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Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

और फिर सनडे का दिन आ जाता है ...

आज राज को ज्योति के साथ नेहा के घर जाना है ...

ज्योति रेड टॉप ब्लॅक जींस में गजब लग रही थी राज भी ब्लू जींस और वाइट शर्ट बड़ा ही स्मार्ट लग रहा था

ज्योति राज के साथ बाइक पर बैठ नेहा के घर की तरफ निकल जाती है

रास्ते में राज ज्योति से कहता है

राज ...ज्योति मुझे तो वहाँ कोई जानता भी नही है बस तेरी खातिर जा रहा हू ..

ज्योति .. आपको भी जानते है

राज ...क्या

ज्योति ...हा वही जाकर देख लेना भैया

थोड़ी देर बाद नेहा का घर आ जाता है

क्या आलीशान कोठी थी और पार्टी भी शानदार लग रही थी राज तो देखता रह जाता है...

राज ...ज्योति ये घर है नेहा का

ज्योति ...जी भैया चलिए

राज बाइक खड़ी कर ज्योति के साथ अंदर पहुचता है घर मेहमानों से भरा पड़ा था ...

तभी राज की नज़र उतरती हुई एक लड़की पर पड़ती है पिंक कलर का लहनगा पहने बिल्कुल परी लग रही थी राज तो एक टक उस लड़की को देखता रह जाता है ...

ज्योति राज से भैया ये नेहा है

राज ... हाा

ज्योति ...भैया ये नेहा है

तभी नेहा की नज़र भी ज्योति और राज पर पड़ती है और अपना हाथ हिलाते हुए नेहा ज्योति के पास आती है...

नेहा ... हाई ज्योति वेलकम.. मुझे बहुत खुशी हुई तुम्हारे आने से ..

और फिर नेहा अपना हाथ राज की तरफ बढ़ाते हुए

नेहा ...हेलो राज कैसे हो तुम

राज नेहा के मूह से अपना नाम सुनकर चोंक जाता है ...और अपना हाथ आगे करते हुए नेहा से मिलता है ...

नेहा बड़े कॉन्फिडेंट से राज का हाथ थाम लेती है और राज की आँखो में देखती है ...

तभी नेहा के मम्मी पापा बहुत बड़ा सा केक काटना शुरू करते है ...

नेहा राज और ज्योति को लेकर उनके पास पहुचती है जेसे ही केक कटता है

सभी मेहमान तालियाँ बजा का सेलीब्रेट करते है ....

नेहा राज और ज्योति को अपने हाथ से केक खिलाती है ...

नेहा तो बस राज की खातिर में ही लगी हुई थी कभी मिठाई कभी कोल्डड्रिंक कभी रसमलाई .. नेहा राज की ऐसी दीवानी हो रही थी .. दिल तो कर रहा था आज ही राज को प्रपोज कर दे ...

नेहा ने ज्योति और राज को अपने मम्मी पापा से भी मिलवाया ..

नेहा के घर आकर राज को बड़ा अच्छा लग रहा था ...

मगर ज्योति को आज बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा था ..2 घंटे हो गये थे उसे नेहा के घर आए हुए .. इन 2 घंटो में राज ने एक बार भी ज्योति से बात नही की थी

... ज्योति को अपने भाई पर भी गुस्सा आ रहा था...ज्योति को लग रहा था अब यान्हा से चलना चाहिए ..

और ज्योति नेहा के पास जाती है ....

ज्योति ...अच्छा नेहा अब हम चलते है हमे देर हो रही है ...

नेहा .. अर्रे ज्योति कहा जा रही है अभी तो पार्टी शुरू हुई है ...

ज्योति ...नेहा मेरी तबीयत भी कुछ ठीक नही लग रही ...

नेहा ..क्या हुआ ज्योति

ज्योति ...थोड़ा सिर दर्द कर रहा है ...

नेहा ...अच्छा एक मिनिट रुक...

और नेहा ज्योति के लिए एक डब्बे में कुछ लाती है ..

ज्योति ...क्या है इस डब्बे में

नेहा ... मिठाई है

और फिर राज और ज्योति वहाँ से जाने लगते है ..

नेहा दोनो को बाहर तक छोड़ने आती है ..

......

रास्ते में

राज .... ज्योति तेरी फ्रेड तो बहुत अच्छी है

ज्योति चिडते हुए

ज्योति ...हा तभी उसको देखकर अपनी बहन को ही भूल गये..

राज ...क्या बात कर रही है

ज्योति ...और नही तो क्या आपने वहाँ पर एक बार भी बात की मुझसे जाओ में नही बोलती आपसे ...

राज. ..अर्रररी बाप रे बाप मेरी बहना इतनी नाराज़ हो गई मुझसे ....
 
अपडेट 13 ....

ज्योति बाइक पर खामोश बैठी थी

राज को ऐसा लग रहा था... जेसे वो बाइक अकेले ही चला रहा हो ज्योति के सरीर का कोई अंग राज को टच नही कर रहा था...

राज को भी अब अपनी ग़लती का अहसास होने लगा राज ज्योति को मनाने लगता है ..

राज ...ज्योति मेरी प्यारी बहन सॉरी यार तू तो मेरी अच्छी फ्रेड है ना इस बार अपने भाई को माफ़ कर दे आगे से ऐसा नही होगा ..

.

ज्योति ... भैया मेरा भी हक़ बनता है आप्पर मगर अब आपके पास मेरे लिए वक़्त ही नही है ..

राज ...नही ज्योति तू तो मेरी सबसे प्यारी बहन है ..

ज्योति ...बस रहने दो भैया में कुछ नही लगती आपकी ..आपकी तो प्यारी डॉली दीदी है

जिनके साथ सारा दिन रहते हो अपने साथ उनको डेली लेकर जाते हो ..

और एक में हू जो कॉलेज भी बस के धक्के खा कर जाती हू मगर तुम पर क्या फरक पड़ता है ...

पता है भैया कब से इस सनडे का इंतज़ार कर रही थी में..

.. मुझे नेहा के यहाँ आने की कोई खास खुशी नही थी मुझे तो बस आपके साथ रहने में ही खुशी होती है ...

अपने लिए ज्योति के दिल में इतना प्यार देखकर राज अपनी बाइक एक साइड करके रोकता है

राज ...ज्योति बता कहा चलना है जहा कहेगी तुझे ले चलूँगा आज पूरा दिन तेरे साथ रहूँगा ...

ज्योति ...नही भैया रहने दो बस अब घर चलिए ...

राज..ज्योति तेरा ऐसे मुरझाया हुआ चेहरा बिल्कुल भी अच्छा नही लगता तू तो खिलखिलाती हुई अच्छी लगती है

मेरे साथ मूवी देखेगी ...

ज्योति के चेहरे पर एक दम मुस्कान आ जाती है जेसे अब उसके दिल की तमन्ना पूरी हुई हो

राज ज्योति को लेकर मूवी थियेटर पहुचता है

जहा तीन मूवीस लगी हुई थी ज्योति और राज दोनो आपस में डीसक़स कर रहे थे कौन सी मूवी देखी जे एक हॉलीवुड मूवी भी लगी थी

राज ..ज्योति इंग्लीश मूवी देखेगी

ज्योति ..आक्षन मूवी लगती है चलो देखते है

राज मूवी की दो टिकेट ले लेता है और दोनो पॉपकॉर्न और कोल्डड्रिंक लेकर हॉल में पहुचते है ...और पिछली शीट पर बैठ जाते है

अभी मूवी स्टार्ट नही हुई थी ..

ज्योति मुस्कुरा कर राज की तरफ देखते हुए ...थॅंक यू भैया

राज ...तू खुश है अब तो

ज्योति ..जी भैया

और तभी मूवी स्टार्ट हो जाती है और हॉल की लाइट बंद हो जाती है ...

ज्योति पॉपकॉर्न खाते हुए मूवी पर अपनी नज़र टीका देती है ...

स्टार्टिंग में ही एक हॉरर सीन आ जाता है

घर में एक अकेली लड़की थी जिसको महसूस होता है उसके सामने कोई था ...

ज्योति डर के मारे अपने भैया का हाथ थाम लेती है ..

ज्योति ...भैया मुझे तो डर लगने लगा ये तो भूत की पिक्चर लग रही है ..

राज को हॉरर मूवी देखने में बड़ा मज़ा आता है राज इंटेरेस्ट होकर मूवी देख रहा था और ज्योति को भी मूवी में इंटेरेस्ट लेने को बोल रहा था ...

राज ...ज्योति क्यूँ डर रही है में हू ना तेरे साथ और ज्योति अपनी नज़रे पर्दे पर टीका देती है ...

तभी मूवी में एक भयानक डरावनी चुड़ैल उस लड़की के सामने आ जाती है और लड़की उस चुड़ेल को देखकर चीख मारने लगती है...उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई बचऊऊम्म्म्मममममिईीईईईईईईईईईईईईईई

उस लड़की के साथ साथ ज्योति भी ये सीन देखकर डर के मारे कांप जाती है और राज से एक दम लिपट जाती है ज्योति के एकदम लिपटने से राज के हाथ में कोल्डड्रिंक कपड़ो पर बिखर जाती है ...

राज ...ओह गॉड ज्योति ये क्या कर दिया तूने मेरे सारे कपड़े खराब हो गये

ज्योति ... भैयाअ मुझे डर लग रहा है..

राज ... देख मेरे सारे कपड़े खराब हो गये ... ज्योति अभी भी राज से चिपकी हुई थी

राज ज्योति को अपने आप से अलग करता है .

ज्योति को भी राज के कपड़े गीले होने का अहसास होता है ...

ज्योति ... आई आम सॉरी भैया

राज ...सॉरी की बच्ची मेरे कपड़ो पर दाग लग जाएँगे ......

ज्योति अपने पर्स से रुमाल निकालती है और राज के ऊपर गिरी कोल्डड्रिंक साफ करने लगती है

हॉल में बिल्कुल अंधेरा था

सारी कोल्डड्रिंक राज की गोद में गिरी थी

ज्योति अंधेरे में रुमाल से कोल्डड्रिंक सॉफ करने के लिए अपने हाथ से गीलापन टटोलते हुए जेसे ही राज की पेंट की ज़िप के पास पहुचती है गीलापन महसूस होता है और ज्योति वही से सॉफ करने लगती है ..

राज तो एक दम उछल सा जाता है ज्योति का हाथ बिल्कुल उसके लंड पर था और ज्योति बड़ी तेज़ी से वहाँ से सॉफ कर रही थी ...

राज ...ज्योति छोड़ ना में साफ कर लूँगा

ज्योति ...मुझे सॉफ करने दो भैया नही तो दाग लग जायगा

उफफफ्फ़ ये क्या कर रही है ज्योति आख़िर राज भी 20 साल का जवान लड़का था इस तरह लंड पर रगड खाने से लंड में सरसराहट सी दौड़ने लगती है..

ज्योति तो राज की कोल्डड्रिंक सॉफ कर रही थी मगर यूज़स क्या पता जो कुछ इस वक़्त वो कर रही थी मास्टरबेट से कम नही था ...

राज ने आज तक कभी मास्टरबेट किया भी नही किया था.. ज्योति के लगातार रुमाल को रगड़ने से लंड में अकड़ाहट आनी शुरू हो गई थी ..और इस नये अहसास ने राज को अपनी आँखे बंद करने पर विवश कर दिया था ...

अब राज का लंड अपना आकार लेना शुरू का देता है जिस कारण जींस की ज़िप फूलने लगती है ज्योति के रगड़ने से जिप थोड़ी सी खुल जाती है जिससे अंडरवेर में से लंड बाहर को निकल जाता है

ज्योति को लगा जेसे हाथ की मुट्ठी में अचानक कोई रॉड आ गई हो ..

ज्योति को जब अहसास होता है उसके हाथ में क्या है ज्योति जल्दी से अपना हाथ वहाँ से हटा लेती है

और अपना चेहरा उठा कर राज की तरफ देखती है राज की आँखे बंद थी ....

ज्योति सीधी होकर बैठ जाती है और दोबारा हिम्मत करके मूवी देखने लगती है

अबकी बार मूवी में एक कंकाल का सीन आ जाता है मगर ज्योति हिम्मत करके उस सीन को देख लेती है और जब मूवी ख़तम होती है ...

राज ...अर्रे वाह ज्योति तूने तो पूरी मूवी देख ली केसी लगी ...

ज्योति ... अच्छी थी

राज ...अब चले घर

ज्योति ...हा भैया चलिए

राज और ज्योति दोनो घर के लिए निकल जाते है ....
 
अपडेट....14

घर पहुचने में राज और ज्योति को काफ़ी रात हो जाती है गेट मम्मी खोलती है ..

सुषमा .. बेटा बड़ी देर लगा दी आने में ..

ज्योति ..मम्मी नेहा तो आने ही नही दे रही थी ...

सुषमा ...बेटा खाना लगाऊ तुम्हारे लिए

राज ...नही मम्मी हम खाना खाकर आए हैं ..

राज अपने रूम में जा कर कपड़े उतार देता है कोल्डड्रिंक की वजह से अंडरवेर भी गीला हो गया था राज अपना अंडरवेर भी उतार देता है राज जेसे ही लोवर पहनने लगता है उसकी नज़र अपने लंड की तरफ जाती है राज को आज लंड की लंबाई दोगनि लग रही थी ...

राज लोवर पहन कर बॅड पर लेट जाता है

राज के दिमाग़ में थियेटर वाला सीन याद आ जाता है कैसे ज्योति का हाथ उसके लंड को रगड रहा था ...

ये सीन याद आते ही राज का हाथ अपने आप अपने लंड पर चला जाता है और धीरे से लंड को सहला देता है ....

राज को अपने हाथ की छुअन से मस्ती सी छाने लगती है ...

बिना अंडरवेर के लोवर में लंड पूरा राज के हाथो में समाया हुआ था ...

उधर ज्योति भी अपने रूम में पहुचती है डॉली दीदी गहरी नींद में सोई हुई थी ..

ज्योति अपनी ड्रेस उतारती है और एक कॉटन का टॉप और शॉर्ट निक्कर पहन लेती है ...

ज्योति अपनी दीदी के बराबर में लेट जाती है

मगर ज्योति की आँखो में नींद दूर तक नही थी आज के दिन का सारा मंज़र उसकी आँखो में घूम रहा था तभी ज्योति को ध्यान आता है भैया के कपड़ो पर दाग लगा है क्यूँ ना अभी वॉश कर दिया जाय.. ज्योति अपने बॅड से उठती है और कुछ सोचकर पहले किचिन में पहुचती है और दूध गरम करके दो ग्लास में करती है और राज के रूम की तरफ चल देती है

जेसे ही ज्योति दरवाजे के पास पहुचती है राज की दबी दबी सी सिसकारियाँ सुनाई देती है

ज्योति दरवाजे के पास ही रुककर अंदर झाँकती है ...

राज बॅड पर लेटा हुआ था और उसका हाथ बहुत तेज़ी से अपने लोवर को पकड़े आगे पीछे कर रहा था ..

राज के मूह से आवाज़े भी निकल रही थी ...ह एयाया अहह ऊओह आअहह उुउऊहह आआआआआआअ
 
ज्योति ने देखा राज की आँखे भी बंद थी राज शायद क्लाईमेक्स पर पहुचने वाला था थोड़ी देर बाद ही राज के लंड से वीर्य की पिचकारी निकल जाती है और राज सुकून भरी आआआहह के साथ राज के हाथ अपने लंड पर रुक जाते है ...राज थोड़ी देर यू ही लेटा रहता है ..

ज्योति दूध के ग्लास लिए शटेचु बनी अंदर का सीन देख रही थी ...

ज्योति को समझ नही आ रहा था वो क्या करे अंदर जाय या वापस जाय...

राज का लोवर पूरा लंड के वीर्य से पूरी तरह से तर चुका था राज अपना लोवर जेसे ही निकालता है राज को गेट पर किसी के होने का अहसास होता है ..राज जल्दी से बॅड पर पड़ी चादर अपने ऊपर डाल लेता है ...

ज्योति भी राज को देखकर ऐसा बर्ताव करती है जेसे उसने कुछ भी नही देखा हो और

दूध के ग्लास लेकर रूम में एंटर हो जाती है ...

ज्योति ...भैया लीजिए आपके लिए गरमा गरम दूध .....

राज की तो शिट्टी पिटी गुम हो चुकी थी इस वक़्त ज्योति के सामने चादर के अंदर राज बिल्कुल नंगा था...

ज्योति को भी इस बात का पता था राज चादर के अंदर नंगा है मगर वो बिल्कुल जाहिर नही करती

बल्कि मुस्कुराते हुए खुद भी राज के सामने बॅड पर बैठ जाती है ...

ज्योति ...भैया थॅंक यू आज आपके साथ पूरा दिन बहुत एंजाय किया सच में भैया मुझे बहुत मज़ा आया ..

राज जल्दी से दूध का ग्लास खाली करता है और ज्योति को पकड़ा देता है

राज ...चल ज्योति अब बहुत रात हो चुकी है तू भी जाकर सो जा ..

ज्योति ..भैया मुझे अभी नींद नही आ रही और आपके कपड़े भी तो खराब हो गये थ्र लाइए में अभी वॉश कर देती हू दाग चले जायगे ..

राज ...कोई बात नही ज्योति सुबह वॉश कर लेना ...

राज खुद को बड़ा अनकंफर्टबल महसूस कर रहा था बस ये चाह रहा था ज्योति जल्दी से यहाँ से चली जाय...

ज्योति को भी राज की हालत पर तरस आ जाता है और ज्योति दूध के खाली ग्लास लेकर मुस्कुराती हुई राज को गुड नाइट् बोलकर रूम से निकल जाती है ......
 
अपडेट.... 15

ज्योति अपने रूम में आकर दीदी के बराबर में लेट जाती है...आज पहली बार लंड देखकर ज्योति की जवानी भी मचलने लगी थी

आँखो में बस राज का नंगा लंड ही घूम रहा था ..

रात भी काफ़ी हो गई थी सोचते हुए ज्योति की कब आँख लग गई पता ही नही चला.....

सोते हुए भी सपने में ज्योति के सामने राज का नंगा लंड था जेसे ज्योति दरवाजे पर खड़ी देख रही थी

राज अपने लंड को हाथ में लेकर आगे पीछे करता हुआ मास्टरबेट कर रहा था

ज्योति का दिल चाह रहा था लंड को अपने हाथ से छूकर देखे केसा लगता है और अभी ज्योति ने ये सोचा ही था की ज्योति एक दम रूम में एंटर हो जाती है

ज्योति ..भैया ये आप क्या कर रहे हो

ज्योति को देखकर राज सकपका जाता है

और जल्दी से बॅड की चादर से अपने लंड को धक लेता है

राज... ज्योति में वो में वो एम्म म्‍म्म्ममममममममममममममम

ज्योति ...क्या भैया ऐसा क्या कर रहे हो जो आपकी आवाज़ भी नही निकल रही...

बताए ना भैया क्या कर रहे थे

राज ...ज्योति मुझे वहाँ खारिश लग रही थी...

ज्योति मुस्कुराते हुए राज की आँखो में देखती हुई

ज्योति ...कहा पर भैया

राज ...तुझे मालूम है ज्योति

ज्योति...बताओ ना भैया

और राज अपना हाथ चादर में बने टेंट पर रखते हुए

राज ...यहाँ पर

ज्योति ....ओह्ह्ह ये बात है फिर आपने मुझे क्यूँ नही बुलाया भैया आपको पता है में कितनी अच्छी मालिश करती हू आपके सिर की ...

और ज्योति तेल की शीशी लेकर राज की चादर खिच लेती है राज का लंड फनफनाता हुआ नाग की तरह ज्योति के सामने आ जाता है ...

राज ...ज्योति तू जा यहाँ से में लगा लूँगा अपने आप ..

ज्योति राज की एक नही सुनती और अपने हाथ में तेल लेकर राज का लंड पकड़ लेती है ..

राज की आह निकल जाती है .....

ज्योति ...भैया ये इतना बड़ा क्यूँ है ..

राज....आअहह पूज़ाआाआअ ये तो ऐसा ही होता है ...

राज को ज्योति के हाथ का टच बड़ा सुकून देता है ...

ज्योति आहिस्ता आहिस्ता राज के लंड को तेल मालिश करने लगती है ...

राज तो आसमान में उड़ने लगा था

राज....ओह ज्योतिआअ आअहह उम्म आईईीीइसस्शह ऊहह ओह

ज्योति लंड मसलते हुए खुद भी गरमा रही थी ज्योति की चूत में भी खुजली होना शुरू हो जाती है ...

ज्योति ...भैया मुझे भी खारिश होने लगी है

राज ...ओह. पुउज्ज्ज्ज्जाआ बता कहा खुजली हो रही है में तेरी खुजली मिटा दूँगा ....

और ज्योति एक दम अपना टॉप उतार देती है
 
ज्योति की छोटी छोटी चुचियाँ राज की आँखो के सामने नंगी हो जाती है

राज अपने हाथ से ज्योति के उभार सहला देता है

ज्योति की सिसकी निकल जाती है

राज ..यहाँ खारिश हो रही है ज्योति

ज्योति .. हहाा .भैया. और नीचे भी हो रही है .. अपनी चूत पर हाथ रखती हुई ....भैया यहाँ पर भी

राज अपने हाथ में तेल लेकर ज्योति की योनि पर फेरने लगता है ज्योति सीीससिईइ ससीिससिईईईईईई करने लगती है

आआहह भैय्ाआआआ आईिससीई हहिि करूँऊओ थोड़ा तेज़्ज़ करो

भैया ...

केसा लग रहा है ज्योति

ज्योति ...बहुत अच्छा लग रहा है भैया बस ऐसे ही करते रहो ..

राज ज्योति की चूत की फांको में उंगली फसाते हुई चूत के होंठ खोल रहा था उंगली तेल में चुपड़ी हुई थी ...

ज्योति ...आअहह आअहह ससीई ससीई कर रही थी

राज की उंगली तेल में चुपड़ी हुई ज्योति की चूत के अंदर तक जाने लगी थी....

सपने में ज्योति की चूत में राज की उंगली कर रहा था ...

मगर हक़ीक़त में सोते हुए ज्योति खुद अपने हाथ से चूत को सहला रही थी ज्योति की चूत पूरी गीली हो रही थी ....

सपने में,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राज ..ज्योति तेरी खारिश मिट गई क्या

ज्योति ..नही भैया थोड़ा अंदर तक करो अंदर भी हो रही है ..

राज अपनी उंगली चूत के थोड़ा अंदर करता हुआ आगे पीछे करने लगता है ...

ज्योति ...आअहह भैय्ाआ ओह

राज ...ज्योति अब ठीक है

ज्योति ...भैया थोड़ा और अंदर करो

राज ..ज्योति अब ये खुजली उंगली से नही मिटेगी मुझे कुछ और करना पड़ेगा

राज अपने हाथो में तेल लेकर अपने लंड पर अच्छी तरह मलता है

राज क्या करने वाला है ज्योति को आभाष हो जाता है

और राज अपने हाथो से ज्योति के दोनो पैर चौड़े करता है और अपना लंड ज्योति की चूत पर रख देता है

ज्योति ...भैया ये तो बहुत बड़ा है इसे अंदर कैसे करोगे ..

राज ...देखेगी कैसे जाता है और

राज अपने दोनो हाथ से ज्योति के उभारों पर पकड़कर एक जोरदार धक्का मार देता है . लंड चूत चीरता हुआ अंदर घुस जाता है ..
 
ज्योति की चीख निकल जाती है ...

सपनो के साथ साथ हक़ीक़त में भी

ज्योति ...उउईईई माआररर्ररर गैिईईईईईईईईईई

ज्योति की चीख से डॉली भी घबराकर उठ जाती है ....

डॉली ... (ज्योति को झंझोड़ती हुई) क्या हुआ तुझे ज्योति

ज्योति सपने से बाहर आती है ....

ज्योति ...ऊहह वववूऊओ दीदड्डिईइ

शायद सपना देख रही थी .....

डॉली ... ऊवू गॉड तूने तो मुझे भी डरा दिया था ..

ऐसा क्या देख लिया तूने सपने में ...

अब ज्योति अपनी दीदी को कैसे बताए सपने में राज से चुद रही थी ..

ज्योति ...दीदी अजगर देख लिया था

डॉली ... यहाँ कोई अजगर नही है चल सो जा और मुझे भी सोने दे ...

.....

और फिर दोनो बहने सो जाती है

सुबह डॉली ऑफीस के लिए तैयार भी हो गई थी मगर ज्योति अभी तक सोई पड़ी थी

डॉली ..अर्रे ज्योति कब तक सोती रहेगी कॉलेज नही जाना तुझे

ज्योति ..दीदी सोने दो ना क्यूँ परेशान कर रही हो

डॉली..लगता है आज तेरा कॉलेज जाने का मूड नही है ..

और डॉली ज्योति को सोता छोड़कर रूम से बाहर आती है

सुषमा ..डॉली बेटा ज्योति नही उठी क्या

डॉली..जी मम्मा आज तो लगता है घोड़े बेचकर सो रही है ..

सुषमा..चल कोई बात नही बेटा तुम दोनो नाश्ता करके निकल जाओ ..

राज और डॉली मिलकर नाश्ता करते है ..

डॉली नाश्ता करते हुए राज से पार्टी के बारे में पूछती है

डॉली .. और राज केसी रही तुम दोनो की पार्टी ..

राज ...दीदी बहुत मज़ा आया पार्टी में

नेहा ने बहुत खातिर की हमारी आने भी नही दे रही थी .....

डॉली ...क्या बात है राज नेहा से पहली बार मिले हो ना तुम तो ...

राज .. जी दीदी

डॉली...लगता है पहली मुलाक़ात में मेरे भाई पर जादू कर दिया है ..

राज ...नही दीदी ऐसी कोई बात नही है ...

और फिर दोनो ऑफीस के लिए घर से निकलते है..

राज अपनी बाइक निकालता है तभी राज की नज़र बाइक के टायर पर पड़ती है ...

राज ...ऊओ माई गॉड

डॉली...क्या हुआ राज

राज ...दीदी बाइक का टायर पंचर है

डॉली ..राज अब क्या करे ऑफीस के लिए देर हो रही है ..

राज ...दीदी टायर पंचर में तो लगभग दो घंटे लग सकते है ...

डॉली ..फिर तो राज बस से ही चलते है .. पंचर शाम को लगवा लेना ..

राज ...ठीक है दीदी बस से ही चलते है ...

डॉली और राज बस स्टॉप पहुचते है और तभी एक बस आती है दोनो बस में चढ़ जाते है ...........
 
अपडेट.....16

रोज की तरह आज भी बस में काफ़ी भीड़ थी

राज और डॉली को बार बार आगे पीछे से धक्के लग रहे थे ...

डॉली ...उफफफ्फ़ राज आज कहा फस गये हम...

राज ज्योति के बारे में सोचने लगता है ज्योति कैसे जाती है बस से डेली कॉलेज...

तभी डॉली को अपने कूल्हे पर किसी का हाथ महसूस होता है डॉली पीछे भी नही मूड पाती उसके मूह से एक दर्द भरी आवाज़ निकलती है .. किसी ने उसके कूल्हे पर ज़ोर से नोच लिया था

डॉली ...उउउइईई माआ और डॉली एक दम पलट ती हुई अपने पीछे खड़े लड़के पर चिल्लाती हुई ...

डॉली ...तमीज़ से खड़े नही हो सकते क्या

लड़का ...ओये मेडम मेंने क्या किया है ..

राज ...क्या हुआ दीदी

डॉली....राज मेरी कमर पर किसी ने नोच लिया

राज भी उस लड़के पर भड़क जाता है और उसका कॉलर पकड़ लेता है

लड़का... मुझपे क्यूँ चिल्ला रहे हो मेने कुछ नही किया है ..

आस् पास खड़े लोग भी राज को ही घूर्ने लगते है ...क्यूँ तमाशा कर रहे हो इतनी भीड़ में थोड़े बहुत धक्के तो लगते है ...

डॉली राज का हाथ पकड़ते हुए राज को रोकती है

डॉली ...जाने दो राज छोड़ो इसे ..

राज उस लड़के को गुस्से से देखते हुए उसका कॉलर छोड़ देता है ...

तभी एक लड़का शीट से उठकर डॉली को शीट ऑफर करता है ...मेंम आप यहाँ बैठ जाइए

डॉली उस लड़के को थॅंक्स बोलती हुई शीट पर बैठ जाती है ....

और थोड़ी देर बाद दोनो ऑफीस पहुच जाते है .. .

दूसरी तरफ घर पर ...

ज्योति अभी तक अपने रूम से बाहर नही निकली थी

सुषमा ज्योति के रूम में पहुचती है ..

ज्योति अभी तक लेटी हुई सो रही थी सुषमा ज्योति के पास बैठते हुए ज्योति के माथे पर प्यार से हाथ फेरती है ...

सुषमा ..ज्योति मेरी बच्ची कब तक सोती रहेगी देख सुऱज कब का निकल चुका है चल अब जल्दी से अपनी आँखे खोल ...

ज्योति अपनी आँखे खोलकर मम्मी को देखती है ..

सुषमा ज्योति को देखकर मुस्कुरा देती है

सुषमा...तेरी तबीयत तो ठीक है ना कॉलेज की छुट्टी भी कर ली तूने . .. ...
 
ज्योति ... हा मम्मी बस थोड़ा सिर दर्द कर रहा है

सुषमा ..बिस्तर से उठकर फ्रेश हो जा सब दर्द गायब हो जायगा ..तब तक में तेरे लिए नाश्ता लगाती हू ......

ज्योति ... जी मम्मी

और मम्मी ज्योति के रूम से निकल जाती है...

ज्योति घड़ी की तरफ देखती है सुबह के 9 बज रहे थे ...

ज्योति ...ओह शीट क्या सच में 9 बज गये ...

ज्योति डेली 5-6 बजे तक उठ जाती थी मगर आज 9 कैसे बज गये तभी ज्योति को रात का सपना याद आता है ...

ज्योति.....ऊहह माइ गॉड रात केसा सपना देख रही थी में ऊहह शिट शितत वो भी राज भैया के साथ ऊहह नूओ

ज्योति को पूरा सपना याद आने लगता है कैसे राज का लिंग उसकी योनि में घुस कर चोद रहा था ....

ज्योति सोचकर ही शरम से पानी पानी हुई जा रही थी ...

ज्योति बॅड से नीचे उतरती है उसको अपने निक्कर में कुछ गीली गीली सी चिपचिपाहट महसूस होती है ज्योति बाथरूम में पहूचकर कर अपना निक्कर उतारकर देखती है ..

ज्योति की योनि चारो तरफ से किसी लिक्विड से सनी हुई थी ...

ज्योति बड़े आश्चर्य से अपनी चूत को देख रही थी फिर अपनी उंगली से उस लिक्विड को साफ करके देखती है ...

ये क्या निकल गया चिपचिपा सा अपनी उंगली नाक के पास लाकर सूंघति है ..

लिक्विड से अज़ीब सी समेल आ रही थी..

ज्योति सोचती है क्या ये लिक्विड मेरी योनि से निकला है ...

और फिर ज्योति शवर खोल देती है पानी की बोछार सीधी ज्योति की योनि पर पड़ती है

ज्योति अपने हाथ से योनि पर लगा लिक्विड साफ करने लगती है .... जेसे ही ज्योति अपनी योनि से लिक्विड रगड रही थी ज्योति को योनि में बहुत ही अच्छी सी प्यारी सी फीलिंग आनी शुरू हो जाती है...

शावर का पानी सीधी योनि पर पड़ रहा था जिससे चूत के होंठ खुल रहे थे ...

ज्योति पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी और अपने होश भी खो चुकी थी

आनंद के सागर में बहते हुए अपनी आँखे बंद कर लेती है .....

और बंद आँखो के सामने फिर से ज्योति के सामने एक फौलादी जिस्म सिक्स पेक मजबूत बॉडी कोई सपनो का रामकुमार फिर से उसके पास आ गया हो और अपने मजबूत हाथो से ज्योति की योनि को सहला रहा था ..

ज्योति अपनी आँखे बंद किए मूह से मस्ती भरी आवाज़े निकालने लगती है ...

उउउफफफफफफ्फ़ आआहह ययईएसस ऊहह

मस्ती में योनि मसलते हुए ज्योति की एक फिंगर योनि के होंठ खोलती हुई काफ़ी

अंदर तक घुस जाती है जेसे ही उंगली कुवारि झिल्ली से टकराती है ज्योति दर्द से चिल्ला उठती है

उईईईईईईईईईई ईईईईईईई उईईईईईईईईईई

और एक दम ज्योति होश में आते हुए अपनी उंगली योनि से बाहर निकाल लेती है ...

ज्योति ...ये मुझे क्या हो जाता है बार बार ..

ज्योति खुद को संभालती है और फ्रेश होकर बाहर आती है ....

सुषमा ने ज्योति की लिए नाश्ता बना लिया था..

सुषमा ...बेटा अगर सिर में ज़्यादा दर्द हो तो स्टोर से दवा ले आना

ज्योति ...जी मम्मी

अब ज्योति अपनी मम्मी को कैसे बताए उसके दर्द का इलाज दवा नही कुछ और है ...

ज्योति को ना चाहते हुए भी बार बार राज के लंड का ही ख़याल आ रहा था .......

ज्योति ...उफफफ्फ़ तौबा है

ज्योति के मूह से अचानक ये आवाज़ बाहर आ जाती है ...

सुषमा...क्या हुआ ज्योति क्या बड़बड़ा रही है .....

ज्योति ..वो मम्मी दर्द की वजह से ऐसा हो रहा है

सुषमा ...चल तू पहले दवा ले आ

ज्योति ...जी मम्मी जाती हू ...

ज्योति ना चाहते हुए भी मेडिकल स्टोर पहुच जाती है ...

ज्योति ...ये क्या हो रहा है मेरे साथ

अब मम्मी को कैसे बताऊं इस मर्ज़ की दवा टॅबलेट नही है .....

और ज्योति स्टोर वाले से

ज्योति ...भैया नींद की टॅबलेट देना

स्टोर वाला ज्योति को टॅबलेट का पत्ता पकड़ा देता है ...

ज्योति टॅबलेट लेकर घर आ जाती है

ज्योति ने क्या सोचकर नींद की गोल्लिया खरीदी...

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ज्योति का आज बिल्कुल भी दिल नही लग रहा था ..

कभी टीवी में ध्यान लगाती कभी अपनी बुक्स लेकर बैठती ..

मगर ज्योति का दिलो दिमाग़ तो जेसे किसी ने अपने वस में कर लिया था ...

घड़ी की सुई देख देख कर ज्योति का दिन कटा था ..शाम को राज और डॉली घर आते है ...राज आते ही बाइक का टायर पचर ठीक कराने चला जाता है ....

खाना वाना खाकर रात को सब अपने अपने रूम में सोने चले जाते है ...

डॉली ज्योति से उसका हाल चाल पूछती है

डॉली ....ज्योति केसी तबीयत है तेरी आज कॉलेज भी नही गई तू ....

ज्योति ..अब ठीक हू दीदी ..आप बताए आज तो बस का सफ़र केसा रहा ....

डॉली...एक दम बकवास पता नही तू कैसे जाती है बस से कॉलेज.. में तो आज के बाद कभी बस में नही जाउन्गी ...

ज्योति ..ऐसा क्या हुआ दीदी ..

और डॉली बस का पूरा हॉल ज्योति को सुनाती है ...

डॉली ...ज्योति तू भी मत जाया कर बस से में राज को बोलूँगी तेरे लिए कोई ऑटो लगाने के लिए ...

और यूही बाते करते हुए डॉली गहरी नींद में सो जाती है ...

ज्योति शायद डॉली के सोने का ही इंतज़ार कर रही थी ज्योति आहिस्ता से बॅड से उतर किचिन में पहुचती है और दूध गरम करके दो ग्लास में करती है और राज के ग्लास में नींद की दो टॅबलेट डाल देती है ...

दूध के ग्लास लेकर राज के रूम में पहुचती है ..

ज्योति ...राज भैया सो गये क्या ...

राज ...हा बस सोने वाला था

ज्योति बॅड पर बैठते हुए राज को दूध का ग्लास पकड़ती है ...

ज्योति ..भैया पहले गरमा गरम दूध पी लीजिए

राज मुस्कुराते हुए ज्योति के हाथ से दूध का ग्लास ले लेता है और गटागट पी जाता है...

राज ... ओह ज्योति तू मेरा कितना ख़याल रखती है ...

ज्योति ... कहाँ भैया आप तो मुझे ख़याल रखने का मोका ही नही देते है ..

राज ...रखती तो है तू मेरा ख़याल और कैसे रखेगी ...

ज्योति ..भैया कहो तो आपके सिर में तेल मालिश कर दूँ

राज ... अब इस वक़्त क्यूँ परेशान होती है ज्योति फिर कभी कर लेना ...

ज्योति ..भैया इसमें परेशान वाली क्या बात है ..

देखना ऐसी तेल मालिश करूँगी आपको मज़ा आ जायगा

ज्योति राज की टेबल से तेल की शीशी निकाल लाती है ..

ज्योति भैया आप आराम से लेट जाइए में आपके सिर में तेल लगाती हू

राज बॅड पर लेट जाता है ज्योति भी बॅड पर राज के सिरहाने बैठकर हाथो में तेल निकालती है और हल्के हल्के हाथो से राज को बालों में लगाने लगती है

राज को टॅबलेट का असर होना शुरू हो जाता है राज की आँखे झपकनी शुरू हो जाती है

राज ..बस ज्योति मुझे नींद आने लगी है तू भी जाकर सो जा ...

ज्योति ..भैया आप सो जाइए मेंने आपको कब मना किया है में तेल मालिश करके चली जाउन्गी

ज़रा सी देर बाद ही राज गहरी नींद में सो जाता है ...

ज्योति 5 मिंट बाद राज को आवाज़ देती है

ज्योति ..भैया ओ भैया सो गये क्या मगर राज को टॅबलेट का नशा चढ़ गया था ...

ज्योति आहिस्ता से बॅड से उतरती है और

उठकर राज का रूम दरवाज़ा लॉक करके फिर से राज के करीब आती है ...

राज के पैरों पर चादर पड़ी हुई थी

ज्योति आहिस्ता से राज के ऊपर से चादर हटा देती है

राज सिर्फ़ अंडरवेर पहने हुए था ज्योति की नज़रे राज के अंडरवेर पर ही थी ..ज्योति ऐसे देख रही थी जेसे राज के अंडरवेर में ज्योति को कोई ख़ज़ाना मिलने वाला है ....
 
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