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रुखसाना एकदम से चिला पड़ी "आअहह... धीरे करो राजा जी..."
ये सुनकर मुझे और मजा आने लगा। मैं और तेज-तेज झटके मारने लगा। बहुत मजा आ रहा था उसकी चूत फाड़ के 15 मिनट बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। अपना लण्ड बिना उसकी चूत से निकाले मैं उसके ऊपर लेटा रहा थोड़ी देर बाद मैंमें उसके ऊपर से हटा तो बहुत रिलैक्स महसूस हो रहा था।
रुखसाना- “आज तो मजा आ गया। इतनी तेज पहले तो आपने कभी नहीं किया....
मैं- "आज हमारी शादी की पहली रात है, और मैं इस रात को तुम्हें भूलने नहीं दूँगा..."
रुखसाना हँसने लगी। हम दोनों लिपट के एक साथ सो रहे थे।
बीस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा तो मैंने रुखसाना से कहा- “इसे अपने मुँह में ले लो और पूरा खड़ा कर दो मेरी जान.... "
रुखसाना मेरा लण्ड चूसने लगी। फिर मैंने सोचा रुखसाना की चूत तो बहुत बार मारी है, अब इसकी गाण्ड मारता तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा।
रुखसाना पूछने लगी- "क्यों?"
मैंने कहा- "मुझे अब तुम्हारी गाण्ड मारनी है...
रुखसाना- "नहीं प्लीज... गाण्ड रहने दीजिए...*
मैं- “गाण्ड मारने तो दो बहुत मजा आएगा...*
रुखसाना- “ठीक है, आप जैसा कहें। हमारी शादी का पहला दिन है और मैंमें आपको नाराज नहीं करना चाहती...." कहकर रुखसाना घोड़ी बन गई।
पर उसकी गाण्ड का छेद बहुत छोटा था क्योंकी उसकी गाण्ड कभी मारी नहीं गई थी। मैंने थोड़ा सा तेल उसकी गाण्ड की छेद पे लगा दिया और फिर अपना लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पे सेट किया। लण्ड धीरे-धीरे अंदर जाने लगा।
रुखसाना को बहुत दर्द हो रहा था वो चीख रही थी- “ऊहह ... ऊहह... आहह.... आअह्ह... "
मैंने धीरे-धीरे पूरा लण्ड अंदर डाल दिया वो बहुत तेज चिल्ला रही थी पर मैं उसकी गाण्ड मारता रहा। 10 मिनट बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला, क्योंकी इस पोजीशन में गाण्ड मारते-मारते में थक गया था तो मैंने उसे लेटने को कहा। अब हम दोनों लेट चुके थे। लेटे-लेटे उसके पीछे से धीरे-धीरे मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में घुसेड़ दिया और गाण्ड मारने लगा। मैंने 20 मिनट तक रुखसाना की गाण्ड मारी और अपना सारा माल उसकी गाण्ड के अंदर ही गिरा दिया। हम दोनों बहुत थक चुके थे। रुखसाना के गाण्ड से खून निकल रहा था, पर मजा बहुत आया। हम दोनों ने रात में एक बार फिर से चुदाई की।
उधर शाजिया रात भर नीचे लेटकर मेरी और रुखसाना की चुदाई की आवाजें सुन रही थी। क्योंकी वो मुझे अपनी अम्मी के साथ चुदाई करते हुए नहीं देख सकती थी ।
***** समाप्त *****
ये सुनकर मुझे और मजा आने लगा। मैं और तेज-तेज झटके मारने लगा। बहुत मजा आ रहा था उसकी चूत फाड़ के 15 मिनट बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। अपना लण्ड बिना उसकी चूत से निकाले मैं उसके ऊपर लेटा रहा थोड़ी देर बाद मैंमें उसके ऊपर से हटा तो बहुत रिलैक्स महसूस हो रहा था।
रुखसाना- “आज तो मजा आ गया। इतनी तेज पहले तो आपने कभी नहीं किया....
मैं- "आज हमारी शादी की पहली रात है, और मैं इस रात को तुम्हें भूलने नहीं दूँगा..."
रुखसाना हँसने लगी। हम दोनों लिपट के एक साथ सो रहे थे।
बीस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा तो मैंने रुखसाना से कहा- “इसे अपने मुँह में ले लो और पूरा खड़ा कर दो मेरी जान.... "
रुखसाना मेरा लण्ड चूसने लगी। फिर मैंने सोचा रुखसाना की चूत तो बहुत बार मारी है, अब इसकी गाण्ड मारता तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा।
रुखसाना पूछने लगी- "क्यों?"
मैंने कहा- "मुझे अब तुम्हारी गाण्ड मारनी है...
रुखसाना- "नहीं प्लीज... गाण्ड रहने दीजिए...*
मैं- “गाण्ड मारने तो दो बहुत मजा आएगा...*
रुखसाना- “ठीक है, आप जैसा कहें। हमारी शादी का पहला दिन है और मैंमें आपको नाराज नहीं करना चाहती...." कहकर रुखसाना घोड़ी बन गई।
पर उसकी गाण्ड का छेद बहुत छोटा था क्योंकी उसकी गाण्ड कभी मारी नहीं गई थी। मैंने थोड़ा सा तेल उसकी गाण्ड की छेद पे लगा दिया और फिर अपना लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पे सेट किया। लण्ड धीरे-धीरे अंदर जाने लगा।
रुखसाना को बहुत दर्द हो रहा था वो चीख रही थी- “ऊहह ... ऊहह... आहह.... आअह्ह... "
मैंने धीरे-धीरे पूरा लण्ड अंदर डाल दिया वो बहुत तेज चिल्ला रही थी पर मैं उसकी गाण्ड मारता रहा। 10 मिनट बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला, क्योंकी इस पोजीशन में गाण्ड मारते-मारते में थक गया था तो मैंने उसे लेटने को कहा। अब हम दोनों लेट चुके थे। लेटे-लेटे उसके पीछे से धीरे-धीरे मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में घुसेड़ दिया और गाण्ड मारने लगा। मैंने 20 मिनट तक रुखसाना की गाण्ड मारी और अपना सारा माल उसकी गाण्ड के अंदर ही गिरा दिया। हम दोनों बहुत थक चुके थे। रुखसाना के गाण्ड से खून निकल रहा था, पर मजा बहुत आया। हम दोनों ने रात में एक बार फिर से चुदाई की।
उधर शाजिया रात भर नीचे लेटकर मेरी और रुखसाना की चुदाई की आवाजें सुन रही थी। क्योंकी वो मुझे अपनी अम्मी के साथ चुदाई करते हुए नहीं देख सकती थी ।
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