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थोड़ी ही देर में वह नदी पर पहुंच गया था,,, नदी पर कोई नहीं था चारों तरफ जंगली झाड़ियां होगी हुई थी और नदी मंद मंद धीरे-धीरे बह रही थी नदी का किनारा बेहद खूबसूरत लग रहा था क्योंकि यहां ठंडी हवा बह रही थी सूरज नदी पर पहुंचकर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां नदी पर आई थी या नहीं क्योंकि रास्ते में तो वह उसे मीली नहीं थी,,। फिर भी वह चारों तरफ नजर घूमाकर इधर-उधर देख रहा था लेकिन उसकी मां का कहीं अता पता नहीं था,, वह अपने मन में सोचने लगा कि लगता है उसकी मां नदी पर आई ही नहीं लेकिन तभी दूसरी तरफ उसे पानी में से,,,छपाक छपाक की आवाज आने लगी,,,, और वह उसे दिशा में देखने लगा जहां पर ढेर सारी झाड़ियां थी बड़े-बड़े पत्थर से उसके पीछे से आवाज आ रही थी,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि इतनी घनी झाड़ियों के पीछे कौन है,,, और इसलिए उत्सुकता बस उस तरफ जाने लगा,,,।
जैसे-जैसे सूरज उसे जगह के करीब जा रहा था वैसे-वैसे आवाज तेज होती जा रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई नदी में नहा रहा है,,,, फिर भी सूरज देखना चाहता था की आखिरकार इतनी घनी जंगली झाड़ियां के बीच कौन है,,, पल भर के लिए उसका मन कहा कि कहीं जंगली जानवर तो नहीं क्योंकि यहां कोई आता नहीं है नहाने के लिए और वह वहां से चला जाना चाहता था लेकिन फिर भी उसकी उत्सव का बढ़ती जा रही थी यह धीरे-धीरे वह उसे जगह पर पहुंच गया और बड़े से पत्थर के आगे जैसे ही पहुंचा तो उसे नदी एकदम साफ दिखाई देने लगी और नदी के किनारे तकरीबन किनारे से तीन चार मीटर दूरी पर,,, उसे कुछ दिखाई नहीं दिया बस गोल-गोल तरंगे घूमती हुई नजर आने लगी वह सोच पड़ गया कि यह क्या हो रहा है,,,,।
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्याहै,,, लेकिन तभी उसे जगह से एक बेहद खूबसूरत औरत नहाते हुए भारी उसका सर नदी के पानी से बाहर की तरफ निकला उसके मुंह में पानी भरा हुआ था और वह मुंह से पानी की पिचकारी नदी नहीं मार रही थी उसकी आंखें बंद थी,,,, पल भर के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि यह औरत कौन है लेकिन जब वह गौर से देखा तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि वह औरत कोई और नहीं उसकी मां थी उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, वह बड़े से पत्थर के पास ठीक अपनी मां के सामने चार-पांच मीटर की दूरी पर खड़ा था उसकी मां की नजर उसे करना पड़े इसलिए वह तुरंत बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,।
पहले वाला सूरज होता तो अपनी मां को इस अवस्था में देखने से पहले वह वहां से चला जाता लेकिन अब सूरज बदल चुका था पूरी तरह से जवान हो चुका था जवान क्या हुआ एक ही रात में मर्द बन चुका था औरतों की तरफ आकर्षित होना उसकी कमजोरी बन चुकी थी और अब भले चाहे उसकी मां हो या बहन उसका आकर्षण अपनी मां बहन की तरफ भी बढ़ने लगा था इसलिए वह बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया था ताकि उसकी मां की नजर उस पर पड ना सके,,,।
सूरज का दिल जोरों से धढक रहा था क्योंकि पहली बार वह अपनी मां को नदी में नहाते हुए देख रहा था,, अभी भी नदी में केवल उसकी मां का सिर ही दिखाई दे रहा था और वह बड़े मजे लेकर नहा रहे थे सूरज के मन में यह उत्सुकता बढ़ रही थी की नदी के अंदर उसकी मां कपड़े पहनी है या बिना कपड़े के अंदर घुसकर नहा रही है यही देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था और अपने मन में प्रार्थना भी कर रहा था कि पास उसकी मां एकदम नंगी होकर नदी में नहा रही हो तो मजा आ जाए,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि जिस जगह पर उसकी मां खड़ी होकर नहा रही थी वहां पर पानी केवल उसकी छाती तक ही था,,,, और उसकी मां की कब काठी थोड़ी लंबी थी इसलिए अच्छी तरह से जानता था की खड़ी होने पर उसकी मां की छाती जरूर नजर आएगी,,,।
वह अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां एक बार डुबकी लेकर फिर से नदी के पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई और कमर के नीचे का ऊपर पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई ,, और वही हुआ जिसके लिए सूरज प्रार्थना कर रहा था वाकई में उसकी मां कपड़े नहीं पहनी थी उसकी नंगी छातिया एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, सूरज तो अपनी मां की चूचियों को देखकर पागल हो गया पर तुरंत उसे रात वाली घटना याद आने लगी मुखिया की बीवी बिस्तर पर नंगी याद आने लगी और अनजाने में ही सूरज मुखिया की बीवी की चूचियों से अपनी मां की चूचियों की तुलना करने लगा जिसमें उसकी मां की चुचिया मुखिया की बीवी की चूचियों से बेहद कसावदार और उससे थोड़ी सी बड़ी ही नजर आ रही थी,,, सूरज तो अपनी मां का यह रूप देखकर एकदम पागल हो गया उसकी आंखों में वासना के शोले नजर आने लगे,,,, उसकी माफी नदी के पानी को अपनी हथेली में लेकर बार-बार उसे अपनी छतिया पर दे मार रही थी जिसकी वजह से पानी का फवारा उसकी छतिया से टकराकर वापस पानी में गिर रहा था और पानी की बूंदे उसकी मां की चूचियों से मोती के दाने की तरह फिसल रही थी,,,, यह सब देखकर सूरज पागल हुआ जा रहा था,,,।
सुनैना इस बात से बेखबर की उसका बेटा छूप कर उसकी नंगी जवानी को देख रहा है वह अपनी ही मस्ती में नदी में छप छपा कर नहा रही थी,,, सूरज अपनी मां का यह रूप देखकर पागल हुआ जा रहा था,, क्योंकि आज तक सूरज अपनी मां को इस तरह से नहाते हुए नहीं देखा था कमर के नीचे का भाग उसे अभी दिखाई नहीं दे रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि ऊपर ना सही नीचे जरूर उसकी मां पेटिकोट पहनी होगी,,,, कुछ देर तक सुनैना इसी तरह से नहाती रही और सूरज बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर अपनी मां की मदहोश जवानी को देखता रहा,, कुछ देर नहा देने के बाद उसकी मां चलते हुए थोड़ा सा आगे की तरफ आई और जैसे ही आगे की तरफ आई कमर के नीचे का भाग भी पानी से बाहर आता हुआ नजर आने लगा और इस नजारे को देखकर तो सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई सूरज ने कभी कल्पना भी नहीं किया था कि वह अपनी मां को इस रूप में कभी देख पाएगा,,, ।
वैसे तो उसने उसे दिन भी कल्पना नहीं किया था कि वह अपनी मां को चुदवाते हुए देख पाएगा लेकिन उसे दिन की अपेक्षा आज का उसकी मां का रूप कुछ ज्यादा ही कामुक नजर आ रहा था,,,, जल्द ही सूरज को पता चल गया कि उसकी मां नदी में पूरी तरह से नंगी होकर नहा रही है,,, और यह ऐसा सही उसके लंड को खड़ा करने के लिए काफी था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,। इस तरह से खुले तोर पे उसने आज तक अपनी मां को नंगी नहीं देखा था,,, उसके लिए पहला मौका था जब वह नदी पर वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख रहा था और एक औरत नदी पर नंगी होने के बाद कितनी खूबसूरत लगती है यह भी उसे आज ही एहसास हो रहा था,,,,।
नदी का पानी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघों तक था,,, सूरज की नजर अपने आप ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की तरफ जा रही थी लेकिन उसे इतनी दूर से अपनी मां की बुर एकदम साफ नजर नहीं आ रही थी बस हल्के-हल्के बालों का कुछ अच्छा नजर आ रहा है और इससे अवस्था में भी उसकी मां स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की तरह खूबसूरत नजर आ रही थी अपनी मां की मधुमक कर देने वाली जवानी को देखकर सूरज का हाथ अपने आप ही अपने पजामें के ऊपर से अपने लंड पर चला गया था जिसे वह धीरे-धीरे दबा रहा था,,, और अपनी मां की नंगी जवानी देखते हुए अपने लंड को दबाने में उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,, सुनैना पूरी तरह से नहाने में मस्त थी उसे बिल्कुल भी आभास नहीं हो रहा था कि,,, ठीक उसकी आंखों के सामने ही उसका बेटा उसे छुप कर देख रहा है और अगर शायद यह पता चल जाता तो वह फिर से पानी की गहराई में जाकर अपने नंगे बदन को छुपा लेती,,,।
सूरज के तन बदन में आग लग रही थी रात भर मुखिया की बीवी की मदद कर देने वाली जवानी को भोगने के बाद एक बार फिर से उसकी मां चोदने के लिए आतुर हो रहा था तड़प रहा था,,, लेकिन यहां पर ऐसा कोई जुगाड़ नहीं था इसलिए वह अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा रहा था,,, बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी को देख ही रहा था कि उसकी मां पानी में फिर से अपना क्रिया कलाप दिखाते हुए,,, दूसरी तरफ घूमने लगी और सूरज का दिन जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां दूसरी तरफ घूमेगी तो उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी आंखों के सामने नजर आ जाएगी और वह अपनी मां की नंगी गांड को देख सकेगा लेकिन उसकी गांड देख पाता इससे पहले उसकी मां एक बार फिर से पानी के अंदर डुबकी लगा दी,,,, सूरज का हाल बेहाल हुआ जा रहा था वह अपनी मां की गांड को देखने के लिए तरस रहा था,,, तभी कुछ ही क्षण उसकी मां पानी में डुबकी लगाकर बाहर निकली और पूरी तरह से खड़ी हो गई और इस बार सूरज के दिल पर हथौड़े चलने लगे उसकी मां की नंगी गांड उसकी आंखों के सामने थी जिस पर पानी की बूंदे फिसल रही थी गांड की दोनों फांकों के बीच की गहराई इतनी गजब की थी कि सूरज का मन उस गहराई में डूब जाने को कर रहा था,, ,,, सूरज अपनी मां की गांड को देखा ही रह गया और इसी अवस्था में सूरज की मां दो-तीन बार पानी में डुबकी लगाई और खड़ी हुई यह नजारा पूरी तरह से सूरज को उत्तेजित कर गया था,,,,।
सूरज का मन अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां को नंगी देखकर मुठिया मारने को कर रहा था,,, और ऐसा करने के लिए वह अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकाल भी लिया था लेकिन उसकी मां नहा चुकी थी और पानी से बाहर आ रही थी और अब सूरज का वहा खड़े रहना बिलकुल भी उचित नहीं था,,, इसलिए वह वापस पजामा पहन कर दबे पांव वहां से पीछे आ गया,,,।
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जैसे-जैसे सूरज उसे जगह के करीब जा रहा था वैसे-वैसे आवाज तेज होती जा रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई नदी में नहा रहा है,,,, फिर भी सूरज देखना चाहता था की आखिरकार इतनी घनी जंगली झाड़ियां के बीच कौन है,,, पल भर के लिए उसका मन कहा कि कहीं जंगली जानवर तो नहीं क्योंकि यहां कोई आता नहीं है नहाने के लिए और वह वहां से चला जाना चाहता था लेकिन फिर भी उसकी उत्सव का बढ़ती जा रही थी यह धीरे-धीरे वह उसे जगह पर पहुंच गया और बड़े से पत्थर के आगे जैसे ही पहुंचा तो उसे नदी एकदम साफ दिखाई देने लगी और नदी के किनारे तकरीबन किनारे से तीन चार मीटर दूरी पर,,, उसे कुछ दिखाई नहीं दिया बस गोल-गोल तरंगे घूमती हुई नजर आने लगी वह सोच पड़ गया कि यह क्या हो रहा है,,,,।
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्याहै,,, लेकिन तभी उसे जगह से एक बेहद खूबसूरत औरत नहाते हुए भारी उसका सर नदी के पानी से बाहर की तरफ निकला उसके मुंह में पानी भरा हुआ था और वह मुंह से पानी की पिचकारी नदी नहीं मार रही थी उसकी आंखें बंद थी,,,, पल भर के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि यह औरत कौन है लेकिन जब वह गौर से देखा तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि वह औरत कोई और नहीं उसकी मां थी उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, वह बड़े से पत्थर के पास ठीक अपनी मां के सामने चार-पांच मीटर की दूरी पर खड़ा था उसकी मां की नजर उसे करना पड़े इसलिए वह तुरंत बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,।
पहले वाला सूरज होता तो अपनी मां को इस अवस्था में देखने से पहले वह वहां से चला जाता लेकिन अब सूरज बदल चुका था पूरी तरह से जवान हो चुका था जवान क्या हुआ एक ही रात में मर्द बन चुका था औरतों की तरफ आकर्षित होना उसकी कमजोरी बन चुकी थी और अब भले चाहे उसकी मां हो या बहन उसका आकर्षण अपनी मां बहन की तरफ भी बढ़ने लगा था इसलिए वह बड़े से पत्थर के पीछे छुप गया था ताकि उसकी मां की नजर उस पर पड ना सके,,,।
सूरज का दिल जोरों से धढक रहा था क्योंकि पहली बार वह अपनी मां को नदी में नहाते हुए देख रहा था,, अभी भी नदी में केवल उसकी मां का सिर ही दिखाई दे रहा था और वह बड़े मजे लेकर नहा रहे थे सूरज के मन में यह उत्सुकता बढ़ रही थी की नदी के अंदर उसकी मां कपड़े पहनी है या बिना कपड़े के अंदर घुसकर नहा रही है यही देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था और अपने मन में प्रार्थना भी कर रहा था कि पास उसकी मां एकदम नंगी होकर नदी में नहा रही हो तो मजा आ जाए,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि जिस जगह पर उसकी मां खड़ी होकर नहा रही थी वहां पर पानी केवल उसकी छाती तक ही था,,,, और उसकी मां की कब काठी थोड़ी लंबी थी इसलिए अच्छी तरह से जानता था की खड़ी होने पर उसकी मां की छाती जरूर नजर आएगी,,,।
वह अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां एक बार डुबकी लेकर फिर से नदी के पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई और कमर के नीचे का ऊपर पानी से ऊपर की तरफ उठी और इस बार वह पूरी तरह से नदी के पानी में खड़ी हो गई ,, और वही हुआ जिसके लिए सूरज प्रार्थना कर रहा था वाकई में उसकी मां कपड़े नहीं पहनी थी उसकी नंगी छातिया एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, सूरज तो अपनी मां की चूचियों को देखकर पागल हो गया पर तुरंत उसे रात वाली घटना याद आने लगी मुखिया की बीवी बिस्तर पर नंगी याद आने लगी और अनजाने में ही सूरज मुखिया की बीवी की चूचियों से अपनी मां की चूचियों की तुलना करने लगा जिसमें उसकी मां की चुचिया मुखिया की बीवी की चूचियों से बेहद कसावदार और उससे थोड़ी सी बड़ी ही नजर आ रही थी,,, सूरज तो अपनी मां का यह रूप देखकर एकदम पागल हो गया उसकी आंखों में वासना के शोले नजर आने लगे,,,, उसकी माफी नदी के पानी को अपनी हथेली में लेकर बार-बार उसे अपनी छतिया पर दे मार रही थी जिसकी वजह से पानी का फवारा उसकी छतिया से टकराकर वापस पानी में गिर रहा था और पानी की बूंदे उसकी मां की चूचियों से मोती के दाने की तरह फिसल रही थी,,,, यह सब देखकर सूरज पागल हुआ जा रहा था,,,।
सुनैना इस बात से बेखबर की उसका बेटा छूप कर उसकी नंगी जवानी को देख रहा है वह अपनी ही मस्ती में नदी में छप छपा कर नहा रही थी,,, सूरज अपनी मां का यह रूप देखकर पागल हुआ जा रहा था,, क्योंकि आज तक सूरज अपनी मां को इस तरह से नहाते हुए नहीं देखा था कमर के नीचे का भाग उसे अभी दिखाई नहीं दे रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि ऊपर ना सही नीचे जरूर उसकी मां पेटिकोट पहनी होगी,,,, कुछ देर तक सुनैना इसी तरह से नहाती रही और सूरज बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर अपनी मां की मदहोश जवानी को देखता रहा,, कुछ देर नहा देने के बाद उसकी मां चलते हुए थोड़ा सा आगे की तरफ आई और जैसे ही आगे की तरफ आई कमर के नीचे का भाग भी पानी से बाहर आता हुआ नजर आने लगा और इस नजारे को देखकर तो सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई सूरज ने कभी कल्पना भी नहीं किया था कि वह अपनी मां को इस रूप में कभी देख पाएगा,,, ।
वैसे तो उसने उसे दिन भी कल्पना नहीं किया था कि वह अपनी मां को चुदवाते हुए देख पाएगा लेकिन उसे दिन की अपेक्षा आज का उसकी मां का रूप कुछ ज्यादा ही कामुक नजर आ रहा था,,,, जल्द ही सूरज को पता चल गया कि उसकी मां नदी में पूरी तरह से नंगी होकर नहा रही है,,, और यह ऐसा सही उसके लंड को खड़ा करने के लिए काफी था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,। इस तरह से खुले तोर पे उसने आज तक अपनी मां को नंगी नहीं देखा था,,, उसके लिए पहला मौका था जब वह नदी पर वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख रहा था और एक औरत नदी पर नंगी होने के बाद कितनी खूबसूरत लगती है यह भी उसे आज ही एहसास हो रहा था,,,,।
नदी का पानी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघों तक था,,, सूरज की नजर अपने आप ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की तरफ जा रही थी लेकिन उसे इतनी दूर से अपनी मां की बुर एकदम साफ नजर नहीं आ रही थी बस हल्के-हल्के बालों का कुछ अच्छा नजर आ रहा है और इससे अवस्था में भी उसकी मां स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की तरह खूबसूरत नजर आ रही थी अपनी मां की मधुमक कर देने वाली जवानी को देखकर सूरज का हाथ अपने आप ही अपने पजामें के ऊपर से अपने लंड पर चला गया था जिसे वह धीरे-धीरे दबा रहा था,,, और अपनी मां की नंगी जवानी देखते हुए अपने लंड को दबाने में उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,, सुनैना पूरी तरह से नहाने में मस्त थी उसे बिल्कुल भी आभास नहीं हो रहा था कि,,, ठीक उसकी आंखों के सामने ही उसका बेटा उसे छुप कर देख रहा है और अगर शायद यह पता चल जाता तो वह फिर से पानी की गहराई में जाकर अपने नंगे बदन को छुपा लेती,,,।
सूरज के तन बदन में आग लग रही थी रात भर मुखिया की बीवी की मदद कर देने वाली जवानी को भोगने के बाद एक बार फिर से उसकी मां चोदने के लिए आतुर हो रहा था तड़प रहा था,,, लेकिन यहां पर ऐसा कोई जुगाड़ नहीं था इसलिए वह अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा रहा था,,, बड़े से पत्थर के पीछे छुपकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी को देख ही रहा था कि उसकी मां पानी में फिर से अपना क्रिया कलाप दिखाते हुए,,, दूसरी तरफ घूमने लगी और सूरज का दिन जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां दूसरी तरफ घूमेगी तो उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी आंखों के सामने नजर आ जाएगी और वह अपनी मां की नंगी गांड को देख सकेगा लेकिन उसकी गांड देख पाता इससे पहले उसकी मां एक बार फिर से पानी के अंदर डुबकी लगा दी,,,, सूरज का हाल बेहाल हुआ जा रहा था वह अपनी मां की गांड को देखने के लिए तरस रहा था,,, तभी कुछ ही क्षण उसकी मां पानी में डुबकी लगाकर बाहर निकली और पूरी तरह से खड़ी हो गई और इस बार सूरज के दिल पर हथौड़े चलने लगे उसकी मां की नंगी गांड उसकी आंखों के सामने थी जिस पर पानी की बूंदे फिसल रही थी गांड की दोनों फांकों के बीच की गहराई इतनी गजब की थी कि सूरज का मन उस गहराई में डूब जाने को कर रहा था,, ,,, सूरज अपनी मां की गांड को देखा ही रह गया और इसी अवस्था में सूरज की मां दो-तीन बार पानी में डुबकी लगाई और खड़ी हुई यह नजारा पूरी तरह से सूरज को उत्तेजित कर गया था,,,,।
सूरज का मन अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां को नंगी देखकर मुठिया मारने को कर रहा था,,, और ऐसा करने के लिए वह अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकाल भी लिया था लेकिन उसकी मां नहा चुकी थी और पानी से बाहर आ रही थी और अब सूरज का वहा खड़े रहना बिलकुल भी उचित नहीं था,,, इसलिए वह वापस पजामा पहन कर दबे पांव वहां से पीछे आ गया,,,।
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