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Incest बाप खिलाड़ी बेटी महाखिलाडीन (Completed)

उसने रिया को करवट लेकर लिटाया जिससे उसकी गांड रमेश के सामने आ गई। रिया ने रमेश का इशारा पाकर चूतड़ों को फैलाया। उसने कुछ और तस्वीरें ली।

फिर रिया फर्श पर घुटनों के बल बैठ गयी और दोनों हाथों से अपनी चूचियों को पकड़ कर उसने जीभ बाहर निकाल ली। रमेश खुश होकर फोटो लेता रहा।

रमेश ने फिर बोला- बेटी अपने बालों को हाथों से पकड़ कर ऊपर उठा लो और कैमरे की तरफ देखो. हाँ . थोड़ा सर को झुकाओ। हाँ और चुदासी लाओ चेहरे पर . हहम्म . सही एकदम।
रिया ने वैसे करके पूछा- ठीक है ये?

अब रमेश ने रिया को फर्श पर कुतिया की तरह दोनों हाथों और घुटनों पर आने को कहा.
रमेश- हहम्म वाह . क्या लग रही हो। अपनी पीठ झुकाओ और पीछे चूतड़ को और उठाओ।

अब रिया ने वैसा ही किया. इन सब के दौरान दोनों बहुत उत्तेजना में आ चुके थे। रिया करीब 15 मिनट तक रमेश जैसे बताता गया वैसे पोज़ देती रही। फिर रिया को ये बर्दाश्त के बाहर होने लगा।

रिया ने रमेश से कहा- प्लीज अब ना तड़पाओ, देखो चूत से कितना पानी चू रहा है. अपनी रंडी बेटी को आपने कितनी चुदासी कर दिया है. लंड की प्यास बढ़ती जा रही है डैडी. अगर आपने अब लंड नहीं डाला तो मैं खुद ही उठ कर आपके लौड़े पर बैठ जाऊंगी.

रमेश- अच्छा, आ जा साली कुतिया आ। ये काम अभी पूरा नहीं हुआ है। तुम्हारी और तस्वीरें लेनी है मगर बाद में लेंगे इससे भी मज़ेदार तरीके से। अभी प्यास बुझा ले अपनी चूत में लंड लेकर मेरा।

रिया कुतिया की हालत में थी. उसने रमेश की ओर घूम कर अपने चूतड़ों पर एक कसकर थप्पड़ मारा और बोली- दे दो अपना लौड़ा मेरी चूत में डैडी।

रमेश भी घुटनों पर आकर रिया के चूतड़ों के पीछे आ गया जिससे उसका लण्ड रिया की चूत से टकरा रहा था। रमेश ने अपने लण्ड पर थूका और पूरा मल दिया। फिर उसने रिया की चूत पर थूका, जिसकी जरूरत ही नहीं थी क्योंकि रिया की चूत पहले से ही काफी चिकनी हो चुकी थी।

रिया की चूत का रंग उसके शरीर से गहरा सांवला था. उसकी चूत पर हल्के बाल होने की वजह से वो और भी मस्त लग रही थी. उसकी चूत चमचमा रही थी। रमेश ने उसकी चूत की फांकों को अलग किया तो अंदर से गुलाबी दिखने लगा।

रमेश ने रिया की चूत पर अपने लौड़े का शिश्न छुआ दिया। रिया की सिसकारी निकल गयी। रमेश ने फिर उसे हटा लिया और आगे करके फिर से छुवाया।

रिया पीछे मुड़कर बोली- हटा क्यों लिया?
रमेश हँसकर बोला- दो ही दिन में मेरे लण्ड की आदत लग गयी है, क्या बात है?
रिया- शैतान कहीं के! बेटी को तड़पा रहे हो। अरे पेलो ना डैड!

रमेश- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, डार्लिंग।
लण्ड को धीरे से रमेश अब रिया की चूत में घुसाने लगा. रिया को अपनी चूत में जाता हुआ लंड बड़ा ही आनंददायक अहसास देने लगा. उसके मुंह से लम्बी सी आह्ह निकल गयी- आहहहहहह . डैडी . आपका लण्ड . आह्ह।

लण्ड को रमेश ने अभी आधा ही घुसाया था. उसे अपनी बेटी की चूत में लण्ड घुसाने में स्वर्ग सा आनंद लग रहा था। चूत अंदर से गर्म थी जैसे लण्ड के स्वागत के लिए चूत ने तैयारी कर रखी हो।
 
चूत को लण्ड का पूरा पूरा अहसास हो रहा था. रमेश ने जैसे ही लण्ड को पूरा उतारा तो रिया उन्माद में भर कर सिसकारी- उफ्फ . कितना भरा भरा महसूस हो रहा है आपका लंड डैडी। ये लंड आज थोड़ा बड़ा लग रहा है . आह्ह . लंड का मजा कितना सुखदायी होता है डैडी।

रमेश- लण्ड तो वही है साली रंडी, पर आज जो तुमने मॉडल की तरह जो फोटोज़ खिंचवाई है ना, उससे और कड़क हो गया है ये।
रिया- पता नहीं डैड, जो भी हो लण्ड से मेरी चूत पूरी भर चुकी है.

अब रमेश ने रिया के बालों को गुच्छा बना कर कस कर पकड़ लिया और उसकी चूत में धक्के मारने लगा. रिया भी अपनी कमर से पीछे धक्के लगा रही थी।

रमेश रिया को अभी प्यार से धक्के लगा रहा था। रमेश की नज़र रिया की गांड के छेद पर गयी। उसने रिया से बिना बताए अपनी एक उंगली को उसकी गांड में घुसा दिया।

रमेश- ऊफ़्फ़ . ये गांड कितनी टाइट है!
रिया की आवाज़ में धक्कों की वजह से कंपन थी- मुझे पता था कि तुम फिर से इसकी डिमांड करोगे. आजकल मर्द औरतों की चूत के साथ गांड जरूर चोदते हैं. चुदाई का ये नया स्वरूप आ गया है. चूत के साथ सबको गांड कॉम्पलीमेंट्री चाहिए. तुम भी चोद लेना मगर पहले चूत मारो मेरी।

रिया के कहने पर रमेश अपनी स्पीड बढ़ाता जा रहा था। रिया मस्ती में चुदवा रही थी। इस तरह रमेश रिया की गांड में भी उंगली तेज़ी से कर रहा था। दोनों एक दूसरे को खुश करने में लगे थे।

रमेश ने रिया की गांड से उंगली निकाली और अपनी उंगली को सूंघने लगा। रमेश ने जैसे ही उसे सूँघा मानो पागल हो उठा और खूब ज़ोरों से धक्के मारने लगा। रिया की गांड की खुशबू ने उसको दीवाना कर दिया था.

अब रिया भी बहुत ज्यादा कामुक हो उठी थी क्योंकि बढ़ते धक्के उसकी चूत में और ज्यादा आनंद दे रहे थे. उसकी चूत पर उसका कंट्रोल नहीं रह गया था. उसकी चूत धीरे धीरे रिया को परम सुख की ओर ले जा रही थी.

रमेश के धक्कों से चूत के अंदर का लावा फूटने लगा और रिया चीखते हुए झड़ गयी। रमेश ने महसूस किया कि रिया की चूत जैसे उसके लण्ड को निचोड़ रही हो। उसके लण्ड पर चूत का सारा रस निकल गया, पर रमेश ने किसी तरह लण्ड को झड़ने से रोक ही लिया।

रिया फर्श पर ढेर हो गयी, जैसे उसके शरीर में कुछ बाकी ही ना रहा हो।
 
रमेश भी रिया के ऊपर लेट कर थोड़ी देर शांत होकर लेट गया। वो जानता था कि रिया की गांड मारने में जल्दी करेगा तो ज्यादा देर तक नहीं मार पायेगा।

रिया मुस्कराते हुए लेटी हुई थी। रमेश उसके बालों को सहला रहा था।

कुछ देर तक ऐसे ही लेटने के बाद रमेश उठा और फर्श पर ही बैठ गया। रिया में उठने की हिम्मत ही नहीं थी। रमेश ने उसे उठाया और अपने सीने से लगा लिया। रिया ने आंखें आधी खोलीं और रमेश को देख कर हल्का मुस्कराई।

उसके चेहरे को देख कर रमेश बोला- क्या बात है साली रंडी। थक गई क्या? क्यों साली रंडी की बच्ची . अभी इतनी ही चुदाई में तेरी गांड फट रही है? अभी तो मुझे तेरी गांड की ऐसी चुदाई करनी है कि साली तू जमीन से उठ भी नहीं पायेगी. तेरी गांड में मैं अपना लंड पूरा पेल के रहूंगा और तुझे बताऊंगा कि एक रंडी का क्या काम होता है.

यह कह कर रमेश ने रिया की गांड पर एक लात मारी और रिया गिर गयी.

मगर रमेश ने फिर से रिया को उठाया और उसकी गांड पर दो-तीन थप्पड़ लगाये और बोला- अभी ठीक से अपनी गांड को मेरे लंड के सामने रख दे क्योंकि तेरी गांड मुझे बहुत पसंद है।

रमेश- फ्री के पैसे नहीं दिए मैंने. तेरी गांड मारने के लिए ही पैसे दिए हैं. तुझे जितनी ज्यादा तकलीफ होगी मुझे उतना ही ज्यादा मज़ा आएगा।
ये कह कर रमेश ने रिया की गांड में थूक दिया और अपनी दो उंगलियों से रिया की गांड के छेद को ढीला करने लगा.

जब रिया की गांड कुछ खुल गई तो तब रमेश ने अपने मोटे लंड को रिया की गांड में एकदम से पेल दिया. रिया एकदम से जोर से चिल्लाई और नीचे गिर गयी. मगर रमेश को कोई फर्क नहीं पड़ा.

उसने दो-तीन थप्पड़ रिया की गांड पर लगाये जिससे रिया फिर उठ गयी. फिर रमेश ने दोबारा से उसकी गांड चुदाई शुरू कर दी. वो इतनी बेदर्दी से उसकी गांड को चोदने लगा जैसे कि वो उसकी बेटी ना होकर कोई सचमुच की रंडी हो.

रिया को समझ में नहीं आया कि उसका बाप इतना जालिम कैसे हो सकता है? वह दर्द को बर्दाश्त करने लगी.

कुछ ही देर की चुदाई के बाद रिया को थोड़ा मजा आने लगा. वह गांड को पीछे धकेल धकेल कर अपनी गांड मरवाने लगी. रिया को गर्म देखकर रमेश ने रिया की गांड पर थप्पड़ों की बरसात कर दी.

लगातार थप्पड़ लगने से रिया की गांड पूरी लाल हो गयी. रमेश पूरे जोर जोर से रिया को चोदने में लगा हुआ था. 1 घंटे तक रिया की गांड मारने के बाद रमेश ने अपना पूरा माल रिया की गांड में गिरा दिया.

रमेश ने रिया को कुतिया ही बने रहने के लिए बोला. इससे रिया की गांड से रमेश के लंड का वीर्य धीरे धीरे बहता हुआ नीचे आने लगा और बाहर गिरने लगा. रमेश ने रिया को नीचे गिरा हुआ वीर्य चाटने के लिए कहा.

रिया ने वीर्य को चाटने से मना कर दिया लेकिन रमेश ने फिर उसे दो थप्पड़ लगा दिये. रिया फिर अपनी जीभ लगा कर अपनी ही गांड से निकले वीर्य को चाटने लगी.

इस सीन को देख कर रमेश उसकी वीडियो बनाने लगा.
वो बोला- वाह . साली। तेरी जैसी दो टके की रंडी कहीं नहीं मिलेगी जो अपनी ही गांड से निकले हुए वीर्य को फर्श पर से चाट ले. मुझे पूरा विश्वास है कि देश में तेरे जितनी बड़ी रंडी शायद कोई नहीं होगी. चल अब मेरे लंड पर लगे हुए माल को भी चाट जा। चल . चाट साली कुतिया।

रिया ने कुतिया बनकर अपने डैड के लंड पर लगे माल को किसी पालतू जानवर की तरह अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ कर दिया. रमेश उठकर कुतिया बनी रिया की गांड देखने लगा.

रमेश- वाह . साली रंडी। तेरी गांड कितनी खूबसूरत लग रही है। चुदकर पूरी खुल गयी है। अंदर का गुलाबी हिस्सा अब बाहर से भी दिख रहा है। दस मिनट में ही मेरे लण्ड ने इसकी खूब खबर ले ली।
उसने उसकी गांड में उंगली घुसाते हुए कहा।

रिया- मेरी इस चुदी हुई गांड की एक फोटो ले लो डैडी, अच्छा रहेगा.
रमेश- हां. सही कहा.
रमेश ने फौरन कैमरे से रिया की गांड की तस्वीर ले ली। उसने रिया को गांड फैलाने के लिए कहा.

रिया गांड फैला कर लेट गयी. रमेश ने कभी करवट लेते हुए उसकी फोटो निकाली तो कभी पेट के बल लेटा कर उसकी नंगी गांड को कैमरे में कैद किया.
काफी फोटो लेने के बाद वो बोला- चल मेरी रंडी बेटी, अब मेरे लिये खाना लगा दे.

वो उठी और डैड का हुक्म मानते हुए तैयारी करने लगी.
 
गांड चुदाई के लम्बे दौर के बाद रमेश और रिया दोनों थक कर लेट गये थे.
रमेश- खाना खाकर कुछ देर रेस्ट कर लेते हैं. फिर तेरी गांड मारूँगा साली रंडी।

दो घंटे रेस्ट करने के बाद रमेश फिर से रिया के पास आ गया जो बेड पर थक कर सो रही थी।
कुछ देर उसकी रसीली गांड और चूत का स्वाद लेने के बाद रमेश का लण्ड पत्थर की तरह कड़क हो चला था जिसे अब रिया की गांड ही अपने अंदर लेकर मोम सा पिघला सकती थी।

रमेश ने रिया के चूतड़ों पर एक तमाचा मारा और बोला- उठ साली रंडी की बच्ची! छिनाल कुतिया, चल घोड़ी बन जा।
रिया- हां-हां जरूर डैड . उफ़्फ़फ़ . ये एक नया ही अहसास था। क्या मस्त मज़ा मिला आज। आज इस लण्ड को मैं अपनी गांड की पूरी गहराई का अहसास कराऊंगी.

वो बोला- पहले कुतिया बनकर चूस इसे। अपने थूक से नहला दे इसे साली कुतिया। तेरी गांड तो पहले से ही गीली है।
रिया झुककर कुतिया बन गयी और अपने बाल संवारते हुए लण्ड को अपने प्यासे मुंह में गले तक ले गयी।

वो लण्ड चूसने की उस्ताद थी। पापा का लंड उसे वाकई बहुत कड़क लग रहा था। उसने अपनी जुबान का भरपूर उपयोग किया। रमेश के आण्डों को सहलाते हुए वो उसका लंड मस्ती में चूसने में पूरी मग्न थी.

रमेश ने अपने एक पैर को रिया की पीठ पर रखा हुआ था और रिया के बाल सहलाते हुए उसको खूब गालियाँ दे रहा था- मादरचोद, मां की लौड़ी, भोसड़ीवाली, चुदक्कड़ रांड .
और भी कई अलंकारों से रमेश ने उसको नवाज़ा।

रिया गालियां सुनकर और ज्यादा जोश में आ रही थी और लंड चूसने की उसकी गति बढ़ती जा रही थी.

थोड़ी देर के बाद रमेश ने रिया के मुंह से लण्ड निकाल लिया।

फिर रिया उसी तरह घोड़ी बनी हुई थी. वो रमेश की ओर बेसब्री और कामुक अंदाज़ से उसको पीछे आते देख रही थी।
वो बोली- डैड, इस रंडी की गांड मारने के लिए तेल लगा लो! नहीं तो दुखेगा।

रमेश- तेरी गांड पहले से ही खुली हुई है साली रंडी. तेरी गांड को गीला करने के लिए थूक ही काफी है.
उसने काफी सारा थूक रिया की गांड पर लगा दिया. रिया भी थूक को अपनी गांड पर फैलाने लगी.

फिर रमेश ने रिया की गांड के छेद पर लण्ड टिकाया और पहले खूब रगड़ा लण्ड को उसके भूरे सिकुड़े हुए गांड के छेद पर। रिया को ये अहसास हुआ और उसे पता लग गया कि उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा लण्ड फिर से उसकी गांड में घुसने वाला है।

वो वासना से ओत प्रोत थी। रमेश ने रिया के बालों को कसकर पकड़ा और लण्ड को दूसरे हाथ से गांड में घुसाने लगा। लण्ड धीरे से गाँड की छेद की परिमिति को बढ़ाते हुए गाँड में प्रवेश करने लगा।
 
रमेश धीरे से लण्ड घुसा रहा था मगर रिया की चीख अभी एक तिहाई सुपारा घुसने के समय ही निकलने लगी। रमेश डर गया और रुक गया. तब रिया पीछे मुडी और हंसते हुए बोली- अरे, डैड मजाक किया था, डालो ना।

इस पर रमेश ने उसके बालों को कसकर खींचा और बोला- साली देख अब तू, कैसे तेरी गाँड का गड्ढा बनाता हूं मैं. इतना चोदूंगा कि अपनी माँ को याद करोगी।

उसने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लण्ड एक साथ रिया की कसी हुई गाँड में उतर गया।

रिया ने हालांकि गाँड बहुत मरवाई थी, मगर इतना मोटा तगड़ा लौड़ा ले रही थी इसलिए उसकी चीख निकल गयी। वो लगभग रोते हुए बोली- डैड आराम से तो पेलते, कहीं गांड फट जाती तो?

रमेश- तुमको अब पता चला ना कि कैसा लगता है गाँड में लण्ड घुसता है तो। अब तो घुस गया. थोड़ी देर में गाँड उसको जगह दे देगी और तुमको मज़ा आएगा।

रिया- अरे डैड, मैं अपना सब तुमको दे चुकी हूं और साथ में मज़ा लूटना है ना! आआहह . थोड़ी देर बस लण्ड को गाँड में स्थिर रखो फिर खूब चोदना। तुमने तो लंड ऐसे घुसाया कि लंड को गांड से डाल कर मुंह से निकाल दोगे!

रमेश- ठीक है साली रंडी, मगर तूने ही मुझे उकसाया था. तेरे मस्त चूतड़ और तेरी गांड के उभरे हुए छेद को देख कर मुझसे रहा नहीं गया.
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद रिया ने कहा- हाँ अब लगता है कि गाँड अभ्यस्त हो गयी है। अब चोदो अपनी रंडी बेटी की गाँड को जितना जी चाहे। अब मज़ा आएगा डैडी।

ये सुन कर रमेश ने रिया की गाँड के छेद, जिसमें उसका लण्ड ऐसे फंसा था जैसे गूँथे हुए आटे में किसी ने लकड़ी गाड़ दी हो, पर थूक दिया। गाँड के छेद के किनारे गहरे भूरे रंग के थे।

रमेश ने अपनी उंगली से थूक को छेद के चारों ओर पोत दिया। फिर उसने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. लण्ड को वो बमुश्किल आधा इंच ही अंदर बाहर कर रहा था।

धीरे धीरे उसने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। उसे अपने लण्ड पर गाँड का कसाव मूंग के हलवे की तरह लग रहा था। लण्ड का अहसास रिया को भी बहुत आनन्ददायक लग रहा था।

गाँड के अंदर जो नर्व एन्डिंग्स होती हैं वहां पर रिया को लंड का घर्षण बहुत मजा दे रहा था. इसलिए गाँड की चुदाई का मज़ा डबल हो रहा था। रमेश गाँड मारने में मस्त था तो रिया गाँड मरवाने में मस्त थी।

धीरे धीरे उनकी मस्ती अब आक्रामक कामुक जोश में बदलने लगी। रमेश अब आधे से भी ज़्यादा लण्ड अंदर बाहर कर रहा था। रिया भी अपनी गाँड पीछे करके लण्ड लेने में कोई कोताही नहीं बरत रही थी। रमेश एक हाथ से रिया के बाल खींच रहा था और दूसरे हाथ से उसके चर्बीदार चूतड़ों को मसल रहा था।

अब पूरी तेज़ी से गाँड की चुदाई चल रही थी। रिया की गाँड से कुछ ग्रीज़ की तरह तरल पदार्थ रिसने लगा और रमेश के लण्ड पर चिपकने लगा। रमेश ने ये देखा तो उसने सोचा कि क्यों न रिया की गांड के इस लसलसे पदार्थ को रिया से ही चटवाया जाये!
 
रमेश ने ये सोचकर कमर की हरकत रोक दी। फिर दोनों चूतड़ों को फैलाकर अपने लण्ड को धीरे धीरे बाहर निकाला। रिया की गांड का छेद रमेश के लंड की गोलाई के जितना चौड़ा हो गया था. लंड पर पूरा चिपचिपा पदार्थ लगा हुआ था.

रिया की गांड का अंदर का गुलाबी हिस्सा साफ साफ दिख रहा था. लंड बाहर निकला तो रिया की सांसों के साथ ही उसकी गांड के अंदर का हिस्सा भी ऊपर नीचे हो रहा था. रमेश ने गांड के अंदर ही थूक दिया। वो ये दृश्य देखकर जैसे मदहोश हो रहा था.

तभी रिया ने टोका- क्या हुआ डैड? क्यों निकाल लिया लण्ड बाहर?
रमेश ने उसकी ओर मुस्कुरा कर देखा और बोला- इधर आ साली कुतिया और चूस इस लण्ड पर लगे अपनी गांड के रस को.

रिया पीछे घूम गयी और उसने लण्ड को जड़ से पकड़ लिया. फिर रमेश की आंखों में देखते हुए अपनी जीभ बाहर निकाली और लण्ड के निचले हिस्से को चाटने लगी। फिर सुपारे पर चूसने लगी और फिर लंड के दायें बायें और फिर ऊपरी हिस्से पर अपनी जुबान फिराने लगी.

रमेश उसके बालों को संवारते हुए उसकी ओर प्यार से देख रहा था। रिया ने उसकी ओर देखा और कहा- मेरी गांड तो बहुत मीठी है डैड.
रमेश- क्यों ना होगी? तुम हो ही स्वीट, अब पता चला कि हम मर्द लोग गांड को क्यों चाटते हैं?

रिया के मुंह मे लण्ड था, मगर फिर भी उसकी हंसी रुक नहीं पाई।
वो बोली- अब रोज़ चटवाऊंगी और चाटूंगी लंड से चुदवाने के बाद। डैड, ये एक नई चीज पता चली मुझे आज।

फिर रमेश ने लण्ड को छुड़ा लिया और बोला- अभी पहले तुम्हारी गांड की चुदाई अधूरी है। तुम अपनी चूत को मसलती रहना, तब तुमको और मज़ा आएगा।

रमेश ने रिया को पीठ के बल अपने सामने लिटा दिया। उसके बाल बिखरे हुए थे। होंठों पर लण्ड चूसने के बाद चमक थी। आंखों में कामुकता की प्यास थी। चूचियां तनकर पहाड़ सी लग रही थीं। रमेश ने उसकी गांड़ के नीचे तकिया लगा दिया और फिर उसकी गांड में लण्ड घुसा दिया।

रिया अपनी चूत मसलने लगी और रमेश ने उसकी दोनों चूचियों को अपने पंजों की गिरफ्त में ले लिया। अब फिर से घमासान चुदाई शुरू होने वाली थी।
रमेश ने अब रिया की गांड फिर से मारनी शुरू कर दी।

अब रिया की गाँड भी ढीली हो चुकी थी। अब लण्ड के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं थी। वो गांड मरवाते हुए अपनी चूत के दाने को छेड़ रही थी। रमेश ने उसकी चूत पर थूक दिया तो रिया उसे पूरी चूत पर मलने लगी।

रिया- आआहह डैड . ऐसे ही! आआहह . उफ़्फ़फ़ . चोदो इस्स! लण्ड चाहे चूत में घुसे या गाँड में, लण्ड को पाने के बाद लड़की मस्त हो ही जाती है।

रमेश- बेटी, देखो ना तुम्हारी गाँड कैसे लण्ड को अपने अंदर समा रही है। जैसे यह मेरे लण्ड का स्वागत कर रही है और कह रही है कि आओ और मुझे जरा और ज्यादा फैला दो।
 
रिया- लड़कियों की गाँड चुदने के लिए ही बनी है डैड, ये बात समझ लो। तो फिर क्यों ना स्वागत करे वो। उस पर इतना मस्त लौड़ा . आआहह हह्ह। चोदो अपनी रंडी बेटी की गाँड को और अपने लण्ड की मोहर लगा दो. उफ़्फ़फ़ . मुझे पेशाब भी लग रहा है।

रमेश- तुम फिक्र मत करो बेटी. थोड़ी देर रुक जाओ. तुम्हारी तबियत से गांड मरवाई होगी. कोई कमी नहीं रहने दूंगा। अपनी रंडी की हर ख्वाइश पूरी करेंगे। तेरी गाँड ने पहले से ही लण्ड को जकड़ रखा है, जैसे उसे अंदर खींच रही है. उफ़्फ़फ़ . आह . ओह्ह . साली रांड।

रिया- मुठ गिरने वाला है क्या डैड?
रमेश- हाँ, पियोगी? आह्हह .
रिया- अंदर ही गिरा दो डैड! मेरा भी होने वाला है।
रमेश- ठीक है, ये ले रंडी।

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद रमेश ने मुठ अपनी रंडी बेटी की गाँड में निकाल दिया। करीब 5-7 पिचकारी मारते हुए रमेश चीखता हुआ रिया की चूचियों पर सर रखकर लेट गया।

उधर चूत के मसलने और गाँड में मुठ की धाराओं को महसूस करके रिया भी झड़ गयी और दोनों उसी तरह लेटे रहे। थोड़ी देर बाद रमेश का लण्ड धीरे से निकलने लगा तो रिया ने अपनी गाँड में पास पड़ी अपनी पैंटी घुसा ली और फिर अपने डैड को गले से चिपका लिया।

रमेश जैसे बेहोश था। दोनों गांड मरवाई से थक चुके थे।

कुछ देर बाद:

रमेश- अब तेरा सूसू नहीं आ रहा क्या साली रंडी? गाण्ड मारने के वक्त तो बहुत चिल्ला रही थी तू?
रिया- डैड उस वक्त आया था. अब नहीं आ रहा है।

रमेश- जा अब कर ले. नहीं तो फिर से लौड़ा चूत के अन्दर जाएगा तो दोबारा बोलोगी. तब तक मैं थोड़ा रेस्ट कर लूँ।
रिया- हाँ डैड, सही कहा आपने. चुदाई के वक्त फिर से आ गया तो हमारा मज़ा खराब हो जाएगा।

रिया जब उठी तो उसको गाण्ड में दर्द महसूस हुआ. वो जब चलने लगी तो दर्द की वजह से उसकी चाल बदल गई. वो कूल्हे उठा कर चल रही थी। रिया गाण्ड को मटकाती हुई सीधी बाथरूम की तरफ़ चली गई।

रमेश आराम से लेटा हुआ था.
तभी उसके दिमाग़ में कोई बात आई और वो उठकर सीधा बाथरूम की तरफ़ भागा तो देखा रिया पेशाब करने बैठी ही थी.
रमेश को देख कर खड़ी हो गई और चौंकती हुई बोली- ओह्ह . डैड ये क्या है! मैं तो डर गई. आप ऐसे अचानक आ गए?

वो बोला- अच्छा हुआ साली रंडी तूने सूसू नहीं किया. मेरा भी सूसू आया है. चल दोनों साथ में करेंगे. मज़ा आएगा.
रिया- हा हा हा . कुछ भी बोलते हो डैड। सूसू साथ में करने में क्या मज़ा?

रमेश- तू देख तो सही रंडी कि मैं क्या करता हूँ? मज़ा ना आए तो कहना!
रिया- जो करना है जल्दी करो डैड. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा. बड़ी ज़ोर का सूसू आया है।

फिर रमेश नीचे बैठ गया और रिया को करीब खींच कर अपनी जाँघों पर बिठा कर उसके मम्मों को चूसने लगा। उसका लौड़ा एकदम कड़क हो गया. उसने रिया की चूत पर लौड़ा टिका दिया और हल्का सा अन्दर पेल दिया।
 
रिया सिसकारते हुए बोली- आह्ह . डैड क्या कर रहे हो . पहले सूसू तो करने दो . आप बाद में आराम से चोद लेना।
रमेश- मेरी जान . मैं चोद नहीं रहा हूँ. अब तू ज़ोर लगा के सूसू कर. देख कितना मज़ा आता है!

रमेश की बात को रिया समझ गई. वो मुस्कराने लगी और अपने डैड के गले में हाथ डालकर उसने एक किस कर दिया।
रमेश- अब सूसू करो. मैं धीरे-धीरे तुम्हारी चूत में लौड़ा डालूँगा. बहुत मज़ा आएगा।

रिया ने सूसू करना शुरू कर दिया. उसकी चूत से सीटी की आवाज़ निकलने लगी. उसकी गर्म-गर्म सूसू रमेश की जाँघों पर लगी तो उसको बहुत मज़ा आया और उसी पल रमेश ने भी सूसू की धार रिया की चूत में मार दी।

इससे रिया एकदम से चिहुँक सी गई. उसको चूत में अजीब सा अहसास होने लगा। कुछ देर तक दोनों सूसू करते रहे। कितना आनंद आ रहा था। जब दोनों सूसू कर चुके तो एक-दूसरे को देख कर हँसने लगे।

रिया- हा हा हा डैड, आपकी सूसू कितनी गर्म थी. मेरी चूत की सिकाई हो गई. थोड़ा सा गाण्ड में भी कर देते तो मज़ा आ जाता।
रमेश- तेरी चूत से कौन सी कोल्ड ड्रिंक बाहर आई है साली कुतिया? वो भी गर्म ही थी और तेरी गाण्ड में सूसू करने वाली इच्छा भी दोबारा मैं पूरी कर दूँगा।

वो बोली- डैड आपकी पूरी जाँघें और पेट सूसू से सन गया है. पहले नहा लेते हैं. उसके बाद बेडरूम में जाएँगे, नहीं तो पूरा बिस्तर खराब हो जाएगा और बदबू भी आएगी.

रमेश- ठीक है मेरी जान. लेकिन ऐसा मत कहो कि बदबू आएगी. ये तो अमृत है. मेरा तो दिल करता है कि तेरी चूत से निकला इसका एक-एक कतरा पी जाऊँ।

रिया- छी: छी: कितने गंदे हो डैड. सूसू पीने की बात कर रहे हो!
रमेश- अरे मजाक कर रहा हूँ साली रंडी।
फिर दोनों फ्रेश होकर बाहर आ गए।
 
अगले दिन सुबह दोनों फ्रेश हो गए. तब रमेश ने रिया को पूरी तरह से नंगी होकर डांस करने को कहा।
रमेश ने म्यूजिक ऑन किया और एक बेहद सेक्सी गाना
एक तो कम ज़िन्दगानी
कमरे में बजने लगा।

रिया उस गाने की बीट पकड़ कर नाचने लगी। रिया को अपनी माँ से नाचने की कला विरासत में मिली थी। अब तो रमेश का बुरा हाल होने लगा।

इस गाने पर नाचते हुए रिया बेहद कामुक मूव्स कर रही थी जो कि उस भद्दे गाने की बोल से मिल रहे थे- जैसे अपने चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से हिलाना। चूचियों को उठा उठा कर हिलाना। होंठों को रगड़ना, आंखे मारना, अपनी चूत को वो इस सब के दौरान छुपाए हुए थी।

रमेश खुश भी था और हैरान भी अपनी रंडी बेटी का ये रूप देखकर।

थोड़ी देर बाद गाना बंद हो गया और रमेश ने ताली बजाई। रिया ने हंसकर हाथ के इशारे से धन्यवाद किया।

फिर रमेश उसके पास आ गया और दूसरा गाना लगाया
भीगे होंठ तेरे . प्यासा दिल मेरा
इमरान हाशमी और मल्लिका वाला।

दोनों ही उस धुन पर नंगे होकर नाचने लगे। इस दौरान रमेश और रिया ने एक दूसरे को कितनी बार चूमा, सहलाया उसका कोई हिसाब नहीं था। दोनों बिल्कुल एक दूसरे में मग्न हो गए थे।

जब गाना खत्म हुआ तो रिया रमेश की कमर के आसपास कैंची बनाकर उसकी गोद में चढ़ी हुई थी। रिया को ऐसे ही उठाकर रमेश अब कमरे की ओर बढ़ चला। दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कराते हुए हांफ रहे थे।

रमेश रिया को कमरे में ले आया तो रिया ने रमेश से कहा- डैड आज का दिन यादगार बनाना होगा। तुम्हारे लण्ड की कसम, आज पूरा दिन चुदवाऊंगी. इसलिए आज हम तुम दोनों ही सेक्स की दवा खा लेते हैं।

रमेश- कहाँ रखे हुए हो जान सेक्स की दवा?
रिया- वहां रैक पर रखी है। आज के दिन की तैयारी है।
पहले उसने रिया को बिस्तर पर रखा. फिर वियाग्रा लाया. दोनों ने एक एक गोली खा ली.

फिर रमेश को देख रिया बोली- ये देखो डैड, तुमको ये देखकर अच्छा लगेगा।
रमेश- क्या?
रिया ने अपनी चूत फैला कर दिखा दी.

रमेश- साली रंडी, आज दिनभर तुमको खूब चोदूंगा. तू टेंशन मत ले।
रिया- जैसे मन करे वैसे चोदो डैड। मैं तुम्हारी दासी हूं.
रमेश- ठीक है, बेड से उतर और कुतिया बन जा फिर।

रिया ने वैसे ही किया। वो कुतिया की तरह चौपाया हो गयी। फिर रमेश उसके बालों को पकड़कर उसको अपने कमरे में ले गया और रिया के गले में कुतिया वाला पट्टा पहना दिया जिसमें चेन भी लगी हुई थी ।

फिर वह रिया को किसी कुतिया की तरह खींचते हुए उसके कमरे में ले गया।
उसने पूछा- लिपस्टिक कहां है तुम्हारी?
रिया- वो वहां दराज़ में है।

इतना कहना था कि रमेश ने एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया और बोला- कुतिया बोलती नहीं सिर्फ भौंकती है. जीभ बाहर लटकाती है। इशारों से बात कर हरामज़ादी कुत्ती कमीनी, तेरी मां को चोदूं भोसड़ीवाली, कुतिया की पिल्ली।

रिया का चेहरा लाल हो उठा। मगर उसे समझ आ गया था कि रमेश शायद आज कोई नरमी नहीं बरतेगा। कहीं ना कहीं वो भी रमेश के हाथों जलील होना पसंद करती थी।

रिया- भौं-भौं . भौं-भौं . ठीक है?
रमेश- हां ये हुई ना बात, कुतिया साली।
रमेश ने लिपस्टिक निकाला और रिया के माथे पर हिंदी में लिखा- रंडी।
 
रमेश ने उसके सामने फर्श पर थूका और रिया से बोला- चाट ले इसे। रिया एक पालतू कुतिया की तरह लपलपाती जीभ से बिना एक पल हिचके थूक चाट गयी।
रमेश- और चाटेगी?

रिया- भौं-भौं वुफ.. (जरूर जरूर, हां)।
रमेश ने उसके खुले मुंह में थूक दिया।
रिया उसे अमृत समझ कर निगल गयी।

रमेश- रिया माई बिच, हमारा फोन ले आओ।

आदेश पर रिया सुरेश का फोन अपने मुँह में उठा लाई. रिया की गांड को सहलाते हुए रमेश ने उससे फोन ले लिया. फिर रमेश ने रिया की कुछ तस्वीरें निकाली. रिया बिल्कुल कुतिया बनी हुई थी।
रमेश- तुम अब वापिस उठ सकती हो।

रिया उठकर रमेश के पास बैठ गयी।
फिर रमेश ने उससे पूछा- कैसा लगा रंडी बेटी ?
रिया- डैड आप बुरा तो नहीं मानोगे ना, या मुझे गलत तो नहीं समझोगे? मुझे गलत मत समझना। जो तुमने अभी किया उसमें मुझे बहुत मज़ा आया। आज तक मैंने ऐसे केवल ब्लू फिल्मों में देखा था.

रमेश- मैं बुरा क्यों मानूंगा? पगला गयी हो क्या? तुझे अगर मज़ा आया तो मुझे डबल मज़ा आया ये करने में।
रिया- मेरा हमेशा से इसी तरह चुदने का मन है। खूब गंदी चुदाई, गाली गलौच से भरी हुई चुदाई। आप मुझे एकदम घटिया सस्ती रंडी बनाकर चोदो। ऐसे चोदो कि कल सुबह मैं अपनी नज़रों से गिर जाऊं।

रिया- आप तो बहुत प्यार से चोदते हो। ना तो भद्दी भद्दी गालियां देते हो, ना मुझे जलील करते हो। मुझे अहसास दिलाओ कि मैं केवल चुदने के लिए ही बनी हूं. तुमने मुझे खरीद लिया है. अब मैं केवल तुम्हारे भोगने की चीज़ हूं. मेरे अंदर अपनी बेटी को नहीं एक कोठे की रंडी को देखो. आपको खुश .

बीच में टोकते हुए रमेश बोला- एक मिनट . एक मिनट . तुम ये सब जो बोल रही हो, सच में बोल रही हो ना? तुम सच में हमारी बेटी हो ना? मुझे नहीं पता था कि तुझे ऐसे चुदवाने का शौक है। अब तो बस तुम देखोगी कि मैं तुझे जलील करते हुए सस्ती रंडी बना कर चोदता हूं.

रिया- मुझे हमेशा से ऐसे ही चुदने का मन है। मगर शर्म से बोल नहीं पाती थी।
रमेश- अरे रंडी की बच्ची, चल अब शर्म को हमेशा के लिए टाटा बोल दो क्योंकि अब जो तुम्हारे साथ होगा उसमें तो शर्म को भी शर्म आ जायेगी। जा अपनी गंदी कच्छी ले आ और किचन से गिलास और खीर ले आओ।

गांड मटकाते हुए रिया चली गयी। रमेश अपने लण्ड को देखकर सोच रहा था कि क्या किस्मत है उसकी। रिया थोड़ी देर बाद वापस आ गयी। उसके हाथ में गंदी मैरून रंग की पैंटी थी। दूसरे हाथ में कटोरी में खीर और गिलास था।

रमेश- छिनाल सुन इधर सामने आ और अपनी बुर को फैला।
उसने रिया की गंदी पैंटी को उसकी चूत में घुसा दिया। उसके बाद उसने रिया को पीछे घोड़ी बनने को बोला।

रिया तुरंत घोड़ी बन गयी और पीछे मुड़कर बोली- क्या करने वाले हो?"
रमेश- चल अपनी गांड को फैला. तुम्हारी गांड में ये सारी खीर जायेगी.
रिया उत्साहित होकर- क्या??

रमेश- हाँ, सही सुना तुमने। चलो फैलाओ।
रिया ने वैसा ही करते हुए कहा- ये लो।
रमेश ने धीरे धीरे एक एक चम्मच करके सारी खीर रिया की गांड में ठूंस दी.
 
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