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Incest मर्द का बच्चा

लल्लू बेड से उतर कर खड़ा हो गया और ऋतु के सर की ओर आ गया.

लल्लू जब से कुंभ से आया था तब से उस टॅटू के कारण उसका शरीर बहुत गठिला हो गया था.

उसके गोरे शरीर पर काला टॅटू चमक रहा था.

लल्लू अपने धोती को खोल कर अलग कर दिया.

उसका डंडा तो पहले से ही खड़ा था.

लल्लू ऋतु का हाथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया.

ऋतु सासो को संभालती हुई लल्लू एल लौड़े को सहलाने लगी.

फिर अपना मूह खोल कर सर उठा लल्लू एल लौड़े को गुपप से मूह में भर कर चूसने लगी.

ऋतु- उऊहह कितना मज़ा आ रहा है. आज में इस गन्ने का पूरा रस चूस जाउन्गी.

लल्लू आँखे बंद किए ऋतु के मूह के गर्माहट को फील कर रहा था.

ऋतु मूह को आगे पीछे कर लल्लू के गन्ने को चूसे जा रही थी.

थोड़ी देर उसे चूसने के बाद जब ऋतु का.मूह दुखने लगा तो लौड़े को निकाल कर अपने पैर फैला लिए और लल्लू को इशारा करने लगी.

लल्लू भी आँखो के इसरे से पूछने लगा की ऋतु क्या कह रही है.

ऋतु- ऐसे क्यू नाटक कर रहा है जैसे पता ही नही. आ अब अपनी लुगाई की इस रस बहाती निगोडी बुर का भोसड़ा बना दे अपना लॉडा डाल कर. जल्दी आ रे अब नही रहा जाता. पता नही क्या आग लगा दी है तुम ने.

अब तो हर दम यही मन करता है की इस प्यारे से लौड़े को अपने बुर में घुसा कर लेती रहूँ.

लल्लू ऋतु के ऊपर चढ़ गया और उसके दोनो पैर पकड़ कर मोड़ दिया फिर ऋतु के छाती से चिपका दिया.\

ऋतु की चूत के साथ साथ उसके बड़ी सी गान्ड भी हवा में उठ गई.

लल्लू को ऋतु की बड़ी गान्ड पागल बना रहा था.

लल्लू ऋतु की चूत पर अपने लौड़े को पकड़ कर रगड़ने मसलने लगा.

ऋतु आँखे बंद किए अपने होंठो को दाँतों से दबाए आहे भर रही थी.

लल्लू चूत के छेद पर लौड़े को लगा कर ऋतु के गान्ड के नीचे दोनो हाथ लगा कर उसे मसलते हुए एक करारा धक्का लगा दिया.

ऋतु अपने दोनो हाथो से अपने पैर को पकड़े हुए चिल्ला उठी.

ऋतु- हरामी एक बार में ही पूरा घुसा दिया.

आज फाड़ कर ही मानेगा. हाय्यी मेरी चूत.

लल्लू ऋतु के गान्ड को मुट्ठी में कस के दबोचे हुचक हचक कर उसे पेलने लगा.

ऋतु की बड़ी बड़ी चुचिया हर धक्के से ऊपर नीचे हिल रहा था.

लल्लू ऋतु के गान्ड को छोड़ कर उसके मोटे मोटे पपीते को पकड़ लिया और उसे ज़ोर ज़ोर से मसलता हुआ कस कस कर ऋतु के बुर में शॉट लगाने लगा.

लल्लू- आहह, ये ली. यी लीयी उउउहह. क्या गर्मीी हाई. लगता है जैसे पिघल जाउन्गा में इस अंदर.

लल्लू ऋतु के ऊपर चढ़ कर उसे रगड़ने लगा.

ऋतु के दोनो चुचे को मसल कर लाल कर दिया.

लल्लू ऋतु को पकड़ कर पलटा दिया और उसे घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत में अपना लॉडा पेल दिया.

लल्लू कमर हिलाता हुआ चूत मार रहा था और एक उंगली को गीला कर ऋतु के गान्ड पर थूक कर उस में अपना उंगली घुसा दिया.

ऋतु इस दोहरे हमले को नही झेल पाई और आहे भरती हुई झड़ गई.

लल्लू ऋतु के बाल को पकड़ कर उसे चोदने में लगा हुआ था.

लल्लू का लॉडा ऋतु की चूत से पूरा भींग गया था और अब तो लल्लू के लोडा के आस पास उसके कमर और लल्लू के टटटे भी भींग गया था ऋतु की चूत रस से.

लल्लू ऋतु की चूत का धज्जिया उड़ा ता हुआ दो उंगली से उसके गान्ड का छेड़ ढीला करने में लगा हुआ था.

ऋतु जब थोड़ी संभली तो वो कमर हिला कर लल्लू का साथ देने लगी.

लल्लू झट से अपना लॉडा निकाल कर ऋतु के गान्ड के छेद पर लगा दिया अपना उंगली निकाल.

लल्लू ऋतु के गान्ड पर पहले ही थूक थूक कर चिकना कर रखा था उंगली से.

लंड लगते ही लल्लू एक धक्का लगा दिया.

गान्ड का छल्ला फैल कर लल्लू के लंड के टोपे को अपने अंदर फशा लिया.

ऋतु इस अचानक हमले के लिए तैयार नही थी वो आगे को गिर गई.

लल्लू ऋतु के कमर को पकड़े लंड को उसके गान्ड में डाले रुक गया.

थोड़ी देर बाद लल्लू आहिस्ता से लौड़े को गान्ड में धकलने लगा.

ऋतु- अया क्या कर रहाा है. मुआअ आजज्ज तूओ तू माअरर दीईया रीए.

लल्लू हल्के हल्के दबाव बनाता हुआ लॉडा ठेलता रहा गान्ड में.

एक चौथाई लंड घुस गया था.

लल्लू- बहुत टाइट है तेरी गान्ड मेरी घोड़ी.

ऋतु- मुआ हट जा वहाँ से.. बहुट्त्त दर्द्द्द कर रहा है…

लल्लू एक चौथाई लंड से ही ऋतु के गान्ड को चोदने लगा हौले हौले.

लल्लू को लग रहा था जैसे उसके लंड को किसी पाइप में फसा दिया हो.

चारो ओर से उसका लंड किसी सिकंजे में फसा हुआ था.

लल्लू जब लंड बाहर निकालता तो जैसे लग रहा था की ऋतु के गान्ड का छल्ला भी साथ ही खिछा चला आ रहा है.

आगे ऋतु अपने सर को इधर उधर पटकती रही थी.

लल्लू उतने से ही ऋतु के गान्ड को चोदने लगा.

थोड़ी देर में जब गान्ड का छल्ला थोड़ा ढीला हुआ तो लल्लू का लंड थोड़ा और अंदर जा पहुचा.

ऋतु को जो थोड़ा आराम मिला था वो फिर उसे दर्द देने लगा.

ऋतु- मुआ निकाल ले वहाँ से नही तो में मार जाउन्गी..

लल्लू अपने लंड को निकाल कर चूत में घुसा कर ताबड तोड धक्के लगा दिया.

कमरा फॅक फुच्च से गूँज उठा.

लल्लू ताबड तोड बिना रुके उसे चोदे जा रहा था

फिर अचानक उस से लंड निकाल कर इस बार एक बार में ही आधा लंड ऋतु के मखमली गान्ड में उतार दिया.

ऋतु अधमरी हो गई.
 
लल्लू अपने लौड़े को टोपा तक निकाल कर एक बार साँस अंदर खिच घच्छ से पूरा का पूरा ठोक दिया ऋतु की गान्ड में.

ऋतु तकिये में मूह रगड़ती गो गो करने लगी.

दर्द से उसे जैसे लगता था की उसकी गान्ड में किसी ने मिर्च घुसा दिया है.

ऋतु- रोते हुए मररर दियाअ मुुआअ नी. हाय्यी बेदर्द्द्द यी क्या किया. मा क्या कर दिया यी. किसका मुह देख कार मेनी आऐ इसकी पास.

ऋतु बेसूध हो गई.

लल्लू तो डर गया की क्या हुआ.

लल्लू ऐसे ही ऋतु की पीठ को जीभ निकाल कर चाटता हुआ उसके चुचे को सहलाने लगा.

थोड़ी देर बाद ऋतु थोड़ी संभली.

लल्लू अब हल्के हल्के अपना कमर हिलाने लगा.

ऋतु की बड़ी बड़ी बाहर को निकली मटका लल्लू के सब्र की परीक्षा ले रहा था.

लल्लू के मन में काम वासना हिलोरे मार रहा था.

लल्लू गान्ड को हाथो से सहलाता हुआ लंड को हल्के से निकालता और फिर डाल देता.

ऋतु चादर को दोनो हाथो में ज़ोर से पकड़े दाँतों से तकिये को दबाए अपनी पीड़ा को सहने की कोशिश कर रही थी.

लल्लू अब अपना कमर हिलाना थोड़ा तेज कर दिया था.

ऋतु की गान्ड से अजीब आवाज़े निकल रहा था.

लल्लू दोनो हाथो में गान्ड थामे अब अपना पूरा लॉडा निकाल निकाल कर ऋतु की ठुकाई कर रहा था.

अब लल्लू के लिए रुकना मुश्किल हो रहा था. लालू को लग रहा था जैसे उसके खून का प्रवाह उसके बदन में नीचे आ कर लंड से बाहर निकलना चाह रहे हो.

लल्लू का लॉडा अब ऋतु की गान्ड में ही फूलने पिचक ने लगा था.

ऋतु को अब बहुत आनद आ रहा था.

ऋतु की गान्ड का छल्ला भी अब कभी खुल जाती और कभी कस जाती.

लल्लू जैसे हवा में उड़ रहा था.

उसके मूह से मज़े की अधिकता से अजीब अजीब आवाज़े निकल रहा था.

लल्लू अंधाधुंड ऋतु की गान्ड को गुब्बारा बनाए जा रहा था.

लल्लू के मूह से गुर्राहट निकल रहा था.

लल्लू गुर्राता हुआ ऋतु की गान्ड में अपना पानी उडेलने लगा.

ऋतु लल्लू के पानी को अपने गान्ड में फील करती वो भी झरने को तरह अपना छूट रस बहा दी.

लल्लू झड़ कर ऋतु की पीठ पर लुढ़क गया.

ऋतु तो पहले ही निढाल हो रखी थी ऐसे ही अपने गान्ड में लल्लू का लंड लिए उसके नीचे दबे पड़ी रही.

लल्लू का लंड सिकुड कर छोटा होता हुआ बाहर निकल गया.

ऋतु के ऊपर से लुढ़कता हुआ लल्लू इसे अपने आगोश में लिए पीछे से ऋतु से चिपका दोनो सो गये.

सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुल गया.

उठ कर देखा तो ऋतु की गान्ड मूसल से चुदने के कारण फैल गया था और उस पर लल्लू के वीर्य के साथ कुछ खून के धब्बे फैला हुआ था.

लल्लू ऋतु के ऊपर एक चादर डाल कर कपड़ा पहन लिया और दरवाजा खोल कर बाहर आ गया.

बाहर आ कर लल्लू नदी किनारे चला गया.

वहाँ अपने निर्धारित स्थान पर जा बैठा
 
सुबह के करीब 5 बज रहे थे.

हरिद्वार की ' हर की पौडी' में श्रधालुओ के स्नान का ताँता लगा हुआ था. उसी में एक गोरी चित्ति लड़की.लंबे घने भूरे बाल, चौड़ी ललाट उस पर छोटी सी लाल बिंदी, धनुष की तरह तीखे भौहे. उस के नीचे झील सी नीली आँखे. जिस में कोई देख ले तो डूब जाने को जी चाहे.

लंबी सुतवा नाक, पतले रस से भरे कोमल होंठ और फूले हुए कसमीरी सेब की तरह गोरे गाल. उस गाल पर एक तिल जो उस हुश्न की मल्लिक्का के हुश्न को चार चाँद लगा दे रखा था.

वो हुश्न की मल्लिका एक गेरुआ वस्त्र पहने हर की पौडी' पर श्रधालुओ की भीड़ में स्नान कर बाहर आई ही थी कपड़े पहन कर की एक लुच्छे ने बॅग झपट कर भागने की कोशिश की उस बॅग का एक हिस्सा उस चोर के हाथ में और दूसरा लड़की के.

वो लड़की अपने बॅग को पकड़ कर खीची तो चोर उस बॅग के साथ उड़ता हुआ खिच कर सीता गंगा जी में गिरा.

आस पास के सभी लोग देख कर ताली बजाते हुए उस लड़की को शाबासी दे रहे थे.

वो लड़की वहाँ से निकल कर चन्डी देवी मंदिर जो गंगा नदी के पूर्व में नील पर्वत पर स्थित है वहाँ पहुचि

.

वहाँ मा चन्डी की पूजा कर वहाँ से फिर वो लड़की माया देवी मंदिर में पूजा अर्चन करने गई.

वहाँ से निकल कर मा वैष्णो देवी मंदिर चल दी जो हर की पौडी से करीब एक किमी दूर था वहाँ करीतिम तरीके से जम्मू में स्थित मा वैष्णो की मंदिर की तरह ही बनाया गया है.

वैसा ही गुफा बनाने की कोशिश की गई है. मार्ग को भी दुर्गम बनाने की कोशिश की गई है यहाँ.

यहाँ पूजा कर वो लड़की भारत माता मंदिर जा कर वहाँ की भव्य सुंदरता का आनंद लेती वहाँ देवी मा की पूजा की फिर ऑटो पकड़ कर वहाँ से सप्त ऋषि आश्रम जा पहुचि.

वहाँ मा गंगा की सात धारा बटी हुई है जो आगे और कई धारा में बिभाजित हो गई है.
 
वहाँ के शिव मंदिर में प्रभु शिव संकर की पूजा अर्चा कर वो लड़की वही के एक आश्रम में जा कर थोड़ी देर वहाँ आश्रम की सॉफ सफाई की फिर वहाँ से आ गई.

वहाँ से ऑटो पकड़ कर वो कनखल पहुच गई.

जहा वो दक्षेश्वर मंदिर फिर हरिहर मंदिर में जा कर पूजा की.

कनखल में ही एक होटल में वो लड़की एक कमरा ले कर रह रही थी.

वो लड़की वहाँ से पूजा अर्चना कर अपने होटेल चली गई.

कमरे में आ कर खाना का ऑर्डर कर दिया और वॉशरूम में जा कर फ्रेश होने लगी.

जब तक फ्रेश हो कर आई तब तक खाना भी आ गया.

खाना ले कर वो लड़की रूम बंद कर दी और अपने सारे कपड़े खोल कर नंगी हो गई.

जब शरीर थका हुआ था तब वो चलती फिरती कयामत लग रही थी लेकिन कपड़े उतरने के बाद वो तो स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी जो यहाँ हरिद्वार में ग़लती से आ गई.

सब से आकर्षक उसके पीछे कमर पर वो टॅटू था जो उसके पीछे के उभार से जस्ट ऊपर बना हुआ था.

वो लड़की झट से एक जींस पेंट और टीशर्ट निकाल कर पहन ली. फिर खाना खा कर बेड पर लेट गई.

लल्लू सूर्य उदय तक वही नदी किनारे बैठा नदी के जीवों से बात करता रहा फिर फ्रेश हो कर घर को चल दिया.

दालान पर आ कर हाथ पैर धो कर अंदर आ गया.

दालान पर सब बैठे थे.

लल्लू भी वही बैठ गया.

सुनील- कहाँ से आ रही है सवारी

लल्लू- सुबह सुबह थोड़ा बाहर टहलने गया था.

सब काका लोग भैया की शादी की ही बात कर रहे थे की एक महीने की छुट्टी में आया है तो अच्छा है की शादी कर के ही अब भैया को यहाँ से भेजा जाये.

लल्लू फिर वहाँ से उठ कर आँगन आ गया.

लल्लू- कोई चाय दे दो मुझे भी.

काजल- जा रसोई में जा कर काकी से ले लो.

लल्लू चलता हुआ रसोई में पहुच गया.

वहाँ रागिनी काकी खाना बना रही थी.

लल्लू- काकी चाय दे दो थोड़ी सी.

रागिनी- देती हूँ तू बैठ बाहर.

लल्लू फिर बाहर खटिया पर जाने लगा लेकिन वो अपने कदम ऋतु काकी के कमरे की ओर बढ़ा दिया.

ऋतु कमरे में लेटी हुई थी साथ में वहाँ रोमा भी थी.

लल्लू- रोमा दीदी क्या बात है आप भी यही है.

रोमा- हा भाई. मा को बुखार हो गया है. उसे ही दवाई देने आई थी.

लल्लू ऋतु के माथे को च्छू कर देखा.

सच में बुखार था ऋतु को.

लल्लू को बहुत बुरा लग रहा था.

उसे समझ नही आ रहा था की अभी वो अब क्या करे.

तभी बाहर रागिनी लल्लू को आवाज़ दी तो लल्लू बाहर आ गया.

रागिनी चाय ले कर खड़ी थी.

लल्लू आगे बढ़ कर चाय का कप ले कर खटिया पर बैठ गया और सोचने लगा की क्या करे की ऋतु को कुछ आराम मिले.

अभी गाड़ी ले कर कही जा भी नही सकता था सब को जवाब देना मुश्किल था.

सुनील काका को पता था की में गाड़ी चला लेता हूँ लेकिन बाकी को क्या जबाब देगा.

लल्लू चाय पीता यही सोचता रहा.

फिर उठ कर बाहर आ गया.

दालान पर अभी भी सब बैठे थे.

लल्लू सुनील काका के पास जा कर बैठ गया.

लल्लू- काका थोड़ा बाइक की चाभी दीजिए ना. बहुत ज़रूरी काम है.

लल्लू सुनील के कान में फुसफुसा कर बोला.

सुनील लल्लू को देखता हुआ जेब से चाभी निकाल कर दे दिया

लल्लू वहाँ से उठ कर बुलेट ले कर लुढ़कता हुआ बाहर आया रोड पर फिर वहाँ स्टार्ट कर तेज़ी से शहर की ओर चल दिया.

शहर में एक लेडी डॉक्टर का क्लिनिक ढूँढने लगा.

फिर उसे एक क्लिनिक मिल गया.

लल्लू बुलेट खड़ी कर उस क्लिनिक में घुस गया.

लल्लू- डॉक्टर से मिलना है. (बाहर बैठी एक लड़की से लल्लू बोला)

लड़की- नाम बताओ.

लल्लू- लल्लू.

लड़की- लल्लू को देखती है. उम्र ..

लल्लू- 18

लड़की- 500 रुपीज़ जमा करो.

लल्लू जेब से 500 का नोट निकाल कर दे दिया.

लड़की पर्ची बना कर देती डॉक्टर के कॅबिन में भेज दी.

लल्लू अंदर गया तो एक 30-35 साल की महिला डॉक्टर अपने चेयर पर बैठी थी.

डॉक- आओ यहाँ बैठो. वो महिला डॉक्टर लल्लू को अपने आगे के चेयर पर बैठने को बोली.

लल्लू जा कर वहाँ बैठ गया.

डॉक- बताओ क्या परेशानी है.

लल्लू- जल्दी जल्दी में तो आ गया यहाँ लेकिन अब उसे समझ नही आ रहा था की क्या कहे.

लल्लू को चुप देख कर वो डॉक्टर फिर बोली.

डॉक- बताओ क्या हुआ है तुम्हे.

लल्लू- डॉक्टर दरअसल बात ये है की मुझे कुछ नही हुआ है.

डॉक- तो.. किसे क्या हुआ है. मरीज को लाना था ना. या वो आने के लायक नही है तो क्या हुआ है ये तो बताओ.

लल्लू- वो डॉक्टर… कैसे कहूं …

डॉक- बताओगे नही तो मुझे पता कैसे चलेगा. में इलाज कैसे करूँगी.

लल्लू- डॉक्टर बात ये है की रात एक लड़की के साथ. नही लड़की नही औरत के साथ..वो क्या है…..

लल्लू को बड़ा शरम आ रहा था बताने में.

डॉक- देखो तुम बिना झिझक क बताओ क्या बात है. डॉक्टर से कैसा शरम. तुम खुल कर बताओ..
 
लल्लू- डॉक्टर में कल रात एक औरत के साथ सोया था तो उसे अब काफ़ी प्रॉब्लम हो रहा है पीछे. उसका कोई दबाई दे दीजिए प्लीज़ और उसे बुखार भी है.

डॉक्टर - में कुछ समझी ही नही. तुम सोए थे एक औरत के साथ तो क्या हुआ उसमें. इस से क्या हो गया की दवाई चाहिए.

लल्लू- आप डॉक्टर ही हो ना. एक मर्द और औरत सो रहा था और क्या आप समझ जाओ प्लीज़..

उस औरत को पीछे बहुत दर्द है.और बुखार भी है.

डॉक्टर - क्या तुम दोनो सेक्स किया था.

लल्लू- हा वही वही…

डॉक्टर - क्या ये उसका पहली बार था

लल्लू- हा ये उसका पहली बार ही था.

डॉक्टर - तो आगे से किया था ना तुमने..

लल्लू- नही नही डॉक्टर . पीछे पीछे किया था.

डॉक्टर - तो तुम ने उस औरत के साथ अनेल सेक्स किया था राइट ..

लल्लू- हा जो भी है….. आप जल्दी से दवा देदो और उसे बुखार भी है.

फिर डॉक्टर ने लल्लू को कुछ ट्यूब जिसे कैसे लगाना है और कुछ दवाई लिख कर दी और उसे मेडिकल से ले लेने को बोली.

लल्लू- वहाँ से उठ कर मेडिकल से वो दवाई से कर तुरंत घर को चल दिया.

बाहर रोड पर ही गाड़ी बंद कर अंदर लुढ़ काता हुआ ला कर खड़ा कर दिया.

दवाई ले कर लल्लू ऋतु के कमरे में चला गया.

ऋतु गान्ड ऊपर किए बेड पर लेटी हुई थी.

लल्लू जा कर दरवाजा बंद कर दिया.

लल्लू- काकी ये दवाई लाया हूँ में.

ऋतु उसे देख कर अपने पास बुलाई..

लल्लू दवाई ले कर ऋतु के पास बेड पर जा पहुचा.

ऋतु खिच कर एक चमत लल्लू को लगा दी.

ऋतु- साले कमीने ये क्या कर दिया है. तुम्हे पता भी है सब को जबाब देना कितना मुश्किल हो रहा है.

लल्लू सिर झुकाए खड़ा रहा.

ऋतु- किसी को पता चला ना तो हम दोनो को मार कर यही खेत में गाड़ देंगे किसी को पता भी नही चलेगा.

लल्लू- ये दबाई लाया हूँ. ये ट्यूब उस में जहा तक हो सके अंदर लगाना है और ये गोली खाने की.

लल्लू ऋतु को वो दवाई पकड़ा कर वहाँ से बाहर आ गया.

बाहर राघव बैठा हुआ था खटिया पर.

राघव- कहाँ था भाई सुबह से. में कब से तुम्हे ढूँढ रहा हूँ.

लल्लू- भैया वो में सुबह खेत की ओर चला गया था तो वही से आने में लेट हो गया.

राघव- वाहह क्या बात है. तुम काका लोगो के साथ खेती में मदद भी करते हो. गुड ये तो बहुत अच्छी बात है.

दोनो वही बैठे हुए बाते करने लगे.
 
लल्लू- भैया वो में सुबह खेत की ओर चला गया था तो वही से आने में लेट हो गया.

राघव- वाहह क्या बात है. तुम काका लोगो के साथ खेती में मदद भी करते हो. गुड ये तो बहुत अच्छी बात है.

दोनो वही बैठे हुए बाते करने लगे.

गौरी- भैया आप बोले थे सुबह हमारे लिए लाए हुए गिफ्ट दोगे तो दो ना.

सभी बहने गौरी को पकड़ कर लाई थी.

राघव - हँसता हुआ. अरे में तो मज़ाक किया था. में आज यही बाज़ार से ला दूँगा.

सभी बहने एक साथ- क्याअ.. आप हमारे लिए कुछ नही लाए.

राघव- सॅड फेस बनाता हुआ मुन्डी ना में हिला दिया.

सभी बहने सॅड हो गई. सब का मूह लटक गया.

राघव उठ कर हँसता हुआ बोला.

राघव- अरे में मज़ाक कर रहा हूँ. सब खुस हो जाओ. में तुम सब के लिए लाया हूँ.

फिर राघव उठ कर घर से अपना बॅग ले कर आया और उसे खोल कर सब को उसका गिफ्ट्स देने लगा.

सभी बहने बहुत खुस थी.

राघव सब के लिए नये देसी जींस और टॉप लाया था

सब ले ले कर अपने को पहन कर देखने के लिए होड़ लगा लिए.

आँगन में सब इन लड़कियो को देख कर हस रहे थे.

रागिनी- सब घोड़ी जैसे हो गई है लेकिन अकल एक ढेले का नही है किसी में.
 
लल्लू- भैया मेरे लिए क्या लाए हो

राघव- भाई सब के लिए लाया हूँ. तू तो मेरा प्यारा छोटा भाई है तेरे लिए तो में स्पेसल लाया हूँ.

लल्लू- तो दिखा दो ना भैया मेरे लिए क्या लाए हो.

राघव एक जींस पेंट और एक टीशर्ट निकाल कर लल्लू को दिया. फिर एक प्लास्टिक का पॅकेट निकाल कर दिया.

लल्लू वो पॅकेट खोल कर देखा तो उस में एक सनग्लास था.

वाउ मस्त है भैया.

राघव- कुछ और भी है तुम्हारे लिए.

लल्लू- भैया एक एक कर मत निकालो. इतनी ख़ुसी समा नही रहा है. जो भी है एक बार में ही देदो ना.

फिर राघव एक और पॅकेट निकाला.

लल्लू झपट कर उसे खोलने लगा.

रागिनी- अरे आराम से खोल बेटा. किस बात की इतनी जल्दी है.

लल्लू जल्दी से उसका कवर हटा दिया फिर खोला तो एक स्मार्ट फोन था.

लल्लू राघव को गले से लगा लिया.

भैया ये मोबाइल जो लाए हो ना ये सब से बढ़िया काम किए हो.

में आज कल में ही खरीदने वाला था.

राघव- तुम्हे पसंद आया.

लल्लू- आप पसंद की बात कर रहे हो. बहुत पसंद आया.

काजल- चल बढ़िया है अब तुम्हे नया खरीदना नही पड़ेगा.

लल्लू- भैया पहले ही समझ गये थे की उनके भाई के पास मोबाइल नही है तो इसी लिए ले आए.

रोमा- भैया में कैसी लग रही हूँ.

सब उधर देखने लगे.

रोमा भैया का लाया कपड़ा पहन कर आई थी.

लल्लू- तुम तो बो...बहुत खूबसूरत लग रही हो रोमा. मुझे पता ही नही था चुड़ेल भी खूबसूरत होती है.

( बच गया फला बॉम्ब निकल रहा था मूह से. सब मार मार कर मेरा गुब्बारा बना देते)

रोमा- क्या… क्या कहा तुम ने बंदर. में चुड़ेल लगती हूँ.. ठहर अभी ये चुड़ैल बताती है की वो क्या करती है बंदरो के साथ.

रोमा गुस्से में लल्लू की ओर दौड़ी.

लल्लू आँगन से भाग कर दालान पर आ गया.

लल्लू- आ बच गया आज तो. नही तो ये चुड़ैल सच में आज खा जाती.

दालान पर दादू और पापा के साथ साथ तीनो काका भी आज बैठे हुए थे.

राम- बेटा जा आँगन में बोल एक बार और चाय बना दे.

लल्लू जा कर शालिनी काकी को बता दिया चाय के लिए.

लल्लू वहाँ से लड़कियो के कमरे में चल दिया.

दरवाजे पर पहुच कर वो दरवाजा खटकाया.

दरवाजा गौरी ने खोला.

गौरी- भाई तुम्हारे लिए भैया क्या लाए है.

लल्लू- दी मेरे लिए तो भैया ने बहुत कुछ लाए है.

कोमल- क्या सब भाई.

लल्लू- दी मेरे लिए एक जींस पेंट एक टी शर्ट एक सनग्लास और एक मोबाइल भी लाए है.

लल्लू वही सोफे पर बैठता हुआ बोला.

रानी- क्या ये तो चिट्टिंग है. तुम्हारे लिए मोबाइल भी और मेरे लिए सिर्फ़ कपड़े. भैया...भैया…

रानी कमरे से ही चिल्लाति हुई बाहर चली गई.

रोमा पीछे से आ कर लल्लू का गला पकड़ ली.

रोमा- अब बता अब कहा भाग कर जायगा बंदर. अब तो तू गया काम से.

लल्लू- मेरी प्यारी दी. में आप से भाग कर कहा जाउन्गा. में तो खुद आप के पास माफी माँगने आया था. मुझे माफ़ कर दो. में वैसे ही मज़ाक किया था.

रोमा- अच्छा बंदर मज़ाक भी करता है. आज तुम्हे छोड़ूँगी नही.

लल्लू- दी मासूम भाई का गला दबा कर क्या होगा. वैसे भी भैया एक महीने बाद चले जाएँगे तो यही बंदर भाई यहाँ आप सब के साथ रहेगा.

ये क्या कर रही है रोमा. पीछे से सोनम दीदी आ कर रोमा को डाँटती बोली.

रोमा- दी इस बंदर ने मुझे चुड़ैल बोला है.

सोनम- ठीक ही बोला है. काम तो वही कर रही है तुम. वैसे भी तुम कई बार उसे बंदर कह कर छेड लिया है तो अब बदला पूरा हो गया. चल छोड़ भाई को.

रोमा मूह बनाती लल्लू को छोड़ कर अलग हट गई.
 
सोनम- भाई तुम्हे क्या सब मिला है भैया से.

फिर लल्लू सोनम को बता दी की उसे क्या सब मिला है.

सोनम- वाउ भाई तुम्हारे पास भी अब मोबाइल हो गया. चालू किया क्या उसे.

लल्लू- नही दी अभी सिम नही है मेरे पास. अब कभी बाज़ार जाउन्गा तो ले लूँगा.

सोनम- भाई जाना तो मुझे भी बताना. में भी चलूंगी.

लल्लू- दी में तो बुलेट से जाउन्गा.

सोनम- हा तो में भी उस पर चली जाउन्गी. क्यू तू किसी और के साथ जायगा क्या.

लल्लू- नही में तो इस लिए कह रहा था की कल आप डर रही थी ना.

सोनम- भाई मुझे नही पता था ना की तू पहले से जानता था चलना. वैसे भाई ये बता की तू ये सब सीखा कब.

लल्लू- दी ये तो टॉप सीक्रेट है. अभी नही बता सकता. लेकिन प्रोमिस में सब से पहले आप को ही बताउन्गा.

वैसे दी आप अपना ड्रेस पहन कर देखी क्या.

सोनम- नही भाई अभी नही पहनी हूँ.

लल्लू- तो पहन कर दिखाओ ना.

सोनम- प्यार से शरमाती हुई. तुम्हे मुझे उसमें देखना है.

लल्लू- हा दी. में देखना चाहता हूँ की मेरी प्यारी दी कैसी लग रही है उस ड्रेस में.

सोनम- ठीक है तुम दो मिनट यहाँ बैठो में अभी पहन कर आई.

लल्लू वही बैठा रहा तब तक सारी लड़किया भैया के पास शिकायत कर रही थी की उनके लिए मोबाइल क्यू नही लाए और लल्लू के लिए लाए.

थोड़ी देर में सोनम जींस और टॉप पहन कर आ गई.

सोनम- भाई कैसी लग रही हूँ बता.

लल्लू गर्दन घुमा कर सोनम की ओर देखा.

सोनम इस समय किसी कयामत से कम नही लग रही थी.

जींस बिल्कुल उसके बदन से चिपका हुआ था.

सोनम घूम घूम कर लल्लू को दिखा रही थी.

सोनम जैसे ही पीछे घूम कर दिखाई.

लल्लू की साँसे उसके गले में ही अटक गया.

लल्लू- वाउ दी उ आअहह कयामत. काश आप मेरी बहन ना होती.

सोनम चौक कर घूम गई.

सोनम- क्या मतलब में तुम्हारी बहन नही होती तो…

लल्लू- दी अगर आप मेरी बहन नही होती तो में आप से शादी कर लेता.

सोनम शरम से लाल अपनी नज़रे झुकाए.

सोनम - क्या में तुम्हे इतनी सुंदर लगती हूँ.

लल्लू- सुंदर.. आप तो सुंदरता की पराकाष्ठा हो. सुंदरता भी आप को देख कर शरमा जाये.

सोनम- हाय्ी रामम्म… भाई प्लीज़ ऐसे मत बोल. मुझे बहुत शरम आ रहा है.

लल्लू- में सच कह रहा हूँ दीदी. आप से सुंदर में इस दुनिया में किसी को नही देखा और मुझे यकीन है चाँद भी आप को देख कर रस्क करता होगा.

सोनम- ऑश मयी गोद्ड़द्ड. क्या में तुम्हे इतनी पसंद हूँ.

लल्लू- पसंद… आप तो मेरी सासो की डोर हो दीदी. आप मेरे रोम रोम में बसी हो.

सोनम आ कर लल्लू को गले से लगा ली.

सोनम- प्लसस. अब और कुछ मत बोल. मुझे कुछ कुछ होने लगता है.

लल्लू सोनम को अपने बाहों में लिए उसकी पीठ को सहलाता खड़ा था.

लल्लू के हाथ में सोनम के ब्रा का स्त्रेप बार बार च्छू रहा था.

लल्लू और सोनम दोनो के बदन में चिंगारी उठ चुकी थी जिसे बस शोला बनना था.

तभी लड़कियो के आने का आभास हुआ तो सोनम लल्लू की बाहों से निकल कर दूसरे कमरे में भाग गई.

लल्लू अपने हाथो को चूम कर मुस्कुरा ता वहाँ खड़ा रहा.

लल्लू- कहा गई थी मेरे बहनो की टोली.

कोमल- हम भाई के पास गये थे.

लल्लू- किस लिए कोई काम था.

रानी- भाई हमें सिर्फ़ कपड़ा और तुम्हे कपड़े के साथ सनग्लास और मोबाइल भी दिए इस लिए गये थे की हमें भी चाहिए.

लल्लू- फिर क्या हुआ दिए क्या भैया आप लोगो को मोबाइल.

गौरी- नही. लेकिन बोले है कल तक ला देंगे.

लल्लू- वाउ. ये तो बहुत अच्छी बात है.

चलो में तो चला आप लोग बाते करो.

लल्लू वहाँ से निकल के ऋतु के कमरे में चला गया.

वहाँ पहले से ही काजल थी तो लल्लू वहाँ से जल्दी से भाग आया.
 
राघव- भाई चल कही घूम कर आते है.

लल्लू- कहाँ चलना है भैया.

राघव- कही भी ये गाँव ही घूम लेते है.

लल्लू- ठीक है फिर चलो.

लल्लू और राघव आँगन से निकल कर दालान पर आ गये.

दालान से बाहर निकल कर दोनो आगे बढ़ने लगे की लल्लू बोला

भैया कहो तो बुलेट ले लू या पैदल ही चलना है.

राघव- नही अभी पैदल ही चल. बुलेट से फिर कभी चल देंगे.

दोनो वहाँ से निकल कर गाँव के चॉक की ओर चल दिए.

रास्ते में जो भी मिलता लल्लू को राम राम ज़रूर करता चाहे वो लल्लू से बड़ा हो या छोटा.

राघव- क्या बात है भाई. गाँव में इतना रेस्पेक्ट तो काका लोगो का भी नही है जितना तुम्हारा है.
 
लल्लू- ऐसा कुछ नही है भैया. ये सब मुझ से डर कर राम राम कर रहे है. मन में तो गाली ही दे रहे होंगे.

राघव- ऐसा क्यू.

लल्लू- क्योंकि मुझे अगर कही ग़लत होता दिखता है तो फिर चाहे वो कोई भी हो में अपने आप को नही रोक पाता हूँ. उसकी मा बहन एक कर देता हूँ. बस एक ही रह गया है जिसका मुझे मौका ही नही लग रहा है.

राघव- ऐसा क्या रह रहा है. जिस का तुम्हे मौका नही मिल रहा.

लल्लू- यहाँ अपने स्टेट में शराब बॅन है. लेकिन सुनने में आया है की गाँव के पूर्व में नदी किनारे कोई दारू बेच रहा है. में जा रहा था उसी दिन लेकिन उस दिन रात ज़्यादा हो गया था तो मुझे वापस घर जाना पड़ा फिर मौका ही नही मिला अभी उधर जाने का.

राघव- तो अभी उधर ही जाना था ना. इधर क्यू आ गया. चल उसी ओर चलते है. देखे तो सही कौन है वो जो यहाँ सब गाँव वालो में जहर घोल रहा है.

लल्लू- इसी लिए तो पूछा था की बुलेट ले लू तो आप मना कर दिए. अब नेक्स्ट टाइम बुलेट से उधर ही चलेंगे.

राघव- चल ठीक है.

फिर दोनो भाई गाँव घूमते हुए चॉक तक गये.

चॉक पर दोनो थोड़ी देर हंसी मज़ाक करते हुए गाँव वालो के साथ बैठ कर चाय पी और फिर वापस घर को आ गये.

काजल- कहाँ गया था भैया को ले कर.

लल्लू- वो भैया घर पर बैठे बैठे बोर हो रहे थे तो थोड़ा बाहर घूमने गये थे.

काजल- चल बैठ नाश्ता भी नही किया दोनो. आ जा खाना खा ले.

फिर दोनो बैठ कर खाना खाने लगे.

खाना खा कर लल्लू जा कर ऋतु को देखा तो वो सो रही थी.

अब ऋतु को बुखार नही था.

लल्लू वहाँ से आ कर आँगन में बैठ गया.

तभी सोनम के मरे से बाहर निकली.

दोनो की नजरें टकराई. सोनम शरमा कर नज़रे झुका ली.

लल्लू आँगन से उठ कर आ गया.

दादू- बेटा तेरे पापा बोले है ज़रा खेत चला जा. वो सभी बाहर है आज.

लल्लू- दादू तो पहले बताना था ना. में तो कब से खाली ही था. चला जाता हूँ में.

लल्लू बाहर आ कर खेत की ओर चल दिया.

खेत में फसल की कटाई हो रहा था.

काफ़ी सारे मजदूर लगे थे कटाई में.

लल्लू वही के पेड़ केनीचे जा कर बैठ गया.

वहाँ से शाम में सारा फसल बंधवा कर सही से खेत से खलिहान में पहुचावाया.

इस सब में अंधेरा हो गया.

लल्लू के घर आते आते रात हो गया.

आँगन आ कर लल्लू नलका पर हाथ पैर धो कर खाना खाया.

खाना खा कर लल्लू खटिया पर बैठा हुआ था.

फिर सब लॅडीस खाना खाने आ गई.
 
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