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Romance अनमोल अहसास

" विनाश ...!!" डॉली ने तेज आवाज में उसे डपट दिया, " इस तरह से नही बोलते हैं!!"

"तो बच्चों को भी इस तरह सबके सामने नही डांटते हैं..! अकेले में समझा सकती हैं आप..!!" राज भी अब तुरंत तेज आवाज में बोला।

"मेरा बच्चा है , डाँटूं या कुछ भी करूँ..?" डॉली भी तुरंत बोली, जबकि जस्सी उसका हाथ दबा रही थी।

" ऐसा है क्या..??"

" हां है.!!"

" तो बस इतना कि मेरा घर है.., यहाँ ऐसा करने की अनुमति नही है आपको!" राज उसके सामने जाकर धीरे से बोला और रूम से बाहर निकल गया।

डॉली उसके चले जाने की दिशा में घूरने लगी तो आज राज ने भी पहली बार पलटकर नाराजगी भरी निगाहों से उसकी तरफ देखा!

"डॉली जूस ला दो बच्चे! दवाइयों से मुँह कड़वा हो जाएगा तो जूस पी लूँगी!" सुभद्रा देवी ने जल्दी से कहा।

डॉली विनाश का हाथ पकड़कर अपने साथ ही ले गयी तो जैस्मिन

अंदर आते हुए बोली, " देखा दादी जी! कितनी गहरी खाई है इनके बीच?"

" नजरिये का फर्क है बच्चे! मैं खाई नही पुल देख रही हूँ!! विनाश वो पुल है जो इस खाई को पाट देगा!"

समीर अब बोल उठा, "इतना आसान नही दादी! राज बहुत मजबूत है, जहां तक मैं उसे जानता हूँ, वो अगर जान भी जाएगा न कि उसे डॉली से प्यार हो गया तो भी वो इस बात को मानेगा नही, फीलींग्स को जल्दी जाहिर करने वालो में से वो कभी रहा ही नही!!"

डॉली जूस तैयार करने लगी तो विनाश चुपके से भागकर उस तरफ चला गया जिधर राज गया था!

राज जब अपनी बात कहने कभी कभार उसके करीब आता था तो उस से उठती महक डॉली के मन मे कुछ अलग सा ही अहसास जगाने का काम करती थी इसलिए वो राज से दूर भागने को बेचैन रहती थी!! खुद पर भी गुस्सा होती कि क्या होता है कभी कभी..! रुकना होगा , पीछे हटना होगा ऐसी हर बात से, हर अहसास से! अपना दायरा नही लांघ सकती मैं...!!"

उधर राज खिड़की के पास खड़ा हो गया और शर्ट के ऊपर के बटन खोलते हुए पल भर को आँख बंद करके मन ही मन बोला, " क्या कह दिया था मैने..? बात तो संभाल ली लेकिन कहना नही चाहिए था!! उसके सामने ही ऐसा कैसे कह सकता हूँ मैं..? भाव बढ़ जाएंगे उसके तो..!! झुकती तो वैसे भी नही है वो लेकिन ये जाहिर होने पर तो लहजा और ज्यादा बदल जायेगा!"

" आप मुझसे बात करेंगे या आप भी नाराज हैं मेरी बात से..??" विनाश की आवाज आई तो राज उसकी तरफ पलटा और बोला, " मैं जरा भी नाराज नही हूँ आपसे..!"

" मम्मा क्यों नाराज है? मैं तो उनके ही बारे में सोच रहा था न??"

" हम्म! आपसे नही, अपनी सिचुएशन से नाराज हैं आपकी मम्मा!"

" ये सिचुएशन कब ठीक होगी..?"

" जल्दी हो जाएगी..!! आप खेलने कूदने पर ध्यान दीजिए, बच्चे इतने गम्भीर अच्छे नही लगते..!!"

"अच्छा..! पर मम्मा तो कहती है कि पढूँगा लिखूंगा तब सिचुएशन बदलेगी, फिर तो बहुत ज्यादा वक्त लगेगा न!"

" छोड़िये ये सब! ये बताइये की आपका घूमने का मन होता है तो पापा कहीं ले नही जाते...?"

" पापा तो है ही नही न..! मैंने तो कभी पापा को देखा ही नही है!" विनाश बोला तो राज हैरानी से उसे देखने लगा, " मतलब..!!" उसके मुंह से निकला।

"मतलब पापा को तो अभी ढूंढ रहा हूँ , जो मम्मा को घुमाएंगे औऱ मुझे भी!" विनाश मासूमियत से बोला।

राज ने अब असमंजस से अपने बालों में हाथ फेरा और मन ही मन बोला, " वो कहती है कि हसबैंड इसी शहर में है, मैंने खुद देखा है, समीर ने भी देखा और इस बच्चे ने कभी पापा नही देखे....! ये कैसी पहेली है...?"

" बेबी...!! विनाश ..!!" डॉली ने अब उसे गायब देखकर आवाज दी तो विनाश ने आवाज दे दी!

" यहाँ क्या कर रहे हो..? इनसे दूर रहा करो..!" डॉली फौरन बोली।

विनाश डॉली की तरफ चला गया तो राज बोला, " आप अपनी मासी के पास जाइये विनाश ! मुझे आपकी मम्मा से बात करनी है!"

विनाश ऊपर चला गया तो डॉली भी जाने को हुई लेकिन राज ने टोक दिया, " बात करनी है आपसे.!!"

" मुझे नही करनी..!!"

" ऐसा है क्या..??"

" हां , ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि बात सुने बिना आपको जाने नही दूँगा!!"

डॉली ने फिर भी कदम बढ़ा दिया तो राज ने अचानक तेजी से

बढ़कर दरवाजा को धक्का दे दिया और डॉली के सामने बन्द दरवाजे से टिक गया..!!

डॉली उसे घूरने लगी तो वह जेब मे हाथ रखते हुए बोला, " पहली बात तो मुझमें कांटे नही लगे और दूसरा ये की आप हमारी आपसी टकराहट के बीच बच्चे को न घसीटे! वो बहुत छोटा है अभी!!"

" मेरे बच्चे के बारे में मैं खुद सोच सकती हूँ!"

"ऐसा है...!! तो बताओ उसे की उसका बाप कहाँ है, खुद के अरमान पूरे करती हो , सरे राह उससे लिपटती हो, और वो बच्चा खेलने की उम्र में अपने उस पापा को ढूंढता फिर रहा है, जिसे उसने कभी देखा ही नही!"

" मिस्टर शर्मा ...!! पहले भी कहा है कुछ जानते नहीं तो बोलने की जरूरत नही...!! और कोई लिपटे मुझसे आपको क्या..? आपका जी कर रहा है लिपटने का..??" डॉली अब गुस्से से बोली।

" एक और शब्द नही..!! मैं कोई ऑक्टोपस नही जो तुमसे लिपटने आऊंगा...!! और खुद की आंखों से देखा था उस रोज रोड पर उस आदमी की....!!" राज ने बात अधूरी छोड़ दी और दूसरी तरफ मुँह फेर लिया।

डॉली ने उसकी पीठ देखते हुए कहा, " मैं भी कोई बेल नही हूँ कि किसी से भी लिपटती फिरूँ..!! ठंड लगने पर भी मैं खुद ही खुद की बाहों में अपने आप को लपेट लेती हूं, किसी और से लिपटने की

जरूरत नही मुझे!! वैसे भी माँग भरते ही दिल भी भर जाता है मर्दों का, फिर तो कोई और चाहिए होती है।"

राज अब उसकी तरफ पलटा, पहली बार डॉली की आवाज में हमेशा सा उफान नही था बल्कि अजीब सी गहराई थी!

वह आगे बोली, " जहां तक बात मेरे बच्चे की है तो वो आगे जाकर सब समझने लगेगा, अभी के लिए आप इतना जान लीजिए कि मेरे पति के साथ रिश्ते पर पूर्ण विराम कब का लग चुका है...! और मैं नही चाहती कि जिंदगी के किसी भी मोड़ पर विनाश कभी भी उस आदमी को देखे या मिले..!!

उसे छोड़ दिया मैंने , जैस्मिन के साथ रहती हूं...!! छोड़ी हुई औरत या छोड़कर आयी हुई औरत समाज से दो ही चीजे हासिल करती है- तिरस्कार और बहिष्कार।

हमारी उपलब्धियों पर तालियाँ और शाबाशियाँ नही मिलती, लोगो की टटोलती नजरे मिलती है जो ये कहती हैं की हमने ये उपलब्धि अपना शरीर किसी के लिए बिछाकर पाया है!!

आपको मेरे पलटकर जवाब देने से दिक्कत होती है न तो यही वजह समझ लीजिए मेरे आपसे बहस की...! क्योंकि मैं कोई वजह नही देना चाहती कि आप मेरे करीब आयें.... या आपके मन को मैं भा जाऊँ..!"

"और आपका क्या....? अगर मैं आपको भा जाऊँ तो...!!"

"ये दिन कभी नही आएगा!!" कहते हुए डॉली दरवाजा खोलकर जाने को हुई तो राज पीछे से बोला, " सवालों से भागो मत, खुद को

निडर कहती हो न......!! लेकिन अब तुम अपने ही जज्बातों से डर रही हो, निगाह मिलाकर बात करने से डर रही हो, इसलिए भाग रही हो!

क्या लगता है तुम्हे मैं तुम्हारे काबिल नही? क्यों डरती हो मुझसे मोहब्बत होने से? मेरे मन को भाने से...??"

डॉली बिना पलटे ही बोली, " क्योंकि मेरा एकाकीपन मेरे लिए बहुत है, इसमें प्यार के लिये कोई जगह नही है।"

राज भी बोल उठा , " जो तुम्हे छोड़ गए..... या फिर जिन्हें तुम छोड़ आयी हो, उनके लिए दूसरों को और खुद को सजा क्यों देना....? जब लौटकर जाना नही है तो आगे क्यों नही बढ़ती.....? अगर दिल किसी के लिये बेकरार होता है तो होने नही देती...? किसी खास को देखकर दिल बेतहाशा जब धड़कता है तो फिर बेकाबू धड़कनों को अनदेखा कर देना सही है क्या..??"

" ऐसे अहसासों पर जाया करने के लिए वक़्त नही मेरे पास!!" डॉली बोली और बाहर निकलने को हुई तो राज बोला, " तो आप कहना चाह रही है कि आप मुझे अनदेखा करने की हैसियत रखती हैं....!!"

डॉली अब रुकी और पलटकर बोली, " मैं दिया बनकर जलना चाहती हूँ और तुम आंधी बनकर मुझे बुझाना चाहते हो...!! हर बार अपनी हैसियत का हवाला क्यों देते हो? मैं जिस भी हैसियत में जी रही हूँ, खुद जी रही हूं न...!! आपसे तो कहने नही आती कुछ!! आज भी नही कहती अगर विनाश यहां नही मिलता!! अपनी किसी भी चाह

का जिक्र आपसे तो कभी भी नही किया मैंने! आप समुद्र हो तो रहो समुद्र ,, मैं नदी बनकर ही खुश हूँ। मैं खुद से मोहब्बत करती हूँ और यही मुझे किसी के भी आगे डटकर खड़े रहने की शक्ति देता है।

"ऐसा है क्या..??"

" हाँ ! ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि दूसरों को भी खुद से मोहब्बत करने पर मजबूर कर उन्हें उनसे ही जुदा करने का हक नही आपको!! आप खुद ही खुद की मिसाल हैं तो दूसरों को भी उनकी मिसाल बने रहने दे, उन्हें बदलने का हक नही आपको..!!"

" मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की ख़ुद सख्त बनकर औरों को अपने लिए फिसलने पर मजबूर करने वाला शख्स आज जब किसी पर फिसल रहा है तो शिकायत हो रही है उसे...??"

"हुँह्ह!! मुझे क्यों शिकायत होगी, तुम्हारे उस चितकबरे पति जैसा नही हूँ मैं की किसी पर भी फिसल जाऊँ!!"

डॉली ने बस एक नजर उठाकर उसे देखा औऱ बाहर जाने को हुई तो राज बोल उठा, " लेकिन एक बात याद रखना, जिस दिन भी खुद से आकर मुझसे लिपटी न , उस दिन के बाद मुझसे जमानत मुमकिन नही होगी!!"

डॉली अब फिर पलटी और निग़ाहों में देखकर बोली, " तन को तो

जबरदस्ती भी हासिल किया जा सकता है, लेकिन हमारी जिंदगी में इम्पोर्टेन्ट वो होता है जिस पर हम अपना मन वार दे!!"

वह पलटकर बाहर निकल गयी तो राज बोला, " मर्दो के प्रति तुम्हारी विरक्ति को आसक्ति में बदल दूँगा! अनमनी उदास आँखो में सुलगते चटख रंग भरूँगा और वो भी अपने अंदाज में...!!"

वह बाहर आया तो दादी से बात करती डॉली के गालों पर जुल्फों को ढलकते देखकर मन मे ख्याल आया, " क्या कोई दिन ऐसा होगा, जब जुल्फों को हटाकर उनकी जगह मेरा चेहरा ले सकेगा!!"
 
जैस्मिन ने उसे डॉली की तरफ देखते देखा तो पीछे हथेली बढ़ाकर दादी का हाथ दबाते हुए हिलाया, वह दादी को दिखाना चाहती थी!

जब कुछ देर हो गई और दादी को डॉली बैठाने लगी तो जैस्मिन उधर देखने लगी, दादी के तो दोनो हाथ वहाँ है फिर मैं किसका हाथ पकड़े बैठी हूँ..?"

उसने अब झट से गर्दन घुमाई और पीछे देखा तो समीर के हाथ पर उसकी हथेली थी, वह अपना हाथ खींचते हुए सामने देखने लगी! और फिर सिर पर हाथ मार लिया, " सत्यानाश हो तेरा!! आज उसके हाथ के पीछे ही पड़ गयी है तू तो!!"

विनाश सो गया था, दादी जैस्मिन को जाने ही नही दे रही थी, बातें करते करते शाम हो गयी थी!! डॉली अब नीचे उतर आई और किचन में चली गयी तो वहाँ एक कॉकरोच उल्टा पड़ा हुआ था!

डॉली उसे अनदेखा कर इधर काम मे लग गयी, राज भी नीचे उतर आया तो जैस्मिन और समीर भी नीचे उतर आये ताकि दादी भी आराम कर सके!

राज किचन में पैर रखते ही कॉकरोच को देखते हुए बोला, " ये कॉकरोच यहाँ क्या कर रहा है..?"

" मैंने तो नही पूछा उससे , खुद ही पूछ लो..!!" डॉली बिना उसकी तरफ देखे बोली।

राज ने एक पल को डॉली की ओर नजर उठायी फिर एक गिलास पानी उठाकर उस कॉकरोच पर डाल दिया तो कॉकरोच सीधा हो गया और चलते हुए डॉली की तरफ ही बढ़ा तो डॉली दूसरी ओर भागते हुए बोली, " ये क्या किया..?"

" आपने ही तो कहा कि खुद पूछ लूँ, उल्टा था तो सोचा सीधा करके ही पूछ लूँ!" राज शरारत से बोला।

डॉली भागी तो गिरे हुए पानी पर फिसल गई, राज ने उसे पकड़ लिया और बोला, " जब मैं करीब होता हूँ तो आप ज्यादा ही नही फिसलती..!!"

" बकवास बन्द कीजिये अपनी...!!" डॉली गुस्से से उसके हाथ को झटक कर सीधी होते हुए बोली।

उधर खड़ी जैस्मिन दोनो को देखकर मुस्कुराते हुए ताली बजाने को हुई

तभी कॉकरोच उड़ गया और उसके चेहरे के पास से गुजरा तो वो कूद कर समीर की गोद मे चढ़ गई!!

" अरे..! अरे..!!" समीर के मुंह से निकला और उसने जैस्मिन की पीठ पर अपना हाथ रख दिया की कहीं वो गिर न जाए लेकिन दोनो ही नीचे गिर पड़े तो जैस्मिन झट से खड़ी होकर हाथ झाड़ते हुए बोली, " मेरी कोई गलती नही!! कॉकरोच की वजह से हुआ सब!!"

समीर भी उठ खड़ा हुआ और सीढ़ियों की तरफ देखने लगा क्योंकि जैस्मिन बिना समय गंवाये ऊपर भाग गई थी...! समीर का दिल जोर से धड़क उठा था , पहली दफा कोई लड़की उसके गले लगी थी वो भी यूँ अचानक.....! कुछ समझ ही नही पाया था वो तो...! आगे बढ़कर वह फ्रिज से बोतल निकालते हुए पानी पीने लगा!

उधर जैस्मिन का दिल भी बहुत ज्यादा धड़क रहा था , वह पलकें झपकते हुए खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी।

)

अगले सन्डे सब शाम को एक साथ बैठे तो पुराने किस्से छिड़ गए, दादी राज के बचपन की कुछ बाते बताने लगी! तब वो इतने अमीर नही हुआ करते थे।

दादी बोली, " ये आज इतना अकड़ू बना घूम रहा है की लड़कियों से दूर भाग रहा है वरना ये आठ साल का था तो इसकी मां इसे लेकर अपनी एक सहेली वाणी से मिलने गयी थी।

वाणी के पास ही उनकी बेटी भी बैठी हुई थी, चार साल की थी, सुंदर सी गोल मटोल प्यारी सी बच्ची थी! दिखता तो ये भी बचपन मे बहुत क्यूट था तो वाणी ने इसे प्यार करते हुए इसके चेहरे और होठ को चूम लिया!

कुछ देर बाद वाणी और छाया आपस मे बात करने लगे तो बच्ची की

बॉल गिरकर चारपाई के नीचे चली गयी!

छाया ने बच्ची को उतरते देखा तो राज से बॉल उठाने को कहा , ये पहले तो राजी नही हुआ फिर दोबारा कहने पर ये उकड़ू हुआ और चारपाई के नीचे घुसा , तब तक बच्ची दूसरी ओर से खुद भी खाट के नीचे घुस गई! थोड़ी ही देर में राज के चिल्लाने की आवाज आई तो दोनो ने नीचे झाँककर देखा, वाणी की बेटी ने चिढ़ के मारे लपक कर इसके होठो को दांत से काट डाला था! और इसने उसे धक्का देकर लुढ़का दिया था!!

वाणी ने उसे खींच निकाला तो वो पिटने से पहले ही बोली, " आपने उसे प्यार क्यों किया? आप उसे प्यार करोगी तो मैं उसे काटूँगी..!!"

विनाश ये सब सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ा तो वहीं डॉली अपनी आंखें गोल गोल घुमाते हुए पलकें झपकाने लगी और फिर इधर उधर देखते हुए एक नजर सामने ही बैठे राज के होठो की तरफ देखा! खूबसूरत मध्यम भरे हुए हल्के लाल नम होंठ...!! उसके होंठ देखकर बदन में अजीब सी हलचल हो उठी तो डॉली ने इधर उधर देखना शुरू कर दिया और मन ही मन बोली, " लानत है मुझ पर..!!"

समीर औऱ जैस्मिन भी हँस रहे थे , राज तो बुरी तरह झेंप गया था, उसे भी ये किस्सा अब तक याद था और वो उस लड़की से जिंदगी में दोबारा एक बार मिलने की ख्वाहिश रखता था!! यही वजह भी थी कि अब तक वह किसी और लड़की में दिलचस्पी नही ले सका था...!!

हालांकि पिछले कुछ सालों में काम के बीच ये किस्सा जहन में धुंधला पड़ गया था और लड़कियों का उस पर यूँ फिदा होना देखकर राज को लगने लगा कि वो भी तो गरीब थी शायद वो भी हैसियत की वजह

से ही मुझसे जुड़ने का दिखावा करे...!! इसी सोच ने उसे रोक लिया वरना राज ने उसे जरूर ढूंढा होता!

उसने अपनी हथेली अपने होठो पर ही रख ली और सोचने की मुद्रा में बैठ गया लेकिन अनायास ही नजर डॉली की तरफ चली गयी क्योंकि वो कुछ असहज सी नजर आ रही थी!

"इसको क्या हुआ...? वैसे तो बहुत हँसती है दादी की बातों पर, इस वक़्त शांत क्यों...? कोई टिप्पणी भी नही की मुझ पर...?? राज मन ही मन बोला।

डॉली खड़ी हुई और कमरे से बाहर निकलते हुए बोली, " मुझे प्यास लगी है, आती हूँ जरा सी देर में!"

वो कमरे से बाहर निकल गयी और पानी पीते हुए बोली, "हे भगवान!! ये राज शर्मा वही लड़का है, जिसके बारे में मां बताती थी!"

"आप ठीक हैं न मम्मा..??" विनाश की आवाज अचानक आयी तो डॉली की पकड़ ढीली पड़ गयी और उसके हाथ से पानी की बोतल छूटकर नीचे गिर गयी!

विनाश के साथ ही राज खड़ा था, वो असमंजस से डॉली के हाथ से गिरी बोतल औऱ उसे भी देखने लगा, " अचानक ही ये उल्कापिंड आज इतनी अनकम्फर्टेबल क्यों नजर आ रही है...?"

विनाश उसकी तरफ बढ़ गया तो राज भी आगे बढ़ा क्योंकि विनाश ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था! राज ने विनाश को फ्रिज से चॉकलेट निकालकर देते हुए कहा, " आप जाइये, दादी और हंसाएगी आपको!"

" जाता हूँ, लेकिन अब मुझे घर जाने का मन हो रहा है!"

" चलते है बेबी, जैस्मिन मासी को बुला कर लाइये!" डॉली नीचे गिरा पानी साफ करते हुए बोली।

राज विनाश के जाते ही बोला, " सब ठीक है न!!"

" हां!" डॉली झट से बोली लेकिन नजर नही उठायी तो राज बोला, " मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि दादी की बात सुनने के बाद से आप कुछ अजीब ही व्यवहार कर रही हैं, घटना तो मेरे साथ हुई थी, ये हालत मेरी होनी चाहिए लेकिन यहाँ मामला उल्टा नजर आ रहा है..!!"

डॉली कुछ नही बोली तो राज उसे देखते हुए बोला, " कहीं वो लड़की आप ही तो नही...??"
 
डॉली अब तुरंत बोली, " मैं नही हूँ वो!! खुद ही तो हैसियत की बात करते हो न आप, तो हम बचपन मे कैसे मिल सकते हैं? और आज पहली बार एक सलाह देती हूँ, उसे न ढूंढे तो ही बेहतर है।"

"क्यों....?"

"क्यो...?? ये आप मुझसे पूछ रहे हैं...!! होंठ सलामत अच्छे नही लग रहे क्या आपको..?"

" हम्म! तो आपको मेरे होठों की इतनी फिक्र है...??" राज उसे एक नजर देखते हुए बोला।

डॉली ने नजर हटा ली और बोली, "हंह्ह...!! मुझे क्यों होगी फिक्र?"

" ऐसा है क्या...??"

" जी ! ऐसा ही है!!"

" तो बस इतना कि मुझे तो अब पूरा शक है कि वो लड़की आप ही हैं!"

" मिस्टर शर्मा !! इतना भी किसी से क्या प्रभावित होना की हर किसी को उसमें ही तलाश करने लग जाना! मैं मैं हूँ..!! वो नही हूँ, आपको वो चाहिए तो उसे शौक से ढूंढिए , मुझे क्या?"

विनाश और जैस्मिन नीचे उतर आए तो डॉली राज के साइड से निकलते हुए बोली, " चलो!! "

वे तीनों निकल गए तो राज डॉली के एक्सप्रेशन याद करते हुए फिर सोच में डूब गया, " मुझे शक नही पूरा यकीन है कि वो लड़की

तुम ही हो!! इतनी खतरनाक हरकत तुम ही कर ही सकती हो..!! मतलब हमारे बीच युद्ध का आगाज तो तुमने बचपन ही कर दिया था!! बहुत जानलेवा हो तुम...!! पर मैं अब ये मानने से गुरेज नही कर सकता कि किसी से न हारने वाला राज खुद के दिल से हार गया और दिल तुम पर हार गया, तुम मुझे अपनी ओर खींचती हो, मेरे लिये बनी हो तुम..!! तुम आग हो तो मैं ताप हूँ, दूर रहना मुमकिन ही नही! तुम्हारे साथ रह नही पाता हूँ लेकिन तुम्हारे बिना रहने का मन नही करता है! दुनिया भर की बहस तुमसे कर लेता हूँ लेकिन साधारण तरीके से बात नही कर पाता!! फिर भी जाने क्या है जो मुझे तुम्हारे करीब करता है!!

मैं और तुम सवाल जवाब से आगे बढ़ेंगे ये आसार तो नजर नही आ रहे लेकिन बहस और सवाल की जगह मैं तुम्हारी आँखो में शर्म भरी मुस्कुराहट देखना चाहता हूं!! और तुम भी तो तमीज सीखो!! बिना दस्तक दिए यूँ दिल मे या ख्वाब में चले आना बद्तमीजी है। जिस तरह तुम मेरे ख्वाब में आने की खबर से बेखबर हो, उसी तरह मैं भी तो नही...?? क्या मैं तुम्हे ख्वाबो में बेचैन नही करता.....?? शायद नही!! इतना कड़वा जो बोलता हूँ!! पर कड़वे लोग भी तो इश्क़ के हकदार होते हैं..!! प्रेम अगन अच्छे खासे इंसान को उबलने पर मजबूर कर देती है!! मैं इतना ज्यादा गरम मिजाज पहले नही था, और अब नरमी नही आ पाती! वजह तुम ही तो हो!!"

उधर विनाश के सोते ही जैस्मिन ने डॉली का हाथ पकड़ते हुए कहा, " सच सच बता, वो तू ही है न!!"

"कौन वो..??"

" वही जिसने राज को चारपाई के नीचे काटा!!"

"मैं ..! वो...!!"

" ए, मैं वो..! झूठे बहाने सोचने की कोशिश नही..!! तेरी मम्मी का नाम वाणी ही था, तो सच बोल!"

डॉली अब हँस पड़ी, "तो क्या हो गया, मैं ही थी लेकिन छोटी थी न! कह मत दियो किसी से, नही बहुत पिटेगी मेरे हाथ से..!!"

जैस्मिन अब उसकी गर्दन में बाँह फँसाकर हँसते हुए बोली, " बेचारा कैसे होठ ढक कर बैठ गया था, दादी के बताने के बाद!!"

डॉली भी अब ठहर ठहर कर हंसे ही जा रही थी, " यार! सोचा नही था कि ये वो लड़का निकलेगा, मां से कितनी बार अपनी जलन का ये किस्सा सुना है! मैं भी कैसी थी न मतलब उसके होठ काट लेना , मैंने किस तरह वहाँ खुद को संभालकर अपनी हँसी रोकी हुई थी मैं ही जानती हूँ! एक तो ये नजर बहुत धोखाधड़ी करती है, बार बार उसके होठो की तरफ ही जा रही थी!!"

"ओह्हहो..!! तेरी नजर..! फिर से काटने का इरादा है क्या..?" जौस्मिन ने आँख मारते हुए कहा तो डॉली उसके पीछे तकिया उठाकर पड़ गयी, " बद्तमीज कहीं की..!! थप्पड़ पड़ेगा खींच के, कैसी वाहियात बात कह रही है...??"

वो जैस्मिन को तकिए से मारने लगी और जैस्मिन अपना मुंह कोहनी

से छिपाने लगी!

( )

राज ने उसी रात समीर को बुलाया और बोला, " पता लगाओ डॉली के बारे में सब..!"

" ठीक है!"

" सब मतलब सब...! मां बाप का नाम भी...!!"

"ठीक है!!"

राज ने दूसरी तरफ घूमकर सिगरेट जलानी चाही तो समीर ने छीन लिया औऱ बोला, " अब इसकी जरूरत नही तो आदत में शामिल मत करो!"

" कैसे पता कि जरूरत नही..??"

" अब भी नही पता कि जरूरत नही, तो कब पता लगेगा?"

" मैं यूँ ही तलब उठने पर पीता हूँ!"

" किसकी तलब??

"हम्म..!!"

" किसकी तलब..? सिगरेट की या डॉली की...!!"

" समीर!!"

" नाम पता है मुझे मेरा, जवाब दो आप!"

"सिगरेट की..!"

" मुझे तो लगता है डॉली के साथ की तलब उठती है!"

" ऐसा है क्या....??"

"हां! ऐसा ही है! मुझे मालूम था आपकी छाती खोखली नही है, आपके अंदर भी दिल है!

" तो बस इतना की मेरे अंदर दिल है लेकिन उसके लिए नही, मैं विनाश के लिए सब पता लगाना चाहता हूँ!"

" एक ही बात है..!!" समीर ने मुस्कुरा कर कहा तो राज बोला, "

एक ही बात नही है!"

समीर गुनगुना उठा,

" तेरे इश्क़ में पागल हो गया दीवाना तेरा रे,

सच होते होते हो गया अफसाना मेरा रे..

राज ने उसकी गर्दन पकड़ते हुए कहा, "जैस्मिन के इश्क में पागल हो रहा है हां..! बात करता हूँ मिहिर अंकल से..!!"

"दिमाग खराब है, कैसी बात कर रहे हो? अभी तो दो ही मुलाकात हुई है!"

" इश्क होने को तो एक नजर ही काफी है, दो तीन मुलाकात बहुत ज्यादा नही हो गयी..??"

" राज ..!"

" अब उम्मीद करूँ की जितना कहा है उतना करोगे!"

" हां , मैं कल तक पता लगाकर बताता हूँ!"
 
समीर दरवाजा बंद करके गेस्ट रूम में चला गया, राज मुस्कुराते हुए खिड़की पर आ गया और बोला, " डॉली !! कल तक सच्चाई सामने होगी! अगर तुम ही वो लड़की हुई तो फिर तो मेरी हद में तुम हमेशा के लिए आ गयी हो और अब जमानत मुमकिन नही! राज ने म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया---

तो डॉली झट से कदम बढ़ाकर किचन में चली गयी! उसकी इस हरकत से राज के होंठ पर मंद मुस्कान आ गई , जिसे उसने फौरन ही रोक भी लिया।

डॉली कॉर्नर में जाकर खड़ी हुई तो राज भी वहीं चला आया! वह कॉफ़ी मग उठाने को हुआ तभी डॉली भी जूस के लिए गिलास उठाने को हुई! दोनो के हाथ हल्के से छू गए तो डॉली ने फौरन अपना हाथ हटा लिया लेकिन राज टस से मस नही हुआ, ऐसे कॉफी बनाने लगा मानो कुछ हुआ ही न हो!

" बहुत असभ्य हो आप..!" डॉली ने दांत जमाकर धीरे से कहा तो राज ने एक नजर उसकी ओर फेरी और छोटी सी मुस्कान चेहरे पर रखते हुए बोला, " ऐसा है क्या..?"

" हां! ऐसा ही है!"

" तो बस इतना की होठ आप मेरे काटे और असभ्य भी मुझे ही कहें..! मैं भी सभ्य बन जाऊँ आपकी तरह....??"

"न.... ही!!"

" नही...!!" राज ने सिप लेते हुए कहा।

"नही से मतलब मैने नही किया ऐसा कुछ!! आपको क्यों लगता है कि इतनी शर्मनाक हरकत मैं करूँगी..?"

राज तुरन्त बोला, " अहं..!! शर्मनाक नही खतरनाक..! और ये आप ही कर सकती है!"

उसकी ठंडी ग्रे आंखों में देखते हुए डॉली ने नजर हटा ली और बोली, " मुझे बहुत काम है!"

राज ने पानी उठाकर उसके होठो के पास लाते हुए कहा, " खुश्क हो रहा होगा न गला??"

"जी नही! आपका इतना भी असर मुझ पर नही होता कि आपकी मौजूदगी से मेरा गला खुश्क हो जाये!" कहते हुए डॉली ने उसके हाथ से गिलास लेकर स्लैब पर जैसे ही रखा, राज ने उसकी तरफ कदम बढ़ा दिया, उनके बीच पहले ही दो तीन कदम का गैप था, डॉली ने कदम पीछे लेते हुए कहा, " आपको यहाँ कोई काम नही है तो प्लीज जाइये!"

" काम तो है..! मुझे आज ही पता चला कि वाणी आंटी की बेटी मेरे यहाँ काम करती है मतलब मेरा अंदाजा सही निकला, सोच रहा था कि सालों बाद मिल ही गए हैं तो उसकी दी हुई एक चीज लौटा ही दूँ..!! आपका क्या ख्याल है इस बारे में...?"

डॉली ने जल्दी से हाथ उठाया और उसे धक्का देना चाहा, लेकिन राज ने उसकी कलाईयों को पकड़ते हुए उसे स्लैब से लगा दिया और बोला, " बहुत असभ्य हैं आप भी..! मैं बात कर रहा हूँ और आप हाथ पैर चला रही हैं! पर आपका भी कसूर नही , कुछ आदतें बचपन से ही होती है जो छूटती ही नही..!!"

डॉली का चेहरा शर्मिंदगी से लाल हो गया, तभी दादी ने उसके कंधे पर हाथ रखा तो डॉली चौंक कर इधर उधर देखने लगी, राज तो वहाँ था ही नही!!

" कहाँ गुम हो बच्चे..? कब से आवाज दे रही हूँ सुन ही नही रही!!"

" राज ..!!"

" वो तो कब का ऑफिस चला गया है!"

" ऑफिस!!"

"हां! कुछ काम था उससे क्या..?"

" नही!!"

" तो फिर..!!"

" मतलब हां, कुछ काम था, मैं फोन पर बात कर लूँगी!" डॉली ने झूठ बोला।

" ठीक है!"

डॉली काम मे लग गयी और मन ही मन बोली, "तूने क्या क्या सोच लिया, बुरा तो है वो , लेकिन इस तरह की हरकतें तो नही करेगा...! हैं

न...??"

वह काम करने के बाद दादी के पास जाकर बैठ गयी और बोली, " अब तो आप ठीक हैं न!!"

" नही! बाहर से ठीक हूँ, अंदर से जी अच्छा नही रहता!!"

" हम्म!!"

" फिर मुझे छोड़कर जाने का सोच रही हो..??"

" वो मैं..!"

" मत जाना!!"

" जी! मैं......!"

"कहीं नही जा रहीं ये...!!" राज अंदर आते हुए बोला।

" मतलब...??" डॉली ने कहा तो राज उसे देखे बगैर बोला।।

" दादी परसों हम लोग गोआ चल रहे हैं, और हम में डॉली भी शामिल हैं!"

" मैं नही जाऊँगी, शायद आप भूल रहे है लेकिन काम के अलावा मेरा एक बेटा भी है, उसके प्रति भी मेरी कुछ जिम्मेदारी है!"

" दादी ये टिकट हैं, इनके साथ साथ विनाश , जैस्मिन और समीर भी चल रहे हैं!!"

" मैं और विनाश कहीं नही जाएंगे..! इस मेहरबानी की जरूरत नही है मिस्टर शर्मा !"

राज ने अब उसकी तरफ निगाह की और बोला, " ऐसा है क्या...?"

"जी! ऐसा ही है!"

" तो बस इतना मिस डॉली की आप हमारे साथ चल रही हैं!!" राज ने तेवर दिखाते हुए कहा, " आप अभी दादी की केयरटेकर हैं और वो जहां जाएंगी, वहाँ आपको जाना होगा!!"

" लेकिन मैं नही..!!"

राज बात काटते हुए बोला, " मिस डॉली !! बहस करने की ख्वाहिश रखती हैं तो बता दूं की सब व्यर्थ है! बहुत देर हो चुकी है, टिकट हो चुके हैं!"

" लेकिन हमारे नाम और उम्र के बिना टिकट कैसे..?"

" लगता है मेरी क्षमता के बारे में अब तक आप जान नही सकीं हैं! सिर्फ आपका ही नाम औऱ उम्र नही, और भी बहुत कुछ जानकारी है मेरे पास..!!"

" आप न..!!" डॉली कुछ कहते कहते रुक गयी तो राज ने बात पूरी कर दी!

"बहुत खराब हूँ, आपकी भाषा में कहें तो असभ्य हूँ!!"
 
डॉली गुस्से में वहाँ से हट गई तो राज कुछ देर बाद नीचे आते हुए बोला, " सामान पैक कर लेंगी या उसके लिए भी मुझे आना होगा!!"

डॉली गुस्से में कुछ नही बोली, तो राज किचन में ही चला आया और बोला, " कानो तक बात नही पहुंच रही..??"

" आपकी ये मनमानी करने की आदत क्यों नही छूटती..?" डॉली गुस्से से बोली।

राज उसकी तरफ देखते हुए बोला, " मनमानी..! हम्म..! ये टेलेंट तो अभी अच्छे से आपको दिखाया ही नही..!! हमेशा आपको सामने से बोलने का बराबर मौका दिया है!"

" मौका आपने नही दिया, मौका मैंने छीना है..!" डॉली नजर उठाकर बोली।

राज पूरे अभिमान के साथ बोला, " पता करना कि मेरे सामने कितने लोग बहकने की हिमाकत करते हैं, भ्रम मिट जाएगा...!!"

" तो आपका मतलब है कि मुझे बहकने का अधिकार दिया हुआ

है...?"

" ऐसा ही समझो..!!"

" क्यों..? मुझमे ऐसा क्या है..?"

" आप नही जानती..??"

" नही...??"

" तो बस इतना कि मैं जवाब देना भी नही चाहता..!!"

" जवाब मुझे चाहिए क्योंकि किसी की मेहरबानी मुझे नही चाहिए!!"

राज ने कदम बढ़ाया तो डॉली फौरन आगे आ गई, " जवाब दीजिये!"

" मैं जब चाहूँगा तभी जवाब दूँगा, आपके कहने से नही..!!"

" क्यों भाग रहे हैं जवाब देने से...?"

" क्योंकि आप मुझसे जवाब पाने की हकदार नही, मैंने आपसे कभी जवाब नही मांगा, आप खुद जवाब देती हैं!"

राज में कदम बढ़ाकर उसे आगे से हटाने को हाथ बढ़ाया तो वह बोली, " जो आप करना चाह रहे हैं, वो मुमकिन नही..!! जवाब से

भागकर आप जीत नही जाएंगे! मैं आपको नही मिल सकती!!"

"ऐसा है क्या..?"

" हां! ऐसा ही है..!!"

"तो बस इतना कि आप खुद को बेहतर तरीके से नही समझती..!! अभी तो मैं ऐसा कुछ सोचता भी नही आपके बारे में..! लेकिन फिर भी बता दूँ की आप मुझे मिल चुकी हैं!!"

" आप इतने अति आत्मविश्वास से क्यों भरे रहते हैं...?"

" सिर्फ आत्मविश्वास से, लेकिन आपकी अपने अहसासों के साथ विद्रोह करने की कोशिश अच्छी है!!"

" समझ नही आता आपको!! कोई एहसास नही है!"

" दुनिया के दस्तूर तो तुम कभी नही मानती न...!! फिर दिल की हलचल को , मन की उमंग को मुझसे जाहिर क्यों नही करती? क्या रोकता है उसे? किस बात का संकोच है?"

" लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ है ही नही!! क्या परेशानी है आपकी?"

" तुम!"

" मैं ही क्यों, कमी तो नही आपको , सैकड़ो लड़कियाँ हैं।"

राज अजीब सी गहरी निग़ाहों से उसे देखते हुए अपने तेवर में बोला तो डॉली उसे असमंजस के भाव से देखने लगी, तभी राज उसकी बाँह को अधिकार पूर्वक थामते हुए बोला, " मुझे तुम जैसी नही चाहिए........!! क्योंकि मुझे सिर्फ तुम चाहिए!"

( क्रमशः )

" और मैने तुम्हारा चयन किया है।"

" क्यों?"

" जाने क्यों?? "

" मुझे जबाब चाहिए।"

" मेरे लिए धतूरा हो गयी हो तुम, वो नशा जो पागल कर देता है लेकिन उतरता नही।"

" तो मैं क्या करूँ...?"

" कुछ नही..!! बस अहसास को मत रोको..!!"

" मैं आपकी लकीरों में नही...!!"

" मेरी मुहब्बत हाथ को लकीरो की मोहताज नहीं, जो लड़की दिल मे रहने लगेगी वो लकीरों में भी रहेगी ही..!! क्योंकि उसे मैं कहीं जाने ही नही दूँगा। जब उसके सिवाय जहन में कोई नही तो जिंदगी में आने का तो सवाल ही नही उठता।

" मुझ जैसी लड़की क्यों चाहिए आपको....?"

" किसने कहा कि तुम जैसी चाहिए? सपने बहुत नही देखती!!"

" लेकिन मुझे आप नही चाहिए..!!" डॉली बोली।

"ऐसा है क्या...??"

" हां! ऐसा ही है!!"

" तो बस इतना कि मुझे देखते ही आपके अंदर की बहस और लड़ाई वाली डॉली इस तरह सिर उठाती है, जैसे मिट्टी के अंदर से एक पौधा सिर उठाता है!! एक बार लड़ाई झगड़े को हटाकर शांत मन से सोचो उसके बाद जवाब देना की मैं आपको चाहिए या नही...!!"

डॉली अब तेज आवाज में बोली, " नही..! नही..!! नही...!! समझ आयी आपको बात! मुझे मेरी जिंदगी में आप नही चाहिए....!! मुझे सब समझ आ रहा है, आपको मुझसे कोई प्यार व्यार नही हुआ है! मैं आपसे बहस करती हूँ, आपसे दूर भागती हूँ , आपको नजरअंदाज

" ऐसा है क्या..??"

" हां! ऐसा ही है!!"

" हम्म! तो बस इतना कि जब यही आशा है आपको मुझसे तो अब तो आशा पूरी न करना मेरी अमीरी की तौहीन होगी..! अब मैं बदला लेकर ही रहूँगा!"

"देखा!! आ ही गए न आप फिर अपनी औकात पर.....!!" डॉली व्यंग्य से होंठ के कोने एक तरफ को उठाते हुए बोली।

राज ने अब अपनी टाई के नॉट के ढीला करते हुए कहा, " मेरे प्रपोजल को जब बदला ही करार दे दिया है तो अब आप मेरी औकात भी देखेंगी औऱ बदला भी.....!!"

" मतलब अब आप नीचपन की हद पार करेंगें...!!"

" जब हद में रहकर बात न बनें तो कभी कभी हद पार करने की जरूरत होती है! और मुझे हद पार करने से कोई गुरेज नही!!"

" तो मैं आज यहाँ से काम छोड़ती हूँ..!!"

" आप ऐसा नही कर सकती..!"

" मैं करूँगी!!"

" ऐसा है क्या....?"

" हां! ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि आपको ऐसा करने नही दूँगा...! आप इस लड़ाई से थकी नही है??"

" नही! और शायद कभी न थकूं!"

" लेकिन मेरा अब रूकने का मन करता है!!"

" मन ही तो करता है न , पर रुक कौन पाता है? शांति से बात करना चाहेंगे फिर झगड़ पड़ेंगे!"

" क्या करेंगे ये छोड़िये! वर्तमान की बात करते हैं...! मन नही करता रुकने का? सबके सामने मजबूत बनो, पूरी दुनिया से लड़ लो लेकिन कोई तो ऐसा हो जिसके सामने तुम तुम बनकर रह सको, सबको अपनी कठोरता से रुलाकर उस एक से लिपटकर तुम रो सको! कोई ऐसा हो , जिसे पाना चाहो जिसकी होना चाहो!"

"मुझे चलना चाहिए! आपकी बातों का रुख फिर बदल रहा है!" डॉली ने कहा और साथ ही जाने के लिए कदम बढ़ाया तभी राज उसकी बाँह थामते हुए बोल पड़ा, " तुम्हारी वजह से मेरा दिल गद्दार हो गया तो सजा तो तुम्हे ही मिलेगी न। इतनी आसानी से तो नही जा सकती तुम...! मुझे कुछ भी गलत तरीका अपनाने पर मजबूर मत करो!! क्योंकि तुम मुझे इतना तो जान ही चुकी हो कि मैं खामोश नहीं बैठूंगा!!"

डॉली उसे देखने लगी और आँख में आँसू आने को हुए तो उसने चेहरा फेर लिया, राज के सामने अपने आंसू दिखाकर खुद को कमजोर नही दिखाना चाहती थी!
 
उसने अपना हाथ झटका तो राज ने उसकी बाँह से अपने हाथ हटा लिए और उसने भी मुंह फेरते हुए मन ही मन कहा, " दिखाना नही चाहती लेकिन जानता हूँ कि मजबूर महसूस कर रही हो...!! चाहता नही तुम्हें आँसू देना लेकिन नही आता मुझे जताना, ये मोहब्बत की बाते करनी भी नही आती....! पर यकीन करो, निभाना आता है मुझे...., मेरी जिंदगी में तुम्हारी क्या अहमियत है तुम्हें समझ क्यों नही आता? तुम रह लेती हो मेरे बिना खुश, मगर मैं नही रह पाता , चाहे तुम्हारी वजह से मैं कितना भी नाराज रहूँ, लेकिन जब मुश्किल में पड़ जाती हो तो मैं सब कुछ भूल जाता हूँ! यहाँ तक कि खुद को भी.....!! तुम्हारे दिल मे मेरे ख्याल तक नही आते और मेरे दिल से तुम्हारे खयाल ही नही जाते। मुझे इस बात पर जरा भी यकीन नही की तुम मुझसे दूर जाना चाहती हो! और ये जानने के बाद की मैं वो बचपन वाला लड़का हूँ , तुम पर कोई फर्क न पड़ा हो ऐसा मुमकिन ही नही!!"

राज अपने कमरे में चला गया और टाई खोलकर बेड पर फेंकते हुए बैठ गया और चेहरे को हथेलियों से ढकते हुए बोला, " समझती क्यों नही...? समझना क्यों नही चाहती..की जो अहसास सिर्फ तुम्हे सोचकर महसूस होते है वो किसी और लड़की के मेरे करीब आ जाने पर भी महसूस नहीं होते!! तुम्हें सोचकर , तुम्हे देखकर ही ये अहसास

होता है कि मेरे अंदर भी अहसास है...!! सारे अहसास बस तुमसे हैं..!!"

वह लेट गया और बालों में हाथ फेरते हुए बोला, " तुम्हारे सिवाय किसी को जिंदगी में लाने की बात तो बहुत ज्यादा है, मुझे तो तुम्हारे सिवाय किसी और को ख्याल में लाने का मशविरा तक न भाये..!!"

वह उठा और शर्ट उतारते हुए बोला, " सोच रहा था कि अंदाज बदलूँ जो कि खुद मेरे लिए बहुत मुश्किल है! लेकिन जब खुद तुम ही मुझसे बदले की उम्मीद लगाए बैठी हो तो मैं अब जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा!! पर हाँ..! हर रूप में तुम्हारा ही रहूँगा...!! तुम्हे तो मेरी नाराजगी ही दिखेगी अब लेकिन साथ भी पाओगी हर उस कदम पर , जहां तुम्हे जरूरत होगी! बीच रास्ते मे कहीं नही छोडूंगा...!! आखिर राज शर्मा हूँ अपने अंदाज की लाज भी रखनी है और अपनी मोहब्बत की भी..!!"

वह खिड़की पर आकर पानी पीते हुए बोला, " कैसे लोग आई लव यू कह देते है...? कितना मुश्किल काम है, इससे अच्छा तो प्रजेंटेशन बना लो उतनी देर में ऑफिस के लिए..!!

इकरार किसी काम का नही, बहुत बकवास हश्र रहा! उफ्फ ये इश्क़ विश्क की बातें कैसे कर लेते हैं लोग...! खबर होती की ये हाल होगा तो कभी उतना भी नही कहता उसके सामने...!! समीर से तरीका पूछना चाहिए था कहने से पहले...!!"

" सब ठीक है राज शर्मा ..!!" समीर ने अंदर आते हुए कहा।

" बहुत लंबी उम्र है, जस्ट सोच ही रहा था तेरे बारे में..!"

" क्यों...?"

" कुछ पूछने था..?"

" पैकिंग के बारे में न..!!"

" नही , इकरार के बारे में...!"

"हं..!!" समीर हैरानी से बोला तो राज की निगाहों का भाव बदल गया और वो बोला, " इतना चौंक क्या रहे हो..? अपने नही तुम्हारे इकरार के बारे में...!!"

समीर खाँसने लगा और बोला, " अब आपको ये सब सोचने की क्या जरूरत पड़ गयी..? किस बात का इकरार...? मैं कुछ नही कहने वाला अभी..!!"

"क्यों..? आसान तो है , उसे देखकर लगता भी है कि वो तुम्हे पसन्द करती है..!!"

" इतना आसान नही है, छोड़िये न..! घूमने चलने पर फोकस कीजिये!!"

" हम्म..!!" राज ने निगाह खिड़की से बाहर करते हुए कहा, " गुरु तो गुरु चेला भी गया गुजरा ही है, संभावना ही नही हालत सुधरने के

तो छोड़ो इकरार के बारे में सोचना, वार ही जारी रहने दो..!!"

उधर डॉली जब शाम को घर पहुंची तो वहाँ राज को देखकऱ चौंक गई, वह दरवाजे पर ही ठिठक गयी तो राज उसकी आहट पर सिर उठाते हुए बोला, " आओ डॉली ...!!

विनाश ने राज की बात सुनकर फटाफट मुड़कर देखा, और आंखों में अपार खुशी भरे हुए वह चहकते हुए बोला, " मम्मा..! पता है मिस्टर हैंडसम हमें घुमाने ले जा रहे हैं, समुन्द्र के किनारे...!! कितना मजा आएगा न, मैं आप दोनो की फोटो जरूर लूँगा वहाँ पानी पर चलते हुए और उसे हम फ्रेम कराएंगे, कोई रोज रोज तो जा नही सकते न! तो फ़ोटो से हमे याद आता रहेगा!"

डॉली उसे चाहकर भी डाँट नही पायी , उसका चेहरा खुशी से दमक रहा था, मुस्कान बेहद दिलनशीं थी! डॉली ने झुककर उसके गाल को चूम लिया और मुस्कुराते हुए बोली, " हम्म! बहुत मजा आएगा!!"

विनाश अब भागकर राज के घुटनों से आ टिका और बोला, " आप बहुत अच्छे हैं मिस्टर हैंडसम!! बिल्कुल किसी सुपर हीरो जैसे...!"

राज मुस्कुराते हुए उठ खड़ा हुआ और बोला, " ठीक है फिर आप अपनी मम्मा को बोलो कपड़े सूटकेस में रखें! मैं चलता हूँ मुझे भी तो पैकिंग करनी है न!"

" ओके, कल मिलते हैं!!' विनाश खुश होकर बोला।

वह जैस्मिन के साथ कपड़े सलेक्ट करने लगा तो डॉली बाहर निकल आयी और बोली, " मिस्टर शर्मा !! अब एक बच्चे की भावनाओं के साथ खेलने लगे..! बहुत ही बेहूदा हरकत की है आपने...!!"

" ऐसा है क्या...?"

" हां!" वह दाँत जमाकर नफरत से बोली।

राज उसकी तरफ मुड़कर आंखों पर चश्मा चढ़ाते हुए बोला, " तो बस इतना की ये शिकायत करने का अधिकार आपको नही..!! ये शिकायत वो इंसान कर सकता है जिसे मुझसे कुछ अच्छा करने की उम्मीद हो , जब आपको मुझसे कोई उम्मीद ही नही तो फिर शिकायत कैसी..?"

" राज शर्मा , नफरत करती हूं मैं तुमसे..!"

राज उसकी बात सुनकर हल्के से मुस्कुरा दिया और कार का दरवाजा खोलते हुए बोला,

" ये तो जानता हूँ, कोई नई बात बताओ तो बात बनें..!!

मैं झुकने को तैयार हूँ, आप भी झुक जाओ तो बात बनें!!"

"भाड़ में गयी तुम्हारी शायरी..., तुम्हे मेरी बद्दुआ लगे तो बात बनें!"

राज हंसते हुए गाड़ी में बैठ गया और बोला, " ऐसा ही सही!!"

डॉली ने अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया औऱ राज ने गाड़ी

स्टार्ट कर दी और म्यूजिक भी ऑन कर दिया-----

तुम्हें अपना बनाने की क़सम खाई है, खाई है

तुम्हें अपना बनाने की क़सम खाई है, खाई है

तेरी आँखों में चाहत ही नज़र आई है, आई है

तुम्हें अपना बनाने की क़सम खाई है

खाई है..

डॉली जैस्मिन और विनाश के साथ शामिल हो गयी!

जैस्मिन कपड़े रखते हुए बोली, " यार ये राज शर्मा कितना सही आदमी है न!!"

"क्यों..?"

" मतलब उसकी दादी को जाना था तो तुझे भी ले ही जाता पर साथ मे हमे भी ले जा रहा है ताकि विनाश अकेला नही रहे।"

" सब दिखावा है!" डॉली ने धीरे से कहा लेकिन जौस्मिन सुन चुकी थी।

विनाश तो अपनी धुन में मग्न था, वो खुश होता हुआ बोला, " मम्मा! मिस्टर हैंडसम जैसे होने चाहिए मेरे पापा!"

" तो सो जाइये अब..!"

विनाश खुशी से ख्यालो में गुम कुछ ही देर में सो गया तो डॉली उसे लिटाते हुए बोली, " लानत है न मेरे होने पर, मेरे होते हुए भी विनाश को पापा की कमी लगती है!"

जैस्मिन ने उसके कंधे पर हाथ रखा तो दर्द की लहर आंखों में उतर आई और डॉली की डबडबायी आंखों से आँसू की एक बूंद टपक गयी।

जैस्मिन उसे पानी का गिलास पकड़ाते हुए बोली, " मां कितना भी कर ले, पर बाप की कमी को पूरा नही कर सकती और इसी तरह बाप मां की कमी को नही भर सकता! बच्चे को दोनो की जरूरत होती है!! विनाश भी बच्चा ही है डॉली..! वो बाकी बच्चों को उनके पिता के साथ देखता है तो उसके मन मे भी पापा की छवि उभरती होगी और उस छवि को वो राज शर्मा में देखता है!!"

"राज शर्मा सूरज है जस्सी, आग है वो..! उसे मुट्ठी में भरना मुमकिन नही!! जिस दिशा में विनाश सोच रहा है वो गलत है!"

" मुझे ऐसा नही लगता! राज की आँखो में विनाश के लिए परवाह नजर आती है, वो जब भी इसके साथ होता है तो कितना मुस्कुराता है जबकि बाकी वक़्त वो गम्भीर ही रहता है!!"

" वो माहिर है यार एक्टिंग में..!"

" ऐसा नही है! बुरा नही है वो...!!" जैस्मिन बोली तो डॉली उठकर दूसरे कमरे में आ गयी और स्कार्फ उतारकर तह करने लगी तो जैस्मिन पीछे पीछे चली आयी और बोली, "देख! मेरी बात सुन..!! तुझसे मोहब्बत करता है वो, पर नफरत जताता है! दुआयें देता है, बद्दुआएं लेता है! साथ देता है और खुद हर मोड़ पर अकेला रहता है! जज्बात से भरा दिल है उसका, पत्थर बनकर रहता है! तेरी बातों से मन व्यथित रहता है लेकिन बाहर से हँसता है! कितना भी नाराज रहे पर तेरी एक आह पर पिघल जाता है! उसे नही आता जताने, पर तेरी उपस्थिति उसके लिए बहुत मायने रखती है! अपनी हर शाब्दिक चोट से तेरा व्यक्तित्व सँवार रहा है वो, तुझे मजबूत कर रहा है पर तेरी नजरों में बुरा बन रहा है क्योंकि उसे जताने नही आता, दिखावा कर रहा है आग होने का, पानी है वो पानी!!"
 
डॉली परेशान सी बोली, "छोड़ दे न जैस्मिन, आज के लिए बहुत हो गया , वहाँ वो इनडायरेक्टली यही सब कह रहा था और यहाँ तुम..!!"

जैस्मिन की आंखे चौड़ी हो गयी और वो डॉली को अपनी तरफ घुमाते हुए अचंभित सी बोली, " वो..!! राज शर्मा ...!! उसने तुझे कहा कि वो तुझसे प्यार करता है...?? सच्ची..!!"

डॉली ने उसका हाथ हटाते हुए कहा, " ये नही कहा पर कहना यही चाह रहा था, कह रहा था कि मुझे......!! मुझे तुम चाहिए...!"

जैस्मिन खुशी से जगह पर ही गोल गोल घूमने लगी और साथ ही साथ बोलती जा रही थी, "ओ माई गॉड! ओ माई गॉड..!! ओ माई

कुछ देर बाद उसने फोन ऑन किया तब भी राज की कोई कॉल नही आई तो उसने अपने मन के अंतर्द्वंद्व को रोकते हुए फोन किया!

राज ने कुछ देर रिंग होने के बाद ही कॉल उठाया और बोला, " हैलो!"

आज दो दिन बाद उसकी आवाज सुनकर डॉली का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क उठा, वह हैलो तक नही बोल पायी।

" डॉली ..!!" राज ने उधर से जब उसका नाम कहा तो डॉली के मन मे जाने कैसी हलचल सी हो गयी तो उसने फोन कट करना चाहा लेकिन राज बोल उठा, " फोन कर लिया तो बोलने की हिम्मत क्यों नही कर पा रही...? सामने तो बहुत बहस करती हो!! आवाज पहचान नही आ रही तो बता दूँ मैं वहीं नागफनी हूँ औऱ आप वही उल्कापिंड हैं!"

डॉली ने फोन कट कर दिया तो राज मुस्कुराते हुए बोला, " काश तुम्हारे एक्सप्रेशन देख पाता इस वक़्त!! यकीनन बहुत लाजवाब लग रही होगी!! मतलब बस तीन दिन नजर नही आया तो निगाहे ढूंढ़ने लगी, सोचा नही था कि इतनी जल्दी टूट जाओगी..!! पर फोन कट कर दिया बुरी बात है...! जज्बातों को इस तरह रोकने से अच्छा बरस ही जाने देती!!"

डॉली ने फौरन फोन दोबारा किया तो राज हँस पड़ा, और बोला, "हम्म! तो फिर से...!! चलिए, आपका काम आसान कर देता हूँ...!!"

"उसे छोड़कर सब कैसे आ सकते है? और वो भी कौन सा कम है..? इतना अमीर है , टिकट कैंसिल ही कर देता तो क्या हो जाता..? वो इसीलिए नजर नही आ रहा था दो दिन से...!!" डॉली मन ही मन सोचे जा रही थी!

होटल में पहुंच कर डॉली ने विनाश को लिटा दिया क्योंकि वो गाड़ी में ही थककर सो गया था! समीर और जैस्मिन दादी के पास थे तो डॉली हाथ मे फोन लिए यहाँ वहां चक्कर काटने लगी! नम्बर मिलाती फिर बिना डायल किये ही काट देती!!

उधर राज को तन्हाई जरा भी नही भा रही थी, उस रात मोड़ पर ही उसका एक्सीडेंट हो गया था! अकेले मन मे जाने कैसी भावनाओं गुबार उमड़ रहा था! पास ही पड़े फोन पर नजर ठहर गयी तभी हल्का सा रिंग हुआ और कॉल तुरंत ही कट गई तो राज ने फौरन फोन उठा लिया!

" डॉली ..!!" वह मुस्कुरा उठा।

लेकिन उसने कॉल बैक नही किया, वक़्त देखा तो रात के पौने बारह हो रहे थे!

वह मुस्कुराते हुए बोला, " मेरी याद आयी उल्कापिंड को??"

डॉली ने रिंग जाने से डरकर फोन स्विच ऑफ कर दिया था कि कहीं राज कॉल न कर दे?? क्या कहेगी की फोन क्यों किया..?"

" जी!!"

" तो बस इतना कि आप भी मेरी अपनी केयरटेकर हैं..!!"

" बद्तमीज..!!"

" शुक्रिया, गुड नाइट..!" कहते हुए राज ने फोन कट कर दिया तो डॉली ने भी फोन रख दिया और बोली, " इसकी अकड़ तो देखो!! मतलब ये कैसे हर किसी पर अपना हक जता सकता है!!"

( क्रमशः )

राज ने कॉल ही नही उठाया तो डॉली ने दोबारा कॉल किया , राज ने अबकी बार फोन उठा लिया और बोला, " आप मुझे सोने दीजिये और खुद भी सो जाइये! रात बहुत हो गई है!! अमीरों को इतनी रात गए कॉल करने पर बहुत से मतलब निकलते हैं मिस डॉली ...! दोबारा याद दिलाने की जरूरत न पड़े...!!"

डॉली भी अब बोली, " मैंने वक़्त पर ध्यान नही दिया था इसलिए फोन कट कर दिया था लेकिन फिर मैं ये समझ गई कि आप जरूर गलत मतलब ही निकालेंगे इसलिए दोबारा कॉल की ताकि वजह बता सकूँ!! दादी परेशान थी आपके बारे में सोचकर लेकिन आपको क्या? आपने फोन उठाना जरूरी नही समझा उनका!! अभी कुछ देर पहले ही सोई हैं वो! जब साथ नही आना था तो सबके टिकट कैंसिल कर देते न! इतने कंजूस क्यों हो गए..? आप यहाँ नही है तो आपके अपने इंजॉय करेंगे या आपके साथ के लिए तरसेंगे...??"

" आप तरस रही हैं..??" राज एकदम सपाट लहजे में बोला।

डॉली तुरंत बोली, " मैंने आपके अपनो की बात की है..!"

" नही झिझकने की कोई बात नही..!! आप निःसंकोच बता सकती है!"

" कहा न कि आपके अपनो की बात कर रही हूँ!"

" ऐसा है क्या...?"

डॉली को कभी राज के एक्सीडेंट के बारे में सोच सोचकर नींद नही आ रही थी, तो कभी खुद की हरकतों की वजह से...!

" मेरा दिमाग खिसक गया था, फोन कर ही लिया था तो काटना नही चाहिए था, पता नही उसने क्या क्या सोचा होगा..? और क्या हुआ गर एक्सीडेंट हुआ तो ढंग से गाड़ी नही चलाएगा तो होगा ही न!! मुझे क्या जरूरत थी उसे फोन करने की...? चैन से रह डॉली !! ऐसा कुछ भी मत कर जिससे उसको आगे बढ़ने की सह मिले!"

उधर राज फोन को सीने पर रखकर चुपचाप सो गया था! नींद में भी होठ पर एक मुस्कुराहट थम सी गयी थी!

अगले दिन सभी खाने पीने के बाद बीच जाने के लिए निकल गए, सूर्यास्त से पहले वे लोग बीच पर पहुंचे!! विनाश तो ख़ुशी से पानी की तरफ भागा , डॉली भी उसे पकड़ने के लिए दौड़ गयी!!

जैस्मिन खुश होते हुए बोली, " कितना खुश है न विनाश ??"

" हम्म!! ठीक है!"

" आप कहाँ हो..?"

"कहाँ हूँ , घर पर ही हूँ!"

" मुझे लगा कि कहीं औऱ हो..?"

" नही! दादी ठीक हैं न!"

" हाँ! बहुत खुश हैं!"

" अच्छा है!"

राज ने फोन रख दिया तो दादी समीर से बोली, " जा तू भी!!"

" मैं नही जा रहा!"

दादी ने हड़काते हुए कहा, " जाओ! मैं कोई शिकायत नही सुनना चाहती कि मेरी वजह से कोई अपने खास के साथ समय नही बिता पाया!"

" दादी!!"

" मैं नजर अभी भी बहुत तेज है! जाओ!"

समीर मुस्कुराते हुए उस तरफ बढ़ गया तो एक फोटोग्राफर उसके साथ चलते हुए बोला, " सर पिक्स लेनी है!"

समीर ने हां में सिर हिला दिया और पानी की तरफ बढ़ते हुए बोला, " इशारा करूँगा!"

डॉली को जैस्मिन पानी की तरफ खींचने लगी तो उसने जौस्मिन को धक्का दिया जिससे वो समीर से जा टकराई! उसी समय समीर ने उस तरफ देखकर इशारा किया तो फोटोग्राफर ने पिक ले ली!
 
जैस्मिन असहज होने को हुई तो समीर ने उस पर पानी उछालते हुए कहा, " मेरे आते ही मुस्कुराहट कहाँ चली गयी?"

जैस्मिन फिर से हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली, " कहीं नहीं!!"

समीर भी उन सबके साथ अठखेलियों में शामिल हो गया तो विनाश बोला, " समीर चाचू!! मिस्टर हैंडसम क्यों नही आये? उन्हें तो कहा था मैंने की उनकी औऱ मम्मा की पिक्स लेनी है!"

" वो कल आएंगे बेटा!! फिर आप अपनी ये विश पूरी कर लेना!"

" कल आएंगे!!" विनाश खुशी से बोला, "मम्मा सुना! वो कल आएंगे!"

" हम्म!" डॉली धीरे से बोली।

शाम ढलने लगी तो सब वापस होटल लौट आये, डॉली यूँ ही मन न लगने पर बाहर निकल आयी तो सामने ही बलजीत को देखकर होश उड़ गए! बलजीत ने भी उसे देख लिया था , वह भी वहाँ घूमने आया था। जैसे ही उसने डॉली की तरफ कदम बढ़ाया, डॉली मुड़ गयी और सामने वाले कमरे का दरवाजा खोला, अंदर अंधेरा था लेकिन डॉली किसी से टकराई थी, और गिरने से बचने के लिए उसको पकड़ भी लिया था!

अंधेरे का फायदा उठाते हुए वह जल्दी से उसके सीने से लगते हुए बोली, " मैं आ रही थी न फिर इतनी जल्दी बत्ती क्यों बुझा दी आपने..? जरा सी भी देर आप मेरे बिना नही रह पाते!"

बलजीत ने ये सुना तो वह दरवाजे से ही वापस लौट गया! उसके तेज कदमो की आहट सुनकर डॉली झट से अलग हुई तो उस शख्स ने उसकी कलाई पकड़ने की कोशिश की लेकिन डॉली ने फोन के कवर से पैसे निकालकर उसे पकड़ाते हुए कहा, " आपकी मदद ली उसके लिए कुछ पैसे! इससे ज्यादा कुछ नही कर सकती आपके लिए!"

इस बात को सुनकर उस शख्स की पकड़ जरा सी ढीली हुई तो डॉली हाथ छुड़ाकर भागी लेकिन उससे भी तेज गति से उस शख्स ने दरवाजा बंद कर दिया तो डॉली बालकनी की तरफ भागी और उस शख्स के पकड़ते पकड़ते भी बाहर कूद गई! उसके हाथ सिर्फ डॉली का स्कार्फ आ सका!

डॉली के पैरों में हल्की मोच का अहसास हुआ क्योंकि दर्द हो रहा था , वह लिफ्ट लेकर अपने कमरे तक आ गयी और चुपचाप एड़ी की

मालिश करते हुए लेट गयी!

" कौन होगा वो? मुझे ढूंढेगा तो नही न!! मेरा स्कार्फ भी उसके हाथ लग गया, पर क्या फर्क पड़ता है? स्कार्फ तो एक जैसे हो ही सकते हैं! कुछ जानी पहचाना सा स्पर्श लगा, राज ..!! पर वो तो कल आने वाला है न!! वो यहाँ कैसे हो सकता है...?

मैं पागल होती जा रही हूँ! उसके बारे में क्यों सोच रही हूं, वो यहां नही है , नही है!! सो जा आराम से , कोई खतरा नही!!"

उधर उस कमरे की लाइट जल चुकी थी और वो शख्स स्कार्फ को देखकर मुस्कुराते हुए बोला, " जानता था कि तुम्हारे सिवाय इतनी हिम्मत किसी लड़की की नही हो सकती कि मुझे पे करने की कोशिश करे, लेकिन मैं इतना सस्ता नही की पांच सौ रुपये देकर तुम मेरे गले लगने का हक खरीद सको...!! बारूद के पास आकर चिंगारी दूर कैसे जा सकती है...? अगली मुलाकत का इंतज़ार करो अब..!! शराफत किनारे रखकर दूरियों की चुभन मिटाने का वक़्त आ गया है!!

डॉली कुछ देर बाद फिर उठकर बैठ गयी, वह अब अपना स्कार्फ लेने के चक्कर मे थी! लेकिन पैरों की तरफ देखते हुए सोच में डूब गई क्योंकि बालकनी से कूदकर वो रेलिंग से लटक गई थी औऱ बहुत मुश्किल से पाइप के सहारे दूसरी मंजिल पर उतरी थी, फिर भी लास्ट में हाथ फिसलने पर गिर कर पैर में चोट खा बैठी थी।

वह वक़्त देखते हुए उठी औऱ कुछ देर बाद ही वो उस रूम के बाहर खड़ी थी! दरवाजे पर हाथ रखा तो दरवाजा अभी भी खुला था लेकिन अंधेरा था! डॉली झट से जी कड़ा करके अंदर चली गयी और मोबाइल की लाइट जला कर इधर उधर देखने लगी, " कहाँ रखा होगा इसने स्कार्फ..?" वह मन ही मन बोली और इधर उधर ढूंढ कर थक गई तभी कुछ आहट हो गयी तो वो झट से छिप गयी!

दूसरी तरफ से आवाज आई , " ढंग से छिपी नही हो, नजर आ रही हो, बाहर आओ!!"

डॉली फिर भी छिपी रही लेकिन आवाज से वो समझ गयी थी कि ये

" ये चेहरा गुलाबी क्यों हो रहा है? जस्सी को शर्म आ रही है!!"

" हट न, शरमाना क्या है?"

" तो समीर का हाथ पकड़कर चल लहरों पर!"

" हट..!! अब मैं मारूँगी तेरे मुक्का! तू है न, तेरा हाथ पकड़कर चलूँगी!"

" चुप रह! मेरा हाथ तो है ही लेकिन एक हमराह भी होना चाहिए और वो समीर बने तो खराबी क्या है?"

" वो मुझे क्यों पसंद करेगा?"

" क्यों करेगा..? अरे वो कर चुका है, उसके चेहरे पर दिखता है कि जनाब लट्टू है तुझ पर!"

विनाश तभी करवट लेने लगा तो दोनो चुप हो गयी और डॉली विनाश के पास चली आयी, विनाश ने उसके गले मे बाँह लपेटते हुए कहा, " गुड मॉर्निंग!"

"गुड मॉर्निंग बेबी! अब उठो, रेडी हो जाओ! समीर चाचू आते होंगे!"

विनाश उठकर ब्रश करने चला गया तो डॉली ने पैर की मालिश करते हुए कहा, " विनाश के कपड़े निकाल दे, मैं उसे नहला देती हूँ!"

कुछ देर बाद सब रेडी हो गए तो खा पीकर बाहर निकले, राज दादी के रूम में था औऱ उनसे बात कर रहा था तो समीर वहाँ आते हुए बोला, " चलो न! विनाश तुम्हे कल से ढूंढ रहा है!"

" हम्म, आता हूँ!"

समीर बाहर आया तो जैस्मिन को देखकर पलके झपकना भूल गया! वो पैरट ग्रीन सूट में बहुत खूबसूरत लग रही थी!

" चाचू , मासी बहुत अच्छी लग रही है न आज?" विनाश ने पूछा तो समीर ने नजर हटाते हुए कहा, " मैं कुछ और देख रहा था!"

" झूठ मत बोलो, आप जस्सी मासी को ही देख रहे थे!"

" विनाश चॉकलेट!!" समीर ने उसका ध्यान भटकाते हुए कहा तभी विनाश बोला, " कोई बात नही , मां और मासी भी आपके बारे में बात कर लेते हैं कभी कभी!"
 
अब तो जस्सी और डॉली खाँसने लगी , जस्सी फटाफट विनाश का हाथ पकड़कर आगे बढ़ते हुए बोली, " आओ हम लोग तब तक घूमते हैं, ये लोग बाद में आते रहेंगे!"

राज रूम से बाहर आया तो डॉली को देखते हुए नजर हटा ली और आगे कदम बढ़ाते हुए बोला, " आप यहाँ है? मुझे उम्मीद नही थी आपके यहाँ होने की!"

वह तेज कदमों से आगे चल दी तो राज चुपचाप उसके पैरों की तरफ देखता रहा! सब जब आगे बढ़ गए तो डॉली ने पीछे मुड़कर देखा, राज कहीं नजर नहीं या तो वह कॉरिडोर में एक तरफ को मुड़ गई और पैर पकड़ कर बैठ गयी।

" आह!! कितना दर्द हो रहा है?" वह सिसकारी लेते हुए जैसे ही बोली, उसी पल कानो में आवाज पड़ी, " कितना..?"

डॉली ने चौंक कर ऊपर सिर उठाया तो बलजीत खड़ा था, डॉली ने जैसे ही जाने को कदम बढ़ाया, बलजीत आगे बढ़ा लेकिन उससे पहले ही राज ने आगे बढ़कर डॉली को अपनी बाँहों में उठाते हुए कहा, " पैरों में दर्द है तो कहना चाहिए था न!"

" मैं.....! वो...!!"

"क्या मैं वो...!!" राज कड़क आवाज में बोला लेकिन फिर भी आवाज में परवाह थी।

बलजीत ये देखकर एक तरफ को हो गया तब तक पत्रकार फ़ोटो क्लिक करने लगे तो डॉली ने घबराकर राज की गर्दन में अपना चेहरा छिपा लिया।

" सर हमने सुना आपका एक्सीडेंट हो गया??"

" आप ठीक है न मिस्टर शर्मा ..??"

" गर्लफ्रेंड हैं आपकी??"

"नही...!! औऱ अब रास्ता छोड़ दीजिए , जब सामने लाना होगा तब इनका चेहरा आपके सामने आ जायेगा, पर आज वो वक़्त नही है!! नाओ प्लीज एक्सक्यूज़ अस!"

राज ने उसका चेहरा छिपाए हुए ही उसको बाँहों में उठाया और आगे बढ़ गया क्योंकि समीर वहाँ आ चुका था औऱ उसने पत्रकारों को राज के पीछे जाने से रोक दिया था।

( क्रमशः )
 
" ये लड़की कौन है..?"

राज ने कोई जवाब नही दिया उधर डॉली ने कसकर उसकी कॉलर पकड़े हुए कहा, " मुझे नीचे उतारने के बारे में सोचना भी मत...!"

राज ने दाँत जमाते हुए धीरे से कहा, " पहले तो अपना चेहरा मेरी कॉलरबोन से हटाओ! बोल रही हो तो मेरी स्किन से होंठ टच हो रहे हैं तुम्हारे, मुझे गुदगुदी लग रही है!"

डॉली उसी तरह बोली, " जगह नही है यहाँ चेहरा हटाने की! अपने फोटोग्राफर से बोलो की यहां से हट जाए फिर मैं भी चेहरा हटा लूँगी!"

" वो क्यों सुनेंगे मेरी..? उन्हें तो जो चाहिए, वो मिल गया है!"

" तो मैं भी नही सुनूँगी आपकी!" डॉली बोली तो राज की गर्दन से उसके होठ टच हुए और राज ने उसे फौरन अपनी बाँहों से नीचे उतार दिया!

डॉली ने फिर भी अपना चेहरा सामने नही किया तो पत्रकार बोले, " बताइये न सर कौन है ये?"

" क्या लगता है आपको कौन है...?" राज ने अब गम्भीरता से पूछा।

राज ने उसे गाड़ी में ले आकर बिठा दिया और खुद भी बैठ गया तो डॉली अपने बाल सेट करने लगी! राज ने उसे इतना सहज देखा तभी आगे बढ़कर अचानक उसका पैर मोड़ दिया तो डॉली ने उसके कंधे में नाखून चुभा दिया और बोली, " कितना दर्द हुआ!"

"पैर ठीक हो गया न!" राज ने रुखाई से कहा तो डॉली ने पैर को घुमाकर देखा, पैर सचमुच ठीक हो गया था।

राज ने अब उसे एक नजर देखते हुए कहा, " और थोड़ी देर को शान्त रहा करो, खासतौर पर जब मेरे साथ रहो! मतलब शरीर मे चिपककर कौन बोलता है?"

" मैं बोलती हूँ! और मैंने नही कहा था चिपकाने को! आपने खुद मुझे उठाया था!"

"अहसान फरामोश लड़की!! मैंने उठाया भी तो क्या, मैंने नही कहा

करुंगा बड़ा होकर शादी!"

" विनाश !! मुझसे तो कह दिया ये सब लेकिन अपनी मम्मा से मत कहना!"

"क्यों?"

"देखो उनकी तरफ , कितनी खुश हैं न??"

" हां!"

" तो वो इन बातों को सुनकर परेशान हो जाएंगी, खुश नही रह पाएंगी!"

" ठीक है मैं उनसे नही कहूंगा कुछ भी!"

" हम्म, गुड!"

" आपके कंधों पर क्या हुआ, किसी ने नोंच लिया?"

" हां!!"

" किसने?"

" आपकी मम्मा ने क्योंकि मैंने उन्हें उठा लिया था न इसलिए!"

लहरों से खेलते हुए कहा, " बहुत, ऑसम है!"

राज ने अचानक आकर विनाश के पास बैठते हुए कहा, " मजा आ रहा है??"

" हां, बहुत लेकिन ...!"

" अब भी लेकिन..?"

" हाँ लेकिन सबसे ज्यादा मजा तो मुझे तब आया जब आपने मम्मा को गोद मे उठाया था!"

" हम्म! शैतान बालक उन्हें पैर में चोट लगी थी बस इसलिए!"

" बस इसलिए..! आपको मम्मा अच्छी नही लगती? कितनी तो सुंदर है?"

" बेशक खूबसूरत हैं, लेकिन अच्छा लगने का ये मतलब तो नही की मैं उन्हें यूँ ही बाँहों में उठा लूँ!"

" अच्छा अब समझा!"

" क्या समझे..?"

" यही की आपको ऐसे उन्हें उठाना अच्छा नही लगता तो आप शादी कर लो न मम्मा से! फिर आप पे कोई गुस्सा नही करेगा! मैं भी तो

" मैंने पहले ही कहा था कि मुझसे खुद आकर लिपटी तो जमानत मुमकिन नही होगी मेरी जद से!"

" मैं क्यों लिपटूंगी आपसे..? मुझे किसी पागल कुत्ते ने नही काटा!"

" ऐसा क्या बुरा है मुझमे...?"

"अच्छा भी क्या है आपमे..?"

" सब कुछ अच्छा है, तभी तो बिना मेरी परमिशन मुझसे अंधेरे कमरे के लिपट गयी और फिर पैसे भी दे दिए गले लगने के!"

" ओ प्लीज! पता नही आप क्या बात कर रहे हैं?"

राज ने उसे अपनी तरफ खींचते हुए घुमाकर कहा, " तो आपको नही पता कि मैं क्या बात कर रहा हूँ?"

" छोड़िये मुझे, विनाश भी है यहाँ!"

" उसी ने मुझे आपसे दोस्ती करने भेजा है, और परेशानी क्या है करीबी से? आप तो माहिर हैं न करीब जाकर किसी को भी अपनी मर्जी से पे करने में!"

"मिस्टर शर्मा ! आपके पास कोई सबूत नही की मैंने ऐसा कुछ किया है! छोड़िये मुझे!"

क्लिक करवा दी थी और दादी के पास चली आयी थी।

राज भी उधर ही चला आया , उसने टेंट रिसोर्ट की बुकिंग की हुई थी! वह लोग अब उधर चले गए , कुछ देर आराम करने और ड्रेस चेंज करने के बाद वह लोग दादी के पास इकट्ठे हो गए!

समीर जैस्मिन के पीछे ही चेयर लगाकर बैठ गया ताकि उसे चुपचाप देख सके और उसे पता भी न लगे!

राज और डॉली दादी कब सिरहाने और पैताने बैठे थे, दादी खुश होते हुए बोली, " कितना अच्छा लग रहा है , लग रहा है कि मेरा पूरा परिवार साथ है!"

राज ने डॉली की तरफ देखा और बोला, " कुछ लोग चुप होने का दिखावा कर रहे हैं!"

"दिखावा क्यों करेंगे? आपके सामने दिखावा करने के पैसे नही मिल रहे हैं!"

" हर काम पैसों से ही क्यों जोड़ती हो आप?"

" क्योंकि मैं यहाँ पैसों के लिए ही काम करती हूँ!"

राज को बहुत बुरा लगा और वो बोला, " इसलिए आपको लगता है कि हर आदमी पैसों के लिए काम करेगा! फिर वो चाहे या न चाहे!!"

" आप जितने शरीफ बनते हैं उतने हैं नही!!"

"वैसे तो मैं कभी शरीफ नही बनता क्योंकि मैं हूँ नही! लेकिन फिर भी आपको अगर लगता है कि मैं शरीफ नही तो आपके आगे मैं आज से सारी शराफत छोड़ दूंगा..!!"

डॉली को अब कोई जबाब नही मिला तो उसने मुँह बनाया तभी राज बोल उठा, " बस चलता तो फिर काट लेती, है न..??"

दादी अब हँस पड़ी और बोली, " तू भी कोई कम नही था काटने में!"

" दादी प्लीज!!" राज ने उन्हें रोका।

"क्या दादी प्लीज! सब सुनो भई, एक बार कलकत्ता से कुछ मेहमान आये थे तो इसकी चारपाई ही उन भाईसाहब को रात में दे दी गयी, ये बार बार मना कर रहा था लेकिन किसी ने सुनी नहीं! रात में ये चारपाई के नीचे घुस गया और जब सब सो गए तब निकलकर उन अंकल का कान काटकर झट से वापस चारपाई के नीचे घुस गया। वो शोर मचाने लगे कि कुत्ते ने कान काट लिया, कुत्ते ने कान काट लिया!!'

डॉली हँसने लगी और साथ मे बोलती रही, " कुत्ता..!! उपमा भी तो देखो!!"

" बस!! बस!! ज्यादा हँसने की जरूरत नही है!" राज चिढ़कर बोला

डॉली चेंज करके विनाश को प्यार करके दादी के पास चली गयी! वह सो गई तो राज रात में एक बार कमरे तक आया लेकिन दरवाजा अंदर से लॉक देखकर वापस चला गया।

सुबह जल्दी ही उठकर डॉली दादी को लेकर बाहर जाने को हुई तो दादी ने मना कर दिया लेकिन डॉली नही मानी और उन्हें अपने साथ लिवा ले गयी, बीच का खूबसूरत सूर्योदय दिखाने को! दादी की चेयर को एक तरफ लगाकर उन्हें बैठाकर वह विनाश का हाथ पकड़े लहरों पर दौड़ गयी, उसके साथ रेत के घर बनाने लगी तो विनाश खिलखिलाकर हँसने लगा! जैस्मिन भी उठी तो विनाश को अपने पास न पाकर वह भी बाहर निकल आयी , समीर भी तभी निकल रहा था! दोनो की नजर मिली तो जैस्मिन मुस्कुरा दी, उसे मुस्कुराते देखकर समीर भी मुस्कुरा दिया और फिर बीच की तरफ इशारा करते हुए बोला, " चलें!"

" हम्म!" जैस्मिन ने कहा।

" हम्म, कुछ कहना है??"

" तुमसे..! शक्ल देखी है अपनी!"

" देखी तो नही है लेकिन जब किसी खूबसूरत लड़की की नजर मेरा चेहरा तलाश रही थी तो मतलब कुछ तो बात है ही इस चेहरे में!"

"तुम..! तुम न...!!"

" क्या मैं...?"

" बहुत ओवर स्मार्ट बनते हो खुद को...! इटिटेट करके रख दिया।"

" तो आप मुझे इरिटेट कर लो, मैं बुरा नही मानूँगा!"

" आहह..!! ये लड़का...!! हटो..!!"

" कहाँ हटूँ, फिर निगाहे तलाश करने लगेगी तो...??"

" नही करेंगी..!!" कहते हुए वो आगे बढ़ी तो लहरों में ही धड़ाम से गिर पड़ी!

" अरे रे!" कहते हुए समीर हँस पड़ा तो जैस्मिन उठने को हुई लेकिन नही उठ पायी तो समीर आगे बढ़ा औऱ उसे थामकर उठाते हुए बोला, " भीगा चेहरा बहुत खूबसूरत लग रहा था बस इसीलिए देखने के लालच में नही उठा रहा था!"

जैस्मिन का चेहरा सुर्ख हो उठा औऱ उसने झट से अपना हाथ उसके हाथ से खींच लिया तो समीर भागती हुई जैस्मिन को देखकर बोला, " ये क्या बात हुई मेरी तारीफ में भी चंद अल्फाज गिराती जाओ!"

जैस्मिन ने जाकर विनाश को बाँहों में भरकर चूम लिया तो विनाश गाल पोंछते हुए बोला, " ओहहो मासी , ऐसे नही करते! पहले चाचू की पूरी बात सुन लेनी चाहिए!"

" सुन ली..!"

" अच्छा! मुझे लगा नही सुना!"

" तुम तो यहाँ खेल रहे हो न! फिर कैसे पता कि मैं क्या सुन रही हूं, क्या नही?"

" मैं यहाँ खेल रहा हूँ लेकिन ध्यान मेरा आप पर औऱ चाचू पर ही था।"

" शैतान..!!" कहते हुए जैस्मिन उसे गुदगुदी करने लगी तो विनाश हंसता हुआ यहाँ वहाँ भागने लगा!

जैस्मिन उसके पीछे भागी तो विनाश जानबूझकर उसे समीर की दिशा में ले गया और फिर बीच से अचानक हट गया तो जैस्मिन ने समीर को ही पकड़ लिया! समीर औऱ जैस्मिन आमने सामने एक दूसरे को करीब पाकर तुरंत हट गए क्योंकि विनाश ताली बजाते हुए हँस रहा था!
 
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