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StoryPublisher
Guest
फोन के दूसरी तरफ से शायद उस ने माफी माँगी और फोन ना उठाने का कारण बताया जिस को सुन के जॅक का गुस्सा कुछ कम हुआ.
जॅक-हमारे लिए एक बुरी खबर है .अजय की सिक्यॉरटी अब कमजोर हो रही है मुझे उसकी सेफ्टी के लिए तुम्हारे दो सबसे बेहतरीन
योद्धा चाहिए और ये कम कल सुबह होने से पहले होने चाहिए ..
फिर दूसरी तरह से कुछ बोला गया .
जॅक-हाँ में उसे ट्रनिंग दे रहा हू पर उस में अभी टाइम लगेगा तुम से जितना कहा जाए उतना करो समझे अपना दिमाग़ ना लगाओ …और जॅक ने गुस्से से फोन तोड़ दिया.में कभी सोच ही नही सकता था कि ये टाइम इतने जल्दी आ जाएगा मुझे कुछ करना होगा इस से पहले
कि कुछ बुरा हो मुझे उस की सिक्यॉरटी को दोबारा से ताक़त वर करना होगा…….
दोस्तो में यहाँ एक बात यहाँ पे क्लियर करना चाहूगा कि में किसी भी जगह (प्लेस) का नाम नही लिखुगा.और ना ही ये क्लियर कर पाउन्गा कि अगर किसी की न्यू एंट्री होती है तो वो कौन है और कहाँ से है बस में आप लोगो को ये बता सकता हूँ जैसे जैसे स्टोरी में उस की ज़रूरत होगी उस की जानकारी आप लोगो को मिलते रहे गी तो उम्मीद है की आप लोग मेरी एस बात को समझेगे …
इसका एक कारण ये भी है की आप लोग खुद अपने आप इमेजिन करे ना कि में करवाऊ ऐसे में आप को स्टोरी पढ़ने में ज़्यादा मज़ा आएगा.
जॅक वहाँ से उठ के बाहर आ जाता है और गार्डन में एक आ के बैठ जाता है कुछ देर बैठने के बाद वो किसी को फोन कर के कुछ
बात करता है और फोन बंद कर के वापस अपने जब में रख लेता है.(यहाँ आप लोगो को बता दूं कि जॅक के पास हमेशा दो फोन रहते
है एक वो अपने साथ लाया था और एक उस ने यहाँ आ के खरीदा था और उस ने जो फोन तोड़ा वो यहाँ वाला था.)
में अपने कमरे में सो रहा था कि मुझे बेचैनी होनी लगी जैसे कि कोई चीज़ मुझे सांस लेने में रुकावट बन रही है में एक दम से उठ गया .सबसे पहले मेने देखा कि आशु (गुड़िया ) आराम से सो रही है उस को कोई डिस्टर्ब ना हो ये सोच के में नीचे गार्डन में आ गया जहा जॅक पहले से ही मोजूद था .
जॅक-तो तुम नीचे आ ही गये में काफ़ी टाइम से तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा हूँ .
में-मुझे नही पता था कि रात के 2 बजे मुझे तुम से मिलने के लिए नीचे गार्डन में आना होगा .
जॅक-हूँ ये बात तो है मुझे तुम से कुछ ज़रूरी बात करनी है क्या तुम मुझे पे भरोसा करते हो.
में-ये कैसा बच्चो जैसा सवाल है अगर तुम पे भरोसा नही होता तो हम साथ नही होते.
जॅक-में भरोसे के बात नही कर रहा में उस भरोसे की बात कर रहा हूँ जो तुम सिर्फ़ कुछ गिने चुने लोगो पे ही करते हो अपने से ज़्यादा .
में-में कुछ समझा नही .फिर भी जितना में समझा हूँ उस हिसाब से में तुम पर अभी उतना ही भरोसा करता हूँ जितना के अपने आप पे .
जॅक-गुड चलो जा के सो जाओ अब हम कल से यहाँ ट्रनिंग नही करेंगे मेने कुछ बड़ा सोचा है तुम्हारे लिए उम्मीद है कि तुम मेरा साथ दोगे.
.
में-मेरी तो ये समझ में नही आ रहा कि तुम मुझे ये ट्रनिंग दे ही क्यूँ रहे हो मुझे इसकी क्या ज़रूरत .है
जॅक-हमारे लिए एक बुरी खबर है .अजय की सिक्यॉरटी अब कमजोर हो रही है मुझे उसकी सेफ्टी के लिए तुम्हारे दो सबसे बेहतरीन
योद्धा चाहिए और ये कम कल सुबह होने से पहले होने चाहिए ..
फिर दूसरी तरह से कुछ बोला गया .
जॅक-हाँ में उसे ट्रनिंग दे रहा हू पर उस में अभी टाइम लगेगा तुम से जितना कहा जाए उतना करो समझे अपना दिमाग़ ना लगाओ …और जॅक ने गुस्से से फोन तोड़ दिया.में कभी सोच ही नही सकता था कि ये टाइम इतने जल्दी आ जाएगा मुझे कुछ करना होगा इस से पहले
कि कुछ बुरा हो मुझे उस की सिक्यॉरटी को दोबारा से ताक़त वर करना होगा…….
दोस्तो में यहाँ एक बात यहाँ पे क्लियर करना चाहूगा कि में किसी भी जगह (प्लेस) का नाम नही लिखुगा.और ना ही ये क्लियर कर पाउन्गा कि अगर किसी की न्यू एंट्री होती है तो वो कौन है और कहाँ से है बस में आप लोगो को ये बता सकता हूँ जैसे जैसे स्टोरी में उस की ज़रूरत होगी उस की जानकारी आप लोगो को मिलते रहे गी तो उम्मीद है की आप लोग मेरी एस बात को समझेगे …
इसका एक कारण ये भी है की आप लोग खुद अपने आप इमेजिन करे ना कि में करवाऊ ऐसे में आप को स्टोरी पढ़ने में ज़्यादा मज़ा आएगा.
जॅक वहाँ से उठ के बाहर आ जाता है और गार्डन में एक आ के बैठ जाता है कुछ देर बैठने के बाद वो किसी को फोन कर के कुछ
बात करता है और फोन बंद कर के वापस अपने जब में रख लेता है.(यहाँ आप लोगो को बता दूं कि जॅक के पास हमेशा दो फोन रहते
है एक वो अपने साथ लाया था और एक उस ने यहाँ आ के खरीदा था और उस ने जो फोन तोड़ा वो यहाँ वाला था.)
में अपने कमरे में सो रहा था कि मुझे बेचैनी होनी लगी जैसे कि कोई चीज़ मुझे सांस लेने में रुकावट बन रही है में एक दम से उठ गया .सबसे पहले मेने देखा कि आशु (गुड़िया ) आराम से सो रही है उस को कोई डिस्टर्ब ना हो ये सोच के में नीचे गार्डन में आ गया जहा जॅक पहले से ही मोजूद था .
जॅक-तो तुम नीचे आ ही गये में काफ़ी टाइम से तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा हूँ .
में-मुझे नही पता था कि रात के 2 बजे मुझे तुम से मिलने के लिए नीचे गार्डन में आना होगा .
जॅक-हूँ ये बात तो है मुझे तुम से कुछ ज़रूरी बात करनी है क्या तुम मुझे पे भरोसा करते हो.
में-ये कैसा बच्चो जैसा सवाल है अगर तुम पे भरोसा नही होता तो हम साथ नही होते.
जॅक-में भरोसे के बात नही कर रहा में उस भरोसे की बात कर रहा हूँ जो तुम सिर्फ़ कुछ गिने चुने लोगो पे ही करते हो अपने से ज़्यादा .
में-में कुछ समझा नही .फिर भी जितना में समझा हूँ उस हिसाब से में तुम पर अभी उतना ही भरोसा करता हूँ जितना के अपने आप पे .
जॅक-गुड चलो जा के सो जाओ अब हम कल से यहाँ ट्रनिंग नही करेंगे मेने कुछ बड़ा सोचा है तुम्हारे लिए उम्मीद है कि तुम मेरा साथ दोगे.
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में-मेरी तो ये समझ में नही आ रहा कि तुम मुझे ये ट्रनिंग दे ही क्यूँ रहे हो मुझे इसकी क्या ज़रूरत .है