुम्हारी शादी हो रही है। राहुल भैया ने कहा।

ये सब मेरे घरवालों ने किया है भैया। उनकी वजह से ही मुझे मेरी दीपा मिल रही है। मैंने कहा।

अभी हमारी बात चीत चल ही रही थी कि तभी दीपा मुझे ढूंढते हुए वहां पर आ गयी।

तुम यहाँ पर बैठे हुए हो और मैंने तुम्हें पूरे कॉलेज में ढूंढ लिया। दीपा ने कहा।

अरे हम भी यहां बैठे हुए हैं, लेकिन लगता है तुम्हारा पूरा ध्यान अपने होने वाले पति पर ही लगा हुआ है। हम लोग तो जैसे यहां हैं ही नहीं। राहुल भैया ने कहा।

राहुल भैया की बात सुनकर दीपा शरमाने लगी।

नहीं भैया ऐसी कोई बात नहीं है ये तो बस दीपा को ध्यान नहीं रहा होगा। मैंने राहुल भैया से कहा।

ओए होए। क्या बात है। अभी से इतनी तरफ़दारी। पता नहीं शादी के बाद क्या होगा तुम दोनों का। चलो भाई चलो। अब इन दोनों प्रेमियों के बीच हम सब का क्या काम, खामखाह कबाब में हड्डी बन रहे हैं हम। राहुल भैया ने हम दोनों की चुटकी लेते हुए कहा।

राहुल भैया की बात सुनक़र विक्रम भैया और उनके दोस्त जाने लगे। दीपा ने उन्हें रोकते हुए कहा।

नहीं भैया ऐसी कोई बात नहीं है आप लोग बैठिए न। हम दोनों को कोई दिक्कत थोड़े न है।

नहीं दीपा हम तो मज़ाक कर रहे थे। अभी क्लास का समय हो रहा है तो हम लोगों को जाना होगा। तुम दोनों बैठो और बातें करो। राहुल भैया जाते हुए बोले।

राहुल भैया के जाने के बाद दीपा मेरे बगल में बैठ गई और मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया। मैंने अपना हाथ उठाकर उसके सिर पर रख दिया और उसके बालों में उंगलियां घुमाने लगा। हम दोनों खामोशी से बैठे हुए थे। थोड़ी देर बाद दीपा ने मेरे कंधे से सिर उठाते हुए कहा।

छोटे क्यों न आज हम दोनों फ़िल्म देखने चलें।

हाँ क्यों नहीं। चलो चलते हैं। मैंने कहा।

उसके बाद मैंने अपनी बाइक निकली और दीपा को पीछे बैठने के लिए कहा। दीपा एक तरफ दोनों पैर करके बैठने लगी तो मैंने कहा।

ये क्या दीपा। अब तो हमारी सगाई भी हो चुकी है। फिर भी तुम ऐसे बैठ रही हो। दोनों तरफ पैर करके मुझसे चिपक कर बैठो न। मैंने दीपा से कहा।

मेरी बात सुनकर दीपा मुस्कुराते हुए अपने पैर दोनों तरफ करके मुझसे चिपक कर बैठते हुए बोली।

क्या बात है छोटे बाबू। आज बड़ा रोमांस सूझ रहा है तुम्हे।

ये रोमांस नहीं है डार्लिंग। ये तो अब मेरा हक है जो मैं तुमपर जता रहा हूँ।

उसके बाद हम दोनों सिनेमाहाल पहुच गए फ़िल्म देखने के लिए। उस समय सिनेमाहाल में सनम तेरी कसम फ़िल्म चल रही थी। हम दोनों टिकट लेकर फ़िल्म देखने अंदर चले गए। अब ये फ़िल्म कैसी है ये तो सभी को पता है। फ़िल्म खत्म होते होते दीपा की आंखों से गंगा जमुना बहने लगी। फ़िल्म खत्म होने के बाद दीपा बाथरूम चली गई और अपने चेहरे को धोकर बाहर आई। उसके बाद हम दोनों घर के लिए निकल पड़े।

ये फ़िल्म कितनी दर्दभरी है न। मेरी आंखों में तो आंसू आ गए। दीपा ने कहा।

बात तो सही कही तुमने दीपा। लगता है पूरी फिल्म के दौरान तुमने अपने आपको ही उस लड़की की जगह महसूस किया। मैंने दीपा से कहा।

तुम सही कह रहे हो निशांत। दीपा ने कहा।

हम दोनों बात करते हुए घर आ रहे थे। रास्ते में एक ठेले पर छोला भटूरा बन रहा था तो दीपा ने बाइक रोकने के लिए कहा। मैंने बाइक रोकी तो दीपा उतरकर उस ठेले के पास चली गई। मैंने भी अपनी गाड़ी ठेले के पास लगाई और दीपा के पास चला गया।

भैया एक थाली छोले भटूरे देना। दीपा ने उस ठेले वाले से कहा।

ठेले वाले ने गरमा गरम छोला भटूरा निकल कर दिया। हम दोनों एक ही थाली में खाने लगे।

अभी हमने आधी थाली छोले भटूरे खत्म किये थे कि एक 8-9 साल का लड़का वहां पर आया और हमे खाते हुए देखने लगा। तभी दीपा की नज़र उस लड़के पर पड़ी। दीपा ने मुझे इशारा करके बताया। मैंने उस लड़के को देखा। वो बहुत ललचाई नजरों से हमारी खाने की थाली को देख रहा था। वो जिस तरह से थाली को देख रहा था हमें लग रहा था कि वो भूखा है। दीपा ने उससे पूछा।

छोले भटूरे खाओगे।

उस लड़के ने हां में गर्दन हिलाई। दीपा ने ठेले वाले से एक थाली छोले भटूरे देने के लिए कहा।

अरे मैडम आप नहीं जानती इन लोगों को। ये रोज़ का काम है। कुछ करते नहीं हैं बस दिन भर घूमते रहते हैं। आप लोग इन सब के चक्कर में मत पढ़िए। ठेले वाले ने कहा।

अरे भैया कैसी बात कर रहे हैं आप। देखो तो कितना भूखा लग रहा है। आप एक थाली इसे दे दीजिए। पैसे तो हम दे ही रहे हैं आपको। दीपा ने कहा।

दीपा के कहने के बाद ठेले वाले ने एक थाली छोला भटूरा बच्चे को खाने के लिए दिया। बच्चे ने जल्दी से उसे खत्म किया और हमें आभार भारी नज़रों से देखता हुआ चला गया। मैंने ठेले वाले को दो थाली के पैसे दिए और घर की ओर निकल लिए। सबसे पहले मैंने दीपा को उसके घर छोड़ा और फिर अपने घर आ गया।

घर आकर मैं अपने कमरे में चल गया। इसी तरह दिन गुजरते रहे और हम दोनों का प्यार परवान चढ़ता रहा। मेरी सगाई को अब 20 दिन से ज्यादा हो गए थे।

मैं सुबह स्नान करके नाश्ता करने के बाद कॉलेज चला गया। कॉलेज गेट पर ही मेरी मुलाकात दीपा से हो गई। हम दोनों साथ साथ कॉलेज के अंदर चले गए और कॉरिडोर से होते हुए अपनी कक्षा में चले गए।

भोजनावकाश के समय मैं और दीपा कैंटीन में चले गए और साथ मे खाना खाया। कुछ देर बैठे रहने के बाद दीपा की सहेली आ गई और उसने दीपा को साथ चलने के लिए कहा। दीपा उसके साथ चली गई। मैं कैंटीन से जाने वाला ही था कि राहुल भैया और उनके दोस्त आ गए तो मैं उन लोगों के साथ बैठ गया और बातचीत करने लगा।

उधर दीपा अपनी सहेली के साथ जा रही थी कि कॉरिडोर के पास उसकी मुलाकात देवांशु से हो गई। दीपा उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ने लगी।

क्या बात है दीपा। इतनी नाराजगी। मुझे माफ़ कर दो। उस दिन जो भी मैंने तुमसे अभद्र भाषा मे बात किया उसके लिए माफ़ी मांगता हूं। देवांशु ने माफी भी अकड़ के साथ मांगी।

दीपा ने उसको कोई जवाब नहीं दिया और अपनी सहेली के साथ आगे बढ़ गई। देवांशु जाकर दीपा के आगे खड़ा हो गया।

अरे यार दीपा। मुझे माफ़ कर दो। में सचमुच् तुमसे दिल से माफी मांग रहा हूँ। उस जिन मैंने तुमसे जिस तरह से बात की मुझे वैसे बात नहीं करना चाहिए था। देवांशु ने कहा।

ठीक है मैंने तुम्हें माफ किया। अब मेरा रास्ता छोड़ो। दीपा ने कहा।

नहीं दीपा पहले तुम मुझे माफ़ करो उसके बाद ही मैं तुम्हे जाने दूंगा। अभी तुमने मुझे माफ़ नहीं किया। ये तुम ऊपरी मन से बोल रही हो। देवांशु ने दीपा का हाथ पकड़ते हुए कहा।

मैंने तुम्हें सच में माफ कर दिया देवांशु। दीपा ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा।

एक बात बताओ दीपा। उस निशांत में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं है। तो तुमने मेरे बजाय उस निशांत से क्यों सगाई कर ली। देवांशु ने फिर से दीपा का हाथ पकड़ते हुए कहा।

मेरा हाथ छोड़ो देवांशु। तुम्हारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है। न लड़की से बात करने की तमीज़, न ही लड़की का सम्मान और इज़्ज़त करने के गुण। तुम बहुत ही बदतमीज़ और बिगड़े हुए लड़के हो। मैं तो तुझे देखना भी पसंद न करूँ। सगाई तो बहुत दूर की बात है। दीपा ने अपना हाथ झटकते हुए कहा।

दीपा की बात सुनकर देवांशु आग बबूला हो गया और उसने दीपा का हाथ कसकर पकड़ते हुए कहा।

तू क्या समझती है अपने आपको। तेरे जैसी लड़कियाँ मेरे आगे पीछे घूमती हैं। और तू मुझे बदतमीज़ बोल रही है। बदतमीज़ी क्या होती है लगता है तुझे बताना पड़ेगा।

इतना कहकर देवांशु अपना हाथ दीपा के दुपट्टे के तरफ बढ़ने लगा। दीपा ने पूरा जोर लगाकर अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाया और पूरी ताकत से एक जोरदार तमाचा देवांशु के गालों पर रसीद कर दिया जिसकी आवाज़ पूरे कॉरिडोर में गूंज गई।

...च...टा...क...।।

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