• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest XXX Kahani मेरे गाँव की नदी

निर्मला: आह सी बेटे तू तो कुछ ज्यादा ही बीच में घुस रहा है देखना कही डूब न जाये और निर्मला के हाथ कल्लु के मोटे खुंखार काले लंड तक पहुच गया और जैसे ही उसने अपने बेटे के काले लंड को अपने हाथो से पकड़ा कल्लु पागलो की तरह अपनी माँ के रसीले होठो को चुमते हुए उसके बोबो को कस कस कर चुसने लगा। निर्मला उसकी इस हरकत से पानी पानी हो गई और उसने कल्लु के कच्छे को खोल कर अपने बेटे के विकराल काले मोटे लंड को अपने हाथो में पूरी तरह थाम लिया अपने बेटे के लंड की लम्बाई और मोटाई देख कर वह पागल हो गई और कहने लगी बेटे पूरी तरह बीच में उतर जा आह आह सी सीई ओह।

कल्लु ने अपनी ऊँगली जो चुत में घुसी थी को बाहर निकाल लिया और गाण्ड में घुसि ऊँगली को गहराई में अपनी माँ की मोटी गाण्ड की गुदा में पूरा जड़ तक पेल दिया और दूसरे हाथ से अपनी माँ के मोटे दूध को दबोचने लगा उधर निर्मला अपने बेटे के काले मोटे लंड को खूब दबा दबा कर महसूस करने लगी और जब उसके हाथ में अपने बेटे के भारी भरकम अंडकोष आये तो उसने उन्हें मुट्ठी में भर भर कर दबोचना शुरू कर दिया कभी वह उसके आंड को दबोचती तो कभी अपने बेटे के लंड के फुले हुए सुपाडे को दबोचती उधर कल्लु ने अपनी लम्बी ऊँगली को अपनी माँ की गाण्ड में जड़ तक घुसा रखा था और एक हाथ से उसके दोनों आमो को बारी बारी से मसल रहा था, तभी कल्लु ने जब अपनी माँ के एक निप्पल को मुह में भर कर काटा तभी निर्मला ने अपने बेटे के काले मोटे लंड को अपनी चुत के छेद में लगा दिया और मारे उत्तेजना के उसने जैसे ही लंड अपनी चुत के छेद में लगाया कल्लु ने कस कर एक धक्का ऊपर की ओर दिया और उसका मोटा तगड़ा लंड अपनी माँ की चुत में आधे से ज्यादा अंदर समा गया और उसकी माँ की चीख़ निकल गई।

निर्मला: कल्लु मार दिया रे कितना मोटा खूँटा है तेरा अपनी माँ की चुत फाड देगा क्या, हरामि क्या तुझे मैंने इसी दिन के लिए अपनी इस चुत से निकाला था की बाद में तू इसी चुत को फिर से अपने मुसल से फाडे आह आह जरा धीरे धीरे चोद हरामी कितना बड़ा लंड है तेरा आह आह सीई सीई अहह सीई ओह माँ मर गई। कल्लु तो अपनी माँ को अपने लंड पर चढ़ाये सारा दबाब अपने लंड की ओर दे रहा था और निर्मला अपने बेटे के खड़े लंड से अपनी चुत फाडे बेठी हुई थी, कुछ देर ऐसे ही झटके देने से दोनों माँ बेटे का पानी छूट गया और दोनों हाफ्ते हुए किनारे पर आकर सुस्ताने लगे।

थोड़ी देर बाद जब दोनों की साँसे नार्मल हुई तब निर्मला ने मुस्कुराते हुए कल्लु की ओर देखा और उसके मोटे लंड को देख कर कहने लगी तूने इसी तरह गुड़िया को भी तैरना सिखाया है न।
 
कल्लु : मुस्कुराते हुए अपने लंड का सुपाडा अपनी माँ को खोल कर दिखाते हुए कहने लगा गुड़िया खुद ही तैरना सीखने के लिए मरी जा रही थी तो मै क्या करता।
निर्मला : मुसकुराकर अच्छा तो तू नहीं मरा जा रहा था अपनी बहन के लिये।
कालू : अपने लंड को मसलते हुए कहने लगा माँ मुझे तो गुड़िया से ज्यादा तुझे तैरना सीखाने का मन होता था।
निर्मला मुस्कुराते हुये, अच्छा तभी दिन भर खेतो में मेरे पीछे ही रहता था, और वैसे भी तेरा यह मुसल तेरी बहन के लायक नहीं बल्कि बड़ी बड़ी गदराई औरतो के लायक है।

कल्लु : मुस्कुराकर अपनी माँ की मोटी नंगी जांघो को सहलाते हुए कहने लगा तू भी तो खूब तबियत से गदराई हुई है,तेरी यह चूत और गांड तो पूरा लेने लायक है।

निर्मला कल्लु के मोटे काले लंड को अपने हाथो से सहलाती हुई, अच्छा तो क्या अपनी माँ पर चढेगा।

कल्लु : अपनी माँ की मोटी गुदाज जांघो को दबोचते हुये, क्यों जब तू अपने बेटे पर चढ़ सकती है तो मै तेरे ऊपर नहीं चढ़ूगा क्या।
निर्मला : मुसकुराकर कहने लगी बस चढेगा ही या कुछ करेगा भी।
कालू : अपनी माँ की मस्त चुत को अपनी हथेली में भर कर कहने लगा चढूँगा भी और तेरी इस मस्त चुत को फाड़ूंगा भी।

निर्मला : मुसकुराकर और कितना फाड़ेगा तेरे निकलने से ही तो सबसे ज्यादा फटी है।
कालू : अपनी माँ की चुत को सहलाकर कहने लगा इसे तो खूब तबियत से फाड़ूंगा ही और अभी इसे भी तो फाडना बाकि है और कल्लु ने अपनी ऊँगली अपंनी माँ की गाण्ड में पेल दी और निर्मला फिर से सिसिया कर कल्लु के सिने से चिपक गई।
कालू : बोल फड़वाएगी अपने बेटे से अपनी मोटी गाँड।
निर्मला : इतने मोटे लंड को अपनी गाण्ड में घुसवाउंगी तो मेरी गाण्ड तो पूरी फट जाएगी।

कल्लु : अरे तू इतना मदमस्त तगड़ा माल है की ऐसे दो दो काले लंड तेरी गाण्ड में घुस जाएगे।
निर्मला: नहीं रे अभी तो तू मेरी चुत ही फाड ले कल तेल लेकर आउंगी तब फिर अपनी माँ की गाण्ड भी खूब कस कर मार लेना मुझे पता है तू अपना काला मुसल पूरा अपनी माँ की मोटी गाण्ड में पेलना चाहता है, और वैसे भी गुड़िया ने कहा था की मुझे कम से कम 8-10 दिन तक तुझसे तैरना सीखना पड़ेगा तभी मै अच्छे से तैर पाउँगी।
 
कल्लु ने बैठे बैठे ही आसन जमा कर अपने खड़े लंड को अपनी माँ की चुत में एक झटके में पेल दिया और निर्मला ने अपनी जांघो को फैला कर अपने हाथ पीछे जमीन पर लगा दिए और कहने लगी अब 8-10 दिन नहीं मै तो रोज तुझे तैरना सिखाउंगा और अपने लंड पर चढा चढा कर तुझे तैराउन्गा।

निर्मला : आह मुये कितना मोटा और विकराल लंड हो गया है तेरा तू तो मेरा मरद बनने के लायक है आह अहह सी सी ओइ माँ और कस के पेल बेटा।

कल्लु : हुमच हुमच कर उकडू बैठे बैठे अपने लंड को अपनी माँ की चुत में पेलते हुए कहने लगा मुझे भी तेरे जैसी ही औरत चाहिये, तेरा गदराया बदन मोटी मोटी जांघे भारी भरकम चूतड़ और मस्त भोसडा मारने में ही मुझे मजा मिलता है आज से तो मेरी औरत तू ही है। आज से मै तुझे रोज नंगी करके खूब कस कस के चोदूँगा।

निर्मला खूब सिसिया रही थी और उसका बेटा दनादन उसकी मस्त चुत में लंड पेल रहा था, कल्लु का लंड और भी विकराल हो गया था और निर्मला की चुत से पानी की धारा बह निकली अब उसने अपनी माँ के मोटे मोटे चूतडो को अपनी तरफ खींच कर दबोच लिया और खूब कस कस कर अपनी माँ की चुत की गहराई में धक्के मारने लगा।

कुछ देर अपनी माँ की रसीली चूत चोदने के बाद कल्लू ने अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत से निकाल लिया और अपनी माँ को अपना लंड चूसने का इशारा किया।
निर्मला ने कल्लू के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

कल्लू:आह माँ क्या मस्त गरम मुँह है तेरा।बहुत मज़ा आ रहा है। लग रहा है मेरा लंड किसी चूत में जा रहा है।तू तो लंड चूसने में भी एक्सपर्ट है।चूस साली और अंदर ले ।पूरा अंदर ले के चूस।

फिर कल्लू अपनी माँ को कुतिया बना देता है और अपना मोटा लंड अपनी माँ की रसीली चूत के छेद पर रखकर एक ही धक्के में पूरा लंड अपनी माँ की चूत में पेल देता है।फिर फचा फच जोर जोर से पेलने लगता है।
कल्लू:आह कितना मज़ा आ रहा है।कितनी टाइट चूत है तेरी माँ।लगता है बहुत दिन से चुदी नहीं है।

निर्मला:हां मेरे लाल चोद अपनी माँ को ।बहुत दिन से प्यासी हूँ चोद चोद के फाड़ दे मेरी चूत को।ये मुझे बहुत परेसान करती है।
कल्लू:आज से रोज तुझे चोदुन्गा माँ।आज से तू मेरी रंडी है।साली अब तेरी चूत और गांड रोज फ़ाड़ूंगा।
इसी तरह कुतिया बना के तेरी गांड मारूँगा साली रंडी।बहुत तरसाया है तूने अपनी मोटी मोटी गांड दिखा के।

निर्मला:चोद मादरचोद चोद।आज से मैं तेरी रंडी हूँ।चोद फाड़ दे मेरी चूत को।
 
कल्लू पूरी ताकत से अपनी माँ को चोदने लगता है गन्दी गन्दी गाली देते हुए।
लगभग सैकड़ो धक्के मार मार कर उसने अपनी माँ की चुत को पूरा लाल कर दिया और अपनी माँ को चोद चोद कर खूब पानी निकाला और अपना पूरा माल अपनी माँ के चूत में निकाल देता है।उस सुनसान जगह पर दोनों की सिसियाने की आवाज और चुत में लंड की पड़ती थाप ही गूंजती रही थी।

उस चुदाई के बाद दोनों माँ बेटे घर की ओर चल दिए। और निर्मला ने अगले दिन तेल की शीशी साथ में लेकर आने वाली बात कल्लु से की और कल्लु अपनी माँ की गुदा को सहलाते हुए कहने लगा माँ कल जब तेरी गुदाज गण्ड में तेल से सना हुआ मेरा काला लंड घुसेगा तो मजा आ जायेगा तब निर्मला कहने लगी अब तो मै भी तेरे इस मोटे मुसल से अपनी मोटी गाण्ड मरवाने के लिए तड़प रही हूँ।

कल सबेरा होते ही हम यहाँ आ जाएगे फिर तू अपनी माँ की कोरी गाण्ड को अपने मुसल पर तेल लगा कर कस कर ठुकाई करना बस यही बाते करते हुए दोनों अपने खेत की ओर चल पडे।
 
दूसरे दिन बाबा को थोडा सा बुखार था।इसलिए वो खेतो में काम करने नहीं गए।कल्लू बैध जी से दवा लाया और बाबा को खिला दिया था।अब बुखार ठीक था।लेकिन कल्लू और निर्मला ने उनको आराम करने को कहकर खेतों की तरफ चल दिए।निर्मला के हाथों में तेल की शीशी देखकर कल्लू का लंड अपनी माँ की मोटी मोटी गांड को फाड़ने के लिए फ़ुफ़कारने लगा।

गुड़िया की सहेली का बर्थ डे था इसलिए वो कुछ देर बाद बगल के गाँव में अपनी सहेली के घर जा रही थी।

आगे आगे निर्मला अपनी मोटी मोटी गांड मटकाती चल रही थी आज निर्मला ने साड़ी पहन रखी थी।जिसे देखकर कल्लू का लंड पूरा रॉड बन गया था।गाँव से दूर आ जाने पर कल्लू अब अपना हाथ कभी कभी अपनी माँ की गांड पर फेर रहा था।खेत में पहुंचकर दोनों झोपडी के पास बैठ गए।निर्मला भी पूरी गरम हो चुकी थी।

कल्लू के होंठ जब अपने माँ निर्मला के होठो के इतने करीब थे, की दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही थी।
कल्लू अपने माँ से एक सवाल पूछता है।
क्या तुम मुझसे आज अपना गांड मरवाओगी माँ ।और निर्मला उसे जवाब नहीं देती बस उससे अपने होठो से लगा लेती है,और दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक जाते है।
यूं तो इससे पहले भी ये एक दूसरे से मिले थे मगर आज जो जज़्बा दोनों के अंदर था वो इससे पहले कभी नहीं महसूस हुआ था।
कल्लू अपने ज़ुबान को बाहर निकाल कर निर्मला के मुह में डालने लगता है और निर्मला भी उसका साथ देते हुए अपना मुह खोल कर कल्लू की जीभ को चुसने लगती है। ओ इस अंदाज़ में कल्लू की जीभ चूस रही थी जैसे उसके मुह में कल्लू का लंड हो।चटखारे मारते हुए अपने मुह का थूक कल्लू के मुह में उंडेलती हुई।

कल्लू का बदन गरम हो चूका था जिस्म पर मौजूद कपडा भी उसे बोझ लग रहा था वो निकाल कर उसे फेंक देता है और निर्मला को मसलते हुए उसके ऊपर चढ जाता है उसका खड़ा लंड निर्मला के साडी के ऊपर से चूत से जा टकराता है।वो चुभन पहली नहीं थी।मगर आज उस चुभन को अंदर महसूस करना चाहती थी निर्मला।

निर्मला;आ ह ह ह मुझे नंगी कर दो पूरी तरह।
कल्लू;मुस्कुराते हुए बैठ जाता है और एक झटके में उसका ब्लाउज निकाल देता है।साडी को कमर से खींच कर अलग कर देता है और पेंटी को नीचे उतार देता है।फूलों से महकती हुए निर्मला अपने पुरे शबाब के साथ कल्लू के सामने नंगी हो जाती है।
कल्लू;माँ आज मै तुझे मर्द का एहसास कराना चाहता हूँ। तेरे मर्द का, तेरे कल्लू का ,तेरे बेटे के लंड से ,तेरी तडपती हुई चूत को गीला करना चाहता हुं। बोल माँ मुझसे चुदाएगी ना लेंगी न मेरा लंड अपनी चूत में।

निर्मला;आह ह ह ह ह मेरी चूत अब मेरी नहीं रही कल्लू ये तुम्हारी हो गई है तुम मालिक हो अब इसके जो चाहें वो कर सकते हो इसके साथ।आह मसलो मेरी चूत के दाने को।बहुत तडपाती है ये तुम्हारी माँ को मेरे लाल।

कल्लू;अपने माँ के ब्रैस्ट पर टूट पड़ता है। ओ बड़े बड़े खरबूज़ की तरह ब्रैस्ट को अपने मुह में भर लेता है और चूसने लगता है।

निर्मला की चूत भी चीखने लगती है।मिलन का वो वक़्त करीब आ गया था। कल्लू का हाथ नीचे बढ़ कर निर्मला के चुत को सहलाने लगता है और निर्मला भी अपने नाज़ुक से हाथों में कल्लू का मोटा लंड दबोच लेती है।
और उसे पकड़ कर हिलाने लगती है जिससे उसकी चूडियाँ खनकने लगती है जिसकी आवाज से कल्लू का लंड झटके मारने लगता है। अबदोनो की साँसें फूल चुकी थी दोनों एक दूसरे के अंदर जाने के लिए बेताब थे।

मगर ये हसीन वक़्त कल्लू को बड़े मुद्दतों के बाद नसीब हुआ था वो कोई जल्द बाज़ी नहीं करना चाहता था।वो नीचे निप्पल्स को हलके हलके काटने लगता है और उसे खिंचते हुए एक ऊँगली उसके बाद दूसरी ऊँगली भी निर्मला के चूत में डाल देता है।
निर्मला -आहह मार डालेगा आज तू मुझे आह
आह ह ह ह।
कल्लू;अभी नहीं जाने मन।
वो नीचे सरकते हुए पेट से होते हुए चूत तक पहुँच जाता है और अपने माँ की चूत के महक में जैसे खो जाता है। एक दिलकश जगह वो जगह जो हर किसी को नसीब नहीं होती। बस कल्लू जैसे किस्मत वाले उस मुक़ाम तक पहुँच पाते है।

निर्मला अपने दोनों पैरों को और खोल देती है। देख जब तू इस चूत से निकल रहा था तब भी मेरे पैर ऐसे ही खुले हुए थे और आज जब तू इस में जायेंगा तब भी ऐसे ही हैं। आजा अपने माँ की चूत में कल्लू।आह अह्ह्ह।
कल्लू अपने ज़ुबान को निर्मला की चूत पर रख कर गाण्ड के सुराख़ से लेकर चूत के दरार तक चाटने लगता है ।

उसकी चूत इतनी पनिया गई थी की ज़ुबान जितने अंदर जाता निर्मला अपने कमर को उतना ऊपर उठा लेती।
इस एहसास में की कल्लू उसे चोद रहा है मगर वो कहाँ जानती थी के असली एहसास अभी बाकी है।
 
कल्लू अपने एक ऊँगली को निर्मला के गाण्ड में डाल कर उसे अंदर बाहर करने लगता है। निर्मला का मुह खुलता चला जाता है। हलक सुखने लगता है मुह से एक शब्द भी नहीं निकल पाता। ऐसा लगने लगता है निर्मला को जैसे की उसकी जान उसकी चूत से खीच रहा है। निर्मला अपने दोनों हाथों से कल्लू के सर को अपने चूत पर दबाने लगती है।

कल्लू के ज़ुबान अपना काम कर गई थी।निर्मला के चूत का उस दिन का पहला पानी बाहर बह निकला था।जिसे कल्लू बड़े चाव से चाटता चला जाता है।
जब निर्मला की साँसें थोड़े धीमी होती है तो वो कल्लू के तरफ देखने लगती है।कल्लू का मुँह पूरी तरह निर्मला के चूत के पानी से गीला था।निर्मला के आँखों में खून उमड़ आया था।वो कल्लू के तरफ लपकती है और उसके मुह को चाटने लगती है।

निर्मला:गलप्प मेरी चूत का पानी है ना ये गल्प
मेरे जान के मुँह को मै साफ़ कर देती हु इसे गलप्प
गलप गलप्प। ओ दीवानी हो गई थी चूत की आग आज सर में चढ़ गई थी।
कल्लू अपने ज़ुबान को भी बाहर निकाल देता है।और निर्मला उसे भी चाटने लगती है।मगर जैसे ही वो कल्लू से और चिपकती है। एक नोकीला मोटा चीज़ उसके पेट से टकरा जाती है।
निर्मला नीचे देखती है।वो कल्लू का खड़ा लंड था जो झटके पर झटके मार रहा था।

कल्लू -माँ तू पेशाब को कैसे बैठती है।
निर्मला नीचे ज़मीन पर बैठ जाती है
निर्मला:ऐसे पेशाब करती है तेरी माँ।
पैर खुले हुए चूत ,चौडे गांड पीछे की तरफ निकले हुए,
ब्रेस्ट सामने की तरफ लटके हुए।।।बहुत हसीन लग रही थी निर्मला।
कल्लू अपने लंड से निर्मला के गाल सहलाने लगता है।
निर्मला- मेरा गला सूख रहा है।मै पानी पीकर आती हूँ।

कल्लू-पानी तो यही है। चल मुँह खोल।
निर्मला कल्लू के आँखों में देखते हुए जैसे ही मुह खोलती है कल्लू उसके मुह में अपना लंड डाल कर उसका सर पीछे से पकड़ लेता है। निर्मला को समझ नहीं आता की कल्लू क्या कर रहा है।
मगर अगले ही पल उसे तब एहसास होता है जब कल्लू का पेशाब उसके हलक में गिरने लगता है।
पेशाब की महक निर्मला को और मदहोश कर देती है और वो कल्लू के लंड से निकला पिशाब पीने लगती है
निर्मला अपने हाथ में कल्लू के आंडो को पकड़ कर उसे दबाने लगती है। जिससे कल्लू का लंड और मोटा होता चला जाता है।
पेशाब पीने के बाद निर्मला का बदन ऐंठने लगता है
उसे लंड चाहीये था अपने चुत में मगर कल्लू उसका मुह मीठा किये बिना उसे ये देना नहीं चाहता था।
कल्लू इशारे से निर्मला को अपने लंड को फिर से मुह में लेने के लिए कहता है।
और गरम दीवानी निर्मला अपने कल्लू के लंड को अपने मुह में लेकर उसे सर से लेकर जड़ तक चाटने लगती है।गप गप आह गल्प गल्प।
कल्लू:मेरा लंड मेरे मुह में कितन अच्छा लगता है माँ गल्प गप।चूस इसे पूरा मुँह में लेके।
निर्मला:मेरे बेटे का लंड मै रोज चूसूंगी गप गप।
कल्लू;आह माँ धीरे धीरे चूस ना दर्द हो रहा है आह
निर्मला;करने दो ना बेटे।और चूसने दे।
कल्लू;अपनी माँ के लिए बरसों का प्यासा था।
 
आज जब कुआँ खुद चल कर प्यासे के पास आया था तो कल्लू एक बूंद भी गँवाना नहीं चाहता था वो अपने माँ को दिन भर पेलना चाहता था। उसे दिन भर अपने लंड के नीचे लेटाकर चोदना चाहता था।
कल्लू;अपने माँ को गोद में उठा लेता है और उसे खेत में लेटा देता है और झट से उसके ऊपर चढ़ जाता है।
अपने दोनों हाथों में निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर वो निर्मला को चुमते हुए अपने लंड को निर्मला के चूत पर घीसने लगता है।
कल्लू:माँ तेरी चूत मुझे चाहिए।
निर्मला:-हाँ हाँ ले ले मेरी चूत बेटा आह आह।चोद डाल अपनी माँ को बना ले तेरे लंड की रानी आह अब और मत तडपा मुझे पेल न अंदर आह।
कल्लू ;कहाँ डालूँ मा।
निर्मला;नीचे हाथ डाल कर कल्लू के लंड को अपने हाथ में पकड़ लेती है और उसे अपने चूत के मुहाने पर लगा देती है। यहाँ मेरे बच्चे यहाँ।
निर्मला;अब तो मना नहीं करेगी ना माँ।
निर्मला;नहीं नहीं अब मना नहीं करुँगी जब जहाँ जैसे चाहेगा वहाँ चुदायेंगी तेरी माँ तुझसे बस डाल दे मेरे अंदर।घुसा दे अपना पूरा लंड अपनी माँ की चूत में।

कल्लू ;अपने कमर को ऊपर के तरफ उठाता है और दन से उसे निर्मला के चूत पर दबा देता है।
एक बेटे का लंड सारे बंधन तोड कर सारी कस्मे भूल कर अपने माँ की रसीली चूत में घुस जाता है।
निर्मला चीख पडती है।हाय बेटे दर्द हो रहा है।

कल्लू;आज वो दिन नहीं है जब एक बेटे अपने माँ के दर्द को सुनकर रुक जाए।वो दूसरा धक्का देता है और ये वाला धक्के से लंड निर्मला के बच्चेदानी तक जा रहा है।निर्मला की कमर ऊपर की तरफ उठ जाती है और निर्मला के दोनों पैर कल्लू के कमर से लिपट जाते है ।वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है।
कल्लू;कुछ पल उस एहसास को महसूस करता है और फिर अपने माँ के दोनों ब्रैस्ट को दबाते हुए लंड को आगे पीछे करता चला जाता है।
निर्मला;हाय रे बेटा मेरा आहह मेरी चूत है ना वो अहह
मेरे बेटा धीरे से कर ना आह।पहले पहले धक्के तो सभी को भी दर्द देते है।
निर्मला तो दो बच्चों की माँ थी उसे ज़्यादा वक़्त नहीं लगता सँभालने में ।जब चूत की चिकनाहट लंड को सहलाने लगती है और जब चूत की दिवारें पूरी तरह खुल जाते है तो निर्मला भी पागल सी हो जाती है।
अपने एकलौते बेटे के नीचे टाँगें खोल कर चुदाना उसे दिवानी बना देता है और वो अपने बेटे के चेहरे को पकड़ कर उसके होठो को अपने मुह में लेकर नीचे से दना दन दना दन हर धक्के का साथ देते हुए कमर को ऊपर उठाने लगती है।
निर्मला:आह।और जोर से बेटा और जोर से
आह खूब डाल मुझे अंदर तक हर उस जगह पहुँच जा जहाँ तेरे बापु भी नहीं पहुँच पाये आह।
मेरी चूत सिर्फ तेरी है मेरे लाल आहह
चोद अपनी माँ को जोर जोर से चोद मुझे आह।
 
निर्मला वो औरत थी जो कल्लू के धक्कों को बड़ी आसानी से सह रही थी और मस्ती में उससे और ज़ोर से पेलने के लिए कह रही थी।सच कहा है किसी ने ग़ुरू ग़ुरू होता है और चेला चेला।गुड़िया तो कल्लू के पेलने पर चीखने लगती थी। यहाँ वो औरत थी जिस ने इस सांड को पैदा की थी। भला वो उस लंड से कैसे पनाह माँगती। आज कल्लू को अपने माँ की ताकत का एहसास हुआ था।
कल्लू ;जितने ज़ोर से लण्ड को चूत में घुसाता
निर्मला उतने ही ताकत से अपने कमर को ऊपर उठा कर उसे और अंदर ले लेती है।
निर्मला पागल हो गई थी अपने दोनों हाथों के नाखुनो से वो कल्लू के पीठ को कुरेदते हुए उसे और ज़ोर से चोदने के लिए पुकार रही थी।
जब माँ पुकारती है तो बेटे को आना पड़ता है और कल्लू वही कर रहा था वो निर्मला को जबरदस्त धक्के के साथ पेल रहा था और निर्मला अपने बेटे को इतनी आसानी से रुकने देने वालों में से न थी।

खेत में पच पच की आवाज़ें गूंज रही थी।कल्लू अपने लंड को पूरा निकलता है घच से फिर अपनी माँ की गीली चूत में पूरा लंड जड़ तक पेल देता।
निर्मला के बीच बीच में चीखने की आवाजे।
जब कल्लू का लण्ड उसके बेच्चेदानी से टकरा जाता।
कल्लू पसीने में नहा चूका था और उसके नीचे लेती हुए निर्मला भी दमा दम हो गई थी मगर दोनों के कमर लगातार हील रही थी। कल्लू की पकड़ अपने माँ के ब्रैस्ट पर और मज़बूत होती चली जाती है।
और निर्मला की चूत से पानी टिप टिप करके रिसने लगता है।वो जोश दिन भर कम नहीं होने वाला था ये दोनों अच्छी तरह से जानते थे।

दोनो पिछले 30 मिनट से जोरदार चुदाई में लगे हुए थे
और लण्ड की मार चूत पर जारी थी।
निर्मला अपना मुह खोल देती है और उसका ज़ुबान बाहर की तरफ निकल आता है उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। कल्लू के धक्कों से उसे सँभलने का मौका नहीं मिल रहा था।
निर्मला -चोद मुझे बेटा चोद अपनी माँ को।अपनी माँ को चोद रहा है ना तु। मेरी चूत में अपना लंड डाल कर जहाँ से मैंने तुझे निकाली थी वहीँ अपना मोटा लण्ड डाल के आह।कैसी है तेरी माँ की चूत मेरे लाल
आह और जोर से चोद आह।

कल्लू;माँ तेरी चूत मुझे पहले मिल गई होती तो कसम से कहीं भी नहीं जाता दिन रात इसी में पडा रहता। आह।
निर्मला;आज से इसी में रखूँगी तुझे दिन रात मुझे चोदेगा ना अपनी माँ को जब दिल कहेंगा मेरा आ ह ।
कल्लू;हां माँ आज से बस तुझे ही चोदुँगा मैं हर जगह।

निर्मला;कहाँ कहाँ चोदेगा मुझे आह।
कल्लू;हर जगह माँ हर जगह।
जब तक तेरे तीनो सुराख़ में नहीं पेल देता तब तक नहीं रुकुंगा आज मैं।
निर्मला;तीनो सुराखों में बेटा।
कल्लू;हाँ माँ तेरी चूत और मुह तो ले चुके है मेरा लण्ड बस तेरी गाण्ड बाकी है आहह उसे भी चोद लूँ एक बार तभी रुकेगा तेरा बेटा आह ह।
निर्मला;मैं भी तुझे रुकने नहीं दूंगी बेटा।
हर जगह लूँगी तेरा लंड।
खेत में।नदी में तो ले चुकी हूँ।
नहाते हुए
पेशाब करते हुए
किचन में
खाना खाते हुए
हर जगह मुझे चोदना मेरी बेटी की चूत चाटते हुए भी चोदना। मेरी बहु के सामने नंगी करके चोदना मुझे बेटा।
कल्लू;हाँ माँ मैं चोदुंगा तुझे अपनी बहन गुड़िया की चूत पर झुका कर।

जब मेरी शादी होगी तो तेरी बहु के सामने भी तुझे चोदुँगा तुझे आहः ले साली।
दोनो एक दूसरे से चिपक जाते है और लम्बी लम्बी साँसें लेते हुए कल्लू अपना सारा पानी अपनी माँ निर्मला के चूत में निकालने लगता है
उसके साथ साथ निर्मला भी झड़ते चली जाती है।
दोनो एक दूसरे को चुमते हुए अपने साँसें धीमी करने लगते है।
 
कुछ देर बाद फिर से निर्मला कल्लू के लण्ड को चूस चूस कर खड़ा कर चुकी थी। दोबारा उसे अपने अंदर लेने की चाह उसे बेचैन कर रही थी।

कल्लू;अपने पास में पड़ी हुए तेल की बोतल उठा लेता है और उसे अपने लण्ड पर उंडेल कर लंड चिकना कर देता है।निर्मला को समझते हुए देर नहीं लगती की कल्लू ऐसा क्यूँ कर रहा है।फिर वह तेल को निर्मला के गांड के छेद पर भी खूब प्यार से लगाता है और साथ ही साथ उसमे अपनी ऊँगली भी पेलता रहता है।

लण्ड और गांड पर तेल लगाने के बाद कल्लू निर्मला को एक कुतिया के पोज में कर देता है।
बडी सी चमकती हुए गाण्ड कल्लू के सामने आ जाती है। इस गाण्ड को तो देख देख कितने बार कल्लू अपने लंड को खड़ा करके गुड़िया और चाची की चूत में घुसाया करता था।और आज यही गाण्ड कल्लू के सामने झुकी हुई थी।
कल्लू;एक थप्पड निर्मला के गाण्ड पर जड़ देता है।
निर्मला:आह। क्या करते हो माँ हूँ मै तुम्हारी।

देवा;उसे सहलाते हुए।रांड भी तो है।
इतने सालों से तडपा जो रही है इस गांड के लिए। एक गाण्ड पर थपड क्या मारा चीख पड़ी साली रंडी।
निर्मला;आहह दर्द होता है ना।
कल्लू ;असली दर्द अब होंगा मेरी जान को।
कल्लू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे निर्मला के गाण्ड के सुराख़ पर घिसता है। निर्मला अपनी ऑंखें बंद कर लेती है।वो जानती थी दर्द भी होंगा मगर मीठा मीठा और वही होता है कल्लू के लंड का सुपाडा निर्मला की कुँवारी गाण्ड में अटक जाता है।
निर्मला ;आहह गया क्क्या.........

वह पीछे मुड़ कर देखती है।
सिर्फ सामने का हिस्सा गया था और निर्मला की आँखों में ऑंसू आ गये थे। कल्लू उसे पूरी तरह सीधा कर देता है और निर्मला अपने कमर को ऊपर के तरफ उठा लेती है।और अपने दोनों हाथो को पीछे करके अपनी गांड के छेद को फैला देती है।
कल्लू;दोनों हाथों में अपनी माँ के काँधे को पकड़ कर लंड को धीरे धीरे अपनी माँ निर्मला के गांड में उतारता चला जाता है।
 
निर्मला अपनी चीखें छूपाने के लिए पेंटी अपने मुह में ठूँस लेती है। मगर गुं गुं हूं की आवाज़ें फिर भी उसके मुह से निकल रही थी
कल्लू;तब तक नहीं रुकता जब तक पूरा का पूरा लंड गाण्ड में नहीं चला जाता। जब कल्लू लण्ड को खिचता है तो थोड़ा सा खून भी उसके लंड से लग जाता है।
जो निर्मला के गाण्ड से निकल रहा था।
कल्लू ;तुझे दर्द हो रहा था तो मुझे रुकने के लिए बोली क्यूँ नही माँ।
निर्मला;मुड कर कल्लू के आँखों में देखने लगती है।
बहुत तड़पाया हैं मैंने तुझे ।जो तड़प का दर्द तूने सहा है मेरी वजह से उस दर्द के सामने ये दर्द तो कुछ भी नहीं है। रुक मत खोल दे आज अपने माँ के हर सुराख़ को।
और कल्लू अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए तेल से सना हुवा लंड गप की आवाज़ के साथ अपनी माँ निर्मला की गांड में उतार देता है।
निर्मला ;आह बेटे आह। और ज़ोर से।जालिम और ज़ुल्म कर अपने माँ पर ।तेरा हर ज़ुल्म सहना चाहती हूँ मै आज से हर दिन हर रात हर सुबह हर घडी ही चोद मुझे आह।
कल्लू;गप गप अपनी माँ की गाण्ड मारने लगता है
हलांकी दोनों को दर्द भी हो रहा था मगर वो मोहब्बत ही क्या जिस में दर्द न हो। सच्ची मोहब्बत में दर्द भी होता है और उस दर्द का मजा भी खूब होता है।
कल्लू अब अपनी पूरी ताकत से निर्मला की गांड मारने लगता है।वह गांड में लंड पेलने के साथ ही कभी कभी निर्मला के गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था जिससे निर्मला के गोरे गोरे चूतड़ लाल हो गए थे।1 घंटे तक जबरदस्त धक्को के साथ चुदाई के बाद कल्लू अपना पूरा माल अपनी माँ की गांड में ही भर देता है।इतनी देर में निर्मला 2 बार झड़ चुकी थी।
 
Back
Top