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Incest कैसे कैसे परिवार

चौथा घर मिशेल और रिचर्ड डिसूज़ा

अध्याय ४.३

भाग ६

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मिशेल के घर में छह दिन कब निकल गए पता ही नहीं चला. इस बीच नई कंपनी का रजिस्टेशन किया गया जिसमे ईव को निदेशक रखा गया. जैसन के आग्रह पर मिशेल भी इसमें एक और निदेशक बनी. एंजिल का इंटरव्यू लेने के बाद ईव ने उसे नियुक्त कर लिया. पहले उसे जैसन और रिचर्ड उसके काम के बारे में ईव के साथ समझाने वाले थे. जैसन ने अपने ठहरने का समय दो सप्ताह आगे बढ़ा दिया था. उसके अन्य साथी सपने समय के अनुसार ३० दिसंबर को अपने देश लौट गए. उन्होंने भी कई सारे नए अनुबंध किये थे जिन पर उन्हें लौट कर काम करना था. जैसन के भी कुछ कार्य उन्हें संभालने थे उसके आगे स्थगित हुए कार्यक्रम के अनुसार.

एंजेल ने २ जनवरी से काम पर आना था और उसके बाद घर के चारों बड़े व्यस्त होने वाले थे. मिशेल ने भी ईव के साथ काम सिखने का निश्चय किया था. रिचर्ड और जैसन भी कम्पनी में पार्टनर थे, परन्तु उनकी भूमिका केवल सलाहकार की ही थी. सम्पूर्ण अधिकार ईव और उसकी अनुपस्थिति में मिशेल के पास ही थे. हर रात नए नए समीकरणों और सम्मिश्रणों के कारण सबके तन और मन सेक्स की ओर से संतुष्ट थे. वैसे भी डेविड और मार्क शिरीन और एंजेल को भी बीच में चोद लेते थे.

नए वर्ष के लिए इस नए आयोजन के लिए सबने अपनी प्रसन्नता दर्शाई थी. वही हर वर्ष के समान पार्टी से सब ऊब चुके थे. इस बार पापा के मित्र इवान स्टोन ने उन्हें एक विशिष्ट आयोजन में निमंत्रित किया था. रिचर्ड और इवान कॉलेज के दिनों से मित्र थे. परन्तु, इवान के दूसरे शहर में चले जाने के कारण उनका मेलजोल अब बहुत कम हो गया था. इवान और रिचर्ड को एक दूसरे के परिवार के बारे में लगभग हर बात पता थी.

मिशेल इवान और उसकी पत्नी हेलेन से मिली तो थी, परन्तु उन्हें वो इतने अंतरंग रूप से नहीं जानती थी जितना कि रिचर्ड. हेलेन भी रिचर्ड और इवान की ही क्लास में थी, और जब रिचर्ड पढ़ाई के बाद अफ्रीका चला गया तो उनका संबंध टूट सा गया था. लौटने के उपरांत रिचर्ड ने जब इवान को ढूंढा तो उसने बताया कि उसने हेलेन से ही विवाह किया था. रिचर्ड को इसमें बहुत ख़ुशी हुई थी, और मिशेल और वो इवान और हेलेन से मिलने उनके घर गए और विवाह के उपलक्ष में उन्हें अफ्रीका से लायी हुई हुई विशेष कलाकृतियां भेंट करीं।

शहर अलग होने के कारण मिलना कभी कभार ही होता था. परन्तु दोनों मित्रों ने अपने घर में जिस प्रकार का वातावरण है उससे एक दूसरे को परिचित करवा दिया था. हालाँकि वे कभी एक दूसरे के परिवार से इस प्रकार से अंतरंग नहीं हुए, पर उन्हें इस विषय में कोई खेद नहीं था. हेलेन के पिता की मृत्यु के बाद उसकी माँ अब उनके ही साथ रहती थी. उनके एक पुत्र था, फिलिप्स। एक बेटी भी थी, परन्तु उसकी अकाल मृत्यु ने हेलेन को झिंझोड़ दिया था. बहुत प्रयासों और मनोचिकित्स्कों के परामर्श और परिवार के अथाह प्रेम ने उसे जीवन को फिर से जीने का उत्साह दिया था.

इवान ने इस बार उन्हें इस विशिष्ट आयोजन में इसीलिए आमंत्रित किया था क्योंकि उसे लगता था कि बी उनके परिवारों के घनिष्ट होने का समय आ गया है. इस रिसोर्ट में वो सर्वोच्च पद पर था, और जिस प्रकार की गोपनीयता नव वर्ष की पार्टी के लिए रखी जाती थी वो अभूतपूर्व थी. रिसोर्ट एक किले के समान सुरक्षित था और जैसी कि कहावत है वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था. इसकी नितांत आवश्यकता भी थी क्योंकि कुछ व्यक्ति जो यहाँ आते थे वे शहर, राज्य और कुछ देश के विख्यात लोगों में थे.

इवान की इन सब बातों से रिचर्ड ने आने परिवार को अवगत कराया और उन्हें किसी भी मूल्य पर कभी भी वहाँ पर किससे मिले इसका उल्लेख नहीं करना है. अगर वो व्यक्ति कभी समाजिक परिपेक्ष में मिलें भी तो उन्हें अज्ञात समझकर ही बात करनी है. इवान के अनुसार इस नियम को विरोध उन्हें महंगा पड़ सकता है. इसी के साथ उसने ये भी बताया कि व्यवसाय हेतु सब एक दूसरे की सहायता करते हैं और उन्हें इससे लाभ मिलना सुनिश्चित था. घर के सभी लोगों ने गोपनीयता की शपथ ली और रिचर्ड ने इवान से उनके सम्मिलित होने की पुष्टि कर दी.

तीस दिसंबर के प्रातः सभी परिवारजन दो कारों में रिसोर्ट के लिए निकल पड़े.

बीच में एक बार रुकने के बाद वे सब साढ़े दस बजे रिसोर्ट को जाने वाली सड़क पर पहुंचे. ये मुख्य हाईवे से अलग थी. उस सड़क पर कोई ५०० मीटर जाने पर एक बड़ा फाटक था जहां पर उनके पहचानपत्र और उनके आमंत्रणपत्र की जाँच की गयी. रिचर्ड का फोटो लेकर उसे अंदर से अनुमोदित किया गया और इस पूरे समय वे लोग कार में ही रहे. जाँच पूर्ण होने पर उनसे क्षमा मांगते हुए और उनका स्वागत करते हुए उन्हें रिसोर्ट के नियत स्थान पर पहुंचने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए. इसके साथ ही उन सबको एक नीले रंग का कड़ा पहनाया गया जिसे उन्हें पूरे समय पहने रहना था. इसके बाद दोनों कारें रिसोर्ट की ओर चल दीं.

उन्हें ये देखकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि रिसोर्ट अभी भी उस स्थान से लगभग एक किमी अंदर था. पास पहुंचने पर उन्हें ऊँचे परकोटे से घिरा हुआ एक भवन का शीर्ष दिखाई दिया. उसके फाटक पर पहुँचने के बाद उनकी एक बार फिर से जाँच हुई. इसके बाद वो अंदर प्रवेश कर गए. अंदर जाने पर दो लड़कों ने आकर उनकी कार की चाबियाँ ले लीं और उन्हें पार्किंग टिकट दे दिए. जब वे अपना सामान निकालने को हुए तो लड़कों ने कहा कि वे इसका प्रबंध कर देंगे.

आठों आगे बढ़कर स्वागतकक्ष में पहुंचे जहां उन्हें रिसोर्ट में पंजीकृत क्या गया और इस समय उन्हें जलपान भी कराया गया. उन्हें बताया गया कि इस समय केवल तीन ही परिवार आये हैं परन्तु सांयकाल तक सबके आने का अनुमान है.

उन्हें चार कमरों के प्रवेश पत्र (card) दिए गए और एक सुंदर लड़की को उन्हें उनके कमरों में ले जाने के लिए नियुक्त किया गया. उनके एक कार्ड से सहायिका ने एक द्वार खोला और उन्हें आगे जाने के लिए कहा. सभी उस द्वार से अंदर चले गए.

सहायिका उनके पीछे आयी. सभी सामने फैले रिसोर्ट को देख रहे थे जो बहुत ही संदर प्राकृतिक सौंदर्य से नहाया हुआ था.

“प्लीज, मेरे साथ आईये.” ये कहते हुए सहायिका उन्हें एक कमरे में ले गयी जो कि बाथरूम और स्नानागार थे. वहाँ पहुंचकर उसने अपने गाउन को उतारकर एक हँगर पर टांगा और उन सबसे भी अनुरोध किया कि वे भी अपने कपड़े उतारकर एक स्थान पर रख दें. उन्हें धोने के बाद उनके सामान में रख दिया जायेगा.

“इस स्थान के आगे किसी भी प्रकार के वस्त्र पहनने की अनुमति नहीं है. आज से १ जनवरी की दोपहर १२ बजे तक यही पोशाक रहेंगी. आपत्ति होने की स्थिति में उस व्यक्ति को इसके आगे नहीं ले जाया जा सकता है.”

किसी ने आपत्ति नहीं की और सभी अपने वस्त्र उतारकर दिए हुए डिब्बे में रख दिए. अब समस्या एक ही थी, कि मोबाइल फोन को ऐसे हाथ में रखना बहुत ही अटपटा था. परन्तु इसका समाधान एक छोटे से लटकने वाले बैग जिसमे केवल मोबाइल ही आ सकता था उन्हें दिया गया.

“आप मोबाइल के साथ अपने कमरे के बाहर नहीं निकल सकते. इसीलिए आप इन्हें अपने कमरे में ही रखियेगा. इनके चार्जर आपको दे दिए जायँगे.”

सबने सहमति में सिर हिलाया. युवाओं को इसमें बड़ी समस्या दिख रही थी, पर अब तीर कमान से निकल चुका था. परन्तु गोपनीयता बनाये रखने के लिए इतनी सावधानी आवश्यक भी थी. वस्त्र निकालने के बाद सहायिका उन्हें उनके कमरों को ओर ले गयी, जो झोपडी नुमा थे. अपने कमरों में जाते हुए उन्होंने अन्य कुछ लोगों को भी घूमते देखा। सहायिका ने बताया कि रिसोर्ट के कर्मचारी एक लाल रंग का कड़ा पहने हुए हैं और उनके पास भी एक थैला है जिसमे आर्डर लेने ले लिए पेन और डायरी है. नीले रंग के कड़े पहने हुए भी तीन लोग दिखे पर उनके चेहरे नहीं दिख पाए.

कमरों के पास जाकर सहायिका ने उन्हें समझाया.

“आप के कमरे में आप चाहें तो फोन द्वारा कोई भी आर्डर दे सकते हैं. अगर आप बाहर हैं तो अपने जो कड़ा पहना है, उसे तीन बार थपथपाइयेगा तो आपके पास कोई आर्डर लेने हेतु आ जायेगा.”

उनके चेहरे पर आश्चर्य के भाव देखकर उसने समझाया कि उसमे एक छोटा सा ट्रांसमीटर है क्योंकि कुछ बार लोग यहाँ पर गुम हो गए थे उसके बाद ढूंढने में आसानी के लिए ऐसा किया गया था. उनके स्थान के सिवाय कोई और गतिविधि नहीं पता लगती, पर थपथप से कण्ट्रोल को पता चलता है और वो आर्डर के लिए किसी को भेज देते हैं. उसने रिचर्ड के कड़े पर तीन बार थपथप की. कुछ ही देर में एक कमरे का फोन बज उठा. इसके बाद वो चली गयी और कमरों को बाँटने के बारे में बात हुई.

जैसन: “बाँटने से क्या होगा, हमारी कोई भी वस्तु तो हमारे पास है नहीं. जिसका जहाँ मन होगा सो जायेगा. दो ही तो रातों की बात है.” बात सही थी और इसीलिए सबने स्वीकृति दे दी.

‘कुछ घूमा जाये?” अपने फोन कमरे में रखने के बाद वे सभी रिसोर्ट में घूमने के लिए निकल पड़े. कमरे में उन्हें रिसोर्ट का नक्शा मिला था जिसमे कहाँ क्या था दर्शाया गया था. मार्क ने तो सबसे पहले खाना खाने का ही प्रस्ताव रखा. देखा तो रेस्त्रां कुछ ही दूर पर था.

“एक बात और है, यहाँ रहने से चलना बहुत हो जायेगा. स्वास्थ्य के लिए अच्छा है.” रिचर्ड की बात पर किसी ने कुछ नहीं कहा.

रेस्त्रां पहुंचकर उन्होंने अपने लिए एक टेबल ली और बैठे ही थे कि रिचर्ड की आयु का एक व्यक्ति उनके सामने आ खड़ा हुआ.

“हैलो, रिचर्ड. लॉन्ग टाइम.”

रिचर्ड उठकर उसके गले लगने को बढ़ा फिर देखा कि दोनों नंगे हैं तो हाथ मिलाकर ही संतोष किया.

“इवान, दिस प्लेस इस कूल, माई फ्रेंड.”

इवान के साथ में एक सुंदर महिला थी, जो हेलेन थी. और हेलेन के साथ में उनका बेटा फिलिप्स था. सबका परिचय कराया गया और इवान, हेलेन और फिलिप्स भी उनकी ही टेबल पर आ गए. बातों का जब परवाह आरम्भ हुआ तो दो घंटे तक यूँ ही चलता रहा. फिर इवान ने उन्हें रिसोर्ट घूमने के लिए हेलेन और फिलिप्स के हाथों सौंप दिया क्योंकि अब अन्य अथिति आने आरम्भ हो गए थे और उसे उन पर भी ध्यान देना था.

हेलेन और फिलिप्स सबको लेकर रिसोर्ट दिखाने के लिए निकल पड़े. उन्होंने बहुत देर तक इस रिसोर्ट की सुंदरता का अवलोकन किया. इसके बाद हेलेन उन्हें उनके कमरों की ओर ले जाने लगी. वे अन्य कमरों के सामने से निकल कर अपने कमरे की ओर चल पड़े. एक कमरे से उन्हें कुछ कोलाहल सा सुनाई पड़ा तो हेलेन नई बिना हिचक उस कमरे का द्वार खोला. अंदर का दृश्य देखकर सब रोमांचित हो गए. एक ४५ वर्ष की महिला को इस समय दो लड़के चोद रहे थे. उनके हाथों को देखकर ये स्पष्ट हो गया कि वे रिसोर्ट के ही कर्मचारी थे. महिला का चेहरा दरवाजे की ओर था और उसे देखकर मिशेल ने उसे पहचान लिया.

वो राज्य की एक प्रसिद्ध समाज सेविका थी, जिसका चेहरा आये दिनों टीवी और समाचार पत्रों में छाया रहता था. उसके इस रूप के बारे में किसी ने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा. इस समय उसकी चूत और गांड दोनों में लंड चल रहे थे और उसके चेहरे पर उन्माद के भाव दिख रहे थे. कमरे में एक आदमी ने बाथरूम में से कदम रखा. ये उसका पति था पर उसने उनकी ओर देखा भी नहीं जैसे ये कोई सामान्य घटना हो. बाथरूम में से एक सुंदर लड़की बाहर आयी और उसने उस आदमी का हाथ लिया और कमरे के बाहर निकलने को हुई तो उसने दर्शक मंडली देखी।

“हेलो हेलेन आंटी, मॉम अभी थोड़ी व्यस्त हैं, आपको कोई काम था क्या?”

“नहीं, हम तो यूँ ही आ गए थे.” ये मेरे मित्र हैं. ये कहते हुए हेलेन ने रिचर्ड और जैसन के परिवारों की ओर संकेत किया.

“हेलो, मैं @#$ हूँ.” उस आदमी ने अपना परिचय दिया. “आप सबसे मिलकर प्रसन्नता हुई. हम शाम को मिलते हैं.”

ये कहते हुए पिता पुत्री कमरे से निकल गए. हेलेन भी अब चलने को हुई तो उसने उस समाज सेविका को हाथ हिलाकर विदा ली. कमरे को यूँ ही खुला छोड़कर वे सब आगे बढ़ गए. अंदर चल रहे व्यभिचार को अपने मन से कोई भी निकाल नहीं पा रहा था. हेलेन उनके कमरे में पहुंचकर उन्हें बोली, “कमरे यहाँ पर लॉक नहीं किये जाते हैं. वैसे भी कमरे में सामान कुछ होता ही नहीं है, और बाहर सब वैसे भी नंगे ही रहते हैं. कुछ लोग इस प्रकार से अन्य लोगों के सामने चुदाई करने में अधिक आनंद पाते हैं. शाम को आपको अधिक पता चलेगा. अभी मुझे फिलिप्स की सेवा की इच्छा है, तो मैं आपकी आज्ञा चाहूंगी.”

ये बताकर हेलेन मिशेल को आंख मारकर फिलिप्स के साथ चली गयी.

“इतने बड़े रहस्य को गोपनीय कैसे रखते होंगे ये लोग? कर्मचारी अगर बाहर कुछ बोल दिए तो बहुत बड़ा स्कैंडल हो जायेगा.”

“मंत्री का बहुत दबदबा है, मुझे नहीं लगता की कर्मचारी अपने ऊपर उन्हें क्रोधित देखना चाहेंगे. वैसे भी अगर देखो तो उन्हें वेतन के साथ अलग अलग औरतों के साथ चुदाई का भी आनंद मिल रहा है. ऐसी नौकरी से कौन हाथ धोना चाहेगा.”

“और लड़कियां?”

“सम्भवतः वही कारण हो. पर कुछ लड़कियों को बड़ी आयु के आदमियों से ही अधिक सुख मिलता है.”

“तब तो आप दोनों की चांदी हो गयी. नई नई चूतें मिलने वाली हैं दो दिन.” मिशेल ने उन्हें छेड़ा.

“और तुम्हें कौन से नए लंड नहीं मिलने वाले?” रिचर्ड ने हँसते हुए उत्तर दिया. “चलो नहाकर अपने खेल खेलते हैं, बाद में क्या कार्यक्रम हैं कुछ पता नहीं है.”

जिसके मन में जहाँ मन हुआ उस कमरे में घुस गया और नहाकर बाहर निकला.

ईव ने सुझाव दिया, “जब यहाँ उन्मुक्त हैं तो क्यों न आज हम अपने कमरों के पीछे बने लॉन में ही चलें. हमने कभी खुले आकाश के नीचे चुदाई की नहीं।”

सबको ये बढ़ रुचिकर लगा. बच्चे कमरों में से चादर और तकिया ले आये. ऐलिस के हाथ में मोबाइल वाला थैला था, पर वो खाली था. उसे देखकर सबने उसे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा.

“पास द पार्सल. मैं वहाँ उल्टे मुंह बैठकर ताली बजायूँगी. आप पार्सल पास करोगे. जिस जिस के हाथ में पार्सल रुकेंगे, उनकी जोड़ी बनेगी. हाँ अगर दो पुरुष या दो स्त्री को मिलीं तो पार्सल फिर चलेगा. ओके, अब सब गोले में बैठ जाओ.” ये कहते हुए ऐलिस ने वो थैली जैसन के हाथ में दी और उनकी ओर पीठ करते हुए ताली बजाने लगी.

पहला पार्सल मार्क के हाथ में रुका.

दूसरा पार्सल मिशेल के हाथ में. मिशेल और मार्क की जोड़ी बन गयी और वो हट कर बैठ गए.

तीसरे पार्सल के साथ जैसन पकड़ा गया.

चौथे में इस बार रिचर्ड आया तो फिर से क्रम चला और इस बार शैली के हाथ में रुका. शैली और जैसन हट हए.

अब केवल ईव, रिचर्ड और डेविड ही शेष थे. और डेविड के हाथ में पार्सल रुकते ही सब जोड़े बन गए. डेविड को केवल ईव ही मिल सकती थी और इसीलिए रिचर्ड को ऐलिस के साथ का अवसर मिला.

“कुछ विस्मित करने वाली बात नहीं है, कि जैसा सबका मन था वैसे ही हुआ.”

ऐलिस ने अपना रहस्य नहीं बताया. वो कमरे की ओर मुंह करे बैठी थी और उसे कमरे की खिड़की में प्रतिबिम्ब दिख रहा था. उसने अपने मन के अनुसार जोड़ों को पार्सल के साथ छोड़ा था. एक गलती उसने पकड़े न जाने के लिए की थी. पर किसी को उसके इस छल का अंदेशा नहीं हुआ.

अपने साथी को आलिंगनबद्ध करके सब चूमने में जुट गए. वे इस बात से अनिभिज्ञ थे कि रिसोर्ट के सुरक्षा केंद्र में उनकी इन गतिविधियों को टीवी पर देखा जा रहा था. तीन पुरुष और दो महिला कर्मी उनके इस खेल पर आंख लगाए हुए थे.

“मस्त माल हैं ये दोनों आंटियाँ , चोदने मिल जाएँ तो मजा आ जाये.” एक आदमी बोला।

“वैसे अंकल लोगों के भी लौड़े अच्छे बड़े हैं. मेरी तो चूत में पानी आ रहा है.” एक लड़की ने अपना विचार रखा.

रिकॉर्ड का बटन दबाकर वे अन्य स्थानों पर चल रही गतिविधियों को देखने लगे.

घास में चादर पर पारिवारिक सम्भोग में मग्न इस परिवार को इस बात का आभास नहीं था कि उनकी फिल्म बन रही है. ऐलिस रिचर्ड के लंड को चूस रही थी तो रिचर्ड उसकी चूत को. चार जोड़े इस समय 69 के आसान में अपने साथियों के जननांगों को चूमने, चाटने और चूसने में लगे थे. जैसन बहुत दिनों से एक कमी का अनुभव कर रहा था, उसे लगा कि आज वो अपनी इच्छा पूरी कर सकता है. इस विचार से उसने अपनी जीभ को कुछ आगे बढ़ाया और इस बार उसने शैली की गांड के भूरे छिद्र को चाटा। शैली चिहुंक पड़ी. उसने अपनी गांड कई बार मरवाई थी और उसे इस बात का ध्यान आया कि हालाँकि परिवार के सभी पुरुष उसकी गांड का आनंद ले चुके थे, पर किन्ही कारणों से उसके मामा इस सुख से वंचित थे. शैली ने जैसन को कई बार अपनी गांड को भूखी आँखों से ताकते देखा था. उसे भी लगा कि ये दिन और स्थान उसके मामा की इच्छा पूरी करने के लिए उपयुक्त है.

ईव डेविड के लंड को चूस कर पूर्ण आक्रोश में लेन में सफल हुई थी. उसके मन में इस समय ये उहापोह थी की वो इसे चूत में ले या गांड में. उसकी चूत बह रही थी तो गांड भी खुजला रही थी. उसने ये निर्णय डेविड के ऊपर ही छोड़ दिया. पर मिशेल ने निर्णय ले लिया था कि मार्क से गांड मरवाना ही उसकी प्राथमिकता थी. उसे ज्ञात था कि आज और कल उसे चूत चोदने वाले बहुत लौड़े मिलने वाले हैं. पर गांड कितने मारना चाहेंगे ये निश्चित नहीं था. वैसे भी दो तीन दिनों से उसकी गांड में कोई लौड़ा गया नहीं था और उसे इसकी कमी खल रही थी.

जैसन ने समय व्यर्थ न करते हुए शैली को एक टिकिया के ऊपर अपने घुटनों के बल होने का निर्देश दिया. शैली ने बड़ी तत्परता से उसके इस निर्देश का पालन किया. उसकी चिकनी उभरी गांड को देखकर रिचर्ड से रहा नहीं गया और उसने उसे दोबार चाटना आरम्भ किया, पर इस बार उसकी जीभ अंदर जाकर भी शैली की गांड को साफ कर रही थी. इसके बाद उसने अपने लंड को शैली की गांड के छेद पर लगाया. तो शैली बोल पड़ी.

शैली, “फक इट हार्ड एंड फ़ास्ट. जस्ट फक इट अंकल.”

जैसन कुछ आराम से उसकी गांड मारना चाहता था उसके इस कथन से उसने अपना मन बदल लिया और गांड में सुपाड़ा अंदर जाते ही एक लम्बे धक्के के साथ अपने लंड को शैली की गांड में जड़ तक बैठा दिया. धक्के के कारण शैली आगे की ओर गिरने को हुई पर जैसन ने उसकी पतली कमर को पकड़कर उसे संभाल लिया.

शैली, “गुड जॉब. नाउ फक मी. फक माई आस. आई लव इट.”

जैसन ने अब किसी प्रकार से भी कमी नहीं रखने का प्रण किया और शैली की गांड में पिस्टन के समान अपने लौड़े को पेलने लगा. शैली के मुंह से घुटी हुई सिसकारियां उसके कानों में एक अद्भुत संगीत का आभास करा रही थीं.

“वाओ, ये अंकल तो गांड मारने में बिलकुल दया नहीं दिखा रहा, मेरी तो गांड में खुजली हो रही है ये देखकर. इसके लंड से गांड मरवाना ही है मुझे.” सुरक्षा कक्ष में एक लड़की ने अपनी गांड खुजलाते हुए टिप्पणी की.”

उसकी साथी लड़की हंस कर बोली, “तुझे आज तक कोई लंड दिखा है जिसे तुझे गांड में नहीं लेना हो? इन दो दिनों में तू सारे अतिथियों से गांड मरवाने वाली है.”

“तुझे क्यों जलन हो रही है? पर इस बार मेरी ड्यूटी यहां लगाकर इवान सर ने मेरा मजा खराब कर दिया.”

“क्या मजा खराब कर दिया तेरा?” ये स्वर इवान के थे जो कक्ष में निरीक्षण के लिए आया था.”

“सॉरी सर, मैं तो मजाक कर रही थी.”

पर दूसरी लड़की अब मजे ले रही थी. “ये कह रही थी कि इस बार अपनी गांड अधिक लौडों से नहीं मरवा पायेगी क्योंकि आपने इसकी ड्यूटी यहाँ जो लगा दी है.”

“हम्म, चलो देखते हैं, कुछ हो पाए तो. वैसे मेरा भी मन है किसी की गांड मारने का तो तुम्हारी अभी की इच्छा तो मैं पूरी कर ही देता हूँ.” ये कहकर इवान ने उस लड़की को कुर्सी के ऊपर झुकाया और एक ही बार में अपने लंड को उसकी गांड में उतार दिया.

“उई माँ. आह. सर अब मारो मेरी गांड. वैसे सामने भी यही चल रहा है.” इवान ने अब तक टीवी की ओर देखा नहीं था और वहाँ देखकर उसे अपने मित्र के परिवार को चुदाई में संलग्न देखकर सुखद आश्चर्य हुआ. उसकी ऑंखें ऐलिस की गांड पर टिकी थीं जो इस समय घोड़ी की मुद्रा ले रही थी. ऐलिस की गांड के उभर को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया और उसने अपने सामने झुकी लड़की की गांड में ताबड़तोड़ लंड चला दिया.

अब ये इस रिसोर्ट के लिए सामान्य बात थी, तो अन्य सभी उनकी ओर ध्यान न देकर अपने काम पर ही केंद्रित थे.

इवान का ध्यान रह रह कर टीवी पर चल रहे उसके मित्र के परिवार पर जा रहा था. इस समय सुंदर पृष्ठ ऊपर उठे हुए थे और उन सब में एक एक लंड पिला हुआ था. उसे इस बात का दुःख हुआ कि वो उनकी बातें नहीं सुन सकता था.

वहाँ चादर पर चारों महिलाएं अपनी गांड में लंड लिए हुए सिसकारियां ले रही थीं और अपने अपने घुड़सवार को प्रोत्साहित कर रही थीं. मार्क और डेविड जिन्हें अपनी माँ की आयु की स्त्रियों में अधिक रूचि थी अपने लंड धुआंधार रूप से चला रहे थे. रिचर्ड और जैसन को भी इन दोनों बालाओं की गांड मारने में अत्यंत सुख मिल रहा था. शाम होने को थी और सूर्य कुछ ढलने सा लगा था. और इसी के साथ चारों लंड अपने अपने रस को अपनी घोड़ी की गांड में विसर्जित करने लगे. इसके बाद वो उनके पास ही ढह गए और लम्बी गहरी साँसों के साथ समाप्त हुए कार्यक्रम का सुख अनुभव करते रहे.

इसके बाद सब उठे और बच्चों ने चादर और तकिये उठाये और कमरों में जाकर उन्हें धोने के लिए डाल दिया. रिचर्ड ने फोन पर चादरें बदलने का अनुरोध किया और फिर बाथरूम में जाकर मुंह हाथ धोकर सब बाहर आकर खड़े हो गए. कुछ ही देर में दो लड़कियाँ आयीं और उन्होंने चादरें और तकिये बदले और उनकी ओर मुस्कराते हुए चली गयीं.

लड़की की गांड मार लेने के बाद इवान ने लड़की को विश्वास दिलाया कि वो उसकी गांड में अधिकतम लंड डलवाने का प्रयत्न करेगा. इसके बाद वो अपने ऑफिस गया जहां उसने पाया कि लगभग सभी अतिथि आ चुके हैं. उन्हें सात बजे रेस्त्रां में आमंत्रित करने के बाद वो अपने परिवार के पास लौट गया.

अपने कमरे में पहुंचा तो देखा कि फिलिप्स हेलेन की गांड मार कर अपने लौड़े को उसकी गांड में से निकाल रहा था. उसने अपना सिर हिलाया और सोचा कि बाप बेटे को गांड मारने का कितना शौक है. और उसे हेलेन के ऊपर भी गर्व हुआ जो गांड मरवाने में कभी पीछे नहीं हटती थी.

फिलिप्स इवान को देखकर मुस्कुराते हुए बोला, “हाय डैड, माँ की गांड मारनी है क्या?”

इवान ने हेलेन की गांड से रिसते हुए फिलिप्स के रस को देखा और उसे कहा कि अब समय नहीं है, और वैसे भी वो अभी सुरक्षा कर्मी लड़की की गांड बजा कर आया है.

“वेल डन, डैड.”

इवान ने हेलेन को पुकारा, “हनी, सात बजे के पहले हमें रेस्त्रां पहुंचना है, तो तैयार हो जाओ. नेताजी भी आ चुके हैं अपनी पत्नी और बेटी के साथ. तो मैं उन्हें मिलने के बाद तुम दोनों को वहीं मिलूंगा. हम दोनों को ही सबका स्वागत करना है, तो जल्दी करो.”

हेलेन, “नो प्रॉब्लम, जानू। बस मैं अभी तैयार होती हूँ. बस मेकअप ही करना है. हम औरतों को देर तो कपड़े पहनने में होती है, जिसकी आज कोई आवश्यकता ही नहीं है.”

ये कहते हुए दोनों हंस पड़े. फिर इवान ने फिलिप्स को बोला, “तुम्हारा काम है रिचर्ड के परिवार को लेकर आना. वैसे उन्हें स्थान पता है, परन्तु पहली बार आये अतिथि को साथ लाया जाता है.”

फिलिप्स ने ये कार्य सहर्ष स्वीकार किया और अपनी माँ के ही साथ बाथरूम में घुस गया. उन दोनों के बाहर आने पर इवान भी तैयार हुआ और मंत्रीजी के बंगले के लिए निकल गया.

***********
 
मंत्रीजी का बंगला रिसोर्ट से कुछ दूर था, बंगला क्या था एक महल ही समझो. उनके बंगले पर अलग सुरक्षा थी और उनसे मिलने के लिए उनकी अनुमति के बिना अंदर जाना असम्भव था. इवान चूँकि रिसोर्ट का सर्वोच्च अधिकारी था तो उसे बंगले में किसी भी समय जाने के अनुमति प्राप्त थी, परन्तु मंत्रीजी को उसके आने की सूचना देने के बाद ही. बंगले के दो गेट थे, एक जो कुछ दूरी पर मुख्य सड़क पर खुलता था और दूसरा रिसोर्ट में. मंत्रीजी के सरकारी सुरक्षाकर्मी पहले गेट के बाहर ही रोक दिए जाते थे. इसीलिए उन्हें मंत्रीजी के क्रियाकलापों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था.

गेट पर पहुंचने पर सुरक्षाकर्मी ने मंत्रीजी को फोन पर बताया कि इवान आये हैं और उनसे अनुमति मिलने पर गेट खोलकर इवान को सैलूट करके उन्हें प्रवेश दिया. गेट से भी उनके बंगले का मुख्य द्वार कोई आधा किमी था. इवान कई बार आश्चर्य करता था कि उनके पास इतना धन कैसे आया, पर उसने कभी भी अपने विचार मुखर नहीं किये. मुख्य द्वार पर पहुंचकर उसने घंटी बजायी और रिसोर्ट की ही एक लड़की ने उसे अंदर प्रवेश दिया. लड़की की लिपस्टिक उसके सुंदर चेहरे पर बिखरी हुई थी. उसने इवान को भव्य बैठक में एक सोफे पर बैठाया. मंत्रीजी अभी बाहर नहीं आये थे. वो कमरे की भव्यता का अवलोकन कर ही रहा था कि उस लड़की ने उसके हाथ में उसकी पसंद की शराब का पैग थमा दिया. इसमें कोई अचरज नहीं था, मंत्रीजी इन सब का कोई संज्ञान नहीं लेते थे.

“आप और कुछ लेंगे?” लड़की के द्वीअर्थी वाक्य को समझने में इवान को देर नहीं लगी. उसने विनम्रता से मना किया और अपनी ड्रिंक की चुस्कियां लेने लगा.

कुछ ही मिनट बीते होंगे कि मंत्रीजी भी आ गए. वे भी रिसोर्ट की ही वेश भूषा में थे, अर्थात पूर्णतया नंगे. उनकी ऊँची कद काठी पर काली घनी मूछें थीं और उनका लंड अभी भी तना हुआ था और उस पर कुछ नमी थी जिसके कारण वो अभी भी चमक रहा था.

“कैसे हो इवान?” उन्होंने आगे बढ़कर इवान से हाथ मिलाया. फिर उस लड़की की ओर देखकर कहा, “तुम्हें मैडम बुला रही हैं.”

“जी सर.” ये कहते हुए वो लड़की पलक झपकते ही बंगले के अंदर चली गयी.

“मैं अच्छा हूँ, सर. आप कैसे हैं?”

“जैसा हमेशा रहता हूँ, बिल्कुल चंगा. कल के आयोजन की सभी तैयारियां हो चुकी हैं?”

“जी सर, अपने जैसा आदेश किया था उसके अनुसार शो के लिए स्टेज की व्यवस्था कर दी है, कल सुबह उस पर पूरी सज्जा भी कर देंगे.” ये कहते हुए इवान रुक गया.

मंत्रीजी ने भांप लिया कि इवान के मन में कोई प्रश्न है.

“तुम ये सोच रहे होंगे कि इस बार मैंने सारे आयोजन प्रबंध तुम्हारे ऊपर न छोड़कर स्वयं अपने ऊपर लिया है. है न?”

“जी सर.”

“बात ये है कि $%^& शहर की एक प्रसिद्ध फाइनैंसर से मेरी एक डील हो रही थी. उन्होंने एक नए क्लब में निवेश किया है. वो भी हमारी तरह का ही विशिष्ट क्लब है, परन्तु वो केवल महिलाओं के लिए है.” ये कहते हुए मंत्रीजी ने इवान को पैनी दृष्टि से देखा.

“जी.”

“तो बात ये है कि उन्हें भी किसी प्रकार का संरक्षण चाहिए है, अन्यथा उन्हें कभी भी शासन बंद कर सकता है अगर उनकी गोपनीयता भंग हुई तो. फिर हमारी ये डील हुई है कि हमारे रिसोर्ट और उनके क्लब के बीच एक समझौता किया जाये जहाँ पर वे अपने कर्मियों को हमारे रिसोर्ट में विशेष प्रयोजनों के लिए उपलब्ध कराएँगे और इसके लिए वे मेरे संरक्षण में रहेंगे.”

“ये तो बहुत ही अच्छी बात है सर. आपको इसके लिए मेरी ओर से बधाई.”

“बात यहाँ तक ही नहीं है, उन्होंने अभी हाल ही में एक अतिविशिष्ट आयोजन किया था, जिसके बाद उन्हें मैंने भी अपने रिसोर्ट में उसी प्रकार का शो करने के लिए मना किया है. महंगा तो है, परन्तु आनंद बहुत आने वाला है.”

“जी सर.”

“तुमने बॉलीवुड की अभिनेत्री “केके” को तो देखा ही होगा, जिसने अपनी आयु से कहीं अधिक आयु के अभिनेता से विवाह किया है.”

इवान का गला सूख गया, उसने अपने ग्लास से दो घूंट लिए और गले को गीला किया.

“जी”

“अभिनेता का पुत्र अपनी इस सौतेली माँ की चुदाई करता है, क्यूंकि अभिनेता अब कुछ विशेष समय ही अपनी पत्नी को चोद सकता है. उसका लंड अपनी पत्नी को औरों से चुदते हुए देखने पर ही खड़ा होता है.”

“डॉक्टर कफील के समान?”

“हाँ, पर डॉक्टर तो उसके बाद भी चुदाई नहीं कर पता, पर इसमें अभी वो कमी नहीं है. तो कल उनका शो है.”

“ओह शिट.” इवान के मुंह से अनजाने में ही अपशब्द निकल गया. पर मंत्रीजी ने उस पर कोई टिप्पणी नहीं की.

“वो फाइनेंसर और क्लब का मालिक भी मेरे साथ ही आये हैं और अभिनेत्री, अभिनेता और उनका बेटा भी. इसी कारण मुझे आने में देर हुई. वे सभी अभी आते ही होंगे.”

इवान इस समय सकते में था. वो प्रसिद्ध अभिनेत्री से मिलने का उसे अवसर मिलने वाला है. तभी मंत्री जी की बेटी बैठक में आयी और उसके साथ एक युवक था, जिसका चेहरा अभिनेता से मिल रहा था.

“पापा, मैं इन्हें रिसोर्ट दिखा दूँ?” ये कहते हुए वो आकर मंत्रीजी की गोद में बैठ गयी.

“लोग पहचान लेंगे तो कल के कार्यक्रम की गोपनीयता समाप्त हो जाएगी. वैसे भी ये तीनों नए वर्ष के पहले दो दिन यहीँ हैं, तो अच्छा होगा कि उस समय दिखाओ.”

“ओके, पापा.” कहकर मंत्रीजी को एक गहरा चुंबन देकर वो खड़ी हुई और युवक के हाथ को पकड़कर बोली, “जैसा पापा ने कहा, अभी नहीं. तो चलो हम कुछ अपना खेल खेल लेते हैं.”

वो दोनों अभी वहाँ से हटे ही थे कि मंत्री जी की पत्नी ने एक सुंदर मध्यम आयु की स्त्री और एक हृष्टपुष्ट नवयुवक के साथ बैठक में प्रवेश किया.

“हैलो इवान, कैसे हो?” मंत्रीजी की पत्नी ने इवान के पास आकर उसके होंठ हल्के से चूमकर पूछा.

“मैं अच्छा हूँ, मैडम. आप कैसी हैं?”

मंत्री जी की पत्नी शिखा उनसे आयु में कोई दस वर्ष कम थीं और उनकी दूसरी पत्नी थीं. पहली पत्नी के देहांत के पश्चात् मंत्रीजी ने कुछ वर्ष बाद उनसे विवाह किया था. वो उनकी पुत्री की शिक्षिका थीं और उनको मिलाने में उनकी पुत्री का ही हाथ था.

“इवान, मैंने कितनी बार कहा है की मुझे शिखा ही पुकारा करो. इन्हें चाहे जैसे भी पुकारो, पर मेरे लिए ऐसे सम्बोधन की कोई आवश्यकता नहीं है.”

इवान ने मंत्रीजी को देखा तो उन्होंने अपने कंधे उचकाए और उसे इसकी अनुमति दे दी.

“ओके, शिखा जी.”

“चलो, ये फिर भी चलेगा. हेलेन कहाँ है? और तुम्हारा लड़का कहाँ है. उसकी मुझे बड़ी याद आती है.”

“जी हेलेन आज के कार्यक्रम के लिए रेस्त्रां में गयी है, फिलिप्स नए अतिथियों को लेकर वहीँ आएगा.”

“हाँ, इन्होने बताया की तुमने इस बार अपने मित्र के परिवार को बुलाया है. और ये भी की उनमे दो जवान लड़के भी हैं.”

“जी”

शिखा को नवयुवकों से चुदवाने में बहुत आनंद मिलता था. मंत्रीजी अब ५५ वर्ष के थे, और उनकी चुदाई की क्षमता आज भी शिखर पर थी. ४५ वर्ष की शिखा को उनसे तो सुख मिलता ही था, पर वो रिसोर्ट में अपने जवान लड़कों से चुदवाने की लालसा को पूरा करती थी. यहाँ से दूर, उसे कभी भी किसी और के साथ नहीं देखा गया.

“आओ, मैं तुम्हें मिलती हूँ. ये हैं रूचि आहूजा, जो कि हमारी नयी पार्टनर हैं, और ये हैं पार्थ जो एक क्लब के मालिक हैं, रूचि के साथ.”

इवान ने पार्थ से हाथ मिलाया और फिर रूचि से.

“आपसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई. मुझे सर ने आपके क्लब के बारे में संक्षेप में बताया है. मुझे विश्वास है कि हमारे संबंध अच्छे रहेंगे.”

“मुझे भी ये विश्वास है.” पार्थ ने उत्तर दिया. रूचि इवान की ओर बस देखती रही मानो उसे पढ़ रही हो.

शिखा: “तो मेरे विचार से हमें रेस्त्रां चलना चाहिए.”

इवान अभिनेत्री से मिलना चाहता था, तो पूछ उठा.

“मंत्रीजी ने कहा कि आपके अन्य अतिथि भी हैं.”

“यू नौटी. तुम्हें केके से मिलना है. चलो मैं तुम्हें मिलवा देती हूँ, वैसे वो अभी कुछ व्यस्त है.”

उसकी बात सुनकर रूचि और पार्थ मुस्कुरा उठे और मंत्रीजी की खिलखिलाहट निकल गयी. इवान को कुछ संकोच हुआ. तब तक शिखा उसे हाथ से पकड़कर घर में अंदर ले गयी.

इवान इस बंगले में कई बार आया था परन्तु वो बैठक तक ही सीमित रहा था. घर के अंदर की भव्यता को देखकर वो चकित था. शिखा उसके हाथ को थामे हुए गलियारे के अंतिम कमरे की ओर पहुंची और रुक गयी.

“इवान, जो तुम इन बॉलीवुड वालों के बारें में विचार रखते हो, ये उनसे बहुत भिन्न हैं. हम लोग भी उन्मुक्त सेक्स के पक्षधर हैं, परन्तु जो गंदगी और घिनौनापन इन लोगों में है, उसे हम कभी नहीं पा सकते. जिस केके से तुम मिलना चाहते हो उसका असली रूप भी देख लो.”

ये कहते हुए शिखा ने दरवाजा खोला और इवान को अंदर ले गयी. अंदर का दृश्य देखकर न केवल इवान भौचक्का रह गया बल्कि उसके मन में जो इस जोड़े के प्रति भाव थे वो एक ही क्षण में तहसनहस हो गए. बिस्तर पर केके तीन लड़कों से एक साथ चुदवा रही थी. हालाँकि उसका चेहरा नहीं दिख रहा था पर शिखा ने बताया था की ये केके है. एक लंड उसकी चूत में, और एक गांड में था. एक लंड उसके मुंह में था. इवान इनमे से किसी भी लड़के को नहीं पहचानता था. उसने उनकी कलाइयों में अतिथि वाले कड़े देखे. पर उसको केके के इस रूप को देखकर उतना आश्चर्य नहीं हुआ, जितना उस अभिनेता को देखकर.

अभिनेता के गले में एक कुत्ते का पट्टा पड़ा हुआ था और वो घुटनों और कोहनियों के बल बैठा हुआ था, उसका चेहरा उसकी पत्नी की ओर था. उसके पट्टे को एक लड़की ने अपने हाथों में थमा हुआ था और उसके सामने एक बड़ा सा कुत्तों को खाना खिलाने वाला कटोरा था. इवान इस दृश्य को अपने मन में समाहित कर ही रहा था कि गांड मारने वाले लड़के ने अपना लंड केके की गांड से निकाला। वो झड़ने वाला था. उस लड़की ने कुत्ते वाला प्याला उठाया और उस लड़के के लंड के आगे लगा दिया. इवान को अब समझ आ रहा था कि यहाँ क्या होने वाला है. उस लड़के ने अपने लंड को झटकते हुए अपना वीर्य उस कटोरे में डाल दिया. जब उसका लंड झड़ चुका तो लड़की ने वो कटोरा अभिनेता के सामने रख दिया.

“कम ऑन, डैड, ड्रिंक योर डाइट. मॉम की गांड से सीधा निकला है.” ये कहते हुए उसने पट्टे को एक झटका दिया और अभिनेता उस कटोरे में भरे वीर्य को पी गया. इवान का मन मचल उठा. चुदाई करना अलग बात थी, पर अपने पिता और पति का यूँ तिरिस्कार करना बिलकुल अलग. जब अभिनेता अपना कटोरा साफ कर चूका तो लड़की ने उसे शाबाशी दी. हालाँकि वे इवान और शिखा को देख चुके थे, पर किसी ने उनकी उपस्थिति का संज्ञान नहीं लिया.

इवान ने शिखा को ओर देखा और सिर से संकेत दिया कि उसे अब कुछ नहीं देखना। शिखा ने उसको साथ लिया और कमरे के बाहर निकल गयी और कमरा बंद कर दिया.

“इतनी गंदगी है इन लोगों के अंदर!”

शिखा ने कुछ नहीं कहा. बैठक में पहुंचकर मंत्रीजी ने उसके चेहरे के भाव पढ़ लिए और बात बदल दी.

“वैसे अँधेरा हो चुका है और रेस्त्रां जाने का भी समय होने वाला है. इवान कृपया तुम रूचि और पार्थ को अपने साथ ले जाओ. इनका परिचय में कल सबको दूंगा. आज इन्हें केवल मेरे अतिथि के रूप में ही मिलवाओ.”

“जी.” इवान की दबी हुई हामी को सुनकर मंत्रीजी बोले, “हर बार जो हमें दिखता है वो पूर्ण सत्य नहीं होता. अन्य लोगों के जीवन या उनकी शैली पर विचार न करते हुए हमें ये डेजह्ण चाहिए कि हम अपने वातावरण में कितने सुखी है.”

इवान रूचि और पार्थ को लेकर बंगले से निकल गया और रेस्त्रां की ओर चल पड़ा. रूचि इवान के मन के भाव को समझ पा रही थी. उसने चलते हुए इवान का हाथ पकड़ा और उसे दबाया.

“अपने मन को शांत रखो, जिस प्रकार का रिसोर्ट आप चला रहे हो, सम्भव है इस प्रकार की विकृतियां आपको देखने के लिए मिलती रहें. अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक मान्यताओं को अलग रखिये. जो दिखता है वो बिकता तो है, पर वो सच कितना होता है इसका अनुमान लगाना असम्भव है.”

इवान इतना अनुभवी होने के बाद भी कुछ सकते में था. पर उसने रूचि की ओर देखा और मुस्कुराकर कहा, “धन्यवाद, आप सच कह रही हैं. मैं उसके बारे में इतने अच्छे विचार रखता था कि उन्हें बिखरता देख कुछ कष्ट हुआ है. पर अब मैं ठीक हूँ. पर वो लड़के कौन थे?”

“उन्हें शो के लिए हम लाये हैं. वे हमारे क्लब से हैं.”

“ओके”

वे अब तक रेस्तराँ पहुंच चुके थे. अंदर अभी कुछ ही लोग थे क्योंकि अभी सात बजने में समय था. अंदर जाने पर विदित हुआ कि केवल हेलेन, फिलिप्स और रिचर्ड का परिवार आ चुके थे. अन्य केवल सेवाकर्मी ही थे. हल्का मद्धम संगीत बज रहा था. और वातावरण बहुत ही रोमांटिक था. रेस्त्रां में टेबलों के बीच में अच्छी दूरी बनाई गयी थी. रेस्त्रां में दस सीटों के पाँच टेबल थीं और छह सीटों की दस. आठ लड़के लड़कियां सेवा के लिए तत्पर खड़े थे.

इवान ने सबसे पहले रूचि और पार्थ को हेलेन से मिलाया और कुछ देर तक हेलेन और रूचि बातें करते रहे. इवान अन्य आयोजनों को देखने के लिए आगे चला गया तो हेलेन ने पार्थ और रूचि को रिचर्ड के परिवार से मिलवाना उचित समझा. जैसे ही वो पार्थ को लेकर उनकी टेबल पर पहुंची मिशेल और रिचर्ड के मुंह खुले रह गए. उन्हें समझ नहीं आया कि वे क्या कहें. हेलेन समझ गयी कि वे एक दूसरे को पहचानते हैं. पार्थ ने रिचर्ड को नमस्ते किया और डेविड को अलग आने के लिए कहा. डेविड उठकर पार्थ के साथ चला गया और हेलेन रूचि को सबसे परिचित करवाने लगी.

पार्थ और डेविड रेस्त्रां के बाहर आये.

“हे डेविड, पहली बात कि चिंता बिलकुल मत करो. ये बात मेरे आगे कहीं नहीं जाएगी. अगर तुम चाहो तो.”

“क्या कहना चाहते हो.” डेविड को लगा कि पार्थ उन्हें ब्लैकमेल करना चाह रहा है.

“जिस प्रकार से सम्भवतः तुम्हारे परिवार में चुदाई चलती है, हमारे परिवार में भी वही होता है. ये तुम्हें इसीलिए बता रहा हूँ कि तुम्हे किसी प्रकार का डर न रहे.”

“ओह, दैट इस ग्रेट.” फिर वो कुछ सोचकर बोलै, “पर सागरिका की तो शादी हो रही है.”

“वहाँ भी वही चलता है. और इसीलिए हमारे परिवार अब कई बार मिलजुल कर चुदाई करते हैं.”

“तो अब क्या होगा.”

“मैं चाहता हूँ कि तुम्हारा परिवार भी इसमें सम्मिलित हो जाये. सोचो, आठ में से चार परिवार अगर ऐसे मिलजुल कर रहें तो.”

“चार? पर ये तो तीन ही हुए.”

“सरप्राइज़! शेट्टी परिवार में भी यही चलन है.”

“होली शिट, वर्ल्ड इस गोइंग क्रेजी, ब्रो।”

“यस, इट इस. नाउ लैट अस गो इनसाइड. यू कैन टैल योर फॅमिली.”

“या, मैन. दे विल बी सरप्राइज़्ड लाइक हैल.”

इसके बाद दोनों अंदर चले गए. जहाँ पार्थ रूचि की ओर मुड़ा, डेविड अपने परिवार की टेबल की ओर चला गया. कुछ ही देर में उन आठों की आश्चर्य से खुली ऑंखें पार्थ को देख रही थीं. पार्थ ने उन्हें आंख मारी और मुस्कुरा दिया. रूचि ने उससे पूछा कि मामला क्या है तो उसने बताया कि वो भी उनके ही पड़ोसी हैं और ये साफ है कि उनके घर में भी पारिवारिक सम्भोग की प्रथा है. रूचि ने इस बार उनकी ओर देखा. फिर उनकी ओर मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया. मिशेल ने उसका उत्तर दिया.

जैसे ही सात बजे एक एक करके अन्य अतिथि भी रेस्त्रां में आने लगे. रेस्त्रां में नियुक्त लड़के उन्हें उनकी टेबल पर बैठा रहे थे और लड़कियां उनके ड्रिंक्स का आर्डर ले रही थीं. आधे घंटे के भीतर ही रेस्त्रां में लगभग सभी लोग आ चुके थे. उनके सबके बैठने के बाद कुछ ही देर में मंत्रीजी, उनकी पत्नी और उनकी पुत्री भी आ गए. सबने खड़े होकर उनका स्वागत किया. वे तीनों ने हर टेबल पर जाकर सबसे मिले और सबका स्वागत किया. देख के ये साफ था कि वे सबको भली भांति जानते थे. मंत्रीजी सभी महिलाओं से आलिंगन करके मिल रहे थे और शिखा और उनकी पुत्री मनीषा पुरुषों के साथ आलिंगनबद्ध हो रही थीं.

इवान ने रेस्त्रां में अब कुल ५० लोग थे. इनमें २४ पुरुष थे और अन्य स्त्रियां. पुरुषों में आठ लड़के थे और अन्य प्रौढ़. महिलों में भी १६ महिलाएं थीं और १० लड़कियां थीं. जैसे जैसे मंत्रीजी का परिवार एक परिवार से मिलता, वे लोग बैठते जा रहे थे. अन्य लोगों से मिलकर अंत में मंत्रीजी का परिवार रिचर्ड के परिवार से मिलने आया.

“आप आज पहली बार आये हैं इसीलिए मैं आपसे मिलने अंत में आया हूँ. मुझे आपके बारे में इवान ने बहुत कुछ बताया है. मैं आपसे व्यापर के संबंध में भी कुछ बातें करना चाहूंगा, और इसके लिए आपको मैं कल अपने बंगले पर आमंत्रित कर रहा हूँ. अब आप सब आज के भोजन का आनंद लें. मैंने इवान से कहा है कि वो सभी से आपका परिचय करवा दे. जो खुश ही देर में करने वाला है. आप अपनी पसंद की ड्रिंक लें. मैं आपके पास कुछ देर में फिर आऊंगा.”

ये कहते हुए मंत्रीजी अपनी टेबल पर चले गए. सभी लोग अपनी ड्रिंक्स पी रहे थे. इवान ने माइक लिया और सबका ध्यान आकर्षित किया.

“आप सबका हमारे रिसोर्ट में फिर स्वागत है. मुझे प्रसन्नता है कि इस बार की थीम, जिसे हमने प्रकृति कहा है, आप सबने इस ठंड में भी स्वागत किया है. हम इस बात के लिए धन्य हैं कि हमारे यहाँ इतनी तीव्र ठंड नहीं पड़ती है, परन्तु इस समय कुछ तापमान कम हो रहा है. इसीलिए यहाँ हीटर चला दिए गए हैं. आप सबके कमरे भी इस समय गर्म किये जा रहे हैं.”

“जैसा की आप सब जानते हैं की ये हमारा पाँचवाँ नव वर्ष का आयोजन है और इस बार मंत्रीजी के एक अति विशिष्ट आयोजन किया है. मैं अपनी ओर से उनका इसके लिए आभार व्यक्त करता हूँ. आज हमारे बीच आठ नए अतिथि हैं, जिनमे से चार अफ्रीका के निवासी हैं. मैं आप सबको उनका परिचय देता हूँ. मैं आपसे विनती करूंगा कि उनके परिचय के उपरांत आप सभी एक एक करके उन्हें भी अपना परिचय दें.”

ये कहते हुए इवान ने रिचर्ड के परिवार के बारे में बताया और कुछ जैसन के परिवार के बारे में भी. इसके बाद हर परिवार ने उनसे मिलकर अपना परिचय दिया. सबसे मिलते मिलते, उन्हें दो परिवारों से रात्रि के लिए आमंत्रण मिला. किसी किसी को अलग आमंत्रण भी मिला. अर्थात कुछ परिवार उनके किसी एक या दो सदयों को ही आमंत्रित करने के इच्छुक थे. उन्होंने कहा कि वे विचार करके उन्हें बताएंगे. मंत्रणा में ये निश्चित हुआ कि अलग अलग परिवारों से मिला जाये जिससे कि उनके बारे में अधिक ज्ञान हो सके. ये तय होते ही उन्होंने पास खड़ी सेविका को ये बात इवान को बताने के लिए कहा.

कुछ महिलाएं जाकर मंत्री जी की टेबल पर बैठ गयी थीं और उनके साथ चुहल कर रही थीं. उनके हाव भाव से प्रतीत होता था कि वे उनके साथ रात बिताने में इच्छुक हैं. पर मंत्रीजी के कुछ बताने के बाद वे कुछ उदास हो गयीं. खाना खाने के पश्चात् एक गाड़ी से सबको उनके निश्चित स्थान (जहाँ उन्हें रात बितानी थी.) छोड़ा गया. मिशेल को इवान के कमरे में छोड़ा गया. अन्य सभी परिवार वाले भी अलग अलग परिवारों के साथ चले गए. आज वे अन्य परिवारों के पारिवारिक सम्भोग में सम्मिलित होने वाले थे.

मंत्री जी आज केके की चुदाई करने वाले थे, तो उनकी पत्नी शिखा ने जिस परिवार के साथ जाना चुना उसी में डेविड भी गया था. वहीं जैसन वाले परिवार में उनकी पुत्री आयी थी.

सभी लोग अपने गंतव्य पर पहुंच चुके थे.

आज रिसोर्ट के हर कमरे में चुदाई का संग्राम होना था.

और जो कल होना था वो अभी तक अनुसूचित था, जिसे केवल रूचि, पार्थ और मंत्रीजी ही जानते थे. पार्थ रूचि के साथ उसके कमरे में गया था. उन्होंने किसी के साथ जाने की आवश्यकता नहीं समझी थी. वैसे भी उन्हें कल के कार्यक्रम के बारे में और मंत्रीजी के साथ व्यवसाय के बारे में चर्चा करनी थी.

बाहर सर्दी धीरे धीरे बढ़ रही थी. पर रिसोर्ट के उन कमरों में जहां लोग थे, इस समय गर्मी थी, न केवल हीटर द्वारा उर्जित, बल्कि उनके शरीरों से निकलता वासना का ज्वर तापमान को बढ़ाता जा रहा था.

अभी केवल शाम ढली थी, रात तो जवान हुई थी.

अध्याय अंत.

अभी आगे अगले अध्याय में.
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.३

भाग १

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शोनाली का घर:

जब पार्थ घर से ३०० किमी दूर रिसोर्ट में डेविड से बात कर रहा था, उनके घर में सागरिका और निखिल की सगाई का प्रबंध कैसे हो ये चर्चा चल रही थी. क्योंकि ये स्त्री-विशेष कार्य था तो इस समय शोनाली, सुमति, शीला, सुप्रिया और सुरेखा इस में व्यस्त थें. वैसे संजना भी आयी हुई थी पर वो सागरिका और पारुल के साथ उनके कमरे में थी. संजना उन दोनों बहनों की बातें सुनकर चकित भी थी और कुछ उदास भी. उनकी बातों से ये साफ था कि वे चुदाई के खेल में पारंगत हैं और कई साथियों के साथ चुदाई कर चुकी हैं. और यहाँ वो थी जो अपनी सील टूटने की प्रतीक्षा कर रही थी. पर उसकी माँ ने उसे विश्वास दिलाया था कि वो दिन भी अब दूर नहीं है.

“पारुल, यार, आज शाम की पार्टी का क्या किया है. सात बज रहे हैं, पर मम्मी लोग तो सब दूसरे ही काम में लगी हैं. लगता है इस बार की पार्टी फीकी ही निकलेगी.” सागरिका ने बुझे मन से कहा.

पारुल, “दीदी, तुम चिंता क्यों कर रही हो. पापा ने सुबह ही तो बताया था कि आज की पार्टी का उन्होंने और नानाजी ने पार्टी का पूरा बीड़ा उठाया है. कल की नए वर्ष की पार्टी को निखिल, नितिन और सजल आयोजित करेंगे. अब हम सब तैयार हो जाते हैं. संजना, चलो तुम्हे मैं सजाती हूँ.”

संजना को इस बात से बहुत ख़ुशी हुई. उसे इस प्रकार का साथ कभी मिला नहीं था. उसके तीन तीन भाई थे, पर बहन एक भी न थी, पर पारुल और सागरिका उसकी ये कमी पूरी करने का प्रयास कर रही थीं.

सागरिका, “अरे पारुल, दो दिन में दो पार्टी, मजा आएगा. तू जा. संजना को मेरे साथ छोड़ दे. वैसे भी मेरे और इसके नाप में अधिक अंतर नहीं है. और फिर तुझे जितना समय लगता है उतने में तो हम दोनों तैयार हो जाएँगी. कल की पार्टी के लिए संजना को सजाने का काम तेरा. फिर देखेंगे कौन जीतेगा.”

इस बात पर सागरिका और संजना दोनों हंस पड़े और पारुल ने मुंह बनाने का स्वांग किया और अपने कमरे में चली गयी. तभी संजना का फोन बजा. उसकी माँ थी.

“हाँ, मॉम. सागरिका दीदी कह रही हैं कि वो मुझे तैयार करेंगी. आप चलो. वहीँ मिलेंगे.”

सुरेखा भी इस बात पर खुश हुई और स्त्री मंडली पार्टी के लिए उठ गयी.

********

सुरेखा को आज की पार्टी का कारण नहीं पता था, उसकी माँ शीला ने उन्हें आज सुबह ही बताया था कि आज उनके घर में पार्टी है और उनका एवं जॉय का परिवार ही होंगे. और कल फिर पार्टी थी, नए साल की. इसे तीनों लड़के आयोजित कर रहे थे. पार्थ के न होने से अन्य तीनों पर अधिक बोझ था. सुरेखा पार्टियों में कई दिनों से नहीं गयी थी. उसके पिता के घर जब पार्टी होती थी, तब वो अवश्य ही जाती थी, पर अब उसे पता चल चूका था कि उन्हें कम ही पार्टियों में बुलाया जाता था. सुप्रिया की बातों से उसे लग रहा था कि ये सामान्य पार्टी नहीं होगी. और इस सोच ने उसकी चूत में खलबली मचाई हुई थी.

घर पर पहुँच कर उसने सजने संवरने में अधिक देर नहीं की. वैसे भी उसकी सुंदरता प्राकृतिक थी, जिस हल्के से मेकअप से ही उभरा जा सकता था. हाँ, उसने अपनी पोशाक चुनने में समय लगाया और पहनने में भी. जब उसने तैयार होकर स्वयं को देखा तो उसे अपने से ही ईर्ष्या हो उठी.

“हम्म्म, अब तक मैं ठीक दिखती हूँ.” उसने अपने आप को सराहा.

“मॉम, आप ठीक नहीं बहुत सुंदर दिखती हो.” सजल ने उसके कमरे के द्वार से ही उसे देखते हुए कहा. “आप अगर लेट न हो रही होतीं, तो मैं एक बार आपकी चुदाई अवश्य करता.”

सुरेखा मन ही मन खुश हो गयी, “पर तुम अभी तक ऐसे क्यों खड़े हो, तैयार नहीं होने क्या?’

“बस मॉम, अभी कपड़े बदलकर आता हूँ, फिर सब साथ चलेंगे. संजना को भी बता देता हूँ.”

“संजना को सागरिका ले कर आएगी, वो उसके ही घर पर है.”

“ओह, ये तो बड़ी अच्छी बात है.”

“हाँ, अब जल्दी कर, फिर हम निकलते हैं.” ये कहते हुए सुरेखा अपने मेकअप को फिर से ठीक करने लगी.

सजल के लौटते ही उसने अपना पर्स लिया और माँ बेटे घर को बंद कर कर सजल के नाना के घर के लिए निकल पड़े.

*******

सागरिका: “संजना, तुम पहले नहा लो, फिर मैं तुम्हारा मेकअप करूंगी. तब तक तुम्हारे लिए कपड़े निकाल लेती हूँ.”

संजना: “थैंक यू , भाभी.”

ये कहकर संजना बाथरूम में गयी और जल्दी ही नहाकर तौलिया लपेटे हुए बाहर आयी. सागरिका ने उसे देखा तो उसे देखती रह गयी.

“क्या देख रही हो भाभी?”

“तुम सच में बहुत ही अधिक सुंदर हो. ऐसे बेकार कपड़े क्यों पहनती हो जिसमें तुम इतनी साधारण लगती हो. कोई बात नहीं, अब मैं तुम्हारे लिए सारे नए कपड़े लूँगी।”

“अरे नहीं, भाभी. मुझे ये ठीक लगते हैं.”

“भाभी की बात टालोगी?”

संजना ने हाथ डाल दिए. “ओके, भाभी.”

“तुम ये लहँगे वाली ड्रैस पहनो, तब तक मैं भी नहा लेती हूँ.”

संजना ने सागरिका द्वारा दिए कपड़े पहने तब तक सागरिका भी बाहर आ गयी. पर संजना का मुंह खुला ही रह गया. बात ये थी कि सागरिका नंगी ही बाहर आ गयी थी. संजना की ऑंखें सागरिका के अदम्य सौंदर्य से चौंधिया गयीं.

“भाभी आप तो बहुत सुंदर हो. निखिल भैया बहुत भाग्यशाली हैं.” ये कहते हुए संजना की आँखें सागरिका के तराशे हुए शरीर पर फिसल रही थीं. उसकी आँखें सागरिका की चूत के ऊपर ठहरीं जहाँ बाल का एक भी रेशा नहीं था. एकदम स्पॉट और चिकनी चूत को देखकर संजना चकित रह गयी और पूछ बैठी.

“भाभी आपकी चू… पर बाल नहीं हैं?”

“लेसर से निकलवा दिए. तुम्हारी भी ऐसी ही चिकनी करवा दूंगी. मॉम बता रही थीं कि तुमने अच्छा जंगल बनाया हुआ है.”

संजना शर्मा गयी.

“भाभी, मैंने कभी सोचा नहीं इस बारे में.”

“मुझे सासू माँ से पूछना पड़ेगा, उन्होंने भोग के बाद क्यों नहीं करवाया उसे साफ.”

संजना को समझ नहीं पड़ रहा था कि क्या कहे.

सागरिका उसके पास आयी और बोली, “मेरी प्यारी ननद, अब मैं तुम्हारा ध्यान रखूँगी। और एक बात और शर्माना बंद करो.”

संजना को अपनी माँ के द्वारा दिया गया यही पाठ याद आ गया. “ओके, भाभी.”

सागरिका ने संजना को ड्रेसिंग टेबल पर बैठाया और उसका मेकअप करने लगी. जल्दी ही संजना का रूप मानो बदल ही गया. वो स्वयं को पहचान नहीं पा रही थी.

इसके बाद सागरिका ने उसे उठाया और फिर अपने कपड़े पहने और अपना मेकअप किया. कुछ ही देर में दोनों सुंदरियां पार्टी के लिए तैयार थीं. सागरिका ने संजना का हाथ लिया और कमरे से निकलकर बैठक में आ गयी. वहाँ देखा तो जॉय बैठा था, पर शोनाली, पारुल और सुमति का अता पता नहीं था. जॉय अपनी बेटी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया और फिर उसने संजना को देखा तो उसका मुंह खुला रह गया. वो उसे पहचान नहीं पाया, वैसे भी वो संजना से एक ही बार मिला था.

“ये कौन है?”

“ओह डैड, आप संजना को नहीं पहचाने?”

“ओह, वाओ. संजना तुम बिलकुल परी लग रही हो.”

“थैंक यू अंकल. ये भाभी का कमाल है.”

“कौन भाभी?” जॉय की बुद्धि काम नहीं कर रही थी.”

“डैड, डैड, डैड. मैं इसकी भाभी बनने वाली हूँ. आप भी न.”

जॉय खिसियानी हंसी हंस पड़ा.

“तुम दोनों को देखकर मैं बिलकुल अवाक् हूँ.”

तब तक पारुल, शोनाली और सुमति भी आ गए. जॉय का लौड़ा इन पाँच सुंदर स्त्रियों को देखकर खड़ा हो गया. सभी स्त्रियों ने एक दूसरे की प्रशंसा करते हुए एक दूसरे को हल्के से चूमा. फिर जॉय को देखा तो उसे देखकर लगा कि वो जड़वत है. शोनाली उसके सामने गयी.

“चलिए, हमें बाद में देख लेना. देर हो जाएगी.”

“हाँ, हाँ, चलो, चलो .”

घर बंद करते हुए पहले ये विचार किया कि पैदल जाएँ या कार से, फिर कार से ही जाने में भलाई समझी और ५ मिनट में ही वे सब समर्थ के घर की घंटी बजा रहे थे.

*******

उधर सुप्रिया और उसके दोनों बेटे निखिल और नितिन भी तैयार थे. सुप्रिया ने दोनों को देखा तो उसका मन भर आया. फिर अपने मन को संयत करते हुए उसने कहा, “लगता है आज तुम दोनों मम्मी की अच्छी सेवा करोगे रात भर.”

निखिल ने उत्तर दिया, “पहले तो ये पता नहीं कि नानाजी ने क्या कार्यक्रम बनाया है. उनके और नानी के बीच में इस पार्टी के लिए क्या तय हुआ है, ये वही जानते हैं. तो सम्भव है कि आपकी रात हमारे बीच न बीते बल्कि किसी और के साथ बीते। “

सुप्रिया ने कुछ सोचा फिर कहा, “ जो भी हो, कल सुबह तो तुम दोनों मेरी अच्छी चुदाई करोगे ही. अगर जाना न होता तो मैं तो अभी से चुदाई के मूड में हूँ.”

निखिल ने आगे बढ़कर सुप्रिया के दोनों गालों पर हाथ रखा, “मॉम, कोई ऐसा समय बता सकती हो, जब आप चुदाई के मूड में नहीं रहती हो.”

“हट, बदमाश. पर तेरी बात सही है. चलो निकलें.”

कुछ ही देर में वे तीनों भी समर्थ के घर में प्रवेश कर रहे थे. उनके आगे अभी अभी सुरेखा और सजल अंदर गए थे. उन्हें आश्चर्य हुआ कि संजना नहीं आयी, फिर सोचा कि बाद में आएगी.

अंदर अब लोग खड़े बातें कर रहे थे. निखिल अपनी भावी पत्नी को ढूंढ रहा था. उसे जब सागरिका दिखी तो उसके साथ एक नयी लड़की को देखकर उसे हैरानी हुई. इस समय उस लड़की को सुरेखा मौसी देखकर कुछ कह रही थीं और उसके चेहरे और माथे को बार बार चूम रही थीं. निखिल उस ओर गया और सागरिका ने उसे देखकर अपनी ४०० वाल्ट की मुस्कुराहट से उसका स्वागत किया. सागरिका की ओर देखकर वो उस लड़की को देखने लगा, कुछ जानी पहचानी सी लगी.

“मौसी, ये कौन है?” उसने सुरेखा से पूछा.

“बूझो तो जानें.” सुरेखा और सागरिका एक साथ बोल पड़ीं.

निखिल ने उस लड़की को देखा और फिर चिल्लाया, “संजू, तू! ओह भगवान! तू कितनी सुंदर लग रही है!” ये कहकर उसने संजना को गले से लगा लिया. संजना भी अपने भाई के सीने से चिपक गयी. निखिल ने उसका माथा चूमकर कहा. “इतनी सुंदर है तू, फिर क्यों झल्ली बनी घूमती है?”

सागरिका: “यही मैंने इससे पूछा था. और मौसी, अब मैं इसके कपड़े और मेकअप का ध्यान रखूंगी. आप कृपया मना मत करना.”

सुरेखा ने सागरिका को बाँहों में ले लिया, “तुम्हारी किसी बात के लिए मैं कभी मना नहीं करूंगी. आज तुमने मेरी संजू के लिए किया है, मैं इसे हमेशा ध्यान में रखूंगी.”

निखिल ने सागरिका से पूछा, “इसे तुमने सजाया है?”

संजना बोल उठी, “हाँ, भैया, ये भाभी का ही जादू है.”

निखिल, “थैंक यू , सग्गू. यू आर वंडरफुल.”

सागरिका, “अरे कुछ नहीं, मेरी इकलौती ननद है. इसके लिए नहीं करूंगी तो किसके लिए करूंगी?”

सभी लोग भावनाओं के सागर में भीग गए. इतने में समर्थ ने सबका ध्यान खींचा।

समर्थ की ओर सबकी ऑंखें चली गयीं. इस समय सब अलग अलग खड़े हुए थे.

समर्थ: “सब बैठ जाओ, मुझे और शीला आपको कुछ बताना चाहते हैं.”

बैठक बड़ी होने के बाद भी इतने लोगों के लिए अपर्याप्त थी. पर किसी प्रकार सभी लोग बैठ गए. कुछ लड़कियां अपने पिता की गोद में जा बैठीं और कुछ माताएं अपने बेटों की. सबका ध्यान अब समर्थ और शीला की ओर था. शीला ने इस समय बहुत सरल मेकअप किया था, परन्तु इसमें भी उसका आकर्षण बढ़ा ही था.

समर्थ: “निखिल के विवाह की बात जब से चली है, मैं और शीला अपने विषय में कुछ चिंतन कर रहे हैं. ये जानकर कि हमारे नाती, नातिन विवाह करने वाले हैं, जानकर मन में इतनी प्रसन्नता है कि उसका वर्णन सम्भव नहीं है.”

“पर इसके साथ ये भी आभास है कि अब हमें अपने आप को कुछ गतिविधियों से अलग कर देना चाहिए.”

ये सुनकर सबके चेहरे पर आश्चर्य और उदासी छा गयी.

समर्थ: “चिंता न करो, इनमें वो गतिविधियां नहीं हैं जो हमारे घर का अभिन्न अंग हैं. मैंने ये निश्चय किया है, कि मैं अब अपने बिज़नेस को सुप्रिया और सुरेखा के हाथों सौंप रहा हूँ. मैं उन्हें किसी भी प्रकार की सलाह के लिए अवश्य उबलब्ध रहूँगा, पर अब ये इन दोनों का ही उत्तरदायित्व है. इसके लिए मैंने आवश्यक अनुदेश दे दिए हैं और १ जनवरी से पूर्ण नियंत्रण इन दोनों के पास चला जायेगा. हाँ, मैं वेतन के रूप में कुछ राशि हर माह लूँगा, परन्तु मुझे नहीं लगता कि इसमें किसी को कोई आपत्ति होगी. ये राशि मुझे और शीला को बराबर मिलेगी और जीवन पर्यन्त मिलेगी. हम में से किसी की मृत्यु होने पर पूरी राशि जीवित व्यक्ति को मिलेगी. अगर किन्ही कारणों से कम्पनी किसी और को बेची जाती है, तो उसमें से ३०% भाग हमारा होगा. कल इस आशय के पत्र सुप्रिया और सुरेखा को दे दिए जायेंगे. इसीलिए, मैं निखिल, नितिन और सजल को कल की पार्टी के लिए पहले से धन्यवाद देता हूँ, क्योंकि ये मेरी कम्पनी के भागीदार के रूप में अंतिम होगी.”

सभी समर्थ की इस बात को चुपचाप सुन रहे थे. सुप्रिया और सुरेखा की आँखों से आंसू बह रहे थे.

“कुछ और आवश्यक बदलाव भी मैंने सोचे हैं. जैसा कि तुम सब जानते हो कि परिवार बढ़ रहा है. इसीलिए मैंने अपने बंगले में कुछ और विस्तार करने का निर्णय लिया है. बंगले की पश्चिम दिशा में बढ़ोत्तरी की जाएगी. ठेकेदार के अनुसार इसमें लगभग आठ महीने का समय लगेगा. मेरा ये विचार है, कि उसके समापन पर सुरेखा और सुप्रिया दोनों अपने परिवारों के साथ इसी घर में रहें. वैसे भी तुम लोगों का आधा समय यहीं बीतता है, तो अधिक अंतर् नहीं पड़ेगा. तुम दोनों अपने वर्तमान बंगलों का क्या करना चाहते हो, ये तुम्हारा निर्णय रहेगा. पर शीला के अनुसार सुरेखा का घर संजना को दिया जाये जिससे कि वो विवाह के बाद उसमें ही रह सके. अगर उसका विवाह शहर से बाहर हो, तो ये निर्णय बदला जा सकता है. घर के विस्तार का नक्शा जो देखना चाहे वो देख सकता है.”

“अब जैसा कि सब देख सकते हैं, की हमारी बैठक अपने बढ़ते परिवार के लिए छोटी पड़ रही है, इसीलिए इसके लिए भी प्रयोजन किया गया है. पर मैं देख रहा हूँ की गोदी में बैठने में बहुत सुख मिल रहा है.”

इस बात पर सब हंस पड़े.

“सागरिका, और निखिल की अगले सप्ताह सगाई है. और उसके दो दिन बाद मैं और शीला दो माह के विश्व दर्शन पर निकल रहे हैं. इसमें से एक मास हम भारत भृमण करेंगे और शेष विश्व के कुछ और देशों का. मुझे विश्वास है कि इस अवधि में सुप्रिया और सुरेखा को मेरी आवश्यकता कम्पनी के कार्यों के लिए नहीं पड़ेगी. मैं जॉय और सुमति से भी अनुरोध करूंगा कि जहाँ तक सम्भव हो वे भी इन दोनों की सहायता करें. जॉय के वर्षों का अनुभव और सुमति की आंतरिक बुद्धिमत्ता मेरी बेटियों के लिए अमूल्य सिद्ध होगी.”

“अब अगर किसी के मन में कोई प्रश्न हो तो मुझसे सॉरी हम दोनों से पूछ सकता है.”

प्रश्न कई थे, पर समर्थ और शीला ने उन सबका शांति और सफलता से उत्तर दिया. इसके बाद सुप्रिया और सुरेखा जाकर दोनों के गले मिलीं. समर्थ ने सुरेखा के कान में कुछ कहा और सुरेखा ने सिर हिलाकर हामी भरी. जॉय ने उठकर समर्थ का हाथ मिलाया. सुमति की आँखों में नमी थी, आज उसके भाई भाभी के सिवाय किसी और ने उसकी प्रशंसा जो की थी.

समर्थ ने उसे गले से लगाया और सुरेखा को संकेत किया. सुरेखा ने भी सुमति को गले लगाया और कहा कि १ जनवरी से वो भी उनकी कम्पनी में उन दोनों के साथ काम करेगी. उसका क्या काम रहेगा, इसका निर्णय ये देखकर किया जायेगा कि वो किस कार्य में उत्कृष्ट है.

फिर समर्थ की हुंकार सुनाई दी, “तो अब पार्टी हो जाये!”

समर्थ की इस घोषणा ने सबको एकाएक ही सक्रिय कर दिया. नितिन, निखिल और सजल ने जल्दी ही व्हिस्की, वाइन और बियर को बार में सजा दिया. उनके संकेत पर पारुल और संजना ने सबसे उनकी पसंद पूछी और तीनों भाइयों को बता दी. सागरिका ने आगे बढ़ कर सहायता करनी चाही तो उसे सुप्रिया ने रोक लिया.

“उन्हें करने दो, तुम अब घर की रानी जो बनने जा रही हो.”

“ओह नहीं मॉम, रानी तो नानी, आप और मौसी ही रहेंगीं. मुझे राजकुमारी समझ लीजिये.” ये कहकर सागरिका ने अपनी हँसी से सुप्रिया के दिल के तार गुदगुदा दिए.

शीला ने सुप्रिया के पास आकर उसे कहा तो सागरिका ने भी उनके इस खेल में सम्मिलित होने की इच्छा की. पर शीला ने उसे बताया कि उसके लिए समर्थ ने कुछ अलग सोचा है. और वैसे भी, आज रात लम्बी रहने वाली है. अब जब समर्थ ने अवकाश लेने का संकल्प लिया है, तो उन्हें अब अपने जीवन को नए रंग में जीने का अवसर मिला है.

सबकी ड्रिंक्स हाथ में देने के बाद निखिल ने व्हिस्की ली, और अन्य चारों ने बियर. महिलाओं ने वाइन को चुना. जॉय और समर्थ भी व्हिस्की ही पी रहे थे. घुल मिल कर बातें करते हुए दूसरे राउंड की ड्रिंक्स भी आ गयीं. इतने में रेस्त्रां से खाना भी आ गया. कुछ देर के बाद सबने ड्रिंक समाप्त की और खाने पर जुट गए. खाना कम कैसे नहीं पड़ा ये एक रहस्य ही रहेगा क्योंकि सभी भूखे तो थे ही. खाने के बाद समर्थ ने जॉय को बालकनी में बुलाया.

समर्थ ने एक सिगरेट निकाली और जॉय से भी पूछा. जॉय ने एक सिगरेट ली और दोनों सुलगाकर कुछ देर चुप खड़े रहे.

समर्थ: “जॉय, मैंने जो कहा था, उसे गंभीरता से लेना. मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटियाँ इस व्यवसाय को और आगे ले जाएँ, पर समाज में स्त्री द्वारा चलाये व्यापार के साथ अधिक धोखा करने का अनुभव है मुझे. मेरी दोनों बेटियाँ कुछ भावुक हैं और इसका लाभ कुछ लोग उठाकर बिज़नेस को हानि पहुंचा सकते हैं. मैं तुमसे निवेदन करता हूँ, कि सेल और पैसे की वसूली की ओर अगर तुम बीच बीच में देखते रहोगे तो किसी भी हानि से बचा जा सकता है. मैं सुमति को इसीलिए भी इसमें मिलाना चाहता हूँ क्योंकि वो बहुत दृढ मन की है, और वो इन दोनों के दयालु स्वभाव की काट के रूप में काम कर सकती है.”

जॉय ने समर्थ को विश्वास दिलाया कि वे इसका ध्यान रखेगा और उसे भी समय समय पर अपने सुझाव भी देता रहेगा.

समर्थ: “आज तुम्हें मेरी छोटी बेटी का भी स्वाद चखने मिल सकता है, अगर हम जल्दी अंदर चलें और तुम उस पर पहले हाथ डाल दो. नहीं तो मेरे नाती उस पर लट्टू हैं.”

ये सुनकर जॉय ने तुरंत सिगरेट फेंकी और अंदर चल दिया. समर्थ भी एक छुपी मुस्कान लिए उसके पीछे हो लिया.

अंदर खेल आरम्भ तो नहीं हुआ था पर देर भी नहीं थी. जॉय ने सीधे सुरेखा की ओर कदम बढ़ाये. और उसने नितिन को कुछ ही सेकंड से पछाड़ दिया. सुरेखा को देखकर जॉय ने कहा कि वो इतने दिन से उसका साथ पाने के लिए टूर था, पर अवसर न मिलने के कारण चूक गया था. तो क्या सुरेखा आज उसके साथ कुछ समय बिताना पसंद करेगी. सुरेखा ने उसके बढ़े हाथ को लिया और हामी भरी. नितिन जो इस आशा में था कि अगर सेटिंग नहीं हुई तो मौसी को वो चोदेगा निराश होकर मुड़ा तो सागरिका से भिड़ गया.

“मेरे प्यारे देवर जी, आज आपको अपनी भाभी की सेवा करनी होगी. आप किसके चक्कर में थे? मौसी को आज मेरे पापा के साथ छोड़ दीजिये न प्लीज.”

सुमति समर्थ के पास जाकर उनके गले लग गयी.

“अपने मेरे ऊपर इतना विश्वास किया, मैं इसे कभी नहीं तोडूंगी.”

“मुझे पता है. मेरी दोनों बेटियां लोगों पर बहुत भरोसा कर लेती हैं. अन्यथा वे बहुत चतुर हैं.” समर्थ ने सुमति के नितम्ब पर अपने हाथों से दबाव बनाया और सुमति उनसे और अधिक सट गयी.

सुप्रिया ने संजना को अपने साथ लिया. संजना अपने चारों और बन रहे वातावरण से कुछ अचरज में थी. सुप्रिया ने उसे शीला के सामने लेकर खड़ा कर दिया.

“मम्मी, सम्भालो अपनी नातिन को. ये अब कली से फूल बनने के लिए आतुर है, और मुझे नहीं लगता कि अब इसे अधिक दिन तक रोक पाएंगे. तो आज इसके रस का पान करने का एक अवसर है, सबके लिए. इससे पहले कि पापा इसका कौमर्य लें, आप भी इसका स्वाद ले लो.”

शीला ने प्यार से संजना के चेहरे को हाथ में लेकर कहा, “हाँ, समर्थ बहुत अधीर है इसके लिए. हमारे भृमण पर निकलने के पहले वो इसे अवश्य फूल बना देंगे. और आज इस कच्ची कली का रस में तो पियूँगी ही, पर इसे भी अपना रस पिलाऊँगी। क्यों संजू, नानी का रस तो पिएगी न?”

“जी नानी” इसके अधिक संजना कुछ न कह सकी.

सुप्रिया: “मम्मी, आप इसे सम्भालो, मैं पारुल को देखती हूँ.”

निखिल शोनाली से बात कर रहा था, “तो सासु माँ, क्या मन है आज आपका. देख रही हूँ कि हम दोनों और सजल ही बचे हैं, तो क्यों न सजल को साथ ले लेते. दोनों मिलकर मुझे चोदो।”

“नेकी और पूछ पूछ.” ये कहकर निखिल ने सजल को पुकारा जो निराश सा एक ओर खड़ा था. निखिल के बुलाने पर उसका चेहरा खिल गया. वो तपाक से पास आ कर खड़ा हो गया.

“मम्मीजी की इच्छा है कि हम दोनों इनकी एक साथ चुदाई करें. क्या सोचते हो?”

सजल ने तुरंत अपनी स्वीकृति दे दी. अब समस्या यही थी कि किसे कहाँ जाना है. और समर्थ ने इसका विचार पहले ही किया हुआ था.

"मैं और शीला अपने कमरे में जा रहे हैं. सुप्रिया और सुरेखा सुप्रिया के कमरे में जाओ. नितिन और निखिल तुम तीसरे कमरे में जाओ. मैंने रिकॉर्डिंग चला दी है. बाद में हम सब देखेंगे. किसी को कोई आपत्ति. इसका कोई प्रश्न ही नहीं था. शीला और समर्थ संजना और सुमति को लेकर अपने कमरे में चले गए. सुप्रिया और सुरेखा पारुल और जॉय को अपने कमरे में, और नितिन, निखिल और सजल शोनाली और सागरिका को लेकर अपने कमरे में चले गए.

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समर्थ और शीला:

कमरा बंद होते ही समर्थ ने सुमति को अपनी ओर खिंचा और उसे चूमते हुए उसके ब्लॉउस के हुक खोल दिए. उधर शीला संजना को लेकर बिस्तर पर बैठी और उसका चेहरा उठाकर चूमने लगी.

“बहुत मीठी है तू संजना, बहुत प्यारी. सदा ऐसे ही रहना बिटिया.” शीला ने उसे एक बार फिर चूमा और अपने गले का हार उतारकर संजना को पहनाया. अब तू और भी अधिक सुंदर लग रही है. जाकर देख तो अपने आप को.”

संजना तुरंत उठकर शीशे में अपने आप को देखने लगी. सगारिका द्वारा किया गया मेकअप, सुंदर पोशाक और गले में ये कीमती हार, सच में उसकी सुंदरता को अद्वितीय बना रहे थे. कई मिनट तक वो अपने आपको अलग अलग कोणों से निहारती रही. फिर उसने प्रीतिबिम्ब में नानी को पीछे खड़े होते देखा.

“सुंदर लग रही है न?”

“जी नानी, थैंक यू.” ये कहते हुए संजना पीछे मुड़ी तो चौंक गयी. उसकी नानी ने अपने कपड़े उतार दिए थे और अब वो नंगी ही संजना के सामने खड़ी थी. संजना ने उनके शरीर को एक बार देखा.

“नानी, आप भी बहुत सुंदर हो. तभी मम्मी, मौसी और मैं भी ऐसी हैं.”

“चल झूठी, इस बुढ़िया को मक्खन लगा रही है.”

“नहीं माँ जी, सच बोल रही है.” ये सुमति ने कहा था. संजना ने उस ओर देखा तो उसने सुमति को भी नंगा पाया. और वो अपने घुटनों के बल थी और उसके मुंह के सामने नाना का विशाल लंड तना खड़ा था. संजना नाना के लंड को देखकर अचम्भित हो गयी. अब तक उसने केवल सजल का ही लंड देखा था, जो उसे बड़ा लगता था, पर नाना का लंड तो सजल से भी बड़ा था. बहुत नहीं, पर बड़ा अवश्य था.

“चल आ, बस अब तू ही रह गयी है अपने कपड़ों में, तुझे तो मैं अपने हाथ से नंगा करूंगी.”

ये कहते हुए शीला बारी बारी से संजना के वस्त्र उतारकर एक ओर अच्छे से रखने लगी.

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सुप्रिया और सुरेखा:

दोनों बहनें बाप बेटी (जॉय और पारुल) के साथ सुप्रिया के कमरे में आ गए. वैसे तो एक कमरा सुरेखा का भी था, पर वो वहाँ कम हो रूकती थी. इसीलिए इतना व्यवस्थित भी नहीं था, पर अब समर्थ की घोषणा के बाद इस विषय में भी कुछ करना होगा. कमरे के अंदर आने के बाद जॉय ने एक ड्रिंक मांगी. सुप्रिया ने उसे उसकी ड्रिंक बनाकर दी. पारुल जो घरेलू चुदाई की अभ्यस्त थी, उसके पिता की ड्रिंक बनते समय ही अपने कपड़े उतार कर सोफे पर बैठ गयी थी. सुरेखा ने उसे इतनी सरलता से निर्वस्त्र होते देखा तो आश्चर्य किया, पर अब वो अपने परिवार में भी व्यभिचार के दर्शन कर चुकी थी, इसीलिए उसने इसे सहर्ष स्वीकार किया.

जॉय के हाथों में उसकी ड्रिंक देकर सुप्रिया ने उसके होंठ चूमे, “मेरी बहन का अच्छा ध्यान रखना समधी जी.”

जॉय ने उसे विश्वास दिलाया कि वो अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ेगा. सुप्रिया ने पारुल को देखा जो पहले ही नंगी हुई बैठी थी.

“वाह, बहुत सुंदर और स्वादिष्ट.” पारुल की नमी से भीगी पारुल की चूत की ओर देखकर सुप्रिया के मुंह में पानी आ गया. उसने भी अपने कपड़े उतारने में अधिक देर न की. और जब तक वो नंगी होकर पारुल के आगे खड़ी हुई, जॉय और सुरेखा भी अपने बंधनों से मुक्त हो चुके थे. जॉय ने सुरेखा को अपनी बाँहों में लेकर एक गहरा चुंबन दिया. सुरेखा इस चुंबन में खो सी गयी और जॉय के सीने से लगकर खड़ी हो गयी. पर जॉय का मन अभी नहीं भरा था. वो सुरेखा का चेहरा उठाकर फिर से उसे चूमने लगा और इस बार सुरेखा ने उसका पूरा साथ दिया. एक दूसरे के चुंबन में खोये इन दोनों को अब कमरे में उपस्थित अन्य दो व्यक्तियों का भान ही नहीं था.

“मुझे तुम्हारी चूत का स्वाद लेना है.” सुप्रिया ने पारुल से कहा.

“और मुझे आपकी.” पारुल ने उत्तर दिया.

“तो फिर समय नष्ट करने का कोई अर्थ नहीं. तुम नीचे या मैं?”

“जैसा आप चाहो.”

“हम्म, ठीक है, तुम नीचे लेटो.” ये कहते हुए पारुल को बिस्तर पर लिटाकर सुप्रिया ने अपनी चूत उसके मुंह पर रखी और फिर आगे झुकते हुए पारुल की पसीजी चूत पर अपनी जीभ फिराई। उसने पारुल के शरीर में एक कम्पन अनुभव किया और अगले ही पल उसके शरीर में भी वही कम्पन हुआ जब पारुल की जीभ ने उसकी चूत पर अपनी जीभ चलाई.

जॉय ने सुरेखा से अपना चुंबन तोड़ा और उसे बिस्तर पर बैठकर उसके दोनों पांव फैला दिए. सुरेखा ने भी जॉय का आशय समझते हुए अपनी जांघें और फैला दीं. जॉय ने उसके जांघों को चूमते हुए उनपर बारी बारी अपनी जीभ चलाई. सुरेखा के शरीर में बिजली सी कौंध गयी. हल्के हल्के जाँघों को चूमते हुए जॉय ने सुरेखा की चूत के ऊपर अपना मुंह जोड़ा और गहरे चुसाव के साथ चूत को चूस लिया. सुरेखा की साँस रुक गयी. ऐसा उसने पहले कभी भी अनुभव नहीं किया था. जॉय ने अब बिना रुके उसकी चूत के चारों ओर और अंदर अपनी जीभ को चलाया तो सुरेखा का मन विव्हल हो गया.

इस समय दोनों बहनों की चूत को बाप बेटी चूसने चाटने में लगे थे. पर पायल भी सुप्रिया की चूत पी रही थी, जबकि सुरेखा का मुंह खाली था. सुरेखा ने इसे ठीक करने के लिए जॉय से कहा कि वो भी उसे अपने लंड चूसने के लिए दे. सुरेखा बिस्तर पर लेटी और जॉय ने ऊपर से अपने लंड को उसके चेहरे के सामने लहराया. सुरेखा ने हाथ में लेकर उसे अपने मुंह में लिया और जॉय ने आगे झुकते हुए सुरेखा की चूत का सेवन पुनः आरम्भ कर दिया.

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शोनाली और सागरिका:

शोनाली अपनी बेटी सागरिका, अपने होने वाले दामाद निखिल और उसके दोनों भाइयों के साथ तीसरे शयनकक्ष में प्रविष्ट हुई. उसके पीछे चल रहे तीनों भाई उसके उचकते कूल्हों को देखकर मंत्रमुग्ध थे. शोनाली भी उन्हें कुछ अधिक ही उछलते हुए चल रही थी. सागरिका के ऊपर मानो किसी का ध्यान ही नहीं था. अगर सागरिका की ऑंखें पीछे देख पातीं तो उसे अवश्य ईर्ष्या होती, अपनी माँ से. पर सृष्टि की रचना ऐसी नहीं है.

कमरे में अंत में सजल ने कदम रखा और दरवाजे को बंद कर दिया.

शोनाली: “ओके, देखो, अब हम सब यहां हैं, तो मैं सीधी बात कहती हूँ. मुझे तीनों के लंड चाहिए, एक साथ. ऐसा किये हुए मुझे बहुत समय हो चुका है, और मैं इस अवसर को खोना नहीं चाहूंगी. सागरिका, तुम क्या चाहती हो?”

सागरिका: “मॉम, आप ने तो मेरे दिल की बात छीन ली. मैं भी यही चाहती थी. पर क्योंकि सजल हमसे पहली बार मिला है, तो मैं उससे जानना चाहूंगी कि वो क्या चाहता है. पहले आप या मैं?” सागरिका अपने कपड़े निकाल रही थी और उसकी सुंदरता को देखकर सजल ठगा सा खड़ा था.

शोनाली: “क्यों न हम उसे दिखा दें कि उसे क्या मिलने वाला है, जिससे उसे निर्णय में कठिनाई न हो.” शोनाली ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे किया और फिर उसे उतारने लगी.

सजल इन दोनों को देखकर विस्मित था. किसे चुने? इसका समाधान उसके बड़े भाई निखिल ने कर दिया.

निखिल: “मैं तो कहूंगा कि आप दोनों को सजल का लंड पहले अपनी चूत में लेना चाहिए. जब तक वो ऐसा नहीं करेगा, हम दोनों आपको छुएँगे भी नहीं. और फिर उसके बाद हम दोनों भी आपकी चुदाई करेंगे, जैसा आप चाहती हो.”

सजल ये सुनकर खुश हो गया. उसे उसके मन की इच्छा पूरी होते दिखी. “हाँ ये ठीक है. पर पहले आंटी।”

शोनाली ने सागरिका की ओर विजयी मुस्कान के साथ देखा. सागरिका ने उसे देखा और मुस्कुराई.

“मॉम, आप अगर ये सोचकर इतरा रही हो कि सजल पहले आपको चोदने वाला है, तो मैं आपको ये बता देती हूँ कि मैं भी सजल से अपनी गांड पहले मरवाऊँगी उसके बाद इन दोनों को छूने दूँगी.”

अब तो सजल की ख़ुशी की सीमा ही नहीं रही. न केवल उसे शोनाली की चूत मिलने वाली थी, बल्कि उसकी होने वाली भाभी उससे गांड भी मरवाने के लिए तैयार थी.

निखिल: “लगता है छोटे भाई, आज तेरी बहुत अधिक माँग है. चल आगे बढ़ और मम्मी जी को चोद, हम तेरा साथ देने के लिए जल्दी ही आते हैं.” नितिन अब तक बिना कुछ बोले नंगा हो ही चुका था. निखिल ने भी अपने कपड़े उतार दिए. सजल के हाथ अपने कपड़े उतारते हुए कांप रहे थे, तो सगारिका ने आगे बढ़ते हुए उसका साथ दिया और जल्दी ही वो भी नंगा था.

नितिन ने उसे देखकर सीटी बजाई, “भाई अब छोटा नहीं रह गया.”

और सच में सजल का खड़ा लंड गर्व से तन कर खड़ा था. शोनाली भी उसके लंड को प्यासी आँखों से देख रही थी. फिर वो आगे बढ़ी.

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समर्थ और शीला:

शीला ने जब संजना के नंगे शरीर को देखा तो उसे ईर्ष्या सी हुई. जवानी की अनछुई कली थी संजना. एक समय शीला भी ऐसी ही दिखती थी. पर आयु ने उसके शरीर को ढाल दिया था. कसे हुए कटाव, चिकनी त्वचा, कहीं भी किसी सिलवट का नामोनिशान नहीं था उसकी नातिन के शरीर पर. उसे प्यार से बिस्तर पर लिटाते हुए वो संजना की आँखों में देख रही थी. पर उसे वहां वासना नहीं बल्कि शीला के प्रति अपर प्रेम और समर्पण दिख रहा था. संजना के भोलेपन पर शीला का भी प्रेम उमड़ पड़ा. वो संजना के चेहरे को हाथों में लेकर चूमने लगी. उसके चेहरे का कोई भी रोम नहीं था जिसे शीला ने नहीं चूमा. संजना केवल अपनी नानी के इस प्रगाढ़ प्रेम को प्राप्त कर रही थी. बिना कुछ कहे. शांत.

पर समर्थ को ये सब दिख रहा था और उसने शीला के इस प्रेम को समझा. उसे संजना के यौवन में शीला की जवानी याद आ गयी. सुमति इन सबसे अनिभिज्ञ समर्थ के लंड को चाटकर अपने लिए तैयार करने में लगी थी. पर उसे रह रह कर अन्य लोगों की भी याद आ रही थी. किसी को याद भी रहेगा कि नहीं कि उसे उसके प्रोटीन का डोस देने का. उसे विश्वास था कि अन्य कमरों में जब गांड में माल छोड़ा जायेगा तो उसकी याद अवश्य आएगी. उसके मुंह में पानी आ गया और ये पानी समर्थ के लंड के ऊपर बहने लगा.

शीला ने बिस्तर पर लेटी अपनी नातिन संजना के शरीर को ऊपर से चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ रही थी. उसकी गर्दन, मम्मे, पेट, नाभि को चूमते हुए वो अपने गंतव्य की ओर आ रही थी. शीला के मुंह और जीभ के कभी हल्के और कभी गहरे स्पर्श से संजना आनंद से दूभर हो चुकी थी. उसकी मौसी और माँ के साथ किये सहवास ने उसे आगे आने वाले सुख की कल्पना तो करा ही दी थी, पर नानी जिस प्रकार उसके शरीर की पूजा कर रही थीं, वो उसके लिए एकदम नया अनुभव था. उसकी अब तक अक्षत योनि पसीज गयी थी. हालाँकि उससे रस की वृष्टि तो नहीं हो रही थी, पर उसे अपनी चूत में कुछ नयी संवेदना अवश्य हो रही थी.

“नानी, आप क्या कर रही हो. ओह, नानी. मुझे क्या हो रहा है. मेरा शरीर जल रहा है. प्लीज नानी. आपने क्या किया है. मुझे कुछ हो रहा है. नानी.” वो बोले जा रही थी.

शीला उसके इस उद्भाव को समझ रही थी, परन्तु अब उसके रुकने का उसका कोई भी आशय नहीं था. वो अपने लक्ष्य के निकट पहुँच चुकी थी. उसके अपनी उँगलियों से संजना की कच्ची चूत की पंखुड़ियाँ छेड़ीं तो संजना सिहर गयी. पंखुड़ियों को अलग करते हुए शीला ने उनकी अंदरूनी त्वचा को सहलाया तो संजना की चूत ने रस छोड़ दिया. शीला ने अपनी उँगलियों को अपने मुंह में लिया और प्रथम रिसाव को चखा. अद्भुत स्वाद और सुगंध ने उसके मुंह और नाक को विह्वल कर दिया. उसने समर्थ की ओर देखा जो उसे ही देख रहा था. आँखों के संकेत से उसे बुलाकर शीला ने फिर संजना की चूत के रास से अपनी उँगलियाँ भिगोयीं. समर्थ ने सुमति को प्यार से हटाते हुए शीला की उँगलियाँ चाटीं। और उसे भी शीला का ही अनुभव हुआ. ये स्वाद बस अब कुछ ही दिनों के लिए थे. कुछ ही दिनों के अंदर वो अपनी नातिन के कौमार्य को भंग जो करने वाला था. अब तक सुमति भी आ गयी और शीला ने उसे भी संजना का स्वाद चखाया.

इसके बाद समर्थ और सुमति अपने कार्य में व्यस्त हो गए और शीला के होंठ संजना की चूत को पहुंच गए.

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सुप्रिया और सुरेखा:

हालाँकि सुप्रिया अन्य लोगों की उपस्थिति में इस प्रकार से कई बार चुदाई कर चुकी थी, पर सुरेखा के लिए ये एक प्रकार से पहला ही अवसर था. उसने अब तक केवल अपने सगे परिवार के साथ ही ऐसा किया था, परन्तु आज पहली बार उसे किसी अन्य परिवार के साथ ऐसा अवसर मिला था. पहले वो कुछ झिझक रही थी, पर उसने सुप्रिया को देखा जो बिना किसी चिंता के पारुल पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किये हुए थी. उसने भी केवल जॉय के बारे में ही सोचने का निस्चय किया और इसी कारण अब वो जॉय के लंड को पूरे मन से चूस रही थी और जॉय के द्वारा उसकी चूत को मिलते सुख को भी अनुभूत कर रही थी.

जॉय अपने पूरे अनुभव को अपनी समधन की बहन की चूत को चाटने में झोंक दे रहा था. और उसे इसका प्रत्याशित फल भी मिल रहा था. सुरेखा की चूत अब खिल चुकी थी और उसे अपनी जीभ से उसकी अंदर की गहराइयों को छूने में कोई अधिक प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा था. सुरेखा की चूत भी पर्याप्त मात्रा में अपना कामरस छोड़कर उसकी जीभ और उँगलियों का भरपूर स्वागत कर रही थी. उँगलियों से चूत को खोलकर जॉय अपनी जीभ से उसे अंदर और बाहर चाट रहा था. सुरेखा भी उसी तन्मयता से जॉय के लंड को चूस रही थी. उसका ये परिवार के बाहर का पहला लंड जो था, और वो इसका पूरा आनंद लेना चाहती थी.

पारुल इस आयु में भी चुदाई में पूरी निपुण थी. और इसका श्रेय उसके घर की महिलाओं को जाता था. उसकी माँ शोनाली, उसकी बुआ सुमति और बहन सागरिका ने उसे पुरुष और स्त्री दोनों के साथ सम्भोग में पूर्ण रूप से पारंगत कर दिया था. सुप्रिया की अपने चेहरे पर उपस्थित चूत को वो बड़े ही प्रेम से चाट रही थी. हालाँकि सुप्रिया की चूत बहुत खुली हुई थी, क्योंकि उसकी चुदाई अच्छे बड़े लौंड़ों से होती थी, और बहुत समय से हो रही थी, परन्तु पारुल को इसके कारण अपनी जीभ को अंदर तक डालने में कोई भी व्यवधान नहीं आ रहा था. सुप्रिया भी अपनी गांड मटका कर उसके मुंह पर अपनी चूत को रह रह कर रगड़ देती थी. और जब वो ऐसा करती तो पारुल भी प्रतिउत्तर में अपनी गांड हिलती और सुप्रिया को उसकी चूत में अपने मुंह को लगाए रखने में कुछ प्रयास करना पड़ता था. पर दोनों एक दूसरे के साथ इस खेल का पूरा आनंद ले रही थीं.

सुरेखा की इच्छा अब चुदने की थी और उसने जॉय को इस बात के लिए संकेत किया. जॉय भी अब चुदाई के ही मूड में था, वो अपना पहला रस सुरेखा के मुंह में उसकी चूत के रस के साथ मिलकर छोड़ना चाहता था. उसने पलटकर सुरेखा की टाँगों के बीच अपना स्थान बनाया और अपने लंड को उसकी स्पंदन करती चूत के मुहाने पर रखा. उसने सुरेखा को देखा तो उसकी दृष्टि भी उन दोनों के समागम के क्षेत्र पर ही टिकी थीं और उसके चेहरे पर प्रसन्नता और आत्मीयता के भाव थे. सुरेखा की आँखों में देखते हुए जॉय ने अपने लंड को उसकी चूत में डालते हुए दबाव बनाये रखा. वो सुरेखा के चेहरे के बदलते भावों को पढ़ने का प्रयास कर रहा था. सुरेखा की मुस्कान, जैसे पल भर के लिए हटी, फिर दोबारा उसके चेहरे को सजाने लगी. उसके चेहरे पर आनंद और आश्चर्य के भाव थे. सुख की अनुभूति थी. जब जॉय के लंड ने पूरा रास्ता तय कर लिया तो वो भाव एक संतुष्टि के थे, जैसे किसी रिक्त स्थान और इच्छा की पूर्ति हो गयी हो.

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शोनाली और सागरिका:

शोनाली ने सजल के लंड पर से आँख हटाए बिना सधे कदमों से बढ़ते हुए उसके लंड को हाथ में थाम लिया. लंड उसके हाथ में फुदकने लगा. शोनाली के चेहरे पर मुस्कुराहट बिखर गयी.

“लगता है मुझे देखकर खुश हो रहा है.” शोनाली ने कहा.

सागरिका भी सजल के लंड पर आँखें गढ़ाए थी. जब शोनाली के हाथ में सजल का लंड मचला तो सागरिका की गांड में भी कुछ खलबली सी हुई. पर उसे पता था कि अभी उसकी गांड की खुजली मिटाने में समय लगेगा. परन्तु उसे एक नए लंड को अपनी गांड में लेने की कल्पना से ही उत्तेजना हो रही थी. निखिल उसके चेहरे के भाव देखकर समझ गया कि उसके मन में क्या है.

“थोड़ा रुको, जान. फिर तुम्हारी गांड में ये जायेगा, जैसा कि तुम चाहती हो.”

सागरिका ने निखिल को देखा और मुस्कुराते हुए सिर हिलाया.

शोनाली अब सजल के लंड को अपने हाथ में लिए हुए सहला रही थी. सजल का लंड इससे अधिक तन नहीं सकता था और उसे कुछ पीड़ा सी हो रही थी. शोनाली ने उसका दर्द समझा और उसे बिस्तर के कोने पर बैठाया और उसके सामने बैठते हुए उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया. सजल के मुंह से एक आह सी निकली. तीनों दर्शक सामने चल रहे दृश्य को उत्सुकता से देख रहे थे. इनमें से किसी ने सजल को पहले इस रूप में नहीं देखा था. निखिल और नितिन अपने इस भाई के पराक्रम को देखने और उसकी सफलता की कामना करने में व्यस्त थे. वहीं सागरिका अपनी माँ को कुछ स्त्री सुलभ ईर्ष्या के साथ देख रही थी. फिर उसने ये सोचकर अपना मन मनाया कि सजल गांड तो पहले उसकी ही मारेगा।

शोनाली के प्रतिष्ठित लंड चूसने की प्रतिभा का इस समय सजल पूरा आनंद ले रहा था. उसे ये आभास हुआ कि शोनाली उसकी माँ से इस कला में कोसों आगे है. उनकी जीभ जिस प्रकार से उसके टोपे पर नाच रही थी वो अपने आप में ही अविस्मरणीय था. उनका लंड को अपने मुंह में लेना, चूसना, निगलना और फिर बाहर निकाल देना, सब किसी कलाकार की सिद्धि का प्रारूप थे. उसके लंड को मन भर चूसने के बाद शोनाली खड़ी हुई. सजल के सामने उसकी चूत बहार बिखेर रही थी. सजल ने अपना हाथ बढाकर उसकी चूत को छुआ और उसकी उँगलियों में शोनाली का रस आ गया. उसने अपनी ऊँगली सूंघने के बाद उसे अपने मुंह में लेकर चाट लिया.

निखिल और नितिन ने ताली बजाकर उसके उस कार्य की सराहना की तो सागरिका ने भी उनका साथ देकर उसे सराहा. उनके इस प्रोत्साहन से सजल को आगे बढ़ने का सहस हुआ और उसने शोनाली को अपनी ओर खींचकर उसकी चूत में अपना मुंह लगा दिया. फिर वो शोनाली की चूत को कुत्ते के समान चाटने लगा. शोनाली केवल ऊह आह ही करती रह गयी और सजल अपनी प्यास उसकी चूत से बुझाता रहा. शोनाली को खड़ा रहना कुछ असहज लग रहा था तो उसने सजल के सिर को प्यार से थपथपाया और फिर हटाते हुए बिस्तर पर जा लेटी। अपने पाँव फैलाते हुए उसने सजल को उसकी चूत के सेवन करने का निमंत्रण दिया.

इस बार सजल ने कुछ संयम से काम लिया और अपनी माँ के बताये अनुसार शोनाली की चूत का भोग लगाने में जुट गया.

दोनों परिवारों की चुदाई का शेष हिस्सा अब अगले भाग में.
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.३

भाग २

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समर्थ और शीला:

समर्थ ने सुमति को प्यार से हटाते हुए शीला की उँगलियाँ चाटीं। और उसे भी शीला का ही अनुभव हुआ. ये स्वाद बस अब कुछ ही दिनों के लिए थे. कुछ ही दिनों के अंदर वो अपनी नातिन के कौमार्य को भंग जो करने वाला था. अब तक सुमति भी आ गयी और शीला ने उसे भी संजना का स्वाद चखाया.

इसके बाद समर्थ और सुमति अपने कार्य में व्यस्त हो गए और शीला के होंठ संजना की चूत को पहुंच गए.

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सुप्रिया और सुरेखा:

वो सुरेखा के चेहरे के बदलते भावों को पढ़ने का प्रयास कर रहा था. सुरेखा की मुस्कान, जैसे पल भर के लिए हटी, फिर दोबारा उसके चेहरे को सजाने लगी. उसके चेहरे पर आनंद और आश्चर्य के भाव थे. सुख की अनुभूति थी. जब जॉय के लंड ने पूरा रास्ता तय कर लिया तो वो भाव एक संतुष्टि के थे, जैसे किसी रिक्त स्थान और इच्छा की पूर्ति हो गयी हो.

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शोनाली और सागरिका:

इस बार सजल ने कुछ संयम से काम लिया और अपनी माँ के बताये अनुसार शोनाली की चूत का भोग लगाने में जुट गया.

अब आगे.......

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समर्थ और शीला:

समर्थ ने सुमति के कान में धीरे से फुसफुसाया: “किस किस की गांड से रस पीना है आज?”

सुमति के शरीर में रोमांच दौड़ गया, उसने काँपते शब्दों में कहा, “जिस जिस की सम्भव हो.”

“सबको तुम्हारा ये व्यसन पता है. और मैनें लड़कों को भी बता दिया है. तो तुम्हारा बुलावा आएगा जैसे ही वे गांड मारना आरम्भ करेंगे. तुम्हें इतना समय मिलेगा कि जाकर अपनी इच्छा पूरी कर सको. जॉय से मैंने कुछ नहीं कहा, पर सुप्रिया को बता दिया है.”

“थैंक यू” सुमति ने उनका आभार व्यक्त किया.

“अब लंड चुसाई बहुत हो गयी आओ अब तुम्हारी चूत को थोड़ा आनंद दें, उसके बाद तुम्हारी गांड की बारी रहेगी.” समर्थ ने उसे और उत्तेजित करने के लिए बताया. “वैसे चाहो तो शीला की गांड भी मार लूंगा तुम्हारे लिए, पर उसके पहले मुझे लगता है तुम्हें दूसरों कमरों का बुलावा आ जायेगा.”

समर्थ ने फिर उठकर सुमति को बिस्तर पर लिटाया और स्वयं जाकर टीवी ऑन करते हुए अन्य कमरों में लगे कैमरों पर लगा दिया. दो कमरों के दृश्य अब टीवी पर चल रहे थे. पर समर्थ ने टीवी को मौन कर दिया. वो इस कमरे के आनंद में विघ्न नहीं डालना चाहता था. सुमति समर्थ को प्यासी दृष्टि से देख रही थी और अपनी टाँगे चौड़ी करते हुए समर्थ द्वारा उसकी चुदाई का निमंत्रण दे रही थी.

समर्थ ने उसकी भी न बुझने वाली प्यास को समझा और उसकी टॉँगों के बीच बैठकर अपने लंड को उसकी चूत पर रखते हुए एक लम्बा धक्का मारा. सुमति की चूत को चीरता हुआ उसका लंड अंदर जड़ तक समा गया. सुमति ने आनंद भरी एक सिसकारी ली. और समर्थ को अपने ऊपर खींचकर उसके होंठों से अपने होंठ जोड़ दिए. उसकी सिसकारी सुनकर संजना का ध्यान उस ओर गया और उसने अपने नाना को सुमति की चूत के अंदर लंड डाले हुए देखा. न जाने कब मेरी भी चूत का उद्घाटन होगा. समर्थ और सुमति के चुंबन और समर्थ के इस आयु में भी गठे शरीर के संचार को देखकर वो प्रभावित थी.

उसके आनंद को चार चाँद लगाने में उसकी नानी भी अपना योगदान दे रही थी. शीला ने अपने शरीर को ऐसे कोण में कर लिया था जहाँ से वो समर्थ और सुमति की चुदाई को देख सकती थी, वहीं वो अपनी प्यारी कमसिन नातिन की चूत का भी भरपूर सेवन कर सकती थी. उसकी उँगलियों से उन मासूम पंखुड़ियों को एक दूसरे से दूर कर दिया था और उसे संजना की बुर के अंदर की गुलाबी त्वचा दिख रही थी. बस कुछ ही दिनों में इसका रंग गुलाबी नहीं रहेगा, कुछ लालिमा ले लेगा. और जब तक वो अपने भृमण से लौटेंगे, तब तक न जाने कितनी लाल हो चुकी होगी. शीला की जीभ अब संजना की चूत के चारों ओर के मखमली क्षेत्र को चाट रही थी. संजना की छूट से उठती हुई कौमार्य की सुगंध उसे एक नए नशे का आभास करा रही थी. चूत के आसपास चाटते हुए वो शनैः शनैः संजना की चूत की ओर बढ़ रही थी.

संजना की चूत पर जैसे ही शीला की जीभ लगी, संजना झड़ गयी. और बहते हुए रस को शीला चाटने लगी जैसे कोई कुतिया पानी पीती है. और फिर उसने अमृत को पीने के बाद अपनी उँगलियों से संजना को चूत को खोला और अपनी जीभ से उसके अंदर चाटने लगी. संजना की चूत की लुभावनी सुगंध उसके नथुनों में बस गयी. वो कभी प्यार तो कभी प्यास के साथ संजना की चूत को चाट रही थी.

समर्थ का लंड अपने यात्रा में व्यस्त था, सुमति की चूत में उसका लंड बड़ी सरलता से अंदर बाहर हो रहा था. सुमति की चूत भी अपना पानी छोड़कर उसके रास्ते को सुगम बना रही थी. लम्बे शक्तिशाली धक्कों से सुमति की चूत को चोदते हुए समर्थ किसी भी प्रकार की दया नहीं दिखा रहा था. सुमति वैसे भी इसी प्रकार की चुदाई की इच्छा रखती थी. समर्थ का लंड उसकी प्यासी चूत में खलबली मचा रहा था. उसे इस बात का भी आभास था कि अब उसके भाई जॉय और उसके बेटे पार्थ के साथ उसे अब चार और लंड मिले थे. समर्थ, निखिल, नितिन और सजल. वो सजल के रस को पीने के लिए उतावली थी, एक बार सीधे उसके लंड से और एक बार उस गांड से जिसमे सजल अपना रस छोड़े। चूत में जो आनंद आ रहा था उसके साथ ही इन विचारों ने उसकी गांड में भी एक खुलजी उतपन्न कर दी. उसने एक हाथ पीछे करते हुए अपनी गांड को एक ऊँगली से टटोला और उसमे अपनी ऊँगली डाल दी.

“मैं तुम्हारी सहायता करता हूँ.” ये कहकर समर्थ ने उसके हाथ को हटाकर अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डाल दी. सुमति की पतली ऊँगली की तुलना में समर्थ की ऊँगली मोटी थी और सुमति की सिसकारी निकल गयी. समर्थ उसकी चूत में अपने लंड को चलाते हुए उसकी गांड में भी ऊँगली अंदर बाहर करने लगा. सुमति अब अपने आप को रोक न पायी और उसका शरीर ढीला पड़ गया और उसकी चूत से रस की धार बह निकली. वो झड़ रही थी और बिस्तर पर शिथिल सी पड़ गयी. समर्थ ने अपने लंड को उसकी चूत से निकाला और अपनी ऊँगली को गांड में से निकालकर उसकी गांड का निरीक्षण किया. उसकी ऊँगली के प्रताप से गांड का छेद खुला हुआ था और उसे आमंत्रित कर रहा था. समर्थ ने एक गहरी साँस ली और अपने लंड का टोपा सुमति की गांड पर रख दिया.

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सुप्रिया और सुरेखा:

जॉय सुरेखा के चेहरे पर छाए हुए आनंद के भावों को देखकर खुश हो गया. हालाँकि वो मानसिक रूप से एक बहुत ही पुरुष था, परन्तु कुछ दिनों से उसे इस परिवार के सम्पर्क में आकर शारीरिक हीनता का बहस हो रहा था. जीवन का चक्र भी कुछ इस गति से चल रहा था कि वो इस बारे में अधिक कुछ सोच नहीं पा रहा था. उसे लग रहा था कि पार्थ, और सिंह परिवार के पुरुषों की तुलना में वो कम बैठता है. परन्तु सुरेखा के भावों को देखकर उसे अपनी इस हीनता से मुक्ति सी मिली। सुरेखा ने अपने पाँव जॉय की पीठ पर लपेट लिया और उसे और तेज चुदाई के लिए उत्साहित करने लगी. जॉय को इसमें कोई कठिनाई न थी और वो अब सुरेखा के गहरे, लम्बे और तीव्र धक्कों से चोदने में लग गया. सुरेखा भी अपनी इस चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी. अपने परिवार के बाहर ये उसका किसी अन्य पुरुष के साथ पहला समय था और उसे इसमें बहुत सुख मिल रहा था.

दूसरी ओर पारुल और सुप्रिया एक दूसरे की चूत में अपनी उँगलियों, जीभ और अंगूठों से भिड़ी हुई थीं. एक दूसरे को खाने के लिए लालयित ये दोनों चूत को अंदर तक न केवल चाट रही थीं, बल्कि अब दो उँगलियों से चोद भी रही थीं. स्त्री समलैंगिक सहवास के आनंद से ये दोनों भलीभांति परिचित थीं और एक स्त्री को दूसरी से क्या इच्छा होती है, ये जानते हुए एक दूसरे की संतुष्टि का प्रयास कर रही थीं. सुप्रिया जो ऊपर थी, उसने पारुल की गांड के नीचे से अपनी एक ऊँगली को पारुल की तंग गांड में डाला तो पारुल ने तुरंत अपनी गांड को ऊँचा उठाकर सुप्रिया के लिए राह सहज कर दी. सुप्रिया ने गांड से ऊँगली निकाली, और फिर पारुल की चूत में डालते हुए अपने मुंह से चाटी और फिर से पारुल की गांड में पेल दी. इस बार उसने ऊँगली को पहले से अधिक अंदर धकेला था.

पारुल भी कौन सी पीछे रहने वाली थी. उसके लिए तो सुप्रिया का पूरा पिछवाड़ा खुला हुआ था, पर एक ही समस्या थी कि उसके हाथ हटाने से सुप्रिया की चूत उसके मुंह पर बैठकर उसकी साँसे रोक सकती थीं. उसने फिर भी एक प्रयास का अवसर लेने का निर्णय लिया और दाएं हाथ से सुप्रिया को पकड़े हुए बाएं हाथ से सुप्रिया की गांड के छेद को टटोला. छेद मिलते ही उसने अपनी एक ऊँगली गांड में डाल दी. सुप्रिया इस खेल की पुरानी खिलाडी थी. वो समझ गयी कि अब उसे अपनी चूत को पारुल के मुंह पर अपने ही बलबूते रखना है, तो उसने आसान में कुछ बदलाव किया जिसके कारण अब वो पारुल के हाथों के सहारे के बिना भी चूत चटवा सकती थी. पारुल के मन में सुप्रिया के लिए आदर और बढ़ गया. और उसने सुप्रिया की गांड में अपनी ऊँगली की गति को अपना सम्मान दिखने के लिए बढ़ा दिया.

जॉय सुरेखा की चुदाई अब पूरी तन्मयता और अपनी शक्ति के अनुसार कर रहा था. उसकी ऑंखें उसके साथ चल रहे पारुल और सुप्रिया पर भी जा रही थीं. हालाँकि वो अपनी बेटी पारुल को देख नहीं पा रहा था पर उसे पारुल पर भी गर्व था कि वो सुप्रिया को पूरा प्यार दे रही थी. घर की सबसे छोटी होने के कारण वो जॉय की सबसे चाहती भी थी. जॉय ने ही उसकी चूत का उद्घाटन किया था. और अब तक केवल उसने और पार्थ ने ही उसकी मादक जवानी का आनंद लिया था. जॉय ने ही उसकी गांड भी पहली बार मारी थी. और पारुल ने अब तक पार्थ को अपनी गांड से दूर ही रखा था. हाँ सुमति को अवश्य उसने गांड चाटने और उसकी गांड से जॉय के वीर्य को पीने का अवसर दिया था. अब देखना ये था कि वो कब तक अपनी गांड बचा कर रख सकती थी.

जॉय के धक्कों की बढ़ती गति ने सुरेखा को अब तक दो तीन बार झाड़ दिया था. पर वर्षों की प्यासी सुरेखा अब अपने जीवन का पूरा आनंद लेने की ओर अग्रसर थी और वो जॉय को और तेज चुदाई के लिए प्रोत्साहित कर रही थी. जॉय ने सुरेखा को काँपते हुए और शरीर को अकड़ते हुए अनुभव किया। इस बार सुरेखा लगता है बहुत तीव्रता से झड़ने वाली थी. जॉय भी अब बहुत निकट था और उसने इसकी घोषणा करते हुए सुरेखा को चेताया. पर सुरेखा अब किसी भी चेतावनी से परे थी. वो चाहती थी कि जॉय उसकी चूत को अपने रस से सींच दे. उसके लरजते हुए शरीर ने जॉय के बीज के लिए स्वयं को तैयार कर लिया.

जैसे ही एक चीख के साथ सुरेखा झाड़कर ठंडी पड़ी, वैसे ही जॉय ने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया और हाँफता हुआ सुरेखा के शरीर पर गिर गया. सुरेखा ने उसके चेहरे को हाथ में लेकर उसके होंठों से अपने होंठ लगाए और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. उधर सुप्रिया और पारुल भी झड़ रही थीं, एक दूसरे का रस पीते हुए दोनों ने अपना शीर्ष प्राप्त कर लिया था. एक दूसरे की चूत के रस की हर बूँद को पीने के बाद ही दोनों एक दूसरे से अलग हुईं. पर पारुल की एक प्यास अभी भी शेष थी. उसने अपने आपको सुप्रिया के नीचे से निकाला और अपने पिता के पास चली गयी. जॉय ने उसे देखा तो समझ गया और वो सुरेखा के ऊपर से हट गया.

पारुल ने अपने होंठ सुरेखा की चूत पर रखे और अपने पिता का जीवन रस उसकी चूत से पीना आरम्भ कर दिया. सुप्रिया ने उसे देखा फिर जॉय की ओर देखा जिसके लंड पर उसकी बहन सुरेखा का रस अभी भी चमक रहा था. उसने जॉय को पास बुलाया और अपने मुंह से उसके लंड को चाटकर साफ कर दिया. अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए उसने चटखारे लिए और सुरेखा को देखा जो इस समय बिलकुल शांत पड़ी थी. उसके चेहरे के भाव और चमक उसके सुखद अनुभव की साक्षी थी. सुप्रिया को एक बार फिर अपनी बहन पर प्यार उमड़ आया.

पारुल ने सुरेखा की चूत से सारा रस पीने के बस सुरेखा की चूत से अपना चेहरा हटाया.

“पापा, बहुत स्वादिष्ट है आप दोनों का मिश्रण. अच्छा है कि अब ये नियमित रूप से पीने मिलेगा.” पारुल ने जॉय से कहा.

“बिलकुल, हम तुम्हें इसका समय समय पर सेवन कराते रहेंगे.”

“थैंक यू, जॉय!” ये सुरेखा ने कहा था. वो ऑंखें खोले तीनों को देख रही थी. उसने सुप्रिया की आँखों में अपने लिए अनंत प्रेम देखा और एक बार मुस्कुराते हुए फिर से अपनी ऑंखें बंद कर लीं.

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शोनाली और सागरिका:

सजल अपनी माँ के सिखाये गुर को शोनाली पर उपयोग कर रहा था. अब शोनाली जितनी खेली खिलाई स्त्री को मुंह से सुख देना कोई सरल चुनौती तो थी नहीं. पर सजल ने अनुभव के स्थान पर अपनी आतुरता का उपयोग किया. चूत के आसपास और ऊपर अपनी जीभ के प्रहारों से उसने शोनाली को जल्दी ही उत्तेजित कर दिया. और जब उसकी जीभ ने शोनाली की चूत के अंदर प्रवेश किया तो शोनाली झड़ गयी. सजल इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया और उसने शोनाली द्वारा भेंट किये रस की हर बून्द को पीते हुए अंत में उसकी चूत को चाटकर साफ कर दिया. अब मुख्य आकर्षण का समय था. उसने शोनाली की ओर देखा. शोनाली को उसकी समस्या समझ आ गयी. शोनाली ने कहा कि सजल के लंड को चुना चाहती है. और इसके लिए उसने सजल को नीचे लिटाया और फिर उसके लंड को मुंह लेकर चाटने लगी, और फिर हस्ते और चाटते हुए उसने कुछ ही मिनट में सजल को झाड़ दिया. सजल झड़ना नहीं चाहता था, पर शोनाली के निपुण मौखिक आघात के सामने टिक भी नहीं सका. शोनाली ने भी सजल के वीर्य की हर बून्द को पी लिया.

शोनाली: “अब जब तुम एक बार झड़ गए हो, तो तुम्हें अगली बार समय लगेगा और तुम मेरी चूत को देर तक चोद सकोगे। सग्गू, आकर अपने देवर के लंड को चाटकर खड़ा करो, तब तक मैं इन दोनों मुश्टण्डों को तैयार करती हूँ.”

सागरिका: “पर मॉम, हमने माना था कि सजल जब तक आपको चोदना आरम्भ नहीं करता तब तक मैं उसे छूऊँगी भी नहीं।”

शोनाली: “वो ठीक है. अपने मुंह से चोद तो चुकी हूँ. अब नखरा न कर, ये भी तेरी ओर देख कैसे लालच से देख रहा है. और तुम दोनों, इधर आओ.”

निखिल और नितिन तुरंत शोनाली के आगे अपने खड़े लंड लेकर चले आये. सागरिका ने सजल के लंड को मुंह में लिया तो उधर उसकी माँ ने अपने दामाद और उसके भाई के लंड को चूसने के लिए अपना मुंह खोल लिया.

सागरिका बहुत प्रेम से सजल के लंड को चूस रही थी, पर उसे ये भी ध्यान था कि उसे सजल के लंड को अपनी माँ की चुदाई के लिए तैयार करना है, न कि झड़ाना है. और जब उसे लगा कि सजल का लंड उपयुक्त अवस्था में पहुंच गया है तो उसने लंड के सुपाड़े पर एक चुंबन लिया और फिर शोनाली को बताया। शोनाली के दामाद निखिल और उसके भाई नितिन के लंड तो पहले ही से अपना आतंक मचाने के लिए आतुर थे. शोनाली तो उन्हें केवल इसीलिए चूस रही थी कि वो कुछ चिकने हो जाएँ. नहीं तो उन दोनों के भरी लौंड़ों से चोटिल होने की संभावना थी. शोनाली ने सागरिका की बात सुनकर सजल की ओर देखा जो बिस्तर पर लेटा उसे आशा से देख रहा था.

शोनाली ने उन दोनों लौंड़ों को छोड़ा और सजल के लंड पर एक चुबंन किया और फिर अपने पांव दोनों ओर करते हुए उसके ऊपर खड़ी हो गयी. फिर उसने अपनी चूत को एक हाथ से फैलाया और नीचे की ओर बैठने लगी. नीचे आकर उसने सजल के लंड को दूसरे हाथ से संभाला और अपनी चूत के मुंह पर लगाया. फिर उसके लंड पर बैठती चली गयी. लंड को अपनी चूत में पूरा लेने के बाद वो झुकी और सजल के चेहरे को चूमने लगी. सजल ने उसके होंठ अपने होंठों से मिलाये और दोनों एक दूसरे को पागलों के समान चूमने लगे. शोनाली ने चुंबन के चलते हुए अपनी गांड को हिलना आरम्भ किया और सजल के लंड पर उठकबैठक करने लगी. सजल के लिए ये आनंद के क्षण थे. आज तक उसने केवल अपनी माँ को ही चोदा था और आज उसे अपनी माँ की आयु की दूसरी स्त्री की चुदाई करने का अवसर मिल रहा था.

वो भी अपने कूल्हे उचकाते हुए शोनाली की चुदाई करने लगा. कुछ ही देर में दोनों ने अच्छी गति पकड़ ली. पर शोनाली की इच्छा ये तो थी नहीं, ये जानते हुए नितिन उसके मुंह के आगे खड़ा हो गया और शोनाली ने उसके लंड को एक ही बार में अपने मुंह में गपक लिया और पूरे जोश से चूसने लगी. उसे अपनी पीठ पर एक हाथ का आभास हुआ तो उसने अपनी उछलकूद रोक दी. फिर उसने किसी की जीभ को गांड पर चलता हुआ अनुभव किया. और फिर वो जीभ हटी तो उसे अपनी गांड पर एक लंड के रखे जाने का ज्ञान हुआ. सागरिका ने ही चाटी होगी मेरी गांड, ये सोचते हुए वो नितिन के लंड को चूसते जा रही थी. जब उसे अपनी गांड पर दबाव का आभास हुआ तो उसने नितिन के लंड को मुंह में तो लिया पर चूसना रोक दिया.

निखिल अपनी सास की गांड में अपना लंड बड़े प्रेम से डाल रहा था. उसे पता था कि शोनाली एक ही बार में भी उसका लंड गांड में लेने के लिए सक्षम है, परन्तु वो उसकी गांड के हर रोम से अपने लंड का परिचय करना चाहता था. सासूमाँ के लिए उसका इतना तो कर्तव्य बनता ही था. जब लंड ने अपना पूरा रास्ता तय कर लिया तो निखिल ने थोड़ा सा लंड निकालते हुए शोनाली की गांड मारना आरम्भ किया. शोनाली ने जब देखा कि अब उसके तीनों छेदों में लौड़े लगे हुए हैं तो वो नितिन के लंड को चूसते हुए सजल के लंड पर उछाल मारने लगी. निखिल ने उससे ताल मिलाते हुए उसकी गांड में अपना लंड पेलने में अब गति पकड़ ली.

सजल का ये पहला अवसर था जब उसे एक दूसरे लंड के साथ चुदाई करना मिला था. शोनाली की चूत और गांड के बीच की पतली सी झिल्ली के दोनों ओर दो लंड चलायमान थे. इसमें से सजल के लिए ये एकदम नया ही अनुभव था. अब तक उसे केवल चूत के घर्षण का ही आनंद मिला था, पर आज उसे न केवल चूत बल्कि उसके दूसरी ओर गांड में चल रहे लंड के घर्षण का भी आभास हो रहा था. और ये अतुलित आनंद था. सजल के सिवाय सभी इस प्रकार की चुदाई के अभ्यस्त थे. और शोनाली को इसमें अनंत आनंद मिलता था. अगर उसके मुंह में नितिन का लंड न होता तो उसकी चीखों से कमरे में हड़कंप मच जाता. पर इसका अर्थ ये नहीं था कि उसे आनंद कुछ कम आ रहा था. उसकी चीखें नितिन के लंड को दबा रही थीं. नितिन को उसकी गले से निकलती गुं गुं की ध्वनि और गले की हलचल से पता लग रहा था कि वो चीख रही थी. और उसकी चीख के लिए खुलता मुंह नितिन के लंड को और अंदर निगल लेता था.

सागरिका इस दृश्य से अपने समय की प्रतीक्षा कर रही थी. उसे भी तीन लौंड़ों से चुदने का जो अवसर मिला था, उसे वो किसी भी मूल्य पर गंवाँ नहीं सकती थी. निखिल के धक्के तीव्र होने के बाद शोनाली की उछलकूद कम हो चली थी. और इसके कारण अब सजल अपने लंड को उसकी चूत में उछल उछल कर पेल रहा था. पहली बार इस प्रकार की चुदाई करने के बाद भी उसने जल्दी ही अपना काम सिख लिया था और शोनाली को उसकी चुदाई से बहुत मजा आ रहा था. गांड में चल रहे निखिल के दिंची लंड ने भी उसे सुख की पराकाष्ठा पर लेकर खड़ा कर दिया था. सजल को अपने लंड पर कुछ बहता हुआ अनुभव हुआ तो वो जान गया कि शोनाली झड़ रही है. शोनाली के शरीर का संचालन भी अब कुछ बिगड़ने लगा था. निखिल बिना रुके अपने लंड से शोनाली की गांड के परखच्चे उड़ने में व्यस्त था. सास हो या माँ, उसे गांड मारते समय कभी भी दया नहीं आती थी. वैसे उससे गांड मरवाने वाली स्त्रियों को भी उसके मोटे लम्बे लौड़े से ऐसी ही चुदाई पसंद थी जो उनकी गांड के पोर पोर को खोल दे.

निखिल ने अंततः अपने रस से शोनाली की गांड को भर ही दिया पर वो हटा नहीं. उसने सागरिका को देखकर संकेत किया और सागरिका ने फोन लगाया. निखिल के लंड को अपनी गांड में लिए हुए अब शोनाली सजल के लौड़े पर और तेजी से कूदने लगी. और उसकी चूत ने झट से झड़कर अपने सुख की घोषणा की. नितिन के लंड को अब शोनाली इतनी अधिक जोर से चूस रही थी कि अगर नितिन का लंड थोड़ा भी कमजोर होता तो कट के गिर पड़ता. पर इसके कारण ये अवश्य हुआ कि नितिन के लंड ने अपना पानी उसके मुंह में छोड़ दिया. सम्भवतः उसे शोनाली के आक्रमण से बचने का यही एकमात्र रास्ता दिखा होगा. सजल ने जैसे ही अपने रस से शोनाली की चूत को भरना आरम्भ किया कि कमरे खुला और उसमे सुमति ने प्रवेश किया. परिस्थिति के अनुसार उसने कपड़े पहनने में समय नहीं खोया था.

उसे अंदर आते देख निखिल ने अपने लंड को शोनाली की गांड से निकाला। सजल इस पूरे घटनाक्रम से अचम्भित था और उसे सुमति का आना और भी आश्चर्य में डाल गया. निखिल हटकर खड़ा हुआ तो सागरिका ने उसके लंड को मुंह में लेकर चाटते हुए साफ कर दिया. सजल शोनाली के नीचे से ये देखकर और चकित हो गया जब सुमति ने शोनाली की गांड में अपना मुंह लगाया और सड़प सड़प की ध्वनि के साथ उसकी गांड में से निखिल का वीर्य पी लिया. शोनाली सजल के ऊपर से उठी और सुमति ने उसकी गांड के नीचे जाकर अपना मुंह खोल दिया. शोनाली ने अपनी गांड में जोर लगाया और कुछ और रस सुमति के मुंह में समा गया. सुमति ने चटखारा लिया और बिना कुछ और कहे कमरे से चली गयी.

सागरिका ने निखिल के लंड को साफ करने के बाद अपनी माँ की चूत में मुंह लगा दिए और उसमे से सजल का रस पी लिया. सजल के पास ही खड़े हुए गीले लंड को देखा तो वो उसे कहते बिना भी न रह सकी.

सागरिका को छोड़कर सभी संतुष्ट थे. पर उसे यूँ छोड़ने का किसी का भी आशय नहीं था. पर उसके लिए कुछ देर ठहरना आवश्यक था.

दोनों परिवारों की चुदाई का शेष हिस्सा अब अगले भाग में.
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.३

भाग ३

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समर्थ और शीला:

समर्थ ने अपने लंड को उसकी चूत से निकाला और अपनी ऊँगली को गांड में से निकालकर सुमति की गांड का निरीक्षण किया. उसकी ऊँगली के प्रताप से गांड का छेद खुला हुआ था और उसे आमंत्रित कर रहा था. समर्थ ने एक गहरी साँस ली और अपने लंड का टोपा सुमति की गांड पर रख दिया.

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सुप्रिया और सुरेखा:

“पापा, बहुत स्वादिष्ट है आप दोनों का मिश्रण. अच्छा है कि अब ये नियमित रूप से पीने मिलेगा.” पारुल ने जॉय से कहा.

“बिलकुल, हम तुम्हें इसका समय समय पर सेवन कराते रहेंगे.”

“थैंक यू, जॉय!” ये सुरेखा ने कहा था. वो ऑंखें खोले तीनों को देख रही थी. उसने सुप्रिया की आँखों में अपने लिए अनंत प्रेम देखा और एक बार मुस्कुराते हुए फिर से अपनी ऑंखें बंद कर लीं.

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शोनाली और सागरिका:

सागरिका ने निखिल के लंड को साफ करने के बाद अपनी माँ की चूत में मुंह लगा दिए और उसमे से सजल का रस पी लिया. सजल के पास ही खड़े हुए गीले लंड को देखा तो वो उसे कहते बिना भी न रह सकी.

सागरिका को छोड़कर सभी संतुष्ट थे. पर उसे यूँ छोड़ने का किसी का भी आशय नहीं था. पर उसके लिए कुछ देर ठहरना आवश्यक था.

अब आगे:

समर्थ और शीला:

सुमति की गांड ने फैलते हुए समर्थ के लंड स्वागत किया. समर्थ ने भी बड़े संयम के साथ सुमति की गांड में लंड डाला. सुमति का चेहरा बिस्तर पर लगा हुआ था और उसके मुंह संजना और शीला की ओर था. साँस रोके सुमति समर्थ के लंड को अपने अंतिम पड़ाव तक पहुँचने की प्रतीक्षा कर रही थी. किस कारण आज समर्थ इतना समय ले रहा था उसे ये समझ नहीं पड़ा. फिर आँखों ने संजना को देखा तो उसे समझ आया कि संजना भयभीत न हो इस कारण समर्थ उसकी गांड इतने प्रेम से मार रहे थे.

परन्तु इस प्रकार से सुमति की गांड की खुजली और बढ़ गयी. वो कसमसाते हुए अपनी गांड को उछाल कर समर्थ के लंड पर फेंक रही थी. समर्थ समझ तो गया पर कुछ करने का साहस नहीं जुटा पाया. सुमति का धैर्य टूट गया उसने समर्थ को मुड़कर देखा तो उसकी आँखों में विनय था.

“थोड़ा तेज करो न बाबूजी, ऐसे क्यों तड़पा रहे हो मुझे. प्लीज, जोर से मारिये न गांड, मेरी तो खुजली बढ़ा दी है आपने .”

शीला ने समर्थ को देखा और उसे संकेत किया कि वो संजना को संभाल लेगी, वो सुमति की इच्छा पूरी करे. बस फिर क्या था, समर्थ ने अपने पूरे लौड़े को गांड से बाहर निकाला और एक भयंकर धक्के के साथ सुमति की गांड में ठोक दिया. सुमति बिलबिला उठी. और फिर उसके चेहरे पर संतोष की छाया आयी. उसकी सिसकारियां समर्थ को और तेजी से गांड मारने के लिए उद्वेलित करने लगी और समर्थ भी इस कार्य में पूरे जोश के साथ जुट गया.

संजना भी अपनी नानी के मुंह में लगातार अपना पानी छोड़ रही थी और उसकी प्यारी नटखट नानी उसे पीने में कोई कोताही नहीं कर रही थी. शीला भी जानती थी कि इस रस की मिठास अब कुछ ही दिनों के लिए शेष है. अपने पति की ओर कनखियों से देखते हुए उसे समर्थ के भाग्य पर गर्व हुआ. अपनी बेटियों का तो वो कौमार्य नहीं ले पाए, परन्तु अपनी नातिन के लिए उन्हें अब ये सुअवसर मिला था. शीला की जीभ के प्रताप के आगे पांव फैलाये उसकी नातिन की चूत अब बेबस थी. जब शीला ने पाया कि संजना की चूत के रस की हर बूँद वो पी चुकी है तो अपना चेहरा उठाकर उसने संजना को देखा.

संजना के चेहरे की लुभावनी मुस्कान ने उसे प्रसन्न कर दिया. ऑंखें बंद किये लेटी संजना अपने ही स्वर्ग में विचरण कर रही थी. उसे इस बात का भी आभास नहीं था कि उसकी नानी अब उसकी चूत से हट चुकी है. वो तो उस सुखद अनुभव में अभी भी लीन थी. शीला को इस बात पर गर्व हुआ कि उसके प्रयासों ने संजना का ध्यान समर्थ और सुमति की ओर नहीं जाने दिया. अन्यथा उसके कोमल मन को कुछ आघात लग सकता था.

शीला ने एक बार फिर अपने सामने खिली हुई कुंवारी चूत पर जीभ फेरी और एक चुम्बन देते हुए हट गयी.

संजना ने अधखुली आँखों से अपनी नानी को देखा.

“क्या हुआ नानी?”

“जड़ तो चुकी है इतनी बार, अब नानी को भी तृप्त कर दे, मेरी लाड़ो।”

“हाँ नानी. पर मुझे इतने अच्छे से नहीं आता.”

“तेरा प्यार ही बहुत है मेरे लिए, जैसा मन करे वैसे ही कर लेना.” शीला ने उसे सांत्वना दी.

“अच्छा नानी.”

ये कहते हुए संजना ने अपने नाना की ओर देखा जिनके चेहरे पर अब कुछ तनाव दिख रहा था. उसने नाना के आगे घोड़ी बनी सुमति को देखा जिसका मुंह उनकी ही ओर था. उसके चेहरे के भाव संजना को कुछ समझ नहीं आये. वो पीड़ा में थीं कर आनंद में, मिश्रित भावों को समझना अभी संजना की समझ के परे थे. पर सुमति की सिसकारियां ये दर्शा रही थीं कि उसे इसमें मजा आ रहा था. नाना के चेहरे के तनाव में भी एक जीत का भाव था. उसने उन दोनों के समागम स्थल को देखा तो चौंक गयी. नाना तो उनकी गांड मार रहे हैं. उसने एक बार आश्चर्य से नाना की ओर फिर देखा. क्या वो भी इस प्रकार की चुदाई करते हैं?

पर संजना को अधिक सोचने का समय न देकर शीला उसके बगल में आ लेटी।

“तेरे नाना को गांड से बहुत प्रेम है, किसी भी स्त्री को वो बिना गांड मारे नहीं छोड़ते.” संजना को अपनी माँ की याद आयी.

“उन्होंने मम्मी की…?”

“नहीं, अब तक नहीं, तेरी माँ बहुत हठी है. नाना को गांड पर हाथ भी नहीं रखने देती. क्या सजल ने उसकी गांड मारी है?”

संजना को आश्चर्य हुआ कि नानी को सजल और उसकी माँ के बारे में पता है. उसने स्वीकृति में सिर हिलाया.

“तो अब वो अपनी गांड तेरे नाना से अधिक दिन नहीं बचा पायेगी. हमारे यात्रा पर निकलने से पहले तेरी चूत का उद्घाटन और उसकी गांड की चुदाई किये बिना इन्हें शांति नहीं मिलेगी.”

समर्थ की झड़ने की हुंकार ने उस दोनों का ध्यान तोड़ दिया. वहीँ सुमति की आनंद से भरी चीख भी उन्हें आकर्षित कर उठी. समर्थ के लंड की रस को अपनी गांड में भरता हुआ अनुभव कर सुमति भी झड़ रही थी. उसकी गांड इस समय उछाल कर समर्थ के लंड को अपने में आत्मसात करने का प्रयास कर रही थी. पर समर्थ का लंड अब ढीला पड़ चुका था. उसने अपने लंड को सुमति की गांड से निकाला।

“अब देख, सुमति क्या करती है. पर इसे देखकर चकित या द्रवित मत होना। चुदाई में हर एक के अपने प्रिय खेल होते हैं. और इसके लिए सुमति से घृणा मत कर बैठना.” शीला ने संजना के कान में धीमे से कहा.

संजना देख रही थी. सुमति ने अपना आसन बदला और सीधे लेट गयी. फिर उन अपना दायाँ हाथ अपनी गांड के नीचे किया और उसपर समर्थ का वीर्य गिरने लगा. एक हथेली भरने के बाद सुमति ने उसे अपने मुंह से लगाया और उसे पीने के बाद अपनी हाथ और उँगलियों को चाटकर फिर अपनी गांड के नीचे लगा दिया. चार पांच बार इस उपक्रम के बाद उसने अपनी दो उँगलियाँ गांड में डालीं और रस के जो अवशेष थे उन्हें भी इकठ्ठा करने के बाद उन उँगलियों को चाट लिया. उसने अपने मुंह से एक संतोष भरी ध्वनि की और चटखारे लेकर समर्थ को देखा और फिर मुड़कर शीला और संजना को.

शीला तो उसके इस व्यसन से परिचित थी पर संजना का मुंह खुला हुआ था. सुमति ने उसे आंख मारी तो संजना ने शर्मा के सिर झुका लिया. सुमति ने उठकर समर्थ के लंड को चाटा और बिलकुल साफ कर दिया. इतने में ही समर्थ के फोन पर एक संदेश आया और उसने सुमति को बताया कि उसे शोनाली के कमरे में याद किया जा रहा है. सुमति टपक से उठी और वैसे ही नंगी उस कमरे की ओर चल पड़ी जहां शोनाली की चुदाई समाप्त हुई थी और उसकी रस से भरी गांड सुमति की प्रतीक्षा में थी.

इसके बाद समर्थ ने कपड़े डाले और शीला से कहा कि वो बैठक में जाकर अन्य कमरों में क्या चल रहा है देखने जा रहा है. शीला ने कुछ न कहा, बस बिस्तर पर लेटकर अपने पाँव फैला लिए, संजना के लिए. संजना अब कम से कम इस खेल से तो परिचित थी और उसने भी अधिक संकोच नहीं किया और अपना मुंह अपनी नानी की चूत पर लगाकर चाटने लगी. सुप्रिया द्वारा सिखाये हुए गुर का उसने भली भांति प्रयोग किया, और शीला को आनंद के सागर में गोते लगवाने लगी. पर वो ये भूल गयी कि सुप्रिया अगर सेर थी तो नानी सवा सेर. शीला ने उसे इस कला का और भी गहन अध्ययन कराया और संजना को अपने नए पाठ का प्रयोग करने के लिए भी उत्साहित किया.

संजना को नानी की चूत में वो आनंद और स्वाद नहीं मिला जो उसकी माँ की चूत में था. पर सुरेखा की चुदाई उस प्रकार से भी नहीं हुई थी जिस प्रकार से शीला की, जिसे लगभग प्रतिदिन ही किसी न किसी लंड से चुदने का सौभाग्य प्राप्त था. और सम्भवतः यही कारण था कि संजना जैसी नयी विद्यार्थी भी दोनों में भेद करने में समर्थ थी. पर शीला संजना की इन भावनाओं से अनजान संजना को नए नए कोण और बिंदुओं पर ध्यान देने के लिए पथ प्रदर्शन कर रही थी. संजना भी नानी के इन निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें अपने अंतर्मन में लिख रही थी, और अगली बार उसकी माँ सुरेखा को इसका अवश्य ही लाभ होना स्वाभाविक था.

शीला की चूत चूसने और चाटने के साथ ही संजना बताये अनुसार शीला की जांघों और उसकी जंघाओं और चूत के मिलन स्थल के बीच की दरार को भी चाट रही थी. हल्की गुदगुदी के साथ शीला हँसते हुए संजना के इस शर्म का आनंद उठा रही थी. चूत को खोलते हुए संजना ने अपनी स्वचालित जीभ से शीला के अंदर की त्वचा को भी अपनी जीभ से चाटा। शीला उसके इस कृत्य से आनंदित होते हुए संजना के मुंह में झड़ गयी. फिर उसने संजना के सिर को बड़े प्रेम से सहलाते हुए अपनी चूत पर दबा लिया. संजना चाटती रही और शीला झड़ती रही. पर शीला की चूत अब वृद्ध हो चुकी थी, उसकी निस्तारण की क्षमता भी घट चुकी थी. चुदाई की अनंत इच्छा होते हुए भी उसकी चूत और रस वर्षा करने में असमर्थ थी.

शीला ने प्रेमपूर्वक संजना के चेहरे को उठाया और फिर स्वयं उठकर उसके होंठ चूमने लगी.

“अच्छा सीखी है रे तू, बहुत स्त्रियों को सुख देगी तू अपने जीवन में.” शीला ने उसे प्रोत्साहन देते हुए कहा.

“मम्मी को भी?”

“वो तो तेरी वैसे भी प्रशंसा करते नहीं थकती, अब तो न जाने क्या करेगी. तेरी माँ सच में भाग्यवान है तेरी जैसी बेटी पाकर.”

फिर शीला ने कहा की उन्हें भी समर्थ के पास चलना चाहिए, देखें कि और लोग क्या कर रहे है. कपड़े पहनकर नानी और नातिन बैठक में चले गए.

बैठक में समर्थ बैठे बियर पीते हुए सामने 3D में दोनों कमरों में चल रहे दृश्य देख रहे थे. सुमति नहीं दिखी तो उन्हें कुछ अस्चर्य हुआ पर कुछ ही देर में सुमति भी कपड़े डालकर आ गयी और समर्थ के पास बैठ गयी. शीला पहले ही संजना को अपनी गोद में लिए थी. सुमति उठी और वो भी समर्थ को गोद में बैठ गयी और चल रहे दृश्यों को देखने लगी.

“कम से कम अब किसी को फोन नहीं करना पड़ेगा. जैसे ही किसी की गांड में लंड जायेगा, मैं चली जाऊँगी.” सुमति ने मन में सोचा. न जाने कैसे समर्थ ने उसके मन के भाव पढ़ लिए.

समर्थ: “दौड़ मत जाना, कुछ देर गांड मारने भी देना. अलग कमरे में इसीलिए भेजा है सबको.”

सुमति शर्मा गयी और उसने अपनी स्वीकृति दी.

समर्थ ने टीवी पर CCTV को सुप्रिया के कमरे पर केंद्रित कर दिया.

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सुप्रिया और सुरेखा:

सुरेखा की चूत का रस पीने के बाद पारुल हटी ही थी की सुप्रिया बोल पड़ी, “सुरेखा, तुम्हे भी अब पारुल का रस चखना चाहिए. सच कहूँ तो संजना के जैसे ही मीठा है. चुदी हुई चूत है तो कुछ अंतर अवश्य है, पर मेरे लिए पारुल और संजना एक जैसी ही हैं.”

पारुल बोल पड़ी, “मौसी, मुझे भी अपनी चूत का स्वाद लेने का बहुत मन है, संजना का भी मैं रस पियूँगी, पर अभी आपका रस पीने की तीव्र इच्छा है.”

सुप्रिया, “तो हो गया, पारुल और सुरेखा एक दूसरे के साथ. तो समधी जी, हमें अपना खेल खेलने का अवसर मिल रहा है.”

जॉय, “बिलकुल समधन साहिबा, आपकी सेवा करना तो मेरा परम कर्तव्य है.”

सुप्रिया उठी और जॉय के होठों को चूमकर उसे लेटने के लिए कहा. जॉय अभी ही झड़ा था और उसका लंड मुरझाया हुआ था, पर सप्रिया के चुम्बन ने उसे फिर जीवित होने का वरदान दिया. बिस्तर पर लेटकर वो सुप्रिया के सुंदर शरीर को अपनी आँखों से पीने का प्रयास कर रहा था. उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ ही दिनों में वे इतने निकट आ गए थे. उसकी पत्नी शोनाली और बहन सुमति भी अत्यंत सुंदर स्त्रियों में थीं, पर जो आकर्षण इन दोनों बहनों में था वो अद्वितीय था.

सुप्रिया जान रही थी कि जॉय उस पर आसक्त है, और उसने इसे दूर करने का कोई प्रयास भी नहीं किया. अपने पाँवों को जॉय के मुंह के दोनों ओर करते हुए उसने अपनी चूत उसके मुंह पर लगा दी और आगे झुकते हुए जॉय के लंड को अपने मुंह में ले लिया. जॉय की लहराती जीभ ने अपनी समधन की चूत को लक्ष्य बनाते हुए अपना प्रभाव दिखाना आरम्भ किया. जॉय चूत चाटने में इतना निपुण था कि उसकी जीभ और उँगलियों के बल पर ही वो किसी भी स्त्री को अनगिनत बार स्वर्ग का द्वार दिखा सकता था. सुप्रिया वैसे तो जॉय की इस कला से परिचित थी, परन्तु उसने कभी इसका पूरी श्रध्दा से अनुभव नहीं किया था. पर आज के इस अवसर पर उसने अपनी चूत को पूर्णतया जॉय को सौंप दिया. और जॉय ने भी इसका अधिकाधिक लाभ उठाते हुए उसकी चूत पर अपनी कला का प्रदर्शन किया. अब ऐसा भी नहीं था कि सुप्रिया किसी से कम थी. उसके भी लंड चूसने का एक अलग ही ढंग था और उसका ये कहना था कि वो किसी को भी ५ मिनट के अंदर ध्वस्त कर सकती है.

उसने अपनी इस कला को जॉय के लंड को जब चाटने और चूसने में लगाया. जॉय की आनंद की सीमा ही जैसे पुनर्धारित हो चली. अगर जॉय कुछ समय पहले सुरेखा की चूत में न झड़ा होता तो उसका ठहरना सम्भव न था.

सुरेखा ने पारुल को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी. दोनों एक दूसरे की चूत को चाटने लगीं और जल्दी ही आनंद से दूभर ही उठीं. हालाँकि पारुल ने सुरेखा की चूत से अपने पिता जॉय का रस खींच लिया था, पर इस आसन में जो रस अंदर गहराई में ठहरा हुआ था वो भी अब बाहर निकल रहे थे और पारुल के मुंह में जा रहे थे. पारुल इसके कारण और भी उत्तेजित हो उठी और उसने सुरेखा के भग्नाशे को दाँतों में लेकर काट लिया. सुरेखा पीड़ा से बिलबिला उठी पर अगले ही क्षण उसे ऐसा लगा कि वो अपना शरीर छोड़कर अन्य ही लोक में है. इतना तीव्र स्खलन उसके जीवन में उसने कभी अनुभव नहीं किया था. झड़ते हुए शरीर के कम्पन के कारण उसका ध्यान पारुल की चूत से हट ही गया. जब उसे अपने शरीर का ज्ञान हुआ तो उसने भी पारुल की उसी प्रकार से भग्नाशे पर काटा।

अब ये प्रतिस्पर्धा चल पड़ी कि दोनों में से कौन जीतेगा. पर जॉय ने ये देखा तो उन्हें सावधान किया.

“इसमें अधिक उत्तेजित होने से एक दूसरे को चोट पहुंचा सकते हो. दाँतों से नहीं होंठों से काम लो, आनंद भी आएगा और पीड़ा भी नहीं होगी.” उसने समझाया.

ये सुनने के बाद सुरेखा और पारुल एक दूसरे की चूत को पीते हुए केवल अपने होंठों और उँगलियों से ही भग्न को छेड़ती रहीं. जॉय और सुप्रिया चुदाई के लिए उत्सुक थे और सुप्रिया ने घोड़ी का आसन लिया.

“जॉय, आज तुम प्लीज मेरी गांड मारो. चूत बाद में चोद लेना. मेरी गांड बहुत देर से झुँझला रही है और अगर इसमें लौड़ा नहीं गया तो मुझे पागल ही कर देगी.” सुप्रिया ने कहा.

“जैसा मैंने पहले कहा है समधन साहिबा, आपकी सेवा करना तो मेरा परम कर्तव्य है.” जॉय ने अपने लंड पर थूक लगाया और फिर अपनी ऊँगली को सुप्रिया की चूत में डालकर उसके रस से सुप्रिया की गांड को तर किया और अपने लंड को उसकी गांड पर रखते हुए हल्के दबाव के साथ अपने लंड से सुप्रिया की गांड को बंद कर दिया.

“जहाँ खुजली है, वहाँ अब मेरा लंड आपको खुजलायेगा और फिर दवाई और मरहम डालकर ही बाहर आएगा.”

उसकी इस बात पर सुरेखा खिलखिला पड़ी. जॉय दमदार धक्कों के साथ सुप्रिया की कसी गांड में अपना हल चलने लगा.

बैठक में सुमति बेचैन हो रही थी. उसका भाई अपनी समधन की गांड मार रहा था और जॉय के हर धक्के के साथ सुमति की चूत और मुंह में पानी आ रहा था. वो समर्थ की गोद में कसमसा रह थी. समर्थ भी समझ गया कि सुमति की इच्छा क्या है. उसने सुमति की चूत पर अपना हाथ रखा और उसे मसलने लगा. सुमति सामने 3डी में चल रहे दृश्य के कारण वैसे भी बहुत चुदासी हो रही थी, समर्थ के हाथ के कारण उसका धैर्य टूट ही गया.

“बाबूजी, मुझे जाने दो न, उसके बाद आप जो चाहो मेरे साथ कर लेना.” उसने समर्थ से विनती की.

समर्थ ने अपना हाथ उसकी चूत से हटाया और उसकी गर्दन चूमकर उसे जाने की आज्ञा दे दी. सुमति गोली की गति से आगे बढ़ी, पर रुक गयी. उसे ये तो पता ही नहीं था कि जाना किधर है. उसने विनयी आँखों से समर्थ को देखा तो समर्थ ने संकेत से बताया कि पहले तल के दूसरे कमरे में. इस बार सुमति की गति और अधिक हो गयी.

जॉय सुप्रिया की गांड में अपने लंड का प्रताप दिखा रहा था. पारुल और सुरेखा अपने प्रेमालाप के बीच में उनकी ओर देख रहे थे. सुप्रिया के चेहरे पर उन्माद था तो जॉय का कुछ भींचा हुआ चेहरा उसके परिश्रम को दर्शा रहा था. जॉय के धक्के लम्बे और पलंगतोड़ थे और सुप्रिया को इसी प्रकार से अपनी गांड फड़वाना भाता था. उसी समय उनके कमरे के दरवाजे के खुलने और फिर बंद होने की ध्वनि हुई. सुरेखा का मुंह उस ओर था इसीलिए उसने सुमति को देखा जो अंदर आयी थी. सुमति अपने कपड़े उतार कर एक ओर डालकर जॉय के द्वारा सुप्रिया की गांड की चुदाई समाप्त होने की प्रतीक्षा करने लगी.

जॉय का अब झड़ने का समय हो चूका था, और सुप्रिया ने भी अपनी गांड को सकुचा कर उसके लंड को दुहने का कार्य आरम्भ कर दिया था. सुप्रिया की गांड की इस प्रकार से खुलने और बंद होने से जॉय भी ठहर न सका. उसे सुप्रिया की इस कलाकारी पर सुखद आश्चर्य हुआ और अगले ही पल उसके लंड ने अपना माल सुप्रिया की गांड में छोड़ दिया. सुप्रिया और जॉय पारस्परिक सिसकारियों के साथ झड़ गए. जॉय ने कुछ देर तक अपने लंड को सुप्रिया की गांड में ही रखा और फिर सिकुड़ते लंड को बाहर खिंच लिया. प्रकाश से भी अधिक गति से उसके सामने उसकी बहन आ खड़ी हुई.

सुमति को देख जॉय को पहले आश्चर्य हुआ फिर वो हंस पड़ा. सुमति ने भी उसे मुस्कुराते हुए हटने के लिए कहा. अब तक सुप्रिया भी सुमति को देख चुकी थी.

“देखो मैंने आपके लिए अपनी गांड में क्या बचा के रखा है.”

सुमति जॉय के हटते ही सुप्रिया की गांड पर टूट पड़ी और अपना मुंह लगाते हुए उसकी गांड से जॉय के रस को चूस कर पीने लगी. जॉय अपनी बहन के इस उपक्रम को देखता रहा और जब उसने पायल की पुकार सुनी तो उस ओर देखा.

“बुआ की आज पूरी पार्टी ही रही है. है न डैड?” पारुल बोली तो जॉय ने हामी भरी.

जब सुमति सुप्रिया की गांड को खाली करने के बाद उठी तो पारुल ने उससे पूछ ही लिया, “क्यों बुआ, कितनी हो गयीं आज?”

“तीन.” और फिर उसने जॉय के मुरझाये लंड को मुंह में लेकर साफ किया और कपड़े पहनके वहाँ से चल पड़ी. द्वार पर पहुंचकर वो ठहरी और बोली, “जब हो जाये तो बैठक में ही आ जाना.”

ये कहते हुए वो कमरे को बंद करते हुए बैठक में चली गयी.

शेष भाग शीघ्र
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.३

भाग ४

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अब तक:

समर्थ और जॉय के परिवार समर्थ के घर पर एकत्रित हैं, जहाँ समर्थ अपने अवकाश प्राप्ति की घोषणा करता है. वो अपने व्यवसाय का पूरा उत्तरदायित्व अपनी बेटियों को सौंप देता है. इसी के साथ वो अपनी पत्नी शीला के साथ भ्रमण पर जाने की भी घोषणा करता है. साथ ही वो सुमति को सुप्रिया की सहायता हेतु कम्पनी में नौकरी दे देता है. घर के विस्तार के बारे में बताकर वो अपनी दोनों बेटियों को परिवार सहित उनके ही साथ रहने का आग्रह करता है. इसके बाद पार्टी और चुदाई का खेल चलता है.

शोनाली और सागरिका:

सागरिका ने निखिल के लंड को साफ करने के बाद अपनी माँ की चूत में मुंह लगा दिए और उसमे से सजल का रस पी लिया. सजल के पास ही खड़े हुए गीले लंड को देखा तो वो उसे चाटे बिना भी न रह सकी.

सागरिका को छोड़कर सभी संतुष्ट थे. पर उसे यूँ छोड़ने का किसी का भी आशय नहीं था. पर उसके लिए कुछ देर ठहरना आवश्यक था.

अब आगे:

सजल ने आज पहली बार ट्रिपल चुदाई में भाग लिया था और उसका उत्साह देखते ही बनता था. अभी तक तो उसके चूत में रहकर ऐसी चुदाई की थी, पर अब उसे सागरिका की गांड में लंड डालने का अवसर मिलने वाला था. निखिल ने उसे ट्रिपल चुदाई में गांड मारने के गुर सिखाये. सजल का लंड में ये सुनकर ही कड़क हो गया. सागरिका उसे ही देख रही थी. और उसने भी सजल के लंड को देखा और समझ गयी कि वो रुकने की स्थिति में नहीं है. उसने निखिल को पुकारा और उसे सजल की स्थिति से अवगत कराया. निखिल ने उसे अपनी बाँहों में ले लिया.

“तो मेरी होने वाली बीवी अब अपनी सवारी के लिए मन बना चुकी है.”

“और नहीं तो क्या, पूरा मजा केवल मम्मी के ही लिए है क्या?”

“नितिन, आ जा भाई, अपनी भाभी की चुदाई करने के लिए.”

नितिन ने बिस्तर पर लेटकर अपने लंड को पकड़ा और सागरिका ने उसके ऊपर चढ़कर अपनी चूत को उसपर लगाकर उसपर बैठ गयी. लंड पूरा अंदर लेते ही वो उछलते हुए नितिन को चोदने लगी. निखिल ने अपना स्थान लिया और सागरिका के आगे खड़ा होकर उसे अपना लंड प्रस्तुत किया. सागरिका ने ताल तोड़े बिना ही निखिल के लंड को मुंह में लिया और पूरी गहराई तक चूसने लगी. उसे इस बात का गर्व था कि उसका होने वाला पति इतने तगड़े लंड का स्वामी है. और उसे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी कि सागरिका अन्य लोगों से भी चुदवाती थी. और चुदवाती रहेगी. वैसे भी निखिल स्वयं भी दूसरों की चुदाई के लिए उन्मुक्त था. अपने गले तक प्रहार करते हुए लंड के साथ उसकी चूत में पेले हुए अपने देवर के लंड से भी वो पूर्णतया संतुष्ट थी. पर अब उसके छोटे देवर सजल को एक नया अनुभव देने का समय था.

निखिल के लंड को मुंह से निकालकर उसने आगे झुकते हुए अपने आप को नितिन के समतल कर दिया. इस आसन में उसकी गांड अब ऊपर आ गयी. फिर उसने सजल को कहा कि वो अब अपने लंड से उसकी गांड मार सकता है. नितिन ने अपने धक्के रोक दिए जिससे कि उसके भाई को आसानी हो. सजल सागरिका की सुंदर मांसल गांड देखकर बहुत ही उत्तेजित था. फिर उसने निखिल द्वारा बताई रीति को दुहराया और अपने लंड को काँपते हुए सागरिका की गांड पर लगाया. निखिल उसे देख रहा था और सजल ने उसे देखा तो निखिल ने उसे अँगूठा ऊपर करते हुए आगे बढ़ने के लिए कहा.

सजल ने लंड को सागरिका की मखमली गांड में बहुत ही ध्यान से डालना प्रारम्भ किया. सागरिका साँस रोके उसके इस पराक्रम को अनुभव कर रही थी. कुछ ही देर में सजल ने उसकी गांड की अँधेरी गुफा में अपने लंड को पूरा डाल दिया. फिर उसने विजयी मुस्कान के साथ निखिल को देखा. निखिल ने अपने हाथ को ऊँचा उठाते हुए अपने भाई के हाथ पर हाई-फाइव किया.

“अब मार ले अपनी भाभी की गांड, जैसे मैंने समझाया था. नितिन, तुम भी ध्यान रखना.” इसके बाद उसने सागरिका के मासूम चेहरे को ठोढ़ी से उठाया और अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया.

“अब तुम्हें भी हम तीनों भाइयों से चुदवाने का सुख मिलने वाला है. और हम तुम्हारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाने वाले हैं. ओके, बेबी?”

सागरिका क्या कहती, उसके मुंह, चूत और गांड तीनों में लंड ठुंसे हुए थे. उसने निखिल के लंड पर अंदर ही अंदर जीभ चलाकर अपनी स्वीकृति दे दी.

“चलो भाइयों, अब अपनी भाभी की मस्त चुदाई करो.”

सजल अभी तेज और धुरंधर चुदाई के बारे में अधिक तो नहीं जानता था, पर उसे ये अवश्य समझ आ गया की उसे बिना रुके सागरिका की गांड मारनी है. उसने अपने लंड को पिस्टन के समान सागरिका की कोमल गांड में चलाना आरम्भ ही किया था कि उसे आभास हुआ कि ये उसकी पिछली डबल चुदाई से बहुत भिन्न थी. जहाँ चूत में उसके लंड को कुछ खुलापन और कोमलता का अनुभव हुआ था, गांड में अधिक कसाव और कठोरता सी थी. और नीचे से उसे नितिन के लंड के साथ घर्षण का जो अनुभव हो रहा था वो उसके सेक्स जीवन का अनूठा अनुभव था.

शोनाली बड़े प्रेम से अपनी बेटी को अपने दामाद और उसके भाइयों से चुदवाती देख रही थी और उसे इस बात से बहुत सांत्वना थी कि उसकी बेटी को इतना अच्छा वर और परिवार मिला है, जो उन सबकी इस जीवन शैली में उनसे भी अधिक संलग्न है. अपनी चूत में ऊँगली डालकर वो अपनी बेटी की दमदार चुदाई देख रही थी. निखिल ने सागरिका के सिर को अपने हाथ में थामा हुआ था और सागरिका के सामने उसके लंड को चूसने के सिवाय और कोई प्रकल्प नहीं था. उसे अपनी चूत और गांड में चलते मोटे लम्बे लंड जो सुख दे रहे थे उसका प्रदर्शन करने में वो असमर्थ थी. उसने न जाने कितनी बार इस प्रकार की चुदाई की इच्छा की थी, पर केवल पार्थ और जॉय के होने के कारण उसे कभी ऐसा सुनहरा अवसर नहीं मिल पाया था. अब तक.

और उसे अपनी गांड में सजल के लंड से अधिक ही आनंद आ रहा था. कारण ये था कि उसकी ताल असम्मिलित सी थी और सागरिका की गांड को समझ नहीं पड़ रहा था कि उसका अगला धक्का कैसा होगा. पहले सजल नितिन के साथ ताल मिलकर उसकी गांड मार रहा था, पर तेजी दिखने के कारण ये क्रम बहुत जल्दी ही ध्वस्त हो गया था. यही कारण था कि नितिन और सजल की ताल बेताल थी. और इसका सबसे अधिक आनंद सागरिका को ही प्राप्त हो रहा था. नितिन तो अपनी भाभी की चुदाई पहले भी कर चुका था और डबलिंग भी कर चुका था, पर उसे आज सजल के उत्साह के कारण अलग मजा आ रहा था. उसके लंड पर घर्षण का कोण बदलते रहने के कारण उसे भी एक नया सुख मिल रहा था. उसे विश्वास था कि अब उसे ये प्रक्रिया अपनी माँ और नानी पर भी अपनाने का मन बना चुका था.

सागरिका की चूत से जहाँ पानी की धार छूट कर नितिन की जांघों को गिला कर रही थी वहीं उसके मुंह से गिरती लार नितिन के चेहरे को. नितिन चाहकर भी इन दोनों से स्वयं को दूर नहीं कर सकता था. वो केवल अपने हाथ से चेहरे और जांघों को पोंछ कर साफ कर रहा था. सजल को इस प्रकार की कोई दुविधा नहीं थी. वो तो एक स्कूल के शरारती बच्चे के समान पूरी तन्मयता के साथ उस खेल में जुटा था जैसे किसी बच्चे को खिलौनों से भरे कमरे में छोड़ दिया गया हो. और उसकी यही उमंग सागरिका और नितिन को भी आनंद की पराकाष्ठा पर ले जा रही थी.

निखिल को इस नए समीकरण का ज्ञात नहीं था, अन्यथा वो भी सजल के इस रूप से प्रभावित हुए बिना न रहता. वो तो अपने सामने अपने दोनों भाइयों को अपनी होने वाली पत्नी की भीषण चुदाई करते हुए ही संतुष्ट और आनंदित था. सागरिका अब उसके लंड को अपने मुंह में अधिक देर तक नहीं रख पा रही थी और उसकी इस कठिनाई को समझते हुए निखिल ने उसके सिर को छोड़ दिया. इसके साथ ही सागरिका ने लंड को मुंह से निकाला और खांसने लगी. फिर वो केवल मां में लेकर निखिल के लंड को चाटने लगी. उसकी चूत भी अब अधिक चुदने से मना कर रही थी. झड़ते हुए सागरिका अब तक चुकी थी.

बैठक में सुमति अपने आप को बहुत देर तक रोके रही फिर समर्थ की मूक स्वीकृति पाकर उस कमरे में चली गयी. आज उसे एक नए लंड से निकले वीर्य का स्वाद जो मिलना था. और वो भी उसकी प्यारी सागरिका की गांड में से. ओह, क्या उसे और कुछ भी चाहिए?

कमरे में धीरे से कदम रखकर वो शोनाली को अपनी चूत में ऊँगली चलते हुए देखी और अपने कपड़े गिरा दिए. सजल को गांड के कसाव के कारण अब रुका नहीं गया और वो भरभराते हुए सागरिका की गांड में अपने वीर्य को छोड़ने लगा. पूरा स्खलित होते ही उसे आभास हुआ कि वो अब तक स्वचालित सी चुदाई कर रहा था. सागरिका की लाल हुई गांड के छेद से अपने रस को बहता देख उसे गर्व अनुभव हो रहा था. वो एक ओर हटा ही था कि सुमति से जा टकराया जो सागरिका की गांड की ओर चली आ रही थी. दोनों डगमगा गए पर सुमति की गति अगर तेज होती तो गिरना तय था. सुमति ने क्षमा की दृष्टि से सजल को देखा और फिर अपने मुंह को सागरिका की गांड से लगते हुए रस का सेवन करने लगी.

सजल उसकी उठी हुई गांड देखकर बहुत आकर्षित हुआ और उसने सुमति की गांड पर अपना हाथ फेरा. सुमति इस क्रिया से झड़ गयी और तेजी से सागरिका की गांड में से अपने पेय को खींचकर पीने लगी. हटते हुए उसने अपने होंठों पर जीभ फिराई और सजल के लंड पर अपनी दृष्टि डाली. घुटनों पर गिरते हुए उसे सजल के लंड को मुंह में लेकर चाटकर साफ कर दिया. फिर उठी और एक बार पीछे मुड़कर शोनाली को देखते हुए उसने कपड़े पहने और बैठक में लौट गयी.

नितिन और निखिल भी अब झड़ रहे थे. नितिन ने सागरिका की चूत को भरा तो निखिल ने उसके मुंह को. निखिल झड़कर अलग हट गया. और फिर सागरिका भी नितिन के ऊपर से हटकर बिस्तर पर ढेर हो गयी. शोनाली ने अपनी बेटी की चूत से बहते हुए रस को देखा तो उठी और सागरिका की चूत को चाटकर उसे इस रस से मुक्ति दिला दी.

सब अब संतुष्ट थे. एक दूसरे को प्रेम से देखते हुए उन्होंने कपड़े पहने, हालाँकि सागरिका अभी भी लेटी थी.

शोनाली से सागरिका का माथा चूमा और उसे जब सम्भव हो बैठक में आने के लिए कहकर अन्य चारों निकल गए. सागरिका चुदाई के संस्मरण लिए हुए बहुत देर तक लेटी हुई मुस्कराती रही और फिर कपड़े पहन कर बैठक में चली गयी.

**********

कुछ ही समय में सागरिका भी बैठक में आ गयी. समर्थ के निर्देश पर सबको उनके पसंद का ड्रिंक दिया गया था. समर्थ के मन में एक प्रश्न था.

समर्थ: “पार्थ, तुमने अपने उस नए अनुबंध के बारे में कुछ बताया नहीं, जिसके लिए तुम और रूचि गए थे.”

पार्थ कुछ देर सोचकर बोला, “नाना जी, सबसे पहले मैं ये बता दूँ कि ये बात इस कमरे के बाहर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि जिनके साथ हमारा अनुबंध हुआ है वो अपनी प्रतिष्ठा के लिए कुछ भी कर सकते हैं.”

समर्थ ने अपने परिवार की ओर देखा. सबने इसे गोपनीय रखने का वचन दिया. समर्थ ने पार्थ को वो बता सकता है.

पार्थ: “पहली बात तो ये जिसे आप सुनकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे वो ये है की चार नंबर वाले डिसूजा भी हमारे ही समान पारिवारिक सम्भोग में लिप्त है. मुझे वो लोग वहीं मिले थे. आंटी के भाई आजकल अफ्रीका से आये हुए हैं और उन सभी के आपसी संबंध हैं.”

“वाओ!” ये पारुल ने कहा था. “डेविड इस सो हॉट!”

उसकी इस बात पर सब हंस पड़े.

“पर जो मैं अब बताने जा रहा हूँ, उसे किसी भी स्थिति में बाहर नहीं जाना चाहिए.” पार्थ रुका और फिर आगे बताने लगा, “जिनके साथ हमारा अनुबंध हुआ है वो इस प्रदेश के जाने माने मंत्री श्री ____ हैं.” इस बार सभी चौंक गए. समर्थ के चहरे पर भी अविश्वास के भाव थे.

“हाँ, उनका बाहर का रूप और अंदर का रूप बहुत अलग हैं. मुझे जहाँ तक समझ आया है, वो भी अपनी बेटी की चुदाई करते हैं, हालाँकि मैंने देखा नहीं. वो और उनकी पत्नी अन्य लोगों से चुदाई करने में कोई बुराई नहीं समझते. जहाँ तक मैं समझता हूँ, हमारी अभिनेत्री की भी वो चुदाई कर चुके हैं.”

“पार्थ, उस दिन क्या हुआ ये बताओ, आगे की बात समझने में हम स्वयं ही सक्षम हैं.” समर्थ ने कहा. अन्य सभी लोग भी इस कथानक के बारे में जानना कहते थे.

पार्थ ने बताना आरम्भ किया.

“रूचि और मुझे एक अलग कार में ले जाया गया था. और हम दोनों उनके ही बंगले पर रुके थे. उस रिसोर्ट में उनका अलग बंगला है, जिसे हर प्रकार से सुरक्षित किया गया है. उनकी अनुमति के बिना रिसोर्ट के मैनेजर इवान स्टोन भी वहां नहीं आ सकते.”

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पार्थ के शब्दों में अगले भाग में पूर्ण विवरण प्रकाशित किया जायेगा. इस भाग में उसके आगे क्या हुआ ये जानिए.

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पार्थ की पूरी बात सुनकर परिवार वाले अत्यंत आश्चर्य में थे. उनके कभी स्वप्न में भी ये भान नहीं हुआ था की उक्त मंत्री इस प्रकार का व्यभिचारी भी हो सकता है. यही नहीं उसने इस सबके लिए एक रिसोर्ट भी बनाया है जिसमे अन्य प्रसिद्द और मान्य व्यक्तिगण भी सम्मिलित थे. कुछ लोगों के बारे में जानकर उन्हें और भी अधिक अचरज हुआ. सच में हाथी के दाँत दिखाने के और तथा खाने के और होते हैं. जिनके बारे में पार्थ ने बताया था उन पर तो यही चरितार्थ होता था. पर इन दोनों परिवारों के बारे में भी यही कहा जा सकता था. किसे पता था कि बाहर के समाज में सौम्य और चरित्रवान बने ये सभी अंदर से किस प्रकार से लिप्त हैं.

समर्थ कुछ सोच में डूबे थे. उनके मन में कुछ चल रहा था. उन्होंने सुप्रिया को देखा तो वो भी उन्हें ही देख रही थी. आँखों का एक और जोड़ा उन्हें देख रहा था, वो थी सुमति.

सुप्रिया: “पापा, क्या आप भी वही सोच रहे हैं, जो मैं?”

समर्थ मुस्कुराते हुए बोला, “तुम जानती हो कि ये सच है, क्या करना चाहती हो?”

सुप्रिया: “अगर देखा जाये तो अभी हमें कुछ नहीं करना होगा. श्रेयकर यही होगा कि शोनाली इस संदर्भ में आगे बढ़े. अभी उन्हें हमारे विषय में अधिक नहीं पता है. उन्हें अनुमान अवश्य है, पर…..,”

पार्थ बोल उठा: “नहीं अनुमान नहीं, मैंने डेविड को बताया था, तो उन्हें पता है.”

सुप्रिया ने उसे देखा, उसे किसी का बीच में बोलना अच्छा नहीं लगा था, पर ये जानकर कि उसने गलत अनुमान किया था, अपनी बात को आगे बढ़ाया.

सुप्रिया: “मैंने गलत समझा था, परन्तु फिर भी मैं चाहूँगी कि इसके संबंध में शोनाली और सुमति अगला कदम लें. पारुल भी डेविड से बात कर सकती है. डेविड से उसे अधिक जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी. शोनाली और सुमति मिशेल के साथ मिलकर कुछ आयोजन कर सकती हैं. पापा आप का क्या सोचना है.”

संस्र्थ: “मुझे ये सही लग रहा है, इस प्रकार से शीला की जो उस समाज में जुड़ने की इच्छा थी, कुछ रूप में पूर्ण हो जाएगी. मेरे विचार से जब तक हम लौटेंगे, हमारे तीन परिवार तो कम से कम मिल चुके होंगे.”

पार्थ: “नाना जी, आप शेट्टी परिवार को भूल गए.”

समर्थ: “भूला नहीं, पार्थ. पर अधिक शीघ्रता विनाश का कारण बनती है. पहले इस परिवार से घनिष्ठता बना लो, उसके बाद ही आगे कुछ सोचो.”

पार्थ: “जी नाना जी, आप ने सही कहा.”

शीला: “डेविड और रिचर्ड के बारे में सोचकर ही मेरी चूत पनिया रही है.”

पार्थ: “नानी, आप भूल गयीं. मार्क भी अब यहीं पढ़ने वाला है, तो आपको उसके विषय में भी सोचना होगा.”

ये सुनकर सब हंस पड़े तो शीला शर्मा गयी.

शीला: “बहुत दुष्ट हो गया है तू पार्थ, इधर आ, तेरी चालाकी को चूसकर निकालती हूँ.”

पार्थ शीला के सामने खड़ा हुआ तो शीला ने उसका लोअर सरकाकर नीचे खिंचा और उसके लंड पर अपनी जीभ चलाने लगी.

“अब हो चुकी बात, चलो कुछ देर बाद आगे की बातें करेंगे. मैं भी अपनी नातिन की चूत का रस पीने के लिए लालायित हूँ. सुना है बहुत मीठा है उसका पानी.”

संजना ये सुनकर शर्मा उठी.

सुप्रिया ने सजल को अपने पास बुलाया और सजल वशीभूत होकर उसके पास आ गया.

“बहुत बड़ा हो गया है रे मेरा बेटा। सुना हैं अपनी माँ को भी चोदता है अब तू. मौसी की याद नहीं आयी कभी?”

“मौसी, याद तो हर दिन आती है.”

“तो दूर क्यों रहता है? माँ ने मना तो किया नहीं होगा?”

“नहीं. बस समय नहीं मिल पाया.”

“चल आज तू अपनी मौसी की भी चुदाई कर. अपनी भाभी और उसकी माँ को तो चोद ही चुका है तू आज.”

सजल मौसी के मुंह से ऐसी भाषा सुनकर कुछ अचम्भे में था, परन्तु जल्दी ही समझ गया कि इस खेल में शर्म का कोई स्थान नहीं है.

“मम्मी, मैं सजल को अपने कमरे में ले जा रही हूँ. तुम चाहो तो बाद में वहीं आ जाना.” शीला को बताकर वो जाते हुए मुड़ी और सुमति को आंख मारते हुए बोली, “आप भी तैयार रहना अपनी औषधि के लिए.”

सुमति के चेहरे के उद्गार देखने लायक थे. उसने निखिल को देखा तो निखिल भी उसे ही देख रहा था. आँखों के संकेत दोनों के लिए पर्याप्त थे.

निखिल ने सुमति को साथ लेकर पूछा, “कहाँ चलें?”

सुमति के शरीर ने झुरझुरी ली, “जहाँ तेरा मन हो.”

निखिल उसे लेकर सुप्रिया वाले कमरे में ही चला गया. नितिन ने सोचा कि कहीं उसे अवसर न मिले, तो तपाक से उसने पारुल को पकड़ा और चल दिया. पारुल भी उसके इस व्यवहार पर हंस पड़ी. कमरे में शोनाली, सुरेखा, सागरिका और जॉय ही बचे थे. अब किसी को समझ नहीं पड़ रहा था कि क्या करें. इसका उपाय शोनाली ने ही सुझाया. “ हम तीनों एक दूसरे को सुख दे सकती हैं और हम तीनों तो आप एक एक करके चोदो।”

जॉय की तो बांछे खिल गयीं, एक साथ तीन तीन सुंदरियों की चुदाई. उसकी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था. उन्होंने वहीं बैठक में ही समर्थ और संजना के निकट ही अपने प्रेमालाप का निर्णय लिया. शीला पार्थ को लेकर अपने कमरे में जा चुकी थी.

सुप्रिया सजल के साथ थी. सुमति ने निखिल को घेरा हुआ था. पारुल को नितिन ले गया था तो पार्थ को शीला. बैठक में समर्थ और जॉय संजना, सुरेखा, सागरिका थे. अगले चरण के खेल के लिए बिसात बिछ चुकी थी. अब बस सभी खिलाड़ी खुलकर खेलने को उग्र थे.

शेष अगले भाग में.
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.३

भाग ५

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अब तक:

समर्थ और जॉय के परिवार समर्थ के घर पर एकत्रित हैं, जहाँ समर्थ अपने अवकाश प्राप्ति की घोषणा करता है. वो अपने व्यवसाय का पूरा उत्तरदायित्व अपनी बेटियों को सौंप देता है. इसी के साथ वो अपनी पत्नी शीला के साथ भ्रमण पर जाने की भी घोषणा करता है. साथ ही वो सुमति को सुप्रिया की सहायता हेतु कम्पनी में नौकरी दे देता है. घर के विस्तार के बारे में बताकर वो अपनी दोनों बेटियों को परिवार सहित उनके ही साथ रहने का आग्रह करता है. इसके बाद पार्टी और चुदाई का खेल चलता है.

चुदाई का एक चक्र हो चुका था. पार्थ ने अपने रिसोर्ट के अनुभव को भी सबके साथ बाँटा था, जिसे सुनकर सभी चकित थे. पर शीला ने नेतृत्व संभालकर आगे की बातों से लोगो का ध्यान हटा दिया था और दूसरे क्रम की चुदाई का आरम्भ करवा दिया था.

सुप्रिया सजल के साथ थी. सुमति ने निखिल को घेरा हुआ था. पारुल को नितिन ले गया था तो पार्थ को शीला. बैठक में समर्थ और जॉय संजना, सुरेखा, सागरिका थे. अगले चरण के खेल के लिए बिसात बिछ चुकी थी. अब बस सभी खिलाड़ी खुलकर खेलने को उग्र थे.

अब आगे:

सुप्रिया और सजल:

सुप्रिया सजल को लेकर अपने निर्धारित कमरे में आ गयी. कमरे में आकर उसने समय व्यर्थ न करते हुए अपने कपड़े यूँ ही आनन फानन फेंके और सजल के सामने कुछ ही देर में वो प्राकृतिक अवस्था में खड़ी थी. सजल भी अपने कपड़े निकाल चूका था पर मौसी को नंगा देखकर उसके मुंह खुला रह गया. वो इस समय एक परी के समान सुंदर लग रही थी. हाँ, आयु का दंश उन्हें अवश्य कुछ काट रहा था, परन्तु आज भी वो अनंत सुंदरी थीं.

“क्या देख रहा है?”

“आ आ आप बहुत सुंदर हो, मौसी.”

“तेरी माँ से भी अधिक?” सुप्रिया ने उसे छेड़ा.

सजल ने कुछ नहीं कहा फिर धीमे स्वर में बोला, “नहीं.”

सुप्रिया एक पल के लिए चौंकी, फिर मुस्कुराकर सजल की ओर बढ़ी.

“जानता है, तेरा ये सीधापन ही मुझे हमेशा रास आता है. तुम अपनी मौसी को नंगा देखकर उसकी चुदाई से पहले भी अपनी माँ को ही उससे मानता है. सच मैं, मैं तेरी इस सच्चाई से बहुत ही प्रभावित हूँ. क्या करना चाहता है तू अपनी मौसी के साथ?”

सुप्रिया ने उसके खड़े होते हुए लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाते हुए पूछा.

“सब कुछ. मम्मी ने कहा था कि आप मुझे बहुत कुछ सीखा सकती हो.”

“सीखा दूँगी समय आने पर, लेकिन आज जो तू चाहता है, वो करुँगी। बता न?”

“कहा न मौसी सब कुछ. आपका मुंह, चूत और गांड सब कुछ.”

“हम्म, और मेरे हाथ?” सुप्रिया ने सजल के लंड को अपने हाथ से दबाते हुए ठिठोली की.

“वो भी.”

सुप्रिया ने सजल के चेहरे को अपने दूसरे हाथ से सहलाया और फिर उसकी गर्दन पकड़कर उसे अपनी ओर खींचते हुए अपने जलते हुए होंठ सजल के होंठों से मिला दिया. सजल मौसी के चुंबन में खो गया और साथ देने लगा. न जाने कितनी देर दोनों एक दूसरे के आलिंगन में चुंबन में बंधे रहे. फिर सुप्रिया ने हाँफते हुए उसे अलग किया और उसे बिस्तर पर बैठा दिया. अब तक सजल का लंड अपने पूरे जोश में आ चुका था. और सुप्रिया उसके आकार से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. अपने घुटनों पर बैठकर सजल के लंड को अपने मुंह में लिया और उसे प्रेम से चूसने लगी.

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सुमति और निखिल:

सुमति अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी. समर्थ से चुदने और गांड मरवाने से उसकी प्यास कम होने के स्थान पर और बढ़ गयी थी. चार लौंड़ों का रस गांड से पीने से भी उसे संतुष्टि नहीं हुई थी. आज उसने प्रण किया हुआ था कि परिवार के हर लंड का रस जिस भी गांड में जायेगा उसे पीने के बाद ही वो घर लौटेगी. समर्थ, निखिल, सजल और जॉय का रस पी चुकी थी. अभी नितिन और पार्थ शेष थे. उसे ये भी विश्वास हो गया था कि हो न हो नितिन आज पारुल की गांड मारने में सफलता पायेगा और उसे नितिन का पानी पारुल की गांड से पीने का सौभाग्य मिलेगा. और पार्थ! शीला पार्थ को गांड मरवाये बिना तो छोड़ने से रही. तो उसका आज का प्रण पूरा होने की पूरी संभावना थी. बस एक अड़चन थी, कि उसे पता कैसे चलेगा. वो नहीं जानती थी की समर्थ ने इसका पूरा प्रबंध किया हुआ है.

अब बात ये भी थी कि अगर उसकी चुदाई चल रही होगी तो वो जाएगी कैसे? फिर उसने ऐसे सभी प्रश्नों को ताक में रखा और निखिल के साथ कमरे में जाते ही तुरंत अपने कपड़े उतार फेंके और निखिल को भी जल्दी से नंगा कर दिया. निखिल के बलशाली लंड को अपने मुंह से चाटते हुए वो अपनी चूत को सहलाने लगी. निखिल उसकी इस उत्सुकता को समझ रहा था और उसे डर था कि कहीं उन दोनों की चुदाई में व्यवधान न पड़े.

“बुआ, आप आराम से रहो. नानाजी से सब प्रबंध कर दिया है. पारुल और नानी गांड मरवा कर हमारे ही पास आएँगी। और आपको उनके गांड खाली करने का पूरा अवसर दिया जायेगा. इसीलिए, अब अपनी चुदाई का मजा लो.”

सुमति ने निखिल की बात सुनी तो वो समर्थ की ऋणी हो गयी. कितना ध्यान रखते हैं उसका. उसकी लंड चाटने की गति समान्य हो चली पर अपनी चूत से उँगलियों को छेड़ना उसने बंद नहीं किया.

“बुआ, चलो लेटो, लंड बाद में चाटने का भी समय रहेगा. आपकी चूत और गांड के स्वाद के साथ मिलेगा. अभी क्या रखा है इसमें? आओ मुझे आप अपना स्वाद चखाओ.”

सुमति निर्विरोध बिस्तर पर लेट गयी और निखिल के चेहरे को लालायित दृष्टि से देखने लगी. निखिल उसकी जांघों के बीच में झुका और अपनी जीभ से उसके भग्नाशे को चाटा। इतने में ही सुमति बहक गयी. पर निखिल ने तो अभी केवल ट्रेलर ही दिखाया था, पिक्चर तो अभी बाकी थी. अपनी जीभ, होंठ, और उँगलियों के माध्यम से निखिल सुमति की चूत और गांड को चाटने, सहलाने, करीदने और चूसने में व्यस्त हो गया. उसका कौन सा अंग कब क्या कर रहा था इसमें कोई नियम नहीं था और सुमति का कामोन्मादित शरीर इन बदलते हुए आघातों को समझने में असमर्थ था और निखिल के उँगलियों पर नाच रहा था.

तड़पती, लरजती, सिसकारियां लेती हुई सुमति सागरिका के भाग्य को धन्य मान रही थी जिसे ऐसा विलक्षण चुड़क्कड़ पति मिलने जा रहा था. और ये उनके परिवार के लिए भी शुभ था. दोनों परिवारों के बढ़ते हुए घनिष्ठ सम्बन्ध अब जीवन पर्यन्त रहने वाले थे. सुमति की चूत के रस से अब निखिल का चेहरा भीग चुका था, परन्तु उसने अपने आक्रमण में कोई कमी नहीं की थी. बल्कि अब उसने सुमति की गांड पर अधिक ध्यान दिया और जैसा कि सुमति की चाहत थी उसकी गांड को भी जीभ और उँगलियों से छेड़ते हुए सुमति को अनन्य बार झाड़ दिया. इस बार जब निखिल ने अपना सिर उठाया तो सुमति एक नशे जैसी स्थिति में ऑंखें बंद किये हुए पड़ी थी. और निखिल ने शैतानी मुस्कराहट के साथ सोचा कि चुदने के लिए तैयार, और ऐसी चुदाई के लिए कि उसका रोम रोम काँप जाये.

निखिल ने आज सुमति के साथ एक नया प्रयोग करने का निर्णय लिया. उसने सुमति को घोड़ी का आसन लेने के लिए आग्रह किया. सुमति ने पलटते हुए अपनी गांड उठाकर आसन ले लिया. अब वो अपनी चूत की खुजली दूर होने की आशा कर रही थी.

*********

पारुल और नितिन:

पारुल मन ही मन नितिन की इस बेचैनी पर खुश थी. वो जानती थी कि नितिन उस पर आसक्त है और ये नहीं दिखाना चाहती थी कि उसके मन में भी नितिन के प्रति वही भावना थी. नितिन कमरे में पारुल के साथ जाते ही उससे लिपट गया. पारुल के हाथ उसकी पीठ पर गए और पारुल ने अपने होंठ नितिन के होंठों से जोड़ दिए. नितिन कई स्त्रियों की चुदाई कर चुका था, पर उसे जो आकर्षण पारुल में दिखा था वो किसी और में नहीं. मन की बातें मन ही जाने.

दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए चुंबनों का अदन प्रदान करते रहे और फिर जब अलग हुए तो उनके चेहरे लाल थे. पारुल ने पहल करते हुए नितिन के कपड़े निकाले और फिर नितिन की ओर देखा तो नितिन अपने आपे में आया और उसने भी पारुल को उसके कपड़ों से मुक्त कर दिया. दोनों प्रेमी एक दूसरे को देखते हुए अपने भाग्य को धन्य कर रहे थे.

कुछ देर तो दोनों एक दूसरे को केवल देखते ही रहे. एक दूसरे में उन्हें एक अनजाना आकर्षण दिख रहा था. फिर नितिन पहल की और पारुल को बिस्तर पर लिटा दिया और उसे ऊपर से नीचे था चूमने और चाटने लगा. उसकी चूत पर पहुंचते ही उसे पारुल की सुगंध ने पागल कर दिया. अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटते ही उसे विश्वास हो गया कि वे दोनों भी एक दूसरे के लिए ही बने हैं. और इसी असहय से उसने पारुल को अपने मुंह से सुख देना आरम्भ किया. पारुल मौखिक सहवास से परिचित थी, और वैसे तो नितिन कुछ भी अलग नहीं कर रहा था, पर पारुल का रोम रोम उसे पुकार रहा था और उसमे एक ऐसी भावना जागृत कर रहा था जिससे वो अब तक अनिभिज्ञ थी. क्या ये प्यार है?

नितिन और पारुल दोनों के मन में समान भावनाएं थीं. पारुल ने अपना ढेर सारा रस नितिन के मुंह में उढ़ेल दिया. नितिन को इस रस में जो स्वाद आया वो अलग था. क्या ये प्यार है?

नितिन के मुंह में झड़ने के साथ ही पारुल ने उसे कहा कि वो भी उसके लंड को चूसने की इच्छुक है. नितिन कब मना करने वाला था. उसने तुरंत ही अपने लंड को पारुल के मुंह के समीप कर दिया जिसे पारुल ने पूरे प्रेम के साथ चाटा और चूसने में लग गयी. नितिन के लंड को न जाने कितनी ही बार चूसा गया था, पर उसे पारुल के मुंह में एक अलग ही आनंद मिल रहा था. क्या ये प्यार है?

पारुल स्वयं भी इन्हीं विचारों में खोई थी. लौड़े तो उसने भी चूसे थे, कई तो नहीं पर पर्याप्त. पर उसे जो अनुभूति उसे नितिन के लंड को चूसने में हो रही वो नई थी. क्या ये प्यार है?

जब नितिन झड़ने को हुआ तो उसने पारुल को चेताया, पर पारुल ने उसके लंड को मुंह से निकालने में कोई रूचि नहीं दिखाई. और नितिन ने उसके मुंह में ही अपना पानी छोड़ दिया. पारुल ने ख़ुशी से उसके पूरे रस को पी लिया और नितिन की ओर प्रेम भरी दृष्टि से देखा. दोनों एक दूसरे को देखकर अब ये समझ गए थे कि उनके बीच केवल चुदाई का ही संबंध नहीं रहेगा. ये सम्भवतः उनके प्रेम की पहली सीढ़ी थी. वैसे भी वो दोनों विवाह के लिए इतनी शीघ्र तैयार नहीं थे, पर भविष्य में इसकी संभावना उन्हें उज्ज्वल दिख रही थीं. एक दूसरे को फिर से चूमते हुए दोनों लेट गए.

“मुझे कुछ अलग सी अनुभूति हुई आज, मैं समझा तो नहीं सकता, पर जीवन में ऐसा भाव पहली बार आया है मेरे मन में.” नितिन ने पारुल को चूमते हुए बताया.

“मुझे भी, कुछ अलग ही लगा आज. क्यों? मुझे भी नहीं पता पर तुम्हारे साथ एक अलग ही भावना थी.” पारुल ने भी उसे चूमते हुए कहा.

“क्या ये प्यार है?” दोनों ने एक साथ पूछा और फिर हंसने लगे.

“देखा न हम दोनों एक ही जैसा सोचते हैं.” पारुल बोली.

“हम्म मुझे नानी और मम्मी से बात करनी होगी.” नितिन ने कहा.

“और मुझे भी, नहीं तो वो मेरे लिए लड़का ढूंढने में लग जाएँगी दीदी के विवाह के बाद.”

“पर अभी मैं विवाह नहीं कर सकता.” नितिन ने सफाई दी.

“मैं भी. अभी दो वर्ष तक तो नहीं.” पारुल ने सहमति जताई.

“तो क्या सगाई कर लें और दो साल बाद?”

“देखो मम्मियाँ क्या कहती हैं. सगाई हो या नहीं, हम एक दूसरे के तो साथी बन ही सकते हैं. सगाई तो केवल औपचरिकता ही है.” पारुल ने कहा.

अब तक नितिन का लंड खड़ा हो चुका था और अपनी संभावित पत्नी की चुदाई के लिए तत्पर था.

“तो सुहागरात मना लेते हैं?” नितिन ने कहा.

“बिलकुल. नेकी और पूछ पूछ.” पारुल ने ये कहते हुए अपने पैर फैला दिए.

*********

शीला और पार्थ:

शीला सुमति की चुदाई देखकर बहुत उत्तेजित थी. उसके ऊपर पार्थ ने अपने नए अनुभव के बारे में सुनकर उसकी आग और भड़का दी थी. अब अगर उसकी भरपूर चुदाई जल्दी न हुई तो वो न जाने क्या करने वाली थी. पहले उसने सोचा था कि समर्थ उसकी चुदाई करेंगे पर सुमति की गांड मारने के बाद वो बैठक में चले गए थे. संजना की जीभ में वो आनंद नहीं था जो किसी लंड के चूत में घुसने का होता है. और गांड के बारे में तो सोचना भी नहीं चाहिए क्योंकि गांड में जब लंड जाता है तभी पूरा मजा आता है. वो अपनी इस अकस्मात कविता पर हंस पड़ी. कमरे में घुसे ही थे तो शीला को हँसते देख पार्थ पूछ बैठा कि क्या बात है?

शीला: “मैंने दो पंक्ति की कविता बनाई है: गांड में जब लंड जाता है तभी पूरा मजा आता है. कैसी है?”

अब हंसने की बारी पार्थ की थी.

“नानी, आपका सच में कोई पर्याय नहीं. आप इतने दिनों तक एक लंड से काम चला लेंगी? टूर पर क्या करेंगी?”

“चिंता न करो, नाती जी. हम दोनों कोई न कोई प्रबंध अवश्य ही कर लेंगे. वैसे भी ऐसे भ्रमण पर निकले कई जोड़े नए अनुभवों के लिए उत्सुक होते हैं.”

पार्थ नानी की इस बात पर सोचता ही रह गया.

फिर बोला, “नानी, वैसे विचार उत्तम है. मैं रूचि से पूछूँगा कि हम भी क्लब के लिए ऐसा ही टूर बनाएँ।”

“बना ले, तेरी क्लब की औरतें तो तुझे मालामाल कर देंगी अगर ये टूर बना तो. पर वो बाद में, पहले मेरी चुदाई कर डाल. संजना से चूत चटवा कर और तेरी माँ की चुदाई देखने के बाद बेचारी को कोई भी संतोष नहीं मिला है. ”

कपड़े फेंककर शीला बिस्तर पर लेटी और अपने पाँव फैलाकर पार्थ को आशा से देखने लगी. पार्थ ने भी सोचा कि क्या बिगड़ता है, छोड़कर इनको शांत कर ही देता हूँ. उसने भी तत्काल कपड़े उतारे और अब तक खड़े हुए लंड को शीला की चूत पर रखा और एक भरी धक्के के साथ अंदर पेल दिया. शीला ने आनंद भरी सिसकारी ली और अपने पाँव कैंची के समान पार्थ की कमर पर लपेट दिए.

और पार्थ ने भी अपनी चिर परिचित चुदाई का परिचय दिया और अपने जवान लौड़े से शीला की बूढी चूत पर आतंक मचा दिया. पर शीला भी खेली खिलाई थी. पार्थ उसके चुदाई के सामर्थ्य से अपरिचित तो नहीं था परन्तु उसने ये समझा कि शीला उसके सामने कुछ दया की भीख माँगेगी। पर हुआ कुछ उल्टा ही. शीला इतनी अधिक उत्साहित और उत्तेजित थी कि पार्थ की इस शक्तिशाली चुदाई को भी वो बड़ी ही आसानी से झेल रही थी हुए उसका मजा भी ले रही थी. न जाने सच में या पार्थ को छेड़ने के उद्देश्य से शीला उसे और भी तेजी से चोदने के लिए उलाहना देनी लगी. अब अपने लंड पर गर्व करने वाले पार्थ के तन बदन में आग सी लग गयी. वो और तेज गति से शीला को चोदने में जुट गया और शीला भी उसे और अधिक कोसते हुए उकसा रही थी.

ऐसा नहीं था कि शीला नहीं समझ रही थी कि वो भी आग से खेल रही है, पर जो आग उसकी चूत में भड़की हुई थी उसका ऐसी भीषण चुदाई के सिवाय कोई और उपचार भी नहीं था. पार्थ को लग रहा था कि वो नानी से हारने वाला है. वो चाहे जितने भी तेज और गहरे धक्के लगाता शीला उन्हें आसानी से झेल रही थी. और इसका और भी एक कारण था, शीला की चूत अब इतना पानी छोड़ चुकी थी कि उसमे लंड तैर रहा था और पार्थ को अब कोई भी आनंद नहीं मिल रहा था.

“नानी, आपकी चूत पूरी गीली हो चुकी है, पता भी नहीं चल रहा है मेरे लंड को. रुको मैं उसे पोंछ दूँ. ”

“कर जो करना है, पर जल्दी कर. आज मुझे अच्छे से चोद कर खुश कर दे, बस.” शीला ने कुछ खीझ के साथ कहा.

पार्थ ने अपनी शर्ट से शीला की चूत को पोंछा और जब लगा की वो अब कुछ सुख गयी है तो अपने लंड को एक ही धक्के ने अंदर डाल दिया. पूछने का काम कुछ अच्छे से ही हुआ था क्योंकि इस बार शीला की चीख निकल गयी. अब उसे लगने लगा कि उसने पार्थ को छेड़कर गलती की क्योंकि अब पार्थ पूरे नियंत्रण में था और शीला की चूत की धज्जियाँ उड़ा रहा था. इस आयु में शीला कितना पानी छोड़ती, उसकी चूत में पार्थ अब एक वहशी रूप में लंड की पिलाई कर रहा था. शीला को अपनी नानी याद आ गयी.

“मुझे छोड़ दे बेटा, मुझसे गलती हो गयी जो मैंने तुझे इतना कुछ कहा. अपनी नानी पर दया कर, मेरी चूत फट गयी है. क्यों जानवर के समान चोद रहा है?”

पर ये बाजी अब पार्थ के हाथ में थी और इस बार उसने अपनी भड़ास निकाली। शिला की बूढी चूत उस जवान मोटे लौड़े के सामने पस्त हो चुकी थी. और अभी पार्थ झड़ने से बहुत दूर था. और इसी कारण पार्थ ने एक निर्णय किया.

“ठीक है, नानी. अगर चूत फट गयी है तो मुझे अपनी गांड मारने दो.”

इससे पहले कि शीला कुछ कह पाती पार्थ ने अपने मोटे लम्बे लंड को शीला की चूत से निकाला और गांड में थोक दिया. शीला की चीख बैठक में चल रहे टीवी पर गूंज गयी. समर्थ ने संजना की चूत में से अपने मुंह को हटाकर देखा तो शीला की गांड में पार्थ का लंड फँसा हुआ था.

“इसे मैंने कई बार समझाया है कि जवान लौंडों को मत छेड़ा कर. इतनी बुढ़ा गयी पर बुद्धि नहीं आयी. चूत का सत्यानाश करवाकर अब गांड भी फड़वा लेगी माँ की लौड़ी.” समर्थ शीला के इस व्यव्हार पर अपने विचार रखते हुए संजना की चूत में फिर से अपनी जीभ चलाने लगा.

शीला को सच में अब कुछ कुछ समझ आने लगा था. उसकी विनती लेकिन कोई सुनने के लिए नहीं था. जिस पार्थ को वो उलाहना देकर उकसा रही थी वो अब उसकी चूत फाड़ने के बाद गांड का भी बैंड बजा रहा था. उसकी दया की भीख ने कुछ देर में पार्थ को भी विचलित कर दिया. उसने अपनी गति कुछ कम की और शीला की चूत को अपनी उँगलियों से छेड़ने लगा. गति कम होने से शीला को कुछ आराम मिला और पार्थ की उँगलियों ने उसकी चूत को कुछ सीमा तक फिर से सामान्य कर दिया.

ऐसी धुआंधार चुदाई के कारण शीला की नसें ढीली हो गयीं थीं और हड्डियां चटक रही थीं. पर पार्थ का भी अब संयम समाप्त हो चूका था. इस गति और कठोरता से चोदने से वो भी अब झड़ रहा था. उसने शीला की गांड में अपना माल भर दिया. शीला कुछ कुनमुनाई पर पार्थ ने उसे वैसे ही रुकने के लिए कहा. फिर उसने अपनी पैंट में से शीला की गांड बंद करने के लिए एक प्लग निकाला और बड़े प्रेम से उसकी गांड में डालकर उसे बंद कर दिया.

“अपनी माँ का बहुत ध्यान रखता है. सच में तेरे जैसा बेटा भाग्य वालों को ही मिलता है. अब मैं क्या करूं.”

“माँ के कमरे में जाओ, और उन्हें वहीँ ये जूस पिला कर आ जाओ.” पार्थ ने उन्हें समझाया.

शीला ने कपड़े पहनने की आवश्यकता नहीं समझी और उस कमरे की ओर बढ़ चली जहाँ वो निखिल के साथ चुद रही थी.

कमरे में जाकर देखा तो सुमति अपनी गांड उठाकर लेटी थी और निखिल अपने लंड से उसकी चुदाई करने ही वाला था. कमरे के खुलने से निखिल रुक गया और सुमति ने भी उस ओर देखा. शीला को अपनी ओर आते देख वो समझ गयी कि उनका प्रयोजन क्या है. उसने निखिल से कहा कि उसे कुछ मिनट का समय चाहिए. और फिर वो पलटी और सीधे लेट गयी. शीला ने उसे इस स्थिति में देखा तो वो भी जान गयी कि सुमति क्या चाहती है. उसने सुमति के मुंह के दोनों ओर पैर किये और अपनी गांड को उसके मुंह के पास ले गयी. सुमति ने अपना मुंह पूरा खोला और बहुत धीरे से शीला की गांड में से प्लग निकाला।

प्लग के निकलते ही वीर्य के मोटे मोटे थक्के सुमति के खुले मुंह में जा गिरे. जब उनके स्वतः गिरने का क्रम रुका तो सुमति ने शीला की जांघ के ऊपर हाथ रखकर दबाया. शीला की गांड अब सुमति के मुंह पर लग गयी. जैसे कोल्ड ड्रिंक को स्ट्रॉ से खींचकर पीते हैं वैसे ही सुमति ने शीला की गांड में से पूरा रस सोख लिया. सुमति के कार्य सम्पन्न करने के बाद शीला उठी और सुमति के होंठ चूमकर निखिल को बोली, “अच्छे से चोदना अपनी बुआ सास को. और अपना पानी पिलाना मत भूलना.” ये कहकर उसने निखिल के हाथ में वो प्लग थमाया और चल दी. द्वार पर जाकर मुड़ी तो देखा कि सुमति अपनी गांड उठाकर उसी आसन में आने लगी थी जिस आसन में वो शीला के आने के समय थी. शीला प्रसन्न मन से पार्थ के पास लौट गयी.

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