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Incest सपना-या-हकीकत

Update 16

मौसी की जी तोड़ चुदाई के बाद मै थोडी देर बाद उनके ऊपर से उठा और किचन से खाना लिया फिर खाना खा कर जल्दी से निचे चला गया

2 बजे तक मौसी तैयार होकर मा के साथ नीचे आई और फिर मै उनको बस स्टैंड तक छोडने ले गया

रास्ते मे

मै - मौसी फिर कब आओगी

मौसी - अगले महीने रक्षाबंधन आनेवाला है तो मै राजेश (मामा) के यहा जाऊंगी तो तु छोटी को लेके आजाना ,,,,हिहिहिही

मै - वाह मौसी ग्रेट ,,,

फिर मैने मौसी से अपना नया मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया जो आज ही चालू हुआ था और उनको बस मे बिठा कर घर वापस आ गया ।

फिर रोज की तरह मै कोचिंग के लिए गया और शाम को वापस आया और मा से अपना नया मोबाईल मागा

फिर मै मोबाइल लेकर निकल गया चंदू से मिलने क्योकि मुझे उसको मोबाइल भी दिखाना था और ढेर सारी बाते भी करनी है ।

मै चंदू के घर पहुचा और उसको आवाज दी थोडी देर मे वो बाहर आया ,, फिर मै उसको लिवा कर टाउन से बाहर पुल की तरफ चल दिया

रास्ते मे मैने उसको अपना मोबाइल दिखाया और साथ मे हमने तस्वीरे निकाली ।

फिर मुझे लगा अब चंदू से कुछ काम की बात शुरू करना चहिये ।

मै - यार चंदू एक बात पूछू

चंदू - अबे बोल भाई

मै - कोई चुत का जुगाड हैं क्या तेरे पास

चंदू - अबे साले ,, मै क्या दलाल हू जो चुत लेके आऊ ,, बेटा चुत पाने के लिए खुद मेहनत करनी पड़ती

मै - भाई कुछ भी कर मुझसे अब रहा नही जाता ,, पुरा दिन घर और दुकान मे रह कर बोर हो जाता हू

चन्दू- अबे तेरे पास मोबाईल आ गया अब काहे का बोर बे

मै - इससे क्या होगा यार ये तो घर पर जरुरत थी तो पापा ने दिला दिया

चंदू - अबे जानी ,, इस्मे दुनिया की सारी खुशियाँ मिल जायेगी

मै - वो कैसे

चंदू - अपना फोन ला ,,, और मेरा फोन लेकर कुछ फ्री पोर्न चला के दिखाने लगा

सेक्स वीडियो देख कर ही मेरा लण्ड मे तनाव आ गया

मै - अबे यार इसको हमेशा थोडी न देख सकता हूं और मेरे पास ईयरफोन भी नही

चंदू - तो फ़िकर काहे की बे ,,, अगर वीडियो नही देख सकता तो स्टोरी पढ लिया कर

और फिर उसने मुझे xfourm.live की एक जबरदस्त सेक्स स्टोरी वेबसाइट खोल के दिखाई

मैने स्टोरी के टाईटल पढने सुरु किये ,,, उसपे ज्यादातर पारिवारिक सेक्स की कहानिया थी

मै - अबे ये क्या है ये सब ,,,इसमे तो कितनी गंदी कहानिया है ,, मा बेटा की चुदाई , पापा बुआ , भाई बहन

चंदू - भाई ऐसी कहानियो की ही डिमांड है आजकल ,,,,

मै - ये सब सच्ची कहानिया है क्या

चंदू - कुछ सच्ची होती है और कुछ लेखक अपनी कलपनाओ को यहा लिखते है

मै - तो तु भी ये पढता है क्या

चंदू - नही अब उसकी जरुरत नही पड़ती मुझे

मै - जरुरत नही मतलब

चंदू थोड़ा हड़बड़ा गया और बोला - कुछ नही छोड वो सब

मै उसको थोड़ा दोस्ती के नाम पर इमोशनल करते हुए - यही है तेरी दोस्ती की अब तू मुझसे बाते भी छिपाने ल्गा

चंदू - नही भाई ऐसी बात नही

मै - फिर बता क्या बात है

चंदू थोड़ा इधर उधर देख कर बोला - भाई वो क्या है मैने इसी साइट से स्टोरी पढ कर उसको अपने लाइफ से रिलेट करने लगा और ना जाने कब मै अपनी बहन के लिए पागल हो गया और फिर

मै - फिर क्या

चंदू - भाई देख ये बात सिर्फ हमारे बिच ही रहनी चाहिये

मै - साले बता ना

चंदू - तो सुन मै काफी सालो से ऐसी stories पढ रहा था और इसका इस्तेमाल मैने अपनी बहन पर किया और मै पास हो गया लेकिन एक दिन मा को पता चला और वो दीदी को हॉस्टल भेज दी

मै - फिर

चंदू - फिर दीदी के ना रहने पर मुझे सेक्स की लत ने ऐसा घेरा की मै रोज 3 4 बार मूठ मारता था इस बात का पता भी मा को चल गया तो मैने उनको अपनी प्रोब्लम बतायी उस दिन वो मुझे डाट कर थप्पड़् मार चली गयी

फिर 2 दिन बाद एक रात मा मेरे कमरे मे आई और फिर मुझे मूठ मारते हुए देखा और पता नही उनको क्या सुझा उसदिन उनहोंने मेरा लण्ड चूसा और बडे प्यार से समझाया

फिर मै जानबुझ कर खड़ा लण्ड उनके सामने ले जाता और वो चुस के शांत कर देती लेकिन मुझे चुत का सुख नही मिला तो मै मा को चोदने का एक आइडिया बनाया और अगले दिन जब खड़ा लण्ड लेकर मा के पास गया तो जब वो लण्ड चुस रही थी उसी बिच मैने मा बोला कि मुझे आपका चुत चाटने का मन है

फिर वो दिन और आज का दिन मै रोज मा की चुदाई करता और दीदी आती है तो उनका भी

मै इतना सुनकर जानबुझ कर चंदू के सामने अपना सर पकड़ के बैठ गया

चंदू - यार देख मुझे गलत मत समझ मुझे सेक्स की बहुत तलब है तो

मै - तू झुट बोल रहा है ना

चंदू - नही भाई मैने जो बोला वो सब सच है

मै - मै नही मानता ,,अगर ऐसा होता तो तु मुझे बहुत पहले ही बताता

चंदू - तो अब तुझे सच लगे इसके लिए क्या करू मै

मै - तू ऐसा कर मुझे तेरी मा के साथ चुदाई दिखा दे

चंदू - ठीक है फिर चल

मै - ऐसे नही तू तेरे मा के साथ का वीडियो बना कर मेरे मोबाईल पर भेज देना मै देख लूंगा

चंदू -ठीक है लेकिन ये बात और वीडियो किसी और तक नही जाना चाहिये इसका वादा कर

मै - हा ठीक है वादा

फिर हम लोग वापस घर आ गये ।

रात मे मै खाना खा कर छत पर चला गया जहा मेरी बहन पहले से टहल रही थी

फिर हम लोग थोड़ी देर कॉलेज की बात किये फिर वो जाते जाते मुझसे बोली - भाई आज रात के लिए अपना मोबाइल दोगे क्या मुझे मूवी देखना है ।

और मैने भी बिना कोई टोक के उसको मोबाईल दे दिया फिर वो निचे चली गयी ।

दोस्तो राज ने अपनी बहन को मोबाईल तो दे दिया लेकिन उन सेक्स स्टोरी की हिस्ट्री को डिलीट करना भूल गया जो चंदू ने उसके मोबाइल मे खोले थे ,,,, क्या अब राज और बहन मे कोई नया ड्रामा होगा या नही
 
UPDATE 17

आज मौसी की ताबड़तोड़ ठुकाई और दिन भर की भागदौड़ से बहुत थक गया था तो आज रात पापा मम्मी को देखना छोड निचे स्टोररुम मे अपने बेड पर सोने चला गया ।

अगली सुबह आंख खुली तो घड़ी में देखा तो 6 बज रहे थे,,, मै सोचा यार मै तो जल्दी उठ गया ,,,, फिर मै फ्रेश होने छत पर गया जहा बाथरूम से मुझे किसी के नहाने की आवाज आ रही थी

मै सोचने लगा पापा तो 8 बजे से पहले उठते नही अनुज भी सो रहा होगा

फिर बाथरुम मे कौन हो सकता मा या दीदी

यार कोई भी यही इंतजार करता हू देखता हू कौन बाहर आता है

थोडी देर बाद दरवजा खुला तो मेरी अप्सरा जैसी सुन्दर दीदी निकली

उनके भिगे बाल और निचे गोरी चिकनी गुदाज जान्घे और तौलिये मे लिपटी जवानी जो उनके नरम कामुक बदन को ढकने की नाकाम कोसिस मे लगे थे उफ्फ्फ क्या मस्त दिख रही थी दीदी

फिर जैसे ही दीदी की नजर मुझ पर पडी तो कपड़ो से भरी बाल्टी उनसे छूट गयी और वो तौलिये को निचे खिच कर अपने मखमली जांघो को छिपाने लगी और इसी हडबडी मे ऊपर से तौलिया खुल गया

और दीदी एकदम नंगी हो गयी

सुबह की हल्की सुनहरी रोशनी मे उनका दुधिया बदन और खिल सा गया ,, उनका दो अनमोल रतन कुछ पलो के लिए निर्वस्त्र हो गये उफ्फ्फ्फ क्या रसिले मम्मे थे दीदी के ,,,, और उनकी हल्की चॉकलेटी रंग की मुंगफली के दाने सी निप्प्ल ,,,,

और हल्की बालो वाली भीगी हुई पिंक चुत जो सुबह की रोशनी मे चमक रही थी

इससे पहले कि मै जी भर कर कुछ देख पाता दीदी ने लपक कर तौलिया उठाया और आगे कर लिया फिर बिना कुछ बोले बाथरूम की तरफ भागी

ह्य्य्य्य ह्य्य्य्य कयामत होना था उस दिन

दीदी के घूमते ही उनकी गोरी चिकनी गुदाज गांड मेरे आँखो के सामने आ गयी और वो हिलते हुए जा रहे थे उफ्फ्फ

मेरे आँखो की सुकून मिल पाता तभी दीदी ने बाथरूम का लॉक लगा दिया

थोडी देर शान्ति के बाद मै बाथरूम के पास गया और बोला - सॉरी दिदी मुझे नही पता था की आप ऐसे अचानक से निकलोगे

मै टॉयलेट मे जा रहा हूँ आप निचे चले जाओ

फिर मै टॉयलेट मे घुसा दो मिनट बाद बाथरूम का दरवाजा खुला और दिदी बिना कुछ बोले निचे चली गई

मेरे मन में थोडी शान्ति हुई की कोई हंगामा नही हुआ मै भी जल्दी से फ्रेश हुआ और नहा कर निचे आया तो दीदी टीशर्ट लोवर पहने किचन मे थी और अनुज बेडरूम मे सोया था मम्मी पापा भी ऊपर नही आये थे

मुझे लगा की मुझे दीदी से बात करनी चाहिए

तो मै किचन मे गया और उनसे पानी मागा और उन्होंने बिना मेरी तरफ देखे एक ग्लास पानी दे दिया और बर्तन धुलने लगी ।

मै - सॉरी दीदी ,,मुझे नही पता था कि ऊपर आप हो और वो सब अचानक से हुआ तो

मैने जानबूझ कर सडा सा मुह बना कर दीदी के सामने नजरे नीचे किये हुए खड़ा रहा जैसे मुझे कितना बुरा मह्सूस हो रहा हो ।

दीदी ने एक नजर मुझे ऐसे देखा और मुस्करा कर बोली - हम्म्म्म ठीक है माफ किया लेकिन एक शर्त है

मै खुश हो गया - थैंक्स दीदी ,,, लेकिन क्या शर्त

दिदी मुस्कुराते हुए बोली -पहली ये कि वो मुझे आज रात भी तेरा मोबाइल चाहिये

मै - बोला ठीक है लेकिन अभी कहा है मोबाइल मेरा

दीदी - वो मेरे लोवर की जेब मे है भाई

मै - तो दो न

दीदी - अरे बर्तन धुल रही हू ,,, तू खुद निकाल

मै - मै मै

दीदी - हा निकाल भाई

फिर उनके पास गया और धीरे से उनकी जेब से बहुत सम्भाल के की उनकी बॉडी को ना छुए मेरा हाथ मोबाईल निकाल लिया

मै - थैंक्स दीदी ,,,फिर जाने लगा

दीदी - अरे दुसरी शर्त तो सुन कर जा

मै चौकते हुए - दुसरी शर्त क्या अब

दीदी - देख अगले महीने रक्षाबंधन है और गिन कर 14 दिन बचे है तो मुझे एक नया मोबाइल चहिये मेरा गिफ्ट

मै - अच्छा ठीक है मै पापा से बोलूंगा

दीदी भी खुश हो गयी और बोली - और हा सुन एक बात

मै - हा बोलो न दिदी

दीदी - आगे से सुबह जल्दी उठकर मत आना नही तो अगली बार और महगा शर्त रखूंगी ,,,,हिहिहिहिही ,,चल भाग अब

मै शर्माते हुए - ठीक है दीदी जो चाहे ले लेना ,,,,और हस्ते हुए भाग गया

दीदी मुझे पकड़ने के लिए दौड़ती तब तक मै निचे भाग आया

और देखा दुकान तो अभी बंद है और अभी 7 ही बज रहे थे फिर मैने पापा के रुम की तरफ देखा तो रुम बंद था लेकिन कुछ बात चित की अवाजे आ रही थी ।

मै खिडकी के पास गया और अंदर देखा ,,अहहा क्या नजारा था

पापा दीवाल से टेक लगाये बिस्तर पर बैठे हैं और मा झुक कर उनका लण्ड चुस रही है

पापा - जानती हो रागिनी ,, अगले हफ्ते शीला दीदी आने वाली है

मा लण्ड को निकाल कर - अरे इस बार इतना जल्दी ,,,, रक्षाबंधन को तो 2 हफ्ते है

पापा - हा वो जन्गिलाल की औरत , निशा और राहुल के साथ अगले हफ्ते मायके जा रही है वहा कोई शादी का कार्यक्रम है तो वही कल फोन की थी दुकान पर था ।

मा - अच्छा ठीक है फिर

मा - और मुझे भी तो रक्षाबंधन पर जाना है मायके 2 दिन के लिए

पापा - क्या दो दिन

मा - हा राजेश भैया की औरत हमेशा बोलती है की आती हो रुकती नही

पापा - लेकिन मेरा क्या होगा जान 2 दिन

मा - 2 दिन अपनी शीला दीदी को चोद लेना ,,,,मा उनको छेद्ते हुए बोली

पापा - हाय्य्य शीला दीदी

मा - क्या हुआ ,,कही सच मे चोदने का सोच तो नही रहे

पापा - हा सोच रहा हूँ मेरा तो ठीक है लेकिन तू 2 दिन कैसे रहेगी ,,

मा - मेरे मायके में मेरे आशिको की कमी थोडी है ,,,हिहिही किसी को भी बुला लुंगी

पापा - ओहोहो किसी की क्या जरुरत है राजेश है ना ,,,,हहाहहहा फिर पापा मा को पकड के हग कर लेतेहै

मा - चलो बहुत हो गई मस्ती अब नहा धो लो मै नास्ता लगाती हू

फिर मै भी जल्दी से ऊपर भागा ।

अब देख्ते है क्या होने वाला है
 
Update 18

मै ऊपर आकर नास्ता कर रहा था कि पापा और मा निचे से आ गये

पापा - अरे वाह राज , तू तो बड़ा जल्दी उठ गया

मै - जी पापा रात मे जल्दी ही सो गया था तो जल्दी निद खुल गई

मा - चलिये अब जाईये नहा कर आईये दुकान नही जाना क्या

पापा- अरे हा , और पापा जल्दी से ऊपर चले गये

मै हसने लगा

मा - तु भी चुपचाप नास्ता कर और त्योहार आने वाले है तो आज दुकान की पर्ची बना ले कल हम दोनो मार्केट जायेगे

मै - दोनो क्यू , मै लेके आऊंगा ना मा आप क्यो परेशान हो

मा - अरे तु लेडीज़ अंडरगार्मेंट सही नही लाता है ,,और आजकल की लडकिया मोबाईल पर मुझे नये नये मॉडल दिखाई है और ओर्डेर भी दिया है उसी तरह का मुझे लाना है ।

मैने एक नजर मा को देखा वो सब्जी छील रही थी वही दीदी पर नजर गयी तो वो मुझे देख कर हस रही थी

मैने उसको चम्मच दिखाया तो उसने भी मुह बनाया ,मै वापस नाश्ता करने लगा

तभी मेरे बारे मे एक शैतानी आइडिया आया क्यो ना मा के साथ थोड़ा मज़ा लू

मै - अगर नये डिज़ाइन के अंडरगार्मेंट की बात है तो मुझसे कहती मै आपको अपने मोबाइल मे इंटरनेट से एक से एक अच्छी माडल दिखाता

मा - अच्छा मोबाईल मे मिल जाते है क्या ये सब

मै - मा सिर्फ कपड़े ही नही अपनी दुकान और भी नये नये आइटेम मिल जायेंगे

मा - अच्छा ठीक है अभी दोपहर के बाद मै दुकान मे आऊ तो दिखाना

मै खुश होता हुआ - ठीक है मा तबतक मै कुछ नये डिज़ाइन निकाल के रखे रहूंगा आपके लिए

मा - हा ठीक है बेटा

फिर मै नास्ता करके निचे गया और दुकान खोल कर काम करने लगा

थोडी देर बाद एक मस्त गदरायी गांड वाली सवाली की लडकी मेरे दुकान पर आई

नया परिचय

सब्बो - मेरे मुहल्ले के पीछे वाली गली मे रह्ती है उम्र 28 साल , लेकिन शादी नही हुई है क्यौंकि ये एक नम्बर की छिनाल और कई बार रंगरेलिया मनाते पकड़ी गई है,,, जवान तो जवान 60 साल के बुढो ने भी इसकी गदरायी जवानी को भोगा है

इसका साइज़ - 38 36 40

इसके लहराते चुचे और कसी गदरायी गांड सबके लण्ड खड़े कर दे ,,,, इसके बदनाम होने के बाद अब ये कुछ गिने चुने सेठो की रखैल है ।

रुबीना - सब्बो की मा एक विधवा है , उम्र 50 साल , गठिला बदन और 40 साइज़ की भारी चुचो की मल्लिका ,,,और उसके 44 साइज़ के हिलते चुतड़ के क्या कहने

सोनू - रुबीना का एकलौता बेटा और सब्बो का छोटा भाई ,,जिसे सब्बो अपनी जान से ज्यादा प्यार करती है और सुनी सुनाई बात है कि सब्बो ने सोनू के लिए अपने ही मुह्हले की कई चूते उसको दिलवाई है ।

सब्बो की वजह से उसके मुहल्ले की और औरते भी थोड़ा बहुत बाहर सेक्स करने लगी थी जिससे की उसका टोला बदनाम था और हम लडके उसे मुहल्ले को रान्डटोला कहते थे ।

वापस कहानी पर

मैने एक नजर सब्बो को ऊपर से निचे देखा

महरुन कलर की बिना ब्रा के उसने टीशर्त पहनी थी जिसमे उसको बडे दानेदार निप्प्ल नुकीले होकर ऐसे तने थे मानो टीशर्त छेद कर बाहर आना चाहते हो और उसकी 38 इन्च का गेराव लिये फुली हुई चुची टीशर्ट मे कसी हुई थी

निचे हरे रंग का स्कर्ट जो कमर के बाद से उसके 40इन्च की बाहर निकली हुई गदराये चुतडो से इतना ऊपर उठा था की उसकी चिकनी पिंडलीया दिख रही थी ।

मेरा तो ये देख कर लण्ड फन्फ्ना गया ।

सब्बो - राज मुझे कुछ सामान चाहिये जरा चाची को बुला दोगे

मै - अरे क्या चाहिये बताओ

सब्बो - वो मुझे बालसफा वाला साबुन चाहिये था

मै - अरे वो अब नही आता जी ,, फिर मैने एक हेअर रेमोवर क्रीम दिया

सब्बो - अरे नही इससे दर्द ज्यादा होता है , साबुन हो तो दे दे नही तो एक 38 इन्च की ब्रा दिखा दे

मै थोडा हिचकता हुआ पुछा - कैसा ब्रा पहनती हो कॉटन मे या स्पोर्ट वाली

सब्बो थोड़ा झिझकते हुए- अब ये स्पोर्ट वाली क्या है ,,,इसिलिए बोल रही थी की चाची को बुला दे वो जानती है मै कौन सा पहनती हू

मै - स्पोर्ट वाले मे तुम्हारे वो लटकेंगे नही और शेप बना रहता है ,,,,मैने उसके चुचो की ओर इशारा करते हुए कहा

सब्बो थोड़ा सोचते हुए - अच्छा ,ठीक है फिर एक 38 नम्बर की वही देदे

मै - इसमे साइज़ का थोड़ा दिक्कत होता है सही साइज़ से एक नं छोटा लेना चाहिए

सब्बो - और अगर छोटा हो गया तो

मै - तु अंडर चली जा नाप ले एक बार

सब्बो मेरी तरफ अचरज से देख्ते हुए मुस्कुराई

फिर मै उसे पापा के कमरे के पास ले गया और बोला जाओ अन्दर नाप लो

सब्बो - ठीक है तू बाहर ही खड़ा रह कोई आये तो आवाज दे देना

सब्बो की ये बात मुझे कुछ आफर जैसी लगी मैने सोचा - ये है तो एक नं की रन्डी ही चलो थोडा मज़ा मै भी लेलू

मै शरारती अंदाज मे - कहो तो बाहर ही नही जाता हूँ ,,, और ये बोल के थोड़ा हिम्मत करते हुए उसके हैवी चुतडो को सहलाया और हल्का सा हाथ मे भर के दबाया भी

सब्बो थोड़ा शर्माते हुए बिना कुछ बोले पीछे हट गयी और एक झटके मे अपना टीसर्ट निकाल दिया और उसके हैवी नरम हल्के सावले रसिले चुचे उछल के नंगे हो गये

मेरा लण्ड तुरंत एक पल मे ही उत्तेजना से भर गया और मै झट से एक नजर दुकान मे देखा और तेज़ी से सब्बो की तरफ लपका और उसकी कमर को पकड के अपनी तरफ खीचा और जीभ निकाल कर उसके काले घेरेदार मून्क्के जैसे निप्प्ल को चाटते हुए उसकी चुचियो को चुस्ने लगा और एक हाथ सीधा उसकी चुत पर ले जाकर रगड़ने लगा

मेरे अचानक हवस भरे हमले से सब्बो खुद को सम्भाल नही पाई और मेरे उसके चुची की चूसने के नशे मे मदहोश होती चली गयी और अपना हाथ मेरे लोवर मे खड़े लण्ड पर ले जा कर उसको सहलाने लगी

करीब 5 मिंट तक उसको अच्छे से मसल चुस लेने के बाद

मैने जल्दी से उसको छोडा और बोला मै दुकान मे जा रहा हू तु साइज़ नाप ले

फिर मै दुकान मे अपना लण्ड ऐडजस्ट करते हुए आकर बैठ गया

थोडी देर बाद सब्बो बाहर आई और मुझे देखकर एक कातिल मुस्कान दी और बोली हा साइज़ ठीक है

फिर मैने उसको अपना नं दिया और बोला शाम तक फ्री होना तो बताना मै घर आ जाऊंगा

वो हस्ते हुए मुझे पैसा दिया और न. का कागज लिया और निकल गयी

मै भी खुश हुआ और सब्बो की जवानी भोगने के लिए थोड़ी देर कल्पानाओ मे खो गया ,,,,, फिर कुछ ग्राहक आये उनको सामान दिया

12 बजे मा निचे आई और मै खाना खाने उपर चला गया और खाना खा कर आया तो मा ने मुझे पापा के लिए टिफ़िन दिया और मै बर्तन वाले दुकान पे चला गया

वहा पापा मिले और उन्होने बताया की उनको अर्जेन्ट एक जगह पैसे लेने जाना है और मुझे गल्ले पर बिठा कर निकल गये और करीब एक घन्टे बाद पापा आये ,,इसी बीच मुझे मा की बात याद आई जो हमने सुबह नास्ते पर की थी तो मैने कुछ स्पैशल डिज़ाइन के ब्रा पैंटी इमेज डाउनलोड किये फिर वापस घर आ गया

फिर मा ऊपर चली गयी सारा काम खत्म करने और मै दुकान की पर्ची बनाने लगा

एक घन्टे बाद मा निचे आई फिर मैने उनको पर्ची दिखाई तो उन्होने कुछ अपने तरफ से भी नोट करने को कहा ।

मा - अरे राज तू मुझे कुछ डिज़ाइन दिखाने वाला था ना

मै - हा मा रुको दिखाता हू

फिर मैने अपने मोबाईल मे मा को कुछ नये मॉडल के ब्रा पैंटी सेट और बिकनी सेट दिखाए जिसे आजकल लडकिय बहुत पसंद कर रही है

मा - अरे वाह राज यहा तो बहुत सारी डिज़ाइन की ब्रा पैंटी है ।

फिर मैने मा को एक ऐसी ब्रा की डिज़ाइन दिखाई जिसमे सिर्फ लास्टीक थी

मै - मा ये देखो ये आजकल ट्रेंड में है और इसमे पट्टी नही होती

मा बडे ध्यान से देख्ते हुए - ओहो तब ये रुकती कैसे होगी

मै - अरे मा ये आप जैसी औरतो के लिए है जिनके दूध बडे हो ,,, मै एक सांस मे बोल गया फिर मेरी फट गयी ,,,फिर मैने उनको बोला - सॉरी मा

मा - अरे कोई बात नहीं तु तो मुझे समझा ही रहा है न

मैने मासूम सा मुह बना के हा बोला

मा - वैसे क्या सच मे तुझे मेरे दूध बडे लगते है ,, मुझे तो नही लगता ,,, और फिर वो पल्लू हटा कर ब्लाऊज को बाहर की तरफ खिच कर चुचियो को देखते हुए बोली

मै मा को नॉर्मल देख कर बोला - सच मे आपके बड़े है मा ,, चाहो तो सीसे मे देख लो

मा बगल मे लगे बडे सीसे मे अपना साडी हटा कर काले रंग की सूती ब्लाऊज मे कैद चुचियो को अपना शरीर घुमा कर देखने लगी और एक हाथ से अपनी एक चुची की ऊपर से पकड कर उसकी गोलाई मापने लगी

मै थोडा चांस लेते हुए बोला

मै ह्स्ते हुए - हिहिहिही ,,क्या नाप रही हो मा वो एक हाथ मे नही आयेगा , मै कह रहा हूँ न बड़े है आपके दूध ,, और तो और मेरे दोनो हाथो से भी नही पकड़ाएगा आपका एक भी दूध ,,,,

मा - चल झुठा इतने भी बडे नही है मेरे दूध

मै - मा शर्त लगा लो मै ही जीतूंगा

मा थोड़ा सोचते हुए मुस्कुरायी बोली चल आजा ,,,, अगर मै जीती तो कुल्फ़ी खिलाना पडेगा

मै - और मै जीता तो

मा - तु जो चाहे ले लेना ,,चल आ पीछे कमरे

मै सोचने लगा क्या किस्मत है यार पिछ्ले कुछ दिनो मे काफी कुछ मिल रहा है और अभी अभी तो सब्बो की चुचियो की मसला था और फिर मा भी

ये सब सोचते हुए मैने कमरे मे गया और मा खडी थी मै उनके सामने था

फिर मा बोली दुकान मे देखते रह कोई आये ना और फिर उसने अपनी काले रंग का ब्लाऊज निकाल दिया अन्दर मा ने कुछ नही पहना था और उन्के हल्के गोरे चुचे उछल के बाहर आ गये और मै एक टक उनके चुचो को निहारने लगा

मा - चल पकड देखू मै कौन जीतता है

मै भी खुश हुआ और जान बुझ के सामने से चुची ना पकड पाने का नाटक करते हुए बार बार हाथ सरका देता जिससे

मा - अरे पकड ना सही से

फिर मैने मा की एक चुची को अच्छे से भर के हाथो मे पकड़ा फिर भी उनका निप्प्ल मेरेदोनो हाथो के बिच से बाहर आ रहा था

मा - देखा ना पकड़ा गया

मै - अरे कहा पकड़ा गया ,, अभी ये तो बाहर ही आ रहा है

मा - क्या बाहर है

मै - अरे ये ,, मै उनके निप्प्ल पर इशारा कर रहा था लेकिन मेरे हाथ उनकी चुचे को पकडे थे तो उनको पता नही चल पा रहा थ

मा - अरे क्या ये ये लगा रखा है छू के बता

फिर मै थोड़ा मौके का फायदा लेते हुए झुका और उनके निप्प्ल लो जीभ से छुआ

इतने मे ही मा की आहह निकल गयी और मेरे हाथो मे भरे चुचे मे फुलाव होने लगा निप्प्ल कड़े हो गये

मा को सिसकी लेता देखा मैने वापस से मुह उनकी निप्प्ल पर लगा कर चूसना शुरू कर दिया

मा - सीईईई उम्म्ंम बेटाआहहह छोड दे अब जान गयी मै क्या बाहर निकला था

मैने वापस से मुह हटा लिया और हल्के हाथो से मा के चुची को दोनो हाथों मे लेके सहलाते हुए बोला - मा आपके दूध बहुत सुन्दर है

मा ह्स्ते हुए - हट बदमाश और मुझे हटा कर ब्लाऊज पहनने लगी

मै वापस से थोड़ा मासूम बनते हुए पुछा - मा अब मुझे दुध क्यो नही पिलाती हो

मा मुस्कुराते हुए मेरे गाल पर हाथ रख कर बोली - बेटा अब इसमे दूध नही होता है

मै - लेकिन मुझे अब मन करता है कि आपका दूध पीयू

मा मुस्कुराते हुए - फिर कभी बेटा अभी दुकान मे चल फिर हम दुकान मे आ गये और काम करने लगे

शाम को 4 बजे मै कोचिंग चला गया और शाम को घर आया थोडी देर दुकान मे रहा फिर सब्बो का फोन आ गया और मै खुश हो गया

देखते है आगे के अपडेट मे क्या होता है
 
UPDATE 019

सब्बो का फोन आते ही मेरा मन गदगद हो गया

मैने अनुज को आवाज दी और उसे दुकान मे बिठा कर निकल गया रान्डटोले की तरफ

शाम 7 बजे का समय था मै टहलते हुए सब्बो के गली मे गया

वहा उसके घर के आस पास के घरो के बाहर कोई न कोई बच्चा बूढ़ा बैठा था

घर के बाहर सब्बो दरवाजे पर खडी थी , मै सोच रहा था कि इतने लोग बाहर है मै कैसे जाऊ इसके घर तभी

सब्बो - अरे राज आ गया ,,, आ मा अंदर इंतजार कर रही है

मै थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा- हा वो पापा ने बोला जल्दी चला जा रात हो गई है हिसाब किताब कर ले बर्तन वाला

पर

हम दोनो ने कोई प्री प्लानिंग नही की थी बस सब कुछ सयोग से हो रहा था

मै भी घर मे घुसा और अन्दर गया तो सच मे सब्बो की मा रुबीना अंदर बैठे सब्जी काट रही थी

वो ब्लाऊज पेतिकोट पहने हुए थी जिसमे उसका गदरायी जवानी साफ दिख रही थी

मै रुबीना को पहली बार ऐसे देख रहा था

उसका पेतिकोट जांघो तक उठा था ऊपर के दो बटन खुले थे

ये नजारा देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मेरा मन सब्बो से हट कर रुबीना की गदरायी जवानी मे खो गया

सब्बो ना जाने कब मेरे बगल मे खडी हो गई और मुझे उसके मा को हवस भरी नजरो से निहारते हुए देख रही थी और मुस्कुरा रही थी

सब्बो - अम्मी लगता है राज को मेरी नही अभी आपकी जरुरत है

रुबीना - क्यो सेठ जी कही मुड बदल तो नही दिया न

मै - हा काकी मूड तो बदल गया है लेकिन

रुबीना- लेकिन क्या सेठ जी

मै - मै तो आया तो सिर्फ सब्बो के लिए ही था लेकिन अब इसके साथ आपको नही छोड़ना है

रुबीना - सम्भाल लोगे एक साथ दो घोडीयो को

मै - क्यू आपको क्या लगता है

रुबीना- चलो देख लेते है कि तुम मे अपने बाप जितना दम है भी या नही

मै चौकते हुए - मतलब

रुबीना - आज आये थे दोपहर में बाऊ जी तेरे हम दोनो को .... और मुस्कुराने लगी रुबीना

मै सोचने लगा - अच्छा तो पापा को यहा आना था पैसे लेने ,,, साला मेरा बाप तो एक नम्बर का रन्डीबाज है

फिर मैने सब्बो को अपनी ओर खींचते हुए उसकी होटों को चुस्ते हुए उसकी चुत को स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी मा के सामने रगड़ना शुरू कर दिया

करीब 2 मिनत के बाद को मै सब्बो को पकडे उसके मा तक गया और उनके सामने खड़ा हो गया

रुबीना नीचे बैठे बैठे मेरे लोवर को निचे किया और मेरा कडक लण्ड उछल कर बाहर आ कर हिलने लगा , जिसे रुबीना बडे प्यार से मुसकुराते हुए मेरी आँखो मे देखते हुए सहलाना शुरू किया

इधर मै वापस सबबो की मोटी गांड सहलाते हुए उसकी चुचियो को एक हाथ से मस्लना चालू कर दिया और फिर उसका टीशर्त निकाल दिया

और सब्बो की सावली रसभरी कोमल चुचियो को मुह मे लेके चुस्ते हुए एक कदम रुबीना की तरफ आगे हुआ

रुबीना ने लपक कर मेरा लण्ड मुह मे किया और चूसना शुरू कर दिया

अब नजारा कुछ यू था मेरा दाहिना हाथ सब्बो की नंगी कमर पर था जो उसको पकड के उसके रसिले चुचो को चुस रहा था और एक हाथ को रुबीना के सर पर रखा था जो मेरे लण्ड को गपागप चूसे जा रही थी ।

रुबीना के लण्ड चूसने से मेरी उत्तेजना और बढ गयी और मैने सब्बो को छोड रुबीना के बालो को पकड तेज़ी से उसके मुह मे पेलना शुरू कर दिया

थोडी ही देर में रुबीना ने खासना शुरू कर दिया और मैने एक हाथ से अपना गिला लौडा उसके मुह से निकाल के उसके बालो को खीचते हुए उसके चेहरे पर लण्ड को पटकने और रगड़ने लगा

फिर वापस रुबीना के मुह मे डाल के चोदने लगा और करीब 3 से 4 मिंट की सास फुला देने वाली जबरदस्त मुह पेलाई के बाद मै पुरा लण्ड रुबीना के मुह भर कर अन्दर ही झडने लगा और मेरा माल उसके मुह से होकर बाहर उसकी पसीने से भीगी थन जैसी चुचियो पर गिरने लगा ।

जब मैने पूरी तरह से अपना लण्ड खाली कर लिया तो मुह से बाहर निकाला

रुबीना- खो खो खो ह्य्य्य्य अल्लाह क्या कर रहा था मादर्चोद ,,,

मै - सालि रन्डी तू ही तो मेरा दम देखना चाहती थी ना अब क्या हुआ

रुबीना - अरे सेठ वो तो मै ,,,,खैर इस मामले मे तुम अपने पापा से आगे ही हो ,,,तो अब बाकी का काम भी करना है की नही

मै - हा करना है ना लेकिन सब्बो रानी के साथ तू आराम कर अभी रान्ड

इतना कह कर वापस से सब्बो की चुचियो को मस्ल्ते हुए चूसने लगा और उसे बिस्तर पर ले गया

बिस्तर पर ले जाकर सब्बो को चुचियो को मिजते हुए चूसना शुरू किया साथ मे अपना लण्ड स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी चुत पर रगडने लगा

थोडी देर बाद मैने उसको घोड़ी बनाया और स्कर्ट को कमर तक चढा दिया

उफ्फ्फ क्या गद्देदार गांड थी सब्बो की ,,, हल्की गोरी गुदाज चुतड के दो पाटो के बीच एक चाकलेटी दर्रार और निचे गोल गोल भूरे रंग की सिकुडी हुए चमडी मे उसके गांड का छेद

ये देख मेरे मुह मे पानी आ गया और मेरा लण्ड फिर से फन्फ्ना गया ।

फिर मैने उसके चुतडो को फैलाया और एक अंगूठे को उस छेद पर थोड़ा सा रब किया फिर मैने झुक कर अपनी जीभ को नुकीला करते हुए उसके भूरे गांड की छेद को टच करने लगा और अपनी लार से गिला करने लगा

सब्बो तडप उठी क्योकि ये उसके लिये पहला अनुभव था

मै लगातार उसके चुतडो को फैलाये उसकी गांड की छेद को चाटे जा रहा था और एक हाथ निचे से उसकी चुत को भी सहलाना सुरु किया

मेरे दोहरे attack से सब्बो सीस्कियो मे बह गयी और उसकी तडप मे वह बिस्तर पर गिर गयी और हाफने लगी ,, सब्बो का कामरस उसकी जांघो पर रिस रहा था, करीब एक मिनट बाद सब्बो सीधा लेट कर तेज़ी से अपना चुत सहलाने लगी

सब्बो - आह्हह राज आजा डाल दे ,,उम्म्ंम उफ्फ्फ और तेज़ी से अपना गांड पटक कर चुत रगड़े जा रही थी ,,

मैने भी देखा की लोहा गरम हो चूका है ब्स हथौड़ा मारने की देर है

और मैने भी देर ना करते हुए ऊपर आकर उसकी चुत पर अपना लण्ड पटकने लगा और उसकी चुचिया नोचने ल्गा ,,,,, फिर मैने अपने लण्ड का सुपारा निकाला और गीली चुत के फलको पर रगड़ने लगा

सब्बो तडप उठी ,,,

हालाकि सब्बो को मेरे से मोटे बडे लण्ड ने चौदा था मगर चरम सुख का आनन्द आज तक नहीं मिला ,,, वो कमर उठा कर चुत को मेरे लण्ड पर रगड़ती रही और उसके चुत का वो छोटे छोटे बालो से घिरा दाना मेरे लाल सुपारे के पेसाब वाले छेद मे चुब्ने से मेरा लण्ड फौलादी हो गया

और मै भी सबर को ताख पर रख उसकी चुत मे लंड डाला और चोद्ना शुरू कर दिया ।

सब्बो - आह्हह राज कितना मस्त चोदू है रे तू कहा था उफ्फ़फ्फ अह्ह्ह्ह ह्ह्य्य्य्य

सब्बो - और तेज़ चोद मेरे राजा अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह आह्हह उफ्फ्फ उम्म्ंम हा ऐसे ही और तेज़ ..... अह्ह्ह्ह

मै - हहहह क्या हुआ सब्बो जान,,,, अभी तो मैने डाला ही है ,,,,, तुने तो इससे भी बडे लण्ड खाये है

सब्बो - आह्हह उफ्फ़फ्फ बात लण्ड की नही तेरा चोदने का तरीका सबसे अलग है मेरे राजा ,,,उह्ह्ह्ह्ज औरतेज़ चोद , उह्ह्ह्ह हाआ हा और तेज़ और अह्ह्ज ऐसे ही

मै लगातार धक्के मारते हुए उसकी चुत में चोदे जा रहा था

करीब 20 मिनत तक भरपूर आनंद से सब्बो को चोदने के बाद मैने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके सामने खड़े होकर उसके बदन और चेहरे पर सारा माल गिरा दिया ।

सब्बो वही थक कर पडी रही

मै उठा और अपने कपडे सही किये और बाहर आया तो रुबीना खाना बना रही थी

मै उसको फिर आने का बोल के घर की तरफ निकल गया

अब देखते है क्या होता है
 
UPDATE 020

मै वापिस घर आया तो 8 बज गए थे और पापा भी घर आ गये थे फिर हम खाना खाये और सो गए

ऐसे ही दिन गुजरे और रक्षा बंधन को अब 4 दिन बाकी थे ।

और एक सुबह मै जल्दी उठा समय देखा तो 6 बज रहे थे तो तुरंत दीदी का ख्याल आया

मै जल्दी से उठा बेडरूम चेक किया फिर जल्दी से छत पर गया तो बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी मै बाहर ही इंतज़ार करने लगा ।

5 मिंट बाद दरवाजा खुला और दीदी ने सर पर तौलिया लपेटे हुए थी और एक काटन दुप्पते से बॉडी को लपेट कर ढका हुआ था

इस बार मुझे देख कर दीदी चौकी नही बल्कि थोड़ा मुस्कराई और कपड़े लेकर अरगन की तरफ गई

मैने पीछे से उनके भिगे बदन पर लिपटा काटन का दुपट्टा देखा जो उनकी गदरायी गांड से चिपका था और चलते हुए 8 का शेप बना रहा था ।

वो कपड़े डालते हुए बोली - भाई मैने उस दिन मना किया था न सवेरे न आना

मै उसके भिगे चुतडो मे खोया था

जब मैने उनकी बात का जवाब नही दिया तो वो मुंडी घुमा के मेरी तरफ देखी कि मै उनकी गांड को देख कर लोवर के ऊपर से अपने खड़े लण्ड को सहला रहा हू

वो गुस्से मे घूमी इससे पहले मै कुछ बोलता वो मेरे उसी हाथ के ऊपर एक चपत लगा देती है जिससे मै अपना लण्ड सहला रहा था और कहती है - राज ये क्या कर रहा है, मै तेरी बड़ी बहन हू

मै सकपका गया - अब्ब्ब मै मै मै ,,,,

दीदी गुस्से मे - तू निचे जा अभी नही तो मै मम्मी को बुला दूँगी

मेरी फट गयी और मै जल्दी से भाग गया और मै दीदी से नजरे चुराने लगा साथ मे डर भी था कही सच मे मम्मी ने ना कह दे ।

फिर मैने नहा धोकर नास्ता किया तब पापा ने बताया की आज शिला बुआ आ रही है ।

मै खुश हो गया कि चलो इसी बहाने दीदी से बच सकूँगा और घर पर कोई बवाल नही होगा ।

फिर मै दुकान खोलने चला गया फिर शाम को समय से कोचिंग गया और जब घर वापस आया तो शिला वुआ आ गयी थी ।

नया परिचय

शीला- राज की बड़ी बुआ , उम्र 50 , गदरायी चुतडो की माल्किन, 40 38 44 का फिगर ,,,थोडी मॉर्डन ड्रेस भी पहनती है ।

कम्मो - मेरी छोटी बुआ , उम्र - 42 साल , जैसा नाम वैसे ही कामुक और गठिले बदन की है, 36 34 38 का सेक्सी फिगर है ।

( बाकी के परिवार का परिचय समय आने पर दिया जायेगा )

वापस कहानी पर

मै घर पहुचा देखा मौसी एक लाल रंग की लेगी के साथ हरे रंग की कुर्ती पहने हुए कीचेन मे मा के साथ थी ।

मैने एक नजर उनकी गदरायी जांघो पर डाला

आह्ह क्या चुस्त लेगी पहनी थी बुआ ने ,, उनके 44 साइज़ की भारी भरकम चुतड ने उनकी कुर्ती को कमर से उठा रखा था ।

बुआ को देखते ही मेरा लण्ड फन्फ्ना उठा और मैने भी लण्ड को राहत देने के लिए जाकर बुआ को पीछे से पकड कर हग कर लिया और लण्ड को उनके नरम गुदाज गदरायी गांड मे धसाते हुए

मै - नमस्ते बुआआआ... आप कब आई

मेरे अचानक हग करने और मेरी आवाज सुन कर खुश हो गयी

शिला - अरे राज बेटा ,,, मै तो अभी एक घन्टा हुआ

मा - राज छोड बुआ को क्यू तंग कर रहा है

शिला - अरे काहे का तंग भाभी जी बेटा है मेरा , क्यू राज

मै भी मौके का फायदे लेते हुए - हा बुआ मै तो आपका ही बेटा हू

मा मेरी बात सुन कर बुआ को छेडते हुए बोली - हा हा तू दीदी का ही बेटा है , मैने कहा तुझे पैदा किया है

बुआ मा की बात समझ गयी और मै भी

बुआ - क्या भाभी आप भी

फिर ऐसे ही हसी मज़ाक हुआ और मै निकल चाचा के घर क्योकि अगले दिन चाची , निशा और राहुल भोपाल जाने वाले थे

मै चचा के यहा पहुचा और अन्दर चला गया

देखा चाची खाना बना रही है जबकि राहुल और निशा पैकिंग कर रहे हैं ।

मै - चाची सारी तैयारियाँ लग रहा है कि हो गयी है

चाची - हा बेटा ,, बस निशा और राहुल अंदर पैकिंग कर रहे हैं

चाची - देख बेटा हम लोग जा रहे हैं तो तेरे चाचा अकेले रहने वाले है ,,, वैसे तेरी शीला बुआ तो आ गयी है लेकिन तु भी कभी कभी आ कर घर देख लिया करना

मै - जी चाची ,, फिर मै कमरे मे चला गया

अन्दर निशा को देखा तो वो बेड पर झुकी टीशर्त लोवर मे पैकिंग कर रही हैं और राहुल बैठा गेम खेल रहा है

मेरी नजर निशा की गदरयी जांघो और उसके 36 का उभार लिये चुतडो पर गयी

मै कमरे के दरवाजे पर खड़ा था किसी को पता नही था मै कमरे से राहुल को भगाने के लिए कुछ सोचा और बाहर चाची को आवाज दी

मै - चाची आपने तो कहा था कि अन्दर दोनो पैकिंग कर रहे हैं,, लेकिन यहा राहुल गेम खेल रहा है

मेरी आवाज से दोनो चौके की मै कब आया और राहुल उठ कर निशा के पास गया तो निशा ने बोला - रहन दे मै कर लुंगी जा अपना काम कर

मै हस रहा था और राहुल मुझे देख कर जल कर रह गया मै उससे बड़ा था तो वो मुझे कुछ कह भी नही सकता था

राहुल मुह बना कर कमरे से बाहर आ गया

मै भी मौका देख कर दरवाजे को ओटन दे कर निशा के पास गया और हल्के से उसके चुतडो पर चपट लगा दिया और उसके सामने बिस्तर पर लेट गया

वो चौक कर पहले रुम मे फिर दरवाजे पर देखती हैं फिर थोड़ा गुस्सा मे मेरी ओर देखती है

निशा - राज क्या कर रहा है कही राहुल देख लेता तो

राज - अच्छा उसकी बड़ी फ़िकर है और मुझे बिना ब्ताये जा रही थी भोपाल ,, इक बार भी नही सोचा इस नये नवेले आशिक के बारे मे

निशा मुस्कुराती हुई- भाई मामा की लडकी की सादी है तो वहा जाना जरुरी है न

और हमेशा के लिए थोडी जा रही हू 15 दिन मे आ जाऊंगी

मै खड़ा हुआ और उसको पीछे से हग करते हुए - फिर 15 दिन का ऐडवांस मे प्यार भी देके जाओ

और वो मुझे धकेल कर अलग हुई - बुलाऊ मम्मी को ,,,,हिहिही ,, ऐडवांस मे प्यार चाहिये

मै वापस लपक कर उनको पीछे से पकड लिया और अपना हाथ उनके टीशर्त के अंदर ले जा कर पेट पर घुमाने लगा

निशा थोडी सहम गयी और डर से थोड़ा काप उठी

मैने अपनी उगली उसके लोवर के लास्टीक में फसा के पेट से थोड़ा दूरी बनाते हुए उसे निशा की नाभि के निचे किया , जिससे निशा की हल्की सी सिसकी सुनाई दी- उम्म्ंम क्या कर रहा है राज ,,छोड दें मा बाहर ही है ।

मैने धीरे से उसके कान को काटते हुए साथ ही उसके नाभि को अपने हथेली मे भर कर मस्ल्ते हुए कहा- कोई नहीं। आयेगा दीदी करने दो न

निशा - आह्हह , नही अभी नही

निशा भले ही मुझे ना कर रही थी लेकिन मदहोसी मे वो मेरा साथ देने को मजबुर भी थी

और इसी का फायदा लेकर मैने उसके गर्दन को चूमना शुरू कर दिया और नरम पेट को सहलाने ल्गा

निशा भी मेरा सर पकड कर और ज्यादा आहे भरते हुए कहा- राज बस कर ,,,

मै कहा मानने वाला था मैने एक कदम और बढा ,,और एक हाथ उसके नरम दुधिया 36 साइज़ की चुचियो पर ले गया और टीशर्त के ऊपर से ही मस्ल्ने ल्गा

निशा - ओह्ह्ह राज बस कर मै पागल हो जाऊंगी ,,,मै वापस आकर जो तू कहेगा दूँगी तुझे ,,अह्ह्ह्ह प्लीज छोड दे मुझे अभी

मै - एक शर्त पर

निशा - बोल भाई क्या चाहिये तुझे ,,अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं

मैने तुरंत निशा का एक हाथ पकड कर अपने खड़े लण्डपर लोवर के ऊपर से रख दिया और बोला - बस इसे चुस कर शांत कर दो दीदी

निशा मुझसे अलग हुई - नही राज तु पागल है क्या ,,बाहर राहुल और मा है कैसे होगा सब

मैने निशा को पकड़ा और कमरे की खिडकी के पास ले आया और दरवाजा भिड्का दिया अच्छे से और तुरंत अपना लोवर क्छ्छे के साथ नीचे उतर दिया जिससे मेरा लण्ड टनटना गया और दीदी को सलामी देने लगा

फिर मैने अपना खड़ा लण्ड सहलाते हुए दीदी को बोला जो एक टक मेरे खड़े लण्ड को देखे जा रही थी

मै - दीदी मै खिडकी से बाहर देख रहा हू आप निचे बैठ कर ... प्लीज

दीदी मुस्कुराइ और मुझे लिप किस्स किया, फिर निचे बैठ गयी ।

और मुझे देखते हुए अपनी जुबान बाहर निकाली और धीरे से मेरे लण्ड के सुपाडे को चाटा

आह्हह दीदी ,,,, फिर निशा ने मुह खोल कर पुरा लण्ड भर कर चूसना सुरु कर दिया

मैने निशा के सर पर हाथ रखकर उसके मुह में हल्के धक्के लगाने लगा

और पर्दे के पीछे से ही कीचेन मे देख रहा था जहा चाची खाना बना रही थी

मैने निचे देखा निशा लगातर तेज़ी से मेरा लण्ड चूसे जा रही थी और मेरी आहे निकल रही थी

मेरी नजर किचन मे खडी चाची पर गयी वो अपनी साडी को कमर को खोसे हुए खडी होकर खाना बना रही थी

मै चाची के गदराये बदन को देख कर और उत्तेजित हो गया। उनकी गांड का उभार मेरे लण्ड मे उत्तेजना ला रहा था और मै कब उनकी मदमस्त ज्वानी को अपनी कलपनाओ मे नंगा करते हुये तेज़ी से अपना हाथ निशा के सर को पकड कर आगे पीछे करने लगा मुझे पता ही नही चला

मेरा ध्यान तब टूटा जब निशा मेरे जांघो पर मुक्का मारने लगी

मैने निचे देखा तो मै उसके मुह मे झड़ चूका था मेरा सारा माल उसके चेहरे पर फैल रहा है ,, निशा की आँखे लाल हो गयी है और आंसू निकल रहे है और फिर भी मेरा लण्ड तेजी से उसके मुह मे अन्दर बाहर हो रहा है

मै उसकी स्थिति देखी तो तुरंत लण्ड बाहर निकाल लिया

निशा लगातार खासे जा रही थी और फिर बिना कुछ बोले बाथरुम चली गई ।

मुझे मह्सूस हुआ कि निशा को ये पसन्द नही आया तो मै बाथरूम के पास गया और बोला - सॉरी दीदी पता नहीं मुझे क्या हो गया था,,,प्लीज माफ करना

निशा मेरी आवाज सुनते ही गुस्से मे बाहर आई बोली - क्या सॉरी राज ,, तुम तो जानवरो की तरह कर रहे थे मेरे साथ मुझे कुछ हो जाता तो

मै - उसके मुह पर हाथ रखकर बोला - सोचना भी मत,,, प्लीज माफ कर दो

और मेरे आँखो मे आंसू आ गए

पता नहीं मुझे क्या हुआ लेकिन उस चिज के लिए मुझे बुरा मह्सूस हो रहा था ।

मेरी हालत देख कर निशा ने मुझे गले ल्गा लिया

निशा - ये आखिरी बार था आगे से ऐसा कुछ मत करना ,,,,, और तु बाहर क्या देख रहा था तबसे की तेरी नजर ही नही हट रही थी

मैने झूठ बोला - वो तो मै नजर रख रहा था कि कहीं कोई आ न जाये ,,सॉरी दीदी

निशा - चल ठीक है तू जा मै थोड़ा काम कर लू कल सुबह ही निकलना है

मैने निशा को गाल पर एक किस्स किया और चाची से मिला और कल सुबह आने को बोल कर घर आ गया

अब देखते है आगे क्या होने वाला है
 
Update 21

शाम को करीब 7.30 बजे मै घर आया । पापा आज जल्दी घर आ गये थे

पापा - कहा गया था राज

मै - पापा वो कल चाची भोपाल जा रही है तो उन्ही से मिलने गया था और चाची ने बोला कि खानेपीने का ध्यान रखने के लिए ।

बुआ - अरे उसकी चिन्ता मत कर मै कल चली जाऊंगी छोटे के यहा ,,, मैं देख लुंगी खाना पीना

मा बुआ से - क्या दीदी आप भी ,,,, हमारे रहते हुए आप वहा खाना बनाने जाओगी ,,, जैसे सबका खाना बनेगा देवर जी का भी बना देंगे

बुआ - हा लेकिन वो दुकान छोड के नही ना आयेगा

मा - अरे उसकी चिन्ता नही है कोई खाना लेके चला जायेगा ,,,खुश

पापा - हा जीजी ,, रागिनी ठीक कर रही है आपको परेसान होने की जरुरत नही है।

बुआ - अच्छा ठीक है बाबा

फिर सब हसने लगे और खाना खाया गया

अब ये हुआ की कौन कहा सोयेगा क्योकि बारिश का मौसम था तो छत पर सोने की दिक्कत थी ।

फिर प्लान हुआ कि बुआ और दीदी एक साथ सो जाये । मै अपने स्टोररुम मे और अनुज मा पापा के साथ

लेकिन ऐन मौके पर अनुज बोला नही मुझे ऊपर ही सोना है तो मा बोली - तो ऐसा कर राज तु चल हमारे साथ सो जाना

मै थोड़ा खुश होते हुए - वाह आज कूलर के पास सोने को मिलेगा हिहिही

पापा - बावरा हो गया है ये

अब पापा को क्या पता मेरे नीचे सोने की खुशी क्या है ।

फिर मै पहले के जैसे ही बोला - मा फिर मै जा रहा हू सोने ,,, कल सुबह चाची को छोडने बस स्टैंड जाना है

मा - हा बेटा तु आराम कर मै किचन का काम खतम करके आती हू ।

पापा - हा मै भी जीजी से थोड़ा बात चित करके आता हूँ

मै मन ही मन खुश हुआ और अपना मोबाईल किया फिर नीचे चला गया

मै निचे आया और पापा के कमरे मे गया फिर मैने कुलर के तरफ की साइड ली ।उसका एक कारण ये था कि कुलर के जस्ट बगल नाइट बल्ब लगा था , जिससे अगर मै करवट लेके सोता तो बडे आराम से मा और पापा का खेल देख सकता था ,ऊपर से नाइट बल्ब की रोशनी मेरे शरीर के पीछे से आती तो सामने वाले को मेरा चेहरा क्लियर नही दिखता ।

मै खुस हुआ और बेड पर लेट कर मोबाईल चलाने लगा ।

मैने चंदू की बतायी सेक्स स्टोरी साइट पर जाकर कुछ सेक्स स्टोरी पढी ,,,मेरा तो मूड बन गया और लोवर मे तनाव आ गया ।

मैने ऐसे ही एक पारिवारिक सेक्स स्टोरी खोली ,,, जिसमे भाई बहन के रिस्ते को लेकर बहुत ही रोमांचक अनुभव वाले सेक्स सीन लिखे गये । और उस स्टोरी मे जब रक्षाबधन का जिक्र आया तो मै अपनी कलपनाओ मे खो गया ।

मुझे मौसी-मामा , पापा-बुआ, निशा-मै जैसे couple के सेक्स अनुभव आने लगे और मै सोचने लगा क्या हो अगर पापा और चाचा दोनो मिल कर रक्षाबन्धन के दिन शीला बुआ जैसी अपनी गदरायी बहन को पेले । और इसी कल्पना मे मै खो गया

कि बुआ को पापा और चाचा मिल कर चोद रहे है । पापा बुआ के निचे उनकी चुत मे लंड डाले और चाचा बुआ की गदरायी गांड मे लण्ड डाल कर चोद रहे हैं,,,,, और बेड पर राखी से सजी थाली हिल रही है ।

आह्हह क्या कामुक सीन है बुआ की उभरी गांड में चाचा चौडे जा रहे हैं आह्हह अह्ह्ज बुआ आह्हह उफ्फ्फ उह्ह्ह उम्म्ंम आह्ह बुआ चुदवा लो मुझ्से भी आह्हह उह्ह्ह

तभी मुझे अह्सास हुआ की मेरी ज्न्घो पर कुछ रिस रहा है और जब मैने निचे देखा तो पता चला कि मैं अपनी कलपना मे इतना उत्तेजित हो गया था कि कब लण्ड को लोवर के ऊपर से हिला कर अंदर ही झड़ गया पता ही नहीं चला ।

फिर मैने मोबाइल मे देखा तो 9 बजने को है लेकिन मा और पापा आये नही सोने

इस बात मै तब्ज्जो ना देते हुए अपनी कल्पना के बारे मे सोचने लगा क्या ऐसा हो सकता है ,, अगर ऐसा हो जाये तो कितना मज़ा आयेगा और बुआ उफ्फ्फ क्या गांड है उनकी ,,,लेगी मे उनकी गांड देख कर आज तो मन कर रहा था पेल दू सालि को ....

मेरा तो एक ही दिन मे ये हाल है पता नहीं बुआ के घर वालो का क्या हाल होता होगा ऐसा गदराया माल रोज रोज देख कर,,ह्य्य्य्य अह्ह्ह्ह बुआ

मुझे छत से निचे आये करीब एक घन्टे हो चुके थे इसी बीच मा के पायलो की आवाज सुनाई दी

मै समझ गया कि पापा और मा निचे आ रहे है । मै तुरंत डाटा बंद किया और फोन किनारे रख कर सोने का नाटक करने अपनी पुरानी आदतो के अनुसार ।

थोडी देर मे मा और पापा के बिच की बातचित हल्की हल्की मेरे कानो तक आने लगी फिर दरवाजा खुला और कदमो की आहट मे थोड़ा सतर्क होकर सोने की ऐक्टिंग करने लगा ,,,,

पापा - लगता है राज सो गया

मा - हा आज बहुत दिन बाद बेचारा अच्छे से सोने को पा रहा है ,,, कितना मेहनती है मेरा बेटा और कोई शिकायत तक नही करता कभी

पापा- हा रागिनी हम बहुत किस्मत वाले हैं

मा - मै क्या कहती हू जी आप वो चौराहे वाला घर जल्दी बनवाओ ,,,कब तक मेरा बेटा ऐसे स्टोर रूम मे सोयेगा

पापा- हा वो मैने एक ठेकेदार से बात कर की है बरिश का मौसम खतम हो तब काम शुरू करवाने को बोला है ,,,क्योकि बारिश मे नीव मजबूत बनाने मे बहुत दिक्कत आती है

मा - अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है ,,,,, मै तो बहुत खुश हूँ नये घर को लेके

पापा - क्यू जान इस घर को भूल जाओगी ,,,हमारी सुहागरात तो यही मनी थी ,हहह्हहाह

मा - क्या आप भी ,,,,चुप रहिये बेटा यही सो रहा है और आप

पापा - अच्छा वो दिन भूल गयी जब रज्जो दीदी के साथ खुली छत पर दोनो बहने मिल कर चुदवा रही थी

मै मन ही मन मा और पापा की मीठी नोक्झोक से खुश हो रहा था क्योंकि यहा मुझे एक घमासान चुदाई का माहौल बनता दिख रहा था जिसमे कुछ खट्टी मीठी बातचित का चटकारा भी मिलना था

मा - क्या आप भी चुप रहिये न ,,, राज सो रहा है हिहिहिहिह

पापा- अरे मेरी जान जब कर चुकी हो तो शर्माना कैसा ,,, और राज सो गया है देखो

फिर पापा ने मुझे हिलाया

मेरी थोडी फटी लेकिन मैने भी थूक गतकते हुए खुद को सम्भाला ,,, जब पापा ने छोडा तब राहत मिली

मा - फिर भी ,,,, वो

पापा - कोई दिक्कत नही होगी जान ,,, उस दिन की तरह

मा - उस दिन तो रज्जो दीदी थी तो दिक्कत नही हुई न

पापा- आह्ह मेरी जान रज्जो दिदी की बात न करो

मा - ओहो अभी भी आहे भर रहे हो दीदी के

पापा - अरे मेरी जान तुम्हारी रज्जो दीदी माल ही ऐसी है ,, रन्डी भी फेल है उनके भरे गदराये जिस्म के आगे

मा - वैसे आपकी शिला जीजी भी कम नही है ,,, लगता है नंदोई जी जम कर लेते है उनकी भी

पापा- हा जान जीजी का भी जवाब नही

मा - अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं क्या कर रहे हो छोडो ना

मै अचानक से सोचने लगा ये बातो के बीच मे सिसिकिया कब से सुरु हो गई और मैं ये देखने के लिए थोडी गरदन ऊपर की और आंखे खोली

ठीक मेरे सर के एक फिट बगल मे पापा जोकि बनियान और कच्छे मे थे वो मा को जो पेतिकोट और ब्लाऊज पहने थी ,,, उनके पेट को सहलाते हुये कंधे को चूम रहे थे ।

मुझे स्पष्ट रूप से दिख नही रहा था लेकिन मा की आहे बता रही थी कि पापा का मा की जिस्मो पर मर्दन किया रोमांचक था ।

मा - आह्हह उम्म्ंम्ं इह्ह बस करिये राज के पापा ,,, मुझसे रहा नहीं जायेगा

पापा - मत रोक मेरी जान,, आ तेरे प्यास मै बुझा दू

मा - आह्हह लेकिन अपने बेटे के सामने कैसे खुद को आपके लिए पेश करु ,,,, अह्ह्ह्ह हम्म्म्म

पापा- मत सोच देख वो सो रहा और पापा ने मा को मेरी तरफ घुमाया

मैने झट से आंखे बंद कर ली

फिर उनदोनो की आहे सुरु हो गयी ।

मै मन मे - यार ऐसे तो मै देख भी नही सकता क्या करु

तभी मेरे मन में एक विचार आया और मैने दाया हाथ उठा कर अपने ललाट पर रख दिया

और कोहनी के बिच थोड़े से गैप से आंखे खोल कर नजारा देखने लगा

अहहह क्या कयामत थी

पापा ने मा को पीछे से पकड़ा हुआ था और मा का ब्लाऊज पुरा खुला था ,,,मा की दोनो चुचिया पापा के हाथ मे थी

और पापा मा के गरदन और कंधो को चूमते हुए मा की चुचियो को ऐसे मिज रहे थे मानो रसभरे मौसमी को हाथो मे भर गार रहे हो ।

ये नजारा देख मेरे पैंट मे तनाव आने लगा ,,, और उसे मा और पापा से छिपाने के लिए मैने पैर फ़ोल्ड करके लेते हुए मा पापा की रासलीला देखने लगा

फिर पापा ने मा तख्ते पर हाथो के बल झुका दिया और खुद निचे बैठ गये

मेरी मा मेरे से महज एक फुट की दूरी पर अपने कोहनियों के बल झुकी थी और उसके 40 साइज़ के पपीते जैसे नरम चुचे बिस्तर से महज कुछ इन्च उपर हवा मे झूल रहे थे ।

इसी बीच मा उछल कर पुरा बेड पर पेट के बल गिर पडी और तेजी से सासे लेने लगी ।

और जब मेरी नजर पापा पर गयी तो देखा पापा ने अपना मुह मा की नंगी गुदाज गांड मे फसा रखा है

मा - आह्हह उफ्फ़फ्फ ह्य्य्य्य मै मर जाऊंगी राज के पापा ,,,अझ्ह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ

पापा- आज मुझे पहले तुम्हारी गांड चोदनी है जान

मा - क्या बात है मेरे राजा आज डायरेक्ट वही, आपको तो मेरी रसिली चुत ही पसंद होती है हमसा ,,,, कही शिला दीदी की उभरी गांड देख कर मन तो नही न कर रहा है

पापा मा के चुतडो को सहलाते हुए - अह्ह्ह्ह हा जान,, आज जबसे शिला दीदी की उभरी गांड को चुस्त लेगी मे देखा तबसे लण्ड अंगड़ाई ले रहा है ।

मा - अरे इतना ही मन तो कहो बुला दू ,,,आज उन्ही को चोद लो हिहिही

पापा - तु कितनी अच्छी है रागिनी मेरे दिल के जज्बातो को समझती है ,,,काश मै शिला दीदी की जबरदस्त गदरायी गांड मे अपना लण्ड डाल पाता ,,,,और फिर पापा क्छ्छे के ऊपर से ही अपना खड़ा लण्ड मा की पहाड़ जैसी उठी गांड की दरार मे रगड़ने लगे ।

मा पागल हो गई- आह्ह अब क्यू तरसा रहे हो दिदी की वजह से ,,चोद दो न मुझे मेरे राजा

पापा - ऐसे सुखे सुखे डाल दू क्या मेरी जान ,, आ इसको गिला तो कर

फिर मा बिस्तर से उठ गयी और निचे बैठ कर पापा का लण्ड 2 मिंट तक चुस कर गिला किया

पापा - आहहह मेरी जान आजा घोड़ी बन जा

फिर मा बेड पर वापस अपने कोहनियों के बल झुक गई और पापा ने थोड़ा थूक मा की गांड के छेद पर अपना हाथ लगाया और लण्ड को मा की गांड पर सेट करके आगे झुक कर लण्ड को मा की गांड मे दबा दिया और थोड़ा सा लण्ड मा की गांड मे गया

मा - सीईई उउउउऊ उम्म्ंम्ं माहहह ,,,आज इतना टाइट क्यू है जी आपका

पापा- वो जिजी का असर लग रहा है,,, मै तो आज तुम्को जीजी समझ के ही चोदने वाला हू ,,,

फिर पापा ने एक धक्का मारा और लण्ड मा की गांड मे रगडता हुआ अन्दर समा गया

मा -अह्ह्ह्ह्ह उईई माहह ,,, सच मे आज बहुत मोटा लग रहा है जी ,,,, अब रुको मत चोदो कस कर मुझे

पापा - ह्ह्य्य्य हा जान ये ले ,,और पापा तेज़ी से मा की गुदाज गांड को पकड कर चुदाई करने लगे हैं ।

पापा की जांघ मा की चुतडो पर फट फट की आवाज के साथ टकरा रही थी जो पापा के मजबूत धक्के को बया कर रही थी ।

हर धक्के के साथ मा की चुचिया उछल जाती थी,,,,,ये नजारा देख कर मेरा लण्ड पूरी तरह से अकड गया मै चाह कर भी उसको ऐडजस्ट नही कर सकता था

इधर पापा तेज़ धक्को से मा की गांड की खुदाई कर रहे थे,,और मा की सिसकिया तेज हो गई थी

आखिरकार 10 मिंट तक जम कर मा की गांड चोदने के बाद पापा मा के अन्दर ही झड़ गये और उनके पीठ पर लेट कर हाफ्ने लगे ।

पापा - ह्ह्हुय्य्य ,,, मज़ा आ गया मेरी जान आज तो

मा - हा आज तो आप अलग ही मूड मे थे और आपका वो भी मोटा लग रहा था,हिहिहिही पापा मा की पीठ को चूमते हुए - तू चीज़ ही मेरी जान

मा - अच्छा मेरी वजह से या शिला दीदी की ,,,, हिहिहिही

पापा - आह्हह रागिनी मेरी जान तू सब समझ जाती है ,,, लेकिन ऐसी किस्मत कहा

मा - अरे तो ट्राई कर लो मेरी जान और वैसे भी 2 दिन के लिए मै राज के साथ मायके जाऊंगी तो मौका देख कर दीदी को ,,,हिहिहिही

पापा - अरे वो तो सिर्फ राज ही जायेगा न तुम्हारे साथ

मा - अरे तो सब मै ही करू,,,तुम्हारी दीदी है तुम समझो कैसे पटाना है

पापा- चलो ठीक है देखता हू कुछ

मा - कहो तो डिरेक्ट पूछ लू की आप उनको चोद्ना चाहते हैं,,,हिहिही

पापा मा को घुमा के हग करते हुए- अच्छा और तेरे पूछने पर हा कर देंगी क्या

मा - हा तो नही करेंगी लेकिन कुछ रेपोन्स जरुर करेगी

चलो मै तुम्हारे लिये इस 3 दिन मे कोई न कोई जुगाड कर के जाती हू

पापा मा की चुचियो की मस्ल्ते हुए - आहहह सच मेरी जान तू कितनी अच्छी है

मा - आह्हह ज्यादा मक्खन न लगाओ और मुझे चोदो मेरी चुत को भी लण्ड चाहिये आप तो अपना काम कर लिये न

पापा - आह्ह हा मेरी जान क्यो नही आजाओ मेरे ऊपर फिर ना जाने कितनी जोरदार धक्को के साथ पापा ने मा को चोदा

और मै बेबस होकर अपने लण्ड को इस करवट से उस करवट ऐडजस्ट करता रहा

आखिरकार जब वो दोनो थक कर सो गये तब मैने उनलोगो की तरफ पीठ करके हल्का सा लण्ड को सहलाया ही था कि भल्भ्ला कर मेरा सारा सोमरस बहने लगा और मेरी जांघो से रिस के मेरे आन्डो तक चला गया और मै भी ऐसे ही किसी तरह सो गया

अब देखते है क्या होता है आगे
 
Update 022

अगली सुबह करीब 6 बजे मेरी निद खुली

मैने देखा मेरे बगल मेरी मा पेट के बल बिना ब्लाऊज के सिर्फ पेतिकोट मे सोयी है

और उनकी उभरी हुई गांड के दरार मे उनका पेतिकोट फसा हुआ है,,, उनकी चिकनी कमर और मुलायम पीठ ,,,आह्हह देखते ही लण्ड सलामी देने लगा ,,,,,

फिर मैने एक नजर पापा पर डाली वो सीधे एक जांघिये मे सोये थे पेट पर हाथ रखे हुए

मै मन मे - पापा कितने किस्मत वाले हैं मा और मौसी को चोदने के बाद अब बुआ को भी पेलने का प्लान है ,, काश मैं भी बुआ को भोग पाता

तभी मैने सोचा क्यू ना सुबह सुबह बुआ के दर्शन कर लू

फिर मैने लोवर मे लण्ड को ऐडजस्ट किया और हल्का सा करवट लेके उठने वाला था कि मा जग गयी

मा - अरे बेटा कहा जा रहा है

मा भूल गयी की रात मे उसने ऊपर कुछ नही पहना है और मेरी तरफ घूम गयी

मै मा के बडे रसिले पपीते जैसे चुचे देख कर थम सा गया और मेरी नजारे उनकी भूरे रंग के मून्क्के जैसे चुचको पर रुक गयी ,,, जब मैने मा को जवाब नही दिया तो उन्होने मेरी नजर का पीछा किया और वो समझ गयी की मेरा ध्यान कहा है

और फिर मुस्कुराते हुए अपनी स्थिति पर थोडी सफाई देते हुए बोली - अरे वो बेटा रात मे गर्मी थी ज्यादा तो ब्लाऊज निकाल दिया था

मैने देखा मा मुझे देख कर मेरे व्यवहार पर मुस्कुरा कर जवाब दे रही है तो मैने भी हौसला करके कहा- हा मा देखा था मैने रात मे आप पुरे कपड़े निकाल दी थी लेकिन ,,,,

मा शर्मा गयी क्योकि वो समझ गयी मेरे कहने का मतलब फिर भी अंजान बनने का नाटक करते हुए बोली - क्या लेकिन बेटा ???

मै थूक गटक कर थोड़ा मा के करीब खिसक कर बोला - लेकिन फिर भी आप लोग वो सब कर रहे थे इतनी गरमी मे भी ।।। मै बहुत ही मासूमियत से बोला

मा थोडा शर्मायी की मैने सारा खेल देखा और सुना था लेकिन उनको इस बात से थोड़ा uncomfortable भी मह्सूस हो रहा था कि मै क्या सोच रहा हूंगा । तो मा बोली - तू तो सो गया था ना

मै - हा मा मै सो गया था लेकिन

मा - लेकिन क्या

मै - मा वो आप इतना तेज़ बोल रहे थे कि निद खुल गयी

मेरे इतना बोल्ते ही मा सीधे लेट गयी और छत पर देखते हुए मुस्कुराने लगी

सीधे लेटने से उनकी चुचिया छत की तरफ नोक बनाये सख्त थी

मै उनकी सख्त चुचियो को देख कर उत्तेजित होने लगा और लोवर मे लण्ड को ऐडजस्ट करने ल्गा

फिर मा सीधे लेते हुए मेरे तरफ सर घुमा कर थोड़ा तिरछी नजरो से देखते हुए पूछी- जब तु उठा तो मै क्या कर रही थी राज

और वापस छत की तरफ देखने लगी ,इस समय उनकी सांसे तेज हो गयी थी और उनकी चुचिया ऊपर निचे हो रही थी

मै फिर से लण्ड को ऐडजस्ट किया और मा की नंगी चुची को देख थूक गटकते हुए बोला - वो वो मा आप बेड पर झुकी थी और पापा नीचे बैठ कर आपके उसमे सर डाले थे ।

इतना बोल के मैने अपनी नजरे निचे कर ली

मा - धत्त पागल,, मतलब तू शुरू से ही जग रहा था

मै - हा शायद लेकिन मा ,,,

मा - हा बोल

मै - पापा आपके,,,,,फिर मैने गांड की तरफ इशारा करते हुए ,,, वहा पर चुम्मी क्यू कर रहे थे

मा शर्मा गयी और मुह पर हाथ रख ली

मै - आपको बहुत अच्छा लग रहा था न मा

मा - धत्त बदमाश अपनी मा से कोई ऐसी बात करता है ,,,

मै - मुझे ये सब कौन बतायेगा अब मम्मी पापा से ना पूछू तो किस्से पूछू

मा थोडी सोच मे पद गयी - ठीक है लेकिन अभी जरुरी नही है समय आयेगा तो बताउन्गी मै तुझे ,,,

मा - अभी तेरी शादी तो नही न हो रही है

मै अनजान बनते हुए - अच्छा तो ये सब शादी के बाद ही कर सकते है क्या

मा - हा बेटा ,, वो भी सिर्फ अपनी बीबी के साथ समझा

मा मुझे नादान बालक समझ कर समझा रही थी तो मैने मा को लपटने का ये मौका कैसे छोडने वाला था

मै - तो फिर पापा ने मौसी के साथ कैसे किया वो सब ,,,थोड़ा जिज्ञसुक भाव मे पुछा

मेरे ये सवाल करते ही मा के चेहरे का रंग ही उड़ गया

मा हडबडी मे बोली - तू तू तुझे कैसे बता ये सब

मै बिना कोई नये भाव के मासूमियत से बोला - उस दिन छत पर देखा था रात मे

मा की सांसे तेज़ हो गयी थी लेकिन वो मुझे कुछ बोल भी नही सकती थी क्योकि गलती उन्ही की थी और मेरे चेहरे का भाव एक मासूम जिज्ञासुक बच्चे के जैसा था ,,,

मा मेरी तरफ घूम साथ ही उन्के करवट लेते ही उनकी दोनो चुचिया बिस्तर की तरफ लटक गयी

फिर मा मुझे बोली- बेटा तुने किसी और को नही न बताया ना उस रात के बारे मे

मै - नही मा मै क्यू ब्ताऊगा किसी को ,,, ये सब छिपा कर करने वाली चीजे है ना

मा थोडी राहत की सांस ली - अच्छा किया बेटा और ये बात तू किसी से नही करेगा जो कुछ जानना पूछना होगा मुझसे पूछ लेना

मै खुश होते हुए - ठीक है मा

फिर वापस से मा की चुचियो को घुरने लगा

मा ने मुझे ऐसे देखा तो बोली - क्यू पीने का मन है क्या मेरे लल्ला

मै बड़ी मासूमियत से हा मे सर हिलाया

फिर मा ने मेरे गाल पर सहलाते हुए एक नजर पापा को देखा तो वो ऐसे ही सोये हुए है

फिर मा मेरी तरफ खिसक गई और इशारा किया मै उनकी चूचियो को चुसू

मै इतना अच्छा ऑफ़र कैसे मना कर पाता और झुक कर मा की चुचियो को दोनो हाथो से पकड़ा और उन्के निप्प्ल तन कर सामने आ गये फिर मैने जीभ निकाल मा मुनक्के जैसे निप्प्ल को चाटने लगा

और जीभ को नुकीला कर उनकी निप्प्ल के चारो तरफ के भूरे घेरे मे गोल गोल जीभ चलाने लगा और बिच बिच मे निप्प्ल को जोर से चुस भी लेता

मा आंखे बंद कर मेरे सर को अपने बड़े बड़े चुची मे दबाए हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी

तो मैने भी मौके की नजाकट को समझा और चुचियो को चुस्ते हुए मा की कमर को पकड कर अपनी तरफ खिच लिया जिससे मेरा लोवर मे खड़ा लण्ड मा जांघो के बिच टकरा गया और मैने भी मा तरफ आगे कमर खिसका कर मा की चुचियो मे एक को एक हाथ से दबाते हुए दुसरे को मुह मे भर कर चूसने ल्गा

मा की मदहोसी बढने लगी वो मेरे सर के साथ साथ मेरे पीठ पर भी हाथ फेरने लगी

मै भी समझ गया मा अभी मेरे नियन्त्रण मे है कुछ पल के लिए

तो क्यो ना थोदा आगे बढ़ा जाय

फिर मैने भी अपना हाथ मा के कमर से उनकी पेतिकोट मे कसी चुतडो पर ले जा कर उनकी गोलाई मापने लगा

मेरा मा के चुतडो पर स्पर्श उनको मेरे लण्ड के और करीब ले आया ,,, मैने भी अपनी कमर को ओर मा की तरफ किया जिस्से मेरा लोवर मे खड़ा लण्ड मा की गुदाज जांघो मे घुस गया

अब मैने मा के चुतडो को पकड कर अपनी तरफ खीचते हुए अपनी कमर हल्की हल्की चलाते हुए मा के चुचो को चूसने ल्गा

जिससे मा की उत्तेजना भी मेरे तरह बढ़ गयी वो भी मेरी कमर को पकड कर तेज़ी से अपनी जांघ को मेरे लण्ड पर घिसने लगी ,, नतीजन मा और मै करीब 1 मिंट मे अंदर ही अंदर झडने लगे और एक दुसरे को झटके देने लगे

फिर हम थक कर एक दुसरे से चीपके रहे

फिर मा बोली - बेटा उठ जा तू ऊपर फ्रेश हो ले

मै मा को छोड़ना नही चाहता था ना जाने कैसा एक जुडाव हो गया मा से

मै - मा अभी आपसे ढेर सारी बाते करनी है और बहुत सारे सवाल हैं

मा मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराइ - बेटा सब बताउन्गी अभी तू जा फ्रेश हो ले , कहीं तेरे पापा न जग जाये , हम लोग दोपहर में बात करेंगे इस बारे मे और किसी से कुछ बताना मत

मै खुश होते हुए हा मे सर हिलाया और ऊपर चला गया और सीधा बाथरूम मे घुस गया

अब देखते आगे क्या होता है
 
Update 23

अब तक :

मै - मा अभी आपसे ढेर सारी बाते करनी है और बहुत सारे सवाल हैं

मा मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराइ - बेटा सब बताउन्गी अभी तू जा फ्रेश हो ले , कहीं तेरे पापा न जग जाये , हम लोग दोपहर में बात करेंगे इस बारे मे और किसी से कुछ बताना मत

मै खुश होते हुए हा मे सर हिलाया और ऊपर चला गया और सीधा बाथरूम मे घुस गया

अब आगे :

मै नहा धोकर फ्रेश हुआ निचे आया तो कीचेन मे मा और दीदी नाश्ता बना रही थी

पापा नाश्ते के टेबल पर बैठे बेडरूम मे शिला बुआ को निहारे जा रहे थे जो मैक्सि मे थी और बैग से कपड़े निकाल रही थी ।

पापा को नही पता था कि मेरी नजर उन पर है वो बस एक टक बुआ को देखे जा रहे थे

बुआ ने बैग से एक हल्के पीले रंग की कुर्ती और सफेद लेगी निकाली और एक मरून कलर का ब्रा पैंटी सेट निकाला फिर बैग रख कर सामने देखा तो पापा उन्ही को देख रहे थे

बुआ ने एक नजर पापा को देखा फिर हाथ मे लिये ब्रा पैंटी पर गयी तो वो थोडा शर्मा गयी

फिर वो तौलिया लेने के लिए वापस बेड की तरफ झुकी तो पापा बुआ की मोटी गांड देख कर चढ्ढे के ऊपर से लण्ड को सहलाया ,,, बुआ ने फिर से वैसे झुके हुए ही वापस गर्दन घुमा के पापा की तरफ देखा तो उनको अपना लण्ड सहलाते हुए उनकी अपनी गांड को निहारते पाया

बुआ घूमी और मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर आने लगी

पापा ने भी बिना नजरे हटाये बुआ की गदरायी जवानी को ताडे जा रहे थे ,, बुआ के बाहर आते ही मै मोबाईल मे देखने लगा मानो मुझे कुछ पता ही न हो

फिर बुआ सीढ़ी से ऊपर चली गयी नहाने के लिए ।

फिर मै भी मा को बता कर बिना नाश्ता किये निकल गया चाची के यहा क्योकि मुझे उनको बस स्टॉप तक लिवा के जाना था ।

करीब 45 मिंट बाद मै वापस घर आया तो 8 बज गये थे ।

पापा बैठ के नाश्ता कर रहे थे और मै आ गया तो बुआ बोली

बुआ - आजा बेटा बैठ तू भी नाश्ता कर ले और बुआ मेरे लिए एक प्लेट मे चाय आलू के पराठे लेके आई

उफ्फ़ क्या लग रही थी बुआ

उस पीले रंग की फिट कुर्ती मे उनकी चुचियो पर कसाव था और सफेद लेगी मे उनकी मरून कलर की पैंटी का कट उनकी गदरायी जांघो पर दिखा रहा था । बुआ ने अपना दुपट्टा अपने गीले बालो पर लपेटा था तो चलने पर उनकी हिल्ती चुचिया सामने से ऊपर निचे होती दिख रही थी ।

पापा की नजर बराबर बुआ पर थी वो बेपरवाह हो कर बुआ को ताडे जा रहे थे ।

पापा - जीजी मुझे नही दोगी मै भी भूखा हू

बुआ मुस्कुराते हुए - हा क्यो नही भइया अभी ला रही हू

और बुआ घूम कर वापस जाने लगी किचन मे और पापा बस बुआ की मटकती मोटी गाड़ को देखे जा रहे थे

मा भी काफी समय से पापा की हरकतों पर नजर रखे मुस्कुरा रही थी । वो भी बुआ को छेडते हुए बोली

मा - लगता है दीदी आपके भईया कुछ ज्यादा ही भूखे लग रहे है ।

बुआ - हा क्यो नही,,, कितने सालो के बाद मेरे हाथ का बना खा रहे हैं तो

फिर बुआ प्लेट मे पराठे लेकर पापा के पास मदमस्त चाल मे आई और पापा के बगल मे खड़े होकर एक पराठा दिया

बुआ - और भी दू भईया

पापा - आपसे जितना लेलू उतना ही कम है दीदी

बुआ हस्ते हुए एक और पराठा पापा को दिया फिर चुतड हिलाते किचन मे चली गयी ।

मै भी पापा बुआ और मा की डबल मेअनींग बाते सुन कर मुस्कुरा रहा था ।

पापा - रागिनी मै दुकान जा रहा हू

मा - ठीक है जी

फिर पापा बुआ को ताड़ते हुए चढ़ढे मे लण्ड को एद्जेस्त करते हुए - जीजी जा रहा हू कोई चीज़ की जरुरत हो मुझे कहना

बुआ भी पापा की हरकतो को देखते हुए बोली - हा भईया जरुर

फिर पापा निकल गए दुकान और मै भी दुकान खोला और बैठ गया काम करने

करीब 11 बजे मा और बुआ एक साथ निचे आई और साथ मे तो टिफ़िन बैग भी थे

मा - ले राज जा पापा को खाना देते आ फिर तू भी खाना खा ले

बुआ - ठीक है भाभी मै भी जा रही हू छोटे(चाचा) को खाना देके खिला के आती हू

फिर मै दुकान के निकला और बुआ चाचा के यहा

मै 20 मिंट मे खाना देकर आ गया वापस

मा - चल तू भी खा ले

मै - नही मा अभी भूख नही है,,,वो आप कुछ बताने वाली थी न चलो ना वही बात करते है

मा थोडी मुस्कराकर - धत्त पागल,,, बहुत बदमाश हो गया है तू

मै जिद करते हुए - मा प्लीज ना प्लीज

मा - ठीक है पूछ क्या जानना है

मै खुश होते हुए मा के गाल पे एक चुम्मा किया और बोला - मा आप बता रही थी न वो करने के लिए शादी करना जरुरी है और वो सब सिर्फ अपने बीबी से ही करना चाहिए,,,,लेकिन पापा तो मौसी के साथ भी किये थे

मा ह्स्ते हुए - तू बिलकुल बावरा है और कितना भोला है

मै - बताओ न मा

मा - अच्छा ठीक है सुन ,,,जो तू कह रहा है वो शादी के पहले भी कर सकते है ,,,लेकिन क्या अंजान लोगो से ऐसे रिस्ते बनाने मे कई बिमारियो के खतरे है और बदनामी का डर भी है । इसीलिये मैने तुझे कहा था की शादी के बाद ही करना चाहिए ये सब ,,,क्योकि अभी तु छोटा है ना

मै उत्सुक भाव से मा से फिर पुछा - और रिस्तो मे वो सब करना सही है क्या मा ,,,उसमे भी तो बदनामी का डर रहता होगा न

मा मुस्कुराते हुए- हा बेटा रिस्तो मे तो और भी ज्यादा बदनामी का डर होता है लेकिन इसका एक फाय्दा है कि लोग जल्दी शक नही करते है इसिलिए,,

मै - तो क्या एक घर के ही लोग भी आपस मे कर सकते है मा

मा - हा कुछ लोग हैं ऐसे जो या तो मजबुरी मे या भावनाओ मे बह कर करते है ,,,और वैसे भी अगर दो लोग आपस मे राजी है तो कुछ भी गलत नही है

मै थोडी देर शांत रहा और सोचने का नाटक करता रहा

मा - क्या हुआ अब हो गया ना सब सवाल खतम

मै - नही अभी तो एक और है

मा - तो वो भी पूछ के लल्ला

मै - अगर ये सब गलत नही है तो क्या मै भी अपने घर , रिस्तो मे वो सब कर सकता हू

मा मुस्कुराते हुए बोली - तु भी करना चाहता है क्या ,,, तुझे किसके साथ करना है हिहिहिही

मै शर्माते हुए - आपके और मौसी के साथ

मा - हट बदमाश ,,,,तुझे मेरे उम्र की बुड्ढीयो मे क्या दिलचस्पी है ,,अभी तू जवान हो रहा है नयी कुवारि लडकियों को देख

मै - नही मा मुझे आपके और मौसी जैसी औरते अच्छी लगती है जिनके ये सब बडे बडे हो ,,,,मै उनकी गांड और चुचियो पर इशारा करते हुए बोला

मा शर्माने लगी और मै वाप्स से छोटे बच्चे की तरह जिद करते हुए बोला - मा मुझे भी सिखना है वो कैसे करते है प्लीईईईज्ज्ज्ज्ज

मा ह्स्ते हुए - ठीक है बेटा आज रात मे जब मै और तेरे पापा आयेंगे तो कल की तरह तू वापस देखना और मै भी तुझे इशारे मे समझाउगी भी

मै मा की बातो से खुश हो गया

और मेरा लण्ड एकदम गरम होकर लोवर मे टनटना गया

मै मा को पीछे से हग किया और खड़ा लण्ड साड़ी के ऊपर से ही उनकी चुतड मे धसाने ल्गा

मा - छोड पागल दुकान मे है हम लोग कोई आ जाएगा

मै - तो अन्दर चलो ना मा मुझे भी करने का मन है आपके साथ

मा - धत्त पागल,,तेरी बुआ कभी भी आ सकती है

मै मन मार कर रह गया

मा मुझे ऐसे देख कर बोली - चिन्ता ना कर रात मे अगर हुआ तो तुझे भी मौका दूँगी ,,,अब खुश

मै - हा खुश और फिर से मा को किस्स दिया और काम करने मे लग गया

अब देखते है दोस्तो आगे क्या होता है

कैसे रागिनी ये जानते हुए कि उसका बेटा उसको देख रहा है और वो अपने पति से खुल कर चुदेगी या कोई थ्रीसोम का तडका भी होने वाला है ।
 
Update 24

अब तक

मै - तो अन्दर चलो ना मा मुझे भी करने का मन है आपके साथ

मा - धत्त पागल,,तेरी बुआ कभी भी आ सकती है

मै मन मार कर रह गया

मा मुझे ऐसे देख कर बोली - चिन्ता ना कर रात मे अगर हुआ तो तुझे भी मौका दूँगी ,,,अब खुश

मै - हा खुश और फिर से मा को किस्स दिया और काम करने मे लग गया

अब आगे :

फिर करीब 2 बजे तक बुआ वापस आई फिर हम लोग बात किये हाल चाल हुआ

मा - चलिये दीदी अन्दर कमरे मे चलते है वही बात करनेगे,, यहा गरमी ज्यादा है

बुआ - चलो ठीक है भाभी

फिर वो दोनो पीछे पापा के कमरे मे चले गये

मै भी अपना चेयर कमरे से थोड़ा करीब ले जाकर बैठ गया

अन्दर कमरे मे

बुआ - अरे वाह यहाँ तो कुलर भी लगा है

मा - जी दीदी ,, आईये बैठीये ना

बुआ - अच्छा यही वो बिस्तर जहा रोज रात मे मेरे भैया आपकी जम कर लेते है ,,,,हिहिहिही

मा - हा क्यो नही ,,,, आप भी आजाओ आज रात मे दीदी आपके भईया आपकी भी ले लेंगे। ,,, ह्हिहिही

दीदी - क्या भाभी आप भी भईया है वो मेरे कुछ तो लिहाज करो

मा - शिला बानो जितनी मोटी तुम्हारी चुतड है ना इससे तुम्हारे बाप का भी लण्ड खड़ा हो जाये वो तो भईया है । हहहहह

बुआ - क्या भाभी आपसे तो मजाक करना अपना घाटा करना है,,,,हीहीहि

मा - वो सब छोडो ये बताओ नंदोई जी लगता है बहुत मेहनत करते है आपके पिछवाडे पे,,,तभी ये हाथी जैसा निकल गया है

बुआ - क्यू आपको भी करवाना है क्या ,,,तो चलियेगा मेरे साथ आपके नंदोई जी आपका भी मेरे जैसा कर देंगे ,,,,, हिहिहिहिज

मा - ना बाबा ना मुझे नही करवाना ,,हीहीहि

मा - हा आपको यहा हफ्ता दस दिन रहना है तो कहो मै आपके किये आपके भैया से बात करु ,,,, वैसे भी बड़ी गांड के दीवाने है ही वो ,,,हहह्हह्जा

बुआ - क्या भाभी आप भी न हिहिहिजी

मा - वैसे मै 2 दिन के लिए मायके जाऊंगी मन करे तो आजाना निचे ,,,राज के पापा अकेले सोये रहेंगे

बुआ थोडी देर चुप रही

मा - क्या हुआ जीजी कही सोचने तो नही न लगी कि कैसे कैसे आपके भैया आपको भोगने वाले है ,,,, हिहिहिही

बुआ - हिहिहिह भक्क भाभी ,,,आप भी

मा - ओहो भईया को सईया बनाने का सोच कर कैसे मुस्कुरा रही है हम्म्म्म्म्ं,,,, और ये दूध भी कड़े हो रहे है । क्या बात है जीजी

बुआ - छिईईई ,,,ऐसा कुछ नही है भाभी ,,, वो तो आप कबसे सेक्स को लेकर बाते किये जा रही है इसिलिए ऐसा हो हुआ है

मा - अच्छा कही भईया के नाम से आपकी मुनिया भी नही न बहने लगी

बुआ - अह्ह्ह्ह्ह भाभी इस्स्स्स उम्म्ंम हाथ हटाओ भाभी क्या कर रही है ।

मै चेयर पर बैठे हुए लण्ड को हल्का सहलाते हुए सोचने लगा - अचानक से ये बाते सिस्कियो मे कैसे बदल गयी और ये देखने के लिए मै खिडकी के पास गया तो देखा

बुआ की आंखे बंद है और उनका एक हाथ बेडशिट को अपनी मुथ्थी मे भरने की कोसिस कर रहा और दुसरा हाथ मा के हाथ को पकडे हुए है

और मा का हाथ बुआ के कुर्ती के अंदर लेगी के ऊपर से उनकी फुली हुई चूत पर रेग रहा है ।

इधर मा एक कातिल मुस्कान से बुआ के चेहरे को देख रही थी जो उनकी चुत पर मा के उंगलियो के स्पर्श के साथ अपने भाव कामुक सिसिकियो के साथ बदल रहा था ।

अब बुआ ने अपनी जान्घे थोडी खोल दी और मा ने मुस्कुराते हुए अच्छे से हाथों मे उनकी चुत को भरते हुए मसलना सुरु कर दिया

बुआ - अह्ह्ह्ह उम्म्ंं भाभी क्या कर रही हो ,,,, मुझसे रहा नही जायेगा

मा - तो चली जाना ना अपने भईया के पास ,, कुटवा लेना अपना ये भोस्डा,,,, और फिर वापस बुआ की चुत को रगड़ने लगी ।

बुआ - भाभी अब मुझसे नही रहा जा है कुछ करो आह्हह उम्म्ंं उफ्फ्फ्फ

और मा के हाथ को पकड कर अपनी चुत पर दबाते हुए कमर पटकने लगी और लपक कर मा के होटो को अपने मोटे-मोटे होटों मे दबोच कर चूसने लगी ,,,, पहले तो मा चौकी फिर वो भी आंखे बंद करते हुए बुआ के होटों को चुस्ते हुए उनकी चुत सहलाने लगी ,,,,

फिर बुआ ने अपनी कुर्ती ऊपर की और मा का हाथ अपनी लेगी मे डाल कर पैंटी के अंदर से नंगी नरम पाव जैसी फुली चुत पर रगड़ने लगी

बुआ के लेगी मे मा के हाथो की हरकत दिख रही थी ,,,फिर मा अपनी उंगली बुआ की चुत मे डाल दी

बुआ - अह्ह्ह्ह भाभी उम्म्ंम चोद दो मुझे अम्म्म्ंं उफ्फ्फ

मा तेज़ी से बुआ की चुत मे उंगली से पेलने लगी और बुआ भी अपनी गांड उठा कर उनका साथ देने लगी

मा - क्यो दीदी अब भी नही लोगी अपने भैया का लण्ड

बुआ - आह्हह भाभी अभी किसी का भी लण्ड मिल जाये तो मै ले लुंगी ,,,,,आआआ उम्म्ंम्मम्म्ं उफ्फ़फ्फ रुकना मत भाभी निकाल दो मेरा आह्हह उम्म्ंम

फिर बुआ तेजी से आहे भरते हुए अपने चुतडो को पटक कर झडने लगी ,,, फिर मा ने उनकी चुत से उंगली बाहर निकाली और अपना साडी ऊपर कर पेतिकोट मे हाथ पोछा ,,,उधर बुआ थक कर लेट गयी

फिर मै भी लण्ड को ठीक किया और दुकान मे आ कर बैठ गया

फिर 10 मिंट बाद मा और बुआ बाहर आई फिर ऊपर चली गयी

मै मन मे खुश होने लगा क्या मस्त चुद्क्क्ड परिवार है मेरा और सारी औरते कितनी भुखी है लण्ड के लिए यहा

शाम को कोचिंग का समय हुआ तो मै कोचिंग पहुचा तो मेरी दीदी , पहले से ही पहुची थी ।

मैने एक नजर उसको देखा ,,, वो मुझे देखते ही मुह घुमा ली क्योकि वो अभी भी कल की बात को लेके गुस्सा थी ।

मेरी फटी पडी थी क्योकि 2 दिन बाद रक्षाबंधन था ,,, मै कितना भी भाग लेता लेकिन उस दिन तो उसका सामना करना ही था ,,,,

फिर मुझे दिदी की बात याद आई की उनको एक मोबाईल चाहिये था ,,,, मैने सोचा कि क्यों मोबाईल के साथ और भी एक गिफ्ट लेलू ,,,लेकिन उससे पहले दीदी से बात करना जरुरी है। मगर कैसे करू ये तो मुझे देखते ही भडक जा रही है ।

चलो ठीक है घर जाते समय बात कर लूंगा रास्ते में,, हा यही सही रहेगा और रास्ते मे चिल्ला कर या गुस्से मे बात नहीं करेगी हहहहाहाहा

फिर मै पढाई मे लग गया लेकिन बार बार मेरा मन दीदी मे लगा ,,, सब कुछ सोचने के बाद भी बात कहा से सुरु करूगा इसी मे सोचने लगा और खुद ही बड़बड़ाते हुए कोचिंग मे बैठा रहा

मै वैसे ज्यादतर दीदी या और किसी लडकी की क्लास मे नही देखता था लेकिन आज बार बार दीदी पर नजर जा रही थी

इसी बिच मेने नोटिस किया कि दीदी ने कई बार स्माइल किया लेकिन क्यू

फिर मैने क्लास मे नजर दौडाई की किसकी निगाहे मेरी दीदी की तरफ है

35 लडके और 15 लड़कियो के बैच मे करीब 7 8 लड़को की नजर मेरे दीदी पर थी ,,कुछ तो आपस मे उसको लेकर बात भी कर रहे थे ।

फिर मुझे लगा ऐसे नही पता चलेगा ,,, तो मैने लगातार 10 मिंट तक दीदी को घूरा और जब दीदी ने अपना राइट साइड के बालो का लट अपने कान मे खोस्ते हुए उनकी दाई तरफ आगे की सीट पर बैठे अमन को देखते हुए स्माइल की ,,,,

मै मन मे - अबे साला ये अमन ,,, मादरर्चोद मेरी बहन के पीछे पडा है साले की हड्डी ना तोडी तो मेरा नाम भी राज नही

मेरा सारा मूड खराब हो गया था एक पल मे ,,, अचानक से मेरे अंदर मेरी बड़ी बहन को लेके एक अलग ही भावना आ गई,,,, जिस बहन को मै कुछ दिनो से खुद हवस की नजर से देख रहा था आज उसके लिए एक भाई का बहन के प्रति फिक्र उमड कर आ गया ।

मैने सोचा कि अब इस अमन से बात करनी और इसे समझाना पडेगा ।

नया परिचय

अमन - चमनपुरा मे मेरे मुहल्ले के बगल वाले मुहल्ले में रहता है जो मेन मार्केट के पास है । ये अपने मा बाप का एकलौता बेटा है लेकिन बहुत ही सीधा और सरल स्वभाव है और पढाई मे अव्वल दर्जे में है,,,मेरे साथ बचपन से ही पढा है और हमेशा मेरी पढाई मे मदद की है

सेठ मुरारीलाल - अमन के पिता जी , क्षेत्र के नामी गिरामी सेठ है और पैसो की कोई कमी नहीं है ।

ममता देवी - अमन की मा ,, बहुत ही अच्छी और सुशील महिला है ,,, थोड़े भारी जिस्म की है ,,कद काठी भी चौडी है एकदम पंजाबन जैसी ,,, इसी वजह से इनका साइज़ भी 42 38 46 का है और भारी जिस्म की वजह से ये सूट सलवार ही पहनती है और और एक बड़ी साल से हमेशा खुद को ढक कर रखती है ।

मदनलाल - अमन के चाचा ,,,ये आर्मी से रिटायर है और इन्होने शादी नही की इसका एक मात्र कारण अमन है क्योकि वो उनको जान से भी प्यारा है और उसके लिए प्यार कम न हो इसिलिए मदनलाल ने कभी शादी नही की और इसी वजह से मुरारिलाल ने दुसरा बच्चा नही किया ।

खैर ये सुनी सुनाई बात है असल सच्चाई वो लोग ही जानते है ।

वापस कहानी पर

मै इसी उधेड़बुन मे लगा था की क्या बात करना है तभी क्लास खतम हो गया ,,, मेरा आज का पुरा क्लास क्या था मुझे पता नही चला मै बाहर दीदी का वेट करने लगा ,,, वो अपने फ्रेंड्स से मिल कर 5 मिनट बाद बाहर आई और गेट पर मुझे खड़ा देखा तो इग्नोर करते हुए सीधि निकल गयी मै भी उसके पीछे पीछे चल दिया,,,अक्सर हम साथ ही आया करते थे घर

जब हम कोचिंग से थोडी दूर आ गये तो मै उसके पास गया और बोला - दीदी अभी भी नाराज हो ,,,, सॉरी

वो सीधे चल रही थी बिना कुछ बोले

मै फिर बोला - दी.....

दीदी थोड़ा गुससे मे जवाब दी हुए - अब क्या यहा भी कोई तमाशा करना है तुमको राज

मै थोड़ा सहम गया क्योकि मै भी बिच सड़क पर कोई बवाल नही चाहता था

तो --- सॉरी न दीदी प्लीज

दीदी - जो बात करनी है घर पे करना,,, इतने मे अमन अपनी बाइक से हम दोनो को क्रास करते हूए आगे निकला और बाइक धीमा कर सीसा ठीक करते हूए निकल गया , जिस वक़्त वह अपनी बाइक का सीसा ठीक कर रहा था उस समय उसका चेहरा दिख रहा था मतलब उसको सीसे मे हम दोनो दिख रहे होगे तब ,,, जिसको देख दीदी ने दुसरी तरफ मुह करके हल्की स्माइल दी ।

मेरी जल कर रह गयी ,, मेरा मूड खराब होने लगा एक बार फिर ,,,,

फिर दीदी ने मुझे देखा तो मै सीधे चल रहा था और मेरे चेहरे पर गुस्से का भाव था

दीदी - मै बोली न घर बात करेंगे

मै उनको देखा - हा ठीक है

फिर घर पहुचे हम लोग तो दुकान मे बुआ और मा बैठे थे , वो दोनो हस रहे थे बात करते हुए

बुआ मुझे देखते ही- अरे भाभी सोनल ही क्यू अब तो राज भी सादी के लायक हो गया है

मा - अरे नही दीदी राज अभी बच्चा है ,,, आप बस मेरी सोनल के लिए उस रानीपुर वाले रिस्ते के लिए कुछ बात आगे बढ़ाईये ,,,, तो राज के पापा भी जाकर देख लेंगे

ये बात सुन के मै शौक मे आ गया अरे दीदी की शादी अब ये बात बिच मे कहा से आई ,,, ये साले रिस्तेदार मिल जाये तो इनको सिर्फ शादी की बाते करनी होती है ,,,

इधर मै ये सब सोच रहा था कि इतने दीदी तेज़ी से छत पर भाग गयी

बुआ हस्ते हुए - देखा भाभी सोनल कैसे शादी के नाम पर शर्मा कर भाग गयी ऊपर हहहहहह्हाहह

मुझे बहुत अजीब लगा की दीदी के लिए तो मै भी ऊपर जाने ल्गा जैसे ही मै 4 सीढ़ी ऊपर गया कि मा की आवाज आई

मा - हा जीजी ,,नही तो आजकल की लडकिया तो खुद ही देख सुन ले रही है अपनी पसन्द से

बुआ - अरे भाभी इन लोगो का बहुत अच्छा है की शादी से पहले जांच परख लेती है कि हथियार ठीक है या नही कितना समय तक रुकेगा ,,,,, और हमारे समय मे जिसके गले बाँध दो वही मिलता है

मा - हिहिहि क्या दीदी आप भी ,,,,छीईईई कैसी बात कर रही हो आप मेरी बेटी है वो

बुआ - अरे भाभी जब 2 बार अन्दर हथियार लेगी ना ,,,, फिर वो भी आगे जाकर अपनी भाभी या नंद से ऐसे ही बात करके मज़े लेगी ,,, हहहह्ह्हाहहा

मा - धत्त,, आप तो ऐसे कह रही है जैसे बाऊजी ( मेरे दादाजी ) ने आपके लिए हल्का हथियार खोजा हो

बुआ - अरे भाभी हतियार तो जबर है ही और लम्बी रेस का घोड़ा भी है

मा - तो मै भी मेरी बेटी के लिए ऐसा ही खोजूंगी

बुआ - उसके लिए खुद ट्राई करना पडेगा ना चुद कर ,,,, और कितने लण्ड पर झुलोगी रानी इस उम्र मे हहहह्हहाह्हा

मा - अच्छा आपकी भी तो बेटिया है आपको तो मेरे से ज्यादा झूलना पडेगा

बुआ - नही मै तो मेरे बेटियो की पसनद से शादी करवाऊंगी जहा वो चाहे ,,,,,

ऐसे ही इनदोनो की गर्मा गर्म बाते चलती रही फिर मुझे दीदी का ख्याल आया तो मै कमरे मे गया जहा दीदी चादर ओढ़े सोयी थी ।

ऐसा दीदी कभी नही करती थी की क्लास से आई और सो जाये

मै धीरे धीरे उनके पास गया तो मुझे रोने की सिसकी सुनाई दी

तो मैने तुरंत चाद्दर खीच ली देखा

दीदी फफ्क फ्फ्क कर रोए जा रही है

मै दीदी के बगल मे बैठ गया और उनके कन्धे पर सर रखा - दीदी क्या हुआ आप रो क्यू रही हो ।

वो मुझे झटकते हुए उठ गयी और गुस्से मे बोली - तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे छुने की चला जा राज यहा से मेरा मूड बहुत खराब है और फिर उठ कर बाथरूम मे चली गई

मै कुछ देर औचक बिस्तर पर बैठे नजरे झुका कर फर्श को देखता रहा और मेरी आंखे एक टक फर्श को देखने से भर आई थी ,,,, मै एक गहरी सोच मे डूब गया कि आखिर क्या हो गया है दीदी को तो ऐसा रिएक्ट नही करती कभी ,,, कही शादी की बात से तो ,,, कही वो भी अमन को पसंद तो नही ,,,, मेरे मन में कई सवाल आ रहे थे

लेकिन मै वही जैसे का जैसे बैठा फर्श को निहारता रहा

फिर दीदी आई और मुझे देखा तो गुस्से मे मेरा कन्धा पकड के खीचते हुए - मैने तुझे बो.....

और मेरा चेहरा देखते ही रुक गई क्योकि मेरी आंखे भरी हुई थी जैसे ही उनहोंने मुझे खीचा वो बहने लगी

दीदी को लगा मै रो रहा हू

दीदी - अरे भाई तू ... फिर वो भी मेरे बगल मे बैठ गई और अपने नखुनो को आपस मे तोडते हुए बोली - सॉरी भाई मै तुझे खामखा डाट दी ,,,, लेकिन मै क्या करू निचे मा और बुआ अभी से मेरी शादी करवाने के लिए बात करने लगी है तो उनका गुस्सा भी तेरे पर आ गया । माफ कर दे भाई

मै शौक था कि दीदी को अचानक से क्या हुआ जो ये बदल गई,,,, सोचा छोडो यार मान गई बला गई,,,,

मै थोड़ा मासूमियत से - तो आप पापा से बोल दो की अभी आपको शादी नही करनी है,,,

दीदी - लेकिन कैसे

मै - आप कहो तो मै बात करु

दीदी - तु ..... और पापा से,,, सच कह रहा न

मै - पापा क्या कहो तो मा से कह कर अभी रुकवा दु, हिहिहिहिह

दीदी - पक्का न

मै - हा दीदी ,,,पक्का

दीदी ने मुझे हग किया और बोली - थैंक्स भाई

लेकिन मै कोई खास रेपोन्स नही देते हुए अलग हो गया और बिना कोई शो ऑफ़ के निचे चला गया ।

क्योकि कब उसका मूड घूम जाता पता नही ।

अब देखते हैं दोस्तो आगे क्या होता है

आने वाले दिन मे राज को कई सारे सेक्सुअल अनुभव और कहानी को नयी दिशा मिलने वाली है ,,,
 
Update 25

मै दीदी को बिना कुछ बोले निकल आया नीचे और फिर मूड फ्रेश करने के लिए सोचा चंदू से मिल लू तो रामवीर से पता चला कि वो ,रजनी और चंपा तीनो चंदू के मामा के यहा चले रक्षा बंधन के लिए ।

मै - अच्छा तभी आज ये कोचिंग भी नही आया था

मै वापस आया और तब तक पापा भी आ गये

फिर मै पापा बुआ और मा सब दुकान मे ही बैठ के बाते करने लगे और पापा की नजर बुआ पर गई जो इस समय एक नायलान मैक्सि पहने हुए थी

पापा - अरे दीदी आपने कपड़े बदल दिये सुबह तो आप कुछ और पहने थे

बुआ शर्माते हुए - हा भईया वो कपडे थोड़े तंग थे और रात मे सोना है तो इसमे ज्यादा आराम है

पापा - तंग कहा थे दीदी एकदम परफ़ेक्ट फितींग थी

बुआ - अरे नही भईया वो ... फिर वो शर्माने लगी

पापा - क्या हुआ जीजी खुल के बताओ यहा कोई बाहर का थोडी है

बुआ - भईया वो मेरे अंदर वाले कपड़े तंग थे ।

मा - क्या दीदी आपने एक बार भी नही बताया की आपके अंडरगार्मेंट्स छोटे हो गये

बुआ थोडी शर्माती हुई और मुझे भी थोड़ा अजीब मह्सूस हो रहा था ऐसे पापा के सामने बाते सुनना लेकिन मा और पापा तो बुआ को खोलने मे लगे थे

बुआ थोड़ा मुस्कुराकर एक नजर पापा और मुझे देखा फिर बोली - हा वो वो मै भूल गई ....

मा - अच्छा तब मतलब अभी भी आपने कुछ नही पहना होगा

मा की बात सुनते ही मेरे और पापा के कान खड़े हो गये क्या सच मे बुआ उस नायलान मैक्सि के अन्दर पूरी नंगी होगी

मै एक बार पापा को देखा तो वो एक तक बुआ के मैक्सि के चैन को देखे जा रहे थे और एक हाथ उनका चढ़ढे को मिज रहा था

इसी बीच पापा मौके का फायदा उठा के बोले - अरे तो रागिनी देख क्या रही है चल जीजी के नाप का अंडरगार्मेंट निकाल दे

बुआ - अरे रहने दो भैया कल सुबह ले लुंगी मै जब नहाने जाऊंगी तो आप चिन्ता ना करो वैसे भी गरमी है तो ऐसे सोने मे आराम है

ऐसे ही बाते हो रही थी फिर मा उठकर - आप लोग बाते करो मै खाना बनाने जा रही हू

फिर मा ऊपर चली गयी और मै भी मोबाईल लेकर साइड हो गया और कानो मे हेडफोन लगा कर उसको चलाने लगा लेकिन मेरी नजर बराबर पापा और बुआ पर थी ।

दोनो सेक्स की आग मे जल रहे थे लेकिन हिम्मत किसी की नही ,,, लेकिन पापा का पुरा मन था बुआ को भोगने का

पापा - और बताओ जीजी वहा के हाल चाल

बुआ - सब ठीक चल रहा है भईया

पापा - यहा कोई दिक्कत तो नही है ना जीजी

बुआ - नही भईया ,,, बस मुझे कल कुछ कपड़े लेके सिल्वाने है

पापा - अरे तो ठीक है कल राज लेके चला जायेगा,,, वैसे कैसा कपडा लोगी

बुआ - सोच रही हू साडीया लेलू इस बार

पापा - अरे वाह ये सही रहेगा

बुआ - हा लेकिन मै अपने नाप का कोई ब्लाऊज नही लाई हू न

पापा - अरे उसकी चिन्ता ना करिये ,,, आईये अन्दर मै अभी नाप ले लेता हू एकदम परफेक्ट साइज़ का

इतना बोल के पापा ने लपक कर इंचीतेप लेके गले मे डाल लिया और खड़े भी हो गये

पापा का उतावलापन देख कर मुझे बहुत हसी आ रही थी ।

पापा - चलो दीदी अन्दर कमरे मे मै नाप ले लेता हू

बुआ - अरे खामखा परेसान हो भईया मै दर्जी को नाप दे दूंगी

पापा - अरे मेरे रहते आप कहा दौड़ने जायेंगी ,,, मै नाप लिख कर दे दूँगा राज कपड़े लेकर चला जायेगा

बुआ मन मान कर - अच्छा ठीक है फिर पापा और बुआ कमरे मे चले गए

पापा ने तो अपनी हवस मे मुझे शुन्य समझ लिया था, वो क्या बाते किये जा रहे हैं मेरे सामने उनको कोई परवाह नहीं थी

फिर दोनो कमरे मे गये और पापा - यहा खड़े हो जाईये जीजी और अपने हाथ ऊपर कर लिजीये

मै सोचने लगा अबे साला पापा तो डायरेक्ट बुआ की चूचि ही नापेगे क्या ,, मै तुरंत उठा और खिडकी के पास से अंदर देखने लगा

कमरे बुआ पापा के सामने हाथ उठाए खड़ी थी और पापा मेरी तरफ पीठ किये खड़े थे

फिर गले से फिता निकालते हुए पापा ने फीता को बुआ के कंधो से अंदर से एक साइड से दुसरे साइड निकाला और सामने लाकर उनके छाती और गले के बिच मे नाप लेते हुए- 36" हम्म्म्म

फिर वापस पापा ने वहा से हटा कर फीता बुआ के छातियो से निचे उनके जहा ब्लाउज़ का बेल्ट होता है वहा लेकिन बिना ब्रा के बुआ की 40 साइज़ की चुचिया थोडी लटकी हुई थी और पापा से टच से निप्प्ल हल्के नुकीले हो गये थे जिससे जहा बेल्ट का माप लेना था वो जगह बुआ की चुचियो से ढका था

पापा - जीजी क्या आप एक मिनट के लिए अपने दूध को ऊपर उथाओगी क्योकि ब्लाउज़ के बेल्ट माप लेना ,,, और मुस्कुराने लगे

बुआ थोडी शर्माते हुए मुस्कुराई और अपने हाथ निचे कर अपनी दोनो पपीते जैसे चुचियो को अपने हाथो मे मैक्सि से पकड कर हल्का ऊपर किया

उफ्फ्फ उस ढीली मैक्सि मे भी बुआ की चुचियो के उठने से मेरे और पापा दोनो के लण्ड अंगदायी लेने लगे

फिर पापा थूक गटकते हुए बुआ की पपीते जैसी चुचियो को घुरते हुए फिते को सामने कर ब्लाऊज के बेल्ट के लिए माप लिया 38" हम्म्म ,, अब छोड दिजीये जीजी

बुआ ने अपने भारी चुचियो को छोडा जिससे 2 3 सैकेण्ड तक उनकी चुचिया हिल्ती रही ,पापा बस एक टक उन हिलते चुचो को देखते रहे फिर उनको देख कर मुस्कुराते हुए - भईया अब आगे बढ़े

पापा - जी जीजी ,,, हा अब थोडी सा अंदर सांस लिजीये मै आपके उभार का माप लेलू

मै पापा के हर स्टेप से उत्तेजित हुए जा रहा था

फिर बुआ ने अपने फेफडो मे सांसे भरी तो उनकी चुचीया फुल कर और ऊपर उठ गयी ।

पापा की आंखे चौडी हो गयी उन्होंने वापस फिते को सामने लाया और ऊँगलियों बुआ की चुचियो के बिच लाकर रख दी और बोले - 42 " हम्म्म

बुआ तुरंत चौकी - क्या 42 ,, नही भईया मेरा 40 साइज़ है

पापा - नही जीजी देखो 42 है

और आपका साइज़ बढ़ गया है तभी आज आपके कपडे तंग थे

बुआ - हम्म्म हो सकता है

फिर पापा ने बाजू और गले का माप लिया ।

बुआ - चलिये हो गया न अब

पापा - अरे दीदी अभी पेतिकोट का तो बाकी है न

बुआ - अरे उसका क्या माप लेना वो ऐसे ही ढीला सील देते है सब

पापा - हा लेकिन अगर वहा पर टाइट हुआ तो कपड़े खराब हो जायेंगे न

बुआ - कहा की बात कर रहे आप भईया

पापा थोड़ा हिचकिचा के बुआ की गांड की तरफ इशारा करते हुए बोले - वहा पर जीजी

बुआ - मै समझी नही भईया

पापा फिर थोड़ा आगे बढ़े और बुआ के बगल मे आ कर उनकी मोटी चुतडो पर मैक्सि के ऊपर से सहलाते हुए - यहा पर जीजी

पापा के स्पर्श से बुआ एकदम सहम सी गयी और उनकी आंखे बंद हो गई

बुआ - आह्ह भईया क्या कर रहे हैं,,, समझ गई मै

पापा का बुआ के लिये हवस चरम पर था उनको जो चाहिये था वो उनकी गिरफ्त मे था तो वो ये मौका कैसे जाने देते

तो वो वैसे ही उनकी मोटी गांड पर हाथ फेरते हुए बोले - तो मै माप लेलू ना इसका भी ,,, ये बोल कर पापा ने बुआ के गांड के पाटो के बीच उंगली से रगड़ा जिससे बुआ हिचक कर आगे हूई मगर अब पापा का हाथ उनकी चुतडो को सहलाए जा रहा था

बुआ - लेलो भईया अह्ह्ह्ह

पापा और बुआ दोनो एक दूसरे को पाना चाहते थे ,, एक तरफ पापा को बुआ की मोटी गांड में अपना लण्ड डालने का हवस ,,, वही दो दिनो की बुआ की फड़फड़ाती चुत लण्ड के लिए तरस तरस कर बहे जा रही थी

पापा ने फीता लिया और इस बार बुआ के पीछे खड़े हो गये और फिर अपने घुटने पर होकर ठीक बुआ के भारी भरकम चुतडो के बराबर मे आ गए,,,, अब पापा का चेहरा बुआ की मोटी गांड के ठीक सामने था ,,, फिर पापा फिते को एक साइड से दुसरे साइड लेने के लिए आगे झुके ,,,और साथ ही बुआ की चुतडो के पास आकर आंखे बंद किया उनकी गदरायी गांड की खुस्बू लेने के लिए एक गहरी सांस ली ,,,जिससे पापा के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गयी

फिर उन्होने फीता सामने किया तो कमर की माप ली 38 " फिर बुआ के मोटी गांड पर फीता को सामने लाया 44" कुल 6 इन्च का उभार ,,,

पापा ने थूक गटकते हुए एक बार अपना चढढा ठीक किया

बोले - जीजी देखा कमर और आपके इसके ( उनकी चुतडो को दबाते हुए ) बिच मे 6 इन्च का अंतर है

बुआ मुंडी घुमा कर निचे पापा को देखती है - अच्छा तभी मेरे सारे पेतिकोट तंग हो जाते है

पापा - जीजी ये बडे भले ही है लेकिन बहुत मुलायम है ,,,, और वापस पापा ने बुआ के चुतड के एक पाट को दबा के बताया जिससे बुआ की सिसकी निकल गयी - उम्म्ंम्म्ं

पापा - जीजी इतना मुलायम तो तकिया भी नही होता है और फिर पापा ने अपना गाल मैक्सि के ऊपर से ही बुआ की गांड पर सहलाने लगे

बुआ - इस्स्स उम्म्ंम्ं ,, बस करो भईया गुदगुदी हो रही है ,,,, और वैसे भी भाभी के पास भी ऐसा ही है वहा सोयिये तकिया बना कर

पापा- नही जीजी रागिनी का आपके जितना नही है

बुआ - धत्त क्या भईया आप भी,,, उठिए चलिये मुझे गुदगुदी लग रही है वहा

पापा फिर खड़े हो गये फिर - अच्छा जीजी आपको याद है हम लोग बचपन में कैसे एक साथ सारे भाई बहन रहते थे और एक दुसरे के ऊपर सोया करते थे ,,,

बुआ - हा भईया कितना अच्छा था तब हम लोग कितने दुबले पतले थे

पापा - सब लोग नही सिर्फ़ मै जंगी और कम्मो थे ,,, आप तो तब ऐसे ही गोल मतोल थे ,, हहहहह

बुआ - भक्क कहा भईया मै भी आप लोगो के जैसी

थी आप ही लोग मुझे भैस मोटी कह कर चिढाते थे।

पापा - वो तो अपने मामा का लड़का लखन आया था वही आपको सबसे पहले भैस बोला था

बुआ - अच्छा वो क्यू ,,, और आपने भी नही रोका उसको कि क्यू बोल रहा था ऐसा मेरी दीदी को

पापा- मैने पुछा था दीदी , फिर जो जवाब उसने दिया तो मै भी संतुष्ट हो गया

बुआ - अच्छा ऐसा क्या बोला वो लखना

पापा - नही दीदी वो पुरानी बात है रहने दिजीये

बुआ - अरे बताईये भईया मै कौन सा बुरा मानूंगी और गुस्सा होना होगा तो उस लखना से होऊंगी

पापा - जीजी वो बोल रहा था की आपकी दूध भैस की थन जैसे लगते है और ....

बुआ - और क्या

पापा - आपका पिछ्वाडा चलने पर गदरायी भैस के जैसे मटकता है इसिलिए

बुआ - हे भगवान तब मै 10वी मे पढ रही थी ,,, और मेरे इतने भी बडे नही थे ये बात बोलते बोलते बुआ मुस्करा दी

पापा - हा दीदी लेकिन बाकियो के मुकाबले बहुत अच्छे थे आपके दूध

बुआ - धत्त पागल,,, ऐसी बाते करता है कोई अपनी बड़ी बहन ,,, और तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे हमेशा मेरे दूध ही निहारा करते थे

पापा को जैसे बात बढाने का नया जरिया मिल गया

पापा - नही जीजी हमेशा नही बस कभी कभी नजर पड़ जाती थी ,,, और आपके दूध उस समय सच मे बडे तो

बुआ - तो क्या

पापा - तो मेरा मन भी होता था कि कभी उनको अच्छे से निहारू ,,, मगर कभी मौका नहीं मिला

बुआ - धत्त भईया ,,, आपको इतने पसंद है क्या मेरे दूध

ये बोल के आंखे निचे कर ली

पापा - जी दीदी ,,, और मै तो हमेशा से सोचता था मेरी शादी आपके जैसी किसी औरत से ही हो

बुआ - हिहिहिही और आखिर आपको आपकी पसंद मिल ही गयी भाभी के रूप मे

पापा - कहा जीजी ,,,

बुआ - क्यू भाभी मेरे से कम है क्या

पापा - हा उसका साइज़ आपके जितना थोडी है

बुआ - धत्त क्या आप भी भईया ऐसा कुछ नही भाभी मेरे से 20 ही पड़ेगी

पापा - नही जीजी मै रोज देखता हू रागिनी को ,, कहो तो शर्त लगा लो हार जाओगी आप

बुआ - देखा है न बस , जैसे मुझे मापा है वैसे थोडी न मापा है भाभी को

एक बार नाप लो देखना आप खुद हार जाओगे

पापा - अगर मै जीत गया तो मुझे क्या मिलेगा

बुआ - जो आप माग लो भईया

पापा - सोच लो जीजी बाद मे पलट मत जाना

बुआ - मै नही पीछे हटून्गी,,, और अगर मै जीती तो राखी पर मन चाहा इनाम लुंगी आपसे हीहीहि

पापा - ठीक है फिर देखते है

बुआ - एक बात और भाभी का माप मै लुंगी पक्का न ,,,नही तो आप शर्त जितने के लिए बेईमानी कर लोगे

पापा- जरुर जरुर जीजी आप ही लेना लेकिन अभी चलिये ऊपर चलते बातो ही बातो मे रात हो गयी हाहाहह

अब देखते आगे क्या होने वाला
 
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