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Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

अपडेट........ 40

अभी तीनो स्टेशन ही पहुचे ही थे की पापा के फोन पर अजय मामा की कॉल आ जाती है ....

अजय मामा ... जीजा जी कहाँ तक पहुच गये

पंकज.. स्टेशन पर है क्या हुआ

अजय मामा .. आपके निकलते ही मम्मी की तबीयत ज़्यादा खराब हो गई ...

पंकज... ओह्ह्ह नो

सुषमा...क्या हुआ जी

पंकज... तुम्हारी मम्मी की तबीयत फिर से बिगड़ गई ऐसा करो तुम वापस अपनी मम्मी के यहाँ चली जाओ डॉली और में घर चले जाते है ....

सुषमा... जी ठीक है

और सुषमा टॅक्सी पकड़ कर वापस अपनी मम्मी के पास चली जाती है ...

डॉली सोचती है नानी का तो बहाना है

मामा के साथ अपना मूह काला कराएँगी..

पंकज और डॉली रेलवे स्टेशन पर बँच पर बैठे ट्रेन का वेट कर रहे थे...

काफ़ी देर इंतज़ार करने के बाद भी जब ट्रेन नही आई..

पंकज.. डॉली बेटा तुम यही बैठो में पूछ कर आता हूँ ट्रेन क्यूँ लेट है

डॉली.. ठीक है पापा

और पापा उठ कर इंक्वाइरी ऑफीस में जाकर पता करते है ..

पंकज... सर नोएडा जाने वाली ट्रेन कब तक आयगी

आदमी ... सर रेलवे लाइन पर काम चल रहा है .. ट्रेन आने में 4-5 घंटे भी लग सकते है

पंकज... ओह्ह्ह

और पंकज वापस डॉली के पास आ जाता है

डॉली..क्या हुआ पापा

पापा .. बेटा ट्रेन आने में 4-5 घंटे लग सकते है क्यूँ ना हम भी वापस तेरे मामा के यहाँ चले ..

डॉली.. नही पापा मेरा वहाँ जाने का बिल्कुल मा\न नही है ...

पंकज.. क्यूँ मन नही कर रहा बेटा क्या बात हो गई ...

डॉली अपने पापा की बात का कोई जवाब नही देती बस चुप चाप बेंच पर बैठी रहती है ...

पंकज .. डॉली बेटा कुछ परेशान सी दिख रही है मामा के यहाँ कोई बात हो गई क्या .. ..

डॉली..नही पापा ऐसी कोई बात नही है

पंकज.. में तेरा बाप हूँ बेटा अबसे पहले कभी तेरे चेहरे पर ऐसी उदासी नही देखी.. ज़रूर कोई बात है जो मुझसे छुपा रही है ...

डॉली अपने पापा से कैसे बताए की वो इसलिए परेशान है की में आपकी नही मामा की संतान हूँ ...

पंकज को भी लगता है ज़रूर डॉली कोई बात उससे छुपाने की कोशिश कर रही है ...

पंकज.. डॉली बेटा उठो सामने गेस्ट हाउस में चलते है 4-5 घंटे क्या यही बेंच पर बैठे रहेंगे ...

डॉली भी अपना बॅग लेकर उठ जाती है ...

गेस्ट हाउस पहुच कर पंकज डॉली को अपनी कसम देता है ....

पंकज ..तुझे मेरी कसम है बता क्या बात है
 
अपडेट.....41

डॉली.. पापा में आपसे बहुत प्यार करती हूँ ऐसे कसम वसं मत दिलाया करो ...

पंकज...डॉली बेटा में भी तुझसे बहुत प्यार करता हूँ ..और अपनी सबसे प्यारी गुड़िया को उदास होते कैसे देख सकता हूँ...

डॉली.. पापा एक बात पुछु आपसे

अगर आपको मेरे बारे में कोई ग़लत बात

पता चले तब भी मुझे ऐसे ही प्यार करोगे ..

डॉली का कहने का मतलब

(अगर आपको ये पता चले में आपका नही किसी और का खून हूँ तो क्या तब भी ऐसे ही प्यार करोगे )

मगर पंकज डॉली का कुछ और ही मतलब समझ जाता है ...

पंकज... कही मेरी बेटी को किसी से प्यार वियर तो नही हो गया ..

डॉली बेटा मुझे तुझपर पूरा भरोसा है तू कोई ग़लत फेसला नही लेगी ..ऐसी बात है तो मुझे बता में तेरी शादी तेरी मर्ज़ी से करा दूँगा...

डॉली सोचती है उफ़फ्फ़ पापा मेरी बात को कहाँ से कहा ले गये......

डॉली अपने पापा के सवालो को उल्टा उन्ही पर डाल देती है ...

डॉली... अच्छा पापा आप बताओ आपकी शादी कैसे हुई लव मॅरेज या अरेंज

मॅरेज

पंकज.. बेटा तेरी मा से तो मेरी शादी अरेंज ही हुई थी .. मगर ...

डॉली...मगर क्या पापा

पंकज...मुझे भी किसी से प्यार हो गया था ..

डॉली पापा के मूह से ये सुनते ही उछल पड़ती है

डॉली... ऊओ ववूऊओव पापा आपकी भी एक लव स्टोरी है ...फिर तो में आपकी लव स्टोरी ज़रूर सुनूँगी ..सुनाए ना पापा

पंकज.. ठीक है डॉली बेटा में तुझे सब बताता हूँ मगर इसके बारे में सुषमा को भी नही मालूम..प्लीज़ मेरा ये राज अपने तक ही रखना ....

डॉली.. ओह्ह्ह पापा आपको मुझपर भरोसा नही क्या ..

पंकज.. हा बेटा खुद से भी ज़्यादा तुझपर भरोसा है.. अच्छा ठीक है बताता हूँ ..

डॉली ठीक बिल्कुल पापा के बराबर में बैठ जाती है ...

पंकज... मुझे याद है ये कहानी स्कूल टाइम में ही शुरू हो गई थी ...

डॉली अपने पापा की बाते बड़े गोर से सुनने लगती है ...

पंकज... हम दोनो साथ साथ ही स्कूल जाते साथ साथ लंच करते और एक दूसरे के हाथो से खाया करते ...

डॉली... वूओव सो रोमॅंटिक पापा

पंकज.. एक बार क्या हुआ हमारे स्कूल के लड़के ने राआआ

डॉली.. क्या हूँ पापा बोलते बोलते अटक क्यूँ गये ...

पंकज.. बेटा में तुम्हे उसका नाम नही बता सकता.. ऐसा करता हूँ रानी कहकर बताता हूँ ...

डॉली मुस्कुराते हुए ...राजा की रानी

पंकज.. स्कूल के एक लड़के ने रानी का हाथ पकड़ लिया और रानी को गंदे गंदे कॉमेंट्स देने लगा. जेसे ही मुझे इस बात का पता चला अगले दिन मेंने उस लड़के को रास्ते में रोक लिया ..

में ... तेरी हिम्मत कैसे हुई बे रानी को गंदे कॉमेंट्स करने की

लड़का.. तू कौन होता है बे मुझे रोकने वाला ..
 
मुझे उसकी बातो से और भी गुस्सा आ गया और मेंने उस लड़के के पेट में ज़ोर से घुसा मार दिया ...

तभी पीछे से उसका दोस्त आ जाता है और मुझे पीछे से पकड़ लेता है ...

मगर में उसको ऐसा दाँव मारता हूँ वो लड़का चारो खाने चित हो जाता है ...

डॉली... ओह्ह्ह वूओव पापा आप तो बॉक्सिंग भी करते थे..फिर क्या हुआ

पंकज.. फिर पहले वाला लड़का पीछे से आकर मेरे ऊपर चाकू से हमला कर देता है ...

डॉली... ऊहह गॉड कुत्ता कमीना पीछे से वार करता है ...

फिर क्या हुआ पापा

उसके बाद मुझे हॉस्पिटल में होश आया था ..

रानी भी वही थी उसकी नम आँखे देखकर लग रहा था..मेरी चोट का दर्द मुझसे ज़्यादा उसे हो रहा था ...

डॉली... पापा जब आप हॉस्पिटल में थे घर के सभी लोग भी वही पर होंगे रानी वहाँ कैसे..

पापा ये रानी कौन थी

पंकज.. बेटा बस रानी के बारे में तुझे नही बता सकता ..

डॉली... अच्छा पापा फिर क्या हुआ

पंकज.. उसके बाद तो रानी मेरी ऐसी दीवानी हो गई थी जब तक मुझे ना देख ले कुछ भी नही खाती थी ....

डॉली.. अच्छा पापा ये तो बताओ क्या रानी आपके साथ ही रहती थी ...

पंकज.. हा बेटा हम साथ ही रहते साथ ही खाते पीते ...

डॉली को समझ नही आ रहा था पापा रानी के साथ साथ रहते ..आख़िर ये रानी कौन थी ..

डॉली.. फिर क्या हुआ पापा आप दोनो में इतना प्यार इतना विश्वास जेसे एक दूजे के लिए ही बने हो.. फिर आपका प्यार अधूरा कैसे रह गया .....

पंकज.. बेटा ये प्यार अधूरा तो रहना ही था रानी के लिए रिश्ते जो आने लगे थे ..

रानी ने कितने ही रिश्ते ठुकरा दिए मगर

रानी के रिश्ते ठुकराने से पापा का गुस्सा बढ़ता जा रहा था आख़िर पापा की ज़िद के आगे रानी को झुकना पड़ा .. और रानी ने शादी के लिए हा कर दी .... रानी की शादी के साथ ही हमारे प्यार की चिता भी जल जाती है ...

बिदाई के वक़्त उसकी आँखो से जो आँसू निकल रहे थे वो बाबुल से बिछड़ने की जगह हमारे प्यार की चिता जलने के अनसो थे ...

डॉली... उफफफफ्फ़ पापा मेरी तो कुछ समझ नही आ रहा आपके सामने रानी की शादी हो जाती है और आप बिना कुछ कहे देखते रहते है .

पंकज..में मजबूर था बेटा

डॉली..ऐसी क्या मजबूरी थी पापा ...

पंकज..में नही बता सकता डॉली बेटा ..

डॉली.. आपको मेरी कसम पापा बताओ

ये रानी कौन थी ...
 
.अपडेट.. 42...

पंकज... बेटा मुझसे कसम खाने को मना कर ती है और खुद मुझे कसम दे रही है ..

डॉली... पापा आपने भी तो मुझे इतने सस्पेंस में डाल दिया अब प्लीज़ बता दीजिए मुझसे रहा नही जायगा ...

पंकज ... और अगर मेंने तुझे रानी के बारे में बता दिया तो शायद में तुझसे नज़र नही मिला पाउन्गा ...

डॉली... ओह्ह्ह गुड आप फिर से मुझे सस्पेंस दे रहे है.. अब चाहे कुछ भी हो मुझे आप रानी के बारे में बताओगे..

डॉली पापा पर अपना हक़ सा जताते हुए ...

पंकज... तेरी ज़िद के कारण बता रहा हूँ

मगर मेरा ये राज सिर्फ़ तुझ तक रहेगा प्लीज़ किसी को मत बताना ...

डॉली ... आप मुझपर भरोसा रखिए पापा आपका राज मेरे सीन में महफूज रहेगा ...

पंकज को लगता है डॉली को बताने में कोई हर्ज नही है आख़िर डॉली मेरी बेटी ही तो है ...

पंकज...तो सुन बेटा ...

डॉली भी अपनी सांस रोके रानी का नाम सुनने को बेताब थी ...

पंकज... में जिससे प्यार करता था वो और कोई नही तेरी बुआ यानी रेणुका दीदी थी ...

ये सुनते ही डॉली को ज़ोर का झटका लगता है और डॉली की आँखे खुली की खुली रह जाती है ....

.

डॉली ..... क्याआआआआआअ आप्प्प और बुआ

ऊओह मयययी गूऊद्ददड ...

डॉली को तो पहले ही मम्मी और मामा के संबंध से झटका लग चुका था ..

अब एक और झटका उसके पापा ने दे दिया था..

डॉली के तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी ..

मम्मी के संबंध देख डॉली को लगा था.. एक पापा ही है जिनके गले लग कर रो सकु मगर पापा भी मम्मी जेसे ही निकले ....

कमरे में बिल्कुल खामोशी चाय थी ..

ना पापा ही कुछ बोल रहे थे और ना डॉली ही कुछ बोल रही थी ....

शायद पापा को भी लगने लगा था डॉली को अपना राज बताकर बहुत बड़ी ग़लती कर दी ... इसलिए पापा खामोश थे ...

काफ़ी देर बाद खामोश रहने के बाद डॉली को लगता है पापा शर्मिंदा हो रहे है.. मेरे फोर्स करने पर ही तो बताया था पापा ने ..

और ये सोचकर ही डॉली खामोशी तोड़ती है ...

डॉली .. पापा आपको बुआ से ही प्यार क्यूँ हुआ था ...

पंकज... इस बात का में क्या जवाब दूँ..

बस एक गाना सुनता हूँ ...

प्यार किया नही जाता हो जाता है

दिल दिया नही जाता खो जाता है ...

डॉली... उफफफ्फ़ पापा क्या रेणुका बुआ भी आपको इतना ही प्यार करती थी ...

पंकज... शायद मुझसे भी ज़्यादा ...

डॉली... किस हद तक चाहती थी वो आपको .

डॉली जाने अपने पापा से क्या सुनना चाह रही थी हर सवाल के बाद एक और सवाल पूछने लगती थी ...

पंकज..प्यार में कोई हद नही होती

डॉली ... ओह्ह्ह गुड यानी आप दोनो सारी हद पर कर चुके थे.. ये जानते हुए भी की आप दोनो में रिस्ता क्या है ...

पंकज फिर से खामोश हो जाता है.. शायद डॉली ने रिश्ते की बात जो कर दी थी ....

डॉली.. अच्छा पापा एक लास्ट सवाल और पूछती हूँ..

क्या शादी के बाद भी आप दोनो ने हद परकरने की कोशिश की..

पंकज... नही बेटा शादी के बाद में तेरी कसम खाकर कह सकता हूँ मेंने तेरी मा के अलावा.. हद पार करना तो दूर किसी को उस नज़र से देखा भी नही ......

पापा के इस जवाब से डॉली को बड़ा सकूँ सा मिलता है. उसकी नज़र में अपने पापा फिर से बेस्ट पापा लगने लगते है ...

और डॉली अपने पापा की तरफ देखकर मुस्कुरा जाती है .. जेसे उससे अपने पापा की बातो से अब कोई शिक़वा शिक़ायत नही थी ...

डॉली को मुस्कुराते हुए देखकर पंकज भी मुस्कुरा जाता है जेसे अब सबकुछ पहले जेसा नॉर्मल हो गया हो ....

पंकज... डॉली बेटा हमे यहाँ काफ़ी देर हो गई अब चलना चाहिए ..

शायद ट्रेन भी आने वाली होगी ...

डॉली एक बार फिर मुस्कुरा कर ...

चलिए पापा

और दोनो स्टेशन पहुचते है तभी नोएडा जाने वाली ट्रेन भी आ जाती है ..

डॉली अपने पापा के साथ नोएडा आ जाती है...

रात के लगभग 11 बज चुके थे घर का गेट राज खोलता है.....

राज पापा और डॉली को ही देखकर पूछता है

मम्मी नही आई ..

पंकज..बेटा तेरी नानी की तबीयत अभी ठीक नही है इसलिए उन्ही के पास रुक गई ...

राज ... ओह

डॉली राज से पूछती है

डॉली.. राज ज्योति सो गई क्या बड़ी भूक लगी है कुछ खाने को होगा..

राज .. दीदी ज्योति तो जाने कब की सो गई है

खाने में उसने राजमा चावल बनाए थे...

डॉली अपने पापा से कहती है ..

डॉली... पापा आप फ्रेश हो जाइए तब तक में खाना गरम कर देती हूँ ...

और पापा फ्रेश होने के लिए अपने रूम में चले जाते है ...

तभी राज अपनी दीदी से कहता है ...

राज ... दीदी आप भी फ्रेश हो जाइए आपके लिए खाना में गरम कर देता हूँ .....

डॉली को राज पर बड़ा प्यार सा आ जाता है और

डॉली राज के गाल पकड़ कर

डॉली... ओह्ह्ह सच मेरा भाई कितना अच्छा है मेरा इतना ख़याल रखता है ...

और डॉली मुस्कुराती हुई फ्रेश होने चली जाती है ... ....

पहले मम्मी फिर पापा का राज जानकर

डॉली के दिल में भी राज के प्यार की चिंगारी

सुलगने लगी थी .......
 
अपडेट....43...

डॉली अपने रूम में पहुचती है

ज्योति बॅड पर लेटी सो रही थी

डॉली अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में पहुचती है और शवर लेती है और फिर

गीले गीले बदन के साथ अपने रूम में आकर अपने लिए कपड़े देखने लगती है

डॉली को ज्योति का एक बारीक सा लोवर नज़र आ जाता है ...

लोवर देखकर डॉली के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ जाती है और डॉली ज्योति का वही लोवर बिना पेंटी के पहन लेती है...

लोवर इतना बारीक था की गीला जिस्म होने के कारण टाँगों से चिपक जाता है ..

जिससे डॉली की टाँगे बिल्कुल साफ नज़र आ रही थी मगर डॉली को इसकी कोई परवाह नही थी...

और डॉली ज्योति के कपड़ो में से ही वाइट कलर का महीन सा टॉप बिना ब्रा के पहन

लेती है ...

और फिर यू ही बिखरे हुए गीले बालो में डॉली ऐसे ही अपने रूम से निकल कर

किचिन में पहुचती है ...

तब तक राज खाना गरम कर चुका था ...

डॉली...राज हो गया खाना गरम ....

राज .... हो गया दीदीईईईईईडी

राज जेसे ही पलट कर अपनी दीदी को देखता है राज की आवाज़ ही अटक जाती है ...

बिखरे बिखरे गीले बालो में दीदी बिल्कुल हसीन की पारी लग रही थी बारीक से टॉप में बिन ब्रा के चुचियों के उभारों की शेप राज की आँखो के सामने क्लियर नज़र आ रही थी .....

उफ़फ्फ़ राज तो अपनी दीदी का ये रूप देखकर साँसे ही लेना भूल गया था ....

डॉली... क्या हुआ भाई ऐसे आँखे चौड़ी चौड़ी करके मुझे क्यूँ देख रहे हो ...

राज ... ओह्ह्ह दीदी कसम से क्या हॉट लग रही हो..आपकी कसम दीदी में तो सांस लेना ही भूल गया हूँ ....

डॉली... बस बस ज़्यादा फांके को रहने दे ...

ये बता पापा ने खाना खा लिया ..

राज ... जी दीदी पापा ने खाना अपने कमरे में ही खा लिया ...

डॉली... ठीक है भाई तुम मेरे लिए भी खाना रूम में ही ले आओ...

राज ...ओके दीदी बस दो मिनिट में लाया...

और डॉली मुस्कुराते हुए अपनी अदाओं से राज को घायल करती हुई कूल्हे मटकाती

रूम में चली जाती है ...

डॉली का जादू राज पर पूरी तरह चल चुका था..

राज जल्दी से प्लेट में खाना लेकर रूम में पहुचता है ..

दीदी राज का मोबाइल लिए हुए बॅड पर लेटी थी ..

राज .. मेरे मोबाइल में क्या देख रही हो दीदी ...

डॉली... देख रही हूँ कही मेरा भाई ऐसी वेसी मूवी तो नही देखता ...

राज ... देखता भी हूँ तो दीदी आपको नही मिलेगी ....

डॉली... ऐसे कहाँ छुपा कर रखी है ..

राज ... दीदी आजकल ऑनलाइन का ज़माना है

जब भी दिल करता है ऑनलाइन देख लेता हूँ ...

डॉली...इसका मतलब राज तुम ऐसी मूवी देखते हो लगता है तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी ...

राज ... शादी भी कर लेंगे पहले खाना तो खा लो ..

डॉली.. राज आज तो अपने हाथ से खिला दो ..

राज .. क्या बात है दीदी आज मुझे पर बड़ा प्यार आ रहा है ..

डॉली... मुझे तो तुझपर हमेशा ही प्यार आता है ...

राज अपने हाथ से एक नीवाला बना कर डॉली को खिलाता है ..डॉली राज की आँखो में बड़े प्यार से देखते हुए नीवाला खाने लगती है ...

राज के हाथ से दो चार नीवाले खाकर डॉली भी राज के लिए नीवाला बनाती है और फिर अपने हाथ को राज की तरफ करती है ..

राज भी अपनी दीदी की आँखो में खोया फॉरन अपना मूह खोल देता है ..
 
खाना खाकर राज सारे बर्तन टेबल पर रखता है और दीदी को एक ग्लास में पानी देता है ...

खाना खिलाने के जो सारे काम डॉली ज्योति किया करती थी...

आज अपनी दीदी के लिए राज ने खुशी खुशी किए थे..

कितना प्यार करता है राज दीदी से

और अब दीदी को देखकर ऐसा लग रहा है

जेसे उसे राज से भी ज़्यादा प्यार हो गया था ...

डॉली पानी पीकर राज को ग्लास पकड़ाती है

राज दीदी का बचा झूठा पानी एक घूट में पी जाता है ....

डॉली... भाई आज रात तुम्हारे साथ सोने को मन कर रहा है ...

राज ...ओह्ह्ह दीदी तुमने मेरे मन की बात कह दी ...

राज फुर्ती से दरवाज़ा लॉक करता है और लाइट भी ऑफ करके दीदी के बगल में लेट जाता है ...

राज ... दीदी मेरा दिल कर रहा है आपको कस कर अपनी बाँहो में भर लू ..

डॉली... भर लो भाई मना किसने किया है ..

दीदी के मूह से ये सुनते ही राज फॉरन डॉली से लिपट जाता है डॉली भी टूटे पत्ते की तरह राज की बाँहो में आ जाती है ...

राज ... ऊहह दीदी आई लव यू आपको बहुत मिस किया मेंने आपके बिना बिल्कुल दिल नही लगता आई लव यू दीदी ...

डॉली... लव यू टू राज मुझे भी तेरी बहुत याद आई. आई लव यू राज...

डॉली और राज के होंठ आपस में मिलने को बेकरार होने लगते है ...

डॉली अपने होंटो को राज के होंटो से मिला देती है ..और राज जेसे इसी पल का इंतज़ार कर रहा था..

दीदी के होंठ मिलते ही राज उनका

मीठा मीठा रस पीने लगता है ...

डॉली भी राज को किस करते हुए आहिस्ता आहिस्ता होंटो को चूस रही थी ...

शायद डॉली को भी राज के होंटो से शहद की मिठास मिल रही थी ...

राज के हाथ डॉली के टॉप पर चल रहे थे

बिना ब्रा के उभारों का कड़ा पन राज को दीवाना बना रहा था काफ़ी देर तक टॉप के ऊपर से ही राज दीदी के बूब्स सहलाता रहा ....

डॉली की चिंगारी भड़क कर शोला बन चुकी थी इसलिए डॉली के हाथ राज के लंड तक पहुच चुके थे ....

जाने डॉली आज कितना आगे बढ़ना चाह रही थी और डॉली राज का लोवर उतार देती है ..

और राज का नंगा लंड दीदी के हाथो में क़ैद हो गया था ...

डॉली आहिस्ता आहिस्ता राज के लंड को सहलाने लगती है..

शायद डॉली के मन में उससे अपने अंदर लेने की कल्पना जागने लगी थी ...

और अगले पल डॉली अपना लोवर और टॉप उतार कर राज के नीचे आ जाती है ....

राज दीवानों की तरह डॉली के जिस्म को चूमने लगता है डॉली सेक्स की आग में पूरी तरह सुलगने लगी थी ...

चूत से पानी रिश रिश कर टपक रहा था

डॉली से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था ...

डॉली... राज मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए

आज मुझे इतना प्यार करो के ज़रा भी दूरी बाकी ना रह जाय मुझमे समा जाओ मुझे

पूरी तरह अपना बनो लो राज......

राज को दीदी की आवाज़ में इतनी तड़प दिख रही थी की अगर इस वक़्त राज अपना लंड चूत में रखकर धक्का मारे तो एक ही झटके में सारा उतार जाय......

मगर राज डॉली दीदी से सच्चा प्यार करता है और अपना पहला प्यार बहुत ही यादगार बनाना चाहता था..इसलिए राज दीदी की चूत पर लंड की जगह अपनी जीब रख देता है ...

डॉली की आँखे बंद थी जेसे ही राज की जीब डॉली की चूत को टच होती है ..

डॉली को लगता है राज ने अपना लंड चूत पर रख दिया डॉली अपने हाथो से बॅड की चादर पकड़कर आने वाले झटके का इंतज़ार करने लगती है .....

मगर ये क्या जेसे ही राज की जीब ने डॉली की चूत को चाटना शुरू किया डॉली अपनी आँखे खोलकर राज को देखती है ....

और तड़पति मचलती हुई राज से कहती है...

आअहह आईईीीइसस्शह ऊहह सस्स्स्स्स्स्सस्स सस्स्स्सीईई

उफफफफ्फ़ राज मुझसे बर्दास्त नही हो रहा प्लीज़ कुछ करो ....

मगर राज कंटिन्यू दीदी की चूत को चाट्ता जा रहा था ...
 
डॉली को लगता है राज ने अपना लंड चूत पर रख दिया डॉली अपने हाथो से बॅड की चादर पकड़कर आने वाले झटके का इंतज़ार करने लगती है .....

मगर ये क्या जेसे ही राज की जीब ने डॉली की चूत को चाटना शुरू किया डॉली अपनी आँखे खोलकर राज को देखती है ....

और तड़पति मचलती हुई राज से कहती है...

आअहह आईईीीइसस्शह ऊहह सस्स्स्स्स्स्सस्स सस्स्स्सीईई

उफफफफ्फ़ राज मुझसे बर्दास्त नही हो रहा प्लीज़ कुछ करो ....

मगर राज कंटिन्यू दीदी की चूत को चाट्ता जा रहा था ...

डॉली की सिसकियाँ लगातार बढ़ती जा रही थी

आआआआआआअ आआआआआआअहह

सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईईईई ऊओह र्राआआआआअजजजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज

डॉली का जिस्म अकड़ने लगता है और अगले पल डॉली झड़ जाती है राज बड़े प्यार से अपनी दीदी का सारा रस गटक जाता है ....

डॉली काफ़ी देर यू पड़ी रहने के बाद राज से बोलती है ...

डॉली... राज में तो आज कली से फूल बनना चाह रही थी तुमने मुझे वो सुख क्यूँ नही दिया ....

राज ... दीदी में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ

और में चाहता हूँ ...जब हमारा पहला प्यार हो तुम दुल्हन की तरह फूलो से सजे बॅड पर घूँघट ओढ़े अपनी नज़रे झुकाए शरमाये मेरा इंतज़ार कर रही हो में अपना प्यार इतने शानदार तरीके से करना चाहता हूँ की सारी उमर याद रहे ...

डॉली राज की बाते सुन फिर से राज को गले लगा लेती है ...

डॉली... ऊहह राज इतना प्यार करते हो मुझसे ...

राज ... हा दीदी अगर मेरे बस चले तो में तुम्हे स्विट्ज़र्लॅंड ले जाकर तुमसे प्यार करूँ .....

डॉली... ओह हो राज फिर तो ज़रूर तुम मुझे बूढी करके पहला प्यार दोगे ....

और इतना कहकर दोनो खिलखिलाकर हँस पड़ते है ...

रात के लगभग 1 बज चुका था

राज और डॉली दोनो एक दूजे की बाँहो में लिपटे हुए सो जाते है .........

सुबह डॉली ज्योति के उठने से पहले ही अपने रूम में चली जाती है ....

_________________

उधर नेहा की तड़प भी राज के लिए बढ़ती जा रही थी ..और जब नेहा से राज की दूरी बर्दास्त करना मुश्किल हो जाता है तो वो नाश्ते के वक़्त अपने मम्मी पापा से राज के बारे में बता देती है ...

नेहा .. डॅडी में और राज एक दूसरे से प्यार

करते है और हम शादी करना चाहते है ...

डॅडी... क्याअ मेरी बेटी इतनी बड़ी हो गई

जिसने अपने लिए खुद ही लड़का ढूँढ लिया ...

नेहा को लगता है शायद डॅडी को गुस्सा आ गया है ..

मगर तभी नेहा के डॅडी बोलते है ...

डॅडी... ठीक है में शाम को 4 बजे घर आ जाउन्गा तुम बुला लेना राज को में बात करूँगा उससे ....

नेहा अपने डॅडी की बात सुनते ही उछलकर अपने डॅडी के गले लग जाती है ....

.......
 
अपडेट.....44....

नेहा को अब लगते है उसकी शादी का सपना जल्द साकार होने वाला है ...

नेहा के मन में शादी के लड्डू फूटने लगे थे ...

नेहा अपनी खुशी राज से बताने के लिए फॉरन अपने रूम में जाकर राज को कॉल करती है ..

राज इस वक़्त छत पर टहलते हुए ये सोच रहा था अगर दीदी ओफिस गई तो ज़रूर संजीव रॉय दीदी को अपने पास रोकने के लिए कहेंगे..मुझे दीदी को ऑफीस जाने से किसी भी हॉल में रोकना पड़ेगा ....

मगर राज की कुछ समझ नही आ रहा था

दीदी से किस तरह मना किया जाय ...

तभी उसको नेहा की कॉल आती है ...

राज नेहा की कॉल रिसीव करता है ...

उधर से नेहा बड़े रोमेंटिक अंदाज़ में राज से बात करती है ...

नेहा ... हेल्ल्लूऊऊ माइ स्वीट हार्ट कैसे हो...

राज ... क्या बात है नेहा.. आज सुबह सुबह बड़े मूड में लग रही हो ..

नेहा ...राज तुम्हे मेरे मूड की परवाह ही नही है ..पता है मुझे तुम्हारी दूरी बर्दास्त नही होती ...

राज ... ओह्ह्ह्ह्ह तो मेरी जान को आज सुबह सुबह ही प्यार चाहिए ...

नेहा ... मुझे तो तुम्हारा प्यार सुबह शाम हर वक़्त चाहिए ..

मगर इस वक़्त मेंने तुम्हे फोन पता है किसलिए किया है ..

राज ...तुम्ही बता दो डार्लिंग

नेहा ... तुम सुनोगे तो खुशी से उछाल पड़ोगे...

राज ... अच्छा जी ......

नेहा ... मेरे डॅडी ने तुम्हे शाम को घर बुलाया है. .....

राज .. क्यूँ बुलाया है तुम्हारे डॅडी ने......

इस सकशन पर नेहा को एक गाना याद आ जाता है..नेहा राज को वही गाना गेट हुए बताती है .....

नेहा ... शायद मेरी शादी का ख़याल दिल में आया है इसीलिए डॅडी ने मेरे तुम्हे चाय पे बुलाया है .....

राज भी नेहा को चिड़ाते हुए

गाने का जवाब गाना

गाकर देता है ...

राज. ...पंछी अकेला देख मुझे

तुमने जाल बिछाया है ..

इसीलिए डॅडी ने तेरे..

मुझे चाय पे बुलाया है ...

नेहा ...नो नो.

शायद मेरी शादी का ख़याल

दिल में आया है

इसी लिए डॅडी ने मेरे

तुम्हे चाय पे बुलाया है...

ठीक तुम 4 बजे घर चले आना

मेरा हाथ माँग लेना

ज़रा ना शरमाना...

राज ...मेरे साथ सात फेरे

सपने देख रही हो

खुली हुई धूप में

तारे देख रही हो .

नही नही बाबा

चाय नही पीना ...

नही नही बाबा

माफ़ कर देना ...

प्यार तो ठीक है.

शादी से डरते है..

शादी से पहले तो

सब अच्छा लगता है

सारी उमर को फिर

रोना पड़ता है ....

नेहा .... इन्ही अदा ओं पर तो हे

अपना दिल आया है

इसी लिए डॅडी ने मेरे

तुम्हे चाय पे बुलाया है .....

राज ...पंछी अकेला देख मुझे

तुमने जाल बिछाया है

इसीलिए डॅडी ने तेरे

मुझे चाय पे बुलाया है ...

नेहा ..दिल्लगी ना करो

छेड़ो ना हमको सनम

मेरी बात मान लो

तुमको मेरी कसम .

नेहा .... राज आओगे ना ...

राज.... ............ आउन्गा ..

नेहा राज के मूह से आने का सुन एक दम खुश हो जाती है ...

नेहा ... ठीक है में 4 बजे तुम्हारे घर पे इंतज़ार करूँगी ...

राज नेहा से 4 बजे आने का वादा करके फोन काट देता है .......

_______________
 
थोड़ी देर बाद डॉली भी राज को दौड़ती हुई ऊपर आती है ...

जेसे ही डॉली को राज दिखाई देता है ...

डॉली... राज आज ऑफीस नही जाना क्या ...

राज .. दीदी आज जाने का बिल्कुल मूड नही है ...

डॉली... अगर ऑफीस जाने का मूड नही है तो क्या करने का मूड हो रहा है ... .

राज ... तुमसे प्यार करने का मूड है ...

डॉली... कहाँ करते हो प्यार भी तुम..

अधूरा छोड़ देते हो भाई ..

राज ... दिल तो ऐसा ही कर रहा है दीदी

आज तुमको ऐसी जगह ले जाऊं जहा तुम्हारे मेरे सिवा कोई ना हो...और तुम्हे जी भर बस प्यार ही प्यार करूँ ...

डॉली... क्या ऐसी भी कोई जगह है राज ...

राज .. चलो दीदी गोआ चलते है और अपना हनिमून मनाते है ....

डॉली .. तुम ना बिल्कुल पागल हो भाई बस फेंकते रहते हो ....

और डॉली राज की बातो को मज़ाक समझकर नीचे आ जाती है ...

राज आज ऑफीस जाना कॅन्सल कर देता है ....

ज्योति को कॉलेज के लिए आज नेहा भी लेने नही आई थी ...ज्योति नेहा से कॉलेज के लिए पूछती है ..तो नेहा ज्योति से कॉलेज ना आना का कह देती है ...

ज्योति भी आज कॉलेज जाना कॅन्सल कर देती है ....

पापा अपने काम पर चले गये थे ...

राज का दिन दीदी और ज्योति के साथ मीठी मीठी प्यारी प्यारी बातो में कब गुजर जाता है पता ही नही चलता ...

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शाम के लगभग 4 बजने वाले थे राज को नेहा के यहाँ जाने का प्रोग्राम याद आता है ...और राज एक घंटे में आना का बोलकर घर से निकल जाता है ...

राज जेसे ही नेहा के घर पहुचता है

नेहा लपक कर दरवाज़ा खोलती है.. नेहा जेसे राज का ही इंतज़ार कर रही थी....

और नेहा राज का हाथ थामे डॅडी के पास ले जाती है

नेहा के डॅडी राजेश और मम्मी किरण ड्रॉयिंग हॉल में बैठे थे ....

राज उन्हे नमस्ते करता है उनके सामने सोफे पर बैठ जाता है ...

राजेश.... नेहा बेटा तुम जाकर राज के लिए नाश्ता ले आओ ...

नेहा ... जी डॅडी

और नेहा नाश्ते के लिए किचिन में चली जाती है ...

राजेश ... नेहा बता रही थी तुम दोनो एक दूसरे को पसंद करते हो और शादी करना चाहते हो ...

राज ... जी अंकल

नेहा के डॅडी.... देखो बेटा नेहा मेरी इकलौती बेटी है और मेरा पास करोरो का कारोबार है जो सब उसी का है ....

और गाँव में खेती वाडी भी बहुत है .....

मेरा जो कुछ है वो सब नेहा का है ..

और में चाहता हूँ नेहा की शादी के बाद अपना सारा कारोबार उससे शॉप कर अपनी

बाकी ज़िंदगी गाँव की ताज़ा हवा में सांस लेकर गुजारू ...

राज जेसे ही नेहा के डॅडी की बाते सुनता है ...

उसे लगता है नेहा से शादी कोई घाटे का सौदा नही है बल्कि शादी करके तो

उसकी लाइफ पूरी तरह बदल जाएगी ...

राज को भी अमीर बनने के सपने आने लगे थे गाड़ी बांग्ला नोकर चाकर...

ऐश ही ऐश ...

राज पल भर में जाने क्या क्या खवाब देखने लगा था ...

तभी नेहा भी नाश्ता लेकर आ जाती है ....

नेहा के डॅडी राजेश नेहा से ....

डॅडी...नेहा बेटा हमे तुम्हारी पसंद पर नाज़ है राज बहुत ही अच्छा लड़का है ..

हमे तो राज एक नज़र में पसंद आ गया..

और आज से अभी से राज को हम ने अपना दामाद मान लिया है .......

अपने डॅडी की बात सुनकर नेहा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ..

राज ...मगर अंकल में अभी शादी नही कर सकता .......

राजेश...क्यूँ बेटा क्या मेंने कुछ ग़लत कह दिया ...

राज ... नही डॅडी ऐसी कोई बात नही है दरअसल मुझसे बड़ी मेरी एक डॉली दीदी है और में चाहता हूँ मुझसे पहले उनकी शादी हो जाए ...

अबकी बार राज नेहा के डॅडी को अंकल ना कहकर डॅडी कहता है ...

राजेश... ये बात तो हम तुम्हारी ये बात भी मान लेते है ...

मगर शादी ना सही तुम हमारी कंपनी तो संभाल सकते हो राज .....

राज ... जी डॅडी में कोशिश करूँगा ...

राजेश..तो कल से तुम अपनी कंपनी देखोगे....

राज ... ठीक है डॅडी में कल से आ जाउन्गा .....

राज की बातो से नेहा का दिल में राज के लिए और प्यार आ जाता है ...

जब राज नेहा से घर जाने के लिए कहता है ..तो नेहा राज से बोलती है ...

नेहा ... आज यही रुक जाओ ना

राज ...कुछ दिन की बात है नेहा फिर तो

तुम्हारे साथ ही रहना है ...

और राज नेहा से विदा लेकर घर की तरफ निकल पड़ता है ....

राज को लगता है उसकी किस्मत पलटने वाली है..और कल से ऑफीस जाने का चक्कर भी ख़तम .......
 
अपडेट... 45......

उधर डॉली और ज्योति घर पर अकेले थे ..

ज्योति .. दीदी चलो मूवी देखने चलते है....

डॉली.... तू ना एक दम कुछ भी प्रोग्राम बना लेती है ..अब कौन सा टाइम है मूवी देखने का ...

पापा और राज भी घर आने वाले है उन्हे डिन्नर कौन बना कर देगा ...

डॉली ज्योति को अपनी बात पर एक दम चुप कर देती है .....

थोड़ी देर बाद ...

ज्योति ....दीदी अगर मानो तो एक बात कहूँ ..

डॉली... अब क्या है ...

ज्योति .. एक गेम खेलते है लूडो ..

जो हार जायगा वो डिन्नर बनायगा और जो जीतेगा वो मूवी देखने जायगा .....

डॉली... अगर में जीत गई

तो क्या में अकेली मूवी देखने जाउन्गी ..

पागल है तू बिना कुछ सोचे कुछ भी बोलती है ...

ज्योति ... दीदी पूरी बात तो सुनो पहले ...

अगर आप गेम जीत ती हो .. तो राज भैया के साथ नाइट शो देखने आप चली जाना...

में हार जाउन्गी तो यही रुक कर डिन्नर तैयार करूँगी ....

ज्योति अपनी दीदी से ईस्तरहा से कहती है जेसे खेलने से पहले ही डॉली दीदी को गेम जिता दिया हो ....

और डॉली को भी ऐसा महसूस करा दिया जेसे डॉली ने गेम खेलने से पहले ही जीत लिया हो ..और डॉली लूडो गेम खेलने के लिए ज्योति से हा बोल देती है ....

डॉली... अच्छा चल मुझे तेरी शर्त मंजूर है आ खेलते है गेम ...

ज्योति के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ जाती है .....

और फाइ डॉली और ज्योति गेम खेलना स्टार्ट करती है ....

तभी राज भी घर पहुचता है डॉली और ज्योति को लूडो गेम खेलता देखकर उनके पास बैठ जाता है ...

ज्योति ... भैया प्लीज़ आप बीच में मत बोलना इस गेम में शर्त लगी है ...

राज ... अच्छा बाबा नही बोलूँगा मगर ये तो बताओ केसी शर्त लगी है दोनो में .....

ज्योति ... भैया शर्त ये है जो भी हारेगा वो खाना बनायगा और जो जीतेगा वो आपके साथ मूवी देखने जायगा ...

राज ... अच्छा जी तो इस शर्त में मुझे भी शामिल किया हुआ है तुम दोनो ने ...

डॉली... भाई गेम चाहे कोई भी जीते

तुम्हे तो जाना ही पड़ेगा ....

शर्त जानकर तो राज की वैसे ही बोलती बंद हो जाती है ...

अगर इस वक़्त दीदी की तरफ बोला तो ज्योति

रूठ जाएगी..

और फिर ज्योति को मनाना आसान नही होगा..

और ज्योति की तरफ से राज इसलिए नही बोल सकता..

क्यूँकी दीदी को हराना राज को अच्छा नही लगेगा ...

राज खामोशी से बैठकर दोनो का लूडो गेम देखने लगता है ...

राज का दिल चाह रहा था इस गेम को दीदी जीत जे... और फिर सिनिमा हॉल के अंधेरे में दीदी और में ....ऐसा सोचते ही राज के लंड में सरसराहट सी दौड़ जाती है ...
 
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