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Incest कैसे कैसे परिवार

अंततः मिशेल ने कहा "डेविड, इतनी अश्लीलता की कोई ज़रुरत नहीं थी. "

"पर आपको तो मेरी ऐसी ही बातें पसंद हैं न मॉम?" डेविड ने अपनी माँ के पास बिस्तर पर बैठकर उसके नंगे शरीर को भूखी आँखों से देखकर कहा, "और दूसरी बात ये कि ये सच है. हैं न जैसन अंकल?"

जैसन ने हकलाते हुए कहा, "ह ह ह हाँ. सच तो है." जैसन थोड़ा अजीब सा मह्सूस कर रहा था. यहाँ वो अपना लंड अपनी बहन की चूत में डाले खड़ा था और उसका भांजा ऐसे बातें कर रहा था जैसे ये साधारण घटना हो. हालाँकि रसोई में सुनी बातों से उसे अनुमान था कि ऐसा सम्भव है, परन्तु देखना और सुनना एक भिन्न अनुभव होता है.

"चोदने में भी बहुत मजा आता है न?"

मिशेल ने डेविड के पेट पर कोहनी मारी। "तुम बहुत नटखट हो रहे हो."

"क्या मॉम, चुदवा तुम रही हो और नटखट मैं. वाह क्या तर्क है."

सुनकर तीनों हंसने लगे. मिशेल ने डेविड को पास खींचकर उसे अपनी बाँहों में भर लिया.

"तुम क्या स्विमिंग से सीधे आ गए हो? तुम अपने कपडे निकाल ही दो, पूरा बेड गीला हो रहा है."

"अब आपने सार्थक बात की है, मॉम"

डेविड ने अपने स्विमिंग शॉर्ट्स को उतार फेंका. मिशेल के मुंह से लार टपकने लगी. जैसन भी उसके बलिष्ट शरीर और तगड़े लंड को देखकर इम्प्रेस हुआ. ईव इससे चुदवाती हुई कैसी दिखेगी? ये सोचकर उसका लंड और तन गया, और इसे मिशेल ने भी अनुभव किया. मिशेल को दो लौडों से एक चुदने में बहुत आनंद आता था. पति और पुत्र के साथ तो वो चुदवाती ही थी, पर आज वो उसके भाई और बेटे से चुदेगी तो सोने पर सुहागा होगा! मिशेल ने दोनों लंड अपने हाथों में ले लिए.

"क्या दमदार हथियार हैं ये दोनों. समझ नहीं आता कि किसे पहले चूसूं."

"फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्वड, मॉम। तो पहले जैसन अंकल. वैसे भी वो हमारे गेस्ट हैं तो पहले उनकी ही सर्विस होनी चाहिए."

"क्या संस्कार दिए हैं तुमने अपने बच्चों को, सिस !" जैसन ने व्यंग्य से हँसते हुए कहा.

"तुम इसे अच्छे से समझ लो, बिग ब्रदर." जैसन को बिस्तर पर लिटाते हुए मिशेल ने कहा, "क्योंकि अगले दो सप्ताह हम सब एक दूसरे को बहुत अंतरंग रूप से जानने वाले है." ये कहकर मिशेल ने बिस्तर पर घुटनों के बल होकर जैसन का खड़ा लंड अपने मुंह में गपक लिया.

पीछे से डेविड ने मिशेल के पिछवाड़े का निरीक्षण किया। दोनों नितम्बो की गोलाईयों पर प्यार से हाथ फिराते हुए उसने अपने दाएं हाथ से चूत की पंखुड़ियों पर घर्षण आरम्भ किया. मिशेल ने अपने पांव थोड़े और फैला दिये. डेविड ने उस आनंद की गुफा को फड़फड़ाते हुए महसूस किया.

"ये लंड माँग रही है." उसने सोचा. “परन्तु जैसन अँकल को ही पहले चोदना चाहिए. वैसे भी मैंने उनकी चुदाई में रोक भी लगाई है.”

मिशेल ने पीछे मुड़कर डेविड के चेहरे के भाव देखे. वो जान गई की डेविड को क्या चाहिए था. पर आज वो पहले अपने भाई से चुदवाने के लिए कटिबद्ध थी. उसे डेविड का दिल तोडना पड़ा.

"डेविड, सन. थोड़ी देर मेरी चूत से खेलो जब तक में तुम्हारे अंकल के लंड को तैयार कर लूँ। "

"मॉम, मैं तो इसे चोदना ज्यादा पसंद करूंगा." डेविड ने मायूसियत से कहा, "पर कि अंकल गेस्ट हैं और उनको पहले हक़ है."

"डेविड, प्लीज मुझे चुदने के लिए तैयार करो. बदले में तुम जो चाहोगे मैं करूंगी."

"ओके, मॉम, डील." गांड लुपलुपाते छेद पर नज़र डालकर डेविड ने अपनी उंगलियां मिशेल की खुली चूत में डाल दीं।

मिशेल ने फिर अपना ध्यान जैसन के लण्ड को चूसने में लगाया. मिशेल इस कला में पारंगत थी. कुछ ही समय में जैसन की हवा निकल गई. उसका पानी छूटने लगा और वो मिशेल के मुंह में ही झड़ गया. मिशेल ने बिना किसी आपत्ति के सारा रस पी लिया. नीचे उसकी चूत अब बेचैन हो रही थी. उसने एक बार फिर से चाट चाट कर जैसन के लंड को तैयार किया.

“एक बार झड़ चुके हो ब्रो डियर, अब लम्बी चुदाई कर सकते हो. प्लीज फक मी नाउ! अब वेट नहीं हो रहा."

"और मेरा क्या, मॉम ?"

"तुम माय डियर सन, कम टू मम्मी. मैं तुम्हारा लंड को चूसूंगी."

"ओह येह!"

जैसन ने उसकी चूत में लंड पेला और डेविड ने उसके मुंह में लंड पेलना आरम्भ कर दिया. सब इतने उत्तेजित थे, कि कुछ ही क्षणों में द्रुत गति पकड़ ली. पर इस आसान में मिशेल को परेशानी हो रही थी, तो उसने दोनों को रोका, डेविड को लिटाया और घोड़ी के आसन में उसका लंड मुंह में भर लिया. जैसन ने पीछे जाकर उसकी चूत में लंड वापिस पेल दिया और जबरदस्त धक्के लगाने लगा.

"ओह्ह्ह्हह, आआआआह जैसन, तुम कितने अंदर तक दस्तक दे रहे हो. चोदो जोर से, हार्डर ब्रदर हार्डर। "

"माँ चिल्लाओ मत, मेरा लंड चूसो."

"मममममपहहहफ़फ़फ़फ़फ़."

"तुम्हारी चूत तो बहुत कसी हुई है." जैसन धक्कों के साथ बोला।

"बिलकुल टीन-एजर लड़कियों की तरह, है न अंकल? ये सब मम्मी की विशेष व्यायाम का कमाल है. केजेल एक्सरसाइज का."

"सच में, ऐसा लग रहा है की लंड वैक्यूम क्लीनर में हो. प्लीज़ ईव को भी सीखा देना।"

“अवश्य सीखा दूँगी.”

परन्तु मिशेल अब झड़ कर अपने घर के काम में लगना चाहती थी. सबकी सहमति से बाद में कभी भी चुदाई की जा सकती थी. न जाने कब ईव और बच्चे आ जाएँ और अवसर आपदा बन जाये. उसने दोनों को उकसाते हुए तेज होने को कहा.

"अब ये कमेंटरी बंद करो और फटाफट चोदो , मैं झड़ने के निकट हूँ."

"ओके" मामा भांजा एक स्वर में बोले और लगे धुआंधार चुदाई करने.

कुछ ही क्षणों में मिशेल चीखती हुई झड़ गई. ये देखकर जैसन और डेविड भी गति बढ़ाते हुए शिखर पर पहुँच गए. पहले जैसन का पानी छूटा. उसके पानी से जैसे मिशेल की चूत में झील बन गई. और फिर डेविड ने उसके मुंह में अपना पानी छोड़ दिया. मिशेल ने लगभग पूरा पी लिया, जो बचा उसे अपने मुंह पर मल लिया.

"आज मेरे प्रोटीन शेक के दो डोज़ हो गए." उसने संतुष्टि से कहा.

"अभी और बाकी हैं मॉम. अभी मॉर्निंग ही है."

"चलो, अब हटो और मुझे रेडी होने दो."

तीनों ने फटाफट कपडे पहने, और कमरे के दरवाज़े को खोला तो स्तब्ध रह गए. सामने रिचर्ड और शैली खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे. जैसन हड़बड़ा गया. पर शैली ने उसे गले लगा लिया. और गाल पर एक चुम्बन दिया. रिचर्ड ने अपना जैसन के हाथ से मिलाया.

"लगता है तुम्हारी बहन ने तुम्हे वेलकम पार्टी दे दी है. वेलकम टू अवर होम, ब्रो इन लॉ. " रिचर्ड ने आंख मारते हुए कहा.

जैसन ने थोड़ा सकुचाते हुए रिचर्ड से हाथ मिलाया।

“अगर थके न हो तो, एक ड्रिंक हो जाये.” रिचर्ड ने आग्रह किया.

“ठीक है.”

जीजा साले बैठक में अपनी ड्रिंक लेकर बैठ गए.

रिचर्ड: “मुझे तुम्हारे और मिशेल के पूर्व संबंधों के बारे में पहले से पता है. उसने मुझे विवाह से पहले ही सब कुछ बता दिया था. और अब तुम ये भी जान गए होगे कि हमारे घर में भी हम सब एक दूसरे के साथ चुदाई करते हैं. मेरा और मिशेल का ये समझौता भी है कि हम बाहर भी किसी से सेक्स कर सकते हैं, कुछ नियमों को मानकर.”

जैसन: “अच्छा.”

रिचर्ड: “तुम तो जानते हो साउथ अफ्रीका में उन्मुक्त सेक्स का चलन है. इसी कारण हम दोनों ने एक दूसरे को कभी रोका नहीं. परन्तु, ये बात बाहर भी किसी को पता न हो, इसीलिए हम अन्य लोगों से संबंध इस नगर में नहीं करते. अब जब तुम यहाँ हो तो समस्या नहीं रहेगी. हालाँकि तुम्हारा संघर्ष मेरे और डेविड के समय से भी होगा. ये तो हमारी बात हुई. क्या तुम ये सब मैनेज कर पाओगे? तुम्हारे घर में कैसा वातावरण है?”

जैसन: “मैं जैसे आपकी बात सुन रहा था तो मुझे लग रहा था कि आप मेरे ही शब्द बोल रहे हैं और मेरे ही परिवार की बात सुना रहे हैं. हमारी भी एकदम यही जीवन शैली है. ईव और मैं एक क्लब के सदस्य भी हैं जहाँ हम अदला बदली करके एक दूसरे की पत्नियों को चोदते हैं. ये हमारे लिए और भी सटीक बैठता है क्योंकि मुझे अफ़्रीकी औरतें बहुत भाती हैं, और ईव को पुरुष.”

“हाँ, मिशेल बता रही थी कि ईव को लम्बे,कड़क और तगड़े लंड बहुत पसंद हैं. इसीलिए उसने तुमसे शादी भी की थी क्यूंकि तुम इस विभाग में वरदान प्राप्त है. “मार्क और ऐलिस भी इसमें भाग लेते हैं?”

“हाँ आपके पिछले बार आने के बाद एक और शयनकक्ष बनवाया है जिसमे हम चारों एक साथ चुदाई कर पाते हैं. इसका उपयोग हम सप्ताह में १-२ दिन कर ही लेते हैं. परन्तु वो कक्ष केवल हम चारों के ही लिए है. ईव तो अब कह रही है कि वहीँ सोने लगें, पर उसमे बिस्तर के सिवाय कुछ और लगाने का स्थान ही नहीं है.”

“आइडिया बहुत अच्छा है, हमने तो पहले ही ऐसा एक क्रीड़ांगन बनवा लिया था, नीचे तलघर में. आओ, तुम्हें दिखाता हूँ.”

ये कहकर रिचर्ड ने ड्रिंक समाप्त की और खड़ा हो गया और जैसन को लेकर तलघर में चला गया.

नीचे पहुंचकर जैसन की ऑंखें चौंधिया गयीं। तलघर इतना बड़ा था, जितना कि ऊपर का पूरा घर. उसके अंदर एक आधुनिक जिम था, एक छोटा तरण ताल, एक बार जिसमें अभी कोई बोतल नहीं थी. एक छोटी रसोई जिसमें फ्रिज और डीप फ्रिज थे. उसमे बारबेक्यू करने का भी प्रबंध था, और एक प्रोजेक्टर था.
 
एक कांच से बना हुआ कमरा था जो कि काफी बड़ा था. अंदर दो बड़े टीवी थे और बड़े बड़े सोफे लगे हुए थे. ये सोफे कम और बिस्तर अधिक लग रहे थे. इतना विहंगम दृश्य देखकर जैसन सम्मोहित ही गया.

“ब्रो, दिस इस अमेजिंग. यहाँ पार्टी भी करते हो क्या?”

“हाँ घर की पार्टियां यहीं होती हैं.” रिचर्ड ने आँख मारते हुए कहा, “बाहर की भी पार्टी में इधर ही करते हैं, पर उस समय हम कुछ परिवर्तन कर देते हैं.”

“ईव तो इसे देखकर पागल ही हो जाएगी. पर ये रह कहाँ गई है? दो घंटे होने को आये, अभी तक न जाने कहाँ है. ऐलिस भी साथ में ही है. मार्क का भी कुछ पता नहीं.” उसने फोन निकाला तो सिग्नल नहीं था.

“ऊपर चलकर कॉल करता हूँ.”

ऊपर आने के पश्चात् उसने ईव को फोन मिलाया.

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अध्याय ५: पाँचवाँ घर - शोनाली और जॉय चटर्जी १

दृश्य १

समय: शाम के आठ बजे

स्थान:घर में .

हलकी मद्धिम प्रकाश से नहाये हुए कमरे में तीन लोग थे. एक नंगी स्त्री अपने पांव फैला कर लेटी हुई थी. एक दूसरी स्त्री, जो उस ही की तरह नंगी थी, उसके ऊपर लेटी थी और उसकी जांघों के बीच अपना चेहरा छुपाये हुए थी. पहली स्त्री अपने मोटे और गुदाज मम्मों को अपने ही हाथों से मसल रही थी. बीच में रह रह कर वो दूसरी स्त्री का सिर अपने जांघों के बीच में जोर से दबा देती. उसके मुंह पर दूसरी स्त्री अपनी चूत लगाए हुए थी जिसे वो बड़ी बेसब्री और प्यार से अपनी जीभ से कुरेद रही थी. दूसरी स्त्री बीच बीच में सिहर उठती थी. उसकी सुन्दर मखमली नितम्बों के बीच इस समय एक लम्बा और मोटा लंड घुसा हुआ था जो उसकी गांड के अंदर आवागमन कर रहा था.

"सागरिका, तुम बार बार मेरी चूत से अपना मुंह क्यों हटा लेती हो?" नीचे वाली स्त्री ने शिकायत से कहा.

"बुआ, अभी थोड़ी देर में जब हमारी जगह बदलेगी और पापा का ये लौड़ा तुम्हारी गांड फाड़ रहा होगा न तब मैं भी तुमसे यही पूछूँगी."

सुमति हल्के से हंस दी. "अभी देर है उसमें. जॉय तेरी गांड को इतनी जल्दी नहीं छोड़ने वाला. मेरा नंबर आने में अभी समय है. ऊई माँ. काटती क्यों है! "

सागरिका ने अपना सिर घुमाकर पीछे अपने पिता को प्यार से देखा. "पापा थोड़ा तेज करो न. मेरी गांड में खुजली हो रही है आपके इतना धीरे करने से."

"ओके, बेटी." कहकर जॉय ने अपनी गति थोड़ी बड़ा दी. पर बहुत नहीं. उसे अपनी बेटी की अपेक्षा का अच्छे से पता था. उसे पता था की कब और कितना गहरा और तेज़ जाना है.

दृश्य २: उसी दिन दोपहर ४ बजे.

स्थान: दिंची क्लब

दिंची क्लब में आज नए सदस्य का साक्षात्कार था. ये एक बहुत ही विशिष्ट क्लब था, जिसकी सदस्यता मात्र और एकमात्र अनुशंसा या आमंत्रण से मिलती थी. इस समय इसके मात्र १३ सदस्य थे. ये सभी महिलाएं थीं. १५ युवक भी थे परन्तु उनका विवरण और पद सदस्य नहीं था, इन्हें रोमियो की उपाधि दी गई थी. इस क्लब का विचार और संकल्पना शोनाली की थी. परन्तु इसका सञ्चालन पार्थ के ही हाथ में था.

इस क्लब की विशेषता थी, इसकी सदस्यता के माप दंड.

१. इसमें स्त्रियों को ३० वर्ष की आयु से अधिक, विवाहित, तलाकशुदा, या विधवा होना आवश्यक था. अविवाहित महिलाओं को इसमें सदस्यता वर्जित थी.

२. युवकों की आयु की १९ वर्ष से २६ वर्ष की सीमा थी. २६ वर्ष के बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाना था. हालाँकि अभी तक ऐसा हुआ नहीं था क्योंकि अभी कोई भी अगले ३ वर्ष तक २६ की आयु का नहीं होने वाला था.

३. ये वो विशेषता थी जिस के आधार पर इस क्लब का नाम रखा गया था. उस में रोमियो युवकों के लंड की लम्बाई १० इंच या अधिक होनी चाहिए थी. इस कारण इसका नाम दिंची (दस इंची) क्लब रखा गया था. पहले इसे Ten Plus का नाम देने का विचार था, परन्तु इससे शंका होने का भी था. हालाँकि इसका पूरा नाम सिर्फ चुने हुए लोगों को ही पता था.

४. इस बात का ध्यान रखने के लिए कि किसी भी तरह की सूचना बाहर न जाये, हर सदस्य के लगभग दस प्रकरण वीडियो में रिकॉर्ड किये जाते थे. इन्हे एक बहुत सुरक्षित स्थान पर रखा जाता था, जिसका पता केवल पार्थ और शोनाली को ही था. इन्हें एक क्लाउड स्टोरेज में भी रखा गया था जिसकी पहुँच भी केवल इन दोनों को ही थी.

५. क्लब का सदस्यता शुल्क २ लाख प्रति माह था और युवकों को प्रति माह १ लाख का पारश्रमिक मिलता था. इसका मात्र २५% ही उन्हें हर माह दिया जाता था, अनुबंध के अनुसार, उन्हें २९ वर्ष की आयु प्राप्त करने या क्लब से जाने के तीन वर्ष पश्चात् उन्हें उनकी शेष राशि दे दी जानी थी. नयी सदस्या का पंजीकरण शुल्क १० लाख था, जो सुरक्षा जमा राशि के रूप में ली जाती थी और छोड़ने के ३ साल बाद वापिस की जाती थी. एक वर्ष के पहले छोड़ने पर ये राशि नहीं लौटाई जाती थी.

क्लब के रखरखाव इत्यादि के व्यय के कारण अभी तक इसमें लाभ मिलना आरम्भ नहीं हुआ था. कुछ अन्य सदस्यों को जोड़ने के लिए वर्तमान सदस्याओं ने नाम सुझाये थे. उनके बारे में प्राथमिक जानकारी प्राप्त कर ली गई थी.

आज इस क्लब में एक नए स्त्री सदस्य और एक रोमियो का साक्षात्कार था. सदस्या का साक्षात्कार पार्थ दायित्व था और रोमियो का शोनाली का.

घर में :

जॉय सागरिका की मखमली गांड में अब तेज और लम्बे धक्के लगा रहा था. सागरिका एक सुखद पीड़ा से कराह रही थी. पर उसने अपनी बुआ की चूत चाटने में कोई ढील नहीं दे रही थी. उसकी चूत में सुमति बुआ की जीभ अपना जादू दिखा रही थी और उसकी गांड में उसके पिता का लंड अपना पराक्रम। इस समय वो स्वर्ग के द्वार पर थी. अचानक जॉय ने हाथ बढाकर उसकी भगनासे को दो उँगलियों से मसल दिया. बस फिर क्या था, सागरिका चरम सुख की सीमा लाँघ गई. उसने अपना मुंह अपनी बुआ की चूत में गाढ़ दिया और स्खलित होने लगी. उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला. उसका शरीर उन्माद से कम्पित हो रहा था. उसकी बुआ के मुंह में उसका ये रस पूरा भर गया.

सागरिका के इस आक्रमण से सुमति भी अब ठहर नहीं पायी और वो भी गों गों की ध्वनि करते हुए झड़ने लगी. दोनों स्त्रियों के चेहरे एक दूसरे के काम रस से भीग गए. उधर जॉय भी अब अपने आप को ज्यादा देर तक रोकने में सक्षम नहीं था. उसने सागरिका की गांड में धक्के तेज कर दिए और कुछ ही क्षणों में अपना लंड अंदर गाढ़ कर अपना पानी अपनी बड़ी बेटी की गांड में डाल दिया. सब लोग कुछ देर के लिए यूँ ही स्थिर रहे.

"सग्गू, मुझे ऊपर आने दे न." सुमति ने हिलते हुए कहा. "मुझे अपना टॉनिक लेना है."

सागरिका समझ गई की बुआ क्या चाहती है.

"बुआ, आप वहीँ रहो, मैं आपको आपकी खुराक पिलाती हूँ."

ये कहते हुए सागरिका उठी और अपनी गांड को सुमति के मुंह पर रख दिया. जॉय के लंड का प्रसाद सुमति के मुंह में गिरने लगा. जब प्राकृतिक रूप से रस गिरना बंद हुआ तो सुमति ने अपना मुंह सागरिका की गांड के छेद पर रखा और लम्बे लम्बे सांसों के साथ अंदर का रस खींचने और चूसने लगी. हालाँकि सागरिका ये कई बार कर चुकी थी पर फिर भी इस अश्लील और घिनौने कृत्य से वापिस एक बार और झड़ गई और इस पानी ने सुमति के चेहरे को नहला दिया. गांड के अंदर से सारा रस खींचने के बाद सुमति ने सागरिका को उठने को कहा.

सागरिका उठ कर एक ओर बैठ गई और लम्बी लम्बी सांसों से अपने आपको संयत करने लगी.

"दीदी, अमार की होबे (मेरा क्या होगा) ?"

"एखाने आशुन (इधर आओ )"

जॉय सुमति के पास गया तो सुमति ने बड़े प्यार से उसका लंड अपने हाथ में लिया और फिर मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगी.

"सच में तुम्हारे लंड और सागरिका की गांड का ये मिला जुला स्वाद मुझे बहुत अच्छा लगता है."

"दीदी, मुझे आज तक नहीं समझ आया कि तुम्हे ऐसा करना कैसे पसंद है. मैं शिकायत नहीं कर रहा. पर ये इतना गन्दा काम है कि मुझे बहुत अजीब लगता है."

"हाँ बुआ. पापा सही बोल रहे हैं."

"सबके अपने अपने स्वांग होते हैं. मुझे गांड मरवाने और उसके अंदर से वीर्य पीने में बहुत आनन्द आता है. अगर वो गांड किसी और की भी हो तो मुझे अच्छा लगता है. आवश्यक नहीं कि तुम्हे भी रुचिकर लगे. पर कभी स्वाद लेना, हो सकता है इसका व्यसन लग जाये।” सुमति बोली, “मुझे अगर वो कुछ समय बाद पीने मिले तो और स्वादिष्ट लगता है. इसीलिए मैं शोनाली की प्रतीक्षा करती हूँ. उसकी गांड में जब भी क्लब जाती है तो माल एक डेढ़ घंटे पकने के बाद आता है."

सागरिका के भाव देखकर वो समझ गई कि लड़की कहीं भाग न जाये.

"हम्म्म लगता है तुझे अभी नहीं भायेगा, सग्गू, एक बड़ा ड्रिंक बना दे मेरे लिए." सुमति उठकर पास पड़े सोफे पर बैठती हुई कहती है.

सागरिका उठती है और दो ड्रिंक्स बनती है और सुमति और जॉय को थमा देती है.

"अब अच्छी बच्ची की तरह मेरी चूत और गांड चाट और अपने बाप के लंड के लिए तैयार कर."

सागरिका नीचे बैठकर अपने काम में जुट जाती है. जॉय अपने मोबाइल पर कुछ देखने में व्यस्त हो जाता है. फिर वो एक मैसेज करता है.

"कहाँ हो?"

"घर वापिस आ रही हूँ. आज एक साक्षात्कार था नए लड़के का क्लब में."

"पास हुआ?"

"अव्वल नंबर से. दीदी के लिए उपहार भी ला रही हूँ. बस ठहरो १० मिनट में पहुँच रही हूँ."

जॉय ने फ़ोन एक ओर रख दिया.

"शोनाली तुम्हारे लिए प्रसाद ला रही है, दीदी."

"वो सच में अपनी ननद से बहुत प्यार करती है."

दिंची क्लब में:

क्लब में साक्षात्कार करने के पहले दोनों सदस्यों से अलग अलग फॉर्म भरवाए गए और साक्षात्कार का शुल्क (मात्र रु १०,०००) लिया गया जिसे वापिस नहीं किया जाना था. दोनों आवेदकों को अलग अलग लाया गया था और दोनों ने एक दूसरे को देखा नहीं था.

फॉर्म के स्वीकृत होने के पश्चात्, दोनों को अलग अलग कमरे में ले जाया गया. दोनों कमरे आलीशान ५-सितारा होटल की तरह थे. दोनों कमरों में कई वीडियो कमरे लगे थे और उनका सञ्चालन दूर से कण्ट्रोल रूम से होता था. क्लब का एक वीडियो ग्राफर था जो इस तरह की फिल्में बनाने में निपुण था. महीने में तीसरे शनिवार को ही सिर्फ ये इंटरव्यू होते थे.

घर में:

बताये समय पर शोनाली घर पहुँच गई और गाड़ी पार्क करके घर में चली गई. फिर उसने जॉय को फ़ोन लाया और पता किया कि वो किसके कमरे में हैं. जानने के बाद उसने अपने कदम तेजी से उस ओर बढ़ा दिए. सुमति उसे देखकर आनंदित हो जाती है.

"मेरी प्यारी भाभी!" सुमति उससे लिपट जाती है. फिर उसे देखकर कहती है, "भाभी क्या बहुत मजा आया?"

"हाँ, बहुत बड़े लंड वाला था. मेरी गांड के तो तार ढीले कर दिए. सच कहूँ दीदी तो मैं तुम्हारे प्रसाद के ही लिए अब गांड मरवाती हूँ. किसी दिन कोई मेरी गांड सच में न फाड़ दे."

"अरे भाभी, गांड अगर तरीके से मारने वाला हो तो एक क्या दो दो लंड भी ले ले, इतनी लचीली बनाई है ऊपर वाले ने. अब समय न गंवाओ, लाओ मुझे मेरा प्रसाद खिलाओ."

जॉय और सागरिका एक साथ बैठकर इस प्रसंग को देख रहे थे. न जाने कितनी बार देखने के बाद, आज भी उन्हें घिन और रोमांच दोनों का अनुभव होता था. शोनाली ने अपने कपडे उतर कर अलग किये. सुमति तो नंगी ही थी, वो बिस्तर पर लेट गई और शोनाली ने अपनी गांड का छेद उसके मुंह पर रख दिया. सुमति ने बड़े प्यार के साथ प्लग के इर्द गिर्द शोनाली की गांड को चाटा और फिर प्लग बाहर खींच लिया. प्लग के बाहर आते ही शोनाली की गांड से निखिल का वीर्य बहने लगा. सुमति ने अपना पूरा मुंह शोनाली के गांड में डाल दिया और चूसने लगी.

"ओह शिट " इस आघात से शोनाली की गांड में कीड़े चलने लगे और उसके मुंह से अनायास ही निकला.

सागरिका दूर से खिलखिलाई. जब सुमति को विश्वास हो गया कि शोनाली की गांड में कुछ बाकी नहीं है तो उसने शोनाली की गांड पर एक चपत लगाई. शोनाली उठी और सीधे लेट गई. उसे पता था की सुमति का अगला आक्रमण कहाँ होना है. सुमति ने भूखी आँखों से शोनाली को देखा. उसके सुन्दर चेहरे और वक्ष पर एक पतली सी पपड़ी जमी थी.

"क्या मैं जो सोच रही हूँ ये वही है?"

"हाँ, आपकी खुराक. दीदी, पर इस तरह इतनी देर रहने में मुझे अच्छा नहीं लगता."

"मेरी प्यारी भाभी, इसीलिए तो मैं तुम्हें इतना प्यार करती हूँ. तुम मेरे लिए बेमन भी सब कुछ करती हो." कहते हुए सुमति ने शोनाली के चेहरे से सूखा वीर्य चाटना शुरु किया.

सागरिका ने जॉय से कहा, "आइये पापा, आपको तैयार कर दूँ, अभी बुआ बुलाने वाली है. उससे पहले ही आप छोटे भाई का कर्तव्य निभाइये और पहले ही हमला कर दीजिये."

ये कहकर सागरिका ने जॉय के लंड को मुंह में लेकर चाटते हुए अच्छे से खड़ा और गीला कर दिया. जॉय आगे रणक्षेत्र की ओर चल दिया. उधर सुमति शोनाली के चेहरे, वक्ष और पेट से चाटती हुई उसकी चूत के द्वार पर पहुंची. उसने चूत की फाँके खोलीं और सागरिका की ओर देखा. जॉय को न देखकर उसे हैरानी हुई.

"जॉ..." कहने के पहले ही जॉय ने अपना लंड एक ही झटके में सुमति की गांड में पेल दिया. सुमति की ऑंखें बाहर आ गयीं. जॉय ने शोनाली को इशारा किया और शोनाली ने सुमति के सिर पर हाथ रखकर अपनी चूत पर दबा दिया.

"चाटो मेरी चूत दीदी. उसके अंदर भी मेरे घोड़े का पानी है."

सुमति गुं गुं की आवाज़ के साथ छटपटाती हुई चूत चाटने लगी. पीछे जॉय उसकी गांड में लम्बे करारे धक्के लगा रहा था. सागरिका सोफे पर बैठी संतुष्टि में ये कामक्रीड़ा देख रही थी. शोनाली ने अपना हाथ सुमति के सिर से हटाया तो सुमति ने साँस लेने के लिए अपना चेहरा ऊपर लिया. उसका चेहरा शोनाली के रस से सराबोर था.

"तुम दोनों मुझे शॉक दिए न." उसने हल्के शिकायत भरे स्वर में कहा.

"नहीं दीदी, वही किये जो आप हर बार चाहती हैं. बस इस बार हमने पहल की. आपको बुरा लगा क्या."

"तुम्हारी चूत पीना, और अपने भाई से गांड मरवाने में मुझे क्यों बुरा लगेगा. जॉय अब तू अच्छे से पेल मेरी गांड और इसकी खुजली मिटा दे."

"बिलकुल, दी." ये कहकर जॉय ने तेज और लम्बे धक्के लगाने शुरू कर दिए.

शोनाली नीचे से उठी और फिर दूसरी ओर जाकर नीचे लेट गई और सुमति की चूत चाटने लगी. सुमति ने तुरंत ही शोनाली के मुंह पर अपना पानी छोड़ दिया. उधर जॉय भी अब झड़ने वाला था. सुमति ने उसके लंड को अपनी गांड में फूलते हुए महसूस किया.

"जॉय, मेरे मुंह में डालना, गांड में नहीं."

ये सुनकर जॉय ने अपना लंड हल्के से बाहर खींच लिया. सुमति की गांड का छेद इस समय दस रुपये की सिक्के जितना खुला हुआ था और उसकी गांड का छेद लुप लुप कर रहा था. जॉय अपना लंड लेकर सुमति के सर के पास आकर खड़ा हो गया. शोनाली नीचे से हटी और सोफे पर सागरिका के साथ बैठ गई. दोनों माँ बेटी सामने हो रहे भाई बहन की प्रणय लीला देख रहे थे. सुमति ने जॉय का लंड अपने गले तक लिया हुआ था और वो अपना सिर आगे पीछे कर रही थी. जॉय का शरीर अकडने लगा और वो कांपते हुए उसने अपनी बहन के मुंह में अपने लंड का प्रसाद छोड़ दिया. सुमति ने कुछ पिया और कुछ अपने चेहरे पर मल लिया. फिर वो थक कर लेट गई और गहरी सांसे लेने लगी.

कुछ समय पश्चात् सागरिका ने सबके लिए एक डबल ड्रिंक बनाया और इस बार खुद भी लिया.

"तो माँ, कैसा रहा आज का इंटरव्यू." सागरिका ने शोनाली से पूछा.

"एकदम फर्स्ट क्लास. और जॉय मुझे शायद अपना पहला दामाद मिल गया है. सागरिका के लिए मुझे ऐसा लड़का मिला है जो हमारे परिवार के लिए बिल्कुल उपयुक्त है."

कहकर उसने अपनी पूरी ड्रिंक एक ही साँस में समाप्त कर दी.

"और उसका नाम है ......”

“निखिल!”

“क्या?”

“वो समर्थ सिंह का नाती!”

“यस! और अब सुनो क्या हुआ.....”

क्रमशः

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अध्याय ६: छठा घर - दिया और आकाश पटेल १

घर में:

दर्शन आज कार्यालय से समय पूर्व घर लौट गया था. आकाश से आज्ञा लेने पर उसे घर जाने की अनुमति मिल गई थी. घर पहुंचा तो वहां पर नीलम चाची के अलावा कोई और नहीं था.

"चाची, सब लोग कहाँ है?"

"भाभी तो अपनी किट्टी पार्टी में गई हैं. कनिका और हितेश कालेज में हैं. तुम कैसे जल्दी घर आ गए."

"बस मन नहीं लग रहा था और कोई काम भी ज्यादा नहीं था. इसीलिए घर चला आया, एक चाय पिलाओगी चाची?"

"क्यों नहीं, मैं अपने लिए बनाने ही वाली थी. तुम मुंह हाथ धो लो, कपडे बदलना चाहो तो बदल लो, तब तक मैं चाय और थोड़ा सा नाश्ता बनती हूँ."

"ठीक है."

दर्शन अपने कमरे में जाकर मुंह हाथ धोकर, टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन कर आ गया. तब तक नीलम ने बैठक में दोनों के लिए चाय और नाश्ता लगा दिए.

"और चाची इस सप्ताह का क्या कार्यक्रम है? कुछ रोमांचक या यूँ ही."

"अरे कुछ नहीं. मैं और भाभी अपने नए बंगले पर जा रहे हैं. भाभी कह रही थी कि हितेश और तुम्हें भी ले चलने के लिए. रात में अकेले में उन्हें वहां घबराहट होती है."

"हाँ, अभी अधिक लोग नहीं हैं वहां. दूसरा यहाँ रहने के बाद उन्हें हर जगह डर लगता है. हितेश से पूछा था?"

"भाभी ने बात की थी सुबह, वो कह रहा था की शाम को वहीँ आ जायेगा. कुछ काम है तो साथ नहीं चल पायेगा."

"और कनिका?"

“वो अपनी सहेली के घर जाएगी. कह रही थी कि अगर ८ बजे तक फ्री हो गई तो वहां आएगी, नहीं तो यहाँ."

"ये भी ठीक है."

"पापा और चाचा क्या बोले. सप्ताहांत में घर में अकेले."

"तेरे चाचा तो ओके कर दिए. तेरे पापा से भाभी ने पूछा होगा. वही बताएंगी."

"आजकल हितेश पर बहुत प्यार आ रहा है चाची। " दर्शन ने चुटकी ली.

"जब तेरे पास अपनी चाची के लिए समय ही नहीं है तो क्यों जलन हो रही है तुझे ?"

"अरे चाची एक इशारा तो करो, मैं दौड़ा चला आऊंगा."

"पहले तो बिना इशारे के ही मेरे पल्लू में बंधा रहता था."

"मैं तो अभी भी बंधा हूँ तुम पल्लू तो हटाओ." दर्शन ने मसखरी से कहा.

"ह्म्म्मम्म , चल तू अपने कमरे में जा, मैं ये सामान रखकर आती हूँ." कहकर नीलम सामान समेटने लगी और दर्शन अपने कमरे की ओर बढ़ गया.

उधर आकाश के ऑफिस में:

आकाश अपनी सेक्रेटरी मेधा को बुलाता है.

"आज के सारे ईमेल भेज दिए ग्राहकों को?"

"जी सर."

"वैसे इस सप्ताहांत में क्या कर रही हो?"

"कुछ नहीं सर, वही घर के काम और टीवी या कोई मूवी देखने चली जाऊंगी."

"घर पर आना चाहोगी, मैं और आकार ही रहेंगे. और लोग बाहर जा रहे हैं."

"सर, आप दोनों के साथ अकेले नहीं, प्लीज. पिछली बार आप लोगों ने मेरी हालत ख़राब कर दी थी. ३ दिन तक दर्द रहा था."

"हम्म्म, निशा को पूछ लो. उसे तो दो लोगों के साथ भी कोई तकलीफ नहीं होती."

"जी सर, वो मान गयी तो ठीक, नहीं तो प्लीज मुझे क्षमा करना."

"ठीक है, नो प्रॉब्लम."

निशा उसके भाई आकार की सेक्रेटरी थी. कोई ४० वर्ष की थी, पर कामुकता में उसकी कोई तुलना नहीं थी. उसके मना करने की सम्भावना कम ही थी. हुआ भी यूँ ही, कुछ देर में मेधा ने आकर कहा कि निशा आएगी. मेधा ने भी आने का विश्वास दिलाया.

"वैरी गुड. मेधा, ये तुम मेरे कहने पर बेमन से तो नहीं...."

"नो सर, पर मैं एक को ही संभाल सकती हूँ. निशा जी की तरह मैं इतनी अनुभवी नहीं हूँ."

"ओके. मुझे बुरा लगेगा अगर तुम दबाव में ऐसा करोगी तो. चलो फ्राइडे को साथ चलेंगे।"

“जी.”

आकार के ऑफिस में:

"सर, मेधा ने इस शुक्रवार को आपके घर आने को कहा है." निशा ने पास आकर आकार से कहा.

"आहा, बहुत खूब. भैया प्लान बनाने में नंबर वन है."

दिया की किट्टी पार्टी:

"और सबीना, तेरा क्या चल रहा है आजकल. तेरे तो पति दुबई में हैं पर तेरा चेहरे से तो बहुत संतुष्टि झलक रही है."

"अब तुम लोगों को तो सब पता है. मेरे तीनों भतीजे आजकल मेरे ही साथ रहते है. आये तो ये कहकर थे कि पढाई पूरी करनी है, पर हरामखोर मेरे और सना पर ही चढ़े रहते हैं दिन रात."

"तभी तेरी बेटी की जवानी निखरी जा रही है. और तेरी तो जैसे आयु ही दस साल कम हो गयी लगती है. लगता है खूब प्रोटीन पीती है." सभी सहेलियां हंसने लगीं.

"वैसे जवानी तो गुप्ता आंटी की भी नहीं जा रही. इस उम्र में भी आपके जलवे कायम हैं."

श्रीमती गुप्ता किट्टी की सबसे वृद्ध सदस्य रहीं. कुछ ६५ की होंगी, विधवा थीं पर उनकी सुखवादी प्रकृति दूसरों के लिए एक उदाहरण था. उनके घर में तीन नौकर थे: एक नौकरानी, एक बावर्ची और एक ड्राइवर. जानकार ये मानते थे की बावर्ची खाना तो बनाता ही था पर इनकी भट्टी की आग भी बुझाता था. उसी तरह ड्राइवर केवल इनकी गाड़ी में इन्हें सवारी कराता था, बल्कि इनकी भी सवारी करता था. और नौकरानी सफाई में निपुण थी, सुना था कि वो कुछ खास स्थानों में लगे श्वेत चिपचिपे पदार्थ को तो चाट चाट कर साफ करती थी.

"अरे, तुम कौन मुझसे कम हो? घर बाहर सब तरफ तो लगी रहती हो खेल में."

यूँ ही सब एक दूसरे के प्रेम प्रसंगों की बातें करती रहीं.

"और दिया, तेरा क्या चल रहा है."

"अरे कुछ खास नहीं, इस सप्ताहांत में मैं और नीलम उसके गेटवे वाले बंगले पर जायेंगे."

"ओह हो हो! कौन होगा तुम्हारे साथ?"

"हितेश और दर्शन जायेंगे."

"तब तो तुम दोनों की खूब अच्छी खातिर करेंगे दोनों."

"हाँ, वैसे तो घर में भी करते हैं, पर इस बार नीलम कह रही थी कि उसने कुछ और भी सोचा है."

"बाहर से लौंडे बुलाएँ होंगे उस चुड़क्कड़ ने."

"पता नहीं. जो भी है. उसी दिन पता चलेगा."

यही सब करते करते खाते पीते समय हो गया और सबने नए अनुभवों और मसाले के साथ अगली किट्टी तक के लिए छुट्टी ली.

घर में:

थोड़ी देर बाद नीलम सब कुछ समेट कर दर्शन के कमरे में प्रविष्ट हुई. दरवाज़े से अंदर जाते ही वो ठिठक गई. दर्शन बिस्तर पर नंगा होकर लेटा हुआ था और अपने लंड को सहला रहा था. इस समय उसका लंड ९० अंश के कोण पर खड़ा हुआ था. नीलम ने दरवाज़ा बंद किया.

"बड़ा बेसब्र हो रहा है तू?"

"अरे चाची ३ दिन हो गए हैं तुम्हें चोदे हुए. बेसब्र क्यों नहीं होऊंगा?"

नीलम ये जान कर खुश हो गई कि दर्शन को उसे चोदे बिना दिन गिनने पड़ते है.

"क्यों? क्या और कोई नहीं मिली तुझे इन ३ दिनों में. तेरा तो एक दिन भी नहीं चलता." नीलम अपने कपड़े निकालते हुए बोली.

"अरे वो सब तो टाइम पास है चाची, असली भोग तो तुम हो."

"बड़ा मस्का मार रहा है चाची को. तेरे इरादे ठीक नहीं लगते कुछ. क्या करेगा रे तू मेरे साथ.?" नीलम ने नंगे होकर बिस्तर पर पास में बैठते हुए पूछा.

"पहले चाची की चूची पियूँगा. फिर चाची की चूत पियूँगा."

"फिर?"

"फिर चाची से लंड चुसवाऊँगा, और चाची की गांड चाटूँगा."

"और फिर?"

"फिर की माँ की चूत." कहते हुए दर्शन ने नीलम को पकड़कर बिस्तर पर धकेल दिया और उसके होंठ चूमने लगा.

फिर उसने एक हाथ में एक मम्मे को दबाया और अपने मुंह से दूसरे को भूखे भेड़िये की तरह चूसने चाटने लगा.

नीलम ने नकली विरोध जताया, "क्या कर रहा है, कोई ऐसा करता है अपनी चाची के साथ."

दर्शन बिना कुछ बोले अपने आक्रमण में लगा रहा. वो एक मम्मे को दबाता, दूसरे को चूसता, फिर बदल कर यही कार्य करता. नीलम अब वासना के भंवर में डूब रही थी.

"तूने तो बोला था की तू चाची की चूत पियेगा."

ये सुनकर दर्शन ने अपना सिर उठाया और नीलम के शरीर को चूमते चाटते हुए नीचे की ओर बढ़ा. जब वो जांघों के बीच पहुंचा तो उसने नीलम के दोनों पैर चौड़े कर दिया और कुछ देर तक लपलपाती चूत को निहारता रहा. फिर उसने धीरे से अपनी जीभ चलाई और नीलम के चूत की दोनों फांकों को हलके से चाट लिया. नीलम सिहर उठी और उसने पानी छोड़ दिया.

दर्शन ने अपना आक्रमण बनाये रखा और फिर अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया और पूरे जोश से चूसने चाटने लगा. नीलम अब कुनमुना रही थी और उसका पानी शायद एक बार फिर छूटने वाला था.

"अब और न तरसा अपनी चाची को, डाल दे मेरी चूत में अपना लौड़ा."

"चूसोगी नहीं, चाची ?" दर्शन ने थोड़ी निराशा से पूछा.

"अरे चोद दे, फिर चूसूंगी. मुझे भी पीना है तेरा रस."

ये सुनकर दर्शन की बांछे खिल गईं. उसने खड़े होकर नीलम की स्थिति को ठीक किया और उसके पांवों के बीच में आकर अपने लंड को नीलम की चूत पर रगड़ा और फिर एक दमदार धक्का लगाया.

"उई माँ. बड़ी जल्दी पड़ी है तुझे. थोड़ा आराम से नहीं डाल सकता था."

"चाची जब आराम से डालता हूँ तो कहती हो जोर से."

कहकर दर्शन लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा, पर अभी उसने गति नहीं पकड़ी. वो नीलम की चूत का पूरा आनंद उठाना चाहता था और जो आनंद धीरे चुदाई में है वो ताबड़तोड़ में नहीं. हालाँकि वो जानता था की नीलम उससे तेज और उग्र चुदाई की इच्छा रखती है. पर आज नीलम चुप थी और वो भी इस चुदाई का आनंद ले रही थी. पर जैसे कि दर्शन का अनुमान था वो जल्द ही इस प्यार भरी चुदाई से ऊबने लगी.

"थोड़ा जोर लगाकर चोद, ये क्या लौंडियों की तरह चोद रहा है."

दर्शन ने अपनी गाड़ी को थर्ड गियर में डाला और लम्बे और थोड़े तेज शॉट मरने लगा. वो चौथे और पांचवें गियर में जाने के लिए तैयार था. कुछ ही समय में वो चौथे और फिर पांचवे गियर में पिलाई करने लगा.

"हाँ यूँ ही. अबे हरामी अगर ऐसे चुदाई न हो तो तेरे से चुदने क्या मजा ही क्या है. पेल चाचीचोद. आह हा हा हा."

दर्शन अब तेज और पाशविक गति से चोद रहा था और नीलम नीचे से गांड उचका उचका कर उसका साथ भी दे रही थी. वो अब तक की इस चुदाई में दो बार और झड़ चुकी थी पर उसकी प्यास अभी पूरी तरह नहीं बुझी थी. अचानक नीलम का शरीर अकडने लगा, वो आनंद की चरम सीमा को छू रही थी. उसके मुंह से कराहें और आनंदातिरेक चीखें निकल रही थीं. फिर उसका शरीर शिथिल हो गया और वो निश्चल सी पड़ गई. दर्शन अपने कार्यक्रम में बिना रुके लगा रहा. वो भी अब झड़ने के करीब था और उसके लम्बे और शक्तिशाली धक्कों से नीलम का शरीर इस गुड़िया की तरह उछाल रहा था.

"चाची मेरे होने वाला है."

नीलम ने बिना कुछ बोले उसे अपना मुंह खोलकर संकेत किया. दर्शन ने अपना लंड बाहर निकला तो गप्प की एक आवाज़ हुई. फिर वो नीलम के रस से सने अपने तमतमाये हुए लंड को नीलम के मुंह के पास ले गया. नीलम ने मुंह खोला और दर्शन ने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया. अब वो दोबारा धक्के मरने लगा जैसे कि मुंह न हो बल्कि चूत हो. नीलम के मुंह से गौं गौं की ध्वनि निकल रही थी. ये देखकर दर्शन ने धक्के धीमे किये और फिर रुक गया. अब नीलम की बारी थी. वो मन लगाकर लंड को आइस क्रीम की तरह चूसने लगी.

दर्शन से अब रुका नहीं गया और उसके लंड ने फौहारे छोड़ने शुरू कर दिए. नीलम जितना हो सका पी गई और बाकी उसके मुंह से बाहर छलक गया. ठंडा पड़ने के बाद दर्शन ने लंड बाहर निकला और नीलम से गालों पर थपथपाया. नीलम हलके से मुस्कुरा दी.

"क्यों चाची, कैसा रहा?"

"एकदम मस्त."

"आपकी ही ट्रेनिंग है."

"चल झूठा, पचासों को चोद चुका था, जब मेरा नंबर आया."

"पर सिखाया तो अपने ने ही कि स्त्री को कैसे संतुष्ट किया जाता है. अब उसका मुझे भरपूर लाभ मिलता है. चाची इस शुक्रवार को कुछ खास है क्या?"

"क्यों?"

"पता नहीं, पर आप हर दो तीन महीने में कुछ नया करती हो. अब काफी समय से..."

"हाँ कुछ प्रोग्राम रखा है."

"कितने लड़के और बुला लिए चाची, हमारा पत्ता कट जाता है."

"इस बार तुम्हारे लिए भी जुगाड़ किया है."

"सच चाची, यू आर ग्रेट." कहते हुए नीलम को बाँहों में भरकर चूम लेता है.

"चल अब उठ, बाकी लोग आते होंगे।"

नीलम अपने कपडे पहनकर निकल गई. दर्शन ने भी कपडे बदले और नीलम के पीछे हो लिया. तभी देखा तो कनिका सामने से आ रही थी. उसे देखकर वो थोड़ा सकपका गया. कनिका जैसे ही पास पहुंची उसने एक अर्थपूर्ण मुस्कराहट के साथ दर्शन को देखकर नीलम की ओर इशारा करते हुए आंख मार दी और आगे बढ़ गई.
 
शुक्रवार:

अंततः शुक्रवार भी आ गया. आकाश और आकार ऑफिस के लिए निकले और उधर दिया और नीलम गेटवे के बंगले की ओर. दर्शन ऑफिस गया, हितेश और कनिका अपने कॉलेज. सब अपने अपने काम में शाम ५ तक व्यस्त रहने वाले थे. शाम को दोनों भाई अपनी अपनी सेक्रेटरी के साथ अलग अलग गाड़ियों में अपने घर पहुंचे. कनिका अपनी सहेली के घर जा चुकी थी.

उधर नीलम के बंगले पर ५ बजे दो गाड़ियां रुकीं. उसमे से दो महिलाएं और दो लड़के निकले और घर की घंटी बजाई। नीलम ने दरवाज़ा खोला और उन्हें अंदर आने का न्योता दिया. सब लोग अंदर चले गए. जब दिया ने नए अतिथि देखे तो अचरज में पड़ गई. अधिकतर नीलम १ या २ लड़कों को बुला लेती थी, पर दो अपनी आयु की महिलाओं को देखकर उसे आश्चर्य हुआ. नीलम ने सबका परिचय कराया।

नीलम: "दिया भाभी, ये मेरी सहेली रमोना है, जिससे आप पहले भी मिले हुए हो. और ये है उसका बेटा सचिन. रमोना, ये मेरी भाभी हैं दिया. अभी दर्शन और हितेश आने वाले होंगे."

"और ये है प्रीति और उसका भांजा पुनीत."

चारों लोगों ने दिया को नमस्ते किया और फिर सब लोग वहीं उस आलीशान बैठक में लगे सोफों पर बैठ गए. कुछ ही देर में दर्शन और हितेश भी आ गए. रमोना और प्रीति को देखकर दोनों की बांछें खिल गयीं. वो भी आकर सोफे पर बैठ गए और बातें करने लगे.

घर में:

चारों बैठ कर कुछ देर तक इधर उधर की बातें करते रहे. फिर आकार ने उठकर सबके लिए ड्रिंक बनाई जिसे निशा ने सबको दिया. एक ड्रिंक लेने के बाद निशा उठी और आकाश के पैरों के पास जाकर बैठ गई, उसने आकाश की बेल्ट निकाली, फिर पैंट को खोला और नीचे सरका दिया. उसके बाद उसने अंडरवियर को भी उतार के बगल में रख दिया.

"हमें ज्यादा समय बेकार की बातों में नहीं बिताना चाहिए. जिस काम के लिए जमा हुए हैं, पहले उस पर ध्यान देना चाहिए."

ये कहकर उसने आकाश का लंड अपने मुंह में डाला और बड़े प्यार से चूसने लगी.

"अरे निशा, मैंने तो सोचा था कि तुम मेरे साथ रहोगी." आकार ने शिकायत की.

"आपके साथ तो लगभग रोज ही रहती हूँ, आकाश सर से कभी कभी मिलना होता है. क्यों मेधा सही है न."

"जी दीदी." ये कहते हुए उसने भी आकार के साथ वही कार्यक्रम दोहराया.

अब दोनों भाई अपने अपने लंड एक दूसरे की सेक्रेटरी से चुसवा रहे थे. दोनों ने अपने शर्ट और बनियान भी निकाल दिए और पूरे नंगे हो गए.

तभी निशा बोली, "मेधा हम ही क्यों इन कपड़ों में रहें, बेकार में गंदे हो जायेंगे."

दोनों उठीं और अपने कपडे उतार दिए. फिर नंगी होकर अपने चुसाई चटाई के काम में लग गयीं. कुछ ही समय में दोनों लंड बिलकुल तनकर लोहे समान हो गए.

"सवारी का समय" निशा ने घोषणा की.

और अपने दोनों पांव आकाश के पांवों के बगल में किये और अपनी बहती हुई चूत को लंड पर रखा और बहुत प्यार से पूरा लंड अंदर ले लिया. उधर मेधा ने भी यही किया और वो आकार की सवारी करने लगी. दोनों भाई अपने चेहरे के सामने हिलते हुए मम्मों को चूसने और दबाने लगे. निशा बहुत तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी जबकि मेधा की गति कम थी.

इस समय कमरे का माहौल बहुत कामुक और गर्म हो चुका था.

नीलम के बंगले में:

इस समय आठ लोग कमरे में बैठे बात कर रहे थे. ये देखकर कोई सोच नहीं सकता था कि कुछ ही देर में यहाँ सामूहिक चुदाई का कार्यक्रम चलेगा. तभी घंटी बजी. दरवाजे पर डिलीवरी बॉय अल्पाहार और खाना लेकर आया था. डिलीवरी लेकर नीलम ने तीनों स्त्रियों के साथ मिलकर अल्पाहार को सजाया और खाने को किचन में रख दिया. फिर नीलम ने सबसे उनकी पसंद की ड्रिंक पूछी. स्त्रियों ने बियर और लड़कों ने व्हिस्की का अनुरोध किया. सब अपनी ड्रिंक्स लेकर अल्पाहार के साथ ग्रहण करने लगे.

"सचिन तुम आजकल क्या कर रहे हो." दिया ने पूछा.

"आंटी, वैसे मेरा कॉलेज चल रहा है पर मैं एक क्लब में पार्ट टाइम काम भी कर रहा हूँ. मम्मी ने ये जॉब दिलवाई थी."

"चलो बहुत अच्छा है, इस आयु में अपना व्यय स्वयं उठाना आना चाहिए."

"और तुम, पुनीत?"

"अभी मेरा पूरा ध्यान बस कॉलेज पर ही है. मैं अगले साल एम बी ए की तैयारी करूंगा. आगे प्रभु इच्छा."

"सच कह रहे हो."

"रमोना, यार तुम इतने खुले तरीके से ये सब करती फिरती हो, तुम्हे अजीब नहीं लगता." नीलम ने रमोना से प्रश्न किया.

"तुम गलत सोच रही हो. मैं कुछ भी खुले आम नहीं करती. इसीलिए मुझ पर कोई ऊँगली नहीं उठता. हाँ प्रवेश को थोड़ा ठीक नहीं लगता कभी कभार, पर चूँकि वो अब सेक्स नहीं कर पाते सो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है. पर शर्त यही है कि न ही बात और न ही उसकी शंका फैलनी चाहिए."

(प्रवेश रमोना के पति हैं जो लगभग ६४ साल के हैं)

"और उन्हें तुम दोनों के बारे में..."

".. पता है. मैं उनसे कोई बात नहीं छुपाती."

फिर प्रीति को ओर देखते हुए नीलम ने उससे पूछा, "तुम कब से अपने भांजे के साथ?"

"ज्यादा नहीं, बस यही कोई ७ महीने हुए हैं. पुनीत को इसकी माँ ने यहाँ पर आगे पढाई के लिए भेजा है. तुम्हारे हितेश की तरह. तो वो हमारे साथ ही रहता है. मैं और मेरे पति कुछ दूसरे जोड़ों के साथ अदला बदली करते हैं. तो एक बार हम लोगों से गलती हो गई और पुनीत ने हमें देख लिया. फिर मेरे पति ने पुनीत को भी न्योता दिया सम्मलित होने का, जो इसने मान लिया. तो हम लोग अब काफी खुल गए हैं."

"आकार और हमने भी सोचा था ये करने का, पर हमारी अभी की सेटिंग सही है, तो कुछ किया नहीं. पर भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता."

अब तक सबकी ड्रिंक ख़त्म हो गई थी. सो नीलम ने सलाह दी कि अपने साथी को तय करने के बाद सब लोग एक ड्रिंक और लेंगे. वैसे भी समय की कोई कमी नहीं थी. सबसे पहले प्रीति को चयन का अधिकार दिया. उसने दर्शन को चुना. फिर दिया ने सचिन को, रमोना ने हितेश को चुना, नीलम ने पुनीत को चुना. नीलम ने देखा कि सचिन उसे लालची आँखों से ताड़ रहा है. तो उसे आंख मारकर मूक शब्दों से इशारा किया कि बाद में.

नीलम पुनीत के साथ सबके लिए ड्रिंक बनाने चली गई और बाकी सब अपनी जोड़ियों में सोफों पर बैठ गए.

घर में:

घर में चुदाई का घमासान युद्ध चल रहा था, निशा उछल उछल कर आकाश के लंड से अपनी चूत की गहराइयों को नाप रही थी. मेधा ने भी अब गति पकड़ ली थी और वो भी तेजी से अपनी गांड उठा उठा कर आकार के लंड को अपनी चूत की गहराई नपवा रही थी. तभी आकाश ने निशा की गांड थपथपाई. निशा रुक गई तो आकाश ने उसे उलटी तरफ मुंह करने को कहा. निशा ने बिना लंड को निकले अपने आप को घुमाया और फिर से उछलने लगी. इस आसन में आकाश अब उसके मम्मे अच्छे से पकड़ कर मसल सकता था और उसने ऐसा ही किया. मेधा जो निशा की नक़ल कर रही थी, वो भी पलट कर चुदवाने लगी और आकार उसके मम्मे भींचने लगा.

ये उछलकूद बहुत देर तक चलती रही. निशा को आकाश ले लंड में अकड़न का आभास हुआ, तो उसने पूछा कि क्या वो झड़ने वाला है? आकाश के हाँ कहने पर वो रुक गई और लंड पर से उतर कर आकाश का लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. वो अपना मुंह पूरा खोलकर आकाश के लंड को अपने गले तक ले जाती फिर बाहर करती, चाटती, चूसती और फिर वही क्रिया दोहराती. मेधा इतनी अनुभवी नहीं थी इसीलिए वो उतर कर आकार का लंड सामान्य रूप से चूसने लगी. निशा के अनुभवी मुंह के आगे आकाश ने हाथ डाल दिए और बताया कि वो झड़ने वाला है. निशा ने बिना लंड निकले उसे बताया कि वो भी तैयार है.

बस फिर क्या था, आकाश ने अपनी पिचकारी को निशा के मुंह में खोल दिया और उसके मुंह को भर दिया. निशा ने थोड़ा ही पिया पर अधिकतम उसके मुंह से रिस कर उसके होंठ, ठोड़ी और स्तनों पर बहने लगा. आकाश का लंड अच्छे से चूस कर उसने लंड को पूरा सुखा दिया. फिर अपने चेहरे और वक्ष पर वीर्य को मल लिया.

मेधा ने भी यही किया और दोनों स्त्रियां इस समय वीर्य से नहाई हुई प्रतीत हो रही थीं. निशा मेधा के पास गई और उसके स्तन और चेहरे से काम रस चाटने लगी. फिर उसने मेधा का एक गहरा चुम्बन लिया और खड़े होकर बाथरूम की ओर बढ़ गई. मेधा उसके पीछे हो गई.

"भाई, ये निशा वाकई में बहुत चुड़क्कड़ औरत है. आदमी को पूरा निचोड़ लेती है."

"सही है, पर मेधा में जो सादगी और नयेपन की मिठास है, वो उसमें नहीं है."

दोनों ने एक दूसरे की बात पर हामी भरी और ये माना कि कुल मिलाकर ये दोनों हर तरह से उन्हें संतुष्ट कर सकती है.

निशा और मेधा बाथरूम से निकलकर रसोई की ओर चली गयीं और जल्दी ही सबके लिए एक नया ड्रिंक ले आयीं। सब यूँ ही नंगे बैठकर अपनी अपनी ड्रिंक की चुस्कियां लेने लगे. हालाँकि निशा और मेधा इस बात से अनजान थीं कि वे दोनों भाई इस समय नीलम के बंगले में क्या चल रहा होगा ये सोचने में ध्यानमग्न थे.

नीलम के बंगले में:

किचन में जाते ही पुनीत ने नीलम को पीछे से भींच लिया और उसकी गर्दन और कान के चुम्मे लेने लगा.

"सब्र कर बेटा, कहीं भागी नहीं जा रही हूँ. तेरी ही हूँ जो करने का मन हो सो कर लेना, पर पहले ये ड्रिंक बनाने में मेरी सहायता कर."

पुनीत ने फटाफट आठ ड्रिंक्स बनवाये और एक ट्रे में सजा दिए. फिर उसने अपने कपडे खोले और केवल कच्छा पहने रखा. उसने नीलम को पकड़ा और उसकी साड़ी अलग कर दी, यही उसने पेटीकोट और ब्लॉउस का भी किया. अब नीलम भी मात्र ब्रा और पैंटी में थी.

"ये ड्रेस सही है न आंटी, ड्रिंक सर्व करने के लिए?"

"हम्म्म, सो तो है. तू मेरे पीछे ट्रे लेकर आ."

जब दोनों बैठक में पहुंचे तो देखा कि वहां भी लगभग वही दृश्य था. सभी जोड़े अर्धनग्न अवस्था में चूमा चाटी कर रहे थे. नीलम ने हलकी खांसी से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

"अरे पहले एक और ड्रिंक ले लो. और नियम सुन लो."

सब ध्यान से नीलम को ओर देखने लगे.

"अभी ७ बजे हैं, और अब से कल शाम ७ बजे तक तुम सारे लड़के हम स्त्रियों के दास हो. जो हम चाहेंगे, तुम वही करोगे. कल शाम तक ये तुम्हारा काम है कि हमें पूरी तरह से खुश और संतुष्ट करो. कल शाम ७ बजे ये उल्टा हो जायेगा और हम महिलाएं तुम्हारी दासियाँ होंगी. है ठीक."

किसी को आपत्ति नहीं थी. सबने हाँ कर दी. और अपनी ड्रिंक्स को उठा कर "चियर्स" कहा और चुस्कियां लेने लगे. पर आधे नंगे लोग कितनी देर अपना संयम रखते, तो देखते ही देखते सारी औरतों की ब्रा धरती पर धूल चाटने लगी. एक दूसरे के होंठ चूम चूम कर लाल हो गए. तब दर्शन उठा और वो प्रीति के पांवों के बीच में बैठ गया. उसने प्रीति की पैंटी नीचे की जिसके लिए प्रीति ने अपनी गांड उठाकर उसकी सहायता की. प्रीति के पांव फैलाकर उसने चूत का एक चुम्बन लिया और जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटा। प्रीति सिहर उठी और उसकी चूत पनिया गई. दर्शन ने अपना मुंह अब उसपर लगाकर जीभ से कुरेदना शुरू किया और फिर अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी. अब वो कभी अपनी जीभ अंदर डालता तो कभी अपनी उंगली प्रीति अब कामांध हो कर आहें भर रही थी. उसने बाकी जोड़ों की ओर देखा तो वहां भी यही दृश्य चल रहा था.

सचिन दिया की चूत पर हमला बोले हुए था, हितेश रमोना को आनंदित कर रहा था और नीलम की सेवा में पुनीत लगा हुआ था. पूरे कमरे में अब आहों और कराहों की ध्वनि फैली हुई थी. सारे लड़के इस खेल में पारंगत थे और इसका श्रेय उनके घर पर हुए प्रशिक्षण को जाता था. उनकी जवानी का पहला स्वाद उनके घर की ही किसी महिला ने चखा था और उन्हें महिलाओं को कैसे संतुष्ट किया जाता है इसके लिए भरपूर अभ्यास कराया था. इस समय चारों महिलाये झड़ने के कगार पर थीं.

और यही हुआ भी.

सबसे पहले प्रीति ने ही अपना पानी छोड़ा, उसकी चीख सुनकर एक पंक्ति में नीलम, रमोना और दिया भी अपने अपने बैलों के मुंह में झड़ गयीं. बैलों ने भी इस अमृत को पूरी श्रद्धा से ग्रहण किया और चूतों को चाटना बंद नहीं किया. जब चूतें अच्छे से झड़ गयीं तो चारों एक एक करके खड़े हो गए और अपने जांघिये उतार फेंके. उन्होंने रसोई में जाकर सबके लिए एक और ड्रिंक बनाई. और वापिस आकर सोफे पर बैठे और अपने साथी को उसकी ड्रिंक थमा दी. चारों महिलाएं यही बात कर रही थीं कि वो कितने अच्छे से चूत पीते हैं. चारों युवाओं ने कुछ कहना उचित न समझा और सिर्फ एक मुस्कराहट से इस प्रशंसा का अभिवादन किया.

चारों महिलाएं अपने ड्रिंक के घूँट लेते हुए अपने साथी के लंड को एक हाथ से मुठिया रही थीं. रमोना ने पहले अपनी ड्रिंक एक तरफ की.

"मुझे अब कुछ और पीने का मन है." ये कहते हुए उसने हितेश के लंड को अपने मुंह में ले लिया और बड़े प्यार से चूसने लगी.

देखा देखी बाकी तीनों ने भी रमोना का अनुसरण किया और अपने साथी के लंड पर प्यार जताने लगती. कुछ ही देर में वापस आह वाह उम्म्म की आवाज़ें कमरे में भर गयीं. बस अंतर इतना ही था कि इस बार ये ध्वनियाँ लड़कों के मुंह से निकल रही थीं. अब चूँकि लड़के देर से स्वयं को रोके हुए थे तो उनसे अधिक संयम नहीं रखा गया. जब हितेश ने कहा कि उसका होने वाला है तो रमोना ने अपनी ड्रिंक का ग्लास उठा लिया और जम के चूसने लगी. जैसे ही उसे ये आभास हुआ कि हितेश छूटने वाला है, उसने लंड को मुंह से निकाल लिया और ग्लास पर लगा दिया. हितेश का कामरस रमोना की ड्रिंक में मिलने लगा. जब उसका रस निकल गया, तो रमोना ने ग्लास को एक तरफ रखा, वापिस लंड मुंह में लेकर साफ किया और अपना ग्लास उठा लिया.

"हे गर्ल्स, देखो मेरा नया ड्रिंक, व्हिस्की और लौड़े के रस का कॉकटेल." ये कहकर उसने एक लम्बे घूँट में उसे पी लिया. "ये है न असली नशा."

उसकी देखा देखी बाकी तीनों ने भी यही उपक्रम किया. तब रमोना ने कहा कि वो सब हर चुदाई के बाद फिर इस प्रकार से तरह रस इकट्ठा करें पर पियें नहीं. उसे एक और युक्ति सूझी है. सब अब अल्पाहार करने के लिए रुक गए और वहीँ बैठकर अपने प्लेट में खाने लगे.

घर में:

आकाश और आकार अब दूसरे चरण के लिए उत्सुक थे. पर मेधा को देखकर उन्हें लगा कि शायद वो अभी सहमत नहीं है. आकार ने निशा से इशारा करके पूछने के लिए कहा.

"मेधा, क्या तुम दूसरे राउंड के लिए रेडी हो."

"दीदी, थोड़ी देर आराम करना चाहती हूँ. सर का लंड बहुत बड़ा है मुझे बहुत थका देते हैं ये." मेधा ने विनती भरे स्वर में कहा.

"हम्म्म ठीक है. तुम तब तक देखो खाने के लिए क्या है. अगर है तो गर्म करके परोसने की तैयारी करो. मैं दोनों के डबल ट्रिप पर ले जाती हूँ."

मेधा सिहर उठी. उसे पिछली बार का समय याद आ गया. और वो झट से उठकर रसोई में चली गई. वहां उसने एक ड्रिंक बनाई और एक ही घूँट में पी गई. निशा के साहस की वो प्रशंसक थी. फिर उसने फ्रिज खोला और खाने का सामान ढूंढने लगी. जब देखा कि कुछ उचित नहीं है तो रेस्टोरेंट से आर्डर कर दिया और उन्हें ४५ मिनट बाद आने को कहा. फिर वो वहीँ एक कुर्सी पर बैठ गई और बाहर की आवाज़ें सुनने लगी.

"तो मालिकों क्या इरादा है?" निशा ने दोनों के बीच बैठकर उनके लंड मुठियाते हुए कहा.

"जाकर बाथरूम से जैल लेकर आ जाओ. इरादा तो तुम्हें समझ आ ही गया होगा." आकाश ने कहा.

"तो आप लोग मेरी चूत और गांड एक साथ मारोगे। दया नहीं आएगी?" निशा ने हंसकर कहा और उठकर बाथरूम चली गई और जैल की ट्यूब ले आयी.

नीलम के बंगले में:

अल्पाहार के बाद महिलाओं ने अपने अपने साथी के लंड मुंह में लेकर उन्हें फिर अच्छे से खड़ा किया और थूक से गीला कर दिया. फिर उन्होंने अपनी पीठ अपने सांड की तरफ करते हुए अपनी चूत को उनके लंड पर बैठाया और अंदर ले लिया.

"जो भी अपने सांड को पहले झड़ायेगी, उसे इनाम मिलेगा." रमोना ने घोषित किया.

"उफ्फ्फ, सचिन कितना बड़ा है तेरा लंड? " दिया ने आश्चर्य से पूछा.

"१० इंच से अधिक." रमोना ने हितेश की सवारी करते हुए बड़े गर्व से कहा.

"इतनी गहराई तक अब तक कोई नहीं गया." दिया ने भी अपनी सवारी गांठते हुए कहा, हालाँकि वो अभी धीरे ऊपर नीचे हो रही थी अपनी चूत को सचिन के लंड के अनुकूल बनाते हुए.

दूसरी ओर अन्य सवारियां गति पकड़ने लगी थीं. वे सब उस अनजाने पुरुस्कार की प्रतियोगिता को जितने का प्रयास कर रही थीं जिसकी घोषणा रमोना ने की थी. लड़के अपने साथी के मम्मों को पकड़ कर दबा रहे थे और अपने सवार को संतुलन रखने में सहायता कर रहे थे. परन्तु उनका ये भी उद्देश्य था कि वो पहले न झड़ें, चाहे इस कारण उनकी साथिन हार ही क्यों न जाये. ये उनके पौरुष की क्षमता का भी परीक्षण था. चारों दिशाओं में इस समय चुदाई की ढप, ढप, छप, छप की ध्वनि निहित थी. और उउउह आअह मेरी माँ की कराहों से पूरा कमरा भरा हुआ था.

दिया स्वयं को संभालने में अक्षम थी और उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. इसके कारण अब सचिन का पूरा लंड उसकी अछूती गहराइयों पर खटखटा रहा था. रमोना जैसी अनुभवी चुड़क्कड़ औरत के सामने सबसे पहले हितेश ने ही हाथ डाल दिए. उसने बताया कि उसका पानी छूटने वाला है. रमोना ने कहा कि उसे अपने ग्लास में व्हिस्की के साथ उसे मिलाना है. ये कहते हुए वो उतर गयी और ग्लास को हितेश के लंड पर लगा दिया. हितेश मुठ मारने लगा और उसने उस ग्लास में अपना कामरस छोड़ दिया.

रमोना वो ग्लास लेकर खड़ी हो गई. उसने ऐलान किया की सारे लड़के अपना पानी उसी ग्लास में छोड़ेंगे.

कुछ ही देर में बाक़ी तीनों लड़कों ने भी अपना रस ग्लास में डाल दिया। रमोना ने ग्लास को थोड़ा हिलाया और फिर लेट कर पहले अपने मम्मों पर डालकर माला, फिर अपने चेहरे पर डाला और वहां भी मल लिया. आखिर में उसने ग्लास मुंह में लगाया और एक घूँट में खाली कर दिया.

"वाह, इसे कहते हैं ड्रिंक."

सबने ताली बजाकर रमोना को जीत की बधाई दी और सभी महिलाओं ने वादा किया कि अगली सभी प्रतियोगिताएं में वे जीतने की कोशिश करेंगी.

तब रमोना ने रहस्यमयी स्वर में कहा, "जरूरी नहीं कि सारे पुरुस्कार हम महिलाओं को ही मिलें. लड़कों के लिए भी हैं पुरुस्कार." ये कहते हुए उसने अपनी एक उंगली से अपनी गांड की छेद को छुआ और उंगली उसके इर्द गिर्द एक गोला बनाया. ये देखकर लौड़े तनतना गए.

घर में:

निशा बाथरूम से जैल की ट्यूब ले आयी और वो दोनों के बीच में आ बैठी और ट्यूब से जैल निकलकर दोनों लौडों पर अच्छे से मला और उनको एकदम चिकना कर दिया.

"गांड कौन मारेगा ?" निशा ने पूछा.

"आकाश भाई, इन्हें तुम कम ही मिलती हो." आकार ने स्पष्ट किया.

"ये होता है छोटा भाई." निशा हंसी।

फिर जैल अपनी चूत पर मला और दो उँगलियों से अपनी चूत के अंदर भी अच्छे से लगा लिया. उसके बाद वो उठी और अपनी चूत आकार के लंड पर रखकर उस पर बैठ गई और जैल की ट्यूब आकाश को थमा दी. आकाश ने ट्यूब को निशा की गांड में डाला और एक अच्छी खासी मात्रा अंदर डाल दी और दो उँगलियों से उसकी गांड में अच्छे से फैला दिया.

उधर अब मेधा से किचन में ठहरा नहीं जा रहा था, वो इस चुदाई को देखने की उत्सुक थी. उसने अपने लिए एक डबल पेग बनाया और सामने सोफे पर बैठ गयी. आकार के लंड पर चूत लगाए निशा को देखा और फिर आकाश ने निशा को आगे की ओर झुकाया और अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा. आकार ने निशा के मम्मों को पकड़ा और बेरहमी से निचोड़ने लगा.

"१, २, ३" की गिनती के साथ ही आकाश ने एक ही लम्बे शॉट में अपना पूरा लंड निशा की गांड में जड़ दिया. निशा के मुंह से एक तीव्र कराह निकली पर उसने लंड बाहर निकालने का कोई प्रयास नहीं किया. उसे इस तरह की डबल चुदाई में बहुत आनंद आता था और वो गांड मरवाने की अभ्यस्त थी. रात में जब तक वो अपनी गांड नहीं मरवाती थी उसे नींद नहीं आती थी. और जब चूत और गांड दोनों का बाजा बज रहा हो तो वो उन्माद की सारी सीमाएं पार कर जाती थी.

"अब चोदो मुझे, कोई दया मत करना, पेल दो अपने लौड़े मेरी चूत और गांड में. फक मी, डबल फक मी."

नीचे से आकार और ऊपर से आकाश ने एक लयबद्ध तरीके अपने लौडों से उसके छेदों को भांजना शुरू किया. जब एक अंदर जाता तो एक बाहर आता। इस समय निशा की चूत और गांड के बीच की झिल्ली पर दोनों ओर से घर्षण हो रहा था. और निशा सातवें आसमान की यात्रा कर रही थी. दोनों भाइयों ने अपनी गति को धीमे धीमे बढ़ाई और तेजी से निशा को चोदने लगे.

पंद्रह मिनट की इस प्रकार की चुदाई के बाद गति कुछ क्षीण पड़ने लगी. निशा अब तक न जाने कितनी बार झड़ चुकी थी पर उसकी प्यास नहीं मिटी थी. वो दोनों भाइयों को और तेज और गहराई से चोदने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी. सामने बैठ कर मेधा ये देखकर हतप्रभ थी और अपनी उंगली से अपनी चूत कुरेद रही थी. तभी उसकी ऑंखें डर और आश्चर्य से फ़ैल गयी. सामने से कनिका आ रही थी. शायद उसका प्लान बदल गया था. कनिका आकर मेधा के बगल में खड़ी हो गई और इस डबल चुदाई को बड़ी दिलचस्पी से देखने लगी. फिर वो रसोई में गई और अपने लिए एक बियर ले आयी और सामने चल रहे खेल को देखती रही.

इतने समय की चुदाई के बाद अब आकाश और आकार स्वयं को रोकने में असमर्थ थे. गांड की तंगी के कारण आकाश ने अपना पानी निशा की गांड में छोड़ दिया. और लगभग साथ ही आकार ने निशा की चूत भर दी. तीनों उसी स्थिति में रुक गए और गहरी सांसे लेते हुए विश्राम करने लगे. फिर आकाश ने अपना लंड निशा की गांड से निकाला। निकलते ही उसका वीर्य निशा की गांड से बहने लगा. फिर निशा उठी और सोफे पर पीठ के बल ढेर हो गई. उसकी चूत और गांड दोनों से कामरस बह रहा था.

"नाइस शो डैड एंड ताऊजी. मेरे ख्याल से मुझे भी ये एक बार ट्राई करना होगा." कनिका ने ताली बजाते हुए प्रशंसा की.

फिर उसने अपना ग्लास मेधा को पकड़ाया और उसे रखने को कहा. वो आगे गई और निशा के सामने बैठ गई. निशा ने एक उसे संतुष्टि की निगाहों से देखा.

"वांट टू टेस्ट (स्वाद लेना चाहोगी) ?" निशा ने पूछा।

"बिलकुल" ये कहते हुए कनिका ने अपना मुंह उसकी चूत पर लगाया और चूत से गांड तक अपनी जीभ चलते हुए अपने पिता और ताऊजी के लौडों का अमृत पी गई.

फिर वो उठी और निशा का एक गहरा चुंबन लिया. "धन्यवाद,"

पीछे मुड़कर उसने ठगी सी बैठी मेधा के हाथ से अपनी ड्रिंक का एक घूँट भरा और गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली गयी.

नीलम के बंगले में:

जब लड़कों ने रमोना की गांड का प्रस्ताव सुना तो उनकी बांछें खिल उठीं. अब ये नहीं था कि उनमें से किसी ने गांड नहीं मारी थी, पर एक नयी गांड में अपने लंड को पेलने का सपना सबका होता है. पर उन्हें ये भी लग रहा था कि रमोना शायद कुछ अधिक नशे में है. यही सोचकर सचिन उसके पास गया.

सचिन: “मॉम, मेरे विचार से अब आपको और नहीं पीनी चाहिए. नहीं तो आपको चुदाई का असली आनंद नहीं आएगा.”

सचिन जानता था कि केवल यही एक कारण था जिसके कारण रमोना पीने पर रोक लगाती थी. उसने कई बार उसे इतना धुत देखा था कि वो चलने या बोलने तक में असमर्थ थी. और ये उसके साथी हितेश के साथ अनर्थ होता.

रमोना: ”मेरा लाल, माँ का कितना ध्यान रखता है. ठीक है अब कुछ देर के लिए कुछ नहीं पियूँगी.”

सभी उठकर खाने में मग्न हो गए. अच्छी शराब और अच्छी चुदाई से सबकी भूख चमक उठी थी. तब रमोना से दिया ने पूछा कि क्या उसके मन में कुछ और भी खेल हैं?

रमोना ने लड़खड़ाते स्वर में कहा: “यार मेरा तो हर समय खेलने का ही मन करता है. पर मैं आज अपनी गांड पर शर्त लगवाना चाहती हूँ. वैसे तो हितेश ही मेरी गांड मारने का पहला अधिकार होना चाहिए, पर मैं एक दूसरा खेल सोच रही हूँ.”

ये सुनकर हितेश का मुंह उतर गया. रमोना उसे देखकर खिलखिलाने लगी.

“खेल ये है”, वो बोली, “हम चारों स्त्रियों को एक पर्ची में नंबर मिलेगा १ से ४ तक. खाने के बाद जब भी हम अगला राउंड खेलेंगे उसमें हम अपने साथी का लंड चूसकर झड़ायेंगे. जो पहले झड़ेगा उसे १ नंबर वाली की गांड मिलेगी और जो अंत में उसे ४ वाली की. पर किसका क्या नंबर है ये तुम लड़कों को कोई नहीं बताएगा जिससे तुम लोग कोई बेईमानी न करो. अगर दो स्त्रियां आपस में बदलना चाहें तो वो एक दूसरे से बदल लेंगे. कैसा है ये आइडिया खेल का.”

सबने कुछ देर सोचा फिर इस प्रस्ताव को पारित कर दिया. और फिर खाने पर टूट पड़े.

खाने के बाद सब लोग आराम से बैठ कर बातें करने लगे. रमोना का भी नशा कुछ कम हो गया और वो भी अब ठीक से बात कर पा रही थी. सचिन और हितेश के कहने पर और ड्रिंक्स न लेने का निर्णय हुआ. अगर कोई चाहता तो सोने के पहले पी सकता था. अचानक दिया का फोन बज उठा. वो फोन लेकर कमरे से बाहर चली गई. लौटी तो गहरे सोच में थी.

“हितेश, क्या तुम्हारे कॉलेज की छुट्टी है कुछ दिनों?”

“नहीं तो, मौसी. पर हाँ विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेज बंद हैं २ सप्ताह के लिए, परीक्षा की तैयारी के लिए. पर हमारे कॉलेज में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. पर बात क्या है ?”

“अरे कुछ नहीं. चल मजा करते हैं.”

रमोना किचन में जाकर एक कागज और कलम ले आई और उसने चार पर्चियां बना दीं. स्त्रियों ने एक एक करके पर्ची में अपना नंबर पढ़ा और रमोना को लौटा दिया. रमोना ने नंबर के साथ नाम लिखा और किचन में जाकर कहीं रख दिया. अब कपड़े तो किसी ने पहने थे नहीं और लड़के पर्ची निकलते देखते ही वापिस टनटना गए थे. सोफे पर बैठकर वो अपने तने हुए लंड सहला रहे थे. हर स्त्री ने अपने निर्धारित साथी के सामने बैठकर उसके लंड को प्यार से पुचकारते हुए चूमने, चाटने और चूसने का कार्यक्रम शुरू कर दिया. लड़के अपने भाग्य पर इतराते हुए अपनी साथी महिला का जोश बढ़ा रहे थे.

इस बार के खेल में कोई प्रतियोगिता का पुट नहीं था, क्योंकि किसी को नहीं पता था कि किस गांड में कौन सा लंड जाने वाला है. इसी कारण सब आनंद ले रहे थे. स्त्रियां बहुत प्यार और पुचकार से लंड पी रही थीं, जैसे कि कोई पसंद की आइसक्रीम चाट रही हों. लड़कों को भी कोई जल्दी तो थी नहीं. आज वो स्त्रियों के दास जो थे. लंड, टोपा, टट्टे और कभी कभी गांड को चाटती हुई महिलाएं अब स्वयं भी उत्तेजित हो रही थीं . कमरे में अगर लड़कों के रस की गंध थी तो चूतों से झरते पानी की भी मादक सुगंध व्याप्त थी. दर्शन पहला लड़का था जो झड़ा. असली में वो बैठे हुए लंड तो चुसवा ही रहा था पर उसके सामने बैठे हितेश के लंड को चूसती रमोना की गांड ने उसे इतना आकर्षित किया कि वो जल्दी ही झड़ गया.

उसके बाद एक एक करते हुए हितेश, पुनीत और अंत में सचिन भी झड़ गए. सबके लौंड़ों के पानी ने गले सींचे और अपनी साथिन की प्यास बुझाई. अब ये देखना था कि किस लंड के भाग्य में किसकी गांड लिखी थी. सो रमोना उठकर किचन में गई और पर्चियां उठा लाई. उसने जिस नंबर से लड़के झड़े थे उस नंबर की पर्ची उन्हें सौंप दी. और फिर कहा कि वो अपने साथिन का नाम घोषित करें. और जब नाम पढ़े गए तो सभी आश्चर्य में आ गए.

दर्शन: “प्रीति”

हितेश: “रमोना”

पुनीत: “नीलम”

सचिन: “दिया”

आश्चर्य इसीलिए था कि सबको अपने ही साथी का नंबर मिला था. ऐसा चमत्कार कैसे हुआ, कोई नहीं समझ पाया. पर अगले राउंड के पहले लंड सही तरह से खड़े हो पाएं इस कारण कुछ देर रुकना आवश्यक था. गांड में पेलने के लिए लंड अधिक कठोर जो होना चाहिए. नीलम ने दर्शन और हितेश को स्टोर रूम से गद्दे ले कर आने के लिया कहा. इनके साथ पुनीत और सचिन भी गए और गद्दे, उसके लिए चादरें और तकिये लेकर आये और उन्हें बीचों बीच बिछा दिया. उसके बाद दर्शन किचन से सरसों के तेल से भरी एक पिचकारी वाली बोतल ले आया. अब सब तैयार था: गद्दे बिछे हुए थे, तेल की शीशी भरी हुई थी, लौड़े गांड फाड़ने को तत्पर थे और गांड वालियाँ उत्सुकता से अपनी गांड में खुजली कर रही थीं. ये खेल अब आरम्भ होने वाला था.

महिलाओं ने अपना स्थान ले लिया, सबने घोड़ी का आसन ग्रहण किया हुआ था और सिर को तकिये पर लगाया हुआ था. इससे उनका पिछवाड़ा ऊपर उठा हुआ था और गांड उभरी हुई थी. पहले नीलम, फिर प्रीति, फिर दिया और रमोना एक दूसरे को देख सकती थीं क्योंकि उनके चेहरे एक दूसरे के सामने थे. अब सारे लड़कों ने अपनी निर्धारित गांड के पीछे अपना स्थान लिया. पुनीत नीलम के पीछे, आलोक प्रीति के, हितेश रमोना के और अंत में सचिन दिया की गांड के पीछे खड़ा हो गया.

आलोक ने अपने हाथ एक हाथ से प्रीति की गांड को फैलाया और दूसरे हाथ से अपने हाथ में उपस्थित तेल की शीशी के नोक से प्रीति की गांड में उपयुक्त मात्रा में तेल भर दिया. उसने प्रीति के नितम्बों को थोड़ा हिलाया जिससे कि तेल अंदर चला जाये. जो तेल बाहर निकला उसने अपने हाथ में लेकर उसे अपने लंड के टोपे पर लगा लिया. फिर उसने बोतल हितेश को दी जिसने समान उपक्रम के साथ रमोना की गांड ने तेल डाला और अपने लंड पर भी लगाया . यही प्रणाली सचिन और पुनीत ने भी अपनाई। अब चारों लौड़े अपने लक्ष्य को भेदने के लिए तत्पर थे. और उन्हें ये दिख रहा था कि उनके सामने उपस्थित गांड भी खुलकर और बंद होकर उनके इस आगंतुक की प्रतीक्षा में थी.

चार लंड अपने लक्ष्य के मुंह पर अपने हथियार को लगाए और दबाव बनाते हुए अपने टोपे को उस तंग गली में प्रविष्ट कर दिया. चारों स्त्रियां ने जो इस आगमन के लिए उत्सुक थीं, एक गहरी साँस ली. उनकी इच्छा जो पूरी होने वाली थी. धीरे धीरे लंड अपने अपने लक्ष्य को भेदने लगे. हर गांड इस प्रतीक्षा में थी कि कब उसकी गहराई भरी जाएगी. लंड बिना रुके अपनी लम्बाई को गांड की गहराई से नाप रहे थे. औरतों में से कुछ बेचैन होने लगीं थीं, वो चाहती थीं कि जल्द ही उनकी चुदाई शुरू हो, पर लड़कों के मन में ऐसा कोई विचार नहीं था. अगर उन्हें आज्ञा दी जाती तो वो अवश्य उसका पालन करते, पर तब तक वो अपने मन से चुदाई कर सकते थे. गांड मारने के सुख में से सबसे अप्रतिम आनंद लंड को पहली बार अंदर डालने का ही होता है.

जैसे जैसे एक एक मिलीमीटर लंड का रास्ता तय होता है, लंड में एक भिन्न अनुभूति होती है. एक एक करके लंड अपनी जड़ तक जा समाये, पर सचिन अभी भी लगा हुआ था. जिनकी ऑंखें दिया को देख रही थीं वो उसके चेहरे पर पीड़ा भरे आनंद के भाव देखतीं. दिया की गांड में इतना मोटा और लम्बा लौड़ा कभी नहीं गया था, हालाँकि उसने खेला बहुतों से था. पर फिर उसके चेहरे पर कुछ सांत्वना के भाव दिखाई दिए. सचिन के पूरे लंड ने उसकी गांड पर अपना अधिकार जमा लिया था.

लंड अब गांड के अंदर अपना आवागमन प्रारम्भ कर चुके थे. छोटे और हल्के धक्कों से लंड अपनी राह सरल कर रहे थे. इसमें तेल का भी समुचित योगदान था. ये सर्वविदित था कि ये केवल चक्रवात के पहले की शांति है. कुछ ही समय में ये शांति टूटेगी और तूफ़ान उनकी गांड की धज्जियाँ उड़ा देगा. पर उनके इस पूरे आयोजन का प्रयोजन ही ये था. उन सबको अपनी गांड प्यार से नहीं बल्कि दमदार ढंग से मरवाने का शौक था. और ये पूरा प्रेम का नाटक बस कुछ ही क्षणों के लिए था. रमोना जैसी महा चुड़क्कड़ औरत से ये सब प्रेम प्यार अब सहन नहीं हो रहा था.

“गांड ऐसे ही हिजड़े की तरह मारता है क्या? कुछ तो दम दिखा.” हितेश के तन बदन में जैसे आग लग गई. उसने अपने पूरे लंड को निकला और एक जानदार धक्के में अंदर पेल दिया.

“ये हुई न बात, अब लगा कुछ हो रहा है. अब मिटा मेरी गांड की खुजली. अगर तू जरा भी हल्का पड़ा तो तेरा लंड काटकर खा जाऊंगी कच्चा ही.”

हितेश ने भी अब अमानवीय रूप धारण कर लिया. और उसके धक्के लम्बे और तीव्र हो गए. रमोना की गांड का रोम रोम आनंद से चीत्कार करने लगा. उसकी आनंदभरी सीत्कारों और चीखों से कमरा भर गया. और उसके साथ एक एक करके अन्य महिलाएं भी जुड़ गयी. सबसे अधिक दर्दनाक चीख दिया की थीं. उसकी गांड में ऐसा मूसल कभी नहीं गया था. और उसे कोई जल्दी नहीं थी गांड की धज्जियाँ उड़वाने की, वो तो पहले वाली गति से ही संतुष्ट थी, पर रमोना के कारण उसे भी उसी अमानवीयता को झेलना पड़ रहा था. सचिन ने ये सोचा था कि दिया भी उसकी माँ की तरह ही उसके लंड पर झूम उठेगी. पर उसके लिए अभी समय था.

दिया की चीखों में आनंद कम और पीड़ा अधिक थी. अन्य दो महिलाएं भी इसी नौका में थीं पर उनकी गांड में सचिन जैसा लंड नहीं था. अब ऐसा भी नहीं था कि लड़कों को गांड मारने मिली थी तो उन्होंने चूत का ध्यान नहीं रखा था. चूत में किसी ने एक तो किसी ने दो उँगलियाँ डाली हुई थीं और उन्हें वो अंदर बाहर कर रहे थे, जितना संभव हो पा रहा था. चारों औरतें अब दो तीन बार झड़ चुकी थीं और आनंद की चरम सीमा प्राप्त कर चुकी थीं.

पुनीत ने नीलम के भग्नाशे को अपनी उँगलियों से मसला तो नीलम को जैसे बिजली का झटका सा लगा और वो चीखती हुई एक बार फिर झड़ गई और उसके पानी से नीचे बिछा बिस्तर और गद्दे भीग गए. उसकी गांड पुनीत के लंड को अपने अंदर समाने के लिए सिकुड़ गयी और इसका परिणाम ये हुआ कि पुनीत भी अपने चरम पर जा पहुंचा. उसने नीलम की गांड में अपने लंड का रस छोड़ दिया. नीलम और पुनीत वहीँ ढेर हो गए. पुनीत का लंड अभी भी उसकी गांड में ही था. दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे. नीलम ने उसे चूमने के लिए सिर घुमाया और दोनों एक दूसरे के साथ चुम्बन में लीन हो गए.
 
रमोना जो इन सबसे अधिक अनुभवी थी उसने हितेश के लंड पर अपनी गांड से चुसाव करना शुरू किया. अब हितेश का लंड उसकी गांड में और भी सट कर और तंग होकर जाने लगा. रमोना की चूत जितना पानी छोड़ सकती थी छोड़ चुकी थी. अब वो लौड़े का पानी पीने के लिए उत्सुक थी. हितेश ने जब अनुभव किया कि वो अब अधिक समय नहीं टिक पायेगा तो वो रमोना की चूत, विशेषकर उसके भग्नाशे को जोर जोर से रगड़ने लगा. रमोना के शरीर ने उसके इस विचार को कि वो अब और नहीं झड़ सकती गलत सिद्ध कर दिया.

हितेश ने जैसे ही अपने गाढ़े वीर्य से उसकी गांड को सींचा, उस गर्म संवेदना और चूत पर प्रहार से रमोना इस बार काँपते हुए झड़ने लगी. उसके शरीर ने अब उसका साथ छोड़ दिया और वो उसी स्थिति में आनंद से कराहते और सुबकते हुए ढीली पड़ गई. हितेश ने धीरे से अपना वीर्य और गांड के रस से सना हुआ लंड बाहर निकाला और रमोना के ही पास लेट गया. रमोना ने उसके चेहरे को हाथ में लिया और चूमने लगी.

आलोक और सचिन भी बहुत पीछे नहीं रहे और उन्होंने भी प्रीति और दिया की गांड में अपना पानी छोड़ा और उनके साथ लेटकर प्रेमालाप करने लगे. कुछ समय पश्चात् औरतों ने सफाई के लिए बाथरूम की राह ली और लड़कों ने भी दूसरे बाथरूम का उपयोग किया. बाहर आने के बाद चादरें उठाकर धोने के लिए डाल दी गयीं और गद्दे और तकिये वापिस स्टोर में लौटा दिए. सबको प्यास लगी हुई थी तो इस बार दिया ने सबके लिए बियर खोल ली. उसकी चाल की लचक बता रही थी कि सचिन के लंड ने भीतर तक आघात किया है. पर उसके चेहरे पर छाई लालिमा और चमक इससे मिली संतुष्टि को भी दर्शा रही थी.

सबने अपनी बियर समाप्त होने के बाद सोने के लिए अपने कमरे की ओर प्रस्थान किया. कल सुबह एक नया दिन था और कुछ तो नया होने की आशंका थी.

क्रमशः
 
अध्याय ७: सातवां घर - वर्षा और समीर नायक १

आज राहुल, जयंत और कुसुम अपने खेतों के दौरे से लौट रहे थे. जब भी दोनों सप्ताह के लिए जाते थे कुसुम भी लगभग साथ चली ही जाती थी. घर में उस समय काम कम होता था जिसे बाक़ी तीनों महिलाएं अच्छे से संभाल लेती थीं. कुसुम की एक पहचान की औरत इन दिनों आती थी और इसके लिए उसे अच्छा पैसा भी मिल जाता था. सभी लोग बैठे हुए बातें कर रहे थे, शाम के ५ बजे थे और तीनों किसी भी समय आ सकते थे. तभी एक गाड़ी की आवाज़ आयी और फिर कार के दरवाजे के खुलने और बंद करने की. जयंत ने ड्राइवर से सामान अंदर लाने को कहा और तीनों अंदर प्रविष्ट हुए.

"आ गए तुम लोग, बहुत प्रतीक्षा कराई. हम तो २ बजे से राह देख रहे हैं." वर्षा ने कहा.

"हाँ माँ, हम लोग बीच में थोड़ा रुक गए थे, इसलिये देर हो गई. पर अभी तो ५ ही बजा है."

"जाओ तुम लोग नहा धो के कपड़े बदलो मैं तुम लोगों के लिए खाने को कुछ लगाती हूँ." सुलभा ने कहा और रसोई की ओर बढ़ गई.

"माँ जी, आप रहने दो, मैं हूँ न, मैं कर लूंगी." कुसुम ने आग्रह किया.

"अरे तू खुद भी तो थकी होगी. वैसे भी सप्ताह भर संतोष ने खूब रगड़ा होगा तुझे. जा तू भी तैयार हो जा. कल से कर लेना काम."

"अरे संतोष ने क्या रगड़ा होगा, इसे तो हम हर दिन यहाँ रगड़ते हैं तब तो नहीं थकती है." समीर ने हँसते हुए कहा.

"बाबू जी. आप बहुत गंदे हो." कुसुम ने मुंह बनाया पर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी.

"तुझे आज रात बताएँगे कि हम कितने गंदे हैं." पवन ने भी हँसते हुए अपनी इच्छा प्रकट की.

कुसुम शर्मा के भाग गई और सब लोग हंसने लगे. कुछ ही देर में सभी आ गए.

"और राहुल और जयंत, खेतों के क्या हाल हैं?" समीर ने पूछा.

"पिताजी, इस बार फिर अच्छी फसल होगी. बाजार में दाम भी अच्छे मिलने की आशा है. इस बार हमने अपनी ६०% फसल का अनुबंध एक विदेशी कंपनी से कर लिया है. २५% का अगले दौरे में कर लेंगे. शेष खुले बाजार में बेचेंगे." राहुल ने बताया.

"हाँ ये ठीक रहेगा. कामगारों से कोई परेशानी तो नहीं है?"

"नहीं, संतोष ने सब अच्छे से संभाल रखा है. हर प्रकार से."

समीर ने अपनी ऑंखें टेढ़ी कीं तो राहुल ने समझाया, "उसने दो औरतों को पटाया हुआ है, और दोनों बिलकुल चटक माल हैं."

"तुमने कैसे जाना?"

"परसों दोनों के ले आया था गेस्ट हाउस में, बहुत एन्जॉय किया."

"राहुल, पर ये समझो कि इस प्रकार से कामगारों के साथ करना ठीक नहीं है. आगे से इस बात का ध्यान रखना. संतोष और कुसुम हमारे घर वाले हैं, पर ये तुम लोगों ने ठीक नहीं किया."

"ठीक है पापा, आगे से नहीं होगा. पर हफ्ते भर बिना चुदाई के रहना मुश्किल होता है."

"तो अंजलि को ले जाया करो, या अपनी दोनों मम्मियों को ले जाओ. पर ऐसा मुझे दोबारा नहीं सुनना है."

"तेरे पापा ठीक कह रहे हैं. जिसे चाहे उसे साथ ले जाओ. साथ भी रहेगा." वर्षा ने समर्थन किया.

"ओके पापा, मम्मी, अगली बार से ऐसा ही करेंगे. इस बार जयंत अंजलि को ले जायेगा. और मेरे साथ आप दोनों में से कोई चलना."

तभी कुसुम भी आ गई और रसोई में जाने लगी.

"अरे रहने दे आज, बोला न. सुलभा कर रही है. आ मेरे पास बैठ यहाँ." वर्षा ने उसे अपने पास बुलाया. "अंजलि तुम थोड़ा अपनी सासू माँ की सहायता करो और सबके लिए ड्रिंक्स बना दो."

"ओके, मॉम." अंजलि ने रसोई की ओर चल दी.

अंजलि रसोई में पहुँच कर सुलभा का हाथ बटाने लगी.

"अंजलि बिटिया, एक बात बोलूं?"

"जी माँ जी."

"आज राहुल को वर्षा के पास रहने दे, वो कह रही थी कि उसकी गांड में कीड़े चल रहे हैं जो सिर्फ राहुल ही निकाल सकता है. वो खुद तो तुझे कहेगी नहीं, सप्ताह भर बाद जो आया है. अगर तुझे ठीक लगे तो अपनी ओर से कह देना."

"ठीक है, माँ जी. मैं जयंत के पास रह लूंगी. बहुत दिन हुए भैया से अच्छे से मिलन नहीं हुआ है. और आपका क्या प्लान है?" अंजलि ने चुटकी ली.

"तेरे ससुर जी और पापा कह रहे थे कुछ. शायद कुसुम को भी बुला लें. पता नहीं, जैसे इनका मन में होगा, सो मेरे लिए ठीक है."

"हम्म्म, अगर पापा रहेंगे तो आपकी गांड की खैर नहीं." कहकर अंजलि ने उनकी गांड पर एक चपत लगाई और ग्लास की ट्रे लेकर बार की ओर चली गई.

सुलभा ने अपनी गांड को हलके से सहलाया, "कहीं दोनों न चढ़ जाएँ इस बुढ़िया पर. पर सच कहूँ तो आज मेरी ज्यादा शक्ति नहीं है. इनकी इच्छा के लिए एक बार कर लूंगी."

फिर उसने खाने का सामान एक ट्रे में लगाया और बैठक में आ गई. उधर अंजलि ने स्कॉच की बोतल, बर्फ और सोडा लिया और बीच टेबल पर रखकर सबके लिए पेग बनाने लगी. पहले अपने ससुर, फिर पिता को पेग दिए. फिर सास को दिया. अपनी माँ को पेग देते हुए कहा, "मम्मी आज मैं जयंत भैया के साथ सो जाऊं? बहुत दिन से हम लोगों की बात ही नहीं होती. आप अगर चाहो तो राहुल के साथ सो जाना. ठीक है?"

वर्षा का चेहरा खिल गया. "ठीक है, जैसे तेरी इच्छा। अब बात ही तो करोगे न?" उसकी हंसी छूट गई.

यूँ ही ड्रिंक लेते लेते बहुत समय हो गया. सुलभा ने सबको खाने के लिए बुलाया और सब खाना खाते हुए बातें करते रहे.

"भाईसाहब अब कोई अच्छी सी लड़की देखकर जयंत की भी शादी दीजिये." सुलभा ने समीर से कहा.

"हमारे परिवार में उसे दुविधा न हो और न हमें उससे, ये देखना बहुत आवश्यक है." समीर ने उत्तर दिया.

"ये बात तो सही है, फिर भी ढूंढने में क्या समस्या है?"

"मेरे लिए पहले ही कोई कमी है जो मुझे शादी करके एक और लड़की दिला रहे हो?" जयंत ने मजाक में बोला।

"हम सब तुम्हारे अकेले के लिए थोड़े ही सोच रहे हैं." अंजलि ने उसे छेड़ा, "यहाँ और भी पुरुष हैं, जिनके लिए ये सोचा जा रहा है."

सब हंसने लगे.

"चलो अब देर हो रही है. तुम जयंत से बात करने के लिए उसके साथ रहो." समीर ने कहा. "आइये समधन जी, आज आपकी थोड़ी सेवा कर दें."

समीर ने सुलभा का हाथ लिया और उसे खड़ा करते हुए, सुलभा के कमरे की ओर चल पड़ा. देखा देखी अंजलि ने जयंत के साथ अपने कमरे की ओर प्रस्थान किया. और वर्षा को राहुल हाथ पकड़कर वर्षा के कमरे की ओर ले गया.

"हम दोनों ही बचे हैं, कुसुम. क्या करें?" पवन ने पूछा.

"हम भी बाबूजी के साथ ही चलते हैं."

"ठीक है, चलो."

ये कहकर दोनों सुलभा और पवन के कमरे की ओर बढ़ गए.

वर्षा और राहुल:

"जी, मम्मी जी, क्या प्लान है."

"तुम्हारी शॉर्ट्स बहुत टाइट लग रहे हैं, क्या बात है."

"आपको देखकर ये हाल हुआ है. मुझे निकाल ही देना चाहिए, क्यूंकि अब कष्ट हो रहा है. आप सहायता करेंगी?"

वर्षा ने राहुल की टी-शर्ट उतार कर एक तरफ रख दी. और फिर शॉर्ट्स को खोलकर नीचे सरका दिया। राहुल ने अपने पावों को उठाकर उन्हें अलग किया. अब वो वर्षा के सामने नंगा खड़ा हुआ था. वर्षा ठगी सी उसके तने हुए लंड को देख रही थी.

"क्या हुआ माँ जी?"

"मुझे विश्वास नहीं होता की कोई लंड इतना बड़ा हो सकता है."

"अपने पहली बार तो नहीं देखा है."

"हाँ पर ये सच में बहुत अविश्वसनीय है." ये कहते हुए वर्षा उसे हाथ में लेकर सहलाने लगी. "मुझे याद है जब तुम अंजलि का हाथ मांगने आए थे. उस दिन भी तुम्हारा अजगर पैंट में दिख रहा था. तभी मैंने अंजलि से पूछकर तुम्हारी परीक्षा के लिया कहा था. अंजलि ने कहा था कि ये फेल जो जाये हो ही नहीं सकता."

"बात तो सही कही थी उसने. पापा के शुक्राणु का प्रभाव है."

"हाँ, पवन के बराबर ही हो तुम."

राहुल ने वर्षा को अपनी बाँहों में ले लिया, और उसे चूमने लगा. वर्षा भी उसका साथ दे रही थी. दोनों एक दूसरे के होंठ जैसे खा जाना चाहते थे. राहुल ने पीछे हाथ बढाकर वर्षा के ब्लॉउस के बटन खोले दिए और चूमते हुए ही उसका ब्लाउज निकाल दिया. उसके इस कृत्य से ये साफ था कि वो इस खेल का पारंगत खिलाडी है. फिर उसने नीचे से साड़ी खोली और वर्षा के शरीर से अलग कर दी. वर्षा ब्रा और पेटीकोट में बहुत लुभावनी लग रही थी. राहुल ने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला और वो भी धरती पर ढेर हो गया.

"आप सुंदरता की देवी हो. सच मैं अंजलि ने आप से ही अपनी सुंदरता पाई है." ये कहकर राहुल ने ब्रा के हुक खोले और उसे भी वर्षा के शरीर से अलग कर दिया. फिर वो घुटनों के बल बैठ गया और वर्षा की पैंटी को हलके से सरकाते हुए निकाल दिया. अब सास और दामाद एक दूसरे के सामने नंगे खड़े हुए थे. वर्षा एकटक राहुल के लंड को ताक रही थी.

"क्या माँ जी, क्या मेरा लंड सुपर लंड है"

"सच में तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है. हाँ, ये सुपर लंड ही है, तुम्हारे पिता की श्रेणी का."

राहुल ने वर्षा के कंधे पर हाथ रखकर उसे धीमे से दबाया, "मम्मी जी, आपको मोटे और बड़े लंड अच्छे लगते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं है. आइये, और अब अपने सुन्दर मुंह से इसकी प्रशंसा कीजिये."

वर्षा घुटनों के बल बैठ गई. उसे राहुल का ये स्वभाव अच्छा लगता था. वो चुदाई के समय उसे अपनी दासी के समान उपयोग करता था. पर चुदाई के बाद वो उसे पूरा आदर देता था. वर्षा ने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया. पर जैसा राहुल का स्वभाव था, उसने वर्षा के सिर के पीछे हाथ रखा और अपने लंड से उसके मुंह को चोदने लगा. वो ८-१० बार अंदर बाहर करता फिर उसका चेहरा पूरा अपने लंड पर दबा देता. इससे उसका लंड वर्षा के गले तक चला जाता था. कुछ पल रूककर वो दोबारा चोदने लगता. जब लंड गले तक जाता तो वर्षा की साँस रुक जाती और आंखों में आंसू आ जाते. ये सिलसिला कुछ ६ -७ मिनट तक चला. फिर एक बार पूरा सिर दबाकर राहुल ने वर्षा को छोड़ा और अपना लंड बाहर निकाल लिया.

"मुझे आपकी चूत का रस पीना है, मम्मी जी."

वर्षा बिस्तर पर लेट गई और एक तकिया अपनी गांड के नीचे लगाकर उसे उठा दिया. राहुल उसके सामने झुक कर चूत की फांकों को फैलाकर, वर्षा की चूत अपनी जीभ से चारों ओर चाटने लगा.

"उई माँ." वर्षा फुसफुसाई.

राहुल के अनुभवी मुंह के प्रभाव से वर्षा ज्यादा देर रुक नहीं पाई और उसने राहुल के मुंह में अपना पानी छोड़ दिया. वैसे भी जब अंजलि ने उसे राहुल के साथ सोने के लिए कहा था उसकी चूत पानी छोड़ रही थी. राहुल ने बेझिझक उसका सेवन किया और चूत पर अपना आक्रमण चलने दिया.

"राहुल, अब बस करो प्लीज. मेरी चूत बहुत संवेदनशील हो गई है. अब देर न करो और चोदो मुझे. तुम्हारे बड़े लंड के लिए ये इतने दिन से व्याकुल है."

"क्यों माँ जी, क्या पापा ने आपको नहीं चोदा इतने दिनों."

"चोदे क्यों नहीं, हर दिन ही चोदते थे, पर तेरी बात अलग है. तू मेरा दामाद है, मेरी बेटी का पति."

राहुल ने अपने लंड को वर्षा की चूत पर रखा.

"राहुल, मेरी चूत ज्यादा देर मत चोदना. आज तुझसे अपनी गांड मरवाने का बहुत मन है."

"अरे माँ जी, आप क्यों इतना सोचती हो. आपकी चूत भी अच्छे से चुदेगी और आपकी इच्छा के अनुसार आपकी गांड का भी भुर्ता बनाऊंगा."

ये कहते हुए राहुल ने एक नपा हुआ धक्का लगाया और वर्षा की खेली खिलाई चूत में एक ही बार में पूरा लंड ठोक दिया. वर्षा का शरीर अकड़ गया. राहुल अपना पूरा खम्बा डाल कर रुक गया जिससे वर्षा को पूरी गहराई भरने की अनुभूति हो सके. राहुल झुककर वर्षा के होंठ चूसने और मम्मे दबाने लगा. वर्षा उसका पूरे मन से साथ दे रही थी.

उसके बाद राहुल ने वर्षा की चूत में अपने लंड से उठक बैठक शुरू की. और शीघ्र ही एक अच्छी गति पकड़ ली. वर्षा अब आनंद की ऊँचाइयाँ छू रही थी. राहुल का जवान और तगड़ा लंड उसकी चूत की वो गहराइयाँ छू रहा था जो मानो अछूती थीं. वो मन ही मन अपने आपको धन्य मान रही थी कि उसकी बेटी ने ऐसा तगड़ा सांड अपने पति के रूप में चुना था. वो लगातार झड़ रही थी और उसकी मुंह से निशब्द चीखें निकल रही थीं.
 
अंजलि और जयंत:

दोनों भाई और बहन एक दूसरे का हाथ थामे हुए अंजलि के कमरे में आ गए.

"वैसे विवाह का आईडिया बुरा नहीं है. तुम्हे इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए."

"पर हमारे परिवार में स्थापित भी होनी चाहिए. मुझे नहीं लगता कि हम लोग अपना रहने के ढंग बदलने वाले हैं. और अगर बात बाहर चली गई तो बहुत समस्या हो जाएगी."

"वो ठीक है, पर अगर तुम हाँ करोगे तो हम इन्हीं मापदंडों पर ढूंढेगे. देर सवेर कोई सही लड़की मिल ही जाएगी."

"हम्म्म, वैसे विचार बुरा नहीं है. हर रोज मुझे अकेले सोना पड़ता है. कम से कम एक स्थायित्व तो आएगा. ठीक है. मुझे स्वीकार है."

"मेरा प्यारा भाई." कहकर अंजलि ने जयंत के होठों को चूमा. “पूरा परिवार इस समाचार से प्रसन्न हो जायेगा. मैं थोड़ा बाथरूम से आती हूँ, तब तक तुम २ पेग बना लो."

जयंत ने कमरे के बार से दो पेग बनाये और अपने कपड़े उतारने लगा और सिर्फ अंडरवियर पहन कर सोफे पर बैठ गया. कुछ ही देर में अंजलि एक तौलिया लपेटकर बाहर आ गयी. जयंत ने कपड़े उठाये और बाथरूम में घुस गया. मुंह हाथ धोकर वो भी एक तौलिया लपेटकर बाहर निकला और सोफे पर बैठ कर अपने पेग की चुस्कियाँ लेने लगा.

"पर ये बात तुम्हारी सास ने क्यों उठाई?"

"पता नहीं, शायद उनके मन में कोई लड़की होगी. जब तुमने न किया था तो उनका चेहरा उतर गया था."

"हाँ ये हो सकता है. और इस सप्ताह तुम लोगों ने क्या किया?"

"अरे इस बार तो पता नहीं क्या बात थी, दोनों पापा और ससुरजी मेरे पास फटके ही नहीं. एक दिन मम्मी के साथ सोते और अगले दिन सासू माँ के साथ. सच में मेरी तो चूत इतनी प्यासी है कि क्या बताऊँ. मैंने सोचा था कि तुम और राहुल को आज एक साथ चोदूगी, पर सासु माँ ने किचन में कहा कि मम्मी को राहुल से अपनी गांड की खुजली मिटानी है. अब मैं क्या करती. अच्छा हुआ तुम्हे किसी ने नहीं हथियाया नहीं तो मैं आज भी प्यासी ही रह जाती."

"मेरे रहते हुए तुम प्यासी रहो, ये कैसे हो सकता है. पर मम्मी को अब राहुल कुछ ज्यादा ही नहीं भाने लगा है?" जयंत ने कहा.

"मम्मी को अब राहुल या ससुरजी से गांड मरवाये बिना अब चैन नहीं आता. कल देख लेना रात में हमारे कमरे में आ जाएँगी."

जयंत ने अपना ग्लास समाप्त किया और अंजलि के पांवो में जाकर बैठ गया. फिर उसके तौलिये को एक ओर करके उसकी चूत पर एक चुम्मा लिया और अपनी जीभ उसकी दरार पर फिराई.

"उई आह." अंजलि ने सीत्कार ली.

"प्यासी तो है." ये कहकर जयंत उसकी चूत पर टूट पड़ा और कभी प्यार कभी आक्रोश से चूमने और चाटने लगा.

जयंत के लगातार और अनुभवी मौखिक सम्भोग और उसकी सप्ताह भर का सेक्स से व्रत के प्रभाव से अंजलि झड़ चुकी थी और अब वो निढाल सी पड़ी थी.

"क्या हुआ अंजलि."

"ये लोग ऐसा क्यों किये? सप्ताह भर के लिए मुझसे दूर रहे. और आने पर राहुल को भी अलग कर दिया. भला हो तुम्हारा, नहीं तो मैं आज भी प्यासी रह जाती."

"अरे अंजलि, मुझे नहीं लगता की उन्होंने ऐसा तुम्हे सताने के लिए किया होगा. तुम भी जा सकती थीं न अगर मन था. हमारे घर में कोई रोक टोक तो है नहीं."

"ज्यादा उनका पक्ष मत लो. अब मुझे चोद दो जल्दी." अंजलि ने आग्रह किया. "पर शायद तुम सच ही कह रहे हो. हम में से कोई ऐसा नहीं सोचता."

जयंत ने अपने लंड को अंजलि की चूत के मुंहाने रखा और रगड़ने लगा.

"यार, अब तू ये सब खेल बंद कर, और पेल अपना लौड़ा अंदर." अंजलि ने गुस्से से कहा.

"ओके, बेबी." ये कहकर एक ही झटके में जयंत ने पूरा लंड अंजलि की प्यासी चूत में उतार दिया.

"उफ्फ्फ" अंजलि ने एक संतुष्टि भरी आह भरी. वो आँखें बंद करके इस आनंद की अनुभूति कर रही थी.

जयंत एक धीमी और स्थिर गति से अंजलि को बहुत प्यार से चोद रहा था. वो आगे झुका और अंजलि के होंठ चूमने लगा. अंजलि भी उसका पूरा साथ दे रही थी. फिर जयंत उसके मम्मों के चूसने और चाटते हुए उसी गति से चोदने में लगा रहा. अंजलि को अपनी चूत में एक उबाल का अहसास हुआ.

"दादा, मेरा होने वाला है."

ये सुनकर जयंत ने अपना परिश्रम बढ़ा दिया और उसकी चूचियों को दबाने और हलके हलके से चबाने और काटने लगा. अंजलि का शरीर थरथराने लगा और वो फिर से झड़ गई. इससे जयंत के लिए घर्षण काम हो गया और उसका लंड अब और तेजी से अंदर की यात्रा करने लगा.

"रुको" अंजलि ने उसे हटने का इशारा किया. जयंत के लंड निकलने पर अंजलि ने बिस्तर के कपडे से अपनी चूत को पोंछ दिया।

"अब करो. तुम्हें इतनी गीली चूत में क्या मजा आ रहा होगा."

जयंत दोबारा अपने काम में लग गया पर इस बार उसके धक्के लम्बे और अधिक शक्तिशाली थे. उसके इन धक्कों के कारण बिस्तर इस समय बुरी तरह हिल रहा था। अंजलि को भी अब बहुत आनंद आ रहा था. वो अपनी गांड उछाल उछाल कर जयंत के धक्कों का प्रतिउत्तर दे रही थी. इस समय कामक्रीड़ा का वीभत्स नृत्य अपनी चरम सीमा पर था. दोनों को इसकी बिलकुल भी चिंता नहीं थी की ये सामाजिक विश्वासों के विरुद्ध है.

अंजलि का इतने दिनों का उपवास और जयंत की यात्रा की थकान अब दोनों पर हावी हो रही थी. दोनों अब अपने रतिक्षण के निकट पहुंच गए थे. जयंत ने अपनी गति बढ़ाते हुए बताया कि वो अब झड़ने वाला है, तो अंजलि ने उसे इशारा किया कि उसके चेहरे पर अपना कामरस डाले। जयंत ने अपना लंड बाहर खींचा और अंजलि के चेहरे के करीब कर दिया. अंजलि ने बड़े प्यार से उसे अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. जैसे ही उसे ये लगा की जयंत का होने वाला है उसने अपने मुंह से निकल कर अपने चेहरे की ओर साध दिया और ऑंखें बंद कर लीं।

जयंत की पिचकारियाँ उसके सुन्दर चेहरे को गाढ़े सफ़ेद रस से सींच रही थीं. जब जयंत का प्रवाह समाप्त हुआ तो अंजलि ने एक बार उसके लंड को मुंह में लेकर चूसा और छोड़ दिया. फिर उसने वीर्य को अपने चेहरे पर मला और कुछ कतरे अपनी उँगलियों से बटोर कर अपने मुंह में डाल लिए और पी गई.

"पता नहीं राहुल क्या कर रहा होगा. अब तक मम्मी की गांड मारी भी होगी या नहीं? चाहे वो कितना भी थका हो, पर चुदाई में कमी नहीं रखता."

"मारी नहीं होगी तो मार लेगा. तुम्हें क्यों मम्मी की गांड की इतनी चिंता हो रही है. चलो एक एक पेग और लेते हैं और फिर सोते है."

ये कहकर जयंत बार की ओर बढ़ गया.

समीर, सुलभा, पवन और कुसुम:

जब पवन और कुसुम कमरे में अंदर गए तो वहां कार्यक्रम आरम्भ हो चुका था. समीर सोफे पर बैठा था और उसका पायजामा गायब था. उसका लंड इस समय सुलभा के मुंह में था और सुलभा ने अभी केवल साड़ी ही उतारी थी जो एक ओर पड़ी थी. ब्लाउज और पेटीकोट में इस समय उसका गदराया शरीर एक लुभावनी रंगभूमि का दर्शन करा रहा था.

"हम यहाँ रहें या जाएँ?" पवन ने समीर से पूछा.

"अब जब आ ही गए हो तो जाना क्यों?"

ये सुनकर कुसुम अपनी साड़ी उतारने लगी. और पवन ने भी अपने कपड़े निकलने में कोई संकोच नहीं किया. पल भर में ही कुसुम ने अपने कपड़े निकाल दिए और नंगी ही खड़ी हो गई. उसे कोई शर्म नहीं थी कि इस समय कमरे में तीन लोग और थे. यहाँ लज्जा के लिए कोई स्थान नहीं था, क्यूंकि अन्य सब भी काम क्रीड़ा में मग्न थे. पवन का लंड इस समय अपने पूरे रोब में था. उसका शरीर इस आयु में भी बहुत गठा हुआ था. सालों की मेहनत का फल था. और इस सबमे सबसे ज्यादा शक्तिशाली अगर कोई अंग था तो वो था उसका लंड, जो उसे एक उत्कृष्ट बीज के कारण प्राप्त था, जिसे उसने आगे अपने पुत्र राहुल को प्रदान किया था. कुसुम वहीँ अपने घुटनों के बल बैठ गई और पवन के लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़े ही प्रेम और आसक्ति से चूसने लगी.

"बाबूजी, आपका लंड इतना बड़ा है की आसानी से मुंह में नहीं जाता है, पर मुझे इसे चूसना बहुत पसंद है." कुसुम बोली.

"मुझे भी तेरी चूत का स्वाद बहुत अच्छा लगता है, चल बिस्तर पर चलते है, मैं तेरी चूत का स्वाद लूँगा और तू मेरे लंड का."

पवन कुसुम के साथ बिस्तर पर गया और लेट गया, कुसुम आकर उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी. और झुककर पवन का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी. पवन अपनी जीभ से कुसुम की चूत कुरेद रहा था और उसके चारों और चाट रहा था. कुसुम इस समय स्वर्ग में थी. वो अपनी क्षमता के अनुसार पवन के विशालकाय लौड़े को अपने मुंह में ले रही थी. पवन ने कुसुम की गांड पर हाथ रखकर उसकी चूत को अपने मुंह की ओर खींचा और अपने मुंह से जोर जोर से चूसने लगा.

"बाबूजी!!!!!!" कहते हुए कुसुम झड़ गई. अब पवन के मुंह में उसका सारा पानी चला गया, जिसे पवन ने बड़े प्रेम से पी लिया. कुसुम हांफते हुए उसके बगल में लेट गई.

"लो, कुसुम का तो इन्होनें एक बार निकाल भी दिया पानी." सुलभा बोली.

"अरे समधन जी, आप क्यों निराश हो रही हो. चलो बिस्तर पर."

सुलभा बिस्तर पर आकर पवन के पास लेट गई. पवन ने उसका हाथ थम कर उसे बड़ी प्रेम भरी आँखों से देखा. सुलभा ने उसके होंठ पवन के होंठों पर रखे और एक गहरा चुम्बन लिया. उसे पवन के मुंह से कुसुम की चूत का स्वाद आया. और पवन को सुलभा के मुंह से समीर के लंड का स्वाद. पर अब इन सब भावनाओं को एक परे धकेला जा चुका था. सामूहिक सम्भोग में इस प्रकार होना स्वाभाविक था.

"बहुत मीठी है कुसुम की चूत, है न."

"सच में."

तब तक समीर आ गया और उसने सुलभा को उठाया और उसका ब्लाउज, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी निकाल कर नंगा कर दिया. फिर उसने सुलभा की दोनों टांगे फैलायीं और अपने मुंह को उसकी चूत पर लगाकर आनन फानन चाटने लगा. इस समय उस डबल किंग साइज बिस्तर पर चार नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे हुए थे.

कुसुम पवन के होंठ का रस पी रही थी और अपने एक हाथ से उसके लंड हो सहला रही थी. सुलभा का एक हाथ अब कुसुम की चूची पर था क्योंकि उसने अपना स्थान बदल लिया था और वो सुलभा की ओर आ चुकी थी. इससे उसका दांयां हाथ मुक्त हो गया था जिससे वो पवन के लंड को सहला रही थी. समीर ने सुलभा की चूत पर अपना आक्रमण निरंतर बनाये हुए था. वो सुलभा की चूत से लेकर उसकी गांड तक एक लकीर में चाट रहा था. उसकी एक उंगली सुलभा की चूत में अंदर बाहर हो रही थी. जब वो सुलभा की गांड के छेद को चाटता था तो उसकी ऊँगली सुलभा की चूत के अंदर खेलती. और जब वो सुलभा की चूत पर हमला करता तो वही उंगली सुलभा की गांड के अंदर यात्रा करती.

सच ये था की समीर मौखिक सम्भोग का विशेषज्ञ था. रुक रुक कर वो अपने दोनों हाथों से चूत की फांके खोलकर अपनी जीभ से अंदर का भ्रमण करता, और फिर यही क्रिया वो सुलभा की मखमली गांड के साथ भी करता. ये कहना अनुपयुक्त नहीं होगा कि सुलभा इस निरंतर आनंद से अनुभूत होकर २ बार झड़ चुकी थी, पर सुलभा की विनतियों की अपेखा करते हुए समीर ने उसे अभी भी छोड़ा नहीं था. समीर अपने साथ सम्भोग करती स्त्री को तब तक मौखिक सुख देता जब तक वो ये नहीं जान लेता कि अब वो स्त्री अब उसे अपने साथ किसी भी प्रकार का व्यव्हार करने से रोक नहीं पायेगी. इसके विपरीत वो स्त्री इतनी विकृत सम्भोग कि आशा करती की समीर भी कई बार चकित रह जाता.

और इस समय सुलभा उस अवस्था में पहुँच चुकी थी. जैसे ही सुलभा ने तीसरी बार अपना रस छोड़ा, समीर ने उससे प्रश्न किया, "तो समधन जी, क्या इच्छा है आपकी आज."

"आज कुछ खास नहीं. आज दिन भर काम और प्रतीक्षा करते करते थक गई हूँ. बस एक बाद अच्छे से चोद दीजिये. फिर मैं सोना चाहूंगी."

ये सुनकर समीर ने अपना लंड सुलभा की चूत पर रखा और बड़े प्यार से अंदर डालकर उसे चोदने लगा. अगर सुलभा ने बताया न होता कि वो थकी है तो समीर उसकी अच्छी मरम्मत करने के मन बनाये था. पर उसे प्यार करना भी उतने ही अच्छे से आता था और अब वो अपनी उसी कला का बखूबी प्रदर्शन कर रहा था. वो अपने लंड को चलते हुए जितना संभव हो सकता था उतना सुलभा के शरीर को चूम रहा थे. उसके कानों, गालों और गर्दन पर उसने चुम्बनों की झड़ी लगा दी थी. रह रह कर वो उन्हें चाटता और अपने होठों से बिना दाँत उपयोग किये हुए हलके से काटता। यही वो उसकी चूचियों के साथ भी कर रहा था और अपने लंड से उसकी चूत की चुदाई भी.

उनके बगल में ही कुसुम अब पवन के लंड पर सवार उठक बैठक कर रही थी. इस आसन में पवन का विशाल लंड कुसुम की उन गहराइयों को छू रहा था जहाँ अब तक कुछ ही पहुँच पाए थे. उसने अपने शरीर को इस अभ्यास में आगे झुकाया हुआ था और पवन के शक्तिशाली हाथ उसके दोनों मम्मों को बेरहमी से मसल रहे थे. पर अब कुसुम की गति धीमी पड़ गई थी. सफर की थकान और शराब के प्रभाव से उसका शरीर उत्तर देने लगा था. उसके ३ बार झड़ने के कारण भी ये संभव था. उसकी ये अवस्था देखकर पवन ने उसकी कमर को पकड़ा और उसे पलटा कर नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. ये पवन के बलशाली व्यक्तित्व का ही प्रभाव था की इस काम में उसका लंड कुसुम की चूत से बाहर नहीं आया. पर कुसुम को जहाँ इसमें थोड़ा आराम मिला वहीँ उसे ये भी आभास हो गया कि अब उसकी चूत की असली कुटाई होगी. अभी तक उसके ऊपर रहने के कारण वो नियंत्रित कर रही थी.

"समीर, ये दोनों आज काफी थकी है. चलो अब इनको दबा के पेलें और फिर आराम करने दें."

"ठीक है पवन. १, २, ३, गो. "

बस फिर क्या था दोनों समधियों ने अपनी गति बढ़ा दी और पूरी गहराई तक लम्बे और ताकतवर धक्के लगाने लगे. सुलभा तेजी के साथ झड़ गई और वहीँ निढाल हो गई. यही उसके साथ लेटी कुसुम का भी हुआ. दोनों समधियों ने लगभग ७-८ मिनट और चोदा और फिर अपने अपने पानी से दोनों चूतों को सरोबार कर दिया. दोनों बाजू में लेट कर सुस्ताने लगे. फिर समीर उठा और कुसुम को उठाने ही वाला था तो देखा कि वो सो चुकी है.

उसने अपने लिए एक पेग बनाया और सोच में डूब गया. उसका ध्यान अब उस समय पर गया जहाँ से ये सब प्रारम्भ हुआ था.
 
वर्षा और राहुल:

राहुल ने वर्षा को कुतिया का आसन ग्रहण करने के लिए कहा. वर्षा अपने घुटनों के बल बैठकर आगे झुक गई और अपना मुंह तकिया में गाढ़ दिया. राहुल ने अपना लौड़ा वापिस वर्षा की चूत में डाला और भयंकर गति से धक्के लगाने लगा. वर्षा की चूत में से फच्च फच्च की आवाज़ आ रही थी. उसने अपनी चीखें तकिया में दबा रखी थीं. परन्तु राहुल को मन में कोई दया भावना नहीं थी, क्योंकि वो जानता था कि उसकी सास को उससे ऐसी ही चुदाई की इच्छा रहती है. प्यार से चोदने के लिए तो उसके पति और बेटा ही पर्याप्त है.

पर जब भी उसे कठोर और निर्दयी चुदाई की इच्छा होती तो वो हमेशा राहुल और उसके पिता पवन की शरण में ही आती थी. हफ्ते में एक बार तो बाप या बेटे में से कोई एक तो उसकी सेवा करता ही था. और जब उसे ज्यादा ही चुदास चढ़ती तो बाप बेटा दोनों ही जुगलबंदी करते. परन्तु ऐसा कम ही होता था, क्योंकि राहुल और पवन जब एक साथ होते तो कभी कभार उनकी चुदाई एक वीभत्स रूप ले लेती थी जो किसी भी स्त्री के लिए झेलना वीरता का कार्य होता है.

पर इस समय वर्षा अपने आपे में नहीं थी. राहुल ने उस पर ऐसी चढ़ाई की थी कि उसका रोम रोम चीख रहा था. पर अभी खेल का आखिरी पड़ाव शेष था. जिसके कारण ही उसने सुलभा से राहुल द्वारा गांड मरवाने की इच्छा जताई थी.

"माँ जी, आपकी चूत अब बहुत बह रही है, मेरे ख्याल से अब आपकी गांड का नंबर लगा दिया जाये. खुजली तो आपको वहीँ हो रही है न." राहुल ने अपनी ऊँगली को चूत के रस से भिगो कर वर्षा की गांड में डालते हुए सवाल किया.

"हाँ बेटा, मार दे मेरी गांड. पता नहीं कब से तेरे लौड़े के लिए खुजला रही है."

राहुल ने वर्षा की चूत के नीचे से उसका बहता हुआ पानी इकठ्ठा किया और उसकी गांड के छेद पर मला, फिर यही कार्य उसने दोबारा किया और इस बार उसने गांड के अंदर की मालिश की. फिर वो उठा और टेबल से वेसलीन की ट्यूब उठाई. अपने बाएं हाथ के अंगूठे और एक ऊँगली से गांड के छेद को खोला और ट्यूब से वेसलीन डालकर लबालब भर दिया. फिर उसने ट्यूब फेंक दी और गांड के छेद को बंद किया. थोड़ी वेसलीन पिचक कर बाहर निकल आयी जिसे अपने लंड पर मल लिया. फिर उसने दो उँगलियों से गांड के अंदर की अच्छी तरह से मालिश की.

अब वर्षा की गांड उसके लौड़े के लिए तैयार थी.

"माँ जी, कैसे मरवानी है? प्यार से या..."

"फाड़ दे." वर्षा ने राहुल की बात पूरी भी न होने दी.

"पहले कहतीं हो बिना वेसलीन लगाए फाड़ता, पर जैसी आपकी इच्छा." ये कहकर राहुल ने अपना लंड वर्षा की गांड पर लगाया और धीरे से अपने लंड के टोपे को गांड में डाला. जब गांड की झिल्ली से उसका टोपा अंदर चला गया तब उसने एक तगड़ा धक्का मारा. धक्का इतना तेज था की बिस्तर हिल गया और वर्षा का शरीर आगे की ओर ढकल गया. अगर राहुल ने उसकी कमर जोर से न पकड़ी होती तो वर्षा धराशायी हो गई होती. परन्तु वर्षा का चेहरा तकिये में और अंदर तक गढ़ गया. पर राहुल के लंड ने अपना लक्ष्य पा लिया था. इस समय उसका पूरा लंड वर्षा की गांड में जड़ समेत गढ़ा हुआ था.

राहुल कुछ समय के लिए रुका, जिससे की वर्षा को अपनी गांड के पूरा भरा होने का आनंद आये। फिर उसने अपने लंड से उसकी मुलायम और मखमली गांड की चुदाई शुरू की. हलके छोटे धक्कों से शुरू करके राहुल थोड़ी ही देर में अपने पूरे लंड से वर्षा की गांड का बंटाधार कर रहा था. देखने वाले इस समय वर्षा पर दया करते, पर राहुल में ऐसी कोई भावना नहीं थी. उसकी सास ने खुद अपनी गांड की सर्वनाश की इच्छा जताई थी और वो किसी भी चुनौती से डरने वाला नहीं था. वर्षा का चेहरा तकिये में गढ़ा हुआ था, इस समय उसे इतनी पीड़ा मिश्रित आनंद आ रहा था कि वो अपने सुध खो बैठी थी. उसका सिर आनंद की अधिकता से चक्कर खा रहा था. उसके शरीर का सारा लहू उसकी गांड की और ही बह रहा था.

राहुल ने एक हाथ से उसकी पीठ और एक हाथ से उसके सिर को दबाया और भयावने रूप से उसकी गांड में अपने पूरे विशाल लंड से पिलाई करने लगा. वर्षा इस समय पीड़ा और आनंद के परस्पर विरोधी भावों में खोई हुई थी. जब लंड अंदर जाता तो उसे पीड़ा का संवेदन होता और बाहर निकलने पर आनंद का. पर इनके बीच का समय इतना क्षणिक था की वो एक ऐसी लहर पर सवार थी जिसका हर पल एक नए सुख की अनुभूति करा रहा था. राहुल अब अपनी शक्ति के अनुसार उसकी गांड मार रहा था. फिर उसने वर्षा के बाल पकडे और उसे घोड़ी के आसन में ले आया. एक हाथ से पीठ दबाये, एक हाथ से बाल पकड़कर वो अपने लंड से गांड में लम्बे, गहरे और शक्तिशाली धक्के मार रहा था.

"मर गई मैं. अब बस कर दुष्ट. मेरी गांड फट गई पूरी. अब छोड़ दे, राक्षस."

राहुल ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योंकि अब वो भी अपने स्खलन के निकट था. उसने धक्कों की गति कम की फिर जैसे ही उसे लगा कि उसका पानी छूटने वाला है, उसने पड़े सावधानी से अपना लंड वर्षा की गांड से बाहर निकाला। उसने बड़े प्रेम से वर्षा की गांड के खुले छेद को देखा, जिसका अंदरूनी भाग लाल चुका था और मानो बाहर आने के लिए छटपटा था. राहुल मुस्कुराया, यही दृश्य उसे अत्यंत सुख देता था, जब वो अपने लंड के प्रताप से क्षत विक्षत गांड को देखता था. इस समय वो छेद इतना चौड़ा था कि उसमें ४ इंच गोलाई कोई भी वस्तु बना रोक टोक के जा सकती थी.

वो उठकर वर्षा के सामने गया और अपने वीर्य और वर्षा की गांड के रस से सना लंड वर्षा के मुंह में डालकर उसके मुंह को बेरहमी से चोदने लगा. २-३ मिनट में उसका लंड अपना पानी वर्षा के मुंह में वृष्टि करने लगा. जब उसने अपनी टंकी खाली कर दी तो एक झटके से वर्षा का मुंह अपने लंड से अलग कर दिया. वर्षा इस समय गहरी सांसे ले रही थी. उसके मुंह से राहुल का वीर्य जो उसके पेट में न जा पाया था बाहर निकल रहा था. राहुल ने अपने लंड से ही उस वीर्य को वर्षा के चेहरे पर मल दिया. फिर गहरी सांसे लेता हुआ वो सामने पड़े सोफे गया.

वर्षा अब उलटी ही लेती हुई अपनी सांसों की संयत कर रही थी. राहुल ने उठकर दो एक्स्ट्रा लार्ज पेग बनाये। वो फिर वर्षा के पास गया और उसे बड़े प्रेम से उठाकर सोफे पर बैठा दिया और उसे उसका पेग दे दिया. वर्षा ने दो ही घूँट में वो पेग ख़त्म कर दिया और राहुल से एक और बनाने को कहा. राहुल ने भी अपना पेग समाप्त किया और दोनों के लिए नए पेग बना लाया.

"जानते हो, मैं कभी कभी सोचती हूँ कि तुमसे ऐसी चुदाई के लिए न कहूँ, तुम हड्डियाँ हिला देते हो. पर कुछ ही दिन में मेरा ये संयम टूट जाता है. शरीर ऐसी ही चुदाई में लिए लालायित हो जाता है."

"माँ जी, इतना मत सोचा करिये. जीवन में जिस भी क्रिया में आपको सुख मिलता हो करिये."

"तुम सच में बहुत अच्छे हो, मेरी बेटी बड़ी भाग्यशाली है जिसे तुम्हारे जैसा पति मिला."

"हम भी माँ जी, जिसे आप लोगों जैसा परिवार मिला."

*****
 
उधर पास के एक कमरे में अंजलि की नींद एक चीख सुनकर खुल गई थी. ये चीख उसकी माँ की थी.

वो मन ही मन मुस्कुराई, "चलो माँ ने अपनी गांड की खुजली मिटा ही ली." और ये सोचते हुए वो जयंत से सट कर दोबारा सो गई.

बेंगलुरू का एक घर:

कमलेश अपनी सेमेस्टर समाप्ति की अंतिम क्लास करने के बाद ४ बजे घर पहुंचा. आज वो अपनी बहन काम्या के साथ संभ्रांत नगर जाने वाला था, रात १० बजे की ट्रेन से. काम्या की छुट्टी २ बजे ही हो गई थी और वो घर आ गई थी सामान लगाने के लिए. अब ६ सप्ताह का अवकाश था और फिर उनका अंतिम सेमेस्टर शुरू होना था. दोनों भाई बहन को अच्छी नौकरी मिल गई थी. काम्या को तो उनके ही शहर में मिली थी, पर कमलेश को कोई १०० किमी दूर दूसरे शहर में. पर वो भी अपने ही शहर के लिए प्रयास कर रहा था.

उसने अपने घर का दरवाजा खोला तो शयनकक्ष से कुछ आहों और सीत्कार के साथ थप थप की ध्वनि सुनाई पड़ी. कमलेश के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई. घर को लॉक करने के बाद वो सोच में पड़ गया. लगता है काम्या अपने बॉयफ्रेंड को साथ ले आयी थी. सामान्य रूप से वो ऐसे समय में बाहर चला जाता था कुछ समय के लिए, पर उसे बाथरूम जाना अति आवश्यक लग रहा था. इसीलिए उसने दबे पांव कमरे में प्रवेश किया और बाथरूम की ओर जाने लगा.

उसने एक चोर भरी आंख से बिस्तर की और देखा तो उसे आश्चर्य हुआ. ये काम्या का बॉयफ्रेंड नहीं था. एक अधेड़ उम्र का आदमी इस समय काम्या को चोद रहा था. कमलेश बाथरूम में गया और अपना काम समाप्त करने के बाद उसने अपने कपडे उतार कर खूंटी पर टांग दिए. फिर एक छोटा सा स्नान किया और वैसे ही नंगा कमरे में चला आया. उस आदमी ने कमलेश को देखा और मुस्कुरा दिया. कमलेश ने अपने लंड को काम्या के मुंह से लगाया और काम्या ने निसंकोच उसे एक प्यार भरी दृष्टि से देखते हुए लंड को अपने मुंह में निगल लिया.

“आप कब आये, पापा?” कमलेश ने उस आदमी से पूछा.

“बस ये समझो कि काम्या और मैं एक साथ ही पहुंचे थे घर.” उस आदमी ने अपनी चुदाई के क्रम को बिना तोड़े हुए उत्तर दिया.

“पहले क्यों नहीं बताया. हम तो आज घर जा रहे थे रात को. पता होता तो एक दिन और रुक जाते.” कमलेश अपने लंड को काम्या के मुंह में चलाते हुए बोला।

“ऐसे ही कार्यक्रम बन गया. अब दो सप्ताह कोई काम नहीं है खेतों में. मैंने भाईसाहब से कल बात की तो उन्होंने घर आने के लिए कहा. कुछ समझौते २ सप्ताह बाद ही होने हैं. और भाईसाहब चाहते हैं की सुपरवाइसर पर कुछ जिम्मेदारी छोड़ी जाये हर काम मैं ही न करूँ।”

“आप दोनों मेरी चुदाई कर रहे हो या अपनी मीटिंग? पापा, आपने तो बहुत ही धीमा कर दिया सब कुछ.” काम्या कुछ गुस्से से बोल पड़ी.

“बस एक बात और, मैं गाड़ी और ड्राइवर दोनों लाया हूँ, हम लोग खाने के बाद निकलेंगे, साथ में.”

ये कहकर सब लोग चुदाई में व्यस्त हो गए.

७ बजे वे सब घर बंद करके निकल पड़े. पास ही के एक रेस्त्रां में खाना खाने के बाद वो संभ्रांत नगर के लिए चल पड़े. रात के २ बजे तक पहुँचने का अनुमान था. रास्ता बहुत अच्छा था और १० बजे के लगभग कमलेश और काम्या सो गए. संतोष ड्राइवर के साथ बैठा हुआ बात करता रहा. यात्रा बहुत शांति से निकल गयी और रात के २.३० बजे, वे सब घर पहुँच गए.

वहां पहुंचकर संतोष ने ड्राइवर को एक बोतल शराब की दी और काफी सारा चिकन वगैरह जो उन्होंने बीच में रूककर लिया था. बचे हुए खाने को, जो अभी भी बहुत था, लेकर वे सब घर के अपने हिस्से में चले गए. कमलेश ने सामान निकाला और साथ में अंदर चला गया. कुसुम बहुत देर से प्रतीक्षा कर रही थी. अपने बच्चों को देखकर माँ की आँखों में आंसू आ गए. दोनों बच्चे अपनी माँ के गले से लग गए. और सब अंदर चले गए.

क्रमशः........................
 
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