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घास लेकर लौटते समय मैदान में जो कुछ भी हुआ था उसे अपनी आंखों से देखकर सूरज की तो सीटी पीटी गुम हो गई थी,,,। क्योंकि उसने अपनी आंखों से एक साथ तीन-तीन औरतों को सौच करते हुए देखा था,, उन तीन औरतों में एक उसकी मां भी थी जिसकी नंगी गोरी गांड देख कर उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, यह उसके जीवन का पहला मौका था जब उसने एक साथ तीन-तीन औरतों को इस अवस्था में देखा था,,,। वैसे तो सूरज कभी भी औरतों को इस स्थिति में देखना पसंद नहीं करता था और ना ही कभी देखा था लेकिन जिस दिन से उसके दोस्त सोनू ने उसे अपनी ही चाची की मद-मस्त कर देने वाली गांड को दिखाया था,,, और उसी दिन से सूरज का औरतों को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया था,,,।
अब हालात इस तरह के बन गए थे कि वह अपने ही घर पर अपनी बहन और अपनी मां को गंदी नजर से देखना शुरू कर दिया था नतीजन मैदान में वह अपनी मां को और बाकी दोनों औरतों को सौच करते हुए देख रहा था ,, और उन तीनों की बातों को भी सुन रहा था उन बातों के केंद्र में सोनू और वह खुद था और सोनू और उसमें जिस तरह की तुलना हो रही थी सोनू उसमें बिल्कुल भी खड़ा नहीं उतर रहा था सूरज का पलड़ा गठीले बदन को देखकर भारी नजर आ रहा था,,,, सूरज उन तीनों औरतों की बातों को सुनकर पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था की औरतें बिस्तर की बातें करती होगी खास करके उसे इस बात से और अचंभा हो रहा था कि उन तीनों औरतों में उसकी मां भी थी जो गंदी बातें कर रही थी,,,,।
उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज समझ गया था कि सोनू की चाची मां बनने के लिए तड़प रही है लेकिन सोनू का चाचा उसे मां बनाने में सक्षम नहीं है यहां तक कि उसे शरीर सुख देने में भी सक्षम नहीं है, यह बात उसे अपनी ही पड़ोस वाली औरत से सुनने को मिली थी,,,,। उसे औरत की बात को सुनकर सूरज इतना तो समझ गया था कि औरत को खुश करने के लिए मर्दों का गठीला बदन और उसका मर्दाना अंग दोनों सांड की तरह होना चाहिए जैसा कि उसका खुद का था और बात ही बात में उसे पड़ोस वाली औरत ने यह भी कहा था कि अगर उसे मन बना है तो सूरज से चुदवा ले या सोनू से,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची सोनू से कभी भी नहीं चुदवाने वाली,, क्योंकि सोनू को वह हमेशा डांटती हई रहती थी क्योंकि सोनू कभी भी उसके चाचा के मां के मुताबिक काम नहीं करता था और इसीलिए वह भी सोचती हो कि कि जब वह छोटा-मोटा काम नहीं कर पता तो भला उसे चोदकर मां कैसे बनाएगा,,,,।
उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज को अपना भविष्य उज्जवल नजर आ रहा था,,,।,,, समझ गया था कि थोड़ी सी कोशिश करने पर सोनू की चाची के साथ-साथ उसकी पड़ोस वाली औरत की उसके नीचे आने के लिए तैयार हो जाएगी और अगर सही किस्मत रहे तो उसकी मां भी उसके सामने अपनी दोनों टांगें खोल देगी,,,, यही बात उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गई थी जिसके चलते हम तीनों औरतों की अश्लील बातों को सुनकर उनकी नंगी गांड देखकर सूरज से रहा नहीं गया था और वह अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों की नंगी गांड देखकर अपने लंड को अपने पजामे से बाहर निकालने के लिए मजबूर हो गया था,,, और उन तीनों औरतों के पिछवाड़े को देखकर अपने हाथों से अपने लंड को निकाल कर अपने लंड की गर्मी को शांत किया,,,।
उन तीनों को वहां से निकल जाने के बाद कुछ देर बाद सूरज भी अपने घर की तरफ चल दिया,,,,,,, रात हो चुकी थी उसकी मां खाना बना रही थी सूरज घास का ढेर उसके उचित स्थान पर रखकर सीधे अपनी मां के पास पहुंच गया वह जानता था कि अभी खाना नहीं बना होगा लेकिन वह अपनी मां से बातें करना चाहता था अपनी मां खूबसूरत चेहरे को देखना चाहता था उसकी गोलाईयों को झांकना चाहता था,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।
खाना तैयार हो गया क्या मां,,,,।
नहीं अभी समय है क्यों आज तुझे ज्यादा भूख लग गई है क्या,,,,?(गरम-गरम रोटी को तवे पर रखते हुए बोली,,,, और उसे गरम रोटी को देखकर सूरज अपने मन में तुरंत सोचने लगा कि उसकी मां की भी तवे की तरह एकदम गरम होगी और रोटी की तरह चुदवासी होने पर फुल जाती होगी,,,, कितना गजब लगता होगा उसकी बुर देखकर,,,, सूरज को इस तरह से ख्यालों में खोया देखकर सुनैना फिर बोली,,,)
क्या हुआ क्या सोच रहा है,,,?
कककक,,, कुछ तो नहीं मैं तो यह कह रहा था कि आज सच में मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,,।
क्यों खेत में ज्यादा मेहनत करना पड़ गया क्या,,,?
हां मां आज इतना सारा खास काट कर लाया हूं कि तीन-चार दिन तक घास लाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी,,,,।
अरे कितना सारा घास काट कर लाया है और तूने इतना सारा घास उठा कैसे लिया,,,,।(सुनैना अपने बेटे की तरफ देखकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,क्योंकि वह जानती थी कि ज्यादा से ज्यादा सूरज कितना बोझ उठा पाएगा,,,,)
अरे मा अभी तो अंधेरा हो गया है सुबह देखना तब तुम ही सोच में पड़ जाओगी,,,,,,।
अरे ज्यादा से ज्यादा कितना उठा लेगा दो टोकरी उससे ज्यादा कहा उठा पता है तू,,,,।
अरे मां,,, अब मैं पहले वाला सूरज नहीं हूं,, पूरी तरह से मर्द बन गया हूं,,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से मर्द शब्द सुनते ही सुनैना के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब उसे खुशी के मारे गले लगाई थी,, इस समय अपने बेटे का मर्द होने का एहसास उसने एकदम साफ तौर पर अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस की थी,,,,, और पल भर में उसे अभी-अभी मैदान में सोच करने वाली घटना याद आती जब उसकी पड़ोस वाली औरत ही उसे भी अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी और यह भी कह रही थी कि सूरज कितना गठीले बदन वाला है बहुत मजा देगा,,,,,,, सुनैना कुछ देर के लिए ख्यालों में खो गई थी तो इस बार सूरज उसे होश में लाते हुए बोला,,,,)
अरे क्या सोच रही हो मुझ पर विश्वास नहीं है क्या,,,?
नहीं नहीं अब तो तुझ पर विश्वास करना ही होगा,,,, क्योंकि अब तू तो रोजगारी भी करने लगा है बड़ा हो गया है,,,,।
बड़ा नहीं पूरा मर्द हो गया हूं,,,,।(सूरज मर्द शब्द का उपयोग अपनी मां के सामने बार-बार जानबूझकर कर रहा था,,,, क्योंकि बड़ा हो गया हूं इसका मतलब सामान्य होता है लेकिन पूरा मर्द हो गया हम इसका मतलब एक औरत को खुश करने लायक हो गया हूं ऐसा वह समझता था और ऐसा था अभी तभी तो जब-जब सूरज के मुंह से मर्द शब्द सुनती थी सुनैना के तन बदन में आग लग जाती थी,,)
हां हां पूरा मर्द हो गया है लेकिन यह तो समय आएगा तभी पता चलेगा,,,,,(सुनैना के मुंह से भी अचानक यह शब्द निकल गया उसके कहने का मतलब यह था कि जब कभी मौका मिलेगा तो वह भी आजमा लेगी कि उसका बेटा कितना मर्द हो गया है,,,। अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)
कैसा समय इसमें समय क्या देखना आजमाना है तो अभी आजमा लो,,,,,,(सूरज अपनी मां से दो अर्थ वाली बात कर रहा था लेकिन एकदम सहज होकर ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी सपना हो कि वह किस बारे में बात कर रहा था लेकिन उसकी मां उसके कहने के मतलब को अपने तरीके से ले रही थी इसलिए उसकी बात सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है यह सब सौच करते समय की बात का ही नतीजा था,,,, जो उसके मन में अपने ही बेटे को लेकर गंदी-गंदी भावनाएं पैदा हो रही थी,,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए सुनैना अपने बेटे से नजर मिलाई बिना ही तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली,,, )
अभी ईस समय आजमाने जैसा कुछ भी नहीं है,,,, जब आजमाना होगा तब आजमा लूंगी वैसे भी तू कहां भागा जा रहा है,,,।
(अपनी मां की बातें सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला कल पर क्यों छोड़ती हो मां चलो अभी आजमालो चलो अपने कमरे में खटिया पर तुम्हारा बदन दर्द न करने लगे तो बोलना ऐसी चुदाई करूंगा की खटिया टूट जाएगी और तुम्हारी बुर का भोसड़ा बन जाएगा,,,, सूरज अपने मन में ही इस तरह की बातों को सोचकर एकदम से गर्म हो गया और उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया वह जिस तरह से बैठा था उसके पजामे के आगे वाले भाग में,,,, ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे सूरज कुछ भरा हो,,, और अनजाने में ही सुनैना की नजर अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर चली गई,,, और जैसे ही पजामे के आगे फुले वाले भाग को देखी,,, सुनैना के तो होश उड़ गई उसके बदन में मीठी-मीठी गुदगुदी होने लगी,,, उसे वाकई में एहसास होने लगा कि वाकई में उसका बेटा मर्द हो गया है,,,, लेकिन जल्द ही उसने अपनी नजर को वहां से हटा ली,,, सुनैना की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था अपने बेटे की उपस्थिति में उसे पहली बार इस तरह का एहसास हो रहा था और यह सब किस लिए हो रहा था,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,,,।
इसी बीच आटा गुंथने और तवे पर पकने में उसके साड़ी का पल्लू कब उसके कंधे से नीचे गिर गया उसे पता ही नहीं चला और साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही उसकी भारी भरकम चूचियां एकदम से नजर आने लगी जिस पर सूरज की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चमक दिखाई देने लगी,,, अजीब से असमंजस में पड़ी सुनैना को इस बात का भान हीं नहीं था कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है,,,, और ईसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,, चूल्हे के सामने खाना बनाने से और गर्मी का मौसम होने की वजह से पसीने की बूंदे उसके माथे से होते हुए मोती के दाने की तरह उसके बदन से लुढ़कते हुए सीधे उसकी चूचियों के बीच की पतली दरार में प्रवेश कर रही थी,,,। यह नजारा ऐसा लग रहा था मानों जैसे गहरी खाई में झरना का पानी गिर रहा हो,,, और इससे कामुक नजारे को देखकर सूरज को इस बात का डर था की कही उसके लंड से झरना ना बहने लगे,,,,।
कुछ देर के लिए दोनों के बीच वार्तालाप एकदम से बंद हो चुकी थी क्योंकि सूरज अपनी मां की चूचियों को ताड़ने में लगा हुआ था,,, गनीमत इस बात का था कि उसकी मां की चूचियां ब्लाउज में कह देती अगर ब्लाउज के बाहर आजाद होती तो शायद सूरज अपनी मां के दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में दबोच लेता,,, इसी बीच सुनैना की नजर जैसे ही अपनी बेटी पर पड़ी तो उसकी नजर के सिधान को देखकर वह एकदम से चौंक गई,,, तुरंत उसकी नजर अपनी छतिया पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है और उसकी भारी भरकम खरबूजा जैसी चुचीया एकदम से उजागर हो गई है,, और उसकी चूचियों को उसका ही बेटा प्यासी नजरों से देख रहा है,,,, सुनैना तो एकदम से बेहाल हो गई अपने बेटे के नजरिया को देखकर वह अंदर ही अंदर पानी पानी हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा वाकई में इतना बड़ा हो गया है कि खुद की मां को प्यासी नजरों से देख रहा है,,,,।
अब हालात इस तरह के बन गए थे कि वह अपने ही घर पर अपनी बहन और अपनी मां को गंदी नजर से देखना शुरू कर दिया था नतीजन मैदान में वह अपनी मां को और बाकी दोनों औरतों को सौच करते हुए देख रहा था ,, और उन तीनों की बातों को भी सुन रहा था उन बातों के केंद्र में सोनू और वह खुद था और सोनू और उसमें जिस तरह की तुलना हो रही थी सोनू उसमें बिल्कुल भी खड़ा नहीं उतर रहा था सूरज का पलड़ा गठीले बदन को देखकर भारी नजर आ रहा था,,,, सूरज उन तीनों औरतों की बातों को सुनकर पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था की औरतें बिस्तर की बातें करती होगी खास करके उसे इस बात से और अचंभा हो रहा था कि उन तीनों औरतों में उसकी मां भी थी जो गंदी बातें कर रही थी,,,,।
उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज समझ गया था कि सोनू की चाची मां बनने के लिए तड़प रही है लेकिन सोनू का चाचा उसे मां बनाने में सक्षम नहीं है यहां तक कि उसे शरीर सुख देने में भी सक्षम नहीं है, यह बात उसे अपनी ही पड़ोस वाली औरत से सुनने को मिली थी,,,,। उसे औरत की बात को सुनकर सूरज इतना तो समझ गया था कि औरत को खुश करने के लिए मर्दों का गठीला बदन और उसका मर्दाना अंग दोनों सांड की तरह होना चाहिए जैसा कि उसका खुद का था और बात ही बात में उसे पड़ोस वाली औरत ने यह भी कहा था कि अगर उसे मन बना है तो सूरज से चुदवा ले या सोनू से,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची सोनू से कभी भी नहीं चुदवाने वाली,, क्योंकि सोनू को वह हमेशा डांटती हई रहती थी क्योंकि सोनू कभी भी उसके चाचा के मां के मुताबिक काम नहीं करता था और इसीलिए वह भी सोचती हो कि कि जब वह छोटा-मोटा काम नहीं कर पता तो भला उसे चोदकर मां कैसे बनाएगा,,,,।
उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज को अपना भविष्य उज्जवल नजर आ रहा था,,,।,,, समझ गया था कि थोड़ी सी कोशिश करने पर सोनू की चाची के साथ-साथ उसकी पड़ोस वाली औरत की उसके नीचे आने के लिए तैयार हो जाएगी और अगर सही किस्मत रहे तो उसकी मां भी उसके सामने अपनी दोनों टांगें खोल देगी,,,, यही बात उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गई थी जिसके चलते हम तीनों औरतों की अश्लील बातों को सुनकर उनकी नंगी गांड देखकर सूरज से रहा नहीं गया था और वह अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों की नंगी गांड देखकर अपने लंड को अपने पजामे से बाहर निकालने के लिए मजबूर हो गया था,,, और उन तीनों औरतों के पिछवाड़े को देखकर अपने हाथों से अपने लंड को निकाल कर अपने लंड की गर्मी को शांत किया,,,।
उन तीनों को वहां से निकल जाने के बाद कुछ देर बाद सूरज भी अपने घर की तरफ चल दिया,,,,,,, रात हो चुकी थी उसकी मां खाना बना रही थी सूरज घास का ढेर उसके उचित स्थान पर रखकर सीधे अपनी मां के पास पहुंच गया वह जानता था कि अभी खाना नहीं बना होगा लेकिन वह अपनी मां से बातें करना चाहता था अपनी मां खूबसूरत चेहरे को देखना चाहता था उसकी गोलाईयों को झांकना चाहता था,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।
खाना तैयार हो गया क्या मां,,,,।
नहीं अभी समय है क्यों आज तुझे ज्यादा भूख लग गई है क्या,,,,?(गरम-गरम रोटी को तवे पर रखते हुए बोली,,,, और उसे गरम रोटी को देखकर सूरज अपने मन में तुरंत सोचने लगा कि उसकी मां की भी तवे की तरह एकदम गरम होगी और रोटी की तरह चुदवासी होने पर फुल जाती होगी,,,, कितना गजब लगता होगा उसकी बुर देखकर,,,, सूरज को इस तरह से ख्यालों में खोया देखकर सुनैना फिर बोली,,,)
क्या हुआ क्या सोच रहा है,,,?
कककक,,, कुछ तो नहीं मैं तो यह कह रहा था कि आज सच में मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,,।
क्यों खेत में ज्यादा मेहनत करना पड़ गया क्या,,,?
हां मां आज इतना सारा खास काट कर लाया हूं कि तीन-चार दिन तक घास लाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी,,,,।
अरे कितना सारा घास काट कर लाया है और तूने इतना सारा घास उठा कैसे लिया,,,,।(सुनैना अपने बेटे की तरफ देखकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,क्योंकि वह जानती थी कि ज्यादा से ज्यादा सूरज कितना बोझ उठा पाएगा,,,,)
अरे मा अभी तो अंधेरा हो गया है सुबह देखना तब तुम ही सोच में पड़ जाओगी,,,,,,।
अरे ज्यादा से ज्यादा कितना उठा लेगा दो टोकरी उससे ज्यादा कहा उठा पता है तू,,,,।
अरे मां,,, अब मैं पहले वाला सूरज नहीं हूं,, पूरी तरह से मर्द बन गया हूं,,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से मर्द शब्द सुनते ही सुनैना के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब उसे खुशी के मारे गले लगाई थी,, इस समय अपने बेटे का मर्द होने का एहसास उसने एकदम साफ तौर पर अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस की थी,,,,, और पल भर में उसे अभी-अभी मैदान में सोच करने वाली घटना याद आती जब उसकी पड़ोस वाली औरत ही उसे भी अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी और यह भी कह रही थी कि सूरज कितना गठीले बदन वाला है बहुत मजा देगा,,,,,,, सुनैना कुछ देर के लिए ख्यालों में खो गई थी तो इस बार सूरज उसे होश में लाते हुए बोला,,,,)
अरे क्या सोच रही हो मुझ पर विश्वास नहीं है क्या,,,?
नहीं नहीं अब तो तुझ पर विश्वास करना ही होगा,,,, क्योंकि अब तू तो रोजगारी भी करने लगा है बड़ा हो गया है,,,,।
बड़ा नहीं पूरा मर्द हो गया हूं,,,,।(सूरज मर्द शब्द का उपयोग अपनी मां के सामने बार-बार जानबूझकर कर रहा था,,,, क्योंकि बड़ा हो गया हूं इसका मतलब सामान्य होता है लेकिन पूरा मर्द हो गया हम इसका मतलब एक औरत को खुश करने लायक हो गया हूं ऐसा वह समझता था और ऐसा था अभी तभी तो जब-जब सूरज के मुंह से मर्द शब्द सुनती थी सुनैना के तन बदन में आग लग जाती थी,,)
हां हां पूरा मर्द हो गया है लेकिन यह तो समय आएगा तभी पता चलेगा,,,,,(सुनैना के मुंह से भी अचानक यह शब्द निकल गया उसके कहने का मतलब यह था कि जब कभी मौका मिलेगा तो वह भी आजमा लेगी कि उसका बेटा कितना मर्द हो गया है,,,। अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)
कैसा समय इसमें समय क्या देखना आजमाना है तो अभी आजमा लो,,,,,,(सूरज अपनी मां से दो अर्थ वाली बात कर रहा था लेकिन एकदम सहज होकर ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी सपना हो कि वह किस बारे में बात कर रहा था लेकिन उसकी मां उसके कहने के मतलब को अपने तरीके से ले रही थी इसलिए उसकी बात सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है यह सब सौच करते समय की बात का ही नतीजा था,,,, जो उसके मन में अपने ही बेटे को लेकर गंदी-गंदी भावनाएं पैदा हो रही थी,,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए सुनैना अपने बेटे से नजर मिलाई बिना ही तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली,,, )
अभी ईस समय आजमाने जैसा कुछ भी नहीं है,,,, जब आजमाना होगा तब आजमा लूंगी वैसे भी तू कहां भागा जा रहा है,,,।
(अपनी मां की बातें सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला कल पर क्यों छोड़ती हो मां चलो अभी आजमालो चलो अपने कमरे में खटिया पर तुम्हारा बदन दर्द न करने लगे तो बोलना ऐसी चुदाई करूंगा की खटिया टूट जाएगी और तुम्हारी बुर का भोसड़ा बन जाएगा,,,, सूरज अपने मन में ही इस तरह की बातों को सोचकर एकदम से गर्म हो गया और उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया वह जिस तरह से बैठा था उसके पजामे के आगे वाले भाग में,,,, ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे सूरज कुछ भरा हो,,, और अनजाने में ही सुनैना की नजर अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर चली गई,,, और जैसे ही पजामे के आगे फुले वाले भाग को देखी,,, सुनैना के तो होश उड़ गई उसके बदन में मीठी-मीठी गुदगुदी होने लगी,,, उसे वाकई में एहसास होने लगा कि वाकई में उसका बेटा मर्द हो गया है,,,, लेकिन जल्द ही उसने अपनी नजर को वहां से हटा ली,,, सुनैना की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था अपने बेटे की उपस्थिति में उसे पहली बार इस तरह का एहसास हो रहा था और यह सब किस लिए हो रहा था,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,,,।
इसी बीच आटा गुंथने और तवे पर पकने में उसके साड़ी का पल्लू कब उसके कंधे से नीचे गिर गया उसे पता ही नहीं चला और साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही उसकी भारी भरकम चूचियां एकदम से नजर आने लगी जिस पर सूरज की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चमक दिखाई देने लगी,,, अजीब से असमंजस में पड़ी सुनैना को इस बात का भान हीं नहीं था कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है,,,, और ईसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,, चूल्हे के सामने खाना बनाने से और गर्मी का मौसम होने की वजह से पसीने की बूंदे उसके माथे से होते हुए मोती के दाने की तरह उसके बदन से लुढ़कते हुए सीधे उसकी चूचियों के बीच की पतली दरार में प्रवेश कर रही थी,,,। यह नजारा ऐसा लग रहा था मानों जैसे गहरी खाई में झरना का पानी गिर रहा हो,,, और इससे कामुक नजारे को देखकर सूरज को इस बात का डर था की कही उसके लंड से झरना ना बहने लगे,,,,।
कुछ देर के लिए दोनों के बीच वार्तालाप एकदम से बंद हो चुकी थी क्योंकि सूरज अपनी मां की चूचियों को ताड़ने में लगा हुआ था,,, गनीमत इस बात का था कि उसकी मां की चूचियां ब्लाउज में कह देती अगर ब्लाउज के बाहर आजाद होती तो शायद सूरज अपनी मां के दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में दबोच लेता,,, इसी बीच सुनैना की नजर जैसे ही अपनी बेटी पर पड़ी तो उसकी नजर के सिधान को देखकर वह एकदम से चौंक गई,,, तुरंत उसकी नजर अपनी छतिया पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है और उसकी भारी भरकम खरबूजा जैसी चुचीया एकदम से उजागर हो गई है,, और उसकी चूचियों को उसका ही बेटा प्यासी नजरों से देख रहा है,,,, सुनैना तो एकदम से बेहाल हो गई अपने बेटे के नजरिया को देखकर वह अंदर ही अंदर पानी पानी हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा वाकई में इतना बड़ा हो गया है कि खुद की मां को प्यासी नजरों से देख रहा है,,,,।