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Incest सुलगते जिस्म और रिश्तों पर कलंक

रात के 11.30 हो रहे थे तभी अचानक मेरा मोबाइल बजने लगता है...

ये कॉल डॉक्टर आलोक का था...में एक पल कुछ सोचता हूँ और वो कॉल पिक कर लेता हूँ...

डॉक्टर--जय मैने वो डीयेने रिपोर्ट्स रेडी कर ली है, और ...वो सारे डीयेने एक दूसरे से मच कर रहे है जैसे एक ही परिवार के हो...मुझे लगा शायद ये जानना तुम्हारे लिए इम्पोर्टेंट होगा इसीलिए टेस्ट ख़तम होते ही मैने तुम्हे फोन कर दिया...

में--सर आपका बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने इस समय कॉल करके ये न्यूज़ सुनाई है...ये मेरे एक दोस्त के परिवार के सॅंपल थे जो मैने आपको टेस्ट करने के लिए दिए थे...कुछ ग़लतफ़हमियाँ होगयि थी उन सभी को इस लिए वो टेस्ट आपसे करवाने पड़े...

डॉक्टर--ठीक है जय मेरा काम अब ख़तम हुआ...कल किसी भी वक़्त आकर तुम वो रिपोर्ट्स ले जा सकते हो...

बाइ गुड नाइट.......

मैने अब तक उस बोतल में से केवल 3 हे पेग बना कर पिए थे...डॉक्टर. के फोन आने के बाद खुशी की अधिकता की वजह से जो भी पिया उसका थोड़ा भी नशा मुझ पर नही हुआ....

तभी मेरे दरवाजे पर दस्तक होती है..में उठ कर दरवाजा खोलने से पहले वो सारा सामान अपने बेड के नीचे सरका देता हूँ...और दरवाजा खोल देता हूँ...

सामने मम्मी खड़ी थी...उन्होने उस वक़्त एक साधारण सा साड़ी ब्लाउस पहन रखा था....लेकिन मम्मी उस में से भी मुझे काफ़ी सुंदर लग रही थी...

मम्मी को देखते ही मैने उन्हे अपनी बाहो में भर लिया और उनके गालो पर किस करने लगा..

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मम्मी--अरे....अरे...पागल छोड़ मुझे क्या कर रहा है....आज इतना प्यार कैसे आ रहा है अपनी माँ पर...

में--मम्मी आज में बहुत खुश हूँ...और ये कहने के साथ ही मेने उन्हे और ज़ोर से भीच लिया खुद की बाहो में...

मम्मी--जय ऐसी क्या बात है जो मुझे इस तरह भीच रहा है...मुझे मारेगा क्या....छोड़ मुझे मेरा दम घुट रहा है...

मैने उनकी ये बात सुनकर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर दी...और मेरी पकड़ ढीली होते ही वो ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगती है...

में--सॉरी मम्मी....वो बात ही कुछ ऐसी थी कि में खुशी के मारे आपको ज़ोर से हग कर बैठा...

मम्मी--अब मुझे बताएगा भी या अकेला ही खुश होता रहेगा...

में--मम्मी में आपका और पापा का ही बेटा हूँ...मैने उन सभी बालो का डीयेने टेस्ट करवाया था और इस से साबित हुआ कि मेरे अंदर पापा का खून है...में नाजायज़ नही हूँ माआ.....

मम्मी की आँखो में अब आँसू आ गये थे और इस बार उन्होने मुझे कस कर गले लगा लिया...

मम्मी--जय तूने आज ये बात बोलकर मेरे सीने से बहुत बड़ा बोझ उतार दिया है...

में--मम्मी में बस आपको खुश देखना चाहता हूँ...

मम्मी--तेरे मुँह से शराब की गंध कैसे आ रही है....तूने आज शराब पी है क्या....

में अपना सिर झुकाते हुए हाँ में अपनी गर्दन हिला देता हूँ...

मम्मी--सारी पी गया या मेरे लिए भी कुछ बचाया है....ये तो खुशी का मोका है...

में वहाँ से हट कर अपने बेड के नीचे से सारा सामान निकाल देता हूँ...और वापस उसे टॅबेल पर रख देता हूँ...

मम्मी मेरे बगल में ही आकर बैठ गयी थी बेड पर....और में उठ कर किचन में से ग्लास लेने चला जाता हूँ...

फिर रूम में आकर हम दोनो का ग्लास भरने के बाद मम्मी को एक ग्लास पकड़ा देता हूँ...

मम्मी उसे एक ही साँस में गटक जाती है....और उस खाली ग्लास को सामने टॅबेल पर रखते हुए कहती है....

मम्मी--ये शराब ज़्यादा मत पिया कर...ये सब कुछ खराब कर देती है...

में मम्मी को बस देखे ही जेया रहा था...तभी अचानक फिर से दरवाजे पर दस्तक होती है...में उठ पाता उस से पहले नीरा रूम में आ जाती है....वो हम दोनो को इस तरह शराब पीता देख, हम लोगो को बस एक टक देखती रहती है....

में वहाँ से उठता हूँ और नीरा को अपनी गोद में उठा कर बेड पर लेटा देता हूँ....और उसका सिर अपनी एक जाँघ पर रख देता हूँ....

में--मम्मी--में आपसे एक बात करना चाहता हूँ...

मम्मी नीरा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहती है...

मम्मी--बोल जय क्या बात है....ऐसी कौनसी बात है जिसे कहने के लिए तुझे मेरी पर्मिशन की ज़रूरत पड़ गयी है.....

में--मम्मी इस पागल ने मुझ से एक कसम ले ली है....और मुझे समझ में नही आरहा कि में वो कैसे पूरी करूँ...

मम्मी--ऐसी कौनसी कसम में फसा दिया तुझे इस पागल ने जो तुझ से पूरी नही हो रही है...

में--मम्मी ये मुझ से शादी करना चाहती है ....

मम्मी--तो कर ले फिर.....क्या कहा तूने...

मम्मी ने चोंक कर एक बार फिर मुझ से पूछा...

में--मम्मी हम दोनो शादी करना चाहते है.... इस बार मेरी आवाज़ में धृड़ता थी.

मम्मी--ये कैसी बात कर रहा है जय...तुम दोनो भाई बहन हो ये पासिबल नही है...छुप कर नाजायज़ रिश्ते बनाना आसान होता है लेकिन इस तरह सबके सामने शादी करना नामुमकिन...

में--मम्मी हम दोनो यहाँ से बहुत दूर चले जाएँगे जहाँ हमे कोई जानता ना हो...

मम्मी --तू ये कैसी बाते कर रहा है जय....माना मुझ से भी ग़लती हुई थी इसलिए में तुम लोगो के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती नही कर सकती....लेकिन फिर भी तुम दोनो मेरे बच्चे हो में कैसे देख पाउन्गि ये सब...

मैने अपनी जाँघ पर कुछ गीलापन महसूस किया जो कि नीरा के आँसुओ की वजह से हो गया था मैने उसको रोता देख उसे अपने सीने से लगा लिया....और मम्मी से कहने लगा...

में--मम्मी में कसम खा चुका हूँ अब मुझे कोई नही रोक सकता...नीरा के कॉलेज के बाद में उस से शादी करूँगा...चाहे कुछ भी हो जाए...

नीरा--सुबक्ते हुए....भैया मेरी वजह से आप घर मत छोड़ना...में ही सब कुछ छोड़ कर चली जाउन्गि...

में--तू जहाँ भी जाएगी मेरे साथ ही जाएगी...

नीरा मेरी बाहो में बिल्कुल किसी बच्चे की तरह समा रही थी...और मम्मी पता नही क्या सोचे जा रही थी...
 
मम्मी--कोई कहीं नही जाएगा....अगर तुम दोनो बे फ़ैसला कर ही लिया है तो ठीक है...लेकिन मुझे बस एक बात का जवाब दो....नेहा का में क्या करूँ??

नेहा को खुश रखने की आख़िरी उम्मीद मुझे तू ही दिख रहा था....लेकिन शाआद उसकी किस्मत में दुख ही लिखे है....

नीरा--मम्मी अगर आप नेहा भाभी की शादी भैया से करवाना चाहते हो तो मुझे इसमें कोई हर्ज नही है....में भाभी को अपनी सोतन मानने को रेडी हूँ....लेकिन सिर्फ़ एक शर्त है....भाभी जब तक खुद भैया से शादी के लिए हाँ नही कहेंगी उन से इस बारे में कोई कुछ नही कहेगा....

अगर उनकी किस्मत में भैया का प्यार लिखा है तो कभी ना कभी वो इनको मिल ही जाएगा...

मम्मी--ये किस्मत विस्मत कुछ नही होती...ना किसी ने कल क्या होने वाला है किसी ने देखा है....में सुबह ही नेहा से इस बारे में बात करूँगी....

में--नही मम्मी आप भाभी से इस बारे में कोई बात नही करोगी....और रही किस्मत की बात तो...जब में उस रात को घर छोड़ कर निकला था....मुझे हर बात पर यकीन हो गया है..इसलिए आपको भाभी से कोई बात नही करनी है....

मम्मी--ठीक है में कोई बात नही करूँगी....लेकिन अगर मुझे लगा कि वो अकेले नही रह पा रही है , उस पल में उस से बात ज़रूर करूँगी.... इतना बोलकर मम्मी बेड पर से उठ गयी और नीरा का हाथ पकड़ कर लेजाते हुए बोली...

मम्मी--अभी तेरी शादी नही हुई है...इसलिए अब से तू अकेले जय के साथ नही रहेगी....चल मेरे साथ और अपने रूम में जाकर चुप चाप सो जा .....

मम्मी की ये बात सुबकर नीरा उनसे अपना हाथ छुड़ा कर मेरे पास आई...और मेरे गालो पर एक ज़ोर दार किस करते हुए....

नीरा--अब जल्द ही हम दोनो की शादी हो जाएगी....उसके बाद हमे कोई अलग नही कर सकेगा....

फिर नीरा और मम्मी रूम से बाहर चले जाते है...

में मुस्कुराता हुआ शराब की उस बोतल को देखने लगता हूँ वो अभी तक आधी ही हुई थी...

मैने बोतल खाली करते हुए तीन बड़े बड़े पेग बोतल से बनाए और जल्दी जल्दी पी जाता हूँ...

अब मुझे नशा चढ़ गया था और में बेड पर लुढ़क जाता हूँ...और सपनो में खो जाता हूँ...

में पूरी तरह से बेहोशी की नींद में था...

तभी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैने अपनी जाँघ पर कुछ गीलापन महसूस किया जो कि नीरा के आँसुओ की वजह से हो गया था मैने उसको रोता देख उसे अपने सीने से लगा लिया....और मम्मी से कहने लगा...

में--मम्मी में कसम खा चुका हूँ अब मुझे कोई नही रोक सकता...नीरा के कॉलेज के बाद में उस से शादी करूँगा...चाहे कुछ भी हो जाए...

नीरा--सुबक्ते हुए....भैया मेरी वजह से आप घर मत छोड़ना...में ही सब कुछ छोड़ कर चली जाउन्गि...

में--तू जहाँ भी जाएगी मेरे साथ ही जाएगी...

नीरा मेरी बाहो में बिल्कुल किसी बच्चे की तरह समा रही थी...और मम्मी पता नही क्या सोचे जा रही थी...

मम्मी--कोई कहीं नही जाएगा....अगर तुम दोनो बे फ़ैसला कर ही लिया है तो ठीक है...लेकिन मुझे बस एक बात का जवाब दो....नेहा का में क्या करूँ??

नेहा को खुश रखने की आख़िरी उम्मीद मुझे तू ही दिख रहा था....लेकिन शाआद उसकी किस्मत में दुख ही लिखे है....

नीरा--मम्मी अगर आप नेहा भाभी की शादी भैया से करवाना चाहते हो तो मुझे इसमें कोई हर्ज नही है....में भाभी को अपनी सोतन मानने को रेडी हूँ....लेकिन सिर्फ़ एक शर्त है....भाभी जब तक खुद भैया से शादी के लिए हाँ नही कहेंगी उन से इस बारे में कोई कुछ नही कहेगा....

अगर उनकी किस्मत में भैया का प्यार लिखा है तो कभी ना कभी वो इनको मिल ही जाएगा...

मम्मी--ये किस्मत विस्मत कुछ नही होती...ना किसी ने कल क्या होने वाला है किसी ने देखा है....में सुबह ही नेहा से इस बारे में बात करूँगी....

में--नही मम्मी आप भाभी से इस बारे में कोई बात नही करोगी....और रही किस्मत की बात तो...जब में उस रात को घर छोड़ कर निकला था....मुझे हर बात पर यकीन हो गया है..इसलिए आपको भाभी से कोई बात नही करनी है....
 
मम्मी--ठीक है में कोई बात नही करूँगी....लेकिन अगर मुझे लगा कि वो अकेले नही रह पा रही है , उस पल में उस से बात ज़रूर करूँगी.... इतना बोलकर मम्मी बेड पर से उठ गयी और नीरा का हाथ पकड़ कर लेजाते हुए बोली...

मम्मी--अभी तेरी शादी नही हुई है...इसलिए अब से तू अकेले जय के साथ नही रहेगी....चल मेरे साथ और अपने रूम में जाकर चुप चाप सो जा .....

मम्मी की ये बात सुबकर नीरा उनसे अपना हाथ छुड़ा कर मेरे पास आई...और मेरे गालो पर एक ज़ोर दार किस करते हुए....

नीरा--अब जल्द ही हम दोनो की शादी हो जाएगी....उसके बाद हमे कोई अलग नही कर सकेगा....

फिर नीरा और मम्मी रूम से बाहर चले जाते है...

में मुस्कुराता हुआ शराब की उस बोतल को देखने लगता हूँ वो अभी तक आधी ही हुई थी...

मैने बोतल खाली करते हुए तीन बड़े बड़े पेग बोतल से बनाए और जल्दी जल्दी पी जाता हूँ...

अब मुझे नशा चढ़ गया था और में बेड पर लुढ़क जाता हूँ...और सपनो में खो जाता हूँ...

में पूरी तरह से बेहोशी की नींद में था...

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में पूरी तरह से बेहोशी की नींद में था...

तभी मेरे रूम का दरवाजा खुलता है और एक साया मेरे सिर के पास आकर बैठ जाता है....सब से पहले वो अपने होंठो से मेरे होंठो पर किस करता है...उसके बाद उसका हाथ धीरे धीरे मेरे नंगे सीने से सरकता हुआ मेरे बरमोडे में घुसने लगता है....

शराब के नशा और थकान से भरी नींद की वजह से मुझे कुछ भी होश नही था मेरे साथ क्या हो रहा है...उस साए ने मेरे बरमोडे में हाथ डालकर मेरे लिंग को सहलाना शुरू कर दिया....

मानव शरीर की कुछ इंद्रिया ऐसी होती है जो दिमाग़ के सोए रहने पर भी जाग्रत हो जाती है....उन्ही इंद्रियो में से लिंग भी एक है.,.

मेरा लिंग पूरी तरह से ताव में आचुका था और उस साए ने अपनी पकड़ लिंग पर मजबूत बना ली...

अगले ही पल उसने अपना हाथ बाहर निकाला और मेरे बरमूडे को मेरी टाँगो के नीचे तक सरका दिया...

कुछ पल तक वो साया मेरे पूरी तरह से तन्नाये लिंग को देखता रहा और अगले ही पल वो खुद के कपड़े उतारने लग गया....उसने अपने एक हाथ से मेरा हाथ उठा कर अपने चेहरे पर घुमाया फिर अपने बूब्स पर मेरे हाथ को रगड़ने लगा...

उसके बाद वो मेरे एक पैरों पर बैठ गयी और मेरा पूरा लिंग जड़ समेत अपने मुँह में भर कर उसे चूसने लगी...वो बिना घबराए मेरे लिंग को लगातार चूसे जा रही थी...तभी वो मेरे घुटने पर अपनी चूत को रगड़ने लग गयी...

में इस समय एक सपना देख रहा था जिस में रिया मेरे लिंग को चूसे जा रही थी...लेकिन में ये नही जानता था कि सपने से बाहर भी कोई मेरे जिस्म से अपनी आग बुझा रहा है...

वो मेरे घुटने पर अपनी चूत रगड़ते रगड़ते झड़ने लगी और उसी वक़्त में भी उसके मुँह में अपना लावा भरने लग जाता हूँ...

अब सब तरफ शांति छा गयी थी सपने में रिया और में भी शांत थे...और सपने के बाहर वो साया भी...उसके बाद उसने मेरे बरमूडा वापस उपर कर दिया...और अपने कड़े पहन कर वो साया बाहर चला गया....और में घनघौर नींद में आनद की अनुभूति करते हुए सोया पड़ा रहा....

सुबह एक हाथ लगातार मेरे कंधे को झींझोड़े जा रहा था...

भैया....भैया...उठो जल्दी उठो देखो सूरज सिर पर आ गया है और आप अभी तक सो रहे हो....

ये आवाज़ में पहचानता था....इतने सालो से जो मुझे नींद में से उठा रही थी ये आवाज़...

में--नींद में ही....क्या हुआ दीदी सोने दो ना...

रूही--अबे उठ जा बाहर चाचा जी इंतजार कर रहे है नाश्ते पर...

दीदी की ये बात सुनकर में चोंक कर बैठ जाता हूँ...चाचा जी....

में--तुम लोग कब आए...

रूही-- हम लोग सुबह ही आए है , अब जल्दी चलो चाचा जी बुला रहे है....

उसके बाद रूही वहाँ से चली जाती है और में हाथ मुँह धोकर बाहर हॉल में आजाता हूँ...वहाँ सभी लोग बैठे हुए थे बस भाभी ही वहाँ नही थी...

चाचा--रात को देर तक जागता रहा क्या जय...

में--नही चाचा जी वो थकान की वजह से नींद थोड़ी ज़्यादा गहरी आ गयी थी...

चाचा--चल ठीक है आजा बैठ नाश्ता कर तेरी चाची ने आज आलू और मूली के परान्ठे बनाए है ....

में--तब तो बैठना हे पड़ेगा पता नही क्यो मुझे भी बड़े ज़ोर की भूक लग रही है...

मम्मी--रात को खाना नही खाएगा तो भूक तो लगेगी ही...

में--तभी में सोचु मुझे इतनी ज़ोर से भूक क्यो लग रही है रात को तो में खाना बिना खाए ही सो गया था...

चाचा--बेटा एक बात कहनी थी तुम से...

में--हाँ चाचा जी बोलिए क्या बात है...

चाचा--बेटा में सोच रहा था कोमल और दीक्षा का अड्मिशन इसी शहर में करवा दूं..तुम सब के साथ ये दोनो रहेंगी तो अच्छे बुरे की समझ भी आज़एगी और आगे पढ़ भी लेगी.........

में--चाचा जी आपके कहने से पहले ही में इन दोनो से बात कर चुका हूँ....नीरा भी अभी स्कूल में बात कर लेगी और में भी कल कॉलेज में जाकर बात कर लूँगा....आप चिंता ना करे...

चाचा--तब फिर ठीक है अब में निश्चिंत होकर गाँव जा सकता हूँ....

में--चाचा जी में ऐसे नही जाने दूँगा आपको यहाँ से...कुछ दिन तो हमारे साथ रहना ही होगा...

चाचा--बेटा मुझे और तेरी चाची को जाना ही पड़ेगा नयी फसल लगाने का टाइम अब आ गया है इसलिए मुझे रोक मत...

में--ठीक है चाचा लेकिन जैसे ही आप लोग काम से फ्री हो जाओगे आप सीधा यहाँ आओगे...

चाचा--ठीक है बेटा जैसा तू चाहे...बल्कि में तो ये चाहूगा जब तुम लोगो की छुट्टियाँ हो तब एक बार तुम सब लोग गाँव ज़रूर आओ...

में--हाँ चाचा जी हम लोग ज़रूर आएँगे...

चाचा--ठीक है बेटा में यहाँ के बाज़ार घूम कर आता हूँ...खेती के लिए बीज और खाद सोच रहा हूँ यही से ले जाउ....

में--जैसा आप चाहे चाचा जी....

उसके बाद नीरा स्कूल चली गयी और चाचा बाज़ार मुझे कॉलेज जाना था लेकिन मैने आज कॉलेज जाने का प्रोग्राम कंसिल कर दिया...

चाची--जय तेरे लिए परान्ठे और लेकर आउ...

में --नही चाची...मेरा पेट भर गया है अब...

चाची मेरे पास खड़ी होकर बोलती है...

चाची--तू आज कॉलेज नही जाएगा क्या....

में--नही चाची ....में आज आप से कुछ बात करना चाहता हूँ...इसलिए कॉलेज नही जा रहा...

चाची--अरे वाह मुझ से बात करनी है इसलिए तू कॉलेज नही जा रहा ....आज कुछ ख़ास बात करनी लगता है...

में--हाँ चाची बात तो ख़ास ही है लेकिन में आप से थोड़ी देर अकेले में बात करना चाहता हूँ..आप मेरे रूम में चलिए में अभी आता हूँ हाथ धो कर...

में हाथ धो कर रूम में पहुँच जाता हूँ...चाची वहाँ मेरी कुछ बुक्स देख रही थी...मुझे रूम में आता देख कर उन्होने वो बुक्स वही रख दी और कहने लगी....

चाची-- हाँ बोल क्या बात है......ऐसी क्या बात करनी थी तुझे अकेले में.......

मैने अंदर आने के बाद दरवाजा लॉक कर दिया और चाची की तरफ बढ़ने लगा...

में--चाची में आपसे ये जानना चाहता हूँ आपने मेरी बहनों को मुझ से दूर क्यो किया....

चाची--पागल ये कैसा सवाल है....में भला क्यो तेरी बहनों को तुझ से दूर करूँगी...
 
में--चाची मुझे सब पता चल गया है....कोमल और दीक्षा किसका खून है....में बस आपसे सच सुनना चाहता हूँ...

चाची--ये क्या बकवास कर रहा है तू...मुझे अब बाहर काम है में बाहर जा रही हूँ.....

मैने चाची को अपने बाहो में भरते हुए....आप क्यो सोई थी पापा के साथ....में ये सच जाने बिना आपको कहीं नही जाने दूँगा...

चाची की आँखो में अब आँसू आचुके थे....और वो अपनी सारी भडास निकालती चली गयी....जब उनके दिल का बोझ कम हुआ तो वो मेरे सामने किसी निर्जीव प्राणी को तरह खड़ी थी...

मैने अपना हाथ आगे बढ़कर उनके सीने से उनका पल्लू हटा दिया....

वो अचानक मेरी इस हरकत से वापस होश में आजाती है....

चाची ये क्या कर रहा है तू.....में तेरी चाची हूँ....तुझे ये सब शोभा नही देता....

मैने चाची को अपने बाहो में भरते हुए....आप क्यो सोई थी पापा के साथ....में ये सच जाने बिना आपको कहीं नही जाने दूँगा...

चाची की आँखो में अब आँसू आचुके थे....और वो अपनी सारी भडास निकालती चली गयी....जब उनके दिल का बोझ कम हुआ तो वो मेरे सामने किसी निर्जीव प्राणी को तरह खड़ी थी...

मैने अपना हाथ आगे बढ़कर उनके सीने से उनका पल्लू हटा दिया....

वो अचानक मेरी इस हरकत से वापस होश में आजाती है....

चाची ये क्या कर रहा है तू.....में तेरी चाची हूँ....तुझे ये सब शोभा नही देता....

में--आपको बेटा देने की कोशिश कर रहा हूँ चाची.....लेकिन बिना आपकी मर्ज़ी के नही....

चाची-- क्या तू सच में मुझे बेटा दे सकता है....

में--हाँ चाची मेरे मन में जो विश्वास भरा है....उसी के कारण मुझे पूरा भरोसा है में आपको बेटा दे सकता हूँ....लेकिन मेरी एक शर्त है....

चाची--अगर तू मुझे बेटा दे देगा तो तू जो कहेगा में वो करूँगी....

एक बार फिर से चाची के मन में बेटा पैदा करने की लालसा जाग गयी थी...

में--आपको कोमल और दीक्षा को मेरे हवाले करना होगा और धीरे धीरे उन्हे सारे सच भी बताने होंगे...

चाची--ये कैसी बात कर रहा है जय तू...एक खुशी देकर तू मेरी दोनो खुशिया छीनना चाहता है....

में--चाची में आपकी कोई भी खुशी नही छीन रहा हूँ...आप हमेशा कोमल और दीक्षा की माँ ही रहोगी....लेकिन उन्दोनो मे खून मेरे पापा का है इसलिए आप से ज़्यादा हक हमारा बनता है उन दोनो पर....और अगर वैसे भी आप उन्दोनो को ये सच नही बताऑगी तो ये सच मुझे ही बताना होगा....में आपको बेटा इस लिए देना चाहता हूँ ताकि आपका मन उन दोनो से अलग होने के बाद तडपे ना....

चाची--जय अगर तू मुझे बेटा दे सकता है तो में कुछ भी करने को रेडी हूँ लेकिन याद रखना तेरे बाप की तरह तूने भी मुझे धोका दिया तो तेरे बाप के पूरे वंश को जड़ से ख़तम कर दूँगी में....

में अब चाची के ब्लाउस के बटन खोल चुका था उन्होने अंदर से एक पिंक कलर की ब्रा पहन रखी थी....मैने उनका ब्लाउस और ब्रा दोनो उतार कर साइड में रख दिया और पहाड़ की छोटी की तरह उनके बड़े बड़े बूब्स देखे ही जा रहा था....उनके बूब्स की निप्पल्स अब बिल्कुल कठोर होकर तन चुकी थी....

में उनकी निप्पेल्स पर अपनी नाक को रगड़ने लगता हूँ और अचानक किसी बच्चे की तरह उनकी निपल अपने मुँह में भर कर चूसने लग जाता हूँ...

में अपने एक हाथ से उनका दूसरा बूब दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी साड़ी खोलने लग गया था....

साड़ी खुल कर अब ज़मीन पर बिखर गयी थी. और मेरा हाथ उनके पेटिकोट के नाडे को खोलने में उलझ गया था...मैने एक ही झटके में वो नाडा खीच दिया और चाची का पेटिकोट सॅर्र्र्र की आवाज़ करता हुआ उनके पैरो में जा कर गिर गया.....चाची अब सिर्फ़ एक पिंक कलर की पैंटी में मेरे सामने खड़ी ग़ज़ब की खूबसूरत लग रही थी....मुझे इस तरह देख चाची ने शर्म से अपने चेहरे पर अपने हाथ रख लिए....में अपने घुटनो के बल बैठा और चाची की पैंटी एक ही झटके में उतार कर उनकी खूबसूरत चूत को देखने लग गया वो चूत काले बालो से धकि लगातार रिस रही थी....उसकी गर्म भभक मुझे अपने चेहरे पर महसूस होने लगी थी....

में उनकी चूत पर हाथ फेरता हुआ खड़ा हो गया और चाची को बाहो में लेकर उनके होंठ चूसने लग गया....होंठो के मिलन ने चाची की आग को और ज़्यादा भड़का दिया था...

उन्होने मुझे धक्का दिया और जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया ...उसके बाद चाची ने फिर से मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड लिया. ....और धीरे धीरे एक हाथ से मेरे लिंग को सहलाने लगती है....काफ़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे की बाहो में लिपटे रहने के बाद में चाची को आराम से बेड पर लेटा देता हूँ....और उनकी गान्ड के नीचे एक पिल्लो रख कर उनकी टांगे फैला देता हूँ...उसके बाद अपने लिंग को चाची की चूत पर टिका कर एक ज़ोर दार धक्का लगा देता हूँ....एक हे झटके में मेरा आधा लिंग चाची की चूत में समा जाता है....

में चाची की दोनो जांघे अपने कंधे पर रखता हूँ और एक ज़ोर दार झटका फिर से लगा देता हूँ....चाची की दर्द की वजह से आहह निकल जाती है.....उसके बाद में उनके बूब्स सहलाता हुआ धीरे धीरे चाची की चूत के अंदर अपना लिंग रगड़ने लगता हूँ....

उसके बाद मेरे कमरे में एक तूफान सा आजाता है....में अपने धकको की रफ़्तार लगातार बढ़ाता ही चला जा रहा था...पता नही इतनी ताक़त मुझ में कहाँ से आ गयी....चाची अब तक 3 बार झड चुकी थी और जब चाची ने मेरी आँखो को बंद होते देखा उसी पल चौथी बार वो झड़ने लगती है इस बार मेरा भी लावा उनके गर्भ की दीवारो पर दस्तक दे रहा था....अब हम दोनो बेसूध पड़े थे....
 
उसके बाद मेरे कमरे में एक तूफान सा आजाता है....में अपने धकको की रफ़्तार लगातार बढ़ाता ही चला जा रहा था...पता नही इतनी ताक़त मुझ में कहाँ से आ गयी....चाची अब तक 3 बार झड चुकी थी और जब चाची ने मेरी आँखो को बंद होते देखा उसी पल चौथी बार वो झड़ने लगती है इस बार मेरा भी लावा उनके गर्भ की दीवारो पर दस्तक दे रहा था....अब हम दोनो बेसूध पड़े थे....

तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से मुझे होश आया....

में ऐसे ही बिना कुछ पहने ही दरवाजे की तरफ बढ़ गया और पूछा कौन है....

बाहर से मम्मी की आवाज़ सुनते ही मैने तुरंत दरवाजा खोल दिया....मम्मी जैसे ही अंदर आई रूम का हाल देख कर उनकी आँखे खुली की खुली रह गयी..

चाची अभी भी बेसूध अपनी टांगे चौड़ी करे बेड पर पड़ी थी....उनकी चूत में से हम दोनो के मिलन का सबूत रह रह कर बाहर रिस रहा था........कभी मम्मी मेरी तरफ़ देखती और कभी चाची की तरफ....

अपनी फटी फटी आँखो से लगातार ये नज़ारा वो देखे ही जा रही थी........

में बिल्कुल नंगा मम्मी के सामने खड़ा था...मम्मी लगातार मुझे देखते हुए....

मम्मी--जय अपने कपड़े पहन....और बता मुझे ये सब क्या चल रहा है....

मम्मी की आवाज़ सुन कर चाची को जैसे होश आ गया वो तुरंत अपने बेड से उठकर खुद के कपड़े पहनने लगी...

मेने अपना बरमूडा डाल लिया था जब तक...मम्मी ने दरवाजा लॉक किया और बेड पर जाकर बैठ गयी अपने सिर पर हाथ रख कर....

मम्मी--जय मैने तुझ से कुछ पूछा है जवाब दे मुझे....ये क्या हो रहा है....और क्यो हो रहा है...

ये बात लगभग उन्होने चीखते हुए कही थी....

में--मैने चाची से सौदा किया है....

मम्मी--कैसा सौदा....कहना क्या चाहता है तू...

में--इनको बेटा चाहिए था....और मुझे मेरी बहनें

इनकी कोख में बेटा मैने डाल दिया है अब इनका अपनी बेटियों पर कोई हक़ नही है....

मम्मी--ये उन लड़कियों की माँ है....तू ये हक़ कैसे ले सकता है...

में--वो सिर्फ़ मेरी बहनें है...उन लड़कियो को कभी इन्होने अपना समझा ही नही...इनको बेटा चाहिए था सो मैने इनको वो दे दिया....

मम्मी--माना ये तेरी बहने है लेकिन इन पर तेरा कोई हक़ नही है...

में--हक है मम्मी मेरी हर बहन पर मेरा हक़ है इन दोनो में भी पापा का ही खून है...बस कोख आपकी जगह चाची की है....मेरी एक बहन और है...जो कहीं दूर मुझे याद कर रही है...में उसे भी ढूँढ कर यहाँ ले आउन्गा...मेरा बस एक ही लक्ष्य है अपनी बहनो की खुशी...ये दोनो भी चाची के साथ नही रहना चाहती....उनको भी हमारी ज़रूरत है...जब उन्हे सच पता पड़ेगा तो वो वैसे भी मेरे साथ ही रुकेंगी.

मम्मी मेरी ये बात सुनकर चाची को एक टक घुरे जा रही थी...और चाची अपना सिर झुकाए वही पास में खड़ी थी...

मम्मी--जय तुझे हो क्या गया है पहले तो तू ऐसा नही था ये एक दम से जानवरों जैसा कैसे बन गया...

में--पहले मुझे कुछ पता नही था....

लेकिन में अब सब समझ गया हूँ...मेरी बहने अब कभी उस गाँव में नही जाएँगी और ये मेरा आख़िरी फ़ैसला है...अगर आपको मुझ पर यकीन नही है तो चाची भी मेरी इस बात को मना नही करेंगी....

मम्मी--लेकिन तू इतनी गॅरेंटी के साथ कैसे कह सकता है कि इसको अब बेटा ही होगा....

में--ये मेरा खुद पर विश्वास है..,इनको लड़का ही होगा...

मम्मी--लेकिन कल को तूने वो बच्चा भी इस से छीन लिया तो....

में--ये उस दिन होगा जब चाची अपना किया हुआ वादा तोड़ देंगी....मेरा काम है प्यार बाटना...अब वो प्यार चाहे आप सौदे के रूप में समझो या हवस के रूप में...

मम्मी--हो क्या गया है तुझे ये कैसी बहकी बहकी बाते कर रहा है...

तुझे इतना भी समझ में नही आरहा तेरी माँ खड़ी है तेरे सामने...

में--अगर आप को भी कुछ चाहिए तो मुझे बोल देना...

ये सुनने के साथ ही मम्मी ने मेरे बेड के पास पानी से भरा जग उठाया और मेरे सिर पर उडेल दिया.....

में जैसे नींद से जागा....

में --मम्मी मुझे गीला क्यो किया...

मम्मी--तू ये क्या अनापशनाप बके जा रहा था...

में--क्या बोला मैने मम्मी....में तो बाहर था यहाँ अंदर कैसे आया....

मम्मी--ये क्या बकवास कर रहा है पिछले आधे घंटे से हम बहस कर रहे है....और तू कहता है कि तूने क्या कहा....
 
में--सच में मम्मी मुझे नही पता में यहाँ कैसे आया...में तो बाहर नाश्ता कर रहा था और ये मेरे कपड़े कैसे चेंज हो गये....

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मम्मी मेरी ऐसी हालत होते देख घबरा गयी और मेरे गीले बदन को अपनी साड़ी से पोछने लग गयी.....

ये क्या हुआ था मुझे....कुछ समझ नही आ रहा था....मुझे कुछ याद क्यों नही आ रहा....में अंदर कैसे आ गया....मम्मी को मैने ऐसा क्या बोल दिया जिस से उन्होने मुझे गीला कर दिया........

मम्मी मेरी बातो से काफ़ी घबरा गयी थी और वो मेरे सीने से लगकर रोने लगती है....

मम्मी--ये क्या हो गया है मेरे घर को किस की नज़र लग गयी है इसे....

चाची--भाभी मुझे लगता है किसीने जय के खाने पीने के सामान में कुछ मिलाया है....

मम्मी--मेरे घर में कोई ऐसा करने की सोच भी नही सकता.....लेकिन फिर भी कुछ तो ग़लत हुआ है इसके साथ...में अभी इसे पंडित जी के पास लेकर जाती हूँ और तू ये बात किसी को नही बताएगी तुझे जो चाहिए था वो तुझे मिल गया...अब मेरे घर से जाने की तैयारी कर लो...

उसके बाद चाची अपनी गर्दन झुकाए....रूम से बाहर निकल गयी....

मम्मी--जय तू अपने कपड़े बदल कर बाहर आजा हम लोगो को कहीं चलना है....

उसके बाद मम्मी बाहर चली जाती है और में अपने ख्यालो में डूबा हुआ अपने कपड़े चेंज करके बाहर निकल आता हूँ....बाहर आकर देखता हूँ मम्मी कार के पास खड़ी है और मुझे चलने के लिए बोल रही है....

में कार स्टार्ट करता हूँ और मुमनी के कहे अनुसार.....चलाने लगता हुँ....

थोड़ी ही देर में हम एक मंदिर के सामने पहुँच गये थे....मम्मी वही उतर गयी और मुझे कार पार्किंग में लगाकर आने का बोल कर वो लगभग भागते हुए मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ने लगी...

में कार पार्क कर के मदिर में चला आया और अपने जूते बाहर ही उतार दिए...

अंदर गया तो वहाँ एक पुजारी के सामने मम्मी बैठी हुई थी...

मम्मी--पुजारी जी इसे देखिए मुझे लगता है इस पर किसी ने कुछ कर दिया है....

में भी वही मम्मी के पास बैठ जाता हूँ...और पुजारी मेरा हाथ पकड़ कर अपनी आँखे बंद करके ध्यान में चला जाता है....

थोड़ी देर बाद जब पुजारी आँखे खोलता है...तो वो मेरी तरफ आश्चर्य से देख रहा होता है

पुजारी--बेटी तेरा बेटा एक महान इंसान है...इसने वो पा लिया जो हम लोगो के नसीब में शायद ही होगा....लेकिन तुम्हारे घर की एक कन्या ने इसके खाने में कुछ ऐसा मिला दिया था जिस से ये अजीब सा व्यवहार करने लग गया है....उस चीज़ के प्रभाव से इसका भीतरी मन जिसे ये हमेशा दबा कर रखता था वो उजागर हो जाता है.....मेडिकल की भाषा में इसे स्प्लिट पर्सनली कहते है....तुम इसे बिल्कुल सही समय पर यहाँ ले आई हो....वैसे उस चीज़ का प्रभाव इस पर से जा चुका है लेकिन इसे बार बार वो चीज़ दी जाती रही तो एक दिन ये पूरी तरह से बदल जाएगा ....

उसके बाद कोई कुछ नही कर पाएगा....

मम्मी--लेकिन में कैसे पता लगाऊ....कि ऐसा कौन कर रहा है....

पुजारी--इसके खाने पीने का ध्यान तुम खुद रखो....जब तुम इसकी हर चीज़ का ध्यान रखोगी तो वो कन्या कोई ना कोई ग़लती ज़रूर करेगी....या तो वो क्रोधित होकर तुम्हे भला बुरा कहेगी या फिर किसी भी तरह से तुम्हे अपने वश में करने की कोशिश करेगी....जो इसे दिया जा रहा है वो शायद किसी ख़ास प्रायोजन से अपना मतलब सिद्ध करने के लिए दिया जा रहा है.

मम्मी--पुजारी जी आपका आशीर्वाद ऐसे ही बनाए रखिए....में अब से इसके खाने पीने का ध्यान रखूँगी....

लेकिन आपने शुरू में कहा कि इसने ऐसा काम किया है जो आप शायद ही अपने जीवन में कर पाए...ऐसा क्या काम किया है इसने...

पुजारी जी-- मुस्कुराते हुए...आपका बेटा महादेव के दर्शन कर चुका है....जो हम सब को इतनी सेवा के बाद भी नही हुए....

उसके बाद पुजारी मेरे पैर छुने लग जाता है....और में पुजारी जी को रोकते हुए उन्हे फिर से अपनो जगह बैठा देता हूँ...

मम्मी--अगर इसके सिर पर महादेव का हाथ है फिर कोई कैसे इसका बुरा कर सकता है....

पुजारी--ये तो उनकी लीला वो ही जाने लेकिन....तुम्हे ये सब भूलकर बस इसके उपर ध्यान देना होगा....कुछ ही दिनो में उसकी सच्चाई तुम्हारे सामने होगी....

उसके बाद में और मम्मी पुजारी जी का आशीर्वाद लेकर घर की तरफ चल पड़ते है....रास्ते में गन्ने के जूस की दुकान देख कर में गाड़ी वहाँ लगा लेता हूँ और जूस वाले से 2 बड़े ग्लास बनाने की बोल देता हूँ....

हम दोनो जूस पीने के बाद वापस घर की तरफ बढ़ जाते है...घर पहुँच कर में मेरे रूम में घुस जाता हूँ और अपनी बुक्स उठा कर पढ़ने बैठ जाता हूँ....कल से कॉलेज जाना था .

थोड़ी देर बाद नीरा मेरे रूम में आती है....

नीरा--क्या बात है भैया आज बुक्स कैसे उठा ली...

में--कुछ नही यार कल से कॉलेज जाना है...और पता नही वहाँ कुछ पढ़ाया गया है भी या नही... तेरा आज स्कूल कैसा रहा वहाँ कोमल के लिए बात करी तूने....

नीरा--हाँ भैया प्रिन्सिपल ने कल कोमल को स्कूल बुलाया है और कुछ फ़ौरमलिटी है जो में करवा दूँगी कोमल के साथ जाकर...

में--चल अच्छा किया....अब कल में भी दीक्षा दीदी के लिए कॉलेज में बात कर लूँगा...

नीरा--भैया एक किस मिलेगी क्या....

ये सुनते ही में उसे कस कर बाहो में भर लेता हूँ और उसके गालो पर खूब सारी किस कर देता हूँ....बदले में नीरा भी मेरे गाल पर किस कर देती है....

में--मिल गयी किस??अब जा यहाँ से थोड़ी देर पढ़ने दे मुझे....और मम्मी को मेरे लिए एक कॉफी बनाने के लिए बोल दे...

नीरा--मम्मी को क्यो परेशान करते हो....में ही आपके लिए कॉफी बना कर ले आती हूँ...

में-- मुस्कुरा कर नीरा से कहता हूँ....तू मम्मी से बोल कर देख अगर वो तुझे बनाने दे तो बना ला....

उसके बाद नीरा रूम से निकल कर सीधा किचन में चली जाती है वहाँ मम्मी उसे मिल जाती है....

नीरा--मम्मी में भैया के लिए कॉफी बना रही हूँ आप भी लोगि....

मम्मी--कॉफी में बना देती हूँ....तुझे अगर पीनी है तो बोल दे मुझे....

नीरा--ठीक है मेरे लिए भी एक फुल मग कॉफी का बना दो...उसके बाद नीरा वहाँ से उछलती कुदति बाहर निकल जाती है....

तभी दीक्षा अंदर किचन में आजाती है....

दीक्षा--ताई जी आप क्या बना रही हो क्या में आपकी कुछ मदद करूँ....

मम्मी--नही बेटा में बना लूँगी....तेरी माँ क्या कर रही है....

दीक्षा--उनके सिर में दर्द हो रहा है...वो लेटी हुई है....आप बोलो तो बुलाउ उनको....
 
मम्मी--नही आराम करने दे....तुझे कॉफी पीनी है तो बोल दे में कॉफी बना रही हूँ....और कोमल और नेहा से भी पुच्छ कर आजा...

दीक्षा--ठीक है ताई जी...में अभी पूछ कर आजाती हूँ....

मम्मी--ये ताई ....ताई क्या लगा रखा है तूने या तो मम्मी बोल या फिर बड़ी मम्मी....दुबारा ताई बोली ना तो देख लेना...

दीक्षा--ठीक है ताई जी.....ओह्ह्ह इम सॉरी बड़ी मम्मी जी....

मम्मी--चल भाग यहाँ से और सब से पूछ कर बता दे मुझे....

उसके बाद वो सब से पूछ कर आजाती है बस चाची कॉफी के लिए मना करती है और बाकी सब कॉफी माँग रहे थे....दीक्षा जब रूही से पूछने के लिए रूम में जाती है...तो रूही भी दीक्षा के साथ किचन में आ जाती है...

रूही--मम्मी मुझे ही बोल देती कॉफी बनाने के लिए...आपने क्यो तकलीफ़ करी...

मम्मी--में बना लूँगी तो घीस नही जाउन्गि...चल अब तू तेरा काम कर और जब आवाज़ दूं तब कॉफी लेने आ जाना तेरी...

तेरे चाचा चाची भी शाम को निकलने वाले है वापस गाँव के लिए उनके लिए भी खाना बनाना है मुझे...

रूही--मम्मी आप से कुछ ज़रूरी बात करनी है...क्या आप थोड़ी देर बाद मुझ से बात कर सकती हो....

मम्मी--बोल क्या ज़रूरी बात है...यहीं बोल दे...

रूही--मम्मी रूम के अंदर बोलने वाली बात है किचन में कैसे बोल दूं....

उसके बाद रूही मम्मी के गाल पर किस करती है और किचन से बाहर चली जाती है.

सभी अपने अपने रूम्स में आ गये थे....में पढ़ता पढ़ता कॉफी की चुस्किया भी लगता जा रहा था....आज मेरा मन काफ़ी शांत था....

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उधर मम्मी भी अपने रूम में चली गयी थी....और उनके पीछे पीछे रूही भी अंदर आ गई थी....

रूही ने मम्मी को पिछे से हग कर लिया था और अपने दोनो हाथ उनके बड़े बड़े बूब्स पर रख कर मसलने लगती है....

मम्मी--रूही क्या हुआ आज तू बड़े मूड में लग रही है...

रूही अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मम्मी की चूत सारी के उपर से ही भींच देती है दूसरे हाथ उनके ब्लाउस में डालकर उनका बूब मसल्ने लग जाती है....

रूही--आप की याद मुझे बहुत आई...मन कर रहा है अभी आपके सामने अपने सारे कपड़े उतार कर आपसे मेरी चूत चुस्वा....

मम्मी--चल अब मुझे छोड़ जो करना हो वो रात को कर लेना...मुझे एक बात बता तुम तो कल शाम को आने वाले थे फिर इतनी रात को कैसे आए वहाँ से....

रूही--में अपने और आपके लिए किसी चीज़ का बंदोबस्त कर रही थी हमेशा के लिए....

रात को जब में जय के रूम में गयी उसे देखने के लिए और फिर मेरा मन नही माना तो मैने उसके होंठो पर किस करदी....जब मैने उसे किस किया तब उसमें से शराब की काफ़ी ज़्यादा स्मेल आरहि थी....मैने इस मोके का फ़ायदा उठा कर जय का लंड भी चूसा और उसका पानी भी पिया....

अब जल्दी ही हम दोनो की चूत में उसका लंड होगा....आपने तो कभी मेरी चूत में उंगली भी नही डाली....लेकिन कल जय का लंड देख कर,मेरी चूत उसका लन्द लेने को तड़प रही है....

हरिद्वार में जब हम निकलने वाले थे तब मुझे पता पड़ा था कि वहाँ कोई बड़ा तांत्रिक आया हुआ है...मैने जब उन्हे अपनी परेशानी बताई तब उन्होने एक दवाई मुझे जय के खाने मिलाने के लिए दे दी थी....जिस की वजह से जल्दी ही हम दोनो की चूत की आग ठंडी हो सकेगी.....

तड़ाक्ककक......एक ज़ोर दार थप्पड़ से रूही का पूरा वजूद झन्झना उठता है....

मम्मी--तेरी हिम्मत कैसे हुई जय को कुछ भी ऐसा वेसा खिला देने की....कहाँ है वो दवाई लेकर आ मेरे पास उसे....

रूही ने अपनी ब्रा के अंदर छुपि हुई एक पूडिया निकाल कर दे दी....और अपने गालो को मसल्ते हुए कहने लगी....

रूही--में जानती हूँ आप मुझे जय से सुख लेने नही दोगि और ना ही खुद लोगि....लेकिन में उसे अपना बना कर ही रहूंगी....

मम्मी--तू शायद जानती नही है तेरे जाने के बाद यहाँ क्या क्या हंगामा हुआ है...

और मम्मी रूही को नीरा से लेकर चाची तक की सारी बाते बताती चली जाती है....

रूही को जब ये सारी बाते पता चलती है तो उसको रुलाई फूट पड़ती है...वो मम्मी के पैरों में बैठकर ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है....

लेकिन मम्मी की आँखो में बस रूही के लिए नफ़रत ही थी....

रूही--मम्मी मुझे माफ़ कर दो....अगर मुझे ऐसा पता होता कि मेरे जाने के बाद यहाँ इतने तूफान आगये है....तो में कभी भी ऐसी हरकत नही करती....

मम्मी--तेरी ये ग़लती जय को पागलपन के अंधेरे में धकेल देती....तूने देखा नही था उसका वो रूप अगर देख लेती तो वही बेहोश हो जाती...मैने नीरा और जय की शादी के लिए हाँ इस लिए करी क्योकि नीरा उसे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती है....उसे जय के जिस्म का लालच नही है....

रूही--मगर में भी जय से प्यार करती हूँ....में भी उसके लिए जान दे सकती हूँ....और रही बात हवस की तो ये तोहफा आपने ही मुझे बचपन में दे दिया था.....में जय के बिना ज़िंदा नही रह सकती....

मम्मी को भी अब शायद अपनी ग़लतियो का एहसास होने लगा था....कैसे उसने खुद के स्वार्थ के लिए उस मासूम को हवस के गहरे दल दल में धकेल दे दिया था..

मम्मी रूही को उठाते हुए...

मम्मी--रूही जो हुआ वो ग़लत था लेकिन उसके बाद तू जो कर रही थी ये उस से भी ज़्यादा ग़लत है....अगर तू जय से प्यार करती है तो उसका दिल जीत....उसका प्यार जीत....तभी तू उसे पा सकती है....लेकिन इस तरह टोने टॉट्को से तू उसका शरीर तो पा लेगी लेकिन कभी उसका प्यार नही पा पाएगी....

बोल मुझे तुझे क्या चाहिए अगर तुझे जय का शरीर चाहिए तो मेरे बोलने भर से वो तेरे साथ वो सब कुछ कर लेगा जो तू चाहती है....लेकिन अगर तुझे उसका प्यार चाहिए तो ये काम तुझे खुद करना पड़ेगा....

अब अपने आँसू पोछ और जो तूने किया है उसके बारे में सोच.....और सोच जय का प्यार तू कैसे पा सकती है....
 
उसके बाद मम्मी रूही को रूम के अंदर छोड़ कर बाहर निकल जाती है...

और अंदर रूम में रूही बेतहाशा रोए जा रही थी.....बस रोए जा रही थी....

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अब सब कुछ बदल गया था...मेरा हर रिश्ता बदल गया था....जिस बहन से में अपनी जान से ज़्यादा प्यार करता था वो अब मुझे पति के रूप में देखने लगी थी....चाची के साथ जो मैने किया.....उस वजह से एक रिश्ता और बदल गया....चाची की कोख में अपना बीज रोपीत कर चुका था....कुछ रिश्ते अभी और बदलने वाले थे....लेकिन रिश्ते बदलते बदलते कहीं में तो नही बदल जाउन्गा....कहीं में उस प्यार को तो नही भूल जाउन्गा जो मुझे मेरे संस्कारों में मिले ....ये क्या बेचैनी छा गयी है मेरे जीवन में....कैसे ख़तम होगा ये अध्याय....कौन निभाएगा मेरा साथ....क्या बस यही लिखा है मेरे जीवन में.....

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मम्मी--जय उठ जा रात होने वाली है कब तक सोता रहेगा ऐसे ही....

में--मम्मी पढ़ते पढ़ते मुझे कब नींद आ गयी कुछ पता ही नही चला ....

मम्मी--चल हाथ मुँह धो ले....और जल्दी से खाना खाने आजा...

उसके बाद तेरे चाचा चाची भी थोड़ी देर में जाने वाले है....

में-- मम्मी में खाना उनके जाने के बाद खा लूँगा अभी कुछ खाने का मन नही है....

मम्मी--ठीक है तेरा जब मन करे तब खा लेना...लेकिन फ्रेश होकर बाहर तो आजा तेरे चाचा कब से तेरा वेट कर रहे है...

में--ठीक है मम्मी में थोड़ी देर में आता हूँ...

उसके बाद में हाथ मुँह धोकर बाहर चाचा के साथ सोफे पर बैठ जाता हूँ...

में--चाचा हो गया आपका काम....ले लिए खाद और बीज...

चाचा--हाँ बेटा यहाँ अच्छी किस्म के बीज मिल्गये....और अगर इस बार बारिश अच्छी हुई तो फसल भी देखने लायक होगी...

उसके बाद चाचा अपने बेग में से 10 लाख रुपये निकाल कर मेरे हाथ मे रख देते है...

में चाचा जी ये पैसे किस लिए...

बेटा ये वैसे तो तेरे पापा की अमानत थी लेकिन अब ये तेरी है....में अपने हिस्से की खेती के साथ साथ तेरे पापा वाले हिस्से में भी खेती करता था....ये उसी खेती के हिस्से के पैसे है जो में जमा करता रहता था....पहले कभी उस बात पर ध्यान नही दिया मैने लेकिन जब में यहाँ आरहा था तब मुझे अहसास हुआ कि मुझे तेरे पापा के हिस्से वाले पैसे भी देने चाहिए....

में--चाचा जी ये पैसे में नही रख सकता...ये आपकी मेहनत का फल है अगर आप उस ज़मीन पर मेहनत नही करते तो वो बंज़र पड़ी रहती....इसलिए इसे आप ही रखिए...

चाचा--बेटा हिस्से का धन चाहे मेहनत का हो या ज़मीन का वो हिस्सा ही रहता है....अगर तू ये पैसे मुझ से नही लेगा तो में हमेशा तुम्हारा कर्ज़दार ही बना रहूँगा....इसलिए तू ये पैसे रख ले....

उसके बाद चाचा ज़बरदस्ती वो दस लाख रुपये मेरे हाथो में रख देते है....

में मम्मी को आवाज़ लगाकर अपने पास बुलाता हूँ और उनसे ये कहता हूँ...

में--मम्मी ये पैसे कल कोमल और दीक्षा दीदी का बॅंक में खाता खुलवाकर एफडी करवा देना और अपनी तरफ से भी 5-5 लाख रुपये मिला देना....

मम्मी--मुस्कुरा कर....मुझे तुझ से यही उम्मीद थी बेटा अपने परिवार का ध्यान अब तुझे ही रखना है और तूने पहला फ़ैसला ही बिल्कुल सही लिया है में कल तुम लोगो के स्कूल कॉलेज से आने के बाद इन्हे बॅंक ले जाउन्गि....

चाचा--जय है तो तू भी तेरे पापा की तरह जिद्दी का जिद्दी....अच्छा मेरा एक काम करेगा जहाँ से में ये बीज लेकर आया था उनके लड़के की परसो शादी है....मैने जब उन्हे बताया कि में किशोर भाई साब का छोटा भाई हूँ तो उन्होने ज़िद्द करते हुए अपने बेटे की शादी का कार्ड थमा दिया अब में तो वहाँ जा पाउन्गा नही इसलिए एक बार वहाँ जाकर उन्हे शादी का तोफ़ा ज़रूर दे आना...

में--ठीक है चाचा जी में चला जाउन्गा...

चाचा--बेटा वो कार्ड मैने तेरी मम्मी को दे दिया है तू वहाँ जाना भूल मत जाना क्योकि ये बुलावा मुझे नही है बल्कि तेरे पापा के सम्मान को था इसलिए अपने पापा के मान के लिए तू वहाँ ज़रूर चले जाना....

में--ठीक है चाचा जी में चला जाउन्गा आप चिंता ना करे...

उसके बाद चाचा और चाची अपना समान लेकर और हम सभी बच्चो को अपने गले से लगाकर विदा लेते है....

उसके बाद में भी अपनी बाइक उठा कर बाहर निकल जाता हूँ...मुझे डॉक्टर के यहाँ से वो डीयेने रिपोर्ट्स लेनी थी...जो कि में सुबह लेना भूल गया था.....

में हॉस्पिटल पहुँच गया था डॉक्टर आलोक अभी किसी मरीज को देखने में व्यस्त थे तब तक में बाहर ही वेट करने लग गया था....

में अपने आस पास दीवारो पर टॅंगी पंटिंग्स देख रहा था....तभी मेरी नज़र एक फॅमिली ट्री पर बनी हुई पैंटिंग पर पड़ी....

उसमे ट्री की रूट्स को पुरखो के रूप में दर्शाया गया था....और तने को फादर के रूप में....उस ट्री की ब्रॅंचस सन्स के रूप में थी और उन ब्रॅंचस में से छोटी छोटी ब्रॅंचस और निकल रही थी जो सन्स के सन्स की थी.....

तभी एक चपरासी मेरे पास आजाता है और कहता है....

चपरासी--डॉक्टर साहब आपको बुला रहे है....अब आप उनसे मिल सकते है....

में--ठीक है काफ़ी जल्दी फ्री हो गये...में आता हूँ...

इतना कह कर में अपनी जगह से उठ गया और डॉक्टर आलोक के कॅबिन की तरफ़ बढ़ गया....

डॉक्टर--आओ जय....लगता है तुम सुबह आना भूल गये थे....कोई बात नही....ये रिपोर्ट्स रेडी है तुम इन्हे ले जा सकते हो....

में--सर मुझे आप से एक सवाल पूछना है...मैने जो आपको डीयेने सम्पेल्स दिए थे वो एक पिता के एक बेटे के और दो बहनों के थे जो कि आपस में मिल रहे थे....लेकिन में एक बेटे के सम्पेल्स देना भूल गया क्या वो ज़रूरी है....

डॉक्टर--अगर कोई ऐसी वेसी प्रॉब्लम. नही है तब तक तो ठीक है लेकिन अगर उस बेटे का डीयेने भी मिल जाता तो अच्छा होता....वैसे तुम कहना क्या चाहते हो सॉफ सॉफ कहो....

ये बात सुनकर नीरा मुस्कुरा देती है....और मेरे गालो पर किस करके वहाँ से चली जाती है....

नीरा का मेरे प्रति प्यार लगातार बढ़ता ही जा रहा था....वो मुझे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करने लग गयी थी......

में बाहर हॉल में आकर बैठ गया था वहाँ दीक्षा भी बैठी हुई थी और टीवी देख रही थी....

में--दीदी कल कॉलेज का आपका पहला दिन है आइ थिंक आपने अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली होगी...

दीक्षा--हाँ जय भैया.,,,तैयारी तो लगभग पूरी हो गयी है....बस अब तो वहाँ जाने का वेट कर रही हूँ....

में--में आपसे एक बात कहना चाहता.....कॉलेज में और स्कूल लाइफ में काफ़ी अंतर होता है....इसलिए अपने दोस्त हमेशा चुन कर बनाना....

दीक्षा--भैया में ये बात जानती हूँ...आप चिंता मत करे...

इतनी देर में मम्मी मेरे लिए खाना लेकर आ गयी थी....और में वही बैठ कर खाना खाने लगता हूँ.......

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अगले दिन सुबह....रूही की आवाज़ मुझे नींद से जगा रही थी....आज कॉलेज जो जाना था...

में नीरा और कोमल एक बाइक पर थे और रूही और दीक्षा अपनी अक्तिवा पर...

रूही और दीक्षा को मैने कॉलेज जाने का बोल दिया था और कोमल और नीरा को उनके स्कूल छोड़कर उस स्कूल के प्रिन्सिपल से भी मिलना था....

वहाँ के प्रिन्सिपल से मिलकर में जल्दी ही कॉलेज भी पहुँच गया....वहाँ कुछ लेक्चर मैने अटेंड किए और कॅंटीन में आकर बैठ गया.....

कॅंटीन में उस दिन हुई घटना के बाद काफ़ी लोग मुझे जानने लग गये थे...इस लिए वहाँ पहुँचते ही कुछ लड़के लड़कियाँ मेरे पास आकर बैठ गये और पापा की डॅत का अफ़सोस जताने लग गये....उसके बाद बाकी सब चले गये और बस 2 लड़के और एक लड़की मेरे साथ ही बैठे रहे...एक लड़के का नाम अरमान था दूसरे का जॉनी....और जो लड़की थी उसका नाम मीना....

अरमान--जय भाई उस दिन जो कुछ भी हुआ उसके बाद पूरा कॉलेज आपका फॅन हो गया है.....

मीना--आपने उस दिन अच्छा सबक सिखाया था उन सब लड़को को....आपकी वजह से ही यहाँ रेजिंग बंद हो सकी है...

में--मैने ऐसा कुछ भी नही किया बस जो कुछ भी किया वो एक सेल्फ़ डिफेन्स में मुझ से हो गया...

मीना--क्या हम लोग आपके दोस्त बन सकते है....वो आक्च्युयली में हम तीनो ही इस शहर से नही है इस लिए यहाँ किसी को ज़्यादा जानते भी नही है.....

में--अरे ये भी कोई पूछने की बात हुई...वैसे भी मेरा इस कॉलेज में कोई दोस्त नही है....

अरमान--तो फिर आज के कॉफी और समोसे मेरी तरफ से....

में--हाँ....हाँ...क्यो नही मुझे तो कब से भूख लग रही थी....इसी बहाने समोसे की पार्टी भी हो जाएगी....

उसी समय रूही और दीक्षा भी वहाँ आ गये....अब वो तीनो मेरे दोस्त बन चुके थे इसलिए मैने उनसे कुछ ना छुपाते हुए रूही और दीक्षा का इंट्रो उन्हे दे दिया.....

मीना--मुझे तो लग रहा था में अकेली पड़ जाउन्गि इस गॅंग में.....अब तो बराबर की टक्कर हो गयी है....हम भी तीन और तुम लोग भी तीन....

और उसके बाद इसी तरह हँसते मुस्कुराते मेरे कॉलेज का दूसरा दिन ख़तम हो गया था....बड़ा अच्छा लग रहा था....नये दोस्त बना कर....इतने दिनो से लाइफ की गाड़ी जैसे रुक ही गयी थी वो फिर से चल पड़ी अपनी पूरी रफ़्तार से....

हम लोग वापस घर के लिए निकल चुके थे नीरा और कोमल का भी स्कूल अब छूटने ही वाला था....इसलिए में स्कूल के दरवाजे के बाहर ही उन दोनो का वेट करने लग गया.....दीक्षा और रूही को कुछ शॉपिंग करनी थी इसलिए वो सीधा मार्केट चली गयी....

तभी मुझे नीरा और कोमल भी आते हुए दिखाई देगयि....नीरा मेरे पीछे वाली सीट पर मुझ से चिपक कर बैठ गयी और कोमल नीरा के पीछे...नीरा बार बार मेरे पेट पर गुदगुदी करती जा रही थी....साथ ही साथ अपने बूब्स भी मेरी पीठ पर रगडे जा रही थी....जबकि कोमल लगातार स्कूल के पहले दिन क्या क्या हुआ ये बताती जाने लगी....

हम लोग अब घर पहुँच गये थे.

घर में आज माहॉल काफ़ी चेंज लग रहा था आज इतने दिनो के बाद भाभी किचन में काम कर रही थी और मम्मी अपने कमरे में आराम कर रही थी....

हम लोगो को आया देख सब से पहले भाभी ने हम सबको पानी पिलाया और उसके बाद कॉफी का पुच्छ कर वापस चली गयी....

में भी भाभी के पास ही किचन में चला गया और उनसे बाते करने लग गया....

में--भाभी क्यो ना आप अपनी प्रॅक्टीस फिर से शुरू कर दें.....

भाभी--क्यो तुझे में किचन में काम करती हुई अच्छी नही लग रही क्या....में वो काम अब छोड़ चुकी हूँ इसलिए में दुबारा वो अब फिर से नही करना चाहती....

में--ओके भाभी जेसी आपकी मर्ज़ी....वैसे आज खाने में क्या बनाया है....

भाभी--बाजरे की रोटी लहसुन की चटनी रायता और अगर तुम्हे गेहू की रोटी खानी है तो वो भी बनाई हुई है मेने....लेकिन में जानती हूँ बाजरे की रोटी तुम्हे सब से ज़्यादा पसंद है....

में--वाह भाभी मज़ा आ गया में जल्दी से चेंज करके आता हूँ तब तक रूही और दीक्षा भी शॉपिंग कर के आचुकी होंगी....

भाभी--उन दोनो को टाइम लगेगा वो शॉपिंग करने गयी है...तुम चेंज कर लो में तुम सब के लिए अभी खाना रेडी कर देती हू....

उसके बाद में अपने रूम में चला गया....आज का पूरा दिन बस ऐसे ही नौरमल निकल गया वरना कुछ दिन से तो ऐसा लग रहा था जैसे हंगामे कभी ख़तम ही नही होंगे मेरी ज़िंदगी से.

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