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Kamukta kahani काला साया - रात का सूपर हीरो

[color=rgb(85,](UPDATE-31)

वो दरवाजा पे दस्तक दिए जा रही थी ऊसने आवाज़ लगाई पर देवश ने दरवाजा नहीं खोला..अचानक ऊसने खुद ही दरवाजे को ज़ोर से धकेला दरवाजा खुल गया.दरवाजे से अंदर जाते ही ऊस्की मुँह से चीख निकल पड़ी..एक शॅक्स मुकोता पहने उसके सामने चाकू लिए खड़ा था..

शीतल का हाथ काँपने लगा उसका पूरा बदन सिहर उठा.सामने खड़ा वो मुकोता पहना शॅक्स जिसके राक्षस जैसे भयंकर मुकोते को देखकर शीतल की सांसीएन काँप उठी वो एक एक कदम पीछे जैसे होती वो शकस आगे बढ़ने लगता है और एकदम से वो उसके इतने करीब आया अपना चाकू लिए की शीतल ने झुककर अपनी आंखें क़ास्सके बंद की और ज़ोर से चीखी

ऊस्की चीख तब शांत हुई जब ऊस शॅक्स ने उसे बाहों में काश लिया और अपने चाकू को फैक्टे हुए.अपने मुकोते को उतार फैका."देवस्सह भैयाअ आप"...शीतल ने चैन की साँस ली..देवश मुस्कराए बस कुछ देर वैसे ही पेंट पकड़े बिस्तर पे हस्सते रहा उसे शीतल की बेवकूफी पे बड़ा हँसी आया

शीतल : आपने तो मेरी जान ले ली होती आज (शीतल ने चिल्लाके कहा)

देवश : हाहाहा तुम डर गयी ना?

शीतल : ऐसे कोई मुकोता पहनें खड़ा होता है क्या? बाबा हमें लगा की आप हमको मर ही डालोगे

देवश : हाथ पगली आ इधर (देवश ने नखरे करती शीतला का हाथ पकड़ा और उसे अपने बगल में बिठाया उसके ज़ुल्फो पे उंगली फहीरते हुए कंधे पे हाथ रखा) अरे मेरी मां नाराज़ मत हो असल में तू तो जानती है ना तेरा भाई कितना टेन्शन में दुबला पट्तला होते जा रहा है

शीतल : हाँ लगता तो है पर आपने ये मुकोता कहाँ से लिया?

देवश : असल में ये खूनी ने पहना था जिसकी केस मैं हैंडिल कर रहा हूँ ये सबूत है मेरे पास (शीतल बारे ध्या न्स सुनती रही)

शीतल : फिर भी आपको ऐसे चीज़ें घर में नहीं रखनी चाहिए पता है मैं कितना डर गयी थी

देवश : तू भी ना अच्छा चल अपना मूंड़ मत खराब कर ये बता आज तू लेट कैसे हो गयी?

शीतल : मां के साथ बर्तन माझने गयी थी एक मालकिन के यहां इसलिए लाइट हो गया फिर वहां से खेत में मां का हाथ बताया मां बहुत तक गयी इसलिए मुझे भेज दिया

देवश : आजकल तू बड़ी समझदार हो गयी अपने भाई का इतना ख्याल रखने लगी है (देवश ने शीतल को आँख मारी शीतल का चेहरा गुलाबी हो गया [ईम्ग]फाइल:///सी:\डोकूमए~1\यूज़र\लोकल्स~1\टेंप\ंसोहटँल1\01\क्लिप_इमेज001.जिफ[/ईम्ग])

देवश ने मुकोते को दराज़ में रख दिया और फिर चाकू को किचन में ले जाकर रखा कुछ देर बाद देवश आया उसके हाथ में एक बॉक्स था..शीतल पहले तो डर गयी कहीं ये भी देवश का कोई मज़ाक ना हो उसे डरने के लिए..पर देवश ने उसे खुद खोलने को कहा.शीतल ने जैसे ही बॉक्स खोला ऊसमें चमचमाती पएेल थी

देवश : कैसी लगी?

शीतल : श भैयाअ कितनी खूबसूरत हाीइ

देवश : तू जब पाओ पे पहन के छान चनाएगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा पतः आई एक ही तू ही तो है जिसे मैं इतना चाहता हूँ

शीतल : श भैया (शीतल ने खुशी के मार्िएन देवश को अपने गले लगा लिया अफ ऊस्की छातियो की सक़ती देवश के खड़े लंड को जमाने लगी)

देवश : अच्छा अब ये बता ऊस दिन तू जो आई तूने मुझे और काकी मां को एक साथ देखा तो तुझे कुछ प्राब्लम तो नहीं हुआ ना देख तू मेरी बहाना है और मैं अपनी प्यारी बहन से कुछ छुपाना नहीं चाहता

शीतल : तो क्या आप मां के साथ?

देवश : नहीं नहीं तेरी मां मेरी मां है वो मुझे कलेजे से खिलाती है सुलाती है क्योंकि ऊँका कोई बेटा नहीं (शीतल थोड़ी मायूस हो गई.देवश ने उसके उदासी चेहरे को उठाया और मुस्कराया)

शीतल : हाँ मां आपसे बहुत प्यार करती है.(देवश मन ही मन मुस्कराया इसको कहना बड़ा ही मुश्किल है की ये इसकी मां अपर्णा के साथ सोता है अगर ऐसा कह दिया तो शीतल फिर देवश से रिश्ता नहीं बनाएगी)

देवश : अच्छा शीतल मैं तुझे कैसा लगता हूँ?
देवश : अगर मैं तुझसे एक बात कहूँ तो तू मानेगी

शीतल : आप जो कहना चाहते हो मैं समझ रही हूँ (देवश की गान्ड फॅट गयी क्या इसे समझ आ गया की मैं क्या सोच रहा हूँ) आप हमसे वो वाला प्यार करना चाहते हो

देवश : मैं तो तुझहहसे हर तरीके का प्यार करना चाहता हूँ पगली [ईम्ग]फाइल:///सी:\डोकूमए~1\यूज़र\लोकल्स~1\टेंप\ंसोहटँल1\01\क्लिप_इमेज002.जिफ[/ईम्ग]तू मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी

शीतल : मुझे डर लगता हाीइ कहीं मां ने सुन्न लिया?

देवश : तू बनाएगी मां को या मैं?

शीतल ने कुछ और नहीं कहा बस सोचती रही.देवश ने उसे थोड़ा टाइम दिया सोचने का.और फिर धीरे धीरे उसके करीब होने लगा..और ऊसने फौरन शीतल के सूट के अंदर से ही ओसॉके पेंट पे हाथ रख दिया.शीतल कसमसा उठी वॉ नजरें झुकाए काँपने लगी इधर उधर अपने च्चेरे को करने लगी.शायद वो बहुत सहम रही थी.एक कुँवारी लड़की को नीचे लाना इतना आसान नहीं उसे धीरे धीरे शराब की बोतल में ढालना पढ़ता है

देवश ने धीरे से गले पे शीतल के चूमा शीतल ने आँख बंद कर ली..फिर देवश धीरे धीरे उसे गर्दन पे होंठ फहरने लगा तो कभी उसके कान की बलियो को मुँह में लेकर चूमता.तो कभी उसके गाल को सहलाता ऊसने धीरे धीरे शीतल को अपने प्यज़ामे के ऊपर बिता लिया उसका खड़ा लंड शीतल की गान्ड पे चुभने लगा.स्शेटल महसूस कर सकती थी दोनों में कोई बात चीत नहीं हो रही थी..

और फिर धीरे से देवश ने उठती कसमसाती शीतल का हाथ पकड़ लिया.."भैया चोद दो मुझे डर लग रहा है"..शीतला ने छुड़ाने की कोशिश की "अरे नखरे मत कर..बहुत प्यार से करूँगा आज मेरे पास आ"...देवश ने एकदम से शीतल को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होठों पे होंठ सटा दिए.शीतल को बिजली का झटका लगा और वो खुद पे खुद निढल पढ़ने लगी और देवश का साथ देने लगी दोनों एक दूसरे की होठों को चूसते रहे..शीतल को किस करना तो आता नहीं इसलिए थूक जुबान सब देवश के मुँह में आ गयी.शीतल के साथ वाइल्ड किस लाजवाब था

देवश ने उठके एक एक करके शीतल के सारे कपड़े ज़मीन पे फैक दिए..और उसे ब्रा और पैंटी में घूर्रने लगा.शीतल ने देवश के बीच में खड़े लंड को देखा और फिर जब देवश ने लंड को बाहर निकाला तो शीतल की साँसें अटक गयी "हें दायया इतना बड़ा"...शीतल ने हववव की आवाज़ निकली

देवश : बेटा ये मोटा लंबा लंड तू जैसी कामसीँ काली को औरत बनता है
शीतल : पर इसमें मजा कैसे आएगा?
देवश : बस देखती जा

देवश ने एक ब्लूएफील्म ऑन कर दी पास ही के पीसी पे जिसपे वो काम कर रहा था.ऊसमें एक केरला आंटी दो काले रक्षासो जैसे आदमियों से चुद रही थी मुँह में ले रही थी शीतल को बड़ा गीन लगा.पर देवश ने कहा इसे चूसने से औरत की छातिया बढ़ती है और ऊँका यौवन खिलता ही एक गवार जाहिल लड़की को साँचे में उतारने के लिए ऐसा कहना ही पढ़ता है

देवश शीतल की ब्रा उतार देता है..और ऊस्की इतनी मोटी मोटी छातियो को देखने लगता है जो उमर के हिसाब से जरूरत से ज्यादा बड़ी थी हो भी क्यों ना मां का जो रूप था ऊसमें..देवश दोनों छातियो को क़ास्सके क़ास्सके दबाने लगता है और उसके निपल्स को मुँह में भरके चुस्सता है..शीतल के छातियो को दबाने से शीतल आहें भरने लगती है यानि उसे मजा आने लगता है..देवश को शीतल की पैंटी गीली नज़र आती है..शीतल की निगाह ब्लूएफील्म पे है और इधर देवश उसके जिस्म से लिपटा छातियो को दबाए जा रहा है.

शीतल : बहुत ही अच्छे[/color]
 

[color=rgb(51,](UPDATE-32)

कुछ देर बाद देवश नंगा ही बिस्तर पे बैठ गया और पेंट को चूमता हुआ शीतल के नाभी से लेकर नीचे जुबान फहीरता है शीतल देवश के बालों पे हाथ फेरते है.और फिर वो झट से पैंटी नीचे खिसका देता है पहले तो शीतल काफी हस्सने लगी.पर देवश ने ज़बरदस्ती से उसे नंगा कर दिया और उसे गाओड़ी में उठाकर पलंग पे लेटा दिया.देवश ने शीतल की टाँगें चौड़ी की मज़बूती से और उसका गुलाबी भाग देखने लगा अफ कितनी चिकनी थी

देवश : तुम साफ रखती हो अपने चुत को
शीतल : हाँ बिना साफ किए खुजली होती है
देवश : हम बहुत खूब (और देवश धीरे धीरे अपने मुँह को चुत के नज़दीक लाता है.शीतल हड़बड़ा जाती है)
शीतल : भैया ये क्या कर रहे हो?
देवश : सस्शह चुप्प्प्प
शीतल : श भैया आहह उईईइ आहह सस्स (देवश जैसे ही चुत पे मुँह रखतः आई ऊस्की गंध उसके नाक में समा जाती है)

पसीने और पेशाब की गंध की मिली जुली महक.देवश शीतल की चीकनी गीली रस से भारी चुत में मुँह लगाए चाटने लगता है.और शीतल बस काँप उठती है..वॉ चहके भी देवश को रोक नहीं पाई इस करार मजे को खुद से अलग नहीं कर पाई.वो बस सर इधर उधर घुमाने लगी.होठों पे दाँत दबाने लगी..और डीवोस के बालों पे हाथ फेरने लगी

"आहह से आहह आअहह"...कभी कभी शीतल चीख पार्टी जब देवश उसके कोलाइटिस को मुँह में भरके चुस्स देता.शीतल कसमसाए ऐतने लगी और फिर उसके पूरे टाँग में झुझुरी सी दौड़ी और ऊसने बीच से एक फावा निकाला जो सीधे देवश के चेहरे को पूरा भीगोटा हुआ फर्श पे जा गिरा

देवश ऊस गीली रस भारी चुत को फिर चुस्सने लगा.ऊस्की फहाँको को मुँह में भर लिया.उफ़फ्फ़ क्या लज़्ज़तदार मादक खुशुबूदार स्वाद था ऊस चुत का..देवश ने धीमें से एक उंगली अंघुता सहित छेद में पुश किया.तो शीतल सिहर गयी उसे कुछ गाड़ने लगा पर वॉ उठ नहीं पाई ऊसमे नैसे जान नहीं थी.फिर देवश ने धीमें से उंगली को तेज कर दिया..शीतल उसे मना करने लगी उसे चब्ब रहा था..देवश ने चुत के कुवरेपन का मुआइना करते हुए घुटनों के बाल बैठ गया

और फिर पास रखिी सेक्स लूब्रिकेट को बारे ही अच्छे से चुत के मुआयने पे लगाया..और अंदर तक उंगली से चिकना से कर दिया ताकि सुराख में लंड आराम से घुस सके.फिर ऊसने अपने लंड पे कॉंडम छड़ाया..ये सब कार्यक्रम शीतल देख रही थी ब्लूएफील्म में सफेद सफेद गाढ़े रस से औरत भीग रही थी फिर ऊसने कुछ देर लंड को मसला और सब ने उसे वैसेह ई हालत में चोद दिया

शीतल के मन में हज़ार सवाल थे उसे ध्या नहीं रहा की कब देवश ने चुत में लंड बारे ही आराम से धकेल दिया.जब 2 इंच ही अंदर लंड प्रवेश किया बस शीतल ज़ोर से दहढ़ उठी उसे बहुत ज़ोर का दरर्द हुआ.देवश ने उसे क़ास्सके पकड़ लिया.शीतल ने देवश को धकेलना चाहा..देवश वैसे ही रुका रहा चुत में लंड थोड़ा सा घुसा था फिर ऊसने थोड़ी सी गति बधाई..शीतल को काफी दर्द होने लगा वॉ मना करने लगी देवश नहीं मना अब शायर के मुँह पे खून लग चुका था अब वो कहाँ रुकता?

ऊसने शीतल के चुत में एक बार फिर लंड को थोड़ा ज़ोर से दबाया और एक हल्का धक्का मारा.बात नहीं बनी ऊसने फिर ज़ोर लगाना शुरू किया..शीतल ने टाँग भीच ली देवश ने उसे गान्ड ढीला छोढ़ने को कहा पर वो नहीं मानी देवश ने पूरी ताक़त लगा दी और इसी ताक़त के चक्कर में लंड धस्ता चला गया चुत में शीतल की आँखें बाहर आ गयी.वो दर्द से छटपटाने लगी.जैसे कोई सुई चुबो दी हो.."आअहह हाययए दूर्गगा मां मर गयी मैंन्न आहह निकालूओ आअहह"..बहुत ज़ोर से पलंग हिल उठा

पर देवश ने शीतल के बालों पे हाथ फायरा उसके माथे पे हाथ फायरा उसे चुप कराया..पर शीतल के आंखों में दर्द के आँसू आ चुके थे.."बाबू हो गया बस अब तुम कुँवारी नहीं रही आहह सस्स बाप रे इसकी कितनी स्क़त है दर्द हो रहः आई लंड में मेरे"...देवश ने अपने लंड के जलन को बर्दाश्त किया और चुत में लंड घुसाए ही रखा

शीतल बस रोए जा रही थी."आहह भैया जैसे हॅगने के वक्त दर्द होता है वैसे ही मुझे महसूस हो रहा है जैसे कोई सख्त चीज़ चुत में फ़ासस गयी"...देवश हस्सा..और ऊसने बारे ही प्यार से नादान शीतल के गालों को चूमा.और फिर धक्के थोड़े देने शुरू किए.पर दर्द बरक़रार रहा.देवश चुदाई करता रहा..और उसी हालत में हल्का हल्का धक्का लगाने लगा."आहह आहह आहह"..शीतल हर धक्को से चिल्ला रही थी.उसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था करीब कुछ 10 मिनट बाद ही उसे थोड़ी राहत मिली..लंड की मोटाई बहुत ज्यादा थी जिस वजह से शीतल को इतना दर्द सहना पड़ा.पर देवश खुश था उसके लंड के आख़िर बिल ढूँढ ही निकाला.देवश ने धक्के थोड़े तेज किए तो शीतल को गाड़ने लगा और वो दर्द से आहह आ के स्वर फीरसे निकालने लगी

देवश ने वैसे ही हालत में उसे कई देर तक लेटे लेटे चोदा.और फिर लंड को चुत के मुख से निकाला फकच्छ से लंड बाहर आ गया और साथ में गीली चुत से रस और थोड़ा खून बाहर निकला.देवश ने कुछ नहीं बताया शीतल को उसे लाइताय रखा और उठके एक गंदा काप्रा लाके उसके चुत को अच्छे से पोंछा और उसके चोट के अंदर भी उंगली काप्रा डालकर पोंछा.चुत से खून रिस रिस के निकल रहा था..देवश ने फौरन अपने खून लगे कॉंडम को भी निकालके फैक दिया उसे लगता था की इससे इन्फेक्षन होता है बार बार एक ही कॉंडम के उसे से.ऊसने फौरन शीतल को अपने ऊपर चढ़ाया पहले तो दर्द के मारें शीतल से उठा नहीं जा रहा पता लेकिन ऊस्की सुराख पूरी तरीके से चौड़ी हो चुकी थी

और काफी गहरी भी अब लंड जल्दी से चुत के मुआने में जा सकता त चुत का द्वार खोल के भोसड़ा बंचुकी थी.ऊसने फौरन डायरी ना करते हुए धीरे धीरे बोल बोलकर शीतल को अपने लंड पे सवार किया शीतल उठने लगी.पर देवश ने बारे ही संजीदगी से उसे हौले हौले नीचे से धक्के देने शुरू किए जाँघ गान्ड से चिपक जाई गान्ड उचक जाती शीतल की और अपनी चुत में लंड को घपप से ले लेती.चुत आराम से अंदर बाहर होने लगा पर दोनों के अंगों में इतना दर्द था की अब रहा नहीं जा रहा था..लेकिन इससे चुदाई का सारा मजा खराब हो जाता है यही सोचकर देवश बस लगा रहा

देवश ने फुरती से शीतल को अपने ऊपर लेटा दिया और ऊस्की ज़ुल्फोन को हटा कर उसके होठों को चुस्सने लगा..दोनों एक दूसरे को बेदर्दी से चूमने लगे.शीतल देवश के निपल्स से खेलने लगी देवश उसे बाज़ुओ में लिए नीचे से लंड को चुत में अंदर बाहर करने लगा.."आहह से आहह से आहह".शीतल आहें भरने लगी.लौंडिया को मजा आ रहा था कोई शक नहीं

देवश ने धक्के अब करार और तेज कर दिए.शीतल की आहें ज़ोर से गूंजने लगी.और देवश किसी रेलवे गाड़ी की तरह बढ़ता में लंड को चुत से अंदर बाहर करने लगा.और जल्द ही देवश ने रफ्तार बड़ी ही तेज कर दी..थोड़े देर बाद दोनों उठे और फिर देवश ने शीतल को नया पोज़िशन लेना सिखाया कुतिया बनने का

इसमें शीतल दर्द के मार्िएन ऐसे ही हाथ बिस्तर पे रखकर पेंट के बाल लाइट गयी और देवश उसके ऊपर चढ़के गान्ड के फहाँको में लंड घिस्सते रहा.फिर ऊसने चुत के मुआने पे धायर सारा लूब्रिकेट फिर लगाया और इस बार गान्ड की छेद में भी..और बड़ी ही धीमें से लंड चुत में डाल दिया लंड तो चुत में डाल गयी पर गान्ड की बात जुड़ा थी.कुछ देर तक देवश शीतल की गान्ड पकड़ा उसे हौले हौले चोदता रहा..शीतल को बेहद मजा आने लगा अब उसे चुदाई और मर्द औरत के बीच का सुख का अहसास हुआ

कुछ देर में ही देवश ने शीतल को पूरा लेटा दिया और ऊस्की गान्ड में लंड डालने लगा ...शीतल दर्द से चिल्ला उठी.पर देवश का पूरा वज़न ऊसपे आ गया.आज तो वो किसी भी सूरत में कुँवारी जाने नहीं वाली थी घर.देवश ने ऊस्की गान्ड में लंड को आधा इंच तक घुसेड़ दिया था ऊस दिन शीतल के इकाफी चीखें निकली थी उसे खूब दर्द से गुजरना पड़ा..लेकिन वहशी देवश कहाँ छोढ़ने वाला था ऊसने और भी क़ास्सके गान्ड में लंड घुसाया और हुआ यूँ की गान्ड की भीतर लंड प्रवेश आख़िर कार कर ही गया और फिर शर हुआ दोनों का संगम

देवश वैसे ही पुश उपस की तरह ऊपर नीचे लंड को घुसता रहा खुद के बदन को ऊपर नीचे करता रहा.नीचे शीतल पीसती गयी और देवश गान्ड में धक्के पेलता रहा..और फिर जब उसका गान्ड से जी भर जाए तो चुत में लंड डाल देता.इस बीच ऊओसका कॉंडम फॅट गया धक्के तेज हो गये और इसी कशमकश में लंड से रस निकलते निकलते बच्चा.देवश ने शीतल के चेहरे पे ही अपना कामरस चोद दिया.और फारिग हो गया शीतल को ऊस्की महक बर्दाश्त नहीं हुई और वो पलंग के दूसरी ओर होंठ पे लगे वीर्य को थूकने लगी

देवश पसीना पसीने बेहाल हो गया फिर भी उसे ऊस हालत में शीतल को साफ करना था उसे गंदे कपड़े से शीतल के चुत को साफ किया खुद के कॉंडम को निकलकर फैका..फिर चादर हटाई और ऐसे ही गद्दे पे दोनों सोए.देवश ने शीतल के चेहरे को अच्छे से साफ किया दूसरे कपड़े से और फिर उसे अहेतियात और कुछ बातें बताई..ताकि आगे छलके वो गर्भवती ना हो जाए..शीतल को बड़ा गुस्सा तो आया था कारण वो जब उठी तो उसे अपनी गान्ड फील नहीं हो रही थी.वो टाँगें चौड़ी चौड़ी करके चल रही थी चुत के मुआने पे अब भी दर्द था..देवश ने फटताफट थकान को चोद उसके लिए गरम पानी उबाला और उससे ऊस्की सूजी चुत की सैकाई की और फिर तब जाकर एक ट्यूब फटी चुत के जगह जगह जहाँ चील गयी वहां लगाया और फिर कॉटन से अपने लंड के सूपड़ा जो चील गया ऊसपे लगाकर फ़ौर्दर्म् लगाया तब जाकर उसे कुछ राहत महसूस हुई..[/color]
 

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ऊस दिन शीतल ने देवश से कुछ और नहीं कहा बस वो बहुत तक गयी थी जगह जगह शरीर का अंग टूट रहा था चुत चिल्लाने से जलन थोड़ी बहुत हो रही इत ओओ घबराई हुई थी पर देवश ने समझाया ऐसा होता है दोनों ने नहाया किसी तरह फिर उसे काफी समझाया की कोई प्राब्लम नहीं होगी उसे उसे चुप रहने को बोला और काकी मां को कोई भी बात ना बताए ये हिदायत दी..शीतल और देवश ने एक दूसरे को स्मूच किया

और कुछ दायरटक शीतल देवश से लिपटी रही दोनों गद्दे डर बिस्तर सोए रहे और फिर जब पूरी तरीके से शीतल की थकान गायब हुई दर्द कम हुआ तो वो खुद पे खुद उठके कपड़े पहनकर देवश के माथे को छू के शाम में ही अपने घर चली गयी..देवश ने कुण्डी लगाई और बिस्तर पे आकर चोद हो गया

जिस दिन देवश ने शीतल की सील तोड़ी और उसे जवान लड़की से औरत बनाया.उसी रात काला साया भी अपनी महबूबा दिव्या के साथ अपने नये वीरान घर में बिस्तर गरम कर रहा था..दूर दूर तक सन्नाटा अंधेरा घर के अंदर.बिजली कांट दी गयी थी.फिर भी मौसम इतना अच्छा था की बाहर का ही खिड़की खोलने से हवा कमरे में आ रही थी.काला साया का हाथ दिव्या के हाथों की उंगलियों में फ़सा हुआ था.दोनों एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे.बिस्तर पे एक दूसरे से लिपटे चादर ओढ़े हुए थे.इतने में दिव्या ने काला साया को सारी बात बता दी की एक पुलिसवाला उसके पीछे लग गया.ये सुनकर काला साया को अच्छा तो नहीं लगा.और वो गंभीरता से सोचने लगा.और फिर ऊसने दिव्या को एक तरक़ीब बताई जिससे वो पुलिसवालो के नजारे में ना आए वो ऊस पुलिसवाले को खुद हैंडिल कर लेगा

दिव्या ने काला साया के मुकोते पे हाथ रखते हुए उसके चेहरे को सहलाया.काला साया ने मुस्कुराकर दिव्या को अपने सीने से लगा लिया."एक दिन जरूर मैं तुम्हें अपना चेहरा दिखाऊंगा दिव्या और वॉ दिन ज्यादा दूर नहीं"...काला साया दिव्या से और लिपट जाता है..नीचे फर्श पे परे उनके कपड़े साफ जाहिर करते है की इस अंधेरे साए में भी दोनों ने कितनी आग लगाई है

काला साया दिव्या के ऊपर फिर से सवार हो गया और दिव्या ने भी मुस्कुराकर अपनी टांगों को बिस्तर पे फैला लिया और काला साया के पिछवाड़े पे टाँग साँप की तरह लपट ली.जल्दी पलंग चरमरने लगा..और प्यार का मीठा आहेसास दिव्या लेने लगी.

अगली दिन ही देवश की आँख खुली सुबह के 6 बज चुके थे..आजकुच ज्यादा जल्दी उठ गया हो भी क्यों ना? कल शाम से ही वॉ थोड़ा सा खाना खाके शीतल की चुदाई में लगा और उसके बाद इतना तक गया की अब उठने की हिम्मत ऊसमे नहीं थी.किसी तरह ताक़त जुटाकर वो उठा.और जल्दी से अंडा और ब्रेड का नाश्ता करने के बाद..नहाने घुस गया.बाहर आकर ऊसने पलंग के नीचे से दुम्ब्ेल्ल और रिंग निकाला और अपनी कसरत में लग गया..कुछ तो ताक़त मिलेगी.कसरत खत्म करके सोचा क्यों ना एक बार शीतल का जायेज़ा ले लिया जाए

कल उसके साथ सेक्स करने के बाद ऊस्की क्या हालत होगी? ये जानना भी जरूरी है क्योंकि औरत्के साथ सेक्स करने के बाद देवश को हमेशा ये डर सताता है की कहीं वो गर्भवती ना हो गयी हो क्योंकि बाद में अबॉर्षन का खर्चा भी उसे ही देना पड़ेगा सेक्स होती ही ऐसी चीज़ है की जबतक करो तबतक जोश और फिर ठंडा होने के बाद टेन्शन ही टेन्शन..खैर देवश फोन करके शीतल का जायेज़ा लेता है.अपर्णा काकी फोन उठती है और बताती है की शीतल की आज हालत कुछ ठीक नहीं.उसे थोड़ा बुखार है देवश पूछता है की आख़िर उसे हुआ क्या? वो फ़िकरमंद होता है..लेकिन डरने की कोई बात नहीं थी क्योंकि वो पानी का ज़्ीडा काम करके बीमार हुई है ये अपर्णा बताती है.देवश मन ही मन मुस्कुराता है आख़िर थी तो कुँवारी ही उसे धीरे धीरे झेलने की आदत हो जाएगी

देवश पुलिस स्टेशन के लिए निकल जाता है.और फिर अपने काम में जुट जाता है.काम कुछ खास नहीं था दोपहर का ब्रेक लेकर देवश वापिस घर पहुंचता है..घर में आकर जैसे ही वो ताली निकलकर खाने के लिए फर्श पे बैठा ही था इतने में उसे एक लिफाफा दिखता है.दरवाजे के ठीक किनारे मानो जैसे किसी ने उसे दरवाजे के नीचे से फैका हो.देवश के माथे की शिकार तरफ जाती है.और वो उठके हाथ धोके लिफाफा उठता है ऊसपे ना तो कुछ लिखा है और ना कोई अड्रेस.वॉ टेबल पे लाके उसे फाड़ता है.और ऊस कागज़ को पढ़ें लगता है..जाहिर था ये धमकी थी और धमकी जिसकी थी उसे भी जाने में वक्त ना लगा काला साया

"मैं जनता हूँ तू मेरे पीछे है.और ये भी जनता हूँ की तू मेरी सक्चाई जानना चाहता है.ये जान ले की मैं किसका दुश्मन नहीं.पर ऊँका हूँ जो मेरे अपनों के और मेरे चेहरे के दुश्मन है.भलाई इसी में है की केस क्लोज़ कर दे अगर मुझे पता चला की तू मेरे पीछे अब भी है.तो सोच लेना तेरे पास दो ऑप्शन है खंडहर हाउस के पास आ जाना अगर वाक़ई तू ये चेहरा देखना चाहता है.लेकिन सोचले ऑप्शन 1 बहुत ही खतरनाक साबित होगा तेरे लिए.दूसरा ऑप्शन ये है की दिव्या का पीछा चोद वो तो एक बेसहारा लड़की है.पर हाँ उसे तो क्या किसी भी मेरे लोगों को तूने हिरासत में लिया तो सोच लियो"...लेटर को दुहराते हुए देवश कागज़ को फाड़ देता है.कानून का सिपाही होकर उसी को गुंडागर्दी का धौस

देवश मुस्कुराता है.ये बात तो साफ थी की काला साया दिव्या से जुड़ा हुआ है कहीं ना कहीं लेकिन ये भी था रहस्य जाने पे उसके जान को खतरा हो जाएगा..लेकिन देवश को ये जरूर पता चल गया की चलो इस बहाने काला साया के दिल में उसके लिए एक खौफ तो पैदा हुआ है.ऑप्शन 1 देवश को ज्यादा सूट किया.क्योंकि चुत मारना और चॅलेंज निभाना उसे बचपन से ही पसंद था

थाने में वापिस आकर.ऊसने काफी देर तक सोचा..और फिर प्लान को अंजाम दिया.पुलिस की मदद लेना सबसे बड़ी बेवकूफी है काला साया एक ही झटके में ऊँका तमाम कर डालेगा..अगर देवश अकेला जाए तो वो कम सतर्क हो जाएगा..पूबलीच तो पता लगा तो काला साया को बचाने और पुलिस पे कीचड़ उछालने में वक्त नहीं लगेगा.सबका अन्नड़ाता जो बिना फिर रहा है

देवश ने इस मॅटर को अपने हाथ में खुद ही लेने का फैसला कर लिया.और फिर ऊसने उसी दिन जीप बीच में ही रोक दी गंभीरता उसके आंखों में सवार थी..और फिर जीप से उतरके एक बारे से दुकान में घुस गया..कुछ देर बाद वो दुकान से बाहर निकाला और अपने हाथ में उठाई ऊस बेसबॉल बात को घूर्रने लगा.देवश ने काला साया को मारने के लिए हत्यार खरीद लिया था

क्या पता घर पे भी वो अटॅक कर सकता है? ऊस्की नजरें देवश पे ही शायद टिकी हो.घर पहुंचकर ऊसने फौरन पुलिस को इकतिल्ला की वॉ ये बात गुप्त रखे की काला साया को पकड़ने का ऑपरेशन वो शुरू कर रहा है..ऊसने पाँच बारे ऑफिसर्स को इस ऑपरेशन के लिए ड्यूटी पे लगाया.ऊन्हें हमको दिया अगर काला साया की परछाई तक दिख जाए ऊसपे गोली चला देना.देवश जनता नहीं था की वो अपने चॅलेंज के चक्कर कितने बारे तूफान को चुनौती दे रहा था

पूरे दिन वो मुकोता को घर में लिए अपने हाथ में पकड़े घूमता रहा.और बेसबॉल बात को साफ करके अपने हाथों में घुमाता है.जल्द ही रात हो जाती है..रात के 12 बजते ही तंन तन्न्न की आवाज़ घारी से सुनकर देवश उठ खड़ा होता है और अपने हाथों में बाइक ग्लव्स और एक मोटा जॅकेट पहन लेता है.पास रखी बेसबॉल बात को उठता है.और उसे अपने जीप पे रखकर सवार हो जाता है पूरे रास्ते उसका दिल ढक ढक कर रहा था अपर्णा काकी शीतल किसी को पता नहीं था की वॉ क्या करने जा रहा है? ईवन पुलिस तक को नहीं.
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[color=rgb(0,]रात गये वॉ ऊस खंडहर हाउस के पास पहुंचता है जिसकी जर्जर इमारत से फॅट फटके कई जमी हुई है और दीवारों से पादो की जड़ें निकल गयी है.ऐसी भयंकर रात में सुनसान सन्नाटे भरे वीरान खंडहर में वो अकेले ही प्रवेश करता है.साथ में एक मोबाइल है जिसे ऊसने स्विच ऑफ कर दिया.अगर क्कूह हो गया तो साला खुद ही सब संभालना पड़ेगा..पुलिस तो वैसे ही पीछे लगी है काला साया के लेकिन फिर भी दिल में एक डर तो रहता ही है[/color]
 

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देवश जनता था वॉ जल्द ही महसूस करेगा की आख़िर काला साया कौन है?.और वो पूरे वीरने खंडहर में बहुत की तरह इधर उधर टहलने लगता है.बीच बीच में टूटे कमरों में झाँकके देखता भी है सिर्फ़ टॉर्च की रोशनी.और कहीं सोए चमगढ़ हूँ हूँ करती उल्लुओ की आवाजें..बेटा अगर या मर दिए गये तो जीवन भर आत्मा बनकर ही तहलॉगे

देवश ने अच्छा ख़ासा खतरा अपने सर पे ले लिया था.अचानक उसे किसी कदमों की आवाज़ सुनाई देती है.वॉ फौरन उल्टे पाओ सीडियो के दीवारों के पीछे चुपके दरवाजे की ओर देखने लगता है.ऊस्की आंखें तहेर गयी वॉ एकदम गंभीर हो गया किसी भी पल वो अक्स उसके सामने आने वाला था..और अचानक वो सामने आया.देवश ने अपने पास रखकर बेसबॉल बात को काफी सक़ती से पकड़ लिया उसे एक ही वार में काला साया को सुला देना था.पर इतना आसान नहीं

वो जैसे जैसे ऊस अक्स के करीब जाने को हुआ एकदम से उसके माथे की शिखर गायब हो उठी.ये अक्स काला साया का नहीं किसी लड़की का था.

"दिवव्यया तूमम्म"...वो कंबल लपटी लड़की ने जैसे ही अपना कंबल हटाया तो ऊस अक्स को पहचानने में.देवश को डायरी ना लगी वो वैसे ही बहुत की तरह खड़ा चुपचाप हाथों में बेसबॉल बात लिए खड़ा रहा

"हाँ मैं".दिव्या के ऊन लवज़ो के बाद ही बदल गाराज़ उठा.बिजली की हल्की हल्की रोशनी पूरे खंडहर में फैल उठी.उसके चेहरे के गंभीरता भाव को देखते ही देवश का गला सुख गया मौके को हाथ में लेते हुए ऊसने एक बार चारों ओर देखा क्या पता शायद? काला साया पीछे से वार कर दे पर वहां कोई मज़ूद नहीं था सिवाय ऊन दोनों के

देवश : टीटी..तुम यहां क्या कर रही हो? (देवश ने फौरन उसके करीब आकर भारी लव्ज़ में कहा)

दिव्या : ये सवाल मुझे बोलने की जरूरत नहीं की मुझे किसने भेजा है? और ये भी नहीं कहूँगी की मैं यहां क्या कर रही हूँ?

देवश : देखो ज्यादा भोलेपन की ऐक्टिंग मत करो चुपचाप बता दो तुम्हारा काला साया किधर है वरना मुझे मज़बूरन तुम्हें गेरफ़्तार करना पड़ेगा काला साया को छुपाने के लिए

दिव्या : तो कर लो ना इंतजार किसका है? तुममें और ऊन बाकी लोगों में फर्क क्या जो गुनाहो को पनाह देकर इंसाफ को पकड़ते हो तुम्हारी ही जैसे लोगों के चलते काला साया पैदा होता है वरना आज इसकी नौबत ही नहीं आती

देवश : ओह चुत उप मिसेज़.पॉन एक प्यादा हो तुम ऊस्की और वो तुम्हें बखूबी उसे कर रहा है अब चुपचाप बताओ कहाँ है वॉ? ऊसने मुझे धमकिभरा खत भेजा आज ऊस्की लाश ले जाए बिना मैं चैन नहीं लूँगा

दिव्या : हां हां हां हां हां हां (दिव्या ऐसे हस्सने लगी जैसे कोई जोक सुना दिया हो उसे.साला आजतक जिसको भी धमकी दी वो साला पेशाब कर देता था पेंट में.और ये लड़की इसे तो लगता है मिर्गी की बीमारी चढ़ गयी हो)

देवश : चुपचाप बताऊं (देवश ने इस बार हॉकी को चोद पॉकेट से रिवाल्वर सीधे दिव्या के माथे पे लगा दी दिव्या की हँसी तो बंद हो गयी पर इस बार उसके आंखों में सख्त गंभीरता थी कहा जाने वाली नज़र ऐसा लग रहा था ये कोई आम लड़की नहीं कोई प्रेत आत्मा है वैसे देवश जी की फॅट तो रही थी लेकिन भाई हीरो है कहानी के डर कैसे जाते)

दिव्या : चलो मेरे साथ (पहले सवाल नहीं बताके देवश वैसे ही चिढ़ गया था और अब किसी मिस्टरी फिल्म की तरह दिव्या चलने लगी देवश ऊस गंभीर औरत के पीछे पीछे चलने लगा दिव्या उसे तिरछी निगाहों से देख रही थी मानो जैसे अभी ऊस्की गुण छीन लेगी और वही देवश को मर देगी)

देवश पूरा सतर्क था..मौका पाते ही कोई भी सामने आए चुत कर देने का.लेकिन वॉ धीरे धीरे बढ़ता गया खंडहर बिजली की गरगरहट से गूँज रहा था..पुरानी सी सीडी थी जो ऊपर जा रही थी.ऊपर के मेल पे पहुंचते ही..दिव्या ने देवश को अपने साथ एक कमरे के भीतर आने को कहा

देवश : इस अंधेरे कमरे में क्या है?

दिव्या : जिसकी तलाश में आए हो तुम?

देवश : क्या मतलब? देखो गोल गोल बातें मत घूमाओ अगर तुम्हारी ये प्लान है

दिव्या : देखो जिस काम के लिए आए हो उसी के लिए अंदर बुला रही हूँ

देवश : त..हीक हे चलो (देवश ने मन को सख्त किया और दिव्या के पीछे पीछे ऊस कमरे में घुसा)
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[color=rgb(184,]देवश जैसे ही कमरे के अंदर आया..उसका बदन काँप गया.बेसबॉल बात जो हाथ में थी वो वही गिर पड़ी.बस दाएँ हाथ की रिवाल्वर कांपें जा रही थी हाथ के हिलने से..देवश चुपचाप दरवाजे के किनारे तेहरा हुआ था.दिव्या मुस्कराए देवश की ओर देखने लगी.और फिर ऊस बिस्तर की चादर को हटा दिया "ये रहा तुम्हारा काला साया"...बिजली की गरगाहट तेज हो गयी[/color]
 

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न्‍न्न्नूऊऊऊऊओ..देवश ज़ोर से चीखा.और उसका इस बार गुण भी गिर पड़ा..सामने बिस्तर के ठीक ऊपर एक मुकोते की तस्वीर थी और वॉ मुखहोटा जिसके हाथ में था वो शॅक्स कोई और नहीं देवश था

बदल गाराज़ उठा.और एक बार देवश घबरा गया "य..ईए कैइससे मुम्मकिन है?"..दिव्या उसे ऐसी निगाहों से देख रही थी जैसे वो सबकुछ पढ़ चुकी हो..ऊसने उठके ऊस मुकोते की तस्वीर को देवश के करीब लाया और उसे दिखाया.."खुद ही देखो कौन है यह? ये तस्वीर तब की है जब तुम काला साया बनकर अपने दूसरे घर से निकल रहे थे जिस वीरान घर की तुम तलाशी लेने आए थे जहाँ मैं रहती हूँ"..देवश हक्का बक्का मुँह पे हहाथ रखे हुए था

दिव्या : अब तुम जानना चाहोगे की ये तुम ही हो.और तुम कोई ऐक्टिंग कर रहे हो? दररो नहीं तुम सच में तुम ही हो ये कोई और है ये शॅक्स जो ये नक़ाब पहन रहा है ये तुम ही हो और ये तुम्हारा गुस्सा

देवश : न्न्न..नहीं पर्रर मैंन काला साया बन जाता हूँ और मुझे पता भी नहीं

दिव्या : ये पेपर्स पढ़ो.डॉक्टर नेगी रस्तोगी.इनको तो जानते होगे मनोचिकित्सक हमारी भाषा में जो दिमागी इलाज़ करते है..याद करो देवश या फिर तुम अंजान बन रहे हो

देवश : त..तूमम मेरे बारे में इतना सबकुछ कैसे जान गयी?

दिव्या : मैंने दिल तुमसे नहीं लगाया इंस्पेक्टर साहेब तुम्हारे ऊस मुकोते से लगाया ऊस इंसान से जो सबका देवता है काला साया..आज की रात मैं भूली नहीं हूँ जब तुम मेरे साथ बिस्तर पे सो रहे थे और तभी मैंने तुम्हारा ये मुकोता हटाया और वही मैं बर्फ की तरह जम गयी तुम ही हो ना जो एक क्या बोलते है उसे अँग्रेज़ी में कौररपटेड अफ़सर बनते थे और फिर रात की आध में जुर्म का सफ़ाया करते थे तुम्हारी गलती नहीं है तुम्हारे अंदर की अक्चई तुम्हें ये बना चुकी है

देवषह : पर्रर ये मैंन मैंन तूमम मुझहहे (देवश पूरा हकला गया था उसके सारें राज़ दरशाई हो चुके थे दिव्या के सामने)

दिव्या : ये फाइल देखो डॉक्टर नेगी रस्तोगी की.जब तुम्हारे मुकोते के बाद तुम्हारे चेहरे को देखा तो पाया की तुम इंस्पेक्टर देवश चट्‍त्ेर्जे हूँ टाउन के इंस्पेक्टर और तुम एक निहायती कमीने इंसान हो मैं खुद रिपोर्ट लिखने तुम्हारे पास आई थी पर तुमने मुझे भगा दिया लेकिन मैं ये नहीं जानती थी जिस देवता को मैं पूजती हूँ वो एक ऐसे इंसान में छुपा है..तुमने मुझसे हर राज़ छुपाएं रखा डॉक्टर नेगी रस्तोगी से बात करने के बाद पता चला की तुम्हें सनक चढ़ती है जो हादसे तुम होते देखते हो ऊन्को अपनी तरीके से साफ करते हो..डॉक्टर नेगी रस्तोगी को फोन करने के बाद ऊन्होने मुझे सारी बात बताई

कहानी कुछ इस तरह थी.देवश चटर्जी डॉक्टर नेगी रस्तोगी के ऑर्फनेज में रहा था.उसके मां बाप की मौत के बाद ऊस्की दादी को मारते वक्त ऊसने देख लिया था..अंजर ने ऊस छोटे से बच्चे को उसके माता पिता की मौत के बाद बीच रास्ते पे ही चोद दिया पहले तो ऊसने दो बार आक्सिडेंट की तरह देवश को मारना चाहा पर देवश बच निकाला देवश की सारी जाएज़ाद पे नाम थी.अगर वो मर जाता है तो सारी प्रॉपर्टी उसके चचेरे भाई जो घर का दूसरा वारिस है साहिल के नाम हो जाएगी..देवश महेज़ 5 साल का था.और फिर उसे बीच रास्ते पे छोढ़ने के बाद उसे अनाथ घोषित कर दिया ऊन कामीनो ने.रास्ते से उठाकर किसी नूं ने देवश को ऑर्फनेज में डाल दिया वहां डर डर तक़लीफ़ सहने के बाद देवश बड़ा हुआ और उसे सरकारी पढ़ाई कराई गयी.देवश अफ़सर में भरती होता है और फिर काबिल अफ़सर बनता है लेकिन कहीं ना कहीं ओसॉके अंदर का गुस्सा अपने माता पिता को मारने की साज़िश और खुद को बेढाकाल करवाने से एक क्रोध पलटा है उसके अंदर

सनकी होने के कारण ऑर्फनेज से ही उसके व्यवहार को लेकर सब चिंतित थे उसका इलाज किया गया हालत तो बदले गये पर बीमारी उसके अंदर रही गयी.अफ़सर के बावजूद भी जब भी कीिस के साथ कुछ बुरा होता है तो देवश के अंदर एक सनक चढ़ती है वॉ दुनिया से बैईमानी करता है लेकिन दूसरे ही पल उसे अपने गुनाहो का दर्द भी होता है और फिर अपने इस सनक को छुपाने के लिए एक मुकोता धारण कर लेता हे दिव्या को दराज़ से ही काला साया के मुकोते का कई स्केचस मिलते है.जिसपे वो अलग अलग तरीकों से खुद के आइडेंटिटी को हाइड करने के लिए मुकोते बनता है.और उसी स्केच से एक काला कपड़े का मुकोता पहनकर और अपने ऑफिसर की ट्रेनिंग में ही मार्षल आर्ट पे ज्यादा ध्यान देकर खुद को एक नया अवतार बना लेता है काला साया

बदल के गारज़ते ही सारी दास्तान खुद पे खुद देवश के सामने पेश हो जाती है.और वो सख्त निगाओ से दिव्या को देखता है "जिसे मैं हर जगह खोजते आई वो मुझे कुछ इस तरह मिलेगा सोचा नहीं था काला साया"..दिव्या के आंखों में आँसू थे उसे देवश का दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ था

देवश अब वो देवश नहीं दिख रहा था.रात ढाल चुकी थी.उसके अंदर का सनक ओसॉके चेहरे पे साफ झलक रहा था ऊस्की खौलती ऊन अंगार भारी आंखों में.उसके होठों पे एक काटी ल्मुस्कुराहट..वो पीछे पलटके दिव्या को देखता है "हाँ मैं ही हूँ काला साया लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ तबतक जबतक मेरे मंसूबो में मुझे कामयाबी नहीं हासिल होती"....देवश मुस्कुराकर दिव्या की ओर देखता है

दिव्या : ये तुमने क्या किया काला साया अपने लिए पुलिस का खतरा बढ़ा लिया

देवश : नहीं दिव्या ये जरूरी था.मुझे दो जिंदगी जीने पे मेरे किस्मत ने मुझे मज़बूर किया था.मैं तो बदले के लिए काला साया बना पर मुझे लगता है सिर्फ़ अपने लिए नहीं दूसरों के लिए भी मुझे लड़ना चाहिईए

दिव्या : लेकिन तुम अब क्या करोगे जो पुलिसवाले तुमने खुद हीरे किए है ऊँका क्या होगा?

देवश : काला साया को गायब होना होगा.ताकि उसे ये दुनियावाले कभी पहचाना ना सके

दिव्या : क्या लेकिन इसमें तो बहुत खतरा है तू.एमेम कहना क्या चाहते हो?

देवश अपनी जॅकेट और चेहरे पे मुकोते को पहनते हुए दिव्या के हाथ से लेकर.."यही की देवश और काला साया का राज़ तुम्हारे सामने आ सके मैंने जब तुम्हें तरक़ीब समझाईी तो ये भी बताया की अगर मैं रहूं या ना रहूं मेरा साय हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा तुम फिक्र मत करना दिव्या मैं हमेशा रहूँगा तुम्हारे साथ"....इतना कहकर काला साया दिव्या को ये कहकर निकल जाता है की उसके दुश्मन उसके इंतजार में है

दिव्या उसे रोकती है पर वो जानती है वो देवश को तो रोक सकती थी पर काला साया को नहीं.काला साया हवा की तरह खंडहर की खिड़की से छलाँग लगाकर ऊस जीप पे सवार हो जाता है दिव्या उसके संग बैठ जाती है.जीप चल पार्टी है..और जल्द ही काला साया उसे घर के पास उतारके उससे विदा ले लेता है

जल्द ही वो पुलिस की नजारे में आता है.पुलिस के काबिल अफ़सर्स जो मौत बनकर ऊसको तलाश रहे थे उसके पीछे लग जाते है "वो जा रहा है उसे हॉर्न मारो आज हमें उसे किसी भी तरह मर गिरना है"...काला साया मुस्कुराकर अपनी शीशे से पीछे की गाड़ी की हॉर्न को सुनता है और ठीक ओसोई पल गाड़ी को रोक देता है..और किसी फुरती के साथ ब्रिड्ज के नीचे कूद जाता है.बारिश तेज हो जाती है..पुलिसवाले भी गोली लिए पहाड़ी से नीचे उतरते है

काला साया अंधेरे की आगोश में चुप जाता है और पास आते अफ़सर्स पे छलाँग मारता है..धधढ धधह.काला साया पे ताबड़टोध गोलियां चल पढ़ती है पर वो हवा के भात इजब कूड़ता है दोनों लाटीएन ऊन दोनों अफसरों पे मर के ऊन्हें गिरा देता है."य्ाआआअ"...देवश पीछे के पुलिस वाले के हाथ को माड़ोध देता है और फिर हवा अपने टांगों को लगभग उठाते हुए सीधे पास खड़े दोनों पुलिसवाले पे लातों की बरसात कर देता है..पुलिसवालो के देते ही

तीसरा ऊसपे गोली चला देता है गोली जॅकेट को छू निकलती है.."परछाई को कभी पकड़ पाओगे भला"..काल साया फुरती से अपने नूंच्ौको को हवा में लहराने लगता है और ठीक उसके बाज़ू पे उतार देता है तीसरा हमला होते ही वो अपना सर पकड़े गिर जाता है
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[color=rgb(85,]ऊसपे इस बार गोलियों की बौछार शुरू हो जाती है.क्योंकि उसे बिना गोलियों के पकड़ना आसान नहीं.काला साया भागता है.धधह धधह पूरे रास्ते गोलियों की शोर्र सुनाई देती है..काला साया दौधते ही जाता है.और ठीक तभी एक ओवरब्रिड्ज के काग्गर पे खड़ा हो जाता है इस बार काला साया काँपने की ऐक्टिंग करता है जैसे अब कोई रास्ता नहीं है बचने का."रुक्क जाओ काला साया हम तुमपे गोली चला देंगे"....एक अफ़सर ज़ोर से चिलाके बाकी अफसरों के साथ उसे घैर लेता है "बचना चाहते हो तो फौरन अपने आपको हमारे हवाले कर दो और अपना मुकोता उतार फाक्ो"...काला साया मुस्कुराता है और फिर ऊन्हें ललकार्ने लगता है..ऊन्हें तो वैसे ही गोली चलाने के आर्डर थे और ऊन्होने संकोच भी नहीं किया..धढ़ धढ़ करके गोली शुरू कर दी[/color]
 
[color=rgb(0,](UPDATE -36)[/color]
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काला साया नदी में कूद पड़ा..गोली उसके बाए कंधे पे पीछे के भाग में जा लगी."आआआआआआआआहह"...काला साया दर्द से दहद्ध उठा.और नदी में गिर पड़ा..अफसरों इन पानी पे दो तीन बार फाइरिंग की "तहरो बरसात तेज है तूफान भी शुरू हो चुकी है यक़ीनन वो पानी में डूब गया है.ऊस्की लास हे ढूँढनी है हमें फौरन"....पानी इतना गहरा था की लाश तो क्या काला साया के मुकोते भी ऊन लोगों के हाथ में नहीं आ पाए

बात को दबा दिया गया ये एलान नहीं किया की काला साया मर चुका..ऊस रात पानी में खूब गोताखोरो ने पता किया पर पानी का बहाव इतना तेज था की शायद नदी काला साया की लाश कहीं और ले जा चुकी हो या फिर गहराइयों में.आख़िरकार हार मानके अफसरों ने ये कोशिश भी चोद दी.

धधढह धड़धह..दरवाजा कोई ज़ोर से पीट रहा था..दिव्या ने जल्दी से दरवाजा खोलाआ "आअहह सस्स दिवव्या आअहह"...दिव्या भौक्ला गयी..ऊसने फथटफट काला साया को बिस्तर पे सुला दिया उसके गीले कपड़ों को फौरन उतार फाका

"आहह आहह दिवव्या"..देवश बधबदाता जा रहा था.दिव्या ने झट से उसके मुकोते को उतार फैका और उसके चेहरे को देखकर दंग रही गयी उसके चेहरे पे इर्द गिर्द चोटें थी."टीटी..तुममनी ये क्या कर लिया आस नहीं इसस्शह हे भागगवान तूमम्म..हेन्न गोलीी लगी है"...दिव्या चीख उठी

"दिववववया फ़ौरान्न्न आअहह सस्स एक दवा तैयार करो मेरे पास के आअहह दराज़ में कुछ दवाइयाअ है और साथ मेंन एक गरम चाकू भी ले आना"...दिव्या ने ठीक वैसा ही किया उसके हाथ बहुत कांपें जा रहे थे

ऊसने ताली ली.और उसके घाव पे गरम चाकू को जैसे लगाया देवश दर्द से चिल्ला उठा."कोशिष्ह करूं आहह मेरी चीखों की परवाह मत करो फौरन वक्त नहीं है"...इतना कहते ही.दिव्या ने आंखें बंद कर ली और बहुत ही क़ास्सके ऊस चाकू में गरम चाकू को रखा...देवश ऊस रात काफी ज़ोर से चीख रहा था.गोली प्लेट पे गिर पड़ी साथ में खून भी टपकने लगा घाव के माँस के जख्म एकदम ताज़ें थे गोली को किसी तरह से निकलकर दिव्या ने उसे निढल देवश के एक एक बताए दवाई को लगाकर ड्रेसिंग कर दी.तब जाकर देवश को शांति मिली और वो निढल पढ़कर सो गया

दिव्या को एकदम से उल्टी आई और ऊसने वॉशबेसिन जाकर उल्टी की और ऊस खून भरे प्लेट गोल आइक सहित फ्लश करके बहाआ दी...देवश के कंधे से लेकर छाती तक पट्टी बँधी थी.वॉ बेहद गहरी नींद में सो चुका था.बीच बीच में दिव्या ऊस जगा देती.ताकि ओसोे ये ना लगे की देवश ने अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली है.पर उसे कामयाबी मिली थी वो गोली के वार से बच निकाला था.दिव्या ने पास रखकी नक़ाब को उठाया वो जानती थी उसे क्या करना है?

और ऊसने फौरन ऊस मुकोते को कैची से फाड़ फाड़ के जला डाला.काला साया पुलिस वालो की नजारे में मर चुका था पर इसी श्हहेर को कहीं ना कहीं ऊस्की जरूरत थी पर ये जरूरी था..क्योंकि देवश का मंसूबा पूरा हो चुका था.और अब वो अपनी ज़िमीडारी मुकोते के बिना ही करना चाहता था

दिव्या देवश की सेवा करती रही.और ऊसने पुलिसवालो के फोन पे ये बताया की वो देवश की बहन है और वॉ घर आए हुए है दो दिन बाद वो आ जाएँगे.ये सुनकर सब शांत पर गये.दिव्या ने देवश की बाइक को किसी तरह घ के अंदर दाखिल करके झाड़ी और घससों से ढक दिया..और देवश के सिरहाने आकर लाइट गयी ऊसने अपना सर देवश के छाती पे रख दिया और उसके आंखों से आँसू गिरने लगे वो सुबकने लगी.उसे यकीन्ना काला साया खोया था पर अब एक नया प्रेमी पाया भी था.आख़िरकार दिव्या की मेहनत भारी सेवा और प्यार और देवश के खुद के विश्वास से आख़िरकार उसे कामयाबी मिल ही गयी और उसका शरीर स्वस्था हो गया.देवश पहले से ज्यादा तन्डरस्ट खुद को महसूस करने लगा उसके बाए कंधे के पीछे लगी गोली के घाव काफी हड़त्ाक सामान्या हो चुके थे..लेकिन दर्द थोड़ा बहुत तो था ही..देवश ने इन कुछ दीनों में खुद को काफी ज्यादा ठीक करने की कोशिश की.हाँ वो कसरत तो नहीं कर पा रहा था पर उसे अपने शरीर को स्वस्था बनाए रखान जरूरी था ताकि पुलिस वालो को ऊसपे कोई शक ना हो उधर थाने में क्या रिपोर्ट आई होंगी ये भी जानना बेहद जरूरी था

देवश ने उसी दिन पुलिस स्टेशन फोन करके अपने अफसरों से पूछा तो जो जानकारी मिली उसे ये साफ था की काला साया को मारा हुआ घोषित कर दिया है दरअसल जिस नदी में देवश कूड़ा था प्लान के मुताबिक वो नदी फाटक से जुड़ी हुई थी अगर ऊसमें गिरा भी था तो वो घयाल ऊपर से ना तैयार पाने से ऊस्की मौत हुई होगी ये सुनकर देवश को मन ही मन खुशी हुई साथ में नदी में गिरके फिर वहां किस तरह तैरके देवश किसी तरह ज़मीन पे पहुंचा था ये स्टोरी तो वही जनता है अगर ऊस रात वो पत्थर का सपोर्ट उसे किनारे पे ना मिला होता तो आज ऊस्की लाश बांग्लादेश तो जरूर पहुंच गयी होती

देवश ने कुछ देर तक बातें की और फिर कमिशनर से मिलने की पर्मिशन ली.देवश फौरन उसी दिन किसी तरह नाश्ता वष्ता और अपने वर्दी को पहनें दिव्या से विदा लेता है दिव्या काफी डर जाती है पर वो दिव्या के बालों पे हाथ फायरके उसे शांत रहने की सलाहियत देता है.ऊन लोगों की तरक़ीब कामयाब हो चुकी है अब उसे डरने की जरूरत नहीं.देवश फौरन थाने जाता है और वहाँ का काम निपटता है हवलदार उससे पूछता है की वो कहाँ गये थे? देवश भी उसे बारे ही संजीदगी से जवाब देता है जैसे की कुछ हुआ ही नहीं था

उसके जख्म अब भी भरे नहीं थे इसलिए कंधे में हल्का हल्का पेन शुरू हो जाता चलने से बारे ही संभलके देवश वर्दी से खुद के बदन को धक्के ताकि पत्तियां ना दिखे चलतः आई..कंधे की गोली के बारे में किसी को पता लगा तब तो फिर साज़िश लगेगी सबको..देवश अपने वर्दी वाले आम किरदार में फीरसे अभिनय करने लगता है वो पानी चबाना फिर हप्पी छोढ़के टाँग टेबल पे रखना..तभी हवलदार कान में फुसफुसता है की आपके अफसरों ने काला साया को मर गिराया कहीं इससे ज़िल्ला वाले ना भड़क जाए.देवश सिर्फ़ इतना कहता है की काला साया मर गया है ये बहुत ही अच्छी खबर है पर अगर लोगों के लगने लगा की वो नहीं आया तो फिर बात बिगड़ते डायरी नहीं लगेगी फिर तो कमिशनर को जवाब देना पड़ेगा क्योंकि ऑर्डर्स तो ऊन्होने ही दिए थे हवलदार और देवश एक दूसरे को ताली मर के खूब तहाका लगाकर हस्सते है

शांतक देवश घर पहुंचता है.अपने काला साया वाले घर पे..दिव्या उसका पलके बिछाए इंतजार कर ही रही थी दरवाजा खटखटते ही दिव्या दरवाजा खोल के उसे गले से लिपाततित है.देवश उसे अपने सीने से लगाए कंधे पे हाथ रखकर अंदर आता है फिर दिव्या उसे बात करते हुए उसके सारे शर्ट को आराम से उतरती है उसके कंधे पे लगी पट्टी को टटोलती है और फिर ऊस जख्म कोदेखती है.देवश ऊस्की ये सेवा देखकर उसके गाल को चूम लेता है..और उसे अपने गोद में बिता लेता है

दिव्या : किसी ने शक तो नहीं किया ना तुमपे
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[color=rgb(0,]देवश : नहीं मेरी दिव्या किसी ने कोई शक नहीं किया.वो लोग तो काला साया के मौत पे हँसी उड़ा रहेः आई.वैसे कमिशनर का फोन आएगा मिलने के लिए फिर ऊनसे बात करके पता चलेगा[/color]
 

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दिव्या : कैसे लोग है? अपने इज्जत के लिए किसी भी भायंट चढ़ा देते है ये भी नहीं समझते वो कोई मुजरिम तो था नहीं अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो क्या बिट्टी ? क्या जरूरत थी इतना बड़ा रिस्क लेने की

देवश : अगर मैं ऐसी ही गायब हो जाता तो हल्ला होने में डायरी नहीं लगती..पुलिसवाले तब भी मेरी टल्लश करते रहते और तुम नहीं जानती बढ़ता शक हुंपे ही आता है काला साया के मरने से काम बहुत हड़त्ाक आसान हो गया है

दिव्या : लेकिन ज़िल्ला वालो का क्या होगा? ऊँका जो विश्वास है की काला साया उनके लिए इंसाफ करेगा

देवश : अगर हर कोई काला साया की ही जरूरत अपना ले तो फिर इंसाफ की देवी अदलात और पुलिस का क्या रोल? हर इंसान को अपनी लरआई खुद लर्णि पार्टी है.जहाँ तक मेरा सवाल है मैं अपने असल अओदे पे उनकी जितनी हो सकता मदद करूँगा

दिव्या : काश ये सब कभी ना होता?

देवश : हाहाहा खैर जाने दो अरे यार कुछ खाने को दो मुझे भूख लगी है.

दिव्या : अच्छा अभी लाई

दिव्या किचन में चली गयी इतने में मेरा फोन बज उठा.कमिशनर का था.मैंने फोन उठाया तो पहले ऊन्होने मुझे बधाई दी और मेरी तारीफ की फिर उसके बाद मुझे कल कलकत्ता आने को बुलाआ पुलिस हेडक्वॉर्टर में..फिर फोन कट हो गया.अचानक फिर दूसरा कॉल आया इस बार अपर्णा काकी का था.फोन उठाते ही वो मुझपर बरस पड़ी

अपर्णा : बेटा कहांन हो तुम? ना कॉल किया ना कुछ घर से कहाँ चले गये तुम्हारे थाने गयी बोले साहेब तो घर चले गये यहां आई तो तालाल आगा देखा करीब कुछ दीनों से तुम कहाँ थे?

देवश : काकी मां आप तो जानती हो मेरी थोड़ी तबीयत ठीक नहीं थी थोड़ा बाहर आउट ऑफ स्टेशन निकाला हूँ कल तक आ जाऊंगा घर

अपर्णा : पता है मैं कितना डर गयी थी? तुम जबसे गये हो शीतल कितना तुम्हें याद करती है बोलती है भाई कब आएँगे बहुत मिलने का मन है (शीतल की इंतजार को मैं बखूबी समझता था आप मर्दों को एक बात कहूँगा यहाँ जब भी किसी की औरत की चुत मारोगे खासकरके अपनी लवर की तो वॉ बार्ब आर मिलने मिलाने की बात बहुत करेगी चस्का जो चढ़ जाता है )

देवश : अच्छा मेरी काकी मां मैं आ जाऊंगा आप फिक्र ना करे

अपर्णा : ठीक है बेटा ऐसे मत जा कर और जाए भी तो बोलकर जा पता है मैं कितना तुझे मिस कर रही हूँ

देवश : अरे मेरी रसगुल्ला मैं आता हूँ ना फिर मां बेटा जमकर प्यार करेंगे

अपर्णा : शैतान कहीं का चल जल्दी आना

कुछ देर तक अपर्णा काकी से बात की.अपर्णा काकी भी कम ठरकी नहीं हो गयी थी अभी से ही लंड लेने की इतनी उतालवली.उधर शीतल के बार्िएन में पूछा तो पता लगा की मेमसाहेब आजकल काफी खुश रहने लगी और मेरी दी हुई पएेल पहनकर खन्न् खन्न् की आवाज़ निकाले खेतों से गाँव जाती है.बस डर लगता था कहीं साला कोई लौंडा ना उसके पीछे पढ़ जाए.क्योंकि ऊसपे सिर्फ़ मेरा हक़ है और उसके होने वाले पति का खैर फोन कट करके देखा दिव्या खाने का प्लेट लाई मुस्करा रही थी

दिव्या : किससे बात कर रहे थे?

देवश : बस अपनी काकी मां से काला साया के जिंदगी में सिर्फ़ दिव्या थी लेकिन देवश के जिंदगी में अपर्णा काकी ऊस्की मां जैसी है और ऊस्की एक प्यारी जवान बहन शीतल

दिव्या : अच्छा ग तो अभी से हमारे से दिल भर गया आपका

देवश : अरे पगली वो तो मेरे अपने है

दिव्या : और मैं क्या गैर हूँ?

देवश ने फौरन दिव्या को अपने ओर खींच लिया दिव्या ने सक़ती से देवश के छाती उसे धकेलना चाहा पर देवश ने सक़ती से उसे थाम लिया "खाना ठंडा हो जाएगा"...दिव्या ने शरमाते हुए कहा..."पेंट पूजा बाद में पहले इस गरमा गरम माँस को खाना है मुझे"....मैंने दिव्या के नाभी पे अपना मुँह लगा दिया.दिव्या कसमसाने लगी अब क्या खाना? पहले एक राउंड चुदाई तो करनी ही पड़ेगी

दिव्या के नाभी को मैंने बारे ज़ोर से जीभ से कुरेदना शुरू किया.और फिर उसके पूरे पेंट पे जबान फहीरयाई.दिव्या पूरी तरह कसमसाए जा रही थी.उसके ठीक बाद दिव्या को टाँग से उठाया और उसे लेटा दिया..इस बीच बड़ा ही क़ास्सके जख्म वाले जगह में दर्द उठा..मैंने दिव्या को नहीं बताया क्या पता बना बनाया मूंड़ खराब हो जाए

देवश ने दिव्या के जंपर और सलवार को उतार फ़ैक्हा..और उसके गान्ड की फहाँको में अपनी उंगलियां फहीराने लगा और दो उंगली ऊस्की गान्ड की छेद में डाल दी.अंगुल करते ही दिव्या कसमसा उठी और बिना पानी मछली की तरह बिस्तर पे छटपटाने लगी..देवश ने दिव्या की छेद में दो उंगली बारे ही ज़ोर किया.और उसके ब्रा के ऊपर से ही छातियो को दबा दिया
दिव्या कुछ देर तक मॉआंन करती रही.और फिर ऊसने झट से देवश को अपने ऊपर खींच लिया..देवश ने फौरन अपने खड़े लंड को निकाला और दिव्या की ब्रा भी उतार फैक्ी..दिव्या ने झुककर देवश का लंड मुँह में भर लिया.अब उसे धीरे धीरे देवश का लंड चूसने की आदत सी पढ़ चुकी थी..वो बारे ही प्यार से देवश के लंड को चुस्ती रही ऊसपे अपनी जबान फहीराती रही.उसके मुख मैथुन से ही देवश झड़ जाता लेकिन वो रुका नहीं ऊसने दिव्या के मुँह में ही सक़ती से लंड मुँह से अंदर बाहर किया.स्लूर्रप्प्प म्‍म्म्मम की आवाजें निकलते हुए दिव्या बारे ही चाव से लंड को चुस्ती रही

फिर देवश ने कुछ देर तक दिव्या को अपना लंड चुस्वता रहा..और फिर उसे गोद में उठाए बिस्तर पे लेटा दिया इस बार मुँह का धायर सारा थूक उसके योनि के छेद पे लगा दिया.और ऊस्की टाँगें अपने कंधे पे रख ली.टाँगें और चुत दोनों जैसे ही चौड़ी हुई.देवश ने लंड चुत के मुआने पे कसके टिकाया और एक करारा धक्का मारा.सस्स्सस्स आआआआआआः.दिव्या चीख उठी.फक्चाक्क से जैसे कोई जिस चीरने की आवाज़ आती है वैसे ही लंड दिव्या के चुत में धंस गया

उसी हालत में देवश दिव्या की चुत में लंड अंदर बाहर करता था.चुत ने घपप से लंड अपनी योनि में भर लिया और देवश भी दोनों पलंग पे मज़बूती से हाथ टिकाए धाधा धढ़ धक्के मारते रहा.चुत से फकच फकच की आवाज़ आने लगी.बीच बीच में दिव्या लरखरा जाती कारण देवश ऐसे तेजी से धक्के पेल रहा था की लंड चुत से बाहर निकालने को हो जाता फिर टाँग को कंधे पे सेट करके फिर करारा शॉट देवश उसके चुत पे मारने लगता

कुछ देर तक हालत ऐसे ही चलते रहे फिर देवश ने लंड को बाहर खींच लिया और ऊस्की योनि पे मुँह लगा दिया ऊपर भीनी झांतों से आती खुशबू ऊसपे रखी नाक अपनी और पूरा मुँह चुत के फहाँको में लगाए देवश खुद को सांत्वे आसमान पे महसूस कर रहा था..मर्द जितना भी टेन्शन में हो जब एक बार चुदाई कर लेता है तो ऊस्की सारी थकान और टेन्शन चली जाती है उसे सब अच्छा लगने लगता है..खैर देवश भी चुत पे ज़ाबान फहीराएज आ रहा था उसके गीली चुत से बहते रस को चत्टता रहा उसका स्वाद बेहद नमकीन था

देवश ने उठके फौरन कांपति दिव्या को अपने से लिपटा लिया ऊस्की एक टाँग उठाई उसके पीछे लेटा.टाँग को अपने टाँग पे चढ़ाया और हाथों में धायर सारा थूक गान्ड की छेद पे लगाया और फिर लंड को छेद के मुआने पे घिस्सने लगा..दिव्या सिहर उठी देवश का एक हाथ बारे ही ज़ोर से छातियो को मसल रहा था.दिव्या को भी तारक चढ़ चुकी थी..एक ही शॉट में लंड छेद में घुसेड़ दिया दिव्या चौंक उठी..ऊस्की गान्ड में कुछ गाड़ने लगा.देवश भी गांडम आइन बारे ही हल्के हल्के धक्के लगाने लगा.लंड गान्ड के भीतर घुसता और फिर बारे ही धीमे से बाहर निकल जाता फिर देवश को लंड छेद पे एडजस्ट करना परता

कुछ देर तक देवश ऐसे ही तरीके से दिव्या की गान्ड मारता रहा.ठप्प्प ठप्प करके धक्को की रफ्तार बढ़ी गान्ड से अंडकोष टकराए और शुरू हुआ आहों का सिलसिला.गान्ड के बजने से आवाज़ आने लगी..दिव्या बारे ही मीठी मीठी आहें भरने लगी..और देवश उसके गले पे होठों को घिस्सने लगा.और उसके कान को चबा जाता.दिव्या आंखें मुंडें देवश के छाती पे सर रखक्के जैसे बेहोश हो गयी..और देवश धक्के लगातार लगता रहा.कुछ देर में ही देवश के लंड में अकड़न होने लगी.और ऊसने झट से छेद से लंड को बाहर निकाला

और उसे दिव्या के गान्ड ऊपर ही झाधने लगा.देवश फारिग हो गया और अपना सारा रस दिव्या की गांदपे छोढ़के उसके दूसरी ओर निढल पढ़ गया..पसीने पसीने हो गया था देवश हांफते हुए कुछ देर तक लेटा रहा..फिर ऊसने झाब उठके देखा दिव्या सो चुकी थी..और ऊसने उठाकर गंदे कपड़े से दिव्या की फूली गान्ड के ऊपर लगे रस को साफ किया और फिर खुद भी बाथरूम जाकर नहाया धोया
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[color=rgb(41,]फिर बाहर आकर खाने को गरम किया और फिर बिस्तर पे ही बैठकर नंगी दिव्या को देखते हुए खाने लगा..इसी तरह वो दिन भी ढाल गया..अब देवश ने अपने जिम्मेदारी को समझते हुए केस पे ध्यान देने लगा..अब ऊसमे ंवो ब्रष्ट वाली बात नहीं रही थी..क्राइम थोड़ा तरफ गया जाहिर था काला साया अब किसी को दिख नहीं रहा था.पर अब सब पुलिस पे ही डिपेंड थे[/color]
 

[color=rgb(226,](UPDATE-38)[/color]


[color=rgb(226,]दूसरे दिन कलकत्ता पहुंचकर कमिशनर के केबिन में घुसते ही देवश ने सलाम ठोंका.कमिशनर ने मुस्कराए देवश के कंधे पे हाथ रखा..और उसे शाबाशी दी[/color]

[color=rgb(226,]कमिशनर : वेरी वाले डन इंस्पेक्टर देवश चटर्जी मुझे तुमसे यही उम्मीद थी तुमने प्रूव करके दिखा दिया की पुलिस डिपार्टमेंट किसी से कम नहीं आस फर आस ई में कन्सर्न्ड और ट्रांसफर आर्डर इस कॅन्सल्ड ऐसे ही मन लगाकर ध्यान देते रहो[/color]

[color=rgb(226,]देवश : सर मैंने वही किया जो कानून के लिए शाइ हो.पर आप इसे मेरा फायदा मत समझिए मैंने कोई भी काम सिर्फ़ अपने फाएेदे के लिए नहीं किया.बस इस बात का कहीं ना कहीं डुक हें सर की काला साया कोई मुजरिम नहीं था वो बस पुलिस की मदद कर रहा था भले ही उसके आक्षन्स ठीक ना हो वो कानून के खिलाफ काम करता है ऊसने खून किए पर किसके मर्डरर्स के क्रिमिनल्स के जो मासूमों की जिंदगी से खेलना चाह रहे थे[/color]

[color=rgb(226,]कमिशनर : वॉट दो यू मीन? काला साया इस अगेन्स्ट थे लॉ[/color]

[color=rgb(226,]देवश : लेकिन अभी स्टिल डॉन;त नो वेदर अभी स्टॉप थे क्राइम वितऊथ हिं.सॉरी सर मुझसे कोई लव्ज़ गलत निकला हो मांफ कीजिएगा बस मैं यही कहूँगा सर कहीं ना कहीं हमने क्राइम को गताया नहीं बढ़ाया पर आप फिक्र ना कीजिए जब तक इंस्पेक्टर देवश ज़िंदा है तबतक लॉ कोई हाथ में नहीं ले पाएगा[/color]

[color=rgb(226,]कोँमिससिओने : आस और विश सन ई आम रियली प्राउड ऑफ यू (मुस्कराए कमिशनर ने बात को स्मझा.देवश सल्यूट मार्टाः आह बाहर निकल गया)[/color]

[color=rgb(226,]घर पहुंचकर ऊसने सबसे पहले अपने घर जो की चाचा चाची ने पहले से धखल किए हुए थे उसे बारे ही सहेजता से खरीदने की उक्सुकता जाहिर की ऊसने जिसके नाम घर था उसका सिग्नेचर कोर्ट को पेश किया इस पे ऊसने बारे ही सहेजता से चाल चली और अपने दाँव पैच से वो घर ख़ैरीड लिया जो ऑलरेडी उसी के नाम था..दिव्या को अपना वीरना घर ही पसंद था पर देवश चाहता था की वो अब चुपके ना रहे..बेरहेआल वो दिव्या के साथ अपने नये घर में आ गया..दिव्या जिस घर की कभी नौकरानी होया करती आज वो ऊस घर की मालकिन खुद को महसूस कर रही थी..इधर देवश को अपने दूसरे घर में जाना भी था[/color]

[color=rgb(226,]और उसी दिन वो अपने पुराने घर आकर..घर में ही कुछ देर तक आराम करता है क्या पता ? अपर्णा काकी और शीतल आ जाए उससे मिलने अकेले अकेले
काफी देर तक मां-बेटी का इंतजार करने का बाद.देवश को जैसे उम्मीद थी वही हुआ.मां-बेटी दोनों साथ ही आई..अपर्णा काकी ने हल्के लाल रंग की बनारसी सारी पहनी थी आसिफ़ के तोहफे की दी हुई.तो दूसरी ओर गुलाबी रंग की मॅचिंग एआरिंग के साथ सूट शीतल ने पहनी हुई थी..दोनों मां-बेटी ही कहर ढा रही थी..डबल ऑफर तो मिला था.पर देवश ना तो मां को बेटी के सामने चोद सकता था.और ना ही बेटी को मां के सामने चोद सकता था.[/color]

[color=rgb(226,]बहरेहाल ऊसने फैसला किया की दोनों को अलग-अलग ही चोदना पड़ेगा..अपर्णा काकी मुस्कराए डीओॉश के सर पे हाथ फेरने लगी और उससे उसका हाल पूछा.देवश इन भी बारे सहेजता से जवाब दिया इतने में शीतल की चोरी चोरी निगाहों को वो पढ़ भी लेता.जो ठीक अपर्णा काकी के पीछे खड़ी मांडमास्त मुस्करा रही थी[/color]

[color=rgb(226,]"अरे शीतल बैठो ना"...देवश ने शीतल को अपने बगल में पलंग पर बैठने को कहा[/color]

[color=rgb(226,]"अच्छा बेटा कुछ खाया मैं तेरे लिए कुछ बनती हूँ..साग की सब्ज़ी लाई उसे गरम कर देती हूँ और रोती बना देती हूँ"...अपर्णा काकी ने मुस्कराए कहा और किचन की ओर चली गयी[/color]

[color=rgb(226,]इस बार देवश शीतल की ओर मूधके उससे बातचीत शुरू करता है.शीतल को तो बस अकेलापन ही चाहिए था मां जैसे ही गयी बस छुपी छुपी ऊसने बातें शुरू कर दी[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : उफ़फ्फ़ हो कहाँ चले गये थे तुम?[/color]

[color=rgb(226,]देवश : बस चला गया था काम के सिसीले में[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : श पता है मैं कितना मिस कर रही थी[/color]

[color=rgb(226,]देवश : अरे मेरी जानं सस्सह धीरे बोल मां सुन लेगी अकेले क्यों नहीं आई?[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : मां को भी आना था सोचा लगे हाथों आपसे मिल्लू[/color]

[color=rgb(226,]देवश : त..एक है और सब ठीक तो है ना[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : हाँ अभी अभी तो मासिक खत्म हुए मेरे[/color]

[color=rgb(226,]देवश : अरे वाह रानी यानि मेरी बहन पूरी औरत बन चुकी है[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : बहुत मन कर रहा है भैया कुछ करो ना[/color]

[color=rgb(226,]देवश : एक..हां ठीक है मैं जनता हूँ तुम बेसवार मत हो कुछ टाइम दे[/color]

[color=rgb(226,]इतने में अपर्णा काकी दबे पाओ आ गयी मैं थोड़ा हड़बड़ा गया शीतल भी."और क्या फुसुर फुसुर चल रहा है भाई बहनों में?"..अपर्णा काकी ने गरमा गरम खाना प्लेट से पलंग पे दस्तर्खान बिछके लगाया[/color]

[color=rgb(226,]देवश : कुछ नहीं काकी मां बस आजकल हमारी शीतल बड़ी समझदार हो गयी है[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : कहाँ बेटा? ये और समझदार अकल घास चरने जाती है इसकी कोई भी काम बोलो तो बस ऐतने लगती है[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : हाँ हाँ और कर लो भैया से शिकायत[/color]

[color=rgb(226,]हम सब हस्सने लगते है..फिर खाना खाने लगते है मैं अपने हाथों से अपनी औरतों को खाना खिलता हूँ.फिर अपर्णा काकी भी मुझे अपने हाथों से खिलती है.शीतल ये सब देखकर मुस्करा रही थी..इतने में अपर्णा काकी ने बात छेड़ी जिससे मेरी मुस्कान कुछ पल के लिए गायब हो गई[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : बेटा सुना की तूने वॉ तेरे चाचा अंजर![/color]

[color=rgb(226,]देवश : ऊस हरामी का नाम मत लो काकी मां[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : देख बेटा मैं समझती हूँ हालत बहुत बुरे थे ठीक ही हुआ जो वो लोग कुत्ते की मौत मारे जिसपे तेरा हक़ था उसे तूने वापिस पा लिया अच्छा है लेकिन ये बात मैं ही जानती हूँ की तेरा उनके साथ क्या रिश्ता है? वो तो ऊस दिन बाज़ार में कुटुम्ब मिल गयी थी खूब परेशान थी बोल रही थी की उसका घर संसार उजध सा गया है मैं तो कुछ समझी नहीं[/color]

[color=rgb(226,]देवश रोती का नीवाला खाए बस अपनी आंखें इधर उधर कर रहा था."जाने दो ना काकी मां जाने दो जिस इंसान ने हमारा घर उजड़ा हो ऊस्की क्या दुनिया उजदेगी अच्छा हुआ मर गये"..काकी मां ने कुछ नहीं कहा बल्कि मेरे ऊन लवज़ो में हामी भारी[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : हाँ बेटा मुझे नहीं पता था की वो कमीने लोग यही है बेटा मर गया देख कुदरत का कहर अंजर गाड़ी के नीचे आ गया.और कुटुम्ब तो पागलख़ाने चली गयी उसका तो ब्लूएफीलंताक बन गया था और शांतलाल गुंडे के साथ उसके संबंध भी थे[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : अरे मां क्यों इधर उधर की बात लेकर बैठी हो? भाई का इतना अच्छा मूंड़ बना है उसे खराब तो मत करो[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : अरे बाबा भाई की बड़ी चिंता है तुझे चल अच्छा है लेकिन सुन अपने भाई को ज्यादा तंग मत करना (इस बात को सुनकर कुछ पल के लिए ही सही मुस्कान वापिस लौट आयआई मेरे चेहरे पे)[/color]

[color=rgb(226,]देवश : अच्छा काकी मां आप दोनों आज इधर ही रुक जाओ वजह ये है की मैं कहीं जाऊंगा तो नहीं तक भी गया हूँ[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : लेकिन बेटा शीतल को भेज देती हूँ दो घर का काम पारा हुआ है[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : मां आप ही चली जाओ ना[/color]

[color=rgb(226,]देवश : एक काम कर ना शीतल तू ही चली जा आजना थोड़े देर में हम लोग कहाँ भागे जा रहे है?[/color]

[color=rgb(226,]शीतल : पर भी (मैं जनता था शीतल क्यों चिढ़ रही है?)[/color]

[color=rgb(226,]देवश : पर वॉर कुछ नहीं अभी जा तो अभी जा[/color]

[color=rgb(226,]शीतला ना नुकुर करके ऐत्ते हुए मां को मन ही मन गाली देते हुए निकल गयी.अपर्णा काकी भी मुझे मुस्कुराकर देखते हुए किचन में बर्तन माझने लगी.अब मैं घर में अकेला चलो पहले मां से ही शुरू करता हूँ[/color]

[color=rgb(226,]उसी वक्त बाहर का एक बार नज़ारा देखा..और दरवाजा कूडनी भेड़ लिया..शीतल को आनें आइन कम से कम 2 घंटे तो लग जाएँगे इतने देर में..काकी मां की भूखी सुखी चुत मर लूँगा ताकि वो थक्के पष्ट हो जाए फिर शीतल आए और वो भी मुझसे चुदाया ले.मां बेटी को एक ही दिन में चोदने का प्लान बना लिया था मैंने[/color]

[color=rgb(226,]फौरन कपड़े उतारे और किचन में चला गया.काकी मां एकदम से जैसे पीछे मुदिी तो शर्मा गयी.मैंने फौरन किचन की खिड़की लगाई और क्काई मां को अपने सीने से लगा लिया काकी मां मुझसे छुड़ाने लगी पर अब कहाँ छुड़ाना चुड़ानी..ऊन्हें निवस्त्र करने में वक्त नहीं लगा[/color]

[color=rgb(226,]वही ऊन्हें कुतिया की मुद्रा में झुकाया और अपना खड़ा लंड उनके चर्वी डर पिछवाड़े में घुस्सेद दिया.अफ क्या मस्त गान्ड थी? पर ढीली थी.लंड पे थोड़ा सा थूक माला और फिर लंड को छेद में टिटके एक करारा शॉट मारा.आआहह काकी मां के मुँह से मीठा स्वर निकाला और वॉ भी मदमस्त चुदवाने लगी..[/color]

[color=rgb(226,]देवश : आस ककीिई मां क्या सौंड्रा है तुम्हारा? क्या गान्ड है तुम्हारी?[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा : बीता.आहह कितने सालों से दबाई रखी थी अपनी इच्छा आहह (काकी मां ने दोनों हाथ सेल्फ़ पे रख दिया.और पीछे से मेरे करार धक्को को अपनी गान्ड के भीतर झेलने लगी)[/color]

[color=rgb(226,]मैंने काकी मां को बहुत ही क़ास्सके चोदना शुरू कर दिया.उनकी ढीली गान्ड में लंड प्री-कम भीगोने लगा.और उनकी गान्ड में भी सनसनी उठने लगी ऊन्होने थोड़ा उठके अपना मुख मेरी तरफ किया और अपने जवान बेटे को होठों में होंठ तुसाए किस शुरू कर दी.हम दोनों एक दूसरे का गहरा चुंबन लेने लगे.काफी मजा आ रहा था नीचे से धक्के लगता और ऊपर मोटे मोटे होठों को चूसता काकी के[/color]

[color=rgb(226,]अपर्णा आहें भरती रही.फिर मैंने लंड को गान्ड से बाहर खींचा.और इस बार अपनी तरफ किया.इस बार काकी मां सेल्फ़ पे बैठ गयी और ऊसने टाँग हवा में उठा ली..काकी मां की सूजी डबल रोती जैसी चुत में लंड एक ही बार में पे लडिया और उनके मोटे मोटे चुचियों को हाथों में लेकर मसलने लगा अफ कितने सख्त निपल्स थे उनके एक बार तो चूसना बनता था अपर्णा काकी को बैठे बैठे ही चोदने लगा.उनकी निपल्स को मुँह में लेकर किसी बच्चे की तरह चूसने लगा.ऊसपे अपनी जबान फहीरने लगा.काकी मां भी चुत को ढीली चोद चुकी थी..और मेरा लंड आसानी से प्रवेश कर रहा था[/color]

[color=rgb(226,]कुछ ही देर में काकी मां ने अपने हाथ मेरे कंधे पे मोड़ दया और फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए झधने लगे.चुत में फकच फकच्छ आवाज़ आने लगी.और मेरा रस चुत से बहता हुआ सेल्फ़ से नीचे टपकने लगा[/color]

[color=rgb(226,]हांफते हुए हम दोनों एक दूसरे के चुंबन लेते रहे.उसके बाद अलग हुए..काकी मां ने फटाफट सेल्फ़ पोंछा फर्श पे लगे वीर्य को पोंछा.और फिर मोटी गान्ड मटकते हुए बाथरूम में घुस्सके नहाने लगी.लेकिन जी सच में दोस्तों भरा नहीं थी एक राउंड और पेल दिया इस बार काकी मां को सीधे गुसलखाने में ही चोद डाला वो पेशाब कर रही थी.और मैंने उनके कुल्हो को दबाते हुए उनके नितंबों के बीच में ही लंड घुसेड़ दिया काकी मां ने बहुत जोरदार आहें भारी और उनकी एक मांसल टाँग को अपने हाथों में उठाए वैसे ही मुद्रा में चोद दिया.और फिर अपना रसभरा लंड उनके मुँह में डाला.उसके बाद काकी मां ने चुस्स चुस्सके मेरे लंड से सारा पानी निकल दिया अब मैं पूरी तरीके से ठंडा पढ़ चुका था[/color]

[color=rgb(226,]काकी मां भी सुसताने लगी.और बिस्तर पे ही कुछ देर के लिए सो गयी उनके सोने से मुझे बेहद वक्त मिल गया इतनें आइन घंटी बाजी.दरवाजा खोला देखता हूँ शीतल आई है ताकि हारी पसीने से लथपथ काम खत्म करके."अरे शीतल तू आ गयी आजा अंदर तेरी मां सो रही है"..शीतल ने मां को सोते देखकर काफी गुस्सा किया थक्के काम ऊसने की और मां यहाँ अंगड़ाई ले रही है लेकिन ये नहीं जानती की उनकी तारक की प्यास बुझी इसलिए वो सो गयी है[/color]
 

[color=rgb(226,](UPDATE-39)[/color]
[color=rgb(226,]

उसी वक्त शीतल को बोला जाकर तू फ्रेश हो जा..वो गुसलखाने में जाकर अपने कपड़े उतारके नहाने लगी.मैंने भी फौरन कपड़े उतार लिए एक बार काकी मां की ओर देखा जो गहरी नींद में थी..फिर जल्दी से गुसलखाने में घुसके दरवाजा लगा दिया.शीतल डर गयी मैंने फौरन उसके मुँह पे हाथ रखा.वॉ भी समझ गयी मेरे दिल में क्या है? और मेरे सामने ही दीवार पे टैक्के खड़ी हो गयी

मैंने फौरन उसके ज़ुल्फो को हटाया और उसके होठों से होंठ भीड़ा दिए..हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे..और फिर शीतल को गान्ड से उठाते हुए उसके नंगे बदन को चूमने लगा उसके छोटे छोटे निपल्स को चुस्सने लगा उसके छातियो को दबाने लगा उसके गले में होंठ फहीराने लगा.शीतल पूरी तरह से तारक में आहें भरने लगी

उसके टांगों को थोड़ा फैलाया और ग्ोअडी में उठाए ही अपना लंड उसके छेद में टीका दिया.पहले तो ऊसने मुझे क़ास्सके पकड़ लिया लेकिन अचानक उसका हाथ मेरे पट्टी पे लगा.काकी मां तो चुदवाने में इतनी मशगूल थी की उसे पता ही नहीं चला पर इसे अगर पता चला तो हुआ भी वही ऊसने पूछ डाला मैंने बताया की लोहे से खरॉच लग गयी सेपटिक पकड़ लेता इसलिए इलाज कराया तो पट्टी लग गयी फिर ऊसने कुछ नहीं कहा बस ख्याल रखने की हिदायत दी

फौरन ऊस्की चुत की फहाँको में लंड घिस्सते हुए एक ही शॉट मारा.उफ़फ्फ़ कितनी सख्त चुत थी..शीतल काँप उठी ऊसने अपने नाखून मेरे पीठ पे गढ़ा दिए और मैं भी फुरती से उसे उछाल उछाल के अपने लंड पे चोदने लगा मेरे हाथ सक़ती से ऊस्की गान्ड को दबोचे हुए थे जबकि पूरा छाती और पेंट मेरे सीने और पेंट से जुड़ा हुआता.मैं बारे ही आराम आराम से धक्के देने लगा

देवश : दर्द तो नहीं हो रहा ना

शीतल : नहीं बिलकुल भी नहीं

देवश : चल मजे ले फिर

शीतल आहह आहह करके बारे ही अहेतियात से आहें भर रही थी ऊस्की मां को पता ना चल जाए.मैं शीतल को उसी हालत में चोदता रहा.वो एम्म्म एम्म्म करते हुए झड़ गयी और मुझसे लिपट गयी.मैंने उसे नहीं छोडा और उसे वही फर्श पे लिटा दिया कारण वो बहुत कमज़ोर पढ़ चुकी थी.मैंने फौरन उसे लािटाए मिशनरी पोज़िशन एमिन दोनों टांगों को अपने कंधे पे रखा और दान दाना दान चुत में लंड घुसाए अंदर बाहर करने लगा

शीतल लज़्ज़त में अपने दाँतों में दाँत रखक्के चुदवाती रही..और मैं उससे चोदता रहा.ऊस्की बीच बीच में ज़ोरर्र से आहह निकल जाती..और मैं अपनी गांड में ताक़त भरके जितना हो सके उसे चोदता रहा.लंड से थोड़ा प्री-कम आने लगता जिसे मैं बीच बीच में उठके पानी और उसी के ब्रा से साफ कर देता..नल खोल दिया था जिससे पानी की आवाज़ से काकी मां को पता ना लगे की मैं गुसलखाने में ऊस्की बेटी को चोद रहा हूँ

कुछ देर में ही शीतल फिर झड़ गयी.इस बार साली कुछ ज्यादा ही ज़ोर से चिल्ला उठी..मैंने फौरन लंड चुत के मुआने से बाहर खिंचा और फिर उसे पेंट से उठाकर दीवार पे टैका दिया उसका वज़न यही कोई 40 किलो तो होगा ही बस छाती और गांड भारी हुई थी.कहाँ हम मर्दों का वज़न औरतों से तीन गुना दुगुना हम मर्दों को औरतों को उठाने में कोई ज्यादा प्राब्लम नहीं होती

ऊस्की पतली कमर पे हाथ रखा और उसके नाभी को अंगुल करते हुए उसके टाँग को कमर पे फ़सा दिया अब वो मुझपर पीठ के बाल चड्डी हुई और मैं नीचे से उसे धक्के पेलता जा रहा था.वो चुड्द्वाए जा रही थी लंड बारे ही आसानी से ऊस्की चुत से निकल रहा था घुस रहा था.कुँवारी चुत अब पहली की तरह टाइट नहीं थी मेरा अब पारा चढ़ गया और मेरी कामशक्ति जवाब देने लगी.और मैंने फौरन धक्के तेज कर डाल्ली.और उसी बीच मैंने उसके कमर से उसे ऊपर उचका दिया.जिससे चुत से लंड फ़च से निकाला और रस लबालब छोढ़ने लगा.लंड रस बहा रहा था जो नाली के अंदर जा राई थी

फिर उसी बीच मैंने शीतल को खड़ा किया और साबुन से जल्दी जल्दी उसके बगल गान्ड चुत छाती साबप्पे साबुन रगड़ा पेंट पे भी रगड़ा फिर ऊसने भी मुझे कुछ साबुन लगाया और हम दोनों ने शवर के नीचे नहाया.ये तीसरी बार मैं झड़ा था काफी तक गया था मैं..फिर मैंने उसे कहा की पहले मैं नियालकता हूँ बाद में तू निकल लियो वो पहले सावधानी से निकली फिर मैं.गनीमत ही काकी मां उठी नहीं

ऊस दिन चुदाई का प्रोग्राम बहुत ही अच्छा ही चला.मैंने इतना सेक्स किया की हाथ पाओ में जान नहीं थी.साला दुम्ब्बेल्ल भी नहीं उठा पाया था.काला साया की मौत के बाद तो जैसे अब मैं पूरा देवश बन चुका था..एक तरह से छुट्टी मिल सी गयी थी अययाशी करने के लिए.साथ ही साथ थाने का कामकाज भी बेटर चल रहा था

लेकिन खुशी पलों को लगते काली नज़र डायरी नहीं लगती..अच्छी खाासी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया.जिसने मुझे फीरसे जुर्म की इस लरआई में पाओ रखने के लिए शामिल करवा ही दिया..अब वो क्या वजह थी ये तो मैं अगले अपडेट में ही बताऊंगा
ऊन दीनों टाउन के आसपास बहुत ज्यादा ही क्राइम तरफ गया था.पुलिस की गश्त के बावजूद सुनसान इलाक़ो में अंधेरी रातों में ही सुपारी किलैंग्स हो जा करती थी.जिनकी लाशें बाद में फाटक के पानी में तैरती दिखती थी.बहुत कल्प्रिट्स और सस्पेक्ट्स को गेरफ़्तार किया गया..खूनियो को भी धार दबोचा पर अब पहली वाली बात नहीं रही थी जो काला साया के टाइम थी लेकिन अगर क्राइम को ओस्से डर था तो पुलिसवालो से ऊन्हें दुगुना डर होना चाहिए था सबके जुबान पे एक ही बात थी आख़िर काला साया आ क्यों नहीं रहा ? पर कोई कुछ ज्यादा कर ना सका.उसे खोजते भी कहा.जिसके चेहरा किसी ने आजतक नहीं देखा

ऊन दीनों टाउन में लगातार 3 महीनों से चोरी हो रही थी सुराग ना के बराबर ना ही कोई दायकात और ना ही कोई प्रोफेशनल तेइफ़ दिन दहाड़े ही बारे बारे सेठो के घर से पैसा जेवराहट सबकुछ चोरी हो जाता..और बाद में शिकायत और दिमाग खाने सेठ लोग पुलिस स्टेशन पे दस्तक देते.कब पकड़ेंगे क्या पुलिस कर रही है? ब्लाह ब्लाह बोलकर चले जाते..बस ऊन्हें आश्वासन ही देना परता.शायद एक फैसला लेकर मैंने अपनी बाकी जिंदगी को जैसे मुस्किलो में डाल दिया था

उसी दिन पुलिस की गश्त मैंने बरहा दी थी पर साला रात को उसका एक परछाई भी नहीं मिला गुंडे नहीं थे ना कोई बड़ी गान्ड थी.सिर्फ़ एक अक्स दिखता काले कपड़ों में और धक्का नक़ाब पॉश घर में घुसता सब पर स्प्रे मरता और फहरी जीतने चीज़ें है लूट लाटके भाग खड़ा होता

ऊस रात भी दिमाग पूरे दिन की थकान से चोद था.टीवी पे फेव मूवी रेसलिंग देख रहा था.मेरी खूबसूरत रेस्लर लड़कियां पेज और निक्की बेला का दमदार एक्शन सीन चल रहा था.साला बाप जन्म में तो कभी मिलेगी नहीं बस यूँ ही आँख सैक ले बेटा.अभी अपने असल घर आया था दिव्या मेरे नयी मकान में रही रही थी.रात करीब 11 बज चुके थे.आराम से अभी टीवी देख ही रहा था इतने में फोन बज उठा.लो कर लो बात साला अभी आंखों से सैका नहीं लंड झड़ा भी नहीं और ये लो फोन कॉल
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[color=rgb(226,]जल्दी से फोन उठाया तो पाया कमिशनर की आवाज़ थी.ऊन्होने बढ़ते अपराध को देखते हुए सूचित किया की ऐसा मामला कलकत्ता में भी हुआ था पर जब ज्यादा इन्वेस्टिगेशन बड़ी तो वॉ चोर गायब हो गया.शायद उंड़रगरौद्ण के बाद वॉ हमारे ही टाउन में आया हो बिकॉज़ बंगाल का सबसे अमीर सेठ लोग यही रहते है बारे बारे मॅजिस्ट्रेट्स और एमएलए का भी यही घर है.जिनके पास धारो दौलत है. कमिशनर ने मुझे बताया की एक पुलिस मीटिंग कल बिताई जा रही है मैं आ जाओ.मैंने भी हाँ कहा और फिर फोन रख दिया[/color]
 
(UPDATE-40)

लो अभी तो आराम मिला था और अब फीरसे मुसीबत.मैंने उठके अंगड़ाई मारी और फिर खड़े खड़े ही टॉयलेट में पेशाब करते हुए टीवी पे रेसलिंग देखने लगा..इतने में फिर साला फोन बज उठा..मैंने जल्दी से कक्चा पहना और फोन को उठाया

"सिररर आप प्ल्स जल्दी आ जइईए बहुत जरूरी है"...मेरे लाख कहने पे भी मैं और सवाल पूछ ना सका जाना ही जरूरी था.मौका-ए-वारदात पे पहुंचकर ही पता चलेगा बात क्या है? साला मन मर के पेज के जीत के साथ ही टीवी ऑफ किया और जीप पकरी और निकल पड़ा इतनी रात गये कुत्ते इतने भौंक रहे थे की साला जो नींद उड़ गयी थी ऊसपे भी चार चाँद लगा दिया

जल्दी से मौका-ए-वारदात पे पहुंचा तो देखता हूँ.चार पुलिसवालो की हड्डिया टूटी है और सब एक साथ कराह रहे है उनकी ये हालत देखकर बेज़्ज़ती और हँसी दोनों एक साथ महसूस हुई."क्या हुआ इन्हें?"...एक कॉन्स्टेबल के पास जाकर मैंने कहा जो सर पकड़ा अपने माथे से निकलते खून की ड्रेसिंग करा रहा था.चारों तरफ लोग जमा थे कुछ वरडबोयस भी शामिल थे हॉस्पिटल के एक दो को तो आंब्युलेन्स में डाला जा रहा था

"सा.आ.हेब आहह एकक लौंडिया मैंने उसे पुरड़ेखा ऊस्की चाल धाल्ल आहह.ऊसने हम पांचों को इतना पिता और ऊस घर की सारे जेवरात और पैसे लेकर भाग गयी आहह उनके ही कंप्लेंट पे हम आए देखा मिया बीवी दोनों ही बुरी तरीके से बेहोश थे"...सारी बातों को सुनकर मैं हाँ हूँ की आवाज़ निकल रहा था

खैर जल्द ही बाकी पुलिसवालो को भी हॉस्पिटल ले जा गया.एक लौंडिया और पाँच हटते काटते हत्यारों से लेंस पुलिसवालो को मर के भाग गयी.कैसी चोर है रे?.सबके होठों पे यही बात थी की बरती वारदात हो रही है और क्‍ाअल साया कहाँ है? लेकिन कोई नहीं जनता था वॉ अब वापिस नहीं आने वाला खैर ये मामला मुझे खुद ही सलटना था.ऊस रात तो नींद हुई छानबीन और गश्त के बावजूद ऊस रांड़ का कोई सुराग ही नहीं मिला

पूरी रात थाने में ही गुजर गयी सुबह 5 बजे घर की ओर रवाना लिया.हप्पी छोढ़ते हुए नींद इतनी लग रही थी की गाड़ी भी नहीं चला पा रहा था.कलकत्ता भी जान था और इस बढ़ते वारदात के इसूचना कमिशनर को भी देनी थी..रास्ते में अपना नया खरीदा हुआ घर मिल गया सोचा वहाँ तो दिव्या है ही चल वही चलता हूँ.गाड़ी को दो तीन बार हॉर्न बजाई पर शायद दिव्या सो रही होगी..अंगड़ाई ली मैं दरवाजा भी लॉक्ड दिव्या को बोलता ही हूँ सावधानी से सबकुछ बंद करके सोया करे.यहां तो काला साया की फुरती और दिमाग चाहिए

फौरन पास के पेड़ पे चढ़ा नींद में अवंगता हुआ और टहनी से ही ब्रांडे पे छलाँग मर दी.साला लूड़क के सीधे दीवार से जा टकराया नींद बहुत ज़ोर की आ रही थी और साला कंधा में ऐसा दर्द हुआ की आहह हनिकल गयी.अब बेटा काला साय तो रहे नहीं जो कूदोगे और प्रेक्टिस बरक़रार रहेगी

खैर दरवाजे पे दस्तक देने के बजाय पास ही की खिड़की पे चोर की तरह घुसा.पास ही की मिसेज़ शर्मा जॉगिंग कर रही थी साली मुझे देखकर चिल्ला ना दे बोले चोर्र चोर्र.लेकिन गनीमत थी की ऊस्की आँखें कमज़ोर थी जब सामने का माक्चर नहीं दिखता तो अपने से 30 में दूर के आदमी को क्या पहचानेगी? बिना चश्मा लगाई घूम रही थी.एक बार ऊसने गौर किया मैं ँततिहक गया फिर आँख बारीक़ करते हुए अंदर चली गयी उसे लगा शायद मेरे खाकके वर्दी से की मैं कोई जंगली बिल्ली हूँ

खैर घर के अंदर घुसा.बहुत सन्नाटा और अंधेरा था.सूरज की रोशनी की नयी नयी चाव दिखी.तभी देखता हूँ की दिव्या बिस्तर पे पेंट के बाल मुँह तकिये में घुसाए सो रही है.ऊस्की गहरी साँसों की आवाज़ को सुनते ही मैं भी फौरन अपना काप्रा उतारे..कक्चा पहने ही बिस्तर पे चढ़के धीरे से उसके गर्दन पे हाथ देकर लाइट गया.वॉ कसमसाई मैंने उसके कान में धीरे से अपना लिया..तो वो घबरके उठती ही पर नींद में होने से मैं उसे ज़ब्रन अपने बाज़ूयो में कैद किया और अपने खड़े लंड उसके नाइटी को ऊपर उठाए गान्ड की दरार से चिपका दिया और फौरन उसके चेहरे पे अपना चेहरा रखकर सो गया

जब नींद खुली तो दोपहर 12 बज चुके थे एकदम से हड़बके उठा तो पाया टेबल पे नाश्ता पारा हुआ है.दिव्या शायद नहा रही थी.नाश्ता एकदम गरम था परांठे और आलू की भाजी फौरन कहा पीक..जूस को गटक के शेविंग की और ब्रश करके जैसे ही बाथरूम की तरफ आया दिव्या टावल लपटे बाहर निकली अफ क्या सौंधी खूबशु आ रही थी निकलते भाप के साथ महक की.बाथरूम से मैंने दिव्या को आँख मारी.और फिर जल्दी से नहाने घुस गया

जब बाहर निकाला तो वॉ सूट पहन चुकी थी.घर काफ इसाफ सुथरा लग रहा था हो ना हो सुबह जल्दी उठके ऊसने कामकाज घर का सारा निपटा लिया था.मुझे वर्दी पहनते देखकर बोली

दिव्या : तुम कब आए थे वॉ भी इतनी सुबह सुबह पता है तुम आते के साथ सो गये

देवश : और नहीं तो क्या करूं? एक तो खंभक्त काम और ऊपर से कमिशनर की मीटिंज्ग मां चोद के रख दी है

दिव्या : छी छी कभी तो अच्छे से बोला करो

देवश : मैं चिढ़ गया हूँ यार अच्छा नहीं लग रहा खैर मैं निकलता हूँ सॉरी आज तुम्हारी नींद खराब की

दिव्या : ना तो मैं 7 बजे उठी तुम बहुत ज्यादा थके हुए थे.तुम घर के अंदर घुसे कैसे? पता है मैं कितना डर गयी कौन मेरे साथ लेटा हुआ है

देवश : बाबू हमेशा याद रखना तुम्हारे संग सिर्फ़ एक ही मर्द के सो सकता है वॉ हूँ मैं और दूसरी बात आज जी नहीं किया घर जाने को अकेले अकेले क्या अब और सोयुंगा बचपन से ही तो अकेला था अब जब एक जवान औरत हो साथ में तो क्या मजा?? वैसे तुम्हारा मुँह क्यों लटका हुआ है?

दिव्या : कुछ नहीं वो आस पड़ोस के लोग पूछताछ करते है जब बाज़ार में मिलते है की तुम्हारा क्या रीलेशन?

देवश : पर डर के मारें नहीं बोलते जानते है मां चोद के रख दूँगा मैं उनकी कोई बात नहीं तुम टेन्शन मत लो मैं समझता हूँ एक जवान औरत एक आदमी के साथ रहती है तो ऊसपे लोग कितना शक करते है जाने दो हमें क्या हमारी दुनिया है

दिव्या केचेहरे पे हल्की मुस्कान आई.मैंने फौरन गाड़ी पकरी..और निकल पड़ा बेचारी ने बहुत रोका लेकिन कलकत्ता 2 घंटे में पहुचना है.दिल में दुख भी था की दिव्या को मैं यूँ मैं अकेला चोद देता हूँ.क्या सोचती होगी? मैं उसके साथ फरेब कर रहा हूँ अकेले अकेले बस अपनी मन की आग शांत करता हूँ लेकिन अभीतक हम दोनों के बीच शादी का रिश्ता बना भी नहीं.उफ़फ्फ़ कितना टेन्शन है य्यार

जल्द ही मीटिंग पे पहुंचा.मीटिंग शुरू भी हो चुकिति मैं अंदर दाखिल हुआ पहले तो कमिशनर से माँफी की रिकवेस्ट की इशारो में ही और फिर अपनी कुर्सी पे बैठ गया.आज काफी बारे बारे अफ़सर आए हुए थे.प्रोजेक्टर स्टार्ट हुआ और फिर एक नक़ाब पॉश लड़की जिसने कृष जैसा मास्क हुआ पहना हुआ था स्क्रीन पे आई उसका चेहरे पहचान नहीं पाया पर बाला की खूबसूरत तो गोरी चिट्ठी और शायद ब्लॉंड उनके सुनहेरे बाल से ही लग रहा था

"ध्यान दीजिए ऑफिसर्स आज हमारी ये बैठक इसलिए हुई है क्योंकि हम इस शख्सियत के खिलाफ एक्शन लेने जा रहे है यक़ीनन ये आप लोगों के डिस्ट्रिक्ट्स में बढ़ती चोरी के मामलों में रही है.और इसके यूँ मुकोता से साफ जाहिर हो रहा है की अभी हाल ही में एक मिडनाइट विगिलियांते क्राइम फाइटर खुद को कहने वाला शॅक्स काला साया और इसमें कोई फर्क नहीं.आप लोग के डिस्कृतस इतर से पास ही है और चोरी की वारदातें पहले सिलगाओं सिलिगुरी मालदा कलकत्ता के पौष ईयालके और इतर में आजकल सुनाने को मिल रही है..इस लड़की का फुटेज हमें सी सी टी अभी कमरा से आत्म मशीन को तोधने के वक्त मिला हम इसके चेहरे को तो नहीं पकड़ पाए पर इससे साफ है की ये चालबाज़ चोर या यूँ कह लीजिए ये औरत काफी शातिर है ये आपको अपने हुस्न से दीवाना बना दे फिर आफ़ि के जेब में हाथ डाले और आप ये सोचे की ये आपका लंड पकड़ रही है बतौर ये आपके जेब को फड़के आपका माल लेकर चंपत हो जाने में माहिर है".....सबकी हँसी निकल गयी फिर मामले को समझते हुए सब गहरी सोच में आ गये

"इसलिए आप लोगों को मैं बता देता हूँ की ये लड़की फिलहाल तो बढ़ते इन्वेस्टिगेशन के कारण कलकत्ता चोद चुकी है और फिलहाल इतर के नज़दीक उसके चोरियो को सुना जा रहा है इसने हमारे पुलिस की टीम को इंजूर्ड कर डाला अब ये लड़की कौन है? ये पता लगाना और इसे अरेस्ट करना आपका काम इनाम भी गोशित किए गये पर सब बेकार सो प्लीज़ गुयज़ लीव और पोज़िशन और कॉन्सेंट्रेट ऑन और न्यू केस डिसमिस"..सब अफ़सर उठके बातचीत करते हुए केबिन से जाने लगे

मैं कमिशनर के करीब आया "सॉरी सर पर मुझे लगता है की इतर में बढ़ती अपराधो में इसी लड़की का हाथ हो सकता है बिकॉज़ जैसे आपको इनफॉर्म किया था हमारी टीम को इसी ने एक झटके में मर के घायल कर दिया"...कोँमिससिओने रछाश्मे को ठीक इए मेरी बात पे गौर करने लगा

कमिशनर - ऑलराइट तो मिस्टर.देवश चटर्जी यू आर ऑन बिकॉज़ ई आम असाइंड यू तो अरेस्ट दीज़ तेइफ़ आस सुन आस यू कॅन वैसे भी आपनेजब से काला साया को मारा है तबसे आपकी प्रश्नासा मेरे एनिगाहो और भी उक्चि है

देवश - मानता हूँ सर जिंदगी की एक भूल तो की है उसे मर के लेकिन अगर यहां वो होता तो ये नहीं होती गुस्तकी मांफ सर (इतना कहकर मैं नजरें झुकाए केबिन से निकल गया)

पूरे रास्ते में बस सोच की कशमकश में डूबा हुआ था.इतर में ऊस रांड़ के आने का मतलब साफ है की मेरी जिम्मेदारी साली और तरफ गयी.अब बेटा चैन कहा.फौरन थाने पहुंचा पहले तो सब केस पे एक बार जाँच की.ऊन्हें निपटाने के बाद जहाँ जहाँ चोरी चोरी हुई थी वहां वहां गया.सब जगहों पे एक ही नाम की नक़ाबपोश लड़की जैसी चोर आई..और सबकुछ लूटके चली गयी उसके चेहरे पे बस एक मुखहोटा था.

पूरे टाउन का लगभग डेढ़ घंटा गश्त लगाया.लेकिन कोई खास रिपोर्ट नहीं वॉकी टॉकी ऑन थी..कोई रिपोर्ट नहीं आई थी..और ना ही किसी घर से कोई सूचना.ऊस रात मैं काफी तक गया था.और जैसे ही घर लौटने को हुआ.तभी देखा एक आदमी चोर्र चोर्र कहकर गाड़ी के बाहर चिल्ला रहा है

मैं उसके करीब आया ऊसने मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला की एक लड़की बाइक से पूरी रफ्तार से भागी है.और उसका आत्म से निकले सूटकेस के पैसों को छींके भागी है ज्यादा दूर नहीं गई.साला आनंफनन में गाड़ी उसी रास्ते मोड़ दी..खूब तेजी से बढ़ता बढ़ा दी..रास्ता एक ही था रंडी बचके जाएगी कहाँ साइरन नहीं बजाया यहां दिमाग चलना था

मेरा पूरा ध्यान ऊस रंडी पे था..अचानक देखता हूँ एक लड़की नक़ाबपोश पहनी बाइक पे सवार है और फुरती से किसी स्टंट मान की तरह चला रही है ऊस्की निगाह जैसे मुझपर हुई मैंने फौरन बढ़ता तेज कर ली.कुछ मीटर दूर थी मुझसे.वॉ बार बार पीछे पलटके मुझे देख रही थी उसके बाइक पे एक सूटकेस फ़साआ था.मैंने फौरन रिवाल्वर निकाली लेकिन ऊसने बाइक सीधे दूसरी ओर पलट ईदया.गुस्सा तो काफी आया मैंने भी गाड़ी उसी ओर मोड़ दी.साला रास्ता इतना खराब था की सर पे चोट लग गया ऊस्की भी बढ़ता थोड़ी धीमी हो गयी
 
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