चैप्टर १०७९
नेहा बुआ रोते हुए अपने कमरे में चलि गयी और कोमल कविता मेरे गले लग गयी
अवी:-मैं आ गया हूँ ना अब रोना बंद करो,
कोमल:-पापा कहा चले गये
अवी:-वो हमारे दिल में है
कविता:-भैया आप हमें छोड़ कर मत जाना
अवी:-नहीं जाउँगा ,मैं तो अपना सामान भी लेकर आ गया हु
श्वेता दीदी:-कोमल थोड़ा आराम कर लो
नीता बुआ:-कविता चलो मेरे साथ,
दोनो वैसे ही मेरे गले लगी रही
अवी:-मैं कही नहीं जाऊंगा, बुआ के साथ जाव
कोमल और कविता नीता बुआ के साथ अपने कमरे में चलि गयी
पूजा बुआ:-अवि
अवी:-हां बुआ
पूजा बुआ:-तुमे पता है ना तुम क्या कर रहे हो
अवी:-हां ,मुझे पता है
पूजा बुआ:-शीतल पूनम तुम कोमल के पास जाव
शीतल दीदी कोमल के कमरे में गयी और नीता बुआ हॉल में आ गयी
पूजा बुआ:- तुम्हारे ऐसा करने से नेहा को दर्द हो रहा है
अवी:-सालो से जो दर्द उनके दिल में छुपा हुआ है उसपे मलम लगा रहा हु
नीता बुआ:-नेहा का दिल इतना दर्द झेल नहीं पायेगा तुम्हारे ऐसा करने से उसके दिल को ठेस लग रही है
अवी:- ऐसा करना जरुरी है
पूजा बुआ:-अगर नेहा पे इसका उल्टा असर हुआ तो
अवी:-कैसा भी हो उसके लिए में तैयार हु
ब चाची:-नेहा तुझसे नफरत करने लगेगी
अवी:-मैं भी यही चाहता हूँ की नेहा बुआ एक तो मुझे प्यार करे या नफरत करे
नीता बुआ:-क्या मतलब
अवी:-नेहा बुआ मुझे प्यार भी करती है और नफरत भी,ज़ो उनके लिए अच्छा नहीं रहेगा ऐसा करने से नेहा बुआ अंदर ही अंदर रोती रह्ती है
जतीन :- ये बहुत रिस्की है जो तुम कर रहे हो नेहा भाभी के दिल में क्या है कोई नहीं बता सकता, सुरेश ने भी कोशिश की थी पर कोई फायदा नहीं हुआ
अवी:-तब बात अलग थी अब अलग है
पूजा बुआ:-तुम्हे जैसा लगे वैसा करना, नेहा को खुश रखना
अवी:-मैं हमारे फॅमिली के लिए कर रहा हु
सीमा चाची:-हमें अवी के दादाजी को बताना चाइये की नहीं
सबने एक साथ जवाब दिया ,"नहि"
पूजा बुआ:-पिताजी को कुछ पता नहीं चलना चाहिये
नीता बुआ:-पिताजी नेहा को ऐसे नहीं देख पायेंगे
सीमा चाची :- उनको बताना न बताना एक जैसा था, उनकी हालत अच्छी थोड़ी है जो वो समज पायेंगे
बडी चाची:-सीमा तुम देख के बोला कर, पिताजी नेहा से बहुत प्यार करते है नेहा को ऐसा देख के उनकी हालत और ख़राब हो जायेंगी
सीमाचाची:-मैं तो बस पूछ रही थी
पूजा बुआ:-गलती से भी उनको पता नहीं चलना चाइये
छोटी चाची:-मैं ध्यान रखूँगी की उनको पता न चले
जतीन:-मैं लीना को लेकर घर जाता हूँ राजेश भी आता होगा
नीता बुआ:-आप लीना को संभाल लेना में यही रुकति हु
पूजा बुआ:-तुज़े तो रुकना ही होगा तेरे बिना नेहा को संभालना मुश्किल होगा तू ही उसको संभाल सकती है
छोटी चाची:-नीता कर पायेगी? कल मना कर रही थी
नीता बुआ:- अवी को देख कर मेरी हिम्मत बंध गयी है
बडी चाची:-हमें जाना चाहिये बच्चों को भूक लगी होगी
पूजा बुआ:-तू जा ,ओर सीमा को भी ले जा,
सीमा चाची:-पूजा दीदी ,मैं तो
पूजा बुआ:-बच्चों को भूख लगी होगी इस लिये कह रही हु
छोटी चाची:-मैं भी चलती हु
नीता बुआ:-मीना तू रुक ना
छोटी चाची:-अवि है ना, वो अकेला संभाल सकता है
नीता बुआ:-एक बार आकर जाना
छोटी चाची:-जैसा तुम कहो
पूजा बुआ:- निता तुम नेहा के कमरे का गेट खोलने की खोशिश करो में अपने घर से खाना लेकर आती हू
पूजा बुआ ने सब को क्या करना है ये बता कर कोमल और कविता के लिए खाना लेने चलि गयी
श्वेता दीदी और पूनम दीदी कोमल के साथ बैठी हुयी थी
नीता बुआ और में हॉल में बैठ कर एक दूसरे की तरफ देख कर सोच रहे थे
अवी:-बुआ
नीता बुआ:-हां
अवी:-एक बार पाप करके देखे
नीता बुआ:-क्या कहा,ऐसे हालात में तुम कैसे कह सकते हो
अवी:-एक बार करते है ना
नीता बुआ :- अवी, ये कुछ ज्यादा ही हो रहा है
अवी:-नहीं करेंगी
नीता बुआ:-मुझे तुमसे ये उमीद नहीं थी
अवी:-मुझे भी आपसे ये उमीद नहीं थी
नीता बुआ:-तुमे ये कैसे कह सकते हो, वो भी जब कोमल के पापा की डेथ हुयी है
अवी:-आप ऐसे कैसे बैठी रह सकती है जब नेहा बुआ ने खुद को कमरे में कैद कर लीया है
नीता बुआ:-मैं वही सोच रही हूँ की कमरे का गेट कैसे खोलू
अवी:-सोचने से काम नहीं चलेगा कुछ कीजिये
नीता बुआ उठ कर डोर के पास गयी
नीता बुआ:-नेहा डोर खोल, ऐसे रोने से जीजाजी वापस नहीं आएंगे
नेहा बुआ ने जवाब नहीं दिया बस रो रही थी
नीता बुआ:-नेहा मेरे लिए डोर खोल, ऐसे रोयेंगी तो में भी रो दूंगी
नेहा बुआ:-तू जा यहाँ से
नीता बुआ:-एक बार डोर खोल में तुझे देख कर चलि जाउँगी
नेहा बुआ:-मुझे अकेला छोड़ दो
नेहा बुआ ऐसे नहीं मानेंगी
मैं कोमल के कमरे में गया और स्वेता दीदी को बताया की कोई बाहर मत आना,
फिर मेंने नीता के कान में अपना आईडिया बताया
ओर नीता बुआ की कमर पे जोर से चुटकी काट ली
नीता बुआ जोर से चिल्लाई
नीता बुआ:-माँआआआ……
नीता बुआ की आवाज़ सुनते नेहा बुआ डोर के पास आ गयी
नेहा बुआ:- नीता,
अवी:-बुआ क्या हुआ,आंखे खोलों,कोई पाणी लेकर आओ
मेरी आवाज़ सुनकर नेहा बुआ ने डोर खोल दिया और मेंने नीता बुआ को अंदर धक्का दे दिया
नीता बुआ कमरे के अंदर चलि गयी नेहा बुआ कुछ समझती उस से पहले मेंने डोर बाहर से बंद किया
मैं बाहर से बंद न करता तो बुआ अंदर से कर देती
नीता बुआ नेहा बुआ के पास रहेंगी तो वो उनके लिए अच्छा होगा
नीता बुआ को ठीक देख कर नेहा बुआ उसके गले लग कर रोने लगी
नीता बुआ नेहा बुआ को संभाल लेंगी
मैं कोमल के कमरे में चला गया और स्वेता दीदी को हॉल में भेज दिया
कोमल और कविता ने मेरे शर्ट को अपने आंसू से गिला करना शुरू किया
पूजा बुआ खाना लेकर आ गयी
कोमल और कविता ने खाना खाने से मना किया
उनको खाना खिलाना जरुरी था,अइसे में मेंने पूजा बुआ को खाना किचन में रखने को कहा
पूजा बुआ ने खाना किचन में रख दिया और नीता बुआ को बता दिया की खाना किचन में है
नेहा बुआ ने खाना खाने से मना कर दिया
छोटी चाची ने रात में एक बार आकर देखा की में क्या कर रहा हु
मुझे कोमल और कविता के साथ देख कर वापस चलि गयी पूजा बुआ भी अपने घर चलि गयी