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Incest एक भाई की वासना (completed)

[color=rgb(255,]अपडेट 11

आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज को उस कपड़ों के ढेर में से सिर्फ़ एक ही काली रंग की ब्रेजियर मिली और वो उसे उठा कर मेरे पास ले आया और बोला- यह लो डार्लिंग..
मैंने ब्रेजियर ली और सूरज वापिस जा कर सोफे पर बैठ गया। जैसे ही वो वापिस गया तो मैंने उसे दोबारा बुलाया।

मैं- अरे यार यह क्या है. यार.. यह तो तुम रश्मि की ब्रेजियर उठा ले आए हो.. मेरी लाओ ना निकाल कर.. तुमको पता नहीं चलता कि क्या.. कि यह कितनी छोटी है।
सूरज ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और मैंने खुले दरवाजे से उसकी बहन की ब्रेजियर उसकी हाथ में पकड़ा दी।
सूरज ने एक नज़र मेरी नंगी चूचियों पर डाली और मैंने जानबूझ कर बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा बंद कर दिया ताकि वो मुझे ना देख सके. लेकिन मैं छुप कर उसे देखने लगी कि वो क्या करता है..?
अब आगे ..[/color]

[color=rgb(44,]जैसे कि मुझे उम्मीद थी.. सूरज अपनी हाथ में पकड़ी हुई अपनी बहन की ब्रेजियर को देखने लगा। उसने वो ब्रा फैलाई और आहिस्ता आहिस्ता उसको फील करने लगा।
मेरी नज़रें उसकी चेहरे पर पड़ीं.. तो उसका चेहरा अजीब सा हो रहा था।

वापिस कपड़ों के तरफ जाते हुए उसने जो हरकत की.. उसे देख कर तो मेरी चूत ही गीली हो गई।[/color]
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[color=rgb(44,]सूरज ने अपनी बहन की ब्रेजियर को अपनी चेहरे पर फेरा और उसे अपनी नाक से लगा कर सूंघा भी।[/color]
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[color=rgb(44,]हालांकि धुली हुई ब्रेजियर में से कहाँ उसकी बहन के जिस्म की खुशबू आनी थी।

थोड़ी देर के बाद वो वापिस आया और बाथरूम का बन्द दरवाजा खोल कर बोला- नहीं यार.. वहाँ पर कोई नहीं है.. दूसरी ब्रेजियर यहीं पड़ी हुई होगी।
मैंने कहा- अच्छा ठीक है.. मैं आकर देख लेती हूँ।

अभी भी उसकी हाथ में रश्मि की ब्रा मौजूद थी.. जिसे देख कर मैं मुस्कराई और उसके हाथ से ब्रा को ले लिया। फिर मैं एक तौलिया अपनी नंगे जिस्म पर लपेट कर बाथरूम से बाहर लाउंज में ही निकल आई।
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सूरज दोबारा से सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था। मैंने जैसे बेखयाली में वो रश्मि की ब्रेजियर दोबारा से उसके पास ही सोफे पर फेंक दी और बोली- क्या है यार.. एक काम भी नहीं होता तुम से मेरा..
यह कह कर मैं अपने बेडरूम में चली गई, अपने कमरे से मैं दोबारा बाहर झाँक कर देखने लगी.. ऐसे कि सूरज मुझे ना देख पाए।

मैंने देखा कि सूरज ने एक-दो बार बेडरूम की तरफ देख कर मेरी तरफ से तसल्ली की और फिर अपने क़रीब ही सोफे पर पड़ी हुई अपनी बहन की ब्रेजियर को दोबारा से उठा लिया।

जैसे ही उसने उसे ब्रा को उठाया.. तो मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
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सूरज ने दोबारा से अपनी बहन की ब्रेजियर उठा ली हुई थी और उस पर आहिस्ता आहिस्ता हाथ फेरते हुए उसे फील कर रहा था.. जैसे कि उसमें अपनी बहन की चूचियों को सोच रहा हो।

मैं कुछ देर उसे अपने बहन की ब्रेजियर से खेलती हुए देखती रही और फिर मुस्करा कर उसे ब्रा से एंजाय करते हुए छोड़ कर.. अपनी अल्मारी की तरफ बढ़ गई।

मैंने अपनी ब्रेजियर निकाल कर पहनी और फिर नीचे से एक लेग्गी पहन ली लेकिन ब्रा के ऊपर टॉप नहीं पहना और फिर बाहर आ गई।
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जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला तो सूरज ने रश्मि की ब्रा फ़ौरन ही सोफे पर फेंक दी। मैंने देख तो लिया था.. लेकिन शो ऐसे ही किया.. जैसे मैंने कुछ भी ना देखा हो।
फिर मैंने कपड़ों में से रश्मि के कपड़े और सोफे पर से उसकी ब्रेजियर उठाई और उसकी अल्मारी में रख आई।

पहले तो सूरज थोड़ा सा घबराया था लेकिन जब उसने देखा कि उसकी इस हरकत का मुझे कुछ भी पता नहीं चला.. तो वो काफ़ी रिलेक्स हो गया था।
मैं तो खुद भी उसे अहसास करवा कर अपना काम और मज़ा खराब नहीं करना चाहती थी ना.. और उसे अपने ही बहन की तरफ जाने का पूरा-पूरा मौका देना चाहती थी।

दो दिन के बाद सुबह जब सूरज ऑफिस के लिए कमरे में ही तैयार हो रहा था.. तो मैंने उससे कहा- सूरज.. प्लीज़ आज ऑफिस से आते हुए थोड़ी शॉपिंग तो करते आना..
सूरज- क्या मंगवाना है?
मैं- यार 3-4 सैट लेटेस्ट और खूबसूरत डिज़ाइन वाली ब्रेजियर के तो ले ही आना।
सूरज- ओके डार्लिंग.. लेता आऊँगा।
मैं- ओह हाँ.. याद आया.. वो ना साइज़ तुम 34 इंच लेकर आना।

सूरज ने हैरान होकर मेरी तरफ देखते हुए बोला- क्यों.. 34 क्यों.. तुम्हारा साइज़ तो 36 है.. फिर छोटा नंबर क्यों मंगवा रही हो?

मैंने उसके उतारे हुए कपड़े समेटते हुए बड़े ही साधारण अंदाज़ में कहा- वो 34 की साइज़ की ब्रेजियर रश्मि के लिए मंगवानी हैं ना.. उसकी ब्रा सबकी सब पुरानी हैं और पुरानी डिज़ाइन की हैं.. उसके लिए कुछ अच्छी डिज़ाइन की ब्रेजियर ले आना।
मैंने इतनी नॉर्मल अंदाज़ में कहा था.. जैसे कि उससे बाज़ार से कोई सब्ज़ी या घर की कोई और चीज़ मंगवा रही हूँ।

लेकिन मेरी इस बात से सूरज चकित हो चुका था। उसे इसे हालत में छोड़ कर मैं मुस्कराती हुई कमरे से बाहर आ गई और रसोई में जाकर नाश्ता तैयार करने लगी।
जब सूरज और रश्मि भी नाश्ते के लिए आ गए.. तो हम सब नाश्ता करने लगे।

मैंने नोट किया कि आज सूरज बड़ी ही अजीब नज़रों से रश्मि को देख रहा था। आज भी उसकी नजरें बार-बार उसकी चूचियों पर जा रही थीं.. जैसे कि वो खुद भी अपनी बहन की चूचियों की साइज़ का अंदाज़ा करना चाह रहा हो।
उसकी यह हालत देख कर मैं दिल ही दिल में मुस्करा रही थी।[/color]
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[color=rgb(44,]इतने दिनों में अब यह तब्दीली आ चुकी हुई थी कि रश्मि को भी कुछ-कुछ फील होने लगा था कि उसके भाई की नजरें उसके जिस्म की इर्द-गिर्द ही घूमती रहती हैं..[/color]
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[color=rgb(44,]लेकिन वो भी कुछ बुरा फील नहीं करती थी और उस बात को साधारण सी बात ही समझती थी।
मैंने कभी भी उसे बुरा मानते हुए या खुद को छुपाते हुए नहीं देखा था।

जब शाम को सूरज घर वापिस आया तो उसके हाथ में एक शॉपिंग बैग था। जिसे उसके हाथ में देख कर ही मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई। लेकिन मैंने अपनी मुस्कराहट सूरज से छुपा ली।

अपने कमरे में आकर सूरज ने मुझे वो शॉपिंग बैग दिया और बोला- यह ले आया हूँ.. जो तुमने मँगवाया था.. देख लेना और अगर कुछ चेंज-वेंज करना हो तो भी करवा लाऊँगा।

मैंने भी बड़े ही साधारण तरीके से उससे बैग लिया और उसे कमरे में एक तरफ 'ओके' कह कर रख दिया.. जैसे मुझे कोई ख़ास दिलचस्पी ना हो और यह एक आम सी बात ही हो।
लेकिन अन्दर से मैं बहुत उत्सुक थी कि देखूँ कि सूरज अपनी बहन के लिए किस किस्म की ब्रा सिलेक्ट करके लाया है।

अगले दिन रश्मि घर पर ही थी तो सूरज के जाने के बाद मैंने वो शॉपिंग बैग उठाया और बाहर आ गई। जहाँ पर रश्मि बैठी टीवी देख रही थी।
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मेरे हाथ मैं नया शॉपिंग बैग देख कर खुश होती हुए बोली- वाउ भाभी.. शॉपिंग करके आई हो.. कब गई थीं आप.. और क्या लाई हो.. दिखाओ मुझे भी?
मैं मुस्करा कर बोली- नहीं यार मैं तो नहीं गई थी.. कुछ चीजें तुम्हारे भैया से ही मँगवाई हैं और वो भी तुम्हारे लिए..
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मैं अब रश्मि के पास ही बैठ चुकी थी और उसका भी पूरा ध्यान अब मेरी तरफ ही था।
रश्मि- अरे भाभी मेरे लिए क्या मंगवा लिया है.. दिखाओ ना मुझे भी?
मैंने बैग मैं से चारों बॉक्स निकाल कर बाहर टेबल पर हम दोनों की सामने रख दिए। बॉक्स पर ब्रा पहने हुई मॉडल्स की फोटो थीं.. जिनको देखते ही रश्मि चौंक उठी।[/color]
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[color=rgb(44,]अपडेट 12

आपने अभी तक पढ़ा..
अन्दर से मैं बहुत उत्सुक थी कि देखूँ कि सूरज अपनी बहन के लिए किस किस्म की ब्रा सिलेक्ट करके लाया है।
अगले दिन रश्मि घर पर ही थी तो सूरज के जाने के बाद मैंने वो शॉपिंग बैग उठाया और बाहर आ गई। जहाँ पर रश्मि बैठी टीवी देख रही थी।

मेरे हाथ मैं नया शॉपिंग बैग देख कर खुश होती हुए बोली- वाउ भाभी.. शॉपिंग करके आई हो.. कब गई थीं आप.. और क्या लाई हो.. दिखाओ मुझे भी?
मैं मुस्करा कर बोली- नहीं यार मैं तो नहीं गई थी.. कुछ चीजें तुम्हारे भैया से ही मँगवाई हैं और वो भी तुम्हारे लिए..

मैं अब रश्मि के पास ही बैठ चुकी थी और उसका भी पूरा ध्यान अब मेरी तरफ ही था।
रश्मि- अरे भाभी मेरे लिए क्या मंगवा लिया है.. दिखाओ ना मुझे भी?
मैंने बैग मैं से चारों बॉक्स निकाल कर बाहर टेबल पर हम दोनों की सामने रख दिए। बॉक्स पर ब्रा पहने हुई मॉडल्स की फोटो थीं.. जिनको देखते ही रश्मि चौंक उठी।
अब आगे ..

रश्मि- भाभी यह क्या है?

मैं- अरे यार तुम्हारे लिए कुछ नई ब्रा मँगवाई हैं मेरा तो मार्केट में चक्कर लग ही नहीं पा रहा था.. इसलिए तुम्हारे भैया से ही कहा था कि ला दो.. आओ खोल कर देखते हैं कि तुम्हारे भैया कैसी डिज़ाइन्स लाए हैं अपनी बहना के लिए।
मेरी बात सुन कर रश्मि का चेहरा शरम से सुर्ख हो गया.. वो झेंपती हुई बोली- भाभी.. आपको भैया से मंगवाने की क्या ज़रूरत थी.. पता नहीं वो मेरे बारे में क्या सोचते होंगे..

मैं मुस्कराई और बोली- अरे इसमें ऐसी कौन सी बात है.. मेरे लिए भी तो खरीद कर ले ही आते हैं ना वो.. तो तुम्हारे लिए ले आए.. तो कौन सी गलत बात हो गई है यार..
मैंने सब लिफ़ाफ़े खोले और उनमें से ब्रा निकाल कर देखने लगी।

उनमें से 2 तो कढ़ाई वाली थीं.. बहुत ही खूबसूरत डिज़ाइन की महंगी वाली ब्रा.. जिनमें से एक ब्लैक और दूसरी स्किन कलर की थी। तीसरी ब्रेजियर नेट वाली थी.. जिसको पहनने पर सब कुछ नज़र आता था। चौथी वाली ब्रा हाफ कप वाली थी.. जिसकी स्ट्रेप पारदर्शी प्लास्टिक की थीं।
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मैंने एक-एक ब्रा खोल कर रश्मि के हाथ में दीं और बोली- यार तेरे भैया बहुत ही सेक्सी ब्रा लाए हैं तुम्हारे लिए।
रश्मि उन सभी ब्रा को हाथों में लेकर देख भी रही थी और शरम से लाल भी हो रही थी।
मैं- अरे यार इस नेट वाली में तो तुम्हारी चूचियाँ बिल्कुल ही नंगी ही रह जाएंगी।
मैंने हँसते हुए कहा।
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रश्मि शर्मा कर मुझे जवाब देते हुए बोली- भाभी आपके पास भी तो हैं ना.. नेट वाली ब्रा.. आप भी तो पहनती हो ना..
मैं फ़ौरन बोली- मेरी पहनी हुई नेट वाली ब्रा तो तुम्हारे भैया को दिखाने के लिए होती है.. तुमको भी क्या यह पहन कर अपने भैया को दिखाना है।

मेरी इस बात पर तो रश्मि उछल ही पड़ी और बोली- भाभी कैसी बातें करती हो आप.. मैं क्यों पहन कर दिखाऊँगी भैया को?
उसका चेहरा शरम से सुर्ख हो गया।
मैं मुस्करा कर बोली- वैसे उसने लाकर तो तुमको इसलिए दी है ना.. शायद तुम्हारे भैया तुमको इसमें देखना चाहते ही हों..
रश्मि बोली- भाभी क़सम से.. आप बहुत खराब बातें करती हो।
मैं भी उसके साथ मिल कर हँसने लगी।

फिर रश्मि वो बैग लेकर अपने कमरे में चली गई.. मैंने भी उसे कोई आग्रह नहीं किया कि वो मुझे नई ब्रा पहन कर दिखाए।
शाम को सूरज घर आया तो आज भी हमेशा की तरह उसकी नज़रें अपनी बहन की चूचियों पर ही थीं.. जैसे अब वो यह जानना चाहता हो कि उसने नई ब्रा पहनी है कि नहीं।

मैंने महसूस किया कि अपने भाई की नज़रों को फील करके रश्मि भी थोड़ा शर्मा रही थी और मैं उन दोनों भाई-बहन की दशा का मजा ले रही थी।

सूरज की अपनी बहन पर तांक-झाँक ऐसे ही चलती रहती थी। गर्मी का मौसम चल रहा था और हमने काफ़ी महीनों से ही एसी लगवाने के लिए पैसे इकठ्ठे करने शुरू किए हुए थे।

अब जाकर हमारे पास इतने पैसे हुए थे कि हम एक एसी लगवा सकें.. तो फिर आख़िरकार हमने अपने बेडरूम में एसी लगवा ही लिया। उस रोज़ हम लोग बहुत खुश थे.. आख़िर हम जैसे मिडिल क्लास के लिए एसी का लग जाना भी एक बहुत बड़ी बात थी।
रात को मैं और सूरज अब एसी में सोने लगे।

लेकिन जल्दी ही मुझे और सूरज को रश्मि का ख्याल आया।

मैं- सूरज.. यार यह बात तो ठीक नहीं है कि हम लोग तो एसी चलाकर सो जाते हैं और उधर रश्मि गर्मी में ही सोती है।
सूरज- हाँ.. कहती तो तुम ठीक हो लेकिन अब कैसे करूँ..? हमारा कमरा भी इतना बड़ा नहीं था कि उसमें कोई और बिस्तर लगाया जा सके और ना ही उसमें कोई भी और सोफा वगैरह ही पड़ा हुआ था।

काफ़ी सोच विचार के बाद मेरे शैतानी दिमाग ने एक अनोखा आइडिया दिया जिससे मेरा काम भी आगे बढ़ने की उम्मीद थी।
मैं सूरज से बोली- सूरज एक बात हो सकती है कि हम रश्मि को अपने साथ ही बिस्तर पर सुला लें।
सूरज चौंक कर बोला- लेकिन यह कैसे हो सकता है.. इस तरह तो हमारी प्राइवेसी खत्म हो जाएगी यार.. और कैसे हम उसे अपने बिस्तर पर सुला सकते हैं?

मैं- यार कोई परेशानी नहीं होगी.. बस मैं बीच में लेट जाया करूँगी.. इसमें कौन सी कोई दिक्कत है यार.. बस उसे आज इधर ही सोने का कह देते हैं। इस तरह गर्मी में उसको सुलाना तो ठीक नहीं है ना..
सूरज मेरा फ़ैसला सुन कर चुप हो गया और कुछ सोचने लगा।

शाम को खाने के वक़्त हमने रश्मि को यह बता दिया। उसने बहुत इन्कार किया.. लेकिन मैंने उसकी कोई भी बात सुनने से इन्कार कर दिया और आख़िर रश्मि को मेरी बात माननी ही पड़ी।
रात हुई तो मैं और सूरज अपने कमरे में आकर लेट गए.. एसी चल रहा था और कमरा काफी ठंडा हो रहा था।

थोड़ी देर तक पढ़ने के बाद रश्मि भी आ गई.. मैंने कमरे में जलता हुआ नाईट बल्व भी बंद कर दिया और अब कमरे में घुप्प अँधेरा था। कमरे में सिर्फ़ एसी की जगमगाते हुए नंबर्स की ही रोशनी हो रही थी।

रश्मि हमारे बिस्तर के पास आई तो मैंने थोड़ा सा और सूरज की तरफ सरक़ कर रश्मि के लिए और भी जगह बनाई और वो झिझकते हुए मेरे साथ लेट गई।

अब मेरी एक तरफ मेरा पति सो रहा था और दूसरी तरफ उसकी बहन.. यानि मैं दोनों बहन-भाई के दरम्यान लेटी हुई थी।

सूरज की आदत थी कि वो मेरे साथ चिपक कर मुझे अपनी बाँहों में समेट कर सोता था।
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अब जब रश्मि कमरे में आई तो सूरज सो चुका हुआ था और मेरी करवट दूसरी तरफ थी.. लेकिन वो पीछे से मुझे चिपका हुआ था।
जैसे ही रश्मि की नज़र हम दोनों पर इस हालत में पड़ी.. तो उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गई।

मैं भी उसकी तरफ देख कर मुस्कराई और उसे चुप करके अपने पास लेटने का इशारा किया। वो खामोशी से मेरे साथ सीधी ही लेट गई।
मैंने आहिस्ता से उसके कान में कहा- अरे यार कुछ फील ना करना.. तुम्हारे भैया की मेरे साथ ऐसे ही चिपक कर सोने की आदत है.. बहुत चिपकू हैं तेरे भैया..

मेरी बात सुन कर रश्मि भी मुस्कराने लगी। मैंने अपनी बाज़ू उठाई और रश्मि के पेट पर रख कर उसे एक झटके से थोड़ा और अपनी करीब खींच लिया।

इस तरह वो मेरे साथ चिपक गई थी लेकिन साथ ही सूरज का हाथ भी उसके जिस्म से टच हो रहा था।

सूरज तो सो रहा था.. लेकिन उसकी बहन को ज़रूर उसके हाथ अपनी कमर की साइड पर महसूस हो रहा था.. जिसकी वजह से वो थोड़ा सा बैचेन सी हो रही थी। लेकिन फिर भी वो आराम से लेटी रही.. क्योंकि मैंने उसके जिस्म पर से अपना हाथ नहीं हटाया था।

अब पोजीशन यह थी कि सूरज मेरे साथ चिपका हुआ था और मैं उसकी बहन के साथ चिपक कर सोने लगी थी।

मैंने आहिस्ता से दोबारा उसके कान के क़रीब अपनी होंठ लिए. जाकर कहा- शर्मा क्यों रही हो.. कल को तुम्हें भी तो ऐसी ही सोना है ना..
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रश्मि ने चौंक कर मेरी तरफ देखा तो मैंने उसके गोरे-गोरे गाल की एक पप्पी ली और बोली- हाँ.. तो क्या तुम अपने पति के साथ चिपक कर नहीं सोया करोगी क्या?
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मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई और अपनी आँखें बंद कर लीं।

एसी की ठंडी-ठंडी हवा में कुछ ही देर में हम सबकी आँख लग गई। मैंने भी करवट ली और अपने पति के साथ चिपक कर एक बाज़ू उसकी ऊपर डाल कर सो गई।
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आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज तो सो रहा था.. लेकिन उसकी बहन को ज़रूर उसके हाथ अपनी कमर की साइड पर महसूस हो रहा था.. जिसकी वजह से वो थोड़ा सा बैचेन सी हो रही थी। लेकिन फिर भी वो आराम से लेटी रही.. क्योंकि मैंने उसके जिस्म पर से अपना हाथ नहीं हटाया था।

अब पोजीशन यह थी कि सूरज मेरे साथ चिपका हुआ था और मैं उसकी बहन के साथ चिपक कर सोने लगी थी।

मैंने आहिस्ता से दोबारा उसके कान के क़रीब अपनी होंठ लिए. जाकर कहा- शर्मा क्यों रही हो.. कल को तुम्हें भी तो ऐसी ही सोना है ना..

रश्मि ने चौंक कर मेरी तरफ देखा तो मैंने उसके गोरे-गोरे गाल की एक पप्पी ली और बोली- हाँ.. तो क्या तुम अपने पति के साथ चिपक कर नहीं सोया करोगी क्या?
मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई और अपनी आँखें बंद कर लीं।

एसी की ठंडी-ठंडी हवा में कुछ ही देर में हम सबकी आँख लग गई। मैंने भी करवट ली और अपने पति के साथ चिपक कर एक बाज़ू उसकी ऊपर डाल कर सो गई।
अब आगे..[/color]
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बहुत सुबह जब मेरी आँख खुली तो हमारी हालत यह थी कि मैं रश्मि की तरफ मुँह करके लेटी हुई थी।[/color]
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[color=rgb(44,]मेरा एक हाथ उसके सीने पर था। उसकी चूचियाँ मेरी बाज़ू के नीचे थीं। सूरज का बाज़ू मेरे ऊपर से होकर मेरी चूची को थामे हुए था।[/color]
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[color=rgb(44,]उसकी एक टाँग मेरी टाँगों के ऊपर से गुज़र रही थी और रश्मि की टाँग पर पहुँची हुई थी।[/color]
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इस हालत को देख कर मैं मुस्करा दी.. दोनों बहन-भाई अभी तक सोए हुए थे। कमरे से बाहर हल्की-हल्की रोशनी हो रही थी.. अभी लेकिन दिन नहीं चढ़ा था।

मेरी नींद टूट चुकी थी.. मैंने आहिस्ता से अपने हाथ को हरकत दी और सोई हुई रश्मि का एक मुम्मा अपनी हाथ में ले लिया.. उसे आहिस्ता से सहलाने लगी।[/color]
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[color=rgb(44,]रश्मि ने नीचे से ब्रा भी पहनी हुई थी उसकी चूची बहुत ही सॉलिड लग रही थी। आहिस्ता-आहिस्ता मैं उसे सहलाने और दबाने लगी। उसकी चूची को दबाना मुझे अच्छा लग रहा था।
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उसका खूबसूरत गोरा-चिट्टा चेहरा मेरी आँखों के सामने और मेरे होंठों के बहुत ही क़रीब था। मैं ज्यादा देर तक खुद पर कंट्रोल ना कर सकी और उसकी चिकने गाल को एक किस कर लिया।
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मेरे जागने के साथ ही मेरे अन्दर का शैतान भी जाग चुका था.. मुझे एक शैतानी ख्याल आया और साथ ही मेरी आँखें कमरे के उस अँधेरे में भी चमक उठीं।
मैंने एक नज़र रश्मि के चेहरे पर डाली.. वो सो रही थी। सूरज के सोने का तो उसके खर्राटों से ही कन्फर्म हो रहा था।

अब मैंने अपनी चूचियों पर लटक रहा सूरज का हाथ अपने हाथ में लेकर उठाया[/color]
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[color=rgb(44,]और बहुत ही आहिस्ता से उसे रश्मि की चूची पर रख दिया.. हाथ तो मैंने सूरज का रखा था.. रश्मि की चूची पर.. लेकिन इस चीज़ के मजे की वजह से सिसकारी मेरी मुँह से निकल गई "'सस्स्स्स्स्.'
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सूरज का हाथ रश्मि की चूची पर रखने के बाद मैंने फ़ौरन ही रश्मि के चेहरे की तरफ देखा.. लेकिन वो बेख़बर सो रही थी।
सूरज का हाथ भी अपनी बहन की चूची के ऊपर बिल्कुल सटा हुआ था। उस बेचारे को तो पता भी नहीं था कि उसके हाथ में उसके ख्वाबों की ताबीर मौजूद है।
मैं धीरे से मुस्करा दी..
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अब मैंने अपना हाथ सूरज के हाथ के ऊपर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसके हाथ को रश्मि की चूची के ऊपर फेरने लगी।
यह खेल मैं ज्यादा देर तक ना खेल सकी क्योंकि एक बार फिर मेरी आँख लग गई।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो उस वक़्त सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली हुई थी और मैं उसकी कमर के साथ उसी की तरफ मुँह करके उससे चिपक कर लेटी हुई थी.. मेरा बाज़ू उसके ऊपर था।
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रश्मि उठ कर जा चुकी हुई थी। मैं सीधी होकर लेट गई और रात जो कुछ हुआ.. उसके बारे में सोचने लगी।
मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कराहट फैली हुई थी।

इतनी में रश्मि ट्रे में चाय के तीन कप ले आई।
उसे देख कर मैं मुस्कुराई और वो मेरे पास ही बिस्तर पर लेटते हुए बोली- भाभी आप तो भैया के साथ चिपक कर बहुत ही बेशर्मी के साथ सोती हो.. सुबह भी आप उनके साथ चिपकी हुई थीं।

मैंने उसे आँख मारी और बोली- सारी रात तो तेरा भाई तेरे साथ चिपका रहा है.. थोड़ी देर के लिए मैंने चिपक लिया तो क्या हो गया यार?
मेरी बात सुन कर वो हँसने लगी। फिर मैंने सूरज को भी उठाया और हम तीनों ने चाय ली और गप-शप भी करते रहे।

ऐसे ही इसी रुटीन में 3-4 दिन गुज़र गए। रात को रश्मि हमारे ही कमरे में हमारे बिस्तर पर हमारे साथ सोने लगी।

एक रात जब रश्मि लेटने के लिए आई.. तो हम दोनों भी अभी जाग ही रहे थे।

हम तीनों लेट कर बातें करने लगे। थोड़ी ही देर गुज़री कि मैंने करवट बदली और सूरज की तरफ मुँह करके लेट गई और साथ ही उसके ऊपर अपना बाज़ू डालती हुए उसे हग कर लिया।
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सूरज आहिस्ता से बोला- यार रश्मि है, तेरे पीछे लेटी हुई है।

लेकिन मैंने उसका ख्याल किए बिना ही अपनी टाँग भी उसके ऊपर रखी और उससे लिपटते हुए बोली- कुछ नहीं होता.. उसे क्या पता.. वो तो अभी बच्ची है।

मैंने मुड़ कर रश्मि की तरफ देखा तो उसकी चेहरे पर शर्मीली सी मुस्कराहट थी।
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कुछ देर के बाद मैंने रश्मि की तरफ अपना मुँह किया और उसे हग कर लिया और बोली- सॉरी रश्मि.. तुमने माइंड तो नहीं किया ना?वो मुस्करा दी और बोली- नहीं भाभी इट्स ओके..

मैंने सूरज का भी हाथ खींचा और अपने ऊपर रख लिया।
अब वो पीछे से मुझे हग किए हुए था [/color]
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[color=rgb(44,]और मैंने सीधी लेटी हुई रश्मि को हग किया हुआ था, सूरज का हाथ रश्मि के पेट को छू रहा था।
मैंने महसूस किया कि रश्मि को अपने भाई का हाथ थोड़ा बेचैन कर रहा है।[/color]
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[color=rgb(44,]मुझे एक शरारत सूझी.. मैंने सूरज का हाथ पकड़ कर रश्मि के पेट पर रखा और बोली- देखो सूरज रश्मि का पेट कितना सपाट है.. और मेरा पेट कितना मोटा हो गया है.. देखो रश्मि इसे फील करके..

मेरी इस हरकत से दोनों बहन-भाई ही चौंक पड़े..[/color]
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[color=rgb(44,]लेकिन मैंने सूरज को हाथ हटाने का मौका दिए बिना ही उसके हाथ को रश्मि के पेट पर फेरना शुरू कर दिया।
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रश्मि का चेहरा शरम से सुर्ख हो गया था। सूरज का भी मुझे पता था कि वो ऊपर से तो संकोच दिखा रहा है.. लेकिन अन्दर से वो अपनी बहन के पेट को छूना ज़रूर चाहता है।
लेकिन कुछ समय के बाद मैंने सूरज के हाथ पर से अपना हाथ हटाया तो फिर भी सूरज ने कुछ देर तक के लिए अपना हाथ रश्मि के पेट पर ही पड़ा रहने दिया।

उस रात को मेरी आधी रात को आँख खुली तो मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत पड़ी। मैं अपनी जगह से उठी और उन दोनों बहन-भाई के बीच में से निकली और उठ कर वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापिस आई तो अचानक ही मेरे ज़हन में एक ख्याल आया। मैंने रश्मि को देखा.. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई सूरज के क़रीब आ गई।
मैं मुस्कराई और रश्मि को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।

अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.. उसका इंतज़ार करना था।[/color]
 
[color=rgb(255,]अपडेट 14

आपने अभी तक पढ़ा..
उस रात को मेरी आधी रात को आँख खुली तो मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत पड़ी। मैं अपनी जगह से उठी और उन दोनों बहन-भाई के बीच में से निकली और उठ कर वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापिस आई तो अचानक ही मेरे ज़हन में एक ख्याल आया। मैंने रश्मि को देखा.. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई सूरज के क़रीब आ गई।

मैं मुस्कराई और रश्मि को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।
अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.. उसका इंतज़ार करना था।

अब आगे..[/color]
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थोड़ी देर के बाद वो ही हुआ जिसका अन्दाजा था.. सूरज ने करवट बदली और रश्मि की तरफ मुँह कर लिया। लेकिन उसे नहीं पता था कि वहाँ पर मैं नहीं.. बल्कि उसकी अपनी बहन रश्मि लेटी हुई है। इसलिए उसने अपनी नींद में ही आदत के मुताबिक़ ही अपना बाज़ू रश्मि के ऊपर डाला और उसे बाँहों में भरते हुए अपने क़रीब खींच लिया.. जैसे कि वहाँ पर रश्मि नहीं बल्कि मैं हूँ।[/color]
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मैं धीरे से मुस्कराई और रश्मि को थोड़ा और आगे को पुश कर दिया।
अब रश्मि की चूचियाँ सूरज के सीने के साथ चिपक गई थीं लेकिन अभी तक दोनों बहन-भाई नींद में ही थे अगरचे दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
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मैंने अपना हाथ रश्मि के ऊपर से आगे बढ़ाया और सूरज के पजामे के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी।
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मैं सूरज के लंड को खड़ा करना चाहती थी और नींद में ही सूरज का लंड आहिस्ता आहिस्ता खड़ा होने लगा।
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जैसे ही सूरज का लंड खड़ा हुआ.. तो उसने अपनी एक टाँग भी रश्मि की जाँघों के ऊपर डाली और अपना लंड उसकी जाँघों के दरम्यान घुसाते हुए उससे चिपक गया।

मैं मुस्कराई और अपना हाथ पीछे खींच लिया। मेरा काम काफ़ी हद तक हो चुका था।
सूरज का इस तरह से रश्मि को अपने साथ चिपकाने और दबाने की वजह से रश्मि की आँख खुल गई।

जैसे ही वो थोड़ा सा कसमसाई तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और थोड़ी सी आँख खोल कर उसे देखने लगी।

रश्मि ने जल्दी से करवट ली और सीधी होकर मेरी तरफ देखने लगी कि यह कैसे हुआ है कि वो मेरी जगह पर है। लेकिन मैं सोती हुई बन गई।

वो हैरत से मेरी तरफ देख रही थी.. फिर उसने आहिस्ता से अपने भाई का हाथ अपने जिस्म पर से उठाया और पीछे कर दिया। अब वो बिल्कुल सीधी लेटी हुई थी और थोड़ी सी कन्फ्यूज़ लग रही थी। सूरज के खर्राटों की आवाज़ अभी भी आ रही थी।

दोबारा थोड़ी देर में वो ही हुआ जिसकी सूरज को आदत पड़ी हुई थी। उसने दोबारा अपना हाथ फैलाया और रश्मि के सीने पर रख कर इस बार उसकी छोटी सी चूची को अपनी हाथ में ले लिया। रश्मि ने घबरा कर पहले सूरज की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ.. लेकिन जब उसे तसल्ली हो गई कि हम दोनों ही सो रहे हैं और किसी को भी होश नहीं है।

रश्मि की चूची के ऊपर उसके भाई का हाथ था.. जिसने मुठ्ठी में अपनी बहन की चूची को लिया हुआ था। रश्मि ने आहिस्ता से अपना हाथ अपने भाई के हाथ पर रखा और उसे पीछे को हटाने लगी। एक लम्हे के लिए यूँ अपनी चूचियों पर किसी का टच उसे भी अच्छा ही लगा था.. लेकिन फिर उसने अपने भाई का हाथ हटा दिया।

लेकिन अभी एक मुसीबत और भी तो थी ना.. सूरज का अकड़ा हुआ लंड उसकी जाँघों से लड़ रहा था। रश्मि थोड़ी सी मेरी तरफ सरकी और मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई.. मुझे थोड़ी मायूसी हुई।

अब रश्मि का रुख़ मेरी तरफ था। उसने अपना बाज़ू मेरे पेट पर रखा और मुझे अपने आगोश में लेकर के लेट गई। लेकिन अगले ही लम्हे वो उछल ही पड़ी। मैं भी हैरान हुई और फिर थोड़ा सा देखा.. तो सूरज अपनी नींद में अपनी टाँग रश्मि के चूतड़ों के ऊपर ला चुका हुआ था और ज़ाहिर है कि उसका लंड पीछे से आकर कर रश्मि की गाण्ड में घुस गया हुआ था। जैसे कि वो मेरी गाण्ड में पीछे से घुसा देता था।

अभी भी उसे यही पता था कि वो अपनी बीवी के साथ ही है.. क्योंकि अगर उसे पता चल जाता कि यह मैं नहीं.. उसकी बहन है.. तो वो ज़रूर पीछे हो चुका होता।

मैंने देखा कि मेरे पेट के ऊपर रखा हुआ रश्मि का हाथ पीछे को गया.. तो मेरी चूत ही जैसे पानी छोड़ गई।

ज़ाहिर है कि रश्मि ने पीछे हाथ ले जाकर अपने भाई का लंड पीछे को करने की कोशिश की थी.. लेकिन उसका हाथ काफ़ी देर तक वापिस नहीं आया था।
शायद वो अपने भाई के लंड को फील कर रही थी।

फिर उसने अपना हाथ वापिस आगे किया और मेरे पेट पर रख कर मुझे हिलाते हुए आवाज़ देने लगी- भाभी.. भाभी.. उठो मैं रश्मि..
मैंने जैसे नींद में आँखें खोलीं और बोली- हाँ.. क्या बात है.. इतनी रात को क्यों जाग रही हो?
वो बोली- भाभी.. यह मैं आपकी जगह पर कैसे आ गई हूँ?

मैंने अब आँखें खोलीं और बोली- अरे यार मैं बाथरूम में गई थी.. वापिस आई तो तुम घूमती हुई मेरी जगह पर पहुँची हुई थीं.. तो मैं यहीं पर तुम्हारी जगह पर लेट गई।
वो बोली- अच्छा भाभी.. चलो आप वापिस आओ अपनी जगह पर..

मैंने नींद में होने की एक्टिंग ही करते हुए दूसरी तरफ करवट ली और बोली- सो जा यार.. क्यों मेरी भी नींद खराब कर रही हो।

रश्मि बेबस होकर वहीं लेटी रह गई। लेकिन अब वह मेरे साथ और भी चिपक गई ताकि उसके भाई से उसका फासला हो जाए।

फिर मैंने रश्मि को सीधी होते हुए महसूस किया। लेकिन अगले ही लम्हे मुझे अपनी कमर के पास सूरज का हाथ महसूस हुआ। मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.. क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।

थोड़ी ही देर में मुझे रश्मि की आवाज़ सुनाई दी- भैया. उठो जरा.. यह मैं हूँ.. भाभी नहीं हैं..
फिर मुझे सूरज की बौखलाई सी आवाज़ सुनाई दी- अरे तू यहाँ कैसे आ गई.. और तेरी भाभी कहाँ है?
रश्मि आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।
फिर सूरज की आवाज़ आई- सॉरी रश्मि.. मैं समझा था कि काजल है।

इसके साथ ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली और दोबारा से सोने लगा। लेकिन मैं जानती थी कि दोनों बहन-भाई को काफ़ी देर तक नींद आने वाली नहीं थी।
मुझे यह भी पता था कि अब कुछ और नहीं होगा.. इसलिए मैंने भी अपनी आँखें मूँदीं और सो गई।
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[color=rgb(255,]अपडेट 15

आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि बेबस होकर वहीं लेटी रह गई। लेकिन अब वह मेरे साथ और भी चिपक गई ताकि उसके भाई से उसका फासला हो जाए।

फिर मैंने रश्मि को सीधी होते हुए महसूस किया। लेकिन अगले ही लम्हे मुझे अपनी कमर के पास सूरज का हाथ महसूस हुआ। मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.. क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।

थोड़ी ही देर में मुझे रश्मि की आवाज़ सुनाई दी- भैया. उठो जरा.. यह मैं हूँ.. भाभी नहीं हैं..
फिर मुझे सूरज की बौखलाई सी आवाज़ सुनाई दी- अरे तू यहाँ कैसे आ गई.. और तेरी भाभी कहाँ है?
रश्मि आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।
फिर सूरज की आवाज़ आई- सॉरी रश्मि.. मैं समझा था कि काजल है।

इसके साथ ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली और दोबारा से सोने लगा। लेकिन मैं जानती थी कि दोनों बहन-भाई को काफ़ी देर तक नींद आने वाली नहीं थी।
मुझे यह भी पता था कि अब कुछ और नहीं होगा.. इसलिए मैंने भी अपनी आँखें मूँदीं और सो गई।
अब आगे..[/color]
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सुबह जब मेरी आँख खुलीं तो दोनों बहन-भाई पहले ही उठ चुके हुए थे। मैं भी उठ कर बाहर आई और नाश्ता तैयार करने लगी।
जब मैंने नाश्ता टेबल पर लगाया और दोनों बहन-भाई को बुलाया तो मैंने महसूस किया कि वो दोनों एक-दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे।
रश्मि के चेहरे पर शर्म की लाली थी.. उसकी नजरें शरम से नीचे झुकी हुई थीं और सूरज भी अपनी नजरें चुरा रहा था और शर्मिंदा सा लग रहा था।
थोड़ी ही देर में वो दोनों घर से चले गए।

सूरज दोपहर में ही घर आ गए, उनके दफ्तर में किसी कारण से छुट्टी हो गई थी..
कुछ देर बातचीत होने के बाद सूरज कमरे में आराम करने चले गए।

मैंने और रश्मि ने भी इस गरम दोपहर में एसी में सोने का सोचा और मैं और रश्मि बिस्तर पर आकर लेट गई पर मुझे नींद नहीं आने वाली थी तो मैंने सूरज की तरफ देखा, वो आँखें मूंदे लेटे हुए थे।

फिर मैंने रश्मि की ओर देखा, उसकी आँखें भी बंद हो गई थीं। मुझे नहीं पता था कि वो सो रही है या जाग रही है लेकिन एक बात पक्का थी कि सूरज अभी तक जाग रहा था।
मैं भी आँख बन्द करके सोने का ड्रामा करने लगी..

तभी मैंने देखा कि सूरज ने अपना हाथ मेरे ऊपर से होता हुआ रश्मि की नंगी बाज़ू के ऊपर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी बाज़ू को सहलाने लगा।
मेरी पीठ सूरज की तरफ ही थी.. इसलिए मुझे उसका लंड अकड़ता हुआ महसूस हो रहा था.. जो कि मेरी गाण्ड में चुभ रहा था।

अचानक ही रश्मि ने करवट बदली और दूसरी तरफ मुँह करके लेट गई। सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया.. लेकिन ज्यादा देर तक सूरज खुद को ना रोक सका।

अब रश्मि की कमर हमारी तरफ थी, उसकी टॉप के नीचे पहनी हुई उसकी काली ब्रेजियर साफ़ नज़र आ रही थी।
थोड़ी देर इन्तजार करने के बाद सूरज ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी एक उंगली रश्मि की ब्रेजियर के हुक पर फेरने लगा।
यह सब देख कर मेरी चूत गीली होती जा रही थी।
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सूरज रश्मि की ब्रेजियर के हुक्स और स्ट्रेप्स पर अपनी ऊँगली फेरने लगा और धीरे-धीरे उनको महसूस कर रहा था।
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सूरज का खड़ा हुआ लंड पीछे से मेरी गाण्ड में घुस रहा था। अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं सूरज को थोड़ा और तड़फाना चाहती थी और उसे यहीं तक ही रोक लेना चाहती थी इसलिए मैंने नींद का नाटक ही करते हुए करवट ली और सूरज से लिपट गई।
अब मैं सूरज को आवाज करते हुए चूमने लगी..[/color]
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[color=rgb(44,]सूरज भी अब जल्दी से सीधा होकर सम्भल कर लेट गया।

तभी रश्मि उठी और कमरे से बाहर निकल गई जिससे मुझे समझ आ गया कि ये भी जागते हुए ही सूरज का हाथ महसूस कर रही थी।
कुछ देर बाद में उठने के बाद मैं जब रसोई में गई तो रश्मि भी वहीं थी।
मुझे देख कर बोली- भाभी यह आप कमरे में क्या हरकतें कर रही थीं?
मतलब अब वो ये जाहिर कर रही थी या शायद उसे नहीं मालूम था कि उसकी ब्रा में कौन ऊँगली कर रहा था।

मैंने भी हँसते हुए उसकी बात को घुमा दिया और बोली- मैं कर रही थी या तुम्हारे भैया.. वो ही तो मुझे तंग कर रहे थे।
मैंने जानबूझ कर ऐसी बात बोली ताकि यह साफ़ हो सके कि वो किसके बारे में ये सब कह रही थी।

रश्मि भी समझ गई और उसने भी बात को घुमाते हुए थोड़ा शरमाती हुए बोली- लेकिन आपको इतना शोर तो नहीं मचाना चाहिए था ना..

मैं हँसने लगी और अब मैंने भी बात को अपने ऊपर ही लेने के इरादे से कहा- यार तुझे क्या पता.. मियाँ-बीवी में इस तरह के खेल चलते ही रहते हैं.. ऐसे ना करो तो ज़िंदगी में मज़ा ही कहाँ आता है।
रश्मि- लेकिन भाभी.. आपको कुछ तो ख्याल करना चाहिए ना..

मैं हंस कर बोली- यार तेरे भैया ने ख्याल करने का मौका ही नहीं दिया.. इसलिए तो मैं चिल्ला रही थी और तुझे अपनी मदद के लिए बुला रही थी.. लेकिन तूने भी आकर मेरी कोई मदद नहीं की और वैसे ही भाग गई।
रश्मि शर्मा कर बोली- मैं भला क्या मदद कर सकती थी आपके.? आप दोनों मियां-बीवी का मामला है.. मैं क्यों बीच में रुकावट बनती।

हम दोनों हँसने लगे और फिर चाय बना कर रसोई से बाहर आ गए और हम तीनों चाय उसी बेडरूम में बैठ कर पीने लगे।

उस रात जब हम लोग सोने के लिए लेटे.. तो जल्दी ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ले ली और बोला- अब मैं सो रहा हूँ..
मैं भी खामोशी से रश्मि की तरफ करवट लेकर लेट गई।

थोड़ी देर हम दोनों ने बातचीत की और फिर हमारी भी आँख लग गई। अभी मेरी आँख लग ही रही थी कि कुछ पलों के बाद.. मुझे थोड़ी सी हलचल अपने पीछे महसूस हुई।
उसी के साथ.. सूरज का बाज़ू मेरे ऊपर आ गया। मैंने अपनी आँखें थोड़ी सी खोलीं तो देखा कि सूरज आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि के कन्धों पर हाथ फेर रहा था।

मैं मन्द मन्द मुस्करा दी और उसकी हरकतों को देखने लगी, नींद तो मेरी फ़ौरन ही गायब हो गई।

सूरज का हाथ आहिस्ता आहिस्ता फिसलता हुआ रश्मि के कंधे से नीचे को आने लगा। जैसे ही सूरज ने रश्मि की चूची को छुआ.. मेरी चूत में एक करेंट सा दौड़ गया।
बहुत ही आहिस्ता से सूरज ने अपना हाथ रश्मि की चूची पर रखा और कुछ देर तक अपना हाथ वैसे ही पड़ा रहने दिया। जब उसने देखा कि रश्मि के जिस्म में कोई हरकत नहीं हुई.. तो उसे यक़ीन हो गया कि वो सो रही है।

सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ को हरकत देते हुए अपनी बहन रश्मि की चूची को सहलाना शुरू कर दिया।
मेरी चूत यह मंज़र देख कर गीली होती जा रही थी कि एक भाई अपनी सोई हुई बहन की चूचियों को सहला रहा है।
मैं देख रही थी कि सूरज अपने पूरे हाथ में उसका पूरे का पूरा चीकू ले लिया और अब वो आहिस्ता-आहिस्ता उसे दबा रहा था।
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रश्मि की छोटी सी चूची उसकी मुठ्ठी में आराम से पूरी आ रही थी.. लेकिन रश्मि को शायद कोई होश नहीं था.. क्योंकि वो सोई हुई थी।
थोड़ी देर में सूरज का हाथ थोड़ा सा ऊपर को गया और उसने अपना हाथ रश्मि के सीने के नंगे हिस्से पर रख दिया और अपनी उंगली आहिस्ता आहिस्ता उसकी नंगी छाती पर गले के नीचे फेरने लगा।

मेरे पीछे सूरज अपनी कोहनी के बल उठ चुका हुआ था और बड़े आराम से अपनी बहन की चूचियों और जिस्म पर हाथ फेर रहा था।
कभी उसके हाथ अपनी बहन की चूचियों को सहलाने लगते और कभी उसके पेट के ऊपर हाथ फेरने लगता। फिर सूरज ने थोड़ा सा और ऊपर होकर मेरे ऊपर से झुकते हुए अपनी बहन के गाल पर एक किस कर ली,[/color]
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[color=rgb(44,]हाथ तो सूरज अपनी बहन की चूचियों और जिस्म पर घूम रहा था लेकिन वो अपना लंड मेरे अन्दर ठोकता जा रहा था।

मुझे भी इससे मज़ा ही आ रहा था।
वैसे भी पिछले कुछ रोज़ से मैं सूरज के साथ छेड़-छाड़ करके उसे उत्तेजित तो कर ही देती थी.. लेकिन उसे अपनी चूत दिए हुए मुझे 15 दिन से ऊपर हो चुके थे, इसलिए भी वो इतना बेक़ाबू हो रहा था।

रश्मि की चूची दबाते दबाते शायद सूरज ने जज़्बाती होकर कुछ ज्यादा ही मसक दिया था.. जिसकी वजह से रश्मि थोड़ा सा कसमासाई और फिर उसने मेरी तरफ करवट ले ली।

जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी तरफ मुँह कर करते हुए लेट गया।

तभी मैंने अपनी आँखें हल्की सी खोल कर देखा तो देखा कि रश्मि ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी आँखें पूरी खोल ली हैं और मेरी तरफ देख रही है।

फिर उसने थोड़ा सा ऊपर होकर अपने भाई की तरफ देखा और धीरे से मुस्करा कर फिर लेट गई, उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और आँखें खुली हुई थीं।
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मैं दिल ही दिल मैं सोच रही थी कि क्या रश्मि को भी पता था कि उसका भाई उसकी चूचियों को दबा रहा है।
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[color=rgb(255,]अपडेट 16

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि की चूची दबाते-दबाते शायद सूरज ने जज़्बाती होकर कुछ ज्यादा ही मसक दिया था.. जिसकी वजह से रश्मि थोड़ा सा कसमासाई और फिर उसने मेरी तरफ करवट ले ली।
जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी तरफ मुँह कर करते हुए लेट गया।

तभी मैंने अपनी आँखें हल्की सी खोल कर देखा तो देखा कि रश्मि ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी आँखें पूरी खोल ली हैं और मेरी तरफ देख रही है।
फिर उसने थोड़ा सा ऊपर होकर अपने भाई की तरफ देखा और धीरे से मुस्करा कर फिर लेट गई। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और आँखें खुली हुई थीं।
मैं दिल ही दिल मैं सोच रही थी कि क्या रश्मि को भी पता था कि उसका भाई उसकी चूचियों को दबा रहा है।
अब आगे..[/color]
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अगर ऐसा था तो उसने कोई ऐतराज़ क्यों नहीं किया और अगर उसने सब कुछ जानते हुए भी कोई ऐतराज़ नहीं किया तो फिर तो यह मेरी बहुत बड़ी कामयाबी थी कि मैं दोनों बहन-भाई को इतना क़रीब लाने में कामयाब हो गई थी और मैं अपनी इस कामयाबी पर दिल ही दिल में बहुत खुश हो रही थी।

अगली शाम रश्मि ने मेरी कहने पर एक मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट पहन ले. स्कर्ट उसके चूतड़ों को आधा ढांप रही थी लेकिन उसकी जाँघों की पूरी पूरी शेप और टाँगें बिल्कुल साफ़ दिख रही थीं।
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रश्मि बहुत ही सेक्सी लग रही थी.. जैसे ही सूरज ने उसे देखा तो उसकी चेहरे पर मुस्कराहट फैल गई।
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मेरी नज़रें उससे टकराईं तो रश्मि ने शर्मा कर अपना सिर झुका लिया। मैं देख रही थी कि जिधर-जिधर भी रश्मि जा रही थी.. सूरज की नजरें उसी के जिस्म पर रह रही थीं। ऊपर टाइट टी-शर्ट में उसकी चूचियाँ बिल्कुल फंसी हुई थीं और उसका गला भी थोड़ा डीप था.. जिसकी वजह से उसका खूबसूरत गोरा-चिकना सीना भी काफ़ी खुला सा नज़र आ रहा था।[/color]
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[color=rgb(44,]लेकिन चूचियाँ या क्लीवेज तो नहीं दिख सकता था। सोने के वक़्त तक भी रश्मि अपने जिस्म की जलवे बिखेरती रही और अपने भाई पर अपनी हुस्न की बिजलियाँ गिराती रही।

रोज़ की तरह आज भी सोने के लिए मैं और सूरज पहले ही कमरे में आ गए।
अब जो आग रश्मि ने अपने भाई के जिस्म और दिमाग में लगाई थी.. उसकी वजह से सूरज ने अन्दर आते ही मुझे खींचा और अपने सीने से लगा लिया।
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मैंने भी कोई रुकावट नहीं की और उसे और भी गर्म करने के लिए उससे लिपट गई और उसके किस का जवाब किस से देने लगी।
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नीचे मैंने उसके बरमूडा में हाथ डाला और उसका लंड पकड़ लिया.. जो धीरे-धीरे मेरे हाथ में फूलने लगा। मैं भी उसके लण्ड को अपने हाथ में दबाते हुए आगे-पीछे करते हुए और भी खड़ा करने लगी। इधर दूसरे हाथ से अपनी मखमली चुत सहलाने लगी।
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[color=rgb(44,]सूरज बोला- जान जल्दी से एक बार चोद लेने दो ना..
मैंने कहा- नहीं. अभी नहीं.. तुम्हारी बहन ने आ जाना है।
सूरज बोला- नहीं.. तुम थोड़ी देर के लिए सिटकनी लगा कर आओ।

मैंने उसके लण्ड को सहलाते हुए कहा- नहीं.. जब वो सो जाएगी.. तो तुम खामोशी से जो भी करना चाहो.. मेरे पीछे लेटे-लेटे कर लेना।
आख़िर में सूरज मान गया।

तभी दरवाज़ा खुला और रश्मि अन्दर आई.. तो उसे देख कर हम दोनों अलग हो गए। जैसे ही रश्मि बिस्तर के क़रीब आई.. तो मैं फ़ौरन ही उसकी जगह पर होकर लेट गई और बोली- रश्मि आज तुम बीच में सोओगी।

रश्मि चौंकी और हैरान होकर बोली- लेकिन क्यों भाभी?
सूरज भी हैरत से मेरी तरफ देख रहा था।
मैं मुस्कुराई और हँसते हुए बोली- तुम्हारे भैया.. मुझे बहुत तंग करते हैं.. इसलिए आज मैं इस तरफ सोऊँगी और तुमको बीच में सोना पड़ेगा।

रश्मि का चेहरा शर्म से लाल हो गया.. लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे घसीटा और उसे अपने और सूरज के बीच अपनी वाली जगह पर लिटा दिया।
रश्मि के चेहरे पर घबराहट के साथ शरम के आसार साफ़ नज़र आ रहे थे.. और वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैं मुस्करा कर बोली- थैंक्यू माय डियर ननद..

मैंने महसूस किया था कि सूरज के चेहरे पर पहले वाली मायूसी के बाद अब थोड़ी उत्तेजना आ गई थी।
आज इस नई स्थितियों की वजह से हम में से कोई भी बोल नहीं रहा था।

मैंने ही थोड़ी सी बातें कीं और उन दोनों ने 'हूँ.. हाँ..' में जवाब दिया।
फिर मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।

हमारा बिस्तर इतना बड़ा नहीं था कि हम सब लोग एक-दूसरे से दूर-दूर होकर सो सकें.. इसलिए रश्मि का जिस्म अपने भाई के जिस्म से टच कर रहा था।
मेरी देखते ही देखते रश्मि ने भी आँखें बंद कर लीं और शायद इस सारी सूरते-हाल को हज़म करने की कोशिश करते हुए सोने लगी।

लेकिन उसके जिस्म से टच होता हुआ उसके भाई का जिस्म भी उसे शायद बेचैन कर रहा था।

ज़ाहिर है कि मैं सो नहीं रही थी और सूरज के हरकत में आने का इन्तजार कर रही थी। कुछ ही देर गुज़री कि वो ही हुआ जिसका मुझे इन्तजार था।
सूरज ने अपनी बहन की तरफ करवट ली और आहिस्ता से अपना हाथ उठा कर रश्मि के पेट पर रख दिया।

मेरी नज़र फ़ौरन ही रश्मि के चेहरे की तरफ गई। मैंने महसूस किया कि उसके चेहरे के हाव-भाव एकदम से थोड़े से चेंज हो गए.. लेकिन फ़ौरन ही उसने दोबारा से अपनी चेहरे को सपाट कर लिया। अब वो खुद को संम्भालते हुए दोबारा से आँखें बंद करके पड़ी रही।

मेरे जिस्म के पास पड़े हुए उसके हाथ में मुझे थोड़ी सी हरकत सी भी फील हुई थी.. जैसे की एकदम किसी के छूने से वो उसका जिस्म काँप उठा हो।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा उठी।

सूरज का हाथ कुछ देर के लिए एक ही जगह पर रश्मि के पेट के ऊपर पड़ा रहा। फिर आहिस्ता आहिस्ता उसका हाथ हिलने लगा और उसने अपने हाथ को अपनी बहन के पेट के ऊपर हौले-हौले हरकत देते हुए उसके पेट को उसकी शर्ट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया।
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सूरज का हाथ आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन के पेट पर हरकत कर रहा था और उसके चेहरे के हाव-भाव बदल रहे थे.. लेकिन उसकी आँखें अभी भी बंद थीं।

पेट पर हाथ फेरने की बाद सूरज ने अपना हाथ थोड़ा सा नीचे लिए जाते हुए रश्मि की जांघ पर रख दिया। रश्मि की जाँघें एक दम रुई के माफिक नरम थी और सायद जांघ सहलाने में सूरज को मजा आ रहा था।
सूरज ने अपना हाथ आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर फिराना शुरू कर दिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
सूरज का हाथ नीचे उसके घुटनों तक जाता और फिर ऊपर को आ जाता। उसे अपनी बहन की जाँघों पर हाथ फेरने में शायद बहुत ही अच्छा लग रहा था।
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मैंने भी महसूस किया कि वो थोड़ा सा ऊपर को उठा और उसने बहुत ही आहिस्ता से रश्मि के गले की तरफ अपनी मुँह कर बढ़ाया और उसके गोरे-गोरे सुरहिदार गले को चूम लिया।[/color]
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[color=rgb(255,]अपडेट 17

आपने अभी तक पढ़ा..

सूरज ने अपना हाथ आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर फिराना शुरू कर दिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
सूरज का हाथ नीचे उसके घुटनों तक जाता और फिर ऊपर को आ जाता। उसे अपनी बहन की जाँघों पर हाथ फेरने में शायद बहुत ही अच्छा लग रहा था।

मैंने भी महसूस किया कि वो थोड़ा सा ऊपर को उठा और उसने बहुत ही आहिस्ता से रश्मि के गाल की तरफ अपनी मुँह कर बढ़ाया और उसके गोरे-गोरे गाल को चूम लिया।
अब आगे..[/color]
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मैं यह सब कुछ अपनी अधखुली आँखों से देख रही थी। एक भाई को इस तरह से अपनी बहन के जिस्म से मजे लेते हुए और उसे किस करते हुए देख कर मेरी अपनी चूत भी गीली हो रही थी।
अब मेरा ख्वाहिश हो रही थी कि जल्दी से सूरज अपनी बहन की चूत को छुए लेकिन मुझे लग रहा था कि वो इस हद तक जाने से डर रहा है।

सूरज ने थोड़ा सा ऊपर होकर अब मेरी तरफ देखा और फिर उसका हाथ अपने पजामे की ऊपर से ही अपने खड़े हुए लंड पर चला गया। उसने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को रश्मि की जांघों के साथ रगड़ने लगा।

मेरा दिल कर रहा था कि जल्दी से अपनी चूत को अपने हाथ से सहलाते हुए उसे ठंडा करना शुरू करूँ..[/color]
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[color=rgb(44,]लेकिन मैं सूरज के सामने खुद को एक्सपोज़ करके उसे शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी कि उसे पता चले कि उसकी बीवी को पता चल गया है कि वो अपनी ही सग़ी बहन को इस तरह से छू रहा है।

एक बात का मुझे थोड़ा-थोड़ा यक़ीन होता चला जा रहा था कि हो ना हो.. रश्मि भी जाग रही है और अपने भाई के अपने जिस्म पर टच करने का मज़ा ले रही है।
वो भी शायद अपनी झिझक और शर्म की वजह से ही उसे रोक नहीं पा रही थी।

जब रश्मि को अहसास हुआ कि उसका भाई हद से गुज़रता जा रहा है.. तो उसने इससे बचने के लिए एकदम अपना रुख़ बदला.. और मेरी तरफ करवट ले ली। अब उसने मेरे ऊपर अपनी बाँहें डाल लीं।

इस अचानक हुई हरकत से सूरज भी थोड़ा बौखला गया और फ़ौरन ही पीछे हट कर लेट गया।

लेकिन मुझे पता था कि इस वक़्त रश्मि के खूबसूरत चूतड़ सूरज के बिल्कुल सामने होंगे और उसके लिए खुद को रोकना मुश्किल होगा।
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उसे छूने से जैसे ही रश्मि ने मुझे हग किया.. तो मुझे उसका नर्म ओ मुलायम जिस्म इस क़दर प्यारा लगा कि मैंने भी फ़ौरन ही उसे हग कर लिया और खुद भी उससे चिपक गई।
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[color=rgb(44,]अब सूरज के लिए कुछ और कर पाना मुश्किल था.. शायद इसलिए उसने भी जल्दी से दूसरी तरफ करवट ले ली और जल्द ही सो गया।

अगले दिन जब मैं सुबह नाश्ता बना रही थी तो रश्मि रसोई में आई।
मैंने ऐसे ही उसे तंग करने के लिए कहा- रात को कब सोई थी तुम?

मेरी बात सुन कर रश्मि घबरा गई और थोड़ा हकलाकर बोली- भाभी. आपके साथ ही तो आँख लग गई थी मेरी.. कककक.. क्यों पूछ रही हो आप यह?
मैंने उसे आँख मारी और बोली- इसलिए पूछ रही हूँ कि तेरे भैया ने तुझे तो तंग नहीं किया रात को?

मेरी बात सुनते ही रश्मि के चेहरे का रंग ही उड़ गया और उसकी आँखें फैल गईं।
फिर वो बोली- भाभी भला मुझे भैया क्यों तंग करेंगे?

मैं मुस्कराई और उसके गोरे-गोरे चिकने लाल होते हुए गाल पर एक चुटकी लेते हुए बोली- इसलिए तो मैंने तुझे बीच में अपनी जगह पर सुलाया था.. मैं होती तेरी जगह.. तो सारी रात ही मुझे तंग करते रहते तेरे भैया..

रश्मि कुछ सोच मैं डूबी हुई थी जैसे याद कर रही हो कि कैसे उसके भाई ने रात को उसके जिस्म को टच किया था।[/color]
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[color=rgb(44,]मैंने उससे कहा- अरे किस सोच में डूब गई हो.. तैयारी करो.. कॉलेज नहीं जाना क्या?

मेरी बात सुन कर उसे तो जैसे मौका मिल गया तो वो फ़ौरन ही रसोई से भाग गई। नाश्ते की टेबल पर दोनों आए तो रश्मि की नजरें आज भी नीचे को झुकी हुई थीं और हमेशा की तरह सूरज की नज़र उसके जिस्म पर ही बहक रही थी।

रश्मि ने अपना कॉलेज का सफ़ेद यूनिफॉर्म पहना हुआ था और शर्ट के नीचे उसने ब्लैक ब्रेजियर पहन रखी थी। अभी उसने दुपट्टा नहीं लिया हुआ था।
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[color=rgb(44,]जब वो उठ कर रसोई की तरफ गई तो सूरज की नज़र फ़ौरन ही उसकी पीछे गई उसकी बैक पर उसकी ब्लैक ब्रा की स्ट्रेप्स और हुक्स पर गई.. जो बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी।
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सूरज की प्यासी नजरें देख कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जब वो दोनों बाइक पर जाने लगे.. तो मैं हमेशा की तरह उन दोनों को सी-ऑफ करने की लिए गेट पर ही थी।
मैंने महसूस किया कि रश्मि आज अपने भाई के पीछे बैठती हुई थोड़ा झिझक रही थी। ज़ाहिर है कि उसे याद आ गया था कि रात को उसका भाई उसके जिस्म को कैसे-कैसे छू रहा था।

मैं उन दोनों की हालत पर मुस्करा रही थी। फिर आख़िर रश्मि सूरज के पीछे बैठे और दोनों निकल गए।

दोपहर को सूरज से पहले ही रश्मि जल्दी कॉलेज से वापिस आ गई। आज मैंने सोच रखा था कि इसे इसके भाई की सामने कुछ और एक्सपोज़ करना है। इसलिए जैसे ही वो अपने कमरे में अपना यूनिफॉर्म चेंज करने की लिए जाने लगी.. तो मैंने उसको कहा- ठहरो.. मैं अभी आती हूँ।

मैं अपने कमरे में गई और उसके भाई का एक बरमूडा और अपनी एक स्लीबलैस टी-शर्ट उठा लाई और बोली- रश्मि.. आज से तुम घर में यह भी पहना करोगी.. देखो ना कितनी गर्मी है..
रश्मि ने हैरत से उस बरमूडा की तरफ देखा और बोली- भाभी मैं यह कैसे पहन सकती हूँ.. वो भी भैया की सामने।
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मैं बोली- अरे इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है.. देखो तो मैंने भी तो रात से यही पहना हुआ है और वैसे भी हमारे घर पर कौन से कोई मेहमान आते हैं जो हमें फिकर होगी।
रश्मि- लेकिन.. भाभीईई..

मैं- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.. बस मुझे नहीं पता.. अगर नहीं पहना ना मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़.. तो इसे फेंक दो सोफे पर.. और अपनी मर्ज़ी का पहन लो जो पहनना है.. लेकिन फिर मुझसे बात ना करना तुम..
यह कह कर मैं मुड़ी और रसोई की तरफ बढ़ी।
मैंने भावुक होते हुए अपना तीर चलाया और मेरी उम्मीद के मुताबिक़ मेरा तीर लगा भी ठीक निशाने पर..

रश्मि ने फ़ौरन ही आगे बढ़ कर मुझे पीछे से हग कर लिया और अपनी बाँहें मेरे गले में डाल कर पीछे से अपना मुँह आगे लाते हुए मेरे गाल को किस किया और बोली- मैं अपनी प्यारी सी भाभी को कैसे नाराज़ कर सकती हूँ.. अरे भाभी तुम कहो तो मैं कुछ भी नहीं पहनूंगी.. लेकिन तुम मुझसे नाराज़ ना होना।
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मैंने मुस्करा कर रश्मि की बालों में हाथ फेरा और बोली- यह हुई ना मेरी प्यारी सी ननद वाली बात.. सच में रश्मि तू तो बहुत ही प्यारी और मासूम है.. हाँ.. तू मेरी मासूम सी ननद है मेरी जान..
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मैं दिल ही दिल में अपने शैतानी खेल पर मुस्कराती हुई रसोई में आ गई और रश्मि चेंज करने के लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।[/color]
 
[color=rgb(255,]अपडेट 18

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि ने फ़ौरन ही आगे बढ़ कर मुझे पीछे से हग कर लिया और अपनी बाँहें मेरे गले में डाल कर पीछे से अपना मुँह आगे लाते हुए मेरे गाल को चूम लिया और बोली- मैं अपनी प्यारी सी भाभी को कैसे नाराज़ कर सकती हूँ.. अरे भाभी तुम कहो तुम कहो तो मैं कुछ भी नहीं पहनूंगी.. लेकिन तुम मुझसे नाराज़ ना होना।

मैंने मुस्करा कर रश्मि की बालों में हाथ फेरा और बोली- यह हुई ना मेरी प्यारी सी ननद वाली बात.. सच में रश्मि तू तो बहुत ही प्यारी और मासूम है.. हाँ.. तू मेरी मासूम सी ननद है मेरी जान..
मैं दिल ही दिल में अपने शैतानी खेल पर मुस्कराती हुई रसोई में आ गई और रश्मि चेंज करने के लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
अब आगे..[/color]
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कुछ देर के बाद रश्मि अपने कमरे से मेरा दिया हुआ कपड़े पहन कर मेरे पास रसोई में आई तो बहुत ही शर्मा रही थी। मैंने उसे देखा तो हमेशा की तरह उससे मज़ाक़ करने की बजाए उसको उत्साहित करने लगी कि तुम सच में बहुत ही प्यारी लग रही हो।
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रश्मि ने अपने भाई वाला जो बरमूडा पहना था.. वो उसके घुटनों तक आ रहा था.. उससे नीचे उसकी गोरी-गोरी टाँगें बिल्कुल नंगी थीं.. बिल्कुल ही साफ़ गोरी-गोरी चिकनी टाँगें जिन पर एक भी बाल नहीं था.. मतलब किसी को भी उसकी चिकनी टाँगें देखते साथ ही मज़ा आ जाए।
ऊपर से उसने मेरी स्लीवलैस शर्ट पहन ली थी, यह शर्ट उसको काफ़ी ढीली थी, उसकी दोनों बाँहें बिल्कुल नंगी थीं, बिल्कुल गोरे और चिकने कन्धों पर उसकी ब्रेजियर की तनियाँ एकदम साफ़ नज़र आ रही थीं।
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स्लीवलैस शर्ट होने की वजह से रश्मि ने प्लास्टिक की पारदर्शी स्ट्रेप्स वाली ब्रेजियर पहन ली थी। ताकि कम से कम नज़र आ सकें. लेकिन कन्धों पर सब मर्दों की नजरें तो ब्रा की स्ट्रेप्स पर ही होती है ना..
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शर्ट की स्ट्रेप्स तो चौड़ी थीं.. लेकिन फिर भी थोड़ी सी भी चलने-फिरने के साथ ही वो पीछे को हट जाती थीं और ब्रेजियर की स्ट्रेप्स नजर आने लगती थीं।
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मैंने बिना कुछ ज्यादा बात किए रश्मि को काम पर लगा दिया.. ताकि उसे भी कोई अहसास ना हो।

काम करते हुए रश्मि आहिस्ता से बोली- भाभी वो भैया.. मेरा मतलब है कि वो भैया नाराज़ हो गए तो.. मुझे ऐसी ड्रेस में देख कर.. मेरा मतलब था!

मैं- अरे पगली तू तो इतनी प्यारी लग रही है.. तो तेरा भाई तुझे देख कर क्यों नाराज़ होगा.. कोई भी भाई अपनी बहन पर नाराज़ नहीं होता।

शाम में जब सूरज घर आया तो खाने की टेबल पर पहुँचने तक उसकी मुलाक़ात रश्मि से नहीं हो सकी। सूरज टेबल पर बैठा था और जैसे ही रश्मि खाने की ट्रे लेकर आई तो सूरज की आँखें फटी की फटी रह गईं।
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(सूरज का रश्मि को देख ऐसे करने का भावना आया )
उसकी नजरें अपनी बहन की नंगी टाँगों पर जमी हुई थीं। जो कि उसके बरमूडा के नीचे बिल्कुल नंगी थीं।

मैं सूरज की नज़रों को ही देख रही थी लेकिन शो ऐसा ही कर रही थी। जैसे कि मैं उन लोगों को नहीं देख रही होऊँ।

रश्मि बुरी तरह से शर्मा रही थी और सूरज की नजरें न चाहते हुए भी अपनी बहन के जिस्म पर से नहीं हट पा रही थीं। कभी वो उसकी नंगी बाँहों को देखता और कभी चिकनी टाँगों को देखने लगता।
मैंने देखा कि रश्मि के कन्धों पर उसकी ब्रेजियर के स्ट्रेप्स भी साफ़ नज़र आ रहे हैं।जब रश्मि खाना परोसने के लिए झुकी उसको देख कर तो मेरी भी हालत खुसक गई ,
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हम दोनों पति पत्नी रश्मि को कहा जाने वाले नजर से देख रहे थे तो रश्मि को खाने के समय ऑक्वर्ड फ़ील हो रही थी,रश्मि ने बड़ी ही मुश्किल से खाना खाया.. मैं इधर-उधर की बातों से उसकी तवज्जो हटाने की कोशिश करती रही लेकिन वो अपनी ड्रेस में बहुत ही परेशानी महसूस कर रही थी।
खाने के बाद सूरज ने कुछ देर बैठ कर टीवी देखा.. रात हो रही थी तो वो अपने बेडरूम में सोने चला गया।

मैंने रसोई से सामान समेटा और फिर चाय बना कर मैंने और रश्मि ने पी। चाय पीने के बाद मैं उससे बोली- आओ एसी में सोने चलते हैं..

रश्मि ड्रेस चेंज करने की कहना चाहती थी लेकिन कह ना पाई और खामोशी से मेरे साथ हमारे बेडरूम में आ गई।

हम दोनों कमरे में आए तो सूरज सो रहा था.. उसकी हल्के-हल्के खर्राटे कमरे में गूँज रहे थे।
लेकिन मुझे शक़ था कि वो सो नहीं रहा होगा.. जाहीर है कि वो अपनी बहन के आने का इन्तजार कर रहा होगा।
कमरे में आकर मैंने दरवाजा बन्द किया और बिस्तर पर जाने की बजाए टॉयलेट में चली गई.. ताकि रश्मि बिस्तर पर आराम से लेट सके और कुछ दिमाग की उलझन से मुक्त हो सके।

थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से बाहर निकली तो रश्मि अपनी ही वाली तरफ को लेटी हुई थी। मैंने बिस्तर के क़रीब आकर उसे आगे को होने को कहा.. पहले तो वो चुप रही.. फिर आहिस्ता से अपने भैया की तरफ सरक़ गई।

मुझे खुशी इस बात की थी कि अगर वो कल रात जाग रही थी और उसे अपने भाई के हाथों से खुद के जिस्म को छूने का पता चला था.. तो उसके बावजूद भी उसने अपने भाई के साथ लेटना क़बूल कर लिया था। शायद उसे भी इस खेल में कुछ मज़ा आने लगा था।

ज़ाहिर है कि वो एक नौजवान झूबसूरत लड़की थी.. जिसे आज तक कभी भी किसी मर्द ने नहीं छुआ था और जब कोई उसे छू रहा था.. तो उसे उसका छूना अच्छा लग रहा था।

अब उसका बदन इस चीज़ को मानने के लिए तैयार नहीं था कि वो उसका भाई है.. तो यह गलत है।
लेकिन उसका दिमाग उसे अभी भी समझाता था.. जिसकी वजह से उसके अन्दर अभी भी थोड़ी झिझक बाकी थी।

दूसरी वजह उसकी उस झिझक का कारण मैं थी। उसके ख्याल में मुझे इन सब बातों कुछ भी एहसास नहीं था.. और अगर मुझे पता हो जाएगा.. तो ऐसा लगता था कि इस बात का मैं बहुत बुरा मान जाऊँगी.. कि वो मेरे पति के साथ जिस्मानी मजा लेना चाह रही है।

हालांकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सारा गेम मेरा ही था.. जिस पर वो दोनों बहन-भाई ना चाहते हुए भी आगे बढ़ रहे थे और एक-दूसरे के क़रीब आते जा रहे थे.. बिना यह सोचे समझे कि यह एक गुनाह है.. और गलत बात है।

सूरज दूसरी तरफ मुँह करके लेटा हुआ था और रश्मि बिल्कुल सीधी.. अपनी पीठ के बल लेटी हुई थी।
मैंने रश्मि की तरफ करवट ली और उससे बातें करने लगी। हम दोनों ने बरमूडा ही पहना हुआ था और दूसरी तरफ सूरज ने भी अपना शॉर्ट्स पहन रखा था, हम दोनों की नंगी टाँगें एक-दूसरे से टच हो रही थीं।

मैंने अपनी टाँग ऊपर करके रश्मि की टाँग पर रखी और उसकी टाँग को आहिस्ता-आहिस्ता सहलाते हुए बोली- रश्मि तुम्हारा जिस्म बहुत ही मुलायम है।
रश्मि शरमाई और बोली- भाभी आप का भी तो ऐसा ही है..
मैं- रश्मि जो भी लड़का तुम्हें हासिल करेगा ना.. वो बहुत ही लकी होगा..!
रश्मि शर्मा कर बोली- क्या मतलब भाभी?
मैं- अरे तेरे जैसे खूबसूरत लड़की जिसको अपने नीचे लिटाने को मिलेगी.. उसकी तो समझो कि लॉटरी ही निकल पड़ेगी।

रश्मि मेरी बात सुन कर शर्मा गई। मैं ऐसी बातें इसलिए कर रही थी ताकि अगर सूरज सो नहीं रहा है.. तो वो भी मेरी बातें सुन सके और मैं उसको उत्तेजित करने की लिए ऐसी बातें कर रही थी।
ऐसी उत्तेजित बातें करते समय मेरी खुद की चूत में रस निकलने लगा था।
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आपने अभी तक पढ़ा..
मैं- रश्मि जो भी लड़का तुम्हें हासिल करेगा ना.. वो बहुत ही लकी होगा..
रश्मि शर्मा कर बोली- क्या मतलब भाभी?
मैं- अरे तेरे जैसे खूबसूरत लड़की जिसको अपने नीचे लिटाने को मिलेगी.. उसकी तो समझो कि लॉटरी ही निकल पड़ेगी..

रश्मि मेरी बात सुन कर शर्मा गई। मैं ऐसी बातें इसलिए कर रही थी ताकि अगर सूरज सो नहीं रहा है.. तो वो भी मेरी बातें सुन सके और मैं उसको उत्तेजित करने की लिए ऐसी बातें कर रही थी।
ऐसी उत्तेजना भरी बातें करते समय मेरी खुद की चूत में रस निकलने लगा था।
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ऐसी ही थोड़ी देर तक बातें करने के बाद मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं.. जैसे कि मैं सो गई हूँ। काफ़ी देर तक खामोशी रही.. मुझे नींद भला कहा आने थी। थोड़ी सी आँख खोल कर मैंने देखा तो रश्मि की आँखें भी बंद थीं।
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ऐसी ही क़रीब-क़रीब एक घंटा गुज़र गया.. तो मुझे रश्मि की दूसरी तरफ सूरज हिलता हुआ महसूस हुआ। उसने जैसे नींद में ही करवट ली और सीधा अपनी बाज़ू और टांग को अपनी बहन के ऊपर रख दिया।

मैंने देखा की रश्मि ने फ़ौरन ही आहिस्ता से आँखें खोलीं और सबसे पहले अपने भाई की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देख कर मेरा पक्का किया कि मैं सो रही हूँ या जाग रही हूँ।
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अपनी तसल्ली करके रश्मि ने आराम से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं हैरान हुई कि उसने अपने भाई का बाज़ू या टांग हटाने की कोई कोशिश नहीं की। उसके भाई की बाज़ू उसकी चूचियों से बिल्कुल नीचे लगी पड़ी थी और टांग उसकी जाँघों पर थी।
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मैं समझ गई कि रश्मि भी आज मजे लेने के चक्कर में है।
अब मेरी तरह से रश्मि भी सोती हुई बनी हुई थी.. लेकिन उसे यह नहीं पता था कि मैं जाग रही हूँ।

कुछ ही देर गुज़ारने के बाद मुझे सूरज के हाथ में हल्की-हल्की हरकत महसूस हुई। सूरज का अपनी बहन के जिस्म के ऊपर रखा हुआ हाथ आहिस्ता आहिस्ता हरकत में आ रहा था।
उसने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ अपनी बहन की टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया।
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जब उसे महसूस हुआ कि उसकी बहन के जिस्म में कोई भी हरकत नहीं हो रही है.. तो उसको यक़ीन हो गया कि वो सो रही है.. अब उसकी हिम्मत बढ़ चली और उसके हाथ का रश्मि के सीने की पहाड़ियों पर चढ़ने का सफ़र शुरू हुआ।
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सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ से रश्मि की चूचियों के निचले हिस्से को छूना शुरू कर दिया। सूरज का हाथ अपनी बहन की चूचियों को नीचे से छू रहा था।
आहिस्ता आहिस्ता उसने अपने हाथ को हरकत देते हुए रश्मि की चूचियों की ऊपर रख दिया और हाथ ऊपर रख कर वहीं पर कुछ देर के लिए ठहर गया।
जैसे वो रश्मि की प्रतिक्रिया देखना चाह रहा हो।

मुझे मज़ा आ रहा था.. लेकिन उससे बढ़ कर रश्मि के संयम पर हैरत हो रही थी कि कैसे वो खामोश अपने चेहरे के हाव-भाव को कंट्रोल करके लेटी हुई है।

सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ को रश्मि की चूचियों पर गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया।
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एक भाई के हाथ के नीचे उसकी बहन की चूची देख कर मेरी तो अपनी चूत गीली होने लगी थी। मेरा दिल कर रहा था कि मैं अपने हाथ अपनी चूत पर ले जाऊँ और अपनी चूत को सहलाने लगूँ लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती थी।
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रश्मि ने जो शर्ट पहन रखी थी.. वो स्लीबलैस थी और उसका गला भी काफ़ी बड़ा था.. जिसमें उसकी सीने का काफ़ी हिस्सा साफ़ नंगा नज़र आता था।
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दोनों चूचियों पर हाथ फेरते हुए सूरज के हाथ आहिस्ता आहिस्ता रश्मि के नंगे सीने पर आ गए और उसने अपनी उंगलियों को अपनी बहन के नंगे और गोरे-गोरे उठे हुए सीने पर रख दिए।

अब आहिस्ता आहिस्ता वो अपना हाथ अपनी बहन के गले के नीचे छातियों पर फेरने लगा।

सूरज का हाथ आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि के सीने पर फिसलता हुआ मेरी तरफ को आने लगा और उसने अपना हाथ रश्मि की शर्ट की स्ट्रेप्स को नीचे को सरका दिया और फिर वापिस अपना हाथ ऊपर की तरफ ले गया।
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रश्मि के सीने पर हाथ फेरते हुए उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता नीचे को जाने लगा।
अब इस तरह लेटने की वजह से रश्मि की चूचियों का क्लीवेज भी साफ़ नज़र आ रहा था। सूरज ने अपनी एक उंगली उस खूबसूरत क्लीवेज में घुसेड़ दी और आहिस्ता आहिस्ता उसे आगे-पीछे करने लगा।
सूरज की एक टाँग अभी तक रश्मि की टाँगों पर ही थी।
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अपनी बहन की चूचियों की क्लीवेज में कुछ देर अपनी उंगली फेरने के बाद मेरे पति ने अपने हाथ की बाक़ी उंगलियां भी आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की टी-शर्ट के अन्दर को घुसेड़ना शुरू कीं और अपना पूरा हाथ रश्मि की चूचियों पर ले गया।

अभी शायद वो रश्मि की चूचियों पर उसकी ब्रा की ऊपर से ही हाथ फेर रहा था। उसका हाथ रश्मि की ब्रेजियर के ऊपर से ही उसकी चूचियों को छू रहा था।
सूरज के हाथ रश्मि की नंगी चूचियों को भी छू रहे थे.. जो कि उसकी ब्रा के आधे कप में से बाहर निकल रही थीं।

मेरी नज़र रश्मि के चेहरे की तरफ गई.. तो उसकी आँखें हल्की-हल्की सी हिल-डुल रही थीं.. जैसे की वो खुद को पूर सुकून में रखने की कोशिश कर रही हो।

उस अँधेरे कमरे में जहाँ सिर्फ़ एसी की जलते-बुझते नंबर्स की बहुत ही मद्धिम सी रोशनी फैली हुई थी। उस रोशनी में कोई भी किसी की चेहरे के हाव-भाव नहीं देख सकता था। किसी को नहीं पता था कि दूसरा जाग रहा है.. या सो रहा है।

हर कोई दूसरी को सोता हुआ ही समझ रहा था। हम तीनों के तीनों उस बिस्तर पर एक-दूसरे के क़रीब लेटे हुए भी जाग रहे थे लेकिन सूरज समझ रहा था कि मैं और रश्मि दोनों सो रहे हैं।

रश्मि मेरे सोए हुए होने की प्रार्थना कर रही थी और खुद भी सोने की एक्टिंग करते हुए अपने भाई को अपने जिस्म से खेलने का मौका दे रही थी।

ज्यादा देर तक अपना हाथ रश्मि की शर्ट की अन्दर रखे बिना ही सूरज ने अपना हाथ उसकी शर्ट से बाहर निकाला और फिर बिस्तर पर उठ कर बैठ गया।

मैंने फ़ौरन ही अपनी आँखें बंद कर लीं। चंद लम्हों के बाद मैंने देखा तो वो उठ कर बिस्तर के हमारे पैरों वाली साइड पर चला गया हुआ था और नीचे झुक कर आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन के गोरे-गोरे पैरों को चूमने लगा था।
वो रश्मि के पैरों को नीचे और ऊपर से चूम रहा था। उसके पैरों को चूमते हुए धीरे-धीरे उसकी टाँगों पर आ गया और उसकी चिकनी और गोरी टाँगों पर हाथ फेरने लगा।

फिर नीचे झुक कर अपने होंठ उसकी गोरी टाँगों पर रख दिए और उन मरमरी टाँगों को चूमने लगा।
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रश्मि की नंगी टाँगों के पास ही मेरी भी टाँगें थीं और वो भी नंगी थीं। सूरज ने एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली और फिर अपना दूसरा हाथ मेरी नंगी गोरी टाँग पर रख दिया।
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अब उसका एक हाथ मेरी टांग को भी सहला रहा था.. तो दूसरा अपनी बहन की टांग को सहला रहा था।
शायद वो दोनों को कंपेयर कर रहा था कि कौन ज्यादा चिकनी है.. उसकी बहन या उसकी बीवी..

रश्मि की टाँगों पर हाथ फिराता हुआ सूरज ऊपर को आ रहा था। अब उसका हाथ रश्मि के घुटनों तक पहुँच चुका था और फिर उसका हाथ ऊपर को सरका और उसने अपना हाथ अपनी बहन की नंगी जांघ पर रख दिया।
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जैसे ही सूरज के हाथ ने रश्मि की नंगी जाँघों को छुआ.. तो मेरी चूत ने तो फ़ौरन ही पानी छोड़ दिया।
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[color=rgb(44,]मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मैं इतनी जल्दी और इतनी आसानी से अभी सूरज को रश्मि की चूत तक पहुँचने देना चाहती थी।[/color]
 
[color=rgb(255,]अपडेट 20

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि की टाँगों पर हाथ फिराता हुआ सूरज ऊपर को आ रहा था। अब उसका हाथ रश्मि के घुटनों तक पहुँच चुका था और फिर उसका हाथ ऊपर को सरका और उसने अपना हाथ अपनी बहन की नंगी जांघ पर रख दिया।
जैसे ही सूरज के हाथ ने रश्मि की नंगी जाँघों को छुआ.. तो मेरी चूत ने तो फ़ौरन ही पानी छोड़ दिया।
मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मैं इतनी जल्दी और इतनी आसानी से अभी सूरज को रश्मि की चूत तक पहुँचने देना चाहती थी।
अब आगे..[/color]
[color=rgb(44,]
मैंने थोड़ी सी हरकत की तो सूरज फ़ौरन ही पीछे हट कर लेट गया।
मैं बड़े ही आराम से उठी जैसे नींद से जागी हूँ और आराम से बाथरूम की तरफ चल दी।
बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चूत को अच्छे से धोया.. जो बिल्कुल गीली हो गई थी,[/color]
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[color=rgb(44,]फिर मैंने बाहर निकलने से पहले थोड़ा सा छुप कर बाहर देखा.. तो सूरज थोड़ा सा उठ कर अपनी बहन की गालों को चूम रहा था और कभी उसकी होंठों को भी पी रहा था.. लेकिन साथ ही बार-बार बाथरूम की तरफ भी देख रहा था।[/color]
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[color=rgb(44,]मैंने बाथरूम में थोड़ा सा शोर किया और फिर दरवाज़ा खोल दिया.. लेकिन सूरज को अपनी जगह पर टिक जाने का पूरा मौका दे दिया।
फिर बाथरूम से वापिस आकर मैं अपनी जगह पर लेटने की बजाए सूरज की तरफ आ गई और उसके साथ लेटने की बजाए उसके ऊपर लेट गई क्योंकि उसके साथ लेटने के लिए जगह नहीं थी।
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मेरे ऊपर लेटने की वजह से सूरज ने नींद में होने का नाटक करते हुए आँखें खोलीं और बोला- हाँ क्या है?
मैंने बिना कुछ कहे उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूमने लगी।
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सूरज भी जो अब तक अपनी बहन के जिस्म से छेड़छाड़ करने से गरम हो चुका था.. उसने भी मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
मैं यह सब कुछ जानबूझ कर कर रही थी.. क्योंकि मुझे पता था कि रश्मि भी जाग रही है और वो यह सब देख रही होगी।
मुझे चूमते हुए और मेरी कमर और मेरी गाण्ड पर हाथ फेरते हुए सूरज मेरे कान में आहिस्ता से बोला- रश्मि जाग जाएगी।
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मैं अपने होंठ सूरज के रश्मि की साइड वाले कान की तरफ ले गई और थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोली- नहीं जानू, तुम्हारी बहन गहरी नींद में सो रही है.. वो सुबह से पहले नहीं उठेगी.. बस जल्दी से तुम मेरे जिस्म से अपनी प्यास बुझा लो..
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मैं ये सब इतनी ऊँची आवाज़ में कह रही थी.. ताकि रश्मि भी यह बात आसानी से सुन ले।

मैं नीचे को जाने लगी और सूरज की टाँगों के बीच आ गया। मैंने सूरज के शॉर्ट्स को नीचे खींचा और उसके अकड़े हुए लंड को अपने हाथ में ले लिया। मैंने सूरज की लंड की टोपी को चूम लिया[/color]
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[color=rgb(44,]और बोली- जानू.. तुम्हारा लंड तो पहले से ही तैयार है.. लगता है कि किसी हसीन और खूबसूरत लड़की की ख्वाब ही देख रहे थे?
सूरज मुस्कराया और एक नज़र रश्मि पर डाल कर बोला- हाँ..

मैंने सूरज की लंड की टोपी को ज़ुबान से चाटा और बोली- ख्वाब देखने की क्या ज़रूरत है.. जब तुम्हारी पास इतनी खूबसूरत चीज़ मौजूद है.. तो चढ़ जाते बस.. और चोद लेते.. तुम्हें किसी से इजाज़त लेने की तो ज़रूरत नहीं है ना..
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सूरज ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और बोला- क्या मतलब?
मैं मुस्कराई उसकी घबराहट देख कर और बोली- हाँ.. तो और क्या.. तुम्हारी बीवी हूँ.. और खूबसूरत भी हूँ.. तो दिल कर रहा था तो आकर चोद लेते मुझे..में अपने मुंह से उसका सुपड़ा निकाल किस का मुंह बनाते हुए आँख मार दी
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मेरी बात सुन कर सूरज ने सकून की साँस ली।
मेरा इशारा तो रश्मि की तरफ ही था.. लेकिन मैं अपनी बात को सम्भाल ले गई।

अब मैंने सूरज के लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। मैं पूरी तरीके से खुल कर सूरज के साथ सेक्स करना चाहती थी.. ताकि रश्मि को भी मालूम हो सके कि कैसे सेक्स करते हैं।
मेरी एक टाँग रश्मि के जिस्म से भी टच कर रही थी।
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मैं अब कोई भी कोशिश नहीं कर रही थी कि रश्मि को पता ना चले क्योंकि मुझे तो पहले से ही पता था कि रश्मि जाग रही है.. और सब कुछ देख भी रही है.. और महसूस भी कर रही है।

मैंने अच्छी तरह से अपने पति के लंड को भर-भर कर चाटा और फिर बिस्तर से नीचे उतर कर अपना बरमूडा और अपनी टी-शर्ट उतार दी।
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[color=rgb(44,]नीचे मैंने ना ब्रेजियर पहनी हुई थी और ना ही पैन्टी.. पूरी तरह से नंगी होकर मैं दोबारा से सूरज की ऊपर आ गई।
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सूरज ने मुझे बहुत रोका कि पूरे कपड़े ना उतारो.. लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी.. जबकि मुझे पता था कि रश्मि अपनी आँखें नहीं खोलेगी।

सूरज के ऊपर आकर मैंने अपनी चूत को सूरज के लंड के ऊपर रखा और धीरे-धीरे उसे अपने चूत में लेते हुए नीचे को बैठ गई।
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फिर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर-नीचे को होकर अपनी चूत चुदवाने लगी।
मैं आगे को झुकी और सूरज के गाल पर चुम्बन करने लगी।
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फिर मैं रश्मि की तरफ देखते हुए बोली- सूरज देखो.. तुम्हारी बहन सोती हुए में कितनी मासूम और खूबसूरत लग रही है।
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[color=rgb(44,]सूरज ने भी अपनी नज़र रश्मि के चेहरे पर जमा दी और अब बिना मेरी तरफ देखे हुए आहिस्ता आहिस्ता मुझे चोदने लगा।
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अब मैंने भी अपने मम्मों को सूरज के मुँह में देते हुए जरा तेज आवाज में सीत्कार करना शुरू कर दिया ताकि बगल में लेटी हुई मेरी ननद की बुर में चींटियाँ रेंगने लगें।
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'हाय.. जानू चूसो न मेरे मम्मों को.. आह्ह.. कितना मस्त चूसते हो और ओह.. तुम्हारा लौड़ा तो आज मेरे नीचे कुछ ज्यादा ही मजा दे रहा है.. मेरी जान किसी और की फ़ुद्दी चोद रहे हो क्या..'
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सूरज कुछ नहीं बोला.. बस धकापेल मेरी चूत को चोदता रहा।
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थोड़ी देर के बाद जब हम दोनों चुदाई करके झाड गए..[/color]
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[color=rgb(44,]तो हम दोनों ने वॉशरूम में जाकर जिस्मों को साफ़ किया और फिर अपनी-अपनी जगह पर आकर लेट गए।
अब हम तीनों ही आराम से सो गए।

अगली सुबह जब हम लोग उठे तो रश्मि पहली ही रसोई में जा चुकी हुई थी।
मैंने सूरज को उठाया और तैयार होने का कह कर खुद भी रसोई में चली गई।

रश्मि चाय बना रही थी.. मैंने जैसे ही उसे देखा.. तो वो शर्मा गई। मैंने महसूस किया कि वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही है।
मैंने उससे कहा- चलो भी.. जल्दी से तैयार होकर कॉलेज की लिए निकलो.. फिर मुझे भी नहाना है।

रश्मि शरारती अंदाज़ में बोली- क्यों आज ऐसी क्या बात हो गई कि आपको सुबह-सुबह ही नहाने की फिकर लग गई है।
मैं मुस्करा कर बोली- अरे यार तुझे बताया तो था कि तेरे भैया रात को बहुत तंग करते हैं.. तो बस रात को उन्होंने पकड़ लिया था।
रश्मि- भैया ने आपको पकड़ लिया या आपने उन्हें पकड़ा था।
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मैं जानती थी कि वो सब कुछ देख रही थी.. इसलिए यह बात कह रही है। मैं फिर भी उसकी बात को छुपाते हुए बोली- तू तो सारी रात बेहोश होकर सोई रहती है.. तुझे क्या पता कि तेरे भैया कितना तंग करते हैं.. मुझे तो पूरी रात नहीं सोने देते। इसलिए तुझे अपनी जगह पर लिटाया था कि शायद तू ही कुछ हेल्प करेगी.. लेकिन फिर तेरा भी मुझे कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

रश्मि शर्मा कर चाय के कप उठाते हुए बोली- भाभी.. मैं भला भैया को उनकी शरारतों से कैसे रोक सकती हूँ?

मैं चुप हो गई और मुस्कुराने लगी।
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इसके बाद हम सब नाश्ते की टेबल पर आए.. तो सूरज की नजरें आज तो रश्मि की जिस्म पर कुछ ज्यादा ही गहरी थीं और उसके नशीले जिस्म से नजर उसकी हट ही नहीं रही थीं।

मैं इस सबको देख कर मजे ले रही थी, लेकिन अभी भी वो दोनों यही समझ रहे थे कि मुझे दोनों को इनकी हरकतों का मुझे पता नहीं है।
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