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Incest Porn Kahani टैटू गुदाई और चुदाई

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मधुलिका:" कहानी की मुख्य महिला किरदार और पूरी कहानी इसी पर आधारित है। आयु लगभग 39 साल और लंबाई करीब 6 फीट और वजन 63 किलोग्राम हैं। देखने में बेहद खूबसूरत और आकर्षक, गोल सा सुंदर चेहरा,काले घने बाल और बड़ी बड़ी खूबसूरत आंखे। सीने पर दो विशाल पपीते के आकार के ठोस गुदाज उभार, इस उम्र भी में बिल्कुल सख्ती के साथ तने हुए मानो उन्हें झुकना पसंद नही,और हल्की सी चर्बी लिए मांसल कमर बिलकुल लहराती हुई नागिन की तरह, गोरा चिकना खूबसूरत पेट और उस पर गहरी गोल गोल आर्कषक नाभि, भरी भरी चिकनी जांघें। कमरे के पीछे जानलेना कटाव लिए पीछे की तरफ उभरे नितम्ब, बेहद आकर्षक और कमनीय, कुल मिलाकर ऐसा रूप सौंदर्य जो किसी को भी अपनी तरफ आसानी से मोहित कर ले। अपने आपको पूरी तरह से इस उम्र मे भी फिट रखा हुआ है। मधुलिका की एक हल्की सी झलक

फिगर:" 38:29:40


काफी आधुनिक विचारों की संस्कारी महिला हैं जो नए जमाने के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलती है। चाहे बात फिर नए नए और आकर्षक कपड़ो के पहनावे की हो या वर्तमान में चल रहे किसी भी फैशन की।

राकेश:" मधुलिक का पति, मधुलिका का दूसरा पति जिसने मधुलिका के पहले पति के मरने के बाद उससे शादी कर ली। राकेश के खराब व्यवहार के चलते उसकी पहली पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी । उम्र करीब 54 साल हैं और काफी पैसे वाला आदमी हैं जिसे बस पैसे कमाने की फिक्र रहती हैं। एक कंपनी में अच्छी खासी सैलरी पर कार्यरत है। परिवार के लिए इस आदमी के पास समय का अभाव हमेशा रहता है जिस कारण इसके अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा अच्छे रिश्ते नही हैं।

मोहित:" माधुलिक का एकमात्र 20 वर्षीय बेटा जो अभी थोड़े दिन पहले ही करीब पांच साल बाद दुबई से टैटू गुदवाने का कोर्स करने वापिस आया हैं और मुबई में इसने अपना एक ऑफिस खोल लिया हैं। काफी सुंदर हैं और एक बहुत ही अच्छे और तंदुरुस्त जिस्म का मालिक हैं ।
 
अपडेट 01

करीब शाम के छह बजे का समय था और घर के लैंड लाइन फोन की घंटी बज उठी। मधुलिका रात का खाना बनाने में व्यस्त थी लेकिन फोन की घंटी बजने से वो फोन की तरफ आई और फोन पर आवाज को सुनते ही उसके होंठो पर स्माइल आ गई और बोली:"

" अच्छी हु नेहा, तुम कैसी हो ? आज काफी दिनों के बाद फोन किया।

नेहा :" मैं तो हमेशा की तरह मस्त हु जानेमन। तुझे फुरसत ही कहां हैं बात करने की, इतनी देर से तेरे मोबाइल पर कॉल कर रही थी लेकिन तूने उठाया ही नहीं । बस थोड़ा ऑफिस के काम में व्यस्त थी इसलिए बात नही हो पाई।

मधु:" मेरा फोन दूसरे कमरे में लगा हुआ था और मैं खाना बना रही थी। अरे मैडम तुझे तो बस बहाने बनाने आते हैं। आज तो संडे हैं तो सुबह से ही घर पर होगी फिर क्यों फोन नही किया ?

नेहा:" अरे करने का सोच ही रही थी कि सुबह ही मेरी मेरी पड़ोसन आ गई। उसने मुझे अपने जिस्म पर बने टैटू दिखाए तो मुझे बहुत पसंद आए। बस इसलिए मैं भी चली गई आज टैटू बनवाने क्योंकि तू तो जानती हैं मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होता कि को फैशन में मुझसे आगे निकल जाए। बस इसलिए फोन नही किया।

मधु:" अच्छा तो मैडम अपने पड़ोसन के टैटू से जल गई और खुद ही बनवा लिए। चल अच्छा किया तूने, वैसे मेरा बेटा ने भी तो टैटू बनाने का हो ऑफिस खोला हुआ है।

नेहा:" अच्छा जी, पहले बताती तो शायद थोड़ा सस्ता में काम हो जाता मेरा। चल कोई बात नहीं आगे से तेरे बेटे से ही बनवा लूंगी। अच्छा रुक तुझे अपने टैटू दिखाती हूं। अपना व्हाट्स ऐप चेक कर।

इतना कहकर नेहा ने अपने अपना मोबाइल निकाला और अपने कुछ फोटो मधु को भेज दिए। मधु दूसरे कमरे से अपना फोन ले आई और देखने लगी। उसने देखा कि नेहा ने उसे एक कुछ फोटो भेजी हुई थी। उसने उत्सुकता वश एक फोटो को खोला और देखा कि सांवली सी नेहा की गर्दन पर एक बहुत ही खूबसूरत सा टैटू बना हुआ था। टैटू बनाने वाले सच में बहुत अच्छा काम किया था। टैटू में एक बहुत ही खूबसूरत आकृति बनी हुई थी जिसमे नेहा की गर्दन काफी आकर्षक लग रही थी।

नेहा:" क्या हुआ, कहां खो गई मैडम ? अच्छा नहीं लगा क्या ?

नारी स्वभाव के कारण मधु ने एक लंबी सी आह भरी और बोली:" अरे यहीं हु, बस तेरी गर्दन पर फोटो देख रही थी, सच में तेरी गर्दन पर बेहद खूबसूरत टैटू बना हुआ है।

नेहा अपने टैटू की तारीफ सुनकर खुश हुई और इतराते हुए बोली:" चल अच्छा लगा तुझे तो मेरे पैसे वसूल हो गए। और फोटो देख न और भी टैटू हैं ।

अपनी तारीफ सुनने की भूखी नेहा ने उसे दूसरे फोटो देखना का एहसास दिलाया तो मधु ने दूसरा फोटो खोला तो उसने देखा कि गर्दन वाला फोटो ही था बस साइड पोजीशन से लिया गया था इसलिए पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।



मधुलिका के अंदर ये सब देखकर धुवां सा उठने लगा कि ये टैटू उसकी गर्दन पर कहीं ज्यादा खूबसूरत लगता क्योंकि मैं तो पहले से इतनी गोरी चिट्टी हु। मधुलिका ने दूसरा फोटो खोला तो उसे झटका सा लगा क्योंकि देखा कि इस फोटो में नेहा ने उपर के हिस्से पर सिर ब्रा पहनी हुई थी और नेहा की सीने की एक गोलाई पर एक बेहद ही आकर्षक चिड़िया बनी हुई थी जिसकी एक लंबी सी चोंच नेहा के बूब्स के अंदर की तरफ बनी हुई थी मानो चिड़िया उसकी ब्रा में अपनी चोंच घुसा देना चाहती हो।



मधुलिका तो ये फोटो बेहद पसंद आई और उसने सोचा कि अगर ये फोटो उसकी छाती पर होती तो उसकी चुचियों के भारी भरकम आकार के कारण चिड़ियां की चोंच उसकी चुचियों के अंदर घुस गई होती। साथ ही साथ उसे नेहा की हिम्मत पर आश्चर्य हुआ कि उसने कितनी आसानी से मात्र ब्रा में अपनी फोटो उसे भेज दी और उसे छेड़ते हुए बोली:"

" कमीनी ये कहां टैटू बनवाया हैं तूने ? तुझे शर्म नही आती क्या ? सिर्फ ब्रा पहनकर टैटू बनवाते हुए ?

नेहा की तेज हंसी गूंज उठी और बोली:" इसमें शर्म कैसी भला? आज कल तो ये फैशन हैं। तुझे कैसा लगा ये बता चल ?

मधु:" फोटो तो अच्छा ही लग रहा है लेकिन ये तो साड़ी पहन लेने के बाद अंदर छुप जायेगा तो क्या फायदा?

नेहा:" अरे मेरी भोली सहेली , ये छुपाने के लिए नहीं बनवाया है। इस पर ढीली और बड़े गले की ब्लाउस पहनी जाती है ताकि लोग देख सके कि आज कल हम मध्यम आयु की औरते भी लड़कियों से किसी तरह कम नहीं है समझी।

मधु:" अच्छा समझ गई बाबा, लेकिन एक बात कहूं तेरी चिड़ियां हैं बड़ी शैतान, ध्यान रखना इसका कहीं चोंच न मार दे इधर उधर।

इतना कहकर मधु हंस पड़ी तो नेहा भी जोर जोर से हंसते हुए बोली:" अरे मेरी चिड़ियां बड़ी सीधी हैं, बस अपनी चोंच नीचे किए देखती रहती हैं चोंच मारती नही है समझी। अच्छा चल अगला फोटो देख न और बता कैसा लग रहा है ?

मधु:" अरे कितने टैटू बनवा लिए तूने ? खूब पैसे उड़ा रही हैं अपने पति के आजकल टैटू बनवा कर। रुक देखती हु।

मधुलिका ने अगला फोटो खोला तो उसने देखा कि उसमे नेहा सिर्फ पेंटी पहने हुए थी और उसकी गांड़ के उभार के शुरुवाती कटाव पर एक फूलो के साथ एक बेहद कामुक तितली बनी हुई थी।



मधु को ये टैटू बेहद ज्यादा पसंद आया और उसके दिमाग में पहला सवाल ये ही आया कि नेहा की पतली गांड़ पर अगर ये टैटू इतना खूबसूरत लग रहा है तो उसकी गांड़ पर तो कयामत ही ढा देगा। मधु की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना देखकर नेहा से ना रहा गया और बोली:"

" क्या हुआ? क्या तू भी अपने पिछवाड़े पर टैटू बनवाने के बारे में सोचने लगी ?

मधु उसकी बात सुनकर एक पल के लिए सकपका गई और जल्दी से हड़बड़ाते हुए बोली:" नही नही, मैं ऐसा कुछ नही सोच रही, टैटू तो तेरा अच्छा लग रहा है लेकिन ये लोगो को दिखाएगी कैसे ?

नेहा:" तो फिर इतना हड़बड़ा क्यों रही है फिर ? वैसे ये फोटो लोगो को दिखाने के लिए नहीं बल्कि मैने अपने पति को पागल करने और जोश दिलाने के लिए बनाई है समझी।

मधु:" अच्छा फिर तो ठीक हैं। तेरे तो मजे हो जाएंगे।

नेहा:" तो तू भी मजे कर ले न, तुझे किसने रोका हैं ? बनवा ले न अपने पिछवाड़े पर टैटू तू भी।

नेहा की बात सुनकर मधु की सांसे तेज होने लगी और बदन में अजीब सी गुदगुदी का एहसास हुआ और बोली:" बस बस, तू ही बनवा ये सब। मैं तो ऐसे ही ठीक हु बिना टैटू के।

नेहा:" तेरी मर्जी, वैसे एक बात कहूं अगर ये टैटू तेरे पिछवाड़े पर होता तो मुझसे कहीं ज्यादा सेक्सी लगता क्योंकि सच में तेरा पिछवाड़ा मुझसे कहीं ज्यादा बड़ा और ठोस लगता है।

नेहा के मुंह से अपने पिछवाड़े की बात सुनकर मधु को अपने ऊपर घमंड सा महसूस हुआ और एक हाथ अपने आप ही उसके पिछवाड़े पर चला गया और फेरते हुए देखने लगी कि सच में उसका पिछवाड़ा कितना बड़ा है। अच्छे से अपने पिछवाड़े की चौड़ाई और गोलाई नापने के बाद मधुलिका की सांसे भारी हो गई और बोली:"

" चल बेशर्म तू, कुछ भी बोलती रहती हैं। इतना भी बड़ा नही है जितना तू बोल रही है।

नेहा:" हाय मेरी जान, तू क्या नाप तौल रही थी अपने पिछवाड़े को इतनी देर से ?

मधुलिका की सांसे रुक सी गई और उसने जल्दी से अपना हाथ पिछवाड़े पर से हटाया और घबराते हुए बोली:" पागल हैं क्या कुछ भी बोल देती हैं ? मैं भला क्यों नापने लगी ?

नेहा उसकी आवाज से उसकी हालत समझ रही थी इसलिए उसके मजे लेते हुए बोली:"

" तू फिर इतना घबरा क्यों रही है ? वैसे तेरा पिछवाड़ा नही बल्कि ऐसा लगता हैं मानो ढोल हो ढोल बड़े बड़े। बनवा ले टैटू क्या करेगी इतने पैसे का तू ? अपने ऊपर भी कुछ खर्च कर लिया कर।

मधुलिका को लगा कि नेहा सच ही तो कह रही है इसलिए सोच कर बोली:

" चल देखती हूं, लेकिन मैं अपनी गर्दन पर ही बनवा लूंगी। तेरे तरह सब चिड़िया और तितली नही समझी।

नेहा:" वो तो तेरी मर्जी, वैसे आजकल तो पेंटी के अंदर भी आगे और पीछे दोनो तरफ टैटू बनवाने का फैशन है। सोचती हूं आज बार मैं भी बनवा ही लुंगी और तेरी सिर्फ चिड़िया और तितली बनवाने से ही फट रही है फट्टू कही की तुम।

नेहा के मुंह से फट्टू सुनकर मधुलिका तो बहुत बुरा लगा और बोली:" फट्टू नही हू समझी लेकिन तेरी तरह बेशर्म भी नही जो किसी के भी आगे ब्रा पेंटी पहन लू समझू।

नेहा:" अरे मेरी भोली बन्नो, पता नही रोज कितनी औरते, लड़कियां अपने जिस्म लगभग पूरी नंगी होकर टैटू बनवा रही है, बस कपड़ो के नाम पर सिर्फ चुचियों के निप्पल और चूत के होंठ ढके हुए होते है हल्की सी थोंग टाइप पेंटी से समझी।

नेहा की बात सुनकर मधुलिका का ध्यान सीधे अपने बेटे पर गया कि पूरे दिन उसका भी इसी तरह से औरतों के नंगे जिस्म पर टैटू बनाता होगा। मधुलिका हल्की सी परेशानी से भरी हुई आवाज में बोली:"

" लेकिन मैं अपने सगे बेटे से टैटू कैसे बनवा सकती हु ?

नेहा की हंसी छूट चुकी और बोली:"

" पागल हैं क्या तू ? अपने बेटे से क्यों बनवाएगी ? इतना बड़ा शहर हैं मुंबई और कहीं बनवा लेना। वैसे अपने बेटे का नम्बर मुझे दे दे ताकि मेरे अगले टैटू थोड़े सस्ते बन सके।

मधुलिका ने राहत की सांस ली और बोली:" हा ये ठीक रहेगा, किसी और से ही बनवा लूंगी। तूने इतने टैटू बनवा तो लिए और कितने बनवाएगी ?

नेहा:" अब तुझे क्या बताऊं मेरी पड़ोसन बता रही थी कि जबसे उसने अपनी पेंटी में टैटू बनवाया हैं तबसे उसका पति उसके आगे पीछे दुम हिलाए घूमता है। इधर उधर मुंह मारने वाला उसके पूरी तरह से काबू में आ गया है। बस सोच रही हूं मैं भी बनवा लू।

मधुलिका उसकी बात सुनकर हैरान हुई और बोली:" पागल हो गई है क्या तू ? किसी और से बनवा ले ना, मेरा बेटा तो बिलकुल तेरे बेटे जैसा हैं फिर तो क्यों तेरी पेंटी में...

मधुलिका की आवाज उत्तेजना के कारण गले में रुक गई और लंबी लंबी सांसे लेने लगी।

नेहा:" दिन भर ना जाने किस किस की पैंटी में बनाता होगा ? मेरी मैं भी बना देगा तो क्या होगा ? औरों से तो अच्छा की काम करेगा। मैं कौन सी उसकी सगी मां हु !!

मधुलिका ने अब तक अपने आपको संयत कर लिया था और बोली:" ठीक हैं दे दूंगी। लेकिन एक बात बता कि ये टैटू बनाने वाले लड़के औरत को लगभग नंगी देखकर खुद को काबू में कैसे रखते हैं ?

नेहा:" अरे भाई उनका ध्यान तो अपने काम पर होता हैं बस, उन्हें जिस्म से कोई लेना देना नही होता, उन्हें तो डर रहता है और कहीं टैटू गलत बन गया एक मार्केट खराब हो जायेगी।

मधुलिका:" अच्छा ये बात भी ठीक है। चल मैं तुझे बाद मैं करती हूं। वैसे भी अभी तक खाना नही बना हैं और राकेश के आने का समय हो गया है। वो वैसे भी आज एक हफ्ते में बाद घर आ रहे है।

नेहा:" अच्छा जी, फिर तो आज रात तू गई काम से, पूरे एक हफ्ते की कसर आज पूरी कर देंगे तेरी। अच्छा टैटू जरूर बनवा लेना फिर देखना तेरा पति रोज घर आया करेगा। अच्छा रखती हु।

नेहा ने फोन काट दिया और मधुलिका अब सिर्फ टैटू के बारे में ही सोच रही थी कि उसे भी अपने जिस्म पर टैटू बनवाना चाहिए। मैं तो अपनी सभी सहेलियों से कही ज्यादा हॉट और खूबसूरत हैं और मेरा फिगर तो उन सबसे कहीं ज्यादा अच्छा है। कमीनी नेहा मुझसे फट्टू बोल रही थी अब मैं उससे कहीं ज्यादा टैटू अपने शरीर पर बनवा कर उसे दिखा कि मैं फट्टू नही बल्कि उससे कहीं ज्यादा फैशनेबल हु।

ये सब सोचते हुए वो अपने काम में लग गई। जल्दी ही खाना बन गया और गर्मी के कारण वो घूमें के लिए छत पर चल गई। छत पर ठंडी हवा से उसे बेहद सुकून मिला और वो पूरे तरह से ढल चुके सूरज को देख रही थी। तभी उसकी उसे किसी जानवर की दर्द भरी आह सुनाई दी तो उसने सड़क पर देखा कि एक आवारा घोड़ा एक घोड़ी के ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था और घोड़ी उसके वजन के कारण ठीक से खड़ी नही हो पा रही थी। मधुलिका की आंखे ये सब देखकर अपने आप चौड़ी होती चली गई और उसने देखा कि घोड़ी का लगभग एक फुट लंबा और करीब पांच इंच मोटा काला लंड उसकी टांगों के बीच में उधर इधर हिल रहा था जिसे देखकर मधुलिका के माथे पर पसीना छलक उठा और देखते ही देखते घोड़े ने पूरी ताकत से अपने दोनो पैरो को उठाकर घोड़ी की कमर पर रख दिया और नीचे से अपने लंड का मोटा तगड़ा सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका कर पूरी जोर जोर से धक्के लगाते हुए अंदर घुसाने लगा और घोड़ी का मुंह दर्द से फिर से खुल गया आज घोड़े ने पूरा उछल उछल कर अपने समूचे लंड को घोड़ी के अंदर उसकी चूत में जड़ तक तक दिया और तेजी से हिलने लगा। घोड़ी अब चिल्ला नही रही थी बल्कि मस्ती से आंखे बंद किए हुए कांप रही थी।

तभी घर की कॉलबेल बज उठी तो मधुलिका ना चाहते हुए भी वापिस नीचे आने लगी। लेकिन जाने से पहले उसने एक आखिरी भरपूर नजर घोड़े पर डाली जो पूरी ताकत से घोड़ी की चूत में और अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था। मधुलिका नीचे आ गई और उनसे दरवाजा खोला तो देखा कि उसका पति आ गया था और दरवाजा खोलते ही उस पर चिल्ला पड़ा

" क्या कर रही थी इतनी देर से ? कब से बेल बजा रहा था ?

मधुलिका:" वो मैं छत पर घूमने चली गई थी। गर्मी लग रही थी इसलिए बस।

राकेश ने घूर कर उसे देखा और बडबड़ करते हुए अंदर घुस गया। मधुलिका को लगा था कि उसका पति एक वीक के बाद आ रहा है तो आते ही उसे बांहों में भर लेगा लेकिन यहां तो उल्टा हो गया था। है भगवान ये आदमी कभी सुधर नही सकता क्या ?

राकेश ने अपना बैग दूर से ही बेड पर फेंक दिया और अपनी टाई खोलने लगा। मधुलिका उसके लिए पानी ले आई तो उसने पानी किया तो मधुलिका बोली:"

" कैसा रहा आपका बिजनेस टूर ?

राकेश ने बुरा सा मुंह बनाया मानो मधुलिका ने इससे कोई गलत सवाल पूछ लिया हो और बोला:"

" ये कैसा सवाल हैं ? तुम बहुत अच्छे से जानती हो कि मैं कोई भी डील खराब नही करता। कम्पनी के साथ साथ पूरे 12 लाख का फायदा हुआ है मुझे इस डील से।

मधुलिका को ये सब सुनकर खुश हुई और बोली:"

" ये तो बहुत अच्छी बात हैं, फिर तो अब आप थोड़े दिन के लिए छूटी ले लो और आराम से घर पर मेरे और मोहित के साथ रहो। वैसे भी दो दिन बाद हमारी शादी की सालगिरह आ रही है तो सोचा इस बार एक पार्टी करते है।

राकेश: देखता हु ऑफिस मैं बात करूंगा। ये भी उम्र हैं पैसा कमाने की फिर तो सारी उम्र आराम ही करना है। अच्छा मैं नहा लेता हूं तब तक रोटी बना लो। मोहित भी पांच मिनट में आ जायेगा।

इतना कहकर वो नहाने के लिए बाथरूम में टॉवेल लेकर घुस गया और मधुलिका उसके व्यवहार से हताश सी होकर किचन की तरफ चल पड़ी।
 
अपडेट नंबर 2

मोहित भी घर आ गया था और अपनी मां को एक प्यारी सी मुस्कान देकर उसने अपना बैग टेबल पर रखा और बोला:

" कैसी हो मम्मी आप ? कैसा रहा आपका पूरा दिन आज ?

मधुलिका ने उसे स्माइल दी और पानी देते हुए बोली:" अच्छा रहा बहुत, तेरे पापा भी आ गए हैं जाओ जल्दी से नहा कर आओ, नही तो गुस्सा करेंगे, पहले से ही काफी खतरनाक मूड में लग रहे हैं आज।

मोहित ने बुरा सा मुंह बनाया और बोला:" ये पापा भी जब देखो बस गुस्से में ही रहते है। अच्छा मैं अभी आया नहाकर।

मोहित दूसरे बाथरूम में घुस गया। मधुलिका अपने बेटे को देखकर सोच रही थी कि आज पता नहीं ये कितनी औरते के जिस्म पर टैटू बनाकर आया होगा। ये सब सोचते हुए जल्दी ही मधुलिका ने खाना तैयार कर दिया और सभी का इंतजार करने लगी। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और मोहित अपने बाहर निकला जिसमे अपने जिस्म पर सिर्फ एक टॉवेल लपेटा हुआ था और उसकी छाती पूरी तरह से नंगी थी। मधुलिका की नजर उसके जिस्म पर पड़ी तो उसने देखा कि उसके बेटे की छाती किसी पहलवान के समान चौड़ी और मजबूत थी। उसकी छाती पर अभी छोटी सी उम्र में काले काले घुंघराले बालों के गुच्छे बने हुए थे जो बेहद आकर्षक लग रहे थे। मधुलिका को याद आया कि उसके पहले पति का जिस्म बिल्कुल ऐसा ही तो था। मोहित बिलकुल बाप पर गया है। मधुलिका अपने ख्यालों में खो गई और मोहित कमरे में घुस गया और जल्दी ही कपड़े पहनकर आ गया और टेबल पर बैठ गया तो देखा कि राकेश पहले से ही बैठा हुआ था। उसने अपने बाप से हाल चाल पूछे और खाना शुरू कर दिया। बात करते करते ही सभी ने खाना खाया और मोहित उपर छत पर घूमने चला गया जबकि राकेश लैपटॉप पर काम में लग गया। मधुलिका ने बर्तन उठाए और धोने चली गई। करीब 10 बज गए थे और मोहित अपने कमरे में लेटा हुआ था। मधुलिका के जिस्म में मस्ती छाई हुई जबसे नेहा से बात करी थी और छत पर घोड़े के सेक्स ने उसकी आग में घी का काम किया और उसने राकेश को रिझाने के लिए मेकअप करना शुरू कर दिया और जल्दी ही वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। गहरे लाल रंग की लिपिस्टिक से सजे उसके पतले पतले रसीले लाल सुर्ख होंठ और काले काजल के कारण उसकी लगभग बोलती हुई आंखे, पतली सी लाल रंग की खूबसूरत नाइटी उसके जिस्म पर काफी कसी हुई थी। वो अपने बेडरूम मे जाने ही वाली थी कि मोहित ने आवाज दी

:" मम्मी सोने से पहले मुझे आज दूध दे देना एक ग्लास गर्म करके।

मधुलिका अपने बेटे की आवाज सुनकर किचन की तरफ चल पड़ी और दूध गर्म करने लगी। नेहा के टैटू के बारे में सोचकर वो काफी उत्तेजित हो रही थी और वो जानती थी कि आज राकेश उसके रूप सौंदर्य के आगे पिघल जायेगा। मधुलिका ये सब सोच कर काफी उत्तेजना महसूस कर रही थी जिससे उसकी चुचियों में हल्का हल्का कंपन हो रहा था। दूध गर्म हो गया था और उसने एक ग्लास में किया और अपने बेटे के रूम की तरफ चल पड़ी। हाल से जैसे ही गुजर रही थी तो हॉल में लगे शीशे पर उसकी नजर पड़ी तो अपने आपको देखकर खुद ही शर्मा गई और सोचने लगी कि क्या मुझे इस ड्रेस में अपने बेटे के रूम में जाना चाहिए !! वो मेरे बारे में क्या सोचेगा। मधुलिका ने खुद ही अपने सवाल का जवाब भी ढूंढ लिया कि नेहा बोल रही थी कि टैटू तो लगभग पूरी नंगी करने बनाया जाता हैं लेकिन उसका बेटा फिर से किसी के जिस्म पर ध्यान नहीं देता तो अब भला अपनी सगी मां के जिस्म पर भला क्यों ध्यान देगा। लेकिन फिर भी तू उसकी सगी मां हैं तो तुझे इस हालत में जाना बिलकुल भी शोभा नही देता। टैटू और नंगे जिस्म की याद आते ही उसका समूचा जिस्म कांप उठा और उत्तेजना महसूस हुई। उससे अब उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी और कपड़े बदलने में काफी समय लग जाता। उसने सोचा कि जल्दी से दूध का ग्लास देकर वापिस लौट आएगी। कांपती हुई मधुलिका अपने तेज सांसे के साथ अपने बेटे के कमरे में घुस गई।

मोहित अपने लैपटॉप में कुछ देख रहा था और कमरे का दरवाजा खुलने से उसने अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी मां उसे स्वर्ग से उतरी हुई मेनका की तरह प्रतीत हुई। तेज कदमों से चलती हुई मधुलिका के बूब्स हल्के हल्के हिल रहे थे और मोहित ने एक नजर ना चाहते हुए भी देखा और तब तक मधुलिका उसके सामने खड़ी हो गई और बोली:"

" लो बेटा दूध।

मोहित ने दूध का ग्लास पकड़ लिया और बोला:"

" मम्मी थैंक्स, आज आप बहुत खूबसूरत लग रही है। आप रोज ऐसे ही रहा कीजिए ना।

अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर मधुलिका शर्मा गई और बोली:" बड़ी बाते करने लगा हैं आजकल तू, चल अब आराम से दूध पी और सो जा। गुड नाईट बेटा

मोहित चाह रहा था कि उसकी मम्मी थोड़ी देर और उसके पास रुके इसलिए बोला:"

" अच्छा मम्मी एक बात तो बताओ, आज पापा का मूड आते ही खराब क्यों हो गया ?

मधुलिका किसी भी हालत में रुकने के मूड में नहीं थी इसलिए बोली:" तू तो जानता ही
अपने बाप का स्वभाव। अच्छा कल बात करती हु। अब मुझे नींद आने लगी।

इतना कहकर मधुलिका तेजी से पलटी और तेज तेज कदमों से चलती हुई बाहर की तरफ निकल गई। उसकी हिलती हुई पीछे से बेहद कामुक लग रही थी और मोहित खुद को इस जादुई दृश्य को देखने से नही रोक पाया और मन ही मन में सोचने लगा कि उसकी मम्मी बेहद खूबसूरत और आकर्षक हैं।

मधुलिका अपने पति के कमरे में घुस गई और उसने अपने पति को एक स्माइल दी तो राकेश उसके रूप सौंदर्य पर लट्टू सा हो गया और बोला:"

" क्या बात हैं आज बड़े खतरनाक मूड में लग रही हो ?

अपने पति को ऐसे मूड में आते देख कर मधुलिका उसके सामने झुकी और उसकी आंखो में देखते हुए लैपटॉप को एक तरफ उठा कर रख दिया और अपने पति से लिपट गई। राकेश ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया और देखते ही देखते दोनो के होंठ जुड़ते चले गए। मधुलिका आज बहुत ज्यादा बेचैनी महसूस कर रही थी और उसने आज पहली बार हिम्मत करते हुए राकेश के लंड को पेंट के उपर से पकड़ लिया कर सहलाया तो राकेश के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। मधुलिका ने जल्दी में अपने बेटे के रूम का दरवाजा बंद नही किया था। । राकेश की आह मोहित में कानो में पड़ी तो उसके कान खड़े हो गए। वो धीरे से दबे पांव खड़ा हुआ और धीमे धीमे चलते हुए अपने बाप के बेडरूम के सामने आ गया। हाल की लाइट बंद थी जिससे वो बेफिक्र था। लेकिन बेडरूम का दरवाजा बंद था बस अंदर से उसकी मां की सिसकियों की आवाज आ रही थी। उसकी मां उसके बाप के उपर चढ़ी हुई थी और राकेश उसकी चुचियों को मसल रहा था। देखते ही देखते काम प्यासी मधुलिका ने अपनी नाइटी को उपर की तरफ करते हुए निकाल दिया और राकेश भी पूरी तरह से नंगा हो गया और देखते ही देखते मधुलिका घोड़ी की तरह बेड पर झुक गई। जबसे उसने घोड़ी को चुदाते हुए देखा था जबसे तड़प रही थी। राकेश को समझ नहीं आ रहा कि बड़ी मुश्किल से अपने टांगे खोलने वाली आज अपने आप ही घोड़ी कैसे बन गई हैं। राकेश खुशी खुशी उसके पीछे आया और अपने करीब चार इंच लंबे को उसकी चूत पर टिका दिया तो मधुलिका के होंठो से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और बोली:

" आह राकेश, घोड़े की तरह चढ़ो न मेरे उपर। तेज तेज चढ़ जाओ।

राकेश ने उसकी कमर को पकड़ कर एक धक्का लगाया और उसका लंड अभी आधा भी नही घुसा था कि वो मधुलिका की चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और पिघल गया। मधुलिका मस्ती से चिल्ला रही थी

" आह पूरे अंदर घुस जाओ, एक टांग मेरी कमर पर रखकर घुसाओ ना घोड़े की तरह।

राकेश का लंड सिकुड़ गया और ढीला होकर बाहर की तरफ निकल गया। मधुलिका को समझते देर नहीं लगी कि हमेशा की तरह राकेश फिर से अंदर घुसने से पहले ढेर हो गया।

मधुलिका गुस्से से पलटी और बोली:" आह ये क्या कर दिया ? आज भी बाहर ही निकल गया तुम्हारा ? कैसे मर्द हो तुम ?

राकेश अपना बचाव करते हुएं बोला:" आह मधु तुम हो ही इतनी गर्म की मैं बर्दाश्त नहीं कर पाता। मेरी क्या गलती।

मधु;" बस बस, तुम जब भी कभी महीने में एक या दो बार बार करते हो हर बार ऐसा ही होता है। आह क्या करू, मेरी चूत जल रही हैं राकेश।

राकेश ने अपराध बोध से सिर झुकाए रखा और अपने कपड़े पहनने लगा और बोला:"

" एक काम करो, जाकर ठंडे पानी से नहा लो, थोड़ा आराम मिल जायेगा।

मधु ने गुस्से से उसकी तरफ देखा और बोली:" ठंडे पानी से प्यास बुझती हैं क्या ? तुम किसी काम के नाही हो नामर्द कही के तुम।

राकेश;" लो अपनी नाइटी पहन लो मधु।

मधु:" नाइटी भी तुम भी पहन लो नामर्द कही के। किसी काम के नाही हो तुम।

इतना कहकर मधुलिका ने गुस्से से नाइटी को उसके उपर फेंक दिया तो राकेश भड़क उठा:"

" बहुत हो गई तुम्हारी बकवास, अपना मुंह बंद रख रख नही तो मेरा हाथ उठ जाएगा।

इतना कहकर उसने नाइटी को वापिस मधु के उपर फेंक दिया तो मधु गुस्से से भड़की:"

" हान तुम और कर भी क्या सकते हो हाथ उठाने के सिवाय। सो जाओ तुम भी अपने ठंडे लौड़े की तरह।

राकेश ने कुछ नहीं बोला और मधुलिका गुस्से में बडबडती रही और अपनी नाइटी को ऐसे ही अपने हाथ में पकड़ कर दरवाजे की तरफ गुस्से से अपने पैर पटकते हुए बढ़ गई। मोहित जैसे ही कदमों की आवाज सुनी तो वो बिना आवाज किए अपने कमरे में घुस गया और मधु नंगी ही चलती हुई बाथरूम में घुस गई और अपनी चूत को ठंडा करने की कोशिश करने लगी। भला ऐसे ठंडे पानी से किसी की आग शांत हो जाती तो दुनिया में लंड की क्या जरूरत होती।

मोहित अपने कमरे में पड़ा हुआ खुद पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि अभी जो अवतार उसने मां का देखा वो सपने में भी नही सोच सकता था। उसकी सुशील और सीधी दिखने वाली मां असल में अंदर से इतनी कामुक और प्यासी होगी वो सोच भी नहीं सकता था। वो सोने की कोशिश करने लगा लेकिन नींद नहीं आ रही थी।

वहीं दूसरी तरफ जब काफी देर बाद भी मधुलिका को राहत नही मिली तो वो अपने कमरे में आई आई। उसने अपना बैग खोला और एक बीयर निकाल कर फ्रिज में रख दी और थोड़ी देर बाद पीकर सो गई।

अगले दिन सुबह रोज की तरह ज़िन्दगी शुरू हुई और मधुलिका ने नाश्ता तैयार किया और आज राकेश जल्दी ही नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल गया। नहाकर मोहित भी तैयार होकर नाश्ता करने लगा। मधुलिका भी नाश्ता कर रही थी और मोहित बीच बीच में देख रहा था कि रात के समय वासना की मूर्ति लगने वाली उसकी मां अब बिल्कुल एक सभ्य समाज की सुशील औरत लग रही थी।

मधुलिका रात से ही टैटू के बारे में सोच रही थी कि इस बार अपने बेटे से थोड़ा ज्ञान ले लेती हू। इसलिए बोली:"

" और बताओ कैसा चल रहा है तुम्हार टैटू का काम ?

मोहित: बहुत ही बढ़िया मम्मी, आजकल तो आप जानती ही है कि फैशन का बोलबाला हैं। हर कोई एक दूसरे से आर्कषक दिखने के लिए मरा जा रही है। इसलिए टैटू का काम बहुत ज्यादा हैं आजकल।

मधु: हान बेटा ये बात तो हैं , वैसे मुंबई में टोटल कितने ऑफिस हैं टैटू के ?

मोहित:" वैसे तो काफी सारे ऑफिस हैं मम्मी लेकिन अच्छे में सिर्फ चार या पांच ही आते हैं जिनमे से एक मेरा अपना भी हैं।

मधु:" भगवान तुझे और तरक्की दे बेटा, वैसे एक टैटू बनवाने में कितना समय और पैसा लगता हैं बेटा ?

मोहित: मम्मी वो तो टैटू के साइज और डिजाइन पर तय करता है। एक टैटू बनवाने में काम से कम 15 से 25 मिनट लग ही जाते है।
लेकिन आज आप ये सब अचानक क्यों पूछ रही है ? क्या आपको भी टैटू बनवाना हैं ?

मधुलिका डर के मारे सकपका सी गई और बोली:" नही नही, बस मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी। मैं भला क्यों टैटू बनवाने लगी इस उम्र में भला बेटा ?

मोहित:" मम्मी आप कैसी बात कर रही है, आप तो बिलकुल जवान दिखती हैं बल्कि जवान से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत हैं आप। मेरे विचार से आपको जरूर टैटू बनवाना चाहिए।

मधु टैटू से बनवाना चाहती थी लेकिन अपने बेटे से नही इसलिए बोली:" ना बेटा न, मुझे नहीं बनवाना टैटू वैटू। मैं ऐसे ही ठीक हु बिना टैटू के ही।

मोहित ने एक नजर अपन मम्मी को देखा और बोला:" मेरे हिसाब से आपकों जरूर बनवा लेना चाहिए। आपके शरीर पर बेहद आकर्षक लगेगा।

मधुलिका:" नही बेटा, नही। मैं ऐसे ही बिना टैटू के ठीक हु।

मोहित: जैसे आपको ठीक लगे मम्मी। अच्छा मैं भी अब ऑफिस चलता हु।

इतना कहकर मोहित खड़ा हुआ और ऑफिस जाने के लिए निकल गया। मधुलिका सोच में पड़ गई कि टैटू बनवाए या नहीं। वो जानती थी कि टैटू बनने से उसके पति मर्द तो नहीं बन जायेगा लेकिन हो सकता हैं कि उसके व्यवहार में कोई बदलाव आ जाए। और फिर नेहा ने भी तो मुझे फट्टू कहा था इसलिए उसका मुंह बंद करने के लिए टैटू बनवा ही लेती हूं। उसने अंतिम निर्णय लिया और थोड़ी इंटरनेट से टैटू की ऑफिस का पता करने लगी। आखिरकार उसे अच्छी ऑफिस मिल ही गई, ये ऑफिस उसके बेटे के ऑफिस से करीब 15 किमी की दूरी पर थी इसलिए उसे खतरा नहीं था।

घर के सारे काम खत्म करने के बाद नहा धोकर उसने अपने जिस्म से अनचाहे बालों को क्रीम से साफ किया और उसका जिस्म बिल्कुल शीशे की तरह चमक उठा। उसने अपनी गाड़ी निकाली और मुंबई की भीड़ में शामिल होती चली गई। जल्दी ही वो ऑफिस के सामने खड़ी हुई थी। तेज तेज कदमों से वो ऑफिस के अंदर घुस गई और उसे अपने अंदर अजीब सा रोमांच महसूस हो रहा है। अंदर पहुंचते ही रिसेप्शन पर बैठी हुई लड़की ने एक मोहक मुस्कान के साथ उसका स्वागत किया और बोली:"

" नमस्ते मैडम, आइए बताए मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हु ?

मधुलिका उसके व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई और बोली:" मैं टैटू बनवाने के लिए आई हू। मुझे उसके बारे में जानकारी चाहिए।

लड़की ने ऑफिस में लगे हुए कैमरे से बाहर मधुलिका की गाड़ी रेंज रोवर देख ली थी और समझ गई कि ये बहुत बड़ी मछली फंस गई हैं तो उसकी तारीफ करते हुए बोली:_

ये तो बहुत ही अच्छा किया आपने, आजकल टैटू का तो जबरदस्त फैशन चल रहा है और भगवान ने आपको तो बिलकुल फुरसत से बनाया हैं तो आपका जिस्म तो टैटू के लिए ही बना हुआ है। आपके जैसी खूबसूरत भाभियों के लिए हमारे पास में स्पेशल पैकेज हैं। मेरे साथ आइए

मधुलिका अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और लड़की के साथ साथ उसके पीछे चल पड़ी। लड़की के कमरे में घुस गई और मधुलिका जैसे ही कमरे में घुसी तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई
 
अपडेट नंबर 3
कमरे में नई नई लड़कियों और उसकी उम्र की महिलाओं की एक से बढ़कर एक टैटू वाली फोटो लगी थी और मधुलिका बड़ी उत्सुकता से उन्हें देख रही थी। उसने देखा कि टैटू लड़कियों की गर्दन, कमर, यहां तक कि ब्रा और पेंटी के तक बने हुए थे। तभी उसकी नजर एक फोटो पर पड़ी जिसमे उसकी ही उम्र की औरत के पेंटी के ठीक ऊपर एक मोटे से लंड का टैटू बन हुआ था जिसका सुपाड़ा पेंटी के अंदर की तरफ घुसा हुआ था। लड़की मधुलिका को ऐसे फोटो को देखते ही समझ गई कि एक काफी आधुनिक विचारों की औरत है और खुश होते हुए बोली:"

" वैसे तो आजकल की लड़कियां लड़कों को रिझाने के लिए अपनी कमर , गर्दन या कंधे पर टैटू बनवाना पसंद करती हैं लेकिन आपकी उम्र की खूबसूरत भाभियां अपने पति को आपकी मुट्ठी में करने के लिए अपनी ब्रा और पेंटी के उपर या अंदर की तरफ टैटू बनवाना ज्यादा पसंद करती है। आपका जिस्म तो बेहद आकर्षक और सेक्सी हैं मानो आपका जिस्म तो टैटू के लिए ही बना हुआ है। आपके लिए ये टैटू बिल्कुल ठीक रहेंगे।

लड़की ने एक फोटो की तरफ इशारा किया तो मधुलिका ने देखा कि उसमे एक भाभी की गर्दन, कमर के साथ बूब्स के उपर और उसकी पीठ पर नीचे की तरफ गांड़ के उभार पर टैटू बना हुआ था। साथ ही साथ अंतिम टैटू तो मानो जानलेवा था जिसमे औरत की चूत के दोनो लिप्स के बीच में छोटी सी चिड़िया बनी हुई थी जिसकी चोंच पर चूत के छेद की तरफ झुक थी और लिखा हुआ था " naughty bird"

मधुलिका ये फोटो देखकर उत्तेजित हो गई और उसने फैसला किया कि वो यही टैटू का पैकेज लेगी ताकि नेहा को दिखा सके कि फट्टू मैं नहीं बल्कि तुम हो।

लड़की:" मैडम मेरे हिसाब से आपके जिस्म पर यही टैटू सही रहेंगे आगे आपकी मर्जी। जैसे आपको थी लगे।

मधुलिका के होंठो पर स्माइल आ गई और उसने लड़की को अपनी तरफ से सहमति दे दी और उसके साथ बाहर आ गई।

लड़की ने उसे अपन शर्त बताई:"

" ये कुछ लड़के के पैकेज हैं जो आजकल टैटू के लिए काफी जानें जाते हैं।

मधुलिका ने देखा कि उसमे अलग अलग कीमत लिखी थी और उसने बिना पैसे की परवाह किए बिना सबसे अच्छे पैकेज का चुनाव किया।

लड़की:" ठीक है मैडम। आप अंदर चलिए थोड़ी देर में आपके जिस्म पर टैटू का काम शुरू हो जायेगा।

मधुलिका को अब काफी रोमांच का महसूस हो रहा था और वो अंदर चली गई और अंदर एक लड़की ने उसे पहनने के लिए एक एक छोटी सी ब्रा जिसमे मात्र निप्पल को ढकने के लिए एक छोटी सी स्ट्रिप थी और एक थॉन्ग जैसी पेंटी दे दी।

मधुलिका ये कपड़े देखकर शर्म सी गई और उसने कांपते हाथों से कपड़ो को पकड़ लिया। वो अंदर अपने कपड़े बदलने के लिए घुस गई जाने लगी लेकिन उसे इंतजार करना पड़ा क्योंकि पहले ही काफी सारी औरते लड़कियां लाइन में बैठी हुई थी। करीब आधे घंटे के बाद उसका नंबर आ गया और वो अपने कपड़े बदलने के लिए घुस गई।

कपड़े बदल कर मधुलिका जैसे ही बाहर निकली तो उसे इन नाम मात्र के कपड़ो में देखकर वहां बैठी हुई औरतों की आंखे और मुंह खुले के खुले रह गए। सच में वो उसका जिस्म कहर ही ढा रहा था जिसे देखकर सभी को जलन महसूस हो रही थी।
ब्रा बिलकुल छोटी थी और पेंटी तो ब्रा में से ही एक पतली सी डोरी निकाल कर उसकी गांड़ के बीच से होते हुए उसकी गांड़ के छेद को नाम मात्र के लिए ढकते हुए आगे को निकल उसकी चूत के बस छेद को ढक रही रही थी और ऊपर यही डोरी ब्रा में आकर मिल गई थी। उसकी चूत के दोनो होंठ आधे से ज्यादा बाहर झांक रहे थे।



मधुलिका को ऑफिस की लड़की एक दूसरे कमरे में ले गई और उसके एक बड़ी सी चादर आपके जिस्म पर डालने के लिए दे दी और बोली"

" मैडम आप थोड़ी देर इंतजार कीजिए। सर बस अभी आते ही होंगे। अगर ठंड लगे तो चादर ओढ़ लीजिए।

इतना कहकर वो बाहर निकल गई और मधुलिका की सांसे अब तेज होने लगी थी कि अब आगे क्या होगा, पहली बार वो टैटू बनवा रही थी और अपने जिस्म के छोटे पकड़े देखकर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था कि पता नहीं कौन वो आर्टिस्ट होगा जो उसके जिस्म पर टैटू बनाएगा। अच्छा किया जो वो अपने बेटे के पास नही गई वरना वो तो इस हालत में अगर अगर अपने बेटे के सामने होती हो शर्म के मारे मर ही जाती।

तभी गेट और एक लड़का अंदर आया जिसकी शक्ल देख कर मधुलिका की सांसे रुक सी गई। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था उसका बेटा मोहित कमरे के अंदर घुस गया था। हाय भगवान, तो क्या मेरा बेटा मेरे जिस्म पर टैटू बनाएगा।
 
अपडेट नंबर 5

मधुलिका ने अपनी कार स्टार्ट करी और घर की तरफ चल पड़ी। उसके मन में हजारों सवाल एक साथ उठ रहे थे और उसकी समझ में नही आ रहा था कि जो उसके साथ हुआ उसके लिए कौन जिम्मेदार है। नहीं मुझे टैटू ही नहीं बनवाना चाहिए था, मैं बेकार ही नेहा को बातो में आ गई और यहां चली आई और अपने बेटे के सामने इस स्थिति का सामना करना पड़ा। तभी उसके मन में दूसरा सवाल उठ गया कि इसमें नेहा का क्या दोष, उसने तो मेरे अच्छे के लिए ही मुझे सलाह दी थी और फिर टैटू ऑफिस वाली लड़की भी तो यही बोल रही थी कि टैटू से मैं ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगने लगूंगी। ये ख्याल मन में आते ही उसने एक नजर अपनी गर्दन पर बने टैटू पर डाली तो उसे अपनी गर्दन सच में पहले से ज्यादा खूबसूरत लगी और उसे एहसास हुआ कि उसके पैसे बेकार नहीं गए। लड़की तो ये भी बो रही थी कि टैटू से पति आगे पीछे घूमते हैं, लेकिन मुझे इससे क्या फायदा होगा, मेरा पति तो मेरे करीब आकर भी सिर्फ मूड ही खराब करता हैं। मधुलिका को रात वाली बात याद आ गई और उसके चेहरे पर थोड़े गुस्से के भाव आए और फिर मन ही मन बड़बड़ाने लगी ना राकेश में दम ना उसके लंड में दम।

तभी उसके सामने चल रही गाड़ी ने अचानक से ब्रेक लगा दिए तो मधुलिका ने भी अपने ब्रेक लगाए लेकिन तब तक गाड़ी सामने वाली गाड़ी से टकरा गई थी और गुस्से से चिल्लाते हुए करीब एक 28 साल का सांवला सा युवक निकला और गुस्से से बोला:"

" अंधी होकर क्या गाड़ी देख कर नही चला सकती क्या ?

मधुलिका ने अपनी गाड़ी का दरवाजा खोला और उस लड़के की तरफ देखते हुए अदा के साथ अपन गर्दन पर पड़े हुए बाल हटाए और बोली:"

" अंधी नही हु, देखा कर ही चला रही थी ? तुम क्या ऐसे ही बीच सड़क में गाड़ी के तेज ब्रेक लगा दोगे क्या ?

लड़का मधुलिका की सुंदरता और उसके जिस्म को देखकर चुप सा हो गया और उसे मधुलिका की गर्दन पर बना टैटू बहुत पसंद आया और धीरे से बोला:"

" माफ कीजिए मैडम, सामने एक बच्चा आ गया जो रोड पर कर रहा था बस इसलिए ये हादसा हो गया, मैंने आपको देखा नहीं इसलिए गलती से गुस्सा कर बैठा। जाने दीजिए, गलती मेरी ही थी बस।

मधुलिका ने उसे कोई जवाब नही दिया और अपनी गाड़ी की तरफ पलट कर चल दी तो उसकी गर्दन पर बना टैटू देखकर लड़का उससे बेहद प्राभावित हुआ और बोला:"

" मैडम वैसे आपका टैटू बेहद खूबसूरत लग रहा हैं आपकी लंबी सुंदर सी गर्दन पर।

मधुलिका अपने टैटू की तारीफ सुनकर खुश हो गई और उसे स्माइल दी और अपनी गाड़ी में बैठ गई। वो युवक मधुलिका की गाड़ी की तरफ आ रहा था कि तभी सामने पीछे से रोड पर जाम लगने लगा और मजबूरी में उसे अपनी गाड़ी में बैठना पड़ा और आगे की तरफ चल पड़ा। वो युवक जान बूझकर गाड़ी धीरे चला रहा था ताकि उसे मधुलिका से बात करने का एक मौका और मिल जाए लेकिन मधुलिका इतनी आसानी से किसी को अपने मुंह लगाने वाली चीज नही थी इसलिए उसने अगले मोड़ से गाड़ी को दांई तरफ घुमा दिया और उसके होंठो पर स्माइल आ गई। उसने थोड़ी दूर जाने के बाद एक मॉल के सामने गाड़ी को रोक दिया क्योंकि उसे घर का कुछ सामान खरीदना था। उसने एक बार ध्यान से अपने टैटू को शीशे में देखा और खुश हो गई। सच में टैटू का असर वो देख चुकी थी कि टैटू उसके जिस्म पर कितना आकर्षक लग रहा था क्योंकि उसे काफी छोटी उम्र का लड़का उसे भाव दे रहा था।

मधुलिका बाहर निकली और अपनी गाड़ी को लॉक करने के बाद मॉल में घुस गई। वहां लेडीज सेक्शन में जाकर उसने अपने लिए ड्रेस और कुछ मेक अप का सामान लिया क्योंकि कल उसकी शादी की सालगिरह थी। आज मॉल में काफी भीड़ थी और मधुलिका ने जान बूझकर अपने टैटू को दर्शनीय बनाया हुआ था जिसे काफी लोग देख भी रहे थे और मधुलिका इससे बेहद खुश हो रही थी।

तभी उसके कंधे पर किसी ने पीछे से हाथ रख दिया तो मधुलिका ने चौंक कर पीछे की तरफ देखा पीछे उसकी सहेली नेहा खड़ी हुई नजर आई तो खुश होते हुए बोली:"

" अरे नेहा यहां क्या कर रही हो ? तुमने मुझे डरा दिया।

नेहा:" अरे वही करने आई ही जो तू कर रही है। घर के जरूरी सामान और कपड़े।

मधुलिका:" अच्छा जी ये बात भी ठीक हैं, वैसे तूने मुझे एकदम से पहचान लिया। काफी तेज नजर हैं तेरी।

नेहा ने अपने हाथ को उसकी गर्दन पर बने टैटू पर फिराया और बोली: अरे मैं तो इस टैटू के चक्कर में आई थी क्योंकि बहुत खूबसूरत लग रहा था।

मधुलिका अपने टैटू की तारीफ सुनकर हवा में उड़ सी गई और बोली:"

" अच्छा तुझे पसंद आया इसके लिए तू ही जिम्मेदार हैं क्योंकि तूने ही तो मुझे टैटू बनवाने की सलाह दी थी।

नेहा:" हान वो बात तो ठीक हैं लेकिन एक बात माननी पड़ेगी कि सच में टैटू बनाने वाले के हाथ में बड़ा दम है बिलकुल कुशल आर्टिस्ट।

टैटू बनाने वाले के हाथ में बड़ा दम हैं ये बात सुनकर मधुलिका के चेहरे पर एक के बाद एक कई भाव आए और चले क्योंकि उसे वो पल याद आ गया जब उसके बेटे ने अपने हाथ में भरकर उसकी चूची को उछलने से रोक रखा था। मधुलिका को खोए हुए देखकर नेहा ने उसकी आंखो के आगे चुटकी बजाई और बोली:"

" क्या हुआ ? कहां खो गई मैडम क्या टैटू बनाने वाली की याद में ?

मधुलिका के चेहरे पर हल्के से हंसी के भाव और उभरे और बोली:" नही यार, बस अपने टैटू को तारीफ सुनकर खुश हो गई थी और कुछ सोच रही थी।

नेहा:" अरे तो मुझे भी बता ना ऐसा क्या सोच रही थी ?

मधुलिका ने उसे अपने साथ रास्ते में सड़क पर हुआ हादसा बताया तो नेहा हंसने लगी और बोली

" मतलब टैटू बनते ही तूने लोगो पर बिजली भी गिरानी शुरू कर दी। जलवे है तेरे भी। मानना पड़ेगा तुझे मधुलिका।

मधुलिका:" अरे इसमें मेरी क्या गलती भला ? वो तो खुद ही कमीना मेरे पीछे पड़ गया था। चलो अच्छा हुआ जान बच गई।

नेहा:" हान तूने अच्छा की किया वैसे भी आज कल राह चलते लोगो को मुंह लगाने का जमाना नही है।

मधुलिका: अच्छा चल तूने सामान खरीद लिया हो तो तुझे घर छोड़ देती हूं अपनी गाड़ी से।

नेहा:" हान चल सामान तो सब खरीद ही लिया है। चल आ चलते हैं घर। तुझे भी काफी समय हो गया घर आए हुए।

इसके दोनो गाड़ी ने बैठ गए और मधुलिका नेहा के साथ उसके घर पहुंच गई। दोनो कॉलेज टाइम की दोस्त थी लेकिन शादी के बाद मधुलिका की किस्मत बदल गई क्योंकि देखने में बेहद खूबसूरत थी वहीं नेहा थोड़ी सांवली थी इसलिए उसे इतनी ऊंची ससुराल और जॉब वाला पति नही मिला और बेचारी की बदकिस्मती के शादी के बाद कोई बच्चा भी नही हुआ था अभी तक। पति बहुत अच्छा मिला जो उसका बेहद ख्याल रखता था।

नेहा चाय बना लाई और दोनो चाय पीते हुए गप्पे लगाने लगी
और नेहा बोली:"

" सिर गर्दन पर ही टैटू बनवाया होगा तो मैं जानती हूं।

मधुलिका अब उसे क्या बोलती कि वो तो सब जगह बनवाने गई और बिल तक दे दिया था लेकिन उसकी किस्मत ने साथ नहीं दिया क्योंकि टैटू बनाने वाला उसका बेटा था। मधुलिका थोड़ा सा उसे समझाते हुए बोली:

" अरे पहली बार था न इसलिए सिर्फ गर्दन पर ही बनाया। अगली बार और भी कुछ सेक्सी से बनवा लुंगी।

उसकी बात सुनकर नेहा जोर जोर से हंसी और बोली:"

" वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी कि मधुलिका कि तुम कॉलेज टाइम से आज तक बिलकुल भी नही बदली। तुम पहले भी फट्टू थी और आज भी फट्टू ही हो। रुक तुझे मैं दिखाती हूं।

इतना कहकर उसने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया सिर अपनी पेंटी के उपर बना हुआ टैटू दिखा दिया और बोली:"

" देख ये होती हैं हिम्मत और बहादुरी, अगर खुद को जवान रखना हैं और जमाने के साथ चलना हैं तो नए फैशन को फॉलो करना ही पड़ता हैं। और ये सब तेरे जैसी फट्टू नही कर सकती।

मधुलिका को उसकी बाते बुरी जरूर लग रही थी लेकिन वो उसकी हिम्मत पर हैरान हो थी कि उसने कितनी बेशर्म से उसके सामने अपनी सलवार को खोल दिया था। मधुलिका बोली:"

" हद हैं यार तेरी भी, तुझे बिलकुल शर्म नही आई ऐसे मेरे सामने कपड़े खोलने में ? और बकवास बंद कर मैं कोई फट्टू नही हू समझी।

नेहा: तेरे सामने सलवार खोलने में कैसी शर्म ? तू कौन सा मेरा रेप कर देगी ?

मधुलिका इस बार उसकी बात पर हंस पड़ी और उसके टैटू की तरफ देखते हुए बोली:

" अच्छा एक बात बता कल तक को तू बोल रही थी कि तूने नीचे टैटू नही बनवाया हैं अभी तू ?फिर ये कैसा बन गया ?

मधुलिका को अपने टैटू को देखते हुए पाकर नेहा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने अपने टैटू की अधिक तारीफ सुनने के इसलिए उसने अपनी पेंटी को हल्का सा नीचे की तरफ सरकाया और बिलकुल उसके करीब आ गई और बोली:"

" देख न ध्यान से टैटू। कल ही शाम को तेरे से बात करने के बाद में मैंने फैसला किया और पहुंच गई टैटू बनवाने के लिए बस।

मधुलिका ने ध्यान से उसके टैटू को देखा तो ज्यादा सुंदर नही लग रहा था। टैटू उसकी चूत के मुंह पर आकर खत्म हो गया था जहां उसकी चूत की क्लिट शुरू हो रही थी। मधुलिका ने देखा कि टैटू के पास हल्के हल्के लाल निशान पड़े थे जो नीचे की तरफ आते हुए उसकी चूत के आस पास और गहरे होते जा रहे थे तो मधुलिका ने हैरानी से पूछा:"

" यार नेहा, सच में तेरे अंदर बहुत ज्यादा हिम्मत हैं, लेकिन एक बात बता ये लाल लाल निशान कैसे पड़े हुए हैं यहां ?

नेहा लाल निशान की बात सुनकर पहले थोड़ा सा मायूस हुई और अगले ही उसके होंठो पर स्माइल आ गई और बोली:"

" यार मेरे पास पैसे कम थे इसलिए सस्ता टैटू बनवाना पड़ा जिससे निशान पड़ गए क्योंकि यहां की स्किन बहुत ज्यादा चिकनी और मुलायम होती हैं ना।

मधुलिका:" अच्छा जी इसका मतलब टैटू बनाने में मशीन और आर्टिस्ट का बुहुत ज्यादा ध्यान रखना होगा।

नेहा किसी पूरी अनुभवी की तरह बोल रही थी:"

" और नही तो क्या? अपने तू अपनी गर्दन के टैटू को ही देख ले कितनी खूबसूरती और बारीकी से काम हुआ है। बनने के बाद कोई सूजन और निशान तक नही। काश मेरे पास भी ज्यादा पैसे होते हो अच्छे आर्टिस्ट से ही बनवाती।

मधुलिका को उसकी बात सुनकर एक बात हो समझ में आ गई कि टैटू बनाना भी कोई बच्चो का खेल नही है और उसका बेटा सच में बहुत बड़ा और सुलझा हुआ आर्टिस्ट है। साथ ही उसे उसे नेहा की हालत पर भी तरस आया कि किस तरह मजबूरी में उसे सस्ते आर्टिस्ट से टैटू बनवाना पड़ा। मधुलिका ने बार फिर से उसके टैटू को देखा और बोली:"

" मशीन के निशान तो ठीक हैं नेहा लेकिन ये तो नीचे की तरफ आते ही ज्यादा ही लाल और गहरे निशान पड़ते जा रहे हैं।

अब नेहा के होंठो पर एक बहुत ही कामुक सी मुस्कान उभर आई और अपने होंठो पर जीभ फिराते हुए बोली:"

" ये निशान मशीन के नही बल्कि तेरे जीजू ने बनाए है। तेरे को देखते ही पागलों की तरह टूट पड़े और जी भरकर चूसा टैटू को और बोले कि तेरी इस टैटू वाली चिड़िया की ऐसी की तैसी। मेरे चोंच में होते हुए भला इसकी चोंच कैसे घुस सकती हैं। बस फिर क्या था खूब दबा दबा कर रात भर अपनी चोंच घुसाते रहे। कभी ऊपर वाली और कभी नीचे वाली।इसलिए ये हाल हो रहा इसका।

इतना कहते हुए नेहा ने अपन पेंटी को पूरा नीचे सरका तो मधुलिका ने शर्म के मारे अपनी अपनी आंखे बंद कर ली तो नेहा। की हंसी छूट गई और बोली:"

" शर्मा मत मेरी जान, देख ले तू भी टैटू बनने के बाद मर्द क्या हाल करते हैं इसका ?

इतना कहते हुए उसने अपनी टांगो को पूरा खोल दिया और मधुलिका ने हिम्मत करके अपनी आंखे खोली और देखा कि नेहा की चूत के होंठ सच में बिलकुल लाल सुर्ख होकर सूज गए मानो रात भर किसी ने उन्हें पूरी बेदर्दी से चूसा, मसला और लंड से चोदा था। मधुलिका अब काफी उत्तेजित महसूस कर रही थी जिससे उसकी चूत में रस उमड़ आया था और उसकी आंखे भी लाल सुर्ख हो गई थी। नेहा ने अपनी पेंटी को ऊपर कर लिया और सीधे उसकी चूची पर हाथ फेरते हुए बोली:"

" क्या हुआ पसंद नही आई तुझे मुझे लाल लाल सूजी हुई, चूसी हुई, मसली हुई, रगड़ी हुई गुलाबो ?

मधुलिका कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि उसकी नेहा का हाथ अपनी चूची पर महसूस करके उसकी सासें बहुत ज्यादा तेज हो गई थी और वो कसकर नेहा से लिपट और बोली:"

" आह नेहा, मुझे भी अपनी गुलाबो पर चिड़िया जरूर बनवानी है।

नेहा उसकी बात सुनकर खुश हो गया और उसे अपनी बाहों में कस लिया और बोली

" ये हुई न बात, अब आई न मेरी जान लाइन पर।

थोड़ी देर बाद के बाद नेहा और मधुलिका एक दूसरे से अलग हो गई और दोनो बैठी रही और बाते करती रही।

मधुलिका :" अच्छा नेहा एक बात बता बता ? क्या तू मुझे अपनी अच्छी और सच्ची सहेली मानती है। ?

नेहा ने चौंक कर उसकी तरफ देखा और बोली:"

" हान बिलकुल बहन की तरह, लेकिन हुआ क्या है ये बता ?

मधुलिका ने बिना कुछ बोले अपने बैग से एक 50 लाख रुपए का चेक निकाला और उसे देते हुए बोली:"

" तो फिर ये रख ले अपनी बहन के आशीर्वाद के रूप में और अपनी जिंदगी खूब अच्छे से जी।

नेहा को कुछ समझ नहीं आया और उसने चेक लिया और फिर उसने मधुलिका को वापिस कर दिया और बोली:"

" आपने मुझे चेक दिया और मैंने लेकर आपको वापिस कर दिया। अब ये चेक तुम्हारे पास मेरी अमानत हैं और मैं इसे उस दिन वापिस लूंगी जब तुम साबित कर दोगी कि तुम फट्टू नही हो।

मधुलिका ने ना चाहते हुए भी चेक वापिस ले लिया क्योंकि वो जानती थी नेहा अपनी जिद की कितनी पक्की है। मधुलिका ने चेक वापिस अपने बैग में रख लिया और बोली:"

" अच्छा तो ये बात है। मतलब तूने कसम खा ही ली हैं कि मुझे भी अपनी तरफ बेशर्म बना कर मेरी भी लाल करवा कर ही मानेगी।

मधुलिका की बात खत्म होते ही दोनो एक साथ जोर जोर से हंसने लगी और नेहा बोली:

" इसी बेशर्मी में ही जिंदगी का मजा हैं, वो गुलाबो ही क्या जो गुलाब की तरह लाल का कर दी जाए

मधुलिका फिर से हंस पड़ी और काफी देर तक दोनो हंसी मजाक करते रहे और फिर मधुलिका अपने घर की तरफ चल पड़ी।
 
अपडेट नंबर 4

कमरे में घुसते समय मोहित का पूरा ध्यान अपने हाथ में पकड़े हुए पेपर पर था जिसमे टैटू कितने बनेंगे और कहां बनेंगे वो ये सब देख रहा था। ग्राहक का नाम मधु देखकर उसे अपनी मां की याद आ गई लेकिन उसकी मां टैटू बनवाना होता तो उसके पास आती, नही वैसे भी उसकी मम्मी का पूरा नाम तो मधुलिका हैं जो वो कहीं भी इस्तेमाल करती है। वहीं दूसरी तरफ मधुलिका को समझ नही आ रहा था कि क्या करे क्योंकि वो नही चाहती थी कि उसका बेटा यहां उसे इस हालत में देखे क्योंकि उसके बेटे को जरूर बुरा लग सकता था। मधुलिका ने चादर को अपने जिस्म पर लपेट लिया और अपना मुंह उसके अंदर छुपा लिया जिससे उसका चेहरा पूरी तरह से छुप गया था। मधुलिका की घबराहट थोड़ी कम हुई और वो अपनी सांसे संयत करने लगी लेकिन उसकी सांसे इस एहसास से उसका अपना सगा बेटा उसके उसके जिस्म पर टैटू बनाएगा और ज्यादा तेज होती जा रही थी। मोहिंत ने पेपर को वहीं टेबल पर रख दिया और बैग से बहुत टैटू बनाने का सामान निकालने लगा। उसने एक छोटा सा खूबसूरत रेशमी और मुलायम बालों वाला ब्रश निकाला, एक जेली टाइप क्रीम की ट्यूब और दो तीन छोटे छोटे ब्रुश थे।

उसने पहली बार अपने सामने मुलायम गद्देदार बेड पर लेटी हुई औरत पर नजर डाली जिसने अपने जिस्म पर चादर डाली थी और उसका मुंह पूरी तरह से ढका हुआ था। शायद ठंड के कारण ऐसा किया हो लेकिन कमरे के अंदर ठंड तो थी ही नहीं, ओह हो सकता हैं कि बेचारी अपनी शक्ल दिखाने से शर्मा रही हो क्योंकि ऐसा पहले भी काफी औरते कर चुकी थी जिन्होंने अपनी पेंटी के आस आस टैटू बनवाया था।

मोहित बहुत ही प्यार और इज्जत से बोला:"

" देखिए मैडम मधु आप मुझसे बेफिक्र रखिए। आप चाहे तो अपना चेहरे खोलकर आराम से अपने शरीर पर बनते हुए टैटू को देख सकती हैं कि ठीक से काम हो रहा है या नही क्योंकि आखिर आपके पैसे दिए हैं। और वैसे भी हम अपने ग्राहक की जिंदगी से कोई मतलब नहीं रखते।

मधुलिका ने अपने बेटे की बात सुनी लेकिन उसने इशारे से ही गर्दन हिलाकर अपना मुंह खोलने से मना कर दिया तो मोहित को बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि कितनी ज्यादा शर्मीली औरत है। चेहरा दिखाना तो दूर की बात बोलने से भी डर रही है।

मोहित:" चलिए जैसी आपकी मर्जी, मुझे तो अपने काम से मतलब हैं। वैसे भी हम अपने ग्राहक की भावनाओं की कद्र करते हैं। क्या मैं टैटू बनाना शुरू कर दू ?

मधुलिका का पूरा जिस्म अपने बेटे की बात सुनकर कांप उठा। अब उसके पास कोई रास्ता भी नहीं बचा था इसलिए उसने अपनी तरफ से फिर से अपनी गर्दन हिलाकर सहमति दे दी। मोहित के होंठो पर स्माइल आ गई क्योंकि उसने काफी सारी औरतों के जिस्म पर सेक्सी टैटू बनाए थे और उन सभी ने उसके साथ बेहद अच्छा और खुला व्यवहार किया था और अपना पूरा सहयोग दिया था। लेकिन ये अजीब औरत हैं टैटू अपनी चूत और बूब्स, गांड़ पर बनवा रही हैं और बोलने से भी शर्मा रही हैं। मोहित ने अपने हाथ से मधुलिका के जिस्म पर पड़ी हुई चादर को थोड़ा सा साइड से उठाया और उसकी गर्दन को एक तरफ से नंगा कर दिया ताकि अपना काम कर सके। मधुलिका आने वाले पल के बारे में सोच सोच कर रोमांच महसूस कर रही थी कि अब क्या होगा।

मोहित ने ब्रश को उठाया और उसकी गर्दन पर साफ करने लगा ताकि टैटू से पहले उसकी गर्दन बिलकुल साफ हो जाएं। ब्रश में मुलायम रेशमी बाल मधुलिका की गर्दन को साफ कर रहे थे और मधुलिका बेहद गुदगुदी महसूस कर रही थी जिससे उसके जिस्म में अजीब सा एहसास हो रहा रहा था। अजय ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और मधुलिका की गर्दन पर पहली बार अपनी उंगली से छुआ तो मधुलिका का जिस्म कांप उठा। मोहित अपने हाथ से उसकी गर्दन को पकड़ कर ब्रश से साफ करने लगा और मधुलिका काफी रोमांचक महसूस कर रही थी। तभी मोहित ने चादर को थोड़ा सा और ऊपर की तरफ उठा लिया और क्रीम हाथ में लेकर उसे मधुलिका की गर्दन पर लगाने लगा ताकि उसकी स्किन मुलायम हो जाए। ठंडी ठंडी क्रीम को अपनी गर्दन पर महसूस करके मधुलिका ने थोड़ी राहत की सांस ली। अजय क्रीम लगाते हुए जैसे ही उपर की तरफ गया तो उसकी नजर मधुलिका के कानो में पड़े हुए सोने के मछली के डिजाइन के बाली पर पड़ी तो उसे एक झटका सा लगा क्योंकि इस डिजाइन के बाले तो उसकी मां मधुलिका पहनती है और साथ में कान के नीचे की तरफ गोल गोल आकार के सुंदर से टोस। ये तो बिलकुल मेरी मम्मी जैसे ही लग रहे हैं कहीं ये मेरी मम्मी तो नही है। दूसरे ही पल उसे एहसास हुआ कि औरते एक दूसरे के फैशन को बहुत जल्दी अपना लेती हैं इसलिए उसने खुद ही अपना जवाब ढूंढ लिया। मोहित उसकी गर्दन पर क्रीम लगाने के बाद बोला:"

" वैसे मैडम आपके कान में मछली के डिजाइन के सोने की बाली बेहद खूबसूरत लग रही है। मेरी मम्मी भी ठीक इसी तरह की पहनती हैं। आपकी पसंद लाजवाब है बहुत।

मधुलिका उसकी बात सुनकर अंदर तक कांप उठी। है भगवान कहीं इसे शक न हो जाए मेरे ऊपर। उसने चादर के अंदर ही अपने दोनो हाथ पेट पर रख कर जोड़ दिए और मन ही मन ईश्वर की प्रार्थना करने लगी कि बस आज किसी बचा लो मुझे। साथ ही साथ वो नेहा को भी मन ही मन गंदी गंदी गालियां देने लगी कि उस कमीनी की वजह से ही ये सब हुआ है। ना मैं उसकी बातो में आती और न ही मेरे साथ ऐसा हो रहा होता। मधुलिका के पास मोहित की बात का कोई जवाब नही होता और होता भी तो भी नही दे सकती थी। उसे समझ नहीं आ रहा था ये दूसरी दुकान पर टैटू बनाने उसका बेटा क्यों आ गया है। लेकिन पूछने की हिम्मत उसमे नहीं थी क्योंकि वो तो किसी भी तरह अपनी जान बचाने पर लगी हुई थी।

मोहित ने क्रीम को अच्छे से लगाने के बाद थोड़ी देर इंतजार किया और इसी बीच उसने एक भरपूर नजर मधुलिका के चादर में लिपटे हुए जिस्म पर डाली और उसकी तारीफ किए बिना ना रह सका। सच में छह फीट के करीब लंबी मधु के बिलकुल भरे हुए फिट जिस्म खास तौर से उसकी गोल गोल पपीते के आकार की ठोस मस्त चूचियां चादर में होने के बाद भी अपना आकार साफ दर्शाती हुई सीधी तनी हुई थी जिनसे मोहित प्रभावित हुए बिना ना रह सका। वो जानता था कि चुचियों के उपर के उभार टैटू बनाने के लिए जो पतली सी ब्रा ग्राहक को दी जाती हैं उसमे चूचियां अच्छे से नही कसी जाती और फैल जाती थी। लेकिन यहां तो मामला बिलकुल उल्टा था। मधुलिका की चूचियां पूरी सख्ती से अपना सिर ऊंचा किए खड़ी हुई थी मानो झुकना उन्होंने कभी सीखा ही नहीं हो।

क्रीम लगाने के बाद करीब 10 मिनट में सूख जाती थी लेकिन यहां मामला बिलकुल उल्टा हो रहा था। एक से दो मिनट के अंदर ही क्रीम सूख गई तो मोहित को आश्चर्य हुआ और उसने हाथ लगाकर देखा तो क्रीम सूखकर सख्त हो गई और मधु की गर्दन उसे काफी गर्म महसूस हुई। कैसी गर्म औरत है ये एकदम तपा हुआ शरीर है इसका। लेकिन इस तरह की बाते ग्राहक को नहीं बोल सकते थे।

मोहित ने धीरे धीरे सारी क्रीम को हटा दिया और मधुलिका की गर्दन पूरी तरह से बिल्कुल साफ होकर चमक उठी। मोहित ने एक हाथ टैटू ब्रश उठाया और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन को पकड़ लिया और जैसे ही घुमाया तो मधुलिका का पूरा बदन जोर से कांप उठा क्योंकि ये एक वाइब्रेटर के जैसा ब्रश था और मधुलिका इसके जबर्दस्त कंपन को महसूस करके रोमांच से कांप उठी थी।

मोहित ने ब्रश को रोक दिया और उसे समझाते हुए बोला:"

" देखिए मैडम, इस तरह का कंपन आपको इस ब्रश के लगते ही अपने शरीर पर महसूस होगा क्योंकि बिना उसके टैटू बना तो आसानी से मिट जाएगा। इसलिए थोड़ा सा धैर्य बनाए रखिए।

मधुलिका को अभी तक अपनी गर्दन पर मीठी मीठी गुदगुदी का एहसास हो रहा था और उसने गर्दन हिलाकर मोहित को टैटू बनाने फिर से बनाने के लिए सहमति दे दी। मोहित ने फिर से ब्रश को चलाना शुरू किया और कंपन के कारण मधुलिका का जिस्म हिलने लगा और वो पूरी तरह से बेचैनी महसूस कर रही थी। उसके जिस्म में उत्तेजक तरंगे उठ रही थी लेकिन उसने अपने दोनों हाथो मे चादर को जोर से कस लिया और अपने मुंह को पूरी जोर से कस कर बंद लिया कि कहीं गुदगुदी से उसके मुंह से आह निकल पड़ी तो उसके बेटे को सब पता चल जायेगा कि ये मधु उसकी मम्मी मधुलिका है। ये सब सोचकर मधु की सांसे पूरी तरह से उखड़ गई थी।

मोहित ने एक पल के लिए अपनी नजर मधु के जिस्म पर डाली तो उसे मधु की जोरदार तेज सांसों के साथ उसकी चूचियां हिलती हुई नजर आई और मोहित को आज पहली बार टैटू बनाते हुए आपने जिस्म में उत्तेजना का एहसास हुआ था। वो जानता था कि ये सब गलत हैं लेकिन मधुलिका की गोल गोल ठोस उछलती हुई चुचियों के आगे उसकी कोई नही चल रही थी। चूचियों के निप्पल इतने सख्त थे उन्होंने चादर को अपने आकार में ही उपर की तरफ उठा रखा था। मोहित काफी बेचैनी महसूस कर रहा था कि है भगवान आज कहां फंस गया। ये औरत हैं या आग का शोला, जीती जागती कयामत क्या होती हैं उसने आज महसूस किया था आई उसके मन में एक अजीब सी इच्छा ने जन्म ले लिया था चाहे कुछ भी हो लेकिन बार बस कम से कम एक बार इस काम देवी का चेहरा जरूर देखना है मुझे।

मधुलिका की गर्दन पर टैटू बन गया था और बस हल्की सी सजावट का काम बाकी था। उसने काम वासना के वशीभूत होकर ब्रश को बिलकुल आगे से अपनी उंगलियों में पकड़ लिया और अपनी उंगलियों को जान बूझकर मधुलिका की गर्दन पर ब्रश चलाने के बहाने प्यार से सहलाते लगा। मधुलिका ने जैसे ही अपने सगे बेटे की उंगली अपनी गर्दन पर सहलाने के अंदाज में महसूस करी तो उसे अपनी सांसे रुकती हुई महसूस हुई और उसके अंदर उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी। मोहित ने टैटू को चेक करने के बहाने हल्का सा जोर लगाया तो मधुलिका को पहली बार अपने सगे बेटे की उंगलियों की कठोरता का एहसास हुआ बिलकुल सख्त, किसी पत्थर के समान। मोहित ने टैटू को अपनी उंगली से अच्छे से छूकर, दबा कर देखा कि कही मिट तो नही जाएगा और मधुलिका को अपने बेटे पर गर्व हुआ कि उसका बेटा कितना ठोस और ताकतवर है। वही दबाए जाने से मधुलिका की नरम नरम मांस से बनी हुई गर्दन हल्की सी अंदर की तरह दब कर घुस रही थी मानो बिलकुल मुलायम हो। इस एहसास से मोहित उत्तेजित हो गया और उसने अपने लंड में तनाव महसूस किया तो उसने जल्दी से अपने हाथ मधुलिका की गर्दन से हटा लिए और मोहित के साथ साथ मधुलिका ने भी चैन की सांस ली।

मोहित:" लीजिए मैडम आपका एक टैटू बन गया हैं। आप चाहें तो सामने शीशे में देख सकती है।

मधुलिका तो किसी भी हालत में उठ ही नही सकती थी क्योंकि उसे खतरा था कही उसके बेटे को पता ना चल जाए। इसलिए उसने अपने हाथ के इशारे से ही उसे दूसरा टैटू बनाने का इशारा किया।

मोहित को निराशा हुई लेकिन कर भी क्या सकता था। मोहित ने एक नजर उसकी चूचियों पर डाली जो मधुलिका की तेज तेज सांसों के कारण हिल रही थी और एक लंबी सांस लेकर बोला:"

" मैडम अगला टैटू आपके सीने की गोलाईयों के उभार पर बनेगा इसलिए बेहतर होगा कि पहले आप अपनी सांसे को काबू में कर लीजिए। ऐसे हिलती रहेगी तो टैटू खराब हो सकता हैं।

मधुलिका का मन किया कि वो उठ कर भाग जाए। उसका अपना सगा बेटा उसकी उछलती हुई चुचियों को देख कर उसे अपनी सांसे ठीक करने के लिए कह रहा था। है भगवान ये क्या दिन दिखा दिया, इस हराम की बच्ची नेहा का मुंह तो मैं तोड़ दूंगी। बस एक बार मेरे सामने आ जाए। लेकिन अभी पहले मधुलिका को फिलहाल के हालात से निपटना जरूरी था इसलिए वो अपनी सांसे ठीक करने लगी।

थोड़ी देर के बाद उसकी सांसों की गति धीमी हो गई तो मोहित की आंखे चमक उठी और उसने चादर को बीच से उसकी छाती पर से थोड़ा सा एक तरफ कर दिया और उसकी एक चूची उसके बेटे के सामने आ गई। नाम मात्र की इस ब्रा में सिर्फ निप्पल ही ढका हुआ था और मोहित कब से मधुलिका की टाइट गोल गोल आकार की चुचियों के उछलने से उनका दीवाना हो गया था और उनके दर्शन को तरस रहा था। जैसे ही उसकी नजर मधु की जोरदार जबरदस्त गद्देदार चुचियों पर पड़ी तो उसका लंड अकड़ गया और उसकी ढीली सी पेंट में एक काफी बड़ा बन गया। मधुलिका को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। उसका बेटा उसकी चूची को देख रहा था और वो वो बेबस उसे दिखाए जा रही थी। गोल गोल गुदाज चूची, बिलकुल उठी हुई ठोस चूची ऐसी लग रही मानो दुनिया की सबसे अच्छी चूची हैं। मनोज से ज्यादा सब्र नहीं हुआ और उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ा कर जैसे ही जैसे ही मधुलिका की चूची के उभार पर रखा तो मधुलिका उछल पड़ी जिससे मनोज का हाथ उसकी गोलाई पर से हट गया। उफ्फ कितनी नाजुक और संवेदनशील औरत हैं, छूने से ही कैसे उछल उछल पड़ रही है ये सोचते हुए मनोज ने मनोज बोला:"

" देखिए मैडम अपनी उत्तेजना को काबू में कीजिए, ऐसे तो टैटू बनना मुश्किल हो जाएगा।

मधुलिका के दिल पर क्या बीत रही थी बस सिर्फ वो ही जानती थी। पिछले कितने सालों से उसका जिस्म वासना की भट्टी में जल रहा था और आज किस्मत ने उसके ऊपर कैसा जुल्म ढाया कि वो अपने सगे बेटे के सामने पड़ी हुई थी। एक तो मनोज के छुने का उत्तेजक एहसास और उपर से उसका सगा बेटा, सबसे ज्यादा चिंता तो उसे इस बात की थी कि अगर मेरे बेटे को पता चल गया तो क्या होगा। मधुलिका ने हिम्मत करके अपने आपको फिर से संयत किया और मोहित को फिर से इशारा किया कि वो अपना काम कर सकता हैं।

मोहित ने देर न करते हुए फिर से मुलायम रेशमी ब्रश उठाया और मधु की चूची के उभार पर फेरने लगा। मोहित काफी उत्तेजक तरीके से ब्रश घुमा रहा था जिसका मदमस्त एहसास मधुलिका को फिर से मदहोश कर रहा था और एक बार फिर से उसकी सांसे ना चाहते हुए भी उखड़ने लगी। मोहित ब्रश को जान बूझकर थोड़ा नीचे की तरफ ले जाने लगा जहां से मधु के निप्पल का भूरे रंग का घेरा शुरू हो रहा था। हालाकि यहां तक टैटू नही बनना था लेकिन मोहित चाह कर भी खुद को नही रोक पाया और उसने मधुलिका के निपल्स के घेरे पर ब्रश फेर दिया तो मधुलिका ने पागल सी होकर एक हाथ से चादर को कस लिया। मोहित ने धैर्य का परिचय दिया और फिर से ऊपर की तरफ आते हुए चूची की शुरुवाती गोलाई को ब्रश से साफ किया। इस बार उसने ब्रश को बिलकुल नीचे से अपनी दो उंगलियों और अंगूठे से पकड़ लिया और अपनी बाकी की दोनो उंगलियों को भी साथ में जोड़ दिया। धीरे धीरे उत्तेजक तरीके से ब्रश घुमाते हुए अपनी दोनो उंगलियों को मधु के उभार पर घुमाते हुए धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगा। जैसे जैसे मोहित की उंगलियां नीचे की तरफ बढ़ रही थी वैसे वैसे ही मधुलिका की सांसे तेज हो रही थी जैसे ही ब्रश फिर से ब्रा की तनी के को छूते हुए चूची के भूरे रंग के घेरे पर पहुंचा तो ब्रश के साथ साथ उसकी उंगली भी उसकी मधुलिका की चूची के घेरे को छू और मधुलिका पागल सी हो गई कर उसने अपनी जांघो को जोर से कस लिया।

मोहित ने अच्छे से उसकी चूची के घेरे को छुआ और फिर ब्रश को एक तरफ रख दिया तो मधुलिका ने एक बार फिर से चैन की सांस ली पर उसे क्या मालूम था थोड़ी देर बाद उससे इससे कहीं ज्यादा उत्तेजक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। मोहित ने क्रीम की ट्यूब को उठा लिया और आने मधु की चूची को सीधे अपने हाथ के छुने के एहसास से ही उसका लंड उछल उछल पड़ने लगा। यही हाल मधुलिका का भी था क्योंकि चादर से उसने जैसे ही मोहित के हाथ में ट्यूब देखी तो उसकी हालत खराब हो गई। उसका गला सूख सा रहा था और वो बार बार अपना थूक समेट कर अपने गले को गीला रखने का प्रयास कर रही थी। मोहित ने अपनी उंगली पर क्रीम ली और मधुलिका की चूचियां अपने आप टाइट होकर बिना उसके छुए ही अकड़ने लगी। मधुलिका ने अपनी हालात पर खुद ही तरस खाकर जोर से अपने दांतो को भींच कर अपने मुंह को बंद कर लिया। मोहित ने अपनी उंगलियों को मधु की चूची के ऊपरी उभार पर रख दिया तो मधुलिका की आंखे मस्ती से उसकी चुचियों की तरह गोल होकर लाल सुर्ख हो गई और मोहित धीरे धीरे बिलकुल कोमल हाथों से उसकी चूची के उभार को क्रीम लगाने लगा। मधुलिका अपने सगे बेटे की उंगलियों की मदमस्त छुअन से पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और उसकी सांसे इस बार पूरी तरह से उखड़ गई और उसकी चूची अपने आप उछल उछल कर उसके बेटे की उंगलियों से टकराने लगी। मोहित इस तरह उसकी चूची उछलने से जोश में आ गया और उसने धीरे से अपनी उंगलियों के साथ साथ हथेली को भी उसकी चूची पर टिका दिया तो ना चाहते हुए भी पहली बार मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी। मधुलिका की इस मस्ती भरी आह ने मोहित को और भी मस्त कर दिया और उसने अच्छे से अपने हाथ से उसकी पूरी चूची को ढक दिया तो मधुलिका बावली सी हो गई और चादर के अंदर ही उसने अपने एक पैर की उंगलियों को दूसरे से मसलना शुरू कर दिया। मोहित उसके पैरो पर से चादर हिलते देखकर समझ गया कि ये मधु पूरी तरह से मदहोश हो गई है और इससे थोड़ी मस्ती करी जा सकती हैं। मोहित उसकी एक चूची को पूरी तरह से अपनी चौड़ी हथेली में ढके हुए क्रीम लगाने के बहाने हल्के हल्के उसकी चूची सहला रहा था और फिर उसने धीरे से मदहोशी से भरी आवाज में मधुलिका के कान में बोला:"

" मधु जी, आपकी गोलाईयां ऐसे। ही उछलती रही तो टैटू कभी बन पाएगा। आप अपनी गुदगुदी सहन नही कर पा रही हैं। टैटू बनने के कोई सबसे पहले आपकी इस बड़ी बड़ी ठोस गोलाई को बेकाबू होकर उछलने से रोकना होगा जो आप चाह कर भी नही रोक पा रही है। इसे रोकने का आपके पास कोई उपाय हो तो बताए मुझे आप।

मधुलिका अपने बेटे के मुंह से अपनी चूची की तारीफ सुनकर मधुलिका तड़प सी गई और बिना कुछ बोले मचलती रही। उसकी सांसों की गति कम होने के बजाय और बढ़ गई जिससे चुचियों पूरी तरह से बेकाबू हो गई और उछल उछल पड़ने लगी। मोहित को इससे बेहतर मौका नहीं मिलने वाला था तो उसने अपना तीर चला दिया और बोला:"

" अब तो एक ही तरीका बचता है कि मैं खुद ही आपकी इन मस्ती भरी ठोस ठोस गोल गोल गोलाईयों को उछलने से रोक दू। क्या आपके इसके लिए तैयार हैं ?

मधुलिका उसकी बात सुनकर पागल सी हो गई। उफ्फ उछलने से रोकने के लिए तो ये जोर से अपने हाथ में दबाकर रखेगा। हाय भगवान क्या दिन दिखा दिया तूने आज मुझे। काश में टैटू ही न बनवाने आती। मधुलिका कुछ भी करके इस मुसीबत से छुटकारा पाना चाहती थी इसलिए उसने ना चाहते हुए भी उसकी गर्दन अपने आप सहमति से झुक गई और आने वाले पलो की कल्पना से ही उसका रोम रोम मचल उठा।

मोहित को इससे ज्यादा और क्या चाहिए था उसने इस बार पुरी हिम्मत से अपना एक हाथ सीधे मधु की चूची पर रख दिया और उसे अपनी पूरी हथेली में भरते हुए कस लिया। मधुलिका अपने बेटे की कठोर हथेली में अपनी पूरी चूची महसूस करते ही बावली सी हो गई और उसकी चूत में उसे कुछ कंपन सा महसूस हुआ। मोहित ने दूसरे हाथ से ब्रश उठाया और वाइब्रेटर जैसे ब्रश को जैसे ही हल्का जान बूझकर मधुलिका के कंधे पर घुमाया तो मधुलिका तड़प उठी और न चाहते हुए भी उछल पड़ी जिससे उसकी पूरी की पूरी चूची ब्रा सहित उसके बेटे के कठोर हाथ में समा गई और मोहित ने पहली बार अपनी हथेली का दबाव बढ़ा कर उसकी चूची को दबा दिया तो मधुलिका के मुंह से एक बार फिर से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने पूरी ताकत से अपने हाथो में चादर को कस लिया जिससे चादर हल्की सी सरक गई और उसके सिर के बाल दिखने लगे तो मोहित समझ गया कि जल्दी ही ये चादर पूरी तरह से उसके मुंह से सरक जायेगी और उसे इस बेपनाह हुस्न की देवी के दर्शन करने को मिल सकते हैं। मधुलिका की नारियल के आकार की बड़ी ठोस गोल चूची पहली बार सिर्फ और सिर्फ उसके बेटे सगे बेटे के हाथ में पूरी बिलकुल पूरी समा गई मानो उसकी चूची सिर्फ उसके बेटे के हाथ के लिए बनी हुई थी ये सोचकर मधुलिका बेहद उत्तेजित हो गई और उसकी चूत में गीलापन आने लगा तो मदहोश सी मधुलिका अपने दोनो पैरो को जोर जोर से एक दूसरे से मसलने लगी। मोहित थोड़ा सा आगे को सरका और बिलकुल उससे सट सा गया। मोहित का एक घुटना उसके पेट से छू रहा था जिसने मधुलिका की आग में घी का काम लिया और मधुलिका ने उत्तेजित होकर चादर को थोड़ा और जोर कस लिया तो मधुलिका का गोरा चिकना माथा हल्का सा खुल गया और मोहित तड़प सा उठा क्योंकि बस कुछ ही देर बाद उसकी इच्छा पूरी होने वाली थी। मोहित ने ब्रश को थोड़ा जोर से उसकी चूची पर चलाया तो मधुलिका फिर से उछल पड़ी और इस बार मोहित ने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी ब्रा की स्ट्रिप को सरका दिया जिससे मधु की पूरी बिलकुल पूरी नंगी चूची उसके हाथ में आ गई और एक बार दोनो में मुंह से आह निकल पड़ी और मोहित ने ताकत से उसकी चूची को नीचे की तरफ दबा दिया तो मधुलिका दर्द भरी मस्ती से कराह उठी और उसने एक हाथ को अपने बेटे के हाथ पर अपनी चूची के ऊपर टिका टिका मानो खुद ही उसे मसलने का निमंत्रण दे दिया हो और उसकी चूत से रस बाहर की तरफ टपक पड़ा । मोहित की हिम्मत बढ़ गई और वो जोर जोर से उसकी चूची को मसल रहा था जिससे मधुलिका के मुंह से हल्की हल्की मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी। मधुलिका उत्तेजना से इतनी ज्यादा पागल हो गई थी कि खुद ही अपने हाथ का दबाव अपने बेटे के हाथ पर डाल कर उसे और जोर से अपनी चूची को मसलने के लिए उकसा रही थी। मोहित ने अपने हाथ की उंगलियों में जैसे ही उसके निप्पल को पकड़ कर मसला तो मधुलिका बेकाबू घोड़ी की तरह उछल पड़ी और चादर उसके मुंह पर से हटती चली गई और जैसे कयामत हो गई। चादर हटते ही अपनी मां को देखते ही मोहित सकपका सा गया और उसका हाथ अपने आप अपनी मां मधुलिका की चूची पर से हट गया तो मधुलिका ने आंखे खोल दी और जैसे ही उसकी आंखे अपने सगे बेटे की आंखो से मिली तो उसे काटो तो खून नहीं और उसने अपना मुंह आंखे नीची करते हुए चादर को अपनी अपने जिस्म पर ढक लिया।, मुंह पर ढक लिया।

मोहित को कुछ भी नहीं आ रहा था कि क्या बोली और तब बाहर से दरवाजा खटखटाया गया तो मोहित ने घड़ी में समय देखा तो उसे आए एक घंटा हो गया था और यही समय उसे टैटू बनाने के लिए मिला था जो अब खत्म हो गया था। मोहित को अब समझ नही आ रहा था कि क्या करे क्योंकि अभी उसके पास सिर्फ पांच मिनट बचे हुए थे और टैटू बनने का कोई सवाल ही नही बनता था।

मोहित ने अपनी मम्मी के चेहरे की तरफ देखा जो चादर से ढका हुआ था जिससे थोड़ी हिम्मत मिली क्योंकि आंखे न मिलने से अपराधबोध कम हुआ और बोला:"

" मम्मी मुझे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि आप यहां टैटू बनवाने आ सकती हो।

मधुलिका को भी थोड़ी सी हिम्मत मिली और बोली:"

" लेकिन तुम कैसे आ गए ?

मोहित ने एक लंबी सांस ली और बोला:" मुंबई में जितने भी हाई प्रोफाइल औरतों के टैटू बनाए जाते हैं उसके लिए सभी ऑफिस मुझे भी बुलाते है और अच्छा पैसा देते हैं। दूसरी एक बात ये भी हैं कि मैं सिर्फ अपने काम पर फोकस करता हूं। बस आज मुझसे पहली बार गलती हो गई और आपके जिस्म को देखकर बहक गया। मम्मी आप सच में जितनी खुबूसरत हैं उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत आपका शरीर है। मैने आज तक ऐसा जिस्म नही देखा मम्मी।

मधुलिका अपने बेटे के मुंह से अपने शरीर की तारीफ सुन रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि अपने बेटे को क्या जवाब दे तभी मोहित फिर से बोल उठा

" मम्मी मुझे आपकी हेल्प चाहिए नही तो मेरा करियर तबाह को सकता है।

मधुलिका ने पहली बार जान बूझकर चादर को हटा दिया और बोली:" बोल ना बेटे क्या हेल्प चाहिए? तेरे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूं।

मोहित:" मम्मी आप बाहर ऑफिस में बोल देना कि आपके सभी टैटू बन गए हैं। मम्मी आपके टैटू में बाद में अपने ऑफिस या घर कहीं पर भी बना दूंगा जब आप कहोगी।

मधुलिका:" बोल दूंगी तू फिकर मत कर। रही बात टैटू की तो वो तो अब मैं बनवाने वाली तुझे।

तभी बाहर से फिर से बैल बज उठी तो मधुलिका ने अपने पूरे जिस्म को चादर से अच्छे से लपेट लिया और बाहर की तरफ चल पड़ी। मोहित अपना बैग बंद करने लगा और तभी उसकी नजर बेड पर पड़ी हुई चादर पर पड़ी तो उसने देखा कि चादर ठीक उसकी मां के जांघो में बीच से हल्की सी भीग गई थी मतलब उसकी मां उसके हाथो की छुवन से पिघल रही थी।

मधुलिका बाहर आई और अपने कपड़े पहन कर बाहर ऑफिस में आ गई तो रिसेप्शन पर बैठी थी लड़की ने उसे स्माइल दी और बोली:"

" उम्मीद हैं मैडम आप आर्टिस्ट द्वारा बनाए गए टैटू से संतुष्ट होंगी।

मधुलिका ने भी स्माइल करते हुए कहा:" हान सच में भूत अच्छा काम किया उसने। मेरा पूरा पैसा वसूल हो गया।

लड़की: मैडम अगर आप बुरा न माने तो क्या मैं आपके सभ टैटू देख सकती हूं ?

मधुलिका तेजी से बोली:" नही नही, बिलकुल भी नही, सबसे पहले मैं टैटू उसके दिखाऊंगी जिसके लिए बनवाए हैं।

लड़की ने एक फीकी सी स्माइल। दी और बोली:" कोई बात नहीं मैडम। फिर से सेवा का मौका दीजियेगा हमे।

मधुलिका ने भी उसे आखिरी बार स्माइल दी और अपनी गाड़ी में बैठ कर अपने घर की तरफ चल पड़ी। उसके मन काफी सारे सवाल उमड़ रहे थे।
 
अपडेट नंबर 6

मधुलिका अपने विचारों में खोई हुई अपनी घर पहुंच गई और घर के काम में लग गई। उसके मन में एक बार फिर से अपने जिस्म पर टैटू बनवाने की इच्छा जन्म ले चुकी थी क्योंकि जब से उसकी नेहा की पेंटी के अंदर लाल लाल निशान देखे थे उसके पूरे जिस्म में अजीब सी मस्ती दौड़ रही थी। बस समस्या ये थी कि टैटू किस से बनवाया जाए। अपने बेटे से टैटू बनवाने की हिम्मत अब उसमे नहीं बची थी क्योंकि वो पहली बार गलती से उस स्थिति में फंस गई थी और उसका क्या हाल हुआ बस वो ही जानती थी इसलिए अब फिर से जान बूझकर वही गलती नही करना चाहती थी। उल्टा अभी तक उसे ये समस्या खाए जा रही थी कि थोड़ी देर जब उसका बेटा घर आयेगा तो वो उसका सामना कैसी करेगी। क्या सोच रहा होगा वो मेरे बारे में कि उसकी मम्मी कितनी जल्दी बहक गई थी। अपने विचारो में खोई हुई मधुलिका अपने घर के काम में लगी हुई थी और उसके मन में विचारो का एक युद्ध सा चल रहा था कि क्या सही है और क्या गलत।

वहीं दूसरी तरफ मोहित भी वहां से निकल कर अपने ऑफिस पहुंच गया और वो भी कम परेशान नहीं था। कोई काम कर पाने की हिम्मत अब उसके अंदर नहीं बची हुई थी इसलिए उसने आते ही अपने सभी काम कैंसल कर दिए और ठंडा पानी पीकर अपनी आरामदायक कुर्सी पर बैठ गया और सोच में डूब गया। उसने सपने में भी नही सोचा था कि उसकी मां टैटू बनवाने के लिए आयेगी और दूसरी शॉप पर तो उसके होने की तो वो कल्पना भी नहीं कर सकता था।आज तक उसने कितनी हो औरतों, भाभियों यहां तक कि कुंवारी और चुलबुली लड़कियों के भी टैटू बनाए लेकिन वो कभी नही बहका और न ही उसने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया। कितनी कोमल और संवेदनशील त्वचा हैं उसकी मम्मी की इस उम्र में भी। बिलकुल किसी हिरनी की तरह मुलायम, उसकी मम्मी इतनी ज्यादा कामुक हो सकती हैं उसे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था। किस तरह सिर्फ उसके हाथ लगाने से ही उसकी मम्मी उछल उछल पड़ रही थी और चाह कर अपने आपको रोक नही पा रही थी। मोहित को लगा कि वो गलत कर कर रहा हैं और उसे अपनी सगी ममी के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए। मोहित ने झुंझला कर अपनी आंखे बंद कर ली लेकिन ये क्या आंखे बंद करते ही उसे वो दृश्य याद आ गया जब उसने अपनी मां की चूची को उछलने से रोकने के लिए अपनी हथेली में भर लिया था। उफ्फ कितनी गोल गोल गुदाज, बिलकुल पपीते जैसी ठोस थी उसकी उसकी मम्मी का चूची। ऐसी तो उसने आज तक किसी भाभी या लड़की की भी नही देखीं थी। इस उम्र में भी उसकी मां किसी काम देवी से कम नहीं है। उसकी चूची के निप्पल कितने सख्त थे और कैसे तने हुए। ये सब सोचते हुए उसके लंड में एक बार फिर से तनाव आने लगा और उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका लंड उसकी मम्मी के बारे में सोच कर अकड़ रहा था। लेकिन सच को स्वीकार करने के सिवाय उसके पास कोई रास्ता नही था और सच यही था कि उसे अपनी मम्मी का जिस्म सच में बेहद बेहद ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगा था और जिसके मोहपाश में वो टैटू बनाते समय बंध सा गया था।

नही नही ये सब सही नही हैं और मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए। एक बार से घबरा कर मोहित ने अपनी आंखे खोल दी और उसका गला फिर से सूख गया था तो उसने एक फिर से बॉटल उठाई और गटागट पीता चला गया। शाम को गई थी और उसने अपने ऑफिस को बंद कर किया और घर की तरफ चल पड़ा। आमतौर भी तेज गाड़ी चलाने वाला मोहित आज गाड़ी को बहुत धीरे धीरे चला रहा था क्योंकि वो खुद अपनी मां का सामना करने से डर रहा था।

मोहित अपने पहुंचने वाला था और उसका दिल बहुत ज्यादा घबरा रहा था कि अब वो अपनी मम्मी का सामना कैसे करेगा। उसे सबसे ज्यादा फिक्र इस बात की थी कि कहीं उसकी मम्मी ये न सोच ना ले कि वो टैटू बनवाने आने वाली औरतों के साथ ऐसा ही करता होगा और टैटू बनाने के बहाने वो मस्ती कर रहा है। मोहित ने अपनी गाड़ी बाहर पार्क करी और घर के अंदर पहुंच गया। उसका दिल धाड धाड़ करके धड़क रहा था मानो उसके सीने से बाहर निकलना चाहता हो।उसने बहुत धीरे से दरवाजा खोला मानो कोई चोर घर के अंदर चोरी करने के लिए घुस रहा हो। अंदर घुसने के बाद उसने इधर उधर डरते हुए देखा और अपनी मम्मी को न पाकर चैन की सांस ली। वो अपने कमरे में घुस गया और अपने ऑफिस बैग को टेबल पर रख दिया और फिर उसने अपने कपड़े लिए और एक टॉवेल के साथ नहाने के लिए चल पड़ा। अब उसकी हवा खराब हो रही थी क्योंकि बाथरूम का रास्ता किचेन के सामने से ही था और वो जानता था कि इस समय उसकी मम्मी किचन मे ही होगी। जैसे जैसे उसके कदम बढ़ रहे थे वैसे वैसे उसकी धड़कन भी बढ़ रही थी। जैसे ही वो किचन के सामने पहुंचा तो उसे उसकी मम्मी खाना बनाती हुई दिखी और मोहित को ऐसा लगा मानो उसने अपनी मम्मी नही बल्कि भूत देख लिया हो। उसके माथे पर पसीना छलक उठा और वो बाथरूम के पास डरते डरते पहुंच ही गया। जैसे ही अंदर घुसने वाला था वो उसने डर के मारे एक बार फिर से पीछे मुड़कर देखा और आगे बढ़ गया। लेकिन उसकी यही गलती उस पर भारी पड़ गई और वो किचन के बाहर रखी हुई बाल्टी से जोर से टकरा गया और उसके मुंह से एक दर्द भरी चींख निकल पड़ी। उसकी आवाज सुनते ही मधुलिका तेजी से बाहर की तरफ दौड़ी और मोहित को अपनी गलती का एहसास हो गया था।

मधुलिका अपने बेटे के मुंह से दर्द भरी चींख सुनकर डर गई थी और तेजी से उसके पास आई और बोली:"

" क्या हुआ मोहित ? तुम ठीक तो हो मेरे बच्चे ?

मोहित अपनी मम्मी को सामने पाकर बुरी तरह से डर गया और पसीने की बूंदे उसके माथे पर छलक आई और मोहित जल्दी से हकलाते हुए बोला:"

" ठीक हु मम्मी। वो मेरा मेरे पैर बाल्टी से टकरा गया था।

मधुलिका आगे बढ़ी और बोली:"

" तुम्हे देखों ना कितना पसीना आ गया दर्द की वजह से, देख कर क्यों नही चलते तुम ?

मधुलिका ने अपनी साड़ी का पल्लू लिया और अपने बेटे के चेहरे पर से पसीना साफ करने लगी। मोहित किसी मूर्ति की तरह खड़ा हुआ था। मधुलिका ने उसका चेहरा साफ किया और बोली:"

" जाओ अब नहा लो तुम। आगे से ध्यान रखना अपना। छोटे बच्चे नही हो तुम अब को ऐसे चीज़ों से टकराते रहते हो।

मधुलिका ने उसे प्यार के साथ साथ हल्की सी डांट भी लगा दी और मोहित ने बिना कहे हां में अपना सिर हिला दिया और अंदर नहाने के लिए घुस गया । मोहित ने अपना दरवाजा बंद किया और चैन की सांस ली और नहाने लगा। मधुलिका फिर से खाना बनाने में लग गई। थोड़ी देर बाद मोहित नहाकर आ गया और राकेश भी आज ऑफिस से जल्दी ही आ गया था। मधुलिका को अच्छा लगा कि कल उसकी शादी की सालगिरह हैं इसलिए शायद उसका पति जल्दी आ गया।

थोड़ी देर बाद सारा परिवार एक साथ डिनर कर रहा था और मोहित अपनी गर्दन नीचे किए हुए चुपचाप खाना खा रहा था वही मधुलिका की हालत भी इससे कही ज्यादा अलग नही थी।

राकेश:" क्या हुआ सब ठीक तो हैं ? आज बड़ी शांति हैं घर में ?

मधुलिका और मोहित की नजरे एक साथ उठी और एक दूसरे को तरफ देखा और मधुलिका बोली:"

" हान सब ठीक हैं क्यों क्या हुआ ?

राकेश:" मैंने तो बस ऐसे ही पूछ लिया क्योंकि आज कोई कुछ बात ही नही कर रहा था।

इसके बाद सभी ने अपना खाना खाया और राकेश अपनी सिगरेट निकाल कर छत पर चला गया और मोहित तो कबसे मौके का इंतजार का रहा था इसलिए वो भी आराम से उठा और अपने कमरे में चला गया।

मधुलिका ने जब से नेहा की पेंटी के पास टैटू देखने के बाद उसकी चूत की हालत देखी थी तबसे वो बेहद बेचैन थी। कल उसकी शादी की सालगिरह थी और ये सोचकर उसकी उत्तेजना और भी बढ़ रही थी। वो आज अपने हुस्न का जादू अपने पति पर चलाने के लिए सोच रही थी। रात के करीब 10 बज गए थे और मधुलिका ने अपने कपड़े बदल लिए एक हल्के गुलाबी रंग की बेहद खूबसूरत नाइटी पहन ली थी। ये उसकी एक पुरानी नाइटी थी जो कि उसे पूरी तरह से फंस कर आ रही थी। ये उसने कुछ साल पहले थी और अभी तक उसका थोड़ा वजन भी बढ़ गया था। इसने सिर्फ कंधो पर बांधने के लिए दो पतली सी तनिया थी और उसके दोनो कंधे पूरे नंगे नजर आ रहे थे। उसकी भारी भरकम चूंचियां एक कामुक लचक लिए आधी बाहर छलक रही थी। उसके दोनो हाथो में रंग की खूबसूरत चूड़ियां बेहद खूबसूरत लग रही थी। रात के समय हमेशा वो अपने काले बालो को खुला रखती थी जो कि उसके खबूसरत कंधो पर फैले हुए थे। उसने अपने होंठो को गहरे लाल रंग की लिपिस्टिक से सजाया और उसके होंठ बेहद आकर्षक लग रहे थे। मधुलिका बिस्तर पर पहुंच गई और अपने पति के पास उससे सट कर लेट गई। राकेश आज फिर से बेइज्जत नही होना चाहता था इसलिए उसने अपनी आंखे बंद कर ली। मधुलिका ने उसके माथे को सहलाया और बोली:"

" बड़ी जल्दी सो गए आज आप? देखिए ना एक बार मैं कैसी लग रही हु ?

राकेश ने जान बूझकर अपने मुंह से खर्राटे निकालने शुरू कर दिए और मधुलिका ने अपना हाथ उसके लंड की तरफ बढ़ा दिया तो राकेश ने गुस्से से अपनी आंखे खोल दी और बोला:"

" क्यों परेशान कर रही हो? सोने दो ना मुझे बड़ी जोर से नींद लगी है। सुबह जल्दी उठना होता है।

मधुलिका ने उसकी तरफ गुस्से से देखा और कुछ नही कहा तो राकेश ने फिर से अपनी आंखे बंद कर ली और सोने की कोशिश करने लगा।

मधुलिका को समझ नही आ रहा था कि ये उसे कैसा अजीब प्राणी मिल गया है। तभी उसे याद आया कि उसने आज अपने बेटे को दूध तो दिया ही नहीं हैं। क्या मुझे उसके पास जाना चाहिए खासतौर से जो आज दिन में हुआ उसके बाद। मधुलिका के अंदर एक बार फिर से विचारो की जंग छिड़ गई है और सोचने लगी कि अपने बेटे से कहीं ज्यादा तो उसकी गलती हैं क्योंकि मोहित ने तो उसे देखा ही नहीं था कि ये मेरी मम्मी हैं जबकि मैं जानती थी कि वो मेरा बेटा है। इसलिए मुझे पहले ही उसे मना कर देना चाहिए था। लेकिन मेरी टैटू की सारी जानकारी उसके पास थी मैं चाह कर भी उसे मना नही कर सकती थी क्योंकि इससे मेरा राज खुल जाना था।

लेकिन मधुलिका कुछ भी हो वो तेरा बेटा हैं तो तुझे एक मां मां फर्ज तो निभाना ही पड़ेगा। जो कुछ हुआ वो अनजाने में हुआ इसके लिए उसका कोई दोष नहीं है। आखिर कार मधुलिका का दिल एक बार फिर से उसके दिमाग से जीत और मधुलिका बिना इस बात की परवाह किए कि वो किस हालत में किचन की तरफ चल पड़ी। उसने दूध गर्म किया और एक ग्लास में लेकर अपने बेटे के रूम में पहुंच गई।
मोहित के कमरे में इस समय सिर्फ एक गुलाबी रंग का हल्की रोशनी वाला बल्ब जला हुआ था और अपनी मां को इस हालत में देखकर मोहित की आंखे फटी की फटी रह गईं। दोनो कंधे बिलकुल नंगे जिन पर बिखरे हुए काले बाल, लाल रंग की लिपिस्टिक से रंगे हुए पतले पतले रसीले होंठ, और उसकी गर्दन पर बना हुआ खूबसूरत टैटू, उसकी बड़ी बड़ी नारियल के जैसी चूचियां जो आधी से ज्यादा बाहर झांक रही थी। दूध का ग्लास ज्यादा गर्म था इसलिए मधुलिका ने उसे एक टेबल पर रख दिया और हल्की सी स्माइल के साथ अपने बेटे की तरफ देखा।


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मोहित को समझ में नहीं आ रहा रहा था कि क्या देखे और क्या नहीं। मधुलिका उसके करीब आ गई और बोली:"

" आज तुमने मुझे दूध के लिए क्यों नही बोला ?

मोहित कुछ बोलने की हालत में ही कहां था। वो तो बस अपनी मम्मी को देख कर सोच रहा रहा था कि उसकी मम्मी सच में कितनी खूबसूरत हैं। मधुलिका को लगा और उसका बेटा शेयर शर्मा रहा हैं इसलिए जवाब नही दे रहा तो मधुलिका उसके पास बैठ गई और बोली:"

" देखो बेटे। आज दिन में जो कुछ भी हुआ वो सब अनजाने में हुआ। उसमे किसी की कोई गलती नहीं है। इसलिए उस बात को हमे दोनो को एक बुरा सपना समझ कर भूल जाना चाहिए।

मोहित ने अपनी मां की बाते सुनकर पहली बार उससे आंखे मिलाई और बोला:"

" मम्मी मुझे तो सपने में भी अंदाजा नाही था आप वहां सकती हो।

मधुलिका:" बेटा बस मेरा भी मन किया टैटू बनवाने के लिए बस इसलिए पहुंच गई थी। अरे बातो बातो में दूध ठंडा हो जायेगा।

इतना कहकर मधुलिका उठी और उसने दूध का ग्लास अपने बेटे को पकड़ा दिया और फिर से उसके पास बैठ गई। मोहित दूध पीते हुए बीच बीच में ना चाहते हुए भी अपनी मां की चुचियों को देख रहा था। मधुलिका आराम से बैठी हुई कुछ सोच रही थी और मोहित सोच रहा था कि उसकी मां की चूचियां सच में कयामत हैं कयामत। कुछ घंटे पहले ही उसकी ही दांई चूची पूरी नंगी उसके हाथ में थी । उफ्फ कैसा आनंदायक एहसास था। मधुलिका ने अपनी नजरे उपर करी तो उसने देखा कि उसका बेटा उसकी चुचियों के उभार को देख रहा था तो उसे हल्की सी शर्म महसूस हुई और मुंह नीचे करते हुए बोली:"

" अच्छा एक बात बताओ आज तक कितने औरतों के टैटू बना चुके हो ?

मोहित ने दूध की एक घूंट भरी और बोला:"

" मम्मी याद नही रहता। लेकिन कम से कम रोज आठ से दस के तो बन ही जाते है।

मधुलिका उत्सुक सी टैटू के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए बोली:"

:" अच्छा तो आज कल किस तरह के टैटू ज्यादा चल रहे हैं बेटा ?

मोहित भी अपना मा के इस तरह अच्छे से मधुर व्यवहार से बिलकुल नॉर्मल हो गया और बोला:"

" मम्मी आज कल वैसे तो सबसे ज्यादा औरते अपनी गर्दन, और कमर पर ही टैटू बनवाने के लिए आती है। और कुछ औरते अपने...

इतना कहकर मोहित चुप हो गया क्योंकि इससे आगे बोल पाने की हिम्मत उसमे नही थी। मधुलिका ने अपने बेटे को हिम्मत देने के लिए थोड़ा आगे को झुककर अपने बेटे का हाथ पकड़ लिए जिससे झुकने से उसकी चूचियां एक पल के लिए बाहर को छलक पड़ी और बोली:"

" कुछ औरते अपने क्या मोहित ? बताओ ना बीच में ही क्यों रुक गए ?

मोहित उसकी चूचियां देखकर हल्का सा बहक गया और हिम्मत करते हुए बोला:"

" वो मम्मी कुछ औरते वही सब टैटू उस जगह बनवाने आती है जहां आप बनवाने आई थी।

इतना कहकर मोहित ने मधुलिका की तरफ देखा और मधुलिका उसका हाथ हल्के से दबाते हुए धीरे से बोली:"

" फिर तो तू खूब मजे करता होगा मोहित रोज।

मोहित:" नही मम्मी आपकी कसम। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। मैं कभी नही बहका। आज ऐसा पहली बार हुआ कि मैं अपने होश खो बैठा।

मधुलिका को उसकी बातो में मजा आने लगा और बोली:"

" क्यों ऐसा क्या हो गया था आज तुझे ?

मोहित कुछ पल के लिए शांत रहा तो मधुलिका ने उसे बोलने का इशारा किया तो बोला:"

" मम्मी अब क्या बताऊं ? आप बुरा मान जाओगी।

मधुलिका:" नही तुम बोलो ना जो भी बात है मैं भला क्यों तुम्हारा बुरा मानने लगी ?

मोहित:" मम्मी आज तक मैंने किसी का इतना कसा हुआ और अच्छा आकर्षक शरीर नही देखा। सच में आप बेहद खूबसूरत हैं।

मोहित ने कहते हुए दूध का खाली ग्लास एक तरफ रख दिया। मधुलिका अपनी तारीफ सुनकर अंदर ही अंदर खुश हो गई और बोली:"

" बस बस, ज्यादा मस्का न लगा। चल अब तूने दूध पी लिया तो मैं चलती हु।

इतना कहकर मधुलिका ने दूध का ग्लास उठाया और बाहर की तरफ चल पड़ी।

मोहित को अपनी मां के साथ बाते करना अच्छा लग रहा था इसलिए बोला:"

" मम्मी बैठो न थोड़ी देर अब बात करते हैं। आओ ना प्लीज। मैं कह रहा था की आपकी टैटू की...

मधुलिका ने गेट के पास पहुंच कर उसे स्माइल दी और उसकी बात को बीच में ही काटते हुए बोली:"

" बस बेटा बस अब तुम आराम करो। वैसे भी खूबसूरत लोगो के ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए रात में समझे। कुछ नही अब टैटू टैटू समझे तुम।

इतना कहकर मधुलिका बाहर निकल गई और मोहित पीछे से मम्मी मम्मी करता रह गया। मधुलिका ने ग्लास किचन में रखा और अपने कमरे में चल पड़ी। अपने बेटे के साथ बात करके अब काफी बेचैनी महसूस कर रही थी। उसने राकेश की तरफ देखा जो गहरी नींद में उल्टा सोया हुआ पड़ा था।

मधुलिका आराम से बेड पर लेट गई और उसकी सांसे आज अपने आप ही तेज हो रही थी। उसके दोनो हाथ अपने आप में उसकी चुचियों पर पहुंच गए तो उसके मुंह से आह निकल पड़ी। कितनी गोल गोल और ठोस हैं उसकी चूंचियां।

मधुलिका की आंखे लाल होने लगी उसने अपनी नाइटी को उतार कर फेंक दिया और अपनी गोल गोल चूचियां हाथ में भरकर मसलने लगी। लेकिन लेकिन हाथ में उसकी आधी ही चूची आ पा रही थी। मधुलिका को ना चाहते हुए भी वो पल याद आ गया जब उसकी एक चूची उसके बेटे के हाथ में पूरी बिलकुल पूरी की पूरी समा गई थी और मधु पागल सी हो गई और अपनी जांघो को मसलने लगी। मधुलिका जोश में आ गई और जोर जोर से अपनी चुचियों को मसलने लगी।

मधुलिका बिलकुल पूरी नंगी हुई बेड पर तड़प रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करू। उसने बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू किया और अपनी गर्म शांत करने के लिए फिर से नहाने का सोचा और नंगी ही उठकर कमरे से बाहर की तरफ चल पड़ी।

बाहर पूरा अंधेरा था और बस किचन से ही हल्की सी नाम के लिए रोशनी आ रही थी जिससे बस हल्की हल्की सी धुंधली धुंधली सी तस्वीर दिख रही थी। मधुलिका इससे पहले कि और आगे बढ़ती बाथरूम की तरफ उसे अपने बेटे आवाज सुनाई दी

" मम्मी एक मिनट रुको तो। मैं आपको ही देने के लिए क्रीम लेकर आ रहा था। टैटू पर लगा लेना अपनी गर्दन पर ताकि कोई जलन या सूजन ना हो आपको।

मधुलिका को काटो तो खून नहीं, मधुलिका पूरी नंगी अपने बेटे से कुछ ही दूरी पर खड़ी हुई थी। मधुलिका का पूरा बदन कांप उठा और उसकी सांसे तेज होने लगी। मोहित धीरे धीरे हल्के कदमों से चलते हुए उसके पास पहुंच गया और मधुलिका के बदन में सिहरन सी दौड़ गई। डर और शर्म के मारे उसका गाल सूख गया और सांसे बहुत तेज हो गई। उसकी चूचियां फिर से उछल कूद करने लगी और मधुलिका के मुंह से आवाज नहीं निकल कर रही थी और न ही इसके पैर आगे की तरफ बढ़ रहे थे। मोहित अब ठीक उसके सामने खड़ा हुआ था और बोला:"

" लो मम्मी ये ट्यूब रख लो, सोने से पहले इसकी गर्दन पर मालिश कर लेना।

इतना कहकर उसने अपना हाथ आगे बढाया तो अंधेरे में उसका हाथ मधुलिका के कंधे से जा टकराया और मधुलिका मचल उठी। उसे लगा कि मानो उसे 440 वोल्ट का करंट लगा हो।

मोहित:" ओह मम्मी, गलत से आपके कंधे पर गया हाथ। एक काम करता हु मैं ही देखा लेता हु सूजन तो नही आई है।

इतना कहकर मोहित अपनी मां के पीछे गया और धीरे से उसके कंधे पर फिर से हाथ टिका दिया। मधुलिका तो कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं थी। ना ही उसका शरीर उसका साथ दे रहा था और न ही उसका दिमाग। वो तो मानो पत्थर की मूर्ति बनकर रह गई थी। मोहित उसके कंधे को छूते हुए उसकी गर्दन पर हाथ के जाने लगा और बड़ी हैरानी हुई थी उसकी मां के कंधे पर नाइटी की तनी नही थी। है भगवान तो क्या मेरी मां इस समय नंगी है। ये मन में विचार आते ही मोहित ने बहक सा गया और उसने अपने हाथ की को बहुत ही उत्तेजक अंदाज में अपनी मां की गर्दन पर फिराया मानो सूजन महसूस करने का प्रयास कर रहा हो। मधुलिका की सांसे पूरी तरह से उखड़ गई क्योंकि अपने बेटे के कामुक हाथो की छुअन उसके जिस्म में मस्ती भरती जा रही थी और मधुलिका कांपती हुई बोली:"

" आह मोहित थोड़ी जल्दी चेक कर ना बेटा, मुझे नहाने जाना हैं और रात भी काफी हो गई है।

मोहित अपनी मम्मी की बात सुनकर थोड़ा सा और उसके करीब होकर हो गया जिससे उसकी गर्म गर्म सांसे अब मधुलिका की गर्दन पर पड़ रही थी जो मधुलिका के लिए आग ने घी का काम कर रही थी। मोहित ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और हथेली की उसके कंधे पर टिका के हाथ की उंगलियों से थोड़ा सा जोर लगाते हुए टैटू पर घुमाया तो मधुलिका उसकी उंगलियों की कठोरता महसूस करके तड़प उठी और वो पल को हाथ करके मदहोश हो गई जब यही कठोर हथेली उसकी चूची को थामे हुई थी। मोहित ने एक बार फिर से अपनी एक उंगली को उसके टैटू पर जोर से रगड़ा तो मधुलिका फिर से कांप उठी और मोहित धीरे से बोला:"

" मम्मी ज्यादा सूजन तो नही लग रही क्योंकि आपकी स्किन बहुत ही चिकनी और मुलायम हैं। इसलिए ज्यादा असर नहीं हुआ।
मैं क्रीम फिर भी लगा देता हूं ताकि कोई दिक्कत ना हो।

मधुलिका अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और कुछ नही बोली। अंधेरा तो था लेकिन पूरे घर की लाइट चली गई और जो परछाई सी दिख रही थी वो भी अब बंद हो गई जिससे मोहित हल्का सा निराश हुआ। मोहित ने ट्यूब को खोल दिया और धीरे से उसके बिलकुल करीब आ गया और सांसे अब मधुलिका के कान से टकरा रही थी और बोला:"

" वैसे आपको ये टैटू कैसा लगा मम्मी ?

इतना कहकर उसने मधुलिका की गर्दन पर ट्यूब लगानी शुरू कर दी। मोहित को गर्म गर्म सांसे मधुलिका को बेहद उत्तेजित कर रही थी इसलिए तो एक कदम आगे बढ़ गई और मोहित ने अपनी एक अंगुली को उसकी गर्दन पर क्रीम लगाने के बहाने काफी जोर से दबाया तो मधुलिका के मुंह से आह निकलते निकलते बची। मोहित फिर से हिम्मत करके थोड़ा सा आगे हो गया और उसकी गर्म सांसे फिर से मधुलिका की गर्दन पर पड़ी और मोहित ने क्रीम लगाने के बहाने उसके कंधे में अपने हल्के से नाखून गड़ा दिए मधुलिका दो कदम आगे बढ़ गई और इस बार मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी और सिसकी:"

" आउच मोहित। टैटू तो तूने बहुत अच्छा बनाया है थोड़ा प्यार से कर और जल्दी कर ना तू। मुझे दिक्कत हो रही है।

मोहित फिर से उसके पीछे खिसक आया और उसके कंधो को अपनी हथेली में भर लिया और गर्दन पर फिर से गर्म सांसे छोड़ते हुए उसके टैटू को जोर से रगड़ दिया। मधुलिका ने बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकी रोकी क्योंकि उसे अपने बेटे के कठोर हाथ काफी आनंद प्रदान कर रहे थे और उसकी तारीफ करते हुए बोली:"

" आह मोहित बेटे, क्या खाते हो तुम, कितने कठोर हाथ है तेरे बिलकुल पत्थर जैसे।

मोहित अपनी मां की बाते सुनकर थोड़ा सा और उत्तेजित हो गया और उसके कंधे पर हथेली का थोड़ा जोर लगाया तो इस बार मधुलिका तड़प सी उठी और उसकी गर्दन पीछे को झुक गई और मोहित के होंठ उसकी गर्दन पर आ लगे। अपने बेटे के गर्म गर्म होंठ अपनी गर्दन पर लगते ही मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी और उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने वासना में सुलगते हुए अपने दोनो हाथों में अपनी चुचियों को भर लिया। तभी जैसे कमाल हो गया और लाइट आ गई। मधुलिका आगे खिसक जाने से किचन के थोड़ा पास पहुंच गई थी और जिससे मोहित को उसकी परछाई पहले के मुकाबले थोड़ा अच्छे से दिख रही थी। मोहित ने जैसे ही अपनी मम्मी की गोल गोल चूचियों को उसके हाथो मे धुंधली सी देखा तो उसका लन्ड अकड़ते हुए खड़ा हो गया। मधुलिका इस समय अपनी आंखे बंद किए पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी चूची मसल रही थी। मोहित कम से कम एक बार उसकी नंगी चूचियों को देखना चाहता था। बिलकुल नंगी, पूरी तरह से आजाद हवा में सिर उठाए हुए। मधुलिका इस समय पूरी गर्म हो गई थी और क्रीम लगाते ही सूख रही थी तो मोहित के दिमाग में एक सेक्सी आइडिया आया और थोड़ा सा आगे को हुआ और बिलकुल उससे सट गया और उसके कान से अपनी जीभ बस आधे की दूरी पर रखते हुए कामुक आवाज में बोला:"

" मम्मी आपकी स्किन टैटू बनवाने से हल्की सी कठोर हो गई है। उपर से आप इतनी ज्यादा गर्म हो कि क्रीम लगाते ही सूख रही है मम्मी। ऐसे तो आपको सूजन पड़ जायेगी।

मधुलिका अपने आपे में नहीं थी और मचलते हुए सिसकी:"

" आह बेटा सूजन से तो मेरी कोमल त्वचा खराब हो जायेगी, आह ठीक कर से इसे बेटा।



मोहित ने अपनी जीभ को बाहर निकाला और अपनी मम्मी की गर्दन पर बने हुए टैटू पर फिरा दिया ।
मधुलिका अपनी बेटी की गर्म जीभ को अपनी गर्दन पर महसूस करते ही तड़प उठी और उसके मुंह से एक जोरदार सिसकी निकली जिसे सुनकर राकेश की नींद टूट गई और वो अंदर से ही चिल्लाया

" क्या हुआ मधुलिका तुम ठीक तो हो?

राकेश की आवाज सुनते ही दोनो की हालत पतली हो गई और मोहित ने अपन मम्मी को छोड़ा अपने कमरे में भागता चल गया। वहीं मधुलिका भी होश में आई और बोली:"

" कुछ नही नहाने जा रही थी कि पैर टेबल से टकरा गया।

उसके बाद मधुलिका नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई।
 
अपडेट नंबर 7

मधुलिका बाथरूम के अंदर घुस गई और उसने चैन की सांस ली। उसकी सांसे अभी तक उसके काबू में नहीं थी जिससे उसकी चुचियों में कंपन अभी भी हो रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वो अपने बेटे के साथ इस बार फिर से बहक गई थी। पिछली बार जो हुआ वो अचानक से हुआ हादसा था लेकिन इस बार सब उसकी मर्जी से हुआ था और कैसे कठोर हाथ से वो मेरे कंधे और गर्दन की मालिश कर रहा था बल्कि कितनी कठोरता से सहला रहा था।

मधु ने अपने हाथ को अपने कंधे पर रख कर सहलाया तो इसे अजीब से सुकून की अनुभूति हुई लेकिन उसके बेटे के हाथो की बात ही और थी। मधुलिका का बदन इस समय कामाग्नि में बुरी तरह से जल रहा था और उसने एक पानी का डिब्बा लिया और अपने डालने लगी ताकि कुछ राहत मिल सके लेकिन उसका जिस्म आज अपने पीते उफान पर था और पानी से उसका जिस्म और गर्म होता जा रहा था। मधुलिका नहाती रही लेकिन कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था। मधुलिका को अपने जिस्म पर पानी डालते हुए आधे घंटे से ज्यादा हो गया था इसलिए वो उसने कमरे मे जाना का फैसला किया। मधुलिका एक बार फिर से बिलकुल नंगी ही बाहर आ गई और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी। हॉल में अभी भी पहले जैसा ही अंधेरा था बस किचन से बहुत हल्की हल्की लाइट आ रही थी। मधुलिका हॉल में खड़ी हो गई और उसे याद आया कि यहीं उसके बेटे ने उसे एक ट्यूब दी थी टैटू पर लगाने के लिए जो यहीं कहीं गिर गई थी। मधुलिका ट्यूब देखने लगी लेकिन उसे कहीं ट्यूब नही मिल रही थी। काफी देर ढूंढने के बाद भी उसे ट्यूब नही मिली तो उसके मन में विचार आया कि क्या वो ट्यूब जल्दी में मोहित अपने साथ तो नही ले गया। ये विचार मन में आते ही मधुलिका का बदन कांप उठा क्योंकि टैटू की मालिश के लिए क्या मुझे फिर से अपने बेटे से ट्यूब लेनी चाहिए।

मधुलिका की समझ में नही आ रहा था कि क्या करे क्योंकि वो एक बार फिर से बहकना नही चाहती थी लेकिन उसका जिस्म उसका साथ नहीं दे रहा था। मधुलिका की सांसे एक बार फिर से तेज होने लगी और वो धीरे से अपने रूम की तरफ बढ़ गई। कमरे के बाहर से ही उसने देखा कि राकेश उल्टा पड़ा हुआ गहरी नींद में सो रहा था और उसके जोर जोर से खर्राटे निकल रहे थे। मधुलिका का पूरा जिस्म कांप रहा था और आंखे लाल सुर्ख हो गई थी। अपने पति को गहरी नींद में सोते हुए देखकर मधुलिका की आंखे चमक उठी और उसने धीरे से पहले पर्दा गिराया और फिर दरवाजे को बंद कर दिया। मधुलिका एक बार फिर से भूल गई कि वो पूरी तरह से नंगी हैं। मधुलिका फिर से हाल में आ गई और चक्कर काटने लगी। वो अपने बेटे से ट्यूब लेना चाह रही थी लेकिन उसका गेट खटखटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।मधुलिका ने हिम्मत करके सूखे हुए को किसी तरह अपने थूक से गीला किया और धीरे धीरे दबे हुए अपने बेटे के कमरे की तरफ चल पड़ी। मधुलिका के पैर जैसे अपने आप उठते जा रहे थे और वो उसके दरवाजे के ठीक सामने पहुंच गई। मधुलिका ने अपना कांपता हुआ हाथ उठाया और धीरे से हिम्मत करके दरवाजे पर मारा और मधुलिका की सांसे एक बार फिर से तेज हो गई। मोहित अभी तक अपनी मां के साथ हुए उस हसीन हादसे को बैठा हुआ सोच रहा था और कमरे पर दस्तक सुनकर उसका दिल धड़क उठा। है भगवान अब कौन आ गया ? कहीं मम्मी ने पापा को तो नही बता दिया। मोहित डर के मारे कांप उठा और उसकी समझ नही आ रहा था कि क्या करे तभी फिर से उसके दरवाजे पर दस्तक हुई तो मोहित के पसीने छूट गए और वो कांपता हुआ दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा। मोहित ने हिम्मत करके भगवान को याद करते हुए दरवाजा खोल दिया तो उसे सामने अंधेरे में एक साया नजर आया तो मोहित समझ गया कि उसे उसकी मम्मी मधुलिका ही हैं। अपनी मम्मी को फिर से अपने कमरे के गेट पर आधी रात देख कर मोहित का दिल धड़क उठा और मोहित बाहर आ गया।

अपने बेटे को बाहर निकलते हुए देख कर मधुलिका की सांसे फिर से और तेज हो गई और उसके समूचे बदन में उत्तेजना की एक लहर सी दौड़ गई। मोहित एक बार फिर से उसके सामने खड़ा और धीरे से कांपते हुए शब्दों में बोला:"

" क्या हुआ मम्मी ? आप इतनी रात गए सब ठीक तो हैं ?

मधुलिका की जुबान को जैसे लकवा सा मार गया लेकिन फिर भी अपने जिस्म की सारी हिम्मत समेटकर बहुत ही धीमी सी मधुर आवाज में बोली:"

" वो बेटा टैटू वाली क्रीम नही मिली मुझे, शायद कहीं गिर गई होंगी अंधेरे में, कहीं सूजन आ गई तो दिक्कत होगी!

मोहित का दिल खुशी के मारे झूम उठा और अपनी जेब से उसने ट्यूब निकाली और उसके हाथ की तरफ बढ़ा दी। मधुलिका ने अपना कांपता हुआ हाथ आगे बढ़ा दिया और मोहित ने उसका हाथ थाम लिया। ट्यूब मधुलिका के हाथ में आ गई थी लेकिन ना तो मोहित ने उसका हाथ छोड़ा और न ही उसने छुटाने का कोई प्रयास किया। मधुलिका मोहित के हाथ की कठोरता महसूस करके फिर से उत्तेजित होने लगी और मधुलिका ने बड़ी मुश्किल से अपनी सांसे थामे खड़ी रही और फिर धीरे से बोली:"

" रात बहुत हो गई है मोहित, अभी मैं चलती हु।

इतना कहकर मधुलिका अपना हाथ छुड़ाने लगी तो मोहित धीरे से बोला:"

" मम्मी कहीं आप ठीक से क्रीम न लगा पाई तो दिक्कत होगी फिर, स्किन खराब हो सकती है।

मधुलिका तो कब से अपने बेटे के मुंह से यही सुनने के लिए तड़प रही थी। उसने बिना कुछ ट्यूब को वापिस मोहित के हाथ में थमा दिया और उसकी तरफ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई। एक तरह से ये उसके लिए खुला आमंत्रण था। मोहित की भी सांसे आने वाले पलो के बारे में सोचकर तेज हो गई और उसने ट्यूब का ढक्कन खोला और थोड़ी सी क्रीम फिर से अपनी उंगलियों पर लगा ली और जैसे ही उसने मधुलिका की गर्दन को छुआ तो कमरा का गेट खुला और राकेश बाहर निकलते हुए दिखा जो मधुलिका को आवाज लगा रहा था।

निराश मोहित एक बार फिर से धीरे से अंधेरे का फायदा उठाकर अपने कमरे में घुस गया और मधुलिका का तो मूड ही खराब हो गया और अपने पति को मन ही मन गालियां देने लगी और ऐसे चलने लगी मानो हॉल में टहल रही हो।

चलती हुई वो राकेश के सामने पहुंची तो राकेश बोला:"

" अरे तुम्हे ढूंढ रहा था। इतनी रात को क्यों टहल रही हो हॉल में तुम ?

मधुलिका गुस्से भरे भाव से अपने शब्दो को चबाकर बोली:"

" नींद नही आ रही थी। इसलिए घूम रही हूं।

राकेश उसके बोलने के अंदाज को देखकर चुप हो गया और बाथरूम की तरफ बढ़ गया। वहीं मधुलिका गुस्से और निराशा से अपने पैरो को पटकती हुई अपने बेडरूम में घुस गई और बेड पर लेटकर सोने का प्रयास करने लगी। सोचते सोचते कब उसकी नींद लग गई उसे कुछ पता ही नही चला।

अगले दिन सुबह रोज की तरह दिनचर्या शुरू हुई और मधुलिका ने नाश्ता तैयार किया और सभी लोग एक साथ बैठकर नाश्ता करने लगे।

मधुलिका:" सुनो ना आज हमारी शादी की सालगिरह हैं। इसलिए आप शाम को ऑफिस से थोड़े जल्दी आ जाना और मैं सोच रही थी कि अपने कुछ रिश्तेदार और दोस्तो को भी बुला लेती हूं।

राकेश ने उसकी तरह देखा और समझ गया कि अगर पार्टी होगी तो बेकार में पैसा खर्च होगा इसलिए बात को घुमाते हुए बोला:"

" देखो मधु एक काम करते हैं दोस्तो और रिश्तेदारों के लिए आप रहने देते हैं। बाद में फिर कभी बुला लेंगे और हां आज मैं और दिन की तरह लेट नही आऊंगा बल्कि समय से पहले ही आ जाऊंगा।

मधुलिका ने कोई बहस करना जरूरी नहीं समझा और और अपने होंठो पर जबरदस्ती स्माइल लाते हुए बोली:"

" अच्छा चलो ठीक हैं। जैसे आपको बेहतर लगे लेकिन आज शाम छह बजे तक जरूर आ जाना। और मोहित बेटा तुम भी आ जाना आज समय से। ज्यादा लेट मत करना समझे।

मोहित:" मम्मी आप बेफिक्र रहे। मैं छह बजे आराम से आ जाऊंगा और एक काम करूंगा आज शाम के लिए खाना भी लेते आऊंगा।

मधुलिका अपने बेटे की बात सुनकर खुश हुई और राकेश इस बात से खुश था कि चलो मधु मान गई नही तो बेकार में ही पैसा खर्च हो जाता।

उसके बाद सभी लोग अपने काम पर चले और मधुलिका घर के काम में लग गई। दोपहर का समय था और मधुलिका लेती हुई आराम कर रही थी कि उसका फोन बज उठा। नेहा का फोन था तो मधुलिका ने खुशी खुशी उठा लिया और बोली:"

" कैसी हो नेहा मैडम ?

नेहा:" मैं तो अच्छी हु तुम बताओ कैसी हो क्या चल रहा हैं ?

मधुलिका:" बस जी सब ठीक हैं। क्या कर रही थी ?

नेहा:" कुछ नही घर के काम खत्म किए तो सोचा तुझसे बात कर लू। अच्छा बता टैटू बनवा लिया क्या तूने ?

मधुलिका उसकी बात सुनकर स्माइल करते हुए बोली:"

" अभी तो मैं बनवाया। यार कल शाम ही तो मिले थे हम उसके बाद से टाइम ही कहां मिला ?

नेहा:" बस बस बहाने मत बना। इतना भी समय नहीं लगता। चल तेरी मर्जी। अरे मै तो बातो बातो में भूल ही गई कि आज तो तेरी शादी की सालगिरह हैं। तुम दोनो को बहुत बहुत बधाई।

मधुलिका खुश हो गई और बोली:"

" थैंक्स नेहा। वैसे कमाल है तुझे याद था।

नेहा:" अरे एक तुम तो मेरी सबसे अच्छी और प्यारी सहेली हो। मुझे याद नहीं रहेगा तो किसे याद रहेगा।

मधुलिका:" हान वो तो तू हैं और हमेशा रहेगी मेरी जान।

नेहा:" अच्छा तो मेरी एक बात सुन, आज के दिन ही तू अपने सभी टैटू बनवा ले। तेरे पति को ये तेरी तरफ से सालगिरह का तोहफा होगा।

मधुलिका उसकी बात से सहमत हुई और बोली:"

" हान यार। तेरी बात में दम है चल फिर आज शाम को तक बनवा लुंगी।

नेहा:" अच्छा चल मैं तुझे बाद में कॉल करती हु। मुझे बाहर जाना हैं थोड़ा काम हैं।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया और मधुलिका एक बार फिर से सोच में पड़ गई कि टैटू किस से बनवाया जाए। अपने बेटे से वो नही बनवाना चाहती थी और उसने फिर एक के बाद एक सभी मुंबई के टैटू ऑफिस में फोन किया लेकिन उसे कहीं भी किसी भी कीमत पर आज के लिए बुकिंग नहीं मिली। मधुलिका को समझ में नही आ रहा था कि क्या करे क्योंकि उसके सामने अब एक ही रास्ता बचा था कि अपने बेटे से टैटू बनवाए लेकिन वो उसके लिए तैयार नहीं थी।

मधुलिका ने सोचा आज नही तो कल टैटू बनवा लूंगी एक दिन में कौन सी मुसीबत आ जायेगी। उसने थोड़ा आराम करने का सोचा और उसके बाद सो गई। करीब दिन बजे के आस पास वो उठी और अपने बेडरूम की सफाई में जुट गई। वो अपने के साथ आज की रात को यादगार बनाना चाहती थी इसलिए उसने सबसे पहले बेडरूम की सफाई करी उसके बाद उसने बहुत ही सुंदर फूलो से सजी हुई सफेद रंग की चादर बेड पर डाल दी। ये सब करते हुए मधुलिका का मन मयूर नृत्य कर रहा था और जिस्म में हल्की हल्की गुदगुदी सी हो रही थी। उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा और उसने अपने बेडरूम के परदे भी बदल लिए और नए परदे लगाने से बेडरूम बेहद खूबसूरत लग रहा था।

सारे काम खत्म करने के बाद उसने ब्यूटी पार्लर जाने का फैसला किया क्योंकि औरत प्राचीन काल से पुरुष को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सौंदर्य का सहारा लेती रही है और मधुलिका भी इसका अपवाद नहीं थी। ब्यूटी पार्लर से करीब पांच बजे के आस पास वो अपने घर पहुंच गई और उसके जिस्म का रोम रोम महक रहा था। लाल रंग के गोल गले के ब्लाउस और गहरे काले रंग की साड़ी वो बला की खूबसूरत लग रही थी। उसके स्टेट किए किए हुए काले लंबे बाल उसके चेहरे के एक तरफ फैले हुए थे जिससे उसकी गर्दन पर बना हुआ टैटू उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहा था। बड़ी बड़ी गहरे काले काजल से सजी आंखे, रस टपकाते हुए पतले कपड़े लिप्स, नंगे खूबसूरत गोरे गोरे चिकने कंधे और उसके लाल सुर्ख ब्लाउस से झांकते हुए उसकी गोल गोल ठोस चुचियों के उभार जिसमे सिर्फ दो बटन लगे हुए थे। उसकी गोल गोल गहरी खूबसूरत नाभि और उसकी गोल गोल गोरी गोरी ढोल की तरह उठी हुई गांड़ पर लिपटी हुई काले रंग की साड़ी सच में बेहद खूबसूरत लग रही थी। माथे पर लगा हुआ सिंदूर और माथे के बीचों बीच में हुई लाल रंग की खूबसूरत बिंदी, गले में पहना हुआ सोने का मंगल सूत्र जो उसकी चूची की गहराइयों के बीफ में गायब हो रहा रहा था। हाथो मे सजी हुई लाल रंग की कांच की खूबसूरत चूड़ियां और पैरों में सजी हुई छन छन करती हुई पायल। मधुलिका सचमुच किसी नई नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी।

मधुलिका ने एक बार खुद को शीशे में देखा और अपने रूप सौंदर्य पर खुद ही मोहित होती चली गई। सच में मधुलिका कुदरत की कारीगरी का नायाब नमूना थी, उसे देख कर ऐसा लग रहा था मानो भगवान ने गलती से इंद्र लोक से कोई अप्सरा ही जमीन पर भेज दी थी।

मधुलिका ने एक बेहद ही मादक तेज गंध वाला कामुक परफ्यूम कमरे में छिड़क दिया क्योंकि उसे परफ्यूम बेहद पसंद था। छह बजने वाले थे और मधुलिका बेचैनी से अपने पति का इंतजार कर रही थी। दरवाजा नॉक हुआ और मधुलिका इसी रूप में दरवाजा खोलने के लिए चली गई। वो पहली ही नज़र में अपने पति को पूरी तरह से मदहोश कर देना चाहती थी। उसकी काले रंग की साड़ी का पल्लू बिलकुल पूरी तरह से पारदर्शी था जिसमे से उसकी चुचियों की गोलाई और गहरी खूबसूरत नाभि नजर आ रही थी। कामुक खूबसूरत गहरी नाभि भी अपने सौंदर्य की अद्भुत अनोखी छटा बिखेर रही थी।

मधुलिका ने धीरे से अपना हाथ आगे बढाया और दरवाजा खोलकर बिना देखे ही अपना चेहरा शर्म के मारे दूसरी तरफ घुमा दिया।



दरवाजे पर उसका पति नही बल्कि बेटा मोहित खड़ा हुआ था और वो अपनी मां के ऐसे रूप सौंदर्य को देखकर हक्का बक्का सा रह गया। मधुलिका का चेहरे दूसरी तरफ था इसलिए उसने पहली बार ध्यान से अपनी मां की लाल रंग के ब्लाउस से झांकती हुई गोल गोल नारियल के आकार की चुचियों का मदहोश करने वाला उभार देखा। अपनी सगी मां की गहरी खूबसूरत नाभि देख कर मोहित अपनी मम्मी की तारीफ लिए बिना ना रह सका

" ओह ओह गॉड। मम्मी आप सच में आज बेहद खूबसूरत लग रही है। लगता है स्वर्ग से साक्षात मेनका उतर आई हैं।

अपने बेटे की आवाज सुनकर मधुलिका को को झटका सा लगा और उसने पलटकर देखा तो गेट पर अपने बेटे को देखकर घबराहट और शर्म के मारे उसके मुंह से निकला

" ओह मोहित तुम।

शर्म के मारे उसके कंधे से साड़ी का पल्लू सरक गया और उसकी आंखे एक फिर से दूसरी तरफ घूम गई।



उफ्फ मधुलिका ने मानो मोहित की जान निकल दी थी। साड़ी का पल्लू गिर जाने से उसकी चुचियों का उभार और गहरी नाभि बिलकुल साफ साफ दिख रहे थे और मोहित ने आज तक ऐसी सुंदरी सपने में भी नहीं देखी थी। उसे एक पहली बार एहसास हो रहा था उसके घर में मा के रूप में कामदेवी रहती है। मधुलिका की नाभि देखकर उसकी जीभ अपने आप बाहर निकल गई मानो उसकी मां की गहरी नाभि को चूमने के लिए बेताब हो। मोहित ने हिम्मत और सब्र से अपनी जीभ को अंदर किया और अपने जेब से एक सुंदर सी हीरे की अंगूठी निकाली और आगे बढ़कर अपनी मां का हाथ पकड़ लिया तो मधुलिका का बदन कांप उठा और बिना कुछ देखे ही बोली

" आह्ह्ह्ह्हह मोहित नही छोड़ो मेरा हाथ। ये सब ठीक नही है। कोई देखा लेगा तो।

मोहित ने हैरानी से अपनी मम्मी की तरफ देखा और अंगूठी पहनाते हुए बोला:"

" क्या ठीक नहीं है मम्मी ? क्या एक बेटे का अपनी मां को शादी की सालगिरह पर गिफ्ट देना ठीक नहीं हैं ?

मधुलिका ने अपने बेटे के हाथ में अंगूठी देखी तो उसे अपन गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और बात को संभालते हुए जल्दी से बोली:"

" अरे वो मैं कुछ और समझी थी। कुछ गलत नहीं है बेटा। लो अच्छे से पहनाओं अंगूठी।

मधुलिका ने अपने हाथ की उंगलियों को पूरा खोल दिया और मोहित ने उसके हाथ में अंगूठी पहना दी और बोला:"

" वैसे आप क्या समझी थी मम्मी ?

मधुलिका को समझ नही आया कि क्या जवाब दे क्योंकि तीर कमान से निकल गया था। मोहित उसके सामने खड़ा हो गया और बोला:"

" मेरी चांद सी खूबसूरत और आकर्षक मम्मी की शादी की सालगिरह की बधाई।

इतना कहकर वो अपनी मम्मी के गले लग गया और फिर से कान में बोला:" मम्मी आपने बताया नही कि आप क्या समझी थी ?

मधुलिका ने प्यार से उसकी कमर पर हल्का सा मारा और बोली:"

" तेरा सिर समझी थी। जा अब जाकर नहा ले और तैयार हो जा। तेरे पापा भी आने वाले होंगे।

मधुलिका के बदन से उठती हुई मादक खुशबू मोहित को पूरी तरह से मदहोश कर रही थी तो उसने मधुलिका को जोर से अपनी बांहों में कस लिया और बोला:"

" मेरी मम्मी दुनिया की सबसे खुबसूरत और अच्छी मम्मी हैं। सच में मम्मी आप आज स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा सी लग रही हो।

मधुलिका उसके हाथो की पकड़ महसूस सिहर उठी और बोली:"

" चल बहुत हो गई तारीफ। अब छोड़ मुझे आज नहा जाकर जल्दी नहीं तो मार खाएगा अब।

मोहित ने अपनी मम्मी को अपनी बांहों से आजाद किया और अंदर घर में घुस गया। थोड़ी देर के बाद वो नहाने के लिए चला गया। करीब 6:30 हो गए और राकेश का कोई पता नहीं था तो मधुलिका ने परेशान होकर उसका नंबर मिलाया तो राकेश ने फोन उठा लिया और बोला:"

" शादी की सालगिरह की बधाई मधु। सॉरी यार मधु मैं एक बिजनेस डील में फंस गया हू और रात को थोड़ा लेट करीब एक बजे तक ही घर पहुंच पाऊंगा। तुम और मोहित खाना खा लेना। अपना ध्यान रखना और मेरा ज्यादा इंतजार मत करना। मधुलिका यार प्लीज मुझे....

मधुलिका ने आगे उसकी बात सुनना जरूरी नहीं समझा और गुस्से से फोन काट लिया। उसका मूड पूरी तरह से खराब हो गया था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। मधुलिका नाराज और परेशान सी हॉल में बैठ गई और अपने बेटे का इंतजार करने लगी। थोड़ी देर के बाद मोहित आ गया और उसने मम्मी को उदास देखा तो समझ गया कि उसके बाप ने फिर से कोई चूतियापा कर दिया है।

मोहित:" क्या हुआ मम्मी ? थोड़ी देर पहले आप का चांद सा रोशन मुस्कुराता हुआ चेहरा क्यों उतरा हुआ नजर आ रहा है ? कहीं पापा ने नाराज तो नही कर दिया ?

मधुलिका के सब्र का बांध टूट गया और गुस्से से बोली:"

" ऐसे भला कौन करता हैं मोहित, मैं कितनी बेचैनी से उनका इंतजार कर रही थी और उन्हें काम से ही फुरसत नहीं है आज के दिन। बोलते हैं कि रात के एक बज जायेगा। भला ये भी क्या बात हुई हैं ?

मोहित: छोड़ो मम्मी उन्हें और आप दिल छोटा मत करो। उनका तो ये हमेशा का काम है, कोई पहली बार थोड़े ही ऐसा किया है।

मधुलिका अपने बेटे की बात सुनकर अंदर से खुश हुई और उसकी नाराजगी शब्द बनकर उसके मुंह से फूटने लगी

" हान बेटा, हर बार का उनका यही काम हैं, बस पैसा पैसा। उनके पास परिवार के लिए कोई समय हैं ही नहीं।

मोहित ने बात को ज्यादा बढ़ाना ठीक नहीं समझा क्यूंकि वो अपनी मम्मी का मूड ज्यादा खराब नही करना चाहता था इसलिए बोला:"

" चलो कोई बात नही। हम दोनों ही तब तक केक काट लेते हैं और खाना खा लेते है। उनका क्या भरोसा आधी रात भी आए या नही आए।

मधुलिका अपने बेटे के रंग में रंगते हुए बोली:"

" हान बेटा बात तो ठीक हैं तुम्हारी। उनकी बात और गधे की लात। शायद उनसे इससे सबक भी मिले कि उनका बिना भी खुशियां मना सकते है।

मधुलिका ने टेबल पर केक रखा और मोहित ने सारी कैंडल एक एक करके जला दी और फिर मधुलिका ने कैंडल बुझा दी और केक काटने लगी तो मोहित अपनी मम्मी को बधाई देने लगा

" मेरी प्यारी मम्मी, दुनिया की सबसे खुबसूरत चांद सी खूबसूरत, प्यारी मम्मी को शादी की सालगिरह की बहुत बहुत बधाई।

मधुलिका ने एक केक का टुकड़ा काटा और अपने बेटे की तरफ बढ़ाते हुए बोली:"

" लो मेरे बेटे। सबसे पहले तुम्ही खाओ अपनी का के हाथ से केक।

मधुलिका ने केक आगे बढ़ाया तो मोहित ने अपने हाथ में पकड़ लिया और मधुलिका के मुंह से सामने करते हुए बोला:"

" सबसे पहले आप खाइए। अपना प्यारा सा मुंह खोलिए मम्मी।

मधुलिका ने मोहित की तरफ उसकी आंखो में देखते हुए अपने लाल सुर्ख रसीले लिप्स को खोल दिया तो मोहित ने केक अपने मम्मी के मुंह के अंदर कर दिया मधुलिका ने केक खा लिया। मधुलिका अपने बेटे के इस व्यवहार से बेहद खुश थी और उसने फिर अपने बेटे को केक खिलाया और मोहित ने खुशी खुशी केक खा लिया।

उसके बाद दोनो मा बेटे के खाना खाया और मोहित अपने कमरे में चला गया जबकि मधुलिका ने घर का थोड़ा बचा हुआ काम खत्म किया। रात के करीब 9 बज गए थे और उसके बाद मधुलिका अपने कमरे में आ गई। कमरे में आते ही मधुलिका बेड पर लेट गई और उसके दिल में टीस सी उठ गई। सच में उसका पति उसकी कोई कदर नही करता है। उसने उदास नजरो से कमरे को देखा कि उसने कितनी मेहनत और उमंगों से कमरे को सजाया था। मधुलिका ने अपनी कमर बेड के सिरहाने से लगा दी और सोच में डूब गई। उसकी खुबसूरत आंखे उदास लग रही और चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी।



कभी वो मायूसी से कमरे में फैली हुई मादक गंध को सूंघती तो कभी खिड़की पर टांगे हुए पर्दो को देखती। कभी तो अपने आपको देखती तो कभी बेड की खूबसूरत चादर पर फैले हुए गुलाब के खुशबूदार फूलो को देखती। मधुलिका को समझ नही आ रहा रहा था कि क्या। उसके बालो की कुछ आवारा लटे झूमती हुई उसके चेहरे पर आ गई तो वो उन्हें अपने हाथो से से पकड़ कर हटाने लगी।



मधुलिका ने अपनी बालो की बहकी हुई लटो को ठीक किया और फिर तो उसकी नजर फिर से एक बार गुलाब की महकती हुई फूलो और पंखुड़ियों पर चली गई तो वो बेड पर लेटती चली गई जिससे उसकी साड़ी उसकी कमर पर से हट गई और उसकी कमर पर बस एक ब्रा की पतली सी स्ट्रिप रह गई थी अब उसके चेहरे के आस पास गुलाब की महकती हुई खुशबू आ रही थी और उसने अपना हाथ फूलो को अपने हाथ में भर लिया और उन्हें देखने लगी तो उसकी सांसों के कारण उसके मुंह से निकली हवा से कुछ गुलाब के फूल की पंखुड़ियां उड़कर उसके चेहरे से टकराई मानो उससे पूछ रही थी हो कि हमारे साथ ये अन्याय क्यों , हम तो तेरे मखमल से कोमल बदन के नीचे बिछकर मसले जाने के लिए कब से तैयार हैं।

मधुलिका ने गुलाब की पंखुड़ियों को हाथो मे भर लिया और उन्हें देखते हुए जोर जोर से अपनी मुट्ठी में मसलने लगी मानो उनकी मसले जाने की इच्छा पूरी कर कर रही हो। गुलाब के फूलो की पंखुड़ियां नाराज सी होकर उसके हाथो से नीचे गिरने लगी मानो उन्हें हाथ से मसले जाना पसंद ना आया हो।





मधुलिका ये सब देख कर बेहद उदास हो गई और सोच में डूब गई कि तभी उसका मोबाइल बज उठा। उसने देखा कि नेहा का फोन था तो उसने उठा लिया और बोली:"

" हान नेहा, कैसी हो ?

नेहा:" अरे अच्छी हु मैडम। मुझे लगा था कि तुम शायद फोन ही नहीं उठाएगी क्योंकि जीजा जी के साथ बिजी होगी।

मधुलिका उदास मन से बोली:"

" अरे यार अभी वो ऑफिस से आए ही नहीं। शायद 12 बजे तक आए। चल तू बता कैसे फोन किया ?

नेहा:" ओह आज भी इतना काम। टैटू तो तूने बनवाया नही होगा मुझे पक्का पता है। चल मैं तो यही कहूंगी कि तुम हो सके तो तक तक टैटू बनवा कर आ जाओ। ये उनके सरप्राइज़ होगा।

मधुलिका:" अच्छा चल देखती हु। अब तो रात भी काफी हो गई हैं अब कहां जाऊंगी।

नेहा:" जब देखो बहाने, कितनी फट्टू हो तुम सच में। मैं तो रात को 11 बजे जाकर टैटू बनवा आई थी समझे। अरे हां बात सुन मेरी एक सहेली ने टैटू बनवाया था लेकिन ठीक से ट्यूब से मालिश नही करी तो उसकी स्किन पर निशान पड़ गए। तुम अपने टैटू की टाइट हाथो से रगड़ रगड़ कर मालिश करती रहना ताकि कोई दिक्कत न हो। अच्छा रखती हु।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया और मधुलिका स्किन खराब होने की बात सुनकर डर गई और अपने ड्राइवर से ट्यूब निकाली और क्रीम हाथ में लेकर मालिश करने लगी। मधुलिका मालिश तो कर रही थी लेकिन उसे सुकून नही मिल रहा रहा था क्योंकि उसके हाथ तो कोमल और मुलायम थे जबकि मालिश कठोर हाथो से होनी चाहिए। कठोर हाथ तो सिर्फ उसके बेटे के ही है। तो क्या मैं अपने बेटे से मालिश कराऊ !! क्या करू फिर। रात भी तो मैं उससे मालिश कराने के लिए तैयार थी। फिर आज ही कराने में क्या दिक्कत हैं, एक काम करती हु उसके रूम में ही चली जाती हु। मधुलिका उठने लगी तो उसे याद आया कि उसका बेडरूम कितना सुंदर लग रहा है तो क्यों न यहीं मालिश करवा लू। अच्छी खुश्बू भी आती रहेगी।
लेकिन कहीं वो फिर से उस दिन की तरह बहक गया तो, उफ्फ कैसे उस दिन टैटू बनाने के लिए उसने मेरी चूची को अपनी हथेली में भर लिया ताकि उछलने से रोक सके। मधुलिका के मन में तभी दूसरा विचार आया कि मैं तो मालिश के लिए ही तो बुला रही हु, कौन सा मुझे टैटू बनवाना हैं उससे। तभी मधुलिका का दिल तेजी से धड़कने लगा और उसकी सोच फिर से बदल गई कि आज नही तो कल तुझे टैटू तो बनवाना ही हैं तो फिर क्यों न आज ही अपने बेटे से टैटू बनवा लू और इतना अच्छा मौका फिर नही मिलेगा, इतना अच्छा सजा महकता हुआ कमरा और सुंदर फूलो से सजा हुआ बेड।

मधुलिका के अंदर विचारो की जंग छिड़ी हुई थी और उसके दिल और दिमाग में एक बहस सी मची थी। मधुलिका क्या तू अपने सगे बेटे से अपनी चूची, गांड़ पर चूत पर टैटू बनवा लेगी, नही नही ये सब ठीक नही है।

मधुलिका का जिस्म और उसका दिल उसका साथ नहीं दे रहा था। मधुलिका ने फिर से सोचा कि एक काम करती हु सिर्फ चूची पर ही टैटू बनवा लेती हूं। लेकिन मुझे अपने आप पर काबू रखना होगा और अपने सीने को उछलने से रोकना होगा नही तो वो उछलने से रोकने लिए फिर से मेरी चूची को अपनी हथेली में भर लेगा। ये सोचते हुए मधुलिका ने अपनी चुचियों की तरह देखा तो उसे अपनी चूचियां हिलती हुई नजर आई तो मधुलिका कांप उठी और उसने फिर से अपनी चुचियों की तरफ देखा जिनके निप्पल अकड़ कर खड़े हो गए थे मानो कह रहे हो कि एक बार तो वो पहले ही पकड़ चुका हैं तो अगर फिर से पकड़ लेगा तो क्या मुसीबत आ जाएंगी और वैसे भी कौन सा किसी को पता चलने वाला हैं। मधुलिका ने अपनी चुचियों को घूरा मानो उन्हें कह रही हो कि आज देखती हूं तुम कैसे मेरे काबू से बाहर जाती हो।

मधुलिका ने बहुत सोच विचार किया लेकिन सही गलत का फैसला नही कर पा रही थी कि तभी बाहर हल्की हल्की बारिश होने लगी जो मधुलिका की सबसे बड़ी कमजोरी थी और अब मधुलिका खुद से ही हार गई और अंततः उसका दिमाग उसके दिल और जिस्म के आगे हार गया। लेकिन उसके अंदर अभी भी इतनी हिम्मत नही थी कि अपने बेटे को बोल सके कि टैटू बनाने वाले समान का बैग भी लेते आना। उसने अंतिम निर्णय कर लिया कि अपने बेटे को मालिश के लिए बुला ही लेती हूं। मधुलिका उठी और उसने कमरे में तेज रोशनी में जल रहे बल्ब को बंद कर दिया और एक हल्का गुलाबी रोशनी वाला नाईट बल्ब जला दिया और उसने अपने जिस्म की सारी हिम्मत समेटकर अपने बेटे को आवाज लगाई

" मोहित बेटा जरा वो रात वाली ट्यूब एक और लेते आना खत्म हो गई हैं।
 
अपडेट नंबर 8

मोहित ने जबसे अपनी मम्मी को सजे हुए देखा था बस उस के बारे में ही सोच रहा था। आराम से बिस्तर पर लेटे हुए मोहित अपनी मम्मी से बात करने का और उनके पास जाने का मौका ढूंढ रहा था और अपनी मम्मी की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर खुशी दौड़ गई। वो तो कबसे तड़प रहा था कि अपनी खूबसूरत मम्मी का जी भरकर दीदार कर करे और उसकी मम्मी ने खुद ही आवाज लगाकर उसका काम आसान कर दिया था। मम्मी ने मुझे ट्यूब के साथ बुलाया है तो इसका मतलब वो मालिश भी करेगी अपनी गर्दन और कंधे की तो अगर मैं थोड़ा सा प्रयास कर करू तो मुझे ही मालिश करने का मौका मिल सकता है। मम्मी की मुलायम और गोरी गोरी त्वचा की छूवन के जादुई एहसास को महसूस करके मोहित एक झटके के साथ खड़ा हुआ और उसने अपने ऑफिस वाला बैग निकाल लिया और सीधे अपनी आंखो में रंगीन ख्वाब लिए अपनी मम्मी के बेडरूम की तरफ चल पड़ा।

मोहित ने धीरे से दरवाजा खोला एक तेज मादक परफ्यूम की गंध ने उसका स्वागत किया और सामने बिस्तर पड़ी हुई अपनी मम्मी को देख कर मोहित की आंखे खुली की खुली रह गई। सफेद रंग की चादर जिस पर गुलाब के फूल बिखरे हुए थे उस पर झुक कर पड़ी हुई उसकी मम्मी की चुचियों का उभार बहुत ही आकर्षक गोलाई लिए अपना जादू बिखेर रहे थे।



मोहित को देखकर मधुलिका उपर की तरफ उठी और उसकी चूचियों के उभार और भी ज्यादा अपना आकार दिखाते हुए सीधे हो गए और मोहित की खुशी का कोई ठिकाना नही था। उसकी मम्मी ऐसे उत्तेजक दृश्य के साथ उसका स्वागत करेगी उसे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी। एक बात तो उसकी समझ में आ गई थी कि अगर उसकी मम्मी को ट्यूब ही चाहिए तो खुद भी मांगने आ सकती थी लेकिन उसने खुद मुझे अपने इस सजे हुए बेडरूम में बुलाया है तो जरूर मम्मी के मन में कुछ चल रहा हैं।

मधुलिका ने अपने बेटे के हाथ में बैग देखा तो उसे याद आया कि ये तो वही बैग हैं जिसमे टैटू बनाने का सामान था। उफ्फ भगवान क्रीम के साथ साथ ये तो टैटू का बैग भी बिना बोले ही ले आया अपने साथ। इसका मतलब ये खुद भी मेरे बदन पर टैटू बनाने के लिए मरा जा रहा।

मोहित ने टैटू का बैग वही एक टेबल पर रख दिया और उसमे से क्रीम निकालने लगा। अभी तक दोनो मे बीच कोई बात नही हुई थी और मधुलिका भी अपनी आंख में उत्तेजना लिए अपने बेटे को देख रही थी और मोहित ने ट्यूब निकाली और मधुलिका की तरफ बढ़ाते हुए बोला:"

"लो मम्मी। आप ट्यूब मांग रहे थे टैटू की मालिश के लिए ।

मधुलिका को निराशा हुई क्योंकि उसे उम्मीद थी कि उसका बेटा खुद से मालिश के लिए बोल देगा लेकिन मोहित चाह रहा था कि पहल उसकी मम्मी खुद अपनी तरफ से करे। मधुलिका के मुंह पर जैसे शर्म का ताला लगा हुआ था लेकिन उसका जिस्म तो आजाद हैं। ये सोचकर मधुलिका दिल ही दिल मुस्कुरा उठी। दोनो जानते थे कि वो एक दूसरे के साथ क्या करना चाहते हैं लेकिन पहल करने से हिचकिचा रहे थे। मधुलिका ने हाथ आगे बढ़ा कर ट्यूब को पकड़ लिया और मोहित को बेड पर बैठने का इशारा किया और खुद अपनी छाती को आगे करते नीचे को पूरी उम्मीद से झुका दिया और गुलाब के फूल उठाते हुए बोली:"

" रुको जरा मैं पहले गुलाब के फूल उठा देती हु।



मधुलिका ने गुलाब के फूल हटाने के बहाने अपनी चुचियों को आधे से ज्यादा नंगा कर दिया और मोहित की नजरे किसी बाज की तरह उसकी चुचियों पर गड़ती चली गई। मधुलिका बिना उपर देखे फूल हटाने लगी तो मोहित उसकी चूचियों को देखते हुए धीरे से बेड पर बैठ गया और उसको रोकते हुए बोला:"

" वैसे मुझे फूलो से एलर्जी नही है मम्मी। उल्टा मुझे फूल बहुत ज्यादा अच्छे लगते हैं।

इतना कहकर उसने एक बार से मधुलिका की चुचियों की तरफ देखा जिनके बीच की उभार में गुलाब की कुछ पंखुड़ियां घुस गई थी और बेहद खूबसूरत लग रही थी। मधुलिका ने अपनी चुचियों की तरफ देखा और समझ गई कि उसका बेटा उसकी चुचियों को फूल बोल रहा है और उसने जैसे। ही अपनी चुचियों के बीच गुलाब के फूल की पंखुड़ियों को देखा तो उसकी आंखे खुशी से चमक उठी और उसने अपना एक हाथ अपनी चूचियों की गहराइयों में उतार दिया और गुलाब की पंखुड़ियों को निकालने लगी। मधुलिका ने जान बूझकर अपनी उंगलियों से अपनी चुचियों को उपर की तरफ उभार दिया और उसकी गोल गोल नारियल जैसी चुचियों के सिर निप्पल ही उसके ब्लाउस में रह गए और बाकी पूरी चूचियां छलक पड़ी। मोहित ही कामुक नजारा देखकर समझ गया कि आज रात जरूर कुछ बड़ा होगा और लंड में ना चाहते हुए तनाव आने लगा।

मधुलिका ने आराम से अपनी चुचियों के बीच से गुलाब की पंखुड़ियों को निकाल दिया और उन्हें मुंह में डाल कर खा गई। मोहित पागल सा हो गया और उसकी आंखे थोड़ा सा लाल होने लगी। मधुलिका फिर से सीधी होकर बैठ गई और ट्यूब का ढक्कन खोलते हुए उसने मोहित से कहा:"

" मोहित मेरी एक सहेली है नेहा। उसने भी टैटू बनवाया था लेकिन उसकी स्किन पर निशान पड़ गए। बोल रही थी कि उसने ठीक से मालिश नही करी इसलिए ऐसा हुआ है।

शुरुवात करते हुए पहली ही गेंद को सीधे मोहित में पाले में डाल दिया और मोहित ने मंझे हुए खिलाड़ी की तरफ पहले ही गेंद पर सिक्स जड़ते हुए बोला:"

" मम्मी ऐसा बिलकुल हो जाता है। टैटू की मशीन स्किन पहली मुलायम लेयर में घुसती हैं टैटू बनाने के लिए इसलिए मालिश करना बेहद जरूरी होता है। नेहा आंटी को मैं जानता हूं लेकिन उनसे कहीं ज्यादा आपकी स्किन मुलायम और चमकदार हैं इसलिए आपको ज्यादा अच्छे से मालिश करनी चाहिए।

मधुलिका अपने बेटे की तरफ से पहली ही बार में इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलते देखकर समझ गई कि उसका बेटा उसकी सोच से कहीं ज्यादा परिपक्व और समझदार हो गया है। मधुलिका ने क्रीम को अपनी उंगलियों में लिया और अपनी गर्दन पर बने टैटू की मालिश करने लगी। मधुलिका जान बूझकर बिलकुल हल्के हाथ से धीरे धीरे मालिश कर रही थी और वही हुआ जो उसने सोचा था। मोहित उसे मालिश करते हुए देखकर बीच में ही बोल पड़ा

" ओह मम्मी। ऐसे हल्के हाथों से मालिश करी तो पक्का निशान पड़ जायेंगे आपकी रूई के समान मुलायम स्किन पर क्योंकि क्रीम पहली लेयर तक पहुंच ही नहीं पायेगी।

मधुलिका की सांसे अपने बेटे की बात सुनकर थोड़ी सी तेज होने लगी और वो समझ गई कि पहली ही बार में तीर बिलकुल सही निशाने पर लग रहा हैं। मधुलिका ने मालिश को और ज्यादा धीमा कर दिया और दुखी सी होते हुए बोली:"

" बेटा मुझसे तो बस ऐसी ही मालिश होगी। अब तू ही बता क्या करू ?

मोहित को ये सुनहरा अवसर लगा और उसकी आंखे चमक रहा और बोला:"मम्मी आपको कठोर हाथ से मालिश की जरूरत है ताकि क्रीम पहली लेयर तक पहुंच जाए। मम्मी अगर आप चाहो तो मैं आपकी मालिश कर सकता...

नेकी और पूछ पूछ। मधुलिका ने मोहित की बात पूरी होने से पहले ही हान कर दिया और मोहित बिना एक पल भी गंवाए मधुलिका के पीछे पहुंच गया और उसने अपनी मम्मी के हाथो से ट्यूब ले ली। मधुलिका ने आने वाले उत्तेजक पलो की कल्पना करके ही अपनी आंखे बंद कर ली। मोहित ने पहली बार अपनी मम्मी की लगभग पूरी नंगी कमर को देखा और उसका दीवाना हो गया। बिलकुल चिकनी कमर, किसी नदी की तरह बलखाती हुई, हल्की सी चर्बी उसकी मादकता को और ज्यादा बढ़ा रही थी। मोहित ने अपनी उंगलियों पर क्रीम को लिया और उसने अपनी उंगलियों को अपनी मम्मी की गर्दन पर टिका दिया। मां बेटे दोनो एक साथ कांप उठे क्योंकि दोनो ही जानते थे कि दोनो एक दूसरे को आपसी सहमति से छू रहे है।

मोहित ने जैसे ही अपनी मम्मी की गर्दन पर दबाव बनाया तो मधुलिका को अपनी गर्दन की नसे खिंचती हुई सी महसूस हुई और उसके समूचे तन बदन में मीठी मीठी तरंगे दौड़ गई। मोहित ने अपनी हथेली को उसके चिकने नंगे कंधे पर टिका दिया और उसकी गर्दन पर उंगलियां घुमाते हुए मालिश करने लगा। मोहित ने अपनी चौड़ी मजबूत हथेली का दबाव पूरी ताकत से उसके कंधे पर दिया तो मधुलिका के मुंह से दर्द भरी कराह निकल पड़ी और उसका जिस्म बेड पर गिरता चला गया और मधुलिका धीरे से सिसक उठी

" आह बेटा, थोड़ा हल्के हाथ से कर ना, देख न गिर गई मैं।

मोहित भी बिना देर किए मधुलिका के पीछे ही गिर गया और उसकी गर्दन को मसलते हुए बोला:"

" हल्के हाथ से कोई फायदा नही होगा। आप एक करो ऐसे ही लेटी रहो। गिरोगी भी नहीं और मालिश अच्छे से हो जायेगी।

मधुलिका अपने बेटे के कठोर हाथो को महसूस करके कुछ बोलने की स्थिति में थी ही कहां। मोहित ने उसके पीछे आते हुए उसके एक कंधे को अपनी हथेली में फिर से पूरा भर लिया और कस कस कर मसलते हुए उसकी गर्दन पर मालिश करने लगा। गर्दन की मालिश करने के बहाने मोहित पूरी ताकत से अपनी मां के कंधे को मसल रहा था मसल रहा था और मधुलिका सब कुछ जानते हुए भी मदहोश सी पड़ी हुई थी और मधुलिका अपने पैरो की उंगलियों को आपस में रगड़ रही थी। मोहित ने रात वाली चाल चली और बोला:"

" मम्मी आपकी गर्दन बेहद ज्यादा गर्म हो रही है मानो इसमें से आग सी निकल रही है। क्रीम लगाते ही सूख रही हैं और गीली वाली क्रीम ऑफिस में ही रह गई क्या करू अब ?

मधुलिका अपने बेटे की मजबूरी समझ गई और रात जब उसके बेटे ने उसकी गर्दन को चूमा था ये सोचकर उसकी आंखे लाल सुर्ख हो गई और उसकी सांसे बेहद तेज हो गई। मधुलिका ने एक नजर अपनी उछलती हुई चुचियों पर डाली और कांपती हुई बोली:"

"रात की तरह कर ले बेटा। याद हैं ना कैसे किया रात तूने ?

मधुलिका ने पूरी तरह से मदहोश आवाज में कहा तो मोहित ने मुंह कुछ बोलने की बजाय अपने जलते हुए लिप्स को अपनी मां की गर्दन पर टिका दिया। जैसे ही मोहित ने अपनी मम्मी की गर्दन पर अपने जलते होंठो को रखा तो मधुलिका मस्ती और उत्तेजना से उछल पड़ी तो मोहित ने अपने पैरो को अपनी मां की कमर पर लपेट लिया और बोला:"

" उफ्फ मम्मी आपका सब कुछ उछलता ही रहता है। और पता नहीं क्या क्या काबू में करना पड़ेगा मुझे।

मधुलिका समझ गई थी उसकी कमर और पैरो के बाद उसका बेटा उसकी चुचियों को काबू करने की बात कर रहा है तो उसके बदन में उत्तेजना की एक तेज लहर दौड़ गई और मधुलिका मस्ती भरी आवाज में बोली:"

" आह बेटा क्या करू, तेरे छूते ही गुदगुदी सहन नहीं होती और सब कुछ उछलने लगता हैं।

मधुलिका ने जान बूझकर अपनी चुचियों को उपर की तरफ जोर से उछाल दिया तो मोहित ने उसके कंधे को कठोरता से थाम लिया और पूरी ताकत से उसकी कमर को अपनी मजबूत टांगो के बीच में कस लिया और उसके कान में फुसफुसाया

" आअअछ मम्मी। अपना बेटा सब कुछ काबू कर लेगा। रुको पहले आपकी गर्दन को ठंडा कर दू कहीं रात की तरह फिर से पापा बीच न आ जाए।

इतना कहकर उसने मधुलिका के कंधे को चूम लिया


और जीभ निकालते हुए उसकी गर्दन को चूसने लगा। मधुलिका के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसका जिस्म उछलने लगा लेकिन उसके बेटे की मजबूत पकड़ के चलते वो उछल नही पा रही थी। मधुलिका की गर्दन खुद ही मोहित की जीभ पर उछलने लगी और मोहित ने उत्साह में आते हुए अपनी जीभ को पूरा बाहर निकाल दिया और उसकी जीभ मधुलिका की गर्दन चाटते हुए उसके गालों तक आने लगी और मधुलिका पूरी तरह से मदहोश हुए सिसक रही थी। मोहित के घुटने की रगड़ से उसकी गांड़ पर से साड़ी सरक गई थी और मधुलिका पागल सी हो गई और सिसक उठी

" अह्ह्ह्ह सीआईआई यूफफ्फ मोहित, कितनी गुदगुदी सहन नाहिईकी यूफफ्फ्फ।

मोहित ने अपने जीभ को उसके गाल पर फेरते उसके होंठ के से चूसते हुए नीचे की तरफ आया तो मधुलिका से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो किसी जंगली घोड़ी की तरह उछल उछल पड़ने लगी तो मोहित ने एक हाथ नीचे करते हुए उसकी गांड़ को अपने हाथ में थाम लिया और बोला:"

" आह मम्मी, सारे टैटू बनवा लो ना आप, गुलाब के फूलो पर आप पहली होगी जिसके जिस्म पर टैटू बनेंगे।

इतना कहकर मोहित ने उसकी गांड़ को पूरी ताकत से कस लिया और मधुलिका का पूरा शरीर उसका पूरा वजूद थरथरा उठा और जोर से कराह उठी

" आह बना ले बेटा, उफ्फ जो तेरा मन करे बना ले। सब टैटू बना दे आज ही। आह मोहित उफ्फ हय्यय।

मधुलिका ने खुद को पूरी तरह से अपने आपको अपने बेटे के हवाले कर दिया। मधुलिका जोर जोर से उछल उछल पड़ने लगी लेकिन मोहित की मजबूत बांहों में पूरी तरह से जकड़ी हुई थी और उसे आज एहसास हो रहा था कि असली और ताकतवर मर्द क्या होता है। उसके बेटे ने आज उसके छह फीट लंबे चौड़े भरे हुए मांसल शरीर को पूरी तरह से अपने कब्जे मे कर लिया था और मधुलिका उसकी ताकत पर फिदा होती चली गई।

मोहित ने जी भरकर अपनी मां की गर्दन को चूमा, चूसा चाटा और मधुलिका की पेंटी गीली होती चली गई। करीब 15 मिनट मोहित ने मधुलिका की गर्दन को चूसा और जैसे ही उसने अपनी पकड़ को ढीला किया तो मधुलिका बिस्तर पर लेट कर लंबी लंबी सांसे भरते हुए अपनी सांसों को काबू करने लगी। मोहित का लंड पत्थर की तरफ सख्त हो गया था और मोहित चाह रहा था कि उसकी मां की नजर उसके लंड पर न पड़े। मधुलिका की सांसे नॉर्मल हुई तो उसने अपनी गर्दन को छुआ तो उसकी गर्दन अब पहले जितनी गर्म महसूस नही हो रही थी। मधुलिका अपने बेटे की ताकत, उसके मजबूत जिस्म और उसकी मर्दानगी के आगे पूरी तरह से हार गई थी और उसने सोच लिया कि चाहे जो हो जाए वो आज अपने बेटे से टैटू जरूर बनवा कर रहेगी।

मोहित ने एक नजर अपनी मां के जिस्म पर डाली और देखा कि मधुलिका की केले के तने के समान मांसल चिकनी चिकनी जांघें और जांघो के बीच उसकी लाल रंग की छोटी सी पैंटी गीली होकर चमक रही थी। मोहित का मन किया कि अभी मुंह में भर कर चूस ले लेकिन उसके अंदर अभी इतनी हिम्मत नही थी।

मधुलिका की सांसे नॉर्मल हो गई तो उसे अपनी हालत का एहसास हुआ और अपनी साड़ी को ठीक किया और शर्मा गई। मोहित धीरे से उठा और बोला:"

" मम्मी मैं अभी बाथरूम से आया।

मोहित बाहर निकल गया और मधुलिका शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी तो उसने देखा कि उसकी गर्दन उसके बेटे से चूस चूस कर बिल्कुल लाल सुर्ख कर दी थी। मधुलिका को नेहा की चूत याद आ गई और उसे एहसास हुआ कि नेहा की चूत भी इतनी लाल नही थी जितनी मोहित ने उसकी गर्दन कर दी थी। हाय भगवान मेरी चूत का क्या हाल..

मधुलिका सोचते सोचते बीच में ही रुक गई। उफ्फ मैं ये क्या सोचने लगी थी। मधुलिका ने अपना फोन निकाला और देखा कि 10:30 हो गए थे। उसने अपने पति राकेश का नंबर मिलाया ताकि ये पता चल जाए कि वो कब तक आयेगा। घंटी जा रही थी और मधुलिका मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी कि आज रात उसका पति घर आने के लिए मना कर दे।

राकेश ने फोन फोन उठाया और बोला:" सॉरी यार मधु। मैं आज रात नही आ पाऊंगा। एक बिजनेस डील के लिए मीटिंग है जो कल सुबह तक चलेगी।

अपने पति की बात सुनकर मधुलिका का मन खुशी से नाच उठा और बोली:"

" आप मेरी चिन्ता मत करो। मीटिंग पर ध्यान दो आखिर कार आप मेरे लिए ही तो सब करते हो। मैं नहीं समझूंगी तो भला कौन समझेगा।

राकेश:" थैंक्स मधु। अच्छा बाद में बात करता हु।

मधुलिका की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। पहली बार उसके पति ने कोई अच्छा काम किया है। थोड़ी देर पहले पति को देर से आने के लिए बोलने पर गाली देने वाली मधुलिका अब अपने बेटे के लिए दीवानी होकर उसके ना आने पर खुशी से मचल रही थी। उसका जिस्म उसके काबू में नहीं था और मधुलिका बेड पर लेट कर आने वाले मधुर पलो को सोचने लगी और उसकी चूचियां अकड़ने लगी और चूत में फिर से गीलापन उभार आया। मधुलिका ने बेड पर पड़ी हुई गुलाब की पंखुड़ियों को देखा जिनमे से कुछ बुरी तरह से मसली जा चुकी थी और मधुलिका ने बाकी गुलाब की पंखुड़ियों को कामुक स्माइल दी मानो उन्हें कह रही हो आज तुम्हारी खैर नहीं।

मोहित सीधे बाथरूम में घुस गया और उसने अपने लंबे चौड़े तगड़े लंड को बाहर निकाला और मधुलिका को याद करके जोर जोर से मुट्ठी मारने लगा। अपनी मां के कमरे में जाने से पहले एक बार लंड पर काबू करने के लिए मोहित उसे पूरी जोर जोर से हिलाने लगा और जल्दी ही उसकी मेहनत रंग लाई और उसके लंड ने एक जोरदार पिचकारी मार दी और मोहित सिसक उठा

" Ahhhhhh मधुलिका तेरी chutttttt

लंड के शांत पड़ते ही मोहित एक बार फिर से पूरे आत्म विश्वास के साथ अपनी मां के बेडरूम की तरफ चल पड़ा।
 
अपडेट नंबर 9

मधुलिका ने जैसे ही अपने बेटे के कदमों की आहट सुनी तो उसका जिस्म मचल उठा और वो बेड उल्टी लेट गई। उसने अपने दोनो हाथों को मोड़कर अपनी चुचियों के नीचे रखा जिससे उसकी चूचियां गोलदार होकर बाहर की तरफ निकल पड़ी। मोहित जैसे ही अंदर घुसा तो फिर से एक और कामुक दृश्य देख कर मदहोश हो गया।



मोहित ने अपनी मम्मी को स्माइल दी तो मधुलिका ने उसे स्माइल देकर उसका हौसला बढ़ाया। मोहित ने अपना बैग खोला और टैटू बनाने के लिए सामान निकालने लगा तो मधुलिका की सांसे फिर से गर्म हो गई और मोहित बिना कुछ बोले बेड पर बैठ गया तो मधुलिका उसका हौसला चेक करने के लिए बोली:"

" बेटा मोहित अगर बीच में ही तेरे पापा आ गए तो क्या होगा ??

मोहित थोड़ा सा घबरा गया और फिर बोला:" ओह मम्मी ये तो मैने सोचा ही नहीं था। फिर क्या करू अब ?

मधुलिका अपने बेटे की हालत का मजा लेते हुए बोली:"

" एक काम कर जा घर का मेन गेट बंद करके आजा। आ भी गए तो तुम गेट खोलने तक नहीं आराम से अपने कमरे में चले जाना।

मोहित को ये प्लान ठीक लगा और वो बिना कुछ उठा और गेट बंद करने चला गया। मोहित के मन में लड्डू, रसगुल्ले सब एक साथ फुट रहे थे क्योंकि अब उसकी मां पूरी तरह से उसके नीचे आ जाने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो गई थी। मधुलिका को क्या मालुम कि राकेश ने मोहित को 7 बजे ही मेसेज कर दिया था कि मैं मीटिंग के चलते आज रात आ नही पाऊंगा। तुम कुछ भी करके अपनी मां को संभाल लेना।

मोहित ने जान बूझकर मधुलिका को नहीं बताया था और मधुलिका ने जब गेट बंद करने की बात करी तो मोहित सब समझ गया। गेट बंद होने की आवाज आए दो मिनट हो गए थे लेकिन मोहित अपनी तक नहीं आया था जिससे मधुलिका सोच रही थी कि उसका नेता कहां रह गया।

मोहित अंदर आया तो उसने अपने कपड़े बदल लिए थे और अब उसके जिस्म पर एक हॉफ स्लीव बनियान और लुंगी थी। मधुलिका की चूत उसे इस हालत में देखकर तड़प उठी और मोहित सीधे बेड पर चढ़ गया।

मोहित ने मधुलिका को लेटने का इशारा किया और मधुलिका वहीं बेड पर लेट गई। मोहित उसके चेहरे के पास बैठ गया और एक ब्रश हाथ में लेकर मधुलिका की गर्दन पर बने टैटू पर फेरते हुए बोला:"

" मम्मी पहले मैं गर्दन के टैटू पर एक लेयर और बना देता हूं जिससे इससे खुबसूरती और बढ़ जाएगी और आपकी गर्दन ज्यादा सेक्सी लगेगी।

अपने बेटे के मुंह से अपने लिए सेक्सी सुनकर मधुलिका चहक उठी और मोहित ने उसकी गर्दन को कामुक तरीके से ब्रश से सहलाना शुरू कर दी तो मधुलिका फिर से उत्तेजित होने लगी। मधुलिका की नजरे मोहित की चौड़ी छाती पर टिकी है थी जिस पर काले घने बालों के गुच्छे से बने हुए थे और मधुलिका को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। मधुलिका की गर्दन को साफ करने के बाद मोहित ने वाइब्रेटर जैसी टैटू गुदने वाली मशीन उठाई और उसे धीरे से मधुलिका की गर्दन पर टिका दिया और उसका कंधा एक हाथ से सहलाते हुए मशीन को चलाने लगा तो मधुलिका के जिस्म में झटके से लगने लगे जिससे उसका पूरा जिस्म थरथराने लगा। मधुलिका को बेचैन होते देखकर मोहित ने अपनी हथेली में उसका पूरा गोरा गोरा कंधा भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा तो मधुलिका की सांसे एक बार फिर से उसके काबू से बाहर जाने लगी जिससे उसकी चूचियां में कंपन होना शुरू हो गया।

मधुलिका ने मदहोश होकर अपनी आंखे बंद कर ली और अपने होंठो को अपने दांतों से चबाने लगी तो मोहित ने मशीन की स्पीड को थोड़ा सा तेज कर दिया जिससे मधुलिका पागल सी हो गई और उसके जिस्म में उत्तेजना के झटके से लगने लगे। मोहित ने अपने नाखून को उसके कंधे में हल्का सा गड़ा दिया तो मधुलिका कराह उठी और उसकी सांसे बहुत तेजी से चलने लगी जिससे उसकी चूचियां उसके ब्लाउस मे उछलने लगी। ब्लाउस का सिर्फ एक बटन लगा हुआ था जिससे मोहित को उसकी चूचियां आधे से ज्यादा दिख रही थी। मोहित ने उत्तेजना सा कांपती हुई मधुलिका के कंधे को थोड़ा सा नीचे झुक कर चूम लिया तो मधुलिका सिसक उठी। मोहित ने मशीन की गति को अब पूरी तेज कर दिया और मशीन उसकी स्किन की पहली लेयर में घुस कर टैटू पर लेयर बनाने लगी तो मधुलिका से इतनी गुदगुदी और उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हुई और वो उछल पड़ी तो मोहित ने मशीन को रोक दिया और कान के पास मुंह करते हुए मदहोश होकर बोला

आह्ह्हह मम्मी, अभी से इतना मत उछलो, अभी तो पूरी रात बाकी है। और आपको एक खुश खबरी और दू कि आज रात पापा नही आयेंगे उनका मेसेज आया था मेरे पास।

अपने बेटे की बात सुनकर मधुलिका के बदन ने एक जोरदार झटका खाया और उसने आंखे खोल कर अपने बेटे को देखा तो मोहित ने उसकी आंखों में देखते हुए मशीन को फिर से फिर से उसकी स्किन की पहली लेयर में घुसाया तो मधुलिका का मुंह मस्ती से खुल गया और वो जोर से सिसक उठी लेकिन उसकी पलके नही झुकी। मोहित उसकी आंखो में देखते हुए मशीन को टैटू पर घुमाता रहा और मधुलिका उसकी आंखों में कामुक अंदाज में देखते हुए कभी अपने होंठ चबाती तो फिर कभी उन्हें जीभ से गीला करती। मधुलिका की आंखे लाल सुर्ख होकर दहकती हुई गोल गोल हो गई थी और मोहित अपनी मां को पागल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। मधुलिका की साड़ी अस्त व्यस्त हो गई थी और उसकी चिकनी जांघें नजर आ रही थी। उसकी गोल गोल गहरी चिकनी नाभि की साफ साफ दिख रही थी। तभी मोहित ने फिर से एक बार पूरे टैटू पर मशीन जोर से फिराई तो मधुलिका का जिस्म जोर से उछला और उसकी चूंचियां पूरी अकड़ के साथ ब्लाउस से टकराई और ब्लाउस का आखिरी बटन भी शहीद हो गया तो शर्म के मारे मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी। मोहित ने उसका ब्लाउस देखा जो खुलकर उसकी चुचियों के उपर बस नाम मात्र के लिए पड़ा रह गया था।



मोहित ने मशीन को एक तरफ रख दिया और मधुलिका की गर्दन पर एक बार फिर से अपने गर्म गर्म होंठो को टिका दिया तो मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी और मोहित ने हल्का सा दांतो से चबाते हुए उसकी गर्दन को सख्ती से चूसा तो मधुलिका की चूचियां जोर जोर से उछलने लगी और ब्लाउस खिसक रहा था। मोहित ने फिर से अपनी मम्मी के कंधे को कस कर मसल दिया तो मधुलिका फिर से कराह उठी और मोहित उसके कान पर अपनी जीभ फिराते हुए बेहद ही और सेक्सी आवाज में सिसका

" आह्ह मधु !! दूसरा टैटू कहां बनाऊं पहले ?

अपने बेटे के मुंह से मधु सुनकर मधुलिका पागल सी हो गई और उससे कहीं ज्यादा सेक्सी आवाज में सिसकते हुए बोली:"

" आह मोहित, उफ्फ जहां तेरा मन करे वहां बना दे। बस आज मेरे सारे टैटू बन जाने चाहिए।

मोहित उसकी गर्दन पर से अपनी उंगलियां घुमाते हुए उसकी चुचियों की तरफ बढ़ने तो मधुलिका ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने कंधे पर टिके उसके दूसरे हाथ को थाम लिया तो मोहित ने मधु के चूची के उभार पर ब्रश फिरते हुए उत्तेजक आवाज में बोला:"


" आह मम्मी, यहां बना दू क्या टैटू ?

मधुलिका फिर से सिसक उठी जिससे उसकी चूचियां फिर से उछल पड़ी मानो खुद ही टैटू बनवा लेने के लिए उसकी चूचियां तड़प रही हो।

मोहित ने अपनी जीभ से पहली बार मधुलिका के कान की लौ को सहला दिया तो मधुलिका तड़प उठी तो मोहित भी मचल उठा और बोला:"

" हय्यय्य मम्मी, उफ्फ कितनी उछलती है ये, टैटू कैसा बनेगा फिर।

मधुलिका ने मोहित की आंखो में देखते हुए अपने कंधे पर टिके अपने बेटे के हाथ को अपने हाथ में जोर से कस दिया। ये मोहित के लिए सीधे सी इजाजत थी कि वो अपनी मां की चुचियों को उछलने से रोक सकता हैं। मोहित ने अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी मां की चुचियों पर पड़े हुए ब्लाउस को उठाकर कर नीचे करते हुए दूर फेंक दिया।



ब्लाउस के हटते ही उसकी मां की गोल गोल ठोस, गुदाज नारियल के जैसी दोनो चूचियां एक हाथ नंगी होकर छलक पड़ी। मधुलिका का पूरा जिस्म कांप उठा और मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी। मोहित ने पहली बार अपनी मां की नंगी चूचियों को देखा और उसकी चुचियों के बीच में गहरे भूरे रंग के गोल गोल निप्पलों को देख कर मोहित पगला सा गया और उसके लंड ने एक बार फिर से जोरदार अंगड़ाई ली और अकड़ते हुए खड़ा हो गया।

मोहित ने ब्रश उठाया और मधुलिका के बांई तरफ बैठ गया और उसकी एक चूची के उपर ब्रश घुमाने लगा तो मधुलिका को फिर से गुदगुदी होने लगी और उसकी सांसे अब बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रही थी। मधुलिका की उछलती हुई चूचियां मोहित को उन्हें हाथ में लेने के लिए उकसा रही थी और मोहित ने ब्रश को एक एक तरफ रख दिया और टैटू बनाने वाली मशीन को उठा लिया तो मधुलिका का समूचा वजूद हाहाकार कर उठा। जैसे ही मोहित ने मशीन को उसकी चूची पर टिकाया तो मधुलिका किसी बेलगाम बेकाबू घोड़ी की तरह उछल पड़ी और मोहित बिना पूछे उसकी जांघो पर बैठ गया और उसकी एक चूची को अपनी हथेली से ढक दिया।



मधुलिका के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकल पड़ी और उसने दोनो हाथो में चादर का कस लिया और उसके हाथो में कुछ गुलाब की पंखुड़िया भी आ गई और मधुलिका तड़पती उन्हे उन्हे मसलने लगी। मोहित ने दूसरे हाथ से मशीन को उठा लिया और उसकी चूची पर टैटू बनाना शुरू कर दिया। मधुलिका से उत्तेज़ना बर्दाश्त नहीं हो रही थी, कभी वो मस्ती से कराहती तो कभी सिसक उठती। मोहित ने उसकी एक चूची को पूरी सख्ती से अपनी हथेली में कसे उसकी चूची पर टैटू बना रहा था। मधुलिका की चूची की स्किन के पहली लेयर में जैसे ही मशीन घुसी तो मधुलिका मस्ती से किसी कोयल की तरह कूकने लगी और उसने अपनी चूची को पूरी तरह से अपने बेटे के हाथ में उभार दिया तो मोहित ने उसकी चूची को जोर से मसल दिया तो मधुलिका जोर जोर से मस्ती से सिसकने लगी और उसकी आवाज पूरे घर में गूंज रही थी। मोहित जितनी जोर से उसकी चूची दबाता उससे कहीं ज्यादा जोर से मधुलिका सिसकी लेती और अपने हाथ मे पकड़ी हुई गुलाब की पंखुड़ियों को मसल देती। मोहित ने मशीन की स्पीड को फुल कर दिया तो मधुलिका मजे से बावली सी हो गई और पूरी जोर से से अपनी गांड़ बेड पर पटकने लगी। मोहित अपने वजन से उसे दबाने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन मधुलिका उछल उछल पड़ रही थी जिससे मोहित की लूंगी ढीली होती चली गई।

मोहित ने आधे से ज्यादा टैटू बना दिया था और जैसे ही उसने अपनी लूंगी ठीक करने के मशीन को रोका तो मधुलिका तड़प उठी और उसने मोहित की आंखो मे देखते हुए अपनी हाथ में मसली हुई गुलाब की पंखुड़ियों को अपने मुंह की तरफ किया और जैसे ही मुंह में डालने वाली थी मोहित ने उसका हाथ पकड़ा और अपना मुंह खोल दिया। मधुलिका ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और गुलाब की पंखुड़ियों को मोहित के मुंह के सामने कर दिया। मोहित ने गुलाब की पंखुड़ियों की हालत देखी और उसने जोर से मधुलिका की चूची को मसल दिया और उसकी चूची की तरफ देखते हुए बोला:"

" आह मधुलिका मेरी मम्मी, तेरे गुलाब को चूस लू क्या ?

मधुलिका उसकी एक अदा पर चुदासी हो उठी और उसने गुलाब की पंखुड़ियों को उसके मुंह के अंदर घुसा दिया तो मोहित उन्हे चबाकर चबाकर चूस चूस कर खाने लगा मानो मधुलिका तो कह रहा हो कि तेरी चुचियों को ऐसे ही चबा चबा चबाकर कर चूस जाऊंगा। मधुलिका ने उसकी एक उंगली पकड़ी जिस पर एक गुलाब की पंखुड़ि लगी हुई और उसे अपने मुंह में घुसा दिया और पागलों की तरह उसकी उंगली को चूसने लगी तो मोहित ने एक बार फिर से मदहोश हो कर मशीन को उठा लिया और टैटू को बनाने लगा। मधुलिका से गुदगुदी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और उसकी उंगली को दांतो में लेकर हल्का हल्का काटने लगी तो मोहित टैटू बनाने लगा। मधुलिका के बार बार उछलने से मोहित की लूंगी खुलकर गिर गई और उसका लंड उछलते हुए बाहर निकल पड़ा और मधुलिका की टांगो के बीच घुस गया। मोहित लंड को मधुलिका की नजरो से छुपाने के लिए उसके उपर थोड़ा सा और झुक गया जिससे लंड और अंदर घुस कर उसकी पैंटी से टकरा गया। अपनी पेंटी पर किसी जानी पहचानी पत्थर के समान कठोर चीज का एहसास होते ही मधुलिका का मुंह एक जोरदार सिसकी के साथ खुल गया और उसने किसी जंगली बिल्ली की तरह बेकाबू होकर मोहित की उंगली को जोर से काट लिया तो मोहित कराह उठा।

मधुलिका अब अपने होशो हवास को बैठी और अपनी दूसरी चूची को अपने हथेली में भर कर मसलने लगी। मधुलिका अपने बेटे के लंड को अपनी जांघो के बीच कस कर उसकी लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने लगी। मधुलिका की आंखे हैरत से फेल गई कि लंड इतना मोटा लंबा कैसे हो सकता है और उसने बदहवास सी होकर अपनी जांघो को पूरी ताकत से भींच लिया तो मोहित ने अपनी पूरी ताकत उसकी चूची पर दिखा दी और मधुलिका दर्द और मस्ती से कराह उठी।

मोहित ने मशीन को एक तरफ रख दिया क्योंकि उसकी मम्मी की चूंची पर एक बेहद ही खूबसूरत तितली बन गई थी। मधुलिका की उत्तेजना को ब्रेक लगा तो उसने मोहित की तरफ देखा तो मोहित बोला:"

" मम्मी टैटू बन गया है। अब अगले टैटू के लिए तैयार हो जाओ।

इतना कहकर मोहित अपने लंड के आगे अपने हाथ अड़ाकर उसके उपर से हट गया और मधुलिका ने लंड को देखने की कोई कोशिश भी नही करी। मधुलिका अब किसी गर्म भट्टी की तरफ तप रही थी और कुछ भी करके वो अपने बेटे से चुद जाना चाहती थी। मधुलिका एक झटके के साथ खड़ी हो गई और उसने अपने बेटे की आंखो में देखते हुए अपने साड़ी को खोलकर नीचे सरका दिया।



मधुलिका की गांड़ पर बस नाम के लिए एक पेंटी थी जिसकी धागे जैसी उसकी गांड़ के छेद को भी ठीक से नहीं ढक पा रही थी। मोहित को आज उसकी उम्मीद से कहीं देखने को मिल रहा था और मोहित बिना देर किए आगे बढ़ा और उसने मधुलिका की गांड़ को छुआ तो मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी और उसने मधुलिका की गांड़ को पकड़ कर बीच मधुलिका को बेड पर झुका दिया और मधुलिका अब बेड पर आगे को किसी घोड़ी की तरह झुक गई जिससे उसकी चूत और गांड़ दोनो एक साथ बाहर को निकल आई तो मोहित बावला सा हो गया और मोहित ने अपने दोनो हाथो को आगे बढ़ा कर उसकी गांड़ को दोनो हाथो में भर लिया और उसकी कठोरता चेक करने लगा तो मधुलिका की भीगी हुई चूत से रस टपक उठा और उसकी पैंटी से एक रस का बुलबुला सा निकल आया तो मोहित ने एक उंगली उसकी पैंटी के उपर फिरा दी तो मधुलिका के मुंह से आह निकल पड़ी और मधुलिका ने बिना अपने बेटे की परवाह किए उसके सामने ही अपनी चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल दिया और जोर से सिसक उठी। मधुलिका चुदाने के लिए पूरी ताकत से तैयार हो गई थी और मोहित अभी भी किसी जल्दबाजी में नही था। उसने मधुलिका की पेंटी की स्ट्रिप को खिसका दी थोड़ा सा एक साइड कर दिया और उसने मधुलिका के चूतड़ों को हाथो में भर कर खोल दिया तो मधुलिका फिर से सिसक उठी और अपने बेटे को देखते हुए कामुक अंदाज में अपने होंठो पर जीभ फिरा दी। मा की गांड़ खुल गई तो मोहित अपनी मां की गांड़ का भूरा कसा हुआ गोल और छेद देखने लगा। मधुलिका समझ गई थी कि उसका बेटा अब उसके काबू में आ गया है क्योंकि वो जान बूझकर उसकी गांड़ का छेद देख रहा है क्योंकि गांड़ के छेद पर टैटू तो बनाने से रहा।

मोहित ने उंगली से गांड़ के छेद को छुआ और सहलाते हुए बोला:_

" आह मम्मी आपकी गांड़ का छेद कितना टाइट हैं!!!

मधुलिका ने कसमसा कर अपनी गांड़ अंदर की तरफ सिकोड़ ली और सिसकते हुए बोली:"

" आउच यूआईआई, ओहोऊ आहह बदतमीज मोहित। क्या क्या देखता है, हाय राम

मोहित जोर जोर से उसकी गांड़ को हथेली में भर कर मसलने लगा और मधुलिका उछल उछल पड़ने लगी। मोहित उसे ज्यादा देर न तड़पाते हुए उसकी गांड़ को ब्रश से साफ करने लगा और जैसे ही उसने उसकी गांड़ के छेद पर ब्रश फिराया तो मधुलिका ने कसमसा कर अपनी गांड़ के छेद को अंदर की तरफ कस लिया और फिर मशीन से टैटू बनाने लगा। मशीन चलती रही और मधुलिका सिसकती रही, उसकी गांड़ का छेद कभी आपने आप बंद होता तो कभी खुल जाता जिसे मोहित ने फैसला कर लिया कि वो अपनी मां की गांड़ भी जरूरी जरूर मारेगा।, उसे घोड़ी बनाकर घोड़े की तरह उछल उछला कर मारेगा!!

मधुलिका सिसकती रही, मचलती रही और उसके बेटे ने उसके गांड़ पर टैटू बना दिया।
मधुलिका का पूरा बदन अब आगे आने वाले आखिरी टैटू को लेकर तड़प रहा था और मोहित भी अब अपने होश खोने के कगार पर आ गया था। मोहित ने मधुलिका की कमर के नीचे हाथ डालकर उसे अपनी बाहों में भर कर उठा लिया और बेड पर सीढ़ी लिटा दिया। मधुलिका सीधी लेट गई उसकी ताकत की कायल हो गई। मधुलिका की चूचियां फिर सामने आ गई और अपना सिर उठाने लगी तो मोहित ने सीधे दोनो हाथो में अपनी मां की चुचियों को भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा।

मधुलिका का बदन मस्ती से भर उठा और वो जोर जोर से कराहने लगी और उसका बदन उछलने लगा तो मोहित अपनी मां के उपर झुका और उसकी गर्दन चाटते हुए उसके कान में धीरे से बोला:"

मम्मी अगला टैटू कहां बनेगा ?

मधुलिका अपना एक हाथ उसके हाथ पर लाई और उसे नीचे ले जाकर अपनी चूत पर टिका दिया और सिसक उठी

" सीईईईई ममिई यहां बनेगा, मोहित अगला टैटू यहां बनेगा , इस पर बनेगा इस पर।

इतना कहकर मधुलिका ने अपनी गांड़ को उठा कर चूत को बेटे के हवाले कर दिया मोहित तड़प उठा और उसने मधुलिका अपनी मम्मी की चूत को पेंटी के उपर से ही मुट्ठी में भर लिया और जोर से मसलते हुए बोला:_

" अअह्ह्ह सीईईईईई, क्या हैं ये मम्मी ?

मधुलिका अपनी चूत मसले जाने से अब और बर्दाश्त नहीं कर पाई और जोर से उछलते हुए बोली:

" अअह्ह्ह्ह चूत हैं मोहित, तेरी मां की चूत, मधुलिका की कसी हुई प्यासी चूत, चुदासी चूत, बहकती चूत, तड़पती चूत, भीगी चूत।

मोहित ने एक उंगली पेंटी की स्ट्रिप से बाहर निकल रहे उसके चूत के भीग चुके लिप्स पर फिराई तो मधुलिका किसी बेकाबू घोड़ी की तरह उछल पड़ी और मोहित फिर से सिसका

" हाय हय्य्य मम्मी आपकी चूत पूरी गीली हो चुकी। आप तो फिर से उछल उछल पड़ने लगी। ऐसे कैसे टैटू बनेगा !!

मधुलिका की चूत और मधुलिका दोनो फिर से तड़प उठी और उसकी आंखो में देखते हुए सिसकी"

" हाय आह गीली चूत मधुलिका की गीली चूत, आह मोहित तो दबा ले ना मुझे अपने नीचे किसी घोड़ी की तरह। क्यों उछलने दे रहा हूं तो मुझे।

मोहित अपनी मम्मी के उपर चढकर बिल्कुल सीधे लेट गया और उसकी चूचियां उसके चौड़े कठोर सीने में घुसने लगी। अपने मम्मी के के मुंह घोड़ी सुनकर मोहित उसका घोड़ा बनने के लिए तड़प उठा और मोहित ने उसकी पैंटी के अंदर हाथ घुसा दिया और एक उंगली उसकी चूत के गीले बिलकुल भीग गए छेद पर फेरते हुए सिसक उठा

" आह मम्मी , हाय मधुलिका घोड़ी, प्यासी घोड़ी, जंगली घोड़ी, चुदासी घोड़ी।

मधुलिका को अब कोई शर्म, परवाह नही रह गई थी वो तो बस अब कुछ भी करके चुद जाना चाहती थी,अपनी चूत पर अपने बेटे की मोटी उंगली महसूस करते ही मधुलिका ने सब लाज हया छोड़कर एक हाथ अपने बेटे की चौड़ी छाती पर टिका दिया और उसके निपल्स सहलाते हुए सिसकी :"

" आह्ह्ह् घोड़ी, मैं घोड़ी, प्यासी घोड़ी चुदासी घोड़ी, मेरा घोड़ा बनेगा ना, मोहित मेरा घोड़ा लौड़ा मैं मोहित की चुदासी घोड़ी।

मधुलिका इतनी चुदासी हो गई थी कि उसने मोहित के बोलने से पहले खुद ही बोल दिया कि मोहित उसका घोड़ा लौड़ा। मधुलिका ने अब पूरी तरह से साफ कर दिया कि उसे आज अपने बेटे से बस चुदना हैं, पूरी रात चुदना है घोड़ी बन बन कर चुदना हैं। मोहित थोड़ा सा आगे को खिसका तो मोहित का लंड पेंटी के उपर से मधुलिका की चूत पर रगड़ने लगा तो मधुलिका जोर जोर से सिसकियां लेने लगी। मोहित उसकी चूची मसलते हुए थोड़ा नीचे होते हुए उसके पेट और नाभि पर जुबान फेरने लगा तो मधुलिका तड़पते हुए अपनी गर्दन इधर उधर पटकने लगी। मोहित ने अब मधुलिका की दोनो चुचियों को अपने हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा।



मधुलिका की चूत पूरी तरह से भीग गई थी और उसकी पैंटी लबालब होकर मोहित का लंड भिगो रही थी। अपनी मां की खूबसूरत गहरी नाभि देखकर मोहित ने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसे गोल करके नाभि में घुसा दिया



मधुलिका फिर से मचल उठी और अपनी गर्दन को इधर उधर पटक रही थी। मोहित ने जैसे ही पूरी जीभ को उसकी नाभि में जड़ तक घुसा दिया तो मधुलिका मस्ती से सिसकते हुए अपना सिर उधर इधर पटकने लगी



" अह्ह्ह्ह्ह बेटे, उफ्फहै भगवान, उफ्फ siiiiiii

मधुलिका की सिसकी सुनकर मोहित का लंड फटने के कगार पर पहुंच गया था। मोहित उसके पेट पर अपनी जीभ से लेकर खींचते हुए अब थोड़ा सा नीचे आया और उसने मधुलिका की पेंटी पर उंगली फिराई तो उसकी उंगली चूत से निकल रहे अमृत से भीग गई और उसने मधुलिका की आंखो मे देखते हुए उंगली को अपने मुंह में भर लिया तो मधुलिका जोर से सिसक उठी और उसे कामुक इशारे करने लगी। अपनी मां की चूत से निकले रस के अद्भुत स्वाद से मोहित की आंखे बंद हो गई और मधुलिका की नजरे पहली बार उसके लंड पर पड़ी तो उसकी रूह कांप उठी। हाय भगवान ये क्या हैं।कितना लंबा मोटा लंड कैसे हो सकता है, बिलकुल घोड़े के जैसा लंड। मधुलिका की चूत में सिरहन सी दौड़ गई और उसके मुंह से एक जोरदार आह निकल पड़ी तो मोहित की आंखे खुल गई और अपनी मम्मी को अपने को अपने लंड को ललचाई नजरों से देखते हुए पाकर मोहित ने उसकी साड़ी को पूरी तरह से उसके जिस्म पर से हटा दिया और सिर्फ एक पेंटी उसके जिस्म पर थी। मधुलिका मदहोश सी हुई उसे देख रही थी।


मोहित ने मधुलिका की चूत के आस पास उंगली से सहलाया और फिर ब्रश से उसकी चूत साफ करने लगा तो मधुलिका मस्ती से कराह उठी। मधुलिका की आधी से ज्यादा चूत पेंटी से बाहर निकली हुई थी और जैसे ही ब्रश चूत के भीग लिप्स से टकराया तो मधुलिका पागल सी होकर फिर से अपनी चुचियों को मसलने लगी। मोहित ने चूत के आस पास साफ करने के बाद ब्रश को एक तरफ रख कर और जैसे ही मशीन को उठाया तो उसका लंड मधुलिका की जांघ से जा टकराया तो मधुलिका उसकी कठोरता महसूस करके अश अश कर उठी और फिर से उछल पड़ी। मोहित ने जैसे ही टैटू की मशीन को उठाया तो मधुलिका बेकाबू होकर उसकी तरफ देखने लगी। मोहित ने उसकी चूत से थोड़े उपर जैसे ही मशीन घुमाई तो मधुलिका जोर से उछल पड़ी। मोहित एक फिर से अपनी मां की जांघो पर बैठ गया और टैटू बनाने लगा तो मधुलिका उछल उछल पड़ने लगी और उसके मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी तो मोहित ने उसकी पैंटी के उपर हल्का सा मशीन को चला के बोला:"

" यहां कौन सा टैटू बनाऊं मम्मी आपकी चूत पर ?

मशीन चूत पर छूते ही मधुलिका पूरी ताकत से कराह उठी और उसकी चूत उसके दिमाग में घुस गई और उसने पूरी तरह से बेशर्म होकर अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ लिया और सिसकी:

" आह ये बना दे मोहित। अपनी मां मधुलिका की चूत पर अपना लंड बना दे हाय।

मोहित से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी मां की चूत पर पेंटी के थोड़ा सा ऊपर लंड बनाना शुरू कर दिया आई मधुलिका ने जोर जोर से मस्ती से कराहना शुरू कर दिया। गुदगुदी के कारण वो उछलती और अपने बेटे के लंड को मसल देती।


मोहित पूरी तरह से पागल सा हो गया और अपने जैसा एक लंड अपनी की चूत पर बनाने लगा। मधुलिका उत्तेजना से पागल सी हो गई और उछल उछल पड़ रही थी। मधुलिका की चूचियां एक तालबध लय में उछल रही थी और वो अपनी चुचियों को खुद ही मसल रही थी।मोहित ने उसकी आंखो में देखते हुए उसकी पेंटी को नीचे की तरफ खिसका दिया तो मधुलिका ने उसे सहयोग दिया और उसकी मां की चूत पूरी तरह से नंगी होकर उसके सामने आ गई तो मोहित ने सीधे उसकी चूत को चूम लिया तो मधुलिका जोर से सिसकी :

" आह बेटा पहले टैटू तो बना दे।

मधुलिका ने अपनी बात से एक ही बार में साफ कर दिया कि टैटू के बाद उसे कोई ऐतराज नहीं होगा।मोहित अब पागल सा हो गया था और उसकी चूत के होंठ को अपनी जीभ से चाटते हुए सिसका

" आह मम्मी टैटू तो आज अपने लंड से बनाऊंगा आपकी चूत।

मधुलिका ने अपनी जांघो को पूरा खोल दिया और मोहित ने मशीन को उसकी चूत पर फिर से शुरू कर दिया और मधुलिका फिर से तड़पने लगी। मधुलिका की चूत से आग की लपटे सी निकल रही थी जो मोहित के हाथ को झुलसा सा रही थी जिससे मोहित और बहकता जा रहा था और जैसे ही टैटू बना तो मधुलिका ने अपनी चूत पर बने लंड टैटू के उपर से उंगली फेरते उंगली को अपनी चूत में घुसा दिया और मोहित के मुंह की तरफ उंगली बढ़ा दी तो मोहित ने सीधे अपनी जीभ को मधुलिका की चूत में घुसा दिया और मधुलिका अपने जिस्म को मस्ती से कराहती हुई बेड पर पटकने लगी



उसने मोहित का सिर अपनी चूत मे घुसा सा दिया और मोहित जोर जोर से उसकी चूत चूसने लगा तो मधुलिका पूरी तेज आवाज में सिसक रही थी और लंड को मसल रही थी। मधुलिका से अपने बेटे की गर्म जीभ अपनी चूत पर बर्दाश्त नहीं हुई और उसने मोहित को अपने ऊपर खींच लिया जिससे लंड उसकी चूत पर आ लगा और मधुलिका ने अपनी दोनो टांगे उसकी कमर में कस दी तो मोहित उसकी चूत पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़ने लगा तो मधुलिका अपनी चूत उठाते हुए सिसकी"

" आह मोहित अपनी मां की चूत में अंदर तक अपने लंड से टैटू बन दो।

मोहित ने उसकी आंखो में देखते हुए एक जोरदार धक्का मारा लेकिन चूत ज्यादा चिकनी होने के कारण लंड फिसल गया तो मधुलिका तड़प उठी और उसने लंड को अपने हाथ से पकड़कर चूत के छेद पर अड़ा दिया और सिसका उठी

" आह मोहित, यहां घुसा आह्ह्ह्ह्ह जल्दी गुस्सा।

मोहित उसकी चूत की गर्मी अपने सुपाड़े पर पाकर तड़प उठा और उसकी दोनो चूचियां पकड़कर पूरा लंड एक ही धक्के में जड़ तक घुसा दिया



मधुलिका दर्द से कराह उठी और अपने बेटे से चिपकती चली गई

" आह मोहित, मर gyiii यूआईआईआई मम्मी आह्ह्ह्ह्।

मधुलिका की पूरी रात से तड़प रही चूत लंड की रगड़ बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और मधुलिका पागल सी हो गई और जोर जोर से सिसक पड़ी। मोहित भी अपनी मां की चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने अपने वीर्य की बारिश मधुलिका की चूत के अंदर कर दी और उसे पूरी ताकत से अपनी बांहों में भींच लिया और दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़ते चले गए।
 
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