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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

एलीना कुछ बोलती उससे पहले ही पूरी ताक़त से धक्का मार दिया

मेरा पूरा लंड एलीना की चूत में समा गया

एलीना की चीख निकल गयी और वो रोने लगी

मैं एलीना का मुँह अपनी तरफ किया.और उसके होंठ चूसने लगा

साथ ही बूब्स दबाने लगा

पर एलीना नही चाहती थी कि मैं रुकु

मैं अपना आधा लंड एलीना की चूत से बाहर निकाला और फिर अंदर डाल दिया

एलीना एक बार फिर चीख पड़ी

मैं नॉर्मल स्पीड में धक्के मारने लगा

हर धक्के साथ एलीना की चीख निकल जाती

मैं एलीना की चूत में धक्के मारते हुए एलीना की नाइटी उतार दिया

साथ ही एलीना की ब्रा भी

एलीना अब पूरी नंगी थी

मैने एलीना की पीठ चूमते हुए.अपना पूरा लंड एलीना की चूत से बाहर निकालके एक ही बार में पूरा डाल दिया

एलीना एक बार फिर चीख पड़ी

मैं अब तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा

इस पोज़िशन में एलीना की चूत बहुत ज़्यादा टाइट थी

मैं अपनी एलीना की चूत पे अपने लंड से वार किए जा रहा था

और मेरी एलीना चीखे जा रही थी.फिर मैं अपना लंड एलीना की चूत से निकाल लिया.और एलीना को खड़ा करके एलीना के होंठ चूसने लगा.एलीना मेरे लंड को मुठियाने लगी

मैने एलीना को बेड पे लिटा दिया.एलीना की गान्ड बेड के किनारे पे थी

मैं एलीना की चूत में एक बार फिर अपना पूरा लंड पेल दिया

एलीना इस बार नही चीखी

मैं तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा.मुझे तो लग रहा था कि जब तक एलीना झडेगी तब तक मैं ही झड जाउन्गा

एलीना- फक मी बेबी यॅ फक मे अया ऊ यॅ

दिलीप- लगता है आज मुझे निचोड़के रहोगी

एलीना- हां मेरे पति जी और ज़ोर से चोदो अपनी बीवी.और ज़ोर से यस अया उम्म्म्म एसस्स और ज़ोर से मैं झड़ने वाली हूँ

[मैं पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा.एलीना पूरी हिल गया.मेरे धक्के से एलीना का पूरा जिस्म हिल रहा था

मैं एलीना के बूब्स अपने मुँह में भरके चूसने लगा.और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा

कुछ देर बाद एलीना झड़ने लगी

 
एलीना जब पूरी तरह से झड गयी तब मैं अपना लंड एलीना की चूत से निकाल लिया

एलीना निढाल पड़ी लंबी लंबी साँसें ले रही थी

फिर वो बेड पे बैठ गयी और मुझे बेड पे लिटा दी

और मेरे लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी

लेकिन वोही आदत पूरा लंड मुँह में लेने की

मैने एलीना का सर पकड़ा और हल्का धक्का मारने लगा

एलीना मेरे बॉल्स सहला रही थी

फिर एलीना खुद मेरा लंड अपने मुँह से निकाल ली

और मेरे लंड पे अपनी चूत पे रखके बैठने लगी

जब मेरा पूरा लंड एलीना की चूत में चला गया तब एलीना मेरे गले से लग गयी.मैं समझ गया

मैं एलीना की कमर पकड़के धक्के मारने लगा.एलीना मेरे होंठ चूस्ते हुए मेरे लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी

एलीना ही थी जो मेरा ऐसा रूप बर्दाश्त कर सकती थी

कुछ देर बाद एलीना झड़ने लगी

मैने अपना लंड एलीना की चूत से निकाल लिया

एलीना- आज बड़े तगड़े मूड में लग रहे हो

एक काम करो अब बिना रुके मुझे चोदो

दिलीप- ऐसी गंदी बातें करना कहाँ से सीख गयी

एलीना- तुम मेरे पति हो तुमसे कैसी शरम

दिलीप- यह सब दवाई का असर है

एलीना- कैसे पति हो तुम इतना कंट्रोल कैसे कर लेते हो

[मैने एलीना को पेट के बल लिटा दिया

एलीना की चूत अब पूरी टाइट लग रही थी

मैं एक ही धक्के में अपना पूरा लंड डाल दिया

एलीना- यस ऐसे ही चोदो अपनी वाइफ को

[मैं पूरे जोश के साथ धक्के मारने लगा

एलीना की चूत मेरे लंड पे दबाव बना रही थी

मेरे हर धक्के के साथ पूरा बेड हिलता और एलीना की आआह निकल जाती

एलीना- आज अपना रस पिलाओ ना बहुत मन है

[कुछ देर एलीना को चोदने के बाद एलीना एक बार फिर झड़ने लगी

[मैं अपना लंड एलीना की चूत से निकाल लिया

एलीना मुझे धक्का देके लिटा दी.एलीना मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में भरके चूसने लगी

कुछ देर बाद मैं झड़ने लगा.एलीना मेरा सारा रस पी गयी

और धम्म से बेड पे लेट गयी.कुछ देर बाद मैं बाथरूम में गया शवर लिया बाहर आया तो देखा एलीना सो चुकी है.मैं उसके माथे पे किस किया और पहुँचा वँया के रूम में...

 
कुछ देर बाद मैं बाथरूम में गया शवर लिया बाहर आया तो देखा एलीना सो चुकी है.मैं उसके माथे पे किस किया और पहुँचा वँया के रूम में

वँया सोई थी.मैं वँया के पास बैठ गया.और अपना एक हाथ उसके गाल पे रखके सहलाने लगा

कुछ देर वँया का गाल सहलाने के बाद.मैं वँया के दोनो हाथ अपने हाथ में पकड़ा.और धीरे से अपनी तरफ खींचने लगा.वँया किसी छोटी बच्ची की तरह मेरी गोद में सोई हुई थी

दिलीप- अपने दिलीप को माफ़ करदो इतनी देर से आया.मुझे पता है तुम जाग रही हो

अपनी आँखें खोलो ना

मेरी प्यारी वानु प्लीज़ अपनी आँखें खोलो

[वँया धीरे से अपनी आँखें खोली

और मुझे देखने लगी

वँया- मुझसे नाराज़ हो

दिलीप- ऐसा क्यूँ कह रही हो

वँया- तो फिर मुझे छोड़ के क्यूँ चले गये

[मैं अपने दोनो कान पकड़ लिया

दिलीप- माफ़ नही करोगी अपने पति को

वँया- अच्छा माफ़ किया

दिलीप- तो ठीक है अब सो जाओ

[वँया उदास हो के अपनी आँखें बंद कर ली

मैं अपना हाथ वँया की कमर पे रखा.और वँया को गुदगुदी करने लगा

वँया खिलखिलके हंस पड़ी

वँया उठके मेरी गोद में बैठ गयी

[मैं वँया के होंठो पे अपने होन्ट रखके चूसने लगा.पहले तो वँया सेहेम गयी.फिर वो भी मेरा साथ देते हुए.मेरे होंठो को चूसने लगी

मैं वँया की दोनो टाँग को अपनी कमर के दोनो साइड कर लिया

वो अपनी टाँग मेरे कमर में लपेट ली.वँया का किस सब से मीठा होता था.फिर मैं वँया के होंठो से अपने होंठ अलग किए.वँया हाँफने लगी

कुछ देर बाद वँया मेरे सर में अपनी उंगलिया फिराने लगी

दिलीप- कुछ पूछना है

वँया- नही

दिलीप- मुझसे झूठ बोलोगि

पूछो मैं गुस्सा नही करूँगा

वँया- ऐसा कुछ नही है

दिलीप- अपने पति की बात नही मानोगी

[वँया अपना सर झुका ली

वँया- तुम एलीना के साथ ऐसा क्यूँ कर रहे थे

दिलीप- क्या कर रहा था

वँया- भोले मत बनो तुम्हे पता है मैं क्या कह रही हूँ

दिलीप- तुम क्या कह रही हो

देखो मेरी प्यारी वँया

तुम्हे अगर कुछ कहना है मुझसे तो सॉफ सॉफ कहो

[मेरी आँखो में देखते हुए

वँया- तुम एलीना को बेरेहमी से

[और चुप हो गयी

 
[मेरी आँखो में देखते हुए

वँया- तुम एलीना को बेरेहमी से

[और चुप हो गयी

[मैं समझ गया कि वँया मुझे एलीना के साथ देख ली

और मैं एलीना को कैसे प्यार करता हूँ वो भी

वँया- बोलो ना अगर बुरा लगा हो तो बोल दो

[मैं वँया के गाल सहलाते हुए

दिलीप- एलीना को मेरे साथ वैसे प्यार करना पसंद है

वँया- और तुम्हे

दिलीप- मुझे भी है

[मैं जो सोच रहा हूँ वो सच ना हो जाए

वँया- अगर तुम्हे उस तरह से प्यार करना अच्छा लगता है तो मुझे भी वैसे ही प्यार करो

दिलीप- नही कर सकता.और ना ही करूँगा

तुम दोबारा यह मत कहना

वँया- इसका मतलब तुम एलीना से प्यार नही करते

दिलीप- वँया मैं अपनी तीनो बीवी से एक बराबर प्यार करता हूँ

तुम ऐसा बोलके मुझे उकसा नही सकती

वँया- मैं उकसा नही रही हूँ.सच बोल रही हूँ.तुम मुझे वैसे ट्रीट नही कर सकते.जैसे तुम एलीना को करते हो.क्यूंकी तुम मेरे जिस्म से नही मुझसे प्यार करते हो

दिलीप- बस इतना काफ़ी है.इसके आगे तुम कुछ नही बोलोगि.वरना मुझे गुस्सा आजाएगा

[सच मे मुझे गुस्सा आने लगा था

वँया- तुम एलीना से नही उसके जिस्म से प्यार करते हो

दिलीप- वन्याआआआ

[मैं चीख उठा.मुझे पता था कि कोई ना कोई जाग ही गया होगा

वँया डर से काँप रही थी

तभी रूम का गेट खुला और विदू दौड़ते हुए हमारे पास आई

वँया की आँखो में आँसू देखके मुझे बहुत दुख हुआ.और विदू मुझे देखने लगी

विदू- क्या हुआ आप इतने गुस्से में क्यूँ हैं

दिलीप- बाहर और कोई तो नही है

विदू- नही हैं सब सोए हुए हैं

दिलीप- आप भी जागी हुई हैं

विदू- बताइए ना गुस्से में क्यूँ हैं

दिलीप- गेट बंद कर दीजिए

[विदू गेट लॉक करके मेरे पास बैठ गयी

वँया अभी भी मेरी गोद में बैठी हुई थी

दिलीप- आप ने मुझे एलीना को प्यार करते हुए देखा है

विदू- हाँ

दिलीप- क्या मैं एलीना से प्यार करता हूँ

विदू- यह भी कोई पूछने की बात है

दिलीप- तो फिर यह क्यूँ कहती है.मैं एलीना के जिस्म से प्यार करता हूँ

विदू- छोटी है अभी

दिलीप- मुझे परेशान करना इसे अच्छा लगता है

विदू- तो आप इसे एलीना की तरह प्यार कीजिए

[यह लीजिए सोचा था विदू समझदार है

लेकिन मेरी किस्मत ही फूटी है

 
दिलीप- अब आप भी शुरू मत हो जाइए

विदू- वँया का कहना है.आप एलीना की तरह उसे प्यार करे.ताकि उसे यकीन हो जाए.आप एलीना से भी प्यार करते हैं

दिलीप- 1 मिनिट 1 मिनिट 1 मिनिट

मतलब यह आप दोनो की मिली भगत है

साला मेरी बीविया मुझसे भी आगे निकली

विदू- आप ग़लत समझ रहे हैं

दिलीप- नही बिल्कुल सही सोच रहा हूँ.एलीना का रूम साउंडप्रूफ नही.आप दोनो ने आवाज़ सुनी.इस वँया की बच्ची ने आपको यह कहके फुसलाया होगा.कि मुझे ऐसे प्यार करना पसंद है

तो ठीक मैं एलीना जैसे ही प्यार करूँगा

.[दोनो के मन में फूटने लगे]

लेकिन दोनो को एक साथ प्यार करूँगा

दोनो एक साथ- नही

दिलीप- क्यूँ नही.आप दोनो मुझे रोक नही सकती

विदू- हटिए जी आप करिए जिस तरह भी अपनी इस वाली को प्यार.मैं इतनी बेशरम नही हूँ

दिलीप- हाँ तो अपने पति से कैसी शरम

विदू- नही नही नही.मैं ऐसा नही करूँगी

दिलीप- तो फिर जाके सो जाइए

[विदू को तो जैसे इसी बात का इंतेज़ार था.वो उल्टे पावं रूम से निकल गयी

वँया हँसने लगी

दिलीप- तुझे बड़ी हँसी आरहि है.आज तू मेरा रुद्र रूप देखेगी

[वँया बुरी तरह से शरमा गयी

मैने वँया को अपने गले से लगा लिया....

वँया के दोनो हाथ मेरी पीठ पे कसते चले गये

मैं वँया की पीठ सहलाने लगा.पीठ सहलाते हुए वँया की गर्दन पे होंठ रख दिया.वँया की आआह निकल गयी.वँया की गर्दन पे होंठ रखके चूमने लगा.वँया की गर्दन चूमने के बाद मैने वँया को अपने से अलग किया.और उसे गौर से देखने लगा.एक दम गुड़िया जैसी थी मेरी वँया.गुलाबी होंठ बड़ी आँखें.गोलगप्पे जैसे गाल.और छोटी छोटी दो चुचिया.जो अभी बढ़ना शुरू हुई थी.मुझे अपने तरफ इस तरह देखते हुए वँया शरमाने लगी

वँया- ऐसे मत देखो ना

[मैं अपने दोनो हाथ वँया के गाल पे रख दिया

दिलीप- आज तो ऐसे ही देखूँगा.तुम्हे ही शौक था अब भुग्तो

[मैं वँया के गालो को सहलाने लगा था

दिलीप- अच्छा एक काम करो.बस एक बार कह दो.तुम्हे पहली रात जैसा ही प्यार करू

[वँया मुझे देखने लगी

वँया- तुम्हारी बीवी हूँ एक बार आगे बढ़ने के बाद पीछे नही हटूँगी

[वँया यह बात बहुत धीरे से बोली थी.शायद वो डर रही थी

 
दिलीप- अच्छा एक काम करो.बस एक बार कह दो.तुम्हे पहली रात जैसा ही प्यार करू

[वँया मुझे देखने लगी

वँया- तुम्हारी बीवी हूँ एक बार आगे बढ़ने के बाद पीछे नही हटूँगी

[वँया यह बात बहुत धीरे से बोली थी.शायद वो डर रही थी

मैं वँया की टीशर्ट नीचे से पकड़ा.और उपर की तरफ उठाने लगा

जब मेरा हाथ वँया के बूब्स तक पहुँचा.तो वो शरमाते हुए.अपने दोनो हाथ उठा दी

मैं वँया की टीशर्ट उतार दिया.वँया ब्रा नही पहनी थी.मैं अपनी बनियान उतार दिया

मैं वँया को लिटा दिया

और उसकी ट्राउज़र को पकड़के के उतारने लगा.वँया अपनी गान्ड उठा दी.मैं देखा वँया पैंटी भी नही पहनी है

फिर मैं वँया का ट्राउज़र उतार के साइड में फेंक दिया

वँया अब पूरी नंगी हो चुकी थी

मैं भी अपनी पॅंट उतार दिया

और पूरा नंगा हो गया

वँया की नज़र जब मेरे लंड पे गयी तो वो और ज़्यादा शरमा गई

मैं वँया के उपर आ गया

और उसके होंठो पे अपने होन्ट रखके चूसने लगा

वँया भी मेरे होन्ट चूसने लगी

कितने मीठे होंठ थे वँया के

हम दोनो एक दूसरे के होंठो को बड़े प्यार से चूस रहे थे

तभी वँया किस तोड़ दी

वँया- तुम तो कह रहे थे आज तुम्हारा रुद्र रूप देखने को मिलेगा

[वँया के इतना कहते ही मैं वँया के होंठ पूरी जोश के साथ चूसने लगा.वँया पूरी हिल गयी.मैं वँया के होंठो को चूस्ते हुए वँया की नाभि में उंगली डालके घुमाने लगा

मेरे ऐसा करते ही वँया मेरे होंठो को बुरी तरह से चूसने लगी.फिर मैं अपने होंठ अलग किया.और वँया को देखने लगा.वँया भी मुझे देखने लगी.मैं वँया के बूब्स पे अपना मुँह रखके चूसने लगा.वँया के एक बूब्स को चूस्ते हुए दूसरे बूब्स को दबाने लगा वँया आआहए भरने लगी.मैं निपल को अपने अंगूठे में पकड़के खींच लिया.वँया की हल्की चीख निकल गयी.फिर मैं अपनी ज़ुबान उसी निपल पे फिराने लगा.वँया उम्म्म करने लगी

फिर मैं वँया के बूब्स को अपने हाथो में भरा.और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा

दिलीप- वानु

वँया- ह्म

दिलीप- एलीना मेरे साथ पूरी तरह से बेशरम बन जाती है

वँया- पता आआह है

इतनी जल्दी आआह उम्म्म नही कर सकती

 


[फिर मैं कुछ नही बोला.और वँया की दोनो चुचिया दबाते हुए वँया के होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा.कुछ देर बाद वँया मेरा हाथ पे अपना हाथ रख दी.मैं अपने में एक निपल लेके बुरी तरह से चूसने लगा.वँया चीखते हुए झड़ने लगी

फिर मैं वँया की टाँगो को चौड़ा किया.एलीना की चूत पूरी गीली हो चुकी थी.उसकी चूत का रस उसके गान्ड के छेद में जा रहा था.मेरा लंड झटके खाने लगा.वँया अपनी आँखें बंद किए.अपनी साँसें काबू कर रही थी.मैं वँया का हाथ पकड़ा और अपने लंड पे रख दिया.वँया अपनी आँख खोल दी.और अपने हाथ में मेरा लंड महसूस करके काँपने लगी

दिलीप- अब इसे प्यार करो

[वँया मेरे इतना कहते ही उठके बैठ गयी.और मुझे लिटा दी.मेरे लंड को पकड़ अपने हाथो से सहलाने लगी.वँया के कोमल हाथो का स्पर्श पाते ही मेरे लंड की एक एक नसे झटके खाने लगी.वँया आँखें फाडे मेरे लंड को देखती रही

कुछ देर मेरे लंड को सहलाने के बाद वँया मेरे लंड के पास अपना मुँह ले गयी.और अपनी ज़ुबान निकालके मेरे लंड के टोपे पे फिरा दी.मेरी आआह निकल गयी.वँया एक बार मुझे देखी.और वापस अपनी ज़ुबान लंड के टोपे पे फिरा दी.पर इस बार रुकी ना लंड के टोपे को चाटने लगी.मेरे जिस्म में करेंट दौड़ने लगा था.लंड के टोपे को अपनी नुकीली ज़ुबान से चाट ते हुए वँया मेरे बॉल्स को पकड़के दबाने लगी

कुछ देर बाद लंड के टोपे को चाटने के बाद मेरे लंड के सुपाडे को अपने होंठो में भरके धीरे से चूसने लगी.लंड के टोपे को चूस्ते हुए.वँया अपने चेहरे के आगे आए हुए अपने सर के बालो को जब साइड करती तो इतनी क्यूट दिखती बता नही सकता.फिर वँया मेरे लंड की चमड़ी को पीछे करके मेरा लंड अपने मुँह के अंदर लेने लगी.जब मेरा आधा लंड वँया के मुँह में चला गया तब वो मेरे लंड को चूसने लगी.वँया के मुँह में मेरा लंड जाते ही.और ज़्यादा हार्ड होने लगा.वँया बड़ी मुश्किल से मेरे आधे लंड को चूस रही थी.उसके मुँह से उसकी लार टपकते हुए उसकी गले तक आ चुकी थी.फिर वँया मेरे लंड को तेज़ी से चूसने लगा.मेरे मुँह से आआह की बरसात हो रही थी.मेरी आअहे सुनके वँया को इतना जोश चढ़ा की वो मेरा पूरा लंड अपने मुँह में भर ली.और तुरंत निकालके खाँसने लगी.मेरा पूरा लंड वँया की थूक से गीला हो चुका था.फिर मैं बेड से नीचे उतर गया

[वँया अपने मुँह पे हाथ रख दी

आज मेरा लंड काफ़ी हार्ड महसूस हो चुका था...

फिर मैं बेड से नीचे उतर गया

[वँया अपने मुँह पे हाथ रख दी

आज मेरा लंड काफ़ी हार्ड हो चुका था

वँया- यह तो आज बहुत बड़ा दिख रहा

मैं तो

दिलीप- तुम तो आज गयी

[और मैं हँसने लगा

वँया- कहाँ तुम्हारा मासूम चेहरा.और कहाँ यह राक्षस

[वँया इसके आगे कुछ बोलती उससे पहले ही.मैं वँया की टाँग पकड़के अपनी तरफ खींचा.और बेड किनारे ले आया.अब वँया की गान्ड किनारे पे थी.मेरा लंड वँया की चूत को छु रहा था.आज मैं वँया को दिखाउन्गा.अपने पति को उकसाने का क्या अंजाम होता है.लेकिन प्यार से मेरी एंजल है

फिर मैं अपना लंड वँया की चूत पे सेट किया और एक धक्का मारा.मेरे लंड का सुपाडा अंदर चला गया

 


मेरे दोनों पॉंव खोलकर वह मेरे स्तनों को दोनों हाथों से भींचने लगे। उन्होंने अपना लन्ड मेरी फुद्दी की मध्यांक रेखा पर रखा और उसे रगड़ने लगे। मैं अपना आपा खो रही थी और राज के लन्ड का मेरे अंदर प्रवेश का बेसब्री से इन्तेजार कर रही थी। तभी उन्होंने उसे थोड़ा अंदर घुसेड़ा और रुक गये। मैंने अधीर होकर पूछा क्या बात है? तो वह बोले, “मेरी बड़ी इच्छा है की हम भी कभी दूसरों के सामने एक ही कमरे में एक ही पलंग पर सेक्स करें। क्या तुम भी ऐसे ही दूसरों के सामने मुझसे कभी चुदवाओगी?”

मैं उनका लन्ड लेने के लिए तड़प रही थी, पर राज मुझे बस तड़पाए जा रहा था। पर फिर भी मैं अड़ी रही मैंने कहा, “अरे भाई ठीक है, पर किस के सामने? आखिर तुम मुझसे क्या करवाना चाहते हो? क्या तुम ऐसे वैसों के सामने मुझे नंगी करना चाहते हो? और तुम मुझे क्यों तड़पा रहे हो?”

राज ने कहा, “पहले यह वचन दो की हम भी यह फिल्म की तरह एक दूसरे कपल के सामने सेक्स करेंगे न? बोलो हाँ या ना?”

मेरा पति मुझे पागल कर रहा था। एक और वह मेरी फुद्दी की दरार पर अपना लन्ड रगड़ रहा था और मुझे उकसा रहा था, दूसरी और मुझे ऐसी कामुकता भरी बातें सुनाकर और तिलमिला रहा था। मैं पति से चुदवाने को उतावली हो रही थी, पर जल्द बाजी में कोई गलत वचन न दूँ यह चिंता भी थी। क्योंकि मैं जानती थी की एक बार मैंने अगर हाँ कह दिया तो फिर राज वह मुझसे करवाकर ही रहेगा।

राज का मुझ पर ऐसा दबाव देनेसे मैं झल्ला कर बोली, “राज, तुम मुझे क्या समझते हो? क्या मैं कोई ऐसी वैसी औरत हूँ को जो हर किसीके सामने अपनी टांगें खोल दूंगी? मैंने तुम्हे जिस किसी औरत के साथ मौज करनी है तो करने की इजाजत दे रक्खी है। पर मुझे बख्शो और मेरे आगे फिर कभी ऐसी बात मत करना।”

राज की शक्ल रोनी सी हो गयी। वह बड़ा दुखी हो गया था। उन्हें दुखी देख कर मैं भी दुखी हो गयी और राज को देख कर बोली, “डार्लिंग मैं क्या करूँ? दूसरे मर्द के साथ थोड़ी सी छेड़छाड़ या थोड़ी मस्ती चलती है। पर सेक्स? यह तो मैं सोच भी नहीं सकती।

बस मेरा इतना ही कहना था की राज दूसरी और करवट बदल कर सो गए। वह उत्तेजना और उन्माद का माहौल एकदम ख़त्म हो गया और वही पुरानी दुरी हम दोनों के बीच आ खड़ी हो गयी। मैं मन ही मन बड़ी दुखी हो रही थी की मैंने भी कहाँ मेरे पति का मूड खराब कर दिया। उस रात को उन्होंने क्या प्लानिंग की थी की हम देर रात तक चुदाई करेंगे। पर मेरी बात ने जैसे राज के मूड पर ठंडा पानि फेंक दिया।

मेरा मन किया की मैं राज से कहूँ की अगर उसका बहुत मन दुःख हो रहा हो तो मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती हूँ। पर मैं कुछ बोल नहीं पायी और चुपचाप सो गयी।

—–

उस रात मैं सो न सकी। सारी रात मैं राज की बातों के बारेमें ही सोचती रही। राज की बातों की गहराई को समझने की कोशिश करने लगी। पता ही नहीं चला की कब मैं सो गयी और कब सुबह हो गयी। पर मस्तिष्क में तब भी वही बात घूम रही थी।

सारी बात तब शुरू हुई जब राज समीर को दिए हुए वचन के बारे में मुझसे पूछताछ करने लगा। जरूर मेरा पति मुझसे कुछ कहना चाहता था। अचानक सारी बात मेरी समझ में आ गयी। अब मैं एक और एक दो समझ गयी और तब मुझे गुस्सा भी आया, दुःख भी हुआ और मेरे पति की और सहानुभूति भी हुई। मेरा पति मुझे उकसा रहा था ताकि मैं समीर से सेक्स करूँ जिससे मरे पति को रुखसार से सेक्स करने का लाइसेंस मिल जाय।

 
वँया के पैर काँपने लगे थे.फिर मैं अपना लंड वँया की चूत से बाहर निकाला और खुद लेट गया.मेरा लंड झटके खाने लगा था.उपर से झड़ने का नाम नही ले रहा था

दिलीप- आजा मेरी एंजल

[वँया कुछ समझी नही.मैने वँया का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पे बिठाने लगा

जब मेरा पूरा लंड वँया की चूत में समा गया

तब मैं वँया को अपने सीने से लगा.और लगा धक्के मारने.ड्रिलिंग मशीन की तरह मेरा लंड वँया की चूत खोद रहा था.फिर मैं वँया के होन्ट चूस्ते हुए धक्के मारने लगा

वँया के होंठ चूस्ते हुए वँया की चूत मारने में मज़ा ही कुछ और आरहा था.उपर से मेरे हाथ वँया की गान्ड पे थे जिन्हे मैं मसल रहा था.एक बार फिर वँया झड़ने लगी.अब वँया की चूत मेरे लंड जितनी खुल चुकी थी.और मैं बिना रुके वँया को चोद रहा था कुछ देर बाद वँया की चूत में जलन होने लगी वँया को दर्द में देखके मैं अपना लंड वँया की चूत से निकाल लिया

मेरे ऐसा करते ही वँया बेड पे लूड़क गयी

मैं वँया के मुँह के पास अपना लंड ले गया.वँया अपना मुँह खोल दी.और मैं अपना लंड वँया के मुँह में डाल दिया.वँया पूरी तेज़ी से मेरा लंड चूसने लगी.कुछ देर बाद मैने अपना लंड वँया के मुँह से बाहर निकालना चाहा तो वो मेरे हाथ पे चपत मार दी.और वैसे ही मेरा लंड चुस्ती रही.कुछ देर बाद मैं झड़ने लगा मेरा लंड अपना वीर्य वँया के मुँह में थूकने लगा.वँया मेरे रस की एक एक बूँद पी गयी..,

कुछ देर तक मैं वैसे ही बैठा रहा.क्यूंकी अब तक मेरा लंड वँया के मुँह मे ही था.वँया अपनी आँखें बंद किए लंबी लंबी साँसें ले रही थी.उसकी चुचिया उपर नीचे होते देख एक बार फिर मेरा लंड अकड़ने लगा.लेकिन अभी मेरी विदू बाकी थी

मैने वँया के मुँह से अपना लंड निकाला.वँया ने अपनी आँखें खोल दी

फिर मैं बाथरूम में गया.और शवर लेके जब निकला.तो वँया वैसे ही अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी

मैं वँया के पास गया

 
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