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Incest कैसे कैसे परिवार

चूतों की शृंखला:

संजना का मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था और वो कुछ बोलना तो चाहती थी, पर उसकी बोलती ही बंद हो गई थी. अब सुप्रिया मौसी ने उसे ये तो बताया था कि उसकी माँ लेस्बियन सम्बन्ध में पहले लीन हो चुकी थीं, पर आज अपनी आँखों से देखने पर भी उसे विश्वास नहीं हो पा रहा था. अंततः उसे अपनी वाणी प्राप्त हो ही गई.

“मम्मी ! मौसी !” उसकी हल्की टूटती हुई पुकार ने अचानक सबका ध्यान उसकी ओर आकर्षित किया. सुरेखा के तो जैसे पांवों के नीचे से जमीन ही निकल गई. पर सुप्रिया की चतुर बुद्धि ने यहाँ भी स्थिति को समझ लिया.

“ओह, माई स्वीट स्वीट संजू. तुम बिल्कुल सही समय पर आयी हो.” सुप्रिया ने उठकर संजना की ओर बढ़ते हुए कहा. “जैसा कि तुम देख रही हो ये हमारा पारिवारिक भोग चल रहा है. और मुझे विश्वास है कि तुम्हारी मिठास के लिए सब आतुर होंगे. पर पहले आओ, मैं तुम्हें अपने नए सम्बन्धियों से अवगत करा दूँ.”

सुप्रिया ने सबका परिचय कराया और सबको संजना से परिचित करवाया. संजना इस बात से ज्यादा विस्मित थी कि सुरेखा ने अपने आप को छुपाने या उसे कुछ समझाने की कोई चेष्टा नहीं की.

“संजना को मैंने अभी कुछ ही दिन पहले चखा था. पहली बार.” ये कहते हुए सुप्रिया ने संजना के वस्त्र निकालने का क्रम प्रारम्भ किया. “सच कहूँ, तो मुझे सुरेखा की याद दिला दी मेरी इस गुड़िया ने. मैंने इससे ये वादा लिया था कि ये किसी भी आदमी से मेरी अनुमति के बिना संसर्ग नहीं करेगी.” अब तक संजना के ऊपर के वस्त्र निकल चुके थे. सुप्रिया ने उसके सामने बैठकर उसके निचले वस्त्र निकालने का उपक्रम शुरू किया. “पर मैंने ये वादा नहीं लिया था कि वो किसी स्त्री से संसर्ग नहीं करेगी.”

वस्त्रहीन संजना के हाथ पकड़कर उसने उसे सुरेखा के आगे खड़ा कर दिया.

“मैंने मौसी के रूप में जो मिठास चखी है, उसकी माँ होने के कारण क्यों न तुम भी उसका रसपान करो.”

ये कहकर उसने संजना को वहीँ छोड़ दिया. और अन्य तीनों की ओर बढ़ती हुई बोली, “हम अपना खेल चालू रखते है.”

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पार्थ और निखिल:

रूचि बड़े चाव से पार्थ का लंड चाट रही थी.

रूचि: “मुझे लम्बे मोटे लौड़े बहुत पसंद हैं, पर उनका उपलभ्ध होना एक समस्या है. और आज तो मेरे हाथ में ऐसे दो दो अस्त्र हैं. ऑफिस में अधिक कुछ नहीं कर पाएंगे, पर मैं तुम्हें अपने घर आमंत्रित करना चाहूंगी.”

पार्थ: “अब आप हमारी पार्टनर हो, आपकी ख़ुशी और संतुष्टि हमारी प्राथमिकता रहेगी. आप अगर एक दिन पहले बता दें तो हम दोनों उपस्थित हो जायेंगे. परन्तु अगर क्लब का कोई कार्य हुआ तो हमें क्षमा करियेगा.”

“हम्म्म, क्लब में तो अब मेरा भी निवेश है, मैं क्योंकर अपना नुकसान करुँगी. क्या तुम दो दिन बाद मेरे बंगले पर आ सकते हो.”

“हाँ, ये संभव है. पर आज भी आपको अपने कौशल का प्रमाण देना चाहते हैं. अपने एक घंटा हमें दिया है, चलिए इसका सदुपयोग करें.”

निखिल अब चूत के पाट खोलकर उसमे अपनी जीभ से खुदाई कर रहा था. उसे इस उम्र की स्त्रियों को क्या अच्छा लगता है, भली भांति पता था. आखिर उसकी पहली शिक्षिका भी रूचि की आयु की ही थी. और उसके दिए हुए पाठ्यक्रम में चूत की चुसाई को अतिरिक्त महत्त्व दिया गया था. निखिल ने रूचि की चूत और उसके आसपास के स्थान को अपने हाथ, होंठ, उँगलियों और दाँतों से हर संभव प्रकार से उत्तेजित किया हुआ था. रूचि अपनी कमर और गांड उछाल कर निखिल के इस आक्रमण को प्रोत्साहित कर रही थी.

रूचि के भग्नासे पर निखिल की थिरकती उँगलियाँ एक लहर के समान चल रही थी. उँगलियाँ चूत के अंदर जाकर स्थान बनातीं और उस रिक्त स्थान को निखिल की जीभ शीघ्र ही भर देती. सांप की जीभ के समान चंचल निखिल की जीभ रूचि के रोम रोम को प्रफुल्लित कर रही थी. उसका रस बह कर उनके गीले शरीरों को और भी भीगा रहा था. पर ये नहीं था कि रूचि केवल अपने सुख में लीन थी. उसने भी पार्थ के लंड पर इतना प्रेम बरसाया हुआ था कि वो अब लोहे के समान तन चुका था. जैसे ही रूचि ने हल्की चीख के साथ अपना पानी निखिल के मुंह में छोड़ा, पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकाल लिया.

“रूचि मैडम, अब हमारी परीक्षा का अगला पेपर लिखना है. अगर आपको आपत्ति न हो तो मैं आपकी इस मखमली चूत को चोदना चाहता हूँ. और अगर आप निखिल को अपने इस सुन्दर और सेक्सी मुंह से कुछ देर चाटकर उसे भी मेरी तरह सुख देंगी तो अच्छा रहेगा.”

“ओह, श्योर. मैं भी अब चुदाई के लिए रेडी हूँ. पर हम यहाँ नहीं, बिस्तर पर खेलेंगे.”

रूचि उस कुर्सी से इठलाती हुई उठी और बिस्तर पर जाकर लेट गई.

पार्थ और निखिल उसके ये नखरे देखकर मुस्कुरा दिए और एक सहमति में संकेत किया.

पार्थ: “रूचि मैडम, आपको कैसी चुदाई पसंद है. हम आपकी वैसे ही सेवा करेंगे.” पार्थ जानता था कि रूचि जैसी आत्मविश्वासी महिला ये कभी नहीं स्वीकारेगी कि उसे कोई हरा सकता है.

रूचि: “जितना तुम दोनों के लौंड़ों में दम है, उतनी ताकत से चोदकर दिखाओ मुझे.” विनाश काले विपरीत बुद्धि.

पार्थ ने उसे KBC की तरह एक अवसर और दिया.

“मैडम आपको तकलीफ न हो जाये. आप एक बार और विचार कर लें.”

ये सुनकर रूचि के तन बदन में आग लग गई कि कल के छोकरे मुझे डराने चले हैं.

“अबे सुन, तेरे जैसे लंड मैं तब से ले रही हूँ जब से मैं १९ साल की हुई थी. हाँ तुम्हारे उन सबकी तुलना में कुछ अधिक बड़े हैं, पर मैं भी कोई कच्ची कली नहीं हूँ. दिखाओ मुझे अपनी सबसे जोरदार चुदाई का नमूना. मैं भी तो जानूँ कि मैंने पैसा नाली में तो नहीं फेंके.”

अब पार्थ को क्रोध आ गया, पर उसने अपने आपको संयत किया और एक बड़ी ही सधे स्वर में बोला, “रूचि मैडम, अब आप जब ऐसे चैलेंज दे रही हैं, तो हम भी चाहेंगे कि ये चुदाई हम अपने तरीके से करें. हम जैसे चाहेंगे आपको मानना होगा. नहीं तो इस चुनौती का कोई अर्थ नहीं.”

रूचि अब अपने घमंड के घोड़े से चाहकर भी नहीं उतर सकती थी. हालाँकि उसे लगा कि वस्तुतः उसने गलत लोगों से पन्गा ले लिया है, पर पीछे होना उसकी शान के विपरीत था.

“मुझे स्वीकार है, अब समय मत बर्बाद करो, देखें तुम किस खेत की मूली हो.”

पार्थ और निखिल ने एक दूसरे को देखा और थम्ब्स अप किया कि मुर्गी ने दाना चुग लिया.

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संजना का मात्र प्रेम:

सुरेखा ने अपना हाथ बढाकर संजना को अपने पास खींचकर बैठा लिया.

“तुम मौसी के घर इस समय कैसे आ गयीं.”

“वो मौसी ने मुझे ये सब सिखाया है अभी कुछ दिनों में. मेरा मन कर रहा था तो मैंने सोचा कि मौसी अकेली होंगी तो हम दोनों….”

“अरे मेरी प्यारी गुड़िया रानी. तुझे पता है, हम दोनों कई वर्ष तक एक दूसरे के साथ रोज संसर्ग करते थे. जब नानी ने हमें अलग कमरा देने के लिए कहा, तब भी हम साथ ही रहीं. मौसी शादी के बाद अलग चली गयीं और हमारा ये सम्बन्ध भी समाप्त हो गया. मौसी के तलाक के बाद उन्होंने मुझे फिर साथ होने का निमंत्रण दिया था, परन्तु तब तक मेरी भी शादी हो गई थी. तो सब कुछ वहीँ समाप्त हो गया. पर कुछ दिन पहले, निखिल की शादी तय होने के लगभग एक सप्ताह पूर्व हम फिर से साथ आ गए.”

“और पापा, उनका क्या?”

सुरेखा ने अन्य लोगों की ओर संकेत किया और कहा कि ये बात हम घर पर करेंगे.

“पर अभी मैं भी तुम्हारा अमृत चखना चाहती हूँ.” ये कहते हुए सुरेखा ने अपने होंठ संजना के होठों से मिला दिए. कुछ ही क्षणों में माँ बेटी एक दूसरे में विलीन हो गए.

सुरेखा ने संजना को सोफे पर बैठने के लिया कहा और फिर उसके पांव फैलाकर अपना चेहरा उसकी कमसिन बुर में छुपा लिया.

“उफ्फ्फ ये सुगंध.” सुरेखा ने मन में सोचा. फिर उसने अपनी जीभ को संजना की योनि पर फिराया और वहां पर कामोत्तेजना से उत्पन्न नमी का चटकारा लिया. “उफ्फ्फ ये स्वाद. मैं कितनी भाग्यशाली हूँ जो मुझे इस कच्ची कली का रस प्राप्त हुआ है.” इस विचार के साथ उसने अपने पूरे मातृप्रेम के साथ उस कमसिन कुंवारी बुर पर अपनी जीभ का प्रहार तीव्र कर दिया. अपने हाथों से उस अमृतकलश के पट खोले और अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसके अंदर प्रवेश किया. अंदर उस अमृतसुधा में उसकी जीभ एक एक किनारे को छूते हुए अपने लिए जीवनसुधा एकत्रित कर रही थी.

संजना जो इसके पहले सुप्रिया के संसर्ग से इस प्रणाली से अनिभिज्ञ तो न थी पर उसे अपनी माँ के प्रेम की थाह अब अनुभव हो रही थी. उसने अपनी माँ के बालों में प्यार से हाथ फिराने के साथ अपनी पतली बाली कमर को मटकाना शुरू किया. उसकी इस प्रतिक्रिया से उसकी जांघों के बीच छुपी उसकी माँ मन ही मन मुस्कुरा उठी. अब उसकी बेटी पूर्ण रूप से यौवन में पदापर्ण कर चुकी थी. और वो समय दूर नहीं था जब वो अपना कौमार्य किसी पुरुष को सौंप देगी. और तब इस झरने के पानी का स्वाद और सुगंध दोनों बदल जायेंगे. अगर उसका बस चलता और उसमे ऐसी शक्ति होती तो वो इस जल को एक ऐसी शीशी में बंद कर लेती जिसका वो जीवन भर स्वाद लेती.

संजना एक नयी नवेली खिलाड़िन थी. और उसे इस प्यार की चूमा चाटी ने स्वतः ही अपने चरम पर पहुंचा दिया. और उसने एक रुदन के साथ अपनी माँ की मुंह में अमृतवर्षा कर दी. वात्स्ल्य से भरपूर उसकी माँ ने एक बूँद का भी तिरिस्कार नहीं किया. जब संजना का झड़ना थम गया तो तब उसने अपना खिला और भीगा चेहरा अपनी बेटी की चूत से हटाया.

“सच में संजू. तेरा स्वाद अनुपम है. आज तू मेरे ही साथ सोना. हमें कई वर्षों की दूरी को समाप्त करना है.”

सुप्रिया ने ये सुना तो बहुत प्रसन्न हुई. उसने इस कली को फूल बनाने में एक अहम् योगदान जो किया था. कुछ देर में ही माँ बेटी ने सबसे विदा ली. अन्य सभी स्त्रियां भी अब अपने घर जाने को व्याकुल थीं. तो एक दूसरे को चूमकर सब अपने गंतव्य की ओर निकल गए.

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पार्थ और निखिल:

रूचि अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर रही थी. निखिल अपने लटकते हुए लंड को लेकर रूचि के मुंह के सामने आ गया और रूचि को अपना मुंह खोलने को कहा. रूचि ने अपने मुंह को खोलकर अपनी जीभ से निखिल के टोपे पर चमकते हुए मदन रस की बूंदों को चाट लिया और अपना सिर उठाकर निखिल की ओर देखा और मुस्कुराई. निखिल ने भी उसकी इस मुस्कराहट का उत्तर दिया. अब रूचि ने अपने मुंह में लंड को लिया और चूसने लगी. लंड की चौड़ाई अधिक होने के कारण उसे अपने मुंह को सामान्य से अधिक खोलना पड़ रहा था.

उसकी चूत पर भी एक भारी भरकम लंड दस्तक दे रहा था. वो लंड इस समय चूत की लम्बाई पर अपने टोपे से घिसाई कर रहा था. और उस चूत ने अपने ऊपर आने वाले संकट को समझते हुए और अपने लिए रास्ता सरल करते हुए ढेरों पानी को छिड़क दिया था. अचानक पार्थ के चेहरे पर एक पाशविक भाव आया, अगर रूचि इस समय उसे देखती तो संभवतः इस क्रीड़ा को तुरंत रोक देती. पर निखिल ने उसके मन को भटकाया हुआ था, और यही अपनी शक्ति से आश्वस्त रूचि के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ.

“रूचि मैडम!” पार्थ ने पुकारा. रूचि ने अपने मुंह में लंड रखते हुए उसकी और वासनामय आँखों से देखा. पर ये पुकार रूचि के लिए नहीं थी, निखिल के लिए थी. रूचि की ऑंखें एक क्षण के लिए पार्थ से मिलीं और उसकी शरीर भय से सिहर उठा. पर अब बहुत देर हो चुकी थी.

निखिल ने अचानक ही उसका सिर पकड़ा और अपने पूरे लंड को उसके मुंह में धकेल दिया. रूचि की ऑंखें फ़ैल गयीं और आंसुओं से लथपथ होने लगीं. पर उसके अहंकार पर असली आक्रमण पार्थ ने किया जब उसने एक ही लम्बे और शक्तिशाली धक्के में अपना लगभग तीन चौथाई लौड़ा उसकी चूत में गाढ़ दिया. रूचि छटपटाने लगी. उसके आँसू थम नहीं रहे थे. पर इन दोनों शक्तिशाली युवा चुदाई मशीनों के समक्ष उसका प्रतिरोध नगण्य था. पार्थ ने अपने लंड को लगभग पूरा बाहर खींचा और अगले ही धक्के में अपने पूरे मूसल को रूचि की ओखली में जड़ दिया. निखिल ने अपने लंड को बाहर निकाला जिससे रूचि का दम न घुट जाये. रूचि के आँसू अविरल बह रहे थे. पर अब वो सांस ले सकती थी. उसने दया भरी दृष्टि से पार्थ की ओर देखा पर उसे समझ आ गया कि उन आँखों में दया नहीं एक पैशाचिक चमक थी.

उसने अपने आप को अब भाग्य के भरोसे छोड़ दिया.

पार्थ ने अपनी निर्दयता का परिचय देते हुए रूचि को अपने लंड की पूरी लम्बाई से ताबड़तोड़ गति से चोदना प्रारम्भ किया. रूचि निखिल के लंड को इन झटकों के कारण सही प्रकार से चूस भी नहीं पा रही थी. निखिल ने पार्थ को थोड़ी सहजता के लिए कहा तो पार्थ ने अपनी गति कुछ कम कर दी, केवल इतनी कि रूचि निखिल के लंड का भी आनंद ले पाए.

इस घनघोर चुदाई ने रूचि के पोर पोर को खोल दिया था. उसकी चूत अपनी खाल बचने के लिए पानी के धार छोड़ रही थी. रूचि ने जीवन में ऐसी चुदाई कभी नहीं करवाई थी. पर ये भी था कि उसके साथी उससे डरते भी थे और इसीलिए उसे बहुत सहजता से ही चोदते थे. पर आज रूचि ने इन्हे ललकार कर उस सुख को पाया था जो उसे आज तक प्राप्त नहीं हुआ था. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. इस कारण अब पार्थ का मूसल भी अब बड़ी सरलता से उसमे परेड कर रहा था. जब पार्थ को लगा कि उसका पानी छूट न जाये तो उसने अपने लंड को बाहर खींचा और निखिल को बागडोर सँभालने का न्योता दिया.

निखिल ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकले और रूचि की खुली चूत के गीलेपन को देखकर एक तौलिये से उसकी चूत को पोछकर कुछ सुखा दिया. उसके बाद उसने पार्थ के ही समान एक लम्बे झटके से अपने लंड को अंदर पेल दिया. अब चूँकि रूचि की चूत में पार्थ का आवागमन हो चूका था तो निखिल के पूरे लंड को भी वो एक ही धक्के में डकार गई. पार्थ ने रूचि को उसके रस से सना अपना लंड चूसने के लिए दिया जिसे रूचि ने बड़ी अधीरता से अपने मुंह में ले लिया। और इस बार निखिल ने अपने जोरदार धक्कों से रूचि की ईमारत हिला दी. पर उसने गति इतनी ही रखी कि पार्थ अपने लंड को रूचि से चुसवा पाए.

पर पार्थ ने ऐसा कोई दया का कार्य नहीं किया वो रूचि के मुंह को चूत समझ कर चोदने लगा. पर अब रूचि भी इस खेल का आनंद उठा रही थी. आज उसने अनुभव किया था कि जिनसे वो अब तक चुदवाती आयी थी वो पहली कक्षा के विद्यार्धी थे और जो आज उसे चोद रहे हैं वो उनसे बहुत आगे. उसके मन में क्लब के अन्य रोमियो से भी चुदने की इच्छा बल पकड़ने लगी. इन सबके बीच उसकी चूत का झड़ना अबाधित था. न जाने कितने वर्षों की प्यास थी जो उसकी चूत के आँसू मिटा रहे थे. पर अंत में उसके शरीर ने हाथ डाल ही दिए. एक फौहारे के साथ उसकी चूत ने एक लम्बी पिचकारी सी मारी और वो ठंडी होकर ढीली पड़ गई.

पार्थ और निखिल का भी अब समय पूरा हो चुका था, पर वो रूचि को अपने प्यार के रस से नहलाना चाहते थे जिससे उसे ये दिन सदैव याद रहे. निखिल अपने लंड को चूत ने निकालकर रूचि के चेहरे के पास आ गया और अपने हाथों से मुठ मारने लगा. उधर पार्थ ने मुंह को तब तक चोदा जब तक कि पक्का न हो गया कि वो झड़ने वाला है. इसके बाद उसने भी अपने लंड को निकाल लिया. दोनों मित्रों ने एक साथ अपने लौंड़ों से रूचि के चेहरे पर गाढ़ा सफ़ेद पानी सींचना शुरू किया. जब चेहरा भर गया तो उसके स्तनों पर भी छिड़क दिया. अंत में पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह में डालकर साफ करने के लिए कहा. उसके बाद निखिल ने भी अपने लंड की सफाई करवाई.

इसके बाद दोनों मित्र खड़े होकर अपने संपन्न कार्य का आकलन करने लगे. उनके वीर्य से भीगी सुन्दर रूचि अब उन्हें और भी रुचिकर लग रही थी. इस समय वो एक अति संपन्न और बड़ी व्यवसाई न होकर एक सस्ती वेश्या प्रतीत हो रही थी. रूचि ने कुछ समय बाद अपनी आंख खोलकर उन दोनों को उसे इस स्थिति में देखते हुए पाया.

“क्या देख रहे हो? ऐसा माल पहले नहीं भोगा होगा.”

पार्थ और निखिल ने उत्तर देना आवश्यक नहीं समझा, क्योंकि ये धंधे की बात थी पर हामी में सर हिला दिया.

“तुम चुदाई बहुत अच्छी करते हो. मेरा घर के लिए निमंत्रण अभी भी है. और इस बार... “ रूचि ने अपनी ऊँगली से एक थक्के वीर्य को लिया और अपनी गांड में उस ऊँगली से डाला. ‘’... इस छेद का भी स्वाद दूंगी.”

अब ऐसा प्रलोभन हो और कोई न करे ऐसा हो ही नहीं सकता.

“चलो अब नहा कर साफ हो जाओ. अपनी एक घंटे की छुट्टी समाप्ति पर है. तीनों साथ ही नहा लेते हैं.”

तीनों जल्दी से नहाये और कमरे से बाहर निकले. रूचि ने रिमोट से कमरे को लॉक किया. फिर इंटरकॉम उठाया.

“आधे घंटे और रुकना फिर अगले अपॉइंटमेंट वाले को भेजना. और घर जाने के पहले मेरे कमरे की सफाई कर देना और कपड़े बदलकर जाते हुए लॉन्ड्री में देती जाना.”

फिर उसने पार्थ को देखा, “ मुझे तुम्हारे साथ बिज़नेस करना रास आएगा. पहली बार मैं कोई बिज़नेस आनंद के लिए करूंगी.”

पार्थ: “रूचि मैडम. आप क्यों नहीं उस अभिनेत्री के शो को देखने आतीं? और कुछ बातें और....”

रूचि: “सोचकर बताती हूँ. और क्या बात है?”

पार्थ: “आप क्यों नहीं हमारी चयन समिति में शामिल हो जातीं? पार्टनर होने के कारण हर दूसरे नए रोमियो का इंटरव्यू आपको लेना होगा। और इंटरव्यू का तात्पर्य होता है प्रार्थी की चुदाई की तकनीक और क्षमता का आकलन.”

रूचि: “ओह, तो तुम मुझे रिश्वत दे रहे हो. मैं इस बारे में भी सोचकर ही बताऊंगी. पर प्रस्ताव अच्छा है. और क्या बात है.”

पार्थ: “कल क्लब में एक विशेष आयोजन है, ११ बजे से. हमें शुशी होगी अगर आप आ सकें तो. एक तो आप क्लब की व्यवस्था देख लेंगी. और कल सभी रोमियो उपस्थित होंगे और आप उनकी क्षमता को देख सकती है. इससे आपको अपने लिए सेवादार चुनने में मदद होगी.”

रूचि: “हम्म्म तब तो कल छुट्टी ही लेनी होगी. मैं प्रयास करुँगी आने का. अरे प्रयास नहीं, मैं अवश्य आऊंगी. पर किसी से अभी मिलूंगी नहीं. वो सब बाद में. क्लब की व्यवस्था इत्यादि भी मैं किसी और दिन देखूँगी. पर अब प्लीज मुझे क्षमा करो, मुझे अब दूसरे कार्य भी संपन्न करने है. तुम दोनों का धन्यवाद, मुझे इतना सुख देने के लिए.”

पार्थ ने अपना ब्रीफ़केस खोलकर चेक किया और देखा कि चैक ठीक से रखा है. तभी रूचि ने रिमोट उठाया और पार्थ को अपने पीछे दरवाजा खुलने की आहत सुनाई दी.

“थैंक यू, रूचि मैडम.” कहते हुए पार्थ और निखिल वहां से निकल गए.

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शोनाली का घर:

शाम हो चुकी थी. सारे पंछी लौट कर घर पहुँच चुके थे.

बैठक में बैठे सब भोजन के पहले की ड्रिंक ले रहे थे.

पार्थ ने सबको नयी पार्टनर और फाइनेंस के बारे में बताया. जॉय को बहुत गर्व हुआ कि पार्थ ने रूचि जैसी शक्तिशाली स्त्री को अपना पार्टनर बनाया है. इसके बाद उनके क्लब की सफलता निश्चित थी.

जॉय ने जैसन के साथ हुई नयी संधि के बारे में बताया और शोनाली से पूछा कि वो कब जाना चाहेगी. शोनाली ने उसे सोचकर बताने के लिया कहा.

सुमति ने शादी की तैयारी से समर्थ और शीला के संतुष्ट होने का शुभ समाचार दिया. सब इस बात से बहुत प्रसन्न हो गए.

शोनाली ने फिर सागरिका और पारुल के साथ सुप्रिया के घर का प्रकरण बताया और सुरेखा और उसकी बेटी के अद्वितीय सौंदर्य की भरपूर प्रशंसा की. ये सुनकर सबके मन ललचा गए और उनके मुंह में पानी आ गया.

फिर सबने भोजन किया और कुछ समय के लिए टीवी पर कुछ कार्यक्रम देखे.

“हम्म्म्म, तो सभी लोग किसी न किसी खेल में व्यस्त रहे आज, मुझे छोड़कर.” जॉय ने हँसते हुए कहा.

“ओह, पापा ! अगर दिन सूना गया है तो क्या हुआ. हम आपकी रात रंगीन करेंगे.” सागरिका और पारुल ने एक स्वर में कहा.

दोनों ने उठकर जॉय का हाथ लिया और लगभग घसीटते हुए उसे अपने कमरे में ले जाने लगीं. अचानक पारुल ने पीछे मुड़कर देखा.

“बुआ, आप भी आ ही जाओ. आपको डबल प्रसाद खिलाएंगी हम दोनों बहनें.”

सुमति तपाक से उठी और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उन तीनों के पीछे चल पड़ी.

“मामी, अब आप किसके बिस्तर पर चुदना चाहोगी? अपने या मेरे?”

शोनाली बिना कुछ बोले पार्थ का हाथ पकड़कर अपने कमरे में चली गई.

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बॉलीवुड अभिनेत्री का शयनकक्ष:

वो सुन्दर अभिनेत्री इस समय एक मोटे लंड पर उठक बैठक कर रही थी. लंड की पूरी चौड़ी के कारण उसकी चूत पूरी फैली हुई थी और इसमें उसे बहुत आनंद आ रहा था.

“सच में हरजीत, तेरा अपना पारिश्रमिक लेने का ये तरीका मुझे बेहद पसंद है. मैं तो चाहूंगी कि तुम ऐसे ही मेरे लिए शो का आयोजन करते रहो.”

“मैडम, जब तक आप अपनी इस चूत का लालच मेरे लिए रखेंगी, तब तक मैं आपको काम की कमी नहीं होने दूंगा.”

ये वही हरजीत था जो विशेष शो इन दोनों के लिए आयोजित करता था और इस उद्योग के गुप्त नियमों के आधार पर उसे एक रात का सहवास प्राप्त था. पर आज अभिनेत्री के मन में कुछ और भी इच्छा थी. उसने सोफे पर नंगे बैठे अपने पति की ओर देखा तो उसका लंड इस समय पूरे जोश में था. अभिनेत्री का मन उसके प्रति प्रेम से भावुक हो उठा.

“जानू , क्यों नहीं तुम अपने लंड को मेरी गांड में डाल लेते. मुझे विश्वास है कि हरजीत को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी.”

हरजीत: “यस, बॉस. आई एम ओके विथ देट”

विवाह से पहले अभिनेत्री ने बहुतेरे लोगों से गांड मरवाई थी. आखिर इस उद्योग में सबका गांड मारना ही सबका उद्देश्य होता है. पर शादी के बाद उसने अपनी गांड केवल अपने पति के लंड के लिए सुरक्षित कर दी थी. हालाँकि इसके कारण उसके हाथ से कुछ फ़िल्में छूट गयीं, पर उसने अपने वचन को नहीं तोड़ा.

प्रौढ़ अभिनेता ने साइड टेबल से वेसलीन निकली और अपनी सुन्दर पत्नी के पीछे आ गया. और कुछ ही समय में वो अतिसुन्दर फिल्मों में चरित्रवान दिखने वाली अभिनेत्री दो लौंड़ों से चुद रही थी. और आने वाले अपने गैंग-बैंग की कल्पना कर रही थी.

क्रमशः
 
छठा घर: दिया और आकाश पटेल

अध्याय ६.२

पिछले भाग से आगे:

नीलम के बंगले में:

जब लड़कों ने रमोना की गांड का प्रस्ताव सुना तो उनकी बांछें खिल उठीं. अब ये नहीं था कि उनमें से किसी ने गांड नहीं मारी थी, पर एक नयी गांड में अपने लंड को पेलने का सपना सबका होता है. पर उन्हें ये भी लग रहा था कि रमोना शायद कुछ अधिक नशे में है. यही सोचकर सचिन उसके पास गया.

सचिन: “मॉम, मेरे विचार से अब आपको और नहीं पीनी चाहिए. नहीं तो आपको चुदाई का असली आनंद नहीं आएगा.” सचिन जानता था कि केवल यही एक कारण था जिसके कारण रमोना पीने पर लगाम लगाती. उसने कई बार उसे इतना धुत देखा था कि वो चलने या बोलने तक में असमर्थ थी. और ये उसके साथी हितेश के साथ अनर्थ होता.

रमोना: ”मेरा लाल, माँ का कितना ध्यान रखता है. ठीक है अब कुछ देर के लिए कुछ नहीं पियूँगी.”

सभी उठकर खाने में मग्न हो गए. अच्छी शराब और अच्छी चुदाई से सबकी भूख चमक उठी थी. तब रमोना से दिया ने पूछा कि क्या उसके मन में कुछ और भी खेल हैं?

रमोना ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा: “यार मेरा तो हर समय खेलने का ही मन करता है. पर मैं आज अपनी गांड पर शर्त लगवाना चाहती हूँ. वैसे तो हितेश ही मेरी गांड मारने का सही हक़दार होना चाहिए, पर मैं एक दूसरा खेल सोच रही हूँ.”

ये सुनकर हितेश का मुंह उतर गया. रमोना उसे देखकर खिलखिलाने लगी.

“खेल ये है, कि हम चारों स्त्रियों को एक पर्ची में नंबर मिलेगा १ से ४ तक. और खाने के बाद जब भी हम अगला राउंड खेलेंगे उसमें हम अपने अपने साथी का लंड चूसकर झड़ायेंगे. जो पहले झड़ेगा उसे १ नंबर वाली की गांड मिलेगी और जो अंत में उसे ४ वाली की. पर किसका क्या नंबर है ये तुम लड़कों को कोई नहीं बताएगा जिससे तुम लोग कोई बेईमानी न करो. अगर दो स्त्रियां आपस में बदलना चाहें तो वो एक दूसरे से बदल लेंगे. कैसा है ये आइडिया खेल का.”

सबने कुछ देर सोचा फिर इस प्रस्ताव को पारित कर दिया. और फिर खाने पर टूट पड़े.

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घर पर:

मेधा को कुछ सुझाई नहीं पड़ रहा था. कौन हैं ये लोग? कैसा है ये परिवार? बेटी बाप और ताऊ का वीर्य चाटती है और इस प्रकार दर्शाती है जैसे ये सामान्य बात हो. और ये भी साफ था कि निशा को इस बारे में पता था. इतनी जल्दी जल्दी शराब पीने से उसे वैसे भी नशा होने लगा था. पर तभी घर की घंटी बजी और उसका ध्यान उस ओर गया. उसने जल्दी से उठकर अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोला. रेस्त्रां से खाना आ गया था. उसने पार्सल लिया और अपने पर्स से पैसे निकालकर डिलीवरी बॉय को दिए. ये तो अच्छा था कि दरवाजे से अंदर का दृश्य नहीं दिख सकता था नहीं तो डिलीवरी वाला भी लंड खड़ा करके जाता. फिर उसने किचन में जाकर खाना बर्तनों में डाला और प्लेट इत्यादि को डाइनिंग टेबल पर सजाया और खाना भी लगा दिया.

इस पूरे समय में निशा दोनों भाइयों के बीच में बैठी चुहल करती रही. जब खाना लग गया तो निशा उठी और नंगी ही घर के अंदर चली गयी. कोई ५-७ मिनट में वो कनिका के साथ वापिस लौटी. कनिका ने अपनी खाली बियर की बोतल को फेंक कर फ्रिज से एक नयी बोतल निकली और उसे खोल कर एक ही घूँट में आधी पी ली.

“उफ्फ्फ्फ़, क्या गर्मी हो रही है. ए सी भी काम नहीं कर पा रहा.”

“कुछ तो गर्मी तुम्हारे पापा और ताऊजी ने भी बढ़ाई हुई है.” निशा ने हँसते हुए कहा.

“आंटी, आप जहाँ हो वहां गर्मी अपने आप हो जाती है.” कनिका ने भी उसका उसी स्वर में उत्तर दिया. उसने अपनी बियर अगले ही घूँट में समाप्त कर दी.

“आप क्या पी रही हो आंटी? मेरा मतलब लौड़े के रस के आलावा.”

अब जहाँ मेधा इस आदान प्रदान को आश्चर्य से देख सुन रही थी, वहीँ निशा खिलखिला उठी.

“व्हिस्की. मुझे बियर का नशा पसंद नहीं और इसके बाद मुझे सुस्ती भी आती है. और इन दोनों के साथ सुस्त होना मानो अपनी ऐसी तैसी करवाना है. खाना खा लें?”

“ओह, श्योर. खाने के बाद और बियर लूंगी.”

“खाने के बाद?”

“पीने और चुदने के लिए मेरा कोई नियम नहीं है.” दोनों इस बात पर फिर खिलखिला उठीं.

अब तक आकाश और आकार खाने की टेबल पर बैठ चुके थे और मेधा उन्हें परोस रही थी.

कनिका ने मेधा का हाथ पकड़ा और कुर्सी पर बैठाया, “आप बैठो, मैं परोसती हूँ.”

कुछ ही समय में सब खाने में मग्न हो गए. खाना शाकाहारी था और उनके प्रिय रेस्ट्रॉं से था. कुछ ही देर में सबने मन भर के भोजन किया और फिर स्त्रियों ने मिलकर सब सफाई की. फिर सब बैठक में जाकर टीवी देखने लगे.

आकाश: “कनिका, क्या हुआ तुम मम्मी के पास जाने के स्थान पर यहाँ क्यों आ गयीं.”

कनिका: “ताऊजी, वहां मम्मी और चाची अपने मजे के लिए जाती हैं. मेरे रहने से उनके लिए कमी होती है. यही सोचकर मैं घर ही आ गयी.”

मेधा अभी भी इस परिवार के बीच में संबंधों को नहीं समझी थी. निशा ने कनिका को संकेत किया तो कनिका बोल उठी: “निशा आंटी और मेधा दीदी, आइये मेरे कमरे में मैं कुछ दिखाना चाहती हूँ आप दोनों को.”

तीनों कनिका के कमरे में चले गए. कमरा बंद करके कनिका और निशा ने मेधा को प्रेम से बैठाया और समझाने लगे.

निशा: “मेधा, तुम्हें कुछ अचरज ही रहा होगा कि इस घर में सब सेक्स के बारे में इतना खुल कर क्यों बात कर लेते है. ये परिवार स्वच्छंद विचारों में विश्वास रखता है. और कोई भी किसी के साथ भी सेक्स कर सकता है.”

कनिका ने मोर्चा सँभालते हुए बात आगे बढ़ाई, “ये जीवनशैली सामाजिक नियमों के विपरीत है, और इसीलिए इस विषय में अधिक लोगों को नहीं पता है. आज तुम्हें जो पता लगा है, हम विश्वास करते हैं कि इसे तुम केवल अपने तक ही रखोगी. वैसे भी कोई तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं करेगा, पर हम नहीं समझते कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी.”

मेधा: “नहीं, इसकी आवश्यकता नहीं है. मेरे ऊपर सर के इतने उपकार हैं कि मैं जीवन पर्यन्त नहीं उतार सकती. उनके साथ छल तो कदापि नहीं करूंगी.”

निशा और कनिका ने उसे एक साथ बाँहों में भर लिया और बड़े प्यार से उसे चूमने लगे. इसके बाद वे लौटकर बैठक में आ गए और बैठ गए.

कनिका: “डैड, अब आपका क्या कार्यक्रम है?”

आकाश और आकार की ऑंखें मेधा की ओर मुड़ गयीं. मेधा के शरीर में सिहरन हुई.

“मेरे विचार से अब हम दोनों मेधा की सवारी करना चाहेंगे,” आकाश ने कहा.

“एक साथ” आकार ने जोड़ा.

निशा: “मैं इसे तैयार करती हूँ.”

कनिका: “मैं कुछ देर देखना चाहूंगी.”

आकाश: : “नो प्रॉब्लम.”

निशा उठी और मेधा के और अपने कपडे निकालने लगी.

**********

नीलम के बंगले में:

खाने के बाद सब लोग आराम से बैठ कर बातें करने लगे. रमोना का भी नशा कुछ कम हो गया और वो भी अब ठीक से बात कर पा रही थी. सचिन और हितेश के कहने पर और ड्रिंक्स न लेने का निर्णय हुआ. अगर कोई चाहता तो सोने के पहले पी सकता था. अचानक दिया का फोन बज उठा. वो फोन लेकर कमरे से बाहर चली गई. लौटी तो गहरे सोच में थी.

“हितेश, क्या तुम्हारे कॉलेज की छुट्टी है कुछ दिनों?”

“नहीं तो, मौसी. पर हाँ विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेज बंद हैं २ सप्ताह के लिए, परीक्षा की तैयारी के लिए. पर हमारे कॉलेज में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. पर बात क्या है ?”

“अरे कुछ नहीं. चल मजा करते हैं.”

रमोना किचन में जाकर एक कागज और कलम ले आई और उसने चार पर्चियां बना दीं. स्त्रियों ने एक एक करके पर्ची में अपना नंबर पढ़ा और रमोना को लौटा दिया. रमोना ने नंबर के साथ नाम लिखा और किचन में जाकर कहीं रख दिया. अब कपड़े तो किसी ने पहने थे नहीं और लड़के पर्ची निकलते देखते ही वापिस टनटना गए थे. सोफे पर बैठकर वो अपने तने हुए लंड सहला रहे थे. हर स्त्री ने अपने निर्धारित साथी के सामने बैठकर उसके लंड को प्यार से पुचकारते हुए चूमने, चाटने और चूसने का कार्यक्रम शुरू कर दिया. लड़के अपने भाग्य पर इतराते हुए अपनी साथी महिला का जोश बढ़ा रहे थे.

इस बार के खेल में कोई प्रतियोगिता का पुट नहीं था, क्योंकि किसी को नहीं पता था कि किस गांड में कौन सा लंड जाने वाला है. इसी कारण सब आनंद ले रहे थे. स्त्रियां बहुत प्यार और पुचकार से लंड पी रही थीं, जैसे कि कोई पसंद की आइसक्रीम चाट रही हों. लड़कों को भी कोई जल्दी तो थी नहीं. आज वो स्त्रियों के दास जो थे. लंड, टोपा, टट्टे और कभी कभी गांड को चाटती हुई महिलाएं अब अपने भी उत्तेजित हो रही थी. कमरे में अगर लड़कों के रस की गंध थी तो चूतों से झरते पानी की भी मादक सुगंध व्याप्त थी. आलोक वो पहला लड़का था जो झड़ा. असली में वो बैठे हुए लंड तो चुसवा ही रहा था पर उसके सामने बैठे हितेश के लंड को चूसती रमोना की गांड ने उसे इतना आकर्षित किया कि वो जल्दी ही झड़ गया.

उसके बाद एक एक करते हुए हितेश, पुनीत और अंत में सचिन भी झड़ गए. सबके लौंड़ों के पानी ने गले सींचे और अपनी साथिन की प्यास बुझाई. अब ये देखना था कि किस लंड के भाग्य में किसकी गांड लिखी थी. सो रमोना उठकर किचन में गई और पर्चियां उठा लाई. उसने जिस नंबर से लड़के झड़े थे उस नंबर की पर्ची उन्हें सौंप दी. और फिर कहा कि वो अपने साथिन का नाम घोषित करें. और जब नाम पढ़े गए तो सभी आश्चर्य में आ गए.

आलोक: “प्रीति”

हितेश: “रमोना”

पुनीत: “नीलम”

सचिन: “दिया”

आश्चर्य इसीलिए था कि सबको अपने ही साथी का नंबर मिला था. ऐसा चमत्कार कैसे हुआ, कोई नहीं समझ पाया. पर अगले राउंड के पहले कुछ रुकना आवश्यक था, अधिक नहीं पर इतना कि लंड सही तरह से खड़े हो पाएं. गांड में पेलने के लिए लंड ज्यादा सख्त होना चाहिए.

नीलम ने आलोक और हितेश को स्टोर रूम से गद्दे ले कर आने के लिया कहा. इनके साथ पुनीत और सचिन भी गए और गद्दे, उसके लिए चादरें और तकिये लेकर आये और उन्हें बीचों बीच बिछा दिया. उसके बाद आलोक किचन से सरसों के तेल से भरी एक पिचकारी वाली बोतल ले आया. अब सब तैयार था: गद्दे बिछे हुए थे, तेल की शीशी भरी हुई थी, लौड़े गांड फाड़ने को तत्पर थे और गांड वालियाँ उत्सुकता से अपनी गांड में खुजली कर रही थीं. ये खेल अब शुरू होने वाला था.

**********

घर पर:

“तुम बहुत सुन्दर हो, मेधा दीदी.” कनिका ने उठकर अपने कपड़े उतारते हुए कहा. “मैं चाहूंगी कि आप मुझे अपना स्वाद चखने दें.”

ये कहते हुए कनिका मेधा के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसने अपने मुंह को मेधा की चूत पर जड़ दिया. अब वो अपनी जीभ से किसी कुत्ते की भांति मेधा की चूत चाट रही थी. निशा ने भी अवसर देखकर मेधा के पीछे घुटनों के बल बैठकर अपना मुंह उसकी गांड में घुसा दिया और अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसकी गांड के छेद को चाटने लगी. कनिका ने मेधा के नितम्ब पकड़कर उसे अपने मुंह की और खींचा और उसकी चूत में अपनी जीभ का प्रवेश कर दिया. नितम्ब खींचने से मेधा का गांड का छेद कुछ और खुल गया और इसका लाभ उठाकर निशा ने अपनी जीभ उसमे धकेल दी. आकाश और आकार ये दृश्य देखकर पागल से हो गए और उनके लौड़े और अधिक तन गए. मेधा को खड़ा होने में परेशानी हो रही थी. उसका शरीर एक अद्भुत अनुभूति से काँप रहा था.

कुछ ही देर में कनिका और निशा ने मेधा के दोनों छेद अच्छे से गीले और चिकने कर दिए. उसे छोड़कर अब दोनों आकाश और आकार की ओर बढ़ीं और उनके लंड अपने मुंह में लेकर उन्हें भी अच्छे से गीला और चिकना कर दिया.

“डैड, आप नीचे लेटो.” कनिका ने आकाश को कहा.

आकाश लेट गया और निशा हाथ पकड़कर मेधा को लेकर आयी और उसे आकाश के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए कहा. मेधा ने अपने पैर आकाश के दोनों ओर किये और फिर उसके लंड पर बैठती गई. देखते ही देखते आकाश का पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक जम गया. मेधा सांस रोके अपने ऊपर होने वाले इस दुहरे आक्रमण की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही थी. अब बारी थी आकार की. निशा ने अपने उंगलियों में थोड़ी वेसलीन लगाई और मेधा की गांड पर रख दी. अंदर डालने का कार्य आकार को करना था. आकार ने अपने लंड को मेधा की फैलती सिकुड़ती गांड पर रखा और हलके से दबाव के साथ सुपाड़े को प्रविष्ट कर दिया. मेधा थोड़ी कुनमुनाई. पर कोई विरोध नहीं किया. आकार ने हल्के धीमे दबाव को बनाये रखा और उसका लंड शनैः शनैः मेधा की गांड में अपनी उपस्थिति बढ़ता गया.

जब दो तिहाई लंड मेधा की गांड को नाप चूका था, तब आकार ने अपने लंड को बाहर खींचा और हल्के धक्के लगते हुए और गहराई तय की. फिर उसने अपने लंड को बाहर खींचकर एक हल्का मगर शक्तिशाली धक्का दिया और मेधा की चीख के साथ उसकी गांड को चीरते हुए पूरे लंड का झंडा गाढ़ दिया. मेधा हल्के हल्के सुबक रही थी, पर विरोध अभी भी नहीं था. उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसके दोनों छेद किन्ही विशाल मूसलों से भर दिए गए हों. पर उसे पता था कि ये केवल प्रारम्भ था. असली गांड कुटाई तो अब होनी थी.

आकाश अब नीचे से चूत में लंड आगे पीछे करने लगा. आकार रुका रहा और मेधा को दो लंडों का सुख एक ओर के घर्षण में आ रहा था. फिर आकाश ठहर गया और इस बार आकार ने लंड मेधा की गांड में आगे पीछे करने लगा. कुछ समय तक यूँ ही चलता रहा, पहले आकाश चूत पेलता फिर आकार गांड. फिर ये क्रम बदल गया. इस बार जब आकाश ने चूत में लंड चलाया तो साथ साथ आकार ने भी साथ दिया. अब दोनों के लंड एक साथ अंदर और बाहर हो रहे थे. मेधा के आनंद की अति हो चुकी थी. पिछली बार इन भाइयों से उसे बहुत बेरहमी से चोदा था, पर आज जिस प्रकार से चोद रहे थे वो सच में आनंद दे रहा था.

उधर कनिका और निशा आपस में लिपटे हुए थे और एक दूसरे की चूत पी रहे थे. रह रह कर दोनों इस तिकड़ी पर भी दृष्टि डाल लेते, परन्तु आपस में ही उन्हें अनंत सुख मिल रहा था. मेधा की चूत अब बहुत रस बहा रही थी और ये बहकर आकाश की जांघों पर फ़ैल रहा था. इसके कारण घर्षण कुछ काम हो गया था. और इसका एक उपाय यह था कि ताल बदली जाये. संकेत पाने पर आकार अपने लंड को अब आकाश के विपरीत चलाने लगा. जब आकाश लंड डालता तब आकार निकालता और इसी लय में दोनों भाई मेधा को चोद रहे थे. मेधा पर भी अब एक मदहोशी सी झा रही थी. वो अलग अपनी गांड उछाल रही थी.

अचानक मेधा का शरीर अकड़ गया और वो ऊल जलूल चीखती हुई ढेर हो गई. उसकी चूत से निकले फौहारे ने इस बार आकाश और आकार दोनों को भिगा दिया था.

ये देखकर कि मेधा झड़ चुकी है निशा और कनिका ने अपने खेल पर विराम लगाया और दोनों मेधा के एक एक ओर चली आयीं। भाई लोग समझ गए और सबसे पहले आकार ने अपने लंड को मेधा की गांड से निकाला और निशा के मुंह में डाल दिया. निशा उसे बड़े प्रेम से चूम चाटकर दोबारा मेधा की गांड में डलवा दी. इस पुरे समय आकाश ने चोदना बंद नहीं किया था. पर जब आकार ने लंड अंदर डाला तो उसने अपने लंड को बाहर निकाल लिया। इस बार कनिका ने उसे चूम चाट कर प्यार किया और मेधा की चूत में लौटा दिया. इस क्रम से मेधा के शरीर और मन की शृंखला बाधित हो गई. वो इसमें अपूर्व आनंद ले रही थी, परन्तु उसके झड़ने के लायक उसकी चूत में अब रस बाकी न था.

अंततः आकार ने अपना माल मेधा को गांड में समर्पित कर दिया पर अपने लंड को वहीँ गड़ाए रखा. जस आकाश ने अपना पानी मेधा की चूत में छोड़ दिया, तब जाकर दोनों भाई मेधा से अलग हुए. मेधा वहीँ पर ढह गई. और कनिका उसके ऊपर टूट पड़ी. चूत और गांड से बहते कामरस का पूरा सेवन करने के पश्चात् ही कनिका ने अपना सिर ऊपर किया. निशा दोनों भाइयों के लौड़े और उनके टट्टों और जांघों पर बिखरे हुए मेधा के रस को चाट रही थी. जब कुछ बाकि न बचा तो कनिका और निशा ने एक दूसरे का गहरा चुम्बन लेकर रसों का आदान प्रदान किया और फिर वहीँ लेट गयीं.

आकाश और आकार बाथरूम गए और लौटते हुए अपने लिए ड्रिंक बनाते हुए आये. फिर मेधा के पास जाकर उसको बड़े प्यार से सहलाते हुए पूछा कि वो ठीक तो है.

मेधा: “सर, ऐसा आनंद मुझे कभी कल्पना में भी प्राप्त नहीं हुआ. आप लोग सच में कमाल हैं.”

ये सुनकर दोनों भाइयों से संतोष की सांस ली. अब ये लड़की हमारे साथ नियमित चुदाई करेगी.

कुछ देर बाद सब सोने ले लिए चल पड़े. मेधा आकार के साथ चली गई और निशा आकाश के साथ.

"पर डैड और ताऊजी, कल सुबह मुझे भी ऐसी ही चुदना है.” कहते हुए कनिका अपने कमरे में चली गई.

**********

नीलम के बंगले में:

औरतों ने अपना स्थान ले लिया, सबने घोड़ी का आसन ग्रहण किया हुआ था और सिर को तकिये पर लगाया हुआ था. इससे उनका पिछवाड़ा ऊपर उठा हुआ था और गांड उभरी हुई थी. पहले नीलम, फिर प्रीति, फिर दिया और रमोना एक दूसरे को देख सकती थीं क्योंकि उनके चेहरे एक दूसरे के सामने थे. अब सारे लड़कों ने अपनी अपनी गांड के पीछे अपना स्थान लिया. पुनीत नीलम के पीछे, आलोक प्रीति के, हितेश रमोना के और अंत में सचिन दिया की गांड के पीछे खड़ा हो गया.

आलोक ने अपने हाथ एक हाथ से प्रीति की गांड को फैलाया और दूसरे हाथ से अपने हाथ में उपस्थित तेल की शीशी के नोक से प्रीति की गांड में उपयुक्त मात्रा में तेल भर दिया. उसने प्रीति के नितम्बों को थोड़ा हिलाया जिससे कि तेल अंदर चला जाये. जो तेल बाहर निकला उसने अपने हाथ में लेकर उसे अपने लंड के टोपे पर लगा लिया. फिर उसने बोतल हितेश को दी जिसने समान उपक्रम के साथ रमोना की गांड ने तेल डाला और अपने लंड पर भी लगे. यही प्रणाली सचिन और पुनीत ने भी अपनाई। अब चारों लौड़े अपने लक्ष्य को भेदने के लिए तत्पर थे. और उन्हें ये दिख रहा था कि उनके सामने उपस्थित गांड भी खुलकर और बंद होकर उनके इस आगंतुक की प्रतीक्षा में थी.

चार लंड अपने लक्ष्य के मुंह पर अपने हथियार को लगाए और दबाव बनाते हुए अपने टोपे को उस तंग गली में प्रविष्ट कर दिया. चारों स्त्रियां ने जो इस आगमन के लिए उत्सुक थीं, एक गहरी साँस ली. उनकी इच्छा जो पूरी होने वाली थी.

धीरे धीरे लंड अपने अपने लक्ष्य को भेदने लगे. हर गांड इस प्रतीक्षा में थी कि कब उसकी गहराई भरी जाएगी. लंड बिना रुके अपनी लम्बाई को गांड की गहराई से नाप रहे थे. औरतों में से कुछ बेचैन होने लगीं थीं, वो चाहती थीं कि जल्द ही उनकी चुदाई शुरू हो, पर लड़कों के मन में ऐसा कोई विचार नहीं था. गांड मारने के सुख में से सबसे अप्रतिम आनंद लंड को पहली बार अंदर डालने का ही होता है. जैसे जैसे एक एक मिलीमीटर लंड का रास्ता तय होता है, लंड में एक अभिन्न सी अनुभूति होती है. एक एक करके लंड अपनी जड़ तक जा समाये, पर सचिन अभी भी लगा हुआ था. जिनकी ऑंखें दिया को देख रही थीं वो उसके चेहरे पर पीड़ा भरे आनंद के भाव देखतीं. दिया की गांड में इतना मोटा और लम्बा लौड़ा कभी नहीं गया था, हालाँकि उसने खेला बहुतों से था. पर फिर उसके चेहरे पर कुछ सांत्वना के भाव दिखाई दिए. सचिन के पूरे लंड ने उसकी गांड पर अपना अधिकार जमा लिया था.

लंड अब गांड के अंदर अपना आवागमन प्रारम्भ कर चुके थे. छोटे और हल्के धक्कों से लंड अपनी राह आसान कर रहे थे. ये सर्वविदित था कि ये केवल तूफ़ान के पहले की शांति है. कुछ ही समय में ये शांति टूटेगी और तूफ़ान उनकी गांड की धज्जियाँ उड़ा देगा. पर उनके इस पूरे आयोजन का प्रयोजन ही ये था. उन सबको अपनी गांड प्यार से नहीं बल्कि दमदार तरीके से मरवाने का शौक था. और ये पूरा प्रेम का नाटक बस कुछ ही क्षणों के लिए था. रमोना जैसी महा चुड़क्कड़ औरत से ये सब प्रेम प्यार अब सहन नहीं हो रहा था.

“गांड ऐसे ही हिजड़े की तरह मारता है क्या? कुछ तो दम दिखा.” हितेश के तन बदन में जैसे आग लग गई. उसने अपने पूरे लंड को निकला और एक जानदार धक्के में अंदर पेल दिया.

“ये हुई न बात, अब लगा कुछ हो रहा है. अब मिटा मेरी गांड की खुजली. अगर तू जरा भी हल्का पड़ा तो तेरा लंड काटकर खा जाऊंगी कच्चा ही.”

हितेश ने भी अब अपना अमानवीय रूप धारण कर लिया. और उसके धक्के लम्बे और तेज हो गए. रमोना की गांड का रोम रोम आनंद से चीख पड़ा. उसकी आनंदभरी सीत्कारों और चीखों से कमरा भर गया. और उसके साथ एक एक करके अन्य महिलाएं भी जुड़ गयी. सबसे अधिक दर्दनाक चीख दिया की थीं. उसकी गांड में ऐसा मूसल कभी नहीं गया था. और उसे कोई जल्दी नहीं थी गांड की धज्जियाँ उड़वाने की, वो तो पहले वाली गति से ही संतुष्ट थी, पर रमोना के कारण उसे भी उसी दरिंदगी को झेलना पड़ रहा था. सचिन ने ये सोचा था कि दिया भी उसकी माँ की तरह ही उसके लंड पर झूम उठेगी. पर उसके लिए अभी समय था. दिया की चीखों में आनंद कम और पीड़ा अधिक थी. अन्य दो महिलाएं भी इसी नौका में थीं पर उनकी गांड में सचिन जैसा लंड नहीं था.

अब ऐसा भी नहीं था कि लड़कों को गांड मारने मिली थी तो उन्होंने चूत का ध्यान नहीं रखा था. चूत में किसी ने एक तो किसी ने दो उँगलियाँ डाली हुई थीं और उन्हें वो अंदर बाहर कर रहे थे, जितना संभव हो पा रहा था. चारों औरतें अब दो तीन बार झड़ चुकी थीं और आनंद की चरम सीमा प्राप्त कर चुकी थीं.

अचानक ही पुनीत ने नीलम के भग्नाशे को अपनी उँगलियों से मसल दिया. नीलम को जैसे बिजली का झटका सा लगा और वो चीखती हुई एक बार फिर झड़ गई और उसके पानी से नीचे बिछा बिस्तर और गद्दे भीग गए. उसकी गांड पुनीत के लंड को अपने अंदर सामने के लिए सिकुड़ गयी और इसका परिणाम ये हुआ कि पुनीत भी अपने चरम पर जा पहुंचा. वो अपने आप को रोक न पाया और उसने नीलम की गांड में अपने लंड का रस छोड़ दिया. नीलम और पुनीत वहीँ ढेर हो गए. पुनीत का लंड अभी भी उसकी गांड में ही था. दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे. नीलम ने उसे चूमने के लिए सिर घुमाया और दोनों एक दूसरे के साथ चुम्बन में लीन हो गए.

रमोना जो इन सबसे अधिक अनुभवी थी उसने हितेश के लंड पर अपनी गांड से चुसाव करना शुरू किया. अब हितेश का लंड उसकी गांड में और भी सट कर और तंग होकर जाने लगा. रमोना की चूत जितना पानी छोड़ सकती थी छोड़ चुकी थी. अब वो लौड़े का पानी पीने के लिए उत्सुक थी. हितेश ने जब अनुभव किया कि वो अब अधिक समय नहीं टिक पायेगा तो वो रमोना की चूत, विशेषकर उसके भग्नाशे को जोर जोर से रगड़ने लगा. रमोना के शरीर ने उसके इस विचार को कि वो अब और नहीं झड़ सकती गलत सिद्ध कर दिया. और हितेश ने जैसे ही अपने गाढ़े वीर्य से उसकी गांड को सींचा, उस गर्म संवेदना और चूत पर प्रहार से रमोना इस बार काँपते हुए झड़ने लगी. उसके शरीर ने अब उसका साथ छोड़ दिया और वो उसी स्थिति में आनंद से कराहते और सुबकते हुए ढीली पड़ गई. हितेश ने धीरे से अपना वीर्य और गांड के रस से सना हुआ लंड बाहर निकाला और रमोना के ही पास लेट गया. रमोना ने उसके चेहरे को हाथ में लिया और चूमने लगी.

आलोक और सचिन भी बहुत पीछे नहीं रहे और उन्होंने भी प्रीति और दिया की गांड में अपना पानी छोड़ा और उनके साथ लेटकर प्रेमालाप करने लगे. कुछ समय पश्चात् औरतों से सफाई के लिए बाथरूम की राह ली और लड़कों ने भी एक दूसरे बाथरूम का प्रयोग किया. बाहर आने के बाद चादरें उठाकर धोने के लिए डाल दी गयीं और गद्दे और तकिये वापिस स्टोर में लौटा दिए. सबको प्यास लगी हुई थी तो इस बार दिया ने सबके लिए बियर खोल ली. उसकी चाल की लचक बता रही थी कि सचिन के लंड ने भीतर तक आघात किया है. पर उसके चेहरे पर छाई लालिमा और चमक इससे मिली संतुष्टि को भी दर्शा रही थी.

सबने अपनी बियर समाप्त होने के बाद सोने के लिए अपने कमरे की ओर प्रस्थान किया. कल सुबह एक नया दिन था और कुछ तो नया होने की आशंका थी.

**********

घर पर:

सुबह होने पर सबने नाश्ता किया और उसके बाद मेधा और निशा ने अपने घर जाने की अनुमति मांगी. दोनों को अपने कुछ काम करने थे. कुछ ही समय में वे नहा धोकर घर चली गयीं. आकाश और आकार भी अपने कुछ काम में व्यस्त हो गए. कनिका कुछ समय के लिए बाहर चली गई. खाने के लिए उसने कहा कि वो कुछ पैक करवाते हुए आएगी और इसीलिए घर में शांति थी. दोनों भाई टीवी पर एक मैच चल रहा था उसे देखने लगे और कुछ देर के लिए सोफे पर ही बैठे हुए सो गए. उठने के बाद दोनों अपने कमरे में जाकर लेट गए और वहीँ पर टीवी पर कुछ कार्यक्रम देखने लगे.

दोपहर १ बजे के बाद कनिका भी लौट आयी और सबके लिए खाना परोसा. सबने प्रेम पूर्वक खाना खाया. फिर कनिका अपने कमरे में चली गई. जाने के पहले उसने ३ बजे दोनों को तैयार रहने के लिए कहा. सबने अपने कमरे में जाकर कुछ समय निकला और ३ बजे लौटकर बैठक में आ गए. कनिका सबसे अंत में आयी और उसने बस एक झीनी सी नाइटी पहनी थी और ये विदित हो रहा था कि उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना है. आकाश और आकार के लौड़े टनटना गए. इसका अर्थ यही था कि कनिका ने जो कल डबल चुदाई की इच्छा व्यक्त की थी वो उसके लिए गंभीर थी.

‘क्या हुआ कनिका, तुम्हारा क्या विचार है?” आकाश ने पूछा.

“ताऊजी, मैंने कल ये निश्चय किया कि मैं भी इस डबल चुदाई का मजा लेने के लिए तैयार हूँ.”

“पर अभी तक तो तुम मना करती आयी थीं. तुम्हारी मम्मी और ताई तो कब से ये आनंद ले रही हैं.”

“अब देखिये तो आप लोग मेरी चूत और गांड दोनों ही मार चुके हैं और मुझे इसमें मजा भी बहुत आता है. पर कभी दोनों एक साथ नहीं मरवाई हैं. मुझे डर लगता था, मम्मी और ताई जी बहुत अनुभवी हैं और वर्षों से ये सब कर रही हैं. दूसरे आप लोग जिस प्रकार से उनकी चुदाई करते थे उससे भी मुझे डर लगता था.”

“फिर अब क्यों?”

“कल मैंने जब आप दोनों को मेधा दीदी को यही सुख इतने प्यार से देते हुए देखा तो मैंने भी इसका आनंद लेने का प्रण किया. पर वैसे ही प्यार और संयम से जो अपने कल दिखाया था.”

“तुम जैसे चाहोगी, वैसे ही करेंगे.”

ये सुनकर कनिका का चेहरा खिल उठा. वो मटकते हुए आकाश और आकार के सामने खड़ी हो गई. उसने सधे हाथों से बड़े ही कामुक अंदाज में अपने उस झीने गाउन की डोरी खोली और कन्धों को झटका. गाउन धरती पर धराशयी हो गया. दोनों भाई इस शरीर को कई बार देख और भोग चुके थे, पर आज के इस दृश्य ने उनके शरीर में आग लगा दी. दोनों ने अपनी टी-शर्ट उतार फेंकी. कनिका उसी मादक चल के साथ आगे आयी और उसने दोनों के बीच में स्थान ले लिया.

“मेरे प्यारे पापा और ताऊजी, आज मुझे वही सुख दीजिये जो घर और बाहर की हर स्त्री को आप मिलकर देते है.” ये कहते हुए उसने एक एक करके दोनों के होंठ चूमे और नीचे उनके शॉर्ट्स पर हाथ फेरने लगी.

दोनों भाइयों के इससे अधिक निमंत्रण की कोई आवश्यकता नहीं थी. उन्होंने तुरंत अपने शॉर्ट्स को उतार फेंका और कनिका के एक एक स्तन को अपने मुंह में लेकर भूखे बच्चे के समान चूसने लगे. कनिका भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. उसने अपने दोनों हाथ एक एक लंड पर रखे और उनके ऊपर हाथ चलने लगी. पहले से ही तने लंड अब फटने की कगार पर जा पहुंचे. कनिका ने दोनों को अपने मम्मों से अलग किया और आकाश के लंड को अपने मुंह में लेकर भूखी भिखारन की तरह चूसने लगी, फिर उसने आकार के लंड को मुंह में लिया और उसे भी चूसने लगी. कुछ देर यूँ ही वो बदल बदल कर लंड चूसती रही. पर आकार ने उसे रोक दिया.

आकार ने उसे सोफे पर लेटने के लिए कहा और उसके पैर फैलाकर उसकी चूत में अपना मुंह डालकर चाटने लगा. आकाश ने कनिका के चेहरे के दोनों ओर पांव रखते हुए उसे अपना लंड प्रस्तुत किया. कनिका ने उसे अपने मुंह में लिया और इस बार चाटते हुए चूसना भी शुरू किया. कमरे में इस समय वासना का उन्माद था. आकाश का लंड कनिका के मुंह में था तो आकार का मुंह कनिका की चूत की खुदाई कर रहा था.

परन्तु आकाश ने ये त्रिकोण को तोड़ दिया और अपने लंड को कनिका के मुंह से निकाला और उसने कनिका और आकार को शयनकक्ष में चलने के लिए कहा. वहां जाते ही आकाश ने कनिका को उसके मुंह पर बैठकर उसके लंड को चूसने के लिए कहा, जिसे 69 का आसन कहा जाता है. जब कनिका ने ये आसन लेते हुए आकाश का लंड चूसने लगी तो आकार ने उसकी उठी हुई गांड पर अपना ध्यान केंद्रित किया. उसकी उभरी हुई गांड के बीचों बीच बने सितारे को देखकर उसके मुंह में पानी आ गया. उसने अपना मुंह उस सितारे पर लगाया और अपनी जीभ से उसे चाटने लगा. इस आक्रमण से कनिका की गांड का छेद स्वतः ही खुलने बंद होने लगा.

उसकी जीभ उस कुलबुलाते छेद को अपनी नोक से छेड़ने लगी तो स्वाभाविक रूप से वो अब फ़ैल गया. आकार ने अपने हाथों से उसकी गांड के पाट खोलकर अपनी जीभ से धीरे धीरे अंदर विचरण करना शुरू किया. कनिका चिहुंक पड़ी. उसे अपने पिता की इस योग्यता का कई बार अनुभव हो चुका था और वो हर बार की तरह इस बार भी इस कला की प्रशंसा करने से नहीं चूकी.

“पापा, सच में आप जैसे गांड चाटते हो न, इतना मजा आता है कि मैं बता नहीं सकती. इतनी मीठी सी गुदगुदी होती है कि लगता है मैं स्वर्ग में हूँ.”

“तुम्हारी गांड है ही इतनी स्वादिष्ट कि कितना भी इसे चाटो, मन नहीं भरता. पर अब ये बताओ की तुम किसका लंड अपनी गांड में लेना पसंद करोगी?”

“पापा, इस बार तो आपका ही. ताऊजी, आप नाराज़ तो नहीं हो रहे हो?”

“अरे तुझसे मैं कभी नाराज़ हो सकता हूँ, आज नहीं तो कल सही. हम कहाँ जा रहे हैं?” आकाश ने उसे विश्वास दिलाया.

आकार: “तो फिर सही आसन लिया जाये?”

ये सुनकर आकाश सीधा लेट गया और उसका लंड ऊपर की ओर तन कर खड़ा हो गया. कनिका ने अपनी चूत को उसके लंड की सीध में लिया और उसके ऊपर बैठते हुए उसे निगल लिया. उसकी चूत इतनी रसीली हो चुकी थी की उसे पूरा लंड लेने में अधिक समय नहीं लगा. एक बार जब उसकी चूत में लंड अच्छे से जम गया तब आकाश ने उसकी कमर पकड़कर उसे आगे झुकाया जिससे उसकी गांड ऊपर उठ जाये. कनिका ने आगे झुककर आकाश के होंठों से अपने होंठ लगा दिए. और जब ये चुम्बन चल रहा था, तब आकार ने अपने लंड पर और कनिका की चूत में तेल अच्छे से मला और ऊँगली से ये तय किया कि कनिका की गांड उसके लंड के लिए तैयार थी.

इसके बाद आकार ने अपने लंड को कनिका की गांड पर रखा और दबाव दिया. उसका सुपाड़ा कुछ प्रतिरोध के पश्चात् गांड में प्रविष्ट हो गया. कनिका के मुंह से एक हल्की सी हूक निकली. पर आकाश के होंठ उसे अपने में बांधे हुए थे. आकार ने अपने दबाव को कम नहीं किया, लगातार वो अपने लंड को कनिका की गांड में बढ़ाता रहा. जब उसका लंड लगभग आधा अंदर चला गया तब आकार रुक गया. वो कनिका को कुछ समय देना चाहता था इस दोहरे हमले के द्वारा हो रहे किसी भी पीड़ा या असुविधा से अपने आपको को अभ्यस्त करने का. कुछ समय उसी प्रकार ठहर कर कनिका की प्रतिक्रिया को देखता रहा. जब उसे लगा कि कनिका को कोई परेशानी नहीं है, तो उसने दोबारा अपने लंड को अंदर धकेलना शुरू कर दिया. और कुछ ही समय में उसके लंड ने कनिका की गांड को पूरा भर दिया.

ये नया अनुभव कनिका की कल्पना के परे था. उसे आज अपनी माँ और ताईजी का इस दुहरी चुदाई से प्यार समझ आ रहा था. अगर दो लंड उसके अंदर सिर्फ ठहरे हुए इतना आनंद दे रहे थे, तो आगे आने वाले सुख का कोई पर्याय नहीं होगा.

“पापा, ताऊजी, अब आप मुझे चोदिये. पर प्लीज प्यार से. मुझे इस ऊंचाई से भी ऊपर जाना है. और मुझे विश्वास है कि आप दोनों मुझे आनंद का वो शिखर स्पर्श करवाएंगे जो मेरे स्वप्न में भी कभी नहीं आया होगा.”

आकाश अपने लंड को अब कनिका की चूत में एक सधी हुई लय में चलने लगा. आकाश और आकार ने वही प्रक्रिया अपनाई जो उन्होंने मेधा के लिए अपनायी थी. पहले आकाश अपने लंड से चूत पेलता, फिर आकार अपने लंड से गांड. ऐसा करने से कनिका के दोनों छेद और बीच की झिल्ली ने अपने आपको इसके अनुकूल ढाल लिया. और अब उसे और अधिक सुख की कामना होने लगी.

कनिका के बदलते भावों को देखकर दोनों भाइयों ने भी अपनी ताल बदली और अब वो एक लंड अंदर और एक बाहर करने लगे. गति सामान्य से कम रखी, जिसके कारण कनिका का रोम रोम प्रज्वलित हो उठा. उसने आकाश को गहरे चुम्बनों से लथपथ कर दिया. दोनों भाई इस प्रकार की चुदाई के प्रवीण महारथी थे. उन्होंने अपनी गाड़ियों के गियर बदले और अब एक साथ दोनों लंड अंदर बाहर विचरण करने लगे. कनिका स्वयं को भूल चुकी थी. उसका मस्तिष्क अब केवल उसकी चूत और गांड की भावनाओं पर ही केंद्रित था, मानो बाकी अंगों का कोई स्थान ही न हो. अन्य अंग जैसे शिथिल हो गए थे. कनिका की आँखों के आगे ब्रह्मांड के सभी तारे घूम रहे थे. अलग अलग चमक और अलग अलग रंग लिए हुए.

आकाश और आकार अब अपनी गति भी बढ़ा चुके थे, कनिका इस मंथन में पिसती हुई एक अकल्पनीय कामोन्माद से व्यथित थी. उसकी आँखों के आगे के तारे कभी झिलमिलाकर तो कभी बस यूँ ही ठहर कर उसे ब्रह्मांड की यात्रा में ले चले थे. दोनों भाई उसकी इस खोई हुई मति का पूरा लाभ उठा रहे थे और आप एक दूसरे के विपरीत दिशा में पूरी गति और शक्ति से लंड चला रहे थे. अचानक जैसे कनिका के आँखों के आगे से वो चमकती हुई वस्तुएं लुप्त हो गयीं और उसे अपने शरीर के निचले हिस्से में से कुछ अलग सा होता हुआ प्रतीत हुआ. उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया परन्तु निचले शरीर से स्त्राव रुक नहीं रहा था. उसे कुछ ज्ञान न था कि उसे क्या हो रहा है. वो एक झूले पर थी और कभी आगे तो कभी पीछे से कोई उसे धकेल रहा था.

आकाश और आकार ने कनिका के उन्माद और उत्सर्ग की इस अधिकता को समझ लिया और दोनों ने तेज और गहरे धक्कों के साथ कनिका के दोनों छेद अपने सफ़ेद रस से भर दिए. कनिका को ये लगा कि जैसे उसके सूखे निचले शरीर में किसी ने पानी से उसकी जलन दूर की हो. ये जल ठंडा भी था और गर्म भी. पतला भी, गाढ़ा भी. ऐसा क्या था जो उसकी भूख और प्यास दोनों मिटा रहा था. वो मूर्छा की स्थिति में भी उसके शरीर से बहते हुए रस के स्त्राव और उसमे प्रवेश करते हुए रस के मिलाप का अनुभव तो कर रही थी, पर वो कुछ भी समझ पाने की अवस्था में न थी.

वो आगे की ओर झुककर गिर गयी. आकाश ने उसकी कमर पकड़कर उसे संभाला और आकार ने अपने लंड को उसकी खुली फटी गांड में से धीरे धीरे बाहर खींच लिया. फिर वो हट कर खड़ा हो गया. आकाश ने कनिका की कमर पकड़कर एक कुलाटी लगाई और वो उसके ऊपर आ गया. दो तीन बार अपने लंड को चलाने के बाद उसने भी अपने लंड को बाहर निकला और आकार के पास खड़ा हो गया.

“लगता है इसका भी नीलम वाला ही हाल हुआ है, जब उसकी पहली बार डबलिंग की थी.”

“हाँ, बेटी माँ पर ही गई है. चलो इसके मुंह पर पानी छिड़ककर इसे इस संसार में लौटा लाते हैं.”

आकार ने पानी के कुछ छींटे कनिका के चेहरे पर मारे तो वो हड़बड़ाकर उठ गई.

“मैं कहाँ हूँ? कौन हो आप लोग? और ऐसे क्यों खड़े हो?”

दोनों भाई मुस्कुराते रहे. कनिका के मस्तिष्क में जब लहू प्रवाहित हुआ तो उसे जैसे सब याद आने लगा.

“पापा, ताऊजी. क्या सचमुच.”

दोनों भाइयों ने हाँ में सिर हिलाया.

“मैं मूर्ख थी जो इतने दिनों से इसे टाल रही थी. पर अब नहीं. मैं क्या सच में मर कर जीवित हुई हूँ?” कनिका ने दोनों हाथों से एक एक लंड पकडकर पूछा.

“लगता तो यही है. वेलकम बैक.”

कनिका बिना उत्तर दिए उन लौडों को चूसने लगी जिसने उसे ये असीम सुख दिया था, बिना इस विचार के कि वो इसके पहले किस गली से निकले थे.

**********

नीलम के बंगले में:

सुबह सभी लोग आराम से ही उठे. किसी को कोई जल्दी तो थी नहीं. कुछ लंड चाटे गए, कुछ चूतें चाटी गयी. कुछ चुदी तो कुछ अनचुदी ही नाश्ते के लिए आ गयीं. सब बड़े ही अनौपचारिक रूप में बैठे और नाश्ता किया. इसके बाद दिया ने जैसे बम्ब फोड़ा.

“कल जो फोन आया था, वो मेरी किट्टी की सहेली सबीना का था. उसे पता है कि हम लोग यहाँ हैं और उसने आने की जिद की है. शायद वो आने ही वाली हो कुछ देर में.” ये कहते हुए दिया ने सबीना के बारे में बताया कि किस प्रकार उसके जेठ के तीन लड़के उसके घर में रहते हैं और माँ बेटी को चोदते है.

“कह रही थी कि कल से उनके कॉलेज परीक्षा की तैयारी के लिए २ हफ्ते के लिए बंद हैं और वो तीनों अपने घर गए हुए है. इसीलिए वो यहाँ आ रही है.”

ये सुनकर जहाँ लड़कों की बांछे खिल गयीं वहीँ महिलाओं के चेहरे उतर गए.

“प्लीज, मैं उसे मना नहीं कर सकती हूँ. हम एक दूसरे के राज जानते हैं, और सब समझ सकते हो कि ये बातें बाहर जाने का क्या अर्थ है.” सबने सिर हिलाकर माना कि ये बहुत हानिकारक होगा.

“पर एक बात और है, जो सबको अटपटी और शायद बुरी लगे.”

“अब और क्या बचा है?” नीलम ने चिढ़कर पूछा.

“नीलम, प्लीज. मैं भी तुम्हारी तरह इस बात से अधिक खुश नहीं हूँ. मैंने सोचा था कि वो अपना मन बदल लेगी, पर उसने सुबह फिर आने की पुष्टि कर दी. रियली सॉरी।”

“ठीक है, भाभी. अब जो है सो है. आप कुछ कह रही थीं इस सबीना के बारे में.”

“हाँ, क्या है न वो गालियाँ बहुत देती है. क्यों न हम उसे फटाफट चुदवाकर भेज दें और फिर अपना आनंद लें. शाम वापिस घर लौट चलेंगे.”

सबने सलाह करके यही सही समझा की चारों लड़कों को उस पर छोड़ देंगे और फिर उसे भागने का प्रयास करेंगे. नाश्ते के बाद सब नहाने और तैयार होने के लिए चले गए.

नहाने के बाद सब लौटकर आये ही थे कि एक कार रुकने की आवाज़ आयी और फिर घंटी बजी.

दिया उठते हुए बोली, “सबीना ही होगी. इसे जल्दी भगाना होगा.”

दरवाज़ा खोलने पर एक अति सुन्दर, पर थोड़ी गुदाज मध्यम आयु की स्त्री ने प्रवेश किया और दिया के गले लग गयी और उसे चूमने लगी.

“दिया, दिया, दिया, मेरी प्यारी सखी. तू तो बड़ी निखरी हुई लग रही है. लगता है खूब चुदाई हुई है तेरी.”

दिया का चेहरा लाल हो गया.

“सबीना, आ जा अंदर. सबसे मिलती हूँ तुझे.”

दिया अंदर आयी और सबसे सबीना का परिचय कराया. लड़कों के मुंह से लार टपकने लगी. औरतों के मुंह पर कोई भाव नहीं थे.

“क्या हुआ सबीना, मेरी याद कैसे आ गई तुझे? और सना कहाँ है. मैं तो सोची थी कि तेरे साथ ही आएगी.”

अब सबीना ने जो बोलना शुरू किया तो सबके छक्के छूट गए.

“अरे यार, तू तो जानती है की मेरे मादरचोद जेठ के तीनों हरामजादे लौंडे इतने दिन से मेरे घर में पढाई के बहाने रुके हुए थे. पिल्ले साले पढाई न जाने कब करते थे, जब देखो तब मेरे और सना पर चढ़े रहते थे. सुबह उठते ही चूत और गांड मारकर भोसड़ी वाले लाल कर देते थे. और कॉलेज से लौटकर फिर पिल जाते थे. मेरी तो गांड का इंडिया गेट बना गए बहनचोद.”

सबकी इस बात पर हंसी छूट गयी, पर सबीना के चेहरे को देखकर सबने अपनी हंसी रोक ली.

“कल साले रंडी की औलाद बोले कि कॉलेज बंद है दो हफ्ते के लिए तो अम्मी ने बुलाया है. मैंने कहा कि रहने दो यहीं घर में रहकर पढाई करो तो बोले नहीं अम्मी कह रही थी कि दो हफ्ते उसकी चुदाई करने के लिए. कहने लगे बड़ी बेताब हो रही है. आखिर में न माने और चले गए माँ के लौड़े. और तो और भोसड़ी वाले सना को भी साथ ले गए. और वो भी बहन की लौड़ी बड़ी इठलाती हुई बाय अम्मी कहकर चली गई.”

“चल अच्छा है, अब तुझे दो हफ्ते तो आराम मिला. रोज़ रोज़ चुदने से तेरा हाल ख़राब हो गया होगा.”

“चुदवाने से भी कभी हालत खराब होती है. कल से चूत और गांड सूनी और सूखी है मेरी. मेरा चेहरा देख कैसा उतर गया है. मुझे तो वजन भी कम हो गया लगता है.”

दिया ने व्यंग से उत्तर दिया,”हाँ दिख तो रहा है की सूख गयी हो बिल्कुल।”

सबीना के कटाक्ष को समझा नहीं और अपनी बात फिर शुरू कर दी.

“फिर मुझे कल शाम को ध्यान आया कि तू नीलम भाभी के घर आयी हुई है, चुदाई के कार्यक्रम के लिए, तो मैंने भी अपनी चुदाई के लिए तेरे पास आने का तय किया. सुन, तेरे पास ये चार चार लौड़े है. कुछ देर चुदवा दे इनसे, तेरा बड़ा कर्म होगा. बड़ी दुआयें मिलेंगी.”

दिया ने कुछ सोचने का नाटक किया.

“ऐसा है सबीना. मुझसे तेरी ये हालत देखी नहीं जा रही.” फिर नीलम, प्रीति और रमोना की ओर देखकर. “क्यों न हम इस दुखी आत्मा को इन चारों के साथ एक ही बार में चुदवा दें जिससे इसकी तृप्ति हो जाये और फिर ये अपने घर सुकून से लौट सके.”

पहले निश्चित किये अनुसार सबने हामी भर ली.

सबीना ने दिया का चेहरा फिर चूम लिए.

“तेरी जैसी सहेली ऊपर वाला सबको दे. तुझे बड़ी बरक्कत मिलेगी.” ये कहते हुए सबीना खड़ी होकर अपने कपड़े उतारने लगी.

“यहाँ?” दिया आश्चर्य से पूछ बैठी.

“अरे अब तुझसे क्या छुपाना. तुम सब भी तो मिलकर चुदवाती हो.”

फिर हतप्रभ बैठे लड़कों को देखकर. “तुम भोसड़ी वालों को क्या में सोने से जड़ा न्योता भेजूं. आ जाओ जल्दी से. फिर न जाने कब मुझे लौड़े मिलेंगे.”

लड़कों में यकायक तत्परता आ गयी और सब पलक झपकते ही नंगे हो गए.

सबीना ने जब उन्हें देखा तो उसका मुंह खुला रह गया.

“क्या लौड़े हैं इन मादरचोदों के. अगर ये मुझे मिल जाएँ तो मैं उन तीनों हरामियों को वहीँ अपनी अम्मी की झांटों में लिपटे रहने के लिए कह दूंगी. दिया, क्या तुम सच में इस सबसे चुदवाती हो?”

दिया ने सिर हिलाकर हाँ कहा तो सबीना बोल पड़ी, ”तुम्हे किस्मत से ऐसे लौड़े मिले हैं. मैंने तो बस इनके सपने ही देखें हैं आज तक.”

चारों लड़कों ने अब तक सबीना को घेर लिया था.

“आंटी, आप मम्मी की दोस्त हो तो आपको खुश करना हमारा कर्तव्य है. आप विश्वास कीजिये कि आज की चुदाई के बाद आप हमारे सिवाय किसी से चुदवाने नहीं जाएँगी.”

ये कहते हुए आलोक ने सबीना के कन्धों पर हाथ रखा और उसे नीचे बैठा दिया. अब सबीना की आँखों के सामने चार विशाल तने हुए लंड थे.

“आंटी, देखें आप कितना अच्छा लंड चूस सकती हैं. चिंता मत करना, हम झड़ने वाले नहीं हैं आपको चोदे बिना.”

सबीना भूखी शेरनी की तरह एक एक करके लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. फिर हितेश उसके पीछे गया और उसकी गांड पर हाथ रखकर उसे ऊपर घोड़ी की अवस्था में लेकर छोड़ दिया. सबीना के मुंह से लंड नहीं निकला और वो एक विक्षिप्त स्त्री की तरह लौडों को चाट रही थी. अन्य सभी स्त्रियां इस खेल को देख रही थीं. वो सबीना की प्यास को समझ सकती थीं.

हितेश ने घुटनों के बल बैठकर सबीना की चूत में एक ही झटके में अपना पूरा लंड पेल दिया. सबीना चीख उठी पर उसने दोबारा लंड चूसना शुरू कर दिया. हितेश ने कोई दस बारह धक्के लगाए और खड़ा हो गया. इस बार पुनीत ने अपने लंड को अंदर डाला और उसी प्रकार दस बारह धक्के मारकर हट गया. सचिन ने अब अपने लंड को अंदर डाला तो सबीना की ऑंखें निकल गयीं. उसके मुंह से लंड छूट गया.

“ये लंड है या मूसल?”

‘आंटी, लंड ही है. अभी तो इसने आपकी गांड की भी सैर करनी है. आप लंड चूसो.” सचिन ने उसे आज्ञा दी.

सबीना फिर से लंड चूसने में व्यस्त हो गई. सचिन ने दस बारह धक्कों के बाद आलोक के लिए स्थान खाली किया. सबीना के मुंह में अब हितेश का लंड आया और उसमे से उसे अपनी चूत की भी खुशबु आयी. पर उसने बिना रुके अपना काम चालू रखा.

एक बार इस क्रम के बाद अब दूसरा राउंड शुरू हुआ. इस बार लड़कों ने सबीना की चूत में ज्यादा देर तक, लगभग ५ मिनट तक एक लड़के ने चुदाई की. रस से लथपथ सबीना की चूत अब बह सी रही थी.

और यही कारण था कि जब तीसरा राउंड आया तो हितेश ने अपने लंड को सबीना की गांड पर सेट किया और एक लम्बा शॉट मारा. सबीना की रूह काँप गई. उसके मुंह से लंड छूट गया और उसकी दर्द भरी चीख ने चारों औरतों के पसीने छुड़ा दिए. पर हितेश ने अपना लक्ष्य साधा हुआ था और उसका अपने पथ से हटने का कोई इरादा नहीं था. वो लम्बे और तेज धक्कों के साथ सबीना की गांड को लगभग ५ मिनट मारने के बाद ही अलग हुआ.

पुनीत ने सबीना की खुली हुई गांड पर थूका और अपने लंड को लगाकर उसी बेदर्दी से धक्का मारा जैसा कि हितेश का था. इस बार सबीना भी तैयार थी और उसने लंड चूसना बंद नहीं किया. अब गांड जब खुल गई थी तो उसे भी मजा आने लगा था. पुनीत ने ५ मिनट ले पश्चात् सचिन के लिए स्थान छोड़ दिया.

“आंटी, जिसे आप मूसल कह रही थीं अब आपकी गांड की ओखली में जाने वाला है.”

सबीना ने मुंह से लंड निकले बिना अपनी स्वीकृति दे दी. और सचिन ने कुछ दया भाव रखते हुए उसकी गांड में धीरे धीरे पूरा लंड पेल दिया.

“बेटीचोद, ये लौड़ा तो मुझे दस्त लगवा देगा. थोड़ा धीरे पेलना भोसड़ी वाले. तेरी माँ की गांड नहीं है ये.”

सचिन ने कुछ समय तो उसकी बात को रखा पर जैसे ही उसे आवागमन में आसानी होने लगी, तब उसने पूरा लंड को बाहर खिंचा और एक निर्मम धक्के के साथ पूरे लंड से गांड फाड़ दी. सबीना इस बार छटपटा उठी पर तीन जोड़े हाथ उसे थामे हुए थे और वो उनकी गिरफ्त से न छूट पाई. अंततः उसकी गांड इस लंड के आकार से आदी हो गई. सचिन के जोरदार और पाशविक धक्कों ने सबीना की गांड के वो सब छेद खोल दिए थे जो इतने सालों से बंद थे. ५ मिनट होने के बाद सचिन ने अपने लंड को अलग किया. आलोक ने अपना स्थान लिया. और उधर हितेश ने गांड से निकले हुए लंड को सबीना के मुंह में पेल दिया. अगर सबीना को कोई आपत्ति थी भी तो उसने दर्शाई नहीं. आलोक ने सबीना की गांड को ५ मिनट मारने के बाद अपना स्थान छोड़ दिया.

उसने पीछे मुड़कर अपनी माँ की ओर देखा तो दिया ने दो हाथों के संकेत से डबल चुदाई के लिए बताया। आलोक ने अपने साथियों को ये चेताया. इस बार सबने अपने लंड सबीना से साफ करवाने के बाद उसे खड़े होने के लिए कहा. सबीना काँपते पैरों पर खड़ी हुई.

सचिन लेट गया और पुनीत ने सबीना को उसके लंड पर सवार होने का आदेश दिया. सबीना समझ गई कि अब उसके साथ क्या होने वाला है. उसने दिया की ओर देखा पर दिया दूसरी ही ओर देख रही थी. सबीना ने सचिन के लंड पर सवारी पूरी की. इतने में दो हाथों ने उसके कन्धों को दबाकर आगे की ओर झुका दिया. और उसे अपनी गांड के ऊपर फिर से दबाव लगा और पक्क्क की आवाज़ से एक लौड़ा उसकी गांड में घुस गया.

उसे पीछे देखकर ये जानने का भी मौका नहीं मिला कि गांड में किसका लंड था क्योंकि पुनीत ने सामने आकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया और ऐसे धक्के लगाने लगा जैसे कि वो मुंह न हो चूत हो. लैंड उसके गले को छू रहा था. अचानक उसकी आँखों के सामने आलोक आया और उसने भी अपने लंड को उसकी आँखों के आगे लहराया. पुनीत ने हटकर आलोक को उसकी मुंह की चुदाई करने का अवसर प्रदान किया. अब ये तो साफ हो गया कि हितेश उसकी गांड में था. हुए दोनों मुश्तंडे बेरोकटोक अपनी पूरी ताकत से उसके दोनों छेदों को दुह रहे थे. अभी तक जिन लौडों से सबीना चुदी थी वो बहुत हद तक सामान्य थे. पर अब उसकी कुटाई सही तरह से ऐसे लौंड़ों से हो रही थी जो ऍम आदमी की नसीब नहीं होते.

वो इस समय एक अलग ही दुनिया में थी. उसने कभी इस निर्ममता और इतने सुख की कल्पना भी नहीं की थी. अपने भतीजों से चुदवाने में जो मजा था आज वो क्षीण हो चुका था. सचिन और हितेश उसकी ऐसी चुदाई कर रहे थे कि किसी की भी रूह कांप जाती. अचानक हितेश ने अपना लंड बाहर निकाला और सबीना के सामने आ खड़ा हुआ. कुछ ही पलों में गांड के खालीपन को आलोक ने अपने लंड से भर दिया और उसी तेजी और ताकत से चुदाई चालू रही. फिर तो क्या था, यही एक क्रम बन गया. एक लंड निकलता और दूसरा उसका स्थान ले लेता. निकला हुआ लंड अपना स्थान सबीना के मुंह में बनता. बस यही एक कमी थी कि सचिन का स्थान नहीं बदल रहा था.

सबीना झड़ते हुए अब बेजान हो चुकी थी. और यही समय था जब उन दरिंदों ने उसे ऐसा खेल दिखाया कि सब भौचक्के रह गए. इस बार जब हितेश के हटने का समय हुआ तो वो हटा नहीं बल्कि उसने थोड़ी जगह बनाई और आलोक ने भी अपने लंड को सबीना की गांड में डाल दिया. पुनीत से सबीना के मुंह में लंड डालकर उसके सिर को दबा रखा था, इसीलिए सबीना कुछ भी न कर सकीय. उसकी चूत में एक और गांड में दो लंड थे. पर ये अधिक समय तो हो नहीं सकता था, इसीलिए हितेश ने अपने लंड को निकाल लिया और सबीना के मुंह में पेल दिया.

ये खेल तब तक चला जब तक हर लड़का अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच गया. पर जैसे ही उसे लगा कि उसका होने वाला है, वो अलग होकर खड़ा हो गया. कुछ ही समय में तीनों हटकर खड़े थे. सचिन ने सबीना को पलटी मारते हुए नीचे किया और १० १५ भयंकर धक्के मारकर वो भी हट गया. चारों ने सबीना के इर्दगिर्द एक गोला बनाया और अपने लंड मुठियाने लगे. लगभग बेसुध पड़ी सबीना एक मूर्छित सी अवस्था में थी. पर उसकी आंख अचानक ही खुल गई, जब उसे अपने ऊपर पानी गिरता हुआ अनुभव किया. पर उसे कुछ ही क्षणों में ये ज्ञात हो गया कि ये पानी साधारण पानी नहीं बल्कि लौडों की टूटियों से निकलता कामरस है जो उसके चेहरे और स्तनमण्डल पर बहाया जा रहा है.

जब लड़के झड़ चुके तो वो हटकर एक सोफे पर बैठ गए और आपस में बातें करने लगे. ये विदित हुआ कि सब सबीना से इस तरह अपने आप आने पर गुस्सा थे और उसे सबक सीखना चाहते थे. उन्हें सबीना को चोदने में कोई आपत्ति नहीं थी पर प्रीति और रमोना जो पहली बार आये थे उनके लिए ये गलत था. चारों ने मिलकर उसे और सबक सीखने का प्रण किया.

कुछ देर में सभीना के शरीर में हलचल हुई तो पुनीत ने उसे सहारा देकर उठाया और उसे बाथरूम की ओर ले चला. अन्य ३ भी पीछे हो लिए.

पुनीत ने सबीना को बाथ टब में लिटाया और कहा, “आंटी, हम सबके लंड का पानी एक बार अपने मुंह में ले लो.”

अर्धमूर्छित सी सबीना मान गई. पुनीत ने अपने लंड को उसके मुंह में डाला और अपना पेशाब उसके मुंह में छोड़ने लगा. सबीना आनाकानी करने लगी पर बाक़ी तीन लड़कों ने उसके हाथ पैर पकड़ लिए. फिर किसी ने उसके चेहरे तो किसी ने उसके मम्मों पर पेशाब करना शुरू किया. जब सब हटे तो सबीना के मुंह और पूरे शरीर पर पेशाब लगी हुई थी.

सचिन ने टब में पानी चलते हुए कहा, “आंटी, अगर आप हमें अलग से बुलातीं तो भी हम आपको पूरा मजा देते. पर अपने हमारे घरेलू उत्सव में इस प्रकार नहीं आना चाहिए था.”

सबीना को अपनी गलती का अहसास हुआ. उसने कहा,”मुझे माफ़ करो. पर मुझे एक पल भी इस चुदाई और तुम्हारे इस आखिरी खेल से परेशानी नहीं हुई. मैं चाहूंगी की तुम चारों जल्द से जल्द मेरे घर आकर मुझे इसी प्रकार से चोदो। मैं दिया से भी माफ़ी मांग लूंगी.”

ये सुनकर लड़के सबीना को स्नान के लिए छोड़कर लौट गए.

कुछ समय बाद सबीना बाहर निकली और अपने कपड़े पहनने लगी. उसके बाद वो दिया के पास गई और उसके दोनों हाथ पकड़ कर बोली, “दिया, मुझे माफ़ करना, मैं तुम लोगों के कार्यक्रम में इस प्रकार से घुस गई. मैं ये अवश्य कहूँगी कि जो आज सुख और जो पाठ इन लड़कों ने मुझे दिया है, उसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है. मैं यही कहूँगी, कि हमारी दोस्ती की खातिर, उन लड़कों को मेरे घर आने की इज़ाज़त दे दो. सच में मेरी ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई.”

दिया ने उसे विश्वास दिलाया कि वो नाराज़ नहीं है और चारों से सबीना की चुदाई नियमित रूप से करने के लिए कहेगी. सबीना ने उसके सर को चूमा और अपने घर चली गई.

कुछ देर में खाने के बाद चुदाई का आखिरी दौर चालू हुआ. और इस बार चारों महिलाओं की डबल चुदाई की गई. फिर शाम ६ बजे नीलम ने घर को लॉक किया और सब अपने घर चले गए.

क्रमशः
 
सातवां घर: वर्षा और समीर नायक

अध्याय ७.२

बेंगलुरू का एक घर:

कमलेश अपनी सेमेस्टर समाप्ति की अंतिम क्लास करने के बाद ४ बजे घर पहुंचा. आज वो अपनी बहन काम्या के साथ संभ्रांत नगर जाने वाला था, रात १० बजे की ट्रेन से. काम्या की छुट्टी २ बजे ही हो गई थी और वो घर आ गई थी सामान लगाने के लिए. अब ६ सप्ताह का अवकाश था और फिर उनका अंतिम सेमेस्टर शुरू होना था. दोनों भाई बहन को अच्छी नौकरी मिल गई थी. काम्या को तो उनके ही शहर में मिली थी, पर कमलेश को कोई १०० किमी दूर दूसरे शहर में. पर वो भी अपने ही शहर के लिए प्रयास कर रहा था.

उसने अपने घर का दरवाजा खोला तो शयनकक्ष से कुछ आहों और सीत्कार के साथ थप थप की ध्वनि सुनाई पड़ी. कमलेश के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई. घर को लॉक करने के बाद वो सोच में पड़ गया. लगता है काम्या अपने बॉयफ्रेंड को साथ ले आयी थी. सामान्य रूप से वो ऐसे समय में बाहर चला जाता था कुछ समय के लिए, पर उसे बाथरूम जाना अति आवश्यक लग रहा था. इसीलिए उसने दबे पांव कमरे में प्रवेश किया और बाथरूम की ओर जाने लगा.

उसने एक चोर भरी आंख से बिस्तर की और देखा तो उसे आश्चर्य हुआ. ये काम्या का बॉयफ्रेंड नहीं था. एक अधेड़ उम्र का आदमी इस समय काम्या को चोद रहा था. कमलेश बाथरूम में गया और अपना काम समाप्त करने के बाद उसने अपने कपडे उतार कर खूंटी पर टांग दिए. फिर एक छोटा सा स्नान किया और वैसे ही नंगा कमरे में चला आया. उस आदमी ने कमलेश को देखा और मुस्कुरा दिया. कमलेश ने अपने लंड को काम्या के मुंह से लगाया और काम्या ने निसंकोच उसे एक प्यार भरी दृष्टि से देखते हुए लंड को अपने मुंह में निगल लिया.

“आप कब आये, पापा?” कमलेश ने उस आदमी से पूछा.

“बस ये समझो कि काम्या और मैं एक साथ ही पहुंचे थे घर.” उस आदमी ने अपनी चुदाई के क्रम को बिना तोड़े हुए उत्तर दिया.

“पहले क्यों नहीं बताया. हम तो आज घर जा रहे थे रात को. पता होता तो एक दिन और रुक जाते.” कमलेश अपने लंड को काम्या के मुंह में चलाते हुए बोला।

“ऐसे ही कार्यक्रम बन गया. अब दो हफ्ते कोई काम नहीं है खेतों में. मैंने भाईसाहब से कल बात की तो उन्होंने घर आने के लिए कहा. कुछ समझौते २ सप्ताह बाद ही होने हैं. और भाईसाहब चाहते हैं की सुपरवाइसर पर कुछ जिम्मेदारी छोड़ी जाये हर काम मैं ही न करूँ।”

“आप दोनों मेरी चुदाई कर रहे हो या अपनी मीटिंग? पापा, अपने तो बहुत ही धीमा कर दिया सब कुछ.” काम्या कुछ गुस्से से बोल पड़ी.

“बस एक बात और, मैं गाड़ी और ड्राइवर दोनों लाया हूँ, हम लोग खाने के बाद निकलेंगे, साथ में.”

ये कहकर सब लोग चुदाई में व्यस्त हो गए.

७ बजे वे सब घर बंद करके निकल पड़े. पास ही के एक रेस्त्रां में खाना खाने के बाद वो संभ्रांत नगर के लिए चल पड़े. रात के २ बजे तक पहुँचने का अनुमान था. रास्ता बहुत अच्छा था और १० बजे के लगभग कमलेश और काम्या सो गए. संतोष ड्राइवर के साथ बैठा हुआ बात करता रहा. यात्रा बहुत शांति से निकल गयी और रात के २.३० बजे, वे सब घर पहुँच गए. वहां पहुंचकर संतोष ने ड्राइवर को एक बोतल शराब की दी और काफी सारा चिकन वगैरह जो उन्होंने बीच में रूककर लिया था. बचे हुए खाने को, जो अभी भी बहुत था, लेकर वे सब घर के अपने हिस्से में चले गए. कमलेश ने सामान निकाला और साथ में अंदर चला गया. कुसुम बहुत देर से प्रतीक्षा कर रही थी.

************

कुसुम का घर:

अंदर जाने के बाद चारों एक दूसरे के गले लग गए. पूरा परिवार बहुत दिन बाद साथ में था. सब लोग बहुत भावुक हो चले थे. कुसुम की तो आँखों से आंसू रुक ही नहीं रहे थे. ये देखकर काम्या और कमलेश ने उसे आगे और पीछे से पकड़कर चूमना शुरू कर दिया और कुछ कुछ गुदगुदी करने लगे. कुसुम के आंसू थम गए और उसकी खिलखिलाहट निकल पड़ी. फिर कमलेश ने कुसुम को गोद में उठाया और उसे उठाकर अंदर ले गया और सोफे पर लिटा दिया और गुदगुदाने लगा.

“बस कर, दुष्ट. मेरी जान लेगा क्या?”

कमलेश ने गुदगुदाना बंद किया और ऊपर उठकर कुसुम के होंठ चूम लिए.

“हम सबकी जान तुम में है, माँ. तुम्हारी जान क्यों लेंगे. तुम्हारी तो आज रात भर चूत और गांड लेंगे. क्यों पापा?”

“और क्या? इतने दिन हो गए हम सबको एक साथ मिले हुए. आज तो इसे प्यार से भर देंगे.”

“और मेरा क्या होगा, पापा?” काम्या ने झूठा स्वांग रचा.

“अरे बिटिया रानी. तू तो हम सबकी राजकुमारी है. रानी की सेवा हो तो राजकुमारी कैसे उससे वंचित रहेगी? और सुनो, भाईसाहब ने कल की छुट्टी दे दी है तुम्हारी माँ को. मुझे कुछ समय के लिए बुलाया है, काम की प्रगति समझने के लिए, पर कहा है कि कुसुम अपने बच्चों के ही साथ रह ले आज. और कल सबको साथ ही बुलाया है.”

ये सुनकर कमलेश ने फिर से कुसुम को गुदगुदी की, “देख ले माँ, अब तो तेरा पूरा ध्यान हम पर ही रहना चाहिए. बड़े दिन बाद मिली हो, तो आज पूरी रात और दिन तुम्हारा भोग लगाएंगे.”

“मैंने कब मन किया है. देख मुई कैसे बह रही है शाम से जब से पता लगा कि तुम तीनों आ रहे हो.” ये कहकर कुसुम ने अपने गाउन को ऊपर उठाया और अपनी चूत की फांके फैलाकर दिखाया। सच में चूत इतनी गीली थी कि जैसे कोई झरना हो.

कमलेश ने अपनी नाक उसपर लगाकर एक गहरी सांस ली.

“उन्न्ह क्या मदमस्त खुशबू है माँ तेरी चूत की. सच में इतने दिनों से इसके लिए तड़प रहा था. इस बार तू हमारे साथ चलना कुछ दिनों के लिए.”

“वो बाद में देखेंगे, अभी तो ये देख कि उस कमीनी का बहना कैसे बंद होगा.” कुसुम ने मचलते हुए कहा.

तभी संतोष बोल पड़ा, “अरे सब कुछ यहीं करना है क्या. चलो बिस्तर पर. मैं भी तो अपनी राजकुमारी का स्वाद ले लूँ, वहां जल्दी में बस चोदकर ही निकल लिए थे.”

ये सुनकर सबने सामान उठाकर अपने अपने कमरे में रखा. काम्या और कमलेश का कमरा एक ही था. संतोष ने अपने और कुसुम के कमरे में अपना बैग रखा और बाथरूम में घुस गया. मुंह हाथ धोने के बाद बाहर आया तो अभी तक कमलेश और काम्या नहीं आये थे.

“कुछ पीयेगी?”

“जो तुम पिला दो.”

संतोष ने बैग में से एक बोतल निकाली और किचन से दो ग्लास और खाने का सामान ले आया. इसके बाद संतोष ने दोनों के लिए पेग बनाया और पीने लगे. तभी कमलेश और काम्या भी आ गए. दोनों ने मुंह हाथ धोकर अपने कपड़े बदल लिए थे. शराब देखकर कमलेश के मुंह में पानी आ गया. संतोष ने उसके भाव देख लिए और संकेत में पूछा. कमलेश ने हामी भरी.

संतोष: “तू भी लेगा क्या कमलेश?”

कमलेश: “जी, पापा. और अगर आज्ञा हो तो काम्या भी थोड़ी सी ले लेगी.”

कुसुम: “ये क्या कर रहे हो. बच्चों को ये सब क्यों पिला रहे हो?”

संतोष: “अरे कुसुम, थोड़ी पीने में कोई बुराई नहीं होती. बस आदत नहीं होनी चाहिए. और इससे ये भी होगा कि अगर कोई पिला भी देगा तो इन्हें अधिक असर नहीं होगा.”

कुसुम: “अब आप जानो और आपका काम. पर मुझे ये ठीक नहीं लगता.”

संतोष: “तेरी चूत के रस से अधिक नशा नहीं है इसमें.”

कुसुम को छोड़ तीनों हंस पड़े. अंत में कुसुम ने भी मजाक को समझा और उनकी हंसी में जुड़ गई.

“माँ, अब भी बह रही है, या कुछ रुकी?” कमलेश ने कुसुम ने हँसते हुए पूछा.

“कैसे रुकेगी, जब तक रोकने के लिए कोई नीड़ नहीं डालेगा.”

“दिखा तो सही.”

पर इस बार कुसुम ने केवल अपनी नाइटी नहीं उठाई, बल्कि खड़े होकर पूरी ही उतार दी. उसका नंगा सांवला शरीर कमरे के रौशनी में नहा रहा था. उसने अपने दोनों पांव फैलाकर अपनी चूत की फांके खोलीं तो उसपर चमकती नमी किसी मोती की बूंदों के सामान चमक रही थीं. उसने अपनी चूत के ऊपर हाथ चलते हुए अपनी ऊँगली अंदर डाली और फिर उसे निकालकर अपने मुंह में लेकर चाट लिया.

“हम्म्म, अभी तक तो बहे जा रही है.”

कमलेश को अब किसी और निमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. वो वैसे भी कई दिनों से अपनी माँ से दूर था और आज उसने इस दूरी को समाप्त करने का प्रण लिया था. उसके कपड़े पलक झपकते ही एक ओर जाकर गिर पड़े. उसने अपने कदम बढ़ाये और कुसुम के सामने घुटनों के बल बैठकर, उसके नितम्बों को अपने हाथ में लिया और अपना मुंह उसकी बहती हुई चूत के मुहाने पर रह कर जोर से मुंह से खींचा जैसे आम को चूसते है. कुसुम का शरीर छटपटा गया. उसकी चूत ने ये जान कर कि उसकी देखभाल करने कोई आ गया है, स्वागत में और ढेर सारा रस उगल दिया. कमलेश ने इसे भी अमृत समझ कर सेवन किया.

कमलेश अब खड़ा हो गया और उसने कुसुम को बहुत प्यार के साथ बिस्तर पर लिटाया, कुछ इस प्रकार कि उसके पांव नीचे झूल रहे थे और कूल्हे बिस्तर के कोने पर थे. इस प्रकार की स्थिति ने वो अब उसके सामने बैठकर मन भर कर अपनी माँ की चूत से प्यार दुलार कर सकता था. कनखियों से उसने देखा कि काम्या ने भी अपने वस्त्र निकाल दिए थे. और ये समझा जा सकता था कि उसके पिता भी पीछे नहीं रहे होंगे. उसका अनुमान सही सिद्ध हुआ जब काम्या भी कुसुम के बगल में उसी आसन में आ लेटी और उसने अपने बगल में अपने पिता की उपस्थिति अनुभव की.

“पापा, आपको किसकी चूत अधिक मीठी लगती है.”

“बेटा, अभी तू इतना बुद्धिमान नहीं हुआ कि मेरी लड़ाई लगवा सके. जो मेरे सामने होती है, मुझे वहीँ मीठी लगती है. क्यों काम्या?”

“पापा, इसकी बातों में मत पड़ना. पता नहीं क्यों इसे अब चुदाई के समय बातें करने की नयी आदत पड़ गई है.”

सब हंसने लगे और कमलेश ने कुसुम की बहती चूत के झरने में अपना मुंह डाला और पीने में जुट गया. एक बार अपनी प्यास बुझाने के बाद उसने चूत को बहुत प्यार से चाटने का कार्यक्रम शुरू कर दिया. संतोष तो पहले ही काम्या की चूत को चाटकर उसे उकसा रहा था. कुसुम ने अपने एक हाथ से काम्या के मम्मे पकडे.

“भरने लगे हैं तेरे ये मम्मे।”

“दिन रात आपका लाडला जो चूसता और दबाता रहता है. और तो और अविनाश (काम्या का बॉयफ्रेंड) भी अब जब अवसर मिले इनसे खेलता है.”

“कैसा लड़का है ये अविनाश?”

“ठीक है, टाइम पास के लिए. चोदना नहीं आता उसे ढंग से. पर चूत और गांड चाटना सीखा दिया है मैंने. और तो और कई बार तो कमलेश के चुदवाने के बाद भी मैं उससे अपनी चूत चटवाई हूँ. उसे पता भी नहीं लगा कि वो केवल मेरा नहीं कमलेश का भी पानी पी रहा है.”

“ये गलत है, काम्या. इस प्रकार किसी को धोखा नहीं देते. आगे से सफाई करने के बाद जाया कर. और अगर उसके प्रति गंभीर नहीं है, तो उसे छोड़ दे. किसी की भावनाओं से नहीं खेलते.”

“अब कौन बातें कर रहा है?” कमलेश ने कुसुम की चूत से सिर उठाकर पूछा.

“उई माँ. पकड़ी गई.” काम्या बोल पड़ी.

“हम इतने दिन बाद साथ हैं, इसीलिए बातें समाप्त नहीं हो रहीं. कुछ ऐसा करें कि बोलती बंद हो जाये.” संतोष ने प्रस्ताव रखा.

“ठीक है पापा, पर जब तक मेरा मन माँ के रस से भर नहीं जाता मैं और कुछ भी नहीं करूँगा.” ये कहते हुए कमलेश ने कुसुम की चूत की फाँको को फैलाया और अपनी जीभ से अंदर का स्वाद लेने लगा.

देखा देखी संतोष ने भी यही किया पर काम्या बीच में टोक दी.

“पापा, मुझे आपका लंड चूसना है अब. वहां घर में सीधे चुदाई पर आ गए थे. पर आपका लंड पीने का बहुत मन है.”

संतोष ने बेमन से अपना चेहरा काम्या की चूत से अलग किया और खड़ा हो गया. काम्या बिस्तर पर बैठ गई और उसने संतोष के लंड को मुंह में लेकर चाटने और चूसने का कार्यक्रम शुरू कर दिया. कमलेश ने कुसुम की चूत में अपनी जीभ की बढ़त जारी राखी और अब वो भग्नाशे पर भी केंद्रित हो गया. हल्के हाथों से उसे सहलाते हुए उसने उसे बीच बीच में मसलते हुए कुसुम की चुदास को और भड़का दिया, पर अति तो तब हुई जब उसने कामरस से भीगी एक ऊँगली कुसुम की गांड में डाल दी. ऊँगली के अंदर जाते ही कुसुम का शरीर अकड़ गया और वो भरभरा कर झड़ गई. उसके मुंह से निकलती सिसकियाँ और दबी हुई आनंद की चीखें उसके इस कामोत्कर्ष की साथी थीं.

संतोष का भी लंड अब भली भांति तन चूका था. इस बार भी वो काम्या के मुंह में नहीं झड़ना चाहता था. उसने काम्या को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसके पैरों के बीच स्थान बनाते हुए उसकी चूत पर अपना लंड रखा.

“पापा, इस बार देर तक चोदना. और जोर जोर से चोदना।’

“जैसी मेरी राजकुमारी चाहे.” ये कहते हुए संतोष ने एक ही झटके में अपने लंड को काम्या की गर्म चूत में उतार दिया. काम्या की एक संतुष्ट कराह निकली.

जब कुसुम कुछ शांत हुई तो संतोष से बोली, “आपका बेटा बहुत शरारती हो गया है. माँ की गांड में ऊँगली करने लगा है.”

संतोष ने भी उसी मजाक में उत्तर दिया, “जहाँ उसका लंड होना चाहिए, वहाँ ऊँगली कर रहा है. शरारती नहीं मुझे तो बेवकूफ लगता है.”

अब माँ की ममता जाग गई, “ख़बरदार, जो मेरे बेटे को बेवकूफ कहा तो. ये गांड जब वो चाहे तब मार सकता है. हैं न कमलेश?”

“बिल्कुल, माँ की गांड में जो मजा है वो कहीं और नहीं.”

“ला बेटा, अपना लंड ला, मुझे थोड़ा इसका स्वाद लेने दे. फिर एक बार मेरी चूत में डालकर मेरी प्यास मिटा दे.”

कमलेश खड़ा हो गया और कुसुम ने बैठते हुए उसके लंड को अपने मुंह से प्यार करना शुरू कर दिया. कमलेश का जवान लंड वैसे ही तना हुआ था, उसकी माँ के परिश्रम ने उसे फटने की स्थिति में ला दिया.

“माँ अब और नहीं, अब मैं आपको चोदना चाहता हूँ. इतने दिन से आज की प्रतीक्षा में था.”

“आ जा मेरे लाल.” ये कहकर कुसुम बिस्तर पर फ़ैल गयी और अपने पांव फैलाकर अपनी चूत को अपने हाथों से खोल दिया.”

कमलेश ने अपना लंड ऊपर रखकर, अपनी माँ को प्यार से देखते हुए एक ही धक्के में अपने लंड को अपने जन्म स्थान में डाल दिया.

“माँ, सच में तेरी चूत जैसा सुख कोई और नहीं देता मुझे.”

“कितनी चोद ली हैं तूने?”

“अरे माँ, इसकी बड़ी सारी गर्लफ्रेंड हैं. और तो और इसने कई आंटियों को भी अपना दोस्त बनाया हुआ है. हर दूसरे दिन किसी न किसी को चोदकर ही आता है.”

“सच बोल रही है ये?” कुसुम ने पूछा.

“बात मत करो, माँ. इतने दिन बाद नीचे आयी हो, मजा करो.” ये कहकर कमलेश अपने लंड की पूरी लम्बाई से कुसुम को चोदने लगा. साथ में उसके पिता भी उसकी बहन को उसी शक्ति से चोद रहे थे.

यात्रा की थकान और रात का ढलता समय संतोष पर अब दिखने लगा था. उसके धक्कों की तीव्रता कम हो चली थी. फिर जैसे ही काम्या अपनी योनि को संकुचित करने लगी, उसके शरीर ने उसका साथ छोड़ दिया और वो काम्या की चूत में झड़ गया. काम्या ने उठकर संतोष के लंड को मुंह से साफ किया।

“पापा, आपके लंड का स्वाद मेरी चूत से निकलकर बहुत स्वादिष्ट हो जाता है.”

उधर, अब कमलेश से भी ठहरना भारी पड़ रहा था.

“बेटा, अगर होने वाला है तो रोक मत. पूरा दिन पड़ा है हमारे पास और इतने दिन है.”

ये सुनकर कमलेश ने रुकने का प्रयास छोड़ दिया और उसने भी कुसुम की चूत को अपने रस से लबालब कर दिया.

कुसुम ने उठकर उसके लंड को चाटकर साफ किया और चूम लिया.

फिर वो काम्या की ओर मुड़ी और काम्य के मुंह पर अपनी चूत रखकर काम्या की चूत से अपने पति का अंश पीने लगी. काम्या ने भी कुसुम की चूत से अपनी भाई के रस को पिया और फिर दोनों माँ बेटी सीधी होकर एक दूसरे से लिपटकर चूमा चाटी करने लगीं.

संतोष और कमलेश ने अपने लिए एक पेग बनाया और एक ही घूँट में पी कर लेट गए. कमलेश ने कुसुम को बाँहों में ले लिया और संतोष ने काम्या को. कुसुम में नींद में जाने के पहले घड़ी देखी तो सुबह के ६ बजने को थे. कुछ ही समय में वे सब निद्रा में लीन हो गए.

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वर्षा का घर:

जहाँ कुसुम के घर में लोग सोने लगे थे, यहाँ घर में एक एक करके सब उठ रहे थे.

सभी अपने कमरों से निकलकर बैठक में आ गए. सुलभा और अंजलि ने सबके लिए चाय बनाई और थोड़ा कुछ हल्का नाश्ता. पूरा नाश्ता तो ८ बजे के बाद ही होना था. समीर, पवन और जयंत समाचार पत्र पड़ने में व्यस्त थे. राहुल बैठ कर कुछ हिसाब देख रहा था. फिर वो उठकर सबके बीच में बैठ गया.

“मैंने हिसाब देखा है. मुझे लगता है कि चूँकि इस साल हमें अच्छा लाभ मिलने वाला है, तो क्यों न हम अपने कामगारों के लिए कुछ अच्छा बोनस दे दें. पर इसे समय पर देना भी आवश्यक है.”

“तुम्हारे गणित से कितना बोनस देना ठीक है.?

“मैंने इसे तीन भागों में बाँटा है. एक नगद बोनस, जो उनके बैंक में जायेगा. दूसरा एक जीवन बीमा, जिसकी हर साल हम भरपाई करेंगे, जब तक वो हमारे साथ रहेंगे. और तीसरा एक स्वास्थ्य बीमा, जो सबको कम से कम २ लाख तक का खर्चा वहन करेगा.”

“और इसमें खर्चा कितना आएगा?”

“मैं नगद में २ महीने का वेतन देना चाहूँगा। इसमें कुल मिलकर लगभग २० लाख का खर्च आएगा. पर इससे हमारे कर का भी बोझ कम होगा. जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा में कुल लगभग १० लाख का खर्चा पड़ेगा. कुल लगभग ३० लाख. कर कम करने के बाद समझिये २७ लाख के आसपास. इसके बाद भी हमारा कुल लाभ २ करोड़ से अधिक रहेगा.”

“मुझे कोई आपत्ति नहीं है. जयंत और तुम्हें ये निर्णय लेना है. वैसे संतोष भी आएगा कुछ समय बाद उससे भी पूछ लेना.” समीर ने कहा.

“उसके लिए अलग प्रावधान किया है. उसका वेतन जयंत और मैंने १ लाख महीना करने का निश्चय किया है. वैसे भी अब उसके दोनों बच्चों की भी नौकरी लग चुकी है. तो अब वो कुछ पैसा बचाने में भी सफल होगा.” राहुल बोला, “पापा, क्या आप किसी प्रकार से कमलेश की नौकरी अपने ही शहर में नहीं लगवा सकते क्या? इससे हम लोग जब नहीं होंगे तो आप सबको कुछ सहायता रहेगी.”

“देखता हूँ, मुझे नहीं लगता इसमें कोई समस्या आनी चाहिए, वेतन कुछ कम हो सकता है, परन्तु फिर भी उसके व्यय कम होंगे. मैं आज अपने एक मित्र से बात करता हूँ. पर कमलेश या उनके परिवार में किसी को ये पता न लगे कि हमने उसकी सहायता की है. इससे उसका मनोबल टूटेगा.”

“ठीक है, पापाजी.” राहुल ने कहा. वो उठकर अपने कमरे की ओर जाने लगा तो समीर ने पुकारा.

“राहुल, यहाँ आओ जरा.”

जब राहुल उसके पास पंहुचा तो समीर ने खड़े होकर उसे गले से लगा लिया.

“मुझे तुम पर गर्व है. जो अपने साथ और अपने लिए काम करने वालों का ध्यान रखता है, ईश्वर उसका भी ध्यान रखता है. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि अंजलि ने तुम्हारे जैसा पति चुना.”

अंजलि और सुलभा जो कमरे में अभी ही आये थे सुनकर भावविभोर हो गए. सुलभा की आँखों में प्रसन्नता और गर्व के आंसू थे और अंजलि की आँखों में प्यार के. अंजलि ने मुड़कर सुलभा को गले लगा लिया. सुलभा ने उसका माथा चूमा और उसका हाथ पकड़कर सबके सामने आ गई.

“अगर अंजलि ने सही पति चुना है भाई साहब तो मुझे ये कहना होगा कि राहुल उससे भी अधिक भाग्यशाली है जिसे अंजलि जैसी पत्नी और आपके जैसा परिवार मिला.”

इस भावपूर्ण प्रकरण के साथ नायक परिवार के दिन का शुभारम्भ हुआ.

नहा धोकर सबने नाश्ता किया और इसमें ही दस बज गए. आज सबका क्लब जाने की योजना थी. वर्षा ने बताया कि तीनों स्त्रियां क्लब जा रही हैं. इस पर समीर ने तीनों स्त्रियों से वहीँ ४ बजे मिलने के लिया कहा. महिलाएं कुछ देर बाद निकल गयीं. समीर संतोष की प्रतीक्षा कर रहा था. कुछ ही देर में संतोष भी आ गया. उसकी लाल आँखों से लग रहा था कि उसकी नींद अभी पूरी नहीं हुई थी.

संतोष को बैठाकर समीर, राहुल और जयंत ने खेतों की स्थिति जानी। सब कुछ अच्छा चल रहा था. इसके बाद राहुल ने अपने बोनस के प्रस्ताव को संतोष से साझा किया. संतोष ने इस पर सहमति जताई पर कुछ छोटे मोटे बदलाव भी प्रस्तावित किये. सबकी सहमति के बाद जयंत ने इस पर काम करने का विश्वास दिलाया. इसके बाद जयंत ने संतोष को उसके नए वेतन के बारे में बताया. संतोष इस पर सहमत नहीं था. उसका कहना था कि उन्हें हर प्रकार का सुख और सुविधा उनके पास है तो इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी. परन्तु समीर ने उसे भविष्य के बारे में समझकर मना लिया.

“रात कितने बजे पहुंचे तुम सब?” काम की बातें समाप्त होने पर समीर ने प्रश्न किया.

“२.३०.”

“और सोये कब? समीर ने मुस्कुरा कर पूछा.

“६ बजे.” संतोष ने निसंकोच उत्तर दिया.

“लगता है काफी लम्बा पारिवारिक मिलन रहा.”

“हम सब कोई ५ महीने बाद एक साथ थे. तो बातें करने में समय यूँ ही निकल गया.”

“मैं जानता हूँ क्या बातें की होंगी. चलो, अब तुम घर जाओ और आराम करो. कल से काम की बातें करेंगे.”

“ठीक है, भाई साहब.” ये कहते हुए संतोष ने अपने घर का रास्ता पकड़ा ही था कि समीर को कुछ याद आ गया.

“संतोष, सुनो.”

“जी?”

“वर्षा और मेरी बात हो रही थी, कुछ दिन पहले. अब जब काम्या भी तुम्हारे ही साथ रहेगी, और नौकरी करेगी तो हमारा विचार था कि तुम्हारे आउट हाउस में एक कमरा और जोड़ दिया जाये. देर सवेर कमलेश को भी यहाँ नौकरी मिल गई तो तुम्हे कठिनाई होगी. बच्चे अब स्कूल में तो हैं नहीं.”

“मैं कुसुम से पूछूंगा.”

“पूछ लो, पर मैंने तय कर लिया है. बच्चों के कॉलेज समाप्त होने तक वो बन जायेगा. तुम लोगों के जाने के बाद कार्य प्रारम्भ होगा. करीब चार महीने में समाप्त होगा, क्योंकि अभी वाले घर में भी कुछ बदलाव करने होंगे. तब तक कुसुम कुछ दिन यहाँ, कुछ दिन तुम्हारे पास और कुछ दिन बेंगलोर में बच्चों के पास रह लेगी.”

“भाई साहब, आप सच मैं देवता हैं. अपने जैसा उचित सोचा है, वैसा ही करें. आपका ही घर है.”

“चलो, हम भी बाहर जा रहे है.”

संतोष अपने घर की ओर निकल गया. और समीर, जयंत, राहुल और पवन क्लब की ओर।

समीर ने रास्ते में अपने मित्र को फोन किया और उससे कमलेश के बारे में बात की. उसके मित्र ने कमलेश से बात करने के बाद ही कुछ निर्णय लेने का विश्वास दिलाया. फिर समीर ने जयंत से कमलेश का नंबर लेकर अपने मित्र को दिया. उसने इस बात को गुप्त रखने का अनुरोध किया. राहुल गाड़ी चलते हुए कभी बात नहीं करता था और कोई २० मिनट में वे सब क्लब पहुँच गए. देखा तो १२ बजने वाले थे. सभी अंदर चल पड़े.

************

कुसुम का घर:

संतोष जब घर पहुंचा तो देखा कि खाना बन रहा है. वो कुसुम और काम्या को दूर से देखकर बहुत गर्वित अनुभव कर रहा था. दोनों सांवली अवश्य थीं, पर सुंदरता का कोई सानी नहीं था. काम करने के कारण शरीर भी गठा हुआ था. वो दोनों को यूँ ही एक तक निहारता रहा. तभी उसने अपने पास कुछ हलचल देखी। ये कमलेश था.

“दोनों बहुत सुन्दर हैं न?”

“सच में. हम बहुत भाग्यशाली हैं.”

कुसुम उनकी बातें सुनकर पीछे मुड़ी और उसकी आँखों से प्यार छलक उठा. काम्या ने भी दोनों को देखा और अपने काम में व्यस्त हो गई. कुछ ही देर में वे अपना कार्य समाप्त करके संतोष और कमलेश के पास आकर बैठ गए.

संतोष: “मैंने भाईसाहब को कार्य की प्रगति बता दी है. अब आज की छुट्टी है. कुछ और भी बातें हुईं हैं.”

कुसुम: “और क्या बात हुई. अगर बताना चाहते हो तो बता दो.”

संतोष: “पहली ये कि मेरा वेतन अब १ लाख प्रति माह हो गया है, इसी महीने से.”

सब ख़ुशी से चिल्ला उठे. “बधाई हो, बधाई हो.”

“और दूसरी?” कुसुम की उत्सुकता दोगुनी हो गई.

“दूसरी ये, कि भाईसाहब हमारे जाने के पश्चात् अपने इस घर में एक कमरा और जोड़ रहे हैं.”

“तो मैं कहाँ रहूंगी? इतना शोर और धूल होगी.”

“उन्होंने कहा है कि कुछ समय मेरे साथ रहना, कुछ समय बच्चों के साथ और बाकी समय उनके साथ.”

सबको ये आयोजन पसंद आ गया.

“पापा, पार्टी दो इंक्रीमेंट की.”

“क्यों नहीं. चलो कमलेश, चिकन वगैरह लाते हैं.”

“चलिए.”

दोनों निकल गए और १ घंटे में सब कुछ लेकर लौट आये.

कुसुम ने जब सामान देखा तो गुस्सा होने लगी. संतोष १ पेटी बियर और बहुत सारा खाने का सामान लाया था.

“ये क्या है? क्या बच्चों को पियक्कड़ बनाना है? इतनी सारी क्यों ले आये?”

“मेरी जान, सब कुछ अच्छा हो रहा है, क्यों न इसका आनंद लिया जाये.”

तभी कमलेश के मोबाईल की घंटी बजी. उसने फोन उठाया और फिर “यस सर, यस सर” कहते हुए बाहर चला गया. १० मिनट बाद आया तो वो ख़ुशी से झूम रहा था. उसने पहले काम्या और फिर कुसुम को उठाकर घुमाया और चूमा.

“बताओ, क्या हुआ है?”

कुसुम ने सिर हिलाया कि पता नहीं.

“मेरी नौकरी इसी शहर में लग गई है. वेतन भी पिछले वाले से अधिक है. माँ, आज तू बस मजा कर. आज बहुत अच्छा दिन है.”

कुसुम ख़ुशी से रो पड़ी और ईश्वर के हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद करने लगी.

संतोष: “देखा मैंने कहा था न, सब अच्छा होगा. चल अब ग्लास ला हम सब मिलकर मजा करेंगे.”

सबने अपने अपने ग्लास में बियर ले ली.

“सोचो, कितना अच्छा हो गया. छह महीने बाद तुम तीनो फिर साथ रहोगे. घर भी बड़ा हो जायेगा और वेतन भी. ये दोनों भी कमाने लगेंगे.”

कुसुम की ख़ुशी का सच में ठिकाना नहीं था.

“बस आप भी साथ रह पाते तो सब ठीक हो जाता.”

“तुम तो जानती हो, ये संभव नहीं. पर महीने में दो बार मैं आया करूँगा, जब काम कम होगा. फिर तुम भी तो आया ही करोगी हफ्ते दस दिन के लिए. समय के साथ सब ठीक हो जायेगा.”

“अब नहीं आ पाऊंगी मैं. बच्चों का ख्याल कौन रखेगा?”

कमलेश और काम्या हंस पड़े. “माँ अभी भी हम अपना ख्याल रखते ही हैं. आप अब आराम से जाया करो. अब तो ये पता रहेगा कि हम अपने ही घर में हैं किसी अन्य शहर में नहीं.”

ये कहते हुए दोनों भाई बहन ने कुसुम को अपनी बाँहों में भर लिया.

“ये फ़ाउल है. मैंने क्या गलत किया? संतोष हँसते हुए बोला। इस बार तीनों ने आकर उसे अपनी बाँहों में ले लिया. और अचानक काम्या ने उसके होंठ चूम लिए. “मेरे प्यारे पापा.”

“मेरे विचार से अब इन कपड़ों की कोई आवश्यकता नहीं है. और फिर हमारा खेल भी अधूरा ही रहा था. क्या बोलते हो?”

बोलना किसने था, सब लग गए अपने कपड़े उतारने में और तुरंत ही नंगे होकर खड़े हो गए.

कुसुम: “सुनिए, अभी आप का लंड चाहिए मुझे. इतने दिन से दूर हो. तरस गई हूँ मैं.”

संतोष: ”तेरी तो रोज सिकाई होती होगी।”

कुसुम: “पर वो आप नहीं हो न.”

ये कहते हुए कुसुम संतोष की छाती से लिपट गयी. संतोष ने उसकी भावना को समझते हुए उसकी पीठ हाथों से सहलाने लगा.

“पर तू समझती तो है न, कि मेरा काम वहां खेतों पर ही है. ये तो भाईसाहब का बड़ा दिल है जो हमें परिवार वाला ही समझते हैं, अन्यथा इतना प्यार और सम्मान कोई देने वाला था हमें?”

“समझती हूँ, और अब आपको को भी अच्छे से समझती हूँ?” कुसुम ने ठिठोली की. संतोष ने उसे आश्चर्य भरी दृष्टि से देखा तो कुसुम उसे बहुत प्रेम से देख रही थी. फिर वो अपने घुटनों से झुककर संतोष के सामने बैठ गई और उसका लंड पुचकारने लगी. संतोष ने एक गहरी साँस ली और अपने शरीर को कुसुम के मुंह को समर्पित कर दिया.

कमलेश और काम्या उन्हें देखकर बहुत खुश थे.

“कोई सोच सकता है कि इतने साल शादी के बाद और इतना दूर रहने पर भी इनमें कितना प्यार है. यही है हमारे देश की सच्ची पहचान जहाँ प्यार दूरी नहीं समर्पण को समझता है. काश हम भी इसी प्रकार के जीवनसाथी को पा पाएं.” जुड़वां बही बहन की सोच भी एकाकार ही थी.

“काम्या, चल बिस्तर पर, तेरी चूत का स्वाद लिए २ दिन हो गए.”

“सच में. और मुझे तुम्हारे लंड का. ६९ (69) करते हैं.”

कमलेश बिस्तर पर जाकर लेट गया और काम्या ने उसके मुंह पर अपनी चूत रखते हुए उसके लंड को अपने मुंह में डाल लिया. दोनों भाई बहन एक दूसरे को मौखिक सुख देने में जुट गए. कुसुम की पीठ उनकी ओर थी पर संतोष उन्हें देख रहा था. उसने कुसुम को खड़ा किया और बिस्तर की ओर संकेत करते हुए कहा कि क्यों न हम भी यही करें. संतोष ने भी कुसुम की चूत का सेवन कई दिन से नहीं किया था. कुसुम उठ गई और संतोष कमलेश के साथ में लेट गया और कुसुम ने भी वही आसन अपनाकर उसके लंड को अपने मुंह में लिया और अपनी चूत को संतोष के मुंह पर लगा दिया.

कुछ १० मिनट में चारों अपने चरम पर पहुँच गए और एक दूसरे के मुंह में झड़ गए. इसके बाद सबने बैठकर फिर से बियर पी और फिर खाना खाया. खाने के बाद कुछ सुस्ती आ गयी क्योंकि सब रात में कम सोये थे. १ घंटे सोने के बाद सब उठे. कुसुम ने चाय बनाई और सब चाय पीते हुए अपने भाग्य पर खुश होने लगे. कुसुम ने सबसे कहा कि सुबह नहाकर मंदिर चलेंगे ६ बजे फिर आगे कुछ करेंगे. सब ने सहमति जताई.

कमलेश ने कुसुम का हाथ पकड़ा और उससे कहा,”माँ, कल कुछ अच्छे से चुदाई नहीं हुई. चल आज मुझे तेरी चूत और गांड दोनों का मजा लेना है.”

काम्या ने भी अपना अंश जोड़ा,” हाँ माँ, मेरी भी यही इच्छा है. और मुझे आपको चूत और गांड में एक साथ चुदते हुए भी देखना है.”

“ये लड़की मेरी जान के पीछे पड़ी रहती है.” कुसुम ने हँसते हुए कहा. “ठीक है, पर मैं भी तेरी डबल चुदाई देखने को उत्सुक हूँ.”

“ओके, माँ. पहले आप इन दोनों से चुदवाओ फिर मैं चुदवाऊँगी।”

ये तय होने के बाद अब रुकने का कोई अर्थ नहीं था.

संतोष: “किसको क्या मिलेगा, ये भी बता दो अब.”

कुसुम ने मोर्चा संभाला, “आपको मेरी चूत मिलेगी और कमलेश को गांड. फिर कमलेश को काम्या की चूत मिलेगी और आपको उसकी गांड. क्या विचार है.”

संतोष ने संतुष्टि के साथ कहा, “हमेशा की तरह, बहुत उत्तम.”

संतोष अब बिस्तर पर लेट गया. काम्या ने आकर उसका लंड चूसकर चिकना कर दिया। कुसुम ने संतोष के ऊपर अपनी चूत की सवारी गाँठी। तब तक काम्या एक पिचकारी वाली प्लास्टिक की बोतल में रसोई से तेल ले आयी. फिर उसने वो बोतल की चोंच से कुसुम की गांड में तेल भर दिया. उसने कमलेश के लंड को चाटकर उसके ऊपर भी तेल लगाया. अब कमलेश कुसुम की गांड की सवारी के लिए तैयार था.

कमलेश बहुत ही प्यार से कुसुम की गांड में लंड डालने लगा. सुपाड़ा पक्क से अंदर गया तो जैसे आगे का रास्ता साफ था. आखिर ये गांड सालों से लौड़े खा रही थी. कमलेश का लंड कुछ ही समय में गांड के अंदर चहलपहल करने लगा. नीचे से संतोष भी अपनी पूरी शक्ति के साथ कुसुम की चूत में लंड पेल रहा था. जो कुछ कसर बाकी थी, उसे कुसुम ऊपर नीचे उछलकर पूरी कर दे रही थी. तीनों इस समय वासना के समुद्र में हिचकोले खा रहे थे. साथ बैठी काम्या ये देखकर अपनी बारी की बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी. इसका अर्थ ये नहीं था कि वो व्यर्थ ही बैठी थी. उसकी उँगलियाँ उसके चूत में चल रही थीं पर उसे इससे शांति नहीं मिल रही थी. पिता के लंड से गांड मरवाये बिना उस कन्या शांति कैसे मिलती.

कुसुम की आनंदकारी चीत्कारें संभवतः मुख्य घर में भी सुनाई दे रही होंगी, पर उन्हें पता था की परिवार इतने दिन बाद साथ आया है तो कुछ तो हल्ला गुल्ला होगा ही. कुसुम इस दुगने आघात से आनंदित अपना रस कुछ नहीं तो २-३ बार तो छोड़ ही चुकी थी, पर असली बड़ा स्खलन अभी भी शेष था. पर अधिक दूर भी नहीं था. जब बाप बेटे अपनी ताल बदल बदलकर चूत और गांड में लंड पेलने लगे तो कुसुम के शरीर और मस्तिष्क को समझ ही नहीं आया की क्या हो रहा है. वो शिथिल हो गया और सारी इन्द्रियां कुसुम के निचले संवेदनशील पर केंद्रित हो गयीं. और इसके बाद कुसुम का बांध टूट गया. वो चीखते हुए झड़ी और संतोष के सीने पर लुढ़क गई. कमलेश अब झड़ने ही वाला था पर संतोष अपने ऊपर लेटी कुसुम की चूत में उसी समय झड़ गया. कमलेश ने भी अपनी गति बढ़ाई क्योंकि अब घर्षण कम हो चुका था. अंत में उसने भी अपने वीर्य से कुसुम की गांड को भर दिया और एक ओर बैठकर गहरी सांसे लेने लगा.

काम्या ने अपना अवसर देखा और वो अपनी माँ की गांड और चूत से बहते कामरस को चाटकर पी गई. पर अब उसे इन दोनों के लंड दोबारा करने थे अपनी डबलिंग के लिए. इसके लिए कुछ देर का विश्राम आवश्यक था. और विश्राम के लिए बियर का एक और चक्र चलाया गया.

बियर समाप्त होते होते संतोष और कमलेश भी अगले चरण के लिए तत्पर थे. पर काम्या को कुछ और तैयारी की आवश्यकता थी. और इसके लिए पहल की कुसुम ने. काम्या को बिस्तर पर लिटा कर उसने काम्या की चूत और गांड को चाटकर उत्तेजित किया. फिर गांड में तेल से अच्छे मालिश कर के उसे लंड झेलने के लिए चिकना किया और अपनी दो उँगलियों से उसे इतना खोल दिया कि संतोष का लंड आसानी से उसे भेद सके. जब उसने ये पाया कि काम्या तैयार है तो उसने अपने पति और बेटे के लौडों को चूसकर खड़ा तो किया ही पर इतना गीला भी कर दिया कि उसकी बेटी को कोई कठिनाई न हो.

कमलेश को लिटाकर कुसुम ने उसके लंड को एक बार और चूसा फिर काम्या की चूत को भी चाटकर उसे कमलेश के लंड पर बैठने के लिए कहा. काम्या ने सरलता से कमलेश को अपनी चूत में समा लिया. अब वो आगे झुकी, जैसा उसने अपनी माँ को करते हुए देखा था. अब संतोष की बारी थी. कुसुम ने एक बार और काम्या की गांड पर जीभ फिराई और ऊँगली से एक बार और सहलाया. फिर उसने संतोष के लंड को चाटकर उसे काम्या की गांड के छेद पर रख दिया. संतोष ने अपने लंड का दबाव बनाया और काम्या की गांड ने खुलकर उसका स्वागत किया और सुपाड़ा अंदर जाकर बैठ गया.

दबाव बनाये रखते हुए उसने अपने लंड को काम्या की गांड में पूरी लम्बाई तक डालने के बाद ही साँस ली. अब काम्या दो शरीरों से दबी हुई थी और उसके दो छेदों में दो लौड़े थे, जो अभी तक शांत पड़े थे. पर ये शांति टूट गई जब कमलेश ने अपने लंड से उसे चोदना शुरू किया. कुछ ही देर में कमलेश ने अच्छी गति पकड़ी और ३-४ मिनट तक चोदने के बाद रुक गया. उसके रुकते ही संतोष ने काम्या की गांड में अपने लंड का संचालन करने लगा. वही ताल अपनाते हुए उसने भी अपनी गति धीरे धीरे बढ़ाई और फिर ३-४ मिनट के बाद रूक गया. अब कमलेश चुदाई करने लगा, पर २-३ मिनट बाद कमलेश के रुके बिना ही संतोष ने भी गांड मारनी फिर शुरू कर दी. काम्या तो जैसे पागल हो गई. कुसुम उसके पास जाकर उसे चूमने लगी.

“ओह, माँ. कितना मजा है ऐसी चुदाई में. सच में स्वर्ग दिखता है. ओह, माँ. मुझे जब तक साथ हैं रोज ऐसे ही चुदना है.”

“ठीक है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं, घर की ही तो बात है.”

कमलेश और संतोष अब पूरी गति से लंड चला रहे थे. काम्या की आनंदातिरेक चीखें उसकी माँ के होंठों ने बंद की हुई थी. काम्या दो झड़ गई थी, और अब उसका विशाल उत्कर्ष निकट था. संतोष और कमलेश भी अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच चुके थे. गांड अधिक तंग होने से और कुछ आयु के कारण, संतोष ने अपने पानी से काम्या की गांड भर दी. गांड में छूट रहे फौहारे की गर्मी से काम्य भी अपने अंत पर पहुँच गई और थरथराते हुए झड़ गई और इतना पानी छोड़ दिया की कमलेश के लंड की ध्वनि किसी चलती हुई नाव के समान प्रतीत होने लगी. और कमलेश अब कितना रुकता. उसने भी अपने रस से काम्या की चूत लबालब कर दी.

संतोष काम्या के ऊपर से हटा, और काम्या एक ओर ढुलक गई. कुसुम ने तुरंत उसकी चूत और गांड से बहते रिसते कामरस को पिया और दोनों छेद चाटकर साफ कर दिए. फिर उसने संतोष के लंड को साफ किया और अंत में कमलेश के लंड को. सब लोग बिस्तर पर लेटकर पंखे की चाल देख रहे थे. सबके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे और एक चमक थी.

सब धीरे धीरे उठे और बाथरूम जाने लगे. आज पूरे शेष समय में केवल चुदाई ही होनी थी, हर संभव सम्मिश्रण में. और अन्य हर कार्य निरर्थक था.

घर कुछ दिनों के लिए स्वर्ग बन गया था.

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क्लब में आनंद (पुरुष वर्ग) :

क्लब पहुँचने के बाद उन्होंने रिसेप्शन पर अपने निर्धारित समय के बारे में बताया. रिसेप्शन पर बैठी युवती ने एक घंटी बजाई और बाईं ओर घंटी बजी और एक अन्य सुन्दर लड़की वहां से आयी. रिसेप्शनिस्ट ने उसे चारों को पार्लर में ले कर जाने के लिए कहा. पार्लर मुख्य भवन से कुछ दूर था और वहां पूर्व नियुक्ति के बिना जाने की अनुमति नहीं थी. इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा की गई थी. वो लड़की उन्हें साथ में पार्लर ले गई जहाँ एक और रिसेप्शन था. वहां बैठी युवती ने खड़े होकर सबका स्वागत किया.

उसने एक अत्यंत ही झीना सा गाउन पहना था जिसमे से उसके शरीर का अंग प्रत्यंग झलक रहा था.

“स्वागत है नायक सर, शिर्के सर. आज आप बहुत दिन बाद पधारे हैं हमारे पार्लर पर.”

“धन्यवाद मोहिनी,” समीर ने उसके गाउन पर लगे उसके नाम को पढ़कर कहा. “क्या आपने हमारी याचिका के अनुसार प्रबंध किया है?”

“अवश्य. बस अब आपको अपने साथियों का ही चयन करना है. आपके लिए पहले मसाज और फिर आगे का सारा प्रबंध है. आपने दो युवतियों और दो परिपक्व संगिनियों की जो आज्ञा दी थी, उसमे से अब आपको चयन करना है.”

“मुझे तो आप भी बहुत भा रही हैं.”

“धन्यवाद, परन्तु मेरी ड्यूटी आज यहाँ है और इसीलिए मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगी. मैं आपसे अनुरोध करूंगी कि आप पहले कमरे में से दो और चौथे कमरे में से अपने लिए संगिनी चुन लें.”

“ये कमरों का क्या अर्थ है?”

“पहले कमरे में २५ वर्ष तक, दूसरे में २५ से ३५ वर्ष, तीसरे में ३५ से ४५ वर्ष और चौथे में ४५ वर्ष से अधिक आयु की संगिनियां है.”

“ठीक है. पवन आओ हमारा तो कमरा पहला ही है. राहुल और जयंत तुम लोग चौथे कमरे में जाओ.” समीर बोला। उसके बाद उसने मोहिनी से पूछा, “हमारा मसाज रूम कौन सा है?”

“आठ नंबर वाला, वही आप आठ लोगों के लिए पर्याप्त होगा.”

पवन और समीर पहले और जयंत और राहुल चौथे कमरे में चले गए.

पहले कमरे में ८ एक से सुन्दर एक लड़कियां थीं. उन्हें देखकर समीर और पवन के लंड अकड़ गए. सभी लड़कियों ने एक लॉकेट पहना था जिसमे एक नंबर था. उन्हें इसी नंबर से पुकारा जाना था. पवन ने ३ और समीर ने ५ को चुना. दोनों लड़कियाँ हटीं और उन्होंने पवन और समीर का हाथ लिया और उनसे कमरे का नंबर पूछा और आठ नंबर कमरे की ओर चल पड़ीं.

चौथे कमरे में जाकर राहुल और जयंत चकित रह गए. यहाँ १२ औरतें थीं और इस आयु में जो रसीलापन होता है वो उनके शरीर से जैसे बह रहा था. राहुल एक स्त्री को देखकर हतप्रभ रह गया. ये तय था कि उसने राहुल को नहीं पहचाना था, पर राहुल उसे इतने वर्ष बाद भी पहचान गया. आज उसकी आयु लगभग ४५ वर्ष की होगी. वो स्कूल की शिक्षिका थी, जिसने उसे बहुत प्रोत्साहित किया था. एक प्रकार से उसका यही व्यव्हार उसके जीवन की सफलता की कुंजी बना था. राहुल ने ३१ नंबर कहते हुए उसे चुन लिया. जयंत ने जिसे चुना वो संभवतः उस कमरे की सबसे प्रौढ़ स्त्री थी. उसके शरीर के कसाव और छटा भी उसकी ढली हुई आयु को छुपा नहीं पा रहे थे. ४२ नंबर की उस ५० वर्ष से अधिक आयु की औरत को जयंत ने चुना. जयंत को ऐसा लगा जैसे ४२ की आँखों में आंसुओं की नमी आयी और फिर चली गई. संभवतः अधिकतर लोग उसका चयन नहीं करते होंगे.

इस तरह से चारों ने मिलकर ३, ५, ३१ और ४२ नंबर की संगिनियों का चयन किया था. उन्हें इसी नंबर से पुकारा जाना था. चारों जोड़े अब आठ नंबर कमरे में पहुँच चुके थे. क्लब की प्रतिष्ठा और शुल्क के अनुसार, कमरा बहुत ही सुन्दर सजा हुआ था. कमरे में एक लम्बा बिस्तर था, जो एक कोने से दूसरे कोने तक बना हुआ था. इस पर आराम से ६ जोड़े सो सकते थे. कमरे के बीच में स्थान खाली था, जहाँ संगिनियों ने चार मसाज टेबल बिछाये और उनके ऊपर सफ़ेद कपड़ा बिछाया. उसके बाद उन्होंने एक ओर से सुगन्धित तेल की शीशियां निकालीं और बड़े कांच के चार कटोरों में डाला. फिर उन्हें माइक्रोवेव में गर्म करने के लिए रख दिया.

इसके बाद चारों ने अपने झीने गाउन उतारे और हैंगर में टांग कर अलमारी में लटका दिए. फिर उन्होंने अपने साथियों की ओर बढ़कर उनके भी वस्त्र उतारकर उसी प्रकार से अलमारी में हैंगर से लटका दिए. कमरे के एक ओर खुले स्नान के लिए फौहारे थे. चारों जोड़े एक एक फौहारे में गए और स्नान करते हुए शरीर को निर्मल किया और कमरे में लौट आये. चारों पुरुषों को फिर टेबल पर उल्टा लिटा दिया गया. इसके बाद माइक्रोवेव में तेल गर्म किया। कमरा अति मादक सुगंध से महक उठा.

चारों महिलाओं ने उनके मुलायम हाथों से उन सशक्त शरीरों पर तेल और उँगलियों से मालिश शुरू कर दी. अभी तक कमरे में आने के बाद किसी ने भी एक शब्द भी नहीं बोला था. पर हर पुरुष अब अपनी संगिनी के साथ बात करना चाहता था. बातें इतनी धीमे स्वर में चल रही थीं कि दूसरी टेबल वाले सुन नहीं सकते थे.

३: “आपका शरीर तो बहुत ही तगड़ा है. आप लगता है व्यायाम करते हैं.”

पवन: “हाँ मेरा बहुत पहले से ये शौक रहा है. और पहले काम भी ऐसा था कि कुछ व्यायाम अपने ही आप हो जाता था.”

३: “आपका वो भी बहुत बड़ा है.”

पवन: “वो क्या?”

३: “आपका लंड, और क्या. आप के लंड से तो मेरी चूत फट ही न जाये.”

पवन ने ३ के नितम्ब दबाते हुए अपना सिर ऊपर करते हुए कहा, “चूत तो नहीं फटेगी. पर गांड का मैं नहीं कह सकता.”

ये सुनकर पवन ने ३ के शरीर में एक झुरझुरी का अनुभव हुआ.

३: “पर आप प्यार से तो करेंगे न. कुछ लोग बहुत बेदर्दी से करते हैं.”

पवन: “मुझसे तुम्हें ये शिकायत नहीं होगी, वैसे इनमे से कौन है जिसे बेरहम चुदाई पसंद है?”

३: “४२ को. वैसे ३१ भी कुछ कम नहीं हैं. आप लोग कहोगे तो ये दोनों डबल या ट्रिपल सवारी भी करने देंगी.”

पवन: “इसका आनंद तो अवश्य ही लेना होगा, पर पहले तुम्हारी जवानी का भोग लगाना है.”

३:”मैं तो आपके ही साथ हूँ, ३ घंटे के लिए.”

उधर राहुल अपनी स्कूल की शिक्षिका को सांचे में उतार रहा था. ३१ ने अभी तक उसे पहचाना नहीं था और राहुल यही चाहता भी था. वो किसी प्रकार से उससे बाहर मिलने का प्रयास कर रहा था. परन्तु ३१ अभी तक कुछ भाव नहीं दे रही थी. जब उसके पीछे की मालिश पूरी हो गई तब ३१ ने उसे पलटने के लिया कहा. अब राहुल के लिए करो या मरो का समय था. अपने इस पुराने बचपन के प्यार को वह आज पूरी तरह से पाना चाहता था. समय ने उसे ये अवसर सोने के थाल में सजा कर दिया था. वो पलटकर कमर के बल लेट गया और उसका विशालकाय लंड उछलकर सीधा हो गया, इतने समय से दबा हुआ जो था. ३१ की ऑंखें चौंधिया गयीं. स्नान तक उसने ये ध्यान नहीं दिया था कि लंड अभी खड़ा भी नहीं था, पर अभी देखकर उसे अपनी चूत की बर्बादी सामने दिखने लगी.

“इतना बड़ा?”

“अभी मालिश करोगी तब अपने असली रूप में आएगा.”

“पर मैंने कभी इतने बड़े लंड से नहीं करवाया।”

“क्या नहीं करवाया?”

“चु चु चुदाई.”

“चिंता मत करिये, मैं आपको केवल आनंद ही दूंगा. ये मेरा वर्षों का संकल्प है.”

३१ ने उसे अचरज भरी आँखों से देखा., “वर्षों का?”

“हाँ, अगर आप मुझसे बाहर मिलो तो मैं आपको सब समझा दूंगा.”

“हमें किसी के घर जाने के अनुमति नहीं है.”

“आप हाँ कहिये, अनुमति को मेरे ऊपर छोड़िये. क्या आप इस शनिवार को आ सकोगी?” राहुल ने एक स्थान का पता दिया. वो उसे अभी घर का पता नहीं देना चाहता था.

“मैं प्रयास करुँगी, पर मुझे इस नौकरी की बहुत ज़रुरत है. अगर आपने अनुमति नहीं ली तो नहीं आऊंगी.”

“ठीक है. अब कुछ मालिश भी हो जाये.”

३१ झेंप गई और मालिश करने लगी. पर उसकी आंख रह रह कर राहुल के तने लंड पर ही जा रही थीं.

“आप चाहो तो स्वाद ले सकती हो, मालिश तो होती रहेगी.”

३१ की मानो मन की इच्छा पूरी हो गई. उसने आव देखा न ताव और लपक कर राहुल के लंड को अपने मुंह से चाटने लगी. पूरी लम्बाई और चौड़ाई को चाटने में उसे बहुत आनंद आ रहा था. उसने राहुल के लंड के आगे के छेद पर रिस आये मदन रस को चाटकर चटखारा लिया। फिर उसने लंड मुंह में लेकर चूसने लगी. राहुल ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और वो अपने पुराने सपने में खो गया.

४२ बहुत श्रध्दा से जयंत की मालिश कर रही थी. उसका शरीर भले ही बुढ़ापा छुपा न पा रहा हो, पर शक्ति उसके हाथों में बहुत थी.

उसने धीरे स्वर में पूछा, “मुझसे तो बहुत सुंदर औरतें थीं वहाँ. आपने मुझे ही क्यों चुना?”

जयंत: “उँह, इसका मेरे पास एक ही उत्तर है. केवल इसीलिए क्योंकि आपने मुझे आकर्षित किया. इसके सिवाय मेरे पास कोई और कारण नहीं है. मुझे आशा है कि आप मेरे इस चयन को सही सिद्ध करेंगी. आपका अनुभव मेरी इच्छा पूरी कर सकेगा ऐसा मुझे विश्वास है.”

४२: “ऐसी क्या इच्छा है आपकी जो मैं पूरी कर सकती हूँ?”

जयंत ने उसे कान पास लाने को कहा. फिर उसने उसके कान में कुछ फुसफुसाया. ४२ ने झटके से अपना सिर ऊपर उठाया, उसके चेहरे से स्पष्ट था कि ये उसके लिए घिनौना था. जयंत उसकी ओर देखकर मुस्कुरा दिया.

जयंत: "मैंने जब आपको उन सबके बीच में देखा तो मैं ये जान गया था कि आप भी इसे पसंद करेंगी. क्या मैं गलत था. आपको भी यही पसंद है न?”

४२ ने हामी में सिर को हिलाया.

“तो फिर एक बार मेरा स्वाद ले लो. बाद में मैं आपको आपका ही स्वाद चखाऊंगा.”

४२ ने जयंत के लंड को मुंह से चाटा और फिर उसके दोनों पांव उठाकर उसके सीने से लगा दिए. इसके बाद उसने अपना मुंह जयंत की गांड के पास ले जाकर उसे चाटने लगी. जयंत को ये बहुत भाता था, पर घर की कोई भी स्त्री ये नहीं पसंद करती थी, हाँ, कुसुम कभी कभार उसके इस व्यसन को पूर्ण कर देती थी, पर जब उसने देखा कि कुसुम उससे दूर भागती है, तो उसने कुसुम से भी ऐसा करने के लिए मना कर दिया. पर ४२ को इसमें कोई शर्म या घिन नहीं आयी. अब जयंत ने कैसा जाना कि उसे ये पसंद है, ये उसकी समझ के परे था.

अब तक बाकी टेबल पर भी ऐसा ही कुछ दृश्य था. पवन के लंड को 3 चूस रही थी. २२ वर्ष की उस सुंदरी के मुंह में पवन का लंड सरलता से नहीं जा रहा था पर वो प्रयास पूरा कर रही थी. उसे ये सोचकर भी डर लग रहा था कि जब ये उसकी चूत में जायेगा तब उसकी चूत का क्या हाल होगा. समीर के लंड से प्यार करने वाली ५ उसे चाट चाट कर अपने थूक से भिगा दिया था. राहुल भी अब ३१ के लिए तैयार था. और जयंत तो मानो स्वर्ग में विचरण कर रहा था. जब बाकी सब खड़े होकर बिस्तर की ओर बढे तब ४२ ने भी अपनी जीभ जयंत की गांड से निकाली। उसने जयंत को संकेत दिया कि सब आगे बढ़ चुके है. जयंत का लंड इस समय इतना तना था कि उसे चलने में भी कठिनाई ही रही थी.

उधर ३ ने अपनी चूत को हाथों से फैलाया और पवन के लंड का उसके अंदर स्वागत किया. कुछ कठिनाई के बाद ३ को भी इस विकराल लंड की चुदाई अच्छी लगने लगी. पर उसे ये नहीं पता था कि लंड जितना अंदर है लगभग उतना ही बाहर भी है. वो बेचारी इसी सोच से खुश थी कि उसने ऐसा लंड भी झेल लिया. समीर ने ५ की छूट में एक ही बार में लंड पेलने का प्रयास किया जिसमे वो विफल हुआ और ५ भी छटपटाने लगी. समीर ने समझ लिया कि लड़की इतनी अनुभवी और खेली हुई नहीं है और वो कुछ देर रुक कर उसे प्यार से चोदने लगा. ५ ने भी अपना दर्द कम होने के बाद उसका पूरा साथ दिया.

राहुल की वर्षों की कामना पूरी हुई जब उसने ३१ की चूत में अपने लंड को सरकाया. उस गर्म चूत के कपाट उसके लंड को सेंक रहे थे. और वो इस आनंद में सब कुछ भूल चूका था.

और जैसे जैसे राहुल का लंड ३१ की चूत को भेद रहा था ३१ के सुख का स्तर भी बढ़ रहा था. उसने लंड तो बहुत खाये थे पर जो अब उसकी चूत में था वो संभवतः सबसे विशाल था. लंड की चौड़ाई उसकी चूत को जैसे दो भागों में बाँट रही थी. पर इसमें उसे केवल आनंद की ही अनुभूति हो रही थी. जब राहुल अपने पूरे लंड को अंदर डालकर रुका तो ३१ ने अपनी ऑंखें खोलकर उसे देखा. राहुल की आंखों में उसे एक असीम प्यार की चमक दिखी. ये ऑंखें? कहाँ देखीं थी उसने? उसे कुछ याद तो नहीं आ रहा था पर उसे उन आँखों में अपने बीते समय का कोई परिचित दिख रहा था. राहुल अपने लंड को उसके भीतर चलाने लगा और ३१ बाकी सब भूल गयी. उसने अपने पैर राहुल की पीठ पर जकड दिए. राहुल ने भी ये जानकर की ३१ पूरा आनंद ले रही है अपनी चुदाई की गति को बढ़ा दिया. ३१ की बहती हुई चूत से अब छप छप की ध्वनि आ रही थी. राहुल ने घर्षण में सरलता देखकर धुरंधर गति से चुदाई शुरू कर दी और ३१ उसके थाप से थाप मिला रही थी.

जयंत ने ४२ की चूत को कुछ ही देर के लिए चोदा, वो भी केवल अपने लंड को उपयुक्त रूप से गीला और कड़क करने के लिए. उसके बाद उसने ४२ को घोड़ी के आसन में किया और अपने उसकी चूत के बहते रस से उसकी गांड को थोड़ा खोला. जब उसे लगा कि ४२ को परेशानी नहीं होगी तो उसने अपने लंड को उसकी गांड में धीरे धीरे घुसा दिया. पहले के दो तीन इंच अंदर जाने के बाद उसने दबाव बढाकर पूरे लंड को जल्दी ही अंदर ठोंक दिया. ४२ गांड मरवाने की बहुत शौक़ीन थी और उसे इस बात की ख़ुशी थी कि उसे आज ऐसा लंड मिला जो चूत से अधिक उसकी गांड की खुजली मिटाएगा. पर उसकी ऑंखें अपने साथ चुद रही ३१ के साथी के लंड को भी ताक रही थीं. उसकी इच्छा थी कि अगर वो लंड भी उसकी गांड मारे तब तो परमानन्द मिलेगा. और ३ के साथ वाला बूढ़ा, जो शायद ३१ वाली के साथी का बाप था, उसका भी लंड तगड़ा था. अगर ये बाप बेटे मुझे एक साथ चोदे तो फिर जीवन का अनंत सुख मिलेगा. पर अभी जो था उसका आनंद लेना ही श्रेयस्कर था. और उसका साथी उसी ताकत और गति से उसकी गांड फाड़ रहा था जिसमे उसे मजा आता था.

समीर भी आज चूत से अधिक गांड मारने के मूड में था, इसीलिए उसने ऐसी लड़की चुनी थी जिसकी गांड वहां उपस्थित लड़कियों में से सबसे उभरी और भरी हुई थी. उसके विचार से उसे भी गांड मरवाने का शौक था. और समीर ने चूत की ओर देखा भी नहीं. सीधे ५ को घोड़ी बनाया और कुछ वेसलीन लगाकर दो ही झटकों में लंड को पेल दिया. उसका अनुमान सही था, ५ ने बिना किसी कठिनाई के पूरा लंड अंदर ले लिया और चूँ भी न की. समीर उसकी गांड अब बेरहमी से मारने लगा पर ५ को उसकी ये क्रूरता बहुत भा रही थी और वो चीख चीख कर और तेज करने की मांग कर रही थी.

कुछ ही देर में चारों संगिनियां झड़कर ढह गयीं और वही उन पुरुषों का भी हुआ. पवन पर संतुष्ट नहीं हो पाया था. उसकी संगिनी उसके लंड को ठीक से झेल नहीं पाई थी और हालाँकि वो झड़ तो गया था पर उसकी प्यास अभी बाकी थी. उसकी ऑंखें ४२ से मिलीं जो अपनी फटी गांड से वीर्य निकालकर खा रही थी. आँखों ने एक दूसरे की बात समझी और तय कर लिया कि वो साथ होंगे कुछ समय में. पर ४२ को अपने साथी के उस व्यसन को पूरा भी करना था जिसका उसने वादा किया था. उसने जयंत को साथ लिया और उसके लंड को चूसकर फिर खड़ा कर दिया. इसके बाद वो उसे संलग्न खुले बाथरूम में ले गई और घोड़ी का आसन ग्रहण कर लिया.

जयंत ने अपने लंड को दोबारा उसकी गांड में डाला और कुछ धक्के मारे। फिर वो रुक गया और ४२ की गांड से पानी बहने लगा. ये पानी जयंत का मूत्र था, जिससे उसने ४२ की गांड को सींचा था. पूरा खाली होने के बाद जयंत ने अपने लंड को बाहर निकाला और ४२ का धन्यवाद किया. ४२ ने उसके बाद उसकी गांड को साफ किया और बिस्तर की ओर लौट गई.

अब इस समय दोनों बाप बेटों की जोड़ी का ध्यान ३१ और ४२ पर केंद्रित हुआ. उन्हें अब डबल चुदाई की इच्छा थी और ये साफ थे की ३ और ५ इसके लिए उपयुक्त नहीं हैं. अब चूँकि पवन की ४२ से अँखियाँ लड़ चुकी थीं तो उसने ४२ को बिस्तर पर पहुँचने ही नहीं दिया. उसे बीच में ही रोककर अपनी बाँहों में भर लिया.

फिर उसने राहुल की ओर देखा और पूछा: “आएगा मेरे साथ?”

राहुल तो उतावला ही था उसने तुरंत हामी भर दी और ४२ को पीछे से जकड लिया. ४२ के मन की इच्छा पूरी होने वाली थी. उसने दोनों हाथों में एक एक लंड लिया और सहलाने लगी. उनके हाथ में आते ही उसकी चूत और गांड कुलबुलाने लगी और ऐसा जैसे उनमे चीटियां चल रही हों.

राहुल ने अपने होंठ उसके कान के पास ले जाकर पूछा: “गांड किसे दोगी ?”

४२ ने सिर घुमाकर उत्तर दिया: “दोनों को, ऐसे लौड़े भाग्य से मिलते हैं. दोनों को गांड में लेने से वंचित नहीं रहना चाहूंगी.”

“तो चलो तुम्हारी सवारी गांठें.”

समीर भी ३१ से बात कर रहा था. उसने भी ३१ को डबल सवारी के लिए सहमत पाया. इस उम्र की औरत पुरानी शराब की तरह होती है. नशा बहुत होता है. जयंत अभी अपने अनुभव से निवृत्त ही हुआ था कि उसके सामने एक और सुन्दर स्त्री चुदने को तत्पर थी. समीर ने ये साफ कर दिया कि उसे गांड ही चाहिए और जयंत जिसने अभी एक गांड मारी थी इस पर सहमत हो गया.

लंड खड़ा करने का काम ३ और ५ को सौंपा गया और दोनों ने तुरंत ही एक एक जोड़े को लिया और उनके लंड चाट और चूसते हुए तान दिए. इसके बाद जयंत और पवन नीचे लेटे और ३१ और ४२ ने उनके ऊपर जाकर अपनी चूत में लंड ले लिए. जब दोनों ने पूरा लंड निगल लिया तो आगे झुक गयीं और उनके पीछे जाकर समीर और राहुल ने अपने लंड उनकी गांड पर रखे. ३१ की गांड में समीर ने बड़े संयम से लंड डाला, पर क्योंकि ४२ की पहले ही गांड खुली हुई थी तो राहुल ने एक अच्छे तगड़े धक्के में ही पूरे लंड को गाड़ दिया. ४२ की आनंद की चीख कमरे में गूंज उठी.

३१ आनंद की लहरों में झूल रही थी. एक सधी ताल में बाप बेटा उसकी चूत और गांड में लंड पेल रहे थे. उसकी चूत और गांड के बीच की झिल्ली इस दोहरे घर्षण से अत्यंत सुखद अनुभूति अनुभव कर रही थी. उसे इस सुख की ही इच्छा थी, पर ये कम ही पूरी होती थी.

४२ की गांड के तो राहुल परखच्चे उदा रहा था. वहीँ पवन भी नीचे से उसकी चूत की बखिया उधेड़ रहा था. दोनों ओर से निर्दयी निर्मम चुदाई के कारण कमरे में ४२ की आनंदमई चीखें गूंज रही थीं. ३१ की सिसकारियां और और तेज चुदाई का आव्हान की आवाजें ४२ की चीखों में दब गयीं. कोई १० मिनट तक इसी तरह से चोदने के बाद पवन ने गांड मारने की इच्छा व्यक्त की. राहुल ने अपने लंड को बड़े ध्यान से बाहर निकाला और एक ओर जाकर लेट गया. ४२ ने काँपते हुए अपने शरीर को पवन से अलग किया और जाकर राहुल के लंड पर स्थापित कर लिया. पवन ने उठकर आव देखा न ताव और ४२ की गांड को एक ही बार में अपने लंड से भर दिया. बाप बेटे छेद बदलकर फिर चालू हो गए. ३ और ५ ने अपने भाग्य को धन्य किया कि ये दोनों निर्दई उनके ऊपर नहीं चढ़े, नहीं तो महीनों तक चलना फिरना बंद हो जाता.

३१ के भी छेदों में लंड बदल चुके थे पर यहाँ चुदाई बहुत ही शांत और सरल गति से हो रही थी. जहाँ डबल चुदाई का तात्पर्य निर्ममता माना जाता है, इस गुट में ऐसा नहीं था. और ३१ को इसमें असीम आनंद मिल रहा था. १० मिनट तक और ऐसे ही चोदने के बाद चारों आदमियों ने अपने झड़ने की घोषणा की. ३ और ५ पास आकर बैठ गयीं. अपना रस अपने हिस्से के छेदों में डालने के बाद सब कुछ देर ठहर गए.

जब जयंत और समीर ३१ से अलग हुए तो ५ ने समीर के लंड को अपने मुंह में लेकर उसे अच्छे से साफ किया. वहीँ जयंत ने ३१ के मुंह में लंड डालकर उससे साफ करवा लिया. ३ ने राहुल के लंड की सफाई की तो ४२ ने पवन के. इसके बाद ३ और ५ ने ३१ और ४२ की चूत और गांड साफ करते हुए उनसे रिसते हुए रस का सेवन किया. इसके बाद अब स्नान के लिए गए.

नहाने के बाद ४२ ने उनके कार्यकलाप का बिल बनाया और उनकी स्वीकृति लेकर बंद किया. इसके बाद सबने अपने पहने. पुरुषों ने अपने पहले वाले और स्त्रियों ने पुराने गाउन धोने के लिए डालकर नए झीने गाउन पहन लिए. सब बाहर निकले और रिसेप्शन पर समीर से बिल चुकाया. साथ ही चारों संगिनियों को दो दो हज़ार की टिप दी. इसके बाद वो मुख्य रिसेप्शन पर गए. राहुल ने क्लब के मैनेजर से ३१ से बाहर मिलने की अनुमति मांगी जो उनकी प्रतिष्ठा को देखकर मैनेजर ने प्रदान कर दी और ३१ को ये निर्णय बता दिया गया. वहां से क्लब में बने रेस्त्रां में जाकर अपनी परिवार की स्त्रियों के साथ बैठ गए.

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क्लब में आनंद (महिला वर्ग) :

वर्षा, अंजलि और सुलभा ने क्लब में पहुँच कर रिसेप्शन पर अपना परिचय दिया. रिसेप्शन पर बैठी युवती ने एक घंटी बजाई, इस बार की घंटी दाईं ओर बजी थी. उस ओर से एक बहुत सुन्दर और हृष्ट पुष्ट लड़का निकलकर आया. रिसेप्शनिस्ट ने उसे तीनों को पार्लर में ले कर जाने के लिए कहा. वो लड़का उन्हें साथ में पार्लर ले गया जहाँ एक और रिसेप्शन था. ये वर्ग दूसरे वर्ग से भिन्न था. यहाँ पर रिसेप्शन में एक आकर्षक युवक था जिसने उनका खड़े होकर स्वागत किया.

“श्रीमती नायक और श्रीमती शिर्के. आपका स्वागत है.” वर्षा और सुलभा ने देखा की वो लड़का केवल एक लंगोट पहने था और उसके नीचे कुछ भी नहीं. इस कारण उसके लंड का आकार दिख रहा था. तीनों के मुंह में पानी आ गया.

“मैडम, आपकी आज्ञा के अनुसार सब कुछ तैयार है. आपको कमरा नंबर पाँच दिया है. इसके पहले आप उस कमरे से अपने साथी चयन कर सकती हैं. आपके मानदंड पर सटीक उतरे हुए साथी ही इस समय वहां उपस्थित हैं.”

तीनों ने कमरे का दरवाजा खोला और अंदर चली गयीं. वहां पर कोई १५-१६ लड़के उसी प्रकार के लंगोट में खड़े हुए थे. उनके बलिष्ठ और कसरती शरीर अत्यंत आकर्षक थे. पर तीन जोड़ी ऑंखें उन लँगोटों के भीतर के मांसपिंड को तौलने का प्रयास कर रही थीं. अंततः वर्षा ने ६ और ९ को चुना, अंजलि ने १ और ७ को. सुलभा बहुत देर देखती रही. फिर उसने भी अपना चयन किया: १०, १२, १५. वर्षा ने उसकी ओर आश्चर्य से देखा तो सुलभा मुस्कुरा दी. निर्धारित साथी बाहर आये और उन्हें पांच नंबर मसाज कक्ष में ले गए. यहाँ को भी साज सजावट उसी प्रकार थी और उन्होने कमरे के बीच में तीन मसाज टेबल लगाए. फिर अपने लंगोट हटाकर उसे एक ओर रख दिया. उन्होंने तीनों स्त्रियों की उनके वस्त्र निकालने में सहायता की और वस्त्रों को अलमारी में हैंगर पर लटकाया. फिर उन्हें स्नान के लिए ले गए और उसके बाद उन्हें मसाज टेबल पर उल्टा लिटा दिया.

माइक्रोवेव में तेल गर्म करने के बाद तीन बड़े कटोरों में तेल लेकर साथी अपनी निर्धारित टेबल पर आ गए.

वर्षा के दोनों ओर ६ और ९ खड़े होकर एक ने ऊपर और एक ने नीचे के शरीर की मालिश शुरू की. उनके मालिश का ऐसा अंदाज था जिससे काम वासना भड़के. और यही हो भी रहा था. गर्दन और पीठ की मालिश में जहाँ वर्षा को आराम मिल रहा था, वहीँ जांघों और पिंडलियों पर चलते मजबूत हाथ उसकी चूत को गीला कर रहे थे. ९ ने उसके नितम्बों पर तेल डालकर उन्हें मसलना जब शुरू किया तो वर्षा की चूत ने पानी ही छोड़ दिया और उसकी खुशबू तेल की सुगंध में जुड़ गयी.

“थोड़ी सहायता करो.” ९ ने ६ से कहा.

६ ने उसके संकेत को समझा और वर्षा के दोनों नितम्ब पकड़कर फैला दिए. इससे उसकी गांड का छेद खुल गया. ९ ने गर्म तेल की एक पतली धार उसमें छोड़ दी. वर्षा का शरीर कांप उठा. इसके बाद ६ वापिस चला गया और ९ उसके नितम्ब मसलते हुए उसकी तेल भरी गांड में एक ऊँगली डालकर अंदर की मालिश करने लगा. रास्ता खुल जाने पर उसने एक और ऊँगली डाल दी और उन्हें घुमाते हुए अंदर की मालिश करने लगा. इसके बाद उसने तीन उँगलियों से यही उपक्रम किया. गांड जब अच्छे से खुल गयी तो उसने दोबारा पिंडली और जांघों पर ध्यान केंद्रित किया.

चूँकि ये उनके मसाज का निर्धारित कार्यक्रम था इसीलिए अंजलि और सुलभा के साथ भी यही चल रहा था. पर सुलभा के लिए कुछ अलग भी था. उसके पास तीन साथी थे और तीन के लिए एक साथ मालिश करने का स्थान तो था नहीं. इसीलिए, सुलभा ने भी अपनी ओर से मालिश में भाग लेना तय किया था. और यही कारण था की उसने तीन साथी चुने थे. जब १० और १५ ने उसके शरीर के ऊपरी और निचले भागों की मालिश शुरू की थी तो सुलभा ने १२ के लंड की मालिश अपने मुंह से शुरू कर दी थी. इस प्रकार की मालिश को सही तरीके से करने के लिए, बिना मालिश का क्रम तोड़े, तीनों साथी उसके घूम रहे थे. और वो एक एक करके सबके लंड चूस रही थी.

“अगर तुमने मुझे ये बताया होता, तो मैं भी तीन साथी ही चुनती.” वर्षा ने शिकायत की.

“कोई बात नहीं है, अभी दो से ही काम चला लो, चुदाई तीन से करवा लेना.”

उसकी बात सुनकर ६ ने अपने लंड को वर्षा के मुंह में डाल दिया और ७ ने अंजलि के. बहुत ही कामुक दृश्य था. यहाँ मालिश और चुसाई एक साथ ही चल रही थी.

कुछ समय इस प्रकार से ही घूमकर लंड चुसवाते और मालिश करते हुए अचानक इस क्रम में एक पूर्व आयोजित परिवर्तन हुआ. जब ६ के लंड को वर्षा चूस रही थी, तो ९ ने मालिश करते हुए उसकी गांड को फैलाया और उसे अपनी जीभ से कुरेदना शुरू किया. गांड तेल के कारण इतनी चिकनी थी की जीभ बड़ी सरलता से अंदर की थाह ले रही थी. जीभ से अंदर के एक एक रोम को चाटते हुए ९ ने वर्षा को कामोत्कर्ष की ऊंचाई पर पहुंचा दिया. इतने में उसकी बारी लंड चुसवाने की आ गयी और उसने अपना स्थान ६ के सौंप दिया और उसका स्थान ले लिया.

अंजलि भी यही सुख अनुभव कर रही थी और उसकी चूत पानी पानी हुए जा रही थी. १ और ७ अब उसके मुंह और गांड पर ध्यान दिए हुए थे. वहीँ सुलभा की इस सबके साथ गर्दन के पास की मालिश भी हो रही थी.

फिर पलटने का समय आ गया और तीनों स्त्रियां पीठ के बल लेट गयीं और दोबारा सामान्य मालिश का कर्म चालू हो गया जो लगभग १० से १५ मिनट तक चला. पर अब ये विदित थे कि तीनों स्त्रियां काम वासना से उत्तेजित हैं और इसीलिए अगले चरण का कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ.

तीनों स्त्रियों को उठाकर खड़ा किया गया और उन्हें साथ में लगे लम्बे बिस्तर की ओर ले जाया गया. तीनों इस समय चुदने के लिए अधीर थीं और साथी उनकी इस अच्छा को पूरा करने में लिए. और चुदाई के लिए अब उन्हें खुली छूट थी, अर्थात तीनों को जिस भी प्रकार से चाहे वो चोद सकते थे. और इस खेल में ये सातों निपुण थे.

वर्षा को सीधा लिटाते हुए ६ ने उसके मुंह में अपना लंड पेल दिया. इसी के साथ ९ उसकी चूत में अपना मुंह लगाकर कुत्ते की भांति चाटने लगा. अंजलि के मुंह में ७ का लंड और चूत में १ का मुंह था. पर सुलभा की बात ही अलग थी. १२ लेटा हुआ था और सुलभा उसके मुंह पर अपनी चूत रखकर बैठी थी. १५ का लंड उसके मुंह में था और उसके पीछे से १० उसकी गांड को चाट रहा था. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस समय आनंद की लहरों में सबसे ऊपर सुलभा ही सवार थी. अगर वर्षा और अंजलि के मुंह में लौड़े न होते तो संभवतः वे अपनी जलन को मुखर कर पातीं.

कुछ ही समय में चुदाई के लिए उपयुक्त समय आ गया. और खेल अगले चरण में प्रवेश कर गया.

तीनों महिलाएं बिस्तर पर घुटनों के बल घोड़ी के आसन में आ गयीं. ६ ने अपने लंड को वर्षा के मुंह में डाला और जहाँ अब तक वर्षा उसका लंड चूस रही थी, अब ६ उसके मुंह की चुदाई करने लगा. वर्षा के पीछे जाकर ९ ने अपने लंड को वर्षा की रिसती चूत में एक ही धक्के में डाल दिया और उसे तेजी से चोदने लगा. ६ एंड ९ का मिलाप कुछ ऐसा था कि एक अंदर जाता तो एक बाहर आता. वर्षा इन दोनों लौडों के प्रहारों के बीच में झूल रही थी. उसके बगल में अंजलि भी यही सुख प्राप्त कर रही थी. १ उसके मुंह की चुदाई कर रहा था तो ७ उसकी चूत को पेल रहा था. ये तो भला हुआ की ये बिस्तर इतना मजबूत बनाया था कि हिल भी नहीं रहा था अन्यथा अब तक चर्र चर्र की ध्वनि के बाद चूँ चूँ भी कर रहा होता।

चूँ चूँ तो नहीं पर उनके पास से घूँ घूँ की ध्वनि अवश्य आ रही थी. अगर वर्षा और अंजलि मुड़कर देख पातीं तो सुलभा से अवश्य भी जलन करने लगतीं. सुलभा ने १० को अपनी चूत समर्पित की हुई थी जो उसे नीचे लेटकर चोद रहा था. १२ ने सुलभा के मुंह की चुदाई का दायित्व संभाला हुआ था. वहीँ १५ ने अपना लंड सुलभा की चूत में पेला हुआ था. तीनों की जुगलबंदी कुछ इस प्रकार की थी कि जब १२ अपने लंड को मुंह में डालता, तब १० भी उसकी चूत में लंड अंदर करता. और इसी के साथ १५ अपने लंड को गांड से बाहर निकाल लेता. इस धक्केमुक्की में १२ का लंड सुलभा के गले तक जा लगता, वो तो चुदाई की गति इतनी थी कि सुलभा की साँस नहीं रूकती. और जब लंड बाहर निकलता तो उसके मुंह से बस घूँ घूँ ही निकल पाती और लंड वापिस अंदर घुस जाता.

कुछ समय पश्चात् ९ बिस्तर पर सीधा लेटा और उसने वर्षा से लंड पर चढ़ने के लिए कहा. वर्षा ने अपनी चूत पर लंड को सैट किया और आसानी से पूरे लंड को निगल गई. ६ जिसने अब तक केवल मौखिक सहवास का ही आनंद लिया था, उसने वर्षा के पीछे अपना स्थान लिया और तेल से भीगी गांड के मुंह पर अपने को लगाया और एक ही बार में अंदर कर दिया. इसी के साथ ६ और ९ वर्षा को दुहरी चुदाई करने लगे. अब यहाँ प्यार व्यार की कोई भावना तो थी नहीं. उनकी ग्राहक चुदवाने के उद्देश्य से ही आयी थीं और उन्हें वही प्राप्त होना था. दोनों तेजी के साथ वर्षा के दोनों छेदों में लौड़े चला रहे थे. और वर्षा इसका आनंद भी ले रही थी.

अंजलि भी अब तक दुहरी चुदाई में लगी हुई थी. ७ ने उसकी चूत में लंड पेला हुआ था तो १ ने गांड में. अंजलि ने सुलभा से कहा, “माँ जी. थोड़ा घुमाकर चुदवाओ।” और ये कहते हुए उसने सातों साथियों को इस चरण का तरीका बताया.

१२ ने सुलभा के मुंह से लंड निकाला और ठहर गया. वहीँ १ ने अपने लौड़े को अंजलि की गांड से निकाला और सुलभा की गांड में जड़ दिया. अंजलि की खाली हुई गांड में ६ ने अपने लंड को वर्षा की गांड से निकालकर डाल दिया. और वर्षा की गांड में १२ ने अपना स्थान लिया और चुदाई अब छोटी छोटी किश्तों में शुरू हो गई. कुछ स्थान परिवर्तन के बाद चूत वालों को भी गांड का आनंद प्राप्त हुआ.

इस घुमावदार चुदाई से अब सब अपने चरम पर पहुँच चुके थे और अंततः जो जिस छेद में था वहीँ झड़ गया. तीनों सन्नारियां भी अनगिनत बाद झाड़कर अब तृप्त हो चुकी थीं. कुछ समय चुदाई की इस आनंदमई भावना में बहने के पश्चात् सब स्नान के लिए गए और फिर स्त्रियों ने अपने वस्त्र पहन लिए. १ ने उनकी सेवा का बिल बनाया जिसे वर्षा ने स्वीकृत किया. साथियों ने नए अधोवस्त्र पहने और उन्हें पार्लर के रिसेप्शन पर ले गए. वर्षा ने बिल चुकाया और फिर मुख्य रिसेप्शन से होते हुए तीनों रेस्त्रां में अपने पुरुष परिवारजनों की प्रतीक्षा करने लगीं.

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रेस्त्रां में:

सबने प्रेम पूर्वक भोजन किया और एक दूसरे से उनका अनुभव पूछा. सबकी यही राय थी कि उनके परिवार का वातावरण अधिक आनंदकर है. परन्तु कभी कभार के लिए ऐसा स्वाद का बदलाव भी चल सकता है. राहुल ने उन्हें अपनी शिक्षिका के बारे में बताया तो सभी को एक सुखद आश्चर्य हुआ. सबने उसके घर आने पर उसे पूरा आदर और सम्मान देने का प्रण किया.

भोजन के बाद सब घर लौट आये और शेष दिन के कार्यों में व्यस्त हो गए.

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अगले दिन सुबह:

अगले दिन कुसुम और परिवार जल्दी उठ कर स्नानादि से निवृत्त होकर मंदिर दर्शन के लिए गए और वहां धन्यवाद किया और आशीर्वाद माँगा. लौटते हुए उन्हें ७ बज गए और कुसुम सीधे बंगले में अपने काम पर चली गई. अभी लोग सोकर उठने ही लगे थे. सुलभा किचन में थी और कुसुम ने जाकर उनके पांव छुए और दूध गर्म करने के लिए चढ़ा दिया. साथ ही नाश्ते की तैयारी भी शुरू कर दी. फिर चाय के लिए पानी चढ़ाया. इसके बाद दोनों को कुछ समय मिला तो बातें शुरू हो गयीं.

सुलभा: “बड़ी खिली हुई लग रही है. लगता है कल बाप बेटे ने अच्छे से चोदा है पूरे दिन.”

कुसुम: “हाँ दीदी, इतने दिन बाद सब मिले तो ये तो होने ही था. पर आपकी भी सुंदरता और चेहरे की चमक बता रही है की आपकी भी अच्छी सेवा हुई है.”

सुलभा ने षड्यंत्रकारी मुद्रा में फुसफुसाते हुए बोला: “कल सब क्लब गए थे.”

कुसुम सब समझ गई. “तभी सब अभी तक लोटे पड़े है.”

“नहीं, उठ गए होंगे. मैं तो कमरे में अकेली ही थी तो यहाँ आ गई. पर कल मजा आ गया. चूत और गांड इतनी चुदी कि मन तृप्त हो गया.”

कुसुम: “दीदी, आपका मन कभी तृप्त नहीं होता. सच बताओ, अपने घर आने पर भी किसी न किसी से चुदवाया तो होगा ही.”

सुलभा: “कल जयंत आया था. पर एक एक बार चूत और गांड मरकर चला गया. और इन्हें न जाने क्या सूझी, उसके आने के बाद वर्षा के पास चले गए. दोनों समधियों ने उसे चोदा होगा रात भर. बस मैं ही रह गयी.”

कुसुम: “दीदी, तुम चिंता मत करो. कमलेश आया हुआ है. तुम्हारी सेवा किया करेगा, जब चाहो. बस मेरे लिए कुछ दम छोड़ देना लड़के में.”

सुलभा: “तेरा बेटा है. चुदवाने के बाद इधर भेजा करना, नहीं तो हम दोनों निचोड़ देंगी उसे.”

कुसुम: “ठीक है दीदी.”

सुलभा: “वैसे कब आएंगे दोनों यहाँ आशीर्वाद लेने.”

कुसुम: “१० बजे के बाद. तब तक सब नाश्ता पानी कर चुके होंगे.”

सुलभा मुस्कुरा कर: “मेरी मान तो ९ बजे बुला लेना, नाश्ते के पहले. और संतोष को भी ले आना. नाश्ता सब साथ कर लेंगे सब परिवार वाले मिलकर.”

कुसुम अपने आप को परिवार का हिस्सा समझे जाने पर धन्य हो गयी.

“ठीक है, दीदी. मैं उन्हें बोलकर आती हूँ, फिर चाय परोस दूंगी सभी को.”

“ठीक है, जल्दी आजा. तुझसे और भी बातें करनी हैं.”

कुसुम घर जाकर सबको ९ बजे आने के लिए बोलकर लौट आयी. और चाय लेकर निकल पड़ी.

९ बजे तक सभी परिवारजन नाश्ते के लिए आये ही थे कि संतोष, काम्या और कमलेश भी आ गए.

“आओ संतोष. आओ काम्या, आजा कमलेश.” समीर ने तीनों का स्वागत किया. कमलेश और काम्या ने समीर, पवन. वर्षा और सुलभा के पांव छूकर आशीर्वाद लिया. सबने उन्हें आशीर्वाद भी दिया और गले भी लगाया.

“बहुत दिन हो गए तुम दोनों को देखे हुए. कितने दिन आये हो घर?”

“ताऊजी, ३ महीने से अधिक हो गए. सच मैं हम भी आप सबसे मिलने के लिए तरस गए थे.” कमलेश ने बताया.

“हाँ बहुत समय जो गया. अब आये हो तो नाश्ते के बाद अच्छे से मिलते हैं.” समीर ने द्विअर्थी बात कही जिसका असली अर्थ समझने में किसी को कठिनाई नहीं हुई. जयंत, अंजलि और राहुल इस बात पर मुस्कुराने लगे. काम्या ने सिर झुका लिया.

“चलिए, पहले नाश्ता करिये, फिर आगे के दिन का सोचेंगे.”

सबने अपना नाश्ता लिया और कुछ लोग डाइनिंग टेबल पर ही खाने लगे और अन्य बैठक में चले गए. समीर, कमलेश, वर्षा और काम्या बैठक में जाकर बैठे.

“ताऊजी, एक अच्छा समाचार और भी है. कल यहाँ से () कंपनी का फोन आया था और उन्होंने फोन पर ही इंटरव्यू ले लिया और मुझे नौकरी का प्रस्ताव भी दे दिया. वेतन पिछले प्रस्ताव से अधिक है.”

वर्षा ख़ुशी से बोली: “ये तो बहुत ही ख़ुशी का समाचार है. रुको, मैं तुम्हारा मुंह मीठा करने के लिए कुछ लाती हूँ.”

वो किचन में गई और कुसुम को गले से लगा लिया और बोली; “तू कब बताने वाली थी कि कमलेश को यहीं नौकरी मिल गई?”

कुसुम झेंप गई, “दीदी, बस आपके की पास आने वाली थी. इसके पहले समय ही नहीं मिला.”

वर्षा: “कोई बात नहीं. बच्चे इतने दिन बाद आये हैं, तुझे सच में कहाँ समय मिल पाया होगा. अब कमलेश का मुंह मीठा करने के लिए कुछ दे.”

मिष्ठान लेकर वर्षा कमलेश के पास आयी जो आदर से खड़ा हो गया. उसके मुंह में मिठाई डालकर वर्षा ने उसे फिर से आशीर्वाद दिया. फिर उसके कान में बोली: “ तेरी सबसे पसंद वाली मिठाई भी मिलेगी तुझे, बस थोड़ी प्रतीक्षा कर ले.” ये कहकर उसने कमलेश के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाकर अपना तात्पर्य जता दिया. कमलेश का लंड एक झटके में खड़ा हो गया.

इसके बाद वर्षा ने काम्या को मिठाई खिलाई और उसे भी आशीर्वाद दिया.

समीर: “वर्षा, तुम तो जानती ही हो मेरे आशीर्वाद का तरीका. हम दोनों जब तक इन्हें अपना प्रसाद नहीं देंगे इनका आशीर्वाद अधूरा ही रहेगा.”

वर्षा: “बिल्कुल, पर नाश्ता कर लीजिये उसके बाद.”

सब नाश्ता समाप्त करने में व्यस्त हो गए.

नाश्ते के बाद समीर और वर्षा ने कहा की वो अपने कमरे में जा रहे हैं. उसके बाद वो दोनों काम्या और कमलेश को लेकर अपने कमरे में चले गए. कमरे में जाने के बाद समीर और वर्षा अपने कपड़े उतारने लगे. कमलेश और काम्या अभी वैसे ही खड़े थे.

“क्या हुआ तुम दोनों को? प्रसाद नहीं लोगे आशीर्वाद के साथ?”

ये सुनकर काम्या और कमलेश भी नंगे हो गए. समीर और वर्षा पास पास सोफे पर बैठ गए. अर्थ समझकर कमलेश वर्षा के आगे जा बैठा और उसकी चूत को चाटने लगा. काम्या ने भी समीर के आगे बैठकर उसके लंड पर अपनी जीभ चलाई और उसे चाटने लगी.

“तुम बच्चों की बहुत याद आती थी, अब ये जानकर ख़ुशी है कि ६ महीनों में यहीं आ जाओगे.” वर्षा बोली।

“ताईजी, हमें भी घर की याद बहुत सताती थी. पर आज हमारा भविष्य बन गया दूर रहकर.” कमलेश ने अपना सिर उठाकर वर्षा को उत्तर दिया. “और विशषकर आपकी ये चूत की खुशबू और स्वाद जिसे हम बहुत मिस करते थे.”

“अब आया है तो जी भर के पी ले मेरा पानी. जब मन करे आ जाया कर. तेरे लिए तो हमेशा खुले है ये.” वर्षा ने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए कहा. “जब तेरी माँ काम पर आया करे, तब तुझे उसकी सेवा नहीं करनी होगी. तब यहाँ आ जाया कर. क्यों जी मैंने ठीक कहा न?”

“तुमने कभी गलत कहा है?” समीर ने चुहल की.

कमलेश और काम्या अपने कथित ताई और ताऊ की चूत और लंड को चूसने चाटने में लगे रहे. दोनों के सिर पर हाथ फेरते हुए वर्षा और समीर आनंद ले रहे थे. साथ ही साथ वे अपनी गांड पर भी दोनों बही बहन की जीभ को अनिभव कर रहे थे. कुछ देर की इस गतिविधि के बाद वर्षा ने कमलेश और समीर ने अपना माल काम्या के मुंह में उड़ेल दिया, जिसे दोनों युवाओं ने प्रसाद समझ कर ग्रहण किया. पर दोनों ने अपने चेहरे को उसी स्थान पर रहने दिया और अपने बुजर्गों से आशीर्वाद लेते रहे.

वर्षा: “चलो जी. इनको तो हमने आशीर्वाद और प्रसाद दे दिया. अब इनको भी कुछ सुख दे दें?”

समीर: “तुमने तो मेरे मुंह की बात चीन ली.”

ये कहते हुए पति पत्नी ने उठकर अपने साथ बहन भाई को लिया और बिस्तर की ओर चल दिए.

और कुछ ही देर में कमलेश का लंड वर्षा की चूत की गहराई नाप रहा था और समीर का लंड काम्या की चूत की.

नायक परिवार में एक और आनंद से भरपूर सामान्य दिन का आरम्भ हो चुका था.

क्रमश:
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.२

भाग १

स्मिता का घर

आज की सुबह :

घर में मेहुल को छोड़कर सभी लोग बाहर जाने के लिए बन संवर रहे थे. आज उनके समुदाय का मासिक मिलन समारोह था. हर बार की तरह पहले प्रबंधन समिति के ५ सदस्य उन परिवारों से मिलेंगे जिनके पुत्र या पुत्री अगले महीने २० वर्ष के होने वाले थे. इसमें ये निर्धारित करने का प्रयास किया जाता था कि क्या वे समुदाय में सम्मिलित होने योग्य हैं या नहीं. समुदाय में ये देखा गया था कि कुछ परिवार इसमें कुछ अधिक समय लेते थे और उनकी संतानें कुछ महीनों बाद सम्मिलित होती थीं. इसके बाद एक नया परिवार जो जुड़ने वाला था उसका परिचय कराया जायेगा. किसी भी परिवार को जोड़ने के पहले उनके बारे में बहुत गहन छानबीन की जाती है, जिसमें ३ से ५ महीने निकल जाते हैं. और इस परिवार को प्रस्तावित करने वाले परिवार से भी इस पूरी पड़ताल के समय पैनी आंख रखी जाती है. ये अत्यंत आवश्यक था क्योंकि सभी शहर में प्रख्यात नागरिक थे और किस भी प्रकार का प्रतिकूल समाचार या बदनामी उन्हें बर्बाद कर सकती थी.

मेहुल को समझा दिया गया था कि उसे अगले महीने से सम्मिलित करने का प्रस्ताव वो देने वाले हैं. मेहुल ने इसके लिए स्वीकृति दे दी थी. मेहुल भी तैयार हो रहा था बाहर जाने के लिए, पर किसी अन्य स्थान पर.

१०.३० बजे सब निकल गए. पहले अन्य सदस्य और अंत में मेहुल.

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पिछले भाग से आगे

सुजाता का घर

पिछले सप्ताह:

अविरल जैसे ही अपने ऑफिस से घर में अंदर आया तो उसकी ऑंखें भौंचक्की रह गयीं. सोफे पर ही उसकी पत्नी सुजाता झुकी हुई थी और उसका बेटा विवेक उसे पीछे से चोद रहा था.

अविरल: “ये कुछ अधिक खुलापन नहीं है? कम से कम कमरे में जा सकते हो. कोई आ गया तो?”

सुजाता: “आता तो घंटी बजता. आपकी तरह चाबी नहीं है उसके पास. दरवाजा लॉक तो कर ही दिया था.”

अविरल: “पर फिर भी…”

सुजाता: “ फिर भी कुछ नहीं.” उसकी आवाज़ में थोड़ी खीज थी. “आप आज जल्दी निकल गए बिना कुछ किये हुए. विवेक जब कॉलेज से आया तो इसे भी चुदाई की तीव्र इच्छा थी. तो बिना समय गंवाए हमने यहीं आसन जमा लिया. आप जाकर नहा लो, तब तक हम भी निपट लेंगे.”

अविरल सिर हिलता हुआ अपने कमरे में चला गया. सुजाता की चुदास दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही थी. उसकी जितनी भी चुदाई करो, उसकी भूख बढ़ती ही थी. कभी कभी तो बाप बेटे दोनों से चुदवाकर भी वो प्यासी रह जाती थी. काश कोई ऐसा मिल जाये जो इसे शांत करे कुछ नियंत्रण में लाये. वो नहा कर निकला तो सुजाता कमरे में आ चुकी थी. उसने अविरल के होंठ चूमे।

सुजाता: “आपको बुरा लगा न. ठीक है, मैं आगे से बाहर नहीं करुँगी. पर क्या करूँ अपने आप को रोकना कभी कभी कठिन हो जाता है.”

अविरल: “श्रेया के घर का क्या समाचार है?”

सुजाता: “स्मिता से बात हुई थी. मेहुल अब ठीक है. स्मिता कल उसे यहाँ भेजेगी. पर वो स्नेहा को इस प्रकार से देखने के बाद उदास है. स्नेहा को उससे बात तो करनी ही होगी. तभी कुछ ठीक होगा. वो तो स्नेहा पर लट्टू है, पर स्नेहा उसके शर्मीले और सीधे स्वभाव के कारण उस पर अधिक ध्यान नहीं देती.”

अविरल: “पता नहीं क्यों, मैं जब उससे मिलता हूँ तो मुझे एक अनुभूति होती है जैसे वो कुछ छुपा रहा है. और जैसे वो जो दिखाता है, वो उसका सच्चा रूप नहीं है. और तुम तो जानती हो मैं किसी के चरित्र के बारे में अक्सर सही ही सोचता हूँ. अगर वो कल आ रहा है, तो मैं तुम्हे थोड़ा संभल कर रहने की राय दूंगा.”

सुजाता: “जैसा आप ठीक समझो. चलिए आपकी ड्रिंक के लिए सब रख दिया है, कुछ देर आराम करिये फिर खाना परोस दूंगी. आपकी पसंद का खाना बनवाया है.”

अविरल ने कपड़े पहने और सुजाता के साथ बाहर आ गया. बाहर विवेक उसकी प्रतीक्षा कर रहा था.

विवेक: “डैड, आई एम सॉरी, आज के लिए.”

अविरल उसका हाथ थामकर: “जाहे कुछ भी हो, इस प्रकार का प्रदर्शन सही नहीं है. सुजाता ने भी आगे से ऐसा न करने का वादा किया है. मैं तुमसे भी यही चाहूंगा.”

विवेक: “यस डैड. आई ऑल्सो प्रॉमिस.”

अविरल: “कूल. लेट अस गेट ए ड्रिंक एंड वाच सम न्यूज़.”

तीनों बैठक में आ गए. सुजाता सबकी ड्रिंक्स के लिए ट्रे लेकर आयी और बनाकर हाथों में सौंपी. फिर सब समाचार देखने में व्यस्त हो गए.

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स्मिता का घर

पिछले सप्ताह, अगली सुबह

स्मिता से ठीक से चलते नहीं बन रहा था. उसने क्रीम लगाकर अपने को थोड़ा ठीक किया. उसने बिस्तर पर सोते हुए अपने बेटे की ओर देखा. उसका लंड इस समय भी बहुत भयानक लग रहा था. उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आ गई. सुजाता की तो अब शामत आएगी. अपने आप को बड़ा चुड़क्कड़ समझती है. एक बार मेरे बेटे का लंड उसकी गांड में जायेगा तो सारी अकड़ निकल जाएगी. सम्बन्धी होते हुए भी नारी सुलभ ईर्ष्या के कारण उसकी सुजाता से एक अनकही अनबन थी. सुजाता जहाँ अपने आपको अधिक सुंदर और चुदाई में अधिक प्रवीण मानती थी स्नेहा के विचार उससे भिन्न थे परन्तु वो कुछ कहती नहीं थी. पर अब उसके पास वो हथियार था जिसकी चोट से सुजाता की नींव हिलने वाली थी. उसने झुकते हुए मेहुल के लंड पर एक चुम्बन लिया और उसके टोपे को चाट लिया. मेहुल ने एक अंगड़ाई ली.

स्मिता: “अब उठ जा, सब ये सोच रहे होंगे कि ये माँ बेटे क्या कर रहे हैं.”

मेहुल ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठों पर एक प्रगाढ़ चुम्बन लिया.

मेहुल: “यही कि तुम मुझे अभी कुछ और सिखा रही हो. सबके मन बड़ी शांति अनुभव कर रहे होंगे, ये सोचकर कि तुमने मुझे सांचे में ढाल लिया है.”

स्मिता: “उन्हें ये नहीं पता कि मैं अब तेरे सांचे में ढल चुकी हूँ और कमरे के अंदर तेरी दासी हूँ.”

मेहुल: “नहीं, मॉम. वो कल की बात थी. आप कभी मेरी दासी नहीं बनोगी. आप तो मेरी जान हो. मैं तो कल आपको सरप्राइस देने के लिए ये सब कह रहा था.”

स्मिता: “और अगर मैं कहूँ कि मुझे तुम्हारा वो रूप अच्छा लगा तो.”

मेहुल: “तो हम ये खेल इसी प्रकार से खेल सकते हैं.”

स्मिता: “मेरी एक बात मानेगा.” स्मिता ने षड्यंत्रकारी आवाज़ में कहा.

मेहुल: “मॉम, तुम्हें पूछने की भी कोई आवश्यकता नहीं है. मैंने आज तक तुम्हे किसी बात के लिए मना किया है. बताओ किसका खून करना है.”

स्मिता ने मेहुल के मुंह पर हाथ रखा: “ये क्या कह रहा है. शुभ शुभ बोल. मैं चाहती हूँ कि तू सुजाता को अपनी दासी बना ले. उसे अपना गुलाम बना ले. वो मुझे बहुत अकड़ दिखती है, बहुत बनती है मेरे सामने.”

मेहुल अपने शर्मीले और सरल रूप में परिवर्तित हो गया, “मैं ये सब कैसे कर सकता हूँ. मैं तो छोटा सा, नन्हा सा बच्चा हूँ.”

दोनों खिलखिला पड़े. फिर मेहुल गंभीर हो गया.

“मॉम, हम जब परसों उनके घर जायेंगे तो आप मुझे उन्हें सौंपकर चली आना. ये कहना कि आप तो कुछ सीखा नहीं पायीं अब वो ही कुछ सीखा सकती है. उन्हें लगेगा कि वो आपसे श्रेष्ठ है. उसके बाद मैं उन्हें सबक सिखाऊंगा. अगर आप वहां रहेंगी, तो मैं जानता हूँ कि आपको उन पर दया आ जाएगी और सारा खेल बिगड़ जायेगा.”

स्मिता खुश होकर: “ये ठीक है. अच्छा पाठ पढ़ाना उसे चुड़ैल को.”

मेहुल कुछ सोचकर: “मॉम. मैं कल आपको दो वीडियो कैमरे दूंगा. आप उसे उनके कमरे में छुपा देना. मैं चाहता हूँ कि आपके पास ये प्रमाण रहे कि वो मेरी दासी बन चुकी हैं.”

मेहुल: “मॉम, एक बात और. जब तुम अपना कैमरा लगाने जाओ, तो एक बार ये अवश्य देखना कि कहीं कोई अन्य कैमरा तो नहीं लगा हुआ.”

स्मिता: “ऐसा कौन करेगा?”

मेहुल: “अविरल अंकल. मुझे विश्वास है कि उस कमरे में कम से कम एक और कैमरा होगा.”

स्मिता: “अगर हुआ तो?”

मेहुल: “उसकी बैटरी निकल देना. मैं खेल की समाप्ति पर फिर लगा दूंगा. अगर कोई ये सोचता है कि उसे हमारे विरुद्ध कोई साक्ष्य मिल सकता है, तो उसे गलत सिद्ध करना हमारा कर्तव्य है.”

स्मिता: “मेहुल, मुझे तुमसे अब कुछ डर सा लग रहा है.”

मेहुल: “डोंट वरी, मॉम मेरे लिए सारी दुनिया से अधिक अपना परिवार प्यारा है. मैं किसी को इस पर आंच नहीं लाने दूँगा।”

स्मिता की ख़ुशी का अब कोई अंत नहीं था. वो मेहुल के षड्यंत्र की भागीदार बनाने के लिए तुरंत मान गई. इसके बाद दोनों बाथरूम में जाकर निवृत्त हुए और फिर सबसे मिलने के लिए बैठक में चले गए. मेहुल ने अपना सीधेपन का मुखौटा लगा लिया.

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सुजाता का घर

पिछले सप्ताह:

खाने के समय स्नेहा भी पहुँच गई. सबने बैठ कर खाना खाया और बातें चलती रहीं. हालाँकि अविरल के प्रयासों के बाद भी हर बार विषय मेहुल की ओर ही जा रहा था था. स्नेहा ने ये बात साफ की कि उसे मेहुल केवल इसीलिए पसंद नहीं है क्योंकि वो उसे एक दब्बू लड़का समझती थी.

अविरल: “स्नेहा, मैं कुछ देर पहले सुजाता को यही समझा रहा था. मेरे विचार से मेहुल जो प्रदर्शित करता है, उसका असली चेहरा वो नहीं है. अगर उसे ये बात पता लगी कि तुम उससे चिढ़ती हो, तो न जाने क्यों मुझे तुम्हारे लिए एक डर की भावना आती है. क्या तुमने कभी उसका अपमान किया है?”

स्नेहा: “नहीं, मैं उसे इसीलिए सहन करती हूँ क्योंकि वो श्रेया दीदी का देवर है. पर जैसे वो मेरे पीछे पालतू कुत्ते के समान दम हिलाता है, कई बार तो उसकी गांड पर लात मरने का मन करता है. मुझे तो लगता है कि उसका लंड भी ३-४ इंच से बड़ा नहीं होगा. साला भड़वा.”

अविरल ये भाषा सुनकर स्तब्ध रह गया. उसे स्नेहा के लिए एक अंजाना सा डर सताने लगा.

अविरल: “स्नेहा, मैं चाहूंगा कि तुम अपनी इन भावनाओं पर अंकुश लगाओ. देर सवेर तुम्हें उसके साथ चुदाई करनी ही है. ये हमारे समुदाय का नियम है. अगर इस प्रकार की भावना रहेगी तो हम बहुत कठिनाई में आ सकते है. जहाँ तक मेरा विचार है, सुजाता के पास वो कल आएगा. श्रेया और महक के बाद तुम्हें ही उसके साथ चुदाई करनी है. तो अगले ६-७ दिनों में या तो अपनी सोच बदलो, या समुदाय से निष्काषित होने के लिए तैयार रहो.”

स्नेहा ने समझ लिया कि अविरल बहुत गंभीर हैं. उसने समय की मांग को समझ कर अपने आप को नियंत्रित करने का वादा किया. अविरल ने भी चैन की साँस ली. पर उसे अभी भी एक अदृश्य भय सता रहा था. उसने अपने कमरे में वीडियो रिकॉर्डर रखने का निश्चय किया. वो देखना चाहता था कि मेहुल का असली रूप क्या है. स्नेहा ने हालाँकि अपना वादा किया था पर उसे इसपर टिकने का कोई भी विचार नहीं था. पर वो नहीं जान रही थी कि ऐसा करने से वो अपने लिए कितनी बड़ी समस्या खड़ी कर रही है.

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स्मिता का घर

पिछले सप्ताह, अगली सुबह

स्मिता और मेहुल जैसे भी बैठक में पहुंचे सब उठा खड़े हुए. सबसे पहले महक दौड़कर अपने भाई के गले लग गई. “भैया, आई एम सो हैप्पी.” उसके मेहुल के गाल पर एक चुम्बन लिया और फिर उसके गले लगी.

उसने कुछ देर में उसे छोड़ा तो मोहन ने उसे गले लगाया. “आई एम हैप्पी फॉर यू ब्रो। वेलकम टू योर न्यू लाइफ.”

फिर विक्रम ने भी इसी सन्देश के साथ उसे गले लगाया. अंत में श्रेया महक के समान उसके गले से लगी और उसके गाल को चूमकर बोली, “क्यों देवर जी, मेरा नंबर कब आएगा?” मेहुल ने झेंपने का स्वांग किया.

मेहुल: “मैं क्या जानूँ भाभी आप ही बताना.”

श्रेया: “मम्मीजी खुश तो हो गयीं न?”

मेहुल: “मैं क्या जानूँ आप उनसे ही पूछो.”

“ए देवर भाभी, एक दूसरे को छोड़ो और चलो नाश्ता करो. बहुत देर हो रही है.” विक्रम ने कहा.

नाश्ता करने के बाद सब अपने काम पर निकल पड़े और मेहुल कॉलेज के लिए. अब श्रेया और स्मिता अकेली ही थीं. कुछ समय किचन इत्यादि का काम करने के बाद श्रेया स्मिता के पास आकर बैठ गयी.

“कैसा रहा माँ जी?”

स्मिता बताना तो सच चाहती थी पर उसे मेहुल की बात याद थी.

“ठीक ही था. अभी और सिखाना पड़ेगा. सुजाता ही आगे की शिक्षा देगी तो ठीक रहेगा. मुझसे बहुत शर्मा रहा था.”

ये सुनकर श्रेया को अपनी माँ पर बहुत गर्व हुआ. उसने ये न समझते हुए कि ऐसा करना सही है या नहीं तुरंत सुजाता को फोन लगा लिया. स्मिता भीतर से तिलमिला उठी. वो तो अच्छा हुआ कि सुजाता ने फोन नहीं उठाया नहीं तो वो अवश्य ही कुछ कर बैठती.

कुछ देर में श्रेया ने कहा कि वो नहा कर आती है और फिर खाना बनाएगी. स्मिता टीवी पर अपना कोई सीरियल देखने लगी. भी श्रेया नहा कर निकली ही थी कि उसकी माँ का फोन आ गया.

सुजाता: “हेलो श्रेया, फोन किया था.”

श्रेया: “हाँ मॉम, मैंने मम्मीजी से पूछा कि कल मेहुल के साथ कैसा रहा. तो कह रही थीं कि उसे सीखना पड़ेगा. फिर कहने लगीं कि उनसे तो मेहुल शर्मा रहा था, इसीलिए आप सिखाएंगी तो अच्छा रहेगा.”

सुजाता: “सिखाऊंगी उसे. अभी भी एक लौंडा ट्रेनिंग पर है. अपनी चूत और गांड चाटना पहले सिखाऊंगी. ऐसे सीधे लड़के को तो मैं अपना गुलाम बनाकर रहूंगी, जैसा इसे बना लिया है. हो सका तो विवेक से चुदवाकर उससे सफाई कराऊँगी.”

श्रेया: “मॉम, ऐसा कुछ मत करना जिससे मुझे इस घर में कठिनाई हो जाये. अभी कौन है तुम्हारी ट्रेनिंग में?”

सुजाता: “तू चिंता न कर, ये सब अभी नहीं, एक बार मेरे सांचे में उतर गया तब. ये अपनी शीतल का बेटा है, केशव। शीतल ने भेजा है सीखने के लिए.”

श्रेया: “माँ, फोन मत काटना, जरा मैं सुनूँ तो कैसे ट्रैन करती हो.”

सुजाता हँसते हुए: “अच्छा मैं फोन रख रही हूँ.”

ये कहकर सुजाता ने फोन एक ओर रख दिया पर बंद नहीं किया. अब श्रेया को साफ सुनाई दे रहा था.

सुजाता: “हाँ बीटा, ऐसे ही चाटते है, अच्छे से खोल मेरी गांड। हाँ अब अपनी जीभ अंदर कर.”

केशव: “आंटी, ये गन्दा है.”

सुजाता: “भोसड़ी वाले, तेरी माँ की चूत नहीं चाटता है क्या?

केशव: “चाटता हूँ.”

सुजाता: “और गांड?”

केशव: “नहीं.”

सुजाता: तभी तेरी माँ तुझे अच्छा मादरचोद नहीं बना पाई और इधर भेज दिया. अब नखरे मत कर और डाल अपनी जीभ अंदर और अच्छे से चाट, नहीं तो….”

अब श्रेया के फोन रख दिया, उसके भी मन में भी चुदाई की इच्छा उठ गई थी. उसने हल्का सा गाउन पहना और बैठक में चली गई.

श्रेया स्मिता के पास जा बैठी. “मम्मी का फोन आया था. मैंने बताई आपकी बात. कह रही थीं कि उन्हें मेहुल भैया को सीखने में ख़ुशी ही होगी.” बड़ी सफाई से उसने पूरी बात छुपा ली.

स्मिता सीधे देखते हुए बोली, “हाँ, वही सही सिखाएगी सही सही.” स्मिता ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा.

श्रेया: “मम्मीजी, अभी आप कुछ कर रही हैं क्या?”

स्मिता समझ गई. “क्यों, तेरी चूत में खुजली हो रही है क्या?”

श्रेया: “जी, आप तो समझती ही हैं.”

स्मिता: “जा, मेरी अलमारी से डिल्डो लेकर आजा, दोनों एक दूसरे को मजा देते हैं.”

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सुजाता का घर:

आज मेहुल और स्मिता सुजाता के घर आने वाले थे. सुजाता ने अपने आप को बना संवार कर बहुत भड़काऊ कपड़े पहने हुए थे. उसने अपनी झांटे और बगल को आज ही फिर से साफ किया था. घर में उसके सिवाय कोई और नहीं था. इस समय उसकी चूत बिल्कुल चिकनी थी. उसकी चूत आने वाले आनंद के अंदेशे में पानी छोड़ रही थी. इतने में ही घंटी बजी. सुजाता ने लपक कर दरवाजा खोला तो पाया की स्मिता और मेहुल ही हैं. उसने स्मिता को गले लगाया और उसके गाल पर चुम्बन लिया. इसके बाद उसने मेहुल को भी गले लगाया.

सुजाता: “आओ, आओ. मैं तुम्हारी ही राह देख रही थी.”

स्मिता: “क्या हमें आने में देर हो गई?”

सुजाता: “नहीं, नहीं. मैं ही कुछ उत्सुक हो रही थी. आज एक नया लौड़ा जो मिलने वाला है.”

स्मिता: “श्रेया तो बता रही थी कि तुम आजकल केशव को ट्रैन कर रही हो.”

सुजाता: “हाँ, पर उसकी बात और है. मेहुल तो अपने घर का बेटा है. इसे तो मैं ऐसा प्यार करना सिखाऊंगी कि ये सबसे तेज चुड़क्कड़ बनेगा नए लड़कों में से.”

स्मिता: “वैसे तुम्हारे इस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से कितने चुड़क्कड़ निकले हैं.”

सुजाता गर्व से: “मैंने गिनना छोड़ दिया है. अरे अंदर तो आओ।”

सब अंदर चले आते हैं और बैठक में बैठ जाते हैं.

स्मिता अपने रोल के अनुसार सुजाता को बताती है कि मेहुल का पारिवारिक सम्भोग में उद्घाटन तो हो चूका है, पर उसके शर्मीले स्वभाव के कारण स्मिता उसे कुछ सीखा नहीं पाती है.

“इसीलिए मैंने सोचा कि तुमसे अच्छा और कौन होगा जो ये शुभ कार्य करे. घर के घर में ही जब इतनी अनुभवी शिक्षिका है तो बाहर क्यों जाना. और अगले महीने इसे समुदाय में भी सम्मिलित जो होना है. कहीं हंसी न उड़े इसकी.”

सुजाता उठकर मेहुल के पास बैठी और उसके गाल पर हाथ फिराते हुए बोली: “मेरे ऊपर से निकला कोई भी हंसी का पात्र नहीं बनता.”

स्मिता: “पर मेहुल ने एक शर्त रखी है. अगर वो मानोगी तभी वो आगे बढ़ेगा अन्यथा मेरे साथ लौट जायेगा.”

सुजाता: “कैसी शर्त?”

स्मिता: “ये कि जब तक ये घर की सभी स्त्रियों के साथ चुदाई नहीं कर लेता, तुम इसके प्रदर्शन के बारे में किसी से भी नहीं बोलोगी. अन्यथा हमारे संबंधों में टूटने की भी स्थिति आ सकती है.”

सुजाता समझी कि मेहुल बहुत कमजोर होगा और संभवतः उसका लंड भी छोटा होगा इसीलिए ऐसी शर्त रखी है. उसने बिना झिझक के इसे स्वीकार कर लिया.

इस बार स्मिता ने कठोर शब्दों में कहा: “किसी से नहीं अर्थात किसी से भी नहीं. अगर हमें पता चला कि तुमने इसका उल्लंघन किया है तो श्रेया को इस घर से नाता हमेशा के लिए तोड़ना होगा या हमारे घर से.”

सुजाता समझ गई कि स्मिता बहुत गंभीर है, क्योंकि इस स्वर में उसने कभी भी उससे बात नहीं की थी. सुजाता ने फिर विश्वास दिलाया कि उसे अपने वादे को तोड़ने का कोई भी अभिप्राय नहीं है. जब स्मिता जान गई कि मछली जाल में फंस चुकी है तो उसने बाथरूम जाने के लिए कहा.

स्मिता: “अगर तुम्हे कोई आपत्ति न हो तो मैं उस कमरे में जाकर देखना चाहती हूँ कि सब ठीक है.”

सुजाता ने कहा कि वो उसके कमरे में चली जाये. स्मिता ने उस कमरे में जाकर अच्छा सा स्थान देखकर दो कैमरे लगा दिए और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग चालू कर दी. दोनों ८ घंटे तक रिकॉर्ड कर सकते थे. फिर उसने अन्य कैमरे की तलाश की और उसे एक कैमरा मिल गया. मेहुल के बताये अनुसार उसने उस कैमरे की बैटरी निकली और कैमरे के पीछे रख दी. फिर वो बाथरूम में गई और मुंह धोकर बाहर आ गई. उसने मेहुल को अंगूठे से संकेत दिया कि काम पूरा हो गया है.

स्मिता: “सुजाता, अब मैं जाना चाहूंगी. अपने बेटे को तुम्हे सौंप कर जा रही हूँ. इसका ध्यान रखना. अरे मेहुल जरा सुनो तो.”

मेहुल उसके पास गया तो स्मिता ने उसे तीनों कैमरे के स्थान बता दिए. इसके बाद उसने दरवाजा खोला और बहुत ख़ुशी के साथ घर की ओर चल पड़ी.

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सुजाता इस समय फूली नहीं समा रही थी. उसके वश में आने वाला ये चौथा लड़का होगा. और इसे वश में करने में उसे सबसे अधिक आनंद भी आएगा और गर्व भी होगा. उसे इस बात से कोई संकोच नहीं था कि वो उसकी बेटी का देवर है. मेहुल भी कुछ कुछ उसका स्वभाव समझ चुका था. वहीँ उसकी माँ ने उसे न भूलने वाला सबक सीखने का भी आदेश दिया था. और उसने अपनी माँ के अपमान का बदला तो लेना ही था. पर इससे पहले उसे कुछ और भी जानना था. और अभी.

“आंटी जी, एक बात तो बताइये, प्लीज.” उसने सकुचाने का स्वांग किया.

“पूछो”

“ये स्नेहा मेरे बारे में क्या सोचती है?” अगर सुजाता ने सच कहना था तो यही समय था. उसको छोड़ने के बाद उससे सच की अपेक्षा नहीं थी. और सुजाता अपने अभिमान में कि वो मेहुल को अपना गुलाम बनाएगी, सच कह बैठी. उसने ये सोचा कि लड़के को झटका देने का यही सही समय है.

सुजाता: “वो तुमसे बहुत चिढ़ती है. अब तुम हो ही ऐसे दब्बू और डरपोक. कोई भी तुम्हारा सम्मान क्यों करेगा. वो तो श्रेया न हो तो तुम्हें अच्छे से पाठ पढ़ाये. अरे भोंदू, लड़की को लड़के में दम दिखना चाहिए. जो तू कुत्ते के समान उसके पीछे लार गिराता घूमता है, ये जान ले वो कभी तुझे घास नहीं डालने वाली.”

तो ये थी सच्चाई. अब एक प्रश्न और था.

“और श्रेया भाभी?”

“वो तो तुझे बहुत चाहती है. जब तेरा इस सब में सम्मिलित होने का निर्णय हुआ, तो मुझे बोली थीं कि माँ देखना मैं मेहुल भैया को ऐसा तेज बनाऊंगी कि सब दंग रह जायेंगे. तुझ पर जान छिड़कती है.”

“हम्म्म, चलो अब सब कुछ साफ हो गया.” मेहुल ने मन में सोचा.

सुजाता: “और कुछ पूछना है या तेरी ट्रेनिंग शुरू करें?”

मेहुल: “यहाँ?

सुजाता: “अरे भोंदू, यहाँ नहीं, मेरे कमरे में.”

मेहुल अपने लिए निकले अपशब्दों को खून का घूँट पी कर सह रहा था. उसने अपनी माँ के साथ अपने अपमान का भी बदला लेना था.

उधर अविरल का मन अपने ऑफिस में बहुत बेचैन था. उसे डर था कि कुछ अनहोनी घटने को है. उसने अपना फोन निकला और सुजाता को कॉल किया. सुजाता ने फोन पर अविरल का नाम देखा और उसे उत्तर नहीं दिया. बल्कि उसने मेहुल को अपने पीछे आने का आदेश दिया. दोनों सुजाता के कमरे में चले गए और सुजाता के फोन ने भी बजना बंद कर दिया. सुजाता ने कमरा बंद किया.

सुजाता और मेहुल दोनों एक दूसरे को शिकार के रूप में ताक रहे थे. अब इसमें से एक ही जीत सकता था और वो अभी भी भीगी बिल्ली ही बना हुआ था. बंद कमरे में सुजाता एक सिंगल सोफे पर महारानी के समान जाकर बैठ गयी.

सुजाता: “मेहुल, तुमने तो सुन ही लिया है कि मैंने कई लड़कों को चुदाई की विद्या सिखाई है. मैं तुम्हें भी वही ज्ञान दूंगी. पर उसके लिए तुम्हें शिक्षण समाप्त न होने तक मेरे गुलाम की तरह रहना होगा. उसके बाद तुम स्वतंत्र हो जाओगे.”

मेहुल: “इसमें समय कितना लगेगा?

सुजाता: “तीन महीने.”

मेहुल: “या जब तक मैं सीख न जाऊं.”

दोनों ने इसका अर्थ अलग समझा. सुजाता समझी कि मेहुल अधिक समय लेगा, जबकि मेहुल आज ही सुजाता का मालिक बनने के लिए आतुर था.

मेहुल: “आंटीजी, क्या मैं आपसे एक अनुरोध कर सकता हूँ”

सुजाता: “बोलो.”

मेहुल: “मुझे काजल लगाए हुए महिलाएं बहुत भाती है, तो क्या आप भी लगा सकती हो.”

सुजाता: “हाँ, लगा लेती हूँ.”

सुजाता अपनी ड्रेसिंग टेबल पर गयी और काजल लगाकर लौट आयी.

मेहुल: “आप बहुत सुंदर लग रही हो, एकदम अप्सरा जैसी. अब बताइये क्या करना है. ”

सुजाता: “इसके लिए तुम्हें सबसे पहले मेरे पैरों में स्थान लेना है, और मेरे दोनों पैरों को तलवे सहित पूरा चाटकर साफ करना है. उसके बाद मैं अगला चरण बताऊंगी.” ये कहकर सुजाता ने अपने सुंदर पैर आगे बढ़ा दिए.

मेहुल उन्हें देखकर उनकी सुंदरता पर लट्टू हो गया. पर मेहुल के लिए ये कुछ नया नहीं था. उसकी अनगिनत प्रशिक्षिकाओं में से एक ने उसे इस कला में भी निपुण किया था. और आज उस कला को एक नए साथी पर आजमाने का समय था. मेहुल ने एक पांव उठाकर उसके अंगूठे को चूसना शुरू किया और क्रमशः उसने उस पूरे पांव को अपने थूक से गीला करके चाट और चूस कर साफ किया. यही क्रिया उसने दूसरे पैर के साथ भी की. सुजाता जहाँ उसे डांट कर, गाली देकर अपनी श्रेष्ठता दिखाना चाहती थी, वासना की लहरों में बहने लगी. इस लड़के में गुलामी के सब गुण हैं, ये सोचकर उसने अब अगले चरण में जाने का निश्चय किया.

सुजाता: “अगला चरण होता है, औरत की चूत और गांड को चाटना। चूत चाटना तो बहुत लोग कर लेते हैं, पर गांड चाटने में कुछ ही निपुण हो पाते हैं.”

मेहुल: “पर आंटी जी, मेरे लंड का नंबर कब आएगा?”

सुजाता उसकी ओर उलाहना भरी दृष्टि से देखकर: “आज तो मैं तेरे लंड को केवल हाथ से झड़ा दूंगी. बाकी समय तुझे बस मेरी गांड और चूत ही चाटना है आज. अगली बार, हुआ तो तेरे लंड को चूस दूंगी. ये मत भूल कि तू मेरा दास है. मैं जो कहूँगी, वही होगा.”

मेहुल डरने का अभिनय करते हुए: “जी आंटी।”

सुजाता: “और अब तू मेरे कपड़े निकाल और उन्हें अच्छे से संभाल कर वहां पर रख.”

ये कहकर सुजाता खड़ी हुई और एक मादक सी अंगड़ाई ली. मेहुल ने पास जाकर उसके नाममात्र के वस्त्रों को उसके सुन्दर मखमली शरीर से अलग किया और संभालकर बताये हुए स्थान पर रख दिया. ये करते हुए उसने एक पैनी दृष्टि से उन स्थानों का अवलोकन किया जहाँ पर उसके कैमरे थे. उसने पाया कि वे पूरा विवरण अच्छे से रिकॉर्ड कर रहे हैं. उसने ये भी तय कर लिया कि उसे किस कोण से सुजाता के अभिमान को तोडना है.

सुजाता इस बार बड़े सोफे पर बैठी और अपने पांव फैला लिए. उसकी चिकनी सपाट चूत बहुत ही लुभावनी लग रही थी. पर जब वो अपने कर्मकांड से निपटेगा तब इसकी सुंदरता ऐसी नहीं रह पायेगी. और फिर आंख सुजाता की गांड पर पड़ी. उस संकरी गली में लगता था बहुत राही नहीं गए थे. या अपनी छाप नहीं छोड़ पाए थे. इतनी चुड़क्कड़ औरत की गांड की कसावट देखकर उसे आश्चर्य हुआ और उसने निश्चय किया कि आज ही वो उसके भी बल निकाल देगा. अभी १२ भी नहीं बजे थे और उसके पास ५ घंटे थे. पर अभी उसने इस गुलामी और सिधाई का मुखौटा कुछ देर और लगाकर रखना था.

बस कुछ और देर….

मेहुल: “आंटीजी, क्या मैं भी अपने कुछ कपड़े निकल लूँ, बैठने में कठिनाई हो रही है.”

सुजाता: “ठीक है, पूरे मत निकाल देना. बनियान और अंडरवियर पहने रखना।”

मेहुल: “जी, आंटीजी.”

मेहुल ने अपने कपड़े एक ओर रखे और सुजाता की जांघों के बीच स्थान ले लिया. उसका असली जादू अब शुरू होने वाला था. सुजाता उसकी जीभ और उँगलियों के जादू से अवगत होने वाली थी. ये सम्भव था कि उसे समझ आ जाये कि वो उतना नौसिखिया नहीं है जितना उसने सोचा था. पर ये खतरा तो उठाना आवश्यक ही था. मेहुल ने सुजाता की जांघें कुछ और फैलायीं और एक गहरी साँस में चूत की पहली सुगंध भर ली. फिर उसने जीभ से उसकी चूत की फांकों को चाटना शुरू किया.

सुजाता ने मेहुल के इस कदम पर एक आह भरी और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया वो देखना चाहती थी कि इस लड़के में कितना दम है. मेहुल ने चूत के बाहरी हिस्से को अच्छे से चाटकर सुजाता की चूत का मुंह खोला और उस पर फूंक मारी। सुजाता को एक नयी ही अनुभूति हुई. और इससे पहले कि वो कुछ कहती मेहुल की जीभ ने अपना रास्ता खोजकर अंदर प्रवेश कर लिया. वो अपनी जीभ से अंदर की परतों को चाट कर छेड़ रहा था. उसकी चूत चाटने की कला नयी तो नहीं थी, पर विकसित अवश्य थी. सुजाता की चूत भी इस नए आगंतुक का स्वागत अपने बहाव से कर रही थी. बहती चूत से मेहुल बिलकुल भी विमुख नहीं हुआ, अपितु उसने अपनी पहुंच और भी अंदर तक बढ़ा ली.

अब मेहुल ने अपने गियर बदले. अगर सुजाता उसके लंड से साक्षात्कार नहीं करेगी, तो सारा बना बनाया प्लान चौपट हो जायेगा. और इसके लिए आवश्यक था उसे एक ऐसे शीर्ष पर ले जाना किसके लिए वो मेहुल को कुछ प्रोत्साहन दे और उसके लंड का दर्शन करे. मेहुल ने अपनी दो उँगलियों को सुजाता की बहती चूत में डुबाया और फिर उसके नितम्बों के नीचे हाथ करते हुए उसकी गांड के छेद को खुजाने लगा. सुजाता फिर एक नयी ऊंचाई की ओर उड़ चली. जब मेहुल ने ऊँगली के पानी को गांड के छेद पर मल दिया तो उसने दोबारा चूत के पानी से उसे भिगोया. और इस बार गांड में छोटी ऊँगली प्रविष्ट कर दी.
 
सुजाता उछल पड़ी. उसकी चूत भी नयी धाराएं छोड़ने को तत्पर थी, कि मेहुल ने अपने होंठों के बीच सुजाता के भग्नाशे को लिया और जोर से मसल दिया. अगर चूत का कोई प्रतिरोध था भी, तो वो समाप्त हो गया. सुजाता का निचला शरीर एक फुट से अधिक ऊपर उछला. पर मेहुल इस प्रतिक्रिया के लिए तैयार था और उसने अपने लक्ष्य से न जीभ हटाई, न उँगलियाँ. बल्कि गांड की ऊँगली सुजाता के नीचे की ओर गिरते ही पूरी अंदर चली गई. इस बार मेहुल ने चूत के अंदर जीभ को सरपट दौड़ते हुए भग्नाशे को दाँतों से दबा दिया. सुजाता चीख पड़ी और संभवतः कुछ सेकण्ड के लिए बेहोश हो गई. उसकी चूत नदी के समान बहे जा रही थी और मेहुल उस जल से अपनी प्यास बुझा रहा था. जब सुजाता होश में आयी तो मेहुल ने अपनी ऊँगली गांड से निकाली और भग्नाशे को चूमकर चूत के चारों ओर चाटकर साफ कर दिया.

मेहुल: “आंटीजी, मैंने ठीक तो किया न?”

सुजाता: “अरे दुष्ट, बहुत अच्छा किया. किसने सिखाया तुझे? बहुत ही अच्छा मजा आया.”

मेहुल: “आंटीजी, बस ब्लू फिल्मों से ही सीखा है. आंटीजी, अगर अच्छा हुआ है तो अपने विद्यार्थी को कुछ पुरुस्कार दीजिये.”

सुजाता कुछ सोचकर: “सच में तुझे कुछ तो मिलना ही चाहिए. वैसे भी मैं तेरे लंड की मुठ मरने वाली तो हूँ ही. आज उतना ही करूंगी, पर अगली बार चूस भी दूंगी. और अभी तुझे मुझे अपनी गांड भी चटवानी है.”

मेहुल: “आंटीजी, आप जब बोलेंगी, मैं आपकी गांड चाट दूंगा. अभी आप मुझे मेरा पुरुस्कार दे दीजिये, बहुत दर्द हो रहा है.”

सुजाता: “ठीक है. अभी अपने पास समय भी है. चल अपने बाकी कपड़े निकाल। तेरी मुठ मार देती हूँ.”

मेहुल ने पहले बनियान और फिर अंडरवियर उतार फेंका. इसके साथ ही उसका विकराल लौड़ा सुजाता के चेहरे के सामने लहरा उठा. सुजाता की ऑंखें फट गयीं. और मेहुल ने अपना मुखौटा उतार फेंका. अब वो एक वहशी का रूप ले चुका था. बस कुछ ही समय में सुजाता इसकी निर्ममता का उदाहरण देखने वाली थी. उसके बचने का एक ही उपाय था. और मेहुल उसे वो उपाय न करने देने के लिए कटिबद्ध था.

सुजाता: “इतना बड़ा लंड है तेरा.”

मेहुल: “जी आंटीजी. क्यों आपको अच्छा नहीं लगा?”

सुजाता: “नहीं नहीं. ऐसा नहीं है. और तूने स्मिता की चुदाई भी की थी इससे?”

मेहुल: “जी आंटीजी. पर मम्मी को तो अच्छा लगा था.”

ये सुजाता के अभिमान पर चोट थी.

सुजाता: “मेरे विचार से जब मैं इससे चुदूँगी तब मुझे भी मजा ही आएगा. पर चल अभी मैं इसे मुठ मार देती हूँ.”

मेहुल: “जैसा आप चाहो. मैं तो आपका गुलाम हूँ. पर मम्मी ने तो मुंह में भी लिया था. आप शायद न ले पाओ .....”

मेहुल ने अपना अंतिम अस्त्र छोड़ा. अगर सुजाता इसे मुंह में ले ली तो आज उसका हालत दया करने लायक होने वाली थी. पर जैसा कहा गया है, “विनाश काळा, विपरीत बुद्धि.” तो सुजाता ने भी इस चुनौती को स्वीकार कर लिया.

सुजाता: “मेरे विचार से स्मिता को कठिनाई हुई होगी. पर चल मैं थोड़ा चूस ही देती हूँ. तू भी क्या याद रखेगा.” सुजाता हार मानने को तैयार नहीं थी. और ये सुनकर मेहुल की आँखों का रंग बदल गया. उसके अंदर का राक्षस पूर्ण रूप से जग गया. बस …

और सुजाता ने मेहुल के लंड को अपने मुंह में डाला और बाहरी रूप से पुचकारने लगी. उसने जैसे ही लंड को थोड़ा सा अंदर लिया, मेहुल ने अपने पत्ते खोल दिए. अपमान का बदला लेने का समय आ चुका था और शिकार उसके जाल में स्वयं फंस गया था. उसने सुजाता के सिर के पीछे हाथ रखा. सुजाता ने अपनी ऑंखें ऊपर करके इसका अभिप्राय समझना चाहा. उसकी ऑंखें मेहुल से मिलीं और उसने उन आँखों में जो देखा उससे उसका अस्तित्व हिल गया. उसने लंड को मुंह से निकालने का प्रयास किया. पर मेहुल की शक्तिशाली पकड़ उसके आगे बहुत अधिक थी. मेहुल ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसे देखा.

मेहुल: “आंआंआंआंआंआंटी जी…” और इसी के साथ एक झटके के साथ अपने हाथ से सुजाता का सिर अपने लंड की ओर खींचा और अपनी कमर के झटके से अपने लंड को सुजाता के मुंह में पेल दिया. लंड गले से भी आगे तक उतर गया और सुजाता साँस न ले सकने के कारण छटपटाने लगी. उसकी आँखों से आंसू निकल आये.

मेहुल ने लंड को गले तक दबाकर रखते हुए १० तक गिनती गिनी और फिर लंड को बाहर निकाल लिया जिससे कि सुजाता साँस ले पाए. सुजाता के चेहरे पर अब आंसुओं से मिलकर काजल बह रहा था. मेहुल ने उसे साँस सँभालने का समय दिया और फिर अपने लंड को उसके मुंह में डालने लगा. सुजाता ने डर से मुंह खोल दिया और मेहुल ने वही प्रक्रिया अपनायी.

मेहुल: “आंआंआंआंआंआंटी जी, आन.. टी…जी. आपका गुलाम आपकी सेवा में लगा है आंटी जी.” लंड बाहर निकालकर फिर वही क्रम २ बार और चला. उसके बाद मेहुल ने अपना लंड बाहर निकला और सुजाता के मुंह पर उससे थप्पड़ मारने लगा. सुजाता इस समय कोई उत्तर देने की स्थिति में नहीं थी. मेहुल ये समझता था और उसने सुजाता के लिए ही उत्तर दे दिया.

मेहुल: “आंटीजी, आपका कुछ न कहना ही आपकी सहमति है. और क्या है न आपका ये गुलाम अब आपकी चूत की सेवा करने की आज्ञा मांग रहा है. तो बिस्तर पर ही चलते है.” मेहुल ने अपना हाथ सुजाता के सिर से हटाया ही नहीं था.

और इस बार उसने उसे बालों से पकड़ा और बिस्तर की ओर धीमी गति से चल पड़ा. सुजाता को समय से होश आ गया और वो अपने हाथ और पांवो के बल मेहुल के पीछे कुतिया के जैसे चल पड़ी. मेहुल बाल खींच नहीं रहा था, पर सुजाता को डर था कि अगर उसने नानुकुर की तो ये भी संभव है.

बिस्तर के पास जाने के बाद मेहुल खड़ा हो गया और मुड़कर सुजाता की आँखों में देखकर बोला: “आंटीजी, जाकर थोड़ा वेसलीन या कोई अन्य जैल ले आईये. अगर नहीं है तो जो भी तेल आप लगती हैं उसे ले आइये. मुझे पता नहीं है कहाँ रखा है, नहीं तो ये गुलाम आपको ऐसा कष्ट नहीं देता.”

सुजाता लड़खड़ाते हुए उठी और वेसलीन क्रीम ले आयी.

मेहुल: “अब थोड़ा इस लौड़े को चूस लीजिये और इस पर ये क्रीम लगा दीजिये.”

सुजाता ने उसके लंड को जितना संभव हो सका चूसा और क्रीम से लथपथ कर दिया. ये सोचकर कि इस क्रीम से उसकी चूत की धज्जियाँ नहीं उड़ेंगी.

मेहुल: “आप बहुत अच्छी मालकिन हैं, आंटीजी. चलिए अब बिस्तर पर लेट जाइये. जो आप अगले दिनों के लिए सोच रखी थीं, उस कार्यक्रम को क्यों न आज ही कर लें जिससे आप मेरी क्षमता को देख सकें और मेरे प्रशिक्षण में किन बिंदुओं पर ध्यान देना हो उसे आप गहराई से नाप सकें.”

सुजाता ने अब स्वयं को अपने भाग्य के हाथों सौंप दिया था. उसकी आँखों से आंसू बहकर काजल को भी उसके चेहरे पर बहा रहे थे. वो अपने पति और बच्चों को याद करते हुए बिस्तर पर लेट गई. मेहुल ने उसकी दशा को समझ लिया पर अब रुकना सम्भव नहीं था. सुजाता को अपना स्थान दिखाना ही था. उसने सुजाता के दोनों पांव चौड़े किये और क्रीम की शीशी से उसकी चूत में क्रीम डालकर दो उँगलियों से उसे चारों ओर मल दिया. जब उसने पाया कि सुजाता की चूत उपयुक्त रूप से चिकनी हो गई है तो उसने उसकी जांघों के बीच स्थान लिया.

“आंटीजी, आपने मुझे सेवा का अवसर प्रदान किया, इसीलिए आपका ये गुलाम आपकी आज हर तरह से और हर छेद में सेवा अर्पण करेगा.”

कहते हुए मेहुल ने अपने लंड को सुजाता की चूत पर रखा और बहुत ही संयम के साथ दबाव बनाने लगा. पहले उसके टोपे ने लक्ष्य भेदा और फिर उसके पीछे शेष लंड आगे बढ़ने लगा. कोई पांच से छः इंच अंदर जाने के बाद मेहुल ठहर गया. सुजाता ने भी गहरी साँस ली. अभी तक सब सामान्य था. सम्भव है कि अब ये ठीक से ही चोदे. वैसे लौड़ा है भी काफी चौड़ा, मेरी चूत फैला दी इसने. उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए. काजल की कालिख में भी मेहुल ने इन्हें पढ़ लिया.

“आंटीजी, आपने मेरी मम्मी का अपमान करके बड़ी गलती की. क्या है न आप मुझे कुछ भी कहो, मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता. पर मम्मी का ये अपमान, मैं सहन नहीं कर सकता.”

“मुझे माफ़ कर दे, मेहुल. मैं स्मिता से भी माफ़ी मांगूगी. मैं अपने नशे में इतनी खो गई थी कि अपने पराये का भी ध्यान नहीं रखा.”

मेहुल अब अपने लंड को बहुत धीमी गति से चूत में आगे पीछे चला रहा था.

“आपका नशा इतना था कि आप अपनी बेटी के देवर को गुलाम बनाना चाहती थीं. आपने स्नेहा को कभी ये नहीं समझाया कि उसकी सोच सही नहीं है. आंटीजी, ऐसे नशे को सदैव के लये उतारना आवश्यक है.”

ये कहकर मेहुल ने टोपे को अंदर रखकर शेष लौड़े को बाहर खींचा, उसने सुजाता के दोनों मम्मों को हाथ में लिया और जोर से भींचते हुए एक लम्बा करारा धक्का मारा. कमरा सुजाता की चीख से सहम गया. सुजाता तड़प रही थी और अपने हाथ पांव हर ओर फेंक रही थी. मेहुल उसके मम्मों को बेदर्दी से मसले जा रहा था.

मेहुल: “गुलाम मैं बनाता हूँ आंटीजी, बनता नहीं हूँ.”

सुजाता की आँखों के आगे तारे नाच रहे थे. उसे लग रहा था कि किसी ने उसकी चूत के न जाने कितने भाग कर दिए है. ऐसा दर्द तो उसे अपनी पहली चुदाई में भी नहीं हुआ था. ये तो अच्छा था कि अब मेहुल रुका हुआ था और उसकी चूत को अभ्यस्त होने दे रहा था. कुछ समय के बाद सुजाता की आँखों के आंसू सूख गए और काजल की कालिख ने उसके सुंदर चेहरे पर एक अजीब सा चित्र बना दिया था. उसने दयनीय दृष्टि से मेहुल को देखा.

सुजाता: “मुझे माफ़ कर दो बेटा। मुझ पर दया करो. मेरे बच्चे क्या करेंगे मेरे बिना. मैं मर गयी तो तुम्हें भी जेल हो जाएगी. मुझे मत मार.”

मेहुल: “अरे रे रे रे, आंटीजी, मेरी मालकिन होकर आप ऐसे बोल रही हैं. ऐसे कैसे चलेगा.”

मेहुल ने भांप लिया था कि सुजाता की पीड़ा कम हो चुकी है, इसीलिए वो इतना कुछ बोल पायी. उसने अपने लंड को सुजाता की फटी पड़ी चूत में चलना शुरू किया. पहले उसने बहुत ही धीमी गति रखी. जब उसे लगा कि चूत ने अपने रस से रास्ते को सरल बना दिया है, तो उसने गति बढ़ा दी. चूत के पानी छोड़ने से सुजाता को भी अब पीड़ा में कमी लग रही थी और उसके अंतरंग भागों में एक अनजानी सी अनुभूति हो रही थी. एक मीठी कसक जो उसने पहले कभी अनुभव नहीं की थी. संभवतः ये मेहुल के विकराल लौड़े की पहुँच ही थी जिसने उसके अनछुए हिस्सों को भी सहला दिया था.

सुजाता के चेहरे आते आनंद और पीड़ा की भावों को मेहुल पढ़ने में सक्षम था. उसने अपनी गति को बढ़ाया और अब वो लौटकर दुर्दांत चुदाई में जुट गया. सुजाता एक गुड़िया के समान उसके इन भीषण आक्रमण को झेल रही थी. उसके चूत को जिस प्रकार मथा जा रहा था वो उसकी कल्पना के परे था और उसे अब इसमें आनंद आने लगा था. अचानक उसकी ऑंखें कामोतकर्ष की अधिकता से बंद हो गयीं. उसे पता भी नहीं चला की वो चिल्ला रही है.

“मार ले मेरी चूत, फाड़ डाल इसे. बहुत सताती है. आज इसकी प्यास मिटा दे. बस और नहीं सह सकती. चोद डाल मुझे. मैं तेरी गुलाम बन गयी. १०० लोगों के सामने तेरा लंड चूसूंगी. सूसू पियूँगी तेरा. जो तू कहेगा सो करुँगी. बस मुझे चोदना बंद मत करना. मरते दम तक मुझे चोदना।”

मेहुल भी सुजाता के इस आत्मसमर्पण से खुश हो गया. वो यही सुनने के लिए आतुर था.

“आंटीजी, तो आप मेरी गुलाम बनने के लिए तैयार हो.”

“हाँ बेटा। मैं तो तेरी गुलाम हो गई और स्नेहा को भी बनवा दूंगी. मेरे मालिक को बुरा भला कहती है. तू मेरा मालिक पहले है और वो मेरी बेटी बाद में. चोद दे मुझे. बस चोदते रह.”

अब सुजाता की चूत से इतना पानी बहे जा रहा था कि वो बीच बीच में झड़ते हुए कुछ सेकंड के लिए बेहोश हो जाती. फिर होश में आते ही फिर बड़बड़ाने लगती. उसका मानसिक संतुलन मानो खो गया हो. शरीर की भूख ने उसकी बुद्धि हर ली थी. पर इस बार जब वो झड़कर बेहोश हुई तो उसका शरीर कांपते हुए जैसे एक तंद्रा में चला गया. वो इस अवस्था में कोई दो से तीन मिनट तक रही. और फिर उसका शरीर ढीला पड़ गया. मेहुल ने उसकी इस अवस्था को समझा और अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल लिया. वो अभी भी नहीं झड़ पाया था. वो उठकर खड़ा हुआ और अपने द्वारा किये हुए संहार का अवलोकन करने लगा. सुजाता का पूरा शरीर लाल हो चुका था. हमेशा अत्यंत सुंदर लगने वाली वो स्त्री इस समय एक अश्लील लग रही थी. उसकी फटी हुई चूत अभी भी अपना रस बहा रही थी.

मेहुल ने उठकर अपना फोन उठाया और सुजाता के इस अवस्था में कई चित्र लिए. सुजाता ने आंख खोली और उसकी ओर देखकर मुस्कुराई. और चित्र लिए गए. फिर मेहुल ने वीडियो ऑन किया और पूरे शरीर का एक एक हिस्सा फिल्माया, विशेषकर चूत जो अभी भी अपने सामान्य आकार में नहीं आयी थी. सुजाता ने अपनी उँगलियाँ अपनी चूत पर लगायीं तो उसकी ऑंखें फ़ैल गयीं. फिर उसने बहते हुए रस को लिया और अपने चेहरे पर मला.

“मेहुल, जब तुम्हारा रस पियूँगी और मुंह पर मलूँगी, तब मुझे शांति मिलेगी.”

मेहुल ने फोन बंद कर दिया, और बोला: “ आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी. चलिए अब आप अपना चेहरा धो लीजिये।”

सुजाता ने बाथरूम में जाकर अपना चेहरा देखा तो उसे घिन आ गयी. उसने अच्छे से उसे साफ किया और फिर मूत्र विसर्जन के बाद अपने शरीर पर एक दृष्टि डाली. उसकी वासना आज शांत हो गई थी. पर उसे नहीं लगता था कि मेहुल अभी रुकने वाला है. उसके हाथ अकस्मात ही उसकी गांड पर चले गए. मेहुल ने इसकी भी माँ चोदनी ही है. उसके शरीर में एक सिहरन हुई. फिर वो एक स्वप्न के भांति चलती हुई शयनकक्ष में लौट आयी. अब मेहुल बाथरूम में चला गया.

सुजाता खड़ी रही, उसका लाल हुआ नंगा शरीर बहुत ही मादक लग रहा था. मेहुल बाथरूम से आकर उसी सिंगल सोफे पर बैठा जिस पर पहले सुजाता बैठी थी. सुजाता समझ गई कि ये संकेत है कि पासा अब पलट चूका है. पर उसे इसमें कोई समस्या नहीं लगी. पहली बार किसी ने उसके शरीर को तोड़ने वाली चुदाई की थी. और उसकी चूत अभी भी इस चुदाई के असर से कुलबुला रही थी.

सुजाता: “मेहुल बेटा, क्या बियर पियेगा?”

मेहुल: “हाँ लेकर आओ.”

सुजाता अपना गाउन डालने लगी तो मेहुल ने रोक दिया. “ऐसे ही जाओ. वैसे भी घर खाली ही है.”

सुजाता उसी अवस्था में किचन से बियर और कुछ अल्पाहार लेकर आयी.

मेहुल: “वैसे खाने में क्या बनाया है आज?”

सुजाता ने ध्यान किया कि अब मेहुल उसे आंटी नहीं बुला रहा है.

सुजाता: “ चिकन करी.”

मेहुल: “ठीक है, बाद में खाएंगे.”

ये कहकर उसने बियर का एक घूँट लिया. सुजाता उसके पांवों के बीच में बैठ गयी और फिर उसके लंड को मुंह में लेकर चाटने लगी. मेहुल ने उसके सिर पर हाथ फिराया.

“आप बहुत अच्छी दासी बनोगी. पर उसके लिए आपको मेरे पांव चाटकर साफ करने होंगे.”

सुजाता ने अपनी बात को उस पर ही विपरीत पड़ते देख अचरज किया. पर उसने लंड को छोड़कर निखिल के पांव चाटकर उन्हें साफ कर दिया. निखिल ने उसके सिर पर थप्पी देकर उसे शाबाशी दी.

मेहुल: “अब जरा अपनी जीभ से मेरी गांड को भी साफ करो.”

ये कहकर मेहुल सोफे पर उलट कर लेट गया. सुजाता बिना कुछ कहे अपने कर्तव्य का पालन किया. फिर मेहुल सीधा बैठ गया और दोबारा बियर के घूँट लेने लगा. सुजाता ने उसके अकड़ते लंड को फिर से चूसना चूरू कर दिया.

मेहुल: “तुम्हारा घर का नाम क्या है?”

सुजाता: “अविरल मुझे कभी कभी सूजी बुलाते हैं.”

मेहुल: “अच्छा नाम है, सूजी डार्लिंग.”

जब मेहुल ने बियर समाप्त की तो समय देखा. अभी २.२० हुए थे. सूजी डार्लिंग की गांड के यज्ञ का समय आ चुका था.

मेहुल: “सूजी डार्लिंग, अब जब तुम मेरी दासी बन चुकी हो तो तुम्हें मुझे पूर्ण रूप से समर्पित करना होगा.”

सुजाता समझ गई कि मेहुल किस ओर संकेत कर रहा है.

“जी”

“और इसके लिए आवश्यक है कि तुम मुझे अपने अन्य दो छेद भी भेंट करो. तुम्हारे मुंह में तो मेरा लंड जा नहीं पाया, इसका मैं दूसरा उपाय करूंगा. पर तुम्हारी गांड की भेंट तुम्हें ही मुझे अर्पण करनी होगी.”

सुजाता खड़ी हो गयी और बहुत हिम्मत के साथ बिस्तर पर बैठी और उसने शीशी से क्रीम निकालकर अपनी गांड में डाली और दो उँगलियों से उसे जितना संभव था खोलकर चिकना कर लिया. उसके बाद उसने बिस्तर पर घोड़ी का आसन किया और मुड़कर मेहुल की ओर देखकर बोली.

“मेरे मालिक. आपकी दासी सूजी आपको अपनी ये गांड भेंट करना चाहती है. मेरे मालिक, मेरी इस भेंट को स्वीकार करें और मुझे अपना लें.”

मेहुल प्रसन्न हो गया. वीडियो में इतने अच्छा संवाद उसने सोचा नहीं था. उसे इस बात का भी ध्यान हुआ कि उसने अभी तक अपनी माँ की गांड नहीं मारी है. उसका भी समय आएगा जल्दी. ये सोचते हुए मेहुल ने खड़े होकर बिस्तर पर से क्रीम अपने लंड पर मली और गांड मारने के सबसे प्रचलित आसन में स्थिति ले ली.

सुजाता ने अपने जीवन के लिए प्रार्थना की और उसे फिर उसके परिवार के सदस्यों की याद आ गयी. तभी उसे अपनी गांड में कोई मोटी वस्तु के जाने का अनुभव हुआ. उसकी तन्द्रा टूटी और वो लौटकर वर्तमान में आ गयी. उसे याद आया की मेहुल अब उसकी गांड मारने में मग्न है. उसने साँस रोकी और दाँत भींचकर आने वाली पीड़ा की प्रतीक्षा करने लगी.

मेहुल अपने लंड को सुजाता की गांड में बहुत संयम के साथ एक एक मिलीमीटर करके उतार रहा था. उसका क्रोध अब बहुत कुछ शांत हो चुका था. सुजाता के समर्पण के पश्चात उसे अधिक कष्ट देने में कोई लाभ नहीं था. अपितु उनकी इस गुलामी से वो बहुत कुछ पा सकता था. और यही सोच थी जिसने सुजाता की गांड को उस बर्बादी से बचा लिया था. इसी प्रकार कुछ समय में मेहुल के लंड ने अपना स्थान सुजाता की पूरी गांड में स्थापित कर लिया.

“सूजी डार्लिंग, तुम्हारी गांड की भेंट स्वीकार कर ली गयी है. मैं तुमसे बहुत खुश हूँ जो तुमने मुझे इस प्रकार से मुझे ये सौंपी है. पर अब इसके अच्छे से चोदने का भी समय चुका है. मैं जितना हो सके उतने प्यार से इसे चोदने पर अगर तुम्हें दर्द हो तो मुझे बताना अवश्य.”

ये कहकर मेहुल अपने मूसल को सुजाता की गांड में चलाने लगा. एक मंथर गति से चुदाई करते हुए उसने धीरे धीरे गति बढ़ा दी. सुजाता के झड़ने का क्रम फिर से आरम्भ हो गया. उसकी गांड में इतना बड़ा लौड़ा आज तक नहीं गया था और आश्चर्य ये था की उसे किंचित मात्र भी पीड़ा नहीं हुई थी. उसकी गांड में एक विचित्र सी जलन हो रही थी जो एक लहर के समान आ और जा रही थी. उसकी गांड को खोलने वाले इस बलशाली लौड़े ने उसके रोम रोम को पुलकित किया हुआ था. और जैसे जैसे मेहुल ने गति बढ़ाई वैसे वैसे उसके आनंद में बढ़ोत्तरी होती गयी. उसकी चूत भी उसके इस आनंद में उसकी साथिन थी और अपने रस की नहर बहाये जा रही थी.

सुजाता एक हाथ से अपनी चूत को रगड़ने लगी और देखते ही देखते उसके शरीर ने एक भीषण स्खलन से अपने आप को तृप्त किया. अब मेहुल भी झड़ने के करीब था और उसने सुजाता की गांड को पेलना बंद नहीं किया और जब वो झड़ गया उसके भी बहुत देर तक वो गांड को मथता रहा. फिर बहुत ही ध्यान से अपने लौड़े को खुली हुई गांड से बाहर निकाल लिया. उसका लंड वीर्य और अन्य रस से गीला था. उसने उठकर अपने फोन से सुजाता की खुली गांड और उससे टपकते हुए वीर्य का फोटो लिया और छोटा सा वीडियो बनाया. फिर उसने सुजाता को बैठने की आज्ञा दी.

“सूजी डार्लिंग. अब समय है तुम्हारे तीसरे छेद की भेंट का. आओ और मेरे लंड को चाटकर साफ करो. ध्यान रहे कि ये किस स्थान से निकला है.”

सुजाता सकपका गई. उसने ऐसी आशा नहीं की थी, पर उसे पता था कि मना करने का कोई प्रश्न ही नहीं था. उसने अपनी जीभ बढ़कर लंड को चाटते हुए बिलकुल साफ कर दिया. मेहुल ने नीचे देखकर उसके इस कार्य की प्रशंसा की.

“सूजी डार्लिंग, तुम सचमुच में मेरी सबसे अच्छी गुलाम बनोगी. आओ अब मैं तुम्हे अपने पानी से चिन्हित कर दूँ.”

ये कहते हुए उसने सुजाता को उठाया और बाथरूम में ले गया. वहां उसने सुजाता को बाथटब में लेटने की आज्ञा दी. उसके लेटने के बाद मेहुल ने अपने लंड का निशाना लगाया और उसे चेहरे से लेकर पूरे शरीर पर अपने मूत्र से नहला दिया. सुजाता कुछ न कह सकीपर जब ये परित्याग समाप्त हुआ तो उसे एक असीम सुख और रोमांच की अनुभूति हुई.

“धन्यवाद, मेरे मालिक.”

“सूजी डार्लिंग. में तुम्हे अपने गुलाम के रूप में स्वीकार करता हूँ. अब तुम स्नान करो और फिर सब कुछ वैसे ही सामान्य हो जायेगा.”

स्नान करके जब सुजाता बाहर आयी तो मेहुल अपने कपडे पहन चुका था. उसने अपने दोनों कैमरे भी निकालकर अपने बैग में रख लिए थे. तीसरे कैमरे की बैटरी भी लगा दी पर उसे बंद ही छोड़ दिया था.

“आंटीजी, मुझे विश्वास है कि आपको मेरे साथ आनंद आया होगा.”

“मेहुल, मैं बता नहीं सकती इस आनंद को. अकल्पनीय था.”

“पर आपको शर्त याद है न? एक भी शब्द किसी ने नहीं कहना है जब तक मम्मी आपको अनुमति नहीं देतीं.”

“अच्छे से याद है. और मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तुम मुझसे रुष्ट हो.”

सुजाता ने अपने सामान्य वस्त्र पहमे और दोनों बैठक में आ गए. ४ बज कर निकल चुके थे स्मिता ने ४.३० आने का समय दिया था. सुजाता ने खाना लगाया और दोनों ने सामान्य बातें करते हुए खाना समाप्त किया. उसके बाद चाय का पानी चढ़ाया और जब तक चाय बनी स्मिता भी आ गयी.

सुजाता ने चाय दी हुए स्मिता से कहा, “दीदी, मुझे क्षमा करना, मैं आपको कई पर अपमानित कर चुकी हूँ. आपके बेटे ने मुझे आज इसकी सजा दे दी है. आगे से मैं ऐसी भूल कभी नहीं करूंगी. ये कहकर सुजाता स्मिता के पांवों से लिपट गयी.

स्मिता ने उसे उठाकर गले लगाया.

“जो अपनी गलती मान लेता है, उसे क्षमा करना ही होता है. मुझे विश्वास है की अब हमारे सम्बन्ध पहले से अधिक मधुर होंगे. पर तुम्हें अपने वादे पर टिकना होगा अन्यथा ठीक नहीं होगा.”

सुजाता ने विश्वास दिलाया और फिर दूसरी बातें करते हुए चाय समाप्त हो गई और स्मिता मेहुल को लेकर घर चली गई. सुजाता उन्हें जाते हुए देखती रही और अपनी गांड सहलाते हुए अपने घर में आ गई. और साथ ही साथ अविरल भी घर आ गया.

भाग दो में जारी
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

अध्याय ८.२

भाग २

स्मिता का घर

घर लौटते हुए स्मिता बहुत खुश थी. उसे विश्वास था कि मेहुल ने अवश्य सुजाता के घमंड को चकनाचूर कर दिया होगा, तभी तो उसने मुझसे भी माफ़ी मांगी. स्मिता गाड़ी चलते हुए इसी ख़ुशी से गुनगुना रही थी. मेहुल ने अपने बैग में से दोनों कैमरे निकाले और उनके मेमोरी कार्ड निकाल लिए.

मेहुल: “घर पहुंचकर मैं इन्हें एक USB में कॉपी कर दूंगा, फिर कल आप देखना.”

स्मिता: “क्या तुम मेरे साथ देखोगे?”

मेहुल: "अगर आप कहोगी तो, पर मुझे कल १ बजे बाहर जाना है.”

स्मिता: “किसी से मिलना है?”

स्मिता: “हाँ. आने के बाद बता दूंगा.”

स्मिता: “ठीक है.”

कुछ ही देर में वो घर पहुँच गए. श्रेया उनकी प्रतीक्षा में बैठी हुई थी. उसने उठकर मेहुल को गले से लगा लिया.

“भैया, मुझे पक्का है कि अपने मम्मी को संतुष्ट कर दिया होगा.”

मेहुल का माथा ठनका, क्या सुजाता ने कुछ बोला?

मेहुल: “आप ऐसा कैसे कह रही हो भाभी?”

श्रेया: “भैया, आप इतने अच्छे हो कि आप सबका ध्यान पहले रखते हो. मैंने मम्मी से पूछा तो बोल रही थीं कि आप बहुत जल्दी सीख जाओगे और उनको आपके साथ बहुत अच्छा लगा.”

मेहुल: “और क्या बोलीं आंटीजी?”

श्रेया: “और कुछ भी बताने से मना कर दिया. कहा कि मुझे इसका अनुभव स्वयं ही करना होगा. तो भैया, आप मुझे कब समय दे रहे हो.”

मेहुल: “भाभी, कल तक तो नहीं हो पायेगा. परसों का रख लेते हैं.”

श्रेया: “महक और स्नेहा? उनका नंबर कब आएगा?”

मेहुल: “एक दिन छोड़कर. स्नेहा का अंत में.”

श्रेया: “अच्छा है. मैं स्नेहा को बता दूंगी.”

मेहुल मन ही मन में: “जैसे वो मेरे लिए मरी जा रही हो.”

फिर स्मिता से: “आप जैसा उचित समझो भाभी.”

श्रेया: “माँ जी आप और भैयाजी थोड़ा मुंह हाथ धो लो, मैं चाय बनाती हूँ. अगर मम्मी ने कुछ नहीं बताया तो आप भी बताने से रहे. मैं तो सोच रही थी कि गर्मागर्म कहानी सुनने मिलेगी. आप ने तो दिल ही तोड़ दिया.”

इस बार मेहुल श्रेया को अपने पास खींचकर बाँहों में ले लेता है. “भाभी, आपका दिल कभी नहीं तोड़ सकता, बस ये है कि आंटीजी और मैंने ये तय किया है कि स्नेहा के साथ होने के बाद मैं सब बता दूंगा.”

श्रेया: “कोई बात नहीं भैयाजी, मैं तो परसों स्वयं ही जान लूंगी।” ये कहकर उसने मेहुल के होंठ चूमे और उसे जाने के लिए कहा.

************

सुजाता का घर

अविरल जब घर पहुंचा तब तक मेहुल और स्मिता निकल चुके थे. वो बिना रुके सीधे अपने कमरे में गया और कैमरे में से मेमोरी कार्ड निकाल लिया. इसे वो कल ऑफिस में देखेगा. सुजाता ने खाने की पूरी तैयारी की हुई थी और अन्य सभी के आने की प्रतीक्षा में दोनों बैठ गए. सुजाता ने अविरल को उसकी ड्रिंक दी. अविरल पूछना तो बहुत कुछ चाहता था पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि बात शुरू कैसे करे. इस समस्या का हल सुजाता ने कर दिया.

सुजाता: “आप कुछ सोच रहे हो?”

अविरल: “सब ठीक तो रहा न? कोई परेशानी?”

सुजाता: “नहीं. पर मेहुल को सेक्स का अनुभव है और उसे अधिक कुछ बताने की आवश्यकता नहीं पड़ी. मेरे विचार से माँ बेटे के सम्बन्ध के कारण स्मिता से वो ठीक प्रकार से चुदाई नहीं कर पाया. मैंने उसे समुदाय के बारे में कुछ समझाया है, और ये भी बताया कि ये सम्बन्ध अनैतिक भले ही हों, परन्तु अत्यंत सुखद होते है. उसे मेरी बात समझ आ गयी.” सुजाता ने संभवतः पहली बार अपने पति से झूठ बोलते हुए कहा. अविरक ने एक चैन की साँस ली. पर उसे अभी भी मेहुल पर पूरा विश्वास नहीं था. उसने इस बात को यहीं समाप्त करना ठीक समझा.

अविरल: “तो आज क्या तुम चुदाई के लिए फिर तत्पर हो. मैं कुछ थका हुआ हूँ.”

सुजाता: “नहीं. आज मैं आपके ही साथ रहूंगी.”

अविरल ये सुनकर खुश हो गया क्योंकि सुजाता हर दिन उठकर विवेक के पास चली जाती थी. कुछ ही देर में स्नेहा और विवेक भी आ गए.

स्नेहा: “और मॉम, कैसा रहा भोंदू का प्रशिक्षण?”

इससे पहले कि सुजाता उत्तर देती अविरल बोल उठा:”स्नेहा, मैंने तुम्हें पहले भी समझाया है और अब आखिरी बार बता रहा हूँ. अगर तुमने इस प्रकार से परिवार के किसी भी सदस्य के लिए बात की तो मैं स्वयं तुम्हे समुदाय ने निकाले जाने का प्रस्ताव रखूँगा। और तुम समझ सकती हो कि इसका क्या अर्थ होगा. आज से एक सप्ताह परिवार का कोई भी तुम्हे छुएगा भी नहीं. और अगर तुमने बाहर कुछ करने की चेष्टा की और मुझे पता लगा तो तुम्हें समुदाय और घर दोनों से निकाल दूँगा।”

स्नेहा के पावों तले से जमीन निकल गई. उसे कल ही चेतावनी मिली थी और उसने गंभीरता से नहीं किया था. उधर सुजाता और विवेक भी सन्न रह गए.

सुजाता ने बचाव करने के लिए कहा: “मत गुस्सा हो. बच्ची है. मैं समझाती हूँ इसे.”

अविरल ने सुजाता को जलती हुई आँखों से देखा: “और अगर नहीं समझा पायीं तो तुम भी इस घर में नहीं रहोगी इसकी अगली गलती के बाद, ये सोचकर इस आग में हाथ डालना. मैं ये बच्ची है, बच्ची है सुनते हुए थक चुका हूँ. चुदवा सकती है, गांड मरवाती है, दो दो लौड़े खाती है तब इसका बचपन कहाँ चला जाता है.”

स्नेहा सहमे हुए स्वर में बोली: “पापा, आगे से कभी ऐसी गलती नहीं होगी. आय एम रियली सॉरी।”

अविरल ने कोई उत्तर नहीं दिया. विवेक सब सुनते हुए भी शांत रहा. उसने अपने पिता का ये रौद्र रूप कम ही देखा था. और इस समय उनसे कुछ भी कहना अपने लिए समस्या खड़ी करना ही था. सब लोगों ने इसी तनाव में खाना खाया. फिर अविरल अपने लिए एक ड्रिंक बनाकर बिना कुछ कहे अपने कमरे में चला गया.

स्नेहा: “मॉम, सच में, मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी.”

सुजाता ने इस बार बुद्धिमानी से काम लिया और उठते हुए कहा: “मेरे विचार से तुम्हारे लिए यही ठीक रहेगा. पर जैसा तुम्हारे पापा ने कहा, मैं इस हाथ से अपना बसा हुआ घर नहीं उजाड़ूंगी. तुम जो करोगी, तुम्हें स्वयं ही उसका मोल चुकाना होगा.”

इसके बाद सुजाता अपने कमरे में अपने पति के पास चली गई.

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