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Romance चाहत

सिटी हॉस्पिटल

भिलाई

अध्यन के सारे टेस्ट हो चुके थे। हाथ में रिपोर्ट पकड़े अध्यन डॉक्टर के केबिन के बाहर बैठा था। देव जी इधर उधर चहल कदमी करते हुए केबिन के तरफ देख रहे थे। अध्यन भी उन्हे ऐसे करते देख रहा था। वो अपने चेयर से उठा और देव जी के पास गया । अध्यन ने देव जी का हाथ पकड़ा फिर उन्हे अपने साथ चेयर के पास ले आया।

अध्यन ने देव जी को कंधों से पकड़ कर चेयर पर बैठाया फिर वो उनके बगल में बैठ गया। देव जी ने बैठते ही अध्यन की तरफ देखा अध्यन ने पलकें झपका कर सब ठीक है कहा। अब अध्यन सामने देखने लगा।

तभी रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने अध्यन के तरफ देखते हुए कहा - your turn..

अध्यन और देव जी ने उसकी आवाज़ सुनी दोनो चेयर से उठे फिर केबिन कि तरफ चले गए।

अंदर केबिन में डॉक्टर किसी से फोन पर बात कर रहे थे। देव जी ने उन्हें बात करते देखा तो दरवाजे पर ही रुक गए। डॉक्टर की नजर जब उन पर पड़ी तो उन्होंने रिसीवर रखा फिर देव जी और अध्यन को अंदर आने का इशारा किया।

देव जी और अध्यन अंदर आ गए तो डॉक्टर ने उन्हें बैठने का इशारा किया। दोनों बैठ गए। अध्यन और देव जी ने डॉक्टर को गुड मॉर्निंग विश किया । डॉक्टर ने भी सिर झुकाते हुए उनका अभिवादन किया।

कुछ बातो के बाद देव जी ने अध्यन की रिपोर्ट्स डॉक्टर को दे दी। डॉक्टर ने रिपोर्ट्स ली फिर उसे पढ़ने लगे अध्यन वहा बैठे बस डॉक्टर के चेहरे पर आने जाने वाले भावो को पढ़ रहा था। वहीं देव जी के चेहरे पर परेशानी के भाव थे। जैसे जैसे अध्यन की रिपोर्ट्स पढ़ी जा रही थी देव जी की टेंशन बढ़ती जा रही थी।

अध्यन बस डॉक्टर को देख रहा था पर पता नहीं उसे अचानक क्या हुआ उसने पलट कर देव जी की तरफ देखा। अध्यन ने देव जी के परेशानी से भरे चेहरे को देखा तो वो

समझ गया इस परेशानी का कारण है उसकी रिपोर्ट्स । अध्यन ने कुछ नहीं कहा बस अपना हाथ देव जी के हाथ पर रख दिया। देव जी ने हाथो का अहसास पाते ही अध्यन की तरफ देखा तो अध्यन मुस्कुरा दिया।

डॉक्टर रिपोर्ट्स देखते हुए बोले - रिपोर्ट्स तो ठीक है.. पर..

अध्यन ने ये सुनते ही देव जी का हाथ छोड़ दिया। देव जी ने अध्यन का हाथ छूटते हुए महसूस किया तो उन्होंने अध्यन की तरफ देखा जो किसी हारे हुए खिलाड़ी की तरह सिर झुकाए नीचे देख रहा है। देव जी को उसका ऐसे नीचे देखना नागवार गुजरा उन्होंने एक बार फिर उसका हाथ मजबूती से पकड़ते हुए बोले - पर क्या डॉक्टर.. डर तो देव जी को भी काफी लग रहा था पर वो अध्यन के सामने दिखाना नहीं चाहते थे। वहीं अध्यन ने अपने हाथो में देव जी की पकड़ को महसूस किया जिससे उसे हिम्मत मिली और वो भी डॉक्टर को देखने लगा।

"एक पिता के लिए उसके बच्चे चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाए.. वो उनके लिए छोटे ही होते है.. जिनकी फिक्र उन्हे उम्र भर होती है... एक पिता हमेशा अपने बच्चो के सामने खुद को मजबूत बना कर रखने की कोशिश करता है.. क्युकी वो जनता है.. ये बच्चे ही उसकी ताकत है.. और साथ साथ कमजोरी भी... क्युकी अगर वो कमजोर पड़ा तो ये उनके

बच्चो के लिए सही नहीं होगा .. उनके बच्चे भी कमजोर पड़ जाएंगे "

देव जी बस अध्यन को कमजोर पड़ते देखना नहीं चाहते थे। डॉक्टर ने देव जी और अध्यन के आंखो में देखा फिर मुस्कुराते हुए बोले - पर .. अब आप दोनों को यहां आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी..

ये सुन अध्यन और देव जी ने चौक कर डॉक्टर की तरफ देखा तो डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - अब बस आपको एक महीने के लिए ही दवाई लेनी होगी.. फिर आप पूरी तरह से ठीक .. डॉक्टर की बात सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई वहीं देव जी की आंखे नम हो गई जिसे सफाई से छुपाते हुए उन्होंने मुस्कुराहट अपने चेहरे पर ला लिया ।

डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखते हुए देव जी से कहा - अब बिल्कुल ठीक है अध्यन.. अब आपको ज्यादा टेंशन लेने की जरुरत नहीं.. बस एक महीने की दवाई.. और लेनी है... और रही एक्सरसाइज की तो .. वो तो हर हेल्थी इंसान को करनी चाहिए.. इससे बॉडी फीट रहती है.. और आप बीमारियों से भी दूर रहते है..

अध्यन ने मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया वहीं देव जी ने अपना हाथ आगे किया और डॉक्टर से हाथ मिलाते हुए बोले - थैंक्यू.. डॉक्टर .. आपने बहुत हेल्प की..

डॉक्टर ने भी मुस्कुराते हुए कहा - मैंने कुछ खास नहीं किया.. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.. जो भी हुआ है.. वो आपकी और अध्यन की मेहनत के कारण हुआ है.. हमने तो बस आपको रास्ता दिखाया है.. चलने वाले तो आप थे..

देव जी ने भी मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया।

अब डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखा फिर उन्होंने कहा - तुम मेरे पहले ऐसे पेशेंट थे.. जिसने मुझसे सीधा ये क्वेश्चन किया था.. की उसके पास कितने दिन है.. मैंने कभी भी ऐसा इंसान नहीं देखा था.. जो इतनी कम उम्र का होते हुए .. भी मौत से नहीं डरता.. मैंने तुमसे पहले भी कहा था.. आज भी कहता हू.. तुम बहुत ब्रेव हो.. हमेशा ऐसे ही रहना..

अध्यन बस मुस्कुरा दिया। थोड़ी फॉर्मेलिटी के बाद अध्यन और देव जी बाहर आए।

देव जी को कार पार्क से बाहर लेनी थीं इसीलिए वो पार्किंग के साइड आ गए। अध्यन मेडिकल शॉप चला गया। उसने मेडिसिंस ली फिर मूड कर देखा तो सामने वहीं मंदिर था। अध्यन उस मंदिर की तरफ चला गया।

ये मंदिर हनुमान जी का छोटा सा मंदिर था अध्यन ने अपने शूज मंदिर के बाहर उतारा फिर मंदिर के अंदर आ गया उसने घंटी बजाई और हाथ जोड़ कर आंखे बंद कर के खड़ा हो गया। उसने हाथ जोड़े हुए कहा - थैंक्यू.. बस यही है मेरे पास.. इससे ज्यादा कुछ नहीं है मेरे पास.. जो मै आपसे कह सकूं.. गुस्सा था मै आपसे .. और क्यों नहीं होता.. मेरे साथ जो हुआ.. उस टाइम मुझे उसमे आपकी ही गलती लगी थी.. पर अब सब ठीक है

.. अपने किया है है ये.. सो थैंक्यू.. थैंक्यू..आगे मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना.. बस आपका साथ चाहिए.. जिससे मै अपनी फैमिली और अपनी चाहत को खुश रख पाऊ.. बस इतना ही दे दीजियेगा.. ये बोल अध्यन ने आंखे खोली फिर आगे बढ़ उसने दान पेटी में कुछ पैसे डाले। एक बार फिर हाथ जोड़ा और मूड कर मंदिर से बाहर आ गया।

कुछ दूर चलने के बाद उसने देखा देव जी कार के बाहर उसका वेट कर रहे थे। वो उनके पास गया तो उनका मोबाइल बजने लगा कॉल गौरी जी का था तो देव जी साइड में चले गए। अध्यन ने कार का गेट खोला फिर अंदर आ गया । कार नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी तो अध्यन को कार के अंदर बैठना ही ठीक लगा वैसे भी मौसम ठंडा था तो कार में बैठना उसके लिए कंफर्टेबल था ।

अध्यन कार के अंदर बैठा ही था उसे बोरियत होने लगी तो उसने अपना मोबाइल निकाल लिया मोबाइल को उसने अनलॉक किया तो उसे चाहत की फोटो दिखी। उस फोटो को उसने मुस्कुराते हुए देखा फिर मोबाइल को सिर से लगा उसने कहा - बस अब कुछ दिन और.. फिर तुम मेरे पास होगी.. मेरे साथ होगी... तभी कार का गेट खुला और देव जी अंदर आ गए। देव जी ने कार निकली और फिर कार अपनी मंजिल की तरफ चलने लगी।

अध्यन ने देखा बहुत शांति है तो उसने music system ऑन कर दिया .. एक प्यारी सी धुन अध्यन के कानों में पड़ी। जिसे सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

ना जानूं मैं, कैसी ये बेकरारी है

शायद दिल के, जाने की अब तैयारी है...

तू दिल का ठिकाना, हूँ तेरा दीवाना

दीवाना तेरा..

तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी..

तू आए ना आए दीवाना तेरा..

तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी,

तू आए ना आए ऊऊ..

दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना है..

अध्यन ये सॉन्ग सुन खुद भी गुनगुनाने लगा.. देव जी ने ड्राइव करते हुए उसे एक नजर देखा और मुस्कुरा दिए। फिर सामने देखने लगे। अब अध्यन थोड़ा जोर से गाने लगा। ये सुन देव जी भी अध्यन को देखने लगे। जो अपने में मस्त होकर गा रहा था ।

पूछे निगाहें मेरी.. है कहा राहे तेरी..

जाने क्यों ना जाने तू.. तन्हा है बाहें मेरी ...

नींदों बिन, रात भी गुज़ारी है ..

जो उतरे ना, तेरी ही तो खुमारी है .. मुश्किल है भुलाना, हूँ तेरा दीवाना

दीवाना तेरा.. तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी, तू आए ना आए ...

अध्यन ने गाना ख़तम किया फिर उसने पलट कर देव जी की

तरफ देखा जो उसे ही देख रहे थे। ये देख अध्यन थोड़ी देर के लिए डर गया । इसी डर से वो चुप हो गया और उसने अपना सिर सीट से टिका दिया । फिर आंखे बंद कर वो बैठ गया। ऐसे ही उसे कब नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला ।

रायपुर...

चाहत क्लास रूम में बैठे अपनी लास्ट क्लास अटेंड कर रही थी। तभी ma'am ने टॉपिक ख़तम कर के कहा - आपको कुछ नोटिस मिला..

सब ने ना में सिर हिला दिया जिसे देख मैम ने कहा - आपके सेकंड ct होने वाले है.. टाइम टेबल आपको नोटिस बोर्ड में मिल जाएगा.. तो टाइम टेबल आ गए है.. ये आपका सेकंड ct ( क्लास टेस्ट ) है.. तो आप सभी ठीक से prepare कर ले.. एग्जाम में बेस्ट ऑफ टू ही जाएगा.. तो जिसका पहला ct ठीक नहीं गया है.. वो अभी भी कवर कर सकता है.. so all the best.. इतना कहते ही सभी ने एक साथ चिल्लाया - थैंक्यू.. मैम..

ये बोल ma'am मुस्कुराते हुए बाहर आ गई।

सारी क्लासेज अब ख़तम हो गई थी। चाहत भी क्लास से बाहर आ गई। वो सीधा नोटिस बोर्ड के पास पहुंची जहां उसे ct टाइम टेबल दिखा । उसने मोबाइल से उसकी फोटो क्लिक की और मूड गई। उसने जब पीछे देखा तो डॉली खड़ी उसे ही देख रही थी। चाहत ने उसकी तरफ देखा फिर मुस्कुरा दी।

दोनों अपने ब्लॉक से बाहर आए । दोनों बस में चढ़ गए। दोनों चलते हुए बस की पिछली सीट पर दोनों बैठ गए और बस ने रफ्तार पकड़ ली।

डॉली सीट पर बैठ बैग गोद में रखते हुए - ct के बारे में सुना..

चाहत - हा.. रश्मि मैम ने बताया था.. ये बोल उसने अपना मोबाइल डॉली कि तरफ बढ़ा दिया। जिसमे टाइम टेबल था।

डॉली उसे देखते हुए - बाकी सारे सब्जेक्ट तो हो जाएंगे पर.. fme ( fundamental of mechanical engineering ) का क्या करें..

चाहत ने ये सुनते ही झट से कहा - हा यार.. उसमे तो बहुत सारे डाउट है..

ये सुन डॉली ने भी सिर पकड़ लिया।

डॉली सीरियस होकर - अब क्या करे..

चाहत ने उसे देख मुंह बना लिया फिर सिर नीचे कर लिया।

दोनों सोच में पड़ गए।

तभी डॉली ने सिर उठा कर देखा तो बस चौक क्रॉस कर रही थी। डॉली ने ऐसे ही देखा तो उसे इशांत दिखा।
 
डॉली ने झट से चाहत की तरफ देखा जो सोच में डूबी थी। डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ा । डॉली के ऐसे हाथ पकड़ने से चाहत ने डॉली की तरफ देखा तो वो दांत दिखा कर हसने लगी। चाहत को कुछ समझ नहीं आया। डॉली ने चाहत का हाथ छोड़ उंगली से खिड़की से बाहर की तरफ इशारा किया। चाहत ने डॉली की उंगली की तरफ देखा तो उसे इशांत दिखा। पहले तो चाहत को कुछ समझ नहीं आया तो उसने डॉली की तरफ देखा। डॉली फिर से उसे देख दांत दिखाते हुए मुस्कुरा दी।

चाहत को उसकी मुस्कुराहट के पीछे का कारण पहले तो समझ नहीं आया वो कभी इशांत को तो कभी डॉली को देख रही थी पर जैसे ही उसे ये बात समझ में आई तो उसने सीधे उठते हुए कहा - no...

बस में बैठे सभी लोग उनकी तरफ अजीब नजरो से देखने लगे। ये देख डॉली अपने चेयर पर से उठी फिर सबको मुस्कुराते हुए देख कर चाहत से दबी आवाज़ में कहा - बैठ जाओ... सब देख रहे है.. डॉली की बात सुन चाहत ने इधर उधर नजर दौड़ाई तो उसने देखा सभी उसे ही देख रहे है ये

देख वो सीट पर बैठ गई।

डॉली ने जैसे ही कुछ कहना चाहा वैसे ही चाहत ने कहा - नहीं.. मै ये नहीं करूंगी..

डॉली उसे घूरते हुए - क्यों..

चाहत ने डॉली को समझाते हुए कहा - नहीं यार.. वो आलरेडी मेरी बहुत हेल्प कर चुके है.. अब और नहीं..

डॉली उसे देखते हुए - हम हमेशा उनकी हेल्प नहीं ले रहे.. बस अभी ही उनकी हेल्प चाहिए.. वो भी डाउट के लिए.. plz चाहत मान जाओ..मै ct में फेल नहीं होना चाहती.. plz

चाहत ने डॉली को देखा जो उससे मिन्नते कर रही थी और मासूम आंखो से चाहत को देख रही थी जिसे देख चाहत ने कहा - ok..

डॉली ने जब ये सुना तो खुश हो गई और जोर से चिल्लाते हुए चाहत को गले से लगा फिर उसके गालो पर किस करते हुए बोली - थैंक्यू.. I love you.. मिसेज शर्मा.. चाहत ने ये सुन डॉली को घुरा तो डॉली ने कान पकड़ते हुए कहा - sorry..

ये बोल उसने चाहत को छोड़ा और अपने आस पास देखा तो सभी फिर अजीब निगाहों से उन दोनों को ही देख रहे थे। ये देख डॉली ने अपना सिर पीट लिया और चाहत उसकी इस

हरकत को देख मुस्कुरा दी। कुछ देर चुप रहने के बाद डॉली ने फिर से बोलना शुरू कर दिया और चाहत बस मुस्कुराते हुए उसे सुन रही थी।

बस वैसे ही चल रही थी और साथ ही डॉली की बकबक भी।

राजनांदगांव,,

अध्यन की कार गेट के पास रुकी अध्यन और देव जी कार से बाहर आए । दोनों गेट के पास आए देव जी ने जैसे ही बेल बजाने के लिए हाथ उठाया ही था उससे पहले ही नौकर ने गेट खोल दिया। देव जी और अध्यन ने अंदर देखा तो गौरी जी के हाथ में पूजा की थाली थी। गौरी जी थाली लेकर अध्यन के सामने गई उन्होंने थाली अध्यन के सामने घुमाते हुए कुछ मंत्र पढ़े।

वहीं देव जी और अध्यन उन्हे देख रहे थे। जब आरती हो गई तो अध्यन ने घर के अंदर आने के लिए अपना कदम बढ़ाया ही था तभी गौरी जी ने उसे हाथ दिखाते हुए रुकने का इशारा किया। अध्यन रुक गया तो गौरी जी ने एक नौकर से लाल सुखी मिर्च लेकर अध्यन के चारो तरफ घूमने लगी और

उसकी नजर उतारने लगी। उन्हे ऐसे करते देख अध्यन ने देव जी की तरफ देखा। तो देव जी ने भी कंधे उचका दिए।

अध्यन ने कुछ बोलना चाहा तो गौरी जी ने भी आंखे बड़ी कर उसे चुप रहने को कह दिया । अध्यन भी सिर हिलाते हुए चुप चाप खड़ा रहा । मिर्च घुमा लेने के बाद गौरी जी ने मिर्च को नौकर को देकर कहा - इसे घर के बाहर फेक आओ..

देव जी जो काफी देर से उन्हे ये सब करते देख रहे थे उनसे ये अंध विश्वास देखा नहीं गया तो उन्होंने गौरी जी से कहा - क्या आप भी.. इतनी पढ़ी लिखी होकर भी.. इन सब बातो पर यकीन करती है..

तब गौरी जी ने अध्यन का हाथ पकड़ कर उसे अन्दर लाते हुए बोली - हा मै पढ़ी लिखी हूं.. पर उसके साथ एक मा भी हूं.. अपने बेटे के लिए जो भी करना होगा वो मै करूंगी.. पर उसे कोई भी नुकसान हो.. ये बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी.. ये एक शब्द एक मा के थे जिसके लिए उसके बेटे से बढ़ कर कुछ नहीं था। इन शब्दों ने देव जी की बोलती बन्द कर दी वो चुप चाप अध्यन के पीछे चलने लगे।

" सही तो कहा था गौरी जी ने.. वो चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी क्यों ना हो.. अपने बेटे के लिए .. वो किसी भी हद तक जा सकती थी.. शायद यही होता है.. एक मा का दिल..

जिसमे अपने बच्चे के लिए बस प्यार ही प्यार भरा होता है "

अब तक अध्यन हॉल में आ चुका था।

गौरी जी ने अध्यन का हाथ छोड़ दिया तब अध्यन ने कहा - मॉम मै फ्रेश होकर आता हूं.. जिसे सुन देव जी ने भी कहा - हा .. मै भी आता हूं..

अध्यन जैसे ही जाने के लिए तो गौरी जी ने उसका हाथ पकड़ लिया । अध्यन एकदम से रुक गया। उसने मूड कर गौरी जी की तरफ देखा तो गौरी जी अध्यन के पास गई फिर उसके माथे को चूमते हुए अध्यन के गले लग गई। वहीं देव जी भी रुक कर अध्यन की तरफ देखने लगे।

अध्यन ने कंफ्यूज होकर देव जी की तरफ देखा तो उन्होंने भी नहीं पता का इशारा किया। अध्यन ने महसूस किया गौरी जी उसके गले लग कर सिसक रही है तो अध्यन ने गौरी जी की पीठ सहला कर कहा - क्या हुआ.. मॉम.. अब तो मै ठीक हूं.. फिर आप क्यों रो रहे हो..

ये सुन गौरी जी ने अध्यन से दूर होते हुए कहा - इन 6 महीनों से खुद को रोक कर रखा था मैंने.. तुम्हारे सामने हमेशा खुश रहती .. पर दिल हमेशा रोता था मेरा.. आज जब तुम ठीक हो.. तब खुशी से ये आंखे बहने लगी है.. ये बोल वो और

ज्यादा सिसकते हुए रोने लगी।

अध्यन ने ये सुना तो उसने देव जी की तरफ देखा जिनकी आंखे भीगी हुई थी। अध्यन ने पहले कभी देव जी को रोते हुए नहीं देखा था आज उन्हे रोते देख अध्यन को भी अच्छा नहीं लग रहा था उसने कुछ नहीं कहा बस गौरी जी को कस कर गले लगा कर कहा - मॉम.. मै आपको और डैड को कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा.. आप दोनों मेरी स्ट्रेथ हो.. ये बोल उसने देव जी की तरफ देख कर पलकें झपका दी। देव जी भी नम आंखो से मुस्कुरा दिए।

कुछ देर रो लेने के बाद गौरी जी अध्यन से दूर हुई उन्होंने अध्यन के चेहरे पर आए आंसुओ को अपने आंचल से साफ करते हुए कहा - अब बस .. अब मत रोना.. कभी भी नहीं.. जाओ फ्रेश होकर आओ.. फिर हम खाना खायेंगे..

अध्यन ने सिर हिला दिया और वहा से जाने लगा।

गौरी जी ने पीछे पलट कर देखा तो देव जी गीली आंखो के साथ उन्हे देख रहे थे

। गौरी जी उनके पास आई तो देव जी ने उनसे कुछ नहीं कहा बस अपने गले से लगा लिया । उन्हे ऐसे देख अध्यन दौड़ते हुए उनके पास आया और उनके गले लग गया। उसने अपनी आंखे बंद की फिर कहा - love you both...

ये सुन देव जी और गौरी जी ने मुस्कुराते हुए एक साथ कहा - love you to..

रायपुर..

चाहत कॉलेज से रूम अा चुकी थी। उसने कपड़े चेंज किए और अपने कपड़े मोड़ कर अलमारी में रखने लगी। अब तक निशा भी रूम में अा चुकी थी । वो भी चेंज कर बेड पर लेट गई। इतने में रूम का दरवाजा जोर से खुला । जिससे चाहत और निशा एक पल के लिए चौक गए। चाहत ने कपड़ों को यू ही पकड़े हुए और निशा ने बेड से उठते हुए दरवाजे की तरफ देखा तो डॉली बुक्स पकड़े चाहत के रूम में एंट्री ले रही थी। उसे ऐसे देख निशा और चाहत ने अपने सिर पर हाथ रख लिया।

डॉली दरवाज़े को पैरो से बंद करते हुए आई फिर अपने बुक्स को बेड पर रख देती है। फिर लम्बी लंबी सांसें लेने लगती है। जिसे देख चाहत ने जल्दी से कपड़े अलमारी में रखे फिर उसने पानी की बोतल उठाई और निशा की तरफ पानी की बोतल बढ़ा दी। डॉली पानी पीने लगती है। निशा डॉली को एक नजर देखती है फिर कानों में इयर फोन डाल कर सो

जाती है। ये देख डॉली हसने लगती है तो चाहत उसे आंख दिखाती हैं। जिसे देख वो चुप हो जाती है।

चाहत ने अलमारी के दरवाज़े बंद कर पानी की बोतल डॉली से लेकर टेबल पर रख देती है फिर डॉली के पास बैठ जाती है। डॉली सारे सब्जेक्ट्स की बुक एक साइड रखते हुए कहती है - बाकी सब तो हो जाएगा.. फिर fme की बुक उठा कर कहती है - but इसका क्या करें..

चाहत उस बुक को एक साइड रख कर अपना मोबाइल उठा लेती है और उसमें से इशांत का नंबर निकाल कर डॉली को दिखाती है डॉली नंबर देख कर खुश हो जाती है। चाहत नंबर डायल करती है तो डॉली मोबाइल को स्पीकर पर रख देती है। मोबाइल पर कॉलर ट्यून बजती है।

दिल को तुमसे प्यार हुआ..

पहली बार हुआ.. तुमसे प्यार हुआ..

ये सुन डॉली फिर से हसने लगती है तो चाहत उसे आंखे दिखा चुप रहने को कहती है। डॉली चुप हो जाती है । इसके तुरंत बाद ही इशांत कॉल अटेंड कर लेता है।

इशांत - हा.. चाहत.. इशांत की आवाज़ इतनी प्यारी होती है कि डॉली दिल पर हाथ रख कर बोलती है - हाए.. मर जाऊं गुड़ खाके.. चाहत एक बार फिर डॉली को घूरती है तो डॉली

चुप हो जाती है।

कॉल पर इशांत जवाब ना पाकर एक बार फिर चाहत को पुकारता है - हेल्लो.. चाहत... चाहत ये सुन झट से कहती है- हा हेल्लो.. इशांत..

इशांत - हा चाहत.. कहो...कुछ काम था?

चाहत ने ये सुन डॉली को देखा तो डॉली उसे इशारे से बात करने को कह रही थी।

चाहत डॉली को देख हिचकिचाते हुए - हा.. नहीं.. मेरा मतलब हा..

इशांत उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - अरे.. तुम तो ऐसे घबरा रही हो.. जैसे मैं तुम्हे खा ही जाऊंगा.. या मुझसे मेरी प्रॉपर्टी लेना चाहती हो..

चाहत को ये सुन हसी अा गई और वो भी मुस्कुराने लगी फिर उसने कहा - हा.. प्रॉपर्टी ही चाहिए..

ये सुन इशांत ने हस्ते हुए कहा - ठीक है.. ले लो.. पर एक बात बता दू .. मै बहुत गरीब परिवार से हूं.. तो ज्यादा प्रॉपर्टी नहीं है मेरी..

चाहत ये सुन हस्ते हुए - नहीं .. भई.. ऐसे कैसे... हमे तो इन्फॉर्मेशन मिली थी.. आप करोड़ों के मालिक है.. तो इस नाते आपके सारे करोड़ों रुपए हमे चाहिए..

इशांत हस्ते हुए - ठीक है .. ले लीजिए.. सब आपका ही तो है.. मेरी प्रॉपर्टी और मै.. वो अपनी बात पूरी कर पाता इससे पहले ही चाहत ने इशांत को टोकते हुए कहा - जी???

इशांत ने खुद को संभालते हुए कहा - नहीं कुछ नहीं.. तुम बताओ.. क्या काम था..??

चाहत ने ये सुना तो डॉली की तरफ देखने लगी। डॉली ने उसे इशारे से बात करने को कहा । तो चाहत ने कहा - वो आपकी हेल्प चाहिए थी..

इशांत ने ये सुन कहा - हा बोलो..

चाहत - वो fme में डाउट थे.. तो.. क्या..आप.. हेल्प करेंगे...

इशांत ने तुरंत कहा - हा ठीक है..आज मेरे एग्जाम कंपलीट हुए है.. ठीक 4 दिन बाद मेरे प्रैक्टिकल कंपलीट हो जाएंगे तो..मै कर दूंगा हेल्प..

ये सुन डॉली ने अपना हाथ सिर पर दे मारा तो चाहत ने झट से कहा - पर हमारे ct तो .. वो तो 4 दिन बाद है.. और हमने कुछ नहीं पढ़ा..

इशांत उसकी बात सुन - हम कौन..??

चाहत - मै और डॉली..

इशांत - कोई नई.. मै तुम्हारी हेल्प कर देता हूं.. कल तुम

दोनों लाइब्रेरी में मिलना.. मै सारे डाउट क्लियर कर दूंगा..

चाहत - पर आपके प्रेक्टिकल..??

इशांत - तुम उसकी टेंशन ना लो.. वैसे भी मेरे प्रैक्टिकल जल्दी हो जाएंगे.. ये सुन डॉली खुश हो जाती है और बेड पर चढ़ कर नाचने लगती है जिसे देख चाहत बेड से उठ जाती है और खिड़की के पास खड़ी हो जाती है।

चाहत - पर ऐसे कैसे.. आपके practical उसका क्या..??

इशांत - क्युकी.. मेरा रोल नंबर पहले आता है.. तो प्रैक्टिकल जल्दी ख़तम हो जाएगा..

चाहत - ठीक है.. तो कल आपसे लाइब्रेरी में मिलते है..

इशांत ये सुन - ओके तो.. मै जाऊ..

चाहत एकदम से - नहीं.. जिसे सुन डॉली भी उसकी तरफ देखती है तो चाहत इशांत से कहती है - एक ओर डाउट है..

इशांत हस्ते हुए कहता है - वो तो कल सॉल्व होगा ना..

चाहत - नहीं ये दूसरा वाला डाउट है..

इशांत फिर से मुस्कुराते हुए - ठीक है .. बोलो..

चाहत - वो.. हमारा एग्जाम नेक्स्ट मंथ है.. तो आपका एग्जाम अभी कैसे कंपलीट हो गया.. ??

इशांत - क्युकी.. हम है आपके सीनियर.. तो हमारे एग्जाम आप सभी से पहले होते है.. जब आप भी सीनियर बन

जाएंगी.. तो आपके भी एग्जाम जल्दी हो जाएंगे.. ये सुन चाहत ने कुछ नहीं कहा ।

इशांत - और कुछ..

चाहत - जी??

इशांत - मेरा मतलब .. और कोई डाउट..

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - नहीं.. और बाय कहते हुए कॉल कट देती है। इधर डॉली बेड से नीचे उतर कर चाहत को गले से लगा लेती है.. वहीं दूसरी तरफ इशांत मोबाइल को सिर से लगा मुस्कुराते हुए बोलता है - पागल लड़की.. फिर अपना काम करने लगता है।
 
चाहत डॉली की तरफ देखने लगी डॉली ने कुछ नहीं कहा बस चाहत से दूर हुई फिर उसने चाहत को गोल घुमाते हुए कहा - ये.. हमारा काम हो गया... और भांगड़ा करने लगी। चाहत अब उसे देख मुस्कुरा रही थी ।

राजनांदगांव...

अध्यन खाना खा कर बेड पर लेटा हुआ था। तभी दरवाज़ा खुला और अंश अंदर अा गया। अंश सीधा बेड पर चढ गया फिर अध्यन के गले लग गया। अंश को गले लगा अध्यन को

बहुत अच्छा लग रहा था। थोड़े देर बाद अंश अध्यन से दूर हुआ फिर उसने कहा - फाइनली तू ठीक हो गया..

अध्यन ने उससे दूर होते हुए कहा - हा.. यार.. अब सब ठीक है..

अंश - डॉक्टर ने क्या कहा..??

अध्यन - उन्होंने बस इतना कहा कि .. मुझे एक महीने बस और मेडिसिन लेनी है.. फिर मै ठीक हो जाऊंगा.. ये बोल अध्यन ने उसके और डॉक्टर के बीच हुई हर बात अंश को बता दी।

अंश ने इतना सुन कहा - hmm.. ठीक है.. फिर उसने सिर झुका कर कहा - क्या अब.. तू चाहत से बात करेगा..

अध्यन ने अंश को देखा जो सिर झुकाए बैठा था ये देख अध्यन मुस्कुराते हुए - हा करूंगा.. ये सुन अंश खुश होकर कहा - सच में..??

अध्यन ये सुन उसके कंधो में हाथ रख - हा सच में..

अंश ये सुन कर - तू जानता नहीं .. मै कब से ये सुनना चाहता था.. इतने दिनों में मैंने अपने दोनो बेस्ट फ्रेंड्स को बहुत मिस किया है.. अब जब तुम दोनों साथ में होगे तो.. सबसे ज्यादा मै ही खुशी मुझे ही होगी.. अंश ने ये सब खुश

होकर कहा।

इतना सुन अध्यन भी बेड से उठ कर खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया। उसने बाहर देखते हुए कहा - तू हमेशा चाहत के बारे में सोचता है..पर क्या तूने कभी एक बार भी मेरे बारे में सोचा है..

अंश ने अध्यन की बात सुन कर कहा - नहीं अध्यन ऐसा नहीं है .. मै तो बस... अंश बोल ही रहा था।

अध्यन उसे टोकते हुए - तू सोच भी नहीं सकता.. मैंने इतने दिन कैसे गुजारे है.. रोज़ उसी जगह पर जाता था मै.. वहा उसे बैठा देख मुझे बहुत तकलीफ होती थी.. मै चाहता था उसके पास जाना पर जा नहीं पाया...क्युकी डरता था.. कहीं उसे मेरी वजह से दुख ना हो.. अब अध्यन की आवाज़ भारी होने लगी किसी तरह खुद को संभालते हुए कहा - पता है... जब वो मुझे छोड़ कर जा रही थी.. स्टेशन में थी वो.. तब तू वहा नहीं था.. वहा मै था.. मैने उसे देखा था बार बार मूड कर देखते हुए.. जा रही थी.. एक नए सफर पर.. पर फिर भी..उसके आंखो में कोई खुशी नहीं थी.. सब खुश थे.. पर वो खुश नहीं थी.. मै उसके दिल का हाल जानता था.. फिर भी मै उसे रोक नहीं पा रहा था... ट्रेन में उसके साथ था .. ठीक उसके पीछे.. उसे वैसे ही देख रहा था.. अपने पापा के कंधो पर सिर रख कर बड़ी ही सुकून से सोई हुई थी...

उसकी घनी पल्को में आए आंसु... तूने नहीं देखे थे... मैंने देखे थे.. पता है.. जब वो ट्रेन से उतर कर घबराहट भरी नज़रों से इधर उधर देख रही थी.. मन किया उसी वक़्त ही उसका हाथ पकड़ लू... और कहूं.. मै हूं तुम्हारे साथ .. हमेशा.. हर पल..

ये बोल अध्यन ने अंश की तरफ देखा जिसमे नमी थी और दर्द था जो बहुत ही गहरा था उसने वैसे ही कहा - तू सोच भी नहीं सकता.. कितना दर्द होता है .. जब आप चाह कर भी अपने प्यार के लिए कुछ नहीं कर पाते है..

अंश ने उसकी आंखे देख कर कहा - सॉरी भाई.. मैंने तुझे आज तक समझा ही नहीं..

अध्यन ने भीगी पलको के साथ मुस्कुराते हुए कहा - इट्स ओके .. तेरी कोई गलती ही नहीं शायद मैंने ही.. तुझे बताने में देर कर दी..

अंश ने कहा - ठीक है मुझे तो देर से बता रहा है... पर उसे जल्दी बता देना.. पर भाई तू उसे छोड़ने रायपुर तक गया था.. और उसे पता भी नहीं..

अध्यन मुस्कुराते हुए - महसूस तो उसने भी किया था.. पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा..

अंश - हा ये हो सकता है..

तभी अंश का मोबाइल बजने लगा अंश ने मोबाइल देखा फिर मुस्कुराने लगा ये देख अध्यन ने कहा - क्या हुआ.. क्यों पागलों की तरह बिना बात के मुस्कुरा रहा है..

अंश ने कुछ नहीं कहा बस मोबाइल अध्यन की तरफ कर दिया अध्यन ने मोबाइल देखा फिर वो भी मुस्कुराने लगा क्युकी कॉल चाहत का था।

अंश ने कॉल अटेंड किया फिर कहा - हा चाहत...

चाहत ने चहकते हुए - हेल्लो अंश..

अंश उसकी आवाज़ की खनक को महसूस करते हुए - क्या बात है.. बहुत खुश हो..

चाहत - हा आज मै बहुत खुश हूं.. जानते हो क्यों..

अंश ने मोबाइल स्पीकर पर कर के पूछा - अच्छा बताओ.. क्यों..?

चाहत - क्युकी.. आज मेरी बहुत बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व हो गई..

अंश और अध्यन चाहत की खुशी को महसूस कर पा रहे थे उसे ऐसे खुश होते देख अध्यन भी मुस्कुराने लगा। अंश ने कहा - और प्रॉब्लम क्या थी..??

चाहत ने ज़ोर से कहा - fme

अंश ने अजीब सा रिएक्शन देते हुए कहा - fme आई think वो तो सब्जेक्ट है ना.. फिर वो.. अंश बोल ही रहा था

तभी ...

चाहत - अरे बुद्धू ... वो क्या है ना.. नेक्स्ट four days के बाद हमारा ct है तो.. उसके लिए prepare करना था.. बाकी के सारे सब्जेक्ट्स तो हो गए.. बस fme में ही डाउट था.. तो आज मैंने और डॉली..

अंश उसे टोकते हुए - डॉली.. कौन डॉली..

चाहत सिर पर हाथ मारते हुए - अरे डॉली.. मेरी फ्रेंड..

अंश - ओह अच्छा..

चाहत ने फिर से कहना स्टार्ट किया - हा तो.. मैंने और डॉली बहुत परेशान थे.. तो हमने सोचा क्यों ना इशांत से बात की जाए.. and guess what.. जब हमने उन्हें अपनी प्रॉब्लम बताई तो वो मान गए ..

अंश - मान गए.. बट किस लिए मान गए..

चाहत - हमारे डाउट क्लियर करने के लिए.. है ना मज़े की बात...

अंश - ओह.. अच्छा..

चाहत ये सुन उदास होकर बोलना है - बस अच्छा.. ये सुन बगल में खड़ा अध्यन अंश को आंखे दिखता है।

जिसे देख अंश जबरदस्ती खुश होकर - बस अच्छा नहीं..

बहुत अच्छा.. ये तो बहुत अच्छा हुआ.. yeh...

चाहत अब दोबारा चहकते हुए - है ना अच्छी बात.. वहीं तो .. ये बोल चाहत थोड़ी देर के लिए चुप हो जाती है ।

अध्यन को उसका ऐसा चुप रहना अच्छा नहीं लगता तो वो अंश को बिना आवाज़ के होठ हिलाते हुए कहता है - क्या हुआ पूछे..

अंश उसका इशारा समझ कर कहता है - क्या हुआ.. चाहत ऐसे suddenly चुप क्यों हो गई..

चाहत थोड़ी देर चुप रहती है तो अध्यन को घबराहट होने लगती है जिसे देख अंश झट से कहता है - हेल्लो.. चाहत तुम सुन रही हो..

चाहत अंश की बात सुनकर कहा - अंश वो..

अब अंश को भी घबराहट होने लगती है जिसे छुपाते हुए कहता है - क्या हुआ.. बोलो..

चाहत - वो .. मुझे सुबह से बेचैनी हो रही थी..और अजीब भी लग रहा था.. तो क्या तुम..

अंश उसकी बात सुन - तो.. मै क्या ..

चाहत ने वैसे ही हिचकिचाते हुए कहा - तो.. क्या तुम.. अध्यन के घर जाकर उसे देख कर आओगे..

अध्यन ने उसकी आवाज़ में एक तरह की फिक्र के साथ डर

को भी महसूस किया । जिसे समझ कर वो बेड पर बैठ गया । उसने अपने हाथो को अपने चेहरे पर रख लिया । ये देख अंश को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले।

इधर चाहत ने भी अपनी आंखे साफ कर के कहा - हेल्लो.. अंश..

अंश ने उसकी बात सुन कर कहा - हा चाहत यही हूं मै.. बोलो..

चाहत ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - अध्यन .. ठीक है या नहीं .. बस इतना जान लू.. फिर मुझे भी अच्छा लगेगा..

अब अंश से रहा नहीं गया उसने अध्यन को घूरते हुए कहा - मै तुम्हे बताना भूल गया.. मै अध्यन के घर पर हूं.. वो अभी वॉशरूम में है.. तुम कहो तो उससे बात करवाऊ तुम्हारी..

ये सुन अध्यन ने चेहरे से हाथ हटा कर अंश को देखा जो उसे ही घुरे जा रहा था दूसरी तरफ चाहत ये सुन थोड़ी देर के लिए चुप हो गई।

चाहत ने गहरी सांस लेकर कहा - नहीं.. जब तक वो खुद नहीं चाहेगा.. तब तक तो मै उससे बात करूंगी नहीं.. ये सुन अंश ने सिर पर हाथ दे मारा वहीं अध्यन मुस्कुराने लगा।

चाहत ने बात जारी रखते हुए कहा - बस तुम इतना करना..

उसे कहना अपना ख्याल रखे.. क्युकी कुछ दिनों से मुझे अजीब सी बेचैनी महसूस होती है.. और अगर कोई भी प्रॉब्लम होगी तो.. मुझे बताना..

अंश ने ये सुन कर कहा - अच्छा ठीक है.. पर तुम चाहो तो अभी अध्यन से बात..

अंश बोल ही रहा था तभी चाहत ने कहा - मै चलती हू.. अंश मुझे कुछ काम था.. बाय..

अंश ने भी बाय कहा और चाहत ने भी कॉल कट कर दी।

अब अंश ने मोबाइल को जेब में डाल कर अध्यन को देखा जो उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था जिसे देख अंश ने कहा - हस मत.. नहीं तो मुंह तोड़ दूंगा तेरा.. सालों तुम ही दोनो का अच्छा है.. एक दूसरे को मिस भी करते हो.. एक दूसरे की फिक्र भी करते हो.. पर बात दोनो को नहीं करनी.. फिर अपनी तरफ उंगली कर - और एक मै हूं.. जो थाली के बैगन की तरह.. कभी इधर तो कभी उधर होता हू.. जाओ यार मुझे तो बात ही नहीं करनी तुम दोनों से.. ये बोल अंश वहा से जाने लगा।

तभी अध्यन ने कहा - अंश रुक..

अंश रुक गया तो अध्यन उसके पास जाकर - नहीं यार तू ये नहीं कर सकता.. अंश ने हैरानी से अध्यन की तरफ देखा तो

अध्यन ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - क्युकी एक तू ही तो है.. जिसके जरिए मुझे चाहत के बारे में सब कुछ पता चल जाता है.. मेरा मेल कबूतर.. ये बोल अध्यन हसने लगा ।

अंश ने ये सुन खीज कर कहा - साले सेलफिश.. ये बोल जाने लगा तो अध्यन ने उसे जबरदस्ती बेड पर बैठाते हुए कहा - तू बैठ मेरी जान.. चल तुझे कुछ खिलता हूं.. बोल क्या खाएगा..

अंश खाने की बात सुन खुश होते हुए - हा ये हुई ना बात.. जो भी टेस्टी हो.. खिला दे.. अध्यन ने उसकी बात सुनी फिर कहा - नौटंकी कहीं का.. ये बोल उसने नौकर को आवाज़ दी फिर उसे नाश्ता लाने को कहा ।

अब अध्यन ने अंश की तरफ देखते हुए कहा - चाहत ct की बात कर रही थी.. वो क्या होता है..

अंश ने बताना शुरू किया -ct means class test.. हर सेमेस्टर में हमारे टेस्ट होते है.. जिसमे से बेस्ट मार्क्स होते है.. उन्हे यूनिवर्सिटी भेजा जाता है.. और ये मार्क्स हमारे semester एग्जाम में count होते हैं..

अध्यन ने ये सुन कहा - और तुम्हारे सेमेस्टर एग्जाम कब है..??

अंश - वो नेक्स्ट मंथ.. वैसे तू ये क्यों पूछ रहा है.. इतने में

दरवाजे पर नॉक हुई फिर एक नौकर खाने की प्लेट लेकर अंदर अा गया फिर प्लेट्स को टेबल पर रख कर उसने कहा - बाबा आपका नाश्ता.. अध्यन ने उसकी बात सुन हा में सिर हिला दिया। अब अध्यन ने अंश की तरफ इशारा किया तो अंश भी उठ कर टेबल के पास अा गया।

अध्यन ने अंश को बैठने का इशारा किया फिर उसने नाश्ते की प्लेट अंश की तरफ बढ़ाते हुए कहा - तो तेरा मतलब है .. की तुम लोगो के सेमेस्टर एग्जाम almost 2 महीनों में हो जाएंगे..

अंश ने बाइट लेते हुए कहा - हा तो..

अध्यन ने भी नाश्ते की प्लेट उठाते हुए कहा - तो कुछ नहीं.. मै चाहत से एग्जाम के बाद बात करूंगा..

अंश के हाथ खाते खाते रुक गए उसने चम्मच साइड में रखा फिर अपना एक हाथ सिर पर रखते हुए कहा - तू मुझे चैन से खाने और जीने देगा की नहीं..

अध्यन ने उसका हाथ सिर से हटाते हुए कहा - ज़्यादा टेंशन मत ले.. ये लास्ट टाइम है.. इसके बाद हम पक्का बात कर लेंगे.. ये बोल अध्यन ने एक बाइट अंश को खिला दिया।

अंश ने खाते हुए कहा - पर तू अब क्यों रुका हुआ है..

अध्यन ने नाश्ते के प्लेट में चम्मच रखते हुए कहा - क्युकी..

अभी उसका एग्जाम है.. और मै नहीं चाहता .. मेरी वजह से उसके एग्जाम में इफेक्ट पड़े.. समझा..

अंश - हा समझ गया... तुम दोनों और तुम्हारा प्यार.. उसकी इस बात को सुन अध्यन मुस्कुराने लगा।

अब दोनोे चुप चापें नाश्ता करने लगे।
 
रायपुर...

अगले दिन

कॉलेज...

चाहत की क्लास ख़तम हुई तो वो सीधे डॉली के क्लास के सामने अा गई। थोड़ी देर बाद डॉली भी क्लास से बाहर आई तो चाहत ने उसे देख अपना हाथ बढ़ा कर उसे अपने पास बुला लिया। दोनों थोड़े देर बाद लाइब्रेरी की तरफ चल पड़ी।

तय समय पर चाहत और डॉली क्लास के बाद लाइब्रेरी पहुंचे । गेट पर ही उनको लाइब्रेरियन ने रोक लिया बिना कुछ बोले ही उन्होंने इशारे से रिजिस्टर को तरफ उंगली कर दी। चाहत

डॉली चाहत भी बुक्स सेक्शन कि तरफ चले गए। उनको प्रॉब्लम थी fme में तो उस सब्जेक्ट की बुक्स दोनो ने उठाई और एक टेबल पर बैठ गए। थोड़े देर सिर खपाने के बाद डॉली ने चाहत की तरफ बेचारगी से देखा। इधर चाहत का चेहरा भी डाउट से भरा पड़ा था।

डॉली और चाहत ने एक दूसरे को बेचारगी से देखा फिर से बुक्स में घुस गए। तभी डॉली की नजर अंदर बैठे लाइब्रेरियन पर पड़ी जो चुपके से चिप्स खा रहे थे। वहीं जब उन्होंने देखा डॉली उन्हे घुर रही है तो वो खाते हुए अटक गए और खासने लगे। लाइब्रेरी में बैठे बाकी लोगो के साथ चाहत ने भी उनकी तरफ देखा फिर डॉली से कहा - इनको अचानक क्या हो गया..??

डॉली को उनकी हालत देख हसी अा गई उसने चाहत से कहा - हम यहां पहले से ही भूखे है.. और ये ऐसे खायेंगे तो बच्चो की बद्दुआ तो लगेगी ही ना..

चाहत को डॉली की बात समझ नहीं आई तो डॉली ने जो कुछ भी थोड़े देर पहले देखा था उसे चाहत को बता दिया अब चाहत भी हसने लगी।

थोड़े देर बाद दरवाज़े के पास किसी के आने की आहट हुई

तो चाहत और डॉली के साथ बाकी सभी की नज़रे दरवाज़े की तरह चली गई। जहा एक 6 फीट की हाइट का लड़का अंदर अा रहा था जिसने हल्के स्काई ब्लू कलर की शर्ट और ब्लैंक फॉर्मल पेंट पहने लड़का रिजिस्टर पर साइन कर रहा था। उसने अपनी शर्ट के स्लीव्स को कोहनी तक मोड़ रखा था बालो को जेल लगा कर अच्छे से सेट कर रखा । बियर्ड्स ट्रीम थे पर उस पर काफी जच रहे थे पैरो में फॉर्मल ब्लैक शूज में वो काफी डैसिंग लग रहा था। लाइब्रेरी में बैठी लड़कियों के साथ लड़के भी उसे घुर रहे थे।

चाहत और डॉली टेबल कोने में बैठे थे। इसलिए दोनों को चेहरा साफ नहीं दिख रहा था। पर शर्ट की फिटिंग से कोई भी कह सकता था कि लड़के की बॉडी काफी अच्छी है। साथ ही साथ चेहरे पर रहने वाला एट्टीट्यूड बता रहा था कि बंदा मैकेनिकल वाला है। धीरे धीरे वो लड़का टेबल के करीब आने लगा.. उसके करीब आते ही चाहत और डॉली ने उसे पहचान लिया । डॉली ने तो सीधे दिल पर हाथ रख कर कहा - हाए... कतई.. जहरीले लग रहे है.. ना..

चाहत ने डॉली की बात सुनी फिर उसे आंखे दिखाते हुए चुप रहने का इशारा किया ।

उस लड़के ने आस पास नजर दौड़ाई फिर अपना मोबाइल निकाल कर कॉल लगा दी। दूसरी तरफ चाहत का मोबाइल

वाइब्रेट होने लगा। चाहत ने एक नजर लड़के को देखा फिर कॉल अटेंड करते हुए कहा - हा इशांत ..इधर देखिए .. लेफ्ट साइड .. चाहत के बोलते ही लड़के ( इशांत ) ने लेफ्ट साइड देखा । जहा कोने में चाहत और डॉली बैठे थे जो उसे देख कर मुस्कुरा रहे थे। उन्हे देख इशांत उनके पास आने लगा।

वहीं इशांत को उनके पास जाता देख बाकी जितने भी बच्चे वहा बैठे थे सभी की नजर इशांत की तरफ चली गई। इशांत जब चाहत और डॉली के पास पहुंचा तो डॉली और चाहत अपने सीट से खड़े हो गए। जिसे देख इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - ये क्या कर रहे हो

..??

इस पर डॉली और चाहत ने एक साथ कहा - गुड आफ्टरनून..सर.. सर पर उन्होंने ज्यादा ही ज़ोर दिया था। दोनो को ऐसा करते देख इशांत मुस्कुराने लगा फिर उसने भी गुड आफ्टरनून कहा फिर कहा - तुम दोनों को इतना फॉर्मल होने की जरूरत नहीं.. ये बोल उसने दोनों को बैठने का इशारा किया। इशारा पाकर चाहत और डॉली दोनों चेयर पर बैठ गए।

उसने अपने बुक्स को अपनी तरफ किया।

फिर चाहत और डॉली की तरफ देख कर कहा - कौन सा यूनिट..

जिसे सुन चाहत ने झट से कहा - यूनिट फर्स्ट ... ये सुन इशांत मुस्कुरा दिया..

फिर इशांत यूनिट फर्स्ट को एक्सप्लेन करने लगा चाहत जहा समझ रही थी वहीं डॉली उसका तो ध्यान रह रह कर इशांत के पिंक लिप्स पर ही जा रहा था। यूनिट के एक टॉपिक को एक्सप्लेन कर लेने के बाद इशांत ने डॉली की तरफ बिना देखे कहा - डॉली कैल्सी...

डॉली वो तो बस इशांत के चेहरे में खोई थी उसने ध्यान नहीं दिया तो इशांत ने सिर उठाया और मूड कर सीधे डॉली को देखने लगा जिससे डॉली एक पल के असहज हो गई उसने अपना सिर नीचे झुका लिया।

इशांत ने उसे ऐसा करते देखा फिर मुस्कुराते हुए उसने केल्सी ( कैलकुलेटर ) को खुद ही हाथ बढ़ा कर ले लिया। फिर इशांत ने क्वेश्चन सॉल्व किया इशांत का मेथड इतना ईज़ी था कि चाहत को झट से समझ अा गया। उसने बुक इशांत से ली और प्रॉब्लम्स खुद सॉल्व करने लगी। वहीं डॉली इशांत को ही देख रही थी। वो बार बार कोशिश करती की वो

जाता हूं.. तुम्हारी इन पलको को देख कर... तभी किसी ने उसके कंधो पर हाथ रखा जिससे इशांत ने पलट कर देखा तो पीछे खड़ा लड़का उसे साइड होने को कह रहा था। जिसे सुन इशांत भी पलट कर आगे निकल गया।

इशांत बुक पकड़े चाहत के पास आया उसने बुक को टेबल पर रखा और पढ़ने लगा साथ ही चाहत और डॉली भी पढ़ने लगे। थोड़े देर बाद इशांत ने मोबाइल पर टाइम देखा फिर चाहत की तरफ देखते हुए कहा - चाहत... जिस पर चाहत ने अपना सिर उठा कर इशांत की तरफ देखा तो इशांत ने कहा - काफी वक़्त हो गया है.. अब तुम दोनों को जाना चाहिए.. तुम्हारी बस अा गई होगी..

चाहत ने कहा - बट ये यूनिट तो कंपलीट नहीं हुआ है..

इस पर इशांत ने उसकी परेशानी समझते हुए कहा - ये जो टॉपिक मैंने समझाया है ना.. सारे क्वेश्चन इसी से सॉल्व होंगे.. और रेस्ट टॉपिक्स भी इसी से रिलेटेड है.. तुम एक बार ट्राई करना.. सॉल्व करने की.. अगर फिर भी अगर कोई प्रॉब्लम हुई तो .. कल मै उसे सॉल्व कर दूंगा..

चाहत ने ये सुन हा में सिर हिला दिया फिर उठ कर उसने बुक्स उठाई फिर उसे वापस रो में रख कर अा गई। इशांत ने

डॉली और चाहत को देखते हुए कहा - तो कल इसी टाइम पर .. यही मिलते है..

चाहत और डॉली ने एक साथ हा कहा फिर अपने केलसी और बाकी चीजों को पकड़ कर आगे बढ़ने लगी। दोनों लाइब्रेरियन के पास पहुंची एक बार फिर उन्होंने रिजिस्टर में एंट्री कर तीनों बाहर अा गए। उन्होंने अपने बैग्स लिए फिर लाइब्रेरी से बाहर अा गए। चाहत और डॉली ने पलट कर इशांत को बाय कहा फिर अपने बस की तरफ बढ़ने लगी।

थोड़ी दूर चले जाने के बाद।

डॉली ने एक बार पलट कर इशांत को देखा जो एक हाथ में साइड बैग पकड़े दूसरे हाथ से मोबाइल पकड़ उसे कान से लगाए किसी से बात कर रहा था । इशांत के बाल हवा में उड़ रहे थे। वो बहुत ही स्मार्ट लग रहा था। जिसे देख डॉली मुस्कुरा दी।

थोड़ी देर बाद चाहत और डॉली बस के पास पहुंच गए। चाहत और डॉली बस में बैठ गए। चाहत आज बहुत थक गई थी तो उसने अपना सिर सीट से लगा लिया वहीं डॉली लाइब्रेरी में हुए किस्से को सोच कर मुस्कुराने लगी। आज उसने इशांत के लिए कुछ महसूस किया था ऐसा पहली बार

था कि डॉली का दिल किसी के लिए धड़क रहा था। डॉली ये सोच कर मुस्कुरा रही थी । ऐसे ही बस आगे बढ़ने लगी।

अब ऐसा रोज़ होने लगा चाहत और डॉली रोज़ लाइब्रेरी जाते वहा वो इशांत से मिलते वो वहा उन्हे टॉपिक्स समझता साथ ही उनके डाउट सॉल्व करता था। चाहत और डॉली भी कॉलेज से आकर हॉस्टल में fme पढ़ती जिस दिन जो यूनिट होता उस यूनिट से रिलेटेड चीज़े वो पहले ही पढ़ लेती थी साथ ही उन्हे जो भी डाउट होते वो जाकर इशांत से डिस्कस कर लेती थी। लगातार तीन दिनों तक ये सब होने के बाद ।

चौथे दिन ..

चाहत की क्लास ख़तम हो जाने के बाद चाहत डॉली के क्लास के बाहर पहुंची उसकी क्लास चल रही थी तो चाहत बाहर डॉली के बाहर आने का इंतज़ार करने लगीं । डॉली थोड़े देर में बाहर आई उसे देख चाहत के चेहरे पर चिंता के भाव अा गए क्युकी डॉली के चेहरे से लग रहा था जैसे

उसकी तबीयत ठीक नहीं थी।

चाहत झट से डॉली के पास गई तो उसका चेहरा मुरझाया हुआ था। चाहत ने डॉली के पास जाकर उसे छुआ तो उसकी बॉडी का टेंपरेचर नॉर्मल था पर उसका चेहरा उतरा हुआ था।

ये देख चाहत ने डॉली से पूछा - क्या हुआ.. तेरा चेहरा इतना पीला कैसे पड़ गया है???

डॉली ने धीरे से कहा - मुझे.. आजीब लग रहा है. जैसे शरीर में जान ही ना हो.. ये उसने बेहद सुस्त होकर कहा था.. उसकी ऐसी आवाज़ सुन चाहत ने उसका हाथ पकड़ा फिर उसे कैंटीन ले आई वहा से चाहत ने डॉली को एक टेबल पर बिठाया।

चाहत वहा से उठ कर काउंटर के पास गई फिर उसने वहा से डॉली के लिए एनर्जी ड्रिंक और चॉकलेट ली। फिर ड्रिंक ले कर चाहत के पास अा गई। उसने डॉली को ड्रिंक पीने को दी फिर उसे चॉकलेट दिया । डॉली ने ड्रिंक पिया फिर चॉकलेट खाने लगी । चाहत ने उसे देखते हुए पूछा - क्या तुम ठीक हो..

तब डॉली ने कहा - हा मै अब ठीक हूं.. फिर डॉली ने मोबाइल पर देखते हुए कहा - तुम लेट हो रही हो.. चलो लाइब्रेरी जाओ..

चाहत ने उसकी बात सुन कहा - पर तुम्हे ऐसे छोड़ कर.. नहीं यार.. वो अपनी बात पूरी करती इससे पहले ही डॉली ने कहा - परसो ct है.. और आज हम लास्ट chapter करने वाले थे..and I think तुम्हे जाना चाहिए.. वरना इतने दिन की मेहनत वेस्ट हो जानी है..

चाहत ने फिर से कुछ कहना चाहा तो डॉली ने चाहत के हाथ में अपना हाथ रख कर कहा - जाओ.. मै ठीक हूं ...

डॉली की बात सुनकर चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया और अपना बैग पकड़ कर उठते हुए बोली - तुम्हे ठीक लगे तो ही.. बस में जाना वरना.. यही रुक कर मेरा इंतज़ार करना.. उसकी बात सुन डॉली ने हा में सिर हिला दिया।

चाहत वहा से बाहर आई और लाइब्रेरी की तरफ चले आई। उसने रिजिस्टर में एंट्री की फिर अन्दर अा गई। उसने नज़रे घुमाते हुए यहां वहा देखा तो इशांत उसे टेबल पर बैठा बुक पढ़ते हुए नजर आया चाहत उसके पास आई फिर उसने कहा - इशांत..

इशांत ने चेहरा उठा कर चाहत की तरफ देखा फिर कहा -

अरे चाहत .. आओ ना.. उसने पीछे देखते हुए कहा - डॉली.. वो कहा है..

चाहत ने ये सुन कहा - वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है तो.. वो आज नहीं अा पाएगी..

ये सुन इशांत ने कहा - अच्छा ठीक है.. फिर उसने सामने की तरफ हाथ बढ़ा कर कहा - बैठो ना... इशांत की बात सुन चाहत सामने चेयर पर बैठ गई।

अब दोनों लास्ट यूनिट को पढ़ने लगे जिससे रिलेटेड प्रॉब्लम्स दोनों ने मिल कर सॉल्व किए। प्रॉब्लम्स सॉल्व हो जाने के बाद डाउट्स देखे गए।ऐसे ही दो घंटों की मेहनत के बाद किसी तरह वो यूनिट कंपलीट हुआ चाहत और इशांत ने अब राहत की सांस ली।

चाहत ने पेन की कैप को लगाते हुए कहा - फाइनली.. ये कंपलीट हुआ..

फिर उसने इशांत की तरफ देखा फिर कहा - ऑल थैंक्स टू यू...

इशांत ने उसकी तरफ देखा फिर सीने पर हाथ रख सिर झुकाते हुए कहा - my pleasure... फिर हसने लगा।

उसकी इस हरकत पर चाहत मुस्कुरा दी।

चाहत चेयर से उठी फिर उसने अपने नोट बुक्स समेटने लगी तभी इशांत का मोबाइल वाइब्रेट होने लगा तो उसने मोबाइल को देखा । मोबाइल पर फ़्लैश होने वाले नाम को देख चाहत की आंखो का साइज बड़ा हो गया । चाहत अब सवालिया निगाहों से इशांत को देखने लगी।

इशांत जो खुद भी बुक्स समेट रहा था उसकी नजर भी वाइब्रेट होते हुए मोबाइल को देखा जिसमे " अध्यन " नाम फ़्लैश हो रहा था। जिसे देख इशांत ने मोबाइल उठाया फिर जैसे ही उसने नज़रे उठा कर सामने देखा तो चाहत उसे सवालिया नजरो से देख रही थी।

इशांत ने गहरी सांस ली फिर कॉल अटेंड कर चाहत की तरफ देखते हुए कहा - हा.. अध्यन.. इधर चाहत के दिल ने मानो धड़कना छोड़ दिया था।

दूसरी तरफ से अध्यन ने कुछ पूछा जिसे सुनते इशांत ने बुक पकड़ी फिर आगे बढ़ गया। चाहत भी उसके पीछे चलने लगी। उसने बाते सुनते हुए कहा - अध्यन एक मिनट होल्ड

करना...

तो दूसरी तरह से अध्यन ने कुछ कहा तो इशांत ने कहा - हा ये ठीक रहेगा.. ये बोल उसने कॉल कट कर दी। उसने मोबाइल एक हाथ में पकड़े रखा फिर लाइब्रेरियन के पास जाकर उसने साइन किया । उसने तिरछी नज़रों से चाहत को देखा जो उसे ही देख रही थी।

इशांत ने चाहत को साइन करने का इशारा किया चाहत ने उसकी बात सुन रिजिस्टर पर साइन कर दिया । दोनों थोड़ी देर बाद लाइब्रेरी से बाहर अा गए।

चाहत अभी भी इशांत को सवालिया नजरो से देख रही थी जिसे देख इशांत ने कहा - तुम्हारे सारे क्वेश्चंस के आंसर मै यहां नहीं दे पाऊंगा...

चाहत ने फिर से एक बार फिर इशांत को सवालिया नजरो से देखा तो इशांत ने कहा - चलो बास्केट बाल ग्राउंड चलते हैं...

इशांत के इतना कहते ही चाहत चुप हो गई। उसने मोबाइल निकाल कर डॉली को मेसेज कर कहा - तुम हॉस्टल चली जाओ.. मुझे देर होगी.. मै ऑटो से अा जाऊंगी.. और ये बात

राजू भैया ( बस का ड्राइवर ) को बता देना।

जिस पर थोड़े देर में डॉली का रिप्लाइ आया - ओके...

डॉली का रिप्लाइ देख चाहत ने इशांत की तरफ देखा फिर उसके पीछे चलने लगी।

दोनों अब ग्राउंड के पास अा गए थे।

चाहत अब इशांत को देखने लगी या यू कहे उसके बोलने का वेट करने लगी...

इशांत ने गहरी सांस ली फिर ग्राउंड के नजदीक लगे चेयर की तरफ इशारा किया और चाहत से कहा - यहां बैठो ..

चाहत अब भी इशांत को देख रही थी इशांत उसके पैर के पास बैठ गया फिर उसने कहा - चाहत...

चाहत ने अब इशांत की आंखो में देखना शुरू किया तो इशांत ने कहा - I love you...

I love you....

ये सुन कर चाहत ने कुछ नहीं कहा । कहती भी क्या.. वो बस इशांत को ही देखे जा रही थी। वहीं इशांत ने कुछ देर के लिए सिर झुका लिया । उसने चाहत के हाथो पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा - पता नहीं.. कब से मै ये सब फील करने लगा.. पर ट्रस्ट मी.. मैंने कभी भी अपनी फीलिंग्स तुम पर थोपने की कोशिश नहीं की... मैंने हमेशा से चाहा है कि तुम खुश रहो.. शायद इसीलिए.. ये बोल इशांत ने अपना सिर उठाया ।

इशांत के सिर उठाते ही चाहत ने इशांत की आंखो में देखा जिसमें अजीब तरह का दर्द था। वहीं इशांत को चाहत के चेहरे पर बस सवाल दिख रहा था मानो वो पूछना चाह रही हो। आखिर क्यों... इशांत चाहत के सवालिया नजरो को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने फिर से अपना सिर नीचे झुका लिया।
 
इशांत ने सिर झुकाए हुए ही कहा - शायद इसीलिए ही उस

दिन.. जब अध्यन मुझसे मिलने आया था... तो मैंने उसे मना नहीं किया.. क्युकी कहीं ना कहीं मै ये चाहता था.. की वो तुमसे दूर हो जाए...और तुम मेरे पास अा जाओ.. ये सुन चाहत हैरान रह गई और उसने इशांत के हाथो से अपना हाथ हटा लिया।

चाहत के हाथ हटाते ही इशांत ने उसे देखा फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा - हा चाहत.. अध्यन मुझसे मिलने आया था..जब तुमने काउन्सलिंग करवाई और तुम्हे ये कॉलेज अलॉट हुआ.. तो उसने मिनी से बात की जिससे उसे पता चला.. मै यहां इस कॉलेज में हूं.. तो वो मुझसे मिलने आया था.. ये बात बाद में मैंने मिनी से कन्फर्म की .. अध्यन ने ही मुझे तुम्हारे बारे में बताया.. उसने ही कहा मै तुम्हारी हेल्प करू.. जिसे सुन मैंने झट से हा कह दिया.. वजह तुम जानती हो.. मेरा तुम्हारे लिए प्यार.. जिसके कारण मै तुम्हे अपनी नज़रों के सामने रखना चाहता था.. यही मेरा स्वार्थ था.. मुझे अध्यन की बातो से ये तो पता चल गया था .. उसे जरूर कोई प्रॉब्लम है.. वरना वो तुम्हे ऐसे छोड़ दे.. ये इंपॉसिबल है.. पर मुझे इन बातो से कोई मतलब नहीं था.. मेरे लिए तो तुम्हारा पास होना मायने रखता था.. मैंने सोचा तुम अध्यन से दूर होगी तो उसे भूल जाओगी.. पर ये नहीं हुआ..

इतना कहने के बाद इशांत ने दर्द भरी मुस्कुराहट के साथ चाहत को देखा जिसके चेहरे पर अब सवाल नहीं था कहीं ना कहीं चाहत को अध्यन का उसके लिए फिक्रमंद होना अच्छा लग रहा था। ये चाहत के चेहरे पर अचानक आई चमक ने बता दिया था।

इशांत अब उठ कर चाहत के बगल में बैठ गया। उसने चाहत का हाथ छोड़ते हुए कहा - चाहत तुम्हे पता है.. जब मैंने अध्यन को कहा .. अगर चाहत ने तुम्हे भुला दिया तो .. ये सुन चाहत के चेहरे के भाव थोड़े देर के लिए बदले जिसे देख इशांत ने फिर से मुस्कुराते हुए कहा - तो.. उसने अपनी उंगली.. यहां.. ये बोल इशांत ने अपने सीने कि तरफ इशारा कर कहा - यहां रख कर कहा था.. की वो तुम्हारे यहां पर है.. तुमने उसे यहां जगह दी है.. तुम उसे भुला दो.. ऐसा तुम कभी नहीं करोगी.. और देखो ना उसका प्यार.. जीत गया .. और मै हार गया.. ये बोल इशांत ने एक बार फिर अपना सिर झुका लिया।

तभी इशांत का मोबाइल एक बार फिर वाइब्रेट हुआ । इशांत ने मोबाइल देखा तो कॉल अध्यन का था । इशांत ने सिर उठा कर चाहत की तरफ देखा तो चाहत ने मोबाइल इशांत के हाथ से ले लिया फिर उसे स्पीकर पर रख दिया।

दूसरी तरफ से अध्यन की आवाज़ आई - हेल्लो इशांत..

इशांत ने एक नजर चाहत पर डालते हुए कहा - हा.. अध्यन..

अध्यन ने दूसरी तरफ से कहा - कैसे है आप..??

इशांत - अच्छा हूं..

अध्यन - आपका एग्जाम था ना.. कैसा रहा..

इशांत - अच्छा गया..

अध्यन थोड़े देर के लिए शांत हो गया फिर उसने कहा - वो आपको थैंक्यू.. कहना था..

अध्यन के थैंक्यू से जितना चाहत हैरान थी उतना ही इशांत भी हैरान था उसने झट से कहा - थैंक्यू.. पर क्यों..??

अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा - वो मुझे चाहत से पता चला.. आपने उसकी हेल्प की किसी सब्जेक्ट में.. सो उसके लिए थैंक्यू..

इशांत और चाहत फिर एक बार हैरान रह गए इशांत ने झट से कहा - पर ये बात तुम्हे कैसे पता..?? तुम्हारी बात हुई चाहत से..??

अध्यन ने तुरंत कहा - नहीं.. वो चाहत ने अंश को बताया था.. जिससे मुझे भी पता चल गया.. जहा तक चाहत से बात

करने की बात है.. वो तो अब दो महीने बाद ही होगी..

इशांत ने ये सुन चाहत की तरफ देखा जो बस सुन रही थी पर उसके चेहरे के एक्सप्रेशन से ये लग रहा था जैसे वो इस बात को सुन कर खुश नहीं है। जिसे इशांत देखते ही समझ गया था।

फिर उसने अध्यन से कहा - पर क्यों.. मेरा मतलब है.. दो महीने बाद क्यों..??

अध्यन ने कहा - क्युकी अभी उसके ct है.. उसके बाद एग्जाम .. और मै हूं उसकी जिंदगी का कमजोर हिस्सा.. अगर मै अभी उसके पास गया तो.. वो कहीं ना कहीं कमजोर पड़ेगी.. और इसका इफेक्ट उसके एग्जाम पर पड़ेगा.. जो मै बिल्कुल भी नहीं चाहता..

इतना बोल अध्यन ने गहरी सांस ली फिर कहा - उसे खुद से दूर .. मैंने इसीलिए नहीं किया.. की वो अपना एग्जाम और अपना फ्यूचर ही खराब कर दे.. अभी उसे अच्छे से एग्जाम दिला लेने दो.. फिर मै उससे बात कर लूंगा.. इतना बोल अध्यन चुप हो गया।

इशांत ये सुन चुप हो गया वहीं चाहत को अध्यन की आवाज़ में सुनाई देने वाली फिक्र ही चाहत की आंखो को गीला करने के लिए काफी था। वहीं अध्यन का खुद पर विश्वास और चाहत के लिए प्यार देख कर इशांत को खुद पर शर्म अा रही थी उसे इस बात का बुरा लग रहा था कि आखिर क्यों.. क्यों..? उसने चाहत को अध्यन से दूर करने की बात सोची.. थोड़े देर तीनों के बीच ऐसे ही चुप्पी छाई रही।

तभी अध्यन ने कहा - हेल्लो.. इशांत..

इशांत जो खुद में ही गुम था। उसने अध्यन की आवाज़ सुन कर कहा - हा अध्यन..

तो अध्यन ने कहा - आप बस दो महीने मेरी चाहत का ध्यान और रख लो.. उसके बाद .. मै हूं उसके लिए.. मुझे पता है.. आपको भी कितना बुरा लगता होगा.. अपने प्यार के सामने होते हुए भी.. उससे अपने दिल की बात ना कह पाना.. तकलीफ में तो आप भी होगे.. बस दो महीने और रुक जाइए.. फिर सब ठीक कर दूंगा मै..

इस पर इशांत ने एक नजर चाहत को देखा जिसकी आंखो में अध्यन के लिए प्यार के साथ एक अलग तरह का गर्व दिख रहा था मानो वो इशांत को कहना चाह रही हो "देखा ये है मेरा प्यार जिसे दूसरो कि फीलिंग्स की कद्र है" इशांत अध्यन

कर लिया था उसने कहा - आप पहले चुप हो जाइए..प्लीज़.. चाहत की खातिर.. थोड़े देर के लिए चुप हो जाइए... ये सुन इशांत शांत हो गया। अध्यन ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - आपको क्या लगता है.. आपने ये जो कुछ भी अभी कहा.. वो मुझे पता नहीं होगा.. मै पहले दिन से ये बात जानता था.. अब एक बार फिर इशांत और चाहत हैरान रह गए। उन्होंने झटके से एक दूसरे को देखने लगे।

अध्यन ने कहा - क्या हुआ.. इतना शॉक्ड होने की जरूरत नहीं.. आपकी जगह कोई भी होता .. शायद वो भी यही सोचता .. तो जो भी अपने सोचा वो गलत नहीं है.. अपने प्यार को पाने की कोशिश हर कोई करता है.. आपने भी की.. इसमें कुछ गलत नहीं है.. पर ...

ये बोल अध्यन ने मुस्कुरा कर कहा - पर चाहत के दिल से मुझे निकालना.. इतना आसान नहीं..

ये सुन इतने देर बाद चाहत और इशांत के चेहरे पर मुस्कान आई । अध्यन ने कहा - तो.. आप हो .. या कोई भी..कुछ भी कर ले.. ना उसके दिल से मै बाहर जाऊंगा.. ना वो मेरे दिल से बाहर जाएगी.. चाहे सिचुएशन कितनी भी खराब क्यों ना हो.. और रही आपकी सॉरी की बात .. तो मुझे इस बात का जरा सा भी बुरा नहीं लगा..

के शब्दों से जमीन में गड़ा जा रहा था। उसने बा मुश्किल से कहा - अध्यन थोड़ा बिजी हूं.. बाद में बात करते है..

दूसरी तरफ से अध्यन ने भी कहा - हा.. मै तो भूल ही गया था.. बाय.. ये बोल अध्यन कॉल कट करने ही वाला था तभी इशांत ने कहा - अध्यन.. अध्यन रुक गया। फिर उसने कहा - हा..

इशांत ने तुरंत कहा - I'm sorry..

अध्यन ने ये सुन कर कहा - सॉरी पर क्यों.. ??

इशांत ने खुद को संभालते हुए कहा - जब तुमने मुझे चाहत का ख्याल रखने को कहा था.. तब मुझे लगा था.. शायद अब मै चाहत को तुमसे दूर कर दूंगा.. पर मै गलत था.. ये बोल इशांत ने भरी आंखो से चाहत को देखा जो उसे ही देख रही थी। फिर इशांत ने कहा - और तुम सही.. वो तुमसे कभी दूर नहीं हो सकती ... कभी नहीं.. क्युकी वो भी तुमसे बेइंतेहा प्यार करती है.. इतना बोलते ही इशांत के आंखो से आंसु छलक पड़े। चाहत भी इशांत को देखने लगी उसे इशांत की तकलीफ का अंदाज़ा हो गया था पर उसने खामोश रहना ही जरूरी समझा।

अध्यन ने इशांत की आवाज़ में आए भारीपन को महसूस

इशांत ने ये सुन कहा - बहुत प्यार करते हो ना उससे..

इस पर अध्यन ने कहा - बहुत नहीं.. बहुत से भी ज्यादा.. बहुत बहुत.. ज्यादा प्यार.. वजह है वो मेरे होने की.. अगर वो नहीं तो मै नहीं.. आपको पता है.. पहले मुझे लगता था .. प्यार जैसी कोई चीज नहीं होती.. सब फालतू की बाते पर.. जब से मैंने चाहत को देखा है.. तब से मुझे इस प्यार पर यकीन हो गया.. इतना सुन इशांत ने चाहत की तरफ देखा जिसने कोई भाव अपने चेहरे पर आने नहीं दिए बस अपना सिर झुका लिया था..

इशांत ने चाहत को ऐसे देख फिर से अध्यन से पूछा - इतना प्यार कब हुआ.. उससे..??

अध्यन ने कहा - पता नहीं.. बस हो गया... उसके साथ रहते हुए ही.. पता ही नहीं चला.. कब प्यार हो गया.. ये बोल अध्यन ने चहकते हुए कहा - आपको पता है.. पहली बार जब मैंने उसे देखा था तब से ही वो मुझे पसंद अा गई थी.. उसके साथ रहते हुए मुझे उसे जानने का मौका मिला.. शायद तब से ही वो मेरे दिल में बस गई थी.. और ऐसे बसी है.. की अब कोई उसके अलावा .. इस दिल में अा ही नहीं सकती.. मै खुद उसके अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं पाता.. ये बोल अध्यन ने गहरी सांस ली। जहा अपने दिल की बात कह अध्यन मुस्कुरा रहा था। साथ ही उसकी आंखे भी गीली हो गई थी।

वहीं चाहत के चेहरे पर दर्द भारी मुस्कान थी। पर उसकी आंखो ने अब भी बहना बंद नहीं किया था। तभी अध्यन ने खुद को संयत कर कहा - मै भी ना.. कहा से कहा पहुंच गया.. आपको जाना था ना.. आप जाइए.. बाय.. जिसे सुन इशांत ने भी बाय कहा फिर कॉल कट हो गई।

अब इशांत ने चाहत को देखा जो अपने आंखो में आए हुए आंसुओ को साफ कर रही थी इशांत ने उसे ऐसे देख कर कहा - चाहत तुम.. क्या तुम ठीक हो..

जिसे सुन चाहत ने सिर उठा कर इशांत को देखा । चाहत के सिर उठाते ही इशांत शॉक्ड रह गया चाहत का पूरा चेहरा आंसुओ से भरा हुआ था। उसकी आंखे लाल हो गई थी। जिसे देख इशांत ने घबरा गया उसने चाहत को देखते हुए लड़खड़ाती जुबान में कहा - तुम.. तुम ठीक तो हो ना..

चाहत ने एक पल इशांत को देखा फिर फफक कर रो पड़ी उसने रोते हुए कहा - मुझे देखो इशांत.. क्या मै इतनी खास हूं.. जिसके लिए वहा वो इतनी दूर होते हुए भी.. फिक्र कर रहा है.. मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया.. जितनी भी खुशी.. उसने मुझे दी है..उसका एक percent भी मैंने उसे नहीं

दिया.. फिर भी वो मेरे लिए इतना कुछ कर रहा है.. मै बहुत बुरी हूं इशांत.. मैंने कभी भी उसे.. और उसके प्यार को नहीं समझा.. दिल हमेशा उसके साथ था.. पर दिमाग ने कभी भी.. उसे सही नहीं समझा.. हर बार मैंने उसे गलत समझा.. ये बोल चाहत फिर से रोने लगी । उसे रोता देख इशांत को बहुत बुरा लग रहा था।

उसने चाहत का हाथ पकड़ते हुए कहा - नहीं..चाहत.. तुम बुरी नहीं हो.. अगर ऐसा होता तो तुम.. यहां उसके लिए रो नहीं रही होती.. तुम्हे ये बात पहले ही पता थी.. तभी तो तुमने कभी भी उसे खुद से दूर नहीं होने दिया.. क्युकी कही ना कही तुम भी ये जानती थी.. की अगर उसने ये किया है.. तो इसके पीछे कोई ना कोई वजह जरूर होगी.. खुद को ब्लेम करना बंद करो.. और बस इंतजार करो.. अध्यन खुद से आकर .. तुमसे बात करेगा..

इशांत की बात सुन चाहत ने उसे देखा फिर चाहत ने अपने आंसु पोछे फिर कहा - आपको पता है.. इशांत .. मुझे पहले से ही पता था.. की आप मुझे पसंद करते है.. ये सुन इशांत को फिर झटका लगा तो उसने कहा - यार तुम दोनों..ये बोल वो थोड़े देर के लिए रुक गया फिर उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - तुम दोनों ने मिल कर मुझे हार्ट अटैक ही दे

देनी है..एक दिन.. ये सुन चाहत मुस्कुरा दी।

उसे इतने देर बाद मुस्कुराते देख इशांत को चैन मिला उसने फिर मुस्कुराते हुए कहा - वैसे.. ये तुम्हे कैसे पता चला ..??

चाहत ने कहा - अध्यन की डायरी.. जिसमे उसने मेरे बारे में लिखा है.. उस डायरी में आपका भी जिक्र उसने किया है.. आपसे लगी शर्त.. से लेकर.. आपका स्कूल में लास्ट डे आना.. और मुझसे मिलने के बाद.. हुई अध्यन से बात.. इन सभी बातों का जिक्र अध्यन ने उस डायरी में किया है.. ये बोल चाहत ने इशांत की तरफ देखा जो मुंह खोले उसे ही देख रहा था।

उसे ऐसे देख चाहत ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - मुझे हमेशा से ये बात पता थी.. पर मैंने सोचा.. जब आपने खुद को इतने दिनों तक रोक कर रखा है.. तो मै क्यों कुछ कहूं.. इसीलिए मैंने कभी भी आपके सामने ये बात जाहिर नहीं होने दी.. और आपने खुद भी कभी.. अपनी हदे पार नहीं की.. ना ही आज से पहले.. मुझे ये महसूस करवाया.. तो मुझे भी जरूरत महसूस नहीं हुई.. आपको कुछ कहने की..

चाहत ने इतना कहा जिसे सुन इशांत ने सिर झुका कर कहा - क्या.. तुम.. क्या तुम.. मुझसे नाराज़ हो..??

चाहत ने इशांत की तरफ देखा फिर कहा - नहीं.. अध्यन ने जो कुछ भी कहा वो मुझे अच्छे से याद है.. उसने कहा था.. अगर आपकी जगह कोई भी होता तो यही करता.. और मुझे भी यही लगता है.. अपने कुछ गलत नहीं किया.. हर इंसान अपनी आखिरी सांस तक कोशिश करता है.. अपने प्यार को पाने की.. और अपने भी वहीं किया है.. इसमें कुछ गलत नहीं..

इतना कह कर चाहत ने मोबाइल पर टाइम देखते हुए कहा - बहुत देर हो गई है.. अब मुझे चलना चाहिए.. वरना ऑटो नहीं मिलेगी.. ये बोल वो चेयर से उठ गई।

तभी इशांत ने चाहत से कहा - ऑटो से मत जाओ.. मै तुम्हे छोड़ देता हूं..

इशांत के इतना कहते ही चाहत ने झट से कहा - नहीं.. मै चली जाऊंगी .. आप फिक्र ना करे.. आपको और भी कम होंगे..

जिसे सुन इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - अरे ऐसे कैसे.. अभी तुमने सुना नहीं.. अध्यन ने क्या कहा है.. बस दो महीनों तक मुझे तुम्हारा ख्याल रखना है.. तो ज्यादा ना नुकुर ना करो..

और चलो मेरे साथ.. चाहत ने इशांत की बात सुनी फिर हाथ जोड़ कर मुस्कुराते हुए बोली - जो हुकुम .. मेरे सीनियर..

उसकी इस हरकत पर इशांत भी मुस्कुरा दिया। इसके बाद दोनों चलते हुए पार्किंग एरिया में आए। उन्होंने देखा शाम हो चली है साथ ही हल्का अधेरा भी हो चुका है। ठंडी हवा चल रही है जिससे ठंडक का अहसास भी हो रहा था।

जिसे देख इशांत ने चाहत को देखा जो एक साइड बैग लटकाए अपने हाथो को आपस में रगड़ रही थी। उसे देख इशांत ने अपना जैकेट बाइक की डिक्की से निकाला और चाहत को देते हुए कहा - इसे पहन लो.. ठंड कम लगेगी.. चाहत ने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला वैसे ही इशांत ने कहा - अब ना मत कहना.. प्लीज.. नहीं तो मै अध्यन को .. आज जो भी हुआ वो बता दूंगा..

चाहत ने इशांत की बात सुनी फिर उसने मुस्कुराते हुए जैकेट लिया फिर कहा - नहीं मै मना.. नहीं करने वाली थी.. बल्कि ये कहने वाली थी.. अगर मैंने ये पहन लिया.. तो आप क्या पहनेंगे.. आपको ठंड नहीं लगेगी..

इशांत ने उसकी बात सुनी फिर कहा - नहीं .. मुझे आदत है.. ये बोल उसने अपनी बाइक पार्किंग से निकाल ली । बाइक पर बैठ कर इशांत ने बाइक स्टार्ट कर के कहा - चले..

चाहत ने भी हा कहा और बाइक पर बैठ गई। बाइक ने रफ्तार पकड़ी। थोड़े देर में इशांत और चाहत रोड पर थे ।
 
इशांत और चाहत रोड पर शांति से चल रहे थे। इशांत ने बैंक मिरर से देखा तो चाहत बड़ी ही मासूमियत से रास्तों को देखते हुए बैठी थी। एक अलग ही तरह की शांति थी चाहत के चेहरे को देख कर इशांत ने मन ही मन सोचते हुए कहा - तुम बहुत ज्यादा साफ हो.. और प्यारी भी.. एक ऐसा हीरा.. जो बस किसी जौहरी के पास ही सलामत रह सकता है.. और आज मुझे यकीन हो गया है.. की वो जौहरी मै नहीं हूं..

ये सोच इशांत ने बाइक टर्न की फिर से उसने मन में कहा - अध्यन.. अध्यन ही वो जोहरी है.. जो तुम्हारे जैसे हीरे को संभाल कर रख सकता है.. और जहा तक मेरी बात है.. मै शायद तुम्हारे प्यार के काबिल नहीं हूं.. पर.. फिर गहरी सांस लेकर इशांत ने कहा - पर.. मैंने पहली बार किसी से प्यार किया है.. और वो तुम हो.. ये प्यार ताउम्र ऐसे ही बना रहेगा.. कभी ख़तम नहीं होगा..

ऐसे ही सोचते हुए चाहत का हॉस्टल अा गया। जिसे देख इशांत ने अपनी बाइक रोक दी। चाहत भी बाइक से उतरी । उसने बाइक से उतर कर इशांत की तरफ देखा फिर बाय कर वापस जाने लगी।

उसे जाता देख इशांत ने चाहत को आवाज़ लगाते हुए कहा - चाहत ..

चाहत ने मूड कर इशांत को देखा वो उसके पास आई तो इशांत ने कहा - अपना ख्याल रखना..

चाहत ने उसे देख मुस्कुराते हुए कहा - आप भी..

ये बोल चाहत मूड गई और हॉस्टल के गेट के पास जाकर एक बार फिर मूड कर इशांत को देखा फिर हाथ हिला कर इशांत को बाय बोला और अंदर चले गई।

इशांत उसे जाते हुए देखता रहा फिर उसने कहा - i always love you.. चाहे कुछ भी हो.. ये प्यार कभी ख़तम नहीं होगा.. कभी भी नहीं..

ये बोल उसने बाइक घुमा ली.. और अपनी मंजिल की तरफ चले गया..

चाहत थके कदमों से रूम अा गई। उसने अपना बैग साइड में रखा फिर वो वॉशरूम फ्रेश होने चले गई। चाहत जैसे ही वाशरूम से बाहर आई वैसे ही उसकी नजर बेड पर गई। जहा डॉली पैर फैलाए बैठी उसका ही इंतज़ार कर रही थी। चाहत ने एक नजर डॉली को देखा फिर टॉवेल साइड में रखा ।

डॉली ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोला वैसे ही बेल बजी डॉली समझ गई थी। ये बेल चाय की है उसने चाहत का काफी मग लिया और चाय लेने चले गई। वहीं चाहत ने अपने कपड़े बदले और बेड पर बैठ गई।

थोड़े देर में डॉली भी अा गई। जिसे देख चाहत ने अलमारी से टोस्ट निकले फिर दोनों बैठ कर टोस्ट खाने लगे। चाहत

हमेशा की तरह खामोशी से टोस्ट खा रही थी। वहीं डॉली की बक बक जारी थी। चाहत उसकी बातो को सुन कर बस हा, हूं में सिर हिला रही थी।

थोड़ी देर ऐसे ही बात कर लेने के बाद जब चाहत से रहा नहीं गया तो उसने डॉली को रोकने का सोचा । चाहत ने कहा - डॉली वो...

चाहत के अचानक ऐसे कहने से डॉली चुप हो गई वो चाहत की तरफ देखने लगी। तो चाहत ने जैसे ही कुछ कहने के मुंह खोला।

तभी चाहत का मोबाइल बजने लगा । चाहत ने एक नज़र डॉली को देखा जो इसके मोबाइल की तरफ ही देख रही थी । चाहत ने मोबाइल देखा फिर लपक के मोबाइल ले लिया।

चाहत ने मोबाइल कान से लगा लिया ।

दूसरी तरफ से आवाज़ आई - हेलो चाहत बेटा..

आवाज़ रीमा जी की थी जिसे सुन चाहत को भी अच्छा लगा। क्युकी वो पहले से ही परेशान थी वजह थीं आज होने वाली चीज़े।

चाहत ने जैसे ही रीमा जी की आवाज़ को सुना चाहत की आधी टेंशन तो दूर हो गई उसने मोबाइल कान से लगाए हुए कहा - हा मम्मी..

दूसरी तरफ से रीमा जी - तुम ठीक हो..

चाहत ने बेड से उठते हुए कहा - हा मम्मी मै ठीक हूं... आप बताओ..

रीमा जी ने सांस लेते हुए कहा - मै भी ठीक हूं.. वो पता नहीं क्यों.. अजीब सी बेचैनी हो रही थी.. सुबह से ... तुम्हे देखने का मन कर रहा था..

"ये मा भी ना ऐसी ही होती है.. पता नहीं कैसे.. पर उनहे अपने बच्चो की तकलीफ पहले ही महसूस हो जाती है .. पता नहीं कौन सा जीपीएस होता है इनके पास जो बच्चे की हर तकलीफ को बिना बोले ही पहचान लेती है ... "

चाहत ने जैसे ही ये सुना तो उसने कहा - अरे मम्मी..आप ना फिक्र ना करो.. आप अपना और आर्यन का ख्याल रखो.. मै वैसे भी एग्जाम के बाद अा जाऊंगी..

चाहत की बात सुन रीमा जी ने कहा - कब है एग्जाम..??

चाहत ने उनकी बात सुन कहा - अभी 3 दिन तो ct ही

चलेंगे.. फिर उसके 15 दिन बाद एग्जाम है.. और ये एग्जाम भी 2 महीनों में ख़तम हो जायेंगे.. फिर मै घर अा जाऊंगी..

रीमा जी को चाहत की बात सुन कर अच्छा लगा उन्होंने चहकते हुए कहा - ये तो बहुत अच्छी बात है..फिर वो चुप हो गई जिसे महसूस कर चाहत ने कहा - हेल्लो.. हेल्लो मम्मी...

जिसे सुन रीमा जी ने कहा - हा बेटू.. सुन रही हूं.. फिर उन्होंने कहा - जल्दी आना बेटा.. बहुत दिन हो गए तुम्हे देखे.. अब रीमा जी आवाज़ भारी होने लगी थी। जिसे सुन चाहत को भी बुरा लगा ।

चाहत ने झट से कहा - हा मेरी मम्मा.. मै जल्दी से अा जाऊंगी.. फिर हम दोनों खूब मस्ती करेंगे..आप देर सारा खाना बनाना जिसे मै अकेले खाऊंगी.. और हा मै आपके सामने ही बैठ जाऊंगी.. आप जी भर कर मुझे देख लेना.. ठीक है.. ये बोल चाहत हसने लगी।

चाहत की बात सुन कर रीमा की के चेहरे पर मुस्कान अा गई । उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - हट.. बदमाश बच्चा..

चाहत को रीमा जी की चहकती हुई आवाज़ सुन कर अच्छा लगा वो यही तो चाहती थी कि किसी तरह से रीमा जी का

मूड ठीक हो जाए । चाहत ने फिर रीमा जी कुछ देर ऐसे ही बाते की । फिर उसने बाय कह कर कॉल कट कर दी।

चाहत जब तक नीचे आई तब तक डिनर का टाइम हो गया था। डॉली और निशा गेट बंद कर के चाहत का ही वेट कर रहे थे। चाहत ने मोबाइल अपनी लोअर के जेब में रखा फिर निशा और डॉली के साथ नीचे अा गई। आज आलू मटर की सब्जी बनी हुई थी।

चाहत , निशा और डॉली सभी चेयर पर बैठ गए। तीनो खाना खाने लगे। डॉली ने तो खाते ही मुंह बना लिया यही हाल निशा का भी था । सब्जी काफी फीकी थी जिसके कारण मिर्ची ज्यादा लग रही थी। निशा और डॉली ने पानी पीते हुए खाना खाना जारी रखा। किसी तरह डॉली और निशा खाना खाने लगे। ठीक ऐसे ही खाते हुए डॉली ने चाहत को देखा जो बिना किसी दिक्कत के खाना खा रही थी। डॉली थोड़ी देर के लिए शॉक्ड हो गई। क्योंकि चाहत को मिर्ची बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती फिर भी आज वो बिना किसी दिक्कत के खाना खा रही थी।

डॉली चाहत को देख रही थी जिसका चेहरा लाल हो चुका था पर जैसे चाहत को इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा

था। चाहत ने जल्दी खाना ख़तम किया और चेयर से उठ गई। उसने प्लेट साफ की फिर सीढ़ियों से होते हुए रूम की तरफ बढ़ गई।

डॉली और निशा ने उसे सीढ़ियों की तरफ जाते हुए देखा डॉली को यहां फिर हैरानी हुई क्युकी आज से पहले चाहत ने ऐसा कभी नहीं किया था हा उसकी आदत थी जल्दी खाने की पर चाहत वहीं रुक कर डॉली और निशा का इंतज़ार करती थी। पर आज उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

डॉली ये सोच ही रही थी तभी उसके बगल में बैठी शिखा ने उसे कंधो से झटका दिया। जिससे डॉली अपने होश में आई। उसने पलट कर शिखा की तरफ देखा जो उसे खाने को कह रही थी। डॉली ने शिखा की तरफ देख कर मुस्कुरा दी। बदले में वो भी मुस्कुरा दी। डॉली ने अपना खाना जल्दी ख़तम किया।

डॉली और निशा अब चाहत के रूम की तरफ अा गए। जब दोनों चाहत के रूम आए तो उन्होंने देखा चाहत बिस्तर लगा रही है।

जिसे देख डॉली ने कहा - क्या हुआ चाहत.. आज इतनी जल्दी सो रही हो.. अभी तो 9:30 ही हुए है...

चाहत ने बिस्तर पर बैठते हुए ही कहा - हा .. आज कॉलेज में मुझे बहुत लेट हो गया था.. तो मै काफी थक गई हूं .. इसीलिए जल्दी सो रही हूं.. ये बोल चाहत बेड पर बैठ गई और सोने को हुई।

जिसे देख डॉली उसके पास आई उसने चाहत को कंधो से पकड़ कर बेड पर लिटाया फिर कहा - ठीक है .. वैसे भी कल कॉलेज कोई नहीं जा रहा.. तुम आराम कर लो.. ये बोल डॉली ने चाहत को ब्लैंकेट ओढ़ाया फिर बोली - गुड नाईट.. मिसेज शर्मा..

डॉली के मुंह से मिसेज शर्मा सुन कर चाहत मुस्कुरा दी उसने ब्लैंकेट सिर तक तान लिया। जिसे देख निशा ने डॉली से कहा - क्या अब तुम भी सोने वाली हो..

डॉली ने उसके कंधो पर अपना हाथ रख कर कहा - नहीं मेरी जान .. अभी कहा.. हम तो तब सोते है.. जब पूरा हॉस्टल सो जाता है.. ये बोल डॉली ने अपनी आई विंक कर दी।

जिसे सुन निशा ने कहा - तो क्या मै तुम्हारे रूम में पढ़ सकती हूं.. वो चाहत यहां सो रही है... तो मै उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती.. निशा ने कहा तो डॉली को बहुत ज्यादा अच्छा लगा उसे निशा का चाहत का फिक्र करना अच्छा लग रहा था। उसने निशा को देखते हुए कहा - नेकी और पूछ

पूछ... चलो जान.. जैसे ही डॉली ने ये कहा तो निशा ने जल्दी से अपने बुक्स को पकड़ा फिर लाइट ऑफ कर उसने दरवाजा बंद कर दिया।

चाहत जो ब्लैंकेट ओढ़े सोई थी उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान अा गई। जब चाहत को यकीन हो गया कि निशा और डॉली वहा से चले गए है तब उसने झट से अपना ब्लैंकेट हटाया उसने पास पड़ा मोबाइल उठाया फिर गैलरी खोल कर कुछ फोटोज देखने लगी।

उसे उसकी ओर अध्यन की एक फोटो मिली जिसे देख चाहत की आंखे एक बार फिर से भीगने लगी । वो बहुत देर तक यूं ही रोती रही फिर उसने मोबाइल को अपने तकिए साइड में रखा फिर कुछ सोचते हुए सो गई।
 
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