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CHODAMPUR SPECIAL UPDATE
पीछले अपडेट मे आपने पढा कि जहा एकतरफ चमनपूरा मे रंगीलाल ने शकुन्तला की पोल खोल दी वही राज के मौसी के यहा रात मे गजब की रोमांचक घटनाये घटी और कुछ गहरे सवालो की उधेड़बुन के साथ रात बित गयी ।
अगली सुबह राजन की नीद करीब करीब 5 बजे तक खुली , वो उठा और एक नजर ममता को देखा । फिर उसे रात की घटना याद आई और उसका लण्ड कड़क हो गया ।
वो भी अन्गडाई लेके उठा और कमरे से बाहर आकर वो जीने से छ्त पर जाने के लिए मूड़ा ही था कि उसे रज्जो के कमरे से रोशनी बाहर आती दिखी ।
राजन की आंखे चमक उठी और वो लपक के रज्जो के कमरे की ओर गया ,,तो देखा दरवाजा और पर्दा कल रात मे जैसे था ,वैसे का वैसा ही पडा है और अंदर कमरे मे रज्जो और कमलनाथ नंगे एक-दूसरे से चिपके सोये है ।
राजन का लण्ड रज्जो की फुली हुई चुत देख कर खड़ा हो गया । तभी कमरे मे 5 बजे का अलार्म बजा और रज्जो उठ कर बैठ गयी । राजन फौरन दरवाजे से हट गया । मगर अन्दर रज्जो को आभास हो गया कि दरवाजे पर कोई है।
राजन भी वहा से तुरंत छत की ओर निकला मगर तब तक रज्जो उठा कर पर्दे के पीछे से राजन को सीढि से उपर जाते देख चुकी थी ।
रज्जो मन मे - कही जीजा जी ही तो नही थे ??
रज्जो को अब खुद पर बडी शर्मिंदगी हो रही थी और कि उसकी लापरवाही मे आज सुबह सुबह नंदोई जी ने उसको नंगा देख लिया होगा ।
अब ना जाने कैसे वो उनका सामना करेगी ।
वहा से हट कर रज्जो ने दरवाजा बंद कर दिया और एक मैकसी डाल कर , कमलनाथ को एक चादर से ढक कर ,खुद नीचे के बाथरुम में फ्रेश होने के लिए चली गयी ।
थोडी देर बाद धीरे धीरे सब उठ कर अपने अपने कामो मे लग गये । रज्जो भी फ्रेश होकर उपर गलियारे मे झाडू लगा रही थी कि उसकी नजर अपने कमरे के बाहर दरवाजे पर टपके वीर्य की कुछ बूंदो पर गयी जो सूख चुकी थी और उसे देख कर रज्जो को भोर के समय का ख्याल आया जब उसने राजन को दबे पाव उसके कमरे के बाहर से सीढ़ी की ओर जाते देखा था ।
रज्जो मन मे मुस्करा कर - मतलब जीजा जी ने पूरा मजा लिया सुबह सुबह ,,, नजर रखनी पड़ेगी अब मुझे भी हिहिहिही
फिर रज्जो ने वो दाग एक गीले कपडे से साफ करके बाकी का काम खतम करके नहाने के लिए अपने कपडे लेके उपर चली गयी ।
जहा ममता और राजन पहले से ही मौजुद थे। राजन जो कि अभी अभी नहा कर निकला था और सिर्फ एक गम्छा लपेट कर अपना जांघिया झाड कर छत की अरगन पर फैला रहा था ।
रज्जो इस समय एक मैकसी मे थी और उसके चुचिय चलने पर बहुत हिल दुल रही थी ।इधर राजन की नजर रज्जो पर पड़ते ही उसे सुबह और रात मे रज्जो का रन्डीपना याद आ गया कि कितनी भुखी है लण्ड की ।
ये सोचते ही राजन के लण्ड ने एक बार फिर से अंगड़ाई ली और ऊभार उपर से साफ दिखने लगा ।
राजन एक गाव का किसान आदमी था ,उसने खेतो मे बहुत मेहनत किया था तो उसका बदन बहुत कसा हुआ था ।
रज्जो की नजरे भी एक बार अपने नंदोई की नंगी चौडी छाती पर गयी फिर उसके लण्ड के उभार पर मारा और फिर जब राजन से नजरे मिली तो अनायास ही उसकी एक मुस्कुराहत निकल पडी ,जिस्मे शर्माहट भरी हुई थी ।
रज्जो नजरे चुराते हुए बाथरूम की ओर निकल गयी जहा ममता नहाने बैठी हुई थी ।
राजन ने भी मुस्करा कर अपना कपडा लेके नीचे चला गया ।
रज्जो बाथरूम के पास जाकर देखा तो ममता भी लगभग नहा चुकी थी और एक पेटिकोट को अपनी छातियों पर बाँधे हुए कपडे खंगाल रही थी ।
रज्जो इतरा कर - ओह्हो लग रहा है रात मे भैया का खुन्टा देख कर बहुत गरम हो गयी थी ,,जो बडे सवेरे नहा ली हम्म्म
ममता रज्जो की बात सुन कर मुस्कुराते हुए - हा देखा मैने कैसे जुल्म करती हो मेरे भैया पर आप ,, इतना बड़ा तबेले जैसा गाड रख दी बेचारे के मुह पर
रज्जो ममता को छेड़ते हुए - ओहो मतलब सच मे आई थी देखने अपने भैया का खुन्टा हम्म्म्म
ममता रज्जो की बाते सुन कर शर्मा कर झेप सी गयी और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि जल्दीबाजी मे उसने क्या क्या बोल दिया ।
रज्जो ममता को शर्म से लाल होता देख - ओह्हो देखो कैसे शर्मा रही है ,,जैसे रात मे अपने भैया से सुहागरात मना के आई हो
ममता ह्स कर - अरे भाभी आप छोडो तब ना मै कुछ करू ,,,आपने ही पूरा कब्जा कर रखा था ।
रज्जो वापस ममता को छेड़ कर - ओहो मतलब पूरा मन है अपने भैया को सईया बनाने का हम्म्म
ममता फिर से शर्म से लाल हो गयी ,,वो जान रही थी कि बातो मे वो अपने भाभी से नही जीत सकती ,,, वो कुछ भी बोले उसकी चित ही होनी है । इसिलिए उसने फिल्हाल के लिए किनारा करना ही सही समझा
ममता बालटी मे कपडे लेके - अरे भाभी हटो ,,क्या सुबह सुबह आप भी हिहिहिही
रज्जो किनारे होकर - अरे मेरी ननद रानी ,,एक बार लेके तो देखो अपने भैया का ,,फिर क्या सुबह क्या रात हिहिहिही
ममता बस हस दी और जानबुझ कर कोई जवाब नही दिया क्योकि वो फिर से अपनी भाभी के जाल मे फंसना नही चाहती थी ।
रज्जो भी कोई प्रतिक्रिया ना पाकर समझ गयी कि अब उसकी ननद शर्मा रही है तो उसने भी ज्यादा खिंचाई नही की और अपने कामो मे लग गयी ।
थोडी देर बाद सारे लोग हाल मे एक्ठ्ठा हुए , तब तक पल्लवि और सोनल ने नाश्ता तैयार कर लिया था ।
फिर सबने नाश्ता कर लिया और आज के काम के बारे मे चर्चा होने लगी कि आगे क्या होना है क्या बाकी है ।
कुछ सामनो की पर्चीया बनाई गयी और रज्जो ने तय किया कि आज छोटे मोटे काम निपटा लिया जाये और कल का लाया हुआ सामान सही जगह रख कर सहेज लिया जाय । फिर कल सारे लोग माल चलेंगे , वही रमन के लिए दूल्हे का कपडा और बाकी जिसको जरुरत होगी उसके हिसाब सब कोई ले लेगा ।
माल जाने की बात सुन कर पल्लवि अनुज सोनल बहुत ही चहक उठे । हालांकि अनुज पहले भी जानिपुर आ चुका था मगर पल्लवि और सोनल के लिए ये पहला अनुभव था ।
सारे लोग खुशी खुशी अपने अपने कामो मे लग गये । कमल्नाथ और राजन फिर से बाहर निकल गये कुछ अधूरे कामो के लिये ।
रमन अनुज को लिवा कर ब्रेकरी वाले दुकान पर चला गया और बाकी महिला मंडल घर के कामो मे लग गयी ।
इधर जहा ये सब घटित हो रहा था वही चमनपूरा मे दो जवाँ दिलो के धडकते अरमाँ अपनी उड़ान भर रहे थे ।
राज की जुबानी
रात मे अपना चुदाई का कोटा पूरा करके हम सब लोग सो गये ।
सुबह उठकर सारे लोग नाश्ते के बाद अपने अपने कामों में लग गये ।
मै भी 8 बजे तक दुकान खोलकर बैठ गया और थोडा साफ सफाई करते वक़्त मेरी नजर पैंटी के डब्बे पर गयी तो मुझे शकुन्तला ताई की बात याद आई । मेरे चेहरे पर अनायास मुस्कुराहत आ गयी ।
मैने थोडी देर बाद सारा काम खतम किया और कुछ ग्राहको से काम निपटा कर फ्री हुआ ।
फिर मैने शकुन्तला ताई के नाप की कुछ पैंटी के रंग का फ़ोटो निकाल कर काजल भाभी के व्हाटसअप पर भेज दिया और तुरंत उनको फोन भी लगा दिया ।
ये मेरा काजल भाभी को पहला काल था जो मैने सगाई के दिन ही पंखुडी भाभी के माध्यम से उनका नम्बर लिया था ।
तिन बार रिंग जाने के बाद ही फोन पिक हुई
काजल भाभी - हा हैलो ,कौन
मै काजल भाभी की मीठी धीमी आवाज सुन कर ही गदगद हो गया - नमस्ते भाभी मै बोल रहा हू राज
काजल थोडा हस कर - अरे बाबू आप हो ,,मै सोची किसका नम्बर है , कहिये फोन क्यू किया
मै हस कर - बस आपकी याद आई तो कर लिया हिहिहिही
काजल भाभी शर्मा गयी और थोडा असहज होकर - मतलब बाबू ,हम समझे नही
मै ह्स कर - अरे आप तो परेशान हो गयी होहिहिही ,,वो कल शाम को ताई जी आई थी घर ना ,तो उनको कुछ अंडरगारमेंट्स के कपडे चाहिये थे ,, साइज़ तो मुझे पता है आप रंग उनको दिखा दो ,मैने व्हाटसअप किया है आपको
काजल अंडरगारमेंट्स की बात पर फिर से शर्मा गयी मगर उसकी सास की बात थी तो - जी बाबू , रुकिये हम अभी मम्मी जी को दिखा कर फोन करते है ।
फिर फोन कट गया ।
मै बाकी के कामो मे लग गया और थोडी ही देर मे काजल भाभी का फोन आने लगा तो मेरे चेहरे पर मुस्कान छा गयी ।
मै फोन उठा कर - हा भाभी बोलिए
काजल भाभी - हा बाबू ,वो एक नेवी ब्लू और एक ब्राउन कलर वाला कर देना ।
मै खुश होकर - ठीक है भाभी , और कुछ आपके लिए
काजल हस कर - अरे मेरे लिए क्या हिहिहिही
मै - अरे वही बाली , रिंग ,लिपस्टिक, आईलाईनर , सिन्दूर बिन्दी हिहिहिहिही
काजल भाभी हस कर - अरे नही नही बाबू कुछ नही ,,कुछ चहिये होगा तो हम बता देंगे,,आपका नम्बर है ना हिहिहिही
मै खुश होकर - जी ठीक है भाभी ,रखता हू फिर ।
काजल भाभी - हा बाबू रखिये बाय ।
फिर फोन कट गया और मेरे चेहरे पर मुस्कुराहत थोडी देर छायी रही ।
मै वापस दुकान के कामो मे लग गया । करीब 11बजे चंदू का मेरे पास फोन आया की वो चौराहे वाले घर पहुच गया है और थोडी देर मे मै भी पहुच जाऊ । मैने भी उसको 12बजे तक आने को बोलकर फोन रख दिया ।
थोडी देर बाद मा दोपहर का खाना लेके आई और मैने चौराहे पर जाने के लिए नया बहाना खोज लिया था ।
मै - मा वो मै कह रहा था कि चंदू का फोन आया था , हमारे स्कूल पर कोई काम है ,,तो मै जाकर देख लू , एक घंटा लग जायेगा ।
मा थोडा सोच कर- अच्छा ठीक है , लेकिन पहले ये खाना खा ले और पापा का टिफ़िन देके उधर से ही निकल जाना ।
मै भी खाना खाकर और पापा का टिफ़िन देते हुए निकल गया चौराहे की ओर ।
थोडी ही देर मे मै चौराहे वाले घर पर पहुचा और गेट खोल कर घर मे प्रवेश किया और सबसे पहले जाकर मम्मी पापा का कमरा सही किया क्योकि उनके कमरे बेड का गद्दा बहुत मोटा था और रोज रात मे मा की चुदाई मे बहुत मजा आता था ।
कमरा सेट करने के बाद मैने चंदू को फोन किया ,,मेरे दिल की धड़कने तेज हो गयी थी और आने वाले रोमांच को लेके लण्ड ने भी अंगड़ाई लेनी शुरु कर दी थी ।
मैने दो बार फोन किया लेकिन चंदू ने फोन नही उठाया ,, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि ये साला फोन क्यू नही उठा रहा है ।
मै वही हाल मे चक्कर काटने लगा और फिर थोडी शंका हुई तो बाथरूम मे जाकर पेशाब करने लगा ,,,खडे लण्ड से पेशाब निकलने मे भी मुझे थोडी जलन सी हुई ।
मैने वही बाथरूम से निकल्ते ही फिर से ट्राई किया और आखिरी रिंग जाते जाते चंदू ने फोन पिक किया ।
मै गुस्से से तिलमिला कर - अबे साले फोन क्यू नही उठा रहा है ।
चन्दू - भाई मै झडने के करीब था तो कैसे उठा लेता , और मै तेरे भी तो जुगाड मे लगा था ना । जल्दी से दरवाजा खोल बाहर ही हू ।
मै चौक कर खुश हुआ और खुद को ठीक किया और फिर दरवाजा खोला तो सामने चंदू और चंपा थे । दोनो मुस्कुरा रहे थे ।
फिर चंदू मुझे हटा कर चम्पा का हाथ पकड कर अंदर जाने लगा
।मै उसे रोकते हुए - अबे तू कहा जा रहा है ,,दीदी को कौन देखेगा फिर ।
चंदू हस कर - मैने मा को घर जाने के लिए बोल दिया। ये बोलकर दीदी को लाया हू कि मुझे कालेज पर काम है और दीदी को वही अपने एक सहेली से मिलना है ।
मैने मुस्करा कर एक नजर चम्पा को देखा तो वो शर्मा कर मुस्कुरा रही थी ।
चंदू - भाई जल्दी कर ले 1 बजे तक पापा के आने का समय है ,,वो घर पर दीदी को नही देखेंगे तो मा पर गुस्सा करेंगे ,तू तो जानता ही है ना पापा को मेरे ।
मै चंदू की बातो पर ध्यान नही दे रहा था ,,मेरी नजारे तो चंपा के टीशर्ट मे उभरे हुए उसकी 34C की ब्ड़ी ब्ड़ी चुचियॉ के नुकीले निप्प्ल पर थी । चंपा की नजर जब मुझ पर गयी तो उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी और चुचिय टीशर्ट को उपर उठाने लगी ।
चंदू ने भी मेरी नजर को भाप लिया तो तपाक से चंपा के पीछे गया और उसका टीशर्ट उठा कर चुचियॉ को नंगा कर दिया ।
चंदू - भाई तरस क्यू रहा है ,,ऐसे देख ले ना ,
चंदू के इस हरकत से चंपा सिहर गयी और उसकी आंखे बंद हो गयी । मेरी नजरे चंपा के गोल गोल हल्के सावले चुचो पर थी ,,,उसके निप्प्ल बहुत सख्त थे ।
मै थुक गटक कर एक बार पैंट के उपर से अपने सर उठाते लण्ड को दबाया तो मेरे तन बदन मे सरसराहट और तेज हो गयी । मै धीरे से एक कदम आगे बढा , तबतक चंदू ने चंपा की चुचिया नीचे से थाम ली और वही अपने भाई का स्पर्श अपनी चुचियॉ पर पाकर चम्पा चंदू की बाहो मे पिघल गयी ,,वो लम्बी लम्बी सासे लेने गयी जिससे उसकी थन जैसी चुचिया उपर नीचे होने लगी ।
मै अब चम्पा के सामने आ चुका था और मैने हौले से हाथ बढा कर अपनी कड़क हथेली को चंपा के नुकीले निप्प्ल पर साम्ने से रखा
चंपा - सीईई उम्म्ंम्ं ,,,फिर वो तेजी से सासे लेने लगी ।
उसकी बेताबी देखकर मैने अपना लण्ड एक हाथ से पैंट के उपर से सहलाते हुए दुसरे हाथ की हथेली को उसकी चुची पर अच्छे से फिराया और फिर उसको नीचे से उठाया तो काफी वजनदार था वो ।
मेरे बदन मे एक कपकपी सी होने लगी ,, एक नया सा अह्सास था और मेरे अन्दर का हवस मुझ पर हावी हो रहा।
इतने मे चंदू ने चम्पा को मेरी तरफ धकेला ,मै बडी मुस्किल से चम्पा को लेके संभला ,, मगर इस घटना मे चंपा की चुची पर मेरी पकड और तेज हो गयी थी ,,जिससे चम्पा की सिसकी निकल गयी ।
चंदू - ले भाई मजा कर ,,मै यही हू हिहिहिजी
चम्पा जो कि अब मेरी बाहो मे थी ,,उसकी कमर के निचले हिस्से और कूल्हो पर मेरा हाथ रेंग रहा था और दुसरा हाथ अब भी वैसे ही उसकी चुची पर कसा हुआ था ।
चन्दू के मुह से ऐसी बाते सुन कर हम दोनो एक दुसरे को देख कर मुस्कुराये और मैने चम्पा के होठो से अपने होठ जोड लिये
उफ्फ्फ क्या गरम तपते होठ थे उसके ,,चंपा ने तेजी से मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी गरमी देख कर मै भी जोश मे आ गया और एक हाथ को उसी चुची पर मस्ल्ते हुए दुसरे हाथ को चम्पा के गाड पर फिराने लगा ।
स्कर्ट के उपर से सहलाने पर मुझे चंपा की गाड अन्दर से बिल्कुल नंगी मह्सूस हुई जिससे मेरे तन और लण्ड में गर्मी बढ गयी ।
मैने अपने दोनो हाथ पीछे ले जाकर चम्पा की गाड नोचने लगा ,,बदले मे चंपा अपनी एडिया उठा कर मेरे होठ चूसे जा रही थी ।
मैने धीरे धीरे स्कर्ट को उपर उठा दिया और उसके नंगी मुलायम गाड के सहलाते हुए उन्हे मसलने लगा ।
उधर चंदू वही हाल मे लगे सोफे पर बैठ कर अपना लण्ड निकाल कर उसे सहलाने लगा ।
चंपा की सिसकियाँ बहुत ही कामुक थी और वो खुद का जिस्म मेरे बदन पर घिसने लगी ।
मैने उसके गाड के पाटो को फैलाया और बीच वाली ऊँगली को उसकी गाड़ मी गहरी दरारो मे डाल कर रगड़ने लगा ।
चंपा ने एक गहरी अह्ह्ह भरी और मेरे कंधो को पकड मजबूत कर ली ,,उसके नुकीले नाखून टीशर्ट मे घूस कर चुबने लगे । मेरे हर बार अपनी उन्गली उसके गाड की दरारो से उसकी सुराख तक ले जाते वक़्त वो तेजी अपने चुतडॉ को सख्त कर लेती और गहरी सिसकिया लेने लगती ।
मै जितना सोच रहा था चम्पा उससे कही ज्यादा गरम लडकी थी , उसके हाथ अब मेरे पैंट के उपर से लण्ड के उभार को टटोलने लगे थे । मैने उसकी आंखो मे एक नशा सा देखा , वो सिस्कते हुए मुस्कुराई और नीचे मेरे पैरो मे सरकती चली गयी ।
चम्पा की आवाज भारी थी और उसकी मादक सिस्कियो से भरी हसी मुझे और भी उत्तेजीत कर रही थी । उसने जल्दी जल्दी मेरे बेल्ट खोल कर पैंट नीचे कर दिया और अंडरवियर मे उभरे हुए लण्ड को उपर से सहलाया ।
मै उसकी अदा से पूरी तरह काप गया , मेरे बदन मे झुरझुरी सी होने लगी ,,पाव कांपने लगे ,,अगले ही पल चम्पा ने अंडरवियर मे हाथ डाल कर मेरे मुसल को निकाला जो पूरी तरह से तीर के जैसे सीधा और नुकीला हिल रहा था ।
चम्पा ने एक बार बडी मादकता से अपनी नाक के मेरे सुपाडे के पास रख कर उसकी गर्मी और गन्ध को आंखे बंद कर मह्सूस किया और उसके चेहरे पर एक मुस्कान छा गयी ।
जब उसने अप्नी आन्खे खोली तो वो एक नशे मे थी और उसकी वो मुस्कान मेरे दिल की धडकनें तेज कर रही थी ,, उसने अपनी नशीली आंखो और उसी कातिल मुस्कान के साथ मुझे देखते हुए अपनी नुकीले नाखूनों से मेरे आड़ो को खरोचते हुए इठलाई ।
मेरी आंखे इस अहसास से बंद सी हो गयी और मेरे हाथ उसके सर पर चले गये । मैने अपनी एड़ियो को उचकाया और उसके सर को अपने लण्ड की तरफ खीचा ।
एक गरम भाप और फिर मानो मुलायम बर्फ की खोल मे मेरा लण्ड सरकने ।
आंखे खोला तो चम्पा मेरा आधा लण्ड घोट चुकी थी और उसकी आंखे बंद थी ,,, लण्ड को इतनी चाव से चूसने पर मुझे गीता की याद आई ,,,वो भी ऐसे ही मेरे लण्ड को चुसती थी ,,मगर उसके छोटे हाथो और नरम होठ का स्पर्श कुछ अलग था ,,,जबकी यहा तो चंपा एक माहिर खिलाडी लग रही थी ।
उसने मेरे आड़ो को अपने एक मुठ्ठि मे कस रखा था जिससे मेरे लण्ड की लम्बाई मे हल्का इजाफा था ,,जिसे वो पूरा गले तक उतार चुकी थी ।
मै पागल सा होने लगा उसकी मुठ्ठि मेरे आड़ो को और कस रही थी ,,एक मीठा दर्द सा हो रहा था क्योकि मेरे आड़ो मे रस निकल कर मेरे सुपाडे की ओर जाने चाहते थे । मगर चम्पा ने ऐन जगह पर मेरे लण्ड को कसा हुआ था ।
ऐसा अनुभव मैने आज तक नही किया था ,, चम्पा जैसी गरम लड़की को भोगना आसान नही था , उसके लण्ड चुसने का अंदाज निराला था ,,
मै धीरे धीरे चरम की ओर बढ रहा था ,
ऐसे मे चंपा ने हौले से मेरा लण्ड अपने मुह से निकालते हुए मेरे आड़ो से पकड ढीली की
जिससे तेजी से सारा वीर्य मेरे आड़ो से सुपाडे मे भरने लगा । मेरे लण्ड मे गरमी बढने लगी और मै दुगनी ताकत से अपने लण्ड की निचली नशो पर काबू करने लगा ,, मेरा चेहरा तप रहा था ,,एडिया उठ चुकी थी, लण्ड पूरी तरह से तन गया था ,,सुपाडे मे गर्मी बढ गयी थी ।।
ऐसे मे चंपा ने मेरे लण्ड को उपर करके निचले हिस्से मे सूपाडे की गांठ पर जीभ फिराने लगी और मेरा सारा सन्तुलन और ताकत एक साथ एक गाढ़े फब्बारे के जैसा फुट पडा ,,, मेरा सुपाडा सारा माल एक साथ चंपा के मुह पर ऊड़ेलने ,,,आज तक मैने इतनी ऊततेज्ना मह्सूस नही की थी ।
मेरा लण्ड झटके दे रहा था और चम्पा के चेहरा मेरे वीर्य से टपक रहा था ।
मेरे हाथ आनायास ही मेरे लण्ड पर गये और मैने अच्छे से उसे झाड़ते हुए एक गहरी सास ली ,,,मै संतुष्ट था कि मै उस दर्द से आजाद था ।
वही जब नजर चंपा पर गयी तो वो मुस्कुरा रही थी और अपने मुछो के पास से टपकते बीर्य को जीभ से साफ कर रही थी ।
मै एक बार हल्का सा हसा और दो कदम पीछे होकर बेड पर बैठ गया ।
वही चंदू बस अपना लण्ड सहलाते हुए मुस्कुरा रहा था ।
चंपा उठी और मुझसे बाथरूम का पुछ कर मेरे कमरे की ओर चली गयी ।
मैने धीरे धीरे अपनी सास बराबर की और एक नजर चंदू को देखा तो वो मुझे इशारे से मेरा हाल पुछ रहा था ।
मै भी मुस्कुरा दिया ,, थोडी देर बाद चंपा बाहर आई
फिर मैने अपने कपड़े सही किये और सबको ठण्डा पानी पीने को दिया ।
फिर चंपा के बगल मे जाकर बैथ गया । चंपा मुझसे ऐसे चिपक गयी मानो मेरी प्रेमिका हो । हमने कोई बाते नही की बस एक दुसरे को देख कर मुस्कराये ।
चंदू हस कर - फिर भाई क्या इरादा है हाह्हहहा
मै थोडा शर्मा कर हसा - आज बस इतना ही भाई ,,बहुत थकान सी लग रही है हिहिहिही
चंदू हस कर - होता है भाई ,,तेरा पहली बार है ना ,,तो थकान तो होगा ही हिहिहिही
चंदू की बात पर चंपा ने मुझे ऐसे घूरा मानो मेरी चोरी पकड ली हो । मै उसकी आंखो मे देखकर इशारा से बोला क्या हुआ
वो बस मुस्कुरा दी ,,मुझे पता था कि चंपा जान रही थी कि ये मेरा पहली बार नही था ।
चंदू - तो फिर कब की प्लानिंग करनी है ।
मैने एक अंगड़ाई ली और चम्पा को देख कर उसके पुछते हुए - कल ???
वो शर्मा कर हा मे इशारा कर दी
फिर हम लोग मार्केट वाले घर के लिए एक साथ ही निकल गये ।
रास्ते मे काफी लोगो ने टीशर्ट मे उभरी हुई चंपा की नुकीली चुचिया और उसकी पतली स्कर्ट मे हिलते गाड को घूरा,,मगर हम तीनो ने उन पलो को भी इंजॉय किया ।
थोडी देर बाद मै दुकान पर चला गया और अपने कामो मे लग गया ।
शाम को 7 वजे तक शकुन्तला ताई की पैंटी लेके मै और मा साथ मे ही अपने चौराहे वाले घर वापस आ गये ।
मै पैंटी का थैला जानबुझ कर अपने कमरे मे रख दिया और नहाने चला गया ।
हम दोनो नहा के आये कि इतने मे पापा भी आ चुके थे ।
फिर पापा ने वही हाल मे ही अपने कपडे निकालने शुरु कर दिये । और एक तौलिया लपेट कर बनियान डाल ली ।
इधर मा भी कीचन मे भीड़ गयी और पापा को नहाने जाने को बोला ,,,मगर ऐन मौके पर डोर बेल बजी ।
हम तीनो जान रहे थे कि इस वक्त कौन आया होगा और हमारे चेहरे मुस्कुरा रहे थे ।
जारी रहेगी
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पीछले अपडेट मे आपने पढा कि जहा एकतरफ चमनपूरा मे रंगीलाल ने शकुन्तला की पोल खोल दी वही राज के मौसी के यहा रात मे गजब की रोमांचक घटनाये घटी और कुछ गहरे सवालो की उधेड़बुन के साथ रात बित गयी ।
अगली सुबह राजन की नीद करीब करीब 5 बजे तक खुली , वो उठा और एक नजर ममता को देखा । फिर उसे रात की घटना याद आई और उसका लण्ड कड़क हो गया ।
वो भी अन्गडाई लेके उठा और कमरे से बाहर आकर वो जीने से छ्त पर जाने के लिए मूड़ा ही था कि उसे रज्जो के कमरे से रोशनी बाहर आती दिखी ।
राजन की आंखे चमक उठी और वो लपक के रज्जो के कमरे की ओर गया ,,तो देखा दरवाजा और पर्दा कल रात मे जैसे था ,वैसे का वैसा ही पडा है और अंदर कमरे मे रज्जो और कमलनाथ नंगे एक-दूसरे से चिपके सोये है ।
राजन का लण्ड रज्जो की फुली हुई चुत देख कर खड़ा हो गया । तभी कमरे मे 5 बजे का अलार्म बजा और रज्जो उठ कर बैठ गयी । राजन फौरन दरवाजे से हट गया । मगर अन्दर रज्जो को आभास हो गया कि दरवाजे पर कोई है।
राजन भी वहा से तुरंत छत की ओर निकला मगर तब तक रज्जो उठा कर पर्दे के पीछे से राजन को सीढि से उपर जाते देख चुकी थी ।
रज्जो मन मे - कही जीजा जी ही तो नही थे ??
रज्जो को अब खुद पर बडी शर्मिंदगी हो रही थी और कि उसकी लापरवाही मे आज सुबह सुबह नंदोई जी ने उसको नंगा देख लिया होगा ।
अब ना जाने कैसे वो उनका सामना करेगी ।
वहा से हट कर रज्जो ने दरवाजा बंद कर दिया और एक मैकसी डाल कर , कमलनाथ को एक चादर से ढक कर ,खुद नीचे के बाथरुम में फ्रेश होने के लिए चली गयी ।
थोडी देर बाद धीरे धीरे सब उठ कर अपने अपने कामो मे लग गये । रज्जो भी फ्रेश होकर उपर गलियारे मे झाडू लगा रही थी कि उसकी नजर अपने कमरे के बाहर दरवाजे पर टपके वीर्य की कुछ बूंदो पर गयी जो सूख चुकी थी और उसे देख कर रज्जो को भोर के समय का ख्याल आया जब उसने राजन को दबे पाव उसके कमरे के बाहर से सीढ़ी की ओर जाते देखा था ।
रज्जो मन मे मुस्करा कर - मतलब जीजा जी ने पूरा मजा लिया सुबह सुबह ,,, नजर रखनी पड़ेगी अब मुझे भी हिहिहिही
फिर रज्जो ने वो दाग एक गीले कपडे से साफ करके बाकी का काम खतम करके नहाने के लिए अपने कपडे लेके उपर चली गयी ।
जहा ममता और राजन पहले से ही मौजुद थे। राजन जो कि अभी अभी नहा कर निकला था और सिर्फ एक गम्छा लपेट कर अपना जांघिया झाड कर छत की अरगन पर फैला रहा था ।
रज्जो इस समय एक मैकसी मे थी और उसके चुचिय चलने पर बहुत हिल दुल रही थी ।इधर राजन की नजर रज्जो पर पड़ते ही उसे सुबह और रात मे रज्जो का रन्डीपना याद आ गया कि कितनी भुखी है लण्ड की ।
ये सोचते ही राजन के लण्ड ने एक बार फिर से अंगड़ाई ली और ऊभार उपर से साफ दिखने लगा ।
राजन एक गाव का किसान आदमी था ,उसने खेतो मे बहुत मेहनत किया था तो उसका बदन बहुत कसा हुआ था ।
रज्जो की नजरे भी एक बार अपने नंदोई की नंगी चौडी छाती पर गयी फिर उसके लण्ड के उभार पर मारा और फिर जब राजन से नजरे मिली तो अनायास ही उसकी एक मुस्कुराहत निकल पडी ,जिस्मे शर्माहट भरी हुई थी ।
रज्जो नजरे चुराते हुए बाथरूम की ओर निकल गयी जहा ममता नहाने बैठी हुई थी ।
राजन ने भी मुस्करा कर अपना कपडा लेके नीचे चला गया ।
रज्जो बाथरूम के पास जाकर देखा तो ममता भी लगभग नहा चुकी थी और एक पेटिकोट को अपनी छातियों पर बाँधे हुए कपडे खंगाल रही थी ।
रज्जो इतरा कर - ओह्हो लग रहा है रात मे भैया का खुन्टा देख कर बहुत गरम हो गयी थी ,,जो बडे सवेरे नहा ली हम्म्म
ममता रज्जो की बात सुन कर मुस्कुराते हुए - हा देखा मैने कैसे जुल्म करती हो मेरे भैया पर आप ,, इतना बड़ा तबेले जैसा गाड रख दी बेचारे के मुह पर
रज्जो ममता को छेड़ते हुए - ओहो मतलब सच मे आई थी देखने अपने भैया का खुन्टा हम्म्म्म
ममता रज्जो की बाते सुन कर शर्मा कर झेप सी गयी और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि जल्दीबाजी मे उसने क्या क्या बोल दिया ।
रज्जो ममता को शर्म से लाल होता देख - ओह्हो देखो कैसे शर्मा रही है ,,जैसे रात मे अपने भैया से सुहागरात मना के आई हो
ममता ह्स कर - अरे भाभी आप छोडो तब ना मै कुछ करू ,,,आपने ही पूरा कब्जा कर रखा था ।
रज्जो वापस ममता को छेड़ कर - ओहो मतलब पूरा मन है अपने भैया को सईया बनाने का हम्म्म
ममता फिर से शर्म से लाल हो गयी ,,वो जान रही थी कि बातो मे वो अपने भाभी से नही जीत सकती ,,, वो कुछ भी बोले उसकी चित ही होनी है । इसिलिए उसने फिल्हाल के लिए किनारा करना ही सही समझा
ममता बालटी मे कपडे लेके - अरे भाभी हटो ,,क्या सुबह सुबह आप भी हिहिहिही
रज्जो किनारे होकर - अरे मेरी ननद रानी ,,एक बार लेके तो देखो अपने भैया का ,,फिर क्या सुबह क्या रात हिहिहिही
ममता बस हस दी और जानबुझ कर कोई जवाब नही दिया क्योकि वो फिर से अपनी भाभी के जाल मे फंसना नही चाहती थी ।
रज्जो भी कोई प्रतिक्रिया ना पाकर समझ गयी कि अब उसकी ननद शर्मा रही है तो उसने भी ज्यादा खिंचाई नही की और अपने कामो मे लग गयी ।
थोडी देर बाद सारे लोग हाल मे एक्ठ्ठा हुए , तब तक पल्लवि और सोनल ने नाश्ता तैयार कर लिया था ।
फिर सबने नाश्ता कर लिया और आज के काम के बारे मे चर्चा होने लगी कि आगे क्या होना है क्या बाकी है ।
कुछ सामनो की पर्चीया बनाई गयी और रज्जो ने तय किया कि आज छोटे मोटे काम निपटा लिया जाये और कल का लाया हुआ सामान सही जगह रख कर सहेज लिया जाय । फिर कल सारे लोग माल चलेंगे , वही रमन के लिए दूल्हे का कपडा और बाकी जिसको जरुरत होगी उसके हिसाब सब कोई ले लेगा ।
माल जाने की बात सुन कर पल्लवि अनुज सोनल बहुत ही चहक उठे । हालांकि अनुज पहले भी जानिपुर आ चुका था मगर पल्लवि और सोनल के लिए ये पहला अनुभव था ।
सारे लोग खुशी खुशी अपने अपने कामो मे लग गये । कमल्नाथ और राजन फिर से बाहर निकल गये कुछ अधूरे कामो के लिये ।
रमन अनुज को लिवा कर ब्रेकरी वाले दुकान पर चला गया और बाकी महिला मंडल घर के कामो मे लग गयी ।
इधर जहा ये सब घटित हो रहा था वही चमनपूरा मे दो जवाँ दिलो के धडकते अरमाँ अपनी उड़ान भर रहे थे ।
राज की जुबानी
रात मे अपना चुदाई का कोटा पूरा करके हम सब लोग सो गये ।
सुबह उठकर सारे लोग नाश्ते के बाद अपने अपने कामों में लग गये ।
मै भी 8 बजे तक दुकान खोलकर बैठ गया और थोडा साफ सफाई करते वक़्त मेरी नजर पैंटी के डब्बे पर गयी तो मुझे शकुन्तला ताई की बात याद आई । मेरे चेहरे पर अनायास मुस्कुराहत आ गयी ।
मैने थोडी देर बाद सारा काम खतम किया और कुछ ग्राहको से काम निपटा कर फ्री हुआ ।
फिर मैने शकुन्तला ताई के नाप की कुछ पैंटी के रंग का फ़ोटो निकाल कर काजल भाभी के व्हाटसअप पर भेज दिया और तुरंत उनको फोन भी लगा दिया ।
ये मेरा काजल भाभी को पहला काल था जो मैने सगाई के दिन ही पंखुडी भाभी के माध्यम से उनका नम्बर लिया था ।
तिन बार रिंग जाने के बाद ही फोन पिक हुई
काजल भाभी - हा हैलो ,कौन
मै काजल भाभी की मीठी धीमी आवाज सुन कर ही गदगद हो गया - नमस्ते भाभी मै बोल रहा हू राज
काजल थोडा हस कर - अरे बाबू आप हो ,,मै सोची किसका नम्बर है , कहिये फोन क्यू किया
मै हस कर - बस आपकी याद आई तो कर लिया हिहिहिही
काजल भाभी शर्मा गयी और थोडा असहज होकर - मतलब बाबू ,हम समझे नही
मै ह्स कर - अरे आप तो परेशान हो गयी होहिहिही ,,वो कल शाम को ताई जी आई थी घर ना ,तो उनको कुछ अंडरगारमेंट्स के कपडे चाहिये थे ,, साइज़ तो मुझे पता है आप रंग उनको दिखा दो ,मैने व्हाटसअप किया है आपको
काजल अंडरगारमेंट्स की बात पर फिर से शर्मा गयी मगर उसकी सास की बात थी तो - जी बाबू , रुकिये हम अभी मम्मी जी को दिखा कर फोन करते है ।
फिर फोन कट गया ।
मै बाकी के कामो मे लग गया और थोडी ही देर मे काजल भाभी का फोन आने लगा तो मेरे चेहरे पर मुस्कान छा गयी ।
मै फोन उठा कर - हा भाभी बोलिए
काजल भाभी - हा बाबू ,वो एक नेवी ब्लू और एक ब्राउन कलर वाला कर देना ।
मै खुश होकर - ठीक है भाभी , और कुछ आपके लिए
काजल हस कर - अरे मेरे लिए क्या हिहिहिही
मै - अरे वही बाली , रिंग ,लिपस्टिक, आईलाईनर , सिन्दूर बिन्दी हिहिहिहिही
काजल भाभी हस कर - अरे नही नही बाबू कुछ नही ,,कुछ चहिये होगा तो हम बता देंगे,,आपका नम्बर है ना हिहिहिही
मै खुश होकर - जी ठीक है भाभी ,रखता हू फिर ।
काजल भाभी - हा बाबू रखिये बाय ।
फिर फोन कट गया और मेरे चेहरे पर मुस्कुराहत थोडी देर छायी रही ।
मै वापस दुकान के कामो मे लग गया । करीब 11बजे चंदू का मेरे पास फोन आया की वो चौराहे वाले घर पहुच गया है और थोडी देर मे मै भी पहुच जाऊ । मैने भी उसको 12बजे तक आने को बोलकर फोन रख दिया ।
थोडी देर बाद मा दोपहर का खाना लेके आई और मैने चौराहे पर जाने के लिए नया बहाना खोज लिया था ।
मै - मा वो मै कह रहा था कि चंदू का फोन आया था , हमारे स्कूल पर कोई काम है ,,तो मै जाकर देख लू , एक घंटा लग जायेगा ।
मा थोडा सोच कर- अच्छा ठीक है , लेकिन पहले ये खाना खा ले और पापा का टिफ़िन देके उधर से ही निकल जाना ।
मै भी खाना खाकर और पापा का टिफ़िन देते हुए निकल गया चौराहे की ओर ।
थोडी ही देर मे मै चौराहे वाले घर पर पहुचा और गेट खोल कर घर मे प्रवेश किया और सबसे पहले जाकर मम्मी पापा का कमरा सही किया क्योकि उनके कमरे बेड का गद्दा बहुत मोटा था और रोज रात मे मा की चुदाई मे बहुत मजा आता था ।
कमरा सेट करने के बाद मैने चंदू को फोन किया ,,मेरे दिल की धड़कने तेज हो गयी थी और आने वाले रोमांच को लेके लण्ड ने भी अंगड़ाई लेनी शुरु कर दी थी ।
मैने दो बार फोन किया लेकिन चंदू ने फोन नही उठाया ,, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि ये साला फोन क्यू नही उठा रहा है ।
मै वही हाल मे चक्कर काटने लगा और फिर थोडी शंका हुई तो बाथरूम मे जाकर पेशाब करने लगा ,,,खडे लण्ड से पेशाब निकलने मे भी मुझे थोडी जलन सी हुई ।
मैने वही बाथरूम से निकल्ते ही फिर से ट्राई किया और आखिरी रिंग जाते जाते चंदू ने फोन पिक किया ।
मै गुस्से से तिलमिला कर - अबे साले फोन क्यू नही उठा रहा है ।
चन्दू - भाई मै झडने के करीब था तो कैसे उठा लेता , और मै तेरे भी तो जुगाड मे लगा था ना । जल्दी से दरवाजा खोल बाहर ही हू ।
मै चौक कर खुश हुआ और खुद को ठीक किया और फिर दरवाजा खोला तो सामने चंदू और चंपा थे । दोनो मुस्कुरा रहे थे ।
फिर चंदू मुझे हटा कर चम्पा का हाथ पकड कर अंदर जाने लगा
।मै उसे रोकते हुए - अबे तू कहा जा रहा है ,,दीदी को कौन देखेगा फिर ।
चंदू हस कर - मैने मा को घर जाने के लिए बोल दिया। ये बोलकर दीदी को लाया हू कि मुझे कालेज पर काम है और दीदी को वही अपने एक सहेली से मिलना है ।
मैने मुस्करा कर एक नजर चम्पा को देखा तो वो शर्मा कर मुस्कुरा रही थी ।
चंदू - भाई जल्दी कर ले 1 बजे तक पापा के आने का समय है ,,वो घर पर दीदी को नही देखेंगे तो मा पर गुस्सा करेंगे ,तू तो जानता ही है ना पापा को मेरे ।
मै चंदू की बातो पर ध्यान नही दे रहा था ,,मेरी नजारे तो चंपा के टीशर्ट मे उभरे हुए उसकी 34C की ब्ड़ी ब्ड़ी चुचियॉ के नुकीले निप्प्ल पर थी । चंपा की नजर जब मुझ पर गयी तो उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी और चुचिय टीशर्ट को उपर उठाने लगी ।
चंदू ने भी मेरी नजर को भाप लिया तो तपाक से चंपा के पीछे गया और उसका टीशर्ट उठा कर चुचियॉ को नंगा कर दिया ।
चंदू - भाई तरस क्यू रहा है ,,ऐसे देख ले ना ,
चंदू के इस हरकत से चंपा सिहर गयी और उसकी आंखे बंद हो गयी । मेरी नजरे चंपा के गोल गोल हल्के सावले चुचो पर थी ,,,उसके निप्प्ल बहुत सख्त थे ।
मै थुक गटक कर एक बार पैंट के उपर से अपने सर उठाते लण्ड को दबाया तो मेरे तन बदन मे सरसराहट और तेज हो गयी । मै धीरे से एक कदम आगे बढा , तबतक चंदू ने चंपा की चुचिया नीचे से थाम ली और वही अपने भाई का स्पर्श अपनी चुचियॉ पर पाकर चम्पा चंदू की बाहो मे पिघल गयी ,,वो लम्बी लम्बी सासे लेने गयी जिससे उसकी थन जैसी चुचिया उपर नीचे होने लगी ।
मै अब चम्पा के सामने आ चुका था और मैने हौले से हाथ बढा कर अपनी कड़क हथेली को चंपा के नुकीले निप्प्ल पर साम्ने से रखा
चंपा - सीईई उम्म्ंम्ं ,,,फिर वो तेजी से सासे लेने लगी ।
उसकी बेताबी देखकर मैने अपना लण्ड एक हाथ से पैंट के उपर से सहलाते हुए दुसरे हाथ की हथेली को उसकी चुची पर अच्छे से फिराया और फिर उसको नीचे से उठाया तो काफी वजनदार था वो ।
मेरे बदन मे एक कपकपी सी होने लगी ,, एक नया सा अह्सास था और मेरे अन्दर का हवस मुझ पर हावी हो रहा।
इतने मे चंदू ने चम्पा को मेरी तरफ धकेला ,मै बडी मुस्किल से चम्पा को लेके संभला ,, मगर इस घटना मे चंपा की चुची पर मेरी पकड और तेज हो गयी थी ,,जिससे चम्पा की सिसकी निकल गयी ।
चंदू - ले भाई मजा कर ,,मै यही हू हिहिहिजी
चम्पा जो कि अब मेरी बाहो मे थी ,,उसकी कमर के निचले हिस्से और कूल्हो पर मेरा हाथ रेंग रहा था और दुसरा हाथ अब भी वैसे ही उसकी चुची पर कसा हुआ था ।
चन्दू के मुह से ऐसी बाते सुन कर हम दोनो एक दुसरे को देख कर मुस्कुराये और मैने चम्पा के होठो से अपने होठ जोड लिये
उफ्फ्फ क्या गरम तपते होठ थे उसके ,,चंपा ने तेजी से मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी गरमी देख कर मै भी जोश मे आ गया और एक हाथ को उसी चुची पर मस्ल्ते हुए दुसरे हाथ को चम्पा के गाड पर फिराने लगा ।
स्कर्ट के उपर से सहलाने पर मुझे चंपा की गाड अन्दर से बिल्कुल नंगी मह्सूस हुई जिससे मेरे तन और लण्ड में गर्मी बढ गयी ।
मैने अपने दोनो हाथ पीछे ले जाकर चम्पा की गाड नोचने लगा ,,बदले मे चंपा अपनी एडिया उठा कर मेरे होठ चूसे जा रही थी ।
मैने धीरे धीरे स्कर्ट को उपर उठा दिया और उसके नंगी मुलायम गाड के सहलाते हुए उन्हे मसलने लगा ।
उधर चंदू वही हाल मे लगे सोफे पर बैठ कर अपना लण्ड निकाल कर उसे सहलाने लगा ।
चंपा की सिसकियाँ बहुत ही कामुक थी और वो खुद का जिस्म मेरे बदन पर घिसने लगी ।
मैने उसके गाड के पाटो को फैलाया और बीच वाली ऊँगली को उसकी गाड़ मी गहरी दरारो मे डाल कर रगड़ने लगा ।
चंपा ने एक गहरी अह्ह्ह भरी और मेरे कंधो को पकड मजबूत कर ली ,,उसके नुकीले नाखून टीशर्ट मे घूस कर चुबने लगे । मेरे हर बार अपनी उन्गली उसके गाड की दरारो से उसकी सुराख तक ले जाते वक़्त वो तेजी अपने चुतडॉ को सख्त कर लेती और गहरी सिसकिया लेने लगती ।
मै जितना सोच रहा था चम्पा उससे कही ज्यादा गरम लडकी थी , उसके हाथ अब मेरे पैंट के उपर से लण्ड के उभार को टटोलने लगे थे । मैने उसकी आंखो मे एक नशा सा देखा , वो सिस्कते हुए मुस्कुराई और नीचे मेरे पैरो मे सरकती चली गयी ।
चम्पा की आवाज भारी थी और उसकी मादक सिस्कियो से भरी हसी मुझे और भी उत्तेजीत कर रही थी । उसने जल्दी जल्दी मेरे बेल्ट खोल कर पैंट नीचे कर दिया और अंडरवियर मे उभरे हुए लण्ड को उपर से सहलाया ।
मै उसकी अदा से पूरी तरह काप गया , मेरे बदन मे झुरझुरी सी होने लगी ,,पाव कांपने लगे ,,अगले ही पल चम्पा ने अंडरवियर मे हाथ डाल कर मेरे मुसल को निकाला जो पूरी तरह से तीर के जैसे सीधा और नुकीला हिल रहा था ।
चम्पा ने एक बार बडी मादकता से अपनी नाक के मेरे सुपाडे के पास रख कर उसकी गर्मी और गन्ध को आंखे बंद कर मह्सूस किया और उसके चेहरे पर एक मुस्कान छा गयी ।
जब उसने अप्नी आन्खे खोली तो वो एक नशे मे थी और उसकी वो मुस्कान मेरे दिल की धडकनें तेज कर रही थी ,, उसने अपनी नशीली आंखो और उसी कातिल मुस्कान के साथ मुझे देखते हुए अपनी नुकीले नाखूनों से मेरे आड़ो को खरोचते हुए इठलाई ।
मेरी आंखे इस अहसास से बंद सी हो गयी और मेरे हाथ उसके सर पर चले गये । मैने अपनी एड़ियो को उचकाया और उसके सर को अपने लण्ड की तरफ खीचा ।
एक गरम भाप और फिर मानो मुलायम बर्फ की खोल मे मेरा लण्ड सरकने ।
आंखे खोला तो चम्पा मेरा आधा लण्ड घोट चुकी थी और उसकी आंखे बंद थी ,,, लण्ड को इतनी चाव से चूसने पर मुझे गीता की याद आई ,,,वो भी ऐसे ही मेरे लण्ड को चुसती थी ,,मगर उसके छोटे हाथो और नरम होठ का स्पर्श कुछ अलग था ,,,जबकी यहा तो चंपा एक माहिर खिलाडी लग रही थी ।
उसने मेरे आड़ो को अपने एक मुठ्ठि मे कस रखा था जिससे मेरे लण्ड की लम्बाई मे हल्का इजाफा था ,,जिसे वो पूरा गले तक उतार चुकी थी ।
मै पागल सा होने लगा उसकी मुठ्ठि मेरे आड़ो को और कस रही थी ,,एक मीठा दर्द सा हो रहा था क्योकि मेरे आड़ो मे रस निकल कर मेरे सुपाडे की ओर जाने चाहते थे । मगर चम्पा ने ऐन जगह पर मेरे लण्ड को कसा हुआ था ।
ऐसा अनुभव मैने आज तक नही किया था ,, चम्पा जैसी गरम लड़की को भोगना आसान नही था , उसके लण्ड चुसने का अंदाज निराला था ,,
मै धीरे धीरे चरम की ओर बढ रहा था ,
ऐसे मे चंपा ने हौले से मेरा लण्ड अपने मुह से निकालते हुए मेरे आड़ो से पकड ढीली की
जिससे तेजी से सारा वीर्य मेरे आड़ो से सुपाडे मे भरने लगा । मेरे लण्ड मे गरमी बढने लगी और मै दुगनी ताकत से अपने लण्ड की निचली नशो पर काबू करने लगा ,, मेरा चेहरा तप रहा था ,,एडिया उठ चुकी थी, लण्ड पूरी तरह से तन गया था ,,सुपाडे मे गर्मी बढ गयी थी ।।
ऐसे मे चंपा ने मेरे लण्ड को उपर करके निचले हिस्से मे सूपाडे की गांठ पर जीभ फिराने लगी और मेरा सारा सन्तुलन और ताकत एक साथ एक गाढ़े फब्बारे के जैसा फुट पडा ,,, मेरा सुपाडा सारा माल एक साथ चंपा के मुह पर ऊड़ेलने ,,,आज तक मैने इतनी ऊततेज्ना मह्सूस नही की थी ।
मेरा लण्ड झटके दे रहा था और चम्पा के चेहरा मेरे वीर्य से टपक रहा था ।
मेरे हाथ आनायास ही मेरे लण्ड पर गये और मैने अच्छे से उसे झाड़ते हुए एक गहरी सास ली ,,,मै संतुष्ट था कि मै उस दर्द से आजाद था ।
वही जब नजर चंपा पर गयी तो वो मुस्कुरा रही थी और अपने मुछो के पास से टपकते बीर्य को जीभ से साफ कर रही थी ।
मै एक बार हल्का सा हसा और दो कदम पीछे होकर बेड पर बैठ गया ।
वही चंदू बस अपना लण्ड सहलाते हुए मुस्कुरा रहा था ।
चंपा उठी और मुझसे बाथरूम का पुछ कर मेरे कमरे की ओर चली गयी ।
मैने धीरे धीरे अपनी सास बराबर की और एक नजर चंदू को देखा तो वो मुझे इशारे से मेरा हाल पुछ रहा था ।
मै भी मुस्कुरा दिया ,, थोडी देर बाद चंपा बाहर आई
फिर मैने अपने कपड़े सही किये और सबको ठण्डा पानी पीने को दिया ।
फिर चंपा के बगल मे जाकर बैथ गया । चंपा मुझसे ऐसे चिपक गयी मानो मेरी प्रेमिका हो । हमने कोई बाते नही की बस एक दुसरे को देख कर मुस्कराये ।
चंदू हस कर - फिर भाई क्या इरादा है हाह्हहहा
मै थोडा शर्मा कर हसा - आज बस इतना ही भाई ,,बहुत थकान सी लग रही है हिहिहिही
चंदू हस कर - होता है भाई ,,तेरा पहली बार है ना ,,तो थकान तो होगा ही हिहिहिही
चंदू की बात पर चंपा ने मुझे ऐसे घूरा मानो मेरी चोरी पकड ली हो । मै उसकी आंखो मे देखकर इशारा से बोला क्या हुआ
वो बस मुस्कुरा दी ,,मुझे पता था कि चंपा जान रही थी कि ये मेरा पहली बार नही था ।
चंदू - तो फिर कब की प्लानिंग करनी है ।
मैने एक अंगड़ाई ली और चम्पा को देख कर उसके पुछते हुए - कल ???
वो शर्मा कर हा मे इशारा कर दी
फिर हम लोग मार्केट वाले घर के लिए एक साथ ही निकल गये ।
रास्ते मे काफी लोगो ने टीशर्ट मे उभरी हुई चंपा की नुकीली चुचिया और उसकी पतली स्कर्ट मे हिलते गाड को घूरा,,मगर हम तीनो ने उन पलो को भी इंजॉय किया ।
थोडी देर बाद मै दुकान पर चला गया और अपने कामो मे लग गया ।
शाम को 7 वजे तक शकुन्तला ताई की पैंटी लेके मै और मा साथ मे ही अपने चौराहे वाले घर वापस आ गये ।
मै पैंटी का थैला जानबुझ कर अपने कमरे मे रख दिया और नहाने चला गया ।
हम दोनो नहा के आये कि इतने मे पापा भी आ चुके थे ।
फिर पापा ने वही हाल मे ही अपने कपडे निकालने शुरु कर दिये । और एक तौलिया लपेट कर बनियान डाल ली ।
इधर मा भी कीचन मे भीड़ गयी और पापा को नहाने जाने को बोला ,,,मगर ऐन मौके पर डोर बेल बजी ।
हम तीनो जान रहे थे कि इस वक्त कौन आया होगा और हमारे चेहरे मुस्कुरा रहे थे ।
जारी रहेगी
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