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समीर चेयर पर काजल के निकलने का इंतेजार करता है।
काजल ने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और बाहर निकली- “जीजू ज्यादा इंतेजार तो नहीं करना पड़ा?"
समीर- “नहीं..." और समीर बाथरूम में चला गया, फ्रेश होकर नीचे आया।
दिव्या थोड़ी देर बाद ब्लू शूट में सबको नमस्ते करके सामने सोफे पर आकर बेठ जाथ है।
सभी दिव्या की खूबसूरती देखकर दंग रह गये। क्या हसीन मलिका मिली समीर को। नेहा भी खशी में जाकर दिव्या की बगल में बैठ गई, और एक मिठाई का टुकड़ा दिव्या के मुँह में रखा- “भाभी मुँह मीठा कीजिए मेरे हाथों से...”
टीना भी कहां पीछे रहने वाली थी, मिठाई का एक टुकड़ा उठाया और कहा- “भाभी एक मेरे हाथ से भी..."
अंजली- “बेटा थोड़ा-थोड़ा खिलाओ, अभी हमें भी खिलाना है..." और अंजली भी दिव्या को एक छोटा सा बरफी का टुकड़ा खिलाती है, और कहती है- “क्या चाँद का टुकड़ा है मेरी बहू... किसी की नजर ना लगे..."
संजना- “सब दिव्या को ही मिठाई खिलायेगे, समीर को मैं खिलाती हूँ.." और समीर के मुँह में बड़ा सा बरफी का पीस टूंस देती है।
सबकी हँसी निकाल जाती है।
काजल- जीजू एक टुकड़ा मेरे हाथ से भी।
फिर अंजली ने दिव्या और समीर को पास बुलाया, और समीर को अंगूठी दी की दिव्या को पहना दे, और सगाई की रश्म अदा करके सबने खाना खाया। बड़ा ही खुशी का समा था। संजना की खुशी का कोई ठिकाना ना था। मारे खुशी के संजना ने म्यूजिक लगाया और डान्स करने लगी।
तेरे घर आया मैं आया तुझको लेने, दिल के बदले दिल का नजराना देने, मेरी ये धड़कन क्या बोले है सुन सुन, साजन जी घर आए, साजन जी घर आए, दुल्हन क्यों शर्माये।
आज है सगाई, सुन लड़की के भाई जरा नाच के हमको दिखा, कड़ी की तरह ना शर्मा तू, मेरी गल मान जा।
सभी को बड़ा मजा आया और यूँ ही वक्त का पता नहीं चला की कब शाम हो गई।
अजय- "अच्छा संजना जी, अब चलते हैं.” और सभी एक दूजे के गले मिलकर विदा हो गये। रात के 10:00 बजे नोयेडा पहुँचे।
किरण- भाई साहब हमें छोड़ आइए।
अजय- "मैं विजय को फोन करता हूँ.."
अजय- "हेलो भाई विजय कहां हो?"
विजय- रास्ते में हूँ, आ गये तुम लोग?
अजय- हाँ बस अभी-अभी पहुंचे हैं।
विजय- "बस दो मिनट में पहुँचता हूँ.." और फोन डिसकनेक्ट हो गया।
अजय- भाभी विजय रास्ते में है बस दो मिनट में पहुँचने वाले हैं।
और तभी विजय की बाइक की आवाज आती है।
अजय- भाभी लगता है विजय आ गया।
काजल ने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और बाहर निकली- “जीजू ज्यादा इंतेजार तो नहीं करना पड़ा?"
समीर- “नहीं..." और समीर बाथरूम में चला गया, फ्रेश होकर नीचे आया।
दिव्या थोड़ी देर बाद ब्लू शूट में सबको नमस्ते करके सामने सोफे पर आकर बेठ जाथ है।
सभी दिव्या की खूबसूरती देखकर दंग रह गये। क्या हसीन मलिका मिली समीर को। नेहा भी खशी में जाकर दिव्या की बगल में बैठ गई, और एक मिठाई का टुकड़ा दिव्या के मुँह में रखा- “भाभी मुँह मीठा कीजिए मेरे हाथों से...”
टीना भी कहां पीछे रहने वाली थी, मिठाई का एक टुकड़ा उठाया और कहा- “भाभी एक मेरे हाथ से भी..."
अंजली- “बेटा थोड़ा-थोड़ा खिलाओ, अभी हमें भी खिलाना है..." और अंजली भी दिव्या को एक छोटा सा बरफी का टुकड़ा खिलाती है, और कहती है- “क्या चाँद का टुकड़ा है मेरी बहू... किसी की नजर ना लगे..."
संजना- “सब दिव्या को ही मिठाई खिलायेगे, समीर को मैं खिलाती हूँ.." और समीर के मुँह में बड़ा सा बरफी का पीस टूंस देती है।
सबकी हँसी निकाल जाती है।
काजल- जीजू एक टुकड़ा मेरे हाथ से भी।
फिर अंजली ने दिव्या और समीर को पास बुलाया, और समीर को अंगूठी दी की दिव्या को पहना दे, और सगाई की रश्म अदा करके सबने खाना खाया। बड़ा ही खुशी का समा था। संजना की खुशी का कोई ठिकाना ना था। मारे खुशी के संजना ने म्यूजिक लगाया और डान्स करने लगी।
तेरे घर आया मैं आया तुझको लेने, दिल के बदले दिल का नजराना देने, मेरी ये धड़कन क्या बोले है सुन सुन, साजन जी घर आए, साजन जी घर आए, दुल्हन क्यों शर्माये।
आज है सगाई, सुन लड़की के भाई जरा नाच के हमको दिखा, कड़ी की तरह ना शर्मा तू, मेरी गल मान जा।
सभी को बड़ा मजा आया और यूँ ही वक्त का पता नहीं चला की कब शाम हो गई।
अजय- "अच्छा संजना जी, अब चलते हैं.” और सभी एक दूजे के गले मिलकर विदा हो गये। रात के 10:00 बजे नोयेडा पहुँचे।
किरण- भाई साहब हमें छोड़ आइए।
अजय- "मैं विजय को फोन करता हूँ.."
अजय- "हेलो भाई विजय कहां हो?"
विजय- रास्ते में हूँ, आ गये तुम लोग?
अजय- हाँ बस अभी-अभी पहुंचे हैं।
विजय- "बस दो मिनट में पहुँचता हूँ.." और फोन डिसकनेक्ट हो गया।
अजय- भाभी विजय रास्ते में है बस दो मिनट में पहुँचने वाले हैं।
और तभी विजय की बाइक की आवाज आती है।
अजय- भाभी लगता है विजय आ गया।